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القرآن

العنكبوت

Al-Ankabut

The Spider

अध्याय 29 · 69 पद

29:1

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। अलिफ़. लाम. मीम.

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ الٓمٓۚ

29:2

क्या लोग सोचते हैं कि उन्हें छोड़ दिया जाएगा, इस कारण कि वे कहते हैं: “हम विश्वास करते हैं”, और उन्हें परीक्षा में नहीं डाला जाएगा?

أَحَسِبَ ٱلنَّاسُ أَن يُتۡرَكُواْ أَن يَقُولُواْ ءَامَنَّا وَهُمُۥ لَا يُفۡتَنُونَ

हमने तो उन्हें परीक्षा में डाला जो उनसे पहले थे,

وَلَقَدۡ فَتَنَّا ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمُۥۖ

29:3

ताकि ईश्वर अवश्य उन्हें अलग कर दे जिन्होंने सच कहा, और अवश्य झूठों को अलग कर दे।

فَلَيَعۡلَمَنَّ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ صَدَقُواْ وَلَيَعۡلَمَنَّ ٱلۡكَٰذِبِينَ

या फिर क्या वे जो बुराई करते हैं सोचते हैं कि वे हमसे आगे निकल जाएँगे?

أَمۡ حَسِبَ ٱلَّذِينَ يَعۡمَلُونَ ٱلسَّيِّـَٔاتِ أَن يَسۡبِقُونَاۚ

कितना बुरा है उनका निर्णय!

سَآءَ مَا يَحۡكُمُونَ

जो कोई ईश्वर से मिलने की आशा रखता है — ईश्वर की ठहराई हुई अवधि अवश्य आएगी;

مَن كَانَ يَرۡجُواْ لِقَآءَ ٱللَّهِ فَإِنَّ أَجَلَ ٱللَّهِ لَأٓتٖۚ

और वह सुनने वाला, सर्वज्ञ है।

وَهُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ

29:6

और जो कोई संघर्ष करता है वह केवल अपने लिए ही संघर्ष करता है,

وَمَن جَٰهَدَ فَإِنَّمَا يُجَٰهِدُ لِنَفۡسِهِۦۚ

29:6

क्योंकि ईश्वर अवश्य धनी है, और सभी प्राणियों से निस्पृह है।

إِنَّ ٱللَّهَ لَغَنِيٌّ عَنِ ٱلۡعَٰلَمِينَ

और जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, हम उनके बुरे कर्मों को अवश्य ढक देंगे, और उन्हें उसके सबसे सुंदर के अनुसार अवश्य प्रतिफल देंगे जो वे करते थे।

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ لَنُكَفِّرَنَّ عَنۡهُمُۥ سَيِّـَٔاتِهِمُۥ وَلَنَجۡزِيَنَّهُمُۥ أَحۡسَنَ ٱلَّذِي كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

29:8

और हमने मनुष्य को उसके दोनों माता-पिता के साथ सुंदर आचरण की अनुशंसा की;

وَوَصَّيۡنَا ٱلۡإِنسَٰنَ بِوَٰلِدَيۡهِۦ حُسۡنٗاۖ

29:8

परंतु यदि वे तुमसे संघर्ष करें कि तुम मेरे साथ उसे साझी ठहराओ जिसका तुम्हें कोई ज्ञान नहीं, तो उनकी बात मत मानो;

وَإِن جَٰهَدَاكَ لِتُشۡرِكَ بِي مَا لَيۡسَ لَكَ بِهِۦ عِلۡمٞ فَلَا تُطِعۡهُمَاۚ

मेरी ही ओर तुम्हारा लौटना है, और तब मैं तुम्हें सूचित करूँगा कि तुम क्या करते थे।

إِلَيَّ مَرۡجِعُكُمُۥ فَأُنَبِّئُكُمُۥ بِمَا كُنتُمُۥ تَعۡمَلُونَ

और जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, हम उन्हें अवश्य भलों में प्रवेश कराएँगे।

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ لَنُدۡخِلَنَّهُمُۥ فِي ٱلصَّٰلِحِينَ

29:10

और लोगों में से कुछ ऐसे हैं जो कहते हैं: “हम ईश्वर पर विश्वास करते हैं”; फिर, जैसे ही ईश्वर के लिए उन्हें सताया जाता है, वे लोगों की दी हुई परीक्षा को ईश्वर के दंड के बराबर मान लेते हैं।

وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يَقُولُ ءَامَنَّا بِٱللَّهِ فَإِذَا أُوذِيَ فِي ٱللَّهِ جَعَلَ فِتۡنَةَ ٱلنَّاسِ كَعَذَابِ ٱللَّهِۖ

29:10

और यदि तुम्हारे अभिभावक की ओर से कोई सहायता आती है, तो वे अवश्य कहेंगे: “हम निश्चय ही तुम्हारे साथ थे।”

وَلَئِن جَآءَ نَصۡرٞ مِّن رَّبِّكَ لَيَقُولُنَّ إِنَّا كُنَّا مَعَكُمُۥۚ

29:10

क्या ईश्वर सबसे अच्छी तरह नहीं जानता जो सभी प्राणियों के सीनों में है?

أَوَلَيۡسَ ٱللَّهُ بِأَعۡلَمَ بِمَا فِي صُدُورِ ٱلۡعَٰلَمِينَ

और ईश्वर अवश्य अलग कर देगा उन्हें जिन्होंने विश्वास किया, और अवश्य अलग कर देगा पाखंडियों को।

وَلَيَعۡلَمَنَّ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَلَيَعۡلَمَنَّ ٱلۡمُنَٰفِقِينَ

29:12

और नकारने वालों ने विश्वास करने वालों से कहा: “हमारी राह का अनुसरण करो, और हम तुम्हारी भूलें वहन कर लेंगे” —

وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لِلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱتَّبِعُواْ سَبِيلَنَا وَلۡنَحۡمِلۡ خَطَٰيَٰكُمُۥ

29:12

जबकि वे उनकी भूलों में से कुछ भी वहन नहीं करेंगे;

وَمَا هُمُۥ بِحَٰمِلِينَ مِنۡ خَطَٰيَٰهُمُۥ مِن شَيۡءٍۖ

वे अवश्य झूठे हैं।

إِنَّهُمُۥ لَكَٰذِبُونَ

29:13

और वे अवश्य अपने बोझ वहन करेंगे, और अपने बोझों के साथ और बोझ भी;

وَلَيَحۡمِلُنَّ أَثۡقَالَهُمُۥ وَأَثۡقَالٗا مَّعَ أَثۡقَالِهِمُۥۖ

29:13

और उनसे अवश्य पूछा जाएगा, पेशी के दिन, उसके विषय में जो वे गढ़ते थे।

وَلَيُسۡـَٔلُنَّ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ عَمَّا كَانُواْ يَفۡتَرُونَ

29:14

हमने निश्चय ही नूह को उसकी क़ौम की ओर भेजा, और उसने उनके बीच हज़ार वर्ष, प्रचलित पंचांग के पचास साल कम, बिताए, फिर बाढ़ ने उन्हें पकड़ लिया जबकि वे अन्यायी थे।

وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوۡمِهِۦ فَلَبِثَ فِيهِمُۥ أَلۡفَ سَنَةٍ إِلَّا خَمۡسِينَ عَامٗا فَأَخَذَهُمُ ٱلطُّوفَانُ وَهُمُۥ ظَٰلِمُونَ

हमने उसे और नाव वालों को उबारा,

فَأَنجَيۡنَٰهُۥ وَأَصۡحَٰبَ ٱلسَّفِينَةِ

29:15

और हमने उसे सभी प्राणियों के लिए एक संकेत बनाया।

وَجَعَلۡنَٰهَا ءَايَةٗ لِّلۡعَٰلَمِينَ

29:16

और इब्राहीम, जब उसने अपनी क़ौम से कहा: “ईश्वर की आज्ञा का पालन करो और उसके प्रति सावधान रहो;

وَإِبۡرَٰهِيمَ إِذۡ قَالَ لِقَوۡمِهِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ وَٱتَّقُوهُۥۖ

यह तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम जानते।

ذَٰلِكُمُۥ خَيۡرٞ لَّكُمُۥ إِن كُنتُمُۥ تَعۡلَمُونَ

29:17

तुम ईश्वर के अतिरिक्त केवल प्रतिरूपों की आज्ञा का पालन करते हो, और एक स्वांग रचते हो;

إِنَّمَا تَعۡبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ أَوۡثَٰنٗا وَتَخۡلُقُونَ إِفۡكًاۚ

29:17

ईश्वर के अतिरिक्त जिनकी तुम आज्ञा का पालन करते हो वे निश्चय ही तुम्हारे लिए किसी जीविका के मालिक नहीं —

إِنَّ ٱلَّذِينَ تَعۡبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ لَا يَمۡلِكُونَ لَكُمُۥ رِزۡقٗا

29:17

इसलिए ईश्वर के पास जीविका खोजो,

فَٱبۡتَغُواْ عِندَ ٱللَّهِ ٱلرِّزۡقَ

उसकी आज्ञा का पालन करो,

وَٱعۡبُدُوهُۥ

और उसके प्रति कृतज्ञ रहो;

وَٱشۡكُرُواْ لَهُۥۖ

उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।

إِلَيۡهِۦ تُرۡجَعُونَ

और यदि तुम झुठलाओ, तो तुमसे पहले के समुदाय पहले ही झुठला चुके हैं;

وَإِن تُكَذِّبُواْ فَقَدۡ كَذَّبَ أُمَمٞ مِّن قَبۡلِكُمُۥۖ

और संदेशवाहक पर केवल स्पष्ट संप्रेषण का दायित्व है।”

وَمَا عَلَى ٱلرَّسُولِ إِلَّا ٱلۡبَلَٰغُ ٱلۡمُبِينُ

29:19

क्या वे नहीं देखते कि ईश्वर रचना का आरंभ कैसे करता है,

أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ كَيۡفَ يُبۡدِئُ ٱللَّهُ ٱلۡخَلۡقَ

फिर उसे दोहराता है?

ثُمَّ يُعِيدُهُۥۚ

यह ईश्वर के लिए निश्चय ही सरल है।

إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرٞ

29:20

कहो: “धरती में घूमो और नज़र डालो कि उसने रचना का आरंभ कैसे किया;

قُلۡ سِيرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَٱنظُرُواْ كَيۡفَ بَدَأَ ٱلۡخَلۡقَۚ

29:20

फिर ईश्वर अंतिम उत्पत्ति को जन्म देगा;

ثُمَّ ٱللَّهُ يُنشِئُ ٱلنَّشَآءَةَ ٱلۡأٓخِرَةَۚ

क्योंकि ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।”

إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ

वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे दंड देता है और जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उस पर दया करता है;

يُعَذِّبُ مَن يَشَآءُ وَيَرۡحَمُ مَن يَشَآءُۖ

और उसी की ओर तुम वापस पहुँचाए जाओगे।

وَإِلَيۡهِۦ تُقۡلَبُونَ

तुम उसे असमर्थ नहीं कर सकते, न धरती में न आकाश में;

وَمَا أَنتُمُۥ بِمُعۡجِزِينَ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَا فِي ٱلسَّمَآءِۖ

और ईश्वर के अतिरिक्त तुम्हारा न कोई आश्रयदाता है, न कोई सहायता।

وَمَا لَكُمُۥ مِن دُونِ ٱللَّهِ مِن وَلِيّٖ وَلَا نَصِيرٖ

और जिन्होंने ईश्वर के संकेतों और उससे मिलने को नकारा, वे मेरी दया से निराश हो चुके हैं,

وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ وَلِقَآئِهِۦ أُوْلَٰٓئِكَ يَئِسُواْ مِن رَّحۡمَتِي

और उन्हीं को पीड़ादायक दंड मिलेगा।

وَأُوْلَٰٓئِكَ لَهُمُۥ عَذَابٌ أَلِيمٞ

उसकी क़ौम का उत्तर केवल यही था कि उन्होंने कहा: “उसे मार डालो, या जला दो!”

فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوۡمِهِۦ إِلَّا أَن قَالُواْ ٱقۡتُلُوهُۥ أَوۡ حَرِّقُوهُۥ

परंतु ईश्वर ने उसे आग से उबारा;

فَأَنجَىٰهُ ٱللَّهُ مِنَ ٱلنَّارِۚ

इसमें अवश्य संकेत हैं उस क़ौम के लिए जो विश्वास करती है।

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ

29:25

और उसने कहा: “तुमने ईश्वर के अतिरिक्त प्रतिरूप केवल इहलोक के जीवन में आपसी स्नेह के कारण अपनाए हैं;

وَقَالَ إِنَّمَا ٱتَّخَذۡتُمُۥ مِن دُونِ ٱللَّهِ أَوۡثَٰنٗا مَّوَدَّةُ بَيۡنِكُمُۥ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَاۖ

29:25

फिर पेशी के दिन तुम एक-दूसरे को नकारोगे और एक-दूसरे को धिक्कारोगे,

ثُمَّ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ يَكۡفُرُ بَعۡضُكُمُۥ بِبَعۡضٖ وَيَلۡعَنُ بَعۡضُكُمُۥ بَعۡضٗا

और तुम्हारी शरण आग है, और तुम्हारी कोई सहायता नहीं होगी।”

وَمَأۡوَىٰكُمُ ٱلنَّارُ وَمَا لَكُمُۥ مِن نَّٰصِرِينَ

29:26

लूत ने उस पर भरोसा किया,

۞ فَـَٔامَنَ لَهُۥ لُوطٞۘ

29:26

और उसने कहा: “मैं अपने अभिभावक की ओर प्रवास करता हूँ;

وَقَالَ إِنِّي مُهَاجِرٌ إِلَىٰ رَبِّيۖ

क्योंकि वही सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।”

إِنَّهُۥ هُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ

29:27

और हमने उसे इसहाक़ और याक़ूब प्रदान किए,

وَوَهَبۡنَا لَهُۥ إِسۡحَٰقَ وَيَعۡقُوبَ

29:27

और हमने उसकी संतति में सूचना देने का दायित्व और ग्रंथ रखा;

وَجَعَلۡنَا فِي ذُرِّيَّتِهِ ٱلنُّبُوَّةَ وَٱلۡكِتَٰبَ

और हमने उसे इहलोक में उसका पुरस्कार दिया,

وَءَاتَيۡنَٰهُۥ أَجۡرَهُۥ فِي ٱلدُّنۡيَاۖ

और अंतिम जीवन में वह अवश्य भलों में से होगा।

وَإِنَّهُۥ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ لَمِنَ ٱلصَّٰلِحِينَ

29:28–29

और लूत, जब उसने अपनी क़ौम से कहा: “तुम अवश्य वह निर्लज्जता करते हो, जिसमें सभी प्राणियों में से किसी ने तुमसे पहल नहीं की; क्या तुम सचमुच पुरुषों के पास जाते हो, राह काटते हो, और अपनी मंडलियों में वह करते हो जो अमान्य है?”

وَلُوطًا إِذۡ قَالَ لِقَوۡمِهِۦ إِنَّكُمُۥ لَتَأۡتُونَ ٱلۡفَٰحِشَةَ مَا سَبَقَكُمُۥ بِهَا مِنۡ أَحَدٖ مِّنَ ٱلۡعَٰلَمِينَ أَى۪نَّكُمُۥ لَتَأۡتُونَ ٱلرِّجَالَ وَتَقۡطَعُونَ ٱلسَّبِيلَ وَتَأۡتُونَ فِي نَادِيكُمُ ٱلۡمُنكَرَۖ

उसकी क़ौम का केवल यही उत्तर था कि उन्होंने कहा: “हमारे पास ईश्वर का दंड ले आओ, यदि तुम सच्चों में से हो!”

فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوۡمِهِۦ إِلَّا أَن قَالُواْ ٱئۡتِنَا بِعَذَابِ ٱللَّهِ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّٰدِقِينَ

उसने कहा: “मेरे अभिभावक, बिगाड़ फैलाने वाली क़ौम के विरुद्ध मेरी सहायता कीजिए।”

قَالَ رَبِّ ٱنصُرۡنِي عَلَى ٱلۡقَوۡمِ ٱلۡمُفۡسِدِينَ

29:31

जब हमारे संदेशवाहक शुभ समाचार लेकर इब्राहीम के पास आए, उन्होंने कहा: “हम निश्चय ही इस बस्ती वालों का विनाश करने वाले हैं; इसके निवासी अन्यायी हैं।”

وَلَمَّا جَآءَتۡ رُسُلُنَا إِبۡرَٰهِيمَ بِٱلۡبُشۡرَىٰ قَالُواْ إِنَّا مُهۡلِكُواْ أَهۡلِ هَٰذِهِ ٱلۡقَرۡيَةِۖ إِنَّ أَهۡلَهَا كَانُواْ ظَٰلِمِينَ

29:32

उसने कहा: “लूत तो निश्चय ही इसमें है।”

قَالَ إِنَّ فِيهَا لُوطٗاۚ

29:32

उन्होंने कहा: “जो इसमें है उसे हम सबसे अच्छी तरह जानते हैं;

قَالُواْ نَحۡنُ أَعۡلَمُ بِمَن فِيهَاۖ

हम उसे अवश्य उबारेंगे, उसे और उसके परिवार को, सिवा उसकी पत्नी के, जो पीछे रह जाने वालों में होगी।”

لَنُنَجِّيَنَّهُۥ وَأَهۡلَهُۥ إِلَّا ٱمۡرَأَتَهُۥ كَانَتۡ مِنَ ٱلۡغَٰبِرِينَ

29:33

जब हमारे संदेशवाहक लूत के पास आए, उनका आना उसे बुरा लगा और वह उनके विषय में व्याकुल हो गया;

وَلَمَّا أَن جَآءَتۡ رُسُلُنَا لُوطٗا سِيٓءَ بِهِمُۥ وَضَاقَ بِهِمُۥ ذَرۡعٗاۖ

29:33

और उन्होंने कहा: “डरो मत और दुखी मत होओ, क्योंकि हम तुम्हें उबारेंगे, तुम्हें और तुम्हारे परिवार को, सिवा तुम्हारी पत्नी के, जो पीछे रह जाने वालों में होगी।

وَقَالُواْ لَا تَخَفۡ وَلَا تَحۡزَنۡ إِنَّا مُنجُوكَ وَأَهۡلَكَ إِلَّا ٱمۡرَأَتَكَ كَانَتۡ مِنَ ٱلۡغَٰبِرِينَ

हम इस बस्ती वालों पर आकाश से एक अशुद्धि निश्चय ही उतारेंगे, इस कारण कि उन्होंने अतिक्रमण किया।”

إِنَّا مُنزِلُونَ عَلَىٰ أَهۡلِ هَٰذِهِ ٱلۡقَرۡيَةِ رِجۡزٗا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ بِمَا كَانُواْ يَفۡسُقُونَ

हमने उसमें से एक स्पष्ट संकेत निश्चय ही छोड़ा है, उस क़ौम के लिए जो बुद्धि से काम लेती है।

وَلَقَد تَّرَكۡنَا مِنۡهَا ءَايَةَۢ بَيِّنَةٗ لِّقَوۡمٖ يَعۡقِلُونَ

और मदयन की ओर उनका भाई शुऐब; उसने कहा: “हे मेरी क़ौम! ईश्वर की आज्ञा का पालन करो, अंतिम दिन की आशा रखो, और धरती पर बिगाड़ने वाले बनकर उपद्रव मत मचाओ।”

وَإِلَىٰ مَدۡيَنَ أَخَاهُمُۥ شُعَيۡبٗا فَقَالَ يَٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ وَٱرۡجُواْ ٱلۡيَوۡمَ ٱلۡأٓخِرَ وَلَا تَعۡثَوۡاْ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُفۡسِدِينَ

उन्होंने उसे झुठलाया; तब झटके ने उन्हें आ पकड़ा, और वे अपने ठिकाने में औंधे पड़े, निश्चल रह गए।

فَكَذَّبُوهُۥ فَأَخَذَتۡهُمُ ٱلرَّجۡفَةُ فَأَصۡبَحُواْ فِي دَارِهِمُۥ جَٰثِمِينَ

29:38

और आद और समूद — यह तुम्हारे सामने उनके आवासों से स्पष्ट हो चुका है; बहकाने वाले ने उनके कर्म उन्हें सुंदर बना दिए थे, और इस प्रकार उन्हें राह से रोक दिया था, जबकि वे स्पष्ट दृष्टि रखने वाले थे।

وَعَادٗا وَثَمُودٗا وَقَد تَّبَيَّنَ لَكُمُۥ مِن مَّسَٰكِنِهِمُۥۖ وَزَيَّنَ لَهُمُ ٱلشَّيۡطَٰنُ أَعۡمَٰلَهُمُۥ فَصَدَّهُمُۥ عَنِ ٱلسَّبِيلِ وَكَانُواْ مُسۡتَبۡصِرِينَ

29:39

और क़ारून, फ़िरऔन और हामान —

وَقَٰرُونَ وَفِرۡعَوۡنَ وَهَٰمَٰنَۖ

29:39

मूसा तो उनके पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ आया था, परंतु वे धरती पर घमंड से फूल गए, हमसे आगे निकल पाने में समर्थ न होते हुए।

وَلَقَدۡ جَآءَهُمُۥ مُوسَىٰ بِٱلۡبَيِّنَٰتِ فَٱسۡتَكۡبَرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَمَا كَانُواْ سَٰبِقِينَ

29:40

उनमें से हर एक को हमने उसके दोष के कारण पकड़ा;

فَكُلًّا أَخَذۡنَا بِذَنۢبِهِۦۖ

29:40

उनमें से कुछ पर हमने कंकड़ों की बौछार भेजी,

فَمِنۡهُمُۥ مَنۡ أَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِۦ حَاصِبٗا

29:40

कुछ को चीख़ ने आ पकड़ा,

وَمِنۡهُمُۥ مَنۡ أَخَذَتۡهُ ٱلصَّيۡحَةُ

29:40

कुछ को हमने धरती से निगलवा दिया,

وَمِنۡهُمُۥ مَنۡ خَسَفۡنَا بِهِ ٱلۡأَرۡضَ

29:40

और कुछ को हमने डुबो दिया।

وَمِنۡهُمُۥ مَنۡ أَغۡرَقۡنَاۚ

29:40

ईश्वर उन पर अन्याय करने वाला न था;

وَمَا كَانَ ٱللَّهُ لِيَظۡلِمَهُمُۥ

29:40

बल्कि वे स्वयं अपने ऊपर अन्याय करते थे।

وَلَٰكِن كَانُواْ أَنفُسَهُمُۥ يَظۡلِمُونَ

29:41

उनका उदाहरण जो ईश्वर के अतिरिक्त हिमायती बना लेते हैं, उस मकड़ी जैसा है जो अपने लिए एक घर बना लेती है;

مَثَلُ ٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُواْ مِن دُونِ ٱللَّهِ أَوۡلِيَآءَ كَمَثَلِ ٱلۡعَنكَبُوتِ ٱتَّخَذَتۡ بَيۡتٗاۖ

29:41

जबकि सबसे कमज़ोर घर अवश्य मकड़ी का घर है — काश वे जानते।

وَإِنَّ أَوۡهَنَ ٱلۡبِيُوتِ لَبَيۡتُ ٱلۡعَنكَبُوتِۚ لَوۡ كَانُواْ يَعۡلَمُونَ

29:42

ईश्वर निश्चय ही वह सब कुछ जानता है जिसे वे उसके अतिरिक्त पुकारते हैं;

إِنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ مَا تَدۡعُونَ مِن دُونِهِۦ مِن شَيۡءٖۚ

और वह सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।

وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ

और ये उदाहरण, हम इन्हें लोगों के लिए कई गुना करते हैं,

وَتِلۡكَ ٱلۡأَمۡثَٰلُ نَضۡرِبُهَا لِلنَّاسِۖ

परंतु इनमें केवल ज्ञानी ही बुद्धि से काम लेते हैं।

وَمَا يَعۡقِلُهَا إِلَّا ٱلۡعَٰلِمُونَ

ईश्वर ने आकाशों और धरती को पूर्ण सत्य के साथ रचा है;

خَلَقَ ٱللَّهُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ بِٱلۡحَقِّۚ

इसमें अवश्य विश्वास करने वालों के लिए एक संकेत है।

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّلۡمُؤۡمِنِينَ

29:45

जो तुम पर ग्रंथ में से प्रकट किया गया है उसे सुनाओ, और संपर्क बनाए रखो;

ٱتۡلُ مَا أُوحِيَ إِلَيۡكَ مِنَ ٱلۡكِتَٰبِ وَأَقِمِ ٱلصَّلَوٰةَۖ

29:45

क्योंकि संपर्क निर्लज्जता से और जो अमान्य है उससे रोकता है;

إِنَّ ٱلصَّلَوٰةَ تَنۡهَىٰ عَنِ ٱلۡفَحۡشَآءِ وَٱلۡمُنكَرِۗ

29:45

और ईश्वर का स्मरण इससे भी बड़ा है;

وَلَذِكۡرُ ٱللَّهِ أَكۡبَرُۗ

ईश्वर जानता है जो तुम करते हो।

وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ مَا تَصۡنَعُونَ

29:46

और ग्रंथ वालों से सबसे सुंदर ढंग के सिवा बहस मत करो,

۞ وَلَا تُجَٰدِلُواْ أَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ إِلَّا بِٱلَّتِي هِيَ أَحۡسَنُ

29:46

सिवा उनमें से उनके जो अन्याय करते हैं;

إِلَّا ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ مِنۡهُمُۥۖ

29:46

और कहो: “हम उस पर विश्वास करते हैं जो हमारे लिए उतारा गया और जो तुम्हारे लिए उतारा गया; हमारा देवता और तुम्हारा देवता एक है, और हम उसके प्रति खरे हैं।”

وَقُولُواْ ءَامَنَّا بِٱلَّذِي أُنزِلَ إِلَيۡنَا وَأُنزِلَ إِلَيۡكُمُۥ وَإِلَٰهُنَا وَإِلَٰهُكُمُۥ وَٰحِدٞ وَنَحۡنُ لَهُۥ مُسۡلِمُونَ

29:47

इसी प्रकार हमने तुम पर ग्रंथ उतारा;

وَكَذَٰلِكَ أَنزَلۡنَا إِلَيۡكَ ٱلۡكِتَٰبَۚ

29:47

जिन्हें हमने ग्रंथ दिया वे उस पर विश्वास करते हैं, और इनमें से भी कुछ उस पर विश्वास करते हैं;

فَٱلَّذِينَ ءَاتَيۡنَٰهُمُ ٱلۡكِتَٰبَ يُؤۡمِنُونَ بِهِۦۖ وَمِنۡ هَٰؤُلَآءِ مَن يُؤۡمِنُ بِهِۦۚ

और हमारे संकेतों को केवल नकारने वाले ही हठपूर्वक ठुकराते हैं।

وَمَا يَجۡحَدُ بِـَٔايَٰتِنَا إِلَّا ٱلۡكَٰفِرُونَ

29:48

तुम इससे पहले कोई ग्रंथ नहीं सुनाते थे, और अपने दाहिने हाथ से उसे नहीं लिखते थे;

وَمَا كُنتَ تَتۡلُواْ مِن قَبۡلِهِۦ مِن كِتَٰبٖ وَلَا تَخُطُّهُۥ بِيَمِينِكَۖ

29:48

अन्यथा मिथ्या गढ़ने वालों को संदेह हो जाता।

إِذٗا لَّٱرۡتَابَ ٱلۡمُبۡطِلُونَ

ये तो बल्कि स्पष्ट संकेत हैं, उनके सीनों में जिन्हें ज्ञान दिया गया है;

بَلۡ هُوَ ءَايَٰتُۢ بَيِّنَٰتٞ فِي صُدُورِ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡعِلۡمَۚ

हमारे संकेतों को केवल अन्यायी ही हठपूर्वक ठुकराते हैं।

وَمَا يَجۡحَدُ بِـَٔايَٰتِنَا إِلَّا ٱلظَّٰلِمُونَ

29:50

और उन्होंने कहा: “उस पर उसके अभिभावक की ओर से संकेत क्यों नहीं उतारे गए!”

وَقَالُواْ لَوۡلَا أُنزِلَ عَلَيۡهِۦ ءَايَتٞ مِّن رَّبِّهِۦۚ

कहो: “संकेत तो केवल ईश्वर के पास हैं; और मैं केवल एक स्पष्ट चेतावनी देने वाला हूँ।”

قُلۡ إِنَّمَا ٱلۡأٓيَٰتُ عِندَ ٱللَّهِ وَإِنَّمَا أَنَا۠ نَذِيرٞ مُّبِينٌ

29:51

क्या उनके लिए यह पर्याप्त नहीं कि हमने तुम पर ग्रंथ उतारा, जो उन्हें सुनाया जाता है?

أَوَلَمۡ يَكۡفِهِمُۥ أَنَّا أَنزَلۡنَا عَلَيۡكَ ٱلۡكِتَٰبَ يُتۡلَىٰ عَلَيۡهِمُۥۚ

इसमें अवश्य उस क़ौम के लिए दया और स्मरण है जो विश्वास करती है।

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَرَحۡمَةٗ وَذِكۡرَىٰ لِقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ

कहो: “मेरे और तुम्हारे बीच ईश्वर साक्षी के रूप में पर्याप्त है;

قُلۡ كَفَىٰ بِٱللَّهِ بَيۡنِي وَبَيۡنَكُمُۥ شَهِيدٗاۖ

वह जानता है जो आकाशों और धरती में है;

يَعۡلَمُ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۗ

और जो मिथ्या पर विश्वास करते हैं और ईश्वर को नकारते हैं, वही घाटा उठाने वाले हैं।”

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِٱلۡبَٰطِلِ وَكَفَرُواْ بِٱللَّهِ أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ

और वे तुमसे माँग करते हैं कि दंड जल्दी लाया जाए;

وَيَسۡتَعۡجِلُونَكَ بِٱلۡعَذَابِ

और यदि नामित अवधि न होती, तो दंड उन पर आ चुका होता — वह उन पर अवश्य अचानक आएगा, और उन्हें आभास भी न हो।

وَلَوۡلَا أَجَلٞ مُّسَمّٗى لَّجَآءَهُمُ ٱلۡعَذَابُۚ وَلَيَأۡتِيَنَّهُمُۥ بَغۡتَةٗ وَهُمُۥ لَا يَشۡعُرُونَ

वे तुमसे माँग करते हैं कि दंड जल्दी लाया जाए,

يَسۡتَعۡجِلُونَكَ بِٱلۡعَذَابِ

और जहन्नम नकारने वालों को अवश्य घेरे हुए है।

وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمُحِيطَةُۢ بِٱلۡكَٰفِرِينَ

29:55

जिस दिन दंड उन्हें उनके ऊपर से और उनके पैरों के नीचे से ढक लेगा, और हम कहेंगे: “जो तुम करते थे उसका स्वाद चखो।”

يَوۡمَ يَغۡشَىٰهُمُ ٱلۡعَذَابُ مِن فَوۡقِهِمُۥ وَمِن تَحۡتِ أَرۡجُلِهِمُۥ وَنَقُولُ ذُوقُواْ مَا كُنتُمُۥ تَعۡمَلُونَ

29:56

“हे मेरे आज्ञाकारियो, जिन्होंने विश्वास किया, मेरी धरती विस्तृत है; इसलिए मेरी ही आज्ञा का पालन करो।”

يَٰعِبَادِيَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ إِنَّ أَرۡضِي وَٰسِعَةٞ فَإِيَّٰيَ فَٱعۡبُدُونِ

हर स्व मृत्यु का स्वाद चखेगा,

كُلُّ نَفۡسٖ ذَآئِقَةُ ٱلۡمَوۡتِۖ

29:57

फिर तुम हमारी ही ओर लौटाए जाओगे।

ثُمَّ إِلَيۡنَا تُرۡجَعُونَ

और जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, उन्हें हम अवश्य उद्यान के ऊँचे कक्षों में बसाएँगे, जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जहाँ वे सदा रहेंगे;

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ لَنُبَوِّئَنَّهُمُۥ مِنَ ٱلۡجَنَّةِ غُرَفٗا تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ

कर्म करने वालों के लिए कितना उत्तम पुरस्कार है,

نِعۡمَ أَجۡرُ ٱلۡعَٰمِلِينَ

उनके लिए जिन्होंने धैर्य रखा और जो अपने अभिभावक को मुख़्तार बनाते हैं।

ٱلَّذِينَ صَبَرُواْ وَعَلَىٰ رَبِّهِمُۥ يَتَوَكَّلُونَ

29:60

कितने ही चलने-फिरने वाले अपनी जीविका स्वयं वहन नहीं करते! ईश्वर ही उन्हें जीविका देता है, और तुम्हें भी उनके साथ;

وَكَآئِن مِّن دَآبَّةٖ لَّا تَحۡمِلُ رِزۡقَهَا ٱللَّهُ يَرۡزُقُهَا وَإِيَّاكُمُۥۚ

और वह सुनने वाला, सर्वज्ञ है।

وَهُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ

और यदि तुम उनसे पूछो कि आकाशों और धरती को किसने रचा और सूर्य और चंद्रमा को वश में किया, तो वे अवश्य कहेंगे: “ईश्वर”;

وَلَئِن سَأَلۡتَهُمُۥ مَنۡ خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَسَخَّرَ ٱلشَّمۡسَ وَٱلۡقَمَرَ لَيَقُولُنَّ ٱللَّهُۖ

तो वे कैसे उलटे फेरे जा रहे हैं?

فَأَنَّىٰ يُؤۡفَكُونَ

ईश्वर अपने आज्ञाकारियों में से जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसके लिए जीविका फैला देता है, और उसके लिए नापकर देता है;

ٱللَّهُ يَبۡسُطُ ٱلرِّزۡقَ لِمَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦ وَيَقۡدِرُ لَهُۥۚ

क्योंकि ईश्वर हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।

إِنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٞ

और यदि तुम उनसे पूछो कि आकाश से पानी कौन उतारता है और उसके द्वारा धरती को उसकी मृत्यु के बाद पुनः जीवन देता है, तो वे अवश्य कहेंगे: “ईश्वर”;

وَلَئِن سَأَلۡتَهُمُۥ مَن نَّزَّلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَحۡيَا بِهِ ٱلۡأَرۡضَ مِنۢ بَعۡدِ مَوۡتِهَا لَيَقُولُنَّ ٱللَّهُۚ

कहो: “प्रशंसा ईश्वर के लिए है!”

قُلِ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِۚ

परंतु उनमें से अधिकतर बुद्धि से काम नहीं लेते।

بَلۡ أَكۡثَرُهُمُۥ لَا يَعۡقِلُونَ

29:64

यह इहलोक का जीवन तो केवल बहलावा और खेल है;

وَمَا هَٰذِهِ ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَا إِلَّا لَهۡوٞ وَلَعِبٞۚ

29:64

और अंतिम ठिकाना, वही अवश्य सच्चा जीवन है — काश वे जानते।

وَإِنَّ ٱلدَّارَ ٱلۡأٓخِرَةَ لَهِيَ ٱلۡحَيَوَانُۚ لَوۡ كَانُواْ يَعۡلَمُونَ

जब वे जलयान में सवार होते हैं, तो ईश्वर को पुकारते हैं, उसी के लिए विधान को समर्पित करते हुए;

فَإِذَا رَكِبُواْ فِي ٱلۡفُلۡكِ دَعَوُاْ ٱللَّهَ مُخۡلِصِينَ لَهُ ٱلدِّينَ

परंतु जब वह उन्हें उबारकर थल की ओर ले आता है, तो देखो, वे साझी ठहराते हैं, ताकि जो हमने उन्हें दिया उसे नकारें,

فَلَمَّا نَجَّىٰهُمُۥ إِلَى ٱلۡبَرِّ إِذَا هُمُۥ يُشۡرِكُونَ لِيَكۡفُرُواْ بِمَا ءَاتَيۡنَٰهُمُۥ

29:66

तो वे उपभोग कर लें: वे शीघ्र ही जान लेंगे।

وَلۡيَتَمَتَّعُواْۚ فَسَوۡفَ يَعۡلَمُونَ

क्या वे नहीं देखते कि हमने एक अलंघनीय और सुरक्षित स्थान बनाया है, जबकि उनके आसपास लोग छीन लिए जाते हैं?

أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّا جَعَلۡنَا حَرَمًا ءَامِنٗا وَيُتَخَطَّفُ ٱلنَّاسُ مِنۡ حَوۡلِهِمُۥۚ

तो क्या वे मिथ्या पर विश्वास करते हैं, और ईश्वर के उपकार को नकारते हैं?

أَفَبِٱلۡبَٰطِلِ يُؤۡمِنُونَ وَبِنِعۡمَةِ ٱللَّهِ يَكۡفُرُونَ

और उससे बढ़कर अन्यायी कौन है जो ईश्वर पर झूठ गढ़ता है, या सत्य को, जब वह उसके पास आ चुका, झुठलाता है?

وَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّنِ ٱفۡتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًا أَوۡ كَذَّبَ بِٱلۡحَقِّ لَمَّا جَآءَهُۥۚ

क्या जहन्नम में नकारने वालों के लिए निवास नहीं है?

أَلَيۡسَ فِي جَهَنَّمَ مَثۡوٗى لِّلۡكَٰفِرِينَ

29:69

और जिन्होंने हमारे लिए संघर्ष किया, उन्हें हम अवश्य अपनी राहों में मार्ग दिखाएँगे;

وَٱلَّذِينَ جَٰهَدُواْ فِينَا لَنَهۡدِيَنَّهُمُۥ سُبُلَنَاۚ

और ईश्वर अवश्य उनके साथ है जो भलाई करते हैं।

وَإِنَّ ٱللَّهَ لَمَعَ ٱلۡمُحۡسِنِينَ

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