الذاريات
Adh-Dhariyat
So Flee to God
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
उनकी शपथ जो बिखेरती हैं बिखेरते हुए, जो भारी लदान वहन करती हैं, जो सहजता से चलती हैं, जो एक आदेश बाँटती हैं: जो तुमसे वादा किया जाता है वह सचमुच सच्चा है, और चुकौती अवश्य घटित होगी।
وَٱلذَّٰرِيَٰتِ ذَرْوًۭا فَٱلْحَٰمِلَٰتِ وِقْرًۭا فَٱلْجَٰرِيَٰتِ يُسْرًۭا فَٱلْمُقَسِّمَٰتِ أَمْرًا إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَصَادِقٌۭ وَإِنَّ ٱلدِّينَ لَوَٰقِعٌۭ
गुँथे हुए मार्गों वाले आकाश की शपथ! तुम अवश्य एक भिन्न-भिन्न कथन में हो: उससे वही उलटा फेरा जाता है जो उलटा फेरा जाता है।
وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلْحُبُكِ إِنَّكُمْ لَفِى قَوْلٍۢ مُّخْتَلِفٍۢ يُؤْفَكُ عَنْهُ مَنْ أُفِكَ
नाश हो अटकल लगाने वालों का, जो गर्त में डूबे हुए हैं, बेसुध!
قُتِلَ ٱلْخَرَّٰصُونَ ٱلَّذِينَ هُمْ فِى غَمْرَةٍۢ سَاهُونَ
वे पूछते हैं: “चुकौती का दिन कब होगा?” — जिस दिन वे आग पर परीक्षा में डाले जाएँगे।
يَسْـَٔلُونَ أَيَّانَ يَوْمُ ٱلدِّينِ يَوْمَ هُمْ عَلَى ٱلنَّارِ يُفْتَنُونَ
“अपनी परीक्षा चखो।
ذُوقُوا۟ فِتْنَتَكُمْ
यही है जिसे तुम जल्दी माँगते थे।”
هَٰذَا ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تَسْتَعْجِلُونَ
सावधानी बरतने वाले निश्चय ही उद्यानों और सोतों में हैं, वह लेते हुए जो उनके अभिभावक ने उन्हें दिया,
إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى جَنَّٰتٍۢ وَعُيُونٍ ءَاخِذِينَ مَآ ءَاتَىٰهُمْ رَبُّهُمْ
क्योंकि वे इससे पहले भलाई करने वालों में से थे।
إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَبْلَ ذَٰلِكَ مُحْسِنِينَ
वे बहुत कम ही
كَانُوا۟ قَلِيلًۭا
रात का भाग नींद को देते थे,
مِّنَ ٱلَّيْلِ مَا يَهْجَعُونَ
और रात के अंतिम पहरों में वे क्षमा माँगते थे।
وَبِٱلْأَسْحَارِ هُمْ يَسْتَغْفِرُونَ
और उनकी संपत्ति में माँगने वाले और वंचित का हक़ था।
وَفِىٓ أَمْوَٰلِهِمْ حَقٌّۭ لِّلسَّآئِلِ وَٱلْمَحْرُومِ
और धरती पर उनके लिए संकेत हैं जिन्हें यक़ीन है,
وَفِى ٱلْأَرْضِ ءَايَٰتٌۭ لِّلْمُوقِنِينَ
और स्वयं तुम्हारे भीतर भी।
وَفِىٓ أَنفُسِكُمْ
तो क्या तुम्हें स्पष्ट नहीं दिखता?
أَفَلَا تُبْصِرُونَ
और आकाश में तुम्हारी जीविका है,
وَفِى ٱلسَّمَآءِ رِزْقُكُمْ
और वह भी जिसका तुमसे वादा किया जाता है। आकाश और धरती के अभिभावक की शपथ, यह अवश्य सत्य है, ठीक वैसे ही जैसे यह सत्य है कि तुम उच्चारण करते हो।
وَمَا تُوعَدُونَ فَوَرَبِّ ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ إِنَّهُۥ لَحَقٌّۭ مِّثْلَ مَآ أَنَّكُمْ تَنطِقُونَ
क्या इब्राहीम के सम्मानित अतिथियों की वार्ता तुम्हारे पास पहुँची? जब उन्होंने उसके यहाँ प्रवेश किया और कहा: “शांति!”
هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ ضَيْفِ إِبْرَٰهِيمَ ٱلْمُكْرَمِينَ إِذْ دَخَلُوا۟ عَلَيْهِ فَقَالُوا۟ سَلَٰمًۭا
उसने कहा: “शांति।
قَالَ سَلَٰمٌۭ
ऐसी क़ौम जिससे मैं अपरिचित हूँ।”
قَوْمٌۭ مُّنكَرُونَ
वह चुपके से अपने परिवार के पास गया, फिर एक मोटा बछड़ा लाया और उसने उसे उनके निकट रखा, यह कहते हुए: “क्या तुम खाते नहीं?”
فَرَاغَ إِلَىٰٓ أَهْلِهِۦ فَجَآءَ بِعِجْلٍۢ سَمِينٍۢ فَقَرَّبَهُۥٓ إِلَيْهِمْ قَالَ أَلَا تَأْكُلُونَ
तब उसने उनसे डर अनुभव किया।
فَأَوْجَسَ مِنْهُمْ خِيفَةًۭ
उन्होंने कहा: “डरो मत।”
قَالُوا۟ لَا تَخَفْ
और उन्होंने उसे एक ज्ञानी लड़के का शुभ समाचार दिया।
وَبَشَّرُوهُ بِغُلَٰمٍ عَلِيمٍۢ
तब उसकी पत्नी चीख़ती हुई सामने आई, उसने अपना मुँह पीट लिया और कहा: “एक बाँझ बुढ़िया?!”
فَأَقْبَلَتِ ٱمْرَأَتُهُۥ فِى صَرَّةٍۢ فَصَكَّتْ وَجْهَهَا وَقَالَتْ عَجُوزٌ عَقِيمٌۭ
उन्होंने कहा: “तुम्हारे अभिभावक ने ऐसा ही कहा है।
قَالُوا۟ كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِ
वही निश्चय ही प्रज्ञावान, सर्वज्ञ है।”
إِنَّهُۥ هُوَ ٱلْحَكِيمُ ٱلْعَلِيمُ
उसने कहा: “तो तुम्हारा क्या मामला है, हे भेजे गए जनो?”
قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا ٱلْمُرْسَلُونَ
उन्होंने कहा: “हमें एक बहिष्कृत क़ौम की ओर भेजा गया है, ताकि उन पर मिट्टी के पत्थर भेजें, जिन पर तुम्हारे अभिभावक के पास अतिवादियों के लिए निशान लगाए गए हैं।”
قَالُوٓا۟ إِنَّآ أُرْسِلْنَآ إِلَىٰ قَوْمٍۢ مُّجْرِمِينَ لِنُرْسِلَ عَلَيْهِمْ حِجَارَةًۭ مِّن طِينٍۢ مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ لِلْمُسْرِفِينَ
हमने उसमें से उन्हें निकाल लिया जो विश्वास करते थे, परंतु हमने उसमें ईश्वर के प्रति खरे जनों के एक ही घर के सिवा कुछ न पाया; और हमने उसमें उनके लिए एक संकेत छोड़ा जो पीड़ादायक दंड से डरते हैं।
فَأَخْرَجْنَا مَن كَانَ فِيهَا مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ فَمَا وَجَدْنَا فِيهَا غَيْرَ بَيْتٍۢ مِّنَ ٱلْمُسْلِمِينَ وَتَرَكْنَا فِيهَآ ءَايَةًۭ لِّلَّذِينَ يَخَافُونَ ٱلْعَذَابَ ٱلْأَلِيمَ
और मूसा में: जब हमने उसे फ़िरऔन के पास स्पष्ट अधिकार के साथ भेजा, तो उसने अपने सहारे के साथ पीठ फेर ली, और कहा: “एक भ्रमकार, या एक विक्षिप्त।”
وَفِى مُوسَىٰٓ إِذْ أَرْسَلْنَٰهُ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ بِسُلْطَٰنٍۢ مُّبِينٍۢ فَتَوَلَّىٰ بِرُكْنِهِۦ وَقَالَ سَٰحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌۭ
हमने उसे और उसकी सेनाओं को पकड़ा और उन्हें लहर में फेंक दिया, जबकि वह दोषारोपण के योग्य था।
فَأَخَذْنَٰهُ وَجُنُودَهُۥ فَنَبَذْنَٰهُمْ فِى ٱلْيَمِّ وَهُوَ مُلِيمٌۭ
और आद में: जब हमने उन पर बाँझ हवा भेजी, जो जिस चीज़ पर से गुज़रती उसे चूर्ण किए बिना न छोड़ती।
وَفِى عَادٍ إِذْ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ ٱلرِّيحَ ٱلْعَقِيمَ مَا تَذَرُ مِن شَىْءٍ أَتَتْ عَلَيْهِ إِلَّا جَعَلَتْهُ كَٱلرَّمِيمِ
और समूद में: जब उनसे कहा गया: “कुछ समय उपभोग कर लो”, परंतु उन्होंने अपने अभिभावक के आदेश के सामने उद्दंडता की, और बिजली की कड़क ने उन्हें पकड़ लिया जबकि वे नज़र डाल रहे थे।
وَفِى ثَمُودَ إِذْ قِيلَ لَهُمْ تَمَتَّعُوا۟ حَتَّىٰ حِينٍۢ فَعَتَوْا۟ عَنْ أَمْرِ رَبِّهِمْ فَأَخَذَتْهُمُ ٱلصَّٰعِقَةُ وَهُمْ يَنظُرُونَ
वे न उठ खड़े हो सके, न कोई सहायता पा सके।
فَمَا ٱسْتَطَٰعُوا۟ مِن قِيَامٍۢ وَمَا كَانُوا۟ مُنتَصِرِينَ
और नूह की क़ौम में, इससे पहले —
وَقَوْمَ نُوحٍۢ مِّن قَبْلُ
क्योंकि वे अतिक्रमणकारी क़ौम थे।
إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَوْمًۭا فَٰسِقِينَ
और आकाश को हमने सामर्थ्य से बनाया,
وَٱلسَّمَآءَ بَنَيْنَٰهَا بِأَيْي۟دٍۢ
और हम अवश्य विस्तार करने वाले हैं।
وَإِنَّا لَمُوسِعُونَ
और धरती को हमने बिछौना बनाया:
وَٱلْأَرْضَ فَرَشْنَٰهَا
कितने उत्तम सँवारने वाले!
فَنِعْمَ ٱلْمَٰهِدُونَ
और हर चीज़ का हमने एक जोड़ा रचा, शायद तुम स्मरण करो।
وَمِن كُلِّ شَىْءٍ خَلَقْنَا زَوْجَيْنِ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ
अतः ईश्वर की ओर भागो: मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से निश्चय ही एक स्पष्ट चेतावनी देने वाला हूँ।
فَفِرُّوٓا۟ إِلَى ٱللَّهِ إِنِّى لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌۭ مُّبِينٌۭ
और ईश्वर के साथ कोई और देवता न ठहराओ, क्योंकि मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से एक स्पष्ट चेतावनी देने वाला हूँ।
وَلَا تَجْعَلُوا۟ مَعَ ٱللَّهِ إِلَٰهًا ءَاخَرَ إِنِّى لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌۭ مُّبِينٌۭ
ऐसा ही हुआ:
كَذَٰلِكَ
उनसे पहले वालों के पास कोई संदेशवाहक नहीं आया जिसके विषय में उन्होंने यह न कहा हो: “एक भ्रमकार, या एक विक्षिप्त।”
مَآ أَتَى ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا قَالُوا۟ سَاحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌ
क्या उन्होंने एक-दूसरे को इसका निर्देश दिया?
أَتَوَاصَوْا۟ بِهِۦ
बल्कि वे ऐसी क़ौम हैं जो हर मर्यादा से आगे निकल जाती है।
بَلْ هُمْ قَوْمٌۭ طَاغُونَ
अतः उनसे पीठ फेर लो — तुम इसके लिए बिल्कुल दोषारोपित नहीं होगे — और स्मरण कराओ,
فَتَوَلَّ عَنْهُمْ فَمَآ أَنتَ بِمَلُومٍۢ وَذَكِّرْ
क्योंकि स्मरण विश्वास करने वालों को लाभ देता है।
فَإِنَّ ٱلذِّكْرَىٰ تَنفَعُ ٱلْمُؤْمِنِينَ
मैंने प्रच्छन्नों और मनुष्यों को केवल इसलिए रचा कि वे मेरी आज्ञा का पालन करें।
وَمَا خَلَقْتُ ٱلْجِنَّ وَٱلْإِنسَ إِلَّا لِيَعْبُدُونِ
मैं उनसे कोई जीविका नहीं चाहता, और मैं नहीं चाहता कि वे मुझे खिलाएँ।
مَآ أُرِيدُ مِنْهُم مِّن رِّزْقٍۢ وَمَآ أُرِيدُ أَن يُطْعِمُونِ
ईश्वर जीविका देने वाला है, बल रखने वाला, अडिग।
إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلرَّزَّاقُ ذُو ٱلْقُوَّةِ ٱلْمَتِينُ
जिन्होंने अन्याय किया, उनके लिए निश्चय ही उनके साथियों के हिस्से जैसा हिस्सा है: अतः वे मुझसे उसे जल्दी लाने को न कहें।
فَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ ذَنُوبًۭا مِّثْلَ ذَنُوبِ أَصْحَٰبِهِمْ فَلَا يَسْتَعْجِلُونِ
अतः हाय नकारने वालों पर, उनके उस दिन के कारण जिसका उनसे वादा किया जाता है।
فَوَيْلٌۭ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِن يَوْمِهِمُ ٱلَّذِى يُوعَدُونَ