محمد
Muhammad
Locks Upon the Cores
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। जिन्होंने नकारा और ईश्वर की राह रोकी, वह उनके कर्म भटका देता है।
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَصَدُّواْ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ أَضَلَّ أَعۡمَٰلَهُمُۥ
और जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, और उस पर विश्वास किया जो मुहम्मद पर उतारा गया — और वही उनके अभिभावक की ओर से आया सत्य है — उसने उनके बुरे कर्म ढक दिए और उनकी दशा भली बना दी।
وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ وَءَامَنُواْ بِمَا نُزِّلَ عَلَىٰ مُحَمَّدٖ وَهُوَ ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّهِمُۥ كَفَّرَ عَنۡهُمُۥ سَيِّـَٔاتِهِمُۥ وَأَصۡلَحَ بَالَهُمُۥ
यह इसलिए कि जिन्होंने नकारा वे असत्य का अनुसरण करते हैं, जबकि जो विश्वास करते हैं वे अपने अभिभावक की ओर से आए सत्य का अनुसरण करते हैं।
ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ ٱتَّبَعُواْ ٱلۡبَٰطِلَ وَأَنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱتَّبَعُواْ ٱلۡحَقَّ مِن رَّبِّهِمُۥۚ
इस प्रकार ईश्वर लोगों के लिए उनके उदाहरणों को कई गुना करता है।
كَذَٰلِكَ يَضۡرِبُ ٱللَّهُ لِلنَّاسِ أَمۡثَٰلَهُمُۥ
तो जब तुम नकारने वालों से मिलो, तो बंदियों को कई गुना करो।
فَإِذَا لَقِيتُمُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ فَضَرۡبَ ٱلرِّقَابِ
फिर जब तुम उन्हें पूरी तरह वश में कर चुको, तो बंधनों को मज़बूती से कस दो,
حَتَّىٰ إِذَا أَثۡخَنتُمُوهُمُۥ فَشُدُّواْ ٱلۡوَثَاقَ
फिर या तो कृपा, या बंदियों का आदान-प्रदान, यहाँ तक कि युद्ध अपना बोझ उतार दे।
فَإِمَّا مَنَّۢا بَعۡدُ وَإِمَّا فِدَآءً حَتَّىٰ تَضَعَ ٱلۡحَرۡبُ أَوۡزَارَهَا
यही बात है। और यदि ईश्वर की मर्ज़ी होती, तो वह स्वयं उनके विरुद्ध अपनी सहायता कर लेता,
ذَٰلِكَۖ وَلَوۡ يَشَآءُ ٱللَّهُ لَٱنتَصَرَ مِنۡهُمُۥ
परंतु ताकि वह तुम्हें एक-दूसरे के द्वारा परखे।
وَلَٰكِن لِّيَبۡلُوَاْ بَعۡضَكُمُۥ بِبَعۡضٖۗ
और जिन्होंने ईश्वर की राह में लड़ाई की, उनके कर्म वह कदापि नहीं भटकाएगा।
وَٱلَّذِينَ قَٰتَلُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ فَلَن يُضِلَّ أَعۡمَٰلَهُمُۥ
वह उन्हें मार्ग दिखाएगा, उनकी दशा भली बनाएगा, और उन्हें उस उद्यान में प्रवेश कराएगा जिससे उसने उन्हें परिचित करा दिया है।
سَيَهۡدِيهِمُۥ وَيُصۡلِحُ بَالَهُمُۥ وَيُدۡخِلُهُمُ ٱلۡجَنَّةَ عَرَّفَهَا لَهُمُۥ
हे विश्वास करने वालो! यदि तुम ईश्वर की सहायता करोगे, तो वह तुम्हारी सहायता करेगा और तुम्हारे क़दम जमा देगा।
يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ إِن تَنصُرُواْ ٱللَّهَ يَنصُرۡكُمُۥ وَيُثَبِّتۡ أَقۡدَامَكُمُۥ
और जिन्होंने नकारा, उनके लिए पतन है, और वह उनके कर्म भटका देता है।
وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ فَتَعۡسٗا لَّهُمُۥ وَأَضَلَّ أَعۡمَٰلَهُمُۥ
यह इसलिए कि उन्होंने उससे अरुचि रखी जो ईश्वर ने उतारा, तो उसने उनके कर्म निरस्त कर दिए।
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُۥ كَرِهُواْ مَا أَنزَلَ ٱللَّهُ فَأَحۡبَطَ أَعۡمَٰلَهُمُۥ
क्या उन्होंने धरती में घूमकर नज़र नहीं डाली कि उनसे पहले वालों का परिणाम कैसा रहा? ईश्वर ने उन्हें नष्ट कर दिया,
۞ أَفَلَمۡ يَسِيرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَيَنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمُۥۖ دَمَّرَ ٱللَّهُ عَلَيۡهِمُۥۖ
और नकारने वालों के लिए भी ऐसा ही परिणाम है।
وَلِلۡكَٰفِرِينَ أَمۡثَٰلُهَا
यह इसलिए कि ईश्वर विश्वास करने वालों का हिमायती है, और नकारने वालों का कोई हिमायती नहीं।
ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ مَوۡلَى ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَأَنَّ ٱلۡكَٰفِرِينَ لَا مَوۡلَىٰ لَهُمُۥ
निश्चय ही, ईश्वर उन्हें जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, ऐसे उद्यानों में प्रवेश कराता है जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं।
إِنَّ ٱللَّهَ يُدۡخِلُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُۖ
और जिन्होंने नकारा, वे उपभोग करते हैं और ऐसे खाते हैं जैसे पशुधन खाता है, और आग उनका निवास होगी।
وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ يَتَمَتَّعُونَ وَيَأۡكُلُونَ كَمَا تَأۡكُلُ ٱلۡأَنۡعَٰمُ وَٱلنَّارُ مَثۡوٗى لَّهُمُۥ
और कितनी ही बस्तियाँ, जो तुम्हारी उस बस्ती से बल में बढ़कर थीं जिसने तुम्हें निकाल दिया, हमने उन्हें नष्ट कर दिया, और उनके लिए कोई सहायता न थी।
وَكَآئِن مِّن قَرۡيَةٍ هِيَ أَشَدُّ قُوَّةٗ مِّن قَرۡيَتِكَ ٱلَّتِي أَخۡرَجَتۡكَ أَهۡلَكۡنَٰهُمُۥ فَلَا نَاصِرَ لَهُمُۥ
क्या वह जो अपने अभिभावक की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण पर खड़ा है, उसके समान है जिसके लिए उसके कर्म की बुराई सुशोभित कर दी गई, और जो अपनी भावनाओं का अनुसरण करते हैं?
أَفَمَن كَانَ عَلَىٰ بَيِّنَةٖ مِّن رَّبِّهِۦ كَمَن زُيِّنَ لَهُۥ سُوٓءُ عَمَلِهِۦ وَٱتَّبَعُواْ أَهۡوَآءَهُمُۥ
उस उद्यान का उदाहरण जिसका सावधानी बरतने वालों से वादा किया गया है: उसमें ऐसे पानी की नदियाँ हैं जो सड़ता नहीं, ऐसे दूध की नदियाँ हैं जिसका स्वाद बदलता नहीं, पीने वालों के लिए स्वादिष्ट मदिरा की नदियाँ हैं, और शुद्ध किए हुए शहद की नदियाँ हैं,
مَثَلُ ٱلۡجَنَّةِ ٱلَّتِي وُعِدَ ٱلۡمُتَّقُونَۖ فِيهَا أَنۡهَٰرٞ مِّن مَّآءٍ غَيۡرِ أَسِنٖ وَأَنۡهَٰرٞ مِّن لَّبَنٖ لَّمۡ يَتَغَيَّرۡ طَعۡمُهُۥ وَأَنۡهَٰرٞ مِّنۡ خَمۡرٖ لَّذَّةٖ لِّلشَّٰرِبِينَ وَأَنۡهَٰرٞ مِّنۡ عَسَلٖ مُّصَفّٗىۖ
और उनके लिए उसमें हर प्रकार के फल हैं, और उनके अभिभावक की ओर से क्षमा भी — क्या वे उनके समान हैं जो आग में सदा रहते हैं, जिन्हें खौलता पानी पिलाया जाता है जो उनकी आँतों को टुकड़े-टुकड़े कर देता है?
وَلَهُمُۥ فِيهَا مِن كُلِّ ٱلثَّمَرَٰتِ وَمَغۡفِرَةٞ مِّن رَّبِّهِمُۥۖ كَمَنۡ هُوَ خَٰلِدٞ فِي ٱلنَّارِ وَسُقُواْ مَآءً حَمِيمٗا فَقَطَّعَ أَمۡعَآءَهُمُۥ
और उनमें से कुछ तुम्हारी बात सुनते हैं, यहाँ तक कि जब वे तुम्हारे पास से निकल जाते हैं, तो जिन्हें ज्ञान दिया गया है उनसे कहते हैं: “अभी उसने क्या कहा?”
وَمِنۡهُمُۥ مَن يَسۡتَمِعُ إِلَيۡكَ حَتَّىٰ إِذَا خَرَجُواْ مِنۡ عِندِكَ قَالُواْ لِلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡعِلۡمَ مَاذَا قَالَ ءَانِفًاۚ
यही वे हैं जिनके मर्मों पर ईश्वर ने मुहर लगा दी है, और जो अपनी भावनाओं का अनुसरण करते हैं।
أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ طَبَعَ ٱللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمُۥ وَٱتَّبَعُواْ أَهۡوَآءَهُمُۥ
और जिन्होंने मार्गदर्शन पाया, उनका मार्गदर्शन वह बढ़ा देता है और उन्हें उनकी सावधानी देता है।
وَٱلَّذِينَ ٱهۡتَدَوۡاْ زَادَهُمُۥ هُدٗى وَءَاتَىٰهُمُۥ تَقۡوَىٰهُمُۥ
तो क्या वे केवल उस घड़ी की प्रतीक्षा करते हैं कि वह उन पर अचानक आ पड़े? जबकि उसके पूर्व-लक्षण आ चुके हैं।
فَهَلۡ يَنظُرُونَ إِلَّا ٱلسَّاعَةَ أَن تَأۡتِيَهُمُۥ بَغۡتَةٗۖ فَقَدۡ جَآءَ ا۬شۡرَاطُهَاۚ
तो जब वह उनके पास आ जाएगी, तब उन्हें अपना स्मरण कैसे होगा?
فَأَنَّىٰ لَهُمُۥ إِذَا جَآءَتۡهُمُۥ ذِكۡرَىٰهُمُۥ
अतः जान लो कि ईश्वर के सिवा कोई देवता नहीं, और अपने दोष के लिए क्षमा माँगो, तथा विश्वास करने वाले पुरुषों और विश्वास करने वाली स्त्रियों के लिए भी।
فَٱعۡلَمۡ أَنَّهُۥ لَا إِلَٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ وَٱسۡتَغۡفِرۡ لِذَنۢبِكَ وَلِلۡمُؤۡمِنِينَ وَٱلۡمُؤۡمِنَٰتِۗ
और ईश्वर तुम्हारी आवाजाही और तुम्हारे निवास को जानता है।
وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ مُتَقَلَّبَكُمُۥ وَمَثۡوَىٰكُمُۥ
और जो विश्वास करते हैं वे कहते हैं: “कोई सूरा क्यों नहीं उतारी गई?”
وَيَقُولُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَوۡلَا نُزِّلَتۡ سُورَةٞۖ
फिर जब एक एकार्थ सूरा उतारी गई और उसमें लड़ाई का उल्लेख हुआ, तो तुम उन्हें देखते हो जिनके मर्म में रोग है, कि वे तुम पर उस व्यक्ति की-सी नज़र डालते हैं जिस पर मृत्यु के कारण मूर्छा छा रही हो।
فَإِذَا أُنزِلَتۡ سُورَةٞ مُّحۡكَمَةٞ وَذُكِرَ فِيهَا ٱلۡقِتَالُ رَأَيۡتَ ٱلَّذِينَ فِي قُلُوبِهِمُۥ مَرَضٞ يَنظُرُونَ إِلَيۡكَ نَظَرَ ٱلۡمَغۡشِيِّ عَلَيۡهِۦ مِنَ ٱلۡمَوۡتِۖ
तो उनके लिए अधिक निकट यही है:
فَأَوۡلَىٰ لَهُمُۥ
बात मानना और मान्य कथन।
طَاعَةٞ وَقَوۡلٞ مَّعۡرُوفٞۚ
फिर जब मामला पक्का हो गया, तब यदि वे ईश्वर के प्रति सच्चे होते, तो यह उनके लिए बेहतर होता।
فَإِذَا عَزَمَ ٱلۡأَمۡرُ فَلَوۡ صَدَقُواْ ٱللَّهَ لَكَانَ خَيۡرٗا لَّهُمُۥ
तो क्या संभव है कि यदि तुम पीठ फेर लो, तो तुम धरती में बिगाड़ फैलाओ और अपनी रिश्तेदारी को बँटे हुए कुलों में टुकड़े-टुकड़े कर दो?
فَهَلۡ عَسَيۡتُمُۥ إِن تَوَلَّيۡتُمُۥ أَن تُفۡسِدُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَتُقَطِّعُواْ أَرۡحَامَكُمُۥ
यही वे हैं जिन्हें ईश्वर ने धिक्कारा; उसने उन्हें बहरा कर दिया और उनकी दृष्टियाँ अंधी कर दीं।
أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ لَعَنَهُمُ ٱللَّهُ فَأَصَمَّهُمُۥ وَأَعۡمَىٰ أَبۡصَٰرَهُمُۥ
तो क्या वे पाठ पर मनन नहीं करते, या उनके मर्मों पर ताले लगे हैं?
أَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ ٱلۡقُرَانَ أَمۡ عَلَىٰ قُلُوبٍ أَقۡفَالُهَا
जो मार्गदर्शन उनके लिए स्पष्ट हो जाने के बाद पीछे हट गए — बहकाने वाले ने ही उन्हें यह सुझाया,
إِنَّ ٱلَّذِينَ ٱرۡتَدُّواْ عَلَىٰ أَدۡبَٰرِهِمُۥ مِنۢ بَعۡدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُ ٱلۡهُدَى ٱلشَّيۡطَٰنُ سَوَّلَ لَهُمُۥ
और उन्हें ढील दी गई।
وَأَمۡلَىٰ لَهُمُۥ
यह इसलिए कि उन्होंने उनसे कहा जो उससे अरुचि रखते हैं जो ईश्वर ने उतारा: “हम मामले के कुछ भाग में तुम्हारी बात मानेंगे।”
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُۥ قَالُواْ لِلَّذِينَ كَرِهُواْ مَا نَزَّلَ ٱللَّهُ سَنُطِيعُكُمُۥ فِي بَعۡضِ ٱلۡأَمۡرِۖ
और ईश्वर जानता है जो वे गुप्त रखते हैं।
وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ أَسۡرَارَهُمُۥ
तो तब क्या होगा जब अभिकर्ता उन्हें निष्ठापूर्वक सँभालेंगे, उन्हें अपनी पकड़ में कई गुना करते हुए, चाहे वे उनके सामने हों या उनकी ओर पीठ किए हों?
فَكَيۡفَ إِذَا تَوَفَّتۡهُمُ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ يَضۡرِبُونَ وُجُوهَهُمُۥ وَأَدۡبَٰرَهُمُۥ
यह इसलिए कि उन्होंने उसका अनुसरण किया जिसने ईश्वर को रुष्ट किया, और उसकी प्रसन्नता से अरुचि रखी; तब उसने उनके कर्म निरस्त कर दिए।
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُ ٱتَّبَعُواْ مَا أَسۡخَطَ ٱللَّهَ وَكَرِهُواْ رِضۡوَٰنَهُۥ فَأَحۡبَطَ أَعۡمَٰلَهُمُۥ
या फिर वे जिनके मर्म में रोग है, क्या यह समझते हैं कि ईश्वर उनके द्वेष को कभी बाहर नहीं निकालेगा?
أَمۡ حَسِبَ ٱلَّذِينَ فِي قُلُوبِهِمُۥ مَرَضٌ أَن لَّن يُخۡرِجَ ٱللَّهُ أَضۡغَٰنَهُمُۥ
और यदि हमारी मर्ज़ी होती, तो हम तुम्हें उन्हें दिखा देते, और तुम उन्हें उनके निशानों से पहचान लेते।
وَلَوۡ نَشَآءُ لَأَرَيۡنَٰكَهُمُۥ فَلَعَرَفۡتَهُمُۥ بِسِيمَٰهُمُۥۚ
और तुम उन्हें उनके कथन के लहजे से अवश्य पहचान लोगे।
وَلَتَعۡرِفَنَّهُمُۥ فِي لَحۡنِ ٱلۡقَوۡلِۚ
और ईश्वर तुम्हारे कर्मों को जानता है।
وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ أَعۡمَٰلَكُمُۥ
और हम तुम्हें अवश्य परखेंगे, यहाँ तक कि हम तुममें से संघर्ष करने वालों और धैर्य रखने वालों को अलग कर दें, और हम तुम्हारी ख़बरों को परखेंगे।
وَلَنَبۡلُوَنَّكُمُۥ حَتَّىٰ نَعۡلَمَ ٱلۡمُجَٰهِدِينَ مِنكُمُۥ وَٱلصَّٰبِرِينَ وَنَبۡلُوَاْ أَخۡبَارَكُمُۥ
जिन्होंने नकारा, ईश्वर की राह रोकी, और मार्गदर्शन उनके लिए स्पष्ट हो जाने के बाद संदेशवाहक के विरोध में खड़े हुए, वे ईश्वर को कुछ हानि नहीं पहुँचाएँगे,
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَصَدُّواْ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَشَآقُّواْ ٱلرَّسُولَ مِنۢ بَعۡدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُ ٱلۡهُدَىٰ لَن يَضُرُّواْ ٱللَّهَ شَيۡـٔٗا
और वह उनके कर्म निरस्त कर देगा।
وَسَيُحۡبِطُ أَعۡمَٰلَهُمُۥ
हे विश्वास करने वालो! ईश्वर की बात मानो और संदेशवाहक की बात मानो, और अपने कर्म व्यर्थ न करो,
۞ يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ أَطِيعُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُواْ ٱلرَّسُولَ وَلَا تُبۡطِلُواْ أَعۡمَٰلَكُمُۥ
क्योंकि जिन्होंने नकारा, ईश्वर की राह रोकी, फिर इस दशा में मरे कि वे नकारने वाले थे, उन्हें ईश्वर कभी क्षमा नहीं करेगा।
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَصَدُّواْ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ ثُمَّ مَاتُواْ وَهُمُۥ كُفَّارٞ فَلَن يَغۡفِرَ ٱللَّهُ لَهُمُۥ
अतः ढीले मत पड़ो और शांति के लिए मत पुकारो, जबकि तुम ही सबसे ऊपर हो और ईश्वर तुम्हारे साथ है,
فَلَا تَهِنُواْ وَتَدۡعُواْ إِلَى ٱلسَّلۡمِ وَأَنتُمُ ٱلۡأَعۡلَوۡنَ وَٱللَّهُ مَعَكُمُۥ
और वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों से कभी वंचित नहीं करेगा।
وَلَن يَتِرَكُمُۥ أَعۡمَٰلَكُمُۥ
इहलोक का जीवन तो केवल खेल और बहलावा है।
إِنَّمَا ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَا لَعِبٞ وَلَهۡوٞۚ
और यदि तुम विश्वास करो और सावधान रहो, तो वह तुम्हें तुम्हारे पुरस्कार देगा और तुमसे तुम्हारी संपत्ति नहीं माँगेगा।
وَإِن تُؤۡمِنُواْ وَتَتَّقُواْ يُؤۡتِكُمُۥ أُجُورَكُمُۥ وَلَا يَسۡـَٔلۡكُمُۥ أَمۡوَٰلَكُمُۥ
यदि वह उन्हें तुमसे आग्रह के साथ माँगता, तो तुम कंजूस बन जाते, और वह तुम्हारे द्वेष को बाहर निकाल देता।
إِن يَسۡـَٔلۡكُمُوهَا فَيُحۡفِكُمُۥ تَبۡخَلُواْ وَيُخۡرِجۡ أَضۡغَٰنَكُمُۥ
तुम वही हो जिन्हें ईश्वर की राह में ख़र्च करने के लिए बुलाया जाता है; फिर भी तुममें कुछ ऐसे हैं जो कंजूसी करते हैं,
هَأَنتُمُۥ هَٰؤُلَآءِ تُدۡعَوۡنَ لِتُنفِقُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ فَمِنكُمُۥ مَن يَبۡخَلُۖ
और जो कंजूसी करता है वह केवल अपने ही प्रति कंजूसी करता है।
وَمَن يَبۡخَلۡ فَإِنَّمَا يَبۡخَلُ عَن نَّفۡسِهِۦۚ
और ईश्वर धनी है,
وَٱللَّهُ ٱلۡغَنِيُّ
जबकि तुम निर्धन हो।
وَأَنتُمُ ٱلۡفُقَرَآءُۚ
और यदि तुम पीठ फेर लोगे, तो वह तुम्हारी जगह एक और क़ौम को ले आएगा जो तुम्हारे जैसी नहीं होगी।
وَإِن تَتَوَلَّوۡاْ يَسۡتَبۡدِلۡ قَوۡمًا غَيۡرَكُمُۥ ثُمَّ لَا يَكُونُواْ أَمۡثَٰلَكُمُۥ