النور
An-Nur
The Light
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
यह एक सूरा है जिसे हमने उतारा और जिसे हमने अनिवार्य किया, और जिसमें हमने स्पष्ट संकेत उतारे, शायद तुम स्मरण करो।
سُورَةٌ أَنزَلْنَٰهَا وَفَرَضْنَٰهَا وَأَنزَلْنَا فِيهَآ ءَايَٰتٍۭ بَيِّنَٰتٍۢ لَّعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ
व्यभिचारिणी और व्यभिचारी, उनमें से प्रत्येक को त्वचा पर सौ प्रहार दो,
ٱلزَّانِيَةُ وَٱلزَّانِى فَٱجْلِدُوا۟ كُلَّ وَٰحِدٍۢ مِّنْهُمَا مِا۟ئَةَ جَلْدَةٍۢ
और ईश्वर के विधान में उन दोनों के लिए कोई करुणा तुम्हें न पकड़े, यदि तुम ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास करते हो;
وَلَا تَأْخُذْكُم بِهِمَا رَأْفَةٌۭ فِى دِينِ ٱللَّهِ إِن كُنتُمْ تُؤْمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلْءَاخِرِ
और विश्वास करने वालों का एक समूह उनके दंड का साक्षी बने।
وَلْيَشْهَدْ عَذَابَهُمَا طَآئِفَةٌۭ مِّنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
व्यभिचारी केवल व्यभिचारिणी या साझी ठहराने वाली स्त्री को ही पत्नी बनाता है,
ٱلزَّانِى لَا يَنكِحُ إِلَّا زَانِيَةً أَوْ مُشْرِكَةًۭ
और व्यभिचारिणी को केवल कोई व्यभिचारी या साझी ठहराने वाला ही पत्नी बनाता है;
وَٱلزَّانِيَةُ لَا يَنكِحُهَآ إِلَّا زَانٍ أَوْ مُشْرِكٌۭ
और यह विश्वास करने वालों के लिए वर्जित है।
وَحُرِّمَ ذَٰلِكَ عَلَى ٱلْمُؤْمِنِينَ
और जो वैवाहिक बंधन से सुरक्षित स्त्रियों पर आरोप लगाते हैं, फिर चार साक्षी नहीं लाते, उन्हें त्वचा पर अस्सी प्रहार दो,
وَٱلَّذِينَ يَرْمُونَ ٱلْمُحْصَنَٰتِ ثُمَّ لَمْ يَأْتُوا۟ بِأَرْبَعَةِ شُهَدَآءَ فَٱجْلِدُوهُمْ ثَمَٰنِينَ جَلْدَةًۭ
और उनका साक्ष्य फिर कभी स्वीकार न करो — वही अतिक्रमणकारी हैं, उन्हें छोड़कर जो इसके बाद पलट आए और जिन्होंने स्वयं को सुधार लिया, क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
وَلَا تَقْبَلُوا۟ لَهُمْ شَهَٰدَةً أَبَدًۭا وَأُو۟لَٰٓئِكَ هُمُ ٱلْفَٰسِقُونَ إِلَّا ٱلَّذِينَ تَابُوا۟ مِنۢ بَعْدِ ذَٰلِكَ وَأَصْلَحُوا۟ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ
और जो अपने जोड़ीदारों पर आरोप लगाते हैं, जबकि उनके पास स्वयं के सिवा कोई साक्षी नहीं, तो उनमें से एक का साक्ष्य यह होगा कि वह ईश्वर के नाम पर चार बार साक्ष्य दे कि वह अवश्य सच्चों में से है, और पाँचवीं बार कि यदि वह झूठों में से हो तो उस पर ईश्वर का धिक्कार हो।
وَٱلَّذِينَ يَرْمُونَ أَزْوَٰجَهُمْ وَلَمْ يَكُن لَّهُمْ شُهَدَآءُ إِلَّآ أَنفُسُهُمْ فَشَهَٰدَةُ أَحَدِهِمْ أَرْبَعُ شَهَٰدَٰتٍۭ بِٱللَّهِ إِنَّهُۥ لَمِنَ ٱلصَّٰدِقِينَ وَٱلْخَٰمِسَةُ أَنَّ لَعْنَتَ ٱللَّهِ عَلَيْهِ إِن كَانَ مِنَ ٱلْكَٰذِبِينَ
और उसके लिए दंड टल जाएगा यदि वह ईश्वर के नाम पर चार बार साक्ष्य दे कि वह अवश्य झूठों में से है, और पाँचवीं बार कि यदि वह सच्चों में से हो तो उस पर ईश्वर का क्रोध हो।
وَيَدْرَؤُا۟ عَنْهَا ٱلْعَذَابَ أَن تَشْهَدَ أَرْبَعَ شَهَٰدَٰتٍۭ بِٱللَّهِ إِنَّهُۥ لَمِنَ ٱلْكَٰذِبِينَ وَٱلْخَٰمِسَةَ أَنَّ غَضَبَ ٱللَّهِ عَلَيْهَآ إِن كَانَ مِنَ ٱلصَّٰدِقِينَ
और यदि तुम पर ईश्वर का अनुग्रह और उसकी दया न होती, और यदि ईश्वर निरंतर पश्चात्ताप स्वीकार करने वाला, प्रज्ञावान न होता…
وَلَوْلَا فَضْلُ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُۥ وَأَنَّ ٱللَّهَ تَوَّابٌ حَكِيمٌ
जो स्वांग लेकर आए वे निश्चय ही तुम्हीं में से एक टोली हैं; इसे अपने लिए बुराई मत समझो,
إِنَّ ٱلَّذِينَ جَآءُو بِٱلْإِفْكِ عُصْبَةٌۭ مِّنكُمْ لَا تَحْسَبُوهُ شَرًّۭا لَّكُم
नहीं, यह तो तुम्हारे लिए एक अच्छाई है।
بَلْ هُوَ خَيْرٌۭ لَّكُمْ
उनमें से हर व्यक्ति के लिए वह है जो उसने अपराध में से कमाया होगा,
لِكُلِّ ٱمْرِئٍۢ مِّنْهُم مَّا ٱكْتَسَبَ مِنَ ٱلْإِثْمِ
और उनमें से जिसने उसका सबसे बड़ा भाग लिया उसके लिए विशाल दंड होगा।
وَٱلَّذِى تَوَلَّىٰ كِبْرَهُۥ مِنْهُمْ لَهُۥ عَذَابٌ عَظِيمٌۭ
काश, इसे सुनकर विश्वास करने वाले पुरुषों और विश्वास करने वाली स्त्रियों ने अपने विषय में अच्छाई का अनुमान लगाया होता, और कहा होता: “यह एक स्पष्ट स्वांग है!”
لَّوْلَآ إِذْ سَمِعْتُمُوهُ ظَنَّ ٱلْمُؤْمِنُونَ وَٱلْمُؤْمِنَٰتُ بِأَنفُسِهِمْ خَيْرًۭا وَقَالُوا۟ هَٰذَآ إِفْكٌۭ مُّبِينٌۭ
काश वे इस विषय में चार साक्षी लेकर आए होते!
لَّوْلَا جَآءُو عَلَيْهِ بِأَرْبَعَةِ شُهَدَآءَ
जब वे साक्षियों को लेकर नहीं आए, तो वही ईश्वर के पास झूठे हैं।
فَإِذْ لَمْ يَأْتُوا۟ بِٱلشُّهَدَآءِ فَأُو۟لَٰٓئِكَ عِندَ ٱللَّهِ هُمُ ٱلْكَٰذِبُونَ
और यदि इहलोक में और अंतिम जीवन में तुम पर ईश्वर का अनुग्रह और उसकी दया न होती, तो उस बात के कारण जिसमें तुम लिप्त हो गए, तुम्हें विशाल दंड पहुँचता, जब तुम उसे अपनी ज़बानों से ग्रहण करते थे और अपने मुँहों से वह कहते थे जिसका तुम्हें कोई ज्ञान नहीं था, उसे नगण्य मानते हुए जबकि वह ईश्वर के पास विशाल है।
وَلَوْلَا فَضْلُ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُۥ فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْءَاخِرَةِ لَمَسَّكُمْ فِى مَآ أَفَضْتُمْ فِيهِ عَذَابٌ عَظِيمٌ إِذْ تَلَقَّوْنَهُۥ بِأَلْسِنَتِكُمْ وَتَقُولُونَ بِأَفْوَاهِكُم مَّا لَيْسَ لَكُم بِهِۦ عِلْمٌۭ وَتَحْسَبُونَهُۥ هَيِّنًۭا وَهُوَ عِندَ ٱللَّهِ عَظِيمٌۭ
और काश, इसे सुनकर तुमने कहा होता: “हमारे लिए उचित नहीं कि हम इसके विषय में बोलें — आपकी महिमा हो, यह तो एक विशाल लांछन है!”
وَلَوْلَآ إِذْ سَمِعْتُمُوهُ قُلْتُم مَّا يَكُونُ لَنَآ أَن نَّتَكَلَّمَ بِهَٰذَا سُبْحَٰنَكَ هَٰذَا بُهْتَٰنٌ عَظِيمٌۭ
ईश्वर तुम्हें उपदेश देता है कि फिर कभी इसके जैसी बात न दोहराओ, यदि तुम विश्वास करने वाले हो।
يَعِظُكُمُ ٱللَّهُ أَن تَعُودُوا۟ لِمِثْلِهِۦٓ أَبَدًا إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
और ईश्वर तुम्हारे लिए संकेतों को स्पष्ट करता है,
وَيُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمُ ٱلْءَايَٰتِ
और ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
जिन्हें यह प्रिय है कि जो विश्वास करते हैं उनके बीच निर्लज्जता फैले, उन्हें निश्चय ही इहलोक में और अंतिम जीवन में पीड़ादायक दंड मिलेगा,
إِنَّ ٱلَّذِينَ يُحِبُّونَ أَن تَشِيعَ ٱلْفَٰحِشَةُ فِى ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌۭ فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْءَاخِرَةِ
और ईश्वर जानता है,
وَٱللَّهُ يَعْلَمُ
और तुम नहीं जानते।
وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
और यदि तुम पर ईश्वर का अनुग्रह और उसकी दया न होती, और यदि ईश्वर करुणामय, दयालु न होता…
وَلَوْلَا فَضْلُ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُۥ وَأَنَّ ٱللَّهَ رَءُوفٌۭ رَّحِيمٌۭ
हे विश्वास करने वालो! बहकाने वाले के क़दमों पर मत चलो;
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تَتَّبِعُوا۟ خُطُوَٰتِ ٱلشَّيْطَٰنِ
और जो कोई बहकाने वाले के क़दमों पर चलता है — वह निश्चय ही निर्लज्जता और जो अमान्य है उसका आदेश देता है।
وَمَن يَتَّبِعْ خُطُوَٰتِ ٱلشَّيْطَٰنِ فَإِنَّهُۥ يَأْمُرُ بِٱلْفَحْشَآءِ وَٱلْمُنكَرِ
और यदि तुम पर ईश्वर का अनुग्रह और उसकी दया न होती, तो तुममें से कोई कभी शुद्ध न होता,
وَلَوْلَا فَضْلُ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُۥ مَا زَكَىٰ مِنكُم مِّنْ أَحَدٍ أَبَدًۭا
पर ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे शुद्ध करता है,
وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ يُزَكِّى مَن يَشَآءُ
और ईश्वर सुनने वाला, सर्वज्ञ है।
وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌۭ
और तुममें से जो अनुग्रह और संपन्नता वाले हैं वे यह शपथ न लें कि अपने निकटजनों, दरिद्रों और जिन्होंने ईश्वर की राह में प्रवास किया उन्हें फिर नहीं देंगे,
وَلَا يَأْتَلِ أُو۟لُوا۟ ٱلْفَضْلِ مِنكُمْ وَٱلسَّعَةِ أَن يُؤْتُوٓا۟ أُو۟لِى ٱلْقُرْبَىٰ وَٱلْمَسَٰكِينَ وَٱلْمُهَٰجِرِينَ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ
बल्कि वे दरगुज़र करें और पन्ना पलट दें।
وَلْيَعْفُوا۟ وَلْيَصْفَحُوٓا۟
क्या तुम्हें यह प्रिय नहीं कि ईश्वर तुम्हें क्षमा करे?
أَلَا تُحِبُّونَ أَن يَغْفِرَ ٱللَّهُ لَكُمْ
और ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
وَٱللَّهُ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌ
जो वैवाहिक बंधन से सुरक्षित, लापरवाह, विश्वास करने वाली स्त्रियों पर आरोप लगाते हैं, वे निश्चय ही इहलोक में और अंतिम जीवन में धिक्कारे गए हैं, और उन्हें विशाल दंड मिलेगा, उस दिन जब उनकी ज़बानें, उनके हाथ और उनके पाँव उनके विरुद्ध उसका साक्ष्य देंगे जो वे करते थे।
إِنَّ ٱلَّذِينَ يَرْمُونَ ٱلْمُحْصَنَٰتِ ٱلْغَٰفِلَٰتِ ٱلْمُؤْمِنَٰتِ لُعِنُوا۟ فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْءَاخِرَةِ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌۭ يَوْمَ تَشْهَدُ عَلَيْهِمْ أَلْسِنَتُهُمْ وَأَيْدِيهِمْ وَأَرْجُلُهُم بِمَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ
उस दिन ईश्वर उन्हें उनका उचित देय पूरा-पूरा चुकाएगा,
يَوْمَئِذٍۢ يُوَفِّيهِمُ ٱللَّهُ دِينَهُمُ ٱلْحَقَّ
और वे जान लेंगे कि ईश्वर ही स्पष्ट सत्य है।
وَيَعْلَمُونَ أَنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلْحَقُّ ٱلْمُبِينُ
नीच स्त्रियाँ नीच पुरुषों के लिए, और नीच पुरुष नीच स्त्रियों के लिए;
ٱلْخَبِيثَٰتُ لِلْخَبِيثِينَ وَٱلْخَبِيثُونَ لِلْخَبِيثَٰتِ
और अच्छी स्त्रियाँ अच्छे पुरुषों के लिए, और अच्छे पुरुष अच्छी स्त्रियों के लिए।
وَٱلطَّيِّبَٰتُ لِلطَّيِّبِينَ وَٱلطَّيِّبُونَ لِلطَّيِّبَٰتِ
वे उससे बरी किए गए हैं जो कहा जाता है;
أُو۟لَٰٓئِكَ مُبَرَّءُونَ مِمَّا يَقُولُونَ
उनके लिए क्षमा और उदार जीविका है।
لَهُم مَّغْفِرَةٌۭ وَرِزْقٌۭ كَرِيمٌۭ
हे विश्वास करने वालो! अपने घरों के अलावा दूसरे घरों में प्रवेश मत करो, अपना परिचय दे देने और उनके घर वालों का अभिवादन कर लेने से पहले —
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تَدْخُلُوا۟ بُيُوتًا غَيْرَ بُيُوتِكُمْ حَتَّىٰ تَسْتَأْنِسُوا۟ وَتُسَلِّمُوا۟ عَلَىٰٓ أَهْلِهَا
यह तुम्हारे लिए बेहतर है, शायद तुम स्मरण करो।
ذَٰلِكُمْ خَيْرٌۭ لَّكُمْ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ
यदि तुम वहाँ किसी को न पाओ, तो तब तक उसमें प्रवेश मत करो जब तक तुम्हें अनुमति न दी जाए;
فَإِن لَّمْ تَجِدُوا۟ فِيهَآ أَحَدًۭا فَلَا تَدْخُلُوهَا حَتَّىٰ يُؤْذَنَ لَكُمْ
और यदि तुमसे कहा जाए: “लौट जाओ”, तो लौट जाओ — यह तुम्हारे लिए अधिक शुद्ध है।
وَإِن قِيلَ لَكُمُ ٱرْجِعُوا۟ فَٱرْجِعُوا۟ هُوَ أَزْكَىٰ لَكُمْ
और ईश्वर उसके विषय में सर्वज्ञ है जो तुम करते हो।
وَٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ عَلِيمٌۭ
तुम पर कोई आक्षेप नहीं कि तुम ऐसे निर्जन घरों में प्रवेश करो जिनमें तुम्हारे लिए कोई उपयोग है।
لَّيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ أَن تَدْخُلُوا۟ بُيُوتًا غَيْرَ مَسْكُونَةٍۢ فِيهَا مَتَٰعٌۭ لَّكُمْ
और ईश्वर जानता है जो तुम सामने लाते हो और जो तुम दबा रखते हो।
وَٱللَّهُ يَعْلَمُ مَا تُبْدُونَ وَمَا تَكْتُمُونَ
विश्वास करने वालों से कहो कि वे अपनी दृष्टियाँ नीची करें और अपने शील की रक्षा करें — यह उनके लिए अधिक शुद्ध है,
قُل لِّلْمُؤْمِنِينَ يَغُضُّوا۟ مِنْ أَبْصَٰرِهِمْ وَيَحْفَظُوا۟ فُرُوجَهُمْ ذَٰلِكَ أَزْكَىٰ لَهُمْ
क्योंकि ईश्वर वे जो करते हैं उसकी पूरी ख़बर रखता है।
إِنَّ ٱللَّهَ خَبِيرٌۢ بِمَا يَصْنَعُونَ
और विश्वास करने वाली स्त्रियों से कहो कि वे अपनी दृष्टियाँ नीची करें और अपने शील की रक्षा करें,
وَقُل لِّلْمُؤْمِنَٰتِ يَغْضُضْنَ مِنْ أَبْصَٰرِهِنَّ وَيَحْفَظْنَ فُرُوجَهُنَّ
और उनमें जो कामना जगाता है उसे सामने न लाएँ, उसे छोड़कर जो उसमें से खुला रहता है,
وَلَا يُبْدِينَ زِينَتَهُنَّ إِلَّا مَا ظَهَرَ مِنْهَا
और वे अपने ढकने वाले कपड़े को अपने सीने के खुले भाग पर कई गुना करें,
وَلْيَضْرِبْنَ بِخُمُرِهِنَّ عَلَىٰ جُيُوبِهِنَّ
और वे उनमें जो कामना जगाता है उसे सामने न लाएँ, केवल अपने पतियों, या अपने पिताओं, या अपने पतियों के पिताओं, या अपने पुत्रों, या अपने पतियों के पुत्रों, या अपने भाइयों, या अपने भाइयों के पुत्रों, या अपनी बहनों के पुत्रों, या अपने आसपास की स्त्रियों, या शपथ से बँधे हुओं, या पुरुषों में से कामना से रहित अनुगामियों, या उन बच्चों के सामने जिन पर स्त्रियों की निजता अभी खुली नहीं है।
وَلَا يُبْدِينَ زِينَتَهُنَّ إِلَّا لِبُعُولَتِهِنَّ أَوْ ءَابَآئِهِنَّ أَوْ ءَابَآءِ بُعُولَتِهِنَّ أَوْ أَبْنَآئِهِنَّ أَوْ أَبْنَآءِ بُعُولَتِهِنَّ أَوْ إِخْوَٰنِهِنَّ أَوْ بَنِىٓ إِخْوَٰنِهِنَّ أَوْ بَنِىٓ أَخَوَٰتِهِنَّ أَوْ نِسَآئِهِنَّ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَٰنُهُنَّ أَوِ ٱلتَّٰبِعِينَ غَيْرِ أُو۟لِى ٱلْإِرْبَةِ مِنَ ٱلرِّجَالِ أَوِ ٱلطِّفْلِ ٱلَّذِينَ لَمْ يَظْهَرُوا۟ عَلَىٰ عَوْرَٰتِ ٱلنِّسَآءِ
और वे अपने क़दम कई गुना न करें, ताकि जो वे छिपाती हैं उनमें से जो कामना जगाता है, उसे ज्ञात करा दें।
وَلَا يَضْرِبْنَ بِأَرْجُلِهِنَّ لِيُعْلَمَ مَا يُخْفِينَ مِن زِينَتِهِنَّ
और सब मिलकर ईश्वर की ओर पलट आओ, हे विश्वास करने वालो, शायद तुम सफल हो जाओ।
وَتُوبُوٓا۟ إِلَى ٱللَّهِ جَمِيعًا أَيُّهَ ٱلْمُؤْمِنُونَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
और अपने में से अविवाहितों का विवाह कराओ, तथा अपने आज्ञाकारी पुरुषों और आज्ञाकारी स्त्रियों में से जो भले हैं उनका भी।
وَأَنكِحُوا۟ ٱلْأَيَٰمَىٰ مِنكُمْ وَٱلصَّٰلِحِينَ مِنْ عِبَادِكُمْ وَإِمَآئِكُمْ
यदि वे निर्धन हों, तो ईश्वर उन्हें अपने अनुग्रह से धनी कर देगा।
إِن يَكُونُوا۟ فُقَرَآءَ يُغْنِهِمُ ٱللَّهُ مِن فَضْلِهِۦ
और ईश्वर विस्तृत, सर्वज्ञ है।
وَٱللَّهُ وَٰسِعٌ عَلِيمٌۭ
और जो विवाह का साधन नहीं पाते वे स्वयं को रोके रखें, जब तक कि ईश्वर उन्हें अपने अनुग्रह से धनी न कर दे।
وَلْيَسْتَعْفِفِ ٱلَّذِينَ لَا يَجِدُونَ نِكَاحًا حَتَّىٰ يُغْنِيَهُمُ ٱللَّهُ مِن فَضْلِهِۦ
और शपथ से बँधे हुओं में से जो विवाह-लेख खोजते हैं, उनके साथ वह लेख तैयार करो यदि तुम उनमें अच्छाई जानते हो,
وَٱلَّذِينَ يَبْتَغُونَ ٱلْكِتَٰبَ مِمَّا مَلَكَتْ أَيْمَٰنُكُمْ فَكَاتِبُوهُمْ إِنْ عَلِمْتُمْ فِيهِمْ خَيْرًۭا
और उन्हें ईश्वर की उस संपत्ति में से दो जो उसने तुम्हें दी है।
وَءَاتُوهُم مِّن مَّالِ ٱللَّهِ ٱلَّذِىٓ ءَاتَىٰكُمْ
और अपनी युवतियों को वेश्यावृत्ति के लिए विवश मत करो, यदि वे सुरक्षित रहना चाहती हैं, केवल इस उद्देश्य से कि तुम इहलोक के जीवन का धन खोजो।
وَلَا تُكْرِهُوا۟ فَتَيَٰتِكُمْ عَلَى ٱلْبِغَآءِ إِنْ أَرَدْنَ تَحَصُّنًۭا لِّتَبْتَغُوا۟ عَرَضَ ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا
और जो कोई उन्हें इसके लिए विवश करता है — उनके विवश किए जाने के बाद, ईश्वर निश्चय ही अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
وَمَن يُكْرِههُّنَّ فَإِنَّ ٱللَّهَ مِنۢ بَعْدِ إِكْرَٰهِهِنَّ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ
हमने निश्चय ही तुम्हारी ओर स्पष्ट संकेत उतारे हैं, तुमसे पहले जो बीत गए उनमें से एक उदाहरण, और सावधानी बरतने वालों के लिए एक उपदेश।
وَلَقَدْ أَنزَلْنَآ إِلَيْكُمْ ءَايَٰتٍۢ مُّبَيِّنَٰتٍۢ وَمَثَلًۭا مِّنَ ٱلَّذِينَ خَلَوْا۟ مِن قَبْلِكُمْ وَمَوْعِظَةًۭ لِّلْمُتَّقِينَ
ईश्वर आकाशों और धरती का प्रकाश है।
ٱللَّهُ نُورُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ
उसके प्रकाश का उदाहरण एक ताक़ जैसा है जिसमें एक दीपक है।
مَثَلُ نُورِهِۦ كَمِشْكَوٰةٍۢ فِيهَا مِصْبَاحٌ
दीपक एक काँच में है।
ٱلْمِصْبَاحُ فِى زُجَاجَةٍ
काँच एक दीप्त तारे जैसा है, जो एक आशीषित वृक्ष के द्वारा जलाया गया है, एक जैतून, न पूर्व का न पश्चिम का, जिसका तेल प्रकाशित करने को है, भले ही आग ने उसे छुआ तक न हो।
ٱلزُّجَاجَةُ كَأَنَّهَا كَوْكَبٌۭ دُرِّىٌّۭ يُوقَدُ مِن شَجَرَةٍۢ مُّبَٰرَكَةٍۢ زَيْتُونَةٍۢ لَّا شَرْقِيَّةٍۢ وَلَا غَرْبِيَّةٍۢ يَكَادُ زَيْتُهَا يُضِىٓءُ وَلَوْ لَمْ تَمْسَسْهُ نَارٌۭ
प्रकाश पर प्रकाश।
نُّورٌ عَلَىٰ نُورٍۢ
ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे अपने प्रकाश की ओर मार्ग दिखाता है,
يَهْدِى ٱللَّهُ لِنُورِهِۦ مَن يَشَآءُ
और ईश्वर लोगों के लिए उदाहरणों को कई गुना करता है,
وَيَضْرِبُ ٱللَّهُ ٱلْأَمْثَٰلَ لِلنَّاسِ
और ईश्वर हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।
وَٱللَّهُ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمٌۭ
ऐसे घरों में जिन्हें ऊँचा किए जाने की ईश्वर ने अनुमति दी है, और जिनमें उसका नाम स्मरण किया जाता है — उनमें प्रातः और संध्या उसकी महिमा गाते हैं ऐसे पुरुष जिनका ध्यान न व्यापार और न बिक्री ईश्वर के स्मरण से, संपर्क बनाए रखने से और शुद्ध उदारता देने से हटाती है,
فِى بُيُوتٍ أَذِنَ ٱللَّهُ أَن تُرْفَعَ وَيُذْكَرَ فِيهَا ٱسْمُهُۥ يُسَبِّحُ لَهُۥ فِيهَا بِٱلْغُدُوِّ وَٱلْءَاصَالِ رِجَالٌۭ لَّا تُلْهِيهِمْ تِجَٰرَةٌۭ وَلَا بَيْعٌ عَن ذِكْرِ ٱللَّهِ وَإِقَامِ ٱلصَّلَوٰةِ وَإِيتَآءِ ٱلزَّكَوٰةِ
उस दिन से डरते हुए जब मर्म और दृष्टियाँ उलट जाएँगी, ताकि ईश्वर उन्हें उनके किए हुए के सबसे सुंदर के अनुसार प्रतिफल दे, और उन्हें अपने अनुग्रह से और अधिक दे।
يَخَافُونَ يَوْمًۭا تَتَقَلَّبُ فِيهِ ٱلْقُلُوبُ وَٱلْأَبْصَٰرُ لِيَجْزِيَهُمُ ٱللَّهُ أَحْسَنَ مَا عَمِلُوا۟ وَيَزِيدَهُم مِّن فَضْلِهِۦ
और ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे बिना गिने जीविका देता है।
وَٱللَّهُ يَرْزُقُ مَن يَشَآءُ بِغَيْرِ حِسَابٍۢ
और जो नकारते हैं, उनके कर्म एक रेगिस्तानी मैदान में मृगतृष्णा जैसे हैं, जिसे प्यासा पानी समझता है, यहाँ तक कि जब वह उसके पास आता है, तो वहाँ कुछ नहीं पाता; पर वह वहाँ ईश्वर को पाता है जो उसका हिसाब उसे पूरा-पूरा चुका देता है।
وَٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ أَعْمَٰلُهُمْ كَسَرَابٍۭ بِقِيعَةٍۢ يَحْسَبُهُ ٱلظَّمْـَٔانُ مَآءً حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءَهُۥ لَمْ يَجِدْهُ شَيْـًۭٔا وَوَجَدَ ٱللَّهَ عِندَهُۥ فَوَفَّىٰهُ حِسَابَهُۥ
और ईश्वर हिसाब में शीघ्र है।
وَٱللَّهُ سَرِيعُ ٱلْحِسَابِ
या उन अँधेरों जैसे जो एक गहरे और उफनते समुद्र पर हैं: एक लहर उसे ढक लेती है, जिसके ऊपर एक और लहर, जिसके ऊपर एक बादल —
أَوْ كَظُلُمَٰتٍۢ فِى بَحْرٍۢ لُّجِّىٍّۢ يَغْشَىٰهُ مَوْجٌۭ مِّن فَوْقِهِۦ مَوْجٌۭ مِّن فَوْقِهِۦ سَحَابٌۭ
अँधेरे एक-दूसरे के ऊपर:
ظُلُمَٰتٌۢ بَعْضُهَا فَوْقَ بَعْضٍ
जब वह अपना हाथ निकालता है, तो उसे लगभग देख नहीं पाता।
إِذَآ أَخْرَجَ يَدَهُۥ لَمْ يَكَدْ يَرَىٰهَا
और जिसे ईश्वर कोई प्रकाश नहीं देता, उसके लिए कोई प्रकाश नहीं।
وَمَن لَّمْ يَجْعَلِ ٱللَّهُ لَهُۥ نُورًۭا فَمَا لَهُۥ مِن نُّورٍ
क्या तुमने नहीं देखा कि जो आकाशों और धरती में हैं वे ईश्वर की ही महिमा गाते हैं, और पंखों की पंक्ति बनाते पक्षी भी?
أَلَمْ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ يُسَبِّحُ لَهُۥ مَن فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَٱلطَّيْرُ صَٰٓفَّٰتٍۢ
हर एक अपने संपर्क और अपने महिमा-गान को जानता है,
كُلٌّۭ قَدْ عَلِمَ صَلَاتَهُۥ وَتَسْبِيحَهُۥ
और ईश्वर उसके विषय में सर्वज्ञ है जो वे करते हैं।
وَٱللَّهُ عَلِيمٌۢ بِمَا يَفْعَلُونَ
और आकाशों और धरती का राजत्व ईश्वर का है,
وَلِلَّهِ مُلْكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ
और ईश्वर की ओर ही गंतव्य है।
وَإِلَى ٱللَّهِ ٱلْمَصِيرُ
क्या तुमने नहीं देखा कि ईश्वर बादलों को चलाता है, फिर उन्हें एक साथ जोड़ता है, फिर उनका एक पुंज बना देता है, और तब तुम देखते हो कि बौछार उसकी गोद से निकल रही है?
أَلَمْ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ يُزْجِى سَحَابًۭا ثُمَّ يُؤَلِّفُ بَيْنَهُۥ ثُمَّ يَجْعَلُهُۥ رُكَامًۭا فَتَرَى ٱلْوَدْقَ يَخْرُجُ مِنْ خِلَٰلِهِۦ
और वह आकाश से, उसमें जो पहाड़ हैं उनमें से, ओले उतारता है, जिन्हें वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उस पर आने देता है, और जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उससे दूर कर देता है;
وَيُنَزِّلُ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مِن جِبَالٍۢ فِيهَا مِنۢ بَرَدٍۢ فَيُصِيبُ بِهِۦ مَن يَشَآءُ وَيَصْرِفُهُۥ عَن مَّن يَشَآءُ
उसकी बिजली की चमक दृष्टियों को हर लेने को है।
يَكَادُ سَنَا بَرْقِهِۦ يَذْهَبُ بِٱلْأَبْصَٰرِ
ईश्वर रात और दिन की अदला-बदली करता है।
يُقَلِّبُ ٱللَّهُ ٱلَّيْلَ وَٱلنَّهَارَ
इसमें अवश्य दृष्टियों वालों के लिए एक सीख है।
إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَعِبْرَةًۭ لِّأُو۟لِى ٱلْأَبْصَٰرِ
और ईश्वर ने पानी से हर चलने-फिरने वाला रचा।
وَٱللَّهُ خَلَقَ كُلَّ دَآبَّةٍۢ مِّن مَّآءٍۢ
उनमें कोई है जो पेट के बल चलता है,
فَمِنْهُم مَّن يَمْشِى عَلَىٰ بَطْنِهِۦ
और उनमें कोई है जो दो पाँवों पर चलता है,
وَمِنْهُم مَّن يَمْشِى عَلَىٰ رِجْلَيْنِ
और उनमें कोई है जो चार पर चलता है।
وَمِنْهُم مَّن يَمْشِى عَلَىٰٓ أَرْبَعٍۢ
ईश्वर जो उसकी मर्ज़ी हो, रचता है,
يَخْلُقُ ٱللَّهُ مَا يَشَآءُ
क्योंकि ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।
إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌۭ
हमने निश्चय ही स्पष्ट संकेत उतारे हैं,
لَّقَدْ أَنزَلْنَآ ءَايَٰتٍۢ مُّبَيِّنَٰتٍۢ
और ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे सीधे पथ की ओर मार्ग दिखाता है।
وَٱللَّهُ يَهْدِى مَن يَشَآءُ إِلَىٰ صِرَٰطٍۢ مُّسْتَقِيمٍۢ
और वे कहते हैं: “हम ईश्वर पर और संदेशवाहक पर विश्वास करते हैं, और हम बात मानते हैं” — फिर उनमें से एक भाग इसके बाद पीठ फेर लेता है;
وَيَقُولُونَ ءَامَنَّا بِٱللَّهِ وَبِٱلرَّسُولِ وَأَطَعْنَا ثُمَّ يَتَوَلَّىٰ فَرِيقٌۭ مِّنْهُم مِّنۢ بَعْدِ ذَٰلِكَ
और ये विश्वास करने वाले नहीं हैं।
وَمَآ أُو۟لَٰٓئِكَ بِٱلْمُؤْمِنِينَ
और जब उन्हें ईश्वर और उसके संदेशवाहक की ओर बुलाया जाता है ताकि वह उनके बीच निर्णय करे, तो देखो, उनमें से एक भाग कतरा जाता है।
وَإِذَا دُعُوٓا۟ إِلَى ٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ لِيَحْكُمَ بَيْنَهُمْ إِذَا فَرِيقٌۭ مِّنْهُم مُّعْرِضُونَ
पर यदि हक़ उनके पक्ष में हो, तो वे पूरी तरह झुककर उसके पास आते हैं।
وَإِن يَكُن لَّهُمُ ٱلْحَقُّ يَأْتُوٓا۟ إِلَيْهِ مُذْعِنِينَ
क्या उनके मर्मों में रोग है, या वे संदेह करते हैं, या उन्हें डर है कि ईश्वर और उसका संदेशवाहक उनके विरुद्ध झुक जाएँगे?
أَفِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌ أَمِ ٱرْتَابُوٓا۟ أَمْ يَخَافُونَ أَن يَحِيفَ ٱللَّهُ عَلَيْهِمْ وَرَسُولُهُۥ
नहीं, वही अन्यायी हैं।
بَلْ أُو۟لَٰٓئِكَ هُمُ ٱلظَّٰلِمُونَ
विश्वास करने वालों का एकमात्र कथन, जब उन्हें ईश्वर और उसके संदेशवाहक की ओर बुलाया जाता है ताकि वह उनके बीच निर्णय करे, यही कहना है: “हमने सुना और हमने बात मानी।”
إِنَّمَا كَانَ قَوْلَ ٱلْمُؤْمِنِينَ إِذَا دُعُوٓا۟ إِلَى ٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ لِيَحْكُمَ بَيْنَهُمْ أَن يَقُولُوا۟ سَمِعْنَا وَأَطَعْنَا
और वही सफल होने वाले हैं।
وَأُو۟لَٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُفْلِحُونَ
और जो कोई ईश्वर और उसके संदेशवाहक की बात मानता है, ईश्वर का भय मानता है और उसके प्रति सावधान रहता है — वही विजयी हैं।
وَمَن يُطِعِ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَيَخْشَ ٱللَّهَ وَيَتَّقْهِ فَأُو۟لَٰٓئِكَ هُمُ ٱلْفَآئِزُونَ
और उन्होंने ईश्वर की शपथ खाई, अपनी शपथों की पूरी शक्ति से, कि यदि तुम उन्हें आदेश दो, तो वे अवश्य निकल पड़ेंगे।
وَأَقْسَمُوا۟ بِٱللَّهِ جَهْدَ أَيْمَٰنِهِمْ لَئِنْ أَمَرْتَهُمْ لَيَخْرُجُنَّ
कहो: “शपथ मत खाओ;
قُل لَّا تُقْسِمُوا۟
मान्य बात मानना!
طَاعَةٌۭ مَّعْرُوفَةٌ
ईश्वर निश्चय ही तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।”
إِنَّ ٱللَّهَ خَبِيرٌۢ بِمَا تَعْمَلُونَ
कहो: “ईश्वर की बात मानो और संदेशवाहक की बात मानो;
قُلْ أَطِيعُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُوا۟ ٱلرَّسُولَ
पर यदि तुम पीठ फेर लो, तो उस पर केवल वही है जो उससे वहन कराया गया है, और तुम पर केवल वही है जो तुमसे वहन कराया गया है।
فَإِن تَوَلَّوْا۟ فَإِنَّمَا عَلَيْهِ مَا حُمِّلَ وَعَلَيْكُم مَّا حُمِّلْتُمْ
और यदि तुम उसकी बात मानोगे, तो मार्गदर्शन पा जाओगे।
وَإِن تُطِيعُوهُ تَهْتَدُوا۟
और संदेशवाहक पर केवल स्पष्ट संप्रेषण का दायित्व है।”
وَمَا عَلَى ٱلرَّسُولِ إِلَّا ٱلْبَلَٰغُ ٱلْمُبِينُ
और ईश्वर ने तुममें से उनसे वादा किया है जो विश्वास करते हैं और भले कर्म करते हैं कि वह उन्हें अवश्य धरती पर उत्तराधिकारी बनाएगा, जैसे उसने उनसे पहले वालों को उत्तराधिकारी बनाया, कि वह उनके लिए उनका वह विधान अवश्य स्थापित करेगा जिसे उसने उनके लिए स्वीकार किया है, और कि वह उनके डर के बाद उनकी दशा को अवश्य सुरक्षा में बदल देगा।
وَعَدَ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مِنكُمْ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ لَيَسْتَخْلِفَنَّهُمْ فِى ٱلْأَرْضِ كَمَا ٱسْتَخْلَفَ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ وَلَيُمَكِّنَنَّ لَهُمْ دِينَهُمُ ٱلَّذِى ٱرْتَضَىٰ لَهُمْ وَلَيُبَدِّلَنَّهُم مِّنۢ بَعْدِ خَوْفِهِمْ أَمْنًۭا
वे मेरी आज्ञा का पालन करते हैं, मेरा कोई साझी ठहराए बिना।
يَعْبُدُونَنِى لَا يُشْرِكُونَ بِى شَيْـًۭٔا
और जो कोई इसके बाद नकारे — वही अतिक्रमणकारी हैं।
وَمَن كَفَرَ بَعْدَ ذَٰلِكَ فَأُو۟لَٰٓئِكَ هُمُ ٱلْفَٰسِقُونَ
और संपर्क बनाए रखो, और शुद्ध उदारता दो,
وَأَقِيمُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُوا۟ ٱلزَّكَوٰةَ
और संदेशवाहक की बात मानो, शायद तुम पर दया की जाए।
وَأَطِيعُوا۟ ٱلرَّسُولَ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
यह कभी मत समझो कि जो नकारते हैं वे धरती पर उसे असमर्थ कर सकते हैं;
لَا تَحْسَبَنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مُعْجِزِينَ فِى ٱلْأَرْضِ
और उनकी शरण आग है,
وَمَأْوَىٰهُمُ ٱلنَّارُ
और कितना भयानक गंतव्य!
وَلَبِئْسَ ٱلْمَصِيرُ
हे विश्वास करने वालो! शपथ से बँधे हुए और तुममें से जो अभी संतुलन की आयु तक नहीं पहुँचे, वे तीन समयों में तुमसे अनुमति माँगें: भोर के संपर्क से पहले, जब तुम दोपहर में अपने वस्त्र रख देते हो, और संध्या के संपर्क के बाद —
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لِيَسْتَـْٔذِنكُمُ ٱلَّذِينَ مَلَكَتْ أَيْمَٰنُكُمْ وَٱلَّذِينَ لَمْ يَبْلُغُوا۟ ٱلْحُلُمَ مِنكُمْ ثَلَٰثَ مَرَّٰتٍۢ مِّن قَبْلِ صَلَوٰةِ ٱلْفَجْرِ وَحِينَ تَضَعُونَ ثِيَابَكُم مِّنَ ٱلظَّهِيرَةِ وَمِنۢ بَعْدِ صَلَوٰةِ ٱلْعِشَآءِ
तुम्हारे लिए निजता के तीन समय।
ثَلَٰثُ عَوْرَٰتٍۢ لَّكُمْ
न तुम पर कोई आक्षेप, न उन पर, इन समयों के अलावा,
لَيْسَ عَلَيْكُمْ وَلَا عَلَيْهِمْ جُنَاحٌۢ بَعْدَهُنَّ
वे तुम्हारे पास आने-जाने वाले होते हुए,
طَوَّٰفُونَ عَلَيْكُم
एक-दूसरे के यहाँ।
بَعْضُكُمْ عَلَىٰ بَعْضٍۢ
इस प्रकार ईश्वर तुम्हारे लिए संकेतों को स्पष्ट करता है,
كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمُ ٱلْءَايَٰتِ
और ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌۭ
और जब तुम्हारे बीच के बच्चे संतुलन की आयु तक पहुँच जाएँ, तो वे अनुमति माँगें जैसे उन्होंने माँगी जो उनसे पहले थे।
وَإِذَا بَلَغَ ٱلْأَطْفَٰلُ مِنكُمُ ٱلْحُلُمَ فَلْيَسْتَـْٔذِنُوا۟ كَمَا ٱسْتَـْٔذَنَ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ
इस प्रकार ईश्वर तुम्हारे लिए अपने संकेतों को स्पष्ट करता है,
كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمْ ءَايَٰتِهِۦ
और ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌۭ
और वृद्ध स्त्रियाँ, स्त्रियों में से, जो विवाह की आशा नहीं रखतीं, उन पर कोई आक्षेप नहीं कि वे अपने वस्त्र रख दें, उनमें जो कामना जगाता है उसका खुलेआम प्रदर्शन किए बिना;
وَٱلْقَوَٰعِدُ مِنَ ٱلنِّسَآءِ ٱلَّٰتِى لَا يَرْجُونَ نِكَاحًۭا فَلَيْسَ عَلَيْهِنَّ جُنَاحٌ أَن يَضَعْنَ ثِيَابَهُنَّ غَيْرَ مُتَبَرِّجَٰتٍۭ بِزِينَةٍۢ
परंतु उनका स्वयं को रोके रखना उनके लिए बेहतर है।
وَأَن يَسْتَعْفِفْنَ خَيْرٌۭ لَّهُنَّ
और ईश्वर सुनने वाला, सर्वज्ञ है।
وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌۭ
अंधे पर कोई तंगी नहीं, और लंगड़े पर कोई तंगी नहीं, और रोगी पर कोई तंगी नहीं, और स्वयं तुम पर भी नहीं, कि तुम अपने घरों में खाओ, या अपने पिताओं के घरों में, या अपनी माताओं के घरों में, या अपने भाइयों के घरों में, या अपनी बहनों के घरों में, या अपने चाचाओं के घरों में, या अपनी बुआओं के घरों में, या अपने मामाओं के घरों में, या अपनी मौसियों के घरों में, या उसमें जिसकी कुंजियाँ तुम्हारे पास हैं, या अपने मित्र के यहाँ।
لَّيْسَ عَلَى ٱلْأَعْمَىٰ حَرَجٌۭ وَلَا عَلَى ٱلْأَعْرَجِ حَرَجٌۭ وَلَا عَلَى ٱلْمَرِيضِ حَرَجٌۭ وَلَا عَلَىٰٓ أَنفُسِكُمْ أَن تَأْكُلُوا۟ مِنۢ بُيُوتِكُمْ أَوْ بُيُوتِ ءَابَآئِكُمْ أَوْ بُيُوتِ أُمَّهَٰتِكُمْ أَوْ بُيُوتِ إِخْوَٰنِكُمْ أَوْ بُيُوتِ أَخَوَٰتِكُمْ أَوْ بُيُوتِ أَعْمَٰمِكُمْ أَوْ بُيُوتِ عَمَّٰتِكُمْ أَوْ بُيُوتِ أَخْوَٰلِكُمْ أَوْ بُيُوتِ خَٰلَٰتِكُمْ أَوْ مَا مَلَكْتُم مَّفَاتِحَهُۥٓ أَوْ صَدِيقِكُمْ
तुम पर कोई आक्षेप नहीं कि तुम साथ मिलकर खाओ या अलग-अलग।
لَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ أَن تَأْكُلُوا۟ جَمِيعًا أَوْ أَشْتَاتًۭا
और जब तुम घरों में प्रवेश करो, तो एक-दूसरे को ईश्वर की ओर से आए हुए, आशीषित और अच्छे अभिवादन से अभिवादन करो।
فَإِذَا دَخَلْتُم بُيُوتًۭا فَسَلِّمُوا۟ عَلَىٰٓ أَنفُسِكُمْ تَحِيَّةًۭ مِّنْ عِندِ ٱللَّهِ مُبَٰرَكَةًۭ طَيِّبَةًۭ
इस प्रकार ईश्वर तुम्हारे लिए संकेतों को स्पष्ट करता है, शायद तुम बुद्धि से काम लो।
كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمُ ٱلْءَايَٰتِ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
विश्वास करने वाले केवल वही हैं जो ईश्वर और उसके संदेशवाहक पर विश्वास करते हैं, और जो, जब वे उसके साथ किसी सामूहिक मामले में होते हैं, तो उससे अनुमति माँगे बिना नहीं जाते।
إِنَّمَا ٱلْمُؤْمِنُونَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَإِذَا كَانُوا۟ مَعَهُۥ عَلَىٰٓ أَمْرٍۢ جَامِعٍۢ لَّمْ يَذْهَبُوا۟ حَتَّىٰ يَسْتَـْٔذِنُوهُ
जो तुमसे अनुमति माँगते हैं, वही निश्चय ही वे हैं जो ईश्वर और उसके संदेशवाहक पर विश्वास करते हैं।
إِنَّ ٱلَّذِينَ يَسْتَـْٔذِنُونَكَ أُو۟لَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ
और जब वे तुमसे अपने किसी काम के लिए अनुमति माँगें, तो उनमें से जिस पर तुम्हारी मर्ज़ी हो, उसे अनुमति दो, और उनके लिए ईश्वर से क्षमा माँगो;
فَإِذَا ٱسْتَـْٔذَنُوكَ لِبَعْضِ شَأْنِهِمْ فَأْذَن لِّمَن شِئْتَ مِنْهُمْ وَٱسْتَغْفِرْ لَهُمُ ٱللَّهَ
क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ
संदेशवाहक की पुकार को अपने बीच वैसा न समझो जैसी तुममें से एक की दूसरे को पुकार।
لَّا تَجْعَلُوا۟ دُعَآءَ ٱلرَّسُولِ بَيْنَكُمْ كَدُعَآءِ بَعْضِكُم بَعْضًۭا
ईश्वर निश्चय ही तुममें से उन्हें पहचान लेगा जो चुपके से खिसक जाते हैं।
قَدْ يَعْلَمُ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ يَتَسَلَّلُونَ مِنكُمْ لِوَاذًۭا
जो उसके आदेश का उल्लंघन करते हैं वे सावधान रहें, कि कहीं उन पर कोई परीक्षा न आ पड़े, या कोई पीड़ादायक दंड न आ पड़े।
فَلْيَحْذَرِ ٱلَّذِينَ يُخَالِفُونَ عَنْ أَمْرِهِۦٓ أَن تُصِيبَهُمْ فِتْنَةٌ أَوْ يُصِيبَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
क्या ऐसा नहीं है: ईश्वर का है जो आकाशों और धरती में है।
أَلَآ إِنَّ لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ
वह निश्चय ही जानेगा कि तुम किस दशा में हो,
قَدْ يَعْلَمُ مَآ أَنتُمْ عَلَيْهِ
और जिस दिन वे उसकी ओर लौटाए जाएँगे, वह उन्हें सूचित करेगा कि उन्होंने क्या किया।
وَيَوْمَ يُرْجَعُونَ إِلَيْهِ فَيُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوا۟
और ईश्वर हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।
وَٱللَّهُ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمٌۢ