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الدخان

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Sura44
حمحم عسق
पद59

Section IXThe example · exposition

The descent of the Scripture, then the messenger's community

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Read the section from its beginning: sura 40

44:1

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। हा. मीम.

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ حمٓۚ

44:2–3

स्पष्ट ग्रंथ की शपथ! हमने उसे निश्चय ही एक आशीषित रात में उतारा है। हम चेतावनी देते हैं।

وَٱلۡكِتَٰبِ ٱلۡمُبِينِ إِنَّا أَنزَلۡنَٰهُۥ فِي لَيۡلَةٖ مُّبَٰرَكَةٍۚ إِنَّا كُنَّا مُنذِرِينَ

44:4–5

उसमें प्रज्ञा का हर मामला अलग-अलग निर्धारित किया जाता है, हमारी ओर से एक आदेश,

فِيهَا يُفۡرَقُ كُلُّ أَمۡرٍ حَكِيمٍ أَمۡرٗا مِّنۡ عِندِنَاۚ

क्योंकि हम तुम्हारे अभिभावक की ओर से एक दया भेजते हैं,

إِنَّا كُنَّا مُرۡسِلِينَ رَحۡمَةٗ مِّن رَّبِّكَۚ

क्योंकि वही है, सुनने वाला, सर्वज्ञ,

إِنَّهُۥ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ

44:7

आकाशों और धरती का और जो उनके बीच है उसका अभिभावक, यदि तुम यक़ीन के साथ जानने वालों में से हो।

رَبُّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا بَيۡنَهُمَاۖ إِن كُنتُمُۥ مُوقِنِينَ

उसके सिवा कोई देवता नहीं।

لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ

वह जीवन देता है और मृत्यु देता है,

يُحۡيِۦ وَيُمِيتُۖ

तुम्हारा अभिभावक और तुम्हारे पहले पूर्वजों का अभिभावक।

رَبُّكُمُۥ وَرَبُّ ءَابَآئِكُمُ ٱلۡأَوَّلِينَ

44:9

परंतु वे, दुविधा में, खेलते हैं।

بَلۡ هُمُۥ فِي شَكّٖ يَلۡعَبُونَ

44:10–11

इसलिए उस दिन ताक में रहो जब आकाश एक स्पष्ट धुआँ लाएगा जो लोगों को घेर लेगा।

فَٱرۡتَقِبۡ يَوۡمَ تَأۡتِي ٱلسَّمَآءُ بِدُخَانٖ مُّبِينٖ يَغۡشَى ٱلنَّاسَۖ

यह पीड़ादायक दंड है।

هَٰذَا عَذَابٌ أَلِيمٞ

44:12

“हमारे अभिभावक, आप हमारा दंड हल्का कीजिए, क्योंकि हम विश्वास करते हैं।”

رَّبَّنَا ٱكۡشِفۡ عَنَّا ٱلۡعَذَابَ إِنَّا مُؤۡمِنُونَ

44:13–14

उनके लिए स्मरण कैसे लाभ देगा, जबकि उनके पास एक स्पष्ट संदेशवाहक आ चुका है, फिर उन्होंने उससे पीठ फेर ली यह कहते हुए: “एक सिखाया-पढ़ाया हुआ व्यक्ति, विक्षिप्त”?

أَنَّىٰ لَهُمُ ٱلذِّكۡرَىٰ وَقَدۡ جَآءَهُمُۥ رَسُولٞ مُّبِينٞ ثُمَّ تَوَلَّوۡاْ عَنۡهُۥ وَقَالُواْ مُعَلَّمٞ مَّجۡنُونٌ

44:15

हम थोड़े समय के लिए तुम्हारा दंड हल्का करेंगे,

إِنَّا كَاشِفُواْ ٱلۡعَذَابِ قَلِيلًاۚ

44:15

परंतु तुम निश्चय ही फिर वही करोगे।

إِنَّكُمُۥ عَآئِدُونَ

जिस दिन हम सबसे बड़ी जकड़ से जकड़ेंगे,

يَوۡمَ نَبۡطِشُ ٱلۡبَطۡشَةَ ٱلۡكُبۡرَىٰ

हम निश्चय ही प्रतिशोध लेंगे।

إِنَّا مُنتَقِمُونَ

44:17–21

उनसे पहले हमने फ़िरऔन की क़ौम की परीक्षा ली: उनके पास एक सम्मानित संदेशवाहक आया, यह कहते हुए: “ईश्वर के आज्ञाकारियों को मेरे हवाले करो, मैं तुम्हारे लिए निश्चय ही एक भरोसेमंद संदेशवाहक हूँ; और ईश्वर के विरुद्ध अपने को ऊँचा मत करो, मैं तुम्हारे पास एक स्पष्ट अधिकार लाया हूँ; और मैं स्वयं को अपने और तुम्हारे अभिभावक की छत्रछाया में रखता हूँ, इससे कि तुम मुझे निष्कासित करो; और यदि तुम मुझ पर भरोसा नहीं रखते, तो मुझसे अलग रहो।”

۞ وَلَقَدۡ فَتَنَّا قَبۡلَهُمُۥ قَوۡمَ فِرۡعَوۡنَ وَجَآءَهُمُۥ رَسُولٞ كَرِيمٌ أَنۡ أَدُّواْ إِلَيَّ عِبَادَ ٱللَّهِۖ إِنِّي لَكُمُۥ رَسُولٌ أَمِينٞ وَأَن لَّا تَعۡلُواْ عَلَى ٱللَّهِۖ إِنِّيَ ءَاتِيكُمُۥ بِسُلۡطَٰنٖ مُّبِينٖ وَإِنِّي عُذۡتُ بِرَبِّي وَرَبِّكُمُۥ أَن تَرۡجُمُونِ وَإِن لَّمۡ تُؤۡمِنُواْ لِي فَٱعۡتَزِلُونِ

44:22

तब उसने अपने अभिभावक को पुकारा: “ये बहिष्कृतों की एक क़ौम है।”

فَدَعَا رَبَّهُۥ أَنَّ هَٰؤُلَآءِ قَوۡمٞ مُّجۡرِمُونَ

44:23–24

“मेरे आज्ञाकारियों के साथ रात में निकल जाओ, तुम्हारा पीछा किया जाएगा; और समुद्र को स्थिर छोड़ दो,

فَٱسۡرِ بِعِبَادِي لَيۡلًا إِنَّكُمُۥ مُتَّبَعُونَ وَٱتۡرُكِ ٱلۡبَحۡرَ رَهۡوًاۖ

क्योंकि वे एक सेना हैं जो डुबो दी जाएगी।”

إِنَّهُمُۥ جُندٞ مُّغۡرَقُونَ

44:25–27

कितने उद्यान और सोते उन्होंने छोड़े, और खेतियाँ, और सम्मानित पद, और सुख-सुविधा जिसमें वे आनंद लेते थे।

كَمۡ تَرَكُواْ مِن جَنَّٰتٖ وَعِيُونٖ وَزُرُوعٖ وَمَقَامٖ كَرِيمٖ وَنَعۡمَةٖ كَانُواْ فِيهَا فَٰكِهِينَ

ऐसा ही।

كَذَٰلِكَۖ

और हमने उसे दूसरी क़ौम को विरासत में दिलाया।

وَأَوۡرَثۡنَٰهَا قَوۡمًا ءَاخَرِينَ

44:29

न आकाश उन पर रोया और न धरती, और उन्हें मोहलत नहीं मिली।

فَمَا بَكَتۡ عَلَيۡهِمُ ٱلسَّمَآءُ وَٱلۡأَرۡضُ وَمَا كَانُواْ مُنظَرِينَ

44:30–31

हमने निश्चय ही इसराईल की संतान को अपमानजनक दंड से उबारा, फ़िरऔन से,

وَلَقَدۡ نَجَّيۡنَا بَنِي إِسۡرَٰٓءِيلَ مِنَ ٱلۡعَذَابِ ٱلۡمُهِينِ مِن فِرۡعَوۡنَۚ

क्योंकि वह अतिवादियों में से, उद्धत था।

إِنَّهُۥ كَانَ عَالِيٗا مِّنَ ٱلۡمُسۡرِفِينَ

44:32–33

हमने निश्चय ही उनका पूरे ज्ञान के साथ चयन किया, सभी प्राणियों से ऊपर, और हमने उन्हें संकेतों में से वह दिया जिसमें स्पष्ट रूप से परखने वाली बात थी।

وَلَقَدِ ٱخۡتَرۡنَٰهُمُۥ عَلَىٰ عِلۡمٍ عَلَى ٱلۡعَٰلَمِينَ وَءَاتَيۡنَٰهُمُۥ مِنَ ٱلۡأٓيَٰتِ مَا فِيهِۦ بَلَٰٓؤٞاْ مُّبِينٌ

44:34–36

वे अवश्य कहते हैं: “हमारी पहली मृत्यु के सिवा कुछ नहीं, और हम फैलाए नहीं जाएँगे। तो हमारे पूर्वजों को ले आओ, यदि तुम सच्चे हो।”

إِنَّ هَٰؤُلَآءِ لَيَقُولُونَ إِنۡ هِيَ إِلَّا مَوۡتَتُنَا ٱلۡأُولَىٰ وَمَا نَحۡنُ بِمُنشَرِينَ فَأۡتُواْ بِـَٔابَآئِنَا إِن كُنتُمُۥ صَٰدِقِينَ

क्या वे बेहतर हैं, या तुब्बा की क़ौम?

أَهُمُۥ خَيۡرٌ أَمۡ قَوۡمُ تُبَّعٖ

और जो उनसे पहले थे, उन्हें हमने नष्ट कर दिया,

وَٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمُۥ أَهۡلَكۡنَٰهُمُۥۚ

क्योंकि वे बहिष्कृत थे।

إِنَّهُمُۥ كَانُواْ مُجۡرِمِينَ

44:38

हमने आकाशों और धरती और जो उनके बीच है उसे खेलते हुए नहीं रचा।

وَمَا خَلَقۡنَا ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَمَا بَيۡنَهُمَا لَٰعِبِينَ

44:39

हमने उन्हें केवल पूर्ण सत्य के साथ रचा है,

مَا خَلَقۡنَٰهُمَا إِلَّا بِٱلۡحَقِّ

परंतु उनमें से अधिकतर नहीं जानते।

وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمُۥ لَا يَعۡلَمُونَ

पृथक्करण का दिन निश्चय ही उन सबके लिए निश्चित वादे का समय है, वह दिन जब कोई हिमायती किसी हिमायती के कुछ काम न आएगा, और उन्हें सहायता नहीं दी जाएगी — सिवा उसके जिस पर ईश्वर दया करे,

إِنَّ يَوۡمَ ٱلۡفَصۡلِ مِيقَٰتُهُمُۥ أَجۡمَعِينَ يَوۡمَ لَا يُغۡنِي مَوۡلًى عَن مَّوۡلٗى شَيۡـٔٗا وَلَا هُمُۥ يُنصَرُونَ إِلَّا مَن رَّحِمَ ٱللَّهُۚ

44:40–42

क्योंकि वही सर्वशक्तिमान, दयालु है।

إِنَّهُۥ هُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ

44:43–46

ज़क़्क़ूम का वृक्ष निश्चय ही अड़ियल अपराधी का भोजन है; पिघली धातु की तरह वह पेटों में खौलता है जैसे खौलता पानी खौलता है।

إِنَّ شَجَرَتَ ٱلزَّقُّومِ طَعَامُ ٱلۡأَثِيمِ كَٱلۡمُهۡلِ يَغۡلِي فِي ٱلۡبُطُونِ كَغَلۡيِ ٱلۡحَمِيمِ

44:47–49

“उसे पकड़ो और घसीटकर भट्ठी के बीच ले जाओ, फिर उसके सिर पर खौलते पानी का दंड उँडेलो। चखो!

خُذُوهُۥ فَٱعۡتُلُوهُۥ إِلَىٰ سَوَآءِ ٱلۡجَحِيمِ ثُمَّ صُبُّواْ فَوۡقَ رَأۡسِهِۦ مِنۡ عَذَابِ ٱلۡحَمِيمِ ذُقۡ

44:47–49

क्योंकि तुम ही तो शक्तिशाली, सम्मानित हो!”

إِنَّكَ أَنتَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡكَرِيمُ

यही निश्चय ही वह है जिसमें तुम वाद-प्रतिवाद करते थे।

إِنَّ هَٰذَا مَا كُنتُمُۥ بِهِۦ تَمۡتَرُونَ

44:51–53

सावधानी बरतने वाले निश्चय ही एक सुरक्षित स्थान में होंगे, उद्यानों और सोतों में, महीन रेशम और कमख़ाब पहने हुए, आमने-सामने।

إِنَّ ٱلۡمُتَّقِينَ فِي مَقَامٍ أَمِينٖ فِي جَنَّٰتٖ وَعِيُونٖ يَلۡبَسُونَ مِن سُندُسٖ وَإِسۡتَبۡرَقٖ مُّتَقَٰبِلِينَ

ऐसा ही।

كَذَٰلِكَ

44:54

और हम उन्हें सहारा देने वाले वार्ताकारों से मिलाएँगे।

وَزَوَّجۡنَٰهُمُۥ بِحُورٍ عِينٖ

वे वहाँ हर स्वाद माँगेंगे, पूर्ण सुरक्षा में।

يَدۡعُونَ فِيهَا بِكُلِّ فَٰكِهَةٍ ءَامِنِينَ

44:56

वे वहाँ मृत्यु का स्वाद नहीं चखेंगे,

لَا يَذُوقُونَ فِيهَا ٱلۡمَوۡتَ

44:56

सिवा पहली मृत्यु के।

إِلَّا ٱلۡمَوۡتَةَ ٱلۡأُولَىٰۖ

44:57

और वह उन्हें भट्ठी के दंड से बचा चुका होगा, तुम्हारे अभिभावक की ओर से एक अनुग्रह के रूप में।

وَوَقَىٰهُمُۥ عَذَابَ ٱلۡجَحِيمِ فَضۡلٗا مِّن رَّبِّكَۚ

यही विशाल विजय है।

ذَٰلِكَ هُوَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ

44:58

हमने उसे तुम्हारी भाषा में केवल इस आशा में सुगम किया है कि वे स्मरण करेंगे।

فَإِنَّمَا يَسَّرۡنَٰهُۥ بِلِسَانِكَ لَعَلَّهُمُۥ يَتَذَكَّرُونَ

44:59

इसलिए ताक में रहो,

فَٱرۡتَقِبۡ

44:59

क्योंकि वे ताक में हैं।

إِنَّهُمُۥ مُرۡتَقِبُونَ

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