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अध्याय 11 · 123 पद

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।

11:1

अलिफ़. लाम. रा.

الٓر

11:2–3

एक ग्रंथ जिसके संकेत अखंडनीय बनाए गए, फिर विस्तृत किए गए, एक प्रज्ञावान, पूरी ख़बर रखने वाले की ओर से: “केवल ईश्वर की आज्ञा का पालन करो; मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से एक चेतावनी देने वाला और एक शुभ समाचार देने वाला हूँ; अपने अभिभावक से क्षमा माँगो, फिर उसकी ओर पलट आओ: वह तुम्हें एक नामित अवधि तक सुंदर उपभोग कराएगा, और वह हर अनुग्रह रखने वाले को उसका अनुग्रह देगा।

كِتَٰبٌ أُحْكِمَتْ ءَايَٰتُهُۥ ثُمَّ فُصِّلَتْ مِن لَّدُنْ حَكِيمٍ خَبِيرٍ أَلَّا تَعْبُدُوٓا۟ إِلَّا ٱللَّهَ إِنَّنِى لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌۭ وَبَشِيرٌۭ وَأَنِ ٱسْتَغْفِرُوا۟ رَبَّكُمْ ثُمَّ تُوبُوٓا۟ إِلَيْهِ يُمَتِّعْكُم مَّتَٰعًا حَسَنًا إِلَىٰٓ أَجَلٍۢ مُّسَمًّۭى وَيُؤْتِ كُلَّ ذِى فَضْلٍۢ فَضْلَهُۥ

11:2–3

परंतु यदि तुम पीठ फेर लो, तो मैं तुम्हारे लिए एक बड़े दिन के दंड से निश्चय ही डरता हूँ।”

وَإِن تَوَلَّوْا۟ فَإِنِّىٓ أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍۢ كَبِيرٍ

ईश्वर की ही ओर तुम्हारा लौटना है,

إِلَى ٱللَّهِ مَرْجِعُكُمْ

और वह हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।

وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌ

11:5

क्या ऐसा नहीं है: वे अपने सीने निश्चय ही मोड़ते हैं ताकि उससे छिप जाएँ।

أَلَآ إِنَّهُمْ يَثْنُونَ صُدُورَهُمْ لِيَسْتَخْفُوا۟ مِنْهُ

क्या ऐसा नहीं कि जब वे अपने वस्त्रों से स्वयं को ढकते हैं, तब वह जानता है जो वे गुप्त रखते हैं और जो वे उजागर करते हैं?

أَلَا حِينَ يَسْتَغْشُونَ ثِيَابَهُمْ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ

वह सीनों के भीतर जो है उसके विषय में सर्वज्ञ है।

إِنَّهُۥ عَلِيمٌۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ

11:6

धरती पर कोई चलने-फिरने वाला नहीं जिसकी जीविका ईश्वर के ज़िम्मे न हो; वह उसका विश्राम-स्थल और उसका जमा-स्थान जानता है:

وَمَا مِن دَآبَّةٍۢ فِى ٱلْأَرْضِ إِلَّا عَلَى ٱللَّهِ رِزْقُهَا وَيَعْلَمُ مُسْتَقَرَّهَا وَمُسْتَوْدَعَهَا

11:6

सब कुछ एक स्पष्ट बही में है।

كُلٌّۭ فِى كِتَٰبٍۢ مُّبِينٍۢ

11:7

और वही है जिसने आकाशों और धरती को छह दिनों में रचा, जबकि उसका भवन पानी पर आधारित था, ताकि तुम्हें परखे कि तुममें से कौन सबसे अच्छा कर्म करता है।

وَهُوَ ٱلَّذِى خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ فِى سِتَّةِ أَيَّامٍۢ وَكَانَ عَرْشُهُۥ عَلَى ٱلْمَآءِ لِيَبْلُوَكُمْ أَيُّكُمْ أَحْسَنُ عَمَلًۭا

11:7

और यदि तुम कहो: “मृत्यु के बाद तुम उठाए जाओगे”, तो नकारने वाले अवश्य कहेंगे: “यह केवल एक स्पष्ट भ्रम है।”

وَلَئِن قُلْتَ إِنَّكُم مَّبْعُوثُونَ مِنۢ بَعْدِ ٱلْمَوْتِ لَيَقُولَنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ إِنْ هَٰذَآ إِلَّا سِحْرٌۭ مُّبِينٌۭ

और यदि हम उनसे दंड को एक गिने हुए समय तक पीछे कर दें, तो वे अवश्य कहेंगे: “उसे क्या रोके हुए है?”

وَلَئِنْ أَخَّرْنَا عَنْهُمُ ٱلْعَذَابَ إِلَىٰٓ أُمَّةٍۢ مَّعْدُودَةٍۢ لَّيَقُولُنَّ مَا يَحْبِسُهُۥٓ

क्या ऐसा नहीं कि जिस दिन वह उनके पास आएगा, वह उनसे हटाया नहीं जाएगा,

أَلَا يَوْمَ يَأْتِيهِمْ لَيْسَ مَصْرُوفًا عَنْهُمْ

और जिसका वे मज़ाक़ उड़ाते थे, वह उन्हें लपेट लेगा।

وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا۟ بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَ

11:9

और यदि हम मनुष्य को अपनी ओर से कोई दया चखाएँ, फिर उसे उससे वापस ले लें, तो वह अवश्य आशाहीन, बड़ा नकारने वाला हो जाता है।

وَلَئِنْ أَذَقْنَا ٱلْإِنسَٰنَ مِنَّا رَحْمَةًۭ ثُمَّ نَزَعْنَٰهَا مِنْهُ إِنَّهُۥ لَيَـُٔوسٌۭ كَفُورٌۭ

11:10

और यदि हम उसे उस हानि के बाद जो उसे छू गई थी, कोई उपकार चखाएँ, तो वह अवश्य कहेगा: “बुरे कर्म मुझसे दूर चले गए”:

وَلَئِنْ أَذَقْنَٰهُ نَعْمَآءَ بَعْدَ ضَرَّآءَ مَسَّتْهُ لَيَقُولَنَّ ذَهَبَ ٱلسَّيِّـَٔاتُ عَنِّىٓ

11:10

वह अवश्य आनंदित, डींग हाँकने वाला है।

إِنَّهُۥ لَفَرِحٌۭ فَخُورٌ

11:11

सिवा उनके जिन्होंने धैर्य रखा और भले कर्म किए: उन्हीं के लिए क्षमा और बड़ा पुरस्कार है।

إِلَّا ٱلَّذِينَ صَبَرُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ أُو۟لَٰٓئِكَ لَهُم مَّغْفِرَةٌۭ وَأَجْرٌۭ كَبِيرٌۭ

11:12

शायद तुम उसका कुछ भाग त्याग दो जो तुम पर प्रकट किया जा रहा है, और तुम्हारा सीना उससे तंग हो जाएगा, इसलिए कि वे कहते हैं: “उस पर कोई कोष क्यों नहीं उतारा गया, या उसके साथ कोई अभिकर्ता क्यों नहीं आया!”

فَلَعَلَّكَ تَارِكٌۢ بَعْضَ مَا يُوحَىٰٓ إِلَيْكَ وَضَآئِقٌۢ بِهِۦ صَدْرُكَ أَن يَقُولُوا۟ لَوْلَآ أُنزِلَ عَلَيْهِ كَنزٌ أَوْ جَآءَ مَعَهُۥ مَلَكٌ

11:12

तुम तो केवल एक चेतावनी देने वाले हो;

إِنَّمَآ أَنتَ نَذِيرٌۭ

11:12

और ईश्वर हर चीज़ पर मुख़्तार है।

وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ وَكِيلٌ

11:13

या वे कहेंगे: “उसने इसे गढ़ लिया है”?

أَمْ يَقُولُونَ ٱفْتَرَىٰهُ

11:13

कहो: “तो इसके जैसी गढ़ी हुई दस सूराएँ ले आओ, और ईश्वर के अतिरिक्त जिन्हें बुला सको बुला लो, यदि तुम सच्चे हो।”

قُلْ فَأْتُوا۟ بِعَشْرِ سُوَرٍۢ مِّثْلِهِۦ مُفْتَرَيَٰتٍۢ وَٱدْعُوا۟ مَنِ ٱسْتَطَعْتُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَ

11:14

यदि वे तुम्हें उत्तर न दें, तो जान लो कि यह केवल ईश्वर के ज्ञान से उतारा गया है, और यह कि उसके सिवा कोई देवता नहीं।

فَإِلَّمْ يَسْتَجِيبُوا۟ لَكُمْ فَٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّمَآ أُنزِلَ بِعِلْمِ ٱللَّهِ وَأَن لَّآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ

11:14

तो क्या तुम ईश्वर के प्रति खरे होगे?

فَهَلْ أَنتُم مُّسْلِمُونَ

11:15

जो कोई इहलोक का जीवन और उसका शृंगार चाहता है, हम उसके कर्मों का फल उसे इसी जीवन में पूरा देते हैं, और उसमें उसे वंचित नहीं किया जाएगा:

مَن كَانَ يُرِيدُ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا وَزِينَتَهَا نُوَفِّ إِلَيْهِمْ أَعْمَٰلَهُمْ فِيهَا وَهُمْ فِيهَا لَا يُبْخَسُونَ

11:16

ये वे हैं जिनके लिए अंतिम जीवन में आग के सिवा कुछ नहीं;

أُو۟لَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ لَيْسَ لَهُمْ فِى ٱلْءَاخِرَةِ إِلَّا ٱلنَّارُ

11:16

जो उन्होंने उसमें किया था वह ढह चुका होगा,

وَحَبِطَ مَا صَنَعُوا۟ فِيهَا

11:16

और जो वे करते थे वह व्यर्थ होगा।

وَبَٰطِلٌۭ مَّا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ

क्या वह जो अपने अभिभावक की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण पर आधारित है, और जिसके पीछे उसकी ओर से एक साक्षी आता है?

أَفَمَن كَانَ عَلَىٰ بَيِّنَةٍۢ مِّن رَّبِّهِۦ وَيَتْلُوهُ شَاهِدٌۭ مِّنْهُ

11:17

और उससे पहले मूसा का ग्रंथ, एक संदर्भ और दया के रूप में।

وَمِن قَبْلِهِۦ كِتَٰبُ مُوسَىٰٓ إِمَامًۭا وَرَحْمَةً

ये वे हैं जो उस पर विश्वास करते हैं।

أُو۟لَٰٓئِكَ يُؤْمِنُونَ بِهِۦ

11:17

और दलों में से जो कोई उसे नकारता है, आग उसका वादे का समय है:

وَمَن يَكْفُرْ بِهِۦ مِنَ ٱلْأَحْزَابِ فَٱلنَّارُ مَوْعِدُهُۥ

तो उसके विषय में वाद-प्रतिवाद में न पड़ो,

فَلَا تَكُ فِى مِرْيَةٍۢ مِّنْهُ

क्योंकि यह तुम्हारे अभिभावक की ओर से आया सत्य है, परंतु अधिकतर लोग विश्वास नहीं करते।

إِنَّهُ ٱلْحَقُّ مِن رَّبِّكَ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ

और उससे अधिक अन्यायी कौन है जो ईश्वर के विरुद्ध झूठ गढ़ता है?

وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ ٱفْتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًا

ये वे हैं जो अपने अभिभावक के सामने प्रस्तुत किए जाएँगे, और साक्षी कहेंगे: “ये वे हैं जिन्होंने अपने अभिभावक के विरुद्ध झूठ बोला!”

أُو۟لَٰٓئِكَ يُعْرَضُونَ عَلَىٰ رَبِّهِمْ وَيَقُولُ ٱلْأَشْهَٰدُ هَٰٓؤُلَآءِ ٱلَّذِينَ كَذَبُوا۟ عَلَىٰ رَبِّهِمْ

क्या ऐसा नहीं कि ईश्वर का धिक्कार अन्यायियों पर है, जो ईश्वर की राह रोकते हैं और उसे टेढ़ी करने की खोज में रहते हैं, और जो अंतिम जीवन को नकारते हैं?

أَلَا لَعْنَةُ ٱللَّهِ عَلَى ٱلظَّٰلِمِينَ ٱلَّذِينَ يَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًۭا وَهُم بِٱلْءَاخِرَةِ هُمْ كَٰفِرُونَ

ये वे हैं जो धरती पर उसे असमर्थ नहीं कर सकेंगे, और ईश्वर के अतिरिक्त उनका कोई हिमायती न होगा:

أُو۟لَٰٓئِكَ لَمْ يَكُونُوا۟ مُعْجِزِينَ فِى ٱلْأَرْضِ وَمَا كَانَ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ مِنْ أَوْلِيَآءَ

11:20

उनका दंड दोगुना किया जाएगा।

يُضَٰعَفُ لَهُمُ ٱلْعَذَابُ

वे न सुन सकते थे, न साफ़ देख सकते थे।

مَا كَانُوا۟ يَسْتَطِيعُونَ ٱلسَّمْعَ وَمَا كَانُوا۟ يُبْصِرُونَ

ये वे हैं जिन्होंने अपने स्व को घाटे में डाल दिया, और जो वे गढ़ते थे वह उनसे दूर भटक गया।

أُو۟لَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ خَسِرُوٓا۟ أَنفُسَهُمْ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا۟ يَفْتَرُونَ

अटल रूप से, अंतिम जीवन में वही सबसे बढ़कर घाटा उठाने वाले हैं।

لَا جَرَمَ أَنَّهُمْ فِى ٱلْءَاخِرَةِ هُمُ ٱلْأَخْسَرُونَ

जिन्होंने विश्वास किया, भले कर्म किए और अपने अभिभावक के सामने झुक गए: यही उद्यान वाले हैं,

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ وَأَخْبَتُوٓا۟ إِلَىٰ رَبِّهِمْ أُو۟لَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ ٱلْجَنَّةِ

जहाँ वे सदा रहेंगे।

هُمْ فِيهَا خَٰلِدُونَ

11:24

दोनों भागों का उदाहरण ऐसा है जैसे अंधा और बहरा, और दृष्टिवान और सुनने वाला:

مَثَلُ ٱلْفَرِيقَيْنِ كَٱلْأَعْمَىٰ وَٱلْأَصَمِّ وَٱلْبَصِيرِ وَٱلسَّمِيعِ

क्या वे उदाहरण में बराबर हैं?

هَلْ يَسْتَوِيَانِ مَثَلًا

11:24

तो क्या तुम स्मरण नहीं करते?

أَفَلَا تَذَكَّرُونَ

11:25

हमने निश्चय ही नूह को उसकी क़ौम की ओर भेजा:

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِۦٓ

11:25

“मैं तुम्हारे लिए एक स्पष्ट चेतावनी देने वाला हूँ:

إِنِّى لَكُمْ نَذِيرٌۭ مُّبِينٌ

केवल ईश्वर की आज्ञा का पालन करो;

أَن لَّا تَعْبُدُوٓا۟ إِلَّا ٱللَّهَ

क्योंकि मैं तुम्हारे लिए एक पीड़ादायक दिन के दंड से डरता हूँ।”

إِنِّىٓ أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ أَلِيمٍۢ

11:27

उसकी क़ौम में से जो नकारते थे, उनके दरबार ने कहा: “हम तुम्हें केवल अपने जैसा एक मानव देखते हैं, और हम किसी को तुम्हारे पीछे चलते नहीं देखते, सिवा उनके जो हममें से सबसे निम्न हैं, पहली दृष्टि में।

فَقَالَ ٱلْمَلَأُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِن قَوْمِهِۦ مَا نَرَىٰكَ إِلَّا بَشَرًۭا مِّثْلَنَا وَمَا نَرَىٰكَ ٱتَّبَعَكَ إِلَّا ٱلَّذِينَ هُمْ أَرَاذِلُنَا بَادِىَ ٱلرَّأْىِ

और हम तुममें अपने ऊपर कोई अनुग्रह नहीं देखते; बल्कि हम तुम्हारे झूठे होने का अनुमान लगाते हैं।”

وَمَا نَرَىٰ لَكُمْ عَلَيْنَا مِن فَضْلٍۭ بَلْ نَظُنُّكُمْ كَٰذِبِينَ

11:28

उसने कहा: “हे मेरी क़ौम, क्या तुमने देखा? यदि मैं अपने अभिभावक के एक स्पष्ट प्रमाण पर आधारित हूँ, और उसने मुझे अपनी ओर से एक दया दी है, और वह तुम्हारे लिए अस्पष्ट हो गई है, तो क्या हम उसे तुम पर थोप दें, जबकि तुम्हें उससे अरुचि है?

قَالَ يَٰقَوْمِ أَرَءَيْتُمْ إِن كُنتُ عَلَىٰ بَيِّنَةٍۢ مِّن رَّبِّى وَءَاتَىٰنِى رَحْمَةًۭ مِّنْ عِندِهِۦ فَعُمِّيَتْ عَلَيْكُمْ أَنُلْزِمُكُمُوهَا وَأَنتُمْ لَهَا كَٰرِهُونَ

हे मेरी क़ौम, मैं इसके लिए तुमसे कोई धन नहीं माँगता:

وَيَٰقَوْمِ لَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مَالًا

मेरा पुरस्कार केवल ईश्वर के ज़िम्मे है।

إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَى ٱللَّهِ

11:29

और मैं उनमें से नहीं जो विश्वास करने वालों को ठुकराते हैं: वे अपने अभिभावक से निश्चय ही मिलेंगे;

وَمَآ أَنَا۠ بِطَارِدِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِنَّهُم مُّلَٰقُوا۟ رَبِّهِمْ

11:29

परंतु मैं तुम्हें एक अज्ञानी क़ौम देखता हूँ।

وَلَٰكِنِّىٓ أَرَىٰكُمْ قَوْمًۭا تَجْهَلُونَ

11:30

हे मेरी क़ौम, ईश्वर के विरुद्ध मेरी सहायता कौन करता, यदि मैं उन्हें ठुकरा देता?

وَيَٰقَوْمِ مَن يَنصُرُنِى مِنَ ٱللَّهِ إِن طَرَدتُّهُمْ

11:30

तो क्या तुम स्मरण नहीं करते?

أَفَلَا تَذَكَّرُونَ

11:31

और मैं तुमसे नहीं कहता कि मेरे पास ईश्वर के भंडार हैं, न यह कि मैं उसे जानता हूँ जो इंद्रियों से परे है, न यह कि मैं एक अभिकर्ता हूँ;

وَلَآ أَقُولُ لَكُمْ عِندِى خَزَآئِنُ ٱللَّهِ وَلَآ أَعْلَمُ ٱلْغَيْبَ وَلَآ أَقُولُ إِنِّى مَلَكٌۭ

11:31

और मैं उनके विषय में, जिन्हें तुम्हारी आँखें तुच्छ समझती हैं, यह नहीं कहता कि ईश्वर उन्हें कोई अच्छाई नहीं देगा:

وَلَآ أَقُولُ لِلَّذِينَ تَزْدَرِىٓ أَعْيُنُكُمْ لَن يُؤْتِيَهُمُ ٱللَّهُ خَيْرًا

11:31

ईश्वर उसे सबसे अच्छी तरह जानता है जो उनके स्वों में है।

ٱللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا فِىٓ أَنفُسِهِمْ

तब तो मैं अवश्य अन्यायियों की गिनती में होता।”

إِنِّىٓ إِذًۭا لَّمِنَ ٱلظَّٰلِمِينَ

11:32

उन्होंने कहा: “हे नूह, तुमने हमसे बहस की, और बहस बहुत बढ़ा दी; तो हमारे पास वह ले आओ जिसका तुम हमसे वादा करते हो, यदि तुम सच्चों की गिनती में हो।”

قَالُوا۟ يَٰنُوحُ قَدْ جَٰدَلْتَنَا فَأَكْثَرْتَ جِدَٰلَنَا فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَآ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّٰدِقِينَ

उसने कहा: “उसे तुम्हारे पास केवल ईश्वर लाएगा, यदि उसकी मर्ज़ी हो, और तुम उसे असमर्थ नहीं कर सकोगे।

قَالَ إِنَّمَا يَأْتِيكُم بِهِ ٱللَّهُ إِن شَآءَ وَمَآ أَنتُم بِمُعْجِزِينَ

11:34

और मेरा परामर्श तुम्हें कोई लाभ नहीं देगा, चाहे मैं तुम्हें परामर्श देना चाहूँ, यदि ईश्वर तुम्हें दिशाहीन करना चाहे:

وَلَا يَنفَعُكُمْ نُصْحِىٓ إِنْ أَرَدتُّ أَنْ أَنصَحَ لَكُمْ إِن كَانَ ٱللَّهُ يُرِيدُ أَن يُغْوِيَكُمْ

वह तुम्हारा अभिभावक है,

هُوَ رَبُّكُمْ

और उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।”

وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ

या वे कहेंगे: “उसने इसे गढ़ लिया है”?

أَمْ يَقُولُونَ ٱفْتَرَىٰهُ

कहो: “यदि मैंने इसे गढ़ा है, तो मेरा बहिष्कार मेरे ही ज़िम्मे है, और मैं तुम्हारे बहिष्कार से बरी हूँ।”

قُلْ إِنِ ٱفْتَرَيْتُهُۥ فَعَلَىَّ إِجْرَامِى وَأَنَا۠ بَرِىٓءٌۭ مِّمَّا تُجْرِمُونَ

11:36

और नूह पर प्रकट किया गया कि तुम्हारी क़ौम में से कोई अब विश्वास नहीं करेगा, उनके अलावा जो पहले ही विश्वास कर चुके हैं:

وَأُوحِىَ إِلَىٰ نُوحٍ أَنَّهُۥ لَن يُؤْمِنَ مِن قَوْمِكَ إِلَّا مَن قَدْ ءَامَنَ

तो उसके कारण व्यथित न हो जो वे करते थे।

فَلَا تَبْتَئِسْ بِمَا كَانُوا۟ يَفْعَلُونَ

11:37

और जलयान निर्मित करो, हमारी आँखों के सामने और हमारे प्रकटीकरण के अनुसार,

وَٱصْنَعِ ٱلْفُلْكَ بِأَعْيُنِنَا وَوَحْيِنَا

11:37

और जिन्होंने अन्याय किया उनके विषय में मुझे संबोधित न करो, क्योंकि वे डुबोए जाएँगे।

وَلَا تُخَٰطِبْنِى فِى ٱلَّذِينَ ظَلَمُوٓا۟ إِنَّهُم مُّغْرَقُونَ

11:38

और वह जलयान निर्मित कर रहा था; और जब भी उसकी क़ौम का कोई दरबार उसके पास से गुज़रता, वह उसका उपहास करता।

وَيَصْنَعُ ٱلْفُلْكَ وَكُلَّمَا مَرَّ عَلَيْهِ مَلَأٌۭ مِّن قَوْمِهِۦ سَخِرُوا۟ مِنْهُ

11:38

उसने कहा: “यदि तुम हमारा उपहास करते हो, तो हम भी तुम्हारा उपहास निश्चय ही करेंगे, जैसे तुम हमारा उपहास करते हो।

قَالَ إِن تَسْخَرُوا۟ مِنَّا فَإِنَّا نَسْخَرُ مِنكُمْ كَمَا تَسْخَرُونَ

तुम शीघ्र जान लोगे कि किस पर ऐसा दंड आएगा जो उसे लज्जा से ढक देगा, और किस पर वह दंड टूट पड़ेगा जो बना रहता है।”

فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ مَن يَأْتِيهِ عَذَابٌۭ يُخْزِيهِ وَيَحِلُّ عَلَيْهِ عَذَابٌۭ مُّقِيمٌ

11:40

यहाँ तक कि जब हमारा आदेश आया और तंदूर उबलने लगा, तो हमने कहा: “उसमें हर चीज़ में से एक जोड़े के दो तत्त्व सवार कर लो, और अपने परिवार को भी, उसके सिवा जिस पर पहले का कथन भारी पड़ चुका है, और उन्हें जिन्होंने विश्वास किया।”

حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءَ أَمْرُنَا وَفَارَ ٱلتَّنُّورُ قُلْنَا ٱحْمِلْ فِيهَا مِن كُلٍّۢ زَوْجَيْنِ ٱثْنَيْنِ وَأَهْلَكَ إِلَّا مَن سَبَقَ عَلَيْهِ ٱلْقَوْلُ وَمَنْ ءَامَنَ

और उसके साथ विश्वास करने वाले केवल थोड़े ही थे।

وَمَآ ءَامَنَ مَعَهُۥٓ إِلَّا قَلِيلٌۭ

11:41

और उसने कहा: “इसमें सवार हो जाओ: ईश्वर के नाम से इसका चलना और इसका लंगर डालना हो।

وَقَالَ ٱرْكَبُوا۟ فِيهَا بِسْمِ ٱللَّهِ مَجْر۪ىٰهَا وَمُرْسَىٰهَآ

मेरा अभिभावक अवश्य अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।”

إِنَّ رَبِّى لَغَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ

और वह उन्हें लेकर पहाड़ों जैसी लहरों के बीच चल रहा था।

وَهِىَ تَجْرِى بِهِمْ فِى مَوْجٍۢ كَٱلْجِبَالِ

11:42

और नूह ने अपने बेटे को आवाज़ दी, जो एक ओर अलग खड़ा था: “हे मेरे नन्हे, हमारे साथ सवार हो जाओ, और नकारने वालों के साथ न रहो।”

وَنَادَىٰ نُوحٌ ٱبْنَهُۥ وَكَانَ فِى مَعْزِلٍۢ يَٰبُنَىَّ ٱرْكَب مَّعَنَا وَلَا تَكُن مَّعَ ٱلْكَٰفِرِينَ

11:43

उसने कहा: “मैं किसी पहाड़ की शरण ले लूँगा, जो मुझे पानी से सुरक्षित रखेगा।”

قَالَ سَـَٔاوِىٓ إِلَىٰ جَبَلٍۢ يَعْصِمُنِى مِنَ ٱلْمَآءِ

11:43

उसने कहा: “आज ईश्वर के आदेश से कोई सुरक्षा नहीं, सिवा उसके जिस पर वह दया करे।”

قَالَ لَا عَاصِمَ ٱلْيَوْمَ مِنْ أَمْرِ ٱللَّهِ إِلَّا مَن رَّحِمَ

11:43

और लहर उन दोनों के बीच आ गई, और वह डूबे हुओं की गिनती में हो गया।

وَحَالَ بَيْنَهُمَا ٱلْمَوْجُ فَكَانَ مِنَ ٱلْمُغْرَقِينَ

11:44

और कहा गया: “हे धरती, अपना पानी निगल लो! हे आकाश, थम जाओ!”

وَقِيلَ يَٰٓأَرْضُ ٱبْلَعِى مَآءَكِ وَيَٰسَمَآءُ أَقْلِعِى

11:44

और पानी घट गया, मामले का फ़ैसला हो गया, और जलयान जूदी पर ठहर गया।

وَغِيضَ ٱلْمَآءُ وَقُضِىَ ٱلْأَمْرُ وَٱسْتَوَتْ عَلَى ٱلْجُودِىِّ

11:44

और कहा गया: “दूर हो अन्यायियों की क़ौम!”

وَقِيلَ بُعْدًۭا لِّلْقَوْمِ ٱلظَّٰلِمِينَ

11:45

और नूह ने अपने अभिभावक को पुकारा और कहा: “मेरे अभिभावक, मेरा बेटा निश्चय ही मेरे परिवार में से है, और आपका वादा सत्य है,

وَنَادَىٰ نُوحٌۭ رَّبَّهُۥ فَقَالَ رَبِّ إِنَّ ٱبْنِى مِنْ أَهْلِى وَإِنَّ وَعْدَكَ ٱلْحَقُّ

11:45

और आप निर्णय करने वालों में सबसे संतुलित हैं।”

وَأَنتَ أَحْكَمُ ٱلْحَٰكِمِينَ

11:46

उसने कहा: “हे नूह, वह निश्चय ही तुम्हारे परिवार में से नहीं है,

قَالَ يَٰنُوحُ إِنَّهُۥ لَيْسَ مِنْ أَهْلِكَ

11:46

क्योंकि उसने वह किया जो भला नहीं है।

إِنَّهُۥ عَمَلٌ غَيْرُ صَٰلِحٍۢ

11:46

तो मुझसे वह न माँगो जिसका तुम्हें कोई ज्ञान नहीं,

فَلَا تَسْـَٔلْنِ مَا لَيْسَ لَكَ بِهِۦ عِلْمٌ

11:46

क्योंकि मैं तुम्हें उपदेश देता हूँ कि तुम अज्ञानियों की गिनती में न रहो।”

إِنِّىٓ أَعِظُكَ أَن تَكُونَ مِنَ ٱلْجَٰهِلِينَ

11:47

उसने कहा: “मेरे अभिभावक, मैं निश्चय ही स्वयं को आपकी छत्रछाया में रखता हूँ कि आपसे वह न माँगूँ जिसका मुझे कोई ज्ञान नहीं,

قَالَ رَبِّ إِنِّىٓ أَعُوذُ بِكَ أَنْ أَسْـَٔلَكَ مَا لَيْسَ لِى بِهِۦ عِلْمٌۭ

11:47

और यदि आप मुझे क्षमा न करें और मुझ पर दया न करें, तो मैं घाटा उठाने वालों की गिनती में हो जाऊँगा।”

وَإِلَّا تَغْفِرْ لِى وَتَرْحَمْنِىٓ أَكُن مِّنَ ٱلْخَٰسِرِينَ

11:48

कहा गया: “हे नूह, हमारी ओर से शांति के साथ उतरो, और तुम पर तथा तुम्हारे साथ वालों से उपजे समुदायों पर आशीषें हों;

قِيلَ يَٰنُوحُ ٱهْبِطْ بِسَلَٰمٍۢ مِّنَّا وَبَرَكَٰتٍ عَلَيْكَ وَعَلَىٰٓ أُمَمٍۢ مِّمَّن مَّعَكَ

और कुछ समुदाय हैं जिन्हें हम उपभोग कराएँगे, फिर हमारी ओर से उन्हें पीड़ादायक दंड छुएगा।”

وَأُمَمٌۭ سَنُمَتِّعُهُمْ ثُمَّ يَمَسُّهُم مِّنَّا عَذَابٌ أَلِيمٌۭ

11:49

ये उसकी सूचनाएँ हैं जो इंद्रियों से परे है, जिन्हें हम तुम पर प्रकट करते हैं:

تِلْكَ مِنْ أَنۢبَآءِ ٱلْغَيْبِ نُوحِيهَآ إِلَيْكَ

तुम इन्हें नहीं जानते थे, न तुम और न तुम्हारी क़ौम, इससे पहले।

مَا كُنتَ تَعْلَمُهَآ أَنتَ وَلَا قَوْمُكَ مِن قَبْلِ هَٰذَا

तो धैर्य रखो,

فَٱصْبِرْ

क्योंकि परिणाम सावधानी बरतने वालों का है।

إِنَّ ٱلْعَٰقِبَةَ لِلْمُتَّقِينَ

11:50

और आद की ओर, उनका भाई हूद:

وَإِلَىٰ عَادٍ أَخَاهُمْ هُودًۭا

उसने कहा: “हे मेरी क़ौम! ईश्वर की आज्ञा का पालन करो: तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई देवता नहीं;

قَالَ يَٰقَوْمِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُۥٓ

तुम केवल गढ़ने वाले हो।

إِنْ أَنتُمْ إِلَّا مُفْتَرُونَ

हे मेरी क़ौम, मैं इसके लिए तुमसे कोई पुरस्कार नहीं माँगता:

يَٰقَوْمِ لَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْرًا

मेरा पुरस्कार केवल उसके ज़िम्मे है जिसने मुझे मूलतः रचा।

إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَى ٱلَّذِى فَطَرَنِىٓ

तो क्या तुम बुद्धि से काम नहीं लेते?

أَفَلَا تَعْقِلُونَ

11:52

हे मेरी क़ौम, अपने अभिभावक से क्षमा माँगो, फिर उसकी ओर पलट आओ: वह तुम पर बरसता आकाश भेजेगा, और तुम्हारे बल में बल बढ़ाएगा; और बहिष्कृत बनकर पीठ न फेरो।”

وَيَٰقَوْمِ ٱسْتَغْفِرُوا۟ رَبَّكُمْ ثُمَّ تُوبُوٓا۟ إِلَيْهِ يُرْسِلِ ٱلسَّمَآءَ عَلَيْكُم مِّدْرَارًۭا وَيَزِدْكُمْ قُوَّةً إِلَىٰ قُوَّتِكُمْ وَلَا تَتَوَلَّوْا۟ مُجْرِمِينَ

11:53

उन्होंने कहा: “हे हूद, तुम हमारे पास कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं लाए, और हम तुम्हारे कथन पर अपने देवताओं को त्यागने वाले नहीं, और हम तुम पर भरोसा करने वाले नहीं।

قَالُوا۟ يَٰهُودُ مَا جِئْتَنَا بِبَيِّنَةٍۢ وَمَا نَحْنُ بِتَارِكِىٓ ءَالِهَتِنَا عَن قَوْلِكَ وَمَا نَحْنُ لَكَ بِمُؤْمِنِينَ

हम तो केवल यह कहते हैं कि हमारे देवताओं में से किसी ने तुम पर बुराई की चोट की है।”

إِن نَّقُولُ إِلَّا ٱعْتَرَىٰكَ بَعْضُ ءَالِهَتِنَا بِسُوٓءٍۢ

उसने कहा: “मैं निश्चय ही ईश्वर को साक्षी बनाता हूँ,

قَالَ إِنِّىٓ أُشْهِدُ ٱللَّهَ

और तुम भी साक्षी रहो कि मैं उससे बरी हूँ जिसे तुम उसके अतिरिक्त साझी ठहराते हो:

وَٱشْهَدُوٓا۟ أَنِّى بَرِىٓءٌۭ مِّمَّا تُشْرِكُونَ مِن دُونِهِۦ

तो सब मिलकर मेरे विरुद्ध चाल चलो, और मुझे कोई मोहलत न दो,

فَكِيدُونِى جَمِيعًۭا ثُمَّ لَا تُنظِرُونِ

11:56

क्योंकि मैं ईश्वर को मुख़्तार बनाता हूँ, जो मेरा अभिभावक है और तुम्हारा भी:

إِنِّى تَوَكَّلْتُ عَلَى ٱللَّهِ رَبِّى وَرَبِّكُم

11:56

कोई चलने-फिरने वाला नहीं जिसे वह माथे के बालों से पकड़े हुए न हो।

مَّا مِن دَآبَّةٍ إِلَّا هُوَ ءَاخِذٌۢ بِنَاصِيَتِهَآ

मेरा अभिभावक सीधे पथ पर है।

إِنَّ رَبِّى عَلَىٰ صِرَٰطٍۢ مُّسْتَقِيمٍۢ

यदि तुम पीठ फेरते हो, तो जिसके साथ मैं तुम्हारी ओर भेजा गया था वह मैं तुम्हें पहुँचा चुका हूँ;

فَإِن تَوَلَّوْا۟ فَقَدْ أَبْلَغْتُكُم مَّآ أُرْسِلْتُ بِهِۦٓ إِلَيْكُمْ

और मेरा अभिभावक तुम्हारी जगह दूसरी क़ौम को उत्तराधिकारी बनाएगा, बिना इसके कि तुम उसे किसी भी बात में हानि पहुँचाओ,

وَيَسْتَخْلِفُ رَبِّى قَوْمًا غَيْرَكُمْ وَلَا تَضُرُّونَهُۥ شَيْـًٔا

क्योंकि मेरा अभिभावक हर चीज़ की रक्षा करता है।”

إِنَّ رَبِّى عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ حَفِيظٌۭ

11:58

और जब हमारा आदेश आया, तो हमने हूद को और उन्हें जिन्होंने उसके साथ विश्वास किया था, अपनी ओर से एक दया के कारण उबारा, और हमने उन्हें एक कड़े दंड से उबारा।

وَلَمَّا جَآءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا هُودًۭا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مَعَهُۥ بِرَحْمَةٍۢ مِّنَّا وَنَجَّيْنَٰهُم مِّنْ عَذَابٍ غَلِيظٍۢ

11:59

और ये आद हैं: उन्होंने अपने अभिभावक के संकेतों को हठपूर्वक अस्वीकार किया, उसके संदेशवाहकों की अवज्ञा की, और हर हठी अत्याचारी के आदेश का अनुसरण किया।

وَتِلْكَ عَادٌۭ جَحَدُوا۟ بِـَٔايَٰتِ رَبِّهِمْ وَعَصَوْا۟ رُسُلَهُۥ وَٱتَّبَعُوٓا۟ أَمْرَ كُلِّ جَبَّارٍ عَنِيدٍۢ

11:60

और इस इहलोक के जीवन में उनके पीछे एक धिक्कार लगा दिया गया, और पेशी के दिन भी:

وَأُتْبِعُوا۟ فِى هَٰذِهِ ٱلدُّنْيَا لَعْنَةًۭ وَيَوْمَ ٱلْقِيَٰمَةِ

11:60

क्या ऐसा नहीं है: आद ने निश्चय ही अपने अभिभावक को नकारा।

أَلَآ إِنَّ عَادًۭا كَفَرُوا۟ رَبَّهُمْ

11:60

दूर हों आद, हूद की क़ौम!

أَلَا بُعْدًۭا لِّعَادٍۢ قَوْمِ هُودٍۢ

11:61

और समूद की ओर, उनका भाई सालेह:

وَإِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمْ صَٰلِحًۭا

उसने कहा: “हे मेरी क़ौम! ईश्वर की आज्ञा का पालन करो: तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई देवता नहीं।

قَالَ يَٰقَوْمِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُۥ

11:61

वही है जिसने तुम्हें धरती से उत्पन्न किया और उसमें तुम्हें दीर्घकाल तक जीवन दिया: तो उससे क्षमा माँगो, फिर उसकी ओर पलट आओ,

هُوَ أَنشَأَكُم مِّنَ ٱلْأَرْضِ وَٱسْتَعْمَرَكُمْ فِيهَا فَٱسْتَغْفِرُوهُ ثُمَّ تُوبُوٓا۟ إِلَيْهِ

क्योंकि मेरा अभिभावक निकट है, और उत्तर देता है।”

إِنَّ رَبِّى قَرِيبٌۭ مُّجِيبٌۭ

11:62

उन्होंने कहा: “हे सालेह, इससे पहले तुम हमारे बीच एक आशा थे; क्या तुम हमें उसकी आज्ञा का पालन करने से रोकते हो जिसकी आज्ञा का पालन हमारे पूर्वज करते थे? जिसकी ओर तुम हमें बुलाते हो, उसके विषय में हम अवश्य एक विचलित करने वाली दुविधा में हैं।”

قَالُوا۟ يَٰصَٰلِحُ قَدْ كُنتَ فِينَا مَرْجُوًّۭا قَبْلَ هَٰذَآ أَتَنْهَىٰنَآ أَن نَّعْبُدَ مَا يَعْبُدُ ءَابَآؤُنَا وَإِنَّنَا لَفِى شَكٍّۢ مِّمَّا تَدْعُونَآ إِلَيْهِ مُرِيبٍۢ

उसने कहा: “हे मेरी क़ौम, क्या तुमने देखा? यदि मैं अपने अभिभावक के एक स्पष्ट प्रमाण पर आधारित हूँ, और उसने मुझे अपनी ओर से एक दया दी है, तो ईश्वर के विरुद्ध मेरी सहायता कौन करता, यदि मैं उसकी अवज्ञा करता?

قَالَ يَٰقَوْمِ أَرَءَيْتُمْ إِن كُنتُ عَلَىٰ بَيِّنَةٍۢ مِّن رَّبِّى وَءَاتَىٰنِى مِنْهُ رَحْمَةًۭ فَمَن يَنصُرُنِى مِنَ ٱللَّهِ إِنْ عَصَيْتُهُۥ

तब तुम मेरा घाटा ही बढ़ाते।

فَمَا تَزِيدُونَنِى غَيْرَ تَخْسِيرٍۢ

हे मेरी क़ौम, यह ईश्वर की ऊँटनी है, तुम्हारे लिए एक संकेत:

وَيَٰقَوْمِ هَٰذِهِۦ نَاقَةُ ٱللَّهِ لَكُمْ ءَايَةًۭ

तो उसे छोड़ दो: वह ईश्वर की धरती पर खाए,

فَذَرُوهَا تَأْكُلْ فِىٓ أَرْضِ ٱللَّهِ

और उसे किसी बुराई से न छुओ, नहीं तो एक निकट का दंड तुम्हें पकड़ लेगा।”

وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوٓءٍۢ فَيَأْخُذَكُمْ عَذَابٌۭ قَرِيبٌۭ

परंतु उन्होंने उसका अंग-भंग कर दिया। तब उसने कहा: “अपने ठिकाने में तीन दिन उपभोग कर लो:

فَعَقَرُوهَا فَقَالَ تَمَتَّعُوا۟ فِى دَارِكُمْ ثَلَٰثَةَ أَيَّامٍۢ

यह ऐसा वादा है जिसे झुठलाया नहीं जाएगा।”

ذَٰلِكَ وَعْدٌ غَيْرُ مَكْذُوبٍۢ

11:66

जब हमारा आदेश आया, तो हमने सालेह को और उन्हें जिन्होंने उसके साथ विश्वास किया था, अपनी ओर से एक दया के कारण, और उस दिन की लज्जा से उबारा;

فَلَمَّا جَآءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا صَٰلِحًۭا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مَعَهُۥ بِرَحْمَةٍۢ مِّنَّا وَمِنْ خِزْىِ يَوْمِئِذٍ

क्योंकि तुम्हारा अभिभावक बलवान, सर्वशक्तिमान है।

إِنَّ رَبَّكَ هُوَ ٱلْقَوِىُّ ٱلْعَزِيزُ

11:67–68

और जिन्होंने अन्याय किया था उन्हें चीख़ ने पकड़ लिया, तो वे अपने ठिकानों में पड़े हुए, निश्चल रह गए, मानो वे वहाँ कभी रहे ही न थे।

وَأَخَذَ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ ٱلصَّيْحَةُ فَأَصْبَحُوا۟ فِى دِيَٰرِهِمْ جَٰثِمِينَ كَأَن لَّمْ يَغْنَوْا۟ فِيهَآ

11:67–68

क्या ऐसा नहीं है: समूद ने निश्चय ही अपने अभिभावक को नकारा।

أَلَآ إِنَّ ثَمُودَا۟ كَفَرُوا۟ رَبَّهُمْ

11:67–68

दूर हों समूद!

أَلَا بُعْدًۭا لِّثَمُودَ

11:69

और हमारे संदेशवाहक इब्राहीम के पास शुभ समाचार के साथ निश्चय ही आए: उन्होंने कहा: “शांति!”

وَلَقَدْ جَآءَتْ رُسُلُنَآ إِبْرَٰهِيمَ بِٱلْبُشْرَىٰ قَالُوا۟ سَلَٰمًۭا

11:69

उसने कहा: “शांति!”

قَالَ سَلَٰمٌۭ

11:69

और उसने देर नहीं की, एक भुना हुआ बछड़ा ले आया।

فَمَا لَبِثَ أَن جَآءَ بِعِجْلٍ حَنِيذٍۢ

11:70

परंतु जब उसने देखा कि उनके हाथ उस तक नहीं पहुँचते, तो उसे वे अजीब लगे और उसने उनके प्रति एक डर अनुभव किया।

فَلَمَّا رَءَآ أَيْدِيَهُمْ لَا تَصِلُ إِلَيْهِ نَكِرَهُمْ وَأَوْجَسَ مِنْهُمْ خِيفَةًۭ

11:70

उन्होंने कहा: “डरो मत,

قَالُوا۟ لَا تَخَفْ

11:70

क्योंकि हम लूत की क़ौम की ओर भेजे गए हैं।”

إِنَّآ أُرْسِلْنَآ إِلَىٰ قَوْمِ لُوطٍۢ

और उसकी पत्नी, खड़ी हुई, हँस पड़ी;

وَٱمْرَأَتُهُۥ قَآئِمَةٌۭ فَضَحِكَتْ

11:71

तब हमने उसे इसहाक़ का शुभ समाचार दिया,

فَبَشَّرْنَٰهَا بِإِسْحَٰقَ

11:71

और इसहाक़ के बाद याक़ूब का।

وَمِن وَرَآءِ إِسْحَٰقَ يَعْقُوبَ

उसने कहा: “हाय मुझ पर! क्या मैं जन्म दूँगी, जबकि मैं बूढ़ी हूँ, और यह मेरा पति है, एक बूढ़ा?

قَالَتْ يَٰوَيْلَتَىٰٓ ءَأَلِدُ وَأَنَا۠ عَجُوزٌۭ وَهَٰذَا بَعْلِى شَيْخًا

यह तो अवश्य आश्चर्य की बात है!”

إِنَّ هَٰذَا لَشَىْءٌ عَجِيبٌۭ

उन्होंने कहा: “क्या तुम ईश्वर के आदेश से आश्चर्य करती हो?

قَالُوٓا۟ أَتَعْجَبِينَ مِنْ أَمْرِ ٱللَّهِ

तुम पर ईश्वर की दया और उसकी आशीषें हों, घर वालो!

رَحْمَتُ ٱللَّهِ وَبَرَكَٰتُهُۥ عَلَيْكُمْ أَهْلَ ٱلْبَيْتِ

क्योंकि वह प्रशंसनीय, गौरवशाली है।”

إِنَّهُۥ حَمِيدٌۭ مَّجِيدٌۭ

11:74

जब इब्राहीम से घबराहट जाती रही और उसके पास शुभ समाचार आ गया, तो वह लूत की क़ौम के विषय में हमसे बहस करने लगा:

فَلَمَّا ذَهَبَ عَنْ إِبْرَٰهِيمَ ٱلرَّوْعُ وَجَآءَتْهُ ٱلْبُشْرَىٰ يُجَٰدِلُنَا فِى قَوْمِ لُوطٍ

11:75

इब्राहीम अवश्य सहनशील, आहें भरने वाला, निरंतर उसका आसरा लेने वाला है।

إِنَّ إِبْرَٰهِيمَ لَحَلِيمٌ أَوَّٰهٌۭ مُّنِيبٌۭ

11:76

“हे इब्राहीम, इससे कतरा जाओ:

يَٰٓإِبْرَٰهِيمُ أَعْرِضْ عَنْ هَٰذَآ

11:76

तुम्हारे अभिभावक का आदेश आ चुका है,

إِنَّهُۥ قَدْ جَآءَ أَمْرُ رَبِّكَ

11:76

और उन पर एक ऐसा दंड निश्चय ही आ रहा है जिसे रद्द नहीं किया जा सकता।”

وَإِنَّهُمْ ءَاتِيهِمْ عَذَابٌ غَيْرُ مَرْدُودٍۢ

11:77

और जब हमारे संदेशवाहक लूत के पास आए, तो उनका आना उसे बुरा लगा, और वह उनके विषय में असहाय अनुभव करने लगा, और उसने कहा: “यह एक कष्टदायक दिन है।”

وَلَمَّا جَآءَتْ رُسُلُنَا لُوطًۭا سِىٓءَ بِهِمْ وَضَاقَ بِهِمْ ذَرْعًۭا وَقَالَ هَٰذَا يَوْمٌ عَصِيبٌۭ

और उसकी क़ौम उसके पास दौड़ती हुई आई, जबकि इससे पहले वे बुरे कर्म किया करते थे।

وَجَآءَهُۥ قَوْمُهُۥ يُهْرَعُونَ إِلَيْهِ وَمِن قَبْلُ كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ ٱلسَّيِّـَٔاتِ

11:78

उसने कहा: “हे मेरी क़ौम, ये मेरी बेटियाँ हैं: वे तुम्हारे लिए अधिक स्वच्छ हैं; तो ईश्वर के प्रति सावधान रहो, और मेरे अतिथियों के विषय में मुझे लज्जित न करो:

قَالَ يَٰقَوْمِ هَٰٓؤُلَآءِ بَنَاتِى هُنَّ أَطْهَرُ لَكُمْ فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَلَا تُخْزُونِ فِى ضَيْفِىٓ

11:78

क्या तुममें कोई सुबुद्ध पुरुष नहीं?”

أَلَيْسَ مِنكُمْ رَجُلٌۭ رَّشِيدٌۭ

11:79

उन्होंने कहा: “तुम जानते ही हो कि तुम्हारी बेटियों पर हमारा क्या स्वत्व है, और तुम अवश्य जानते हो कि हम क्या चाहते हैं।”

قَالُوا۟ لَقَدْ عَلِمْتَ مَا لَنَا فِى بَنَاتِكَ مِنْ حَقٍّۢ وَإِنَّكَ لَتَعْلَمُ مَا نُرِيدُ

उसने कहा: “काश मुझमें तुम्हारे विरुद्ध कुछ बल होता, या मैं किसी सुदृढ़ आधार की शरण ले पाता!”

قَالَ لَوْ أَنَّ لِى بِكُمْ قُوَّةً أَوْ ءَاوِىٓ إِلَىٰ رُكْنٍۢ شَدِيدٍۢ

11:81

उन्होंने कहा: “हे लूत, हम निश्चय ही तुम्हारे अभिभावक के संदेशवाहक हैं: वे तुम तक कभी नहीं पहुँचेंगे।

قَالُوا۟ يَٰلُوطُ إِنَّا رُسُلُ رَبِّكَ لَن يَصِلُوٓا۟ إِلَيْكَ

11:81

तो अपने परिवार को लेकर, अपनी पत्नी के अलावा, रात के एक भाग में चल पड़ो, और तुममें से कोई पीछे न मुड़े,

فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍۢ مِّنَ ٱلَّيْلِ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنكُمْ أَحَدٌ إِلَّا ٱمْرَأَتَكَ

क्योंकि जो उन पर आने वाला है वह उस पर भी आएगा।

إِنَّهُۥ مُصِيبُهَا مَآ أَصَابَهُمْ

उनका वादे का समय सुबह है:

إِنَّ مَوْعِدَهُمُ ٱلصُّبْحُ

क्या सुबह निकट नहीं है?”

أَلَيْسَ ٱلصُّبْحُ بِقَرِيبٍۢ

11:82–83

जब हमारा आदेश आया, तो हमने उसके ऊपरी भाग को उसका निचला भाग बना दिया, और उस पर ढली हुई मिट्टी के, तह-दर-तह रखे, तुम्हारे अभिभावक के पास अंकित पत्थर बरसाए:

فَلَمَّا جَآءَ أَمْرُنَا جَعَلْنَا عَٰلِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهَا حِجَارَةًۭ مِّن سِجِّيلٍۢ مَّنضُودٍۢ مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ

और वह अन्यायियों से दूर नहीं।

وَمَا هِىَ مِنَ ٱلظَّٰلِمِينَ بِبَعِيدٍۢ

11:84

और मदयन की ओर, उनका भाई शुऐब:

وَإِلَىٰ مَدْيَنَ أَخَاهُمْ شُعَيْبًۭا

11:84

उसने कहा: “हे मेरी क़ौम! ईश्वर की आज्ञा का पालन करो: तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई देवता नहीं,

قَالَ يَٰقَوْمِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُۥ

11:84

और माप और तुला को न घटाओ।

وَلَا تَنقُصُوا۟ ٱلْمِكْيَالَ وَٱلْمِيزَانَ

11:84

मैं तुम्हें निश्चय ही अच्छाई में देखता हूँ, और मैं तुम्हारे लिए एक घेर लेने वाले दिन के दंड से डरता हूँ।

إِنِّىٓ أَرَىٰكُم بِخَيْرٍۢ وَإِنِّىٓ أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍۢ مُّحِيطٍۢ

11:85

हे मेरी क़ौम, माप और तुला को निष्पक्षता से पूरा दो,

وَيَٰقَوْمِ أَوْفُوا۟ ٱلْمِكْيَالَ وَٱلْمِيزَانَ بِٱلْقِسْطِ

11:85

और लोगों को उनकी चीज़ों में वंचित न करो, और धरती पर बिगाड़ने वाले बनकर उपद्रव न फैलाओ।

وَلَا تَبْخَسُوا۟ ٱلنَّاسَ أَشْيَآءَهُمْ وَلَا تَعْثَوْا۟ فِى ٱلْأَرْضِ مُفْسِدِينَ

11:86

जो ईश्वर के पास शेष रहता है वह तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम विश्वास करने वाले हो;

بَقِيَّتُ ٱللَّهِ خَيْرٌۭ لَّكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ

और मैं तुम पर रक्षक नहीं हूँ।”

وَمَآ أَنَا۠ عَلَيْكُم بِحَفِيظٍۢ

11:87

उन्होंने कहा: “हे शुऐब, क्या तुम्हारा संपर्क तुम्हें आदेश देता है कि हम उसे त्याग दें जिसकी आज्ञा का पालन हमारे पूर्वज करते थे, या अपनी संपत्ति के साथ जो हमारी मर्ज़ी हो, वह करना बंद कर दें?

قَالُوا۟ يَٰشُعَيْبُ أَصَلَوٰتُكَ تَأْمُرُكَ أَن نَّتْرُكَ مَا يَعْبُدُ ءَابَآؤُنَآ أَوْ أَن نَّفْعَلَ فِىٓ أَمْوَٰلِنَا مَا نَشَٰٓؤُا۟

11:87

तुम तो अवश्य सहनशील, सुबुद्ध हो!”

إِنَّكَ لَأَنتَ ٱلْحَلِيمُ ٱلرَّشِيدُ

11:88

उसने कहा: “हे मेरी क़ौम, क्या तुमने देखा? यदि मैं अपने अभिभावक के एक स्पष्ट प्रमाण पर आधारित हूँ, और उसने अपनी ओर से मुझे एक सुंदर जीविका दी है…

قَالَ يَٰقَوْمِ أَرَءَيْتُمْ إِن كُنتُ عَلَىٰ بَيِّنَةٍۢ مِّن رَّبِّى وَرَزَقَنِى مِنْهُ رِزْقًا حَسَنًۭا

11:88

और मैं नहीं चाहता कि तुम्हारा विरोध करके स्वयं वही करूँ जिससे मैं तुम्हें रोकता हूँ:

وَمَآ أُرِيدُ أَنْ أُخَالِفَكُمْ إِلَىٰ مَآ أَنْهَىٰكُمْ عَنْهُ

11:88

मैं केवल सुधार चाहता हूँ, जितना मुझसे बन पड़े;

إِنْ أُرِيدُ إِلَّا ٱلْإِصْلَٰحَ مَا ٱسْتَطَعْتُ

11:88

और मेरी सफलता केवल ईश्वर पर निर्भर है:

وَمَا تَوْفِيقِىٓ إِلَّا بِٱللَّهِ

11:88

उसी को मैं मुख़्तार बनाता हूँ,

عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ

11:88

और उसी का आसरा लेता हूँ।

وَإِلَيْهِ أُنِيبُ

11:89

हे मेरी क़ौम, मुझसे तुम्हारा संबंध टूट जाना तुम्हें इस पर न ले जाए कि तुम पर वह आ पड़े जो नूह की क़ौम पर, या हूद की क़ौम पर, या सालेह की क़ौम पर आ पड़ा;

وَيَٰقَوْمِ لَا يَجْرِمَنَّكُمْ شِقَاقِىٓ أَن يُصِيبَكُم مِّثْلُ مَآ أَصَابَ قَوْمَ نُوحٍ أَوْ قَوْمَ هُودٍ أَوْ قَوْمَ صَٰلِحٍۢ

11:89

और लूत की क़ौम तुमसे दूर नहीं।

وَمَا قَوْمُ لُوطٍۢ مِّنكُم بِبَعِيدٍۢ

और अपने अभिभावक से क्षमा माँगो, फिर उसकी ओर पलट आओ,

وَٱسْتَغْفِرُوا۟ رَبَّكُمْ ثُمَّ تُوبُوٓا۟ إِلَيْهِ

11:90

क्योंकि मेरा अभिभावक दयालु, स्नेहशील है।”

إِنَّ رَبِّى رَحِيمٌۭ وَدُودٌۭ

11:91

उन्होंने कहा: “हे शुऐब, तुम जो कहते हो उसका बहुत कुछ हम नहीं समझते, और हम तुम्हें अपने बीच अवश्य निर्बल देखते हैं; यदि तुम्हारा कुटुंब न होता, तो हम तुम्हें निष्कासित कर देते; और तुम्हारी हम पर कोई शक्ति नहीं।”

قَالُوا۟ يَٰشُعَيْبُ مَا نَفْقَهُ كَثِيرًۭا مِّمَّا تَقُولُ وَإِنَّا لَنَرَىٰكَ فِينَا ضَعِيفًۭا وَلَوْلَا رَهْطُكَ لَرَجَمْنَٰكَ وَمَآ أَنتَ عَلَيْنَا بِعَزِيزٍۢ

11:92

उसने कहा: “हे मेरी क़ौम, क्या मेरा कुटुंब तुम्हारे लिए ईश्वर से अधिक भार रखता है, जिसे तुमने अपनी पीठ के पीछे डाल दिया है?

قَالَ يَٰقَوْمِ أَرَهْطِىٓ أَعَزُّ عَلَيْكُم مِّنَ ٱللَّهِ وَٱتَّخَذْتُمُوهُ وَرَآءَكُمْ ظِهْرِيًّا

11:92

मेरा अभिभावक उसे पूरी तरह घेरे हुए है जो तुम करते हो।

إِنَّ رَبِّى بِمَا تَعْمَلُونَ مُحِيطٌۭ

11:93

हे मेरी क़ौम, अपनी जगह के अनुसार कर्म करो, क्योंकि मैं भी कर्म करता हूँ:

وَيَٰقَوْمِ ٱعْمَلُوا۟ عَلَىٰ مَكَانَتِكُمْ إِنِّى عَٰمِلٌۭ

तुम शीघ्र जान लोगे कि किस पर ऐसा दंड आएगा जो उसे लज्जा से ढक देगा, और कौन झूठा है।

سَوْفَ تَعْلَمُونَ مَن يَأْتِيهِ عَذَابٌۭ يُخْزِيهِ وَمَنْ هُوَ كَٰذِبٌۭ

और तुम ताक लगाओ,

وَٱرْتَقِبُوٓا۟

क्योंकि मैं तुम्हारे साथ ताक लगाए हूँ।”

إِنِّى مَعَكُمْ رَقِيبٌۭ

और जब हमारा आदेश आया, तो हमने शुऐब को और उन्हें जिन्होंने उसके साथ विश्वास किया था, अपनी ओर से एक दया के कारण उबारा।

وَلَمَّا جَآءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا شُعَيْبًۭا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مَعَهُۥ بِرَحْمَةٍۢ مِّنَّا

और जिन्होंने अन्याय किया था उन्हें चीख़ ने पकड़ लिया, तो वे अपने ठिकानों में पड़े हुए, निश्चल रह गए, मानो वे वहाँ कभी रहे ही न थे।

وَأَخَذَتِ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ ٱلصَّيْحَةُ فَأَصْبَحُوا۟ فِى دِيَٰرِهِمْ جَٰثِمِينَ كَأَن لَّمْ يَغْنَوْا۟ فِيهَآ

11:95

दूर हो मदयन, जैसे समूद दूर हुए!

أَلَا بُعْدًۭا لِّمَدْيَنَ كَمَا بَعِدَتْ ثَمُودُ

11:96–97

हमने निश्चय ही मूसा को अपने संकेतों और एक स्पष्ट अधिकार के साथ फ़िरऔन और उसके दरबार की ओर भेजा; परंतु उन्होंने फ़िरऔन के आदेश का अनुसरण किया,

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِـَٔايَٰتِنَا وَسُلْطَٰنٍۢ مُّبِينٍ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَإِي۟هِۦ فَٱتَّبَعُوٓا۟ أَمْرَ فِرْعَوْنَ

11:96–97

और फ़िरऔन का आदेश सुबुद्ध न था।

وَمَآ أَمْرُ فِرْعَوْنَ بِرَشِيدٍۢ

11:98

वह पेशी के दिन अपनी क़ौम के आगे चलेगा, और उन्हें आग तक पहुँचाएगा:

يَقْدُمُ قَوْمَهُۥ يَوْمَ ٱلْقِيَٰمَةِ فَأَوْرَدَهُمُ ٱلنَّارَ

11:98

कितना निकृष्ट है वह पहुँचने का स्थान जहाँ पहुँचा जाता है!

وَبِئْسَ ٱلْوِرْدُ ٱلْمَوْرُودُ

11:99

और इहलोक में उनके पीछे एक धिक्कार लगा दिया गया, और पेशी के दिन भी:

وَأُتْبِعُوا۟ فِى هَٰذِهِۦ لَعْنَةًۭ وَيَوْمَ ٱلْقِيَٰمَةِ

11:99

कितनी निकृष्ट सौग़ात है वह जो उन्हें दी गई!

بِئْسَ ٱلرِّفْدُ ٱلْمَرْفُودُ

11:100

ये उन बस्तियों की सूचनाएँ हैं जो हम तुम्हें बताते हैं: उनमें से कुछ खड़ी शेष हैं, और कुछ कटी हुई फ़सल।

ذَٰلِكَ مِنْ أَنۢبَآءِ ٱلْقُرَىٰ نَقُصُّهُۥ عَلَيْكَ مِنْهَا قَآئِمٌۭ وَحَصِيدٌۭ

11:101

और हमने उन पर अन्याय नहीं किया, परंतु उन्होंने स्वयं पर अन्याय किया:

وَمَا ظَلَمْنَٰهُمْ وَلَٰكِن ظَلَمُوٓا۟ أَنفُسَهُمْ

11:101

उनके देवता, जिन्हें वे ईश्वर के अतिरिक्त पुकारते थे, उनके किसी काम न आए जब तुम्हारे अभिभावक का आदेश आया,

فَمَآ أَغْنَتْ عَنْهُمْ ءَالِهَتُهُمُ ٱلَّتِى يَدْعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ مِن شَىْءٍۢ لَّمَّا جَآءَ أَمْرُ رَبِّكَ

11:101

और उन्होंने उनका विनाश ही बढ़ाया।

وَمَا زَادُوهُمْ غَيْرَ تَتْبِيبٍۢ

11:102

यह तुम्हारे अभिभावक की पकड़ है, जब वह बस्तियों को पकड़ता है जबकि वे अन्यायी होती हैं:

وَكَذَٰلِكَ أَخْذُ رَبِّكَ إِذَآ أَخَذَ ٱلْقُرَىٰ وَهِىَ ظَٰلِمَةٌ

11:102

उसकी पकड़ निश्चय ही पीड़ादायक, कठोर है।

إِنَّ أَخْذَهُۥٓ أَلِيمٌۭ شَدِيدٌ

इसमें उसके लिए अवश्य एक संकेत है जो अंतिम जीवन के दंड से डरता है:

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَءَايَةًۭ لِّمَنْ خَافَ عَذَابَ ٱلْءَاخِرَةِ

वह ऐसा दिन है जिसमें लोग एकत्र किए जाएँगे,

ذَٰلِكَ يَوْمٌۭ مَّجْمُوعٌۭ لَّهُ ٱلنَّاسُ

और वह एक प्रमाणित दिन है।

وَذَٰلِكَ يَوْمٌۭ مَّشْهُودٌۭ

और हम उसे केवल एक गिनी हुई अवधि तक टालते हैं।

وَمَا نُؤَخِّرُهُۥٓ إِلَّا لِأَجَلٍۢ مَّعْدُودٍۢ

11:105

जिस दिन वह आएगा, कोई स्व उसकी अनुमति के बिना नहीं बोलेगा:

يَوْمَ يَأْتِ لَا تَكَلَّمُ نَفْسٌ إِلَّا بِإِذْنِهِۦ

11:105

तब अभागा होगा और सौभाग्यशाली।

فَمِنْهُمْ شَقِىٌّۭ وَسَعِيدٌۭ

11:106–107

जो अभागे होंगे, वे आग में होंगे, जहाँ उनके लिए हाँफ और सिसकियाँ होंगी, जहाँ वे सदा रहेंगे, जब तक आकाश और धरती टिके रहेंगे, सिवा उसके जो तुम्हारे अभिभावक की मर्ज़ी हो,

فَأَمَّا ٱلَّذِينَ شَقُوا۟ فَفِى ٱلنَّارِ لَهُمْ فِيهَا زَفِيرٌۭ وَشَهِيقٌ خَٰلِدِينَ فِيهَا مَا دَامَتِ ٱلسَّمَٰوَٰتُ وَٱلْأَرْضُ إِلَّا مَا شَآءَ رَبُّكَ

11:106–107

क्योंकि तुम्हारा अभिभावक जो चाहता है वह निरंतर करता रहता है।

إِنَّ رَبَّكَ فَعَّالٌۭ لِّمَا يُرِيدُ

11:108

और जो सौभाग्यशाली होंगे, वे उद्यान में होंगे, जहाँ वे सदा रहेंगे, जब तक आकाश और धरती टिके रहेंगे, सिवा उसके जो तुम्हारे अभिभावक की मर्ज़ी हो:

وَأَمَّا ٱلَّذِينَ سُعِدُوا۟ فَفِى ٱلْجَنَّةِ خَٰلِدِينَ فِيهَا مَا دَامَتِ ٱلسَّمَٰوَٰتُ وَٱلْأَرْضُ إِلَّا مَا شَآءَ رَبُّكَ

11:108

एक ऐसा अनुदान जो कभी नहीं सूखेगा।

عَطَآءً غَيْرَ مَجْذُوذٍۢ

तो उसके विषय में वाद-प्रतिवाद में न पड़ो जिसकी आज्ञा का पालन ये करते हैं:

فَلَا تَكُ فِى مِرْيَةٍۢ مِّمَّا يَعْبُدُ هَٰٓؤُلَآءِ

वे आज्ञा का पालन केवल वैसे ही करते हैं जैसे उनके पूर्वज पहले करते थे।

مَا يَعْبُدُونَ إِلَّا كَمَا يَعْبُدُ ءَابَآؤُهُم مِّن قَبْلُ

और हम उन्हें उनका भाग अवश्य पूरा देंगे, उसमें कुछ भी घटाए बिना।

وَإِنَّا لَمُوَفُّوهُمْ نَصِيبَهُمْ غَيْرَ مَنقُوصٍۢ

11:110

हमने निश्चय ही मूसा को ग्रंथ दिया, और उसमें मतभेद किया गया;

وَلَقَدْ ءَاتَيْنَا مُوسَى ٱلْكِتَٰبَ فَٱخْتُلِفَ فِيهِ

और यदि तुम्हारे अभिभावक का पहले का बोल न होता, तो उनके बीच फ़ैसला कर दिया गया होता;

وَلَوْلَا كَلِمَةٌۭ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ لَقُضِىَ بَيْنَهُمْ

और वे अवश्य उसके विषय में एक विचलित करने वाली दुविधा में हैं।

وَإِنَّهُمْ لَفِى شَكٍّۢ مِّنْهُ مُرِيبٍۢ

11:111

और तुम्हारा अभिभावक उन सबको अवश्य उनके कर्म पूरे देगा,

وَإِنَّ كُلًّۭا لَّمَّا لَيُوَفِّيَنَّهُمْ رَبُّكَ أَعْمَٰلَهُمْ

क्योंकि वह वे जो करते हैं उसकी पूरी ख़बर रखता है।

إِنَّهُۥ بِمَا يَعْمَلُونَ خَبِيرٌۭ

11:112

तो सीधे रहो, जैसा तुम्हें आदेश दिया गया है, और वे भी जो तुम्हारे साथ पलट आए हैं, और मर्यादा से आगे न निकलो,

فَٱسْتَقِمْ كَمَآ أُمِرْتَ وَمَن تَابَ مَعَكَ وَلَا تَطْغَوْا۟

11:112

क्योंकि वह उस पर दृष्टि रखता है जो तुम करते हो।

إِنَّهُۥ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌۭ

11:113

और उनकी ओर झुकाव न रखो जिन्होंने अन्याय किया, नहीं तो आग तुम्हें छू लेगी,

وَلَا تَرْكَنُوٓا۟ إِلَى ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ فَتَمَسَّكُمُ ٱلنَّارُ

और तुम्हारा, ईश्वर के अतिरिक्त, कोई हिमायती न होता,

وَمَا لَكُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ مِنْ أَوْلِيَآءَ

फिर तुम्हारी सहायता नहीं की जाती।

ثُمَّ لَا تُنصَرُونَ

11:114

और दिन के दोनों सिरों पर, और रात की निकटवर्ती घड़ियों में संपर्क बनाए रखो,

وَأَقِمِ ٱلصَّلَوٰةَ طَرَفَىِ ٱلنَّهَارِ وَزُلَفًۭا مِّنَ ٱلَّيْلِ

11:114

क्योंकि भलाइयाँ बुरे कर्मों को मिटा देती हैं:

إِنَّ ٱلْحَسَنَٰتِ يُذْهِبْنَ ٱلسَّيِّـَٔاتِ

11:114

यह स्मरण करने वालों के लिए एक स्मरण है।

ذَٰلِكَ ذِكْرَىٰ لِلذَّٰكِرِينَ

11:115

और धैर्य रखो,

وَٱصْبِرْ

11:115

क्योंकि ईश्वर भलाई करने वालों का पुरस्कार नष्ट नहीं होने देता।

فَإِنَّ ٱللَّهَ لَا يُضِيعُ أَجْرَ ٱلْمُحْسِنِينَ

11:116

क्या तुमसे पहले की पीढ़ियों में ऐसे अवशेष-धारक न थे जो धरती पर बिगाड़ से रोकते, उन थोड़े-से के सिवा जिन्हें हमने उबारा?

فَلَوْلَا كَانَ مِنَ ٱلْقُرُونِ مِن قَبْلِكُمْ أُو۟لُوا۟ بَقِيَّةٍۢ يَنْهَوْنَ عَنِ ٱلْفَسَادِ فِى ٱلْأَرْضِ إِلَّا قَلِيلًۭا مِّمَّنْ أَنجَيْنَا مِنْهُمْ

11:116

और जो अन्यायी थे, उन्होंने उसी का अनुसरण किया जिसमें वे विलासिता में जी रहे थे, और वे बहिष्कृत हुए।

وَٱتَّبَعَ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ مَآ أُتْرِفُوا۟ فِيهِ وَكَانُوا۟ مُجْرِمِينَ

11:117

और तुम्हारे अभिभावक की प्रकृति में नहीं कि वह बस्तियों को अन्याय से नष्ट कर दे, जबकि वहाँ के निवासी सुधार करते हों।

وَمَا كَانَ رَبُّكَ لِيُهْلِكَ ٱلْقُرَىٰ بِظُلْمٍۢ وَأَهْلُهَا مُصْلِحُونَ

11:118

और यदि तुम्हारे अभिभावक की मर्ज़ी होती, तो वह लोगों को एक ही समुदाय बना देता;

وَلَوْ شَآءَ رَبُّكَ لَجَعَلَ ٱلنَّاسَ أُمَّةًۭ وَٰحِدَةًۭ

11:119

परंतु वे मतभेद करते ही रहते हैं, उनके सिवा जिन पर तुम्हारा अभिभावक दया करता है,

وَلَا يَزَالُونَ مُخْتَلِفِينَ إِلَّا مَن رَّحِمَ رَبُّكَ

11:119

और इसी के लिए उसने उन्हें रचा है।

وَلِذَٰلِكَ خَلَقَهُمْ

11:119

और तुम्हारे अभिभावक का बोल पूरा हो गया: “मैं अवश्य जहन्नम को प्रच्छन्नों और मनुष्यों से, सबको मिलाकर, भर दूँगा।”

وَتَمَّتْ كَلِمَةُ رَبِّكَ لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ أَجْمَعِينَ

11:120

और संदेशवाहकों की जो भी सूचनाएँ हम तुम्हें बताते हैं, वही हैं जिनसे हम तुम्हारी चेतना को दृढ़ करते हैं;

وَكُلًّۭا نَّقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ أَنۢبَآءِ ٱلرُّسُلِ مَا نُثَبِّتُ بِهِۦ فُؤَادَكَ

11:120

और इसमें तुम्हारे पास सत्य आया, और विश्वास करने वालों के लिए उपदेश और स्मरण आया।

وَجَآءَكَ فِى هَٰذِهِ ٱلْحَقُّ وَمَوْعِظَةٌۭ وَذِكْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ

11:121–122

और जो विश्वास नहीं करते उनसे कहो: “अपनी जगह के अनुसार कर्म करो; हम कर्म कर रहे हैं; और प्रतीक्षा करो: हम भी निश्चय ही प्रतीक्षा कर रहे हैं।”

وَقُل لِّلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ ٱعْمَلُوا۟ عَلَىٰ مَكَانَتِكُمْ إِنَّا عَٰمِلُونَ وَٱنتَظِرُوٓا۟ إِنَّا مُنتَظِرُونَ

11:123

और आकाशों और धरती में जो इंद्रियों से परे है, वह ईश्वर का है,

وَلِلَّهِ غَيْبُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ

11:123

और सारा आदेश उसी की ओर लौटता है:

وَإِلَيْهِ يُرْجَعُ ٱلْأَمْرُ كُلُّهُۥ

अतः उसकी आज्ञा का पालन करो, और उसे मुख़्तार बनाओ:

فَٱعْبُدْهُ وَتَوَكَّلْ عَلَيْهِ

11:123

और तुम्हारा अभिभावक उससे लापरवाह नहीं जो तुम करते हो।

وَمَا رَبُّكَ بِغَٰفِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ

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