يوسف
Yusuf
The Finest of Accounts
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। अलिफ़. लाम. रा.
بِسۡمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحۡمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ الٓر۪ۚ
ये स्पष्ट ग्रंथ के संकेत हैं।
تِلۡكَ ءَايَٰتُ اُ۬لۡكِتَٰبِ اِ۬لۡمُبِينِ
हमने इसे त्रुटिहीन पाठ के रूप में उतारा, शायद तुम बुद्धि से काम लो।
إِنَّا أَنزَلۡنَٰهُ قُرۡءَٰنًا عَرَبِيّٗا لَّعَلَّكُمۡ تَعۡقِلُون
हम तुम्हें सबसे सुंदर कथा बताते हैं, इस पाठ को तुम पर प्रकट करते हुए, जबकि तुम इससे पहले अवश्य लापरवाहों की गिनती में थे।
نَّحۡن نَّقُصُّ عَلَيۡكَ أَحۡسَنَ اَ۬لۡقَصَصِ بِمَا أَوۡحَيۡنَا إِلَيۡكَ هَٰذَا اَ۬لۡقُرۡءَانَ وَإِن كُنتَ مِن قَبۡلِهِۦ لَمِنَ اَ۬لۡغَٰفِلِينَ
जब यूसुफ़ ने अपने पिता से कहा: “हे मेरे पिता! मैंने ग्यारह तारे देखे, और सूर्य तथा चंद्रमा को भी,
إِذۡ قَالَ يُوسُفُ لِأَبِيهِ يَٰأَبَتِ إِنِّي رَأَيۡتُ أَحَدَ عَشَرَ كَوۡكَبٗا وَاَلشَّمۡسَ وَاَلۡقَمَر
मैंने उन्हें अपने सामने माथा टेकते देखा।”
رَّأَيۡتُهُمۡ لِي سَٰجِدِينَ
उसने कहा: “हे मेरे नन्हे! अपना स्वप्न अपने भाइयों को मत बताना, वरना वे तुम्हारे विरुद्ध कोई चाल चलेंगे,
قَالَ يَٰبُنَيِّ لَا تَقۡصُصۡ رُۥيۭاكَ عَلَىٰ إِخۡوَتِكَ فَيَكِيدُواْ لَك كَّيۡدًاۖ
क्योंकि बहकाने वाला मनुष्य का स्पष्ट शत्रु है।
إِنَّ اَ۬لشَّيۡطَٰنَ لِلۡإِنسَٰنِ عَدُوّٞ مُّبِينٞ
और इसी प्रकार तुम्हारा अभिभावक तुम्हें चुनेगा और तुम्हें घटनाओं का पूर्वकथन सिखाएगा,
وَكَذَٰلِكَ يَجۡتَبِيكَ رَبُّكَ وَيُعَلِّمُكَ مِن تَاوِيلِ اِ۬لۡأَحَادِيثِ
और वह तुम पर और याक़ूब के कुल पर अपना उपकार पूरा करेगा, जैसे उसने इससे पहले तुम्हारे दो पूर्वजों, इब्राहीम और इसहाक़ पर उसे पूरा किया;
وَيُتِمُّ نِعۡمَتَهُۥ عَلَيۡكَ وَعَلَىٰ ءَالِ يَعۡقُوبَ كَمَا أَتَمَّهَا عَلَىٰ أَبَوَيۡكَ مِن قَبۡلُ إِبۡرَٰهِيمَ وَإِسۡحَٰقَۚ
क्योंकि तुम्हारा अभिभावक सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।”
إِنَّ رَبَّكَ عَلِيمٌ حَكِيمٞ
यूसुफ़ और उसके भाइयों में पूछने वालों के लिए निश्चय ही संकेत थे।
۞ لَّقَدۡ كَانَ فِي يُوسُفَ وَإِخۡوَتِهِۦ ءَايَٰتٞ لِّلسَّآئِلِينَ
जब उन्होंने कहा: “यूसुफ़ और उसका भाई हमारे पिता को हमसे अधिक प्रिय हैं, जबकि हम एक संगठित टोली हैं:
إِذۡ قَالُواْ لَيُوسُفُ وَأَخُوهُ أَحَبُّ إِلَىٰ أَبِينَا مِنَّا وَنَحۡنُ عُصۡبَةٌ
हमारे पिता अवश्य स्पष्ट भटकाव में हैं।
إِنَّ أَبَانَا لَفِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٍ
यूसुफ़ को मार डालो, या उसे किसी धरती पर निर्वासित कर दो, ताकि तुम्हारे पिता का चेहरा केवल तुम्हारे लिए खाली हो जाए, और इसके बाद तुम एक भली क़ौम बन जाओ।”
اِ۟قۡتُلُواْ يُوسُفَ أَوِ اِ۪طۡرَحُوهُ أَرۡضٗا يَخۡل لَّكُمۡ وَجۡهُ أَبِيكُمۡ وَتَكُونُواْ مِنۢ بَعۡدِهِۦ قَوۡمٗا صَٰلِحِينَ
उनमें से एक ने कहा: “यूसुफ़ को मार मत डालो, बल्कि उसे कुएँ की गहराई में डाल दो: कोई क़ाफ़िला उसे निकाल लेगा, यदि तुम्हें कुछ करना ही है।”
قَالَ قَآئِلٞ مِّنۡهُمۡ لَا تَقۡتُلُواْ يُوسُفَ وَأَلۡقُوهُ فِي غَيَٰبَتِ اِ۬لۡجُبِّ يَلۡتَقِطۡهُ بَعۡضُ اُ۬لسَّيَّارَةِ إِن كُنتُمۡ فَٰعِلِينَ
उन्होंने कहा: “हे हमारे पिता! तुम्हें क्या हुआ है कि तुम यूसुफ़ के विषय में हम पर भरोसा नहीं करते, जबकि हम अवश्य उसके सच्चे हितैषी हैं?
قَالُواْ يَٰأَبَانَا مَالَكَ لَا تَامَ۬نَّا عَلَىٰ يُوسُفَ وَإِنَّا لَهُۥ لَنَٰصِحُونَ
उसे कल हमारे साथ भेजो, कि वह मन बहलाए और खेले; हम अवश्य उसके रक्षक रहेंगे।”
أَرۡسِلۡهُ مَعَنَا غَدٗا نَّرۡتَعۡ وَنَلۡعَبۡ وَإِنَّا لَهُۥ لَحَٰفِظُونَ
उसने कहा: “यह मुझे अवश्य दुखी करता है कि तुम उसे ले जाओ, और मुझे डर है कि भेड़िया उसे खा जाए जबकि तुम उससे लापरवाह हो।”
قَالَ إِنِّي لَيَحۡزُنُنِي أَن تَذۡهَبُواْ بِهِۦ وَأَخَافُ أَن يَاكُلَهُ اُ۬لذِّيبُ وَأَنتُمۡ عَنۡهُ غَٰفِلُونَ
उन्होंने कहा: “यदि भेड़िया उसे खा जाए, जबकि हम एक संगठित टोली हैं, तो हम तब अवश्य घाटा उठाने वाले होंगे।”
قَالُواْ لَئِنۡ أَكَلَهُ اُ۬لذِّيبُ وَنَحۡنُ عُصۡبَةٌ إِنَّا إِذٗا لَّخَٰسِرُونَ
जब वे उसे ले गए और उसे कुएँ की गहराई में डालने पर सहमत हो गए — और हमने उस पर प्रकट किया: “तुम उन्हें उनके इस मामले से अवश्य सूचित करोगे, जबकि उन्हें इसका आभास भी नहीं” —
فَلَمَّا ذَهَبُواْ بِهِۦ وَأَجۡمَعُواْ أَن يَجۡعَلُوهُ فِي غَيَٰبَتِ اِ۬لۡجُبِّۚ وَأَوۡحَيۡنَا إِلَيۡهِ لَتُنَبِّئَنَّهُم بِأَمۡرِهِمۡ هَٰذَا وَهُمۡ لَا يَشۡعُرُونَ
वे शाम को अपने पिता के पास रोते हुए आए, और उन्होंने कहा: “हे हमारे पिता! हम निश्चय ही दौड़ लगाने गए थे और यूसुफ़ को अपने सामान के पास छोड़ गए, और भेड़िये ने उसे खा लिया।
وَجَآءُو أَبَاهُمۡ عِشَآءٗ يَبۡكُونَ قَالُواْ يَٰأَبَانَا إِنَّا ذَهَبۡنَا نَسۡتَبِقُ وَتَرَكۡنَا يُوسُفَ عِندَ مَتَٰعِنَا فَأَكَلَهُ اُ۬لذِّيبُۖ
परंतु तुम हम पर भरोसा नहीं करोगे, चाहे हम सच कह रहे हों।”
وَمَا أَنتَ بِمُومِنٖ لَّنَا وَلَوۡ كُنَّا صَٰدِقِينَ
और वे उसके कुर्ते पर झूठा रक्त लगाकर लाए।
وَجَآءُو عَلَىٰ قَمِيصِهِۦ بِدَمٖ كَذِبٖۚ
उसने कहा: “बल्कि तुम्हारे स्व ने तुम्हें एक मामला सुझा दिया है।
قَالَ بَلۡ سَوَّلَتۡ لَكُمۡ أَنفُسُكُمۡ أَمۡرٗاۖ
गरिमामय धैर्य!
فَصَبۡرٞ جَمِيلٞۖ
और जो तुम बयान करते हो, उसके विरुद्ध ईश्वर ही से सहायता माँगी जाती है।”
وَاَللَّهُ اُ۬لۡمُسۡتَعَانُ عَلَىٰ مَا تَصِفُونَ
और एक क़ाफ़िला आया; उन्होंने अपने पानी भरने वाले को भेजा, जिसने अपना डोल नीचे उतारा। उसने कहा: “शुभ समाचार! यह तो एक लड़का है!”
وَجَآءَت سَّيَّارَةٞ فَأَرۡسَلُواْ وَارِدَهُمۡ فَأَدۡلَىٰ دَلۡوَهُۥۖ قَالَ يَٰبُشۡرَٰيَ هَٰذَا غُلَٰمٞۚ
और उन्होंने उसे व्यापारिक माल की तरह छिपा लिया —
وَأَسَرُّوهُ بِضَٰعَةٗۚ
परंतु ईश्वर उनके किए हुए के विषय में सर्वज्ञ था।
وَاَللَّهُ عَلِيمُۢ بِمَا يَعۡمَلُونَ
और उन्होंने उसे घटे हुए दाम पर बेच दिया, कुछ गिनी-चुनी मुद्राओं में: वे उसे कुछ अधिक महत्व नहीं देते थे।
۞ وَشَرَوۡهُ بِثَمَنِۢ بَخۡسٖ دَرَٰهِم مَّعۡدُودَةٖ وَكَانُواْ فِيهِ مِنَ اَ۬لزَّٰهِدِينَ
और जिसने उसे मिसर में ख़रीदा, उसने अपनी पत्नी से कहा: “इसका निवास सम्मानजनक रखो; संभव है कि यह हमारे काम आए, या हम इसे संतान के रूप में अपना लें।”
وَقَالَ اَ۬لَّذِي اِ۪شۡتَر۪ىٰهُ مِن مِّصۡرَ لِاِمۡرَأَتِهِۦ أَكۡرِمِي مَثۡوَىٰهُ عَسَىٰ أَن يَنفَعَنَا أَوۡ نَتَّخِذَهُۥ وَلَدٗاۚ
और इसी प्रकार हमने यूसुफ़ को इस धरती पर स्थापित किया, और इसलिए कि उसे घटनाओं का पूर्वकथन सिखाएँ —
وَكَذَٰلِكَ مَكَّنَّا لِيُوسُف فِّي اِ۬لۡأَرۡضِ وَلِنُعَلِّمَهُۥ مِن تَاوِيلِ اِ۬لۡأَحَادِيثِۚ
ईश्वर अपनी योजना में प्रबल है,
وَاَللَّهُ غَالِبٌ عَلَىٰ أَمۡرِهِۦ
परंतु अधिकतर लोग नहीं जानते।
وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ اَ۬لنَّاسِ لَا يَعۡلَمُونَ
और जब वह पूर्ण परिपक्वता को पहुँचा, तो हमने उसे निर्णय और ज्ञान दिया:
وَلَمَّا بَلَغَ أَشُدَّهُۥ ءَاتَيۡنَٰهُ حُكۡمٗا وَعِلۡمٗاۚ
इसी प्रकार हम भलाई करने वालों को प्रतिफल देते हैं।
وَكَذَٰلِكَ نَجۡزِي اِ۬لۡمُحۡسِنِينَ
और जिस स्त्री के घर में वह था, उसने उससे उसका स्व पाना चाहा; उसने द्वार बंद कर लिए और कहा: “इधर आओ।”
وَرَٰوَدَتۡهُ اُ۬لَّتِي هُوَ فِي بَيۡتِهَا عَن نَّفۡسِهِۦ وَغَلَّقَتِ اِ۬لۡأَبۡوَٰبَ وَقَالَتۡ هَيۡتَ لَكۚ
उसने कहा: “मैं स्वयं को ईश्वर की छत्रछाया में रखता हूँ!
قَّالَ مَعَاذَ اَ۬للَّهِۖ
वही मेरा स्वामी है: उसने मेरा निवास सुंदर बनाया है,
إِنَّهُۥ رَبِّيَ أَحۡسَنَ مَثۡوَايَۖ
क्योंकि अन्यायी सफल नहीं होते।”
إِنَّهُۥ لَا يُفۡلِحُ اُ۬لظَّٰلِمُونَ
और निश्चय ही, उस स्त्री ने उसके प्रति इरादा किया,
وَلَقَدۡ هَمَّتۡ بِهِۦۖ
और वह भी उसके प्रति इरादा करता, यदि उसने अपने अभिभावक का प्रमाण न देखा होता:
وَهَمَّ بِهَا لَوۡلَا أَن رَّء۪ا بُرۡهَٰنَ رَبِّهِۦۚ
ऐसा ही हुआ, ताकि हम उससे बुराई और निर्लज्जता को दूर रखें,
كَذَٰلِكَ لِنَصۡرِفَ عَنۡهُ اُ۬لسُّوٓءَ وَاَلۡفَحۡشَآءَۚ
क्योंकि वह हमारे निर्मल आज्ञाकारियों में से था।
ا۪نَّهُۥ مِنۡ عِبَادِنَا اَ۬لۡمُخۡلِصِينَ
और दोनों द्वार की ओर एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में दौड़े, और उसने पीछे से उसका कुर्ता फाड़ दिया, और उन्होंने द्वार पर उसके सरदार को पाया।
وَاَسۡتَبَقَا اَ۬لۡبَابَ وَقَدَّتۡ قَمِيصَهُۥ مِن دُبُرٖ وَأَلۡفَيَا سَيِّدَهَا لَدَا اَ۬لۡبَابِۚ
उसने कहा: “उसका क्या प्रतिफल है जो तुम्हारे परिवार से बुराई चाहे, सिवा कारावास या पीड़ादायक दंड के?”
قَالَتۡ مَا جَزَآءُ مَنۡ أَرَادَ بِأَهۡلِكَ سُوٓءًا إِلَّا أَن يُسۡجَنَ أَوۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ
उसने कहा: “उसी ने मुझसे मेरा स्व पाना चाहा।”
قَالَ هِيَ رَٰوَدَتۡنِي عَن نَّفۡسِيۚ
और उसके परिवार के एक साक्षी ने साक्ष्य दिया: “यदि उसका कुर्ता आगे से फटा है, तो वह सच कहती है, और वह झूठों में से है; परंतु यदि उसका कुर्ता पीछे से फटा है, तो उसने झूठ बोला है,
وَشَهِد شَّاهِدٞ مِّنۡ أَهۡلِهَا إِن كَانَ قَمِيصُهُۥ قُدَّ مِن قُبُلٖ فَصَدَقَتۡ وَهۡوَ مِنَ اَ۬لۡكَٰذِبِينَ وَإِن كَانَ قَمِيصُهُۥ قُدَّ مِن دُبُرٖ فَكَذَبَتۡ
और वह सच्चों में से है।”
وَهۡوَ مِنَ اَ۬لصَّٰدِقِينَ
जब उसने देखा कि उसका कुर्ता पीछे से फटा है, तो उसने कहा: “यह तुम्हारी चाल है: तुम्हारी चाल निश्चय ही विशाल है।
فَلَمَّا رَء۪ا قَمِيصَهُۥ قُدَّ مِن دُبُرٖ قَالَ إِنَّهُۥ مِن كَيۡدِكُنَّۖ إِنَّ كَيۡدَكُنَّ عَظِيمٞ
यूसुफ़, इससे कतरा जाओ;
يُوسُفُ أَعۡرِضۡ عَنۡ هَٰذَاۚ
और तुम, अपने दोष के लिए क्षमा माँगो, क्योंकि तुम भूल करने वालियों में से हो।”
وَاَسۡتَغۡفِرِي لِذَنۢبِكِۖ إِنَّك كُّنتِ مِنَ اَ۬لۡخَاطِـِٔينَ
और राजधानी में कुछ स्त्रियों ने कहा: “शक्तिशाली की पत्नी अपने नौजवान से उसका स्व पाना चाहती है: उसने उसे अवश्य प्रेम से मोह लिया है;
وَقَالَ نِسۡوَةٞ فِي اِ۬لۡمَدِينَةِ اِ۪مۡرَأَتُ اُ۬لۡعَزِيزِ تُرَٰوِدُ فَتَىٰهَا عَن نَّفۡسِهِۦۖ قَد شَّغَفَهَا حُبًّاۖ
हम उसे अवश्य स्पष्ट भटकाव में देखती हैं।”
إِنَّا لَنَر۪ىٰهَا فِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٖ
जब उसने उनका षड्यंत्र सुना, तो उसने उन्हें बुलाया और उनके लिए टेक लगाने का सामान जुटाया; उसने उनमें से हर एक को एक छुरी दी, और कहा: “उनके सामने निकल आओ।”
فَلَمَّا سَمِعَتۡ بِمَكۡرِهِنَّ أَرۡسَلَتۡ إِلَيۡهِنَّ وَأَعۡتَدَتۡ لَهُنَّ مُتَّكَـٔٗا وَءَاتَتۡ كُلَّ وَٰحِدَةٖ مِّنۡهُنَّ سِكِّينٗا وَقَالَتِ اِ۟خۡرُجۡ عَلَيۡهِنَّۖ
जब उन्होंने उसे देखा, तो उसे इतना महान पाया कि उन्होंने अपने हाथ काट लिए, और कहा: “ईश्वर इससे परे है! यह कोई मानव नहीं:
فَلَمَّا رَأَيۡنَهُۥ أَكۡبَرۡنَهُۥ وَقَطَّعۡنَ أَيۡدِيَهُنَّ وَقُلۡنَ حَٰشَٰ لِلَّهِ مَا هَٰذَا بَشَرًا
यह तो बस एक सम्मानित अभिकर्ता है।”
إِنۡ هَٰذَا إِلَّا مَلَكٞ كَرِيمٞ
उसने कहा: “यह वही है जिसके विषय में तुम मुझ पर दोषारोपण करती थीं।
۞ قَالَتۡ فَذَٰلِكُنَّ اَ۬لَّذِي لُمۡتُنَّنِي فِيهِۖ
मैंने निश्चय ही उससे उसका स्व पाना चाहा, परंतु उसने अपनी रक्षा को दृढ़ता से थामे रखा;
وَلَقَدۡ رَٰوَدتُّهُۥ عَن نَّفۡسِهِۦ فَاَسۡتَعۡصَمَۖ
और यदि वह वह न करे जो मैं उसे आदेश देती हूँ, तो वह अवश्य कारावास में डाला जाएगा, और अवश्य नीचा किए गए जनों में होगा।”
وَلَئِن لَّمۡ يَفۡعَلۡ مَا ءَامُرُهُۥ لَيُسۡجَنَنَّ وَلَيَكُونٗا مِّنَ اَ۬لصَّٰغِرِينَ
उसने कहा: “मेरे अभिभावक, कारावास मुझे उससे अधिक प्रिय है जिसकी ओर वे मुझे बुलाती हैं; और यदि आप मुझसे उनकी चाल दूर न करें, तो मैं उनकी ओर झुक जाऊँगा और अज्ञानियों में से हो जाऊँगा।”
قَال رَّبِّ اِ۬لسِّجۡنُ أَحَبُّ إِلَيَّ مِمَّا يَدۡعُونَنِي إِلَيۡهِۖ وَإِلَّا تَصۡرِفۡ عَنِّي كَيۡدَهُنَّ أَصۡبُ إِلَيۡهِنَّ وَأَكُن مِّنَ اَ۬لۡجَٰهِلِينَ
उसके अभिभावक ने उसकी बात का उत्तर दिया और उससे उनकी चाल दूर कर दी,
فَاَسۡتَجَابَ لَهُۥ رَبُّهُۥ فَصَرَفَ عَنۡهُ كَيۡدَهُنَّۚ
क्योंकि वही सुनने वाला, सर्वज्ञ है।
إِنَّه هُّوَ اَ۬لسَّمِيعُ اُ۬لۡعَلِيمُ
फिर उन्हें, संकेत देख लेने के बाद, यह सूझा कि वे उसे एक समय तक अवश्य कारावास में रखेंगे।
ثُمَّ بَدَا لَهُم مِّنۢ بَعۡدِ مَا رَأَوُاْ اُ۬لۡأٓيَٰتِ لَيَسۡجُنُنَّهُۥ حَتَّىٰ حِينٖ
और दो नौजवानों ने उसके साथ कारावास में प्रवेश किया।
وَدَخَلَ مَعَهُ اُ۬لسِّجۡنَ فَتَيَانِۖ
उनमें से एक ने कहा: “मैं स्वयं को मदिरा निचोड़ते देखता था।”
قَالَ أَحَدُهُمَا إِنِّيَ أَر۪ىٰنِيَ أَعۡصِرُ خَمۡرٗاۖ
और दूसरे ने कहा: “मैं स्वयं को अपने सिर पर रोटी वहन करते देखता था, जिसमें से पक्षी खा रहे थे।
وَقَالَ اَ۬لۡأٓخَرُ إِنِّيَ أَر۪ىٰنِيَ أَحۡمِلُ فَوۡقَ رَاسِي خُبۡزٗا تَاكُلُ اُ۬لطَّيۡرُ مِنۡهُۖ
हमें उसके पूर्वकथन की सूचना दो: हम तुम्हें भलाई करने वालों में देखते हैं।”
نَبِّئۡنَا بِتَاوِيلِهِۦۖ إِنَّا نَر۪ىٰكَ مِنَ اَ۬لۡمُحۡسِنِينَ
उसने कहा: “जो भोजन तुम्हें जीविका के रूप में दिया जाता है, वह तुम्हारे पास नहीं आएगा, बिना इसके कि उसके तुम तक पहुँचने से पहले मैं तुम्हें उसके पूर्वकथन की सूचना दे दूँ:
قَال لَّا يَاتِيكُمَا طَعَامٞ تُرۡزَقَانِهِۦ إِلَّا نَبَّاتُكُمَا بِتَاوِيلِهِۦ قَبۡلَ أَن يَاتِيَكُمَاۚ
यह उसमें से है जो मेरे अभिभावक ने मुझे सिखाया है,
ذَٰلِكُمَا مِمَّا عَلَّمَنِي رَبِّيَۚ
क्योंकि मैंने उस क़ौम का मत छोड़ दिया जो ईश्वर पर विश्वास नहीं करती, और जो अंतिम जीवन को नकारती है,
إِنِّي تَرَكۡتُ مِلَّةَ قَوۡمٖ لَّا يُومِنُونَ بِاللَّهِ وَهُم بِالۡأٓخِرَةِ هُمۡ كَٰفِرُونَ
और मैंने अपने पूर्वजों, इब्राहीम, इसहाक़ और याक़ूब के मत का अनुसरण किया है:
وَاَتَّبَعۡتُ مِلَّةَ ءَابَآءِيَ إِبۡرَٰهِيمَ وَإِسۡحَٰقَ وَيَعۡقُوبَۚ
हमारे लिए उचित नहीं कि हम ईश्वर के साथ किसी चीज़ को साझी ठहराएँ।
مَا كَانَ لَنَا أَن نُّشۡرِكَ بِاللَّهِ مِن شَيۡءٖۚ
यह हम पर और लोगों पर ईश्वर के अनुग्रह में से है,
ذَٰلِكَ مِن فَضۡلِ اِ۬للَّهِ عَلَيۡنَا وَعَلَى اَ۬لنَّاسِ
परंतु अधिकतर लोग कृतज्ञ नहीं होते।
وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ اَ۬لنَّاسِ لَا يَشۡكُرُونَ
हे मेरे कारावास के दोनों साथियो! क्या बिखरे हुए स्वामी बेहतर हैं, या ईश्वर, जो एक, सर्वोपरि है?
يَٰصَٰحِبَيِ اِ۬لسِّجۡنِ ءَٰا۬رۡبَابٞ مُّتَفَرِّقُونَ خَيۡرٌ أَمِ اِ۬للَّهُ اُ۬لۡوَٰحِدُ اُ۬لۡقَهَّارُ
उसके अतिरिक्त तुम जिसकी आज्ञा का पालन करते हो, वे बस कुछ गुण हैं जिनके नाम तुमने और तुम्हारे पूर्वजों ने रख लिए हैं, जबकि ईश्वर ने उन पर कोई अधिकार नहीं उतारा:
مَا تَعۡبُدُونَ مِن دُونِهِۦ إِلَّا أَسۡمَآءٗ سَمَّيۡتُمُوهَا أَنتُمۡ وَءَابَآؤُكُم مَّا أَنزَلَ اَ۬للَّهُ بِهَا مِن سُلۡطَٰنٍۚ
निर्णय केवल ईश्वर का है:
إِنِ اِ۬لۡحُكۡمُ إِلَّا لِلَّهِ
उसने आदेश दिया है कि तुम केवल उसी की आज्ञा का पालन करो:
أَمَرَ أَلَّا تَعۡبُدُواْ إِلَّا إِيَّاهُۚ
यही सीधा विधान है,
ذَٰلِكَ اَ۬لدِّينُ اُ۬لۡقَيِّمُ
परंतु अधिकतर लोग नहीं जानते।
وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ اَ۬لنَّاسِ لَا يَعۡلَمُونَ
हे मेरे कारावास के दोनों साथियो! तुम दोनों में से एक अपने स्वामी को मदिरा पिलाएगा;
۞ يَٰصَٰحِبَيِ اِ۬لسِّجۡنِ أَمَّا أَحَدُكُمَا فَيَسۡقِي رَبَّهُۥ خَمۡرٗاۖ
रहा दूसरा, वह खंभे पर जड़ा जाएगा, और पक्षी उसके सिर से खाएँगे।
وَأَمَّا اَ۬لۡأٓخَرُ فَيُصۡلَبُ فَتَاكُلُ اُ۬لطَّيۡرُ مِن رَّاسِهِۦۚ
जिस मामले के बारे में तुम मुझसे पूछ रहे थे, उसका फ़ैसला हो चुका है।”
قُضِيَ اَ۬لۡأَمۡرُ اُ۬لَّذِي فِيهِ تَسۡتَفۡتِيَانِ
और उसने उनमें से उससे कहा जिसके बारे में उसका अनुमान था कि वह उबर जाएगा: “अपने स्वामी को मेरा स्मरण कराना।”
وَقَال لِّلَّذِي ظَنَّ أَنَّهُۥ نَاجٖ مِّنۡهُمَا اَ۟ذۡكُرۡنِي عِندَ رَبِّكَ
परंतु बहकाने वाले ने उसे अपने स्वामी से इसका उल्लेख करना भुला दिया, और उसने कुछ वर्ष कारावास में बिताए।
فَأَنسَىٰهُ اُ۬لشَّيۡطَٰنُ ذِكۡر رَّبِّهِۦ فَلَبِثَ فِي اِ۬لسِّجۡنِ بِضۡعَ سِنِينَ
और राजा ने कहा: “मैं सात मोटी गायें देखता हूँ जिन्हें सात दुबली गायें खा रही हैं, और सात हरी बालें और दूसरी सूखी हुई:
وَقَالَ اَ۬لۡمَلِكُ إِنِّيَ أَر۪يٰ سَبۡعَ بَقَرَٰتٖ سِمَانٖ يَاكُلُهُنَّ سَبۡعٌ عِجَافٞ وَسَبۡعَ سُنۢبُلَٰتٍ خُضۡرٖ وَأُخَرَ يَابِسَٰتٖۖ
हे दरबारियो! मेरे स्वप्न के बारे में मुझे अपनी राय दो, यदि तुम स्वप्नों का अर्थ निकाल सकते हो।”
يَٰأَيُّهَا اَ۬لۡمَلَأُ اَ۬فۡتُونِي فِي رُۥيٰۭيَ إِن كُنتُمۡ لِلرُّۥيۭا تَعۡبُرُونَ
उन्होंने कहा: “उलझे हुए सपनों का ढेर,
قَالُواْ أَضۡغَٰثُ أَحۡلَٰمٖۖ
और हम सपनों के पूर्वकथन में निपुण नहीं।”
وَمَا نَحۡنُ بِتَاوِيلِ اِ۬لۡأَحۡلَٰمِ بِعَٰلِمِينَ
और उन दोनों में से जो उबर गया था, उसने, एक लंबे समय बाद स्मरण करते हुए, कहा: “मैं तुम्हें उसके पूर्वकथन की सूचना देता हूँ: अतः मुझे भेजो।”
وَقَالَ اَ۬لَّذِي نَجَا مِنۡهُمَا وَاَدَّكَرَ بَعۡدَ أُمَّةٍ أَنَا۠ أُنَبِّئُكُم بِتَاوِيلِهِۦ فَأَرۡسِلُونِ
“यूसुफ़, सच्चे पुरुष, हमें सात मोटी गायों के बारे में, जिन्हें सात दुबली गायें खा रही हैं, और सात हरी बालों और दूसरी सूखी हुई बालों के बारे में अपनी राय दो, शायद मैं लोगों के पास लौटूँ, शायद वे जान लें।”
يُوسُفُ أَيُّهَا اَ۬لصِّدِّيقُ أَفۡتِنَا فِي سَبۡعِ بَقَرَٰتٖ سِمَانٖ يَاكُلُهُنَّ سَبۡعٌ عِجَافٞ وَسَبۡعِ سُنۢبُلَٰتٍ خُضۡرٖ وَأُخَرَ يَابِسَٰتٖ لَّعَلِّيَ أَرۡجِعُ إِلَى اَ۬لنَّاسِ لَعَلَّهُمۡ يَعۡلَمُونَ
उसने कहा: “तुम सात वर्ष लगातार, परिश्रम से खेती करोगे;
قَالَ تَزۡرَعُونَ سَبۡعَ سِنِينَ دَابٗا
और जो तुम काटो, उसे उसकी बाल में ही रहने दो, उस थोड़े के सिवा जो तुम खाओगे।
فَمَا حَصَدتُّمۡ فَذَرُوهُ فِي سُنۢبُلِهِۦ إِلَّا قَلِيلٗا مِّمَّا تَاكُلُونَ
फिर इसके बाद सात कठोर वर्ष आएँगे, जो उसे खा जाएँगे जो तुमने उनके लिए आगे बढ़ाया होगा, उस थोड़े के सिवा जो तुम सुरक्षित रखोगे।
ثُمَّ يَاتِي مِنۢ بَعۡد ذَّٰلِكَ سَبۡعٞ شِدَادٞ يَاكُلۡنَ مَا قَدَّمۡتُمۡ لَهُنَّ إِلَّا قَلِيلٗا مِّمَّا تُحۡصِنُونَ
फिर इसके बाद एक साल आएगा जिसमें लोगों पर उद्धारक वर्षा होगी, और जिसमें वे निचोड़ेंगे।”
ثُمَّ يَاتِي مِنۢ بَعۡد ذَّٰلِكَ عَامٞ فِيهِ يُغَاثُ اُ۬لنَّاسُ وَفِيهِ يَعۡصِرُونَ
और राजा ने कहा: “उसे मेरे पास लाओ।”
وَقَالَ اَ۬لۡمَلِكُ اُ۪يتُونِي بِهِۦۖ
जब संदेशवाहक उसके पास आया, तो उसने कहा: “अपने स्वामी के पास लौट जाओ, और उससे पूछो कि उन स्त्रियों का क्या मामला है जिन्होंने अपने हाथ काट लिए थे,
فَلَمَّا جَآءَهُ اُ۬لرَّسُولُ قَالَ اَ۪رۡجِعۡ إِلَىٰ رَبِّكَ فَسۡـَٔلۡهُ مَا بَالُ اُ۬لنِّسۡوَةِ اِ۬لَّٰتِي قَطَّعۡنَ أَيۡدِيَهُنَّۚ
क्योंकि मेरा अभिभावक उनकी चाल के विषय में सर्वज्ञ है।”
إِنَّ رَبِّي بِكَيۡدِهِنَّ عَلِيمٞ
उसने कहा: “तुम्हारा क्या हाल था, जब तुमने यूसुफ़ से उसका स्व पाना चाहा?”
قَالَ مَا خَطۡبُكُنَّ إِذۡ رَٰوَدتُّنَّ يُوسُفَ عَن نَّفۡسِهِۦۚ
उन्होंने कहा: “ईश्वर इससे परे है! हम उसमें कोई बुराई नहीं जानतीं।”
قُلۡنَ حَٰشَٰ لِلَّهِ مَا عَلِمۡنَا عَلَيۡهِ مِن سُوٓءٖۚ
शक्तिशाली की पत्नी ने कहा: “अब सत्य सामने आ गया: मैंने ही उससे उसका स्व पाना चाहा था, और वह अवश्य सच्चों में से है।”
قَالَتِ اِ۪مۡرَأَتُ اُ۬لۡعَزِيزِ اِ۬لۡـَٰٔنَ حَصۡحَصَ اَ۬لۡحَقُّ أَنَا۠ رَٰوَدتُّهُۥ عَن نَّفۡسِهِۦ وَإِنَّهُۥ لَمِنَ اَ۬لصَّٰدِقِينَ
“यह इसलिए कि वह जान ले कि मैंने उसकी अनुपस्थिति में उसके साथ विश्वासघात नहीं किया, और कि ईश्वर विश्वासघातियों की चाल को मार्ग नहीं दिखाता।
ذَٰلِكَ لِيَعۡلَمَ أَنِّي لَمۡ أَخُنۡهُ بِالۡغَيۡبِ وَأَنَّ اَ۬للَّهَ لَا يَهۡدِي كَيۡدَ اَ۬لۡخَآئِنِينَ
और मैं अपने स्व को बरी घोषित नहीं करती:
۞ وَمَا أُبَرِّئُ نَفۡسِيَۚ
स्व अवश्य बुराई के लिए उकसाता है, उसके सिवा जिस पर मेरा अभिभावक दया करता है,
إِنَّ اَ۬لنَّفۡسَ لَأَمَّارَةُۢ بِالسُّو إِلَّا مَا رَحِمَ رَبِّيَۚ
क्योंकि मेरा अभिभावक अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।”
إِنَّ رَبِّي غَفُورٞ رَّحِيمٞ
और राजा ने कहा: “उसे मेरे पास लाओ: मैं उसे केवल अपना बना लूँगा।”
وَقَالَ اَ۬لۡمَلِكُ اُ۪يتُونِي بِهِۦ أَسۡتَخۡلِصۡهُ لِنَفۡسِيۖ
जब उसने उससे बात की, तो उसने कहा: “तुम आज हमारे यहाँ अधिकार और भरोसे की स्थिति में हो।”
فَلَمَّا كَلَّمَهُۥ قَالَ إِنَّكَ اَ۬لۡيَوۡمَ لَدَيۡنَا مَكِينٌ أَمِينٞ
उसने कहा: “मुझे इस धरती के भंडारों का प्रमुख बना दो, क्योंकि मैं ज्ञानवान रक्षक हूँ।”
قَالَ اَ۪جۡعَلۡنِي عَلَىٰ خَزَآئِنِ اِ۬لۡأَرۡضِۖ إِنِّي حَفِيظٌ عَلِيمٞ
और इसी प्रकार हमने यूसुफ़ को इस धरती पर स्थापित किया, वह उसमें जहाँ उसकी मर्ज़ी होती वहाँ बसता था:
وَكَذَٰلِكَ مَكَّنَّا لِيُوسُف فِّي اِ۬لۡأَرۡضِ يَتَبَوَّأُ مِنۡهَا حَيۡثُ يَشَآءُۚ
हम जिस पर हमारी मर्ज़ी हो, उस पर दया करते हैं, और हम भलाई करने वालों के पुरस्कार को नष्ट नहीं होने देते।
نُصِيب بِّرَحۡمَتِنَا مَن نَّشَآءُۖ وَلَا نُضِيعُ أَجۡرَ اَ۬لۡمُحۡسِنِينَ
और अंतिम जीवन का पुरस्कार अवश्य उनके लिए बेहतर है जो विश्वास करते हैं और सावधान रहते हैं।
وَلَأَجۡرُ اُ۬لۡأٓخِرَةِ خَيۡرٞ لِّلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَكَانُواْ يَتَّقُونَ
और यूसुफ़ के भाई आए और उन्होंने उसके यहाँ प्रवेश किया; उसने उन्हें पहचान लिया, परंतु वे उसे नहीं पहचानते थे।
وَجَآءَ ا۪خۡوَةُ يُوسُف فَّدَخَلُواْ عَلَيۡهِ فَعَرَفَهُمۡ وَهُمۡ لَهُۥ مُنكِرُونَ
जब उसने उन्हें उनकी रसद से लैस कर दिया, तो कहा: “अपने पिता की ओर का अपना एक भाई मेरे पास लाओ।
وَلَمَّا جَهَّزَهُم بِجَهَازِهِمۡ قَالَ اَ۪يتُونِي بِأَخٖ لَّكُم مِّنۡ أَبِيكُمۡۚ
क्या तुम नहीं देखते कि मैं पूरा नाप देता हूँ और मैं मेज़बानों में सबसे बेहतर हूँ?
أَلَا تَرَوۡنَ أَنِّي أُوفِي اِ۬لۡكَيۡلَ وَأَنَا۠ خَيۡرُ اُ۬لۡمُنزِلِينَ
और यदि तुम उसे मेरे पास नहीं लाओगे, तो मेरे यहाँ तुम्हारे लिए कोई नाप नहीं होगा, और तुम मेरे निकट नहीं आओगे।”
فَإِن لَّمۡ تَاتُونِي بِهِۦ فَلَا كَيۡل لَّكُمۡ عِندِي وَلَا تَقۡرَبُونِ
उन्होंने कहा: “हम उसके पिता से उसे पाना चाहेंगे, हम अवश्य यह करेंगे।”
قَالُواْ سَنُرَٰوِدُ عَنۡهُ أَبَاهُ وَإِنَّا لَفَٰعِلُونَ
और उसने अपने नौजवानों से कहा: “उनका माल उनकी बोरियों में रख दो, शायद वे उसे पहचान लें जब वे अपने परिवार की ओर पलट जाएँ, शायद वे लौट आएँ।”
وَقَال لِّفِتۡيَتِهِ اِ۪جۡعَلُواْ بِضَٰعَتَهُمۡ فِي رِحَالِهِمۡ لَعَلَّهُمۡ يَعۡرِفُونَهَا إِذَا اَ۪نقَلَبُواْ إِلَىٰ أَهۡلِهِمۡ لَعَلَّهُمۡ يَرۡجِعُونَ
जब वे अपने पिता की ओर लौटे, तो उन्होंने कहा: “हे हमारे पिता! हमें नाप से रोक दिया गया है; अतः हमारे साथ हमारे भाई को भेजो, हम नाप पा लेंगे, और हम अवश्य उसके रक्षक रहेंगे।”
فَلَمَّا رَجَعُواْ إِلَىٰ أَبِيهِمۡ قَالُواْ يَٰأَبَانَا مُنِعَ مِنَّا اَ۬لۡكَيۡلُ فَأَرۡسِلۡ مَعَنَا أَخَانَا نَكۡتَلۡ وَإِنَّا لَهُۥ لَحَٰفِظُونَ
उसने कहा: “क्या मैं उसके विषय में तुम पर उसी प्रकार भरोसा करूँ जैसे मैंने इससे पहले उसके भाई के विषय में तुम पर भरोसा किया था?
قَالَ هَلۡ ءَامَنُكُمۡ عَلَيۡهِ إِلَّا كَمَا أَمِنتُكُمۡ عَلَىٰ أَخِيهِ مِن قَبۡلُ
ईश्वर सबसे बेहतर रक्षक है,
فَاَللَّهُ خَيۡرٌ حِفۡظٗاۖ
और वह दयालुओं में सबसे अधिक दयालु है।”
وَهۡوَ أَرۡحَمُ اُ۬لرَّٰحِمِينَ
जब उन्होंने अपना सामान खोला, तो उन्होंने अपना माल पाया, जो उन्हें वापस कर दिया गया था। उन्होंने कहा: “हे हमारे पिता! हम और क्या खोजें?
۞ وَلَمَّا فَتَحُواْ مَتَٰعَهُمۡ وَجَدُواْ بِضَٰعَتَهُمۡ رُدَّتۡ إِلَيۡهِمۡۖ قَالُواْ يَٰأَبَانَا مَا نَبۡغِيۖ
यह हमारा माल है, जो हमें वापस कर दिया गया है; हम अपने परिवार के लिए रसद लाएँगे, अपने भाई की रक्षा करेंगे, और एक व्यक्ति की माप अतिरिक्त पाएँगे:
هَٰذِهِۦ بِضَٰعَتُنَا رُدَّتۡ إِلَيۡنَاۖ وَنَمِيرُ أَهۡلَنَا وَنَحۡفَظُ أَخَانَا وَنَزۡدَادُ كَيۡلَ بَعِيرٖۖ
यह सहज नाप है।”
ذَٰلِك كَّيۡلٞ يَسِيرٞ
उसने कहा: “मैं उसे तुम्हारे साथ नहीं भेजूँगा, जब तक तुम ईश्वर के सामने मुझसे एक गंभीर प्रतिज्ञा न करो कि तुम उसे मेरे पास अवश्य वापस लाओगे, सिवा इसके कि तुम घिर जाओ।”
قَال لَّنۡ أُرۡسِلَهُۥ مَعَكُمۡ حَتَّىٰ تُوتُونِۦ مَوۡثِقٗا مِّنَ اَ۬للَّهِ لَتَاتُنَّنِي بِهِۦ إِلَّا أَن يُحَاطَ بِكُمۡۖ
जब उन्होंने उससे अपनी गंभीर प्रतिज्ञा कर ली, तो उसने कहा: “हम जो कहते हैं, उस पर ईश्वर मुख़्तार है।”
فَلَمَّا ءَاتَوۡهُ مَوۡثِقَهُمۡ قَالَ اَ۬للَّهُ عَلَىٰ مَا نَقُولُ وَكِيلٞ
और उसने कहा: “हे मेरे बेटो! एक ही द्वार से प्रवेश मत करना, बल्कि अलग-अलग द्वारों से प्रवेश करना;
وَقَالَ يَٰبَنِيَّ لَا تَدۡخُلُواْ مِنۢ بَابٖ وَٰحِدٖ وَاَدۡخُلُواْ مِنۡ أَبۡوَٰبٖ مُّتَفَرِّقَةٖۖ
मैं ईश्वर के विरुद्ध तुम्हारे किसी काम नहीं आऊँगा:
وَمَا أُغۡنِي عَنكُم مِّنَ اَ۬للَّهِ مِن شَيۡءٍۖ
निर्णय केवल ईश्वर का है;
إِنِ اِ۬لۡحُكۡمُ إِلَّا لِلَّهِۖ
मैं उसी को मुख़्तार बनाता हूँ,
عَلَيۡهِ تَوَكَّلۡتُۖ
और मुख़्तार बनाने वाले उसी को मुख़्तार बनाएँ।”
وَعَلَيۡهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ اِ۬لۡمُتَوَكِّلُونَ
जब उन्होंने वैसे ही प्रवेश किया जैसा उनके पिता ने उन्हें आदेश दिया था, तो वह ईश्वर के विरुद्ध उनके किसी काम न आया, सिवा याक़ूब के स्व में एक आवश्यकता के, जिसे उसने पूरा किया;
وَلَمَّا دَخَلُواْ مِنۡ حَيۡثُ أَمَرَهُمۡ أَبُوهُم مَّا كَانَ يُغۡنِي عَنۡهُم مِّنَ اَ۬للَّهِ مِن شَيۡءٍ إِلَّا حَاجَةٗ فِي نَفۡسِ يَعۡقُوبَ قَضَىٰهَاۚ
उसके पास अवश्य वह ज्ञान था जो हमने उसे सिखाया था,
وَإِنَّهُۥ لَذُو عِلۡمٖ لِّمَا عَلَّمۡنَٰهُ
परंतु अधिकतर लोग नहीं जानते।
وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ اَ۬لنَّاسِ لَا يَعۡلَمُونَ
जब उन्होंने यूसुफ़ के यहाँ प्रवेश किया, तो उसने अपने भाई को अपने पास शरण दी,
وَلَمَّا دَخَلُواْ عَلَىٰ يُوسُفَ ءَاوَىٰ إِلَيۡهِ أَخَاهُۖ
और कहा: “मैं निश्चय ही तुम्हारा भाई हूँ: अतः वे जो करते थे, उससे व्यथित मत हो।”
قَالَ إِنِّيَ أَنَا۠ أَخُوكَ فَلَا تَبۡتَئِسۡ بِمَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ
जब उसने उन्हें उनकी रसद से लैस कर दिया, तो उसने प्याला अपने भाई की बोरी में रख दिया; फिर एक घोषक ने पुकारा: “हे कारवाँ! तुम अवश्य चोर हो!”
فَلَمَّا جَهَّزَهُم بِجَهَازِهِمۡ جَعَلَ اَ۬لسِّقَايَةَ فِي رَحۡلِ أَخِيهِ ثُمَّ أَذَّنَ مُؤَذِّنٌ أَيَّتُهَا اَ۬لۡعِيرُ إِنَّكُمۡ لَسَٰرِقُونَ
उन्होंने उनकी ओर मुख करके कहा: “तुम्हारा क्या खोया है?”
قَالُواْ وَأَقۡبَلُواْ عَلَيۡهِم مَّاذَا تَفۡقِدُونَ
उन्होंने कहा: “हमसे राजा का पैमाना खो गया है;
قَالُواْ نَفۡقِد صُّوَاعَ اَ۬لۡمَلِكِ
जो उसे लाएगा उसे एक व्यक्ति का बोझ मिलेगा, और मैं इसका ज़ामिन हूँ।”
وَلِمَن جَآءَ بِهِۦ حِمۡلُ بَعِيرٖ وَأَنَا۠ بِهِۦ زَعِيمٞ
उन्होंने कहा: “ईश्वर की शपथ, तुम निश्चय ही जानते हो कि हम इस धरती पर बिगाड़ फैलाने नहीं आए, और हम चोर नहीं हैं।”
قَالُواْ تَاَللَّهِ لَقَدۡ عَلِمۡتُم مَّا جِينَا لِنُفۡسِدَ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ وَمَا كُنَّا سَٰرِقِينَ
उन्होंने कहा: “फिर उसका प्रतिफल क्या होगा, यदि तुम झूठे हो?”
قَالُواْ فَمَا جَزَٰٓؤُهُۥ إِن كُنتُمۡ كَٰذِبِينَ
उन्होंने कहा: “उसका प्रतिफल: जिसकी बोरी में वह मिले, वही स्वयं उसका प्रतिफल है।
قَالُواْ جَزَٰٓؤُهُۥ مَن وُجِدَ فِي رَحۡلِهِۦ فَهۡوَ جَزَٰٓؤُهُۥۚ
इसी प्रकार हम अन्यायियों को प्रतिफल देते हैं।”
كَذَٰلِكَ نَجۡزِي اِ۬لظَّٰلِمِينَ
उसने उनकी बोरियों से आरंभ किया, अपने भाई की बोरी से पहले, फिर उसे अपने भाई की बोरी से निकाला:
فَبَدَأَ بِأَوۡعِيَتِهِمۡ قَبۡلَ وِعَآءِ اَ۬خِيهِ ثُمَّ اَ۪سۡتَخۡرَجَهَا مِن وِعَآءِ اَ۬خِيهِۚ
इसी प्रकार हमने यूसुफ़ के पक्ष में चाल चली:
كَذَٰلِك كِّدۡنَا لِيُوسُفَۖ
वह राजा के विधान के अनुसार अपने भाई को नहीं ले सकता था, जब तक ईश्वर की मर्ज़ी न हो।
مَا كَانَ لِيَاخُذَ أَخَاهُ فِي دِينِ اِ۬لۡمَلِكِ إِلَّا أَن يَشَآءَ اَ۬للَّهُۚ
हम जिस पर हमारी मर्ज़ी हो, उसे श्रेणियों में ऊँचा करते हैं,
نَرۡفَعُ دَرَجَٰتِ مَن نَّشَآءُۗ
और ज्ञान के हर धारक के ऊपर एक ज्ञानी है।
وَفَوۡقَ كُلِّ ذِي عِلۡمٍ عَلِيمٞ
उन्होंने कहा: “यदि उसने चोरी की है, तो उसके एक भाई ने इससे पहले चोरी की थी।”
۞ قَالُواْ إِن يَسۡرِقۡ فَقَد سَّرَقَ أَخٞ لَّهُۥ مِن قَبۡلُۚ
यूसुफ़ ने इसे अपने भीतर छिपाए रखा और उसे उनके सामने नहीं आने दिया;
فَأَسَرَّهَا يُوسُف فِّي نَفۡسِهِۦ وَلَمۡ يُبۡدِهَا لَهُمۡۚ
उसने कहा: “तुम्हारी जगह सबसे बुरी है,
قَالَ أَنتُمۡ شَرّٞ مَّكَانٗاۖ
और ईश्वर उसे सबसे अच्छी तरह जानता है जो तुम बयान करते हो।”
وَاَللَّهُ أَعۡلَم بِمَا تَصِفُونَ
उन्होंने कहा: “हे शक्तिशाली! उसका एक पिता है, बहुत उम्र वाला वृद्ध; अतः हममें से एक को उसकी जगह ले लो: हम तुम्हें भलाई करने वालों में देखते हैं।”
قَالُواْ يَٰأَيُّهَا اَ۬لۡعَزِيزُ إِنَّ لَهُۥ أَبٗا شَيۡخٗا كَبِيرٗا فَخُذۡ أَحَدَنَا مَكَانَهُۥۖ إِنَّا نَر۪ىٰكَ مِنَ اَ۬لۡمُحۡسِنِينَ
उसने कहा: “हम स्वयं को ईश्वर की छत्रछाया में रखते हैं कि हम उसके सिवा किसी और को न लें जिसके पास हमने अपनी वस्तु पाई: तब हम अवश्य अन्यायी होंगे।”
قَالَ مَعَاذَ اَ۬للَّهِ أَن نَّاخُذَ إِلَّا مَن وَجَدۡنَا مَتَٰعَنَا عِندَهُۥ إِنَّا إِذٗا لَّظَٰلِمُونَ
जब वे उससे पूरी तरह निराश हो गए, तो वे एकांत में मंत्रणा के लिए अलग हो गए।
فَلَمَّا اَ۪سۡتَيۡـَٔسُواْ مِنۡهُ خَلَصُواْ نَجِيّٗاۖ
उनमें सबसे बड़े ने कहा: “क्या तुम नहीं जानते कि तुम्हारे पिता ने तुमसे ईश्वर के सामने एक गंभीर प्रतिज्ञा ली थी,
قَالَ كَبِيرُهُمۡ أَلَمۡ تَعۡلَمُواْ أَنَّ أَبَاكُمۡ قَدۡ أَخَذَ عَلَيۡكُم مَّوۡثِقٗا مِّنَ اَ۬للَّهِ
और इससे पहले तुमने यूसुफ़ के प्रति अपने कर्तव्य में चूक की?
وَمِن قَبۡلُ مَا فَرَّطتُمۡ فِي يُوسُفۖ
अतः मैं इस धरती को नहीं छोड़ूँगा, जब तक मेरे पिता मुझे अनुमति न दें, या ईश्वर मेरे पक्ष में निर्णय न करे:
فَّلَنۡ أَبۡرَحَ اَ۬لۡأَرۡضَ حَتَّىٰ يَاذَن لِّيَ أَبِيَ أَوۡ يَحۡكُمَ اَ۬للَّهُ لِيۖ
वह निर्णय करने वालों में सबसे बेहतर है।
وَهۡوَ خَيۡرُ اُ۬لۡحَٰكِمِينَ
अपने पिता के पास लौट जाओ, और कहो: ‘हे हमारे पिता! तुम्हारे बेटे को निश्चय ही चोर ठहराया गया है;
اَ۪رۡجِعُواْ إِلَىٰ أَبِيكُمۡ فَقُولُواْ يَٰأَبَانَا إِنَّ اَ۪بۡنَكَ سَرَقَ
और हम उतने का ही साक्ष्य देते हैं जितना हम जानते हैं, और हम उसकी रक्षा नहीं कर सकते थे जो इंद्रियों से परे था।
وَمَا شَهِدۡنَا إِلَّا بِمَا عَلِمۡنَا وَمَا كُنَّا لِلۡغَيۡبِ حَٰفِظِينَ
और उस बस्ती से पूछ लो जहाँ हम थे, और उस कारवाँ से जिसके साथ हम आए हैं: हम अवश्य सच्चे हैं।’”
وَسۡـَٔلِ اِ۬لۡقَرۡيَةَ اَ۬لَّتِي كُنَّا فِيهَا وَاَلۡعِيرَ اَ۬لَّتِي أَقۡبَلۡنَا فِيهَاۖ وَإِنَّا لَصَٰدِقُونَ
उसने कहा: “बल्कि तुम्हारे स्व ने तुम्हें एक मामला सुझा दिया है।
قَالَ بَلۡ سَوَّلَتۡ لَكُمۡ أَنفُسُكُمۡ أَمۡرٗاۖ
गरिमामय धैर्य!
فَصَبۡرٞ جَمِيلٌۖ
संभव है कि ईश्वर उन सबको मेरे पास ले आए,
عَسَى اَ۬للَّهُ أَن يَاتِيَنِي بِهِمۡ جَمِيعًاۚ
क्योंकि वही सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।”
إِنَّه هُّوَ اَ۬لۡعَلِيمُ اُ۬لۡحَكِيمُ
और उसने उनसे पीठ फेर ली और कहा: “हे मेरी कड़वाहट, यूसुफ़ के लिए!”
وَتَوَلَّىٰ عَنۡهُمۡ وَقَالَ يَٰأَسَفَىٰ عَلَىٰ يُوسُفَ
और उसकी आँखें शोक से सफ़ेद हो गईं, जबकि वह अपना दुख पी रहा था।
وَاَبۡيَضَّتۡ عَيۡنَاهُ مِنَ اَ۬لۡحُزۡنِ فَهۡوَ كَظِيمٞ
उन्होंने कहा: “ईश्वर की शपथ, तुम यूसुफ़ का स्मरण करते रहोगे, यहाँ तक कि गल जाओ या नष्ट हो जाओ।”
قَالُواْ تَاَللَّهِ تَفۡتَؤُاْ تَذۡكُرُ يُوسُفَ حَتَّىٰ تَكُونَ حَرَضًا أَوۡ تَكُونَ مِنَ اَ۬لۡهَٰلِكِينَ
उसने कहा: “मैं अपने उद्गार और अपने शोक की शिकायत केवल ईश्वर से करता हूँ,
قَالَ إِنَّمَا أَشۡكُواْ بَثِّي وَحُزۡنِيَ إِلَى اَ۬للَّهِ
और मैं ईश्वर की ओर से वह जानता हूँ जो तुम नहीं जानते।
وَأَعۡلَم مِّنَ اَ۬للَّهِ مَا لَا تَعۡلَمُونَ
हे मेरे बेटो! जाओ और यूसुफ़ और उसके भाई का पता लगाओ, और ईश्वर की राहत से निराश मत हो,
يَٰبَنِيَّ اَ۪ذۡهَبُواْ فَتَحَسَّسُواْ مِن يُوسُفَ وَأَخِيهِ وَلَا تَاْيۡـَٔسُواْ مِن رَّوۡحِ اِ۬للَّهِۖ
क्योंकि ईश्वर की राहत से कोई निराश नहीं होता, सिवा उस क़ौम के जो नकारती है।”
إِنَّهُۥ لَا يَاْيۡـَٔسُ مِن رَّوۡحِ اِ۬للَّهِ إِلَّا اَ۬لۡقَوۡمُ اُ۬لۡكَٰفِرُونَ
जब उन्होंने उसके यहाँ प्रवेश किया, तो कहा: “हे शक्तिशाली! हमें और हमारे परिवार को हानि पहुँची है, और हम थोड़े मूल्य का माल लेकर आए हैं:
۞ فَلَمَّا دَخَلُواْ عَلَيۡهِ قَالُواْ يَٰأَيُّهَا اَ۬لۡعَزِيزُ مَسَّنَا وَأَهۡلَنَا اَ۬لضُّرُّ وَجِينَا بِبِضَٰعَةٖ مُّزۡجَىٰةٖ
अतः हमें पूरा नाप दो, और हम पर दान करो,
فَأَوۡفِ لَنَا اَ۬لۡكَيۡلَ وَتَصَدَّقۡ عَلَيۡنَاۖ
क्योंकि ईश्वर दान करने वालों को प्रतिफल देता है।”
إِنَّ اَ۬للَّهَ يَجۡزِي اِ۬لۡمُتَصَدِّقِينَ
उसने कहा: “क्या तुम जानते हो कि तुमने यूसुफ़ और उसके भाई के साथ क्या किया, जब तुम अज्ञानी थे?”
قَالَ هَلۡ عَلِمۡتُم مَّا فَعَلۡتُم بِيُوسُفَ وَأَخِيهِ إِذۡ أَنتُمۡ جَٰهِلُونَ
उन्होंने कहा: “क्या सचमुच तुम ही यूसुफ़ हो?”
قَالُواْ أَٰ۟نَّكَ لَأَنتَ يُوسُفُۖ
उसने कहा: “मैं यूसुफ़ हूँ, और यह मेरा भाई है।
قَالَ أَنَا۠ يُوسُفُ وَهَٰذَا أَخِيۖ
ईश्वर ने हम पर कृपा की है:
قَدۡ مَنَّ اَ۬للَّهُ عَلَيۡنَاۖ
जो सावधान रहता है और धैर्य रखता है — ईश्वर भलाई करने वालों के पुरस्कार को निश्चय ही नष्ट नहीं होने देता।”
إِنَّهُۥ مَن يَتَّقِ وَيَصۡبِرۡ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يُضِيعُ أَجۡرَ اَ۬لۡمُحۡسِنِينَ
उन्होंने कहा: “ईश्वर की शपथ, ईश्वर ने तुम्हें हम पर निश्चय ही वरीयता दी है, और हम अवश्य भूल करने वाले थे।”
قَالُواْ تَاَللَّهِ لَقَدۡ ءَاثَرَكَ اَ۬للَّهُ عَلَيۡنَا وَإِن كُنَّا لَخَٰطِـِٔينَ
उसने कहा: “तुम पर कोई दोषारोपण नहीं:
قَال لَّا تَثۡرِيبَ عَلَيۡكُمُ
आज ईश्वर तुम्हें क्षमा करता है,
اُ۬لۡيَوۡمَۖ يَغۡفِرُ اُ۬للَّهُ لَكُمۡۖ
वह दयालुओं में सबसे अधिक दयालु है।
وَهۡوَ أَرۡحَمُ اُ۬لرَّٰحِمِينَ
मेरा यह कुर्ता लेकर जाओ, और इसे मेरे पिता के चेहरे पर डाल दो: उन्हें दृष्टि वापस मिल जाएगी। फिर अपने सारे परिवार को मेरे पास ले आओ।”
اَ۪ذۡهَبُواْ بِقَمِيصِي هَٰذَا فَأَلۡقُوهُ عَلَىٰ وَجۡهِ أَبِي يَاتِ بَصِيرٗا وَاتُونِي بِأَهۡلِكُمۡ أَجۡمَعِينَ
जब कारवाँ रवाना हुआ, तो उनके पिता ने कहा: “मैं अवश्य यूसुफ़ की गंध पा रहा हूँ, यदि तुम मुझे सठियाया हुआ न ठहराओ।”
وَلَمَّا فَصَلَتِ اِ۬لۡعِيرُ قَالَ أَبُوهُمۡ إِنِّي لَأَجِدُ رِيحَ يُوسُفَۖ لَوۡلَا أَن تُفَنِّدُونِ
उन्होंने कहा: “ईश्वर की शपथ, तुम अवश्य अपने पुराने भटकाव में हो।”
قَالُواْ تَاَللَّهِ إِنَّكَ لَفِي ضَلَٰلِكَ اَ۬لۡقَدِيمِ
जब शुभ समाचार देने वाला आया, तो उसने उसे उसके चेहरे पर डाल दिया, और उसे तुरंत दृष्टि वापस मिल गई।
فَلَمَّا أَن جَآءَ اَ۬لۡبَشِيرُ أَلۡقَىٰهُ عَلَىٰ وَجۡهِهِۦ فَاَرۡتَدَّ بَصِيرٗاۖ
उसने कहा: “क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि मैं ईश्वर की ओर से वह जानता हूँ जो तुम नहीं जानते?”
قَالَ أَلَمۡ أَقُل لَّكُمۡ إِنِّيَ أَعۡلَم مِّنَ اَ۬للَّهِ مَا لَا تَعۡلَمُونَ
उन्होंने कहा: “हे हमारे पिता! हमारे दोषों के लिए क्षमा माँगो, क्योंकि हम भूल करने वाले थे।”
قَالُواْ يَٰأَبَانَا اَ۪سۡتَغۡفِر لَّنَا ذُنُوبَنَا إِنَّا كُنَّا خَٰطِـِٔينَ
उसने कहा: “मैं शीघ्र ही तुम्हारे लिए अपने अभिभावक से क्षमा माँगूँगा:
قَالَ سَوۡفَ أَسۡتَغۡفِر لَّكُمۡ رَبِّيَۖ
निश्चय ही वही अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।”
إِنَّه هُّوَ اَ۬لۡغَفُورُ اُ۬لرَّحِيمُ
जब उन्होंने यूसुफ़ के यहाँ प्रवेश किया, तो उसने अपने पिता और अपनी माता को अपने पास शरण दी, और कहा: “मिसर में प्रवेश करो, यदि ईश्वर की मर्ज़ी हो, सुरक्षित।”
فَلَمَّا دَخَلُواْ عَلَىٰ يُوسُفَ ءَاوَىٰ إِلَيۡهِ أَبَوَيۡهِ وَقَالَ اَ۟دۡخُلُواْ مِصۡرَ إِن شَآءَ اَ۬للَّهُ ءَامِنِينَ
और उसने अपने पिता और अपनी माता को भवन पर ऊँचा किया, और वे उसके सामने माथा टेके हुए गिर पड़े।
وَرَفَعَ أَبَوَيۡهِ عَلَى اَ۬لۡعَرۡشِ وَخَرُّواْ لَهُۥ سُجَّدٗاۖ
और उसने कहा: “हे मेरे पिता! यह मेरे पुराने स्वप्न का पूर्वकथन है: मेरे अभिभावक ने उसे सच कर दिखाया।
وَقَالَ يَٰأَبَتِ هَٰذَا تَاوِيل رُّۥيٰۭيَ مِن قَبۡلُ قَد جَّعَلَهَا رَبِّي حَقّٗاۖ
और उसने मेरे साथ भलाई की, जब उसने मुझे कारावास से निकाला, और तुम सबको देहात से ले आया, इसके बाद कि बहकाने वाले ने मेरे और मेरे भाइयों के बीच फूट डाल दी थी।
وَقَدۡ أَحۡسَنَ بِيَ إِذۡ أَخۡرَجَنِي مِنَ اَ۬لسِّجۡنِ وَجَآءَ بِكُم مِّنَ اَ۬لۡبَدۡوِ مِنۢ بَعۡدِ أَن نَّزَغَ اَ۬لشَّيۡطَٰنُ بَيۡنِي وَبَيۡنَ إِخۡوَتِيۚ
मेरा अभिभावक जो उसकी मर्ज़ी हो, उसमें सूक्ष्म है,
إِنَّ رَبِّي لَطِيفٞ لِّمَا يَشَآءُۚ
क्योंकि वही सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
اِ۪نَّه هُّوَ اَ۬لۡعَلِيمُ اُ۬لۡحَكِيمُ
मेरे अभिभावक, आपने मुझे राजत्व का एक भाग प्रदान किया, और मुझे घटनाओं का पूर्वकथन सिखाया।
۞ رَبِّ قَدۡ ءَاتَيۡتَنِي مِنَ اَ۬لۡمُلۡكِ وَعَلَّمۡتَنِي مِن تَاوِيلِ اِ۬لۡأَحَادِيثِۚ
आकाशों और धरती के उद्गम, आप निकट जीवन में और अंतिम जीवन में मेरे हिमायती हैं: मुझे निष्ठा से सँभाले रखिए, अपने प्रति खरा, और मुझे भलों से मिला दीजिए।”
فَاطِرَ اَ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِ أَنتَ وَلِيِّۦ فِي اِ۬لدُّنۡيۭا وَاَلۡأٓخِرَةۖ تَّوَفَّنِي مُسۡلِمٗا وَأَلۡحِقۡنِي بِالصَّٰلِحِينَ
यह उसकी सूचनाओं में से है जो इंद्रियों से परे है, जिन्हें हम तुम पर प्रकट करते हैं:
ذَٰلِكَ مِنۡ أَنۢبَآءِ اِ۬لۡغَيۡبِ نُوحِيهِ إِلَيۡكَۖ
तुम उनके पास नहीं थे जब वे षड्यंत्र करते हुए अपने मामले पर सहमत हुए।
وَمَا كُنتَ لَدَيۡهِمۡ إِذۡ أَجۡمَعُواْ أَمۡرَهُمۡ وَهُمۡ يَمۡكُرُونَ
और अधिकतर लोग, चाहे तुम कितना भी चाहो, विश्वास करने वाले नहीं हैं।
وَمَا أَكۡثَرُ اُ۬لنَّاسِ وَلَوۡ حَرَصۡتَ بِمُومِنِينَ
और तुम इसके लिए उनसे कोई पुरस्कार नहीं माँगते:
وَمَا تَسۡـَٔلُهُمۡ عَلَيۡهِ مِنۡ أَجۡرٍۚ
यह तो बस सभी प्राणियों के लिए एक स्मरण है।
إِنۡ هُوَ إِلَّا ذِكۡرٞ لِّلۡعَٰلَمِينَ
आकाशों और धरती में कितने ही संकेत हैं, जिनके सामने से वे कतराते हुए गुज़र जाते हैं!
وَكَأَيِّن مِّنۡ ءَايَةٖ فِي اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِ يَمُرُّونَ عَلَيۡهَا وَهُمۡ عَنۡهَا مُعۡرِضُونَ
और उनमें से अधिकतर ईश्वर पर विश्वास नहीं करते, सिवा इसके कि उसके साथ साझी ठहराते हैं।
وَمَا يُومِنُ أَكۡثَرُهُم بِاللَّهِ إِلَّا وَهُم مُّشۡرِكُونَ
क्या वे इससे निश्चिंत हैं कि उन पर ईश्वर के दंड में से ऐसा कुछ नहीं आएगा जो उन पर छा जाए, या वह घड़ी उन पर अचानक नहीं आएगी, जबकि उन्हें आभास भी न हो?
أَفَأَمِنُواْ أَن تَاتِيَهُمۡ غَٰشِيَةٞ مِّنۡ عَذَابِ اِ۬للَّهِ أَوۡ تَاتِيَهُمُ اُ۬لسَّاعَةُ بَغۡتَةٗ وَهُمۡ لَا يَشۡعُرُونَ
कहो: “यह मेरी राह है: मैं ईश्वर की ओर बुलाता हूँ।
قُلۡ هَٰذِهِۦ سَبِيلِي أَدۡعُواْ إِلَى اَ۬للَّهِۚ
पूर्ण दूरदृष्टि के साथ, मैं और वे जो मेरा अनुसरण करते हैं।
عَلَىٰ بَصِيرَةٍ أَنَا۠ وَمَنِ اِ۪تَّبَعَنِيۖ
और ईश्वर की महिमा हो!
وَسُبۡحَٰنَ اَ۬للَّهِ
और मैं साझी ठहराने वालों में से नहीं हूँ।”
وَمَا أَنَا۠ مِنَ اَ۬لۡمُشۡرِكِينَ
और हमने तुमसे पहले केवल पुरुषों को भेजा, जिन पर हम प्रकट करते थे, बस्तियों वालों में से।
وَمَا أَرۡسَلۡنَا مِن قَبۡلِكَ إِلَّا رِجَالٗا يُوحَىٰ إِلَيۡهِم مِّنۡ أَهۡلِ اِ۬لۡقُر۪يٰۗ
क्या उन्होंने धरती में घूमकर नज़र नहीं डाली कि उनसे पहले वालों का परिणाम कैसा रहा?
أَفَلَمۡ يَسِيرُواْ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ فَيَنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ اُ۬لَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡۗ
और अंतिम जीवन का ठिकाना अवश्य उनके लिए बेहतर है जो सावधान रहे:
وَلَدَارُ اُ۬لۡأٓخِرَةِ خَيۡرٞ لِّلَّذِينَ اَ۪تَّقَوۡاْۚ
क्या तुम बुद्धि से काम नहीं लेते?
أَفَلَا يَعۡقِلُونَ
यहाँ तक कि जब संदेशवाहक निराश हो गए और उन्होंने अनुमान लगाया कि उन्हें झुठलाया गया था, तो हमारी सहायता उनके पास आई, और जिस पर हमारी मर्ज़ी थी, वह उबार लिया गया,
حَتَّىٰ إِذَا اَ۪سۡتَيۡـَٔسَ اَ۬لرُّسُلُ وَظَنُّواْ أَنَّهُمۡ قَدۡ كُذِّبُواْ جَآءَهُمۡ نَصۡرُنَا فَنُـۨجِي مَن نَّشَآءُۖ
और हमारी कठोरता बहिष्कृत क़ौम से रद्द नहीं की जाती।
وَلَا يُرَدُّ بَاسُنَا عَنِ اِ۬لۡقَوۡمِ اِ۬لۡمُجۡرِمِينَ
उनकी कथा में मेधा रखने वालों के लिए निश्चय ही एक सीख थी:
۞ لَقَدۡ كَانَ فِي قَصَصِهِمۡ عِبۡرَةٞ لِّأُوْلِي اِ۬لۡأَلۡبَٰبِۗ
यह कोई गढ़ी हुई वार्ता नहीं थी,
مَا كَانَ حَدِيثٗا يُفۡتَر۪يٰ
बल्कि उसकी पुष्टि थी जो इससे पहले है, हर चीज़ का विस्तृत विवरण, और विश्वास करने वाली क़ौम के लिए मार्गदर्शन और दया।
وَلَٰكِن تَصۡدِيقَ اَ۬لَّذِي بَيۡنَ يَدَيۡهِ وَتَفۡصِيلَ كُلِّ شَيۡءٖ وَهُدٗى وَرَحۡمَةٗ لِّقَوۡمٖ يُومِنُونَ