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Hud
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ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। अलिफ़. लाम. रा.
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ الٓرۚ
एक ग्रंथ जिसके संकेत अखंडनीय बनाए गए, फिर विस्तृत किए गए, एक प्रज्ञावान, पूरी ख़बर रखने वाले की ओर से: “केवल ईश्वर की आज्ञा का पालन करो; मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से एक चेतावनी देने वाला और एक शुभ समाचार देने वाला हूँ; अपने अभिभावक से क्षमा माँगो, फिर उसकी ओर पलट आओ: वह तुम्हें एक नामित अवधि तक सुंदर उपभोग कराएगा, और वह हर अनुग्रह रखने वाले को उसका अनुग्रह देगा।
كِتَٰبٌ أُحۡكِمَتۡ ءَايَٰتُهُۥ ثُمَّ فُصِّلَتۡ مِن لَّدُنۡ حَكِيمٍ خَبِيرٍ أَلَّا تَعۡبُدُواْ إِلَّا ٱللَّهَۚ إِنَّنِي لَكُمُۥ مِنۡهُۥ نَذِيرٞ وَبَشِيرٞ وَأَنِ ٱسۡتَغۡفِرُواْ رَبَّكُمُۥ ثُمَّ تُوبُواْ إِلَيۡهِۦ يُمَتِّعۡكُمُۥ مَتَٰعًا حَسَنًا إِلَىٰ أَجَلٖ مُّسَمّٗى وَيُؤۡتِ كُلَّ ذِي فَضۡلٖ فَضۡلَهُۥۖ
परंतु यदि तुम पीठ फेर लो, तो मैं तुम्हारे लिए एक बड़े दिन के दंड से निश्चय ही डरता हूँ।”
وَإِن تَوَلَّوۡاْ فَإِنِّيَ أَخَافُ عَلَيۡكُمُۥ عَذَابَ يَوۡمٖ كَبِيرٍ
ईश्वर की ही ओर तुम्हारा लौटना है,
إِلَى ٱللَّهِ مَرۡجِعُكُمُۥۖ
और वह हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।
وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٌ
क्या ऐसा नहीं है: वे अपने सीने निश्चय ही मोड़ते हैं ताकि उससे छिप जाएँ।
أَلَا إِنَّهُمُۥ يَثۡنُونَ صُدُورَهُمُۥ لِيَسۡتَخۡفُواْ مِنۡهُۥۚ
क्या ऐसा नहीं कि जब वे अपने वस्त्रों से स्वयं को ढकते हैं, तब वह जानता है जो वे गुप्त रखते हैं और जो वे उजागर करते हैं?
أَلَا حِينَ يَسۡتَغۡشُونَ ثِيَابَهُمُۥ يَعۡلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعۡلِنُونَۚ
वह सीनों के भीतर जो है उसके विषय में सर्वज्ञ है।
إِنَّهُۥ عَلِيمُۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ
धरती पर कोई चलने-फिरने वाला नहीं जिसकी जीविका ईश्वर के ज़िम्मे न हो; वह उसका विश्राम-स्थल और उसका जमा-स्थान जानता है:
۞ وَمَا مِن دَآبَّةٖ فِي ٱلۡأَرۡضِ إِلَّا عَلَى ٱللَّهِ رِزۡقُهَا وَيَعۡلَمُ مُسۡتَقَرَّهَا وَمُسۡتَوۡدَعَهَاۚ
सब कुछ एक स्पष्ट बही में है।
كُلّٞ فِي كِتَٰبٖ مُّبِينٖ
और वही है जिसने आकाशों और धरती को छह दिनों में रचा, जबकि उसका भवन पानी पर आधारित था, ताकि तुम्हें परखे कि तुममें से कौन सबसे अच्छा कर्म करता है।
وَهُوَ ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ فِي سِتَّةِ أَيَّامٖ وَكَانَ عَرۡشُهُۥ عَلَى ٱلۡمَآءِ لِيَبۡلُوَكُمُۥ أَيُّكُمُۥ أَحۡسَنُ عَمَلٗاۗ
और यदि तुम कहो: “मृत्यु के बाद तुम उठाए जाओगे”, तो नकारने वाले अवश्य कहेंगे: “यह केवल एक स्पष्ट भ्रम है।”
وَلَئِن قُلۡتَ إِنَّكُمُۥ مَبۡعُوثُونَ مِنۢ بَعۡدِ ٱلۡمَوۡتِ لَيَقُولَنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ إِنۡ هَٰذَا إِلَّا سِحۡرٞ مُّبِينٞ
और यदि हम उनसे दंड को एक गिने हुए समय तक पीछे कर दें, तो वे अवश्य कहेंगे: “उसे क्या रोके हुए है?”
وَلَئِنۡ أَخَّرۡنَا عَنۡهُمُ ٱلۡعَذَابَ إِلَىٰ أُمَّةٖ مَّعۡدُودَةٖ لَّيَقُولُنَّ مَا يَحۡبِسُهُۥۗ
क्या ऐसा नहीं कि जिस दिन वह उनके पास आएगा, वह उनसे हटाया नहीं जाएगा,
أَلَا يَوۡمَ يَأۡتِيهِمُۥ لَيۡسَ مَصۡرُوفًا عَنۡهُمُۥ
और जिसका वे मज़ाक़ उड़ाते थे, वह उन्हें लपेट लेगा।
وَحَاقَ بِهِمُۥ مَا كَانُواْ بِهِۦ يَسۡتَهۡزِءُونَ
और यदि हम मनुष्य को अपनी ओर से कोई दया चखाएँ, फिर उसे उससे वापस ले लें, तो वह अवश्य आशाहीन, बड़ा नकारने वाला हो जाता है।
وَلَئِنۡ أَذَقۡنَا ٱلۡإِنسَٰنَ مِنَّا رَحۡمَةٗ ثُمَّ نَزَعۡنَٰهَا مِنۡهُۥ إِنَّهُۥ لَيَـُٔوسٞ كَفُورٞ
और यदि हम उसे उस हानि के बाद जो उसे छू गई थी, कोई उपकार चखाएँ, तो वह अवश्य कहेगा: “बुरे कर्म मुझसे दूर चले गए”:
وَلَئِنۡ أَذَقۡنَٰهُۥ نَعۡمَآءَ بَعۡدَ ضَرَّآءَ مَسَّتۡهُۥ لَيَقُولَنَّ ذَهَبَ ٱلسَّيِّـَٔاتُ عَنِّيۚ
वह अवश्य आनंदित, डींग हाँकने वाला है।
إِنَّهُۥ لَفَرِحٞ فَخُورٌ
सिवा उनके जिन्होंने धैर्य रखा और भले कर्म किए: उन्हीं के लिए क्षमा और बड़ा पुरस्कार है।
إِلَّا ٱلَّذِينَ صَبَرُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ أُوْلَٰٓئِكَ لَهُمُۥ مَغۡفِرَةٞ وَأَجۡرٞ كَبِيرٞ
शायद तुम उसका कुछ भाग त्याग दो जो तुम पर प्रकट किया जा रहा है, और तुम्हारा सीना उससे तंग हो जाएगा, इसलिए कि वे कहते हैं: “उस पर कोई कोष क्यों नहीं उतारा गया, या उसके साथ कोई अभिकर्ता क्यों नहीं आया!”
فَلَعَلَّكَ تَارِكُۢ بَعۡضَ مَا يُوحَىٰ إِلَيۡكَ وَضَآئِقُۢ بِهِۦ صَدۡرُكَ أَن يَقُولُواْ لَوۡلَا أُنزِلَ عَلَيۡهِۦ كَنزٌ أَوۡ جَآءَ مَعَهُۥ مَلَكٌۚ
तुम तो केवल एक चेतावनी देने वाले हो;
إِنَّمَا أَنتَ نَذِيرٞۚ
और ईश्वर हर चीज़ पर मुख़्तार है।
وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ وَكِيلٌ
या वे कहेंगे: “उसने इसे गढ़ लिया है”?
أَمۡ يَقُولُونَ ٱفۡتَرَىٰهُۥۖ
कहो: “तो इसके जैसी गढ़ी हुई दस सूराएँ ले आओ, और ईश्वर के अतिरिक्त जिन्हें बुला सको बुला लो, यदि तुम सच्चे हो।”
قُلۡ فَأۡتُواْ بِعَشۡرِ سُوَرٖ مِّثۡلِهِۦ مُفۡتَرَيَٰتٖ وَٱدۡعُواْ مَنِ ٱسۡتَطَعۡتُمُۥ مِن دُونِ ٱللَّهِ إِن كُنتُمُۥ صَٰدِقِينَ
यदि वे तुम्हें उत्तर न दें, तो जान लो कि यह केवल ईश्वर के ज्ञान से उतारा गया है, और यह कि उसके सिवा कोई देवता नहीं।
فَإِلَّمۡ يَسۡتَجِيبُواْ لَكُمُۥ فَٱعۡلَمُواْ أَنَّمَا أُنزِلَ بِعِلۡمِ ٱللَّهِ وَأَن لَّا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ
तो क्या तुम ईश्वर के प्रति खरे होगे?
فَهَلۡ أَنتُمُۥ مُسۡلِمُونَ
जो कोई इहलोक का जीवन और उसका शृंगार चाहता है, हम उसके कर्मों का फल उसे इसी जीवन में पूरा देते हैं, और उसमें उसे वंचित नहीं किया जाएगा:
مَن كَانَ يُرِيدُ ٱلۡحَيَوٰةَ ٱلدُّنۡيَا وَزِينَتَهَا نُوَفِّ إِلَيۡهِمُۥ أَعۡمَٰلَهُمُۥ فِيهَا وَهُمُۥ فِيهَا لَا يُبۡخَسُونَ
ये वे हैं जिनके लिए अंतिम जीवन में आग के सिवा कुछ नहीं;
أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ لَيۡسَ لَهُمُۥ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ إِلَّا ٱلنَّارُۖ
जो उन्होंने उसमें किया था वह ढह चुका होगा,
وَحَبِطَ مَا صَنَعُواْ فِيهَا
और जो वे करते थे वह व्यर्थ होगा।
وَبَٰطِلٞ مَّا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ
क्या वह जो अपने अभिभावक की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण पर आधारित है, और जिसके पीछे उसकी ओर से एक साक्षी आता है?
أَفَمَن كَانَ عَلَىٰ بَيِّنَةٖ مِّن رَّبِّهِۦ وَيَتۡلُوهُۥ شَاهِدٞ مِّنۡهُۥ
और उससे पहले मूसा का ग्रंथ, एक संदर्भ और दया के रूप में।
وَمِن قَبۡلِهِۦ كِتَٰبُ مُوسَىٰ إِمَامٗا وَرَحۡمَةًۚ
ये वे हैं जो उस पर विश्वास करते हैं।
أُوْلَٰٓئِكَ يُؤۡمِنُونَ بِهِۦۚ
और दलों में से जो कोई उसे नकारता है, आग उसका वादे का समय है:
وَمَن يَكۡفُرۡ بِهِۦ مِنَ ٱلۡأَحۡزَابِ فَٱلنَّارُ مَوۡعِدُهُۥۚ
तो उसके विषय में वाद-प्रतिवाद में न पड़ो,
فَلَا تَكُ فِي مِرۡيَةٖ مِّنۡهُۥۚ
क्योंकि यह तुम्हारे अभिभावक की ओर से आया सत्य है, परंतु अधिकतर लोग विश्वास नहीं करते।
إِنَّهُ ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّكَ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يُؤۡمِنُونَ
और उससे अधिक अन्यायी कौन है जो ईश्वर के विरुद्ध झूठ गढ़ता है?
وَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّنِ ٱفۡتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًاۚ
ये वे हैं जो अपने अभिभावक के सामने प्रस्तुत किए जाएँगे, और साक्षी कहेंगे: “ये वे हैं जिन्होंने अपने अभिभावक के विरुद्ध झूठ बोला!”
أُوْلَٰٓئِكَ يُعۡرَضُونَ عَلَىٰ رَبِّهِمُۥ وَيَقُولُ ٱلۡأَشۡهَٰدُ هَٰؤُلَآءِ ٱلَّذِينَ كَذَبُواْ عَلَىٰ رَبِّهِمُۥۚ
क्या ऐसा नहीं कि ईश्वर का धिक्कार अन्यायियों पर है, जो ईश्वर की राह रोकते हैं और उसे टेढ़ी करने की खोज में रहते हैं, और जो अंतिम जीवन को नकारते हैं?
أَلَا لَعۡنَةُ ٱللَّهِ عَلَى ٱلظَّٰلِمِينَ ٱلَّذِينَ يَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَيَبۡغُونَهَا عِوَجٗا وَهُمُۥ بِٱلۡأٓخِرَةِ هُمُۥ كَٰفِرُونَ
ये वे हैं जो धरती पर उसे असमर्थ नहीं कर सकेंगे, और ईश्वर के अतिरिक्त उनका कोई हिमायती न होगा:
أُوْلَٰٓئِكَ لَمۡ يَكُونُواْ مُعۡجِزِينَ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَمَا كَانَ لَهُمُۥ مِن دُونِ ٱللَّهِ مِنۡ أَوۡلِيَآءَۘ
उनका दंड दोगुना किया जाएगा।
يُضَعَّفُ لَهُمُ ٱلۡعَذَابُۚ
वे न सुन सकते थे, न साफ़ देख सकते थे।
مَا كَانُواْ يَسۡتَطِيعُونَ ٱلسَّمۡعَ وَمَا كَانُواْ يُبۡصِرُونَ
ये वे हैं जिन्होंने अपने स्व को घाटे में डाल दिया, और जो वे गढ़ते थे वह उनसे दूर भटक गया।
أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ خَسِرُواْ أَنفُسَهُمُۥ وَضَلَّ عَنۡهُمُۥ مَا كَانُواْ يَفۡتَرُونَ
अटल रूप से, अंतिम जीवन में वही सबसे बढ़कर घाटा उठाने वाले हैं।
لَا جَرَمَ أَنَّهُمُۥ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ هُمُ ٱلۡأَخۡسَرُونَ
जिन्होंने विश्वास किया, भले कर्म किए और अपने अभिभावक के सामने झुक गए: यही उद्यान वाले हैं,
إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ وَأَخۡبَتُواْ إِلَىٰ رَبِّهِمُۥ أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَنَّةِۖ
जहाँ वे सदा रहेंगे।
هُمُۥ فِيهَا خَٰلِدُونَ
दोनों भागों का उदाहरण ऐसा है जैसे अंधा और बहरा, और दृष्टिवान और सुनने वाला:
۞ مَثَلُ ٱلۡفَرِيقَيۡنِ كَٱلۡأَعۡمَىٰ وَٱلۡأَصَمِّ وَٱلۡبَصِيرِ وَٱلسَّمِيعِۚ
क्या वे उदाहरण में बराबर हैं?
هَلۡ يَسۡتَوِيَانِ مَثَلًاۚ
तो क्या तुम स्मरण नहीं करते?
أَفَلَا تَذَّكَّرُونَ
हमने निश्चय ही नूह को उसकी क़ौम की ओर भेजा:
وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوۡمِهِۦ
“मैं तुम्हारे लिए एक स्पष्ट चेतावनी देने वाला हूँ:
أَنِّي لَكُمُۥ نَذِيرٞ مُّبِينٌ
केवल ईश्वर की आज्ञा का पालन करो;
أَن لَّا تَعۡبُدُواْ إِلَّا ٱللَّهَۖ
क्योंकि मैं तुम्हारे लिए एक पीड़ादायक दिन के दंड से डरता हूँ।”
إِنِّيَ أَخَافُ عَلَيۡكُمُۥ عَذَابَ يَوۡمٍ أَلِيمٖ
उसकी क़ौम में से जो नकारते थे, उनके दरबार ने कहा: “हम तुम्हें केवल अपने जैसा एक मानव देखते हैं, और हम किसी को तुम्हारे पीछे चलते नहीं देखते, सिवा उनके जो हममें से सबसे निम्न हैं, पहली दृष्टि में।
فَقَالَ ٱلۡمَلَأُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِن قَوۡمِهِۦ مَا نَرَىٰكَ إِلَّا بَشَرٗا مِّثۡلَنَا وَمَا نَرَىٰكَ ٱتَّبَعَكَ إِلَّا ٱلَّذِينَ هُمُۥ أَرَاذِلُنَا بَادِيَ ٱلرَّأۡيِ
और हम तुममें अपने ऊपर कोई अनुग्रह नहीं देखते; बल्कि हम तुम्हारे झूठे होने का अनुमान लगाते हैं।”
وَمَا نَرَىٰ لَكُمُۥ عَلَيۡنَا مِن فَضۡلِۭ بَلۡ نَظُنُّكُمُۥ كَٰذِبِينَ
उसने कहा: “हे मेरी क़ौम, क्या तुमने देखा? यदि मैं अपने अभिभावक के एक स्पष्ट प्रमाण पर आधारित हूँ, और उसने मुझे अपनी ओर से एक दया दी है, और वह तुम्हारे लिए अस्पष्ट हो गई है, तो क्या हम उसे तुम पर थोप दें, जबकि तुम्हें उससे अरुचि है?
قَالَ يَٰقَوۡمِ أَرَءَيۡتُمُۥ إِن كُنتُ عَلَىٰ بَيِّنَةٖ مِّن رَّبِّي وَءَاتَىٰنِي رَحۡمَةٗ مِّنۡ عِندِهِۦ فَعَمِيَتۡ عَلَيۡكُمُۥ أَنُلۡزِمُكُمُوهَا وَأَنتُمُۥ لَهَا كَٰرِهُونَ
हे मेरी क़ौम, मैं इसके लिए तुमसे कोई धन नहीं माँगता:
وَيَٰقَوۡمِ لَا أَسۡـَٔلُكُمُۥ عَلَيۡهِۦ مَالًاۖ
मेरा पुरस्कार केवल ईश्वर के ज़िम्मे है।
إِنۡ أَجۡرِي إِلَّا عَلَى ٱللَّهِۚ
और मैं उनमें से नहीं जो विश्वास करने वालों को ठुकराते हैं: वे अपने अभिभावक से निश्चय ही मिलेंगे;
وَمَا أَنَا۠ بِطَارِدِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْۚ إِنَّهُمُۥ مُلَٰقُواْ رَبِّهِمُۥ
परंतु मैं तुम्हें एक अज्ञानी क़ौम देखता हूँ।
وَلَٰكِنِّي أَرَىٰكُمُۥ قَوۡمٗا تَجۡهَلُونَ
हे मेरी क़ौम, ईश्वर के विरुद्ध मेरी सहायता कौन करता, यदि मैं उन्हें ठुकरा देता?
وَيَٰقَوۡمِ مَن يَنصُرُنِي مِنَ ٱللَّهِ إِن طَرَدتُّهُمُۥۚ
तो क्या तुम स्मरण नहीं करते?
أَفَلَا تَذَّكَّرُونَ
और मैं तुमसे नहीं कहता कि मेरे पास ईश्वर के भंडार हैं, न यह कि मैं उसे जानता हूँ जो इंद्रियों से परे है, न यह कि मैं एक अभिकर्ता हूँ;
وَلَا أَقُولُ لَكُمُۥ عِندِي خَزَآئِنُ ٱللَّهِ وَلَا أَعۡلَمُ ٱلۡغَيۡبَ وَلَا أَقُولُ إِنِّي مَلَكٞ
और मैं उनके विषय में, जिन्हें तुम्हारी आँखें तुच्छ समझती हैं, यह नहीं कहता कि ईश्वर उन्हें कोई अच्छाई नहीं देगा:
وَلَا أَقُولُ لِلَّذِينَ تَزۡدَرِي أَعۡيُنُكُمُۥ لَن يُؤۡتِيَهُمُ ٱللَّهُ خَيۡرًاۖ
ईश्वर उसे सबसे अच्छी तरह जानता है जो उनके स्वों में है।
ٱللَّهُ أَعۡلَمُ بِمَا فِي أَنفُسِهِمُۥ
तब तो मैं अवश्य अन्यायियों की गिनती में होता।”
إِنِّي إِذٗا لَّمِنَ ٱلظَّٰلِمِينَ
उन्होंने कहा: “हे नूह, तुमने हमसे बहस की, और बहस बहुत बढ़ा दी; तो हमारे पास वह ले आओ जिसका तुम हमसे वादा करते हो, यदि तुम सच्चों की गिनती में हो।”
قَالُواْ يَٰنُوحُ قَدۡ جَٰدَلۡتَنَا فَأَكۡثَرۡتَ جِدَٰلَنَا فَأۡتِنَا بِمَا تَعِدُنَا إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّٰدِقِينَ
उसने कहा: “उसे तुम्हारे पास केवल ईश्वर लाएगा, यदि उसकी मर्ज़ी हो, और तुम उसे असमर्थ नहीं कर सकोगे।
قَالَ إِنَّمَا يَأۡتِيكُمُۥ بِهِ ٱللَّهُ إِن شَآءَ وَمَا أَنتُمُۥ بِمُعۡجِزِينَ
और मेरा परामर्श तुम्हें कोई लाभ नहीं देगा, चाहे मैं तुम्हें परामर्श देना चाहूँ, यदि ईश्वर तुम्हें दिशाहीन करना चाहे:
وَلَا يَنفَعُكُمُۥ نُصۡحِي إِنۡ أَرَدتُّ أَنۡ أَنصَحَ لَكُمُۥ إِن كَانَ ٱللَّهُ يُرِيدُ أَن يُغۡوِيَكُمُۥۚ
वह तुम्हारा अभिभावक है,
هُوَ رَبُّكُمُۥ
और उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।”
وَإِلَيۡهِۦ تُرۡجَعُونَ
या वे कहेंगे: “उसने इसे गढ़ लिया है”?
أَمۡ يَقُولُونَ ٱفۡتَرَىٰهُۥۖ
कहो: “यदि मैंने इसे गढ़ा है, तो मेरा बहिष्कार मेरे ही ज़िम्मे है, और मैं तुम्हारे बहिष्कार से बरी हूँ।”
قُلۡ إِنِ ٱفۡتَرَيۡتُهُۥ فَعَلَيَّ إِجۡرَامِي وَأَنَا۠ بَرِيٓءٞ مِّمَّا تُجۡرِمُونَ
और नूह पर प्रकट किया गया कि तुम्हारी क़ौम में से कोई अब विश्वास नहीं करेगा, उनके अलावा जो पहले ही विश्वास कर चुके हैं:
وَأُوحِيَ إِلَىٰ نُوحٍ أَنَّهُۥ لَن يُؤۡمِنَ مِن قَوۡمِكَ إِلَّا مَن قَدۡ ءَامَنَ
तो उसके कारण व्यथित न हो जो वे करते थे।
فَلَا تَبۡتَئِسۡ بِمَا كَانُواْ يَفۡعَلُونَ
और जलयान निर्मित करो, हमारी आँखों के सामने और हमारे प्रकटीकरण के अनुसार,
وَٱصۡنَعِ ٱلۡفُلۡكَ بِأَعۡيُنِنَا وَوَحۡيِنَا
और जिन्होंने अन्याय किया उनके विषय में मुझे संबोधित न करो, क्योंकि वे डुबोए जाएँगे।
وَلَا تُخَٰطِبۡنِي فِي ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ إِنَّهُمُۥ مُغۡرَقُونَ
और वह जलयान निर्मित कर रहा था; और जब भी उसकी क़ौम का कोई दरबार उसके पास से गुज़रता, वह उसका उपहास करता।
وَيَصۡنَعُ ٱلۡفُلۡكَ وَكُلَّمَا مَرَّ عَلَيۡهِۦ مَلَأٞ مِّن قَوۡمِهِۦ سَخِرُواْ مِنۡهُۥۚ
उसने कहा: “यदि तुम हमारा उपहास करते हो, तो हम भी तुम्हारा उपहास निश्चय ही करेंगे, जैसे तुम हमारा उपहास करते हो।
قَالَ إِن تَسۡخَرُواْ مِنَّا فَإِنَّا نَسۡخَرُ مِنكُمُۥ كَمَا تَسۡخَرُونَ
तुम शीघ्र जान लोगे कि किस पर ऐसा दंड आएगा जो उसे लज्जा से ढक देगा, और किस पर वह दंड टूट पड़ेगा जो बना रहता है।”
فَسَوۡفَ تَعۡلَمُونَ مَن يَأۡتِيهِۦ عَذَابٞ يُخۡزِيهِۦ وَيَحِلُّ عَلَيۡهِۦ عَذَابٞ مُّقِيمٌ
यहाँ तक कि जब हमारा आदेश आया और तंदूर उबलने लगा, तो हमने कहा: “उसमें हर चीज़ में से एक जोड़े के दो तत्त्व सवार कर लो, और अपने परिवार को भी, उसके सिवा जिस पर पहले का कथन भारी पड़ चुका है, और उन्हें जिन्होंने विश्वास किया।”
حَتَّىٰ إِذَا جَآءَ ا۬مۡرُنَا وَفَارَ ٱلتَّنُّورُ قُلۡنَا ٱحۡمِلۡ فِيهَا مِن كُلِّ زَوۡجَيۡنِ ٱثۡنَيۡنِ وَأَهۡلَكَ إِلَّا مَن سَبَقَ عَلَيۡهِ ٱلۡقَوۡلُ وَمَنۡ ءَامَنَۚ
और उसके साथ विश्वास करने वाले केवल थोड़े ही थे।
وَمَا ءَامَنَ مَعَهُۥ إِلَّا قَلِيلٞ
और उसने कहा: “इसमें सवार हो जाओ: ईश्वर के नाम से इसका चलना और इसका लंगर डालना हो।
۞ وَقَالَ ٱرۡكَبُواْ فِيهَا بِسۡمِ ٱللَّهِ مُجۡرَىٰهَا وَمُرۡسَىٰهَاۚ
मेरा अभिभावक अवश्य अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।”
إِنَّ رَبِّي لَغَفُورٞ رَّحِيمٞ
और वह उन्हें लेकर पहाड़ों जैसी लहरों के बीच चल रहा था।
وَهِيَ تَجۡرِي بِهِمُۥ فِي مَوۡجٖ كَٱلۡجِبَالِ
और नूह ने अपने बेटे को आवाज़ दी, जो एक ओर अलग खड़ा था: “हे मेरे नन्हे, हमारे साथ सवार हो जाओ, और नकारने वालों के साथ न रहो।”
وَنَادَىٰ نُوحٌ ٱبۡنَهُۥ وَكَانَ فِي مَعۡزِلٖ يَٰبُنَيِّ ٱرۡكَب مَّعَنَا وَلَا تَكُن مَّعَ ٱلۡكَٰفِرِينَ
उसने कहा: “मैं किसी पहाड़ की शरण ले लूँगा, जो मुझे पानी से सुरक्षित रखेगा।”
قَالَ سَـَٔاوِي إِلَىٰ جَبَلٖ يَعۡصِمُنِي مِنَ ٱلۡمَآءِۚ
उसने कहा: “आज ईश्वर के आदेश से कोई सुरक्षा नहीं, सिवा उसके जिस पर वह दया करे।”
قَالَ لَا عَاصِمَ ٱلۡيَوۡمَ مِنۡ أَمۡرِ ٱللَّهِ إِلَّا مَن رَّحِمَۚ
और लहर उन दोनों के बीच आ गई, और वह डूबे हुओं की गिनती में हो गया।
وَحَالَ بَيۡنَهُمَا ٱلۡمَوۡجُ فَكَانَ مِنَ ٱلۡمُغۡرَقِينَ
और कहा गया: “हे धरती, अपना पानी निगल लो! हे आकाश, थम जाओ!”
وَقِيلَ يَٰأَرۡضُ ٱبۡلَعِي مَآءَكِ وَيَٰسَمَآءُ اَ۬قۡلِعِي
और पानी घट गया, मामले का फ़ैसला हो गया, और जलयान जूदी पर ठहर गया।
وَغِيضَ ٱلۡمَآءُ وَقُضِيَ ٱلۡأَمۡرُ وَٱسۡتَوَتۡ عَلَى ٱلۡجُودِيِّۖ
और कहा गया: “दूर हो अन्यायियों की क़ौम!”
وَقِيلَ بُعۡدٗا لِّلۡقَوۡمِ ٱلظَّٰلِمِينَ
और नूह ने अपने अभिभावक को पुकारा और कहा: “मेरे अभिभावक, मेरा बेटा निश्चय ही मेरे परिवार में से है, और आपका वादा सत्य है,
وَنَادَىٰ نُوحٞ رَّبَّهُۥ فَقَالَ رَبِّ إِنَّ ٱبۡنِي مِنۡ أَهۡلِي وَإِنَّ وَعۡدَكَ ٱلۡحَقُّ
और आप निर्णय करने वालों में सबसे संतुलित हैं।”
وَأَنتَ أَحۡكَمُ ٱلۡحَٰكِمِينَ
उसने कहा: “हे नूह, वह निश्चय ही तुम्हारे परिवार में से नहीं है,
قَالَ يَٰنُوحُ إِنَّهُۥ لَيۡسَ مِنۡ أَهۡلِكَۖ
क्योंकि उसने वह किया जो भला नहीं है।
إِنَّهُۥ عَمَلٌ غَيۡرُ صَٰلِحٖۖ
तो मुझसे वह न माँगो जिसका तुम्हें कोई ज्ञान नहीं,
فَلَا تَسۡـَٔلَنَّ مَا لَيۡسَ لَكَ بِهِۦ عِلۡمٌۖ
क्योंकि मैं तुम्हें उपदेश देता हूँ कि तुम अज्ञानियों की गिनती में न रहो।”
إِنِّيَ أَعِظُكَ أَن تَكُونَ مِنَ ٱلۡجَٰهِلِينَ
उसने कहा: “मेरे अभिभावक, मैं निश्चय ही स्वयं को आपकी छत्रछाया में रखता हूँ कि आपसे वह न माँगूँ जिसका मुझे कोई ज्ञान नहीं,
قَالَ رَبِّ إِنِّيَ أَعُوذُ بِكَ أَنۡ أَسۡـَٔلَكَ مَا لَيۡسَ لِي بِهِۦ عِلۡمٞۖ
और यदि आप मुझे क्षमा न करें और मुझ पर दया न करें, तो मैं घाटा उठाने वालों की गिनती में हो जाऊँगा।”
وَإِلَّا تَغۡفِرۡ لِي وَتَرۡحَمۡنِي أَكُن مِّنَ ٱلۡخَٰسِرِينَ
कहा गया: “हे नूह, हमारी ओर से शांति के साथ उतरो, और तुम पर तथा तुम्हारे साथ वालों से उपजे समुदायों पर आशीषें हों;
قِيلَ يَٰنُوحُ ٱهۡبِطۡ بِسَلَٰمٖ مِّنَّا وَبَرَكَٰتٍ عَلَيۡكَ وَعَلَىٰ أُمَمٖ مِّمَّن مَّعَكَۚ
और कुछ समुदाय हैं जिन्हें हम उपभोग कराएँगे, फिर हमारी ओर से उन्हें पीड़ादायक दंड छुएगा।”
وَأُمَمٞ سَنُمَتِّعُهُمُۥ ثُمَّ يَمَسُّهُمُۥ مِنَّا عَذَابٌ أَلِيمٞ
ये उसकी सूचनाएँ हैं जो इंद्रियों से परे है, जिन्हें हम तुम पर प्रकट करते हैं:
تِلۡكَ مِنۡ أَنۢبَآءِ ٱلۡغَيۡبِ نُوحِيهَا إِلَيۡكَۖ
तुम इन्हें नहीं जानते थे, न तुम और न तुम्हारी क़ौम, इससे पहले।
مَا كُنتَ تَعۡلَمُهَا أَنتَ وَلَا قَوۡمُكَ مِن قَبۡلِ هَٰذَاۖ
तो धैर्य रखो,
فَٱصۡبِرۡۖ
क्योंकि परिणाम सावधानी बरतने वालों का है।
إِنَّ ٱلۡعَٰقِبَةَ لِلۡمُتَّقِينَ
और आद की ओर, उनका भाई हूद:
وَإِلَىٰ عَادٍ أَخَاهُمُۥ هُودٗاۚ
उसने कहा: “हे मेरी क़ौम! ईश्वर की आज्ञा का पालन करो: तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई देवता नहीं;
قَالَ يَٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَكُمُۥ مِنۡ إِلَٰهٍ غَيۡرُهُۥۖ
तुम केवल गढ़ने वाले हो।
إِنۡ أَنتُمُۥ إِلَّا مُفۡتَرُونَ
हे मेरी क़ौम, मैं इसके लिए तुमसे कोई पुरस्कार नहीं माँगता:
يَٰقَوۡمِ لَا أَسۡـَٔلُكُمُۥ عَلَيۡهِۦ أَجۡرًاۖ
मेरा पुरस्कार केवल उसके ज़िम्मे है जिसने मुझे मूलतः रचा।
إِنۡ أَجۡرِي إِلَّا عَلَى ٱلَّذِي فَطَرَنِيۚ
तो क्या तुम बुद्धि से काम नहीं लेते?
أَفَلَا تَعۡقِلُونَ
हे मेरी क़ौम, अपने अभिभावक से क्षमा माँगो, फिर उसकी ओर पलट आओ: वह तुम पर बरसता आकाश भेजेगा, और तुम्हारे बल में बल बढ़ाएगा; और बहिष्कृत बनकर पीठ न फेरो।”
وَيَٰقَوۡمِ ٱسۡتَغۡفِرُواْ رَبَّكُمُۥ ثُمَّ تُوبُواْ إِلَيۡهِۦ يُرۡسِلِ ٱلسَّمَآءَ عَلَيۡكُمُۥ مِدۡرَارٗا وَيَزِدۡكُمُۥ قُوَّةً إِلَىٰ قُوَّتِكُمُۥ وَلَا تَتَوَلَّوۡاْ مُجۡرِمِينَ
उन्होंने कहा: “हे हूद, तुम हमारे पास कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं लाए, और हम तुम्हारे कथन पर अपने देवताओं को त्यागने वाले नहीं, और हम तुम पर भरोसा करने वाले नहीं।
قَالُواْ يَٰهُودُ مَا جِئۡتَنَا بِبَيِّنَةٖ وَمَا نَحۡنُ بِتَارِكِي ءَالِهَتِنَا عَن قَوۡلِكَ وَمَا نَحۡنُ لَكَ بِمُؤۡمِنِينَ
हम तो केवल यह कहते हैं कि हमारे देवताओं में से किसी ने तुम पर बुराई की चोट की है।”
إِن نَّقُولُ إِلَّا ٱعۡتَرَىٰكَ بَعۡضُ ءَالِهَتِنَا بِسُوٓءٖۗ
उसने कहा: “मैं निश्चय ही ईश्वर को साक्षी बनाता हूँ,
قَالَ إِنِّي أُشۡهِدُ ٱللَّهَ
और तुम भी साक्षी रहो कि मैं उससे बरी हूँ जिसे तुम उसके अतिरिक्त साझी ठहराते हो:
وَٱشۡهَدُواْ أَنِّي بَرِيٓءٞ مِّمَّا تُشۡرِكُونَ مِن دُونِهِۦۖ
तो सब मिलकर मेरे विरुद्ध चाल चलो, और मुझे कोई मोहलत न दो,
فَكِيدُونِي جَمِيعٗا ثُمَّ لَا تُنظِرُونِ
क्योंकि मैं ईश्वर को मुख़्तार बनाता हूँ, जो मेरा अभिभावक है और तुम्हारा भी:
إِنِّي تَوَكَّلۡتُ عَلَى ٱللَّهِ رَبِّي وَرَبِّكُمُۥۚ
कोई चलने-फिरने वाला नहीं जिसे वह माथे के बालों से पकड़े हुए न हो।
مَا مِن دَآبَّةٍ إِلَّا هُوَ ءَاخِذُۢ بِنَاصِيَتِهَاۚ
मेरा अभिभावक सीधे पथ पर है।
إِنَّ رَبِّي عَلَىٰ صِۜرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ
यदि तुम पीठ फेरते हो, तो जिसके साथ मैं तुम्हारी ओर भेजा गया था वह मैं तुम्हें पहुँचा चुका हूँ;
فَإِن تَوَلَّوۡاْ فَقَدۡ أَبۡلَغۡتُكُمُۥ مَا أُرۡسِلۡتُ بِهِۦ إِلَيۡكُمُۥۚ
और मेरा अभिभावक तुम्हारी जगह दूसरी क़ौम को उत्तराधिकारी बनाएगा, बिना इसके कि तुम उसे किसी भी बात में हानि पहुँचाओ,
وَيَسۡتَخۡلِفُ رَبِّي قَوۡمًا غَيۡرَكُمُۥ وَلَا تَضُرُّونَهُۥ شَيۡـًٔاۚ
क्योंकि मेरा अभिभावक हर चीज़ की रक्षा करता है।”
إِنَّ رَبِّي عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٍ حَفِيظٞ
और जब हमारा आदेश आया, तो हमने हूद को और उन्हें जिन्होंने उसके साथ विश्वास किया था, अपनी ओर से एक दया के कारण उबारा, और हमने उन्हें एक कड़े दंड से उबारा।
وَلَمَّا جَآءَ ا۬مۡرُنَا نَجَّيۡنَا هُودٗا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مَعَهُۥ بِرَحۡمَةٖ مِّنَّا وَنَجَّيۡنَٰهُمُۥ مِنۡ عَذَابٍ غَلِيظٖ
और ये आद हैं: उन्होंने अपने अभिभावक के संकेतों को हठपूर्वक अस्वीकार किया, उसके संदेशवाहकों की अवज्ञा की, और हर हठी अत्याचारी के आदेश का अनुसरण किया।
وَتِلۡكَ عَادٞۖ جَحَدُواْ بِـَٔايَٰتِ رَبِّهِمُۥ وَعَصَوۡاْ رُسُلَهُۥ وَٱتَّبَعُواْ أَمۡرَ كُلِّ جَبَّارٍ عَنِيدٖ
और इस इहलोक के जीवन में उनके पीछे एक धिक्कार लगा दिया गया, और पेशी के दिन भी:
وَأُتۡبِعُواْ فِي هَٰذِهِ ٱلدُّنۡيَا لَعۡنَةٗ وَيَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۗ
क्या ऐसा नहीं है: आद ने निश्चय ही अपने अभिभावक को नकारा।
أَلَا إِنَّ عَادٗا كَفَرُواْ رَبَّهُمُۥۗ
दूर हों आद, हूद की क़ौम!
أَلَا بُعۡدٗا لِّعَادٖ قَوۡمِ هُودٖ
और समूद की ओर, उनका भाई सालेह:
۞ وَإِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمُۥ صَٰلِحٗاۚ
उसने कहा: “हे मेरी क़ौम! ईश्वर की आज्ञा का पालन करो: तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई देवता नहीं।
قَالَ يَٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَكُمُۥ مِنۡ إِلَٰهٍ غَيۡرُهُۥۖ
वही है जिसने तुम्हें धरती से उत्पन्न किया और उसमें तुम्हें दीर्घकाल तक जीवन दिया: तो उससे क्षमा माँगो, फिर उसकी ओर पलट आओ,
هُوَ أَنشَأَكُمُۥ مِنَ ٱلۡأَرۡضِ وَٱسۡتَعۡمَرَكُمُۥ فِيهَا فَٱسۡتَغۡفِرُوهُۥ ثُمَّ تُوبُواْ إِلَيۡهِۦۚ
क्योंकि मेरा अभिभावक निकट है, और उत्तर देता है।”
إِنَّ رَبِّي قَرِيبٞ مُّجِيبٞ
उन्होंने कहा: “हे सालेह, इससे पहले तुम हमारे बीच एक आशा थे; क्या तुम हमें उसकी आज्ञा का पालन करने से रोकते हो जिसकी आज्ञा का पालन हमारे पूर्वज करते थे? जिसकी ओर तुम हमें बुलाते हो, उसके विषय में हम अवश्य एक विचलित करने वाली दुविधा में हैं।”
قَالُواْ يَٰصَٰلِحُ قَدۡ كُنتَ فِينَا مَرۡجُوّٗا قَبۡلَ هَٰذَاۖ أَتَنۡهَىٰنَا أَن نَّعۡبُدَ مَا يَعۡبُدُ ءَابَآؤُنَا وَإِنَّنَا لَفِي شَكّٖ مِّمَّا تَدۡعُونَا إِلَيۡهِۦ مُرِيبٖ
उसने कहा: “हे मेरी क़ौम, क्या तुमने देखा? यदि मैं अपने अभिभावक के एक स्पष्ट प्रमाण पर आधारित हूँ, और उसने मुझे अपनी ओर से एक दया दी है, तो ईश्वर के विरुद्ध मेरी सहायता कौन करता, यदि मैं उसकी अवज्ञा करता?
قَالَ يَٰقَوۡمِ أَرَءَيۡتُمُۥ إِن كُنتُ عَلَىٰ بَيِّنَةٖ مِّن رَّبِّي وَءَاتَىٰنِي مِنۡهُۥ رَحۡمَةٗ فَمَن يَنصُرُنِي مِنَ ٱللَّهِ إِنۡ عَصَيۡتُهُۥۖ
तब तुम मेरा घाटा ही बढ़ाते।
فَمَا تَزِيدُونَنِي غَيۡرَ تَخۡسِيرٖ
हे मेरी क़ौम, यह ईश्वर की ऊँटनी है, तुम्हारे लिए एक संकेत:
وَيَٰقَوۡمِ هَٰذِهِۦ نَاقَةُ ٱللَّهِ لَكُمُۥ ءَايَةٗۖ
तो उसे छोड़ दो: वह ईश्वर की धरती पर खाए,
فَذَرُوهَا تَأۡكُلۡ فِي أَرۡضِ ٱللَّهِۖ
और उसे किसी बुराई से न छुओ, नहीं तो एक निकट का दंड तुम्हें पकड़ लेगा।”
وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوٓءٖ فَيَأۡخُذَكُمُۥ عَذَابٞ قَرِيبٞ
परंतु उन्होंने उसका अंग-भंग कर दिया। तब उसने कहा: “अपने ठिकाने में तीन दिन उपभोग कर लो:
فَعَقَرُوهَا فَقَالَ تَمَتَّعُواْ فِي دَارِكُمُۥ ثَلَٰثَةَ أَيَّامٖۖ
यह ऐसा वादा है जिसे झुठलाया नहीं जाएगा।”
ذَٰلِكَ وَعۡدٌ غَيۡرُ مَكۡذُوبٖ
जब हमारा आदेश आया, तो हमने सालेह को और उन्हें जिन्होंने उसके साथ विश्वास किया था, अपनी ओर से एक दया के कारण, और उस दिन की लज्जा से उबारा;
فَلَمَّا جَآءَ ا۬مۡرُنَا نَجَّيۡنَا صَٰلِحٗا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مَعَهُۥ بِرَحۡمَةٖ مِّنَّا وَمِنۡ خِزۡيِ يَوۡمِئِذٍۚ
क्योंकि तुम्हारा अभिभावक बलवान, सर्वशक्तिमान है।
إِنَّ رَبَّكَ هُوَ ٱلۡقَوِيُّ ٱلۡعَزِيزُ
और जिन्होंने अन्याय किया था उन्हें चीख़ ने पकड़ लिया, तो वे अपने ठिकानों में पड़े हुए, निश्चल रह गए, मानो वे वहाँ कभी रहे ही न थे।
وَأَخَذَ ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ ٱلصَّيۡحَةُ فَأَصۡبَحُواْ فِي دِيَٰرِهِمُۥ جَٰثِمِينَ كَأَن لَّمۡ يَغۡنَوۡاْ فِيهَاۗ
क्या ऐसा नहीं है: समूद ने निश्चय ही अपने अभिभावक को नकारा।
أَلَا إِنَّ ثَمُودٗا كَفَرُواْ رَبَّهُمُۥۗ
दूर हों समूद!
أَلَا بُعۡدٗا لِّثَمُودَ
और हमारे संदेशवाहक इब्राहीम के पास शुभ समाचार के साथ निश्चय ही आए: उन्होंने कहा: “शांति!”
وَلَقَدۡ جَآءَتۡ رُسُلُنَا إِبۡرَٰهِيمَ بِٱلۡبُشۡرَىٰ قَالُواْ سَلَٰمٗاۖ
उसने कहा: “शांति!”
قَالَ سَلَٰمٞۖ
और उसने देर नहीं की, एक भुना हुआ बछड़ा ले आया।
فَمَا لَبِثَ أَن جَآءَ بِعِجۡلٍ حَنِيذٖ
परंतु जब उसने देखा कि उनके हाथ उस तक नहीं पहुँचते, तो उसे वे अजीब लगे और उसने उनके प्रति एक डर अनुभव किया।
فَلَمَّا رَءَا أَيۡدِيَهُمُۥ لَا تَصِلُ إِلَيۡهِۦ نَكِرَهُمُۥ وَأَوۡجَسَ مِنۡهُمُۥ خِيفَةٗۚ
उन्होंने कहा: “डरो मत,
قَالُواْ لَا تَخَفۡ
क्योंकि हम लूत की क़ौम की ओर भेजे गए हैं।”
إِنَّا أُرۡسِلۡنَا إِلَىٰ قَوۡمِ لُوطٖ
और उसकी पत्नी, खड़ी हुई, हँस पड़ी;
وَٱمۡرَأَتُهُۥ قَآئِمَةٞ فَضَحِكَتۡ
तब हमने उसे इसहाक़ का शुभ समाचार दिया,
فَبَشَّرۡنَٰهَا بِإِسۡحَٰقَ
और इसहाक़ के बाद याक़ूब का।
وَمِن وَرَآءِ ا۪سۡحَٰقَ يَعۡقُوبُ
उसने कहा: “हाय मुझ पर! क्या मैं जन्म दूँगी, जबकि मैं बूढ़ी हूँ, और यह मेरा पति है, एक बूढ़ा?
قَالَتۡ يَٰوَيۡلَتَىٰ ءَا۬لِدُ وَأَنَا۠ عَجُوزٞ وَهَٰذَا بَعۡلِي شَيۡخًاۖ
यह तो अवश्य आश्चर्य की बात है!”
إِنَّ هَٰذَا لَشَيۡءٌ عَجِيبٞ
उन्होंने कहा: “क्या तुम ईश्वर के आदेश से आश्चर्य करती हो?
قَالُواْ أَتَعۡجَبِينَ مِنۡ أَمۡرِ ٱللَّهِۖ
तुम पर ईश्वर की दया और उसकी आशीषें हों, घर वालो!
رَحۡمَتُ ٱللَّهِ وَبَرَكَٰتُهُۥ عَلَيۡكُمُۥ أَهۡلَ ٱلۡبَيۡتِۚ
क्योंकि वह प्रशंसनीय, गौरवशाली है।”
إِنَّهُۥ حَمِيدٞ مَّجِيدٞ
जब इब्राहीम से घबराहट जाती रही और उसके पास शुभ समाचार आ गया, तो वह लूत की क़ौम के विषय में हमसे बहस करने लगा:
فَلَمَّا ذَهَبَ عَنۡ إِبۡرَٰهِيمَ ٱلرَّوۡعُ وَجَآءَتۡهُ ٱلۡبُشۡرَىٰ يُجَٰدِلُنَا فِي قَوۡمِ لُوطٍ
इब्राहीम अवश्य सहनशील, आहें भरने वाला, निरंतर उसका आसरा लेने वाला है।
إِنَّ إِبۡرَٰهِيمَ لَحَلِيمٌ أَوَّٰهٞ مُّنِيبٞ
“हे इब्राहीम, इससे कतरा जाओ:
يَٰإِبۡرَٰهِيمُ أَعۡرِضۡ عَنۡ هَٰذَاۖ
तुम्हारे अभिभावक का आदेश आ चुका है,
إِنَّهُۥ قَدۡ جَآءَ ا۬مۡرُ رَبِّكَۖ
और उन पर एक ऐसा दंड निश्चय ही आ रहा है जिसे रद्द नहीं किया जा सकता।”
وَإِنَّهُمُۥ ءَاتِيهِمُۥ عَذَابٌ غَيۡرُ مَرۡدُودٖ
और जब हमारे संदेशवाहक लूत के पास आए, तो उनका आना उसे बुरा लगा, और वह उनके विषय में असहाय अनुभव करने लगा, और उसने कहा: “यह एक कष्टदायक दिन है।”
وَلَمَّا جَآءَتۡ رُسُلُنَا لُوطٗا سِيٓءَ بِهِمُۥ وَضَاقَ بِهِمُۥ ذَرۡعٗا وَقَالَ هَٰذَا يَوۡمٌ عَصِيبٞ
और उसकी क़ौम उसके पास दौड़ती हुई आई, जबकि इससे पहले वे बुरे कर्म किया करते थे।
وَجَآءَهُۥ قَوۡمُهُۥ يُهۡرَعُونَ إِلَيۡهِۦ وَمِن قَبۡلُ كَانُواْ يَعۡمَلُونَ ٱلسَّيِّـَٔاتِۚ
उसने कहा: “हे मेरी क़ौम, ये मेरी बेटियाँ हैं: वे तुम्हारे लिए अधिक स्वच्छ हैं; तो ईश्वर के प्रति सावधान रहो, और मेरे अतिथियों के विषय में मुझे लज्जित न करो:
قَالَ يَٰقَوۡمِ هَٰؤُلَآءِ بَنَاتِي هُنَّ أَطۡهَرُ لَكُمُۥۖ فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَلَا تُخۡزُونِ فِي ضَيۡفِيۖ
क्या तुममें कोई सुबुद्ध पुरुष नहीं?”
أَلَيۡسَ مِنكُمُۥ رَجُلٞ رَّشِيدٞ
उन्होंने कहा: “तुम जानते ही हो कि तुम्हारी बेटियों पर हमारा क्या स्वत्व है, और तुम अवश्य जानते हो कि हम क्या चाहते हैं।”
قَالُواْ لَقَدۡ عَلِمۡتَ مَا لَنَا فِي بَنَاتِكَ مِنۡ حَقّٖ وَإِنَّكَ لَتَعۡلَمُ مَا نُرِيدُ
उसने कहा: “काश मुझमें तुम्हारे विरुद्ध कुछ बल होता, या मैं किसी सुदृढ़ आधार की शरण ले पाता!”
قَالَ لَوۡ أَنَّ لِي بِكُمُۥ قُوَّةً أَوۡ ءَاوِي إِلَىٰ رُكۡنٖ شَدِيدٖ
उन्होंने कहा: “हे लूत, हम निश्चय ही तुम्हारे अभिभावक के संदेशवाहक हैं: वे तुम तक कभी नहीं पहुँचेंगे।
قَالُواْ يَٰلُوطُ إِنَّا رُسُلُ رَبِّكَ لَن يَصِلُواْ إِلَيۡكَۖ
तो अपने परिवार को लेकर, अपनी पत्नी के अलावा, रात के एक भाग में चल पड़ो, और तुममें से कोई पीछे न मुड़े,
فَٱسۡرِ بِأَهۡلِكَ بِقِطۡعٖ مِّنَ ٱلَّيۡلِ وَلَا يَلۡتَفِتۡ مِنكُمُۥ أَحَدٌ إِلَّا ٱمۡرَأَتُكَۖ
क्योंकि जो उन पर आने वाला है वह उस पर भी आएगा।
إِنَّهُۥ مُصِيبُهَا مَا أَصَابَهُمُۥۚ
उनका वादे का समय सुबह है:
إِنَّ مَوۡعِدَهُمُ ٱلصُّبۡحُۚ
क्या सुबह निकट नहीं है?”
أَلَيۡسَ ٱلصُّبۡحُ بِقَرِيبٖ
जब हमारा आदेश आया, तो हमने उसके ऊपरी भाग को उसका निचला भाग बना दिया, और उस पर ढली हुई मिट्टी के, तह-दर-तह रखे, तुम्हारे अभिभावक के पास अंकित पत्थर बरसाए:
فَلَمَّا جَآءَ ا۬مۡرُنَا جَعَلۡنَا عَٰلِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمۡطَرۡنَا عَلَيۡهَا حِجَارَةٗ مِّن سِجِّيلٖ مَّنضُودٖ مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَۖ
और वह अन्यायियों से दूर नहीं।
وَمَا هِيَ مِنَ ٱلظَّٰلِمِينَ بِبَعِيدٖ
और मदयन की ओर, उनका भाई शुऐब:
۞ وَإِلَىٰ مَدۡيَنَ أَخَاهُمُۥ شُعَيۡبٗاۚ
उसने कहा: “हे मेरी क़ौम! ईश्वर की आज्ञा का पालन करो: तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई देवता नहीं,
قَالَ يَٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَكُمُۥ مِنۡ إِلَٰهٍ غَيۡرُهُۥۖ
और माप और तुला को न घटाओ।
وَلَا تَنقُصُواْ ٱلۡمِكۡيَالَ وَٱلۡمِيزَانَۖ
मैं तुम्हें निश्चय ही अच्छाई में देखता हूँ, और मैं तुम्हारे लिए एक घेर लेने वाले दिन के दंड से डरता हूँ।
إِنِّي أَرَىٰكُمُۥ بِخَيۡرٖ وَإِنِّيَ أَخَافُ عَلَيۡكُمُۥ عَذَابَ يَوۡمٖ مُّحِيطٖ
हे मेरी क़ौम, माप और तुला को निष्पक्षता से पूरा दो,
وَيَٰقَوۡمِ أَوۡفُواْ ٱلۡمِكۡيَالَ وَٱلۡمِيزَانَ بِٱلۡقِسۡطِۖ
और लोगों को उनकी चीज़ों में वंचित न करो, और धरती पर बिगाड़ने वाले बनकर उपद्रव न फैलाओ।
وَلَا تَبۡخَسُواْ ٱلنَّاسَ أَشۡيَآءَهُمُۥ وَلَا تَعۡثَوۡاْ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُفۡسِدِينَ
जो ईश्वर के पास शेष रहता है वह तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम विश्वास करने वाले हो;
بَقِيَّتُ ٱللَّهِ خَيۡرٞ لَّكُمُۥ إِن كُنتُمُۥ مُؤۡمِنِينَ
और मैं तुम पर रक्षक नहीं हूँ।”
وَمَا أَنَا۠ عَلَيۡكُمُۥ بِحَفِيظٖ
उन्होंने कहा: “हे शुऐब, क्या तुम्हारा संपर्क तुम्हें आदेश देता है कि हम उसे त्याग दें जिसकी आज्ञा का पालन हमारे पूर्वज करते थे, या अपनी संपत्ति के साथ जो हमारी मर्ज़ी हो, वह करना बंद कर दें?
قَالُواْ يَٰشُعَيۡبُ أَصَلَوَٰتُكَ تَأۡمُرُكَ أَن نَّتۡرُكَ مَا يَعۡبُدُ ءَابَآؤُنَا أَوۡ أَن نَّفۡعَلَ فِي أَمۡوَٰلِنَا مَا نَشَٰٓؤُاْۖ
तुम तो अवश्य सहनशील, सुबुद्ध हो!”
اِ۪نَّكَ لَأَنتَ ٱلۡحَلِيمُ ٱلرَّشِيدُ
उसने कहा: “हे मेरी क़ौम, क्या तुमने देखा? यदि मैं अपने अभिभावक के एक स्पष्ट प्रमाण पर आधारित हूँ, और उसने अपनी ओर से मुझे एक सुंदर जीविका दी है…
قَالَ يَٰقَوۡمِ أَرَءَيۡتُمُۥ إِن كُنتُ عَلَىٰ بَيِّنَةٖ مِّن رَّبِّي وَرَزَقَنِي مِنۡهُۥ رِزۡقًا حَسَنٗاۚ
और मैं नहीं चाहता कि तुम्हारा विरोध करके स्वयं वही करूँ जिससे मैं तुम्हें रोकता हूँ:
وَمَا أُرِيدُ أَنۡ أُخَالِفَكُمُۥ إِلَىٰ مَا أَنۡهَىٰكُمُۥ عَنۡهُۥۚ
मैं केवल सुधार चाहता हूँ, जितना मुझसे बन पड़े;
إِنۡ أُرِيدُ إِلَّا ٱلۡإِصۡلَٰحَ مَا ٱسۡتَطَعۡتُۚ
और मेरी सफलता केवल ईश्वर पर निर्भर है:
وَمَا تَوۡفِيقِي إِلَّا بِٱللَّهِۚ
उसी को मैं मुख़्तार बनाता हूँ,
عَلَيۡهِۦ تَوَكَّلۡتُ
और उसी का आसरा लेता हूँ।
وَإِلَيۡهِۦ أُنِيبُ
हे मेरी क़ौम, मुझसे तुम्हारा संबंध टूट जाना तुम्हें इस पर न ले जाए कि तुम पर वह आ पड़े जो नूह की क़ौम पर, या हूद की क़ौम पर, या सालेह की क़ौम पर आ पड़ा;
وَيَٰقَوۡمِ لَا يَجۡرِمَنَّكُمُۥ شِقَاقِيَ أَن يُصِيبَكُمُۥ مِثۡلُ مَا أَصَابَ قَوۡمَ نُوحٍ أَوۡ قَوۡمَ هُودٍ أَوۡ قَوۡمَ صَٰلِحٖۚ
और लूत की क़ौम तुमसे दूर नहीं।
وَمَا قَوۡمُ لُوطٖ مِّنكُمُۥ بِبَعِيدٖ
और अपने अभिभावक से क्षमा माँगो, फिर उसकी ओर पलट आओ,
وَٱسۡتَغۡفِرُواْ رَبَّكُمُۥ ثُمَّ تُوبُواْ إِلَيۡهِۦۚ
क्योंकि मेरा अभिभावक दयालु, स्नेहशील है।”
إِنَّ رَبِّي رَحِيمٞ وَدُودٞ
उन्होंने कहा: “हे शुऐब, तुम जो कहते हो उसका बहुत कुछ हम नहीं समझते, और हम तुम्हें अपने बीच अवश्य निर्बल देखते हैं; यदि तुम्हारा कुटुंब न होता, तो हम तुम्हें निष्कासित कर देते; और तुम्हारी हम पर कोई शक्ति नहीं।”
قَالُواْ يَٰشُعَيۡبُ مَا نَفۡقَهُ كَثِيرٗا مِّمَّا تَقُولُ وَإِنَّا لَنَرَىٰكَ فِينَا ضَعِيفٗاۖ وَلَوۡلَا رَهۡطُكَ لَرَجَمۡنَٰكَۖ وَمَا أَنتَ عَلَيۡنَا بِعَزِيزٖ
उसने कहा: “हे मेरी क़ौम, क्या मेरा कुटुंब तुम्हारे लिए ईश्वर से अधिक भार रखता है, जिसे तुमने अपनी पीठ के पीछे डाल दिया है?
قَالَ يَٰقَوۡمِ أَرَهۡطِيَ أَعَزُّ عَلَيۡكُمُۥ مِنَ ٱللَّهِ وَٱتَّخَذۡتُمُوهُۥ وَرَآءَكُمُۥ ظِهۡرِيًّاۖ
मेरा अभिभावक उसे पूरी तरह घेरे हुए है जो तुम करते हो।
إِنَّ رَبِّي بِمَا تَعۡمَلُونَ مُحِيطٞ
हे मेरी क़ौम, अपनी जगह के अनुसार कर्म करो, क्योंकि मैं भी कर्म करता हूँ:
وَيَٰقَوۡمِ ٱعۡمَلُواْ عَلَىٰ مَكَانَتِكُمُۥ إِنِّي عَٰمِلٞۖ
तुम शीघ्र जान लोगे कि किस पर ऐसा दंड आएगा जो उसे लज्जा से ढक देगा, और कौन झूठा है।
سَوۡفَ تَعۡلَمُونَ مَن يَأۡتِيهِۦ عَذَابٞ يُخۡزِيهِۦ وَمَنۡ هُوَ كَٰذِبٞۖ
और तुम ताक लगाओ,
وَٱرۡتَقِبُواْ
क्योंकि मैं तुम्हारे साथ ताक लगाए हूँ।”
إِنِّي مَعَكُمُۥ رَقِيبٞ
और जब हमारा आदेश आया, तो हमने शुऐब को और उन्हें जिन्होंने उसके साथ विश्वास किया था, अपनी ओर से एक दया के कारण उबारा।
وَلَمَّا جَآءَ ا۬مۡرُنَا نَجَّيۡنَا شُعَيۡبٗا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مَعَهُۥ بِرَحۡمَةٖ مِّنَّا
और जिन्होंने अन्याय किया था उन्हें चीख़ ने पकड़ लिया, तो वे अपने ठिकानों में पड़े हुए, निश्चल रह गए, मानो वे वहाँ कभी रहे ही न थे।
وَأَخَذَتِ ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ ٱلصَّيۡحَةُ فَأَصۡبَحُواْ فِي دِيَٰرِهِمُۥ جَٰثِمِينَ كَأَن لَّمۡ يَغۡنَوۡاْ فِيهَاۗ
दूर हो मदयन, जैसे समूद दूर हुए!
أَلَا بُعۡدٗا لِّمَدۡيَنَ كَمَا بَعِدَتۡ ثَمُودُ
हमने निश्चय ही मूसा को अपने संकेतों और एक स्पष्ट अधिकार के साथ फ़िरऔन और उसके दरबार की ओर भेजा; परंतु उन्होंने फ़िरऔन के आदेश का अनुसरण किया,
وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا مُوسَىٰ بِـَٔايَٰتِنَا وَسُلۡطَٰنٖ مُّبِينٍ إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ وَمَلَإِيْهِۦ فَٱتَّبَعُواْ أَمۡرَ فِرۡعَوۡنَۖ
और फ़िरऔन का आदेश सुबुद्ध न था।
وَمَا أَمۡرُ فِرۡعَوۡنَ بِرَشِيدٖ
वह पेशी के दिन अपनी क़ौम के आगे चलेगा, और उन्हें आग तक पहुँचाएगा:
يَقۡدُمُ قَوۡمَهُۥ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ فَأَوۡرَدَهُمُ ٱلنَّارَۖ
कितना निकृष्ट है वह पहुँचने का स्थान जहाँ पहुँचा जाता है!
وَبِئۡسَ ٱلۡوِرۡدُ ٱلۡمَوۡرُودُ
और इहलोक में उनके पीछे एक धिक्कार लगा दिया गया, और पेशी के दिन भी:
وَأُتۡبِعُواْ فِي هَٰذِهِۦ لَعۡنَةٗ وَيَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۚ
कितनी निकृष्ट सौग़ात है वह जो उन्हें दी गई!
بِئۡسَ ٱلرِّفۡدُ ٱلۡمَرۡفُودُ
ये उन बस्तियों की सूचनाएँ हैं जो हम तुम्हें बताते हैं: उनमें से कुछ खड़ी शेष हैं, और कुछ कटी हुई फ़सल।
ذَٰلِكَ مِنۡ أَنۢبَآءِ ٱلۡقُرَىٰ نَقُصُّهُۥ عَلَيۡكَۖ مِنۡهَا قَآئِمٞ وَحَصِيدٞ
और हमने उन पर अन्याय नहीं किया, परंतु उन्होंने स्वयं पर अन्याय किया:
وَمَا ظَلَمۡنَٰهُمُۥ وَلَٰكِن ظَلَمُواْ أَنفُسَهُمُۥۖ
उनके देवता, जिन्हें वे ईश्वर के अतिरिक्त पुकारते थे, उनके किसी काम न आए जब तुम्हारे अभिभावक का आदेश आया,
فَمَا أَغۡنَتۡ عَنۡهُمُۥ ءَالِهَتُهُمُ ٱلَّتِي يَدۡعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ مِن شَيۡءٖ لَّمَّا جَآءَ ا۬مۡرُ رَبِّكَۖ
और उन्होंने उनका विनाश ही बढ़ाया।
وَمَا زَادُوهُمُۥ غَيۡرَ تَتۡبِيبٖ
यह तुम्हारे अभिभावक की पकड़ है, जब वह बस्तियों को पकड़ता है जबकि वे अन्यायी होती हैं:
وَكَذَٰلِكَ أَخۡذُ رَبِّكَ إِذَا أَخَذَ ٱلۡقُرَىٰ وَهِيَ ظَٰلِمَةٌۚ
उसकी पकड़ निश्चय ही पीड़ादायक, कठोर है।
إِنَّ أَخۡذَهُۥ أَلِيمٞ شَدِيدٌ
इसमें उसके लिए अवश्य एक संकेत है जो अंतिम जीवन के दंड से डरता है:
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّمَنۡ خَافَ عَذَابَ ٱلۡأٓخِرَةِۚ
वह ऐसा दिन है जिसमें लोग एकत्र किए जाएँगे,
ذَٰلِكَ يَوۡمٞ مَّجۡمُوعٞ لَّهُ ٱلنَّاسُ
और वह एक प्रमाणित दिन है।
وَذَٰلِكَ يَوۡمٞ مَّشۡهُودٞ
और हम उसे केवल एक गिनी हुई अवधि तक टालते हैं।
وَمَا نُؤَخِّرُهُۥ إِلَّا لِأَجَلٖ مَّعۡدُودٖ
जिस दिन वह आएगा, कोई स्व उसकी अनुमति के बिना नहीं बोलेगा:
يَوۡمَ يَأۡتِۦ لَا تَكَلَّمُ نَفۡسٌ إِلَّا بِإِذۡنِهِۦۚ
तब अभागा होगा और सौभाग्यशाली।
فَمِنۡهُمُۥ شَقِيّٞ وَسَعِيدٞ
जो अभागे होंगे, वे आग में होंगे, जहाँ उनके लिए हाँफ और सिसकियाँ होंगी, जहाँ वे सदा रहेंगे, जब तक आकाश और धरती टिके रहेंगे, सिवा उसके जो तुम्हारे अभिभावक की मर्ज़ी हो,
فَأَمَّا ٱلَّذِينَ شَقُواْ فَفِي ٱلنَّارِ لَهُمُۥ فِيهَا زَفِيرٞ وَشَهِيقٌ خَٰلِدِينَ فِيهَا مَا دَامَتِ ٱلسَّمَٰوَٰتُ وَٱلۡأَرۡضُ إِلَّا مَا شَآءَ رَبُّكَۚ
क्योंकि तुम्हारा अभिभावक जो चाहता है वह निरंतर करता रहता है।
إِنَّ رَبَّكَ فَعَّالٞ لِّمَا يُرِيدُ
और जो सौभाग्यशाली होंगे, वे उद्यान में होंगे, जहाँ वे सदा रहेंगे, जब तक आकाश और धरती टिके रहेंगे, सिवा उसके जो तुम्हारे अभिभावक की मर्ज़ी हो:
۞ وَأَمَّا ٱلَّذِينَ سَعِدُواْ فَفِي ٱلۡجَنَّةِ خَٰلِدِينَ فِيهَا مَا دَامَتِ ٱلسَّمَٰوَٰتُ وَٱلۡأَرۡضُ إِلَّا مَا شَآءَ رَبُّكَۖ
एक ऐसा अनुदान जो कभी नहीं सूखेगा।
عَطَآءً غَيۡرَ مَجۡذُوذٖ
तो उसके विषय में वाद-प्रतिवाद में न पड़ो जिसकी आज्ञा का पालन ये करते हैं:
فَلَا تَكُ فِي مِرۡيَةٖ مِّمَّا يَعۡبُدُ هَٰؤُلَآءِۚ
वे आज्ञा का पालन केवल वैसे ही करते हैं जैसे उनके पूर्वज पहले करते थे।
مَا يَعۡبُدُونَ إِلَّا كَمَا يَعۡبُدُ ءَابَآؤُهُمُۥ مِن قَبۡلُۚ
और हम उन्हें उनका भाग अवश्य पूरा देंगे, उसमें कुछ भी घटाए बिना।
وَإِنَّا لَمُوَفُّوهُمُۥ نَصِيبَهُمُۥ غَيۡرَ مَنقُوصٖ
हमने निश्चय ही मूसा को ग्रंथ दिया, और उसमें मतभेद किया गया;
وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا مُوسَى ٱلۡكِتَٰبَ فَٱخۡتُلِفَ فِيهِۦۚ
और यदि तुम्हारे अभिभावक का पहले का बोल न होता, तो उनके बीच फ़ैसला कर दिया गया होता;
وَلَوۡلَا كَلِمَةٞ سَبَقَتۡ مِن رَّبِّكَ لَقُضِيَ بَيۡنَهُمُۥۚ
और वे अवश्य उसके विषय में एक विचलित करने वाली दुविधा में हैं।
وَإِنَّهُمُۥ لَفِي شَكّٖ مِّنۡهُۥ مُرِيبٖ
और तुम्हारा अभिभावक उन सबको अवश्य उनके कर्म पूरे देगा,
وَإِن كُلّٗا لَّمَا لَيُوَفِّيَنَّهُمُۥ رَبُّكَ أَعۡمَٰلَهُمُۥۚ
क्योंकि वह वे जो करते हैं उसकी पूरी ख़बर रखता है।
إِنَّهُۥ بِمَا يَعۡمَلُونَ خَبِيرٞ
तो सीधे रहो, जैसा तुम्हें आदेश दिया गया है, और वे भी जो तुम्हारे साथ पलट आए हैं, और मर्यादा से आगे न निकलो,
فَٱسۡتَقِمۡ كَمَا أُمِرۡتَ وَمَن تَابَ مَعَكَ وَلَا تَطۡغَوۡاْۚ
क्योंकि वह उस पर दृष्टि रखता है जो तुम करते हो।
إِنَّهُۥ بِمَا تَعۡمَلُونَ بَصِيرٞ
और उनकी ओर झुकाव न रखो जिन्होंने अन्याय किया, नहीं तो आग तुम्हें छू लेगी,
وَلَا تَرۡكَنُواْ إِلَى ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ فَتَمَسَّكُمُ ٱلنَّارُ
और तुम्हारा, ईश्वर के अतिरिक्त, कोई हिमायती न होता,
وَمَا لَكُمُۥ مِن دُونِ ٱللَّهِ مِنۡ أَوۡلِيَآءَ
फिर तुम्हारी सहायता नहीं की जाती।
ثُمَّ لَا تُنصَرُونَ
और दिन के दोनों सिरों पर, और रात की निकटवर्ती घड़ियों में संपर्क बनाए रखो,
وَأَقِمِ ٱلصَّلَوٰةَ طَرَفَيِ ٱلنَّهَارِ وَزُلَفٗا مِّنَ ٱلَّيۡلِۚ
क्योंकि भलाइयाँ बुरे कर्मों को मिटा देती हैं:
إِنَّ ٱلۡحَسَنَٰتِ يُذۡهِبۡنَ ٱلسَّيِّـَٔاتِۚ
यह स्मरण करने वालों के लिए एक स्मरण है।
ذَٰلِكَ ذِكۡرَىٰ لِلذَّٰكِرِينَ
और धैर्य रखो,
وَٱصۡبِرۡ
क्योंकि ईश्वर भलाई करने वालों का पुरस्कार नष्ट नहीं होने देता।
فَإِنَّ ٱللَّهَ لَا يُضِيعُ أَجۡرَ ٱلۡمُحۡسِنِينَ
क्या तुमसे पहले की पीढ़ियों में ऐसे अवशेष-धारक न थे जो धरती पर बिगाड़ से रोकते, उन थोड़े-से के सिवा जिन्हें हमने उबारा?
فَلَوۡلَا كَانَ مِنَ ٱلۡقُرُونِ مِن قَبۡلِكُمُۥ أُوْلُواْ بَقِيَّةٖ يَنۡهَوۡنَ عَنِ ٱلۡفَسَادِ فِي ٱلۡأَرۡضِ إِلَّا قَلِيلٗا مِّمَّنۡ أَنجَيۡنَا مِنۡهُمُۥۗ
और जो अन्यायी थे, उन्होंने उसी का अनुसरण किया जिसमें वे विलासिता में जी रहे थे, और वे बहिष्कृत हुए।
وَٱتَّبَعَ ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ مَا أُتۡرِفُواْ فِيهِۦ وَكَانُواْ مُجۡرِمِينَ
और तुम्हारे अभिभावक की प्रकृति में नहीं कि वह बस्तियों को अन्याय से नष्ट कर दे, जबकि वहाँ के निवासी सुधार करते हों।
وَمَا كَانَ رَبُّكَ لِيُهۡلِكَ ٱلۡقُرَىٰ بِظُلۡمٖ وَأَهۡلُهَا مُصۡلِحُونَ
और यदि तुम्हारे अभिभावक की मर्ज़ी होती, तो वह लोगों को एक ही समुदाय बना देता;
وَلَوۡ شَآءَ رَبُّكَ لَجَعَلَ ٱلنَّاسَ أُمَّةٗ وَٰحِدَةٗۖ
परंतु वे मतभेद करते ही रहते हैं, उनके सिवा जिन पर तुम्हारा अभिभावक दया करता है,
وَلَا يَزَالُونَ مُخۡتَلِفِينَ إِلَّا مَن رَّحِمَ رَبُّكَۚ
और इसी के लिए उसने उन्हें रचा है।
وَلِذَٰلِكَ خَلَقَهُمُۥۗ
और तुम्हारे अभिभावक का बोल पूरा हो गया: “मैं अवश्य जहन्नम को प्रच्छन्नों और मनुष्यों से, सबको मिलाकर, भर दूँगा।”
وَتَمَّتۡ كَلِمَةُ رَبِّكَ لَأَمۡلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنَ ٱلۡجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ أَجۡمَعِينَ
और संदेशवाहकों की जो भी सूचनाएँ हम तुम्हें बताते हैं, वही हैं जिनसे हम तुम्हारी चेतना को दृढ़ करते हैं;
وَكُلّٗا نَّقُصُّ عَلَيۡكَ مِنۡ أَنۢبَآءِ ٱلرُّسُلِ مَا نُثَبِّتُ بِهِۦ فُؤَادَكَۚ
और इसमें तुम्हारे पास सत्य आया, और विश्वास करने वालों के लिए उपदेश और स्मरण आया।
وَجَآءَكَ فِي هَٰذِهِ ٱلۡحَقُّ وَمَوۡعِظَةٞ وَذِكۡرَىٰ لِلۡمُؤۡمِنِينَ
और जो विश्वास नहीं करते उनसे कहो: “अपनी जगह के अनुसार कर्म करो; हम कर्म कर रहे हैं; और प्रतीक्षा करो: हम भी निश्चय ही प्रतीक्षा कर रहे हैं।”
وَقُل لِّلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ ٱعۡمَلُواْ عَلَىٰ مَكَانَتِكُمُۥ إِنَّا عَٰمِلُونَ وَٱنتَظِرُواْ إِنَّا مُنتَظِرُونَ
और आकाशों और धरती में जो इंद्रियों से परे है, वह ईश्वर का है,
وَلِلَّهِ غَيۡبُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ
और सारा आदेश उसी की ओर लौटता है:
وَإِلَيۡهِۦ يَرۡجِعُ ٱلۡأَمۡرُ كُلُّهُۥ
अतः उसकी आज्ञा का पालन करो, और उसे मुख़्तार बनाओ:
فَٱعۡبُدۡهُۥ وَتَوَكَّلۡ عَلَيۡهِۦۚ
और तुम्हारा अभिभावक उससे लापरवाह नहीं जो तुम करते हो।
وَمَا رَبُّكَ بِغَٰفِلٍ عَمَّا يَعۡمَلُونَ