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القرآن

الذاريات

Adh-Dhariyat

So Flee to God

अध्याय 51 · 60 पद

51:1–6

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। उनकी शपथ जो बिखेरती हैं बिखेरते हुए, जो भारी लदान वहन करती हैं, जो सहजता से चलती हैं, जो एक आदेश बाँटती हैं: जो तुमसे वादा किया जाता है वह सचमुच सच्चा है, और चुकौती अवश्य घटित होगी।

بِسْمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحْمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ وَالذَّٰرِيَٰتِ ذَرْواٗ فَالْحَٰمِلَٰتِ وِقْراٗ فَالْجَٰرِيَٰتِ يُسْراٗ فَالْمُقَسِّمَٰتِ أَمْراً اِنَّمَا تُوعَدُونَ لَصَادِقٞ وَإِنَّ اَ۬لدِّينَ لَوَٰقِعٞۖ

51:7–9

गुँथे हुए मार्गों वाले आकाश की शपथ! तुम अवश्य एक भिन्न-भिन्न कथन में हो: उससे वही उलटा फेरा जाता है जो उलटा फेरा जाता है।

وَالسَّمَآءِ ذَاتِ اِ۬لْحُبُكِ إِنَّكُمْ لَفِے قَوْلٖ مُّخْتَلِفٖ يُوفَكُ عَنْهُ مَنُ ا۟فِكَۖ

51:10–11

नाश हो अटकल लगाने वालों का, जो गर्त में डूबे हुए हैं, बेसुध!

قُتِلَ اَ۬لْخَرَّٰصُونَ اَ۬لذِينَ هُمْ فِے غَمْرَةٖ سَاهُونَۖ

51:12–13

वे पूछते हैं: “चुकौती का दिन कब होगा?” — जिस दिन वे आग पर परीक्षा में डाले जाएँगे।

يَسْـَٔلُونَ أَيَّانَ يَوْمُ اُ۬لدِّينِ يَوْمَ هُمْ عَلَى اَ۬لنّ۪ارِ يُفْتَنُونَۖ

“अपनी परीक्षा चखो।

ذُوقُواْ فِتْنَتَكُمْۖ

51:14

यही है जिसे तुम जल्दी माँगते थे।”

هَٰذَا اَ۬لذِے كُنتُم بِهِۦ تَسْتَعْجِلُونَۖ

51:15–16

सावधानी बरतने वाले निश्चय ही उद्यानों और सोतों में हैं, वह लेते हुए जो उनके अभिभावक ने उन्हें दिया,

إِنَّ اَ۬لْمُتَّقِينَ فِے جَنَّٰتٖ وَعُيُونٍ اٰخِذِينَ مَآ ءَات۪يٰهُمْ رَبُّهُمُۥٓۖ

क्योंकि वे इससे पहले भलाई करने वालों में से थे।

إِنَّهُمْ كَانُواْ قَبْلَ ذَٰلِكَ مُحْسِنِينَۖ

51:17

वे बहुत कम ही

كَانُواْ قَلِيلاٗۖ

51:17

रात का भाग नींद को देते थे,

مِّنَ اَ۬ليْلِ مَا يَهْجَعُونَۖ

51:18

और रात के अंतिम पहरों में वे क्षमा माँगते थे।

وَبِالَاسْح۪ارِ هُمْ يَسْتَغْفِرُونَۖ

51:19

और उनकी संपत्ति में माँगने वाले और वंचित का हक़ था।

وَفِےٓ أَمْوَٰلِهِمْ حَقّٞ لِّلسَّآئِلِ وَالْمَحْرُومِۖ

और धरती पर उनके लिए संकेत हैं जिन्हें यक़ीन है,

وَفِے اِ۬لَارْضِ ءَايَٰتٞ لِّلْمُوقِنِينَۖ

51:21

और स्वयं तुम्हारे भीतर भी।

وَفِےٓ أَنفُسِكُمُۥٓۖ

तो क्या तुम्हें स्पष्ट नहीं दिखता?

أَفَلَا تُبْصِرُونَۖ

51:22

और आकाश में तुम्हारी जीविका है,

وَفِے اِ۬لسَّمَآءِ رِزْقُكُمْۖ

51:23

और वह भी जिसका तुमसे वादा किया जाता है। आकाश और धरती के अभिभावक की शपथ, यह अवश्य सत्य है, ठीक वैसे ही जैसे यह सत्य है कि तुम उच्चारण करते हो।

وَمَا تُوعَدُونَ فَوَرَبِّ اِ۬لسَّمَآءِ وَالَارْضِ إِنَّهُۥ لَحَقّٞ مِّثْلَ مَآ أَنَّكُمْ تَنطِقُونَۖ

51:24–25

क्या इब्राहीम के सम्मानित अतिथियों की वार्ता तुम्हारे पास पहुँची? जब उन्होंने उसके यहाँ प्रवेश किया और कहा: “शांति!”

هَلَ اَت۪يٰكَ حَدِيثُ ضَيْفِ إِبْرَٰهِيمَ اَ۬لْمُكْرَمِينَ إِذْ دَخَلُواْ عَلَيْهِ فَقَالُواْ سَلَٰماٗۖ

51:24–25

उसने कहा: “शांति।

قَالَ سَلَٰمٞۖ

ऐसी क़ौम जिससे मैं अपरिचित हूँ।”

قَوْمٞ مُّنكَرُونَۖ

वह चुपके से अपने परिवार के पास गया, फिर एक मोटा बछड़ा लाया और उसने उसे उनके निकट रखा, यह कहते हुए: “क्या तुम खाते नहीं?”

فَرَاغَ إِلَىٰٓ أَهْلِهِۦ فَجَآءَ بِعِجْلٖ سَمِينٖ فَقَرَّبَهُۥٓ إِلَيْهِمْ قَالَ أَلَا تَاكُلُونَۖ

तब उसने उनसे डर अनुभव किया।

فَأَوْجَسَ مِنْهُمْ خِيفَةٗۖ

उन्होंने कहा: “डरो मत।”

قَالُواْ لَا تَخَفْۖ

51:28

और उन्होंने उसे एक ज्ञानी लड़के का शुभ समाचार दिया।

وَبَشَّرُوهُ بِغُلَٰمٍ عَلِيمٖۖ

51:29

तब उसकी पत्नी चीख़ती हुई सामने आई, उसने अपना मुँह पीट लिया और कहा: “एक बाँझ बुढ़िया?!”

فَأَقْبَلَتِ اِ۪مْرَأَتُهُۥ فِے صَرَّةٖ فَصَكَّتْ وَجْهَهَا وَقَالَتْ عَجُوزٌ عَقِيمٞۖ

उन्होंने कहा: “तुम्हारे अभिभावक ने ऐसा ही कहा है।

قَالُواْ كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِۖ

वही निश्चय ही प्रज्ञावान, सर्वज्ञ है।”

إِنَّهُۥ هُوَ اَ۬لْحَكِيمُ اُ۬لْعَلِيمُۖ

उसने कहा: “तो तुम्हारा क्या मामला है, हे भेजे गए जनो?”

۞ قَالَ فَمَا خَطْبُكُمُۥٓ أَيُّهَا اَ۬لْمُرْسَلُونَۖ

उन्होंने कहा: “हमें एक बहिष्कृत क़ौम की ओर भेजा गया है, ताकि उन पर मिट्टी के पत्थर भेजें, जिन पर तुम्हारे अभिभावक के पास अतिवादियों के लिए निशान लगाए गए हैं।”

قَالُوٓاْ إِنَّآ أُرْسِلْنَآ إِلَىٰ قَوْمٖ مُّجْرِمِينَ لِنُرْسِلَ عَلَيْهِمْ حِجَارَةٗ مِّن طِينٖ مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ لِلْمُسْرِفِينَۖ

51:35–37

हमने उसमें से उन्हें निकाल लिया जो विश्वास करते थे, परंतु हमने उसमें ईश्वर के प्रति खरे जनों के एक ही घर के सिवा कुछ न पाया; और हमने उसमें उनके लिए एक संकेत छोड़ा जो पीड़ादायक दंड से डरते हैं।

فَأَخْرَجْنَا مَن كَانَ فِيهَا مِنَ اَ۬لْمُومِنِينَ فَمَا وَجَدْنَا فِيهَا غَيْرَ بَيْتٖ مِّنَ اَ۬لْمُسْلِمِينَ وَتَرَكْنَا فِيهَآ ءَايَةٗ لِّلذِينَ يَخَافُونَ اَ۬لْعَذَابَ اَ۬لَالِيمَۖ

51:38–39

और मूसा में: जब हमने उसे फ़िरऔन के पास स्पष्ट अधिकार के साथ भेजा, तो उसने अपने सहारे के साथ पीठ फेर ली, और कहा: “एक भ्रमकार, या एक विक्षिप्त।”

وَفِے مُوس۪ىٰٓ إِذَ اَرْسَلْنَٰهُ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ بِسُلْطَٰنٖ مُّبِينٖ فَتَوَلّ۪ىٰ بِرُكْنِهِۦ وَقَالَ سَٰحِرٌ اَوْ مَجْنُونٞۖ

51:40

हमने उसे और उसकी सेनाओं को पकड़ा और उन्हें लहर में फेंक दिया, जबकि वह दोषारोपण के योग्य था।

فَأَخَذْنَٰهُ وَجُنُودَهُۥ فَنَبَذْنَٰهُمْ فِے اِ۬لْيَمِّ وَهُوَ مُلِيمٞۖ

51:41–42

और आद में: जब हमने उन पर बाँझ हवा भेजी, जो जिस चीज़ पर से गुज़रती उसे चूर्ण किए बिना न छोड़ती।

وَفِے عَادٍ اِذَ اَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ اُ۬لرِّيحَ اَ۬لْعَقِيمَ مَا تَذَرُ مِن شَےْءٍ اَتَتْ عَلَيْهِ إِلَّا جَعَلَتْهُ كَالرَّمِيمِۖ

और समूद में: जब उनसे कहा गया: “कुछ समय उपभोग कर लो”, परंतु उन्होंने अपने अभिभावक के आदेश के सामने उद्दंडता की, और बिजली की कड़क ने उन्हें पकड़ लिया जबकि वे नज़र डाल रहे थे।

وَفِے ثَمُودَ إِذْ قِيلَ لَهُمْ تَمَتَّعُواْ حَتَّىٰ حِينٖ فَعَتَوْاْ عَنَ اَمْرِ رَبِّهِمْ فَأَخَذَتْهُمُ اُ۬لصَّٰعِقَةُ وَهُمْ يَنظُرُونَۖ

वे न उठ खड़े हो सके, न कोई सहायता पा सके।

فَمَا اَ۪سْتَطَٰعُواْ مِن قِيَامٖ وَمَا كَانُواْ مُنتَصِرِينَۖ

51:46

और नूह की क़ौम में, इससे पहले —

وَقَوْمَ نُوحٖ مِّن قَبْلُۖ

51:46

क्योंकि वे अतिक्रमणकारी क़ौम थे।

إِنَّهُمْ كَانُواْ قَوْماٗ فَٰسِقِينَۖ

और आकाश को हमने सामर्थ्य से बनाया,

وَالسَّمَآءَ بَنَيْنَٰهَا بِأَيَيْدٖۖ

51:47

और हम अवश्य विस्तार करने वाले हैं।

وَإِنَّا لَمُوسِعُونَۖ

और धरती को हमने बिछौना बनाया:

وَالَارْضَ فَرَشْنَٰهَاۖ

कितने उत्तम सँवारने वाले!

فَنِعْمَ اَ۬لْمَٰهِدُونَۖ

51:49

और हर चीज़ का हमने एक जोड़ा रचा, शायद तुम स्मरण करो।

وَمِن كُلِّ شَےْءٍ خَلَقْنَا زَوْجَيْنِ لَعَلَّكُمْ تَذَّكَّرُونَۖ

51:50

अतः ईश्वर की ओर भागो: मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से निश्चय ही एक स्पष्ट चेतावनी देने वाला हूँ।

فَفِرُّوٓاْ إِلَى اَ۬للَّهِ إِنِّے لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٞ مُّبِينٞۖ

और ईश्वर के साथ कोई और देवता न ठहराओ, क्योंकि मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से एक स्पष्ट चेतावनी देने वाला हूँ।

وَلَا تَجْعَلُواْ مَعَ اَ۬للَّهِ إِلَٰهاً اٰخَرَ إِنِّے لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٞ مُّبِينٞۖ

ऐसा ही हुआ:

كَذَٰلِكَۖ

51:52

उनसे पहले वालों के पास कोई संदेशवाहक नहीं आया जिसके विषय में उन्होंने यह न कहा हो: “एक भ्रमकार, या एक विक्षिप्त।”

مَآ أَتَى اَ۬لذِينَ مِن قَبْلِهِم مِّن رَّسُولٍ اِلَّا قَالُواْ سَاحِرٌ اَوْ مَجْنُونٌۖ

क्या उन्होंने एक-दूसरे को इसका निर्देश दिया?

اَتَوَاصَوْاْ بِهِۦۖ

बल्कि वे ऐसी क़ौम हैं जो हर मर्यादा से आगे निकल जाती है।

بَلْ هُمْ قَوْمٞ طَاغُونَۖ

51:54–55

अतः उनसे पीठ फेर लो — तुम इसके लिए बिल्कुल दोषारोपित नहीं होगे — और स्मरण कराओ,

فَتَوَلَّ عَنْهُمْ فَمَآ أَنتَ بِمَلُومٖ وَذَكِّرْۖ

51:54–55

क्योंकि स्मरण विश्वास करने वालों को लाभ देता है।

فَإِنَّ اَ۬لذِّكْر۪ىٰ تَنفَعُ اُ۬لْمُومِنِينَۖ

51:56

मैंने प्रच्छन्नों और मनुष्यों को केवल इसलिए रचा कि वे मेरी आज्ञा का पालन करें।

۞ وَمَا خَلَقْتُ اُ۬لْجِنَّ وَالِانسَ إِلَّا لِيَعْبُدُونِۖ

51:57

मैं उनसे कोई जीविका नहीं चाहता, और मैं नहीं चाहता कि वे मुझे खिलाएँ।

مَآ أُرِيدُ مِنْهُم مِّن رِّزْقٖ وَمَآ أُرِيدُ أَنْ يُّطْعِمُونِۖ

51:58

ईश्वर जीविका देने वाला है, बल रखने वाला, अडिग।

إِنَّ اَ۬للَّهَ هُوَ اَ۬لرَّزَّاقُ ذُو اُ۬لْقُوَّةِ اِ۬لْمَتِينُۖ

51:59

जिन्होंने अन्याय किया, उनके लिए निश्चय ही उनके साथियों के हिस्से जैसा हिस्सा है: अतः वे मुझसे उसे जल्दी लाने को न कहें।

فَإِنَّ لِلذِينَ ظَلَمُواْ ذَنُوباٗ مِّثْلَ ذَنُوبِ أَصْحَٰبِهِمْ فَلَا يَسْتَعْجِلُونِۖ

51:60

अतः हाय नकारने वालों पर, उनके उस दिन के कारण जिसका उनसे वादा किया जाता है।

فَوَيْلٞ لِّلذِينَ كَفَرُواْ مِنْ يَّوْمِهِمُ اُ۬لذِے يُوعَدُونَۖ

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