النبا
An-Naba
The Immense Information
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। किस विषय में?
بِسْمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحْمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ عَمَّ
वे विशाल सूचना के विषय में एक-दूसरे से पूछते हैं, उसी के विषय में जिस पर वे मतभेद करते हैं।
يَتَسَآءَلُونَ عَنِ اِ۬لنَّبَإِ اِ۬لْعَظِيمِ اِ۬لذِے هُمْ فِيهِ مُخْتَلِفُونَۖ
कदापि नहीं! वे शीघ्र ही जान लेंगे। फिर, कदापि नहीं! वे शीघ्र ही जान लेंगे।
كَلَّا سَيَعْلَمُونَ ثُمَّ كَلَّا سَيَعْلَمُونَۖ
क्या हमने धरती को एक सुव्यवस्थित विस्तार नहीं बनाया, और पहाड़ों को खूँटे? क्या हमने तुम्हें जोड़ों में नहीं रचा, और तुम्हारी नींद को विश्राम नहीं बनाया? क्या हमने रात को वस्त्र नहीं बनाया, और दिन को जीवन-निर्वाह का साधन? क्या हमने तुम्हारे ऊपर सात दृढ़ नहीं बनाए, और एक प्रदीप्त मशाल नहीं रखी? और क्या हमने निचोड़ने वालियों से भरपूर पानी नहीं उतारा, ताकि उसके द्वारा दाना, वनस्पति और गुँथे हुए उद्यान निकालें?
أَلَمْ نَجْعَلِ اِ۬لْأَرْضَ مِهَٰداٗ وَالْجِبَالَ أَوْتَاداٗ وَخَلَقْنَٰكُمْ أَزْوَٰجاٗ وَجَعَلْنَا نَوْمَكُمْ سُبَاتاٗ وَجَعَلْنَا اَ۬ليْلَ لِبَاساٗ وَجَعَلْنَا اَ۬لنَّهَارَ مَعَاشاٗ وَبَنَيْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعاٗ شِدَاداٗ وَجَعَلْنَا سِرَاجاٗ وَهَّاجاٗ وَأَنزَلْنَا مِنَ اَ۬لْمُعْصِرَٰتِ مَآءٗ ثَجَّاجاٗ لِّنُخْرِجَ بِهِۦ حَبّاٗ وَنَبَاتاٗ وَجَنَّٰتٍ أَلْفَافاًۖ
अलगाव का दिन निश्चय ही एक निर्धारित वादे का समय है — वह दिन जब नरसिंगा में फूँका जाएगा, और तुम भीड़ों में आओगे, जब आकाश खोला जाएगा और द्वार बन जाएगा, और जब पहाड़ गति में डाल दिए जाएँगे और मरीचिका बन जाएँगे।
إِنَّ يَوْمَ اَ۬لْفَصْلِ كَانَ مِيقَٰتاٗ يَوْمَ يُنفَخُ فِے اِ۬لصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْوَاجاٗ وَفُتِّحَتِ اِ۬لسَّمَآءُ فَكَانَتْ أَبْوَاباٗ وَسُيِّرَتِ اِ۬لْجِبَالُ فَكَانَتْ سَرَاباًۖ
जहन्नम निश्चय ही एक निगरानी-चौकी है, उनके पुनरागमन का स्थान जो हर मर्यादा से आगे निकल जाते हैं, जहाँ वे लंबे दौर बिताएँगे।
إِنَّ جَهَنَّمَ كَانَتْ مِرْصَاداٗ لِّلطَّٰغِينَ مَـَٔاباٗ لَّٰبِثِينَ فِيهَا أَحْقَاباٗۖ
वे वहाँ न ठंडक चखेंगे और न कोई पेय, सिवा खौलते पानी और दुर्गंधित तरल के — ठीक अनुपात वाला प्रतिफल।
لَّا يَذُوقُونَ فِيهَا بَرْداٗ وَلَا شَرَاباً إِلَّا حَمِيماٗ وَغَسَاقاٗ جَزَآءٗ وِفَاقاًۖ
वे किसी हिसाब की आशा नहीं रखते थे, और उन्होंने हमारे संकेतों को डटकर झुठलाया।
إِنَّهُمْ كَانُواْ لَا يَرْجُونَ حِسَاباٗ وَكَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا كِذَّاباٗۖ
जबकि हमने हर चीज़ को एक बही में गिन रखा है।
وَكُلَّ شَےْءٍ أَحْصَيْنَٰهُ كِتَٰباٗۖ
तो चखो! हम तुम्हारे दंड को केवल बढ़ाएँगे।
فَذُوقُواْ فَلَن نَّزِيدَكُمْ إِلَّا عَذَاباًۖ
सावधानी बरतने वालों के लिए निश्चय ही एक विजय है: घिरे हुए उद्यान और बेलें, जीवन-शक्ति से भरी संगिनियाँ, उर्वर और एक ही मूल की, और छलकता हुआ प्याला। वे वहाँ न निरर्थकता सुनेंगे और न झूठ —
إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ مَفَازاً حَدَآئِقَ وَأَعْنَٰباٗ وَكَوَاعِبَ أَتْرَاباٗ وَكَأْساٗ دِهَاقاٗ لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْواٗ وَلَا كِذَّاباٗۖ
तुम्हारे अभिभावक की ओर से एक प्रतिफल, ठीक गणना की गई देन,
جَزَآءٗ مِّن رَّبِّكَ عَطَآءً حِسَاباٗۖ
आकाशों और धरती, और जो उनके बीच है, उनका अभिभावक,
رَّبُّ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَاۖ
सर्वदयालु; वे उसे संबोधित करने का अधिकार नहीं रखते,
اَ۬لرَّحْمَٰنُ لَا يَمْلِكُونَ مِنْهُ خِطَاباٗۖ
उस दिन जब प्रवाह और अभिकर्ता पंक्ति में खड़े होंगे, जब कोई नहीं बोलेगा सिवा उसके जिसे सर्वदयालु ने अनुमति दी होगी, और जो सही कथन कहेगा।
يَوْمَ يَقُومُ اُ۬لرُّوحُ وَالْمَلَٰٓئِكَةُ صَفّاٗ لَّا يَتَكَلَّمُونَ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ اُ۬لرَّحْمَٰنُ وَقَالَ صَوَاباٗۖ
यही सत्य का दिन है।
ذَٰلِكَ اَ۬لْيَوْمُ اُ۬لْحَقُّۖ
तो जो चाहे वह अपने अभिभावक की ओर पुनरागमन का एक स्थान बना ले।
فَمَن شَآءَ اَ۪تَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ مَـَٔاباًۖ
हमने तुम्हें निश्चय ही एक निकट दंड की चेतावनी दे दी है, उस दिन जब मनुष्य नज़र डालेगा कि उसके हाथों ने क्या आगे बढ़ाया, और नकारने वाला कहेगा: “काश मैं मिट्टी होता!”
إِنَّا أَنذَرْنَٰكُمْ عَذَاباٗ قَرِيباٗ يَوْمَ يَنظُرُ اُ۬لْمَرْءُ مَا قَدَّمَتْ يَدَٰهُ وَيَقُولُ اُ۬لْكَافِرُ يَٰلَيْتَنِے كُنتُ تُرَٰباَۢۖ