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Sura77
ن
पद50

Section XIThe application · continuation · closing

“Leave Me”: the messenger's endurance in the face of denial

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Read the section from its beginning: sura 68

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।

77:1–7

उनकी शपथ जो एक के बाद एक भेजी जाती हैं, उनकी शपथ जो ज़ोर से बिखेरती हैं, उनकी शपथ जो भली-भाँति फैलाती हैं, उनकी शपथ जो स्पष्ट रूप से अलग करती हैं, उनकी शपथ जो स्मरण देती हैं, सफ़ाई के रूप में या चेतावनी के रूप में: तुमसे जो वादा किया गया है वह अवश्य घटित होने वाला है।

وَٱلْمُرْسَلَٰتِ عُرْفًۭا فَٱلْعَٰصِفَٰتِ عَصْفًۭا وَٱلنَّٰشِرَٰتِ نَشْرًۭا فَٱلْفَٰرِقَٰتِ فَرْقًۭا فَٱلْمُلْقِيَٰتِ ذِكْرًا عُذْرًا أَوْ نُذْرًا إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَٰقِعٌۭ

77:8–13

जब तारे मिटा दिए जाएँगे, जब आकाश चीर दिया जाएगा, जब पहाड़ चूर-चूर कर दिए जाएँगे, जब संदेशवाहक अपना वादे का समय पा लेंगे — किस दिन के लिए वे टाले गए थे? अलगाव के दिन के लिए।

فَإِذَا ٱلنُّجُومُ طُمِسَتْ وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ فُرِجَتْ وَإِذَا ٱلْجِبَالُ نُسِفَتْ وَإِذَا ٱلرُّسُلُ أُقِّتَتْ لِأَىِّ يَوْمٍ أُجِّلَتْ لِيَوْمِ ٱلْفَصْلِ

77:14

और तुम्हें क्या अंदाज़ा दिलाए कि अलगाव का दिन क्या है?

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ

77:15

उस दिन हाय झुठलाने वालों पर!

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

क्या हमने पहलों को नष्ट नहीं किया?

أَلَمْ نُهْلِكِ ٱلْأَوَّلِينَ

फिर हम बाद वालों को उनके पीछे लगा देंगे।

ثُمَّ نُتْبِعُهُمُ ٱلْءَاخِرِينَ

हम बहिष्कृतों के साथ इसी प्रकार व्यवहार करते हैं।

كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ

उस दिन हाय झुठलाने वालों पर!

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

77:20–23

क्या हमने तुम्हें एक तुच्छ पानी से नहीं रचा? फिर हमने उसे एक सुरक्षित, स्थिर स्थान में रखा, एक ज्ञात माप तक; हमने निर्धारित किया —

أَلَمْ نَخْلُقكُّم مِّن مَّآءٍۢ مَّهِينٍۢ فَجَعَلْنَٰهُ فِى قَرَارٍۢ مَّكِينٍ إِلَىٰ قَدَرٍۢ مَّعْلُومٍۢ فَقَدَرْنَا

और हम निर्धारित करने में उत्तम हैं!

فَنِعْمَ ٱلْقَٰدِرُونَ

उस दिन हाय झुठलाने वालों पर!

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

क्या हमने धरती को जीवित और मृत दोनों के लिए एक पात्र नहीं बनाया? और क्या हमने उसमें दृढ़ और ऊँचे खूँटे नहीं रखे, और क्या हमने तुम्हें प्यास बुझाने वाला पानी नहीं पिलाया?

أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ كِفَاتًا أَحْيَآءًۭ وَأَمْوَٰتًۭا وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ شَٰمِخَٰتٍۢ وَأَسْقَيْنَٰكُم مَّآءًۭ فُرَاتًۭا

उस दिन हाय झुठलाने वालों पर!

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

“उसकी ओर जाओ जिसे तुम झुठलाते थे! जाओ एक तीन शाखाओं वाली छाया की ओर, जो न छाया करती है और न ज्वाला के विरुद्ध किसी काम की है।”

ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ ظِلٍّۢ ذِى ثَلَٰثِ شُعَبٍۢ لَّا ظَلِيلٍۢ وَلَا يُغْنِى مِنَ ٱللَّهَبِ

77:32–33

वह महलों जैसी बड़ी चिंगारियाँ फेंकती है, मानो वे पीले ऊँट हों।

إِنَّهَا تَرْمِى بِشَرَرٍۢ كَٱلْقَصْرِ كَأَنَّهُۥ جِمَٰلَتٌۭ صُفْرٌۭ

उस दिन हाय झुठलाने वालों पर!

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

यह वह दिन है जब वे कुछ नहीं कहेंगे, और जब उन्हें सफ़ाई देने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

هَٰذَا يَوْمُ لَا يَنطِقُونَ وَلَا يُؤْذَنُ لَهُمْ فَيَعْتَذِرُونَ

उस दिन हाय झुठलाने वालों पर!

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

77:38–39

यह अलगाव का दिन है; हमने तुम्हें और पहलों को एकत्र कर दिया है। यदि तुम्हारे पास कोई चाल है, तो वह चाल मुझ पर चलो!

هَٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ جَمَعْنَٰكُمْ وَٱلْأَوَّلِينَ فَإِن كَانَ لَكُمْ كَيْدٌۭ فَكِيدُونِ

उस दिन हाय झुठलाने वालों पर!

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

77:41–42

जो सावधान रहे वे निश्चय ही छायाओं और सोतों के बीच होंगे, और अपनी कामनाओं के अनुसार स्वादों के बीच:

إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى ظِلَٰلٍۢ وَعُيُونٍۢ وَفَوَٰكِهَ مِمَّا يَشْتَهُونَ

77:43

“खाओ और पियो

كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟

77:43

सुखपूर्वक, उसके बदले जो तुम करते थे।”

هَنِيٓـًٔۢا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ

हम भलाई करने वालों को इसी प्रकार प्रतिफल देते हैं।

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

उस दिन हाय झुठलाने वालों पर!

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

77:46

“खाओ और थोड़ा उपभोग कर लो, क्योंकि तुम बहिष्कृत हो।”

كُلُوا۟ وَتَمَتَّعُوا۟ قَلِيلًا إِنَّكُم مُّجْرِمُونَ

उस दिन हाय झुठलाने वालों पर!

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

और जब उनसे कहा जाता है: “घुटने टेको”, तो वे घुटने नहीं टेकते।

وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱرْكَعُوا۟ لَا يَرْكَعُونَ

उस दिन हाय झुठलाने वालों पर!

وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ

तो इसके बाद वे किस वार्ता पर विश्वास करेंगे?

فَبِأَىِّ حَدِيثٍۭ بَعْدَهُۥ يُؤْمِنُونَ

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