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القرآن

النحل

An-Nahl

A Drink in Which There Is Healing

Sura16
الرالمر
पद128

Section IIIThe application · continuation

The signs of the Scripture and the accounts that confirm it

  1. 10
  2. 11
  3. 12
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Read the section from its beginning: sura 10

16:1

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। ईश्वर का आदेश आ गया: तो उसे जल्दी लाने की चेष्टा मत करो।

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ أَتَىٰ أَمۡرُ ٱللَّهِ فَلَا تَسۡتَعۡجِلُوهُۥۚ

16:1

उसकी महिमा हो, और वह उससे बहुत ऊपर है जिसे तुम उसका साझी ठहराते हो।

سُبۡحَٰنَهُۥ وَتَعَٰلَىٰ عَمَّا يُشۡرِكُونَ

16:2

वह अभिकर्ताओं को प्रवाह के साथ, अपने आदेश से, अपने आज्ञाकारियों में से जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उस पर उतारता है: “चेतावनी दो कि मेरे सिवा कोई देवता नहीं; तो मेरे प्रति सावधान रहो।”

يُنزِلُ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةَ بِٱلرُّوحِ مِنۡ أَمۡرِهِۦ عَلَىٰ مَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦ أَنۡ أَنذِرُواْ أَنَّهُۥ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا۠ فَٱتَّقُونِ

उसने आकाशों और धरती को पूर्ण सत्य के साथ रचा।

خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ بِٱلۡحَقِّۚ

16:3

वह उससे बहुत ऊपर है जिसे तुम उसका साझी ठहराते हो।

تَعَٰلَىٰ عَمَّا يُشۡرِكُونَ

16:4

उसने मनुष्य को एक बूँद से रचा, और देखो, वह खुला झगड़ालू है।

خَلَقَ ٱلۡإِنسَٰنَ مِن نُّطۡفَةٖ فَإِذَا هُوَ خَصِيمٞ مُّبِينٞ

16:5

और पशुधन को उसने रचा:

وَٱلۡأَنۡعَٰمَ خَلَقَهَاۖ

16:5

तुम उनमें गरमाहट और लाभ पाते हो, और उनमें से खाते हो।

لَكُمُۥ فِيهَا دِفۡءٞ وَمَنَٰفِعُ وَمِنۡهَا تَأۡكُلُونَ

16:6

और तुम उनमें शोभा पाते हो, जब तुम उन्हें शाम को घर लाते हो और जब उन्हें चराने ले जाते हो।

وَلَكُمُۥ فِيهَا جَمَالٌ حِينَ تُرِيحُونَ وَحِينَ تَسۡرَحُونَ

16:7

और वे तुम्हारे बोझ ऐसे भूभाग तक ले जाते हैं जहाँ तुम स्वयं को कष्ट दिए बिना नहीं पहुँच पाते:

وَتَحۡمِلُ أَثۡقَالَكُمُۥ إِلَىٰ بَلَدٖ لَّمۡ تَكُونُواْ بَٰلِغِيهِۦ إِلَّا بِشِقِّ ٱلۡأَنفُسِۚ

16:7

तुम्हारा अभिभावक अवश्य करुणामय, दयालु है।

إِنَّ رَبَّكُمُۥ لَرَءُوفٞ رَّحِيمٞ

और घोड़े, खच्चर और गधे, ताकि तुम उन पर सवार हो, और शृंगार के लिए।

وَٱلۡخَيۡلَ وَٱلۡبِغَالَ وَٱلۡحَمِيرَ لِتَرۡكَبُوهَا وَزِينَةٗۚ

और वह वह रचता है जो तुम नहीं जानते।

وَيَخۡلُقُ مَا لَا تَعۡلَمُونَ

16:9

और ईश्वर पर है ठीक राह को चिह्नित करना; और कुछ राहें टेढ़ी हैं।

وَعَلَى ٱللَّهِ قَصۡدُ ٱلسَّبِيلِ وَمِنۡهَا جَآئِرٞۚ

16:9

और यदि उसकी मर्ज़ी होती, तो तुम सबको मार्ग दिखा देता।

وَلَوۡ شَآءَ لَهَدَىٰكُمُۥ أَجۡمَعِينَ

16:10

वही है जिसने आकाश से पानी उतारा: तुम उससे पेय पाते हो, और उससे वृक्ष उगते हैं जिनमें तुम चराते हो।

هُوَ ٱلَّذِي أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗۖ لَّكُمُۥ مِنۡهُۥ شَرَابٞ وَمِنۡهُۥ شَجَرٞ فِيهِۦ تُسِيمُونَ

16:11

वह तुम्हारे लिए उसके द्वारा खेतियाँ, ज़ैतून, खजूर, अंगूर की बेलें, और सब प्रकार के फल उगाता है:

يُنۢبِتُ لَكُمُۥ بِهِ ٱلزَّرۡعَ وَٱلزَّيۡتُونَ وَٱلنَّخِيلَ وَٱلۡأَعۡنَٰبَ وَمِن كُلِّ ٱلثَّمَرَٰتِۚ

16:11

इसमें अवश्य उस क़ौम के लिए एक संकेत है जो सोच-विचार करती है।

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّقَوۡمٖ يَتَفَكَّرُونَ

16:12

और उसने तुम्हारे लिए रात और दिन, सूर्य और चंद्रमा को वश में किया; और तारे उसके आदेश से वशीभूत हैं।

وَسَخَّرَ لَكُمُ ٱلَّيۡلَ وَٱلنَّهَارَ وَٱلشَّمۡسَ وَٱلۡقَمَرَۖ وَٱلنُّجُومَ مُسَخَّرَٰتِۭ بِأَمۡرِهِۦۚ

16:12

इसमें अवश्य उस क़ौम के लिए संकेत हैं जो बुद्धि से काम लेती है।

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يَعۡقِلُونَ

16:13

और जो उसने तुम्हारे लिए धरती पर बिखेरा, विविध रंगों का:

وَمَا ذَرَأَ لَكُمُۥ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُخۡتَلِفًا أَلۡوَٰنُهُۥۚ

16:13

इसमें अवश्य उस क़ौम के लिए एक संकेत है जो स्मरण करती है।

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّقَوۡمٖ يَذَّكَّرُونَ

वही है जिसने समुद्र को वश में किया, ताकि तुम उसमें से ताज़ा मांस खाओ और उसमें से वह आभूषण निकालो जिसे तुम पहनते हो;

وَهُوَ ٱلَّذِي سَخَّرَ ٱلۡبَحۡرَ لِتَأۡكُلُواْ مِنۡهُۥ لَحۡمٗا طَرِيّٗا وَتَسۡتَخۡرِجُواْ مِنۡهُۥ حِلۡيَةٗ تَلۡبَسُونَهَاۖ

और तुम जलयानों को उसमें लहरें चीरते देखते हो, ताकि तुम उसके अनुग्रह में से खोजो, और शायद तुम कृतज्ञ हो जाओ।

وَتَرَى ٱلۡفُلۡكَ مَوَاخِرَ فِيهِۦ وَلِتَبۡتَغُواْ مِن فَضۡلِهِۦ وَلَعَلَّكُمُۥ تَشۡكُرُونَ

16:15–16

और उसने धरती पर दृढ़ खूँटे डाले, ताकि वह तुम्हें लेकर डगमगाए नहीं, और नदियाँ और राहें भी, शायद तुम मार्गदर्शन पाओ, और पहचान-चिह्न भी,

وَأَلۡقَىٰ فِي ٱلۡأَرۡضِ رَوَٰسِيَ أَن تَمِيدَ بِكُمُۥ وَأَنۡهَٰرٗا وَسُبُلٗا لَّعَلَّكُمُۥ تَهۡتَدُونَ وَعَلَٰمَٰتٖۚ

और वे तारे से ही मार्गदर्शन पाते हैं।

وَبِٱلنَّجۡمِ هُمُۥ يَهۡتَدُونَ

16:17

तो क्या जो रचता है, उसके समान है जो नहीं रचता?

أَفَمَن يَخۡلُقُ كَمَن لَّا يَخۡلُقُۚ

16:17

तो क्या तुम स्मरण नहीं करते?

أَفَلَا تَذَّكَّرُونَ

16:18

और यदि तुम ईश्वर के उपकार को गिनने लगो, तो उसे पूरा गिन न सकोगे।

وَإِن تَعُدُّواْ نِعۡمَةَ ٱللَّهِ لَا تُحۡصُوهَاۗ

16:18

ईश्वर अवश्य अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।

إِنَّ ٱللَّهَ لَغَفُورٞ رَّحِيمٞ

ईश्वर जानता है जो तुम छिपाते हो और जो तुम उजागर करते हो।

وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ مَا تُسِرُّونَ وَمَا تُعۡلِنُونَ

16:20

और जिन्हें तुम ईश्वर के अतिरिक्त पुकारते हो, वे कुछ नहीं रचते; वे स्वयं रचे गए हैं।

وَٱلَّذِينَ تَدۡعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ لَا يَخۡلُقُونَ شَيۡـٔٗا وَهُمُۥ يُخۡلَقُونَ

16:21

मृत, निर्जीव,

أَمۡوَٰتٌ غَيۡرُ أَحۡيَآءٖۖ

16:21

और उन्हें आभास नहीं कि वे कब उठाए जाएँगे।

وَمَا يَشۡعُرُونَ أَيَّانَ يُبۡعَثُونَ

तुम्हारा देवता एक ही देवता है।

إِلَٰهُكُمُۥ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞۚ

16:22

जो अंतिम जीवन पर विश्वास नहीं करते, उनका मर्म अमान्य करने वाला है, और वे घमंड से फूलते हैं।

فَٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِ قُلُوبُهُمُۥ مُنكِرَةٞ وَهُمُۥ مُسۡتَكۡبِرُونَ

अटल रूप से, ईश्वर जानता है जो वे छिपाते हैं और जो वे उजागर करते हैं:

لَا جَرَمَ أَنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعۡلِنُونَۚ

वह घमंड से फूलने वालों से प्रेम नहीं करता।

إِنَّهُۥ لَا يُحِبُّ ٱلۡمُسۡتَكۡبِرِينَ

16:24–25

और जब उनसे कहा जाता है: “तुम्हारे अभिभावक ने क्या उतारा है?”, तो वे कहते हैं: “प्राचीनों की दंतकथाएँ” — ताकि वे पेशी के दिन अपने बोझ पूरे के पूरे वहन करें, और उनके बोझों का एक भाग भी जिन्हें वे बिना ज्ञान के भटकाते हैं:

وَإِذَا قِيلَ لَهُمُۥ مَاذَا أَنزَلَ رَبُّكُمُۥ قَالُواْ أَسَٰطِيرُ ٱلۡأَوَّلِينَ لِيَحۡمِلُواْ أَوۡزَارَهُمُۥ كَامِلَةٗ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ وَمِنۡ أَوۡزَارِ ٱلَّذِينَ يُضِلُّونَهُمُۥ بِغَيۡرِ عِلۡمٍۗ

16:24–25

कितना बुरा है वह बोझ जो वे वहन करते हैं!

أَلَا سَآءَ مَا يَزِرُونَ

उनसे पहले वालों ने भी षड्यंत्र किया; परंतु ईश्वर उनके निर्माण पर नींवों की ओर से आया, और छत ऊपर से उन पर आ गिरी, और दंड उन पर वहाँ से आया जहाँ से उन्हें आभास नहीं था।

قَدۡ مَكَرَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمُۥ فَأَتَى ٱللَّهُ بُنۡيَٰنَهُمُۥ مِنَ ٱلۡقَوَاعِدِ فَخَرَّ عَلَيۡهِمُ ٱلسَّقۡفُ مِن فَوۡقِهِمُۥ وَأَتَىٰهُمُ ٱلۡعَذَابُ مِنۡ حَيۡثُ لَا يَشۡعُرُونَ

16:27

फिर पेशी के दिन वह उन्हें लज्जित करेगा और कहेगा: “मेरे साझीदार कहाँ हैं, जिनके विषय में तुम अलग खड़े होकर विरोध करते थे?”

ثُمَّ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ يُخۡزِيهِمُۥ وَيَقُولُ أَيۡنَ شُرَكَآءِيَ ٱلَّذِينَ كُنتُمُۥ تُشَٰٓقُّونَ فِيهِمُۥۚ

16:28

जिन्हें ज्ञान दिया गया था वे कहेंगे: “आज लज्जा और बुराई निश्चय ही नकारने वालों पर है” — जिन्हें अभिकर्ता निष्ठा से सँभाले रखते हैं, जो स्वयं पर अन्याय करने वाले हैं।

قَالَ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡعِلۡمَ إِنَّ ٱلۡخِزۡيَ ٱلۡيَوۡمَ وَٱلسُّوٓءَ عَلَى ٱلۡكَٰفِرِينَ ٱلَّذِينَ تَتَوَفَّىٰهُمُ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ ظَالِمِي أَنفُسِهِمُۥۖ

16:28

तब वे समर्पण करते हैं: “हम कोई बुराई नहीं करते थे!” — हाँ, क्यों नहीं!

فَأَلۡقَوُاْ ٱلسَّلَمَ مَا كُنَّا نَعۡمَلُ مِن سُوٓءِۭۚ بَلَىٰۚ

क्योंकि ईश्वर उसके विषय में सर्वज्ञ है जो तुम करते थे।

إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمُۢ بِمَا كُنتُمُۥ تَعۡمَلُونَ

16:29

तो जहन्नम के द्वारों से प्रवेश करो, वहाँ सदा रहने के लिए:

فَٱدۡخُلُواْ أَبۡوَٰبَ جَهَنَّمَ خَٰلِدِينَ فِيهَاۖ

घमंडियों का निवास कितना निकृष्ट है!

فَلَبِئۡسَ مَثۡوَى ٱلۡمُتَكَبِّرِينَ

16:30

और जो सावधान रहे उनसे कहा जाता है: “तुम्हारे अभिभावक ने क्या उतारा?” वे कहते हैं: “अच्छाई।”

۞ وَقِيلَ لِلَّذِينَ ٱتَّقَوۡاْ مَاذَا أَنزَلَ رَبُّكُمُۥۚ قَالُواْ خَيۡرٗاۗ

16:30

जो इस निकट जीवन में भलाई करते हैं, उनके लिए कुछ सुंदर है;

لِّلَّذِينَ أَحۡسَنُواْ فِي هَٰذِهِ ٱلدُّنۡيَا حَسَنَةٞۚ

परंतु अंतिम जीवन का ठिकाना बेहतर है,

وَلَدَارُ ٱلۡأٓخِرَةِ خَيۡرٞۚ

और सावधानी बरतने वालों का ठिकाना कितना उत्तम है!

وَلَنِعۡمَ دَارُ ٱلۡمُتَّقِينَ

स्थायित्व के उद्यान, जिनमें वे प्रवेश करेंगे, जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं; वहाँ उनके लिए वही होगा जो उनकी मर्ज़ी हो।

جَنَّٰتُ عَدۡنٖ يَدۡخُلُونَهَا تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُۖ لَهُمُۥ فِيهَا مَا يَشَآءُونَۚ

16:32

इस प्रकार ईश्वर सावधानी बरतने वालों को प्रतिफल देता है, जिन्हें अभिकर्ता निष्ठा से सँभाले रखते हैं जब वे अच्छे होते हैं,

كَذَٰلِكَ يَجۡزِي ٱللَّهُ ٱلۡمُتَّقِينَ ٱلَّذِينَ تَتَوَفَّىٰهُمُ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ طَيِّبِينَ

यह कहते हुए: “तुम पर शांति हो! उद्यान में प्रवेश करो, उसके बदले में जो तुम करते थे।”

يَقُولُونَ سَلَٰمٌ عَلَيۡكُمُ ٱدۡخُلُواْ ٱلۡجَنَّةَ بِمَا كُنتُمُۥ تَعۡمَلُونَ

16:33

क्या वे बस इसकी प्रतीक्षा में हैं कि अभिकर्ता उनके पास आएँ, या तुम्हारे अभिभावक का आदेश आ जाए?

هَلۡ يَنظُرُونَ إِلَّا أَن تَأۡتِيَهُمُ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ أَوۡ يَأۡتِيَ أَمۡرُ رَبِّكَۚ

उनसे पहले वालों ने भी ऐसा ही किया।

كَذَٰلِكَ فَعَلَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمُۥۚ

ईश्वर ने उन पर अन्याय नहीं किया,

وَمَا ظَلَمَهُمُ ٱللَّهُ

बल्कि वे स्वयं पर ही अन्याय करते थे।

وَلَٰكِن كَانُواْ أَنفُسَهُمُۥ يَظۡلِمُونَ

जो उन्होंने किया उसकी बुराइयाँ उन पर आ पड़ीं,

فَأَصَابَهُمُۥ سَيِّـَٔاتُ مَا عَمِلُواْ

और जिसका वे मज़ाक़ उड़ाते थे वह उनके विरुद्ध चरितार्थ हुआ।

وَحَاقَ بِهِمُۥ مَا كَانُواْ بِهِۦ يَسۡتَهۡزِءُونَ

और साझी ठहराने वालों ने कहा: “यदि ईश्वर की मर्ज़ी होती, तो हम उसके अतिरिक्त किसी की आज्ञा का पालन न करते, न हम और न हमारे पूर्वज, और हम उसके अतिरिक्त किसी वस्तु को वर्जित न ठहराते।”

وَقَالَ ٱلَّذِينَ أَشۡرَكُواْ لَوۡ شَآءَ ٱللَّهُ مَا عَبَدۡنَا مِن دُونِهِۦ مِن شَيۡءٖ نَّحۡنُ وَلَا ءَابَآؤُنَا وَلَا حَرَّمۡنَا مِن دُونِهِۦ مِن شَيۡءٖۚ

उनसे पहले वालों ने भी ऐसा ही किया।

كَذَٰلِكَ فَعَلَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمُۥۚ

तो संदेशवाहकों पर स्पष्ट संप्रेषण के सिवा और क्या दायित्व है?

فَهَلۡ عَلَى ٱلرُّسُلِ إِلَّا ٱلۡبَلَٰغُ ٱلۡمُبِينُ

16:36

हमने निश्चय ही हर समुदाय में एक संदेशवाहक उठाया: “ईश्वर की आज्ञा का पालन करो और मर्यादाहीन से दूर रहो”,

وَلَقَدۡ بَعَثۡنَا فِي كُلِّ أُمَّةٖ رَّسُولًا أَنُ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ وَٱجۡتَنِبُواْ ٱلطَّٰغُوتَۖ

16:36

उनमें से कुछ को ईश्वर ने मार्ग दिखाया,

فَمِنۡهُمُۥ مَنۡ هَدَى ٱللَّهُ

16:36

और उनमें से कुछ पर भटकाव सिद्ध हो गया।

وَمِنۡهُمُۥ مَنۡ حَقَّتۡ عَلَيۡهِ ٱلضَّلَٰلَةُۚ

16:36

तो धरती में घूमो और नज़र डालो कि झुठलाने वालों का परिणाम कैसा रहा।

فَسِيرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَٱنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُكَذِّبِينَ

16:37

यदि तुम उनके मार्गदर्शन के लिए उत्सुक हो, तो ईश्वर जिसे भटकाता है उसे निश्चय ही मार्ग नहीं दिखाता,

إِن تَحۡرِصۡ عَلَىٰ هُدَىٰهُمُۥ فَإِنَّ ٱللَّهَ لَا يُهۡدَيٰ مَن يُضِلُّۖ

और उनके लिए कोई सहायता नहीं होगी।

وَمَا لَهُمُۥ مِن نَّٰصِرِينَ

16:38

और उन्होंने अपनी शपथों के पूरे बल से ईश्वर की शपथ खाई कि ईश्वर उसे नहीं उठाएगा जो मरता है।

وَأَقۡسَمُواْ بِٱللَّهِ جَهۡدَ أَيۡمَٰنِهِمُۥ لَا يَبۡعَثُ ٱللَّهُ مَن يَمُوتُۚ

16:39

हाँ, क्यों नहीं! यह उस पर एक वादा है, सत्य के साथ — परंतु अधिकतर लोग नहीं जानते — ताकि वह उनके लिए स्पष्ट कर दे जिस पर वे मतभेद करते हैं, और ताकि नकारने वाले जान लें कि वे झूठे थे।

بَلَىٰ وَعۡدًا عَلَيۡهِۦ حَقّٗا وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَعۡلَمُونَ لِيُبَيِّنَ لَهُمُ ٱلَّذِي يَخۡتَلِفُونَ فِيهِۦ وَلِيَعۡلَمَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ أَنَّهُمُۥ كَانُواْ كَٰذِبِينَ

16:40

किसी वस्तु के लिए हमारा एकमात्र कथन, जब हम उसे चाहते हैं, उससे यह कहना है: “हो जा”,

إِنَّمَا قَوۡلُنَا لِشَيۡءٍ إِذَا أَرَدۡنَٰهُۥ أَن نَّقُولَ لَهُۥ كُن

16:40

और वह हो जाती है।

فَيَكُونُ

और जिन्होंने ईश्वर के लिए प्रवास किया, अन्याय सहने के बाद, हम उन्हें इस निकट जीवन में एक सुंदर स्थिति में अवश्य ठहराएँगे;

وَٱلَّذِينَ هَاجَرُواْ فِي ٱللَّهِ مِنۢ بَعۡدِ مَا ظُلِمُواْ لَنُبَوِّئَنَّهُمُۥ فِي ٱلدُّنۡيَا حَسَنَةٗۖ

और अंतिम जीवन का पुरस्कार कहीं बड़ा है, यदि वे जानते —

وَلَأَجۡرُ ٱلۡأٓخِرَةِ أَكۡبَرُۚ لَوۡ كَانُواْ يَعۡلَمُونَ

उनके लिए जिन्होंने धैर्य रखा और जो अपने अभिभावक को मुख़्तार बनाते हैं।

ٱلَّذِينَ صَبَرُواْ وَعَلَىٰ رَبِّهِمُۥ يَتَوَكَّلُونَ

16:43–44

और हमने तुमसे पहले केवल ऐसे पुरुष भेजे जिन पर हम प्रकट करते थे: तो स्मरण वालों से पूछो, यदि तुम नहीं जानते — स्पष्ट प्रमाणों और प्रपत्रों के साथ।

وَمَا أَرۡسَلۡنَا مِن قَبۡلِكَ إِلَّا رِجَالٗا يُوحَيٰ إِلَيۡهِمُۥۖ فَسَلُواْ أَهۡلَ ٱلذِّكۡرِ إِن كُنتُمُۥ لَا تَعۡلَمُونَ بِٱلۡبَيِّنَٰتِ وَٱلزُّبُرِۗ

16:43–44

और हमने तुम्हारी ओर स्मरण उतारा, ताकि तुम लोगों के लिए स्पष्ट करो जो उनके लिए उतारा गया, और शायद वे सोच-विचार करें।

وَأَنزَلۡنَا إِلَيۡكَ ٱلذِّكۡرَ لِتُبَيِّنَ لِلنَّاسِ مَا نُزِّلَ إِلَيۡهِمُۥ وَلَعَلَّهُمُۥ يَتَفَكَّرُونَ

तो क्या जिन्होंने बुराइयों का षड्यंत्र किया, वे इससे निश्चिंत हैं कि ईश्वर उन्हें धरती में न धँसाएगा, या उन पर दंड वहाँ से न आएगा जहाँ से उन्हें आभास नहीं होता, या वह उन्हें उनके चलते-फिरते न पकड़ेगा, जबकि वे उसे असमर्थ नहीं कर सकते, या वह उन्हें क्रमिक डर में न पकड़ेगा?

أَفَأَمِنَ ٱلَّذِينَ مَكَرُواْ ٱلسَّيِّـَٔاتِ أَن يَخۡسِفَ ٱللَّهُ بِهِمُ ٱلۡأَرۡضَ أَوۡ يَأۡتِيَهُمُ ٱلۡعَذَابُ مِنۡ حَيۡثُ لَا يَشۡعُرُونَ أَوۡ يَأۡخُذَهُمُۥ فِي تَقَلُّبِهِمُۥ فَمَا هُمُۥ بِمُعۡجِزِينَ أَوۡ يَأۡخُذَهُمُۥ عَلَىٰ تَخَوُّفٖ

16:45–47

तुम्हारा अभिभावक अवश्य करुणामय, दयालु है।

فَإِنَّ رَبَّكُمُۥ لَرَءُوفٞ رَّحِيمٌ

16:48

क्या उन्होंने नहीं देखा कि ईश्वर ने जो भी वस्तु रची है, उसकी परछाइयाँ दाएँ और बाएँ झुकती हैं, ईश्वर के सामने माथा टेके हुए, और नतमस्तक?

أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ إِلَىٰ مَا خَلَقَ ٱللَّهُ مِن شَيۡءٖ يَتَفَيَّؤُاْ ظِلَٰلُهُۥ عَنِ ٱلۡيَمِينِ وَٱلشَّمَآئِلِ سُجَّدٗا لِّلَّهِ وَهُمُۥ دَٰخِرُونَ

16:49–50

और ईश्वर के सामने माथा टेकता है वह सब जो आकाशों में है और धरती पर है, चलने-फिरने वाले प्राणियों में से, और अभिकर्ता भी, बिना घमंड से फूले: वे अपने अभिभावक से, जो उनके ऊपर है, डरते हैं, और वही करते हैं जिसका उन्हें आदेश दिया जाता है।

وَلِلَّهِۤ يَسۡجُدُۤ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِ مِن دَآبَّةٖ وَٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ وَهُمُۥ لَا يَسۡتَكۡبِرُونَ يَخَافُونَ رَبَّهُمُۥ مِن فَوۡقِهِمُۥ وَيَفۡعَلُونَ مَا يُؤۡمَرُونَ۩

और ईश्वर ने कहा: “दो देवता मत बनाओ।

۞ وَقَالَ ٱللَّهُ لَا تَتَّخِذُواْ إِلَٰهَيۡنِ ٱثۡنَيۡنِۖ

वह बस एक ही देवता है;

إِنَّمَا هُوَ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞ

तो तुम्हें मेरे ही प्रति आदर रखना चाहिए।”

فَإِيَّٰيَ فَٱرۡهَبُونِ

और उसी का है जो आकाशों में है और धरती पर है,

وَلَهُۥ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ

16:52

और उसी का विधान है, स्थायी रूप से।

وَلَهُ ٱلدِّينُ وَاصِبًاۚ

तो क्या ईश्वर के अतिरिक्त किसी और के प्रति तुम सावधान रहते हो?

أَفَغَيۡرَ ٱللَّهِ تَتَّقُونَ

जो भी उपकार तुम्हारे पास है वह ईश्वर की ओर से है;

وَمَا بِكُمُۥ مِن نِّعۡمَةٖ فَمِنَ ٱللَّهِۖ

16:53

फिर जब तुम्हें हानि छूती है, तो तुम उसी की ओर आर्तनाद करते हो।

ثُمَّ إِذَا مَسَّكُمُ ٱلضُّرُّ فَإِلَيۡهِۦ تَجۡـَٔرُونَ

फिर जब वह तुमसे हानि दूर कर देता है, तो देखो, तुममें से एक भाग अपने अभिभावक के साथ औरों को साझी ठहराने लगता है, ताकि उसे नकारे जो हमने उन्हें दिया।

ثُمَّ إِذَا كَشَفَ ٱلضُّرَّ عَنكُمُۥ إِذَا فَرِيقٞ مِّنكُمُۥ بِرَبِّهِمُۥ يُشۡرِكُونَ لِيَكۡفُرُواْ بِمَا ءَاتَيۡنَٰهُمُۥۚ

तो उपभोग कर लो,

فَتَمَتَّعُواْ

परंतु तुम शीघ्र ही जान लोगे।

فَسَوۡفَ تَعۡلَمُونَ

और वे उसके लिए, जिसे वे नहीं जानते, उसमें से एक भाग ठहराते हैं जो हमने उन्हें जीविका में दिया।

وَيَجۡعَلُونَ لِمَا لَا يَعۡلَمُونَ نَصِيبٗا مِّمَّا رَزَقۡنَٰهُمُۥۗ

ईश्वर की शपथ, तुमसे अवश्य पूछा जाएगा कि तुम क्या गढ़ते थे।

تَٱللَّهِ لَتُسۡـَٔلُنَّ عَمَّا كُنتُمُۥ تَفۡتَرُونَ

16:57

और वे ईश्वर के लिए बेटियाँ ठहराते हैं — उसकी महिमा हो!

وَيَجۡعَلُونَ لِلَّهِ ٱلۡبَنَٰتِ سُبۡحَٰنَهُۥ

16:57

जबकि स्वयं उनके लिए वह है जिसकी वे कामना करते हैं।

وَلَهُمُۥ مَا يَشۡتَهُونَ

16:58–59

और जब उनमें से किसी को बेटी का शुभ समाचार दिया जाता है, तो उसका चेहरा काला पड़ा रहता है, और वह खिन्नता से भरा होता है; जिस बुराई का उसे समाचार दिया गया उसके कारण वह क़ौम से दूर छिप जाता है:

وَإِذَا بُشِّرَ أَحَدُهُمُۥ بِٱلۡأُنثَىٰ ظَلَّ وَجۡهُهُۥ مُسۡوَدّٗا وَهُوَ كَظِيمٞ يَتَوَٰرَىٰ مِنَ ٱلۡقَوۡمِ مِن سُوٓءِ مَا بُشِّرَ بِهِۦۚ

16:58–59

क्या वह उसे तिरस्कार सहकर रखेगा, या उसे मिट्टी में गाड़ देगा?

أَيُمۡسِكُهُۥ عَلَىٰ هُونٍ أَمۡ يَدُسُّهُۥ فِي ٱلتُّرَابِۗ

16:58–59

कितना बुरा है उनका निर्णय!

أَلَا سَآءَ مَا يَحۡكُمُونَ

जो अंतिम जीवन पर विश्वास नहीं करते, उनके लिए बुराई का उदाहरण है,

لِلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِ مَثَلُ ٱلسَّوۡءِۖ

और ईश्वर के लिए सबसे ऊँचा उदाहरण है:

وَلِلَّهِ ٱلۡمَثَلُ ٱلۡأَعۡلَىٰۚ

और वही सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।

وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ

और यदि ईश्वर लोगों को उनके अन्याय के कारण पकड़ता, तो वह धरती पर किसी चलने-फिरने वाले को नहीं छोड़ता;

وَلَوۡ يُؤَاخِذُ ٱللَّهُ ٱلنَّاسَ بِظُلۡمِهِمُۥ مَا تَرَكَ عَلَيۡهَا مِن دَآبَّةٖ

परंतु वह उन्हें एक नामित अवधि तक टाल देता है,

وَلَٰكِن يُؤَخِّرُهُمُۥ إِلَىٰ أَجَلٖ مُّسَمّٗىۖ

16:61

और जब उनकी अवधि आएगी, तो वे उसे एक घड़ी भी पीछे नहीं कर सकेंगे,

فَإِذَا جَآءَ ا۬جَلُهُمُۥ لَا يَسۡتَـٔۡخِرُونَ سَاعَةٗ

और न आगे बढ़ा सकेंगे।

وَلَا يَسۡتَقۡدِمُونَ

और वे ईश्वर के लिए वह ठहराते हैं जिससे वे स्वयं अरुचि रखते हैं,

وَيَجۡعَلُونَ لِلَّهِ مَا يَكۡرَهُونَۚ

और उनकी जीभें झूठ का वर्णन करती हैं, यह कहते हुए कि उनके लिए सबसे सुंदर है:

وَتَصِفُ أَلۡسِنَتُهُمُ ٱلۡكَذِبَ أَنَّ لَهُمُ ٱلۡحُسۡنَىٰۚ

16:62

अटल रूप से, उनके लिए आग है, और वे उसमें सबसे पहले पहुँचाए जाएँगे।

لَا جَرَمَ أَنَّ لَهُمُ ٱلنَّارَ وَأَنَّهُمُۥ مُفۡرَطُونَ

16:63

ईश्वर की शपथ, हमने निश्चय ही तुमसे पहले समुदायों के पास संदेशवाहक भेजे; परंतु बहकाने वाले ने उनके कर्म उनके लिए सुंदर बना दिए, और वह आज उनका हिमायती है:

تَٱللَّهِ لَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا إِلَىٰ أُمَمٖ مِّن قَبۡلِكَ فَزَيَّنَ لَهُمُ ٱلشَّيۡطَٰنُ أَعۡمَٰلَهُمُۥ فَهُوَ وَلِيُّهُمُ ٱلۡيَوۡمَ

और उनके लिए पीड़ादायक दंड होगा।

وَلَهُمُۥ عَذَابٌ أَلِيمٞ

16:64

और हमने तुम पर ग्रंथ केवल इसलिए उतारा कि तुम उनके लिए स्पष्ट करो जिस पर उन्होंने मतभेद किया, और विश्वास करने वाली क़ौम के लिए मार्गदर्शन और दया के रूप में।

وَمَا أَنزَلۡنَا عَلَيۡكَ ٱلۡكِتَٰبَ إِلَّا لِتُبَيِّنَ لَهُمُ ٱلَّذِي ٱخۡتَلَفُواْ فِيهِۦ وَهُدٗى وَرَحۡمَةٗ لِّقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ

और ईश्वर ने आकाश से पानी उतारा, जिससे उसने धरती को उसकी मृत्यु के बाद पुनः जीवन दिया:

وَٱللَّهُ أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَحۡيَا بِهِ ٱلۡأَرۡضَ بَعۡدَ مَوۡتِهَاۚ

इसमें अवश्य उस क़ौम के लिए एक संकेत है जो सुनती है।

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّقَوۡمٖ يَسۡمَعُونَ

16:66

और पशुधन में तुम्हारे लिए अवश्य एक सीख है:

وَإِنَّ لَكُمُۥ فِي ٱلۡأَنۡعَٰمِ لَعِبۡرَةٗۖ

16:67

हम तुम्हें उसमें से पिलाते हैं जो उनके पेटों में है, अधपचे अन्न और रक्त के बीच से, निर्मल दूध, पीने वालों के लिए सुखद; और खजूर और अंगूर के फलों से तुम मादक पेय और सुंदर जीविका लेते हो।

نُّسۡقِيكُمُۥ مِمَّا فِي بُطُونِهِۦ مِنۢ بَيۡنِ فَرۡثٖ وَدَمٖ لَّبَنًا خَالِصٗا سَآئِغٗا لِّلشَّٰرِبِينَ وَمِن ثَمَرَٰتِ ٱلنَّخِيلِ وَٱلۡأَعۡنَٰبِ تَتَّخِذُونَ مِنۡهُۥ سَكَرٗا وَرِزۡقًا حَسَنًاۚ

इसमें अवश्य उस क़ौम के लिए एक संकेत है जो बुद्धि से काम लेती है।

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّقَوۡمٖ يَعۡقِلُونَ

16:68–69

और तुम्हारे अभिभावक ने मधुमक्खी के मन में प्रकट किया: “पहाड़ों में घर बनाओ, और वृक्षों में और उसमें जो खड़ा किया जाता है; फिर सब फलों में से खाओ, और अपने अभिभावक की राहों पर चलो, जो सुगम की गई हैं।”

وَأَوۡحَىٰ رَبُّكَ إِلَى ٱلنَّحۡلِ أَنِ ٱتَّخِذِي مِنَ ٱلۡجِبَالِ بِيُوتٗا وَمِنَ ٱلشَّجَرِ وَمِمَّا يَعۡرِشُونَ ثُمَّ كُلِي مِن كُلِّ ٱلثَّمَرَٰتِ فَٱسۡلُكِي سُبُلَ رَبِّكِ ذُلُلٗاۚ

16:68–69

उनके पेटों से एक विविध रंगों का पेय निकलता है, जिसमें लोगों के लिए उपचार है:

يَخۡرُجُ مِنۢ بُطُونِهَا شَرَابٞ مُّخۡتَلِفٌ أَلۡوَٰنُهُۥ فِيهِۦ شِفَآءٞ لِّلنَّاسِۚ

16:68–69

इसमें अवश्य उस क़ौम के लिए एक संकेत है जो सोच-विचार करती है।

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّقَوۡمٖ يَتَفَكَّرُونَ

16:70

ईश्वर ने तुम्हें रचा, फिर वह तुम्हें निष्ठा से सँभालता है;

وَٱللَّهُ خَلَقَكُمُۥ ثُمَّ يَتَوَفَّىٰكُمُۥۚ

16:70

और तुममें कुछ ऐसे हैं जो निम्नतम आयु तक वापस पहुँचा दिए जाते हैं, ताकि जानने के बाद कुछ न जानें,

وَمِنكُمُۥ مَن يُرَدُّ إِلَىٰ أَرۡذَلِ ٱلۡعُمُرِ لِكَيۡ لَا يَعۡلَمَ بَعۡدَ عِلۡمٖ شَيۡـًٔاۚ

16:70

क्योंकि ईश्वर सर्वज्ञ, सामर्थ्यवान है।

إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمٞ قَدِيرٞ

और ईश्वर ने तुममें से कुछ को दूसरों पर जीविका में वरीयता दी:

وَٱللَّهُ فَضَّلَ بَعۡضَكُمُۥ عَلَىٰ بَعۡضٖ فِي ٱلرِّزۡقِۚ

16:71

जिन्हें वरीयता दी गई वे अपनी जीविका उन शपथ से बँधों को वापस नहीं देते जो उनके बीच हैं, ताकि वे उसमें बराबर हो जाएँ।

فَمَا ٱلَّذِينَ فُضِّلُواْ بِرَآدِّي رِزۡقِهِمُۥ عَلَىٰ مَا مَلَكَتۡ أَيۡمَٰنُهُمُۥ فَهُمُۥ فِيهِۦ سَوَآءٌۚ

16:71

तो क्या वे ईश्वर के उपकार को हठपूर्वक अस्वीकार करते हैं?

أَفَبِنِعۡمَةِ ٱللَّهِ يَجۡحَدُونَ

16:72

और ईश्वर ने तुम्हारे लिए स्वयं तुमसे जोड़ीदार बनाए, और तुम्हारे जोड़ीदारों से तुम्हारे लिए बेटे और पौत्र बनाए,

وَٱللَّهُ جَعَلَ لَكُمُۥ مِنۡ أَنفُسِكُمُۥ أَزۡوَٰجٗا وَجَعَلَ لَكُمُۥ مِنۡ أَزۡوَٰجِكُمُۥ بَنِينَ وَحَفَدَةٗ

और तुम्हें अच्छी वस्तुओं से जीविका दी।

وَرَزَقَكُمُۥ مِنَ ٱلطَّيِّبَٰتِۚ

तो क्या वे असत्य पर विश्वास करते हैं, और ईश्वर के उपकार को नकारते हैं?

أَفَبِٱلۡبَٰطِلِ يُؤۡمِنُونَ وَبِنِعۡمَتِ ٱللَّهِ هُمُۥ يَكۡفُرُونَ

और वे ईश्वर के अतिरिक्त उसकी आज्ञा का पालन करते हैं जिसके पास उनके लिए आकाशों और धरती से कोई जीविका नहीं, किसी भी वस्तु की, और जिसमें इसका सामर्थ्य नहीं।

وَيَعۡبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَا يَمۡلِكُ لَهُمُۥ رِزۡقٗا مِّنَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ شَيۡـٔٗا وَلَا يَسۡتَطِيعُونَ

16:74

तो ईश्वर के लिए उदाहरणों को कई गुना मत करो,

فَلَا تَضۡرِبُواْ لِلَّهِ ٱلۡأَمۡثَالَۚ

क्योंकि ईश्वर जानता है,

إِنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ

और तुम नहीं जानते।

وَأَنتُمُۥ لَا تَعۡلَمُونَ

16:75

ईश्वर एक उदाहरण जोड़ता है: एक पराधीन, जिसके पास कोई अधिकार नहीं, और वह जिसे हमने अपनी ओर से सुंदर जीविका दी, जिसमें से वह चुपके से और खुलकर ख़र्च करता है — क्या वे बराबर होंगे?

۞ ضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلًا عَبۡدٗا مَّمۡلُوكٗا لَّا يَقۡدِرُ عَلَىٰ شَيۡءٖ وَمَن رَّزَقۡنَٰهُۥ مِنَّا رِزۡقًا حَسَنٗا فَهُوَ يُنفِقُ مِنۡهُۥ سِرّٗا وَجَهۡرًاۖ هَلۡ يَسۡتَوُۥنَۚ

प्रशंसा ईश्वर के लिए है!

ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِۚ

परंतु उनमें से अधिकतर नहीं जानते।

بَلۡ أَكۡثَرُهُمُۥ لَا يَعۡلَمُونَ

16:76

और ईश्वर एक उदाहरण जोड़ता है: दो पुरुष, जिनमें एक गूँगा है, हर अधिकार से रहित, अपने हिमायती पर पूरा बोझ; वह उसे जहाँ भी भेजे, कोई अच्छाई नहीं लाता — क्या वह उसके बराबर होगा जो न्याय का आदेश देता है और सीधे पथ पर खड़ा है?

وَضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلٗا رَّجُلَيۡنِ أَحَدُهُمَا أَبۡكَمُ لَا يَقۡدِرُ عَلَىٰ شَيۡءٖ وَهُوَ كَلٌّ عَلَىٰ مَوۡلَىٰهُۥ أَيۡنَمَا يُوَجِّههُّۥ لَا يَأۡتِ بِخَيۡرٍ هَلۡ يَسۡتَوِي هُوَ وَمَن يَأۡمُرُ بِٱلۡعَدۡلِ وَهُوَ عَلَىٰ صِۜرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ

16:77

और आकाशों और धरती में जो इंद्रियों से परे है, वह ईश्वर का है।

وَلِلَّهِ غَيۡبُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ

घड़ी का आदेश बस पलक झपकने जैसा है, या उससे भी तीव्र,

وَمَا أَمۡرُ ٱلسَّاعَةِ إِلَّا كَلَمۡحِ ٱلۡبَصَرِ أَوۡ هُوَ أَقۡرَبُۚ

क्योंकि ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।

إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ

और ईश्वर ने तुम्हें तुम्हारी माताओं के पेटों से निकाला, जबकि तुम कुछ नहीं जानते थे,

وَٱللَّهُ أَخۡرَجَكُمُۥ مِنۢ بُطُونِ أُمَّهَٰتِكُمُۥ لَا تَعۡلَمُونَ شَيۡـٔٗا

16:78

और उसने तुम्हारे लिए श्रवण, दृष्टियाँ और चेतनाएँ रखीं, शायद तुम कृतज्ञ हो जाओ।

وَجَعَلَ لَكُمُ ٱلسَّمۡعَ وَٱلۡأَبۡصَٰرَ وَٱلۡأَفۡـِٔدَةَ لَعَلَّكُمُۥ تَشۡكُرُونَ

16:79

क्या तुमने पक्षियों को नहीं देखा, जो आकाश के अंतरिक्ष में वशीभूत हैं, जिन्हें ईश्वर के सिवा कोई नहीं थामता?

أَلَمۡ يَرَوۡاْ إِلَى ٱلطَّيۡرِ مُسَخَّرَٰتٖ فِي جَوِّ ٱلسَّمَآءِ مَا يُمۡسِكُهُنَّ إِلَّا ٱللَّهُۚ

इसमें अवश्य विश्वास करने वाली क़ौम के लिए संकेत हैं।

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ

16:80

और ईश्वर ने तुम्हारे लिए तुम्हारे घरों को शांत आवास बनाया, और तुम्हारे लिए पशुधन की खालों से ऐसे घर बनाए जिन्हें तुम अपने कूच के दिन और अपने पड़ाव के दिन हल्का पाते हो,

وَٱللَّهُ جَعَلَ لَكُمُۥ مِنۢ بِيُوتِكُمُۥ سَكَنٗا وَجَعَلَ لَكُمُۥ مِن جُلُودِ ٱلۡأَنۡعَٰمِ بِيُوتٗا تَسۡتَخِفُّونَهَا يَوۡمَ ظَعَنِكُمُۥ وَيَوۡمَ إِقَامَتِكُمُۥ

16:80

और उनकी ऊन, रोओं और बालों से साज-सामान और एक समय तक का उपयोग।

وَمِنۡ أَصۡوَافِهَا وَأَوۡبَارِهَا وَأَشۡعَارِهَا أَثَٰثٗا وَمَتَٰعًا إِلَىٰ حِينٖ

16:81

और ईश्वर ने तुम्हारे लिए, जो उसने रचा उसमें से, परछाइयाँ बनाईं, और तुम्हारे लिए पहाड़ों में आश्रय बनाए, और तुम्हारे लिए कुर्ते बनाए जो तुम्हें गरमी से बचाते हैं, और ऐसे कुर्ते जो तुम्हें तुम्हारी अपनी हिंसा से बचाते हैं:

وَٱللَّهُ جَعَلَ لَكُمُۥ مِمَّا خَلَقَ ظِلَٰلٗا وَجَعَلَ لَكُمُۥ مِنَ ٱلۡجِبَالِ أَكۡنَٰنٗا وَجَعَلَ لَكُمُۥ سَرَٰبِيلَ تَقِيكُمُ ٱلۡحَرَّ وَسَرَٰبِيلَ تَقِيكُمُۥ بَأۡسَكُمُۥۚ

16:81

इसी प्रकार वह तुम पर अपना उपकार पूरा करता है, शायद तुम उसके प्रति खरे हो जाओ।

كَذَٰلِكَ يُتِمُّ نِعۡمَتَهُۥ عَلَيۡكُمُۥ لَعَلَّكُمُۥ تُسۡلِمُونَ

यदि वे पीठ फेर लें, तो तुम पर केवल स्पष्ट संप्रेषण का दायित्व है।

فَإِن تَوَلَّوۡاْ فَإِنَّمَا عَلَيۡكَ ٱلۡبَلَٰغُ ٱلۡمُبِينُ

वे ईश्वर के उपकार को मान्य ठहराते हैं, फिर उसे अमान्य ठहराते हैं,

يَعۡرِفُونَ نِعۡمَتَ ٱللَّهِ ثُمَّ يُنكِرُونَهَا

और उनमें से अधिकतर नकारते हैं।

وَأَكۡثَرُهُمُ ٱلۡكَٰفِرُونَ

16:84

और जिस दिन हम प्रत्येक समुदाय में से एक साक्षी उठाएँगे, फिर नकारने वालों को कोई अनुमति नहीं दी जाएगी, और न उनसे खेद प्रकट करने को कहा जाएगा।

وَيَوۡمَ نَبۡعَثُ مِن كُلِّ أُمَّةٖ شَهِيدٗا ثُمَّ لَا يُؤۡذَنُ لِلَّذِينَ كَفَرُواْ وَلَا هُمُۥ يُسۡتَعۡتَبُونَ

और जब जिन्होंने अन्याय किया है, वे दंड को देखेंगे, तो वह उनके लिए हल्का नहीं किया जाएगा, और उन्हें मोहलत नहीं दी जाएगी।

وَإِذَا رَءَا ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ ٱلۡعَذَابَ فَلَا يُخَفَّفُ عَنۡهُمُۥ وَلَا هُمُۥ يُنظَرُونَ

और जब जिन्होंने साझी ठहराया, वे अपने साझीदारों को देखेंगे, तो कहेंगे: “हमारे अभिभावक, ये हमारे साझीदार हैं जिन्हें हम आपके अतिरिक्त पुकारते थे।”

وَإِذَا رَءَا ٱلَّذِينَ أَشۡرَكُواْ شُرَكَآءَهُمُۥ قَالُواْ رَبَّنَا هَٰؤُلَآءِ شُرَكَآؤُنَا ٱلَّذِينَ كُنَّا نَدۡعُواْ مِن دُونِكَۖ

तब ये उनके सामने यह कथन रखेंगे: “तुम अवश्य झूठे हो।”

فَأَلۡقَوۡاْ إِلَيۡهِمُ ٱلۡقَوۡلَ إِنَّكُمُۥ لَكَٰذِبُونَ

और वे उस दिन ईश्वर को अपना समर्पण प्रस्तुत करेंगे,

وَأَلۡقَوۡاْ إِلَى ٱللَّهِ يَوۡمَئِذٍ ٱلسَّلَمَۖ

और जो वे गढ़ा करते थे, वह उनसे दूर भटक जाएगा।

وَضَلَّ عَنۡهُمُۥ مَا كَانُواْ يَفۡتَرُونَ

जो नकारते हैं और जिन्होंने ईश्वर की राह रोकी — हम उनके दंड के ऊपर और दंड बढ़ा देंगे, उस बिगाड़ के कारण जो वे फैलाते थे।

ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَصَدُّواْ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ زِدۡنَٰهُمُۥ عَذَابٗا فَوۡقَ ٱلۡعَذَابِ بِمَا كَانُواْ يُفۡسِدُونَ

और जिस दिन हम प्रत्येक समुदाय में उन्हीं में से एक साक्षी उनके विरुद्ध उठाएँगे, और तुम्हें इन पर साक्षी बनाकर लाएँगे।

وَيَوۡمَ نَبۡعَثُ فِي كُلِّ أُمَّةٖ شَهِيدًا عَلَيۡهِمُۥ مِنۡ أَنفُسِهِمُۥۖ وَجِئۡنَا بِكَ شَهِيدًا عَلَىٰ هَٰؤُلَآءِۚ

16:89

और हमने तुम पर ग्रंथ उतारा, जो हर चीज़ को स्पष्ट करने वाला है, और मार्गदर्शन, दया और शुभ समाचार के रूप में, उनके लिए जो ईश्वर के प्रति खरे हैं।

وَنَزَّلۡنَا عَلَيۡكَ ٱلۡكِتَٰبَ تِبۡيَٰنٗا لِّكُلِّ شَيۡءٖ وَهُدٗى وَرَحۡمَةٗ وَبُشۡرَىٰ لِلۡمُسۡلِمِينَ

16:90

ईश्वर न्याय, भलाई और निकट संबंधी को दिए जाने का आदेश देता है,

۞ إِنَّ ٱللَّهَ يَأۡمُرُ بِٱلۡعَدۡلِ وَٱلۡإِحۡسَٰنِ وَإِيتَآيِٕ ذِي ٱلۡقُرۡبَىٰ

16:90

और वह निर्लज्जता, जो अमान्य है, और ज़्यादती से मना करता है:

وَيَنۡهَىٰ عَنِ ٱلۡفَحۡشَآءِ وَٱلۡمُنكَرِ وَٱلۡبَغۡيِۚ

16:90

वह तुम्हें उपदेश देता है, शायद तुम स्मरण करो।

يَعِظُكُمُۥ لَعَلَّكُمُۥ تَذَّكَّرُونَ

16:91

और ईश्वर की संधि को निभाओ जब तुम संधि करो,

وَأَوۡفُواْ بِعَهۡدِ ٱللَّهِ إِذَا عَٰهَدتُّمُۥ

16:91

और शपथों को पक्का करने के बाद उन्हें मत तोड़ो, जबकि तुम ईश्वर को अपने ऊपर ज़ामिन बना चुके हो,

وَلَا تَنقُضُواْ ٱلۡأَيۡمَٰنَ بَعۡدَ تَوۡكِيدِهَا وَقَدۡ جَعَلۡتُمُ ٱللَّهَ عَلَيۡكُمُۥ كَفِيلًاۚ

क्योंकि ईश्वर जानता है जो तुम करते हो।

إِنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ مَا تَفۡعَلُونَ

16:92

और उसके समान मत हो जाओ जिसने अपना सूत मज़बूती से कातने के बाद उसे रेशा-रेशा करके उधेड़ डाला; तुम अपनी शपथों को आपस में छल का साधन बनाते हो, इस बहाने से कि एक समुदाय दूसरे समुदाय से संख्या में बढ़कर हो:

وَلَا تَكُونُواْ كَٱلَّتِي نَقَضَتۡ غَزۡلَهَا مِنۢ بَعۡدِ قُوَّةٍ أَنكَٰثٗا تَتَّخِذُونَ أَيۡمَٰنَكُمُۥ دَخَلَۢا بَيۡنَكُمُۥ أَن تَكُونَ أُمَّةٌ هِيَ أَرۡبَىٰ مِنۡ أُمَّةٍۚ

16:92

ईश्वर इसके द्वारा केवल तुम्हें परखता है,

إِنَّمَا يَبۡلُوكُمُ ٱللَّهُ بِهِۦۚ

16:92

और वह पेशी के दिन, जिस पर तुम मतभेद रखते थे, उसे तुम्हारे लिए अवश्य स्पष्ट करेगा।

وَلَيُبَيِّنَنَّ لَكُمُۥ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ مَا كُنتُمُۥ فِيهِۦ تَخۡتَلِفُونَ

और यदि ईश्वर की मर्ज़ी होती, तो वह तुम्हें एक ही समुदाय बना देता;

وَلَوۡ شَآءَ ٱللَّهُ لَجَعَلَكُمُۥ أُمَّةٗ وَٰحِدَةٗ

पर वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे भटकाता है और जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे मार्ग दिखाता है,

وَلَٰكِن يُضِلُّ مَن يَشَآءُ وَيَهۡدِي مَن يَشَآءُۚ

और तुमसे अवश्य पूछा जाएगा उसके विषय में जो तुम किया करते थे।

وَلَتُسۡـَٔلُنَّ عَمَّا كُنتُمُۥ تَعۡمَلُونَ

और अपनी शपथों को आपस में छल का साधन मत बनाओ, नहीं तो जम जाने के बाद कोई पाँव फिसल जाएगा, और ईश्वर की राह रोकने के कारण तुम बुराई का स्वाद चखोगे; और तुम्हारे लिए विशाल दंड होगा।

وَلَا تَتَّخِذُواْ أَيۡمَٰنَكُمُۥ دَخَلَۢا بَيۡنَكُمُۥ فَتَزِلَّ قَدَمُۢ بَعۡدَ ثُبُوتِهَا وَتَذُوقُواْ ٱلسُّوٓءَ بِمَا صَدَدتُّمُۥ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَلَكُمُۥ عَذَابٌ عَظِيمٞ

और ईश्वर की संधि के बदले तुच्छ मूल्य मत ख़रीदो:

وَلَا تَشۡتَرُواْ بِعَهۡدِ ٱللَّهِ ثَمَنٗا قَلِيلًاۚ

जो ईश्वर के पास है वही तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम जानते।

إِنَّمَا عِندَ ٱللَّهِ هُوَ خَيۡرٞ لَّكُمُۥ إِن كُنتُمُۥ تَعۡلَمُونَ

जो तुम्हारे पास है वह समाप्त हो जाता है,

مَا عِندَكُمُۥ يَنفَدُ

और जो ईश्वर के पास है वह स्थायी रहता है।

وَمَا عِندَ ٱللَّهِ بَاقِۦۗ

16:96

और हम, जिन्होंने धैर्य रखा, उन्हें उनके कर्मों में सबसे सुंदर के अनुसार उनके पुरस्कार का प्रतिफल अवश्य देंगे।

وَلَنَجۡزِيَنَّ ٱلَّذِينَ صَبَرُواْ أَجۡرَهُمُۥ بِأَحۡسَنِ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

16:97

जो कोई भला कर्म करे, पुरुष हो या स्त्री, और वह विश्वास करने वाला हो, हम उसे अवश्य एक अच्छा जीवन जिलाएँगे, और हम उन्हें उनके कर्मों में सबसे सुंदर के अनुसार उनके पुरस्कार का प्रतिफल अवश्य देंगे।

مَنۡ عَمِلَ صَٰلِحٗا مِّن ذَكَرٍ أَوۡ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤۡمِنٞ فَلَنُحۡيِيَنَّهُۥ حَيَوٰةٗ طَيِّبَةٗۖ وَلَنَجۡزِيَنَّهُمُۥ أَجۡرَهُمُۥ بِأَحۡسَنِ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

16:98

जब तुम पाठ पढ़ो, तो निष्कासित बहकाने वाले के विरुद्ध ईश्वर की छत्रछाया चाहो,

فَإِذَا قَرَأۡتَ ٱلۡقُرَانَ فَٱسۡتَعِذۡ بِٱللَّهِ مِنَ ٱلشَّيۡطَٰنِ ٱلرَّجِيمِ

16:99

क्योंकि उसका उन पर कोई अधिकार नहीं जो विश्वास करते हैं और अपने अभिभावक को मुख़्तार बनाते हैं।

إِنَّهُۥ لَيۡسَ لَهُۥ سُلۡطَٰنٌ عَلَى ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَلَىٰ رَبِّهِمُۥ يَتَوَكَّلُونَ

16:100

उसका अधिकार केवल उन्हीं पर है जो उसे अपना हिमायती बनाते हैं, और उन पर जो उसे साझीदार ठहराते हैं।

إِنَّمَا سُلۡطَٰنُهُۥ عَلَى ٱلَّذِينَ يَتَوَلَّوۡنَهُۥ وَٱلَّذِينَ هُمُۥ بِهِۦ مُشۡرِكُونَ

16:101

और जब हम एक संकेत के स्थान पर दूसरा संकेत रख देते हैं — ईश्वर सबसे अच्छा जानता है जो वह उतारता है — तो वे कहते हैं: “तुम केवल गढ़ने वाले हो।”

وَإِذَا بَدَّلۡنَا ءَايَةٗ مَّكَانَ ءَايَةٖ وَٱللَّهُ أَعۡلَمُ بِمَا يُنزِلُ قَالُواْ إِنَّمَا أَنتَ مُفۡتَرِۭۚ

परंतु उनमें से अधिकतर नहीं जानते।

بَلۡ أَكۡثَرُهُمُۥ لَا يَعۡلَمُونَ

16:102

कहो: “इसे पवित्र प्रवाह ने तुम्हारे अभिभावक की ओर से सत्य के साथ उतारा है, ताकि जो विश्वास करते हैं उन्हें दृढ़ करे, और उनके लिए जो ईश्वर के प्रति खरे हैं, मार्गदर्शन और शुभ समाचार के रूप में।”

قُلۡ نَزَّلَهُۥ رُوحُ ٱلۡقُدۡسِ مِن رَّبِّكَ بِٱلۡحَقِّ لِيُثَبِّتَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَهُدٗى وَبُشۡرَىٰ لِلۡمُسۡلِمِينَ

16:103

हम निश्चय ही जानेंगे कि वे कहते हैं: “उसे तो केवल एक मानव सिखाता है।”

وَلَقَدۡ نَعۡلَمُ أَنَّهُمُۥ يَقُولُونَ إِنَّمَا يُعَلِّمُهُۥ بَشَرٞۗ

16:103

जबकि जिसकी ओर वे इशारा करते हैं उसकी भाषा अस्पष्ट है, और यह भाषा त्रुटिहीन, स्पष्ट है।

لِّسَانُ ٱلَّذِي يُلۡحِدُونَ إِلَيۡهِۦ أَعۡجَمِيّٞ وَهَٰذَا لِسَانٌ عَرَبِيّٞ مُّبِينٌ

जो ईश्वर के संकेतों पर विश्वास नहीं करते, ईश्वर उन्हें निश्चय ही मार्ग नहीं दिखाता,

إِنَّ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ لَا يَهۡدِيهِمُ ٱللَّهُ

और उनके लिए पीड़ादायक दंड होगा।

وَلَهُمُۥ عَذَابٌ أَلِيمٌ

झूठ वही गढ़ते हैं जो ईश्वर के संकेतों पर विश्वास नहीं करते,

إِنَّمَا يَفۡتَرِي ٱلۡكَذِبَ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِۖ

और वे ही झूठे हैं।

وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡكَٰذِبُونَ

16:106

जो कोई विश्वास करने के बाद ईश्वर को नकारे — सिवा उसके जिसे विवश किया गया हो, जबकि उसका मर्म विश्वास में चैन से रहता है —

مَن كَفَرَ بِٱللَّهِ مِنۢ بَعۡدِ إِيمَٰنِهِۦ إِلَّا مَنۡ أُكۡرِهَ وَقَلۡبُهُۥ مُطۡمَئِنُّۢ بِٱلۡإِيمَٰنِ

16:106

परंतु जो नकार के लिए अपना सीना खोल दे, उन पर ईश्वर की ओर से क्रोध है,

وَلَٰكِن مَّن شَرَحَ بِٱلۡكُفۡرِ صَدۡرٗا فَعَلَيۡهِمُۥ غَضَبٞ مِّنَ ٱللَّهِ

16:106

और उनके लिए विशाल दंड होगा।

وَلَهُمُۥ عَذَابٌ عَظِيمٞ

यह इसलिए कि उन्होंने अंतिम जीवन की अपेक्षा निकट जीवन से अधिक प्रेम किया, और इसलिए कि ईश्वर नकारने वाली क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।

ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُ ٱسۡتَحَبُّواْ ٱلۡحَيَوٰةَ ٱلدُّنۡيَا عَلَى ٱلۡأٓخِرَةِ وَأَنَّ ٱللَّهَ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلۡكَٰفِرِينَ

16:108

ये वही हैं जिन पर ईश्वर ने छाप लगा दी है: उनके मर्म, उनके श्रवण और उनकी दृष्टि पर,

أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ طَبَعَ ٱللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمُۥ وَسَمۡعِهِمُۥ وَأَبۡصَٰرِهِمُۥۖ

और ये ही लापरवाह हैं।

وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡغَٰفِلُونَ

अटल रूप से, अंतिम जीवन में वे ही घाटा उठाने वाले हैं।

لَا جَرَمَ أَنَّهُمُۥ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ هُمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ

फिर, तुम्हारा अभिभावक, उनके प्रति जिन्होंने परीक्षा में डाले जाने के बाद प्रवास किया, फिर संघर्ष किया और धैर्य रखा — तुम्हारा अभिभावक, इसके बाद, अवश्य अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।

ثُمَّ إِنَّ رَبَّكَ لِلَّذِينَ هَاجَرُواْ مِنۢ بَعۡدِ مَا فُتِنُواْ ثُمَّ جَٰهَدُواْ وَصَبَرُواْ إِنَّ رَبَّكَ مِنۢ بَعۡدِهَا لَغَفُورٞ رَّحِيمٞ

जिस दिन हर स्व अपने पक्ष में बहस करता हुआ आएगा, और हर स्व को जो उसने किया वह पूरा-पूरा दिया जाएगा, जबकि उन पर अन्याय नहीं किया जाएगा।

۞ يَوۡمَ تَأۡتِي كُلُّ نَفۡسٖ تُجَٰدِلُ عَن نَّفۡسِهَا وَتُوَفَّىٰ كُلُّ نَفۡسٖ مَّا عَمِلَتۡ وَهُمُۥ لَا يُظۡلَمُونَ

16:112

और ईश्वर एक उदाहरण जोड़ता है: एक बस्ती जो सुरक्षित थी, चैन में थी, जिसे उसकी जीविका हर स्थान से सहज रूप से मिलती थी; फिर उसने ईश्वर के उपकारों को नकारा, और ईश्वर ने उसे भूख और डर के वस्त्र का स्वाद चखाया, उसके कारण जो वे करते थे।

وَضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلٗا قَرۡيَةٗ كَانَتۡ ءَامِنَةٗ مُّطۡمَئِنَّةٗ يَأۡتِيهَا رِزۡقُهَا رَغَدٗا مِّن كُلِّ مَكَانٖ فَكَفَرَتۡ بِأَنۡعُمِ ٱللَّهِ فَأَذَٰقَهَا ٱللَّهُ لِبَاسَ ٱلۡجُوعِ وَٱلۡخَوۡفِ بِمَا كَانُواْ يَصۡنَعُونَ

16:113

उनके पास निश्चय ही उन्हीं में से एक संदेशवाहक आया था, पर उन्होंने उसे झुठलाया; और दंड ने उन्हें आ पकड़ा, जबकि वे अन्यायी थे।

وَلَقَدۡ جَآءَهُمُۥ رَسُولٞ مِّنۡهُمُۥ فَكَذَّبُوهُۥ فَأَخَذَهُمُ ٱلۡعَذَابُ وَهُمُۥ ظَٰلِمُونَ

तो उसमें से खाओ जिससे ईश्वर ने तुम्हें जीविका दी है, जो वैध और अच्छा है,

فَكُلُواْ مِمَّا رَزَقَكُمُ ٱللَّهُ حَلَٰلٗا طَيِّبٗا

और ईश्वर के उपकार के प्रति कृतज्ञ रहो, यदि तुम उसी की आज्ञा का पालन करते हो।

وَٱشۡكُرُواْ نِعۡمَتَ ٱللَّهِ إِن كُنتُمُۥ إِيَّاهُۥ تَعۡبُدُونَ

उसने तुम पर केवल मरा हुआ पशु, रक्त, सूअर का मांस, और जो ईश्वर के अतिरिक्त किसी और के लिए समर्पित किया गया हो, वह वर्जित किया है।

إِنَّمَا حَرَّمَ عَلَيۡكُمُ ٱلۡمَيۡتَةَ وَٱلدَّمَ وَلَحۡمَ ٱلۡخِنزِيرِ وَمَا أُهِلَّ لِغَيۡرِ ٱللَّهِ بِهِۦۖ

परंतु जो कोई इसके लिए लाचार हो, बिना विद्रोही बने और सीमाएँ पार किए, तो ईश्वर निश्चय ही अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।

فَمَنُ ٱضۡطُرَّ غَيۡرَ بَاغٖ وَلَا عَادٖ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ

और उसके विषय में, जिसका तुम्हारी जीभें झूठा वर्णन करती हैं, यह मत कहो: “यह वैध है और यह वर्जित है”, ताकि तुम ईश्वर पर झूठ गढ़ो,

وَلَا تَقُولُواْ لِمَا تَصِفُ أَلۡسِنَتُكُمُ ٱلۡكَذِبَ هَٰذَا حَلَٰلٞ وَهَٰذَا حَرَامٞ لِّتَفۡتَرُواْ عَلَى ٱللَّهِ ٱلۡكَذِبَۚ

क्योंकि जो ईश्वर पर झूठ गढ़ते हैं वे सफल नहीं होंगे।

إِنَّ ٱلَّذِينَ يَفۡتَرُونَ عَلَى ٱللَّهِ ٱلۡكَذِبَ لَا يُفۡلِحُونَ

यह थोड़ा-सा उपभोग है,

مَتَٰعٞ قَلِيلٞ

और उनके लिए पीड़ादायक दंड होगा।

وَلَهُمُۥ عَذَابٌ أَلِيمٞ

और पुनरुन्मुखों पर हमने वह वर्जित किया जिसका वर्णन हम तुम्हारे सामने पहले कर चुके हैं;

وَعَلَى ٱلَّذِينَ هَادُواْ حَرَّمۡنَا مَا قَصَصۡنَا عَلَيۡكَ مِن قَبۡلُۖ

हमने उन पर अन्याय नहीं किया,

وَمَا ظَلَمۡنَٰهُمُۥ

परंतु वे स्वयं अपने ऊपर अन्याय करते थे।

وَلَٰكِن كَانُواْ أَنفُسَهُمُۥ يَظۡلِمُونَ

फिर, तुम्हारा अभिभावक, उनके प्रति जिन्होंने अज्ञान में बुराई की, फिर इसके बाद पश्चात्ताप किया और स्वयं को सुधार लिया — तुम्हारा अभिभावक, इसके बाद, अवश्य अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।

ثُمَّ إِنَّ رَبَّكَ لِلَّذِينَ عَمِلُواْ ٱلسُّوٓءَ بِجَهَٰلَةٖ ثُمَّ تَابُواْ مِنۢ بَعۡدِ ذَٰلِكَ وَأَصۡلَحُواْ إِنَّ رَبَّكَ مِنۢ بَعۡدِهَا لَغَفُورٞ رَّحِيمٌ

16:120

इब्राहीम एक समुदाय था, ईश्वर के प्रति समर्पित, पूरी तरह उसी की ओर मुड़ा हुआ, और वह साझी ठहराने वालों में से नहीं था,

إِنَّ إِبۡرَٰهِيمَ كَانَ أُمَّةٗ قَانِتٗا لِّلَّهِ حَنِيفٗا وَلَمۡ يَكُ مِنَ ٱلۡمُشۡرِكِينَ

16:121

उसके उपकारों के प्रति कृतज्ञ।

شَاكِرٗا لِّأَنۡعُمِهِۚ

16:121

उसने उसे चुन लिया और सीधे पथ की ओर मार्ग दिखाया।

ٱجۡتَبَىٰهُۥ وَهَدَىٰهُۥ إِلَىٰ صِۜرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ

और हमने उसे निकट जीवन में भलाई दी;

وَءَاتَيۡنَٰهُۥ فِي ٱلدُّنۡيَا حَسَنَةٗۖ

और अंतिम जीवन में वह अवश्य उनमें से होगा जो भले हैं।

وَإِنَّهُۥ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ لَمِنَ ٱلصَّٰلِحِينَ

16:123

फिर हमने तुम पर प्रकट किया: “इब्राहीम के मत का अनुसरण करो, पूरी तरह ईश्वर की ओर मुड़े हुए”,

ثُمَّ أَوۡحَيۡنَا إِلَيۡكَ أَنِ ٱتَّبِعۡ مِلَّةَ إِبۡرَٰهِيمَ حَنِيفٗاۖ

और वह साझी ठहराने वालों की गिनती में नहीं था।

وَمَا كَانَ مِنَ ٱلۡمُشۡرِكِينَ

विराम केवल उन्हीं पर रखा गया जिन्होंने उसके विषय में मतभेद किया:

إِنَّمَا جُعِلَ ٱلسَّبۡتُ عَلَى ٱلَّذِينَ ٱخۡتَلَفُواْ فِيهِۦۚ

16:124

तुम्हारा अभिभावक पेशी के दिन उनके बीच अवश्य निर्णय करेगा, उस विषय में जिसमें वे मतभेद रखते थे।

وَإِنَّ رَبَّكَ لَيَحۡكُمُ بَيۡنَهُمُۥ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ فِيمَا كَانُواْ فِيهِۦ يَخۡتَلِفُونَ

16:125

अपने अभिभावक की राह की ओर प्रज्ञा और सुंदर उपदेश के साथ बुलाओ, और उनसे सबसे सुंदर ढंग से बहस करो;

ٱدۡعُ إِلَىٰ سَبِيلِ رَبِّكَ بِٱلۡحِكۡمَةِ وَٱلۡمَوۡعِظَةِ ٱلۡحَسَنَةِۖ وَجَٰدِلۡهُمُۥ بِٱلَّتِي هِيَ أَحۡسَنُۚ

16:125

क्योंकि तुम्हारा अभिभावक सबसे अच्छा जानता है कि कौन उसकी राह से भटक गया,

إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعۡلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبِيلِهِۦ

16:125

और वह उन्हें सबसे अच्छा जानता है जो मार्गदर्शन पाते हैं।

وَهُوَ أَعۡلَمُ بِٱلۡمُهۡتَدِينَ

16:126

और यदि तुम बदला लो, तो ठीक उतना ही बदला लो जितना तुम्हें सहना पड़ा;

وَإِنۡ عَاقَبۡتُمُۥ فَعَاقِبُواْ بِمِثۡلِ مَا عُوقِبۡتُمُۥ بِهِۦۖ

16:126

परंतु यदि तुम धैर्य रखो, तो यह उनके लिए अवश्य बेहतर है जो धैर्य रखने वाले हैं।

وَلَئِن صَبَرۡتُمُۥ لَهُوَ خَيۡرٞ لِّلصَّٰبِرِينَ

16:127

और धैर्य रखो —

وَٱصۡبِرۡ

16:127

जबकि तुम्हारा धैर्य ईश्वर पर ही निर्भर है।

وَمَا صَبۡرُكَ إِلَّا بِٱللَّهِۚ

16:127

और उनके लिए दुखी मत हो, और उसके कारण तंगी में मत रहो जिसका वे षड्यंत्र करते हैं,

وَلَا تَحۡزَنۡ عَلَيۡهِمُۥ وَلَا تَكُ فِي ضِيقٖ مِّمَّا يَمۡكُرُونَ

क्योंकि ईश्वर सावधानी बरतने वालों और भलाई करने वालों के साथ है।

إِنَّ ٱللَّهَ مَعَ ٱلَّذِينَ ٱتَّقَواْ وَّٱلَّذِينَ هُمُۥ مُحۡسِنُونَ

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