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القرآن

الحجرات

Al-Hujurat

The Believers Are But Brothers

Sura49
حمحم عسق
पद18

Section IXThe application · continuation

The descent of the Scripture, then the messenger's community

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Read the section from its beginning: sura 40

49:1

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। हे विश्वास करने वालो! ईश्वर और उसके संदेशवाहक के आगे मत बढ़ो।

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تُقَدِّمُواْ بَيۡنَ يَدَيِ ٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦۖ

49:1

और ईश्वर के प्रति सावधान रहो,

وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَۚ

क्योंकि ईश्वर सुनने वाला, सर्वज्ञ है।

إِنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٞ

49:2

हे विश्वास करने वालो! अपनी आवाज़ें सूचनादाता की आवाज़ से ऊँची मत करो, और उससे ऊँचे स्वर में बात मत करो जैसे तुम आपस में करते हो, कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारे कर्म ढह जाएँ और तुम्हें आभास भी न हो,

يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَرۡفَعُواْ أَصۡوَٰتَكُمُۥ فَوۡقَ صَوۡتِ ٱلنَّبِيِّ وَلَا تَجۡهَرُواْ لَهُۥ بِٱلۡقَوۡلِ كَجَهۡرِ بَعۡضِكُمُۥ لِبَعۡضٍ أَن تَحۡبَطَ أَعۡمَٰلُكُمُۥ وَأَنتُمُۥ لَا تَشۡعُرُونَ

49:3

क्योंकि जो ईश्वर के संदेशवाहक के सामने अपनी आवाज़ें धीमी रखते हैं, वही हैं जिनके मर्मों को ईश्वर ने सावधानी के लिए जाँचा है।

إِنَّ ٱلَّذِينَ يَغُضُّونَ أَصۡوَٰتَهُمُۥ عِندَ رَسُولِ ٱللَّهِ أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ ٱمۡتَحَنَ ٱللَّهُ قُلُوبَهُمُۥ لِلتَّقۡوَىٰۚ

उनके लिए क्षमा और विशाल पुरस्कार है।

لَهُمُۥ مَغۡفِرَةٞ وَأَجۡرٌ عَظِيمٌ

49:4

जो तुम्हें कक्षों के पीछे से पुकारते हैं, उनमें से अधिकतर बुद्धि से काम नहीं लेते।

إِنَّ ٱلَّذِينَ يُنَادُونَكَ مِن وَرَآءِ ٱلۡحُجُرَٰتِ أَكۡثَرُهُمُۥ لَا يَعۡقِلُونَ

और यदि वे धैर्य रखते, यहाँ तक कि तुम उनकी ओर निकल आते, तो यह उनके लिए बेहतर होता।

وَلَوۡ أَنَّهُمُۥ صَبَرُواْ حَتَّىٰ تَخۡرُجَ إِلَيۡهِمُۥ لَكَانَ خَيۡرٗا لَّهُمُۥۚ

और ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।

وَٱللَّهُ غَفُورٞ رَّحِيمٞ

49:6

हे विश्वास करने वालो! यदि कोई अतिक्रमणकारी तुम्हारे पास कोई सूचना लाए, तो स्पष्ट रूप से भेद करो, कहीं ऐसा न हो कि तुम अज्ञान में किसी क़ौम पर आ पड़ो और जो तुमने किया उस पर पछताने वाले बन जाओ।

يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ إِن جَآءَكُمُۥ فَاسِقُۢ بِنَبَإٖ فَتَبَيَّنُواْ أَن تُصِيبُواْ قَوۡمَۢا بِجَهَٰلَةٖ فَتُصۡبِحُواْ عَلَىٰ مَا فَعَلۡتُمُۥ نَٰدِمِينَ

और जान लो कि ईश्वर का संदेशवाहक तुम्हारे बीच है; यदि वह बहुत-से मामलों में तुम्हारी बात मान लेता, तो तुम कष्ट में पड़ जाते।

وَٱعۡلَمُواْ أَنَّ فِيكُمُۥ رَسُولَ ٱللَّهِۚ لَوۡ يُطِيعُكُمُۥ فِي كَثِيرٖ مِّنَ ٱلۡأَمۡرِ لَعَنِتُّمُۥ

49:7

परंतु ईश्वर ने तुम्हें विश्वास प्रिय बना दिया और उसे तुम्हारे मर्मों में सुशोभित कर दिया, और तुममें नकार, अतिक्रमण और अवज्ञा के प्रति अरुचि जगा दी।

وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ حَبَّبَ إِلَيۡكُمُ ٱلۡإِيمَٰنَ وَزَيَّنَهُۥ فِي قُلُوبِكُمُۥ وَكَرَّهَ إِلَيۡكُمُ ٱلۡكُفۡرَ وَٱلۡفُسُوقَ وَٱلۡعِصۡيَانَۚ

यही वे हैं जो सुबुद्धि वाले हैं, ईश्वर के अनुग्रह और उपकार से।

أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلرَّٰشِدُونَ فَضۡلٗا مِّنَ ٱللَّهِ وَنِعۡمَةٗۚ

और ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।

وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٞ

49:9

और यदि विश्वास करने वालों के दो समूह आपस में लड़ पड़ें, तो उनमें मेल करा दो।

وَإِن طَآئِفَتَانِ مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ ٱقۡتَتَلُواْ فَأَصۡلِحُواْ بَيۡنَهُمَاۖ

49:9

यदि उन दोनों में से एक समूह दूसरे पर ज़्यादती करे, तो ज़्यादती करने वाले से लड़ो, यहाँ तक कि वह ईश्वर के आदेश की ओर आ जाए।

فَإِنۢ بَغَتۡ إِحۡدَىٰهُمَا عَلَى ٱلۡأُخۡرَىٰ فَقَٰتِلُواْ ٱلَّتِي تَبۡغِي حَتَّىٰ تَفِيٓءَ ا۪لَىٰ أَمۡرِ ٱللَّهِۚ

49:9

यदि वह आ जाए, तो न्याय के साथ उनमें मेल करा दो, और निष्पक्ष रहो,

فَإِن فَآءَتۡ فَأَصۡلِحُواْ بَيۡنَهُمَا بِٱلۡعَدۡلِ وَأَقۡسِطُواْۖ

49:9

क्योंकि ईश्वर निष्पक्षों से प्रेम करता है।

إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلۡمُقۡسِطِينَ

49:10

विश्वास करने वाले तो केवल भाई हैं; अतः अपने दोनों भाइयों में मेल करा दो।

إِنَّمَا ٱلۡمُؤۡمِنُونَ إِخۡوَةٞ فَأَصۡلِحُواْ بَيۡنَ أَخَوَيۡكُمُۥۚ

49:10

और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, शायद तुम पर दया की जाए।

وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ لَعَلَّكُمُۥ تُرۡحَمُونَ

49:11

हे विश्वास करने वालो! कोई क़ौम किसी क़ौम का उपहास न करे: संभव है वे उनसे बेहतर हों; और न स्त्रियाँ स्त्रियों का उपहास करें: संभव है वे उनसे बेहतर हों।

يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا يَسۡخَرۡ قَوۡمٞ مِّن قَوۡمٍ عَسَىٰ أَن يَكُونُواْ خَيۡرٗا مِّنۡهُمُۥ وَلَا نِسَآءٞ مِّن نِّسَآءٍ عَسَىٰ أَن يَكُنَّ خَيۡرٗا مِّنۡهُنَّۖ

और कटाक्षों से अपनों की निंदा मत करो, और एक-दूसरे को चिढ़ाने वाले उपनाम मत दो।

وَلَا تَلۡمِزُواْ أَنفُسَكُمُۥ وَلَآ تَّنَابَزُواْ بِٱلۡأَلۡقَٰبِۖ

49:11

विश्वास के बाद अतिक्रमण कितना निकृष्ट गुण है!

بِئۡسَ ٱلِٱسۡمُ ٱلۡفُسُوقُ بَعۡدَ ٱلۡإِيمَٰنِۚ

और जो पश्चात्ताप नहीं करता, वही अन्यायी हैं।

وَمَن لَّمۡ يَتُبۡ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلظَّٰلِمُونَ

49:12

हे विश्वास करने वालो! बहुत-से अनुमानों से बचो,

يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱجۡتَنِبُواْ كَثِيرٗا مِّنَ ٱلظَّنِّ

49:12

क्योंकि कुछ अनुमान अपराध हैं।

إِنَّ بَعۡضَ ٱلظَّنِّ إِثۡمٞۖ

49:12

और जासूसी मत करो।

وَلَآ تَّجَسَّسُواْ

49:12

और तुममें से कोई किसी की पीठ पीछे बुराई न करे।

وَلَا يَغۡتَب بَّعۡضُكُمُۥ بَعۡضًاۚ

49:12

क्या तुममें से किसी को यह प्रिय होगा कि वह अपने मृत भाई का मांस खाए? तुम्हें उससे अरुचि होती।

أَيُحِبُّ أَحَدُكُمُۥ أَن يَأۡكُلَ لَحۡمَ أَخِيهِۦ مَيۡتٗا فَكَرِهۡتُمُوهُۥۚ

49:12

और ईश्वर के प्रति सावधान रहो,

وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَۚ

क्योंकि ईश्वर निरंतर पलट आने वाला, दयालु है।

إِنَّ ٱللَّهَ تَوَّابٞ رَّحِيمٞ

49:13

हे लोगो! हमने तुम्हें नर और मादा रचा, और हमने तुम्हें राष्ट्र और क़बीले बनाया, ताकि तुम एक-दूसरे को पहचानो।

يَٰأَيُّهَا ٱلنَّاسُ إِنَّا خَلَقۡنَٰكُمُۥ مِن ذَكَرٖ وَأُنثَىٰ وَجَعَلۡنَٰكُمُۥ شُعُوبٗا وَقَبَآئِلَ لِتَّعَارَفُواْۚ

49:13

ईश्वर के पास तुममें सबसे सम्मानित निश्चय ही वह है जो सबसे अधिक सावधानी बरतता है,

إِنَّ أَكۡرَمَكُمُۥ عِندَ ٱللَّهِ أَتۡقَىٰكُمُۥۚ

क्योंकि ईश्वर सर्वज्ञ, पूरी ख़बर रखने वाला है।

إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمٌ خَبِيرٞ

49:14

प्रतिष्ठित जनों ने कहा: “हमने विश्वास किया।” कहो: “तुमने विश्वास नहीं किया; बल्कि कहो: ‘हम ईश्वर के प्रति खरे हो गए हैं’, क्योंकि विश्वास अभी तुम्हारे मर्मों में प्रविष्ट नहीं हुआ।

۞ قَالَتِ ٱلۡأَعۡرَابُ ءَامَنَّاۖ قُل لَّمۡ تُؤۡمِنُواْ وَلَٰكِن قُولُواْ أَسۡلَمۡنَا وَلَمَّا يَدۡخُلِ ٱلۡإِيمَٰنُ فِي قُلُوبِكُمُۥۖ

49:14

और यदि तुम ईश्वर और उसके संदेशवाहक की बात मानो, तो वह तुम्हारे कर्मों में से कुछ भी घटाएगा नहीं,

وَإِن تُطِيعُواْ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ لَا يَلِتۡكُمُۥ مِنۡ أَعۡمَٰلِكُمُۥ شَيۡـًٔاۚ

क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।”

إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٌ

विश्वास करने वाले तो केवल वही हैं जिन्होंने ईश्वर और उसके संदेशवाहक पर विश्वास किया, फिर संदेह नहीं किया, और जिन्होंने अपनी संपत्ति और अपने स्व से ईश्वर की राह में संघर्ष किया।

إِنَّمَا ٱلۡمُؤۡمِنُونَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ ثُمَّ لَمۡ يَرۡتَابُواْ وَجَٰهَدُواْ بِأَمۡوَٰلِهِمُۥ وَأَنفُسِهِمُۥ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِۚ

यही सच्चे हैं।

أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلصَّٰدِقُونَ

कहो: “क्या तुम ईश्वर को अपने विधान की सूचना देना चाहते हो, जबकि ईश्वर जानता है जो आकाशों में है और जो धरती पर है?

قُلۡ أَتُعَلِّمُونَ ٱللَّهَ بِدِينِكُمُۥ وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۚ

और ईश्वर हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।”

وَٱللَّهُ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٞ

49:17

वे समझते हैं कि ईश्वर के प्रति खरे हो जाने से वे तुम पर कृपा कर रहे हैं।

يَمُنُّونَ عَلَيۡكَ أَنۡ أَسۡلَمُواْۖ

49:17

कहो: “यह मत समझो कि ईश्वर के प्रति अपने खरेपन से तुम मुझ पर कृपा कर रहे हो।

قُل لَّا تَمُنُّواْ عَلَيَّ إِسۡلَٰمَكُمُۥۖ

49:17

बल्कि ईश्वर तुम पर कृपा करता है कि उसने तुम्हें विश्वास की ओर मार्ग दिखाया, यदि तुम सच्चे हो।”

بَلِ ٱللَّهُ يَمُنُّ عَلَيۡكُمُۥ أَنۡ هَدَىٰكُمُۥ لِلۡإِيمَٰنِ إِن كُنتُمُۥ صَٰدِقِينَ

49:18

ईश्वर आकाशों और धरती में जो इंद्रियों से परे है उसे निश्चय ही जानता है।

إِنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ غَيۡبَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ

49:18

और ईश्वर तुम जो करते हो उस पर दृष्टि रखता है।

وَٱللَّهُ بَصِيرُۢ بِمَا يَعۡمَلُونَ

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