طه
Ta-Ha
That You May Not Toil
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। ता. हा.
بِسْمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحْمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ طَهَۖ
हमने तुम पर पाठ इसलिए नहीं उतारा कि तुम अभागे हो जाओ,
مَا أَنزَلْنَا عَلَيْكَ اَ۬لْقُرْءَانَ لِتَشْقَىٰ
बल्कि उसके लिए स्मरण के रूप में जो भय रखता है,
إِلَّا تَذْكِرَةٗ لِّمَنْ يَّخْشَىٰۖ
एक अवतरण, उसकी ओर से जिसने धरती और ऊँचे आकाशों को रचा,
تَنزِيلاٗ مِّمَّنْ خَلَقَ اَ۬لْأَرْضَ وَالسَّمَٰوَٰتِ اِ۬لْعُلَىۖ
सर्वदयालु, जो भवन पर स्थित हुआ।
اَ۬لرَّحْمَٰنُ عَلَى اَ۬لْعَرْشِ اِ۪سْتَوَىٰۖ
उसी का है जो आकाशों में है, जो धरती पर है, जो इन दोनों के बीच है, और जो मिट्टी के नीचे है।
لَهُۥ مَا فِے اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِے اِ۬لْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَمَا تَحْتَ اَ۬لثَّرَىٰۖ
और यदि तुम अपना कथन ऊँचे स्वर में कहो, तो वह निश्चय ही गुप्त को जानता है, और उसे भी जो उससे अधिक छिपा है।
وَإِن تَجْهَرْ بِالْقَوْلِ فَإِنَّهُۥ يَعْلَمُ اُ۬لسِّرَّ وَأَخْفَىۖ
ईश्वर, उसके सिवा कोई देवता नहीं।
اَ۬للَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ
उसी के हैं सबसे सुंदर गुण।
لَهُ اُ۬لْأَسْمَآءُ اُ۬لْحُسْنَىٰۖ
और क्या तुम्हारे पास मूसा की वार्ता पहुँची है?
وَهَلْ أَتَيٰكَ حَدِيثُ مُوسَىٰ
जब उसने एक आग देखी, तो अपने परिवार से कहा: “ठहरो, क्योंकि मैंने एक आग देखी है; शायद मैं तुम्हारे लिए उसमें से एक अंगारा ले आऊँ, या आग के पास कोई मार्गदर्शन पा जाऊँ।”
إِذْ رَءَا نَاراٗ فَقَالَ لِأَهْلِهِ اِ۟مْكُثُواْ إِنِّيَ ءَانَسْتُ نَاراٗ لَّعَلِّيَ ءَاتِيكُم مِّنْهَا بِقَبَسٍ أَوْ أَجِدُ عَلَى اَ۬لنَّارِ هُدىٗۖ
जब वह वहाँ पहुँचा, तो उसे पुकारा गया: “मूसा! मैं ही निश्चय ही तुम्हारा अभिभावक हूँ। अपनी चप्पलें उतार दो, क्योंकि तुम तुवा की पवित्र की हुई घाटी में हो।”
فَلَمَّا أَتَيٰهَا نُودِيَ يَٰمُوسَىٰ إِنِّيَ أَنَا رَبُّكَ فَاخْلَعْ نَعْلَيْكَ إِنَّكَ بِالْوَادِ اِ۬لْمُقَدَّسِ طُوَىٰۖ
और मैंने तुम्हें चुना है: इसलिए सुनो जो प्रकट किया जा रहा है। निश्चय ही मैं ही ईश्वर हूँ — मेरे सिवा कोई देवता नहीं। इसलिए मेरी आज्ञा का पालन करो, और मेरे स्मरण के लिए संपर्क बनाए रखो;
وَأَنَا اَ۪خْتَرْتُكَ فَاسْتَمِعْ لِمَا يُوحَىٰ إِنَّنِيَ أَنَا اَ۬للَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاعْبُدْنِے وَأَقِمِ اِ۬لصَّلَوٰةَ لِذِكْرِيَۖ
क्योंकि वह घड़ी आ रही है — मैं उसे लगभग छिपाए रखता हूँ — ताकि हर स्व को उसका प्रतिफल मिले जिसमें वह लगा रहा।
إِنَّ اَ۬لسَّاعَةَ ءَاتِيَةٌ أَكَادُ أُخْفِيهَا لِتُجْزَىٰ كُلُّ نَفْسِۢ بِمَا تَسْعَىٰۖ
जो उस पर विश्वास नहीं करता और अपनी भावना का अनुसरण करता है, वह तुम्हें उससे न रोक दे, नहीं तो तुम्हारा पतन होगा।
فَلَا يَصُدَّنَّكَ عَنْهَا مَن لَّا يُؤْمِنُ بِهَا وَاتَّبَعَ هَوَيٰهُ فَتَرْدَىٰۖ
और तुम्हारे दाहिने हाथ में यह क्या है, मूसा?
وَمَا تِلْكَ بِيَمِينِكَ يَٰمُوسَىٰۖ
उसने कहा: “यह मेरी लाठी है; मैं इस पर टेक लगाता हूँ, इससे अपनी भेड़-बकरियों के लिए पत्ते झाड़ता हूँ, और इसमें मेरे और भी काम हैं।”
قَالَ هِيَ عَصَايَ أَتَوَكَّؤُاْ عَلَيْهَا وَأَهُشُّ بِهَا عَلَىٰ غَنَمِے وَلِے فِيهَا مَـَٔارِبُ أُخْرَىٰۖ
उसने कहा: “इसे फेंक दो, मूसा।”
قَالَ أَلْقِهَا يَٰمُوسَىٰۖ
उसने उसे फेंका, और देखो, वह एक दौड़ता हुआ साँप बन गई।
فَأَلْقَيٰهَا فَإِذَا هِيَ حَيَّةٞ تَسْعَىٰۖ
उसने कहा: “इसे पकड़ो, डरो मत: हम इसे इसकी पहली अवस्था में वापस ला देंगे।”
قَالَ خُذْهَا وَلَا تَخَفْ سَنُعِيدُهَا سِيرَتَهَا اَ۬لْأُولَىٰۖ
और अपना हाथ अपनी बगल से लगा लो: वह बिना किसी बुराई के श्वेत निकलेगा — एक और संकेत, कि हम तुम्हें अपने कुछ सबसे बड़े संकेत दिखाएँ।
وَاضْمُمْ يَدَكَ إِلَىٰ جَنَاحِكَ تَخْرُجْ بَيْضَآءَ مِنْ غَيْرِ سُوٓءٍ ءَايَةً أُخْرَىٰ لِنُرِيَكَ مِنْ ءَايَٰتِنَا اَ۬لْكُبْرَىۖ
फ़िरऔन के पास जाओ: वह हर मर्यादा से आगे निकल गया है।
اَ۪ذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُۥ طَغَىٰۖ
उसने कहा: “मेरे अभिभावक, मेरा सीना खोल दीजिए, मेरा कार्य मेरे लिए सरल कर दीजिए, मेरी जीभ की एक गाँठ खोल दीजिए ताकि वे मेरा कथन समझें, और मेरे परिवार में से मेरे लिए एक हाथ बँटाने वाला निर्धारित कीजिए, हारून, मेरे भाई को।
قَالَ رَبِّ اِ۪شْرَحْ لِے صَدْرِے وَيَسِّرْ لِيَ أَمْرِے وَاحْلُلْ عُقْدَةٗ مِّن لِّسَانِے يَفْقَهُواْ قَوْلِے وَاجْعَل لِّے وَزِيراٗ مِّنْ أَهْلِے هَٰرُونَ أَخِےۖ
उसके द्वारा मेरा संकल्प दृढ़ कीजिए, और उसे मेरे कार्य में साझी बनाइए, ताकि हम आपकी बहुत महिमा गाएँ और आपका बहुत स्मरण करें; आप हम पर दृष्टि रखने वाले हैं।”
اِ۟شْدُدْ بِهِۦ أَزْرِے وَأَشْرِكْهُ فِے أَمْرِے كَےْ نُسَبِّحَكَ كَثِيراٗ وَنَذْكُرَكَ كَثِيراً إِنَّكَ كُنتَ بِنَا بَصِيراٗۖ
उसने कहा: “तुम्हें तुम्हारा माँगा हुआ दे दिया गया, मूसा।
۞ قَالَ قَدْ أُوتِيتَ سُؤْلَكَ يَٰمُوسَىٰۖ
हमने तुम पर एक और बार भी निश्चय ही कृपा की, जब हमने तुम्हारी माता के मन में प्रकट किया जो प्रकट किया गया: ‘इसे संदूक में डाल दो, फिर इसे लहर में डाल दो;
وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَيْكَ مَرَّةً أُخْرَىٰ إِذْ أَوْحَيْنَا إِلَىٰ أُمِّكَ مَا يُوحَىٰ أَنِ اِ۪قْذِفِيهِ فِے اِ۬لتَّابُوتِ فَاقْذِفِيهِ فِے اِ۬لْيَمِّۖ
लहर इसे तट पर फेंक दे; मेरा और उसका एक शत्रु इसे ले लेगा।’
فَلْيُلْقِهِ اِ۬لْيَمُّ بِالسَّاحِلِ يَأْخُذْهُ عَدُوّٞ لِّے وَعَدُوّٞ لَّهُۥۖ
और मैंने तुम पर अपनी ओर से एक प्रेम डाल दिया, ताकि तुम मेरी आँख के सामने गढ़े जाओ — जब तुम्हारी बहन चलती हुई कहती थी: ‘क्या तुम चाहते हो कि मैं तुम्हें बताऊँ कि कौन इसकी देखभाल का ज़िम्मा लेगा?’
وَأَلْقَيْتُ عَلَيْكَ مَحَبَّةٗ مِّنِّے وَلِتُصْنَعَ عَلَىٰ عَيْنِيَ إِذْ تَمْشِے أُخْتُكَ فَتَقُولُ هَلْ أَدُلُّكُمْ عَلَىٰ مَنْ يَّكْفُلُهُۥۖ
हमने तुम्हें तुम्हारी माता के पास लौटा दिया ताकि उसकी आँखें ठहर जाएँ और वह दुखी न हो।
فَرَجَعْنَٰكَ إِلَىٰ أُمِّكَ كَےْ تَقَرَّ عَيْنُهَا وَلَا تَحْزَنَۖ
और तुमने एक स्व को मार डाला, और हमने तुम्हें व्यथा से उबारा; हमने तुम्हें एक कठोर परीक्षा में डाला।
وَقَتَلْتَ نَفْساٗ فَنَجَّيْنَٰكَ مِنَ اَ۬لْغَمِّ وَفَتَنَّٰكَ فُتُوناٗۖ
तुमने मदयन वालों के बीच कई वर्ष बिताए, फिर तुम एक निश्चित माप के अनुसार आए, मूसा।
فَلَبِثْتَ سِنِينَ فِے أَهْلِ مَدْيَنَ ثُمَّ جِئْتَ عَلَىٰ قَدَرٖ يَٰمُوسَىٰۖ
और मैंने तुम्हें अपने लिए गढ़ा।
وَاصْطَنَعْتُكَ لِنَفْسِيَۖ
जाओ, तुम और तुम्हारा भाई, मेरे संकेतों के साथ, और मेरे स्मरण में सुस्ती न करो।
اَ۪ذْهَبْ أَنتَ وَأَخُوكَ بِـَٔايَٰتِے وَلَا تَنِيَا فِے ذِكْرِيَۖ
तुम दोनों फ़िरऔन के पास जाओ: वह हर मर्यादा से आगे निकल गया है। उससे कोमल कथन कहो; शायद वह स्मरण करे, या भय माने।”
اَ۪ذْهَبَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُۥ طَغَىٰ فَقُولَا لَهُۥ قَوْلاٗ لَّيِّناٗ لَّعَلَّهُۥ يَتَذَكَّرُ أَوْ يَخْشَىٰۖ
उन्होंने कहा: “हमारे अभिभावक, हमें डर है कि वह हम पर जल्दबाज़ी करेगा या हर मर्यादा से आगे निकल जाएगा।”
قَالَا رَبَّنَا إِنَّنَا نَخَافُ أَنْ يَّفْرُطَ عَلَيْنَا أَوْ أَنْ يَّطْغَىٰۖ
उसने कहा: “डरो मत: मैं निश्चय ही तुम दोनों के साथ हूँ, मैं सुनता हूँ और देखता हूँ।
قَالَ لَا تَخَافَا إِنَّنِے مَعَكُمَا أَسْمَعُ وَأَرَىٰۖ
इसलिए उसके पास जाओ, और कहो: ‘हम निश्चय ही तुम्हारे अभिभावक के दो संदेशवाहक हैं; इसराईल की संतान को हमारे साथ जाने दो और उन्हें दंड न दो; हम तुम्हारे पास तुम्हारे अभिभावक की ओर से एक संकेत लाए हैं।
فَأْتِيَٰهُ فَقُولَا إِنَّا رَسُولَا رَبِّكَ فَأَرْسِلْ مَعَنَا بَنِے إِسْرَآءِيلَ وَلَا تُعَذِّبْهُمْ قَدْ جِئْنَٰكَ بِـَٔايَةٖ مِّن رَّبِّكَۖ
और शांति हो उस पर जो मार्गदर्शन का अनुसरण करता है।
وَالسَّلَٰمُ عَلَىٰ مَنِ اِ۪تَّبَعَ اَ۬لْهُدَىٰۖ
हम पर निश्चय ही प्रकट किया गया है कि दंड उस पर है जो झुठलाता है और मुँह मोड़ता है।’”
إِنَّا قَدْ أُوحِيَ إِلَيْنَا أَنَّ اَ۬لْعَذَابَ عَلَىٰ مَن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰۖ
उसने कहा: “और तुम दोनों का अभिभावक कौन है, मूसा?”
قَالَ فَمَن رَّبُّكُمَا يَٰمُوسَىٰۖ
उसने कहा: “हमारा अभिभावक वह है जिसने हर चीज़ को उसकी अपनी रचना दी, फिर उसे मार्ग दिखाया।”
قَالَ رَبُّنَا اَ۬لذِے أَعْطَىٰ كُلَّ شَےْءٍ خَلْقَهُۥ ثُمَّ هَدَىٰۖ
उसने कहा: “तो पहली पीढ़ियों का क्या हाल है?”
قَالَ فَمَا بَالُ اُ۬لْقُرُونِ اِ۬لْأُولَىٰۖ
उसने कहा: “उनका ज्ञान मेरे अभिभावक के पास एक बही में है।
قَالَ عِلْمُهَا عِندَ رَبِّے فِے كِتَٰبٖۖ
मेरा अभिभावक न भटकता है न भूलता है।”
لَّا يَضِلُّ رَبِّے وَلَا يَنسَىۖ
वह जिसने तुम्हारे लिए धरती को सँवारा हुआ विस्तार बनाया, उसमें तुम्हारे लिए राहें निकालीं, और आकाश से पानी उतारा,
اَ۬لذِے جَعَلَ لَكُمُ اُ۬لْأَرْضَ مِهَٰداٗ وَسَلَكَ لَكُمْ فِيهَا سُبُلاٗ وَأَنزَلَ مِنَ اَ۬لسَّمَآءِ مَآءٗۖ
जिसके द्वारा हमने हर प्रकार की वनस्पतियों के जोड़े उगाए।
فَأَخْرَجْنَا بِهِۦ أَزْوَٰجاٗ مِّن نَّبَاتٖ شَتَّىٰۖ
खाओ, और अपने पशुधन को चराओ।
كُلُواْ وَارْعَوْاْ أَنْعَٰمَكُمْۖ
इसमें सूझ-बूझ वालों के लिए अवश्य संकेत हैं।
إِنَّ فِے ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّأُوْلِے اِ۬لنُّهَىٰۖ
उसी से हमने तुम्हें रचा, उसी में हम तुम्हें वापस पहुँचाएँगे, और उसी से हम तुम्हें एक बार फिर निकालेंगे।
۞ مِنْهَا خَلَقْنَٰكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰۖ
हमने उसे अपने सारे संकेत निश्चय ही दिखाए, परंतु उसने झुठलाया और इनकार किया।
وَلَقَدْ أَرَيْنَٰهُ ءَايَٰتِنَا كُلَّهَا فَكَذَّبَ وَأَبَىٰۖ
उसने कहा: “क्या तुम हमें अपने भ्रम से हमारी धरती से निकालने आए हो, मूसा? हम तुम्हारे पास वैसा ही भ्रम अवश्य लाएँगे।
قَالَ أَجِئْتَنَا لِتُخْرِجَنَا مِنْ أَرْضِنَا بِسِحْرِكَ يَٰمُوسَىٰ فَلَنَأْتِيَنَّكَ بِسِحْرٖ مِّثْلِهِۦۖ
इसलिए हमारे और अपने बीच एक वादे का समय निर्धारित करो जिसे न हम तोड़ें न तुम, एक निष्पक्ष स्थान पर।”
فَاجْعَلْ بَيْنَنَا وَبَيْنَكَ مَوْعِداٗ لَّا نُخْلِفُهُۥ نَحْنُ وَلَا أَنتَ مَكَاناٗ سِوىٗۖ
उसने कहा: “तुम्हारा वादे का समय शोभा का दिन होगा, और लोग पूर्वाह्न में इकट्ठा किए जाएँ।”
قَالَ مَوْعِدُكُمْ يَوْمُ اُ۬لزِّينَةِ وَأَنْ يُّحْشَرَ اَ۬لنَّاسُ ضُحىٗۖ
फ़िरऔन ने पीठ फेरी, अपनी चाल एकत्र की, फिर वह आया।
فَتَوَلَّىٰ فِرْعَوْنُ فَجَمَعَ كَيْدَهُۥ ثُمَّ أَتَىٰۖ
मूसा ने उनसे कहा: “हाय तुम पर! ईश्वर पर झूठ न गढ़ो, नहीं तो वह तुम्हें दंड से उखाड़ फेंकेगा।
قَالَ لَهُم مُّوسَىٰ وَيْلَكُمْ لَا تَفْتَرُواْ عَلَى اَ۬للَّهِ كَذِباٗ فَيَسْحَتَكُم بِعَذَابٖۖ
और जो गढ़ता है वह विफल हो चुका है।”
وَقَدْ خَابَ مَنِ اِ۪فْتَرَىٰۖ
उन्होंने अपने मामले में आपस में खींचतान की और अपनी गुप्त मंत्रणा छिपाए रखी।
فَتَنَٰزَعُواْ أَمْرَهُم بَيْنَهُمْ وَأَسَرُّواْ اُ۬لنَّجْوَىٰۖ
उन्होंने कहा: “ये दोनों अवश्य भ्रमकार हैं जो अपने भ्रम से तुम्हें तुम्हारी धरती से निकालना और तुम्हारी आदर्श जीवन-पद्धति को ले जाना चाहते हैं।
قَالُواْ إِنَّ هَٰذَٰنِ لَسَٰحِرَٰنِ يُرِيدَٰنِ أَنْ يُّخْرِجَٰكُم مِّنْ أَرْضِكُم بِسِحْرِهِمَا وَيَذْهَبَا بِطَرِيقَتِكُمُ اُ۬لْمُثْلَىٰۖ
इसलिए अपनी चाल एकत्र करो, फिर पंक्तिबद्ध होकर आओ।
فَأَجْمِعُواْ كَيْدَكُمْ ثُمَّ اَ۪ئْتُواْ صَفّاٗۖ
और आज वही सफल होता है जो ऊपर रहता है।”
وَقَدْ أَفْلَحَ اَ۬لْيَوْمَ مَنِ اِ۪سْتَعْلَىٰۖ
उन्होंने कहा: “मूसा, या तो तुम फेंको, या हम पहले फेंकने वाले होंगे।”
قَالُواْ يَٰمُوسَىٰ إِمَّا أَن تُلْقِيَ وَإِمَّا أَن نَّكُونَ أَوَّلَ مَنْ أَلْقَىٰۖ
उसने कहा: “नहीं, तुम फेंको।”
قَالَ بَلْ أَلْقُواْۖ
और देखो, उनकी रस्सियाँ और उनकी लाठियाँ, उनके भ्रम के कारण, उसे दौड़ती हुई प्रतीत हुईं।
فَإِذَا حِبَالُهُمْ وَعِصِيُّهُمْ يُخَيَّلُ إِلَيْهِ مِن سِحْرِهِمْ أَنَّهَا تَسْعَىٰۖ
मूसा ने अपने भीतर एक डर अनुभव किया।
فَأَوْجَسَ فِے نَفْسِهِۦ خِيفَةٗ مُّوسَىٰۖ
हमने कहा: “डरो मत, क्योंकि तुम ही ऊपर हो।
قُلْنَا لَا تَخَفْ إِنَّكَ أَنتَ اَ۬لْأَعْلَىٰۖ
और जो तुम्हारे दाहिने हाथ में है उसे फेंक दो: वह उसे निगल लेगा जो उन्होंने गढ़ा है।
وَأَلْقِ مَا فِے يَمِينِكَ تَلَقَّفْ مَا صَنَعُواْۖ
जो उन्होंने गढ़ा है वह केवल भ्रमकार की चाल है,
إِنَّمَا صَنَعُواْ كَيْدُ سَٰحِرٖۖ
और भ्रमकार सफल नहीं होता, चाहे वह जहाँ से आए।”
وَلَا يُفْلِحُ اُ۬لسَّاحِرُ حَيْثُ أَتَىٰۖ
भ्रमकार माथा टेके हुए गिरा दिए गए।
فَأُلْقِيَ اَ۬لسَّحَرَةُ سُجَّداٗۖ
उन्होंने कहा: “हम हारून और मूसा के अभिभावक पर विश्वास करते हैं।”
قَالُواْ ءَامَنَّا بِرَبِّ هَٰرُونَ وَمُوسَىٰۖ
उसने कहा: “तुमने मेरे अनुमति देने से पहले ही उस पर भरोसा कर लिया! वह अवश्य तुम सबमें बड़ा है, जिसने तुम्हें भ्रम सिखाया।
قَالَ ءَاٰ۬مَنتُمْ لَهُۥ قَبْلَ أَنْ ءَاذَنَ لَكُمْ إِنَّهُۥ لَكَبِيرُكُمُ اُ۬لذِے عَلَّمَكُمُ اُ۬لسِّحْرَۖ
मैं तुम्हारे हाथ और पैर अवश्य विपरीत ओर से कटवाऊँगा, और तुम्हें खजूर के तनों पर सूली पर चढ़ाऊँगा; तब तुम अवश्य जान लोगे कि हममें से कौन दंड में अधिक कठोर और अधिक टिकाऊ है।”
فَلَأُقَطِّعَنَّ أَيْدِيَكُمْ وَأَرْجُلَكُم مِّنْ خِلَٰفٖ وَلَأُصَلِّبَنَّكُمْ فِے جُذُوعِ اِ۬لنَّخْلِ وَلَتَعْلَمُنَّ أَيُّنَا أَشَدُّ عَذَاباٗ وَأَبْقَىٰۖ
उन्होंने कहा: “हम तुम्हें कभी उन स्पष्ट प्रमाणों पर वरीयता नहीं देंगे जो हमारे पास आए हैं, और न उस पर जिसने हमें मूलतः रचा है।
۞ قَالُواْ لَن نُّؤْثِرَكَ عَلَىٰ مَا جَآءَنَا مِنَ اَ۬لْبَيِّنَٰتِ وَالذِے فَطَرَنَاۖ
तो जो फ़ैसला तुम्हें करना है, कर लो:
فَاقْضِ مَا أَنتَ قَاضٍۖ
तुम केवल इसी इहलोक के जीवन में फ़ैसला करते हो।
إِنَّمَا تَقْضِے هَٰذِهِ اِ۬لْحَيَوٰةَ اَ۬لدُّنْيَاۖ
हम निश्चय ही अपने अभिभावक पर विश्वास करते हैं, ताकि वह हमारी भूलों को और भ्रम के विषय में तुमने हमें जिसके लिए विवश किया उसे क्षमा कर दे।
إِنَّا ءَامَنَّا بِرَبِّنَا لِيَغْفِرَ لَنَا خَطَٰيَٰنَا وَمَا أَكْرَهْتَنَا عَلَيْهِ مِنَ اَ۬لسِّحْرِۖ
ईश्वर बेहतर और अधिक टिकाऊ है।”
وَاللَّهُ خَيْرٞ وَأَبْقَىٰۖ
निश्चय ही, जो भी अपने अभिभावक के पास बहिष्कृत होकर आता है, उसके लिए जहन्नम है, जिसमें न वह मरता है, न जीता है।
إِنَّهُۥ مَنْ يَّأْتِ رَبَّهُۥ مُجْرِماٗ فَإِنَّ لَهُۥ جَهَنَّمَ لَا يَمُوتُ فِيهَا وَلَا يَحْيَىٰۖ
और जो भी उसके पास विश्वास करने वाला होकर आता है, जिसने भले कर्म किए हैं, उनके लिए ऊँची श्रेणियाँ हैं:
وَمَنْ يَّأْتِهِ مُؤْمِناٗ قَدْ عَمِلَ اَ۬لصَّٰلِحَٰتِ فَأُوْلَٰٓئِكَ لَهُمُ اُ۬لدَّرَجَٰتُ اُ۬لْعُلَىٰۖ
स्थायित्व के ऐसे उद्यान जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जहाँ वे सदा रहेंगे।
جَنَّٰتُ عَدْنٖ تَجْرِے مِن تَحْتِهَا اَ۬لْأَنْهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۖ
और यही उसका प्रतिफल है जो स्वयं को शुद्ध करता है।
وَذَٰلِكَ جَزَآءُ مَن تَزَكَّىٰۖ
हमने निश्चय ही मूसा पर प्रकट किया: “रात में चल पड़ो मेरे आज्ञाकारियों के साथ, और उनके लिए समुद्र में एक सूखा रास्ता बना दो; पकड़े जाने से डरो नहीं, और भय न रखो।”
وَلَقَدْ أَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنِ اِ۪سْرِ بِعِبَادِے فَاضْرِبْ لَهُمْ طَرِيقاٗ فِے اِ۬لْبَحْرِ يَبَساٗ لَّا تَخَٰفُ دَرَكاٗ وَلَا تَخْشَىٰۖ
फ़िरऔन ने अपनी सेनाओं के साथ उनका पीछा किया, और उन्हें लहर से वह ढक गया जो ढक गया।
فَأَتْبَعَهُمْ فِرْعَوْنُ بِجُنُودِهِۦ فَغَشِيَهُم مِّنَ اَ۬لْيَمِّ مَا غَشِيَهُمْۖ
और फ़िरऔन ने अपनी क़ौम को भटकाया, उसने उसे मार्ग नहीं दिखाया।
وَأَضَلَّ فِرْعَوْنُ قَوْمَهُۥ وَمَا هَدَىٰۖ
इसराईल की संतान, हमने तुम्हें तुम्हारे शत्रु से उबार लिया, हमने तुम्हें पर्वत के दाहिने पार्श्व पर वादे का समय दिया, और हमने तुम पर मन्न और बटेरें उतारीं।
يَٰبَنِے إِسْرَآءِيلَ قَدْ أَنجَيْنَٰكُم مِّنْ عَدُوِّكُمْ وَوَٰعَدْنَٰكُمْ جَانِبَ اَ۬لطُّورِ اِ۬لْأَيْمَنَ وَنَزَّلْنَا عَلَيْكُمُ اُ۬لْمَنَّ وَالسَّلْوَىٰۖ
उन अच्छी वस्तुओं में से खाओ जिनकी जीविका हमने तुम्हें दी है, और उनमें मर्यादा से आगे न निकलो, नहीं तो तुम पर मेरा क्रोध टूट पड़ेगा;
كُلُواْ مِن طَيِّبَٰتِ مَا رَزَقْنَٰكُمْ وَلَا تَطْغَوْاْ فِيهِ فَيَحِلَّ عَلَيْكُمْ غَضَبِےۖ
और जिस पर मेरा क्रोध टूट पड़ता है, वह गर्त में जा गिरा।
وَمَنْ يَّحْلِلْ عَلَيْهِ غَضَبِے فَقَدْ هَوَىٰۖ
और मैं अवश्य बड़ा क्षमाकर्ता हूँ उसके प्रति जो पश्चात्ताप करता है, विश्वास करता है, भला कर्म करता है, फिर मार्गदर्शन पाता है।
وَإِنِّے لَغَفَّارٞ لِّمَن تَابَ وَءَامَنَ وَعَمِلَ صَٰلِحاٗ ثُمَّ اَ۪هْتَدَىٰۖ
तो किस बात ने तुम्हें अपनी क़ौम से अलग होकर जल्दी आने को प्रेरित किया, मूसा?
۞ وَمَا أَعْجَلَكَ عَن قَوْمِكَ يَٰمُوسَىٰۖ
उसने कहा: “वे मेरे पदचिह्नों पर यहीं हैं; मैं आपकी ओर जल्दी आया, मेरे अभिभावक, कि आप प्रसन्न हो जाएँ।”
قَالَ هُمْ أُوْلَآءِ عَلَىٰ أَثَرِے وَعَجِلْتُ إِلَيْكَ رَبِّ لِتَرْضَىٰۖ
उसने कहा: “हमने निश्चय ही तुम्हारे बाद तुम्हारी क़ौम को परीक्षा में डाला, और अस-सामिरी ने उन्हें भटका दिया।”
قَالَ فَإِنَّا قَدْ فَتَنَّا قَوْمَكَ مِنۢ بَعْدِكَ وَأَضَلَّهُمُ اُ۬لسَّامِرِيُّۖ
तो मूसा क्रोधित, कटु होकर अपनी क़ौम की ओर लौटा।
فَرَجَعَ مُوسَىٰ إِلَىٰ قَوْمِهِۦ غَضْبَٰنَ أَسِفاٗۖ
उसने कहा: “हे मेरी क़ौम! क्या तुम्हारे अभिभावक ने तुमसे एक अच्छा वादा नहीं किया था?
قَالَ يَٰقَوْمِ أَلَمْ يَعِدْكُمْ رَبُّكُمْ وَعْداً حَسَناًۖ
क्या संधि तुम्हें बहुत लंबी लगी, या तुमने चाहा कि तुम्हारे अभिभावक का क्रोध तुम पर टूट पड़े, इसलिए कि तुम मेरे वादे के समय से यों चूक गए?”
أَفَطَالَ عَلَيْكُمُ اُ۬لْعَهْدُ أَمْ أَرَدتُّمْ أَنْ يَّحِلَّ عَلَيْكُمْ غَضَبٞ مِّن رَّبِّكُمْ فَأَخْلَفْتُم مَّوْعِدِےۖ
उन्होंने कहा: “हम स्वेच्छा से तुम्हारे वादे के समय से नहीं चूके; बल्कि हमसे क़ौम के आभूषणों के बने बोझ वहन कराए गए, हमने उन्हें फेंक दिया, और इसी प्रकार अस-सामिरी ने भी डाला।”
قَالُواْ مَا أَخْلَفْنَا مَوْعِدَكَ بِمَلْكِنَا وَلَٰكِنَّا حُمِّلْنَا أَوْزَاراٗ مِّن زِينَةِ اِ۬لْقَوْمِ فَقَذَفْنَٰهَا فَكَذَٰلِكَ أَلْقَى اَ۬لسَّامِرِيُّۖ
उसने उनके लिए एक बछड़ा निकाल दिया, एक शरीर जो रँभाता था, और उन्होंने कहा: “यह तुम्हारा देवता है और मूसा का देवता” — पर वह भूल गया था।
فَأَخْرَجَ لَهُمْ عِجْلاٗ جَسَداٗ لَّهُۥ خُوَارٞ فَقَالُواْ هَٰذَا إِلَٰهُكُمْ وَإِلَٰهُ مُوسَىٰ فَنَسِيَۖ
क्या वे नहीं देखते कि वह उन्हें कोई कथन नहीं लौटाता, और उनके लिए न हानि का मालिक है न लाभ का?
أَفَلَا يَرَوْنَ أَلَّا يَرْجِعُ إِلَيْهِمْ قَوْلاٗ وَلَا يَمْلِكُ لَهُمْ ضَرّاٗ وَلَا نَفْعاٗۖ
हारून ने उनसे पहले ही कहा था: “हे मेरी क़ौम! तुम इसके द्वारा केवल परीक्षा में डाले गए हो;
وَلَقَدْ قَالَ لَهُمْ هَٰرُونُ مِن قَبْلُ يَٰقَوْمِ إِنَّمَا فُتِنتُم بِهِۦۖ
निश्चय ही तुम्हारा अभिभावक सर्वदयालु है: इसलिए मेरा अनुसरण करो और मेरे आदेश की बात मानो।”
وَإِنَّ رَبَّكُمُ اُ۬لرَّحْمَٰنُ فَاتَّبِعُونِے وَأَطِيعُواْ أَمْرِےۖ
उन्होंने कहा: “हम इसके पास डटे रहना नहीं छोड़ेंगे, जब तक मूसा हमारे पास न लौट आए।”
قَالُواْ لَن نَّبْرَحَ عَلَيْهِ عَٰكِفِينَ حَتَّىٰ يَرْجِعَ إِلَيْنَا مُوسَىٰۖ
उसने कहा: “हे हारून! जब तुमने उन्हें भटकते देखा तो किस बात ने तुम्हें रोका, कि तुम मेरा अनुसरण करो? क्या तुमने मेरे आदेश की अवज्ञा की?”
قَالَ يَٰهَٰرُونُ مَا مَنَعَكَ إِذْ رَأَيْتَهُمْ ضَلُّواْ أَلَّا تَتَّبِعَنِۦ أَفَعَصَيْتَ أَمْرِےۖ
उसने कहा: “मेरी माता के पुत्र, मेरी दाढ़ी और मेरा सिर न पकड़ो, क्योंकि मुझे भय हुआ कि तुम कहोगे: ‘तुमने इसराईल की संतान में फूट डाली और मेरे कथन का ध्यान नहीं रखा।’”
قَالَ يَبْنَؤُمَّ لَا تَأْخُذْ بِلِحْيَتِے وَلَا بِرَأْسِيَ إِنِّے خَشِيتُ أَن تَقُولَ فَرَّقْتَ بَيْنَ بَنِے إِسْرَآءِيلَ وَلَمْ تَرْقُبْ قَوْلِےۖ
उसने कहा: “तुम्हारा क्या मामला है, सामिरी?”
قَالَ فَمَا خَطْبُكَ يَٰسَٰمِرِيُّۖ
उसने कहा: “मैंने वह साफ़ देखा जो उन्होंने नहीं देखा; मैंने संदेशवाहक की पद-छाप से एक मुट्ठी ली, फिर उसे फेंक दिया — मेरे स्व ने मुझे यही सुझाया।”
قَالَ بَصُرْتُ بِمَا لَمْ يَبْصُرُواْ بِهِۦ فَقَبَضْتُ قَبْضَةٗ مِّنْ أَثَرِ اِ۬لرَّسُولِ فَنَبَذْتُهَا وَكَذَٰلِكَ سَوَّلَتْ لِے نَفْسِےۖ
उसने कहा: “जाओ, क्योंकि जीवन में तुम्हारे हिस्से में यह कहना है ‘मुझे मत छुओ’,
۞ قَالَ فَاذْهَبْ فَإِنَّ لَكَ فِے اِ۬لْحَيَوٰةِ أَن تَقُولَ لَا مِسَاسَۖ
और तुम्हारे लिए निश्चय ही एक वादे का समय है जिससे तुम चूक नहीं सकोगे।
وَإِنَّ لَكَ مَوْعِداٗ لَّن تُخْلَفَهُۥۖ
और अपने उस देवता पर नज़र डालो जिसके पास तुम डटे रहे: हम उसे अवश्य जलाएँगे, फिर उसे अवश्य लहर में बिखेर देंगे, पूरी तरह बिखरा हुआ।”
وَانظُرْ إِلَىٰ إِلَٰهِكَ اَ۬لذِے ظَلْتَ عَلَيْهِ عَاكِفاٗ لَّنُحَرِّقَنَّهُۥ ثُمَّ لَنَنسِفَنَّهُۥ فِے اِ۬لْيَمِّ نَسْفاًۖ
तुम्हारा एकमात्र देवता ईश्वर है, उसके सिवा कोई देवता नहीं,
إِنَّمَا إِلَٰهُكُمُ اُ۬للَّهُ اُ۬لذِے لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ
जिसका ज्ञान हर चीज़ को समेटे हुए है।
وَسِعَ كُلَّ شَےْءٍ عِلْماٗۖ
इस प्रकार हम तुम्हें बीती हुई बातों की कुछ सूचनाएँ बताते हैं,
كَذَٰلِكَ نَقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ أَنۢبَآءِ مَا قَدْ سَبَقَۖ
और हमने तुम्हें अपनी ओर से एक स्मरण दिया है।
وَقَدْ ءَاتَيْنَٰكَ مِن لَّدُنَّا ذِكْراٗۖ
जो कोई उससे कतराएगा वह निश्चय ही पेशी के दिन एक बोझ वहन करेगा, उसमें सदा रहता हुआ,
مَّنْ أَعْرَضَ عَنْهُ فَإِنَّهُۥ يَحْمِلُ يَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِ وِزْراً خَٰلِدِينَ فِيهِۖ
और वह उनके लिए पेशी के दिन कितना बुरा गट्ठर होगा!
وَسَآءَ لَهُمْ يَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِ حِمْلاٗۖ
जिस दिन नरसिंगे में फूँका जाएगा, हम बहिष्कृतों को इकट्ठा करेंगे, उस दिन पीले पड़े हुए, आपस में फुसफुसाते हुए: “तुमने केवल दस ही बिताए।”
يَوْمَ يُنفَخُ فِے اِ۬لصُّورِ وَنَحْشُرُ اُ۬لْمُجْرِمِينَ يَوْمَئِذٖ زُرْقاٗ يَتَخَٰفَتُونَ بَيْنَهُمْ إِن لَّبِثْتُمْ إِلَّا عَشْراٗۖ
हम सबसे अच्छी तरह जानते हैं जो वे कहेंगे, जब उनमें अपनी जीवन-पद्धति में सबसे आदर्श व्यक्ति कहेगा: “तुमने केवल एक दिन बिताया।”
نَّحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَقُولُونَ إِذْ يَقُولُ أَمْثَلُهُمْ طَرِيقَةً إِن لَّبِثْتُمْ إِلَّا يَوْماٗۖ
और वे तुमसे पहाड़ों के विषय में पूछते हैं; कहो: “मेरा अभिभावक उन्हें पूरी तरह बिखेर देगा, उन्हें एक सपाट मैदान में छोड़कर, जहाँ तुम न टेढ़ापन देखोगे न उभार।”
وَيَسْـَٔلُونَكَ عَنِ اِ۬لْجِبَالِ فَقُلْ يَنسِفُهَا رَبِّے نَسْفاٗ فَيَذَرُهَا قَاعاٗ صَفْصَفاٗ لَّا تَرَىٰ فِيهَا عِوَجاٗ وَلَا أَمْتاٗۖ
उस दिन वे पुकारने वाले का अनुसरण करेंगे, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं,
يَوْمَئِذٖ يَتَّبِعُونَ اَ۬لدَّاعِيَ لَا عِوَجَ لَهُۥۖ
और आवाज़ें सर्वदयालु के सामने विनीत हो जाएँगी; तुम केवल एक सरसराहट सुनोगे।
وَخَشَعَتِ اِ۬لْأَصْوَاتُ لِلرَّحْمَٰنِ فَلَا تَسْمَعُ إِلَّا هَمْساٗۖ
उस दिन सिफ़ारिश केवल उसी को लाभ देगी जिसे सर्वदयालु अनुमति दे चुका होगा और जिसके कथन को स्वीकार करेगा।
يَوْمَئِذٖ لَّا تَنفَعُ اُ۬لشَّفَٰعَةُ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ اُ۬لرَّحْمَٰنُ وَرَضِيَ لَهُۥ قَوْلاٗۖ
वह जानता है जो उनके सामने है और जो उनके पीछे है, जबकि वे अपने ज्ञान से उसे घेर नहीं सकते।
يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يُحِيطُونَ بِهِۦ عِلْماٗۖ
और चेहरे उस जीवित के सामने झुक जाएँगे, जो अपने आप बना रहने वाला है,
۞ وَعَنَتِ اِ۬لْوُجُوهُ لِلْحَيِّ اِ۬لْقَيُّومِۖ
और जिसने अन्याय वहन किया, वह असफल हो चुका होगा।
وَقَدْ خَابَ مَنْ حَمَلَ ظُلْماٗۖ
और जो भले कर्म करता है, विश्वास करने वाला होकर, उसे न अन्याय का डर होगा न वंचित किए जाने का।
وَمَنْ يَّعْمَلْ مِنَ اَ۬لصَّٰلِحَٰتِ وَهْوَ مُؤْمِنٞ فَلَا يَخَافُ ظُلْماٗ وَلَا هَضْماٗۖ
इस प्रकार हमने इसे उतारा, एक त्रुटिहीन पाठ, और हमने इसमें धमकी को विविध रूपों में रखा, शायद वे सावधान रहें, या यह उनके लिए एक स्मरण उभार दे।
وَكَذَٰلِكَ أَنزَلْنَٰهُ قُرْءَاناً عَرَبِيّاٗ وَصَرَّفْنَا فِيهِ مِنَ اَ۬لْوَعِيدِ لَعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ أَوْ يُحْدِثُ لَهُمْ ذِكْراٗۖ
परम-उच्च हो ईश्वर, अधिराज, सत्य!
فَتَعَٰلَى اَ۬للَّهُ اُ۬لْمَلِكُ اُ۬لْحَقُّۖ
और पाठ के साथ जल्दबाज़ी न करो, इससे पहले कि तुम्हारे लिए उसका प्रकटीकरण अपनी पूर्णता तक पहुँचा दिया जाए,
وَلَا تَعْجَلْ بِالْقُرْءَانِ مِن قَبْلِ أَنْ يُّقْضَىٰ إِلَيْكَ وَحْيُهُۥۖ
और कहो: “मेरे अभिभावक, मेरा ज्ञान बढ़ा दीजिए।”
وَقُل رَّبِّ زِدْنِے عِلْماٗۖ
हमने निश्चय ही इससे पहले आदम को एक संधि से बाँधा था, किंतु वह भूल गया, और हमने उसमें कोई संकल्प नहीं पाया।
وَلَقَدْ عَهِدْنَا إِلَىٰ ءَادَمَ مِن قَبْلُ فَنَسِيَ وَلَمْ نَجِدْ لَهُۥ عَزْماٗۖ
और जब हमने अभिकर्ताओं से कहा: “आदम के सामने माथा टेको”, तो उन्होंने माथा टेका,
وَإِذْ قُلْنَا لِلْمَلَٰٓئِكَةِ اِ۟سْجُدُواْ لِأٓدَمَ فَسَجَدُواْۖ
सिवा इब्लीस के, जिसने इनकार किया।
إِلَّا إِبْلِيسَ أَبَىٰۖ
हमने कहा: “हे आदम! यह निश्चय ही तुम्हारा और तुम्हारे जोड़ीदार का शत्रु है; यह तुम दोनों को उद्यान से कदापि न निकाल दे, नहीं तो तुम अभागे हो जाओगे।
فَقُلْنَا يَٰـَٔادَمُ إِنَّ هَٰذَا عَدُوّٞ لَّكَ وَلِزَوْجِكَ فَلَا يُخْرِجَنَّكُمَا مِنَ اَ۬لْجَنَّةِ فَتَشْقَىٰۖ
इसमें तुम्हारे लिए यह आश्वासन है कि तुम्हें न भूख लगेगी, न तुम निर्वस्त्र होगे,
إِنَّ لَكَ أَلَّا تَجُوعَ فِيهَا وَلَا تَعْرَىٰۖ
न तुम्हें प्यास लगेगी, न तुम धूप में खुले रहोगे।”
وَإِنَّكَ لَا تَظْمَؤُاْ فِيهَا وَلَا تَضْحَىٰۖ
तब बहकाने वाले ने उसके कान में बुदबुदाया,
فَوَسْوَسَ إِلَيْهِ اِ۬لشَّيْطَٰنُۖ
उसने कहा: “हे आदम! क्या तुम चाहते हो कि मैं तुम्हें शाश्वतता का वृक्ष और ऐसा राजत्व बता दूँ जो जीर्ण नहीं होता?”
قَالَ يَٰـَٔادَمُ هَلْ أَدُلُّكَ عَلَىٰ شَجَرَةِ اِ۬لْخُلْدِ وَمُلْكٖ لَّا يَبْلَىٰۖ
दोनों ने उसमें से खाया; तब उनकी नग्नता उनके सामने आ गई, और वे दोनों अपने ऊपर उद्यान के पत्ते सिलने लगे।
فَأَكَلَا مِنْهَا فَبَدَتْ لَهُمَا سَوْءَٰتُهُمَا وَطَفِقَا يَخْصِفَٰنِ عَلَيْهِمَا مِنْ وَّرَقِ اِ۬لْجَنَّةِۖ
और आदम ने अपने अभिभावक की अवज्ञा की, और वह दिशाहीन हो गया।
وَعَصَىٰ ءَادَمُ رَبَّهُۥ فَغَوَىٰۖ
फिर उसके अभिभावक ने उसे चुन लिया, वह अनुकंपा के साथ उसकी ओर पलटा, और उसने उसे मार्ग दिखाया।
ثُمَّ اَ۪جْتَبَٰهُ رَبُّهُۥ فَتَابَ عَلَيْهِ وَهَدَىٰۖ
उसने कहा: “तुम दोनों यहाँ से एक साथ उतर जाओ,
قَالَ اَ۪هْبِطَا مِنْهَا جَمِيعاَۢۖ
एक-दूसरे के शत्रु होकर।
بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوّٞۖ
फिर यदि तुम्हारे पास मेरी ओर से कोई मार्गदर्शन आए, तो जो मेरे मार्गदर्शन का अनुसरण करेगा वह न भटकेगा, न अभागा होगा;
فَإِمَّا يَأْتِيَنَّكُم مِّنِّے هُدىٗ فَمَنِ اِ۪تَّبَعَ هُدَايَ فَلَا يَضِلُّ وَلَا يَشْقَىٰۖ
और जो मेरे स्मरण से कतराएगा, उसकी गुज़र निश्चय ही तंग होगी, और हम उसे पेशी के दिन अंधा इकट्ठा करेंगे।”
وَمَنْ أَعْرَضَ عَن ذِكْرِے فَإِنَّ لَهُۥ مَعِيشَةٗ ضَنكاٗ وَنَحْشُرُهُۥ يَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِ أَعْمَىٰۖ
वह कहेगा: “मेरे अभिभावक, आपने मुझे अंधा क्यों इकट्ठा किया, जबकि मैं साफ़ देखता था?”
قَالَ رَبِّ لِمَ حَشَرْتَنِيَ أَعْمَىٰ وَقَدْ كُنتُ بَصِيراٗۖ
वह कहेगा: “ऐसे ही: हमारे संकेत तुम्हारे पास आए, और तुमने उन्हें भुला दिया;
۞ قَالَ كَذَٰلِكَ أَتَتْكَ ءَايَٰتُنَا فَنَسِيتَهَاۖ
ऐसे ही, आज, तुम भुला दिए जाते हो।”
وَكَذَٰلِكَ اَ۬لْيَوْمَ تُنسَىٰۖ
इस प्रकार हम उसे प्रतिफल देते हैं जो अतिवादी रहा और जिसने अपने अभिभावक के संकेतों पर विश्वास नहीं किया;
وَكَذَٰلِكَ نَجْزِے مَنْ أَسْرَفَ وَلَمْ يُؤْمِنۢ بِـَٔايَٰتِ رَبِّهِۦۖ
और अंतिम जीवन का दंड अधिक कठोर और अधिक टिकाऊ है।
وَلَعَذَابُ اُ۬لْأٓخِرَةِ أَشَدُّ وَأَبْقَىٰۖ
क्या उन्हें इससे मार्ग नहीं दिखाया जाता कि हमने उनसे पहले कितनी पीढ़ियाँ नष्ट कर दीं, जिनके आवासों में वे चलते हैं?
أَفَلَمْ يَهْدِ لَهُمْ كَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّنَ اَ۬لْقُرُونِ يَمْشُونَ فِے مَسَٰكِنِهِمْۖ
इसमें सूझ-बूझ वालों के लिए अवश्य संकेत हैं।
إِنَّ فِے ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّأُوْلِے اِ۬لنُّهَىٰۖ
और यदि तुम्हारे अभिभावक का पहले का बोल न होता और एक नामित अवधि न होती, तो यह अनिवार्य हो जाता।
وَلَوْلَا كَلِمَةٞ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ لَكَانَ لِزَاماٗ وَأَجَلٞ مُّسَمّىٗۖ
इसलिए वे जो कहते हैं उस पर धैर्य रखो,
فَاصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَۖ
और सूर्योदय से पहले और उसके अस्त होने से पहले अपने अभिभावक की प्रशंसा के साथ महिमा गाओ;
وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ قَبْلَ طُلُوعِ اِ۬لشَّمْسِ وَقَبْلَ غُرُوبِهَاۖ
और रात के कुछ पहरों में उसकी महिमा गाओ, तथा दिन के छोरों पर, शायद तुम प्रसन्न हो जाओ।
وَمِنْ ءَانَآءِےْ اِ۬ليْلِ فَسَبِّحْ وَأَطْرَافَ اَ۬لنَّهَارِ لَعَلَّكَ تَرْضَىٰۖ
और अपनी आँखें उस पर न गड़ाओ जिसका हमने उनमें से कुछ जोड़ों को उपभोग कराया है — इहलोक के जीवन की चमक-दमक — ताकि उसमें उन्हें परीक्षा में डालें;
وَلَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعْنَا بِهِۦ أَزْوَٰجاٗ مِّنْهُمْ زَهْرَةَ اَ۬لْحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنْيَا لِنَفْتِنَهُمْ فِيهِۖ
तुम्हारे अभिभावक की जीविका बेहतर और अधिक टिकाऊ है।
وَرِزْقُ رَبِّكَ خَيْرٞ وَأَبْقَىٰۖ
और अपने परिवार को संपर्क का आदेश दो, और उसमें दृढ़ रहो:
وَأْمُرْ أَهْلَكَ بِالصَّلَوٰةِ وَاصْطَبِرْ عَلَيْهَاۖ
हम तुमसे जीविका नहीं माँगते,
لَا نَسْـَٔلُكَ رِزْقاٗۖ
हम ही तुम्हें जीविका देते हैं;
نَّحْنُ نَرْزُقُكَۖ
और परिणाम सावधानी के लिए है।
وَالْعَٰقِبَةُ لِلتَّقْوَىٰۖ
और उन्होंने कहा: “वह हमारे पास अपने अभिभावक की ओर से कोई संकेत क्यों नहीं लाता!”
وَقَالُواْ لَوْلَا يَأْتِينَا بِـَٔايَةٖ مِّن رَّبِّهِۦۖ
पहले के इतिवृत्तों में जो है उसका स्पष्ट प्रमाण क्या उनके पास नहीं आया?
أَوَلَمْ تَأْتِهِم بَيِّنَةُ مَا فِے اِ۬لصُّحُفِ اِ۬لْأُولَىٰۖ
और यदि हम उन्हें इससे पहले किसी दंड से नष्ट कर देते, तो वे कहते: “हमारे अभिभावक, आपने हमारी ओर कोई संदेशवाहक क्यों नहीं भेजा, कि हम अपमानित और लज्जा से ढके जाने से पहले आपके संकेतों का अनुसरण करते?”
وَلَوْ أَنَّا أَهْلَكْنَٰهُم بِعَذَابٖ مِّن قَبْلِهِۦ لَقَالُواْ رَبَّنَا لَوْلَا أَرْسَلْتَ إِلَيْنَا رَسُولاٗ فَنَتَّبِعَ ءَايَٰتِكَ مِن قَبْلِ أَن نَّذِلَّ وَنَخْزَىٰۖ
कहो: “हर कोई प्रतीक्षा में है; तुम भी प्रतीक्षा में रहो:
قُلْ كُلّٞ مُّتَرَبِّصٞ فَتَرَبَّصُواْۖ
तुम शीघ्र जान लोगे कि समतल पथ वाले कौन हैं, और किसने मार्गदर्शन पाया।”
فَسَتَعْلَمُونَ مَنْ أَصْحَٰبُ اُ۬لصِّرَٰطِ اِ۬لسَّوِيِّ وَمَنِ اِ۪هْتَدَىٰۖ