غافر
Ghafir
My Guardian Is God
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। हा. मीम.
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ حٜمٓ
ग्रंथ का अवतरण ईश्वर की ओर से है, जो सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, दोष क्षमा करने वाला और पश्चात्ताप स्वीकार करने वाला, सज़ा देने में कठोर, विपुलता का धारक है,
تَنزِيلُ ٱلۡكِتَٰبِ مِنَ ٱللَّهِ ٱلۡعَزِيزِ ٱلۡعَلِيمِ غَافِرِ ٱلذَّنۢبِ وَقَابِلِ ٱلتَّوۡبِ شَدِيدِ ٱلۡعِقَابِ ذِي ٱلطَّوۡلِۖ
उसके सिवा कोई देवता नहीं;
لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ
उसी की ओर गंतव्य है।
إِلَيۡهِ ٱلۡمَصِيرُ
ईश्वर के संकेतों पर केवल नकारने वाले ही बहस करते हैं;
مَا يُجَٰدِلُ فِيٓ ءَايَٰتِ ٱللَّهِ إِلَّا ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ
तो देशों में उनकी आवाजाही तुम्हें छल न ले।
فَلَا يَغۡرُرۡكَ تَقَلُّبُهُمۡ فِي ٱلۡبِلَٰدِ
इनसे पहले नूह की क़ौम ने झुठलाया, और उनके बाद दलों ने,
كَذَّبَتۡ قَبۡلَهُمۡ قَوۡمُ نُوحٖ وَٱلۡأَحۡزَابُ مِنۢ بَعۡدِهِمۡۖ
और हर समुदाय ने अपने संदेशवाहक को पकड़ने का इरादा किया,
وَهَمَّتۡ كُلُّ أُمَّةِۭ بِرَسُولِهِمۡ لِيَأۡخُذُوهُۖ
और उन्होंने असत्य के द्वारा बहस की ताकि उससे सत्य को खंडित करें — तब मैंने उन्हें पकड़ लिया:
وَجَٰدَلُواْ بِٱلۡبَٰطِلِ لِيُدۡحِضُواْ بِهِ ٱلۡحَقَّ فَأَخَذتُّهُمۡۖ
और तब मेरी सज़ा कैसी रही?
فَكَيۡفَ كَانَ عِقَابِ
इस प्रकार तुम्हारे अभिभावक का बोल नकारने वालों पर सिद्ध हुआ: वे आग वाले हैं।
وَكَذَٰلِكَ حَقَّتۡ كَلِمَتُ رَبِّكَ عَلَى ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ أَنَّهُمۡ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِ
जो भवन को वहन करते हैं और जो उसके आसपास हैं, वे अपने अभिभावक की प्रशंसा करते हुए महिमा गाते हैं, उस पर विश्वास करते हैं और विश्वास करने वालों के लिए क्षमा माँगते हैं:
ٱلَّذِينَ يَحۡمِلُونَ ٱلۡعَرۡشَ وَمَنۡ حَوۡلَهُۥ يُسَبِّحُونَ بِحَمۡدِ رَبِّهِمۡ وَيُؤۡمِنُونَ بِهِۦ وَيَسۡتَغۡفِرُونَ لِلَّذِينَ ءَامَنُواْۖ
“हमारे अभिभावक, आप दया और ज्ञान से हर चीज़ को समेटे हुए हैं; इसलिए उन्हें क्षमा कीजिए जो पलट आते हैं और आपकी राह का अनुसरण करते हैं, और उन्हें भट्ठी के दंड से बचा लीजिए;
رَبَّنَا وَسِعۡتَ كُلَّ شَيۡءٖ رَّحۡمَةٗ وَعِلۡمٗا فَٱغۡفِرۡ لِلَّذِينَ تَابُواْ وَٱتَّبَعُواْ سَبِيلَكَ وَقِهِمۡ عَذَابَ ٱلۡجَحِيمِ
हमारे अभिभावक, उन्हें स्थायित्व के उद्यानों में प्रवेश दीजिए जिनका आपने उनसे वादा किया है, और उनके साथ उन्हें भी जो उनके पिताओं, उनके जोड़ीदारों और उनकी संततियों में से भले रहे;
رَبَّنَا وَأَدۡخِلۡهُمۡ جَنَّٰتِ عَدۡنٍ ٱلَّتِي وَعَدتَّهُمۡ وَمَن صَلَحَ مِنۡ ءَابَآئِهِمۡ وَأَزۡوَٰجِهِمۡ وَذُرِّيَّٰتِهِمۡۚ
क्योंकि आप ही सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान हैं।
إِنَّكَ أَنتَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ
और उन्हें बुरे कर्मों से बचाइए;
وَقِهِمُ ٱلسَّيِّـَٔاتِۚ
और जिसे आप उस दिन बुरे कर्मों से बचाएँ, उस पर आपने दया की है,
وَمَن تَقِ ٱلسَّيِّـَٔاتِ يَوۡمَئِذٖ فَقَدۡ رَحِمۡتَهُۥۚ
और यही विशाल विजय है।”
وَذَٰلِكَ هُوَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ
नकारने वालों को पुकारा जाएगा: “ईश्वर की घिन स्वयं के प्रति तुम्हारी अपनी घिन से अवश्य बड़ी है, जब तुम्हें विश्वास की ओर बुलाया जाता था और तुम नकारते थे।”
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ يُنَادَوۡنَ لَمَقۡتُ ٱللَّهِ أَكۡبَرُ مِن مَّقۡتِكُمۡ أَنفُسَكُمۡ إِذۡ تُدۡعَوۡنَ إِلَى ٱلۡإِيمَٰنِ فَتَكۡفُرُونَ
वे कहेंगे: “हमारे अभिभावक, आपने हमें दो बार मृत्यु दी और आपने हमें दो बार जीवन दिया; हम अपने दोष मान लेते हैं — तो क्या निकलने की कोई राह है?”
قَالُواْ رَبَّنَآ أَمَتَّنَا ٱثۡنَتَيۡنِ وَأَحۡيَيۡتَنَا ٱثۡنَتَيۡنِ فَٱعۡتَرَفۡنَا بِذُنُوبِنَا فَهَلۡ إِلَىٰ خُرُوجٖ مِّن سَبِيلٖ
यह इसलिए कि जब अकेले ईश्वर को पुकारा जाता था तो तुम नकारते थे, और यदि उसके साथ किसी को साझी ठहराया जाता तो तुम विश्वास करते थे;
ذَٰلِكُم بِأَنَّهُۥٓ إِذَا دُعِيَ ٱللَّهُ وَحۡدَهُۥ كَفَرۡتُمۡ وَإِن يُشۡرَكۡ بِهِۦ تُؤۡمِنُواْۚ
इसलिए निर्णय ईश्वर का है, जो परम-उच्च, महान है।
فَٱلۡحُكۡمُ لِلَّهِ ٱلۡعَلِيِّ ٱلۡكَبِيرِ
वही है जो तुम्हें अपने संकेत दिखाता है और तुम्हारे लिए आकाश से जीविका उतारता है;
هُوَ ٱلَّذِي يُرِيكُمۡ ءَايَٰتِهِۦ وَيُنَزِّلُ لَكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ رِزۡقٗاۚ
परंतु केवल वही स्मरण करता है जो उसका आसरा लेता है।
وَمَا يَتَذَكَّرُ إِلَّا مَن يُنِيبُ
तो ईश्वर को पुकारो, विधान को अनन्य रूप से उसी को समर्पित करते हुए, भले ही नकारने वाले इससे घृणा करें।
فَٱدۡعُواْ ٱللَّهَ مُخۡلِصِينَ لَهُ ٱلدِّينَ وَلَوۡ كَرِهَ ٱلۡكَٰفِرُونَ
वह श्रेणियों में ऊँचा करने वाला है, भवन का धारक;
رَفِيعُ ٱلدَّرَجَٰتِ ذُو ٱلۡعَرۡشِ
वह अपने आज्ञाकारियों में से जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उस पर अपने आदेश का प्रवाह डालता है, ताकि मिलन के दिन की चेतावनी दे, उस दिन की जब वे खुले में होंगे,
يُلۡقِي ٱلرُّوحَ مِنۡ أَمۡرِهِۦ عَلَىٰ مَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦ لِيُنذِرَ يَوۡمَ ٱلتَّلَاقِ يَوۡمَ هُم بَٰرِزُونَۖ
उनमें से कुछ भी ईश्वर से छिपा नहीं है।
لَا يَخۡفَىٰ عَلَى ٱللَّهِ مِنۡهُمۡ شَيۡءٞۚ
आज राजत्व किसका है?
لِّمَنِ ٱلۡمُلۡكُ ٱلۡيَوۡمَۖ
ईश्वर का, जो एकमेव, वर्चस्वशाली है।
لِلَّهِ ٱلۡوَٰحِدِ ٱلۡقَهَّارِ
आज हर स्व को उसकी कमाई के अनुसार प्रतिफल दिया जाएगा;
ٱلۡيَوۡمَ تُجۡزَىٰ كُلُّ نَفۡسِۭ بِمَا كَسَبَتۡۚ
आज कोई अन्याय नहीं;
لَا ظُلۡمَ ٱلۡيَوۡمَۚ
क्योंकि ईश्वर हिसाब में शीघ्र है।
إِنَّ ٱللَّهَ سَرِيعُ ٱلۡحِسَابِ
और उन्हें आसन्न के दिन की चेतावनी दो, जब मर्म गलों तक होंगे, घुटन में दबे हुए,
وَأَنذِرۡهُمۡ يَوۡمَ ٱلۡأٓزِفَةِ إِذِ ٱلۡقُلُوبُ لَدَى ٱلۡحَنَاجِرِ كَٰظِمِينَۚ
अन्यायियों के लिए न कोई गर्मजोशी वाला मित्र होगा, न कोई मध्यस्थ जिसकी बात मानी जाए।
مَا لِلظَّٰلِمِينَ مِنۡ حَمِيمٖ وَلَا شَفِيعٖ يُطَاعُ
वह आँखों की धोखेबाज़ी को जानता है और उसे भी जो सीने छिपाते हैं।
يَعۡلَمُ خَآئِنَةَ ٱلۡأَعۡيُنِ وَمَا تُخۡفِي ٱلصُّدُورُ
ईश्वर सत्य के साथ फ़ैसला करता है,
وَٱللَّهُ يَقۡضِي بِٱلۡحَقِّۖ
जबकि वे जिन्हें उसके अतिरिक्त पुकारते हैं किसी बात का फ़ैसला नहीं करते;
وَٱلَّذِينَ يَدۡعُونَ مِن دُونِهِۦ لَا يَقۡضُونَ بِشَيۡءٍۗ
क्योंकि ईश्वर सुनने वाला, दृष्टिवान है।
إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡبَصِيرُ
क्या उन्होंने धरती में घूमकर नज़र नहीं डाली कि उनसे पहले वालों का परिणाम कैसा रहा?
۞ أَوَلَمۡ يَسِيرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَيَنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلَّذِينَ كَانُواْ مِن قَبۡلِهِمۡۚ
वे उनसे बल में और धरती पर अवशेषों में बढ़कर थे, और ईश्वर ने उन्हें उनके दोषों के कारण पकड़ लिया;
كَانُواْ هُمۡ أَشَدَّ مِنۡهُمۡ قُوَّةٗ وَءَاثَارٗا فِي ٱلۡأَرۡضِ فَأَخَذَهُمُ ٱللَّهُ بِذُنُوبِهِمۡ
और ईश्वर के विरुद्ध उनके लिए कोई बचाने वाला न था।
وَمَا كَانَ لَهُم مِّنَ ٱللَّهِ مِن وَاقٖ
यह इसलिए कि उनके संदेशवाहक उनके पास स्पष्ट प्रमाण लाते थे, परंतु वे नकारते थे; तब ईश्वर ने उन्हें पकड़ लिया,
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمۡ كَانَت تَّأۡتِيهِمۡ رُسُلُهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ فَكَفَرُواْ فَأَخَذَهُمُ ٱللَّهُۚ
क्योंकि वह बलवान है, सज़ा देने में कठोर।
إِنَّهُۥ قَوِيّٞ شَدِيدُ ٱلۡعِقَابِ
हमने निश्चय ही मूसा को अपने संकेतों और एक स्पष्ट अधिकार के साथ भेजा, फ़िरऔन, हामान और क़ारून की ओर; उन्होंने कहा: “एक भ्रमकार, एक बड़ा झूठा।”
وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا مُوسَىٰ بِـَٔايَٰتِنَا وَسُلۡطَٰنٖ مُّبِينٍ إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ وَهَٰمَٰنَ وَقَٰرُونَ فَقَالُواْ سَٰحِرٞ كَذَّابٞ
फिर जब वह उनके पास हमारी ओर से सत्य लेकर आया, तो उन्होंने कहा: “उनके बेटों को मार डालो जिन्होंने उसके साथ विश्वास किया, और उनकी स्त्रियों की लज्जा पर आघात करो”;
فَلَمَّا جَآءَهُم بِٱلۡحَقِّ مِنۡ عِندِنَا قَالُواْ ٱقۡتُلُوٓاْ أَبۡنَآءَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مَعَهُۥ وَٱسۡتَحۡيُواْ نِسَآءَهُمۡۚ
परंतु नकारने वालों की चाल भटकाव में ही है।
وَمَا كَيۡدُ ٱلۡكَٰفِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَٰلٖ
और फ़िरऔन ने कहा: “मुझे छोड़ दो, मैं मूसा को मार डालूँ, और वह अपने अभिभावक को पुकार ले, क्योंकि मुझे डर है कि वह तुम्हारा विधान बदल देगा और धरती में बिगाड़ को खुले में ला देगा।”
وَقَالَ فِرۡعَوۡنُ ذَرُونِيٓ أَقۡتُلۡ مُوسَىٰ وَلۡيَدۡعُ رَبَّهُۥٓۖ إِنِّيٓ أَخَافُ أَن يُبَدِّلَ دِينَكُمۡ أَوۡ أَن يَظۡهَرَ فِي ٱلۡأَرۡضِ ٱلۡفَسَادُ
और मूसा ने कहा: “मैं निश्चय ही स्वयं को अपने अभिभावक और तुम्हारे अभिभावक की छत्रछाया में रखता हूँ, हर उस घमंडी से जो हिसाब के दिन पर विश्वास नहीं करता।”
وَقَالَ مُوسَىٰٓ إِنِّي عُذۡتُ بِرَبِّي وَرَبِّكُم مِّن كُلِّ مُتَكَبِّرٖ لَّا يُؤۡمِنُ بِيَوۡمِ ٱلۡحِسَابِ
और फ़िरऔन के कुल के एक विश्वास करने वाले पुरुष ने, जो अपना विश्वास दबाए रखता था, कहा: “क्या तुम एक पुरुष को इसलिए मार डालोगे कि वह कहता है: ‘मेरा अभिभावक ईश्वर है’, जबकि वह तुम्हारे अभिभावक की ओर से तुम्हारे पास स्पष्ट प्रमाण लाया है? यदि वह झूठा है, तो उसका झूठ उसी पर पड़ता है; और यदि वह सच्चा है, तो जो वह तुमसे वादा करता है उसका एक भाग तुम पर आ पड़ेगा,
وَقَالَ رَجُلٞ مُّؤۡمِنٞ مِّنۡ ءَالِ فِرۡعَوۡنَ يَكۡتُمُ إِيمَٰنَهُۥٓ أَتَقۡتُلُونَ رَجُلًا أَن يَقُولَ رَبِّيَ ٱللَّهُ وَقَدۡ جَآءَكُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ مِن رَّبِّكُمۡۖ وَإِن يَكُ كَٰذِبٗا فَعَلَيۡهِ كَذِبُهُۥۖ وَإِن يَكُ صَادِقٗا يُصِبۡكُم بَعۡضُ ٱلَّذِي يَعِدُكُمۡۖ
क्योंकि ईश्वर उसे मार्ग नहीं दिखाता जो अतिवादी, बड़ा झूठा है।
إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهۡدِي مَنۡ هُوَ مُسۡرِفٞ كَذَّابٞ
हे मेरी क़ौम, आज राजत्व तुम्हारा है, तुम धरती पर प्रबल हो; परंतु यदि ईश्वर की कठोरता हम पर आ जाए तो उससे हमारी सहायता कौन करेगा?”
يَٰقَوۡمِ لَكُمُ ٱلۡمُلۡكُ ٱلۡيَوۡمَ ظَٰهِرِينَ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَمَن يَنصُرُنَا مِنۢ بَأۡسِ ٱللَّهِ إِن جَآءَنَاۚ
फ़िरऔन ने कहा: “मैं तुम्हें केवल वही दिखाता हूँ जो मैं देखता हूँ, और मैं तुम्हें केवल सुबुद्धि की राह की ओर मार्ग दिखाता हूँ।”
قَالَ فِرۡعَوۡنُ مَآ أُرِيكُمۡ إِلَّا مَآ أَرَىٰ وَمَآ أَهۡدِيكُمۡ إِلَّا سَبِيلَ ٱلرَّشَادِ
और जिसने विश्वास किया था उसने कहा: “हे मेरी क़ौम, मैं निश्चय ही तुम्हारे लिए दलों के दिन जैसे एक दिन से डरता हूँ, नूह की क़ौम, आद, समूद और उनके बाद आने वालों के चलन जैसे;
وَقَالَ ٱلَّذِيٓ ءَامَنَ يَٰقَوۡمِ إِنِّيٓ أَخَافُ عَلَيۡكُم مِّثۡلَ يَوۡمِ ٱلۡأَحۡزَابِ مِثۡلَ دَأۡبِ قَوۡمِ نُوحٖ وَعَادٖ وَثَمُودَ وَٱلَّذِينَ مِنۢ بَعۡدِهِمۡۚ
और ईश्वर आज्ञाकारियों के लिए कोई अन्याय नहीं चाहता।”
وَمَا ٱللَّهُ يُرِيدُ ظُلۡمٗا لِّلۡعِبَادِ
“हे मेरी क़ौम, मैं निश्चय ही तुम्हारे लिए उस दिन से डरता हूँ जब एक-दूसरे को हाँक लगाई जाएगी, उस दिन जब तुम पीठ फेरकर भागोगे, जबकि ईश्वर से तुम्हारे लिए कोई बचाव न होगा;
وَيَٰقَوۡمِ إِنِّيٓ أَخَافُ عَلَيۡكُمۡ يَوۡمَ ٱلتَّنَادِ يَوۡمَ تُوَلُّونَ مُدۡبِرِينَ مَا لَكُم مِّنَ ٱللَّهِ مِنۡ عَاصِمٖۗ
और जिसे ईश्वर भटका दे, उसके लिए कोई मार्ग दिखाने वाला नहीं रहता।
وَمَن يُضۡلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنۡ هَادٖ
यूसुफ़ निश्चय ही पहले तुम्हारे पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ आया, और जो वह तुम्हारे पास लाया उसके विषय में तुम दुविधा में ही रहे, यहाँ तक कि जब वह नष्ट हो गया, तो तुमने कहा: ‘ईश्वर उसके बाद कोई संदेशवाहक नहीं उठाएगा’;
وَلَقَدۡ جَآءَكُمۡ يُوسُفُ مِن قَبۡلُ بِٱلۡبَيِّنَٰتِ فَمَا زِلۡتُمۡ فِي شَكّٖ مِّمَّا جَآءَكُم بِهِۦۖ حَتَّىٰٓ إِذَا هَلَكَ قُلۡتُمۡ لَن يَبۡعَثَ ٱللَّهُ مِنۢ بَعۡدِهِۦ رَسُولٗاۚ
इसी प्रकार ईश्वर उसे भटकाता है जो अतिवादी, संदेह से भरा है —
كَذَٰلِكَ يُضِلُّ ٱللَّهُ مَنۡ هُوَ مُسۡرِفٞ مُّرۡتَابٌ
जो ईश्वर के संकेतों पर बहस करते हैं, जबकि उनके पास कोई अधिकार नहीं आया;
ٱلَّذِينَ يُجَٰدِلُونَ فِيٓ ءَايَٰتِ ٱللَّهِ بِغَيۡرِ سُلۡطَٰنٍ أَتَىٰهُمۡۖ
यह ईश्वर के पास और विश्वास करने वालों के पास एक बड़ी घिनौनी बात है।
كَبُرَ مَقۡتًا عِندَ ٱللَّهِ وَعِندَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْۚ
इसी प्रकार ईश्वर हर घमंडी अत्याचारी के मर्म पर मुहर लगा देता है।”
كَذَٰلِكَ يَطۡبَعُ ٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ قَلۡبِ مُتَكَبِّرٖ جَبَّارٖ
और फ़िरऔन ने कहा: “हे हामान, मेरे लिए एक अटारी बनाओ, शायद मैं साधनों तक पहुँच जाऊँ, आकाशों के साधनों तक, और मूसा के देवता की झलक पा लूँ; मैं अनुमान लगाता हूँ कि वह अवश्य झूठा है।”
وَقَالَ فِرۡعَوۡنُ يَٰهَٰمَٰنُ ٱبۡنِ لِي صَرۡحٗا لَّعَلِّيٓ أَبۡلُغُ ٱلۡأَسۡبَٰبَ أَسۡبَٰبَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ فَأَطَّلِعُ إِلَىٰٓ إِلَٰهِ مُوسَىٰ وَإِنِّي لَأَظُنُّهُۥ كَٰذِبٗاۚ
इसी प्रकार फ़िरऔन की आँखों में उसके कर्म की बुराई सुंदर बना दी गई, और उसके लिए राह रोक दी गई;
وَكَذَٰلِكَ زُيِّنَ لِفِرۡعَوۡنَ سُوٓءُ عَمَلِهِۦ وَصُدَّ عَنِ ٱلسَّبِيلِۚ
फ़िरऔन की चाल विनाश में ही थी।
وَمَا كَيۡدُ فِرۡعَوۡنَ إِلَّا فِي تَبَابٖ
और जिसने विश्वास किया था उसने कहा: “हे मेरी क़ौम, मेरा अनुसरण करो, मैं तुम्हें सुबुद्धि की राह की ओर मार्ग दिखाऊँगा;
وَقَالَ ٱلَّذِيٓ ءَامَنَ يَٰقَوۡمِ ٱتَّبِعُونِ أَهۡدِكُمۡ سَبِيلَ ٱلرَّشَادِ
हे मेरी क़ौम, यह इहलोक का जीवन केवल उपभोग है,
يَٰقَوۡمِ إِنَّمَا هَٰذِهِ ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَا مَتَٰعٞ
जबकि अंतिम जीवन निश्चय ही स्थिरता का ठिकाना है।
وَإِنَّ ٱلۡأٓخِرَةَ هِيَ دَارُ ٱلۡقَرَارِ
जो कोई बुरा कर्म करता है उसे केवल उसके समकक्ष का प्रतिफल दिया जाता है,
مَنۡ عَمِلَ سَيِّئَةٗ فَلَا يُجۡزَىٰٓ إِلَّا مِثۡلَهَاۖ
और जो कोई भला कर्म करता है, पुरुष हो या स्त्री, विश्वास करने वाला होते हुए, वे उद्यान में प्रवेश कराए जाएँगे, जहाँ उन्हें बिना हिसाब जीविका दी जाएगी।
وَمَنۡ عَمِلَ صَٰلِحٗا مِّن ذَكَرٍ أَوۡ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤۡمِنٞ فَأُوْلَٰٓئِكَ يُدۡخَلُونَ ٱلۡجَنَّةَ يُرۡزَقُونَ فِيهَا بِغَيۡرِ حِسَابٖ
हे मेरी क़ौम, मुझे क्या हुआ कि मैं तुम्हें उद्धार की ओर बुलाता हूँ जबकि तुम मुझे आग की ओर बुलाते हो?
۞ وَيَٰقَوۡمِ مَا لِيٓ أَدۡعُوكُمۡ إِلَى ٱلنَّجَوٰةِ وَتَدۡعُونَنِيٓ إِلَى ٱلنَّارِ
तुम मुझे बुलाते हो कि मैं ईश्वर को नकारूँ और उसके साथ उसे साझी ठहराऊँ जिसका मुझे कोई ज्ञान नहीं, जबकि मैं तुम्हें सर्वशक्तिमान, महान क्षमाकर्ता की ओर बुलाता हूँ;
تَدۡعُونَنِي لِأَكۡفُرَ بِٱللَّهِ وَأُشۡرِكَ بِهِۦ مَا لَيۡسَ لِي بِهِۦ عِلۡمٞ وَأَنَا۠ أَدۡعُوكُمۡ إِلَى ٱلۡعَزِيزِ ٱلۡغَفَّٰرِ
अनिवार्य रूप से, जिसकी ओर तुम मुझे बुलाते हो उसके लिए न इहलोक में कोई बुलावा है न अंतिम जीवन में; ईश्वर की ओर ही हम वापस लाए जाएँगे, और अतिवादी आग वाले हैं।
لَا جَرَمَ أَنَّمَا تَدۡعُونَنِيٓ إِلَيۡهِ لَيۡسَ لَهُۥ دَعۡوَةٞ فِي ٱلدُّنۡيَا وَلَا فِي ٱلۡأٓخِرَةِ وَأَنَّ مَرَدَّنَآ إِلَى ٱللَّهِ وَأَنَّ ٱلۡمُسۡرِفِينَ هُمۡ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِ
तुम शीघ्र ही स्मरण करोगे जो मैं तुमसे कहता हूँ;
فَسَتَذۡكُرُونَ مَآ أَقُولُ لَكُمۡۚ
और मैं अपना मामला ईश्वर को सौंपता हूँ;
وَأُفَوِّضُ أَمۡرِيٓ إِلَى ٱللَّهِۚ
क्योंकि ईश्वर आज्ञाकारियों पर दृष्टि रखता है।”
إِنَّ ٱللَّهَ بَصِيرُۢ بِٱلۡعِبَادِ
तब ईश्वर ने उसे उन अनिष्टों से बचा लिया जिनका उन्होंने षड्यंत्र किया था,
فَوَقَىٰهُ ٱللَّهُ سَيِّـَٔاتِ مَا مَكَرُواْۖ
और फ़िरऔन के कुल को बुरे दंड ने लपेट लिया:
وَحَاقَ بِـَٔالِ فِرۡعَوۡنَ سُوٓءُ ٱلۡعَذَابِ
आग, जिसके सामने वे सुबह और शाम पेश किए जाते हैं,
ٱلنَّارُ يُعۡرَضُونَ عَلَيۡهَا غُدُوّٗا وَعَشِيّٗاۚ
और जिस दिन वह घड़ी आ खड़ी होगी: “फ़िरऔन के कुल, सबसे कठोर दंड में प्रवेश करो।”
وَيَوۡمَ تَقُومُ ٱلسَّاعَةُ ٱدۡخُلُوٓاْ ءَالَ فِرۡعَوۡنَ أَشَدَّ ٱلۡعَذَابِ
और जब वे आग में विवाद करेंगे, तो निर्बल उनसे कहेंगे जो घमंड से फूलते थे: “हम निश्चय ही तुम्हारे अनुयायी थे; तो क्या तुम आग के एक अंश के विरुद्ध हमारे काम आ सकते हो?”
وَإِذۡ يَتَحَآجُّونَ فِي ٱلنَّارِ فَيَقُولُ ٱلضُّعَفَٰٓؤُاْ لِلَّذِينَ ٱسۡتَكۡبَرُوٓاْ إِنَّا كُنَّا لَكُمۡ تَبَعٗا فَهَلۡ أَنتُم مُّغۡنُونَ عَنَّا نَصِيبٗا مِّنَ ٱلنَّارِ
जो घमंड से फूलते थे वे कहेंगे: “हम निश्चय ही सब इसमें हैं; ईश्वर आज्ञाकारियों के बीच निर्णय कर चुका है।”
قَالَ ٱلَّذِينَ ٱسۡتَكۡبَرُوٓاْ إِنَّا كُلّٞ فِيهَآ إِنَّ ٱللَّهَ قَدۡ حَكَمَ بَيۡنَ ٱلۡعِبَادِ
और जो आग में हैं वे जहन्नम के प्रभारियों से कहेंगे: “अपने अभिभावक को पुकारो, कि वह हमारे लिए, केवल एक दिन के लिए ही सही, दंड हल्का कर दे।”
وَقَالَ ٱلَّذِينَ فِي ٱلنَّارِ لِخَزَنَةِ جَهَنَّمَ ٱدۡعُواْ رَبَّكُمۡ يُخَفِّفۡ عَنَّا يَوۡمٗا مِّنَ ٱلۡعَذَابِ
वे कहेंगे: “क्या तुम्हारे संदेशवाहक तुम्हारे पास स्पष्ट प्रमाण नहीं लाते थे?” वे कहेंगे: “क्यों नहीं।” वे कहेंगे: “तो पुकारो।”
قَالُوٓاْ أَوَلَمۡ تَكُ تَأۡتِيكُمۡ رُسُلُكُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِۖ قَالُواْ بَلَىٰۚ قَالُواْ فَٱدۡعُواْۗ
परंतु नकारने वालों की पुकार भटकाव में ही है।
وَمَا دُعَٰٓؤُاْ ٱلۡكَٰفِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَٰلٍ
हम अवश्य अपने संदेशवाहकों की और विश्वास करने वालों की सहायता करते हैं, इहलोक के जीवन में और उस दिन जब साक्षी खड़े होंगे, उस दिन जब अन्यायियों का बहाना उन्हें लाभ न देगा; उनके लिए धिक्कार होगा, और उनके लिए बुरा ठिकाना होगा।
إِنَّا لَنَنصُرُ رُسُلَنَا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَيَوۡمَ يَقُومُ ٱلۡأَشۡهَٰدُ يَوۡمَ لَا يَنفَعُ ٱلظَّٰلِمِينَ مَعۡذِرَتُهُمۡۖ وَلَهُمُ ٱللَّعۡنَةُ وَلَهُمۡ سُوٓءُ ٱلدَّارِ
हमने निश्चय ही मूसा को मार्गदर्शन दिया, और इसराईल की संतान को ग्रंथ का वारिस बनाया, मार्गदर्शन और स्मरण मेधा रखने वालों के लिए।
وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا مُوسَى ٱلۡهُدَىٰ وَأَوۡرَثۡنَا بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ ٱلۡكِتَٰبَ هُدٗى وَذِكۡرَىٰ لِأُوْلِي ٱلۡأَلۡبَٰبِ
तो धैर्य रखो, क्योंकि ईश्वर का वादा सत्य है;
فَٱصۡبِرۡ إِنَّ وَعۡدَ ٱللَّهِ حَقّٞ
और अपने दोष के लिए क्षमा माँगो, और प्रशंसा के साथ अपने अभिभावक की महिमा गाओ, शाम और भोर को।
وَٱسۡتَغۡفِرۡ لِذَنۢبِكَ وَسَبِّحۡ بِحَمۡدِ رَبِّكَ بِٱلۡعَشِيِّ وَٱلۡإِبۡكَٰرِ
जो ईश्वर के संकेतों पर बहस करते हैं जबकि उनके पास कोई अधिकार नहीं आया, उनके सीनों में केवल एक घमंड है जिस तक वे कभी नहीं पहुँचेंगे;
إِنَّ ٱلَّذِينَ يُجَٰدِلُونَ فِيٓ ءَايَٰتِ ٱللَّهِ بِغَيۡرِ سُلۡطَٰنٍ أَتَىٰهُمۡ إِن فِي صُدُورِهِمۡ إِلَّا كِبۡرٞ مَّا هُم بِبَٰلِغِيهِۚ
इसलिए ईश्वर की छत्रछाया चाहो,
فَٱسۡتَعِذۡ بِٱللَّهِۖ
क्योंकि वही सुनने वाला, दृष्टिवान है।
إِنَّهُۥ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡبَصِيرُ
आकाशों और धरती की रचना अवश्य लोगों की रचना से बड़ी है,
لَخَلۡقُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ أَكۡبَرُ مِنۡ خَلۡقِ ٱلنَّاسِ
परंतु अधिकतर लोग नहीं जानते।
وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَعۡلَمُونَ
अंधा और दृष्टिवान बराबर नहीं हैं, और न ही वे जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए और वह जो बुरा करता है;
وَمَا يَسۡتَوِي ٱلۡأَعۡمَىٰ وَٱلۡبَصِيرُ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ وَلَا ٱلۡمُسِيٓءُۚ
वे बहुत थोड़ा स्मरण करते हैं।
قَلِيلٗا مَّا تَتَذَكَّرُونَ
वह घड़ी अवश्य आने वाली है, उसके विषय में कोई संदेह नहीं,
إِنَّ ٱلسَّاعَةَ لَأٓتِيَةٞ لَّا رَيۡبَ فِيهَا
परंतु अधिकतर लोग विश्वास नहीं करते।
وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يُؤۡمِنُونَ
और तुम्हारे अभिभावक ने कहा: “मुझे पुकारो, मैं तुम्हें उत्तर दूँगा;
وَقَالَ رَبُّكُمُ ٱدۡعُونِيٓ أَسۡتَجِبۡ لَكُمۡۚ
क्योंकि जो मेरी आज्ञाकारिता के सामने घमंड से फूलते हैं वे शीघ्र जहन्नम में प्रवेश करेंगे, नतमस्तक होकर।”
إِنَّ ٱلَّذِينَ يَسۡتَكۡبِرُونَ عَنۡ عِبَادَتِي سَيُدۡخَلُونَ جَهَنَّمَ دَاخِرِينَ
ईश्वर वह है जिसने तुम्हारे लिए रात बनाई ताकि तुम उसमें विश्राम करो, और दिन को, ताकि तुम उसमें साफ़ देखो;
ٱللَّهُ ٱلَّذِي جَعَلَ لَكُمُ ٱلَّيۡلَ لِتَسۡكُنُواْ فِيهِ وَٱلنَّهَارَ مُبۡصِرًاۚ
ईश्वर लोगों पर अवश्य अनुग्रह रखता है,
إِنَّ ٱللَّهَ لَذُو فَضۡلٍ عَلَى ٱلنَّاسِ
परंतु अधिकतर लोग कृतज्ञ नहीं हैं।
وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَشۡكُرُونَ
यही ईश्वर तुम्हारा अभिभावक है,
ذَٰلِكُمُ ٱللَّهُ رَبُّكُمۡ
हर चीज़ का रचयिता;
خَٰلِقُ كُلِّ شَيۡءٖ
उसके सिवा कोई देवता नहीं;
لَّآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ
तो तुम कैसे उलटे फेरे जा रहे हो?
فَأَنَّىٰ تُؤۡفَكُونَ
इसी प्रकार वे उलटे फेरे जाते हैं जो ईश्वर के संकेतों को हठपूर्वक अस्वीकार करते थे।
كَذَٰلِكَ يُؤۡفَكُ ٱلَّذِينَ كَانُواْ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ يَجۡحَدُونَ
ईश्वर वह है जिसने तुम्हारे लिए धरती को स्थिर स्थान और आकाश को एक निर्माण बनाया, जिसने तुम्हें रूप दिया और तुम्हारे रूप सुंदर बनाए, और तुम्हें अच्छी चीज़ों की जीविका दी;
ٱللَّهُ ٱلَّذِي جَعَلَ لَكُمُ ٱلۡأَرۡضَ قَرَارٗا وَٱلسَّمَآءَ بِنَآءٗ وَصَوَّرَكُمۡ فَأَحۡسَنَ صُوَرَكُمۡ وَرَزَقَكُم مِّنَ ٱلطَّيِّبَٰتِۚ
यही ईश्वर तुम्हारा अभिभावक है;
ذَٰلِكُمُ ٱللَّهُ رَبُّكُمۡۖ
आशीषमय है ईश्वर, जो सभी प्राणियों का अभिभावक है।
فَتَبَارَكَ ٱللَّهُ رَبُّ ٱلۡعَٰلَمِينَ
वह जीवित है;
هُوَ ٱلۡحَيُّ
उसके सिवा कोई देवता नहीं;
لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ
तो उसे पुकारो, विधान को अनन्य रूप से उसी को समर्पित करते हुए;
فَٱدۡعُوهُ مُخۡلِصِينَ لَهُ ٱلدِّينَۗ
प्रशंसा ईश्वर के लिए है, जो सभी प्राणियों का अभिभावक है।
ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ
कहो: “मुझे निश्चय ही मना किया गया है कि मैं उनकी आज्ञा का पालन करूँ जिन्हें तुम ईश्वर के अतिरिक्त पुकारते हो, जब मेरे पास मेरे अभिभावक की ओर से स्पष्ट प्रमाण आ चुके हैं; और मुझे आदेश दिया गया है कि मैं सभी प्राणियों के अभिभावक के प्रति खरा रहूँ।”
۞ قُلۡ إِنِّي نُهِيتُ أَنۡ أَعۡبُدَ ٱلَّذِينَ تَدۡعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ لَمَّا جَآءَنِيَ ٱلۡبَيِّنَٰتُ مِن رَّبِّي وَأُمِرۡتُ أَنۡ أُسۡلِمَ لِرَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ
वही है जिसने तुम्हें मिट्टी से रचा, फिर एक बूँद से, फिर एक चिपकाव से, फिर वह तुम्हें शिशु के रूप में निकालता है, फिर तुम्हें अपनी पूर्ण परिपक्वता तक पहुँचने देता है, फिर वृद्ध हो जाने देता है —
هُوَ ٱلَّذِي خَلَقَكُم مِّن تُرَابٖ ثُمَّ مِن نُّطۡفَةٖ ثُمَّ مِنۡ عَلَقَةٖ ثُمَّ يُخۡرِجُكُمۡ طِفۡلٗا ثُمَّ لِتَبۡلُغُوٓاْ أَشُدَّكُمۡ ثُمَّ لِتَكُونُواْ شِيُوخٗاۚ
और तुममें से कुछ पहले ही निष्ठापूर्वक सँभाल लिए जाते हैं — ताकि तुम एक नामित अवधि तक पहुँचो, और शायद तुम बुद्धि से काम लो।
وَمِنكُم مَّن يُتَوَفَّىٰ مِن قَبۡلُۖ وَلِتَبۡلُغُوٓاْ أَجَلٗا مُّسَمّٗى وَلَعَلَّكُمۡ تَعۡقِلُونَ
वही जीवन देता है और मृत्यु देता है;
هُوَ ٱلَّذِي يُحۡيِۦ وَيُمِيتُۖ
और जब वह किसी चीज़ को तय करता है, तो उससे केवल इतना कहता है: “हो जा”,
فَإِذَا قَضَىٰٓ أَمۡرٗا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُۥ كُن
और वह हो जाती है।
فَيَكُونُ
क्या तुमने उन्हें नहीं देखा जो ईश्वर के संकेतों पर बहस करते हैं, वे कैसे हटाए जाते हैं?
أَلَمۡ تَرَ إِلَى ٱلَّذِينَ يُجَٰدِلُونَ فِيٓ ءَايَٰتِ ٱللَّهِ أَنَّىٰ يُصۡرَفُونَ
जिन्होंने ग्रंथ को और उसे झुठलाया जिसके साथ हमने अपने संदेशवाहक भेजे, वे शीघ्र जान लेंगे, जब उनकी गर्दनों में तौक़ होंगे, और ज़ंजीरें भी,
ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِٱلۡكِتَٰبِ وَبِمَآ أَرۡسَلۡنَا بِهِۦ رُسُلَنَاۖ فَسَوۡفَ يَعۡلَمُونَ إِذِ ٱلۡأَغۡلَٰلُ فِيٓ أَعۡنَٰقِهِمۡ وَٱلسَّلَٰسِلُ
वे खौलते पानी में घसीटे जाएँगे, फिर आग में सुलगाए जाएँगे।
يُسۡحَبُونَ فِي ٱلۡحَمِيمِ ثُمَّ فِي ٱلنَّارِ يُسۡجَرُونَ
फिर उनसे कहा जाएगा: “कहाँ हैं वे जिन्हें तुम ईश्वर के अतिरिक्त साझी ठहराते थे?”
ثُمَّ قِيلَ لَهُمۡ أَيۡنَ مَا كُنتُمۡ تُشۡرِكُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِۖ
वे कहेंगे: “वे हमसे दूर भटक गए; सच तो यह है कि हम पहले किसी चीज़ को नहीं पुकारते थे।”
قَالُواْ ضَلُّواْ عَنَّا بَل لَّمۡ نَكُن نَّدۡعُواْ مِن قَبۡلُ شَيۡـٔٗاۚ
इसी प्रकार ईश्वर नकारने वालों को भटकाता है।
كَذَٰلِكَ يُضِلُّ ٱللَّهُ ٱلۡكَٰفِرِينَ
यह इसलिए है कि तुम धरती पर बिना हक़ के हर्षित होते थे, और इतराते थे;
ذَٰلِكُم بِمَا كُنتُمۡ تَفۡرَحُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِ بِغَيۡرِ ٱلۡحَقِّ وَبِمَا كُنتُمۡ تَمۡرَحُونَ
जहन्नम के द्वारों से प्रवेश करो, वहाँ सदा रहने के लिए:
ٱدۡخُلُوٓاْ أَبۡوَٰبَ جَهَنَّمَ خَٰلِدِينَ فِيهَاۖ
घमंडियों का निवास कितना निकृष्ट है!
فَبِئۡسَ مَثۡوَى ٱلۡمُتَكَبِّرِينَ
तो धैर्य रखो, क्योंकि ईश्वर का वादा सत्य है;
فَٱصۡبِرۡ إِنَّ وَعۡدَ ٱللَّهِ حَقّٞۚ
चाहे हम तुम्हें उसका एक भाग दिखा दें जिसका हम उनसे वादा करते हैं, चाहे हम तुम्हें निष्ठापूर्वक सँभाल लें, हमारी ही ओर वे लौटाए जाएँगे।
فَإِمَّا نُرِيَنَّكَ بَعۡضَ ٱلَّذِي نَعِدُهُمۡ أَوۡ نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِلَيۡنَا يُرۡجَعُونَ
हमने निश्चय ही तुमसे पहले संदेशवाहक भेजे; उनमें से कुछ वे हैं जिनकी कथा हमने तुम्हें बताई, और कुछ वे जिनकी कथा हमने तुम्हें नहीं बताई;
وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا رُسُلٗا مِّن قَبۡلِكَ مِنۡهُم مَّن قَصَصۡنَا عَلَيۡكَ وَمِنۡهُم مَّن لَّمۡ نَقۡصُصۡ عَلَيۡكَۗ
और किसी संदेशवाहक के लिए उचित नहीं कि वह कोई संकेत ले आए, ईश्वर की अनुमति के सिवा;
وَمَا كَانَ لِرَسُولٍ أَن يَأۡتِيَ بِـَٔايَةٍ إِلَّا بِإِذۡنِ ٱللَّهِۚ
और जब ईश्वर का आदेश आता है, तो पूर्ण सत्य के साथ फ़ैसला किया जाता है, और असत्य के कारीगर तब वहाँ घाटा उठाते हैं।
فَإِذَا جَآءَ أَمۡرُ ٱللَّهِ قُضِيَ بِٱلۡحَقِّ وَخَسِرَ هُنَالِكَ ٱلۡمُبۡطِلُونَ
ईश्वर वह है जिसने तुम्हारे लिए पशुधन बनाया, ताकि तुम उनमें से कुछ पर सवारी करो और कुछ को खाओ;
ٱللَّهُ ٱلَّذِي جَعَلَ لَكُمُ ٱلۡأَنۡعَٰمَ لِتَرۡكَبُواْ مِنۡهَا وَمِنۡهَا تَأۡكُلُونَ
और उनमें तुम्हारे लिए उपयोगिताएँ हैं,
وَلَكُمۡ فِيهَا مَنَٰفِعُ
और ताकि तुम उन पर उस आवश्यकता तक पहुँचो जो तुम्हारे सीनों में है,
وَلِتَبۡلُغُواْ عَلَيۡهَا حَاجَةٗ فِي صُدُورِكُمۡ
और उन पर तथा जलयानों पर तुम ढोए जाते हो।
وَعَلَيۡهَا وَعَلَى ٱلۡفُلۡكِ تُحۡمَلُونَ
और वह तुम्हें अपने संकेत दिखाता है;
وَيُرِيكُمۡ ءَايَٰتِهِۦ
तो ईश्वर के संकेतों में से तुम किसे अमान्य ठहराते हो?
فَأَيَّ ءَايَٰتِ ٱللَّهِ تُنكِرُونَ
क्या उन्होंने धरती में घूमकर नज़र नहीं डाली कि उनसे पहले वालों का परिणाम कैसा रहा?
أَفَلَمۡ يَسِيرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَيَنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡۚ
वे उनसे अधिक संख्या में थे और धरती पर बल में और अवशेषों में बढ़कर थे; परंतु जो वे कमाते थे वह उनके किसी काम न आया।
كَانُوٓاْ أَكۡثَرَ مِنۡهُمۡ وَأَشَدَّ قُوَّةٗ وَءَاثَارٗا فِي ٱلۡأَرۡضِ فَمَآ أَغۡنَىٰ عَنۡهُم مَّا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ
फिर जब उनके संदेशवाहक उनके पास स्पष्ट प्रमाण लाए, तो वे उस ज्ञान पर हर्षित हुए जो उनके पास था;
فَلَمَّا جَآءَتۡهُمۡ رُسُلُهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ فَرِحُواْ بِمَا عِندَهُم مِّنَ ٱلۡعِلۡمِ
और जिसका वे मज़ाक़ उड़ाते थे उसने उन्हें लपेट लिया।
وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُواْ بِهِۦ يَسۡتَهۡزِءُونَ
फिर जब उन्होंने हमारी कठोरता देखी, तो उन्होंने कहा: “हम केवल ईश्वर पर विश्वास करते हैं, और जिसे हम उसका साझी ठहराते थे उसे नकारते हैं।”
فَلَمَّا رَأَوۡاْ بَأۡسَنَا قَالُوٓاْ ءَامَنَّا بِٱللَّهِ وَحۡدَهُۥ وَكَفَرۡنَا بِمَا كُنَّا بِهِۦ مُشۡرِكِينَ
परंतु उनके विश्वास ने उन्हें लाभ नहीं दिया, जब उन्होंने हमारी कठोरता देख ली —
فَلَمۡ يَكُ يَنفَعُهُمۡ إِيمَٰنُهُمۡ لَمَّا رَأَوۡاْ بَأۡسَنَاۖ
यही ईश्वर की रीति है, जो उसके आज्ञाकारियों के बीच पहले ही बीत चुकी है;
سُنَّتَ ٱللَّهِ ٱلَّتِي قَدۡ خَلَتۡ فِي عِبَادِهِۦۖ
और नकारने वाले वहाँ घाटा उठाने वाले रहे।
وَخَسِرَ هُنَالِكَ ٱلۡكَٰفِرُونَ