التوبة
At-Tawba
God Suffices Me
बरी-पत्र, ईश्वर और उसके संदेशवाहक की ओर से, उन साझी ठहराने वालों के प्रति जिनसे तुमने संधि की थी।
بَرَآءَةٞ مِّنَ ٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ إِلَى ٱلَّذِينَ عَٰهَدتُّمُۥ مِنَ ٱلۡمُشۡرِكِينَ
तो चार महीने धरती पर घूमते रहो,
فَسِيحُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ أَرۡبَعَةَ أَشۡهُرٖ
और जान लो कि तुम ईश्वर को असमर्थ नहीं कर सकते, और यह कि ईश्वर नकारने वालों को लज्जित करता है।
وَٱعۡلَمُواْ أَنَّكُمُۥ غَيۡرُ مُعۡجِزِي ٱللَّهِ وَأَنَّ ٱللَّهَ مُخۡزِي ٱلۡكَٰفِرِينَ
और ईश्वर और उसके संदेशवाहक की ओर से लोगों के लिए एक घोषणा, हज के महासंगम के दिन: ईश्वर साझी ठहराने वालों से बरी है, और उसका संदेशवाहक भी।
وَأَذَٰنٞ مِّنَ ٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ إِلَى ٱلنَّاسِ يَوۡمَ ٱلۡحَجِّ ٱلۡأَكۡبَرِ أَنَّ ٱللَّهَ بَرِيٓءٞ مِّنَ ٱلۡمُشۡرِكِينَ وَرَسُولُهُۥۚ
तो यदि तुम पलट आओ, तो यह तुम्हारे लिए बेहतर है;
فَإِن تُبۡتُمُۥ فَهُوَ خَيۡرٞ لَّكُمُۥۖ
परंतु यदि तुम पीठ फेरो, तो जान लो कि तुम ईश्वर को असमर्थ नहीं कर सकते।
وَإِن تَوَلَّيۡتُمُۥ فَٱعۡلَمُواْ أَنَّكُمُۥ غَيۡرُ مُعۡجِزِي ٱللَّهِۗ
और जिन्होंने नकारा उन्हें पीड़ादायक दंड का शुभ समाचार दो — उन साझी ठहराने वालों को छोड़कर जिनसे तुमने संधि की, फिर जिन्होंने तुम्हारे प्रति किसी बात में कमी नहीं की और तुम्हारे विरुद्ध किसी का साथ नहीं दिया: उनके प्रति उनकी संधि उसकी अवधि तक पूरी करो,
وَبَشِّرِ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِعَذَابٍ أَلِيمٍ إِلَّا ٱلَّذِينَ عَٰهَدتُّمُۥ مِنَ ٱلۡمُشۡرِكِينَ ثُمَّ لَمۡ يَنقُصُوكُمُۥ شَيۡـٔٗا وَلَمۡ يُظَٰهِرُواْ عَلَيۡكُمُۥ أَحَدٗا فَأَتِمُّواْ إِلَيۡهِمُۥ عَهۡدَهُمُۥ إِلَىٰ مُدَّتِهِمُۥۚ
क्योंकि ईश्वर सावधानी बरतने वालों से प्रेम करता है।
إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلۡمُتَّقِينَ
जब अलंघनीय महीने बीत जाएँ, तो साझी ठहराने वालों को जहाँ पाओ मार डालो; उन्हें पकड़ो, उन्हें घेरो, और हर निगरानी-स्थल पर उनके लिए घात लगाओ।
فَإِذَا ٱنسَلَخَ ٱلۡأَشۡهُرُ ٱلۡحُرُمُ فَٱقۡتُلُواْ ٱلۡمُشۡرِكِينَ حَيۡثُ وَجَدتُّمُوهُمُۥ وَخُذُوهُمُۥ وَٱحۡصُرُوهُمُۥ وَٱقۡعُدُواْ لَهُمُۥ كُلَّ مَرۡصَدٖۚ
परंतु यदि वे पलट आएँ, संपर्क बनाए रखें और शुद्ध उदारता दें, तो उनकी राह खुली छोड़ दो,
فَإِن تَابُواْ وَأَقَامُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتَوُاْ ٱلزَّكَوٰةَ فَخَلُّواْ سَبِيلَهُمُۥۚ
क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ
और यदि साझी ठहराने वालों में से कोई तुमसे शरण माँगे, तो उसे शरण दो, जब तक वह ईश्वर का बोल न सुन ले, फिर उसे उसके सुरक्षित स्थान तक पहुँचा दो।
وَإِنۡ أَحَدٞ مِّنَ ٱلۡمُشۡرِكِينَ ٱسۡتَجَارَكَ فَأَجِرۡهُۥ حَتَّىٰ يَسۡمَعَ كَلَٰمَ ٱللَّهِ ثُمَّ أَبۡلِغۡهُۥ مَأۡمَنَهُۥۚ
यह इसलिए कि वे ऐसी क़ौम हैं जो नहीं जानती।
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُۥ قَوۡمٞ لَّا يَعۡلَمُونَ
साझी ठहराने वालों के लिए ईश्वर और उसके संदेशवाहक के पास संधि कैसे हो सकती है — उनके सिवा जिनसे तुमने माथा टेकने के अलंघनीय स्थान के पास संधि की? जब तक वे तुम्हारे प्रति सीधे रहें, तुम भी उनके प्रति सीधे रहो,
كَيۡفَ يَكُونُ لِلۡمُشۡرِكِينَ عَهۡدٌ عِندَ ٱللَّهِ وَعِندَ رَسُولِهِۦ إِلَّا ٱلَّذِينَ عَٰهَدتُّمُۥ عِندَ ٱلۡمَسۡجِدِ ٱلۡحَرَامِۖ فَمَا ٱسۡتَقَٰمُواْ لَكُمُۥ فَٱسۡتَقِيمُواْ لَهُمُۥۚ
क्योंकि ईश्वर सावधानी बरतने वालों से प्रेम करता है।
إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلۡمُتَّقِينَ
फिर कैसे? यदि वे तुम पर हावी हो जाएँ, तो वे तुम्हारे प्रति न रक्त-संबंध का लिहाज़ करेंगे न ज़मानत का।
كَيۡفَ وَإِن يَظۡهَرُواْ عَلَيۡكُمُۥ لَا يَرۡقُبُواْ فِيكُمُۥ إِلّٗا وَلَا ذِمَّةٗۚ
वे तुम्हें अपने मुँह से प्रसन्न करते हैं, जबकि उनके मर्म इनकार करते हैं; और उनमें से अधिकतर अतिक्रमणकारी हैं।
يُرۡضُونَكُمُۥ بِأَفۡوَٰهِهِمُۥ وَتَأۡبَىٰ قُلُوبُهُمُۥ وَأَكۡثَرُهُمُۥ فَٰسِقُونَ
उन्होंने ईश्वर के संकेतों के बदले एक तुच्छ मूल्य ख़रीदा, और उन्होंने उसकी राह रोकी।
ٱشۡتَرَوۡاْ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ ثَمَنٗا قَلِيلٗا فَصَدُّواْ عَن سَبِيلِهِۦۚ
कितना बुरा है जो वे करते थे!
إِنَّهُمُۥ سَآءَ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ
वे किसी विश्वास करने वाले के प्रति न रक्त-संबंध का लिहाज़ करते हैं न ज़मानत का।
لَا يَرۡقُبُونَ فِي مُؤۡمِنٍ إِلّٗا وَلَا ذِمَّةٗۚ
और वही आक्रमणकारी हैं।
وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُعۡتَدُونَ
यदि वे पलट आएँ, संपर्क बनाए रखें और शुद्ध उदारता दें, तो वे विधान में तुम्हारे भाई हैं।
فَإِن تَابُواْ وَأَقَامُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتَوُاْ ٱلزَّكَوٰةَ فَإِخۡوَٰنُكُمُۥ فِي ٱلدِّينِۗ
और हम उस क़ौम के लिए संकेतों का विवरण देते हैं जो जानती है।
وَنُفَصِّلُ ٱلۡأٓيَٰتِ لِقَوۡمٖ يَعۡلَمُونَ
परंतु यदि वे अपनी संधि के बाद अपनी शपथें भंग करें, और तुम्हारे विधान पर प्रहार करें, तो नकार के अगुवाओं से लड़ो,
وَإِن نَّكَثُواْ أَيۡمَٰنَهُمُۥ مِنۢ بَعۡدِ عَهۡدِهِمُۥ وَطَعَنُواْ فِي دِينِكُمُۥ فَقَٰتِلُواْ أَى۪مَّةَ ٱلۡكُفۡرِ
क्योंकि उनकी शपथें टिकाऊ नहीं — शायद वे बाज़ आएँ।
إِنَّهُمُۥ لَا أَيۡمَٰنَ لَهُمُۥ لَعَلَّهُمُۥ يَنتَهُونَ
तो क्या तुम उस क़ौम से नहीं लड़ोगे जिसने अपनी शपथें भंग कीं, जिसने संदेशवाहक को निकालने का इरादा किया, और जिसने पहले तुम पर प्रहार किया? क्या तुम उनसे भय खाते हो?
أَلَا تُقَٰتِلُونَ قَوۡمٗا نَّكَثُواْ أَيۡمَٰنَهُمُۥ وَهَمُّواْ بِإِخۡرَاجِ ٱلرَّسُولِ وَهُمُۥ بَدَءُوكُمُۥ أَوَّلَ مَرَّةٍۚ أَتَخۡشَوۡنَهُمُۥۚ
ईश्वर इसका अधिक अधिकारी है कि तुम उससे भय खाओ, यदि तुम विश्वास करने वाले हो।
فَٱللَّهُ أَحَقُّ أَن تَخۡشَوۡهُۥ إِن كُنتُمُۥ مُؤۡمِنِينَ
उनसे लड़ो: ईश्वर तुम्हारे हाथों से उन्हें दंड देगा, उन्हें लज्जित करेगा, उनके विरुद्ध तुम्हारी सहायता करेगा, विश्वास करने वाली क़ौम के सीनों को चंगा करेगा, और उनके मर्मों से आक्रोश दूर करेगा।
قَٰتِلُوهُمُۥ يُعَذِّبۡهُمُ ٱللَّهُ بِأَيۡدِيكُمُۥ وَيُخۡزِهِمُۥ وَيَنصُرۡكُمُۥ عَلَيۡهِمُۥ وَيَشۡفِ صُدُورَ قَوۡمٖ مُّؤۡمِنِينَ وَيُذۡهِبۡ غَيۡظَ قُلُوبِهِمُۥۗ
और ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसकी ओर अनुकंपा के साथ पलटता है।
وَيَتُوبُ ٱللَّهُ عَلَىٰ مَن يَشَآءُۗ
और ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
या फिर तुमने समझा था कि तुम्हें यों ही छोड़ दिया जाएगा, जबकि ईश्वर ने अभी उन्हें अलग नहीं किया जिन्होंने तुममें से संघर्ष किया और ईश्वर, उसके संदेशवाहक और विश्वास करने वालों के अतिरिक्त किसी को अंतरंग राज़दार नहीं बनाया?
أَمۡ حَسِبۡتُمُۥ أَن تُتۡرَكُواْ وَلَمَّا يَعۡلَمِ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ جَٰهَدُواْ مِنكُمُۥ وَلَمۡ يَتَّخِذُواْ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَلَا رَسُولِهِۦ وَلَا ٱلۡمُؤۡمِنِينَ وَلِيجَةٗۚ
और ईश्वर तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।
وَٱللَّهُ خَبِيرُۢ بِمَا تَعۡمَلُونَ
साझी ठहराने वालों को यह उचित नहीं कि वे ईश्वर के माथा टेकने के स्थानों को आबाद करें, जबकि वे अपने ही विरुद्ध नकार का साक्ष्य देते हैं।
مَا كَانَ لِلۡمُشۡرِكِينَ أَن يَعۡمُرُواْ مَسۡجِدَ ٱللَّهِ شَٰهِدِينَ عَلَىٰ أَنفُسِهِمُۥ بِٱلۡكُفۡرِۚ
वही हैं जिनके कर्म ढह गए, और जो आग में सदा रहते हैं।
أُوْلَٰٓئِكَ حَبِطَتۡ أَعۡمَٰلُهُمُۥ وَفِي ٱلنَّارِ هُمُۥ خَٰلِدُونَ
ईश्वर के माथा टेकने के स्थानों को वही आबाद करता है जिसने ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास किया, संपर्क बनाए रखा, शुद्ध उदारता दी, और केवल ईश्वर से भय खाया — यही वे हैं जिनके विषय में संभव है कि वे मार्गदर्शन पाने वालों में हों।
إِنَّمَا يَعۡمُرُ مَسَٰجِدَ ٱللَّهِ مَنۡ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ وَأَقَامَ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتَى ٱلزَّكَوٰةَ وَلَمۡ يَخۡشَ إِلَّا ٱللَّهَۖ فَعَسَىٰ أُوْلَٰٓئِكَ أَن يَكُونُواْ مِنَ ٱلۡمُهۡتَدِينَ
क्या तुमने हज करने वालों को पानी पिलाने और माथा टेकने के अलंघनीय स्थान को आबाद करने को उसके समकक्ष ठहरा लिया जिसने ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास किया, और ईश्वर की राह में संघर्ष किया?
۞ أَجَعَلۡتُمُۥ سِقَايَةَ ٱلۡحَآجِّ وَعِمَارَةَ ٱلۡمَسۡجِدِ ٱلۡحَرَامِ كَمَنۡ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ وَجَٰهَدَ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِۚ
वे ईश्वर के पास बराबर नहीं हैं।
لَا يَسۡتَوُۥنَ عِندَ ٱللَّهِۗ
और ईश्वर अन्यायी क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।
وَٱللَّهُ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلظَّٰلِمِينَ
जिन्होंने विश्वास किया, प्रवास किया और अपनी संपत्ति और अपने स्व से ईश्वर की राह में संघर्ष किया, उनकी ईश्वर के पास एक अधिक विशाल श्रेणी है,
ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَهَاجَرُواْ وَجَٰهَدُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ بِأَمۡوَٰلِهِمُۥ وَأَنفُسِهِمُۥ أَعۡظَمُ دَرَجَةً عِندَ ٱللَّهِۚ
और वही विजयी हैं।
وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡفَآئِزُونَ
उनका अभिभावक उन्हें अपनी ओर से दया, एक प्रसन्नता, और ऐसे उद्यानों का शुभ समाचार देता है जिनमें उनके लिए बना रहने वाला उपकार होगा, वहाँ सदा, चिरकाल तक रहने को;
يُبَشِّرُهُمُۥ رَبُّهُمُۥ بِرَحۡمَةٖ مِّنۡهُۥ وَرِضۡوَٰنٖ وَجَنَّٰتٖ لَّهُمُۥ فِيهَا نَعِيمٞ مُّقِيمٌ خَٰلِدِينَ فِيهَا أَبَدًاۚ
क्योंकि ईश्वर के पास विशाल पुरस्कार है।
إِنَّ ٱللَّهَ عِندَهُۥ أَجۡرٌ عَظِيمٞ
हे विश्वास करने वालो! अपने पिताओं और अपने भाइयों को हिमायती न बनाओ, यदि वे विश्वास की अपेक्षा नकार से अधिक प्रेम करते हैं।
يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَتَّخِذُواْ ءَابَآءَكُمُۥ وَإِخۡوَٰنَكُمُۥ أَوۡلِيَآءَ ا۪نِ ٱسۡتَحَبُّواْ ٱلۡكُفۡرَ عَلَى ٱلۡإِيمَٰنِۚ
और तुममें से जो कोई उन्हें हिमायती बनाता है, वही अन्यायी हैं।
وَمَن يَتَوَلَّهُمُۥ مِنكُمُۥ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلظَّٰلِمُونَ
कहो: “यदि तुम्हारे पिता, तुम्हारे पुत्र, तुम्हारे भाई, तुम्हारे जोड़ीदार, तुम्हारे आत्मीय जन, वह संपत्ति जो तुमने कमाई, वह व्यापार जिसके मंदे पड़ने का तुम्हें भय है, और वे आवास जिनसे तुम संतुष्ट हो, तुम्हें ईश्वर से, उसके संदेशवाहक से, और उसकी राह में संघर्ष से अधिक प्रिय हैं, तो प्रतीक्षा में रहो, जब तक ईश्वर अपना आदेश ले न आए।”
قُلۡ إِن كَانَ ءَابَآؤُكُمُۥ وَأَبۡنَآؤُكُمُۥ وَإِخۡوَٰنُكُمُۥ وَأَزۡوَٰجُكُمُۥ وَعَشِيرَتُكُمُۥ وَأَمۡوَٰلٌ ٱقۡتَرَفۡتُمُوهَا وَتِجَٰرَةٞ تَخۡشَوۡنَ كَسَادَهَا وَمَسَٰكِنُ تَرۡضَوۡنَهَا أَحَبَّ إِلَيۡكُمُۥ مِنَ ٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَجِهَادٖ فِي سَبِيلِهِۦ فَتَرَبَّصُواْ حَتَّىٰ يَأۡتِيَ ٱللَّهُ بِأَمۡرِهِۦۗ
और ईश्वर अतिक्रमणकारियों की क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।
وَٱللَّهُ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلۡفَٰسِقِينَ
ईश्वर ने निश्चय ही अनेक स्थानों पर तुम्हारी सहायता की, और हुनैन के दिन, जब तुम्हारी बड़ी संख्या ने तुम्हें चकाचौंध कर दिया, परंतु वह तुम्हारे किसी काम न आई, और धरती अपने विस्तार के बावजूद तुम्हारे लिए तंग हो गई; फिर तुमने पीठ फेरी, भागते हुए।
لَقَدۡ نَصَرَكُمُ ٱللَّهُ فِي مَوَاطِنَ كَثِيرَةٖ وَيَوۡمَ حُنَيۡنٍ إِذۡ أَعۡجَبَتۡكُمُۥ كَثۡرَتُكُمُۥ فَلَمۡ تُغۡنِ عَنكُمُۥ شَيۡـٔٗا وَضَاقَتۡ عَلَيۡكُمُ ٱلۡأَرۡضُ بِمَا رَحُبَتۡ ثُمَّ وَلَّيۡتُمُۥ مُدۡبِرِينَ
फिर ईश्वर ने अपने संदेशवाहक पर और विश्वास करने वालों पर अपनी आश्वस्ति उतारी, और ऐसी सेनाएँ उतारीं जिन्हें तुम नहीं देखते थे, और उसने उन्हें दंड दिया जिन्होंने नकारा था।
ثُمَّ أَنزَلَ ٱللَّهُ سَكِينَتَهُۥ عَلَىٰ رَسُولِهِۦ وَعَلَى ٱلۡمُؤۡمِنِينَ وَأَنزَلَ جُنُودٗا لَّمۡ تَرَوۡهَا وَعَذَّبَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْۚ
और नकारने वालों का प्रतिफल ऐसा ही है।
وَذَٰلِكَ جَزَآءُ ٱلۡكَٰفِرِينَ
फिर ईश्वर इसके बाद जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसकी ओर अनुकंपा के साथ पलटता है।
ثُمَّ يَتُوبُ ٱللَّهُ مِنۢ بَعۡدِ ذَٰلِكَ عَلَىٰ مَن يَشَآءُۗ
और ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
وَٱللَّهُ غَفُورٞ رَّحِيمٞ
हे विश्वास करने वालो! साझी ठहराने वाले तो केवल अशुद्धि हैं: अतः इस साल के बाद वे माथा टेकने के अलंघनीय स्थान के निकट न आएँ।
يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ إِنَّمَا ٱلۡمُشۡرِكُونَ نَجَسٞ فَلَا يَقۡرَبُواْ ٱلۡمَسۡجِدَ ٱلۡحَرَامَ بَعۡدَ عَامِهِمُۥ هَٰذَاۚ
और यदि तुम्हें तंगी का डर हो, तो ईश्वर, यदि उसकी मर्ज़ी हो, अपने अनुग्रह से तुम्हें धनी कर देगा,
وَإِنۡ خِفۡتُمُۥ عَيۡلَةٗ فَسَوۡفَ يُغۡنِيكُمُ ٱللَّهُ مِن فَضۡلِهِۦ إِن شَآءَۚ
क्योंकि ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
ا۪نَّ ٱللَّهَ عَلِيمٌ حَكِيمٞ
उनसे लड़ो जो न ईश्वर पर विश्वास करते हैं न अंतिम दिन पर, जो उसे वर्जित नहीं मानते जिसे ईश्वर और उसके संदेशवाहक ने वर्जित किया है, और जो सत्य के विधान के अनुरूप नहीं चलते, उनमें से जिन्हें ग्रंथ दिया गया — जब तक कि वे अपने हाथ से युद्ध-क्षतिपूर्ति न दें, नीचा किए हुए।
قَٰتِلُواْ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱللَّهِ وَلَا بِٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ وَلَا يُحَرِّمُونَ مَا حَرَّمَ ٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥ وَلَا يَدِينُونَ دِينَ ٱلۡحَقِّ مِنَ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡكِتَٰبَ حَتَّىٰ يُعۡطُواْ ٱلۡجِزۡيَةَ عَن يَدٖ وَهُمُۥ صَٰغِرُونَ
और पुनरुन्मुखों ने कहा: “अल-उज़ैर ईश्वर का पुत्र है”;
وَقَالَتِ ٱلۡيَهُودُ عُزَيۡرُ ٱبۡنُ ٱللَّهِ
और सहायकों ने कहा: “अल-मसीह ईश्वर का पुत्र है।”
وَقَالَتِ ٱلنَّصَٰرَى ٱلۡمَسِيحُ ٱبۡنُ ٱللَّهِۖ
यह उनका कथन है, उनके मुँह से; वे उनके कथन की नक़ल करते हैं जिन्होंने उनसे पहले नकारा।
ذَٰلِكَ قَوۡلُهُمُۥ بِأَفۡوَٰهِهِمُۥۖ يُضَٰهُونَ قَوۡلَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِن قَبۡلُۚ
ईश्वर उनसे लड़े!
قَٰتَلَهُمُ ٱللَّهُۖ
तो वे कैसे उलटे फेरे जा रहे हैं?
أَنَّىٰ يُؤۡفَكُونَ
उन्होंने अपने आचार्यों और अपने भिक्षुओं को ईश्वर के अतिरिक्त स्वामी बना लिया, और मरयम के पुत्र अल-मसीह को भी,
ٱتَّخَذُواْ أَحۡبَارَهُمُۥ وَرُهۡبَٰنَهُمُۥ أَرۡبَابٗا مِّن دُونِ ٱللَّهِ وَٱلۡمَسِيحَ ٱبۡنَ مَرۡيَمَ
जबकि उन्हें केवल एक ही देवता की आज्ञा का पालन करने का आदेश दिया गया था।
وَمَا أُمِرُواْ إِلَّا لِيَعۡبُدُواْ إِلَٰهٗا وَٰحِدٗاۖ
उसके सिवा कोई देवता नहीं।
لَّا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۚ
उसकी महिमा हो, उससे ऊपर जो वे उसके साथ साझी ठहराते हैं!
سُبۡحَٰنَهُۥ عَمَّا يُشۡرِكُونَ
वे ईश्वर की ज्योति को अपने मुँह से बुझाना चाहते हैं, परंतु ईश्वर अपनी ज्योति पूर्ण करने के सिवा सब कुछ अस्वीकार करता है, भले ही नकारने वाले इससे घृणा करें।
يُرِيدُونَ أَن يُطۡفِـُٔواْ نُورَ ٱللَّهِ بِأَفۡوَٰهِهِمُۥ وَيَأۡبَى ٱللَّهُ إِلَّا أَن يُتِمَّ نُورَهُۥ وَلَوۡ كَرِهَ ٱلۡكَٰفِرُونَ
वही है जिसने अपने संदेशवाहक को मार्गदर्शन और सत्य के विधान के साथ भेजा, ताकि उसे हर विधान पर प्रबल करे, भले ही साझी ठहराने वाले इससे घृणा करें।
هُوَ ٱلَّذِي أَرۡسَلَ رَسُولَهُۥ بِٱلۡهُدَىٰ وَدِينِ ٱلۡحَقِّ لِيُظۡهِرَهُۥ عَلَى ٱلدِّينِ كُلِّهِۦ وَلَوۡ كَرِهَ ٱلۡمُشۡرِكُونَ
हे विश्वास करने वालो! बहुत से आचार्य और भिक्षु लोगों की संपत्ति असत्य से अवश्य खा जाते हैं, और ईश्वर की राह को रोकते हैं।
۞ يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ إِنَّ كَثِيرٗا مِّنَ ٱلۡأَحۡبَارِ وَٱلرُّهۡبَانِ لَيَأۡكُلُونَ أَمۡوَٰلَ ٱلنَّاسِ بِٱلۡبَٰطِلِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِۗ
और जो सोना और चाँदी जमा करके रखते हैं, और उसे ईश्वर की राह में ख़र्च नहीं करते — उन्हें पीड़ादायक दंड का शुभ समाचार दो,
وَٱلَّذِينَ يَكۡنِزُونَ ٱلذَّهَبَ وَٱلۡفِضَّةَ وَلَا يُنفِقُونَهَا فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ فَبَشِّرۡهُمُۥ بِعَذَابٍ أَلِيمٖ
उस दिन जब उन्हें जहन्नम की आग में तपाया जाएगा, और उससे उनके माथे, उनके पहलू और उनकी पीठें दागी जाएँगी: “यह वह है जो तुमने अपने लिए जमा करके रखा; तो जो तुम जमा करते थे उसे चखो!”
يَوۡمَ يُحۡمَىٰ عَلَيۡهَا فِي نَارِ جَهَنَّمَ فَتُكۡوَىٰ بِهَا جِبَاهُهُمُۥ وَجُنُوبُهُمُۥ وَظُهُورُهُمُۥۖ هَٰذَا مَا كَنَزۡتُمُۥ لِأَنفُسِكُمُۥ فَذُوقُواْ مَا كُنتُمُۥ تَكۡنِزُونَ
ईश्वर के निकट महीनों की संख्या निश्चय ही बारह महीने है, ईश्वर की संहिता में, उस दिन से जब उसने आकाशों और धरती को रचा;
إِنَّ عِدَّةَ ٱلشُّهُورِ عِندَ ٱللَّهِ ٱثۡنَا عَشَرَ شَهۡرٗا فِي كِتَٰبِ ٱللَّهِ يَوۡمَ خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ
उनमें से चार अलंघनीय हैं।
مِنۡهَا أَرۡبَعَةٌ حُرُمٞۚ
यही सीधा विधान है।
ذَٰلِكَ ٱلدِّينُ ٱلۡقَيِّمُۚ
तो इन महीनों में अपने आप पर अन्याय न करो।
فَلَا تَظۡلِمُواْ فِيهِنَّ أَنفُسَكُمُۥۚ
और साझी ठहराने वालों से सभी महीनों में लड़ो, जैसे वे सभी महीनों में तुमसे लड़ते हैं,
وَقَٰتِلُواْ ٱلۡمُشۡرِكِينَ كَآفَّةٗ كَمَا يُقَٰتِلُونَكُمُۥ كَآفَّةٗۚ
और जान लो कि ईश्वर सावधानी बरतने वालों के साथ है।
وَٱعۡلَمُواْ أَنَّ ٱللَّهَ مَعَ ٱلۡمُتَّقِينَ
स्थगन तो नकार में केवल एक और वृद्धि है: उसके द्वारा नकारने वाले भटकाते हैं; वे एक साल उसे वैध कर देते हैं और एक साल उसे अलंघनीय बना देते हैं, ताकि ईश्वर ने जिसे अलंघनीय बनाया है उसकी संख्या को रौंद दें, और इस प्रकार ईश्वर ने जिसे अलंघनीय बनाया है उसे वैध कर दें।
إِنَّمَا ٱلنَّسِيٓءُ زِيَادَةٞ فِي ٱلۡكُفۡرِۖ يَضِلُّ بِهِ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ يُحِلُّونَهُۥ عَامٗا وَيُحَرِّمُونَهُۥ عَامٗا لِّيُوَاطِـُٔواْ عِدَّةَ مَا حَرَّمَ ٱللَّهُ فَيُحِلُّواْ مَا حَرَّمَ ٱللَّهُۚ
उनके कर्मों की बुराई उनके लिए सुंदर बना दी गई है।
زُيِّنَ لَهُمُۥ سُوٓءُ اَ۬عۡمَٰلِهِمُۥۗ
और ईश्वर नकारने वाली क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।
وَٱللَّهُ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلۡكَٰفِرِينَ
हे विश्वास करने वालो! तुम्हें क्या हुआ है कि जब तुमसे कहा जाता है: “ईश्वर की राह में लामबंद हो जाओ”, तो तुम धरती की ओर बोझिल होकर झुक जाते हो?
يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مَا لَكُمُۥ إِذَا قِيلَ لَكُمُ ٱنفِرُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ ٱثَّاقَلۡتُمُۥ إِلَى ٱلۡأَرۡضِۚ
क्या तुम अंतिम जीवन की अपेक्षा इहलोक के जीवन से संतुष्ट हो गए हो?
أَرَضِيتُمُۥ بِٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا مِنَ ٱلۡأٓخِرَةِۚ
इहलोक के जीवन का उपभोग, अंतिम जीवन की तुलना में, बस थोड़ा-सा है।
فَمَا مَتَٰعُ ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا فِي ٱلۡأٓخِرَةِ إِلَّا قَلِيلٌ
यदि तुम लामबंद नहीं होगे, तो वह तुम्हें पीड़ादायक दंड देगा, और तुम्हें एक दूसरी क़ौम से बदल देगा, और तुम उसे ज़रा भी हानि न पहुँचा सकोगे।
إِلَّا تَنفِرُواْ يُعَذِّبۡكُمُۥ عَذَابًا أَلِيمٗا وَيَسۡتَبۡدِلۡ قَوۡمًا غَيۡرَكُمُۥ وَلَا تَضُرُّوهُۥ شَيۡـٔٗاۗ
और ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।
وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٌ
यदि तुम उसकी सहायता नहीं करोगे, तो ईश्वर पहले ही उसकी सहायता कर चुका है, जब नकारने वालों ने उसे निकाल दिया था — वह, दो में दूसरा — जब वे दोनों कंदरा में थे, जब वह अपने साथी से कह रहा था: “दुखी न हो, ईश्वर निश्चय ही हमारे साथ है।”
إِلَّا تَنصُرُوهُۥ فَقَدۡ نَصَرَهُ ٱللَّهُ إِذۡ أَخۡرَجَهُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ ثَانِيَ ٱثۡنَيۡنِ إِذۡ هُمَا فِي ٱلۡغَارِ إِذۡ يَقُولُ لِصَٰحِبِهِۦ لَا تَحۡزَنۡ إِنَّ ٱللَّهَ مَعَنَاۖ
तब ईश्वर ने उस पर अपनी आश्वस्ति उतारी,
فَأَنزَلَ ٱللَّهُ سَكِينَتَهُۥ عَلَيۡهِۦ
और उसे ऐसी सेनाओं से सुदृढ़ किया जिन्हें तुम नहीं देखते थे,
وَأَيَّدَهُۥ بِجُنُودٖ لَّمۡ تَرَوۡهَا
और उसने नकारने वालों का बोल सबसे नीचा कर दिया,
وَجَعَلَ كَلِمَةَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ ٱلسُّفۡلَىٰۗ
जबकि ईश्वर का बोल तो सबसे ऊपर रहने वाला है।
وَكَلِمَةُ ٱللَّهِ هِيَ ٱلۡعُلۡيَاۗ
ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।
وَٱللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
लामबंद हो जाओ, हलके या भारी, और अपनी संपत्ति और अपने स्व से ईश्वर की राह में संघर्ष करो।
ٱنفِرُواْ خِفَافٗا وَثِقَالٗا وَجَٰهِدُواْ بِأَمۡوَٰلِكُمُۥ وَأَنفُسِكُمُۥ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِۚ
यह तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम जानते होते।
ذَٰلِكُمُۥ خَيۡرٞ لَّكُمُۥ إِن كُنتُمُۥ تَعۡلَمُونَ
यदि यह निकट का लाभ और मध्यम यात्रा होती, तो वे तुम्हारा अनुसरण करते; परंतु दूरी उन्हें लंबी लगी।
لَوۡ كَانَ عَرَضٗا قَرِيبٗا وَسَفَرٗا قَاصِدٗا لَّٱتَّبَعُوكَ وَلَٰكِنۢ بَعُدَتۡ عَلَيۡهِمُ ٱلشُّقَّةُۚ
और वे ईश्वर की शपथ खाएँगे: “यदि हमसे बन पड़ता, तो हम तुम्हारे साथ निकल पड़ते”;
وَسَيَحۡلِفُونَ بِٱللَّهِ لَوِ ٱسۡتَطَعۡنَا لَخَرَجۡنَا مَعَكُمُۥ
वे स्वयं को नष्ट कर रहे हैं,
يُهۡلِكُونَ أَنفُسَهُمُۥ
और ईश्वर जानता है कि वे अवश्य झूठे हैं।
وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ إِنَّهُمُۥ لَكَٰذِبُونَ
ईश्वर तुमसे दरगुज़र करे! तुमने उन्हें यह अनुमति क्यों दी, इससे पहले कि तुम्हारे लिए वे स्पष्ट हो जाते जिन्होंने सच कहा, और तुम झूठों को जान लेते?
عَفَا ٱللَّهُ عَنكَ لِمَ أَذِنتَ لَهُمُۥ حَتَّىٰ يَتَبَيَّنَ لَكَ ٱلَّذِينَ صَدَقُواْ وَتَعۡلَمَ ٱلۡكَٰذِبِينَ
ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास करने वाले तुमसे अनुमति नहीं माँगते, जब बात अपनी संपत्ति और अपने स्व से संघर्ष करने की हो।
لَا يَسۡتَـٔۡذِنُكَ ٱلَّذِينَ يُؤۡمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ أَن يُجَٰهِدُواْ بِأَمۡوَٰلِهِمُۥ وَأَنفُسِهِمُۥۗ
ईश्वर सावधानी बरतने वालों के विषय में सर्वज्ञ है।
وَٱللَّهُ عَلِيمُۢ بِٱلۡمُتَّقِينَ
तुमसे अनुमति केवल वही माँगते हैं जो न ईश्वर पर विश्वास करते हैं न अंतिम दिन पर, और जिनके मर्म संदेह से ग्रस्त हैं, इसलिए वे अपने संदेह में हिचकिचाते हैं।
إِنَّمَا يَسۡتَـٔۡذِنُكَ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ وَٱرۡتَابَتۡ قُلُوبُهُمُۥ فَهُمُۥ فِي رَيۡبِهِمُۥ يَتَرَدَّدُونَ
और यदि वे निकलना चाहते, तो उसके लिए कुछ साज़-सामान तैयार करते;
۞ وَلَوۡ أَرَادُواْ ٱلۡخُرُوجَ لَأَعَدُّواْ لَهُۥ عُدَّةٗ
परंतु ईश्वर ने उनके उठाए जाने से अरुचि रखी, और उसने उन्हें रोक दिया, और उनसे कहा गया: “बैठने वालों के साथ बैठे रहो।”
وَلَٰكِن كَرِهَ ٱللَّهُ ٱنۢبِعَاثَهُمُۥ فَثَبَّطَهُمُۥ وَقِيلَ ٱقۡعُدُواْ مَعَ ٱلۡقَٰعِدِينَ
यदि वे तुम्हारे बीच निकले होते, तो तुम्हारी व्याकुलता ही बढ़ाते, और तुम्हें परीक्षा में डालने की खोज में तुम्हारे बीच इधर-उधर दौड़ते फिरते — और तुम्हारे बीच उनकी सुनने वाले हैं।
لَوۡ خَرَجُواْ فِيكُمُۥ مَا زَادُوكُمُۥ إِلَّا خَبَالٗا وَلَأَوۡضَعُواْ خِلَٰلَكُمُۥ يَبۡغُونَكُمُ ٱلۡفِتۡنَةَ وَفِيكُمُۥ سَمَّٰعُونَ لَهُمُۥۗ
और ईश्वर अन्यायियों के विषय में सर्वज्ञ है।
وَٱللَّهُ عَلِيمُۢ بِٱلظَّٰلِمِينَ
उन्होंने निश्चय ही पहले भी परीक्षा खोजी थी, और तुम्हारे लिए मामलों को उलट-पलट किया था, यहाँ तक कि सत्य आ गया और ईश्वर का आदेश सामने आ गया, उनकी अरुचि के बावजूद।
لَقَدِ ٱبۡتَغَوُاْ ٱلۡفِتۡنَةَ مِن قَبۡلُ وَقَلَّبُواْ لَكَ ٱلۡأُمُورَ حَتَّىٰ جَآءَ ٱلۡحَقُّ وَظَهَرَ أَمۡرُ ٱللَّهِ وَهُمُۥ كَٰرِهُونَ
और उनमें से कोई है जो कहता है: “मुझे अनुमति दो, और मुझे परीक्षा में न डालो।”
وَمِنۡهُمُۥ مَن يَقُولُ ٱئۡذَن لِّي وَلَا تَفۡتِنِّيۚ
क्या वे परीक्षा में पहले ही नहीं गिर चुके?
أَلَا فِي ٱلۡفِتۡنَةِ سَقَطُواْۗ
और जहन्नम नकारने वालों को अवश्य घेरे हुए है।
وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمُحِيطَةُۢ بِٱلۡكَٰفِرِينَ
यदि तुम्हें कोई भलाई पहुँचती है, तो यह उन्हें बुरा लगता है,
إِن تُصِبۡكَ حَسَنَةٞ تَسُؤۡهُمُۥۖ
और यदि तुम्हें कोई विपत्ति पहुँचती है, तो वे कहते हैं: “हमने पहले ही एहतियात बरत ली थी” — और वे पीठ फेर लेते हैं, हर्ष से भरे हुए।
وَإِن تُصِبۡكَ مُصِيبَةٞ يَقُولُواْ قَدۡ أَخَذۡنَا أَمۡرَنَا مِن قَبۡلُ وَيَتَوَلَّواْ وَّهُمُۥ فَرِحُونَ
कहो: “हम पर कुछ नहीं आएगा, सिवा उसके जो ईश्वर ने हमारे लिए विहित किया है;
قُل لَّن يُصِيبَنَا إِلَّا مَا كَتَبَ ٱللَّهُ لَنَا
वह हमारा सबसे निकट का ज़ामिन है।
هُوَ مَوۡلَىٰنَاۚ
और विश्वास करने वालों को ईश्वर को ही मुख़्तार बनाना चाहिए।”
وَعَلَى ٱللَّهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ
कहो: “क्या तुम हमारे विषय में दो सबसे सुंदर बातों में से केवल एक की ही अपेक्षा रखते हो?
قُلۡ هَلۡ تَرَبَّصُونَ بِنَا إِلَّا إِحۡدَى ٱلۡحُسۡنَيَيۡنِۖ
और हम तुम्हारे विषय में अपेक्षा रखते हैं कि ईश्वर तुम पर अपनी ओर से, या हमारे हाथों से, कोई दंड घटित करे।
وَنَحۡنُ نَتَرَبَّصُ بِكُمُۥ أَن يُصِيبَكُمُ ٱللَّهُ بِعَذَابٖ مِّنۡ عِندِهِۦ أَوۡ بِأَيۡدِينَاۖ
तो तुम प्रतीक्षा में रहो,
فَتَرَبَّصُواْ
क्योंकि हम तुम्हारे साथ प्रतीक्षा में हैं।”
إِنَّا مَعَكُمُۥ مُتَرَبِّصُونَ
कहो: “ख़ुशी से ख़र्च करो या अनमने मन से, यह तुमसे स्वीकार नहीं किया जाएगा,
قُلۡ أَنفِقُواْ طَوۡعًا أَوۡ كَرۡهٗا لَّن يُتَقَبَّلَ مِنكُمُۥ
क्योंकि तुम अतिक्रमणकारियों की क़ौम हो।”
إِنَّكُمُۥ كُنتُمُۥ قَوۡمٗا فَٰسِقِينَ
और उनके ख़र्च स्वीकार किए जाने से उन्हें किसी चीज़ ने नहीं रोका, सिवा इसके कि उन्होंने ईश्वर और उसके संदेशवाहक को नकारा, कि वे संपर्क में आते हैं तो केवल आलस्य के साथ, और ख़र्च करते हैं तो केवल अनमने मन से।
وَمَا مَنَعَهُمُۥ أَن تُقۡبَلَ مِنۡهُمُۥ نَفَقَٰتُهُمُۥ إِلَّا أَنَّهُمُۥ كَفَرُواْ بِٱللَّهِ وَبِرَسُولِهِۦ وَلَا يَأۡتُونَ ٱلصَّلَوٰةَ إِلَّا وَهُمُۥ كُسَالَىٰ وَلَا يُنفِقُونَ إِلَّا وَهُمُۥ كَٰرِهُونَ
इसलिए उनकी संपत्ति और उनकी संतान तुम्हें चकाचौंध न करें।
فَلَا تُعۡجِبۡكَ أَمۡوَٰلُهُمُۥ وَلَا أَوۡلَٰدُهُمُۥۚ
ईश्वर इससे केवल यही चाहता है कि उन्हें इहलोक के जीवन में दंड दे, और उनका स्व निकल जाए जबकि वे नकार रहे हों।
إِنَّمَا يُرِيدُ ٱللَّهُ لِيُعَذِّبَهُمُۥ بِهَا فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَتَزۡهَقَ أَنفُسُهُمُۥ وَهُمُۥ كَٰفِرُونَ
और वे ईश्वर की शपथ खाते हैं कि वे अवश्य तुम्हारे ही हैं, जबकि वे तुम्हारे नहीं हैं; बल्कि वे डरने वाले हैं।
وَيَحۡلِفُونَ بِٱللَّهِ إِنَّهُمُۥ لَمِنكُمُۥ وَمَا هُمُۥ مِنكُمُۥ وَلَٰكِنَّهُمُۥ قَوۡمٞ يَفۡرَقُونَ
यदि उन्हें कोई पीछे हटने की जगह मिलती, कंदराएँ या कोई सुरंग, तो वे उसी की ओर बेक़ाबू होकर मुड़ जाते।
لَوۡ يَجِدُونَ مَلۡجَـًٔا أَوۡ مَغَٰرَٰتٍ أَوۡ مُدَّخَلٗا لَّوَلَّوۡاْ إِلَيۡهِۦ وَهُمُۥ يَجۡمَحُونَ
और उनमें से कुछ ऐसे हैं जो दानों के विषय में कटाक्षों से तुम्हारी निंदा करते हैं: यदि उन्हें उनमें से सौंपा जाए, तो वे संतुष्ट रहते हैं; और यदि उन्हें उनमें से न सौंपा जाए, तो देखो, वे क्रुद्ध हो उठते हैं।
وَمِنۡهُمُۥ مَن يَلۡمِزُكَ فِي ٱلصَّدَقَٰتِ فَإِنۡ أُعۡطُواْ مِنۡهَا رَضُواْ وَإِن لَّمۡ يُعۡطَوۡاْ مِنۡهَا إِذَا هُمُۥ يَسۡخَطُونَ
और यदि वे उससे संतुष्ट हो जाते जो ईश्वर और उसके संदेशवाहक ने उन्हें दिया था, और कहते: “ईश्वर हमारे लिए पर्याप्त है; ईश्वर हमें अपने अनुग्रह से देगा, और उसका संदेशवाहक भी;
وَلَوۡ أَنَّهُمُۥ رَضُواْ مَا ءَاتَىٰهُمُ ٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥ وَقَالُواْ حَسۡبُنَا ٱللَّهُ سَيُؤۡتِينَا ٱللَّهُ مِن فَضۡلِهِۦ وَرَسُولُهُۥ
क्योंकि हम तो ईश्वर की ओर लगन से मुड़ते हैं।”
إِنَّا إِلَى ٱللَّهِ رَٰغِبُونَ
दान केवल निर्धनों के लिए हैं, दरिद्रों के लिए, उनकी देखरेख करने वालों के लिए, उनके लिए जिनके मर्मों में मेल कराया गया है, उनके लिए जो ऋण के बोझ तले हैं, उनके लिए जो अप्रत्याशित ख़र्च से क़र्ज़दार हुए, ईश्वर की राह में, और राह के मुसाफ़िर के लिए — यह ईश्वर की ओर से अनिवार्य कर्तव्य है।
۞ إِنَّمَا ٱلصَّدَقَٰتُ لِلۡفُقَرَآءِ وَٱلۡمَسَٰكِينِ وَٱلۡعَٰمِلِينَ عَلَيۡهَا وَٱلۡمُؤَلَّفَةِ قُلُوبُهُمُۥ وَفِي ٱلرِّقَابِ وَٱلۡغَٰرِمِينَ وَفِي سَبِيلِ ٱللَّهِ وَٱبۡنِ ٱلسَّبِيلِۖ فَرِيضَةٗ مِّنَ ٱللَّهِۗ
और ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٞ
और उनमें से कुछ ऐसे हैं जो सूचनादाता को तंग करते हैं और कहते हैं: “वह तो पूरा कान ही है।”
وَمِنۡهُمُ ٱلَّذِينَ يُؤۡذُونَ ٱلنَّبِيَّ وَيَقُولُونَ هُوَ أُذُنٞۚ
कहो: “तुम्हारे लिए अच्छाई का कान है: वह ईश्वर पर विश्वास करता है, विश्वास करने वालों पर भरोसा करता है, और तुममें से जिन्होंने विश्वास किया उनके लिए वह दया है।”
قُلۡ أُذُنُ خَيۡرٖ لَّكُمُۥ يُؤۡمِنُ بِٱللَّهِ وَيُؤۡمِنُ لِلۡمُؤۡمِنِينَ وَرَحۡمَةٞ لِّلَّذِينَ ءَامَنُواْ مِنكُمُۥۚ
और जो ईश्वर के संदेशवाहक को तंग करते हैं, उन्हें पीड़ादायक दंड मिलेगा।
وَٱلَّذِينَ يُؤۡذُونَ رَسُولَ ٱللَّهِ لَهُمُۥ عَذَابٌ أَلِيمٞ
वे तुम्हारे सामने ईश्वर की शपथ खाते हैं, तुम्हें संतुष्ट करने के लिए; परंतु ईश्वर और उसका संदेशवाहक इसके अधिक अधिकारी हैं कि वे उसे संतुष्ट करने का प्रयास करें, यदि वे विश्वास करने वाले हैं।
يَحۡلِفُونَ بِٱللَّهِ لَكُمُۥ لِيُرۡضُوكُمُۥ وَٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥ أَحَقُّ أَن يُرۡضُوهُۥ إِن كَانُواْ مُؤۡمِنِينَ
क्या वे नहीं जानते कि जो कोई ईश्वर और उसके संदेशवाहक से शत्रुतापूर्वक विरोध करता है, उसके लिए जहन्नम की आग है, जहाँ वह सदा रहेगा?
أَلَمۡ يَعۡلَمُواْ أَنَّهُۥ مَن يُحَادِدِ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ فَأَنَّ لَهُۥ نَارَ جَهَنَّمَ خَٰلِدٗا فِيهَاۚ
यही विशाल लज्जा है।
ذَٰلِكَ ٱلۡخِزۡيُ ٱلۡعَظِيمُ
पाखंडी इस बात से आशंकित रहते हैं कि उन पर कोई सूरा उतार दी जाए, जो उन्हें सूचित कर दे कि उनके मर्मों में क्या है।
يَحۡذَرُ ٱلۡمُنَٰفِقُونَ أَن تُنزَلَ عَلَيۡهِمُۥ سُورَةٞ تُنَبِّئُهُمُۥ بِمَا فِي قُلُوبِهِمُۥۚ
कहो: “मज़ाक़ उड़ाओ!
قُلِ ٱسۡتَهۡزِءُواْ
ईश्वर निश्चय ही उसे खुले में निकाल लाएगा जिससे तुम आशंकित हो।”
إِنَّ ٱللَّهَ مُخۡرِجٞ مَّا تَحۡذَرُونَ
और यदि तुम उनसे पूछो, तो वे अवश्य कहेंगे: “हम तो केवल डूबते और खेलते थे।”
وَلَئِن سَأَلۡتَهُمُۥ لَيَقُولُنَّ إِنَّمَا كُنَّا نَخُوضُ وَنَلۡعَبُۚ
कहो: “क्या तुम ईश्वर, उसके संकेतों और उसके संदेशवाहक का मज़ाक़ उड़ाते थे?”
قُلۡ أَبِٱللَّهِ وَءَايَٰتِهِۦ وَرَسُولِهِۦ كُنتُمُۥ تَسۡتَهۡزِءُونَ
सफ़ाई मत दो:
لَا تَعۡتَذِرُواْ
तुमने अपने विश्वास के बाद नकारा है।
قَدۡ كَفَرۡتُمُۥ بَعۡدَ إِيمَٰنِكُمُۥۚ
यदि तुम में से एक समूह से दरगुज़र किया जाए, तो दूसरे समूह को दंड दिया जाएगा, इस कारण कि वे बहिष्कृत हुए।
إِن يُعۡفَ عَن طَآئِفَةٖ مِّنكُمُۥ تُعَذَّبۡ طَآئِفَةُۢ بِأَنَّهُمُۥ كَانُواْ مُجۡرِمِينَ
पाखंडी पुरुष और स्त्रियाँ एक-दूसरे में से हैं: वे अमान्य का आदेश देते हैं और मान्य से मना करते हैं, और अपने हाथ बंद रखते हैं; उन्होंने ईश्वर को भुला दिया, और उसने उन्हें भुला दिया।
ٱلۡمُنَٰفِقُونَ وَٱلۡمُنَٰفِقَٰتُ بَعۡضُهُمُۥ مِنۢ بَعۡضٖۚ يَأۡمُرُونَ بِٱلۡمُنكَرِ وَيَنۡهَوۡنَ عَنِ ٱلۡمَعۡرُوفِ وَيَقۡبِضُونَ أَيۡدِيَهُمُۥۚ نَسُواْ ٱللَّهَ فَنَسِيَهُمُۥۚ
पाखंडी निश्चय ही अतिक्रमणकारी हैं।
إِنَّ ٱلۡمُنَٰفِقِينَ هُمُ ٱلۡفَٰسِقُونَ
ईश्वर ने पाखंडी पुरुषों और स्त्रियों से, और नकारने वालों से जहन्नम की आग का वादा किया है, जहाँ वे सदा रहेंगे।
وَعَدَ ٱللَّهُ ٱلۡمُنَٰفِقِينَ وَٱلۡمُنَٰفِقَٰتِ وَٱلۡكُفَّارَ نَارَ جَهَنَّمَ خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ
वही उनके लिए पर्याप्त है।
هِيَ حَسۡبُهُمُۥۚ
और ईश्वर ने उन्हें धिक्कारा है,
وَلَعَنَهُمُ ٱللَّهُۖ
और उन्हें बना रहने वाला दंड मिलेगा।
وَلَهُمُۥ عَذَابٞ مُّقِيمٞ
उन जैसे जो तुमसे पहले थे: वे शक्ति में तुमसे बढ़कर थे, उनके पास अधिक संपत्ति और संतान थी; उन्होंने अपने हिस्से का उपभोग किया, और तुमने अपने हिस्से का उपभोग किया जैसे तुमसे पहले वालों ने अपने हिस्से का उपभोग किया, और तुम डूब गए जैसे वे डूब गए।
كَٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِكُمُۥ كَانُواْ أَشَدَّ مِنكُمُۥ قُوَّةٗ وَأَكۡثَرَ أَمۡوَٰلٗا وَأَوۡلَٰدٗا فَٱسۡتَمۡتَعُواْ بِخَلَٰقِهِمُۥ فَٱسۡتَمۡتَعۡتُمُۥ بِخَلَٰقِكُمُۥ كَمَا ٱسۡتَمۡتَعَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِكُمُۥ بِخَلَٰقِهِمُۥ وَخُضۡتُمُۥ كَٱلَّذِي خَاضُواْۚ
यही वे हैं जिनके कर्म ढह गए, इहलोक में और अंतिम जीवन में;
أُوْلَٰٓئِكَ حَبِطَتۡ أَعۡمَٰلُهُمُۥ فِي ٱلدُّنۡيَا وَٱلۡأٓخِرَةِۖ
और यही घाटा उठाने वाले हैं।
وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ
क्या उन्हें उनकी सूचना नहीं पहुँची जो उनसे पहले थे: नूह की क़ौम, आद, समूद, इब्राहीम की क़ौम, मदयन वाले, और उलट दी गई बस्तियाँ?
أَلَمۡ يَأۡتِهِمُۥ نَبَأُ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمُۥ قَوۡمِ نُوحٖ وَعَادٖ وَثَمُودَ وَقَوۡمِ إِبۡرَٰهِيمَ وَأَصۡحَٰبِ مَدۡيَنَ وَٱلۡمُؤۡتَفِكَٰتِۚ
उनके संदेशवाहक उनके पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ आए थे।
أَتَتۡهُمُۥ رُسُلُهُمُۥ بِٱلۡبَيِّنَٰتِۖ
और ईश्वर ऐसा न था कि उन पर अन्याय करता;
فَمَا كَانَ ٱللَّهُ لِيَظۡلِمَهُمُۥ
बल्कि वे स्वयं अपने ऊपर अन्याय करते थे।
وَلَٰكِن كَانُواْ أَنفُسَهُمُۥ يَظۡلِمُونَ
और विश्वास करने वाले पुरुष और विश्वास करने वाली स्त्रियाँ एक-दूसरे के हिमायती हैं:
وَٱلۡمُؤۡمِنُونَ وَٱلۡمُؤۡمِنَٰتُ بَعۡضُهُمُۥ أَوۡلِيَآءُ بَعۡضٖۚ
वे मान्य का आदेश देते हैं और अमान्य से मना करते हैं, संपर्क बनाए रखते हैं, शुद्ध उदारता देते हैं, और ईश्वर और उसके संदेशवाहक की बात मानते हैं।
يَأۡمُرُونَ بِٱلۡمَعۡرُوفِ وَيَنۡهَوۡنَ عَنِ ٱلۡمُنكَرِ وَيُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَيُؤۡتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَيُطِيعُونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥۚ
यही वे हैं जिन पर ईश्वर शीघ्र ही दया करेगा,
أُوْلَٰٓئِكَ سَيَرۡحَمُهُمُ ٱللَّهُۗ
क्योंकि ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।
إِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٞ
ईश्वर ने विश्वास करने वाले पुरुषों और विश्वास करने वाली स्त्रियों से ऐसे उद्यानों का वादा किया है जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जहाँ वे सदा रहेंगे, और स्थायित्व के उद्यानों में अच्छे आवासों का;
وَعَدَ ٱللَّهُ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ وَٱلۡمُؤۡمِنَٰتِ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَا وَمَسَٰكِنَ طَيِّبَةٗ فِي جَنَّٰتِ عَدۡنٖۚ
और ईश्वर की ओर से एक प्रसन्नता इससे भी बड़ी है।
وَرِضۡوَٰنٞ مِّنَ ٱللَّهِ أَكۡبَرُۚ
यही विशाल विजय है।
ذَٰلِكَ هُوَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ
हे सूचनादाता! नकारने वालों और पाखंडियों से संघर्ष करो, और उनके प्रति दृढ़ रहो।
يَٰأَيُّهَا ٱلنَّبِيُّ جَٰهِدِ ٱلۡكُفَّارَ وَٱلۡمُنَٰفِقِينَ وَٱغۡلُظۡ عَلَيۡهِمُۥۚ
और उनकी शरण जहन्नम होगी,
وَمَأۡوَىٰهُمُۥ جَهَنَّمُۖ
और कितना भयानक गंतव्य!
وَبِئۡسَ ٱلۡمَصِيرُ
वे ईश्वर की शपथ खाते हैं कि उन्होंने कुछ नहीं कहा;
يَحۡلِفُونَ بِٱللَّهِ مَا قَالُواْ
जबकि उन्होंने निश्चय ही नकार का बोल कहा है, और ईश्वर के प्रति खरे रहने के बाद उन्होंने नकारा है, और उन्होंने उसका इरादा किया जो उन्हें प्राप्त नहीं हुआ।
وَلَقَدۡ قَالُواْ كَلِمَةَ ٱلۡكُفۡرِ وَكَفَرُواْ بَعۡدَ إِسۡلَٰمِهِمُۥ وَهَمُّواْ بِمَا لَمۡ يَنَالُواْۚ
वे केवल इसी का रोष रखते हैं कि ईश्वर और उसके संदेशवाहक ने उन्हें अपने अनुग्रह से धनी कर दिया।
وَمَا نَقَمُواْ إِلَّا أَنۡ أَغۡنَىٰهُمُ ٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥ مِن فَضۡلِهِۦۚ
यदि वे पलट आएँ, तो यह उनके लिए बेहतर होगा;
فَإِن يَتُوبُواْ يَكُ خَيۡرٗا لَّهُمُۥۖ
परंतु यदि वे पीठ फेर लें, तो ईश्वर उन्हें इहलोक में और अंतिम जीवन में पीड़ादायक दंड देगा,
وَإِن يَتَوَلَّوۡاْ يُعَذِّبۡهُمُ ٱللَّهُ عَذَابًا أَلِيمٗا فِي ٱلدُّنۡيَا وَٱلۡأٓخِرَةِۚ
और धरती पर उनका न कोई आश्रयदाता होगा, न कोई सहायता।
وَمَا لَهُمُۥ فِي ٱلۡأَرۡضِ مِن وَلِيّٖ وَلَا نَصِيرٖ
और उनमें से कुछ ऐसे हैं जिन्होंने ईश्वर से संधि की: “यदि वह हमें अपने अनुग्रह से देगा, तो हम अवश्य दान करेंगे, और हम अवश्य उनमें होंगे जो भले हैं।”
۞ وَمِنۡهُمُۥ مَنۡ عَٰهَدَ ٱللَّهَ لَئِنۡ ءَاتَىٰنَا مِن فَضۡلِهِۦ لَنَصَّدَّقَنَّ وَلَنَكُونَنَّ مِنَ ٱلصَّٰلِحِينَ
परंतु जब उसने उन्हें अपने अनुग्रह से दिया, तो उन्होंने उसमें कंजूसी की और कतराते हुए पीठ फेर ली।
فَلَمَّا ءَاتَىٰهُمُۥ مِن فَضۡلِهِۦ بَخِلُواْ بِهِۦ وَتَوَلَّواْ وَّهُمُۥ مُعۡرِضُونَ
तब उसने इसके पीछे उनके मर्मों में पाखंड लगा दिया, उस दिन तक जब वे उससे मिलेंगे, इसलिए कि उन्होंने ईश्वर से जो वादा किया था उसमें उसके प्रति चूक की, और इसलिए कि वे झूठ बोलते थे।
فَأَعۡقَبَهُمُۥ نِفَاقٗا فِي قُلُوبِهِمُۥ إِلَىٰ يَوۡمِ يَلۡقَوۡنَهُۥ بِمَا أَخۡلَفُواْ ٱللَّهَ مَا وَعَدُوهُۥ وَبِمَا كَانُواْ يَكۡذِبُونَ
क्या वे नहीं जानते कि ईश्वर उनका रहस्य और उनकी गुप्त मंत्रणाएँ जानता है, और यह कि जो इंद्रियों से परे है उसे पूरी तरह जानने वाला ईश्वर ही है?
أَلَمۡ يَعۡلَمُواْ أَنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ سِرَّهُمُۥ وَنَجۡوَىٰهُمُۥ وَأَنَّ ٱللَّهَ عَلَّٰمُ ٱلۡغُيُوبِ
जो स्वेच्छा से दान करने वाले विश्वास करने वालों की कटाक्षों से निंदा करते हैं, और उनका उपहास करते हैं जिनके पास अपने परिश्रम के सिवा देने को कुछ नहीं — ईश्वर उनका उपहास करता है,
ٱلَّذِينَ يَلۡمِزُونَ ٱلۡمُطَّوِّعِينَ مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ فِي ٱلصَّدَقَٰتِ وَٱلَّذِينَ لَا يَجِدُونَ إِلَّا جُهۡدَهُمُۥ فَيَسۡخَرُونَ مِنۡهُمُۥ سَخِرَ ٱللَّهُ مِنۡهُمُۥ
और उन्हें पीड़ादायक दंड मिलेगा।
وَلَهُمُۥ عَذَابٌ أَلِيمٌ
तुम उनके लिए क्षमा माँगो या न माँगो —
ٱسۡتَغۡفِرۡ لَهُمُۥ أَوۡ لَا تَسۡتَغۡفِرۡ لَهُمُۥ
यदि तुम उनके लिए सत्तर बार क्षमा माँगो, तब भी ईश्वर उन्हें कभी क्षमा नहीं करेगा।
إِن تَسۡتَغۡفِرۡ لَهُمُۥ سَبۡعِينَ مَرَّةٗ فَلَن يَغۡفِرَ ٱللَّهُ لَهُمُۥۚ
यह इसलिए कि उन्होंने ईश्वर और उसके संदेशवाहक को नकारा।
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُۥ كَفَرُواْ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦۗ
और ईश्वर अतिक्रमणकारियों की क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।
وَٱللَّهُ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلۡفَٰسِقِينَ
जो पीछे छोड़े गए, वे ईश्वर के संदेशवाहक से अलग बैठे रहने पर प्रसन्न हुए, और उन्हें ईश्वर की राह में अपनी संपत्ति और अपने स्व से संघर्ष करने से अरुचि हुई, और उन्होंने कहा: “गर्मी में लामबंद न होओ।”
فَرِحَ ٱلۡمُخَلَّفُونَ بِمَقۡعَدِهِمُۥ خِلَٰفَ رَسُولِ ٱللَّهِ وَكَرِهُواْ أَن يُجَٰهِدُواْ بِأَمۡوَٰلِهِمُۥ وَأَنفُسِهِمُۥ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ وَقَالُواْ لَا تَنفِرُواْ فِي ٱلۡحَرِّۗ
कहो: “जहन्नम की आग गर्मी में और भी तीव्र है” — यदि वे समझते होते!
قُلۡ نَارُ جَهَنَّمَ أَشَدُّ حَرّٗاۚ لَّوۡ كَانُواْ يَفۡقَهُونَ
तो वे थोड़ा हँसें, और बहुत रोएँ, उसके प्रतिफल में जो वे कमाते थे।
فَلۡيَضۡحَكُواْ قَلِيلٗا وَلۡيَبۡكُواْ كَثِيرٗا جَزَآءَۢ بِمَا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ
यदि ईश्वर तुम्हें उनके किसी समूह की ओर लौटा दे, और वे तुमसे निकलने की अनुमति माँगें, तो कहो: “तुम मेरे साथ कभी नहीं निकलोगे, और मेरे साथ किसी शत्रु से नहीं लड़ोगे,
فَإِن رَّجَعَكَ ٱللَّهُ إِلَىٰ طَآئِفَةٖ مِّنۡهُمُۥ فَٱسۡتَـٔۡذَنُوكَ لِلۡخُرُوجِ فَقُل لَّن تَخۡرُجُواْ مَعِيَ أَبَدٗا وَلَن تُقَٰتِلُواْ مَعِي عَدُوًّاۖ
क्योंकि तुम पहली बार बैठे रहने से संतुष्ट हो गए थे;
إِنَّكُمُۥ رَضِيتُمُۥ بِٱلۡقُعُودِ أَوَّلَ مَرَّةٖ
तो पीछे रहने वालों के साथ बैठे रहो।”
فَٱقۡعُدُواْ مَعَ ٱلۡخَٰلِفِينَ
और उनमें से जो कोई मर जाए, उसके साथ कभी संपर्क न रखो, और उसे दफ़नाने के लिए बने न रहो,
وَلَا تُصَلِّ عَلَىٰ أَحَدٖ مِّنۡهُمُۥ مَاتَ أَبَدٗا وَلَا تَقُمۡ عَلَىٰ قَبۡرِهِۦۖ
क्योंकि उन्होंने ईश्वर और उसके संदेशवाहक को नकारा, और वे अतिक्रमणकारी रहते हुए मरे।
إِنَّهُمُۥ كَفَرُواْ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَمَاتُواْ وَهُمُۥ فَٰسِقُونَ
और उनकी संपत्ति और उनकी संतान तुम्हें चकाचौंध न करें।
وَلَا تُعۡجِبۡكَ أَمۡوَٰلُهُمُۥ وَأَوۡلَٰدُهُمُۥۚ
ईश्वर इससे केवल यही चाहता है कि उन्हें इहलोक में दंड दे, और उनका स्व निकल जाए जबकि वे नकार रहे हों।
إِنَّمَا يُرِيدُ ٱللَّهُ أَن يُعَذِّبَهُمُۥ بِهَا فِي ٱلدُّنۡيَا وَتَزۡهَقَ أَنفُسُهُمُۥ وَهُمُۥ كَٰفِرُونَ
और जब कोई सूरा उतारी गई: “ईश्वर पर विश्वास करो, और उसके संदेशवाहक के साथ संघर्ष करो”, तो उनमें से जिनके पास साधन हैं वे तुमसे अनुमति माँगते हैं, और कहते हैं: “हमें बैठने वालों के साथ रहने दो।”
وَإِذَا أُنزِلَتۡ سُورَةٌ أَنۡ ءَامِنُواْ بِٱللَّهِ وَجَٰهِدُواْ مَعَ رَسُولِهِ ٱسۡتَـٔۡذَنَكَ أُوْلُواْ ٱلطَّوۡلِ مِنۡهُمُۥ وَقَالُواْ ذَرۡنَا نَكُن مَّعَ ٱلۡقَٰعِدِينَ
वे पीछे रहने वालों के साथ होने से संतुष्ट हो गए,
رَضُواْ بِأَن يَكُونُواْ مَعَ ٱلۡخَوَالِفِ
और उनके मर्मों पर छाप लगा दी गई, इसलिए वे समझते नहीं।
وَطُبِعَ عَلَىٰ قُلُوبِهِمُۥ فَهُمُۥ لَا يَفۡقَهُونَ
परंतु संदेशवाहक ने, और उन्होंने जिन्होंने उसके साथ विश्वास किया, अपनी संपत्ति और अपने स्व से संघर्ष किया,
لَٰكِنِ ٱلرَّسُولُ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مَعَهُۥ جَٰهَدُواْ بِأَمۡوَٰلِهِمُۥ وَأَنفُسِهِمُۥۚ
और यही वे हैं जिनके लिए अच्छाई है,
وَأُوْلَٰٓئِكَ لَهُمُ ٱلۡخَيۡرَٰتُۖ
और यही सफल होने वाले हैं।
وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُفۡلِحُونَ
ईश्वर ने उनके लिए ऐसे उद्यान तैयार किए हैं जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जहाँ वे सदा रहेंगे।
أَعَدَّ ٱللَّهُ لَهُمُۥ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ
यही विशाल विजय है।
ذَٰلِكَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ
और सफ़ाई देने वाले, प्रतिष्ठित जनों में से, आए कि उन्हें अनुमति दी जाए, जबकि जिन्होंने ईश्वर और उसके संदेशवाहक से झूठ बोला वे बैठे रहे।
وَجَآءَ ٱلۡمُعَذِّرُونَ مِنَ ٱلۡأَعۡرَابِ لِيُؤۡذَنَ لَهُمُۥ وَقَعَدَ ٱلَّذِينَ كَذَبُواْ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥۚ
उनमें से जिन्होंने नकारा, उन्हें पीड़ादायक दंड पहुँचेगा।
سَيُصِيبُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِنۡهُمُۥ عَذَابٌ أَلِيمٞ
दुर्बलों पर कोई बाधा नहीं, न रोगियों पर, न उन पर जो ख़र्च करने को कुछ नहीं पाते, बशर्ते वे ईश्वर और उसके संदेशवाहक के प्रति निष्कपट हों।
لَّيۡسَ عَلَى ٱلضُّعَفَآءِ وَلَا عَلَى ٱلۡمَرۡضَىٰ وَلَا عَلَى ٱلَّذِينَ لَا يَجِدُونَ مَا يُنفِقُونَ حَرَجٌ إِذَا نَصَحُواْ لِلَّهِ وَرَسُولِهِۦۚ
भलाई करने वालों के विरुद्ध कोई राह नहीं।
مَا عَلَى ٱلۡمُحۡسِنِينَ مِن سَبِيلٖۚ
और ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
وَٱللَّهُ غَفُورٞ رَّحِيمٞ
न उनके विरुद्ध जो तुम्हारे पास इसलिए आए कि तुम उन्हें सवारी दो, और जिनसे तुमने कहा: “मुझे तुम्हें सवारी देने को कुछ नहीं मिलता”,
وَلَا عَلَى ٱلَّذِينَ إِذَا مَا أَتَوۡكَ لِتَحۡمِلَهُمُۥ قُلۡتَ لَا أَجِدُ مَا أَحۡمِلُكُمُۥ عَلَيۡهِۦ
और जो इस हाल में चले गए कि उनकी आँखें आँसुओं से उमड़ रही थीं, दुखी कि उन्हें ख़र्च करने को कुछ नहीं मिला।
تَوَلَّواْ وَّأَعۡيُنُهُمُۥ تَفِيضُ مِنَ ٱلدَّمۡعِ حَزَنًا أَلَّا يَجِدُواْ مَا يُنفِقُونَ
राह केवल उन्हीं के विरुद्ध है जो धनी होते हुए तुमसे अनुमति माँगते हैं।
۞ إِنَّمَا ٱلسَّبِيلُ عَلَى ٱلَّذِينَ يَسۡتَـٔۡذِنُونَكَ وَهُمُۥ أَغۡنِيَآءُۚ
वे पीछे रहने वालों के साथ होने से संतुष्ट हो गए,
رَضُواْ بِأَن يَكُونُواْ مَعَ ٱلۡخَوَالِفِ
और ईश्वर ने उनके मर्मों पर छाप लगा दी, इसलिए वे जानते नहीं।
وَطَبَعَ ٱللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمُۥ فَهُمُۥ لَا يَعۡلَمُونَ
जब तुम उनकी ओर लौटोगे, तो वे तुम्हारे सामने सफ़ाई देंगे।
يَعۡتَذِرُونَ إِلَيۡكُمُۥ إِذَا رَجَعۡتُمُۥ إِلَيۡهِمُۥۚ
कहो: “सफ़ाई मत दो, हम तुम पर भरोसा नहीं करेंगे।
قُل لَّا تَعۡتَذِرُواْ لَن نُّؤۡمِنَ لَكُمُۥ
ईश्वर ने हमें तुम्हारी ख़बरों की सूचना पहले ही दे दी है।
قَدۡ نَبَّأَنَا ٱللَّهُ مِنۡ أَخۡبَارِكُمُۥۚ
और ईश्वर तुम्हारा कर्म देखेगा, और उसका संदेशवाहक भी,
وَسَيَرَى ٱللَّهُ عَمَلَكُمُۥ وَرَسُولُهُۥ
फिर तुम उसकी ओर वापस लाए जाओगे जो उसे जानता है जो इंद्रियों से परे है और जो साक्ष्य में है, और वह तुम्हें सूचित करेगा कि तुम क्या करते थे।”
ثُمَّ تُرَدُّونَ إِلَىٰ عَٰلِمِ ٱلۡغَيۡبِ وَٱلشَّهَٰدَةِ فَيُنَبِّئُكُمُۥ بِمَا كُنتُمُۥ تَعۡمَلُونَ
जब तुम उनकी ओर पलट जाओगे, तो वे तुम्हारे सामने ईश्वर की शपथ खाएँगे, ताकि तुम उनसे कतराओ।
سَيَحۡلِفُونَ بِٱللَّهِ لَكُمُۥ إِذَا ٱنقَلَبۡتُمُۥ إِلَيۡهِمُۥ لِتُعۡرِضُواْ عَنۡهُمُۥۖ
तो तुम उनसे कतराओ,
فَأَعۡرِضُواْ عَنۡهُمُۥۖ
क्योंकि वे एक गंदगी हैं,
إِنَّهُمُۥ رِجۡسٞۖ
और उनकी शरण जहन्नम होगी,
وَمَأۡوَىٰهُمُۥ جَهَنَّمُ
उसके प्रतिफल में जो वे कमाते थे।
جَزَآءَۢ بِمَا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ
वे तुम्हारे सामने शपथ खाते हैं, ताकि तुम उनसे संतुष्ट हो जाओ; परंतु यदि तुम उनसे संतुष्ट हो भी जाओ, तो ईश्वर अतिक्रमणकारियों की क़ौम से निश्चय ही संतुष्ट नहीं होगा।
يَحۡلِفُونَ لَكُمُۥ لِتَرۡضَوۡاْ عَنۡهُمُۥۖ فَإِن تَرۡضَوۡاْ عَنۡهُمُۥ فَإِنَّ ٱللَّهَ لَا يَرۡضَىٰ عَنِ ٱلۡقَوۡمِ ٱلۡفَٰسِقِينَ
प्रतिष्ठित जन नकार और पाखंड में और भी तीव्र हैं, और वे इसके अधिक योग्य हैं कि उन सीमाओं को न जानें जो ईश्वर ने अपने संदेशवाहक पर उतारी हैं।
ٱلۡأَعۡرَابُ أَشَدُّ كُفۡرٗا وَنِفَاقٗا وَأَجۡدَرُ أَلَّا يَعۡلَمُواْ حُدُودَ مَا أَنزَلَ ٱللَّهُ عَلَىٰ رَسُولِهِۦۗ
और ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٞ
और प्रतिष्ठित जनों में कुछ ऐसे हैं जो जो कुछ ख़र्च करते हैं उसे विवश हानि मानते हैं, और तुम्हारे लिए भाग्य के पलटावों की अपेक्षा रखते हैं।
وَمِنَ ٱلۡأَعۡرَابِ مَن يَتَّخِذُ مَا يُنفِقُ مَغۡرَمٗا وَيَتَرَبَّصُ بِكُمُ ٱلدَّوَآئِرَۚ
उन्हीं पर बुराई का चक्र है।
عَلَيۡهِمُۥ دَآئِرَةُ ٱلسُّوٓءِۗ
ईश्वर सुनने वाला, सर्वज्ञ है।
وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٞ
और प्रतिष्ठित जनों में कुछ ऐसे हैं जो ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास करते हैं, और जो कुछ ख़र्च करते हैं उसे ईश्वर के निकट पहुँचने का साधन और संदेशवाहक की मुलाक़ातों का साधन मानते हैं।
وَمِنَ ٱلۡأَعۡرَابِ مَن يُؤۡمِنُ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ وَيَتَّخِذُ مَا يُنفِقُ قُرُبَٰتٍ عِندَ ٱللَّهِ وَصَلَوَٰتِ ٱلرَّسُولِۚ
क्या ऐसा नहीं है: यह निश्चय ही उनके लिए निकटता है।
أَلَا إِنَّهَا قُرۡبَةٞ لَّهُمُۥۚ
ईश्वर उन्हें अपनी दया में प्रवेश कराएगा,
سَيُدۡخِلُهُمُ ٱللَّهُ فِي رَحۡمَتِهِۦۚ
क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ
और सबसे पहले के अग्रगामी, प्रवासियों और सहयोगियों में से, और वे जिन्होंने भलाई करते हुए उनका अनुसरण किया — ईश्वर उनसे संतुष्ट है, और वे उससे संतुष्ट हैं;
وَٱلسَّٰبِقُونَ ٱلۡأَوَّلُونَ مِنَ ٱلۡمُهَٰجِرِينَ وَٱلۡأَنصَارِ وَٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوهُمُۥ بِإِحۡسَٰنٖ رَّضِيَ ٱللَّهُ عَنۡهُمُۥ وَرَضُواْ عَنۡهُۥ
उसने उनके लिए ऐसे उद्यान तैयार किए हैं जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जहाँ वे सदा, चिरकाल तक रहेंगे।
وَأَعَدَّ لَهُمُۥ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَا أَبَدٗاۚ
यही विशाल विजय है।
ذَٰلِكَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ
और तुम्हारे आसपास के प्रतिष्ठित जनों में पाखंडी हैं,
وَمِمَّنۡ حَوۡلَكُمُۥ مِنَ ٱلۡأَعۡرَابِ مُنَٰفِقُونَۖ
और राजधानी वालों में से भी कुछ, पाखंड में अड़े हुए, जिन्हें तुम नहीं जानते:
وَمِنۡ أَهۡلِ ٱلۡمَدِينَةِ مَرَدُواْ عَلَى ٱلنِّفَاقِ لَا تَعۡلَمُهُمُۥۖ
हम ही उन्हें जानते हैं।
نَحۡنُ نَعۡلَمُهُمُۥۚ
हम उन्हें दो बार दंड देंगे, फिर वे एक विशाल दंड की ओर वापस लाए जाएँगे।
سَنُعَذِّبُهُمُۥ مَرَّتَيۡنِ ثُمَّ يُرَدُّونَ إِلَىٰ عَذَابٍ عَظِيمٖ
और कुछ अन्य हैं जिन्होंने अपने दोष स्वीकार किए, एक भले कर्म को दूसरे बुरे कर्म से मिलाकर; संभव है कि ईश्वर अनुकंपा के साथ उनकी ओर पलटे,
وَءَاخَرُونَ ٱعۡتَرَفُواْ بِذُنُوبِهِمُۥ خَلَطُواْ عَمَلٗا صَٰلِحٗا وَءَاخَرَ سَيِّئًا عَسَى ٱللَّهُ أَن يَتُوبَ عَلَيۡهِمُۥۚ
क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٌ
उनकी संपत्ति से ऐसा दान लो जो उन्हें स्वच्छ करे और बढ़ाए, और उनके साथ संपर्क में रहो,
خُذۡ مِنۡ أَمۡوَٰلِهِمُۥ صَدَقَةٗ تُطَهِّرُهُمُۥ وَتُزَكِّيهِمُۥ بِهَا وَصَلِّ عَلَيۡهِمُۥۖ
क्योंकि तुम्हारे संपर्क उनके लिए आश्वस्ति हैं।
إِنَّ صَلَوَٰتِكَ سَكَنٞ لَّهُمُۥۗ
ईश्वर सुनने वाला, सर्वज्ञ है।
وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
क्या वे नहीं जानते कि ईश्वर ही अपने आज्ञाकारियों का पश्चात्ताप स्वीकार करता है और दान ग्रहण करता है, और ईश्वर ही निरंतर पश्चात्ताप स्वीकार करने वाला, दयालु है?
أَلَمۡ يَعۡلَمُواْ أَنَّ ٱللَّهَ هُوَ يَقۡبَلُ ٱلتَّوۡبَةَ عَنۡ عِبَادِهِۦ وَيَأۡخُذُ ٱلصَّدَقَٰتِ وَأَنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ
और कहो: “कर्म करो; ईश्वर तुम्हारा कर्म देखेगा, और उसका संदेशवाहक और विश्वास करने वाले भी,
وَقُلِ ٱعۡمَلُواْ فَسَيَرَى ٱللَّهُ عَمَلَكُمُۥ وَرَسُولُهُۥ وَٱلۡمُؤۡمِنُونَۖ
और तुम उसकी ओर वापस लाए जाओगे जो उसे जानता है जो इंद्रियों से परे है और जो साक्ष्य में है, और वह तुम्हें सूचित करेगा कि तुम क्या करते थे।”
وَسَتُرَدُّونَ إِلَىٰ عَٰلِمِ ٱلۡغَيۡبِ وَٱلشَّهَٰدَةِ فَيُنَبِّئُكُمُۥ بِمَا كُنتُمُۥ تَعۡمَلُونَ
और कुछ अन्य ईश्वर के आदेश तक लंबित रखे गए हैं: या तो वह उन्हें दंड देगा, या अनुकंपा के साथ उनकी ओर पलटेगा।
وَءَاخَرُونَ مُرۡجَـُٔونَ لِأَمۡرِ ٱللَّهِ إِمَّا يُعَذِّبُهُمُۥ وَإِمَّا يَتُوبُ عَلَيۡهِمُۥۗ
और ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٞ
और जिन्होंने हानि पहुँचाने के लिए, नकार के कारण, विश्वास करने वालों के बीच फूट डालने के लिए, और उसके लिए निगरानी-चौकी के रूप में जिसने पहले ईश्वर और उसके संदेशवाहक से युद्ध छेड़ा था, माथा टेकने का एक स्थान बना लिया —
وَٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُواْ مَسۡجِدٗا ضِرَارٗا وَكُفۡرٗا وَتَفۡرِيقَۢا بَيۡنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ وَإِرۡصَادٗا لِّمَنۡ حَارَبَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ مِن قَبۡلُۚ
वे अवश्य शपथ खाएँगे: “हम तो केवल सबसे अच्छा चाहते थे”;
وَلَيَحۡلِفُنَّ إِنۡ أَرَدۡنَا إِلَّا ٱلۡحُسۡنَىٰۖ
और ईश्वर साक्ष्य देता है कि वे अवश्य झूठे हैं।
وَٱللَّهُ يَشۡهَدُ إِنَّهُمُۥ لَكَٰذِبُونَ
उसमें कभी बने न रहो।
لَا تَقُمۡ فِيهِۦ أَبَدٗاۚ
जो माथा टेकने का स्थान पहले ही दिन से सावधानी की नींव पर रखा गया है, वह इसका कहीं अधिक अधिकारी है कि तुम उसमें बने रहो।
لَّمَسۡجِدٌ أُسِّسَ عَلَى ٱلتَّقۡوَىٰ مِنۡ أَوَّلِ يَوۡمٍ أَحَقُّ أَن تَقُومَ فِيهِۦۚ
वहाँ ऐसे पुरुष हैं जिन्हें स्वच्छ होना प्रिय है।
فِيهِۦ رِجَالٞ يُحِبُّونَ أَن يَتَطَهَّرُواْۚ
ईश्वर स्वच्छ होने वालों से प्रेम करता है।
وَٱللَّهُ يُحِبُّ ٱلۡمُطَّهِّرِينَ
तो क्या वह जिसका निर्माण ईश्वर के प्रति सावधानी और उसकी प्रसन्नता की नींव पर रखा गया, बेहतर है, या वह जिसका निर्माण ढहने को तैयार एक खड्ड के किनारे पर रखा गया, जो फिर उसके साथ जहन्नम की आग में ढह जाता है?
أَفَمَنۡ أَسَّسَ بُنۡيَٰنَهُۥ عَلَىٰ تَقۡوَىٰ مِنَ ٱللَّهِ وَرِضۡوَٰنٍ خَيۡرٌ أَم مَّنۡ أَسَّسَ بُنۡيَٰنَهُۥ عَلَىٰ شَفَا جُرُفٍ هَارٖ فَٱنۡهَارَ بِهِۦ فِي نَارِ جَهَنَّمَۗ
और ईश्वर अन्यायी क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।
وَٱللَّهُ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلظَّٰلِمِينَ
जो निर्माण उन्होंने खड़ा किया वह उनके मर्मों में संदेह बना रहता है, जब तक कि उनके मर्म टुकड़े-टुकड़े न हो जाएँ।
لَا يَزَالُ بُنۡيَٰنُهُمُ ٱلَّذِي بَنَوۡاْ رِيبَةٗ فِي قُلُوبِهِمُۥ إِلَّا أَن تُقَطَّعَ قُلُوبُهُمُۥۗ
और ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
ईश्वर ने विश्वास करने वालों से उनका स्व और उनकी संपत्ति निश्चय ही ख़रीद लिया है, इसके बदले में कि उनके लिए उद्यान है।
۞ إِنَّ ٱللَّهَ ٱشۡتَرَىٰ مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ أَنفُسَهُمُۥ وَأَمۡوَٰلَهُمُۥ بِأَنَّ لَهُمُ ٱلۡجَنَّةَۚ
वे ईश्वर की राह में लड़ते हैं, मारते हैं और मारे जाते हैं — यह उसके ज़िम्मे एक वादा है, पूर्ण सत्य के साथ, तौरात, इंजील और इस पाठ में।
يُقَٰتِلُونَ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ فَيَقۡتُلُونَ وَيُقۡتَلُونَۖ وَعۡدًا عَلَيۡهِۦ حَقّٗا فِي ٱلتَّوۡرَىٰةِ وَٱلۡإِنجِيلِ وَٱلۡقُرَانِۚ
और अपनी संधि पूरी करने में ईश्वर से अधिक निष्ठावान कौन है?
وَمَنۡ أَوۡفَىٰ بِعَهۡدِهِۦ مِنَ ٱللَّهِۚ
तो उस बिक्री पर हर्षित हो जाओ जो तुमने उसके साथ की है,
فَٱسۡتَبۡشِرُواْ بِبَيۡعِكُمُ ٱلَّذِي بَايَعۡتُمُۥ بِهِۦۚ
और यही विशाल विजय है।
وَذَٰلِكَ هُوَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ
पलट आने वाले, आज्ञा का पालन करने वाले, प्रशंसा करने वाले, यात्रा करने वाले, घुटने टेकने वाले, माथा टेकने वाले, मान्य का आदेश देने वाले और अमान्य से मना करने वाले, और ईश्वर की सीमाओं की रक्षा करने वाले —
ٱلتَّٰٓئِبُونَ ٱلۡعَٰبِدُونَ ٱلۡحَٰمِدُونَ ٱلسَّٰٓئِحُونَ ٱلرَّٰكِعُونَ ٱلسَّٰجِدُونَ ٱلۡأٓمِرُونَ بِٱلۡمَعۡرُوفِ وَٱلنَّاهُونَ عَنِ ٱلۡمُنكَرِ وَٱلۡحَٰفِظُونَ لِحُدُودِ ٱللَّهِۗ
और विश्वास करने वालों को शुभ समाचार दो।
وَبَشِّرِ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ
सूचनादाता और विश्वास करने वालों के लिए उचित न था कि वे साझी ठहराने वालों के लिए क्षमा माँगें, चाहे वे निकट संबंधी हों, जब उन पर स्पष्ट हो गया कि वे भट्ठी वाले हैं।
مَا كَانَ لِلنَّبِيِّ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ أَن يَسۡتَغۡفِرُواْ لِلۡمُشۡرِكِينَ وَلَوۡ كَانُواْ أُوْلِي قُرۡبَىٰ مِنۢ بَعۡدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُۥ أَنَّهُمُۥ أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَحِيمِ
और इब्राहीम ने अपने पिता के लिए क्षमा केवल उस वादे के कारण माँगी जो उसने उससे किया था;
وَمَا كَانَ ٱسۡتِغۡفَارُ إِبۡرَٰهِيمَ لِأَبِيهِۦ إِلَّا عَن مَّوۡعِدَةٖ وَعَدَهَا إِيَّاهُۥ
परंतु जब उस पर स्पष्ट हो गया कि वह ईश्वर का शत्रु है, तो उसने स्वयं को उससे बरी घोषित कर दिया।
فَلَمَّا تَبَيَّنَ لَهُۥ أَنَّهُۥ عَدُوّٞ لِّلَّهِ تَبَرَّأَ مِنۡهُۥۚ
इब्राहीम अवश्य आहें भरने वाला, सहनशील था।
إِنَّ إِبۡرَٰهِيمَ لَأَوَّٰهٌ حَلِيمٞ
ईश्वर को शोभा नहीं देता कि वह किसी क़ौम को उसके मार्ग दिखाने के बाद भटकाए, जब तक वह उसे पहले स्पष्ट न कर दे कि किससे सावधान रहना है,
وَمَا كَانَ ٱللَّهُ لِيُضِلَّ قَوۡمَۢا بَعۡدَ إِذۡ هَدَىٰهُمُۥ حَتَّىٰ يُبَيِّنَ لَهُمُۥ مَا يَتَّقُونَۚ
क्योंकि ईश्वर हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।
إِنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٌ
आकाशों और धरती का राजत्व निश्चय ही ईश्वर का है;
إِنَّ ٱللَّهَ لَهُۥ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ
वह जीवन देता है और मृत्यु देता है।
يُحۡيِۦ وَيُمِيتُۚ
और ईश्वर के अतिरिक्त तुम्हारा न कोई आश्रयदाता है, न कोई सहायता।
وَمَا لَكُمُۥ مِن دُونِ ٱللَّهِ مِن وَلِيّٖ وَلَا نَصِيرٖ
ईश्वर निश्चय ही सूचनादाता, प्रवासियों और सहयोगियों की ओर अनुकंपा के साथ पलटा है, जिन्होंने कठिनाई की घड़ी में उसका अनुसरण किया, इसके बाद कि उनमें से एक भाग के मर्म लगभग टेढ़े हो गए थे; फिर वह अनुकंपा के साथ उनकी ओर पलटा — वह उनके प्रति करुणामय, दयालु है — और उन तीन की ओर भी जो पीछे छोड़े गए थे,
لَّقَد تَّابَ ٱللَّهُ عَلَى ٱلنَّبِيِّ وَٱلۡمُهَٰجِرِينَ وَٱلۡأَنصَارِ ٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوهُۥ فِي سَاعَةِ ٱلۡعُسۡرَةِ مِنۢ بَعۡدِ مَا كَادَ تَزِيغُ قُلُوبُ فَرِيقٖ مِّنۡهُمُۥ ثُمَّ تَابَ عَلَيۡهِمُۥۚ إِنَّهُۥ بِهِمُۥ رَءُوفٞ رَّحِيمٞ وَعَلَى ٱلثَّلَٰثَةِ ٱلَّذِينَ خُلِّفُواْ
यहाँ तक कि धरती अपने विस्तार के बावजूद उनके लिए तंग हो गई, उनका स्व स्वयं भी उनके लिए तंग हो गया, और उन्होंने अनुमान लगाया कि ईश्वर से पीछे हटने की कोई जगह नहीं सिवा उसी की ओर — तब वह अनुकंपा के साथ उनकी ओर पलटा, ताकि वे पलट आएँ,
حَتَّىٰ إِذَا ضَاقَتۡ عَلَيۡهِمُ ٱلۡأَرۡضُ بِمَا رَحُبَتۡ وَضَاقَتۡ عَلَيۡهِمُۥ أَنفُسُهُمُۥ وَظَنُّواْ أَن لَّا مَلۡجَأَ مِنَ ٱللَّهِ إِلَّا إِلَيۡهِۦ ثُمَّ تَابَ عَلَيۡهِمُۥ لِيَتُوبُواْۚ
क्योंकि ईश्वर ही निरंतर पश्चात्ताप स्वीकार करने वाला, दयालु है।
إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ
हे विश्वास करने वालो! ईश्वर के प्रति सावधान रहो, और सच्चों के साथ रहो।
يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَكُونُواْ مَعَ ٱلصَّٰدِقِينَ
राजधानी वालों के लिए, और उनके आसपास के प्रतिष्ठित जनों के लिए, उचित न था कि वे ईश्वर के संदेशवाहक से दूर पीछे रह जाएँ, या उसके स्व की अपेक्षा अपने ही स्व को चुनें।
مَا كَانَ لِأَهۡلِ ٱلۡمَدِينَةِ وَمَنۡ حَوۡلَهُمُۥ مِنَ ٱلۡأَعۡرَابِ أَن يَتَخَلَّفُواْ عَن رَّسُولِ ٱللَّهِ وَلَا يَرۡغَبُواْ بِأَنفُسِهِمُۥ عَن نَّفۡسِهِۦۚ
यह इसलिए कि ईश्वर की राह में उन्हें कोई प्यास, कोई थकान, कोई अभाव नहीं पहुँचता, वे कोई ऐसा स्थान नहीं रौंदते जो नकारने वालों को चिढ़ाए, और शत्रु पर कोई प्राप्ति उन्हें नहीं होती, बिना इसके कि उसके बदले उनके लिए एक भला कर्म लिख दिया जाए;
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُۥ لَا يُصِيبُهُمُۥ ظَمَأٞ وَلَا نَصَبٞ وَلَا مَخۡمَصَةٞ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ وَلَا يَطَـُٔونَ مَوۡطِئٗا يَغِيظُ ٱلۡكُفَّارَ وَلَا يَنَالُونَ مِنۡ عَدُوّٖ نَّيۡلًا إِلَّا كُتِبَ لَهُمُۥ بِهِۦ عَمَلٞ صَٰلِحٌۚ
क्योंकि ईश्वर भलाई करने वालों का पुरस्कार नष्ट नहीं होने देता।
إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُضِيعُ أَجۡرَ ٱلۡمُحۡسِنِينَ
और वे कोई ख़र्च नहीं करते, छोटा या बड़ा, वे किसी घाटी का आवागमन विच्छिन्न नहीं करते, बिना इसके कि वह उनके लिए लिख दिया जाए,
وَلَا يُنفِقُونَ نَفَقَةٗ صَغِيرَةٗ وَلَا كَبِيرَةٗ وَلَا يَقۡطَعُونَ وَادِيًا إِلَّا كُتِبَ لَهُمُۥ
ताकि ईश्वर उन्हें, जो कुछ वे करते थे उसमें से सबसे सुंदर के अनुसार, प्रतिफल दे।
لِيَجۡزِيَهُمُ ٱللَّهُ أَحۡسَنَ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ
विश्वास करने वालों के लिए उचित न था कि सब मिलकर लामबंद हो जाएँ।
۞ وَمَا كَانَ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ لِيَنفِرُواْ كَآفَّةٗۚ
तो ऐसा क्यों न हुआ कि उनके प्रत्येक भाग में से एक समूह लामबंद होता, ताकि वे विधान में जो समझते हैं उसे गहराई से जानें, और अपनी क़ौम को चेतावनी दें जब वे उनकी ओर लौटें, शायद वे सजग रहें?
فَلَوۡلَا نَفَرَ مِن كُلِّ فِرۡقَةٖ مِّنۡهُمُۥ طَآئِفَةٞ لِّيَتَفَقَّهُواْ فِي ٱلدِّينِ وَلِيُنذِرُواْ قَوۡمَهُمُۥ إِذَا رَجَعُواْ إِلَيۡهِمُۥ لَعَلَّهُمُۥ يَحۡذَرُونَ
हे विश्वास करने वालो! नकारने वालों में से जो तुम्हारे निकट हैं उनसे लड़ो, और वे तुममें दृढ़ता पाएँ।
يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ قَٰتِلُواْ ٱلَّذِينَ يَلُونَكُمُۥ مِنَ ٱلۡكُفَّارِ وَلۡيَجِدُواْ فِيكُمُۥ غِلۡظَةٗۚ
और जान लो कि ईश्वर सावधानी बरतने वालों के साथ है।
وَٱعۡلَمُواْ أَنَّ ٱللَّهَ مَعَ ٱلۡمُتَّقِينَ
और जब कोई सूरा उतारी गई, तो उनमें से कोई कहता है: “इस सूरा ने तुममें से किसे विश्वास में बढ़ाया?”
وَإِذَا مَا أُنزِلَتۡ سُورَةٞ فَمِنۡهُمُۥ مَن يَقُولُ أَيُّكُمُۥ زَادَتۡهُۥ هَٰذِهِۦ إِيمَٰنٗاۚ
जहाँ तक विश्वास करने वालों का प्रश्न है, उसने उन्हें विश्वास में बढ़ाया, और वे उससे हर्षित होते हैं।
فَأَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ فَزَادَتۡهُمُۥ إِيمَٰنٗا وَهُمُۥ يَسۡتَبۡشِرُونَ
परंतु जिनके मर्मों में रोग है, उसने उनकी गंदगी पर एक और गंदगी जोड़ दी, और वे नकारते हुए मरे।
وَأَمَّا ٱلَّذِينَ فِي قُلُوبِهِمُۥ مَرَضٞ فَزَادَتۡهُمُۥ رِجۡسًا إِلَىٰ رِجۡسِهِمُۥ وَمَاتُواْ وَهُمُۥ كَٰفِرُونَ
क्या वे नहीं देखते कि उन्हें हर साल एक या दो बार परीक्षा में डाला जाता है? फिर वे पलट नहीं आते, और स्मरण नहीं करते।
أَوَلَا يَرَوۡنَ أَنَّهُمُۥ يُفۡتَنُونَ فِي كُلِّ عَامٖ مَّرَّةً أَوۡ مَرَّتَيۡنِ ثُمَّ لَا يَتُوبُونَ وَلَا هُمُۥ يَذَّكَّرُونَ
और जब कोई सूरा उतारी गई, तो वे एक-दूसरे पर नज़र डालते हैं: “क्या कोई तुम्हें देख रहा है?” फिर वे खिसक जाते हैं।
وَإِذَا مَا أُنزِلَتۡ سُورَةٞ نَّظَرَ بَعۡضُهُمُۥ إِلَىٰ بَعۡضٍ هَلۡ يَرَىٰكُمُۥ مِنۡ أَحَدٖ ثُمَّ ٱنصَرَفُواْۚ
ईश्वर ने उनके मर्मों को फेर दिया, क्योंकि वे ऐसी क़ौम हैं जो समझती नहीं।
صَرَفَ ٱللَّهُ قُلُوبَهُمُۥ بِأَنَّهُمُۥ قَوۡمٞ لَّا يَفۡقَهُونَ
तुम्हारे पास निश्चय ही एक संदेशवाहक आया है, तुम्हीं में से; तुम्हारा कष्ट में पड़ना उसे भारी लगता है,
لَقَدۡ جَآءَكُمُۥ رَسُولٞ مِّنۡ أَنفُسِكُمُۥ عَزِيزٌ عَلَيۡهِۦ مَا عَنِتُّمُۥ
वह तुम्हारी चिंता करने वाला है,
حَرِيصٌ عَلَيۡكُمُۥ
करुणामय है, विश्वास करने वालों के प्रति दयालु है।
بِٱلۡمُؤۡمِنِينَ رَءُوفٞ رَّحِيمٞ
यदि वे पीठ फेर लें, तो कहो: “ईश्वर मेरे लिए पर्याप्त है;
فَإِن تَوَلَّوۡاْ فَقُلۡ حَسۡبِيَ ٱللَّهُ
उसके सिवा कोई देवता नहीं;
لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ
मैं उसी को मुख़्तार बनाता हूँ,
عَلَيۡهِۦ تَوَكَّلۡتُۖ
और वह विशाल भवन का अभिभावक है।”
وَهُوَ رَبُّ ٱلۡعَرۡشِ ٱلۡعَظِيمِ