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القرآن
Sura2

Al-Baqara البقرة

Guidance for those who guard themselves هدًى للمتّقين

الم

286 पदSection ICloses the section: its shelfmark

  1. 6
  2. 5
  3. 4
  4. 3
  5. 2
The Guardian of every thing, then the Scripture
Summary and links in the frieze

In the frieze He receives the Scripture as guidance, stories of Adam, the Sons of Israel, Ibrahim, then rules, and ends praying.

Read just before, 3 leads here: God graced the believers with a messenger from among them (3:164); sura 2 lets us hear Ibrahim and Isma'il asking for him (2:129). 3

It leads to 1: The answer comes first, guidance for those who guard themselves (2:2); sura 1, last of all, asks: "Guide us on the straight path". 1

Read the notice in the frieze

Closes on “This is the Scripture: no doubt possible”

Threshold of sections I and VI

Read the section from its beginning: sura 6

Read with: the suras of the same shelf mark

  • 3 The clan of Imran, then the woundthe twin of 2: the dispute and the combat lived through
  • 29 The house of the spiderthe trial of those who say “We believe”
  • 30 Before and afterthe signs, and the Law that does not change
  • 31 The wisdom of Luqmanwisdom passed on from a father to his son
  • 32 The day of the openingthe descent, and those who fall down in prostration
2:1

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। الٓمٓ (Alif Lam Mim)।

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ الٓمٓۚ

2:2

यह ग्रंथ है: इसमें कोई संदेह नहीं,

ذَٰلِكَ ٱلۡكِتَٰبُ لَا رَيۡبَۛ

2:3

इसमें मार्गदर्शन है उनके लिए जो सावधान रहते हैं, जो विश्वास करते हैं भले ही वह उनकी इंद्रियों से परे हो, संपर्क बनाए रखते हैं, और उसमें से ख़र्च करते हैं जो हमने उन्हें जीविका के रूप में दिया है,

فِيهِۦۛ هُدٗى لِّلۡمُتَّقِينَ ٱلَّذِينَ يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡغَيۡبِ وَيُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَمِمَّا رَزَقۡنَٰهُمُۥ يُنفِقُونَ

और जो उस पर विश्वास करते हैं जो तुम पर उतारा गया और जो तुमसे पहले उतारा गया, और जिन्हें अंतिम जीवन का यक़ीन है — वही अपने अभिभावक की ओर से मार्गदर्शन पर हैं,

وَٱلَّذِينَ يُؤۡمِنُونَ بِمَا أُنزِلَ إِلَيۡكَ وَمَا أُنزِلَ مِن قَبۡلِكَ وَبِٱلۡأٓخِرَةِ هُمُۥ يُوقِنُونَ أُوْلَٰٓئِكَ عَلَىٰ هُدٗى مِّن رَّبِّهِمُۥۖ

और वही सफल होने वाले हैं।

وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُفۡلِحُونَ

2:6

जो नकारते हैं, उनके लिए निश्चय ही बराबर है कि तुम उन्हें चेतावनी दो या न दो: वे विश्वास नहीं करते।

إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ سَوَآءٌ عَلَيۡهِمُۥ ءَا۬نذَرۡتَهُمُۥ أَمۡ لَمۡ تُنذِرۡهُمُۥ لَا يُؤۡمِنُونَ

2:7

ईश्वर ने उनके मर्मों और उनके श्रवण पर मुहर लगा दी है,

خَتَمَ ٱللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمُۥ وَعَلَىٰ سَمۡعِهِمُۥۖ

2:7

और उनकी दृष्टियों पर आवरण है जो उन्हें ढके हुए है;

وَعَلَىٰ أَبۡصَٰرِهِمُۥ غِشَٰوَةٞۖ

और उनके लिए विशाल दंड होगा।

وَلَهُمُۥ عَذَابٌ عَظِيمٞ

और लोगों में कुछ ऐसे हैं जो कहते हैं: “हम ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास करते हैं”, जबकि वे विश्वास करने वाले नहीं हैं।

وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يَقُولُ ءَامَنَّا بِٱللَّهِ وَبِٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ وَمَا هُمُۥ بِمُؤۡمِنِينَ

वे ईश्वर को और उन्हें छलना चाहते हैं जिन्होंने विश्वास किया,

يُخَٰدِعُونَ ٱللَّهَ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ

2:9

किंतु वे केवल स्वयं को छलते हैं, और उन्हें इसका आभास नहीं।

وَمَا يُخَٰدِعُونَ إِلَّا أَنفُسَهُمُۥ وَمَا يَشۡعُرُونَ

2:10

उनके मर्मों में एक रोग है,

فِي قُلُوبِهِمُۥ مَرَضٞ

और ईश्वर ने उनका रोग बढ़ा दिया है;

فَزَادَهُمُ ٱللَّهُ مَرَضٗاۖ

2:10

और उनके लिए पीड़ादायक दंड होगा, इसलिए कि वे झूठ बोलते थे।

وَلَهُمُۥ عَذَابٌ أَلِيمُۢ بِمَا كَانُواْ يُكَذِّبُونَ

और जब उनसे कहा जाता है: “धरती पर बिगाड़ न फैलाओ”, तो वे कहते हैं: “हम तो केवल सुधार करने वाले हैं।”

وَإِذَا قِيلَ لَهُمُۥ لَا تُفۡسِدُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ قَالُواْ إِنَّمَا نَحۡنُ مُصۡلِحُونَ

2:12

क्या ऐसा नहीं है: वही निश्चय ही बिगाड़ने वाले हैं; किंतु उन्हें इसका आभास नहीं।

أَلَا إِنَّهُمُۥ هُمُ ٱلۡمُفۡسِدُونَ وَلَٰكِن لَّا يَشۡعُرُونَ

2:13

और जब उनसे कहा जाता है: “विश्वास करो जैसे लोगों ने विश्वास किया”, तो वे कहते हैं: “क्या हम वैसे विश्वास करें जैसे मूर्खों ने विश्वास किया?”

وَإِذَا قِيلَ لَهُمُۥ ءَامِنُواْ كَمَا ءَامَنَ ٱلنَّاسُ قَالُواْ أَنُؤۡمِنُ كَمَا ءَامَنَ ٱلسُّفَهَآءُۗ

क्या ऐसा नहीं है: वही निश्चय ही मूर्ख हैं; किंतु वे जानते नहीं।

اَ۬لَا إِنَّهُمُۥ هُمُ ٱلسُّفَهَآءُ وَلَٰكِن لَّا يَعۡلَمُونَ

और जब वे उनसे मिलते हैं जिन्होंने विश्वास किया, तो कहते हैं: “हमने विश्वास किया”;

وَإِذَا لَقُواْ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ قَالُواْ ءَامَنَّا

2:14

और जब वे अपने बहकाने वालों के साथ अकेले होते हैं, तो कहते हैं: “हम निश्चय ही तुम्हारे साथ हैं, हम तो केवल मज़ाक़ उड़ा रहे हैं।”

وَإِذَا خَلَوۡاْ إِلَىٰ شَيَٰطِينِهِمُۥ قَالُواْ إِنَّا مَعَكُمُۥ إِنَّمَا نَحۡنُ مُسۡتَهۡزِءُونَ

2:15

ईश्वर उनका मज़ाक़ उड़ाता है, और उन्हें उनकी मर्यादाहीनता में बढ़ने देता है, जिसमें वे टटोलते फिरते हैं।

ٱللَّهُ يَسۡتَهۡزِئُ بِهِمُۥ وَيَمُدُّهُمُۥ فِي طُغۡيَٰنِهِمُۥ يَعۡمَهُونَ

2:16

यही वे हैं जिन्होंने मार्गदर्शन के बदले भटकाव ख़रीदा; इसलिए उनका व्यापार लाभदायक न रहा, और वे मार्गदर्शन पाने वाले न थे।

أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ ٱشۡتَرَوُاْ ٱلضَّلَٰلَةَ بِٱلۡهُدَىٰ فَمَا رَبِحَت تِّجَٰرَتُهُمُۥ وَمَا كَانُواْ مُهۡتَدِينَ

2:17

उनका उदाहरण उस व्यक्ति का उदाहरण है जो आग जलाता है; जब वह अपने आसपास को प्रकाशित कर चुका,

مَثَلُهُمُۥ كَمَثَلِ ٱلَّذِي ٱسۡتَوۡقَدَ نَارٗا فَلَمَّا أَضَآءَتۡ مَا حَوۡلَهُۥ

ईश्वर उनका प्रकाश ले जाता है और उन्हें अँधेरों में छोड़ देता है जहाँ उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता।

ذَهَبَ ٱللَّهُ بِنُورِهِمُۥ وَتَرَكَهُمُۥ فِي ظُلُمَٰتٖ لَّا يُبۡصِرُونَ

बहरे, गूँगे, अंधे, इसलिए वे नहीं लौटते।

صُمُّۢ بُكۡمٌ عُمۡيٞ فَهُمُۥ لَا يَرۡجِعُونَ

2:19

या जैसे आकाश से मूसलाधार वर्षा, जिसमें अँधेरे, गरज और बिजलियाँ हैं:

أَوۡ كَصَيِّبٖ مِّنَ ٱلسَّمَآءِ فِيهِۦ ظُلُمَٰتٞ وَرَعۡدٞ وَبَرۡقٞ

वे वज्रपात के कारण अपनी उँगलियाँ अपने कानों में डालते हैं, मृत्यु से सतर्क होकर।

يَجۡعَلُونَ أَصَٰبِعَهُمُۥ فِي ءَاذَانِهِمُۥ مِنَ ٱلصَّوَٰعِقِ حَذَرَ ٱلۡمَوۡتِۚ

ईश्वर नकारने वालों को पूरी तरह घेरे हुए है।

وَٱللَّهُ مُحِيطُۢ بِٱلۡكَٰفِرِينَ

बिजली उनकी दृष्टियाँ उचक ले जाने को है।

يَكَادُ ٱلۡبَرۡقُ يَخۡطَفُ أَبۡصَٰرَهُمُۥۖ

जब भी वह उन्हें प्रकाशित करती है, वे चलते हैं;

كُلَّمَا أَضَآءَ لَهُمُۥ مَشَوۡاْ فِيهِۦ

और जब उन पर अँधेरा छा जाता है, वे ठिठककर खड़े रह जाते हैं।

وَإِذَا أَظۡلَمَ عَلَيۡهِمُۥ قَامُواْۚ

और यदि ईश्वर की मर्ज़ी होती, तो वह उनका श्रवण और उनकी दृष्टियाँ ज़रूर ले जाता,

وَلَوۡ شَآءَ ٱللَّهُ لَذَهَبَ بِسَمۡعِهِمُۥ وَأَبۡصَٰرِهِمُۥۚ

क्योंकि ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।

إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ

2:21

हे लोगो! अपने अभिभावक की आज्ञा का पालन करो, जिसने तुम्हें और तुमसे पहले वालों को रचा, शायद तुम सावधान रहो,

يَٰأَيُّهَا ٱلنَّاسُ ٱعۡبُدُواْ رَبَّكُمُ ٱلَّذِي خَلَقَكُمُۥ وَٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِكُمُۥ لَعَلَّكُمُۥ تَتَّقُونَ

वही जिसने तुम्हारे लिए धरती को बिछौना बनाया, और आकाश को एक निर्मिति, और जिसने आकाश से पानी उतारा, जिससे उसने तुम्हारे लिए जीविका के रूप में फल निकाले।

ٱلَّذِي جَعَلَ لَكُمُ ٱلۡأَرۡضَ فِرَٰشٗا وَٱلسَّمَآءَ بِنَآءٗ وَأَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَخۡرَجَ بِهِۦ مِنَ ٱلثَّمَرَٰتِ رِزۡقٗا لَّكُمُۥۖ

इसलिए ईश्वर के प्रतिद्वंद्वी न ठहराओ, जबकि तुम जानते हो।

فَلَا تَجۡعَلُواْ لِلَّهِ أَندَادٗا وَأَنتُمُۥ تَعۡلَمُونَ

2:23

और यदि तुम उसके विषय में संदेह में हो जो हमने अपने आज्ञाकारी पर उतारा है, तो उसके जैसी एक सूरा ले आओ,

وَإِن كُنتُمُۥ فِي رَيۡبٖ مِّمَّا نَزَّلۡنَا عَلَىٰ عَبۡدِنَا فَأۡتُواْ بِسُورَةٖ مِّن مِّثۡلِهِۦ

और ईश्वर के अतिरिक्त अपने साक्षियों को बुलाओ, यदि तुम सच्चे हो।

وَٱدۡعُواْ شُهَدَآءَكُمُۥ مِن دُونِ ٱللَّهِ إِن كُنتُمُۥ صَٰدِقِينَ

यदि तुम ऐसा नहीं करते — और तुम कभी नहीं कर पाओगे — तो उस आग से सावधान रहो, जिसका ईंधन लोग और पत्थर हैं,

فَإِن لَّمۡ تَفۡعَلُواْ وَلَن تَفۡعَلُواْ فَٱتَّقُواْ ٱلنَّارَ ٱلَّتِي وَقُودُهَا ٱلنَّاسُ وَٱلۡحِجَارَةُۖ

जो नकारने वालों के लिए तैयार की गई है।

أُعِدَّتۡ لِلۡكَٰفِرِينَ

और उन्हें शुभ समाचार दो जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए कि उनके लिए ऐसे उद्यान होंगे जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं।

وَبَشِّرِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ أَنَّ لَهُمُۥ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُۖ

2:25

जब भी उन्हें वहाँ जीविका के रूप में कोई फल दिया जाता है, वे कहते हैं: “यह वही है जो हमें पहले दिया गया था”;

كُلَّمَا رُزِقُواْ مِنۡهَا مِن ثَمَرَةٖ رِّزۡقٗا قَالُواْ هَٰذَا ٱلَّذِي رُزِقۡنَا مِن قَبۡلُۖ

और वह उन्हें मिलता-जुलता लाया जाता है।

وَأُتُواْ بِهِۦ مُتَشَٰبِهٗاۖ

और वहाँ उनके लिए स्वच्छ किए हुए जोड़ीदार होंगे,

وَلَهُمُۥ فِيهَا أَزۡوَٰجٞ مُّطَهَّرَةٞۖ

और वे वहाँ सदा रहते हैं।

وَهُمُۥ فِيهَا خَٰلِدُونَ

2:26

ईश्वर निश्चय ही कोई उदाहरण जोड़ने में संकोच नहीं करता, चाहे वह मच्छर का हो या उससे भी अधिक का।

۞ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَسۡتَحۡيِۦ أَن يَضۡرِبَ مَثَلٗا مَّا بَعُوضَةٗ فَمَا فَوۡقَهَاۚ

जहाँ तक उनका प्रश्न है जिन्होंने विश्वास किया, वे जानते हैं कि यह उनके अभिभावक की ओर से सत्य है;

فَأَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ فَيَعۡلَمُونَ أَنَّهُ ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّهِمُۥۖ

और जहाँ तक उनका प्रश्न है जो नकारते हैं, वे कहते हैं: “इस उदाहरण से ईश्वर ने क्या चाहा है?”

وَأَمَّا ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ فَيَقُولُونَ مَاذَا أَرَادَ ٱللَّهُ بِهَٰذَا مَثَلٗاۘ

वह इससे बहुतों को भटकाता है, और इससे बहुतों को मार्ग दिखाता है;

يُضِلُّ بِهِۦ كَثِيرٗا وَيَهۡدِي بِهِۦ كَثِيرٗاۚ

2:27

और वह इससे केवल अतिक्रमणकारियों को भटकाता है, जो ईश्वर की संधि को, उसे बाँधने वाली गंभीर प्रतिज्ञा के बाद, तोड़ते हैं, उसे काटते हैं जिसे ईश्वर ने जोड़ने का आदेश दिया है, और धरती पर बिगाड़ फैलाते हैं।

وَمَا يُضِلُّ بِهِۦ إِلَّا ٱلۡفَٰسِقِينَ ٱلَّذِينَ يَنقُضُونَ عَهۡدَ ٱللَّهِ مِنۢ بَعۡدِ مِيثَٰقِهِۦ وَيَقۡطَعُونَ مَا أَمَرَ ٱللَّهُ بِهِۦ أَن يُوصَلَ وَيُفۡسِدُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِۚ

यही घाटा उठाने वाले हैं।

أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ

2:28

तुम ईश्वर को कैसे नकार सकते हो, जबकि तुम मृत थे और उसने तुम्हें जीवन दिया; फिर वह तुम्हें मृत्यु देगा,

كَيۡفَ تَكۡفُرُونَ بِٱللَّهِ وَكُنتُمُۥ أَمۡوَٰتٗا فَأَحۡيَٰكُمُۥۖ ثُمَّ يُمِيتُكُمُۥ

फिर तुम्हें पुनः जीवन देगा, फिर उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे?

ثُمَّ يُحۡيِيكُمُۥ ثُمَّ إِلَيۡهِۦ تُرۡجَعُونَ

वही है जिसने तुम्हारे लिए वह सब रचा जो धरती पर है,

هُوَ ٱلَّذِي خَلَقَ لَكُمُۥ مَا فِي ٱلۡأَرۡضِ جَمِيعٗا

2:29

फिर वह आकाश की ओर मुड़ा, और उसने उन्हें सात आकाशों के रूप में गढ़ा;

ثُمَّ ٱسۡتَوَىٰ إِلَى ٱلسَّمَآءِ فَسَوَّىٰهُنَّ سَبۡعَ سَمَٰوَٰتٖۚ

और वह हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।

وَهُوَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٞ

2:30

और जब तुम्हारे अभिभावक ने अभिकर्ताओं से कहा: “मैं धरती पर एक उत्तराधिकारी रखने वाला हूँ।”

وَإِذۡ قَالَ رَبُّكَ لِلۡمَلَٰٓئِكَةِ إِنِّي جَاعِلٞ فِي ٱلۡأَرۡضِ خَلِيفَةٗۖ

2:30

उन्होंने कहा: “क्या आप उसमें ऐसे को रखेंगे जो वहाँ बिगाड़ फैलाएगा और रक्त बहाएगा, जबकि हम आपकी प्रशंसा करते हुए आपकी महिमा गाते हैं और आपकी पवित्रता की घोषणा करते हैं?”

قَالُواْ أَتَجۡعَلُ فِيهَا مَن يُفۡسِدُ فِيهَا وَيَسۡفِكُ ٱلدِّمَآءَ وَنَحۡنُ نُسَبِّحُ بِحَمۡدِكَ وَنُقَدِّسُ لَكَۖ

उसने कहा: “मैं निश्चय ही वह जानता हूँ जो तुम नहीं जानते।”

قَالَ إِنِّيَ أَعۡلَمُ مَا لَا تَعۡلَمُونَ

2:31

और उसने आदम को सभी गुण सिखाए, फिर उन्हें अभिकर्ताओं के सामने रखा, और कहा: “मुझे इनके गुणों की सूचना दो, यदि तुम सच्चे हो।”

وَعَلَّمَ ءَادَمَ ٱلۡأَسۡمَآءَ كُلَّهَا ثُمَّ عَرَضَهُمُۥ عَلَى ٱلۡمَلَٰٓئِكَةِ فَقَالَ أَنۢبِـُٔونِي بِأَسۡمَآءِ هَٰؤُلَآءِ ا۪ن كُنتُمُۥ صَٰدِقِينَ

उन्होंने कहा: “आपकी महिमा हो! हमें केवल उतना ही ज्ञान है जितना आपने हमें सिखाया; निश्चय ही आप ही सर्वज्ञ, प्रज्ञावान हैं।”

قَالُواْ سُبۡحَٰنَكَ لَا عِلۡمَ لَنَا إِلَّا مَا عَلَّمۡتَنَاۖ إِنَّكَ أَنتَ ٱلۡعَلِيمُ ٱلۡحَكِيمُ

2:33

उसने कहा: “हे आदम! इन्हें इनके गुणों की सूचना दो।”

قَالَ يَٰـَٔادَمُ أَنۢبِئۡهُمُۥ بِأَسۡمَآئِهِمُۥۖ

2:33

और जब उसने उन्हें उनके गुणों की सूचना दे दी, तो उसने कहा: “क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि मैं आकाशों और धरती में जो इंद्रियों से परे है उसे जानता हूँ, और जो तुम प्रकट करते हो और जो तुम दबाते थे उसे मैं जानता हूँ?”

فَلَمَّا أَنۢبَأَهُمُۥ بِأَسۡمَآئِهِمُۥ قَالَ أَلَمۡ أَقُل لَّكُمُۥ إِنِّيَ أَعۡلَمُ غَيۡبَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَأَعۡلَمُ مَا تُبۡدُونَ وَمَا كُنتُمُۥ تَكۡتُمُونَ

2:34

और जब हमने अभिकर्ताओं से कहा: “आदम के सामने माथा टेको”, तो उन्होंने माथा टेका,

وَإِذۡ قُلۡنَا لِلۡمَلَٰٓئِكَةِ ٱسۡجُدُواْ لِأٓدَمَ فَسَجَدُواْ

2:34

सिवा इब्लीस के: उसने इनकार किया, घमंड से फूल गया, और नकारने वालों में से हो गया।

إِلَّا إِبۡلِيسَ أَبَىٰ وَٱسۡتَكۡبَرَ وَكَانَ مِنَ ٱلۡكَٰفِرِينَ

2:35

और हमने कहा: “हे आदम! तुम और तुम्हारा जोड़ीदार उद्यान में रहो, और उसमें से भरपूर खाओ, जहाँ से तुम्हारी मर्ज़ी हो,

وَقُلۡنَا يَٰـَٔادَمُ ٱسۡكُنۡ أَنتَ وَزَوۡجُكَ ٱلۡجَنَّةَ وَكُلَا مِنۡهَا رَغَدًا حَيۡثُ شِئۡتُمَا

2:35

किंतु इस पेड़ के पास न जाना, नहीं तो तुम अन्यायियों में से हो जाओगे।”

وَلَا تَقۡرَبَا هَٰذِهِ ٱلشَّجَرَةَ فَتَكُونَا مِنَ ٱلظَّٰلِمِينَ

2:36

किंतु बहकाने वाले ने उन्हें वहाँ से फिसला दिया, और उन्हें उस दशा से निकाल दिया जिसमें वे थे;

فَأَزَلَّهُمَا ٱلشَّيۡطَٰنُ عَنۡهَا فَأَخۡرَجَهُمَا مِمَّا كَانَا فِيهِۦۖ

2:36

और हमने कहा: “नीचे जाओ,

وَقُلۡنَا ٱهۡبِطُواْ

2:36

एक-दूसरे के शत्रु बनकर,

بَعۡضُكُمُۥ لِبَعۡضٍ عَدُوّٞۖ

और धरती पर तुम्हारे लिए एक ठौर और एक समय तक का उपभोग होगा।”

وَلَكُمُۥ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُسۡتَقَرّٞ وَمَتَٰعٌ إِلَىٰ حِينٖ

2:37

फिर आदम ने अपने अभिभावक से कुछ बोल पाए, और वह अनुकंपा के साथ उसकी ओर पलटा,

فَتَلَقَّىٰ ءَادَمَ مِن رَّبِّهِۦ كَلِمَٰتٞ فَتَابَ عَلَيۡهِۦۚ

क्योंकि वही निरंतर पलट आने वाला, दयालु है।

إِنَّهُۥ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

2:38

हमने कहा: “यहाँ से नीचे जाओ, सब के सब;

قُلۡنَا ٱهۡبِطُواْ مِنۡهَا جَمِيعٗاۖ

2:38

फिर यदि मेरी ओर से तुम्हारे पास मार्गदर्शन आए, तो जो मेरे मार्गदर्शन पर चले, उन पर कोई डर नहीं, और न वे दुखी होंगे।

فَإِمَّا يَأۡتِيَنَّكُمُۥ مِنِّي هُدٗى فَمَن تَبِعَ هُدَايَ فَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمُۥ وَلَا هُمُۥ يَحۡزَنُونَ

और जो नकारते हैं और हमारे संकेतों को झुठलाते हैं — वही आग वाले हैं, वे उसमें सदा रहते हैं।”

وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَكَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِۖ هُمُۥ فِيهَا خَٰلِدُونَ

2:40

हे इसराईल की संतान! मेरे उपकार का स्मरण करो, वह जिससे मैंने तुम्हें भर दिया, और मेरी संधि को निभाओ, मैं तुम्हारी संधि को निभाऊँगा; और तुम्हें मेरे ही प्रति आदर रखना चाहिए।

يَٰبَنِي إِسۡرَٰٓءِيلَ ٱذۡكُرُواْ نِعۡمَتِيَ ٱلَّتِي أَنۡعَمۡتُ عَلَيۡكُمُۥ وَأَوۡفُواْ بِعَهۡدِي أُوفِ بِعَهۡدِكُمُۥ وَإِيَّٰيَ فَٱرۡهَبُونِ

और उस पर विश्वास करो जो मैंने उतारा है, जो उसकी पुष्टि करता है जो तुम्हारे पास है, और उसे नकारने वालों में पहले मत बनो;

وَءَامِنُواْ بِمَا أَنزَلۡتُ مُصَدِّقٗا لِّمَا مَعَكُمُۥ وَلَا تَكُونُواْ أَوَّلَ كَافِرِۭ بِهِۦۖ

2:41

और मेरे संकेतों के बदले तुच्छ मूल्य न ख़रीदो; और तुम्हें मेरे ही प्रति सावधान रहना चाहिए।

وَلَا تَشۡتَرُواْ بِـَٔايَٰتِي ثَمَنٗا قَلِيلٗا وَإِيَّٰيَ فَٱتَّقُونِ

और सत्य पर असत्य का आवरण न चढ़ाओ, और सत्य को मत दबाओ, जबकि तुम जानते हो।

وَلَا تَلۡبِسُواْ ٱلۡحَقَّ بِٱلۡبَٰطِلِ وَتَكۡتُمُواْ ٱلۡحَقَّ وَأَنتُمُۥ تَعۡلَمُونَ

और संपर्क बनाए रखो, और शुद्ध उदारता दो,

وَأَقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُواْ ٱلزَّكَوٰةَ

2:43

और घुटने टेकने वालों के साथ घुटने टेको।

وَٱرۡكَعُواْ مَعَ ٱلرَّٰكِعِينَ

2:44

क्या तुम लोगों को सद्गुण का आदेश देते हो, और स्वयं को भूल जाते हो, जबकि तुम ग्रंथ सुनाते हो?

۞ أَتَأۡمُرُونَ ٱلنَّاسَ بِٱلۡبِرِّ وَتَنسَوۡنَ أَنفُسَكُمُۥ وَأَنتُمُۥ تَتۡلُونَ ٱلۡكِتَٰبَۚ

तो क्या तुम बुद्धि से काम नहीं लेते?

أَفَلَا تَعۡقِلُونَ

2:45

और धैर्य और संपर्क से मदद माँगो:

وَٱسۡتَعِينُواْ بِٱلصَّبۡرِ وَٱلصَّلَوٰةِۚ

2:46

यह अवश्य भारी है, सिवा विनीतों के, जो अनुमान लगाते हैं कि वे अपने अभिभावक से मिलेंगे, और यह कि उसी की ओर वे लौटते हैं।

وَإِنَّهَا لَكَبِيرَةٌ إِلَّا عَلَى ٱلۡخَٰشِعِينَ ٱلَّذِينَ يَظُنُّونَ أَنَّهُمُۥ مُلَٰقُواْ رَبِّهِمُۥ وَأَنَّهُمُۥ إِلَيۡهِۦ رَٰجِعُونَ

2:47

हे इसराईल की संतान! मेरे उपकार का स्मरण करो, वह जिससे मैंने तुम्हें भर दिया, और यह कि मैंने तुम्हें सभी प्राणियों से ऊपर वरीयता दी।

يَٰبَنِي إِسۡرَٰٓءِيلَ ٱذۡكُرُواْ نِعۡمَتِيَ ٱلَّتِي أَنۡعَمۡتُ عَلَيۡكُمُۥ وَأَنِّي فَضَّلۡتُكُمُۥ عَلَى ٱلۡعَٰلَمِينَ

2:48

और उस दिन से सावधान रहो जब कोई स्व किसी दूसरे स्व के कुछ भी काम नहीं आएगा, जब उससे कोई मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाएगी, जब उससे कोई प्रतिकर नहीं लिया जाएगा, और जब उनकी सहायता नहीं की जाएगी।

وَٱتَّقُواْ يَوۡمٗا لَّا تَجۡزِي نَفۡسٌ عَن نَّفۡسٖ شَيۡـٔٗا وَلَا تُقۡبَلُ مِنۡهَا شَفَٰعَةٞ وَلَا يُؤۡخَذُ مِنۡهَا عَدۡلٞ وَلَا هُمُۥ يُنصَرُونَ

2:49

और जब हमने तुम्हें फ़िरऔन के कुल से उबारा, जो तुम्हें बुरा दंड देता था, तुम्हारे बेटों का गला काटता था और तुम्हारी स्त्रियों की लाज पर आघात करता था —

وَإِذۡ نَجَّيۡنَٰكُمُۥ مِنۡ ءَالِ فِرۡعَوۡنَ يَسُومُونَكُمُۥ سُوٓءَ ٱلۡعَذَابِ يُذَبِّحُونَ أَبۡنَآءَكُمُۥ وَيَسۡتَحۡيُونَ نِسَآءَكُمُۥۚ

और उसमें तुम्हारे अभिभावक की ओर से वह था जो विशाल रूप से परखता है।

وَفِي ذَٰلِكُمُۥ بَلَآءٞ مِّن رَّبِّكُمُۥ عَظِيمٞ

2:50

और जब हमने तुम्हारे लिए समुद्र को चीरा, और तुम्हें उबारा, और फ़िरऔन के कुल को डुबो दिया, जबकि तुम नज़र डाल रहे थे।

وَإِذۡ فَرَقۡنَا بِكُمُ ٱلۡبَحۡرَ فَأَنجَيۡنَٰكُمُۥ وَأَغۡرَقۡنَا ءَالَ فِرۡعَوۡنَ وَأَنتُمُۥ تَنظُرُونَ

2:51

और जब हमने मूसा के लिए चालीस रातों का वादे का समय तय किया; फिर उसके बाद तुमने बछड़े को अपना लिया, और तुम अन्याय करने वाले थे।

وَإِذۡ وَٰعَدۡنَا مُوسَىٰ أَرۡبَعِينَ لَيۡلَةٗ ثُمَّ ٱتَّخَذۡتُمُ ٱلۡعِجۡلَ مِنۢ بَعۡدِهِۦ وَأَنتُمُۥ ظَٰلِمُونَ

फिर इसके बाद हमने तुमसे दरगुज़र किया, शायद तुम कृतज्ञ हो जाओ।

ثُمَّ عَفَوۡنَا عَنكُمُۥ مِنۢ بَعۡدِ ذَٰلِكَ لَعَلَّكُمُۥ تَشۡكُرُونَ

2:53

और जब हमने मूसा को ग्रंथ दिया

وَإِذۡ ءَاتَيۡنَا مُوسَى ٱلۡكِتَٰبَ

और विवेक, शायद तुम मार्गदर्शन पाओ।

وَٱلۡفُرۡقَانَ لَعَلَّكُمُۥ تَهۡتَدُونَ

2:54

और जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा: “हे मेरी क़ौम! तुमने बछड़े को अपनाकर निश्चय ही स्वयं पर अन्याय किया है; इसलिए उसकी ओर पलट आओ जिसने तुम्हें अस्तित्व दिया, और आपस में एक-दूसरे को मारो,

وَإِذۡ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوۡمِهِۦ يَٰقَوۡمِ إِنَّكُمُۥ ظَلَمۡتُمُۥ أَنفُسَكُمُۥ بِٱتِّخَاذِكُمُ ٱلۡعِجۡلَ فَتُوبُواْ إِلَىٰ بَارِئِكُمُۥ فَٱقۡتُلُواْ أَنفُسَكُمُۥ

2:54

यही तुम्हारे लिए उसके निकट, जिसने तुम्हें अस्तित्व दिया, बेहतर है।”

ذَٰلِكُمُۥ خَيۡرٞ لَّكُمُۥ عِندَ بَارِئِكُمُۥ

तब वह अनुकंपा के साथ तुम्हारी ओर पलटा,

فَتَابَ عَلَيۡكُمُۥۚ

क्योंकि वही निरंतर पलट आने वाला, दयालु है।

إِنَّهُۥ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

2:55

और जब तुमने कहा: “हे मूसा! हम तुम पर तब तक भरोसा नहीं करेंगे जब तक ईश्वर को खुलकर न देख लें”; तब वज्रपात ने तुम्हें पकड़ लिया, जबकि तुम नज़र डाल रहे थे।

وَإِذۡ قُلۡتُمُۥ يَٰمُوسَىٰ لَن نُّؤۡمِنَ لَكَ حَتَّىٰ نَرَى ٱللَّهَ جَهۡرَةٗ فَأَخَذَتۡكُمُ ٱلصَّٰعِقَةُ وَأَنتُمُۥ تَنظُرُونَ

फिर हमने तुम्हारी मृत्यु के बाद तुम्हें उठाया, शायद तुम कृतज्ञ हो जाओ।

ثُمَّ بَعَثۡنَٰكُمُۥ مِنۢ بَعۡدِ مَوۡتِكُمُۥ لَعَلَّكُمُۥ تَشۡكُرُونَ

और हमने तुम पर बादल की छाया फैलाई, और तुम पर मन्न और बटेरें उतारीं:

وَظَلَّلۡنَا عَلَيۡكُمُ ٱلۡغَمَامَ وَأَنزَلۡنَا عَلَيۡكُمُ ٱلۡمَنَّ وَٱلسَّلۡوَىٰۖ

“हमने तुम्हें जो जीविका दी है उसमें से अच्छी चीज़ें खाओ” —

كُلُواْ مِن طَيِّبَٰتِ مَا رَزَقۡنَٰكُمُۥۚ

2:57

उन्होंने हम पर अन्याय नहीं किया, बल्कि वे स्वयं पर ही अन्याय करते थे।

وَمَا ظَلَمُونَا وَلَٰكِن كَانُواْ أَنفُسَهُمُۥ يَظۡلِمُونَ

2:58

और जब हमने कहा: “इस बस्ती में प्रवेश करो, उसमें से जहाँ तुम्हारी मर्ज़ी हो भरपूर खाओ, द्वार से माथा टेके हुए प्रवेश करो, और कहो: हमें बोझमुक्त कीजिए — हम तुम्हारी भूलें क्षमा कर देंगे,

وَإِذۡ قُلۡنَا ٱدۡخُلُواْ هَٰذِهِ ٱلۡقَرۡيَةَ فَكُلُواْ مِنۡهَا حَيۡثُ شِئۡتُمُۥ رَغَدٗا وَٱدۡخُلُواْ ٱلۡبَابَ سُجَّدٗا وَقُولُواْ حِطَّةٞ نَّغۡفِرۡ لَكُمُۥ خَطَٰيَٰكُمُۥۚ

और भलाई करने वालों को हम और अधिक देंगे।”

وَسَنَزِيدُ ٱلۡمُحۡسِنِينَ

किंतु जो अन्यायी थे उन्होंने उस कथन को, जो उनसे कहा गया था, किसी और कथन से बदल दिया; तब हमने उन अन्यायियों पर आकाश से एक मलिनता उतारी, इसलिए कि उन्होंने अतिक्रमण किया।

فَبَدَّلَ ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ قَوۡلًا غَيۡرَ ٱلَّذِي قِيلَ لَهُمُۥ فَأَنزَلۡنَا عَلَى ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ رِجۡزٗا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ بِمَا كَانُواْ يَفۡسُقُونَ

2:60

और जब मूसा ने अपनी क़ौम के लिए पानी माँगा; हमने कहा: “अपनी छड़ी से चट्टान पर मारो”;

۞ وَإِذِ ٱسۡتَسۡقَىٰ مُوسَىٰ لِقَوۡمِهِۦ فَقُلۡنَا ٱضۡرِب بِّعَصَاكَ ٱلۡحَجَرَۖ

और देखो, उससे बारह सोते फूट निकले:

فَٱنفَجَرَتۡ مِنۡهُ ٱثۡنَتَا عَشۡرَةَ عَيۡنٗاۖ

लोगों के हर समूह ने अपने पानी पीने का स्थान जान लिया।

قَدۡ عَلِمَ كُلُّ أُنَاسٖ مَّشۡرَبَهُمُۥۖ

ईश्वर की दी हुई जीविका में से खाओ और पियो,

كُلُواْ وَٱشۡرَبُواْ مِن رِّزۡقِ ٱللَّهِ

और धरती पर उपद्रव न फैलाओ, बिगाड़ने वाले बनकर।

وَلَا تَعۡثَوۡاْ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُفۡسِدِينَ

2:61

और जब तुमने कहा: “हे मूसा! हम एक ही भोजन पर कभी धैर्य नहीं रख पाएँगे; इसलिए हमारे लिए अपने अभिभावक को पुकारो, कि वह हमारे लिए निकाले उसमें से जो धरती उगाती है, उसकी साग-सब्ज़ी, उसके खीरे, उसका लहसुन, उसकी मसूर और उसके प्याज़।”

وَإِذۡ قُلۡتُمُۥ يَٰمُوسَىٰ لَن نَّصۡبِرَ عَلَىٰ طَعَامٖ وَٰحِدٖ فَٱدۡعُ لَنَا رَبَّكَ يُخۡرِجۡ لَنَا مِمَّا تُنۢبِتُ ٱلۡأَرۡضُ مِنۢ بَقۡلِهَا وَقِثَّآئِهَا وَفُومِهَا وَعَدَسِهَا وَبَصَلِهَاۖ

2:61

उसने कहा: “क्या तुम उसे लेना चाहोगे जो निकट का है, उसके बदले जो बेहतर है?

قَالَ أَتَسۡتَبۡدِلُونَ ٱلَّذِي هُوَ أَدۡنَىٰ بِٱلَّذِي هُوَ خَيۡرٌۚ

2:61

तो मिसर में नीचे जाओ, क्योंकि वहाँ तुम्हें वह मिलेगा जो तुमने माँगा है।”

ٱهۡبِطُواْ مِصۡرٗا فَإِنَّ لَكُمُۥ مَا سَأَلۡتُمُۥۗ

2:61

और अपमान और दरिद्रता उन पर चिपका दी गई, और वे ईश्वर के क्रोध के पात्र बने।

وَضُرِبَتۡ عَلَيۡهِمُ ٱلذِّلَّةُ وَٱلۡمَسۡكَنَةُ وَبَآءُو بِغَضَبٖ مِّنَ ٱللَّهِۚ

2:61

यह इसलिए कि वे ईश्वर के संकेतों को नकारते थे, और सूचनादाताओं को बिना हक़ के मार डालते थे।

ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُۥ كَانُواْ يَكۡفُرُونَ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ وَيَقۡتُلُونَ ٱلنَّبِيِّـۧنَ بِغَيۡرِ ٱلۡحَقِّۚ

यह इसलिए कि उन्होंने अवज्ञा की और सीमाएँ पार कीं।

ذَٰلِكَ بِمَا عَصَواْ وَّكَانُواْ يَعۡتَدُونَ

2:62

निश्चय ही, जिन्होंने विश्वास किया, पुनरुन्मुख, सहायक और आकांक्षी — जिसने भी ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास किया, और एक भला कर्म किया, उनका पुरस्कार उनके अभिभावक के पास उनके लिए है, उन पर कोई डर नहीं, और न वे दुखी होंगे।

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَٱلَّذِينَ هَادُواْ وَٱلنَّصَٰرَىٰ وَٱلصَّٰبِـِٔينَ مَنۡ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ وَعَمِلَ صَٰلِحٗا فَلَهُمُۥ أَجۡرُهُمُۥ عِندَ رَبِّهِمُۥ وَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمُۥ وَلَا هُمُۥ يَحۡزَنُونَ

2:63

और जब हमने तुम्हारी गंभीर प्रतिज्ञा ली, और तुम्हारे ऊपर पर्वत को ऊँचा किया:

وَإِذۡ أَخَذۡنَا مِيثَٰقَكُمُۥ وَرَفَعۡنَا فَوۡقَكُمُ ٱلطُّورَ

“जो हमने तुम्हें दिया है उसे दृढ़ता से थामो, और जो उसमें है उसे स्मरण रखो, शायद तुम सावधान रहो।”

خُذُواْ مَا ءَاتَيۡنَٰكُمُۥ بِقُوَّةٖ وَٱذۡكُرُواْ مَا فِيهِۦ لَعَلَّكُمُۥ تَتَّقُونَ

फिर इसके बाद तुमने पीठ फेर ली;

ثُمَّ تَوَلَّيۡتُمُۥ مِنۢ بَعۡدِ ذَٰلِكَۖ

और यदि तुम पर ईश्वर का अनुग्रह और उसकी दया न होती, तो तुम घाटा उठाने वालों में से होते।

فَلَوۡلَا فَضۡلُ ٱللَّهِ عَلَيۡكُمُۥ وَرَحۡمَتُهُۥ لَكُنتُمُۥ مِنَ ٱلۡخَٰسِرِينَ

2:65

तुम उन्हें निश्चय ही जान चुके हो जिन्होंने तुममें से विराम के दिन के विषय में सीमाएँ पार कीं; तब हमने उनसे कहा: “दुत्कारे हुए बंदर बन जाओ।”

وَلَقَدۡ عَلِمۡتُمُ ٱلَّذِينَ ٱعۡتَدَوۡاْ مِنكُمُۥ فِي ٱلسَّبۡتِ فَقُلۡنَا لَهُمُۥ كُونُواْ قِرَدَةً خَٰسِـِٔينَ

हमने इसे उसके लिए जो इससे पहले था और जो इसके बाद था एक निवारक उदाहरण बनाया, और सावधानी बरतने वालों के लिए एक उपदेश।

فَجَعَلۡنَٰهَا نَكَٰلٗا لِّمَا بَيۡنَ يَدَيۡهَا وَمَا خَلۡفَهَا وَمَوۡعِظَةٗ لِّلۡمُتَّقِينَ

2:67

और जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा: “ईश्वर तुम्हें आदेश देता है कि एक गाय का गला काटो।”

وَإِذۡ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوۡمِهِۦ إِنَّ ٱللَّهَ يَأۡمُرُكُمُۥ أَن تَذۡبَحُواْ بَقَرَةٗۖ

2:67

उन्होंने कहा: “क्या तुम हमारा मज़ाक़ उड़ाते हो?”

قَالُواْ أَتَتَّخِذُنَا هُزُؤٗاۖ

उसने कहा: “मैं स्वयं को ईश्वर की छत्रछाया में रखता हूँ कि मैं अज्ञानियों में से न होऊँ।”

قَالَ أَعُوذُ بِٱللَّهِ أَنۡ أَكُونَ مِنَ ٱلۡجَٰهِلِينَ

2:68

उन्होंने कहा: “हमारे लिए अपने अभिभावक को पुकारो, कि वह हमें स्पष्ट करे कि वह क्या है।”

قَالُواْ ٱدۡعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا هِيَۚ

उसने कहा: “वह कहता है कि वह एक गाय है, न बूढ़ी और न कुँवारी,

قَالَ إِنَّهُۥ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٞ لَّا فَارِضٞ وَلَا بِكۡرٌ

इन दोनों के बीच मध्यम आयु की;

عَوَانُۢ بَيۡنَ ذَٰلِكَۖ

इसलिए वही करो जिसका तुम्हें आदेश दिया गया है।”

فَٱفۡعَلُواْ مَا تُؤۡمَرُونَ

2:69

उन्होंने कहा: “हमारे लिए अपने अभिभावक को पुकारो, कि वह हमें स्पष्ट करे कि उसका रंग क्या है।”

قَالُواْ ٱدۡعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا لَوۡنُهَاۚ

उसने कहा: “वह कहता है कि वह एक पीली गाय है, चटक रंग की,

قَالَ إِنَّهُۥ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٞ صَفۡرَآءُ فَاقِعٞ لَّوۡنُهَا

जो निगाहों को भा जाती है।”

تَسُرُّ ٱلنَّٰظِرِينَ

2:70

उन्होंने कहा: “हमारे लिए अपने अभिभावक को पुकारो, कि वह हमें स्पष्ट करे कि वह क्या है: गायें सब हमारी दृष्टि में एक-सी हैं, और हम अवश्य, यदि ईश्वर की मर्ज़ी हो, मार्गदर्शन पाने वालों में से होंगे।”

قَالُواْ ٱدۡعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا هِيَ إِنَّ ٱلۡبَقَرَ تَشَٰبَهَ عَلَيۡنَا وَإِنَّا إِن شَآءَ ٱللَّهُ لَمُهۡتَدُونَ

उसने कहा: “वह कहता है कि वह एक ऐसी गाय है जो भूमि को उलटने के लिए और खेत को सींचने के लिए सधाई नहीं गई,

قَالَ إِنَّهُۥ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٞ لَّا ذَلُولٞ تُثِيرُ ٱلۡأَرۡضَ وَلَا تَسۡقِي ٱلۡحَرۡثَ

सही-सलामत, जिसमें कोई दाग़ नहीं।”

مُسَلَّمَةٞ لَّا شِيَةَ فِيهَاۚ

उन्होंने कहा: “अब तुम सत्य लाए हो।”

قَالُواْ ٱلۡـَٰٔنَ جِئۡتَ بِٱلۡحَقِّۚ

2:71

तब उन्होंने उसका गला काटा, जबकि वे लगभग ऐसा न करते।

فَذَبَحُوهَا وَمَا كَادُواْ يَفۡعَلُونَ

2:72

और जब तुमने एक स्व को मार डाला, और उसके विषय में एक-दूसरे पर टालने लगे —

وَإِذۡ قَتَلۡتُمُۥ نَفۡسٗا فَٱدَّٰرَٰٔتُمُۥ فِيهَاۖ

जबकि ईश्वर उसे निकालने वाला था जो तुम दबाते थे।

وَٱللَّهُ مُخۡرِجٞ مَّا كُنتُمُۥ تَكۡتُمُونَ

तब हमने कहा: “उसे उसके एक भाग से मारो”;

فَقُلۡنَا ٱضۡرِبُوهُۥ بِبَعۡضِهَاۚ

इस प्रकार ईश्वर मृतकों को जीवन देता है, और तुम्हें अपने संकेत दिखाता है, शायद तुम बुद्धि से काम लो।

كَذَٰلِكَ يُحۡيِ ٱللَّهُ ٱلۡمَوۡتَىٰ وَيُرِيكُمُۥ ءَايَٰتِهِۦ لَعَلَّكُمُۥ تَعۡقِلُونَ

फिर इसके बाद तुम्हारे मर्म सख़्त हो गए, यहाँ तक कि वे पत्थर जैसे हैं, या उससे भी अधिक कठोर।

ثُمَّ قَسَتۡ قُلُوبُكُمُۥ مِنۢ بَعۡدِ ذَٰلِكَ فَهِيَ كَٱلۡحِجَارَةِ أَوۡ أَشَدُّ قَسۡوَةٗۚ

और पत्थरों में अवश्य ऐसे हैं जिनसे नदियाँ फूट निकलती हैं;

وَإِنَّ مِنَ ٱلۡحِجَارَةِ لَمَا يَتَفَجَّرُ مِنۡهُ ٱلۡأَنۡهَٰرُۚ

और उनमें अवश्य ऐसे भी हैं जो फट जाते हैं, और उनसे पानी निकलता है;

وَإِنَّ مِنۡهَا لَمَا يَشَّقَّقُ فَيَخۡرُجُ مِنۡهُ ٱلۡمَآءُۚ

2:74

और उनमें अवश्य ऐसे भी हैं जो नीचे गिर पड़ते हैं, ईश्वर का भय रखते हुए।

وَإِنَّ مِنۡهَا لَمَا يَهۡبِطُ مِنۡ خَشۡيَةِ ٱللَّهِۗ

2:74

और ईश्वर उससे लापरवाह नहीं जो तुम करते हो।

وَمَا ٱللَّهُ بِغَٰفِلٍ عَمَّا يَعۡمَلُونَ

2:75

क्या तुम लालसा रखते हो कि वे तुम पर भरोसा करें, जबकि उनमें से एक भाग ईश्वर का बोल सुनता था, फिर उस पर बुद्धि से काम लेने के बाद तोड़-मरोड़ देता था, जानते हुए?

۞ أَفَتَطۡمَعُونَ أَن يُؤۡمِنُواْ لَكُمُۥ وَقَدۡ كَانَ فَرِيقٞ مِّنۡهُمُۥ يَسۡمَعُونَ كَلَٰمَ ٱللَّهِ ثُمَّ يُحَرِّفُونَهُۥ مِنۢ بَعۡدِ مَا عَقَلُوهُۥ وَهُمُۥ يَعۡلَمُونَ

और जब वे उनसे मिलते हैं जिन्होंने विश्वास किया, तो कहते हैं: “हमने विश्वास किया”;

وَإِذَا لَقُواْ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ قَالُواْ ءَامَنَّا

2:76

और जब वे आपस में अकेले होते हैं, तो कहते हैं: “क्या तुम उन्हें बताओगे जो ईश्वर ने तुम पर खोला है, कि वे उसे लेकर तुम्हारे अभिभावक के पास तुमसे विवाद करें?”

وَإِذَا خَلَا بَعۡضُهُمُۥ إِلَىٰ بَعۡضٖ قَالُواْ أَتُحَدِّثُونَهُمُۥ بِمَا فَتَحَ ٱللَّهُ عَلَيۡكُمُۥ لِيُحَآجُّوكُمُۥ بِهِۦ عِندَ رَبِّكُمُۥۚ

तो क्या तुम बुद्धि से काम नहीं लेते?

أَفَلَا تَعۡقِلُونَ

क्या वे नहीं जानते कि ईश्वर जानता है जो वे गुप्त रखते हैं और जो वे उजागर करते हैं?

أَوَلَا يَعۡلَمُونَ أَنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعۡلِنُونَ

2:78

और उनमें कुछ ऐसे भी हैं जिनके पास पहले से कोई ग्रंथ न था, जो ग्रंथ को केवल व्यर्थ आशाओं के रूप में जानते हैं,

وَمِنۡهُمُۥ أُمِّيُّونَ لَا يَعۡلَمُونَ ٱلۡكِتَٰبَ إِلَّا أَمَانِيَّ

और जो केवल अनुमान लगाते हैं।

وَإِنۡ هُمُۥ إِلَّا يَظُنُّونَ

2:79

तो हाय उन पर जो अपने हाथों से ग्रंथ लिखते हैं, फिर कहते हैं: “यह ईश्वर की ओर से है”, ताकि उसके बदले तुच्छ मूल्य ख़रीदें!

فَوَيۡلٞ لِّلَّذِينَ يَكۡتُبُونَ ٱلۡكِتَٰبَ بِأَيۡدِيهِمُۥ ثُمَّ يَقُولُونَ هَٰذَا مِنۡ عِندِ ٱللَّهِ لِيَشۡتَرُواْ بِهِۦ ثَمَنٗا قَلِيلٗاۖ

हाय उन पर, उसके कारण जो उनके हाथों ने लिखा,

فَوَيۡلٞ لَّهُمُۥ مِمَّا كَتَبَتۡ أَيۡدِيهِمُۥ

और हाय उन पर, उसके कारण जो वे कमाते हैं!

وَوَيۡلٞ لَّهُمُۥ مِمَّا يَكۡسِبُونَ

2:80

और उन्होंने कहा: “आग हमें केवल गिने-चुने दिनों के लिए छुएगी।”

وَقَالُواْ لَن تَمَسَّنَا ٱلنَّارُ إِلَّا أَيَّامٗا مَّعۡدُودَةٗۚ

कहो: “क्या तुमने ईश्वर के पास से कोई संधि ली है — ईश्वर अपनी संधि से कभी नहीं मुकरता —

قُلۡ أَتَّخَذۡتُمُۥ عِندَ ٱللَّهِ عَهۡدٗا فَلَن يُخۡلِفَ ٱللَّهُ عَهۡدَهُۥۖ

या तुम ईश्वर के विषय में वह कहते हो जो तुम नहीं जानते?”

أَمۡ تَقُولُونَ عَلَى ٱللَّهِ مَا لَا تَعۡلَمُونَ

2:81

क्यों नहीं: जो कोई बुरा कर्म कमाए, और उसकी भूल उसे घेर ले — वही आग वाले हैं, वे उसमें सदा रहते हैं।

بَلَىٰۚ مَن كَسَبَ سَيِّئَةٗ وَأَحَٰطَتۡ بِهِۦ خَطِيٓـَٔتُهُۥ فَأُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِۖ هُمُۥ فِيهَا خَٰلِدُونَ

और जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए — वही उद्यान वाले हैं, वे उसमें सदा रहते हैं।

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَنَّةِۖ هُمُۥ فِيهَا خَٰلِدُونَ

2:83

और जब हमने इसराईल की संतान की गंभीर प्रतिज्ञा ली: “तुम ईश्वर के अतिरिक्त किसी की आज्ञा का पालन नहीं करोगे,

وَإِذۡ أَخَذۡنَا مِيثَٰقَ بَنِي إِسۡرَٰٓءِيلَ لَا يَعۡبُدُونَ إِلَّا ٱللَّهَ

2:83

और माता-पिता, निकट-संबंधियों, अनाथों और दरिद्रों के प्रति भलाई करोगे;

وَبِٱلۡوَٰلِدَيۡنِ إِحۡسَانٗا وَذِي ٱلۡقُرۡبَىٰ وَٱلۡيَتَٰمَىٰ وَٱلۡمَسَٰكِينِ

और लोगों से वह कहो जो सुंदर है;

وَقُولُواْ لِلنَّاسِ حُسۡنٗا

और संपर्क बनाए रखो, और शुद्ध उदारता दो”;

وَأَقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُواْ ٱلزَّكَوٰةَ

फिर तुमने पीठ फेर ली, तुममें से थोड़े-से को छोड़कर, टालमटोल करते हुए।

ثُمَّ تَوَلَّيۡتُمُۥ إِلَّا قَلِيلٗا مِّنكُمُۥ وَأَنتُمُۥ مُعۡرِضُونَ

और जब हमने तुम्हारी गंभीर प्रतिज्ञा ली: “तुम अपना रक्त नहीं बहाओगे, और अपने ठिकानों से एक-दूसरे को नहीं निकालोगे”; फिर तुमने उसे स्वीकार किया, और तुम साक्षी हो।

وَإِذۡ أَخَذۡنَا مِيثَٰقَكُمُۥ لَا تَسۡفِكُونَ دِمَآءَكُمُۥ وَلَا تُخۡرِجُونَ أَنفُسَكُمُۥ مِن دِيَٰرِكُمُۥ ثُمَّ أَقۡرَرۡتُمُۥ وَأَنتُمُۥ تَشۡهَدُونَ

2:85

फिर भी देखो तुम एक-दूसरे को मारते हो, और अपनों में से एक भाग को उनके ठिकानों से निकालते हो, अपराध और वैर में उनके विरुद्ध एक-दूसरे का साथ देते हुए;

ثُمَّ أَنتُمُۥ هَٰؤُلَآءِ تَقۡتُلُونَ أَنفُسَكُمُۥ وَتُخۡرِجُونَ فَرِيقٗا مِّنكُمُۥ مِن دِيَٰرِهِمُۥ تَظَّٰهَرُونَ عَلَيۡهِمُۥ بِٱلۡإِثۡمِ وَٱلۡعُدۡوَٰنِ

2:85

और यदि वे बंदी बनकर तुम्हारे पास आएँ, तो तुम उनकी अदला-बदली करते हो, जबकि उनका निकाला जाना तुम पर वर्जित था।

وَإِن يَأۡتُوكُمُۥ أُسَٰرَىٰ تَفۡدُوهُمُۥ وَهُوَ مُحَرَّمٌ عَلَيۡكُمُۥ إِخۡرَاجُهُمُۥۚ

2:85

क्या तुम ग्रंथ के एक भाग पर विश्वास करते हो, और दूसरे भाग को नकारते हो?

أَفَتُؤۡمِنُونَ بِبَعۡضِ ٱلۡكِتَٰبِ وَتَكۡفُرُونَ بِبَعۡضٖۚ

तो तुममें से जो ऐसा करे, उसका प्रतिफल निकट जीवन में लज्जा के सिवा और क्या है?

فَمَا جَزَآءُ مَن يَفۡعَلُ ذَٰلِكَ مِنكُمُۥ إِلَّا خِزۡيٞ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَاۖ

और पेशी के दिन वे सबसे कठोर दंड की ओर वापस लाए जाएँगे।

وَيَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ يُرَدُّونَ إِلَىٰ أَشَدِّ ٱلۡعَذَابِۗ

2:85

और ईश्वर उससे लापरवाह नहीं जो वे करते हैं।

وَمَا ٱللَّهُ بِغَٰفِلٍ عَمَّا يَعۡمَلُونَ

यही वे हैं जिन्होंने अंतिम जीवन के बदले निकट जीवन ख़रीदा; इसलिए उनका दंड हल्का नहीं किया जाएगा, और उनकी सहायता नहीं की जाएगी।

أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ ٱشۡتَرَوُاْ ٱلۡحَيَوٰةَ ٱلدُّنۡيَا بِٱلۡأٓخِرَةِۖ فَلَا يُخَفَّفُ عَنۡهُمُ ٱلۡعَذَابُ وَلَا هُمُۥ يُنصَرُونَ

2:87

हमने निश्चय ही मूसा को ग्रंथ दिया, और उसके बाद संदेशवाहकों को क्रम से भेजा।

وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا مُوسَى ٱلۡكِتَٰبَ وَقَفَّيۡنَا مِنۢ بَعۡدِهِۦ بِٱلرُّسُلِۖ

2:87

और हमने मरयम के पुत्र ईसा को स्पष्ट प्रमाण दिए, और उसे पवित्र प्रवाह से सुदृढ़ किया।

وَءَاتَيۡنَا عِيسَى ٱبۡنَ مَرۡيَمَ ٱلۡبَيِّنَٰتِ وَأَيَّدۡنَٰهُۥ بِرُوحِ ٱلۡقُدۡسِۗ

तो जब भी कोई संदेशवाहक तुम्हारे पास वह लेकर आया जिसकी ओर तुम्हारे अपने स्व नहीं झुकते थे, क्या तुम घमंड से नहीं फूल गए?

أَفَكُلَّمَا جَآءَكُمُۥ رَسُولُۢ بِمَا لَا تَهۡوَىٰ أَنفُسُكُمُ ٱسۡتَكۡبَرۡتُمُۥ

तुमने उनमें से एक भाग को झुठलाया, और दूसरे भाग को तुम मार डालते हो।

فَفَرِيقٗا كَذَّبۡتُمُۥ وَفَرِيقٗا تَقۡتُلُونَ

2:88

और उन्होंने कहा: “हमारे मर्म ढके हुए हैं”;

وَقَالُواْ قُلُوبُنَا غُلۡفُۢۚ

नहीं, ईश्वर ने उन्हें उनके नकार के कारण धिक्कारा, और वे थोड़ा ही विश्वास करते हैं।

بَل لَّعَنَهُمُ ٱللَّهُ بِكُفۡرِهِمُۥ فَقَلِيلٗا مَّا يُؤۡمِنُونَ

और जब उनके पास ईश्वर की ओर से एक ग्रंथ आया, जो उसकी पुष्टि करता है जो उनके पास है — जबकि इससे पहले वे नकारने वालों के विरुद्ध उद्घाटन माँगा करते थे —

وَلَمَّا جَآءَهُمُۥ كِتَٰبٞ مِّنۡ عِندِ ٱللَّهِ مُصَدِّقٞ لِّمَا مَعَهُمُۥ وَكَانُواْ مِن قَبۡلُ يَسۡتَفۡتِحُونَ عَلَى ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ

2:89

तो जब उनके पास वह आया जिसे वे पहचानते थे, उन्होंने उसे नकार दिया।

فَلَمَّا جَآءَهُمُۥ مَا عَرَفُواْ كَفَرُواْ بِهِۦۚ

इसलिए नकारने वालों पर ईश्वर का धिक्कार है।

فَلَعۡنَةُ ٱللَّهِ عَلَى ٱلۡكَٰفِرِينَ

2:90

कितना भयानक है वह जिसके बदले उन्होंने अपना स्व ख़रीदा: उसे नकारना जो ईश्वर ने उतारा है, ज़्यादती से, इसलिए कि ईश्वर अपने आज्ञाकारियों में से जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उस पर अपना अनुग्रह उतारता है!

بِئۡسَمَا ٱشۡتَرَوۡاْ بِهِۦ أَنفُسَهُمُۥ أَن يَكۡفُرُواْ بِمَا أَنزَلَ ٱللَّهُ بَغۡيًا أَن يُنزِلَ ٱللَّهُ مِن فَضۡلِهِۦ عَلَىٰ مَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦۖ

इसलिए वे क्रोध पर क्रोध के पात्र बने।

فَبَآءُو بِغَضَبٍ عَلَىٰ غَضَبٖۚ

और नकारने वालों के लिए हीन करने वाला दंड है।

وَلِلۡكَٰفِرِينَ عَذَابٞ مُّهِينٞ

और जब उनसे कहा जाता है: “उस पर विश्वास करो जो ईश्वर ने उतारा है”, तो वे कहते हैं: “हम उस पर विश्वास करते हैं जो हम पर उतारा गया”; और वे उसे नकारते हैं जो उसके परे है,

وَإِذَا قِيلَ لَهُمُۥ ءَامِنُواْ بِمَا أَنزَلَ ٱللَّهُ قَالُواْ نُؤۡمِنُ بِمَا أُنزِلَ عَلَيۡنَا وَيَكۡفُرُونَ بِمَا وَرَآءَهُۥ

जबकि वही सत्य है, उसकी पुष्टि करता हुआ जो उनके पास है।

وَهُوَ ٱلۡحَقُّ مُصَدِّقٗا لِّمَا مَعَهُمُۥۗ

2:91

कहो: “तो फिर तुमने इससे पहले ईश्वर के सूचनादाताओं को क्यों मार डाला, यदि तुम विश्वास करने वाले थे?”

قُلۡ فَلِمَ تَقۡتُلُونَ أَنۢبِيَآءَ ٱللَّهِ مِن قَبۡلُ إِن كُنتُمُۥ مُؤۡمِنِينَ

2:92

मूसा तुम्हारे पास निश्चय ही स्पष्ट प्रमाणों के साथ आया; फिर उसके बाद तुमने बछड़े को अपना लिया, और तुम अन्याय करने वाले थे।

۞ وَلَقَدۡ جَآءَكُمُۥ مُوسَىٰ بِٱلۡبَيِّنَٰتِ ثُمَّ ٱتَّخَذۡتُمُ ٱلۡعِجۡلَ مِنۢ بَعۡدِهِۦ وَأَنتُمُۥ ظَٰلِمُونَ

और जब हमने तुम्हारी गंभीर प्रतिज्ञा ली, और तुम्हारे ऊपर पर्वत को ऊँचा किया:

وَإِذۡ أَخَذۡنَا مِيثَٰقَكُمُۥ وَرَفَعۡنَا فَوۡقَكُمُ ٱلطُّورَ

“जो हमने तुम्हें दिया है उसे दृढ़ता से थामो, और सुनो।”

خُذُواْ مَا ءَاتَيۡنَٰكُمُۥ بِقُوَّةٖ وَٱسۡمَعُواْۖ

2:93

उन्होंने कहा: “हमने सुना और अवज्ञा की”;

قَالُواْ سَمِعۡنَا وَعَصَيۡنَا

और उनके मर्मों को उनके नकार के कारण बछड़ा पिला दिया गया।

وَأُشۡرِبُواْ فِي قُلُوبِهِمُ ٱلۡعِجۡلَ بِكُفۡرِهِمُۥۚ

2:93

कहो: “कितना भयानक है वह जिसका आदेश तुम्हारा विश्वास तुम्हें देता है, यदि तुम विश्वास करने वाले हो!”

قُلۡ بِئۡسَمَا يَأۡمُرُكُمُۥ بِهِۦ إِيمَٰنُكُمُۥ إِن كُنتُمُۥ مُؤۡمِنِينَ

2:94

कहो: “यदि ईश्वर के पास अंतिम ठिकाना केवल तुम्हारे लिए है, लोगों को छोड़कर, तो मृत्यु की इच्छा करो, यदि तुम सच्चे हो।”

قُلۡ إِن كَانَتۡ لَكُمُ ٱلدَّارُ ٱلۡأٓخِرَةُ عِندَ ٱللَّهِ خَالِصَةٗ مِّن دُونِ ٱلنَّاسِ فَتَمَنَّوُاْ ٱلۡمَوۡتَ إِن كُنتُمُۥ صَٰدِقِينَ

किंतु वे उसकी इच्छा कभी नहीं करेंगे, उसके कारण जो उनके हाथों ने आगे बढ़ाया।

وَلَن يَتَمَنَّوۡهُۥ أَبَدَۢا بِمَا قَدَّمَتۡ أَيۡدِيهِمُۥۚ

और ईश्वर अन्यायियों के विषय में सर्वज्ञ है।

وَٱللَّهُ عَلِيمُۢ بِٱلظَّٰلِمِينَ

और तुम उन्हें अवश्य सब लोगों में जीवन से सबसे अधिक चिपके हुए पाओगे,

وَلَتَجِدَنَّهُمُۥ أَحۡرَصَ ٱلنَّاسِ عَلَىٰ حَيَوٰةٖ

उनसे भी अधिक जिन्होंने साझी ठहराया; उनमें से एक हज़ार वर्ष जीना चाहेगा,

وَمِنَ ٱلَّذِينَ أَشۡرَكُواْۚ يَوَدُّ أَحَدُهُمُۥ لَوۡ يُعَمَّرُ أَلۡفَ سَنَةٖ

किंतु यह उसे दंड से किसी तरह बचा न पाता, भले ही वह उतना ही लंबा जीता।

وَمَا هُوَ بِمُزَحۡزِحِهِۦ مِنَ ٱلۡعَذَابِ أَن يُعَمَّرَۗ

ईश्वर उस पर दृष्टि रखता है जो वे करते हैं।

وَٱللَّهُ بَصِيرُۢ بِمَا يَعۡمَلُونَ

2:97

कहो: “जो कोई जिब्रील का शत्रु है, वह जान ले कि उसी ने उसे तुम्हारे मर्म पर उतारा है, ईश्वर की अनुमति से, उसकी पुष्टि करता हुआ जो उससे पहले है, और विश्वास करने वालों के लिए मार्गदर्शन और शुभ समाचार के रूप में।”

قُلۡ مَن كَانَ عَدُوّٗا لِّـجَبۡرِيلَ فَإِنَّهُۥ نَزَّلَهُۥ عَلَىٰ قَلۡبِكَ بِإِذۡنِ ٱللَّهِ مُصَدِّقٗا لِّمَا بَيۡنَ يَدَيۡهِۦ وَهُدٗى وَبُشۡرَىٰ لِلۡمُؤۡمِنِينَ

2:98

जो कोई ईश्वर का, उसके अभिकर्ताओं का, उसके संदेशवाहकों का, जिब्रील का और मीकाल का शत्रु है, वह जान ले कि ईश्वर निश्चय ही नकारने वालों का शत्रु है।

مَن كَانَ عَدُوّٗا لِّلَّهِ وَمَلَٰٓئِكَتِهِۦ وَرُسُلِهِۦ وَجَبۡرِيلَ وَمِيكَٰٓـِٔيلَ فَإِنَّ ٱللَّهَ عَدُوّٞ لِّلۡكَٰفِرِينَ

हमने निश्चय ही तुम्हारी ओर स्पष्ट संकेत उतारे हैं,

وَلَقَدۡ أَنزَلۡنَا إِلَيۡكَ ءَايَٰتِۭ بَيِّنَٰتٖۖ

और उन्हें केवल अतिक्रमणकारी ही नकारते हैं।

وَمَا يَكۡفُرُ بِهَا إِلَّا ٱلۡفَٰسِقُونَ

क्या ऐसा है कि जब भी वे कोई संधि करते हैं, उनमें से एक भाग उसे ठुकरा देता है?

أَوَكُلَّمَا عَٰهَدُواْ عَهۡدٗا نَّبَذَهُۥ فَرِيقٞ مِّنۡهُمُۥۚ

बल्कि उनमें से अधिकतर विश्वास नहीं करते।

بَلۡ أَكۡثَرُهُمُۥ لَا يُؤۡمِنُونَ

2:101

और जब उनके पास ईश्वर की ओर से एक संदेशवाहक आया, उसकी पुष्टि करता हुआ जो उनके पास है, तो जिन्हें ग्रंथ दिया गया था उनमें से एक भाग ने ईश्वर के ग्रंथ को अपनी पीठ के पीछे फेंक दिया, मानो वे जानते ही न हों।

وَلَمَّا جَآءَهُمُۥ رَسُولٞ مِّنۡ عِندِ ٱللَّهِ مُصَدِّقٞ لِّمَا مَعَهُمُۥ نَبَذَ فَرِيقٞ مِّنَ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡكِتَٰبَ كِتَٰبَ ٱللَّهِ وَرَآءَ ظُهُورِهِمُۥ كَأَنَّهُمُۥ لَا يَعۡلَمُونَ

2:102

और उन्होंने उसका अनुसरण किया जो बहकाने वाले सुलैमान के राजत्व के विषय में सुनाते थे।

وَٱتَّبَعُواْ مَا تَتۡلُواْ ٱلشَّيَٰطِينُ عَلَىٰ مُلۡكِ سُلَيۡمَٰنَۖ

2:102

जबकि सुलैमान ने कभी नहीं नकारा,

وَمَا كَفَرَ سُلَيۡمَٰنُ

2:102

बल्कि बहकाने वालों ने नकारा, जो लोगों को भ्रम सिखाते थे, और उसे भी जो बाबिल में दो राजाओं, हारूत और मारूत, पर उतारा गया;

وَلَٰكِنَّ ٱلشَّيَٰطِينَ كَفَرُواْ يُعَلِّمُونَ ٱلنَّاسَ ٱلسِّحۡرَ وَمَا أُنزِلَ عَلَى ٱلۡمَلَكَيۡنِ بِبَابِلَ هَٰرُوتَ وَمَٰرُوتَۚ

2:102

और वे दोनों किसी को तब तक नहीं सिखाते थे जब तक पहले यह न कह दें: “हम तो केवल एक परीक्षा हैं, इसलिए नकारो मत।”

وَمَا يُعَلِّمَانِ مِنۡ أَحَدٍ حَتَّىٰ يَقُولَا إِنَّمَا نَحۡنُ فِتۡنَةٞ فَلَا تَكۡفُرۡۖ

फिर वे उनसे वह सीखते जिससे वे व्यक्ति को उसके जोड़ीदार से अलग करते हैं;

فَيَتَعَلَّمُونَ مِنۡهُمَا مَا يُفَرِّقُونَ بِهِۦ بَيۡنَ ٱلۡمَرۡءِ وَزَوۡجِهِۦۚ

किंतु वे उससे किसी को हानि नहीं पहुँचाते, ईश्वर की अनुमति के बिना।

وَمَا هُمُۥ بِضَآرِّينَ بِهِۦ مِنۡ أَحَدٍ إِلَّا بِإِذۡنِ ٱللَّهِۚ

और वे वह सीखते हैं जो उन्हें हानि पहुँचाता है और लाभ नहीं देता।

وَيَتَعَلَّمُونَ مَا يَضُرُّهُمُۥ وَلَا يَنفَعُهُمُۥۚ

वे निश्चय ही जानते थे कि जो कोई उसे ख़रीदे, उसका अंतिम जीवन में कोई हिस्सा न होगा।

وَلَقَدۡ عَلِمُواْ لَمَنِ ٱشۡتَرَىٰهُۥ مَا لَهُۥ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ مِنۡ خَلَٰقٖۚ

और कितना भयानक है वह जिसके बदले उन्होंने अपना स्व बेच दिया, काश वे जानते!

وَلَبِئۡسَ مَا شَرَوۡاْ بِهِۦ أَنفُسَهُمُۥۚ لَوۡ كَانُواْ يَعۡلَمُونَ

और यदि वे विश्वास करते और सावधान रहते, तो ईश्वर की ओर से मिलने वाला प्रतिदान निश्चय ही बेहतर होता, काश वे जानते।

وَلَوۡ أَنَّهُمُۥ ءَامَنُواْ وَٱتَّقَوۡاْ لَمَثُوبَةٞ مِّنۡ عِندِ ٱللَّهِ خَيۡرٞۚ لَّوۡ كَانُواْ يَعۡلَمُونَ

2:104

हे विश्वास करने वालो! “हमारी उपेक्षा करो” न कहो, बल्कि कहो “हम पर नज़र डालो”, और सुनो।

يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَقُولُواْ رَٰعِنَا وَقُولُواْ ٱنظُرۡنَا وَٱسۡمَعُواْۗ

और नकारने वालों के लिए पीड़ादायक दंड है।

وَلِلۡكَٰفِرِينَ عَذَابٌ أَلِيمٞ

2:105

ग्रंथ वालों में से जो नकारते हैं, वे और साझी ठहराने वाले नहीं चाहते कि तुम्हारे अभिभावक की ओर से तुम पर कोई अच्छाई उतारी जाए;

مَّا يَوَدُّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِنۡ أَهۡلِ ٱلۡكِتَٰبِ وَلَا ٱلۡمُشۡرِكِينَ أَن يُنزَلَ عَلَيۡكُمُۥ مِنۡ خَيۡرٖ مِّن رَّبِّكُمُۥۚ

किंतु ईश्वर अपनी दया जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसके लिए विशेष रखता है।

وَٱللَّهُ يَخۡتَصُّ بِرَحۡمَتِهِۦ مَن يَشَآءُۚ

और ईश्वर विशाल अनुग्रह वाला है।

وَٱللَّهُ ذُو ٱلۡفَضۡلِ ٱلۡعَظِيمِ

2:106

हम जिस भी संकेत की प्रतिलिपि बनाते हैं, या जिसे भुला देते हैं, उससे बेहतर या उसके जैसा ले आते हैं।

۞ مَا نَنسَخۡ مِنۡ ءَايَةٍ أَوۡ نَنسَـٔۡهَا نَأۡتِ بِخَيۡرٖ مِّنۡهَا أَوۡ مِثۡلِهَاۗ

क्या तुम नहीं जानते कि ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है?

أَلَمۡ تَعۡلَمۡ أَنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٌ

क्या तुम नहीं जानते कि ईश्वर का है आकाशों और धरती का राजत्व, और यह कि ईश्वर के अतिरिक्त तुम्हारा न कोई हिमायती है न कोई सहायता?

أَلَمۡ تَعۡلَمۡ أَنَّ ٱللَّهَ لَهُۥ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۗ وَمَا لَكُمُۥ مِن دُونِ ٱللَّهِ مِن وَلِيّٖ وَلَا نَصِيرٍ

2:108

या क्या तुम अपने संदेशवाहक से वैसे प्रश्न करना चाहोगे जैसे मूसा से पहले प्रश्न किए गए?

أَمۡ تُرِيدُونَ أَن تَسۡـَٔلُواْ رَسُولَكُمُۥ كَمَا سُئِلَ مُوسَىٰ مِن قَبۡلُۗ

और जो कोई विश्वास के बदले नकार को अपनाए, वह ठीक राह से भटक गया।

وَمَن يَتَبَدَّلِ ٱلۡكُفۡرَ بِٱلۡإِيمَٰنِ فَقَدۡ ضَلَّ سَوَآءَ ٱلسَّبِيلِ

2:109

ग्रंथ वालों में से बहुत-से चाहते हैं कि तुम्हारे विश्वास के बाद तुम्हें फिर एक नकार की ओर वापस ले जाएँ,

وَدَّ كَثِيرٞ مِّنۡ أَهۡلِ ٱلۡكِتَٰبِ لَوۡ يَرُدُّونَكُمُۥ مِنۢ بَعۡدِ إِيمَٰنِكُمُۥ كُفَّارًا

ईर्ष्या से, अपनी ओर से, इसके बाद कि सत्य उन पर स्पष्ट हो चुका है।

حَسَدٗا مِّنۡ عِندِ أَنفُسِهِمُۥ مِنۢ بَعۡدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُ ٱلۡحَقُّۖ

2:109

इसलिए दरगुज़र करो और पन्ना पलट दो, जब तक ईश्वर अपना आदेश न ले आए,

فَٱعۡفُواْ وَٱصۡفَحُواْ حَتَّىٰ يَأۡتِيَ ٱللَّهُ بِأَمۡرِهِۦۗ

क्योंकि ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।

إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ

और संपर्क बनाए रखो, और शुद्ध उदारता दो।

وَأَقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُواْ ٱلزَّكَوٰةَۚ

और जो भी अच्छाई तुम अपने लिए आगे बढ़ाते हो, उसे तुम ईश्वर के पास पाओगे,

وَمَا تُقَدِّمُواْ لِأَنفُسِكُمُۥ مِنۡ خَيۡرٖ تَجِدُوهُۥ عِندَ ٱللَّهِۗ

क्योंकि ईश्वर तुम जो करते हो उस पर दृष्टि रखता है।

إِنَّ ٱللَّهَ بِمَا تَعۡمَلُونَ بَصِيرٞ

2:111

और उन्होंने कहा: “उद्यान में कोई प्रवेश नहीं करेगा, सिवा उसके जो पुनरुन्मुखों या सहायकों में से हो।”

وَقَالُواْ لَن يَدۡخُلَ ٱلۡجَنَّةَ إِلَّا مَن كَانَ هُودًا أَوۡ نَصَٰرَىٰۗ

ये उनकी व्यर्थ आशाएँ हैं।

تِلۡكَ أَمَانِيُّهُمُۥۗ

कहो: “अपना प्रमाण लाओ, यदि तुम सच्चे हो।”

قُلۡ هَاتُواْ بُرۡهَٰنَكُمُۥ إِن كُنتُمُۥ صَٰدِقِينَ

क्यों नहीं: जो कोई भलाई करते हुए अपनी दिशा ईश्वर के प्रति खरी कर दे, उसका पुरस्कार उसके अभिभावक के पास है; उन पर कोई डर नहीं, और न वे दुखी होंगे।

بَلَىٰۚ مَنۡ أَسۡلَمَ وَجۡهَهُۥ لِلَّهِ وَهُوَ مُحۡسِنٞ فَلَهُۥ أَجۡرُهُۥ عِندَ رَبِّهِۦ وَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمُۥ وَلَا هُمُۥ يَحۡزَنُونَ

2:113

और पुनरुन्मुखों ने कहा: “सहायक किसी आधार पर नहीं हैं”; और सहायकों ने कहा: “पुनरुन्मुख किसी आधार पर नहीं हैं”; जबकि वे ग्रंथ सुनाते हैं।

وَقَالَتِ ٱلۡيَهُودُ لَيۡسَتِ ٱلنَّصَٰرَىٰ عَلَىٰ شَيۡءٖ وَقَالَتِ ٱلنَّصَٰرَىٰ لَيۡسَتِ ٱلۡيَهُودُ عَلَىٰ شَيۡءٖ وَهُمُۥ يَتۡلُونَ ٱلۡكِتَٰبَۗ

इसी प्रकार उन्होंने कहा जो नहीं जानते, उनके कथन जैसा कथन कहते हुए।

كَذَٰلِكَ قَالَ ٱلَّذِينَ لَا يَعۡلَمُونَ مِثۡلَ قَوۡلِهِمُۥۚ

ईश्वर पेशी के दिन उनके बीच उस विषय में निर्णय करेगा जिसमें वे मतभेद रखते थे।

فَٱللَّهُ يَحۡكُمُ بَيۡنَهُمُۥ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ فِيمَا كَانُواْ فِيهِۦ يَخۡتَلِفُونَ

2:114

और उससे बढ़कर अन्यायी कौन है जो ईश्वर के माथा टेकने के स्थानों में उसके नाम का स्मरण किए जाने से रोकता है, और उन्हें उजाड़ने में लगा रहता है?

وَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّن مَّنَعَ مَسَٰجِدَ ٱللَّهِ أَن يُذۡكَرَ فِيهَا ٱسۡمُهُۥ وَسَعَىٰ فِي خَرَابِهَاۚ

उन्हें वहाँ केवल डरते हुए प्रवेश करना चाहिए।

أُوْلَٰٓئِكَ مَا كَانَ لَهُمُۥ أَن يَدۡخُلُوهَا إِلَّا خَآئِفِينَۚ

उनके लिए निकट जीवन में लज्जा है,

لَهُمُۥ فِي ٱلدُّنۡيَا خِزۡيٞ

और अंतिम जीवन में उनके लिए विशाल दंड होगा।

وَلَهُمُۥ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ عَذَابٌ عَظِيمٞ

और ईश्वर के हैं उदय-स्थान और अस्त-स्थान:

وَلِلَّهِ ٱلۡمَشۡرِقُ وَٱلۡمَغۡرِبُۚ

2:115

तुम जिधर भी मुड़ो, वहीं ईश्वर की दिशा है,

فَأَيۡنَمَا تُوَلُّواْ فَثَمَّ وَجۡهُ ٱللَّهِۚ

क्योंकि ईश्वर विस्तृत, सर्वज्ञ है।

إِنَّ ٱللَّهَ وَٰسِعٌ عَلِيمٞ

2:116

और उन्होंने कहा: “ईश्वर ने अपने लिए संतान बना ली है।”

وَقَالُواْ ٱتَّخَذَ ٱللَّهُ وَلَدٗاۗ

उसकी महिमा हो!

سُبۡحَٰنَهُۥۖ

बल्कि उसी का है जो आकाशों और धरती में है;

بَل لَّهُۥ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ

सब उसके प्रति समर्पित हैं।

كُلّٞ لَّهُۥ قَٰنِتُونَ

आकाशों और धरती का अपूर्व रचयिता।

بَدِيعُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ

2:117

जब वह किसी चीज़ को तय करता है, तो उससे केवल इतना कहता है: “हो जा”,

وَإِذَا قَضَىٰ أَمۡرٗا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُۥ كُن

2:117

और वह हो जाती है।

فَيَكُونُ

2:118

और जो नहीं जानते उन्होंने कहा: “ईश्वर हमसे बोलता क्यों नहीं, या हमारे पास कोई संकेत क्यों नहीं आता!”

وَقَالَ ٱلَّذِينَ لَا يَعۡلَمُونَ لَوۡلَا يُكَلِّمُنَا ٱللَّهُ أَوۡ تَأۡتِينَا ءَايَةٞۗ

इसी प्रकार उनसे पहले वालों ने कहा, उनके कथन जैसा कथन कहते हुए;

كَذَٰلِكَ قَالَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمُۥ مِثۡلَ قَوۡلِهِمُۥۘ

उनके मर्म एक-से हैं।

تَشَٰبَهَتۡ قُلُوبُهُمُۥۗ

हमने उस क़ौम के लिए संकेत स्पष्ट कर दिए हैं जिसे यक़ीन है।

قَدۡ بَيَّنَّا ٱلۡأٓيَٰتِ لِقَوۡمٖ يُوقِنُونَ

हमने तुम्हें पूर्ण सत्य के साथ भेजा है, शुभ समाचार देने वाला और चेतावनी देने वाला,

إِنَّا أَرۡسَلۡنَٰكَ بِٱلۡحَقِّ بَشِيرٗا وَنَذِيرٗاۖ

2:119

और तुमसे भट्ठी वालों के विषय में नहीं पूछा जाएगा।

وَلَا تُسۡـَٔلُ عَنۡ أَصۡحَٰبِ ٱلۡجَحِيمِ

2:120

और न पुनरुन्मुख और न सहायक कभी तुमसे संतुष्ट होंगे, जब तक तुम उनके मत का अनुसरण न करो।

وَلَن تَرۡضَىٰ عَنكَ ٱلۡيَهُودُ وَلَا ٱلنَّصَٰرَىٰ حَتَّىٰ تَتَّبِعَ مِلَّتَهُمُۥۗ

2:120

कहो: “ईश्वर का मार्गदर्शन ही मार्गदर्शन है।”

قُلۡ إِنَّ هُدَى ٱللَّهِ هُوَ ٱلۡهُدَىٰۗ

2:120

और यदि तुम उनकी भावनाओं का अनुसरण करते, इसके बाद कि तुम्हारे पास ज्ञान आ चुका है, तो ईश्वर के विरुद्ध तुम्हारा न कोई हिमायती होता न कोई सहायता।

وَلَئِنِ ٱتَّبَعۡتَ أَهۡوَآءَهُمُۥ بَعۡدَ ٱلَّذِي جَآءَكَ مِنَ ٱلۡعِلۡمِ مَا لَكَ مِنَ ٱللَّهِ مِن وَلِيّٖ وَلَا نَصِيرٍ

2:121

जिन्हें हमने ग्रंथ दिया, और जो उसे वैसे सुनाते हैं जैसे उसे सुनाया जाना चाहिए, वही उस पर विश्वास करते हैं।

ٱلَّذِينَ ءَاتَيۡنَٰهُمُ ٱلۡكِتَٰبَ يَتۡلُونَهُۥ حَقَّ تِلَاوَتِهِۦ أُوْلَٰٓئِكَ يُؤۡمِنُونَ بِهِۦۗ

और जो कोई उसे नकारे — वही घाटा उठाने वाले हैं।

وَمَن يَكۡفُرۡ بِهِۦ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ

2:122

हे इसराईल की संतान! मेरे उपकार का स्मरण करो, वह जिससे मैंने तुम्हें भर दिया, और यह कि मैंने तुम्हें सभी प्राणियों से ऊपर वरीयता दी।

يَٰبَنِي إِسۡرَٰٓءِيلَ ٱذۡكُرُواْ نِعۡمَتِيَ ٱلَّتِي أَنۡعَمۡتُ عَلَيۡكُمُۥ وَأَنِّي فَضَّلۡتُكُمُۥ عَلَى ٱلۡعَٰلَمِينَ

2:123

और उस दिन से सावधान रहो जब कोई स्व किसी दूसरे स्व के कुछ भी काम नहीं आएगा, जब उससे कोई प्रतिकर स्वीकार नहीं किया जाएगा, जब कोई मध्यस्थता उसे लाभ नहीं देगी, और जब उनकी सहायता नहीं की जाएगी।

وَٱتَّقُواْ يَوۡمٗا لَّا تَجۡزِي نَفۡسٌ عَن نَّفۡسٖ شَيۡـٔٗا وَلَا يُقۡبَلُ مِنۡهَا عَدۡلٞ وَلَا تَنفَعُهَا شَفَٰعَةٞ وَلَا هُمُۥ يُنصَرُونَ

2:124

और जब इब्राहीम के अभिभावक ने उसे कुछ बोलों से परखा, जिन्हें उसने पूरा किया।

۞ وَإِذِ ٱبۡتَلَىٰ إِبۡرَٰهِيمَ رَبُّهُۥ بِكَلِمَٰتٖ فَأَتَمَّهُنَّۖ

2:124

उसने कहा: “मैं निश्चय ही तुम्हें लोगों के लिए मार्गदर्शक बनाने वाला हूँ।”

قَالَ إِنِّي جَاعِلُكَ لِلنَّاسِ إِمَامٗاۖ

उसने कहा: “और मेरी संतति में से?”

قَالَ وَمِن ذُرِّيَّتِيۖ

2:124

उसने कहा: “मेरी संधि अन्यायियों को नहीं मिलती।”

قَالَ لَا يَنَالُ عَهۡدِيَ ٱلظَّٰلِمِينَ

2:125

और जब हमने घर को लोगों के लिए बार-बार आने का स्थान और सुरक्षा बनाया; और उन्होंने इब्राहीम के ठहराव-स्थल को संपर्क का स्थान बना लिया।

وَإِذۡ جَعَلۡنَا ٱلۡبَيۡتَ مَثَابَةٗ لِّلنَّاسِ وَأَمۡنٗا وَٱتَّخِذُواْ مِن مَّقَامِ إِبۡرَٰهِيمَ مُصَلّٗىۖ

2:125

और हमने इब्राहीम और इस्माईल को एक संधि से बाँधा: “मेरे घर को आने-जाने वालों, वहाँ ठहरने वालों, और सेवा में घुटने टेकने वालों और निष्ठा में माथा टेकने वालों के लिए स्वच्छ करो।”

وَعَهِدۡنَا إِلَىٰ إِبۡرَٰهِيمَ وَإِسۡمَٰعِيلَ أَن طَهِّرَا بَيۡتِي لِلطَّآئِفِينَ وَٱلۡعَٰكِفِينَ وَٱلرُّكَّعِ ٱلسُّجُودِ

2:126

और जब इब्राहीम ने कहा: “मेरे अभिभावक, इसे एक सुरक्षित भूभाग बनाइए, और इसके निवासियों को फलों की जीविका दीजिए, उन्हें जो उनमें से ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास करते हैं।”

وَإِذۡ قَالَ إِبۡرَٰهِيمُ رَبِّ ٱجۡعَلۡ هَٰذَا بَلَدًا ءَامِنٗا وَٱرۡزُقۡ أَهۡلَهُۥ مِنَ ٱلثَّمَرَٰتِ مَنۡ ءَامَنَ مِنۡهُمُۥ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِۚ

2:126

उसने कहा: “और जो कोई नकारे, उसे मैं थोड़ा उपभोग दूँगा, फिर उसे आग के दंड की ओर धकेल दूँगा।”

قَالَ وَمَن كَفَرَ فَأُمَتِّعُهُۥ قَلِيلٗا ثُمَّ أَضۡطَرُّهُۥ إِلَىٰ عَذَابِ ٱلنَّارِۖ

और कितना भयानक गंतव्य!

وَبِئۡسَ ٱلۡمَصِيرُ

2:127

और जब इब्राहीम इस्माईल के साथ घर की नींव ऊँची कर रहा था:

وَإِذۡ يَرۡفَعُ إِبۡرَٰهِيمُ ٱلۡقَوَاعِدَ مِنَ ٱلۡبَيۡتِ وَإِسۡمَٰعِيلُ

“हमारे अभिभावक, हमसे इसे स्वीकार कीजिए; निश्चय ही आप ही सुनने वाले, सर्वज्ञ हैं।

رَبَّنَا تَقَبَّلۡ مِنَّاۖ إِنَّكَ أَنتَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ

2:128

हमारे अभिभावक, हम दोनों को अपने प्रति खरा बना दीजिए, और हमारी संतति में से अपने प्रति खरा एक समुदाय।

رَبَّنَا وَٱجۡعَلۡنَا مُسۡلِمَيۡنِ لَكَ وَمِن ذُرِّيَّتِنَا أُمَّةٗ مُّسۡلِمَةٗ لَّكَ

2:128

और हमें हमारे हितकारी आचरण दिखाइए।

وَأَرۡنَا مَنَاسِكَنَا

और अनुकंपा के साथ हमारी ओर पलटिए,

وَتُبۡ عَلَيۡنَاۖ

क्योंकि आप ही निरंतर पलट आने वाले, दयालु हैं।

إِنَّكَ أَنتَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

2:129

हमारे अभिभावक, और उनके बीच उन्हीं में से एक संदेशवाहक उठाइए, जो उन्हें आपके संकेत सुनाए, उन्हें ग्रंथ और प्रज्ञा सिखाए, और उन्हें शुद्ध करे;

رَبَّنَا وَٱبۡعَثۡ فِيهِمُۥ رَسُولٗا مِّنۡهُمُۥ يَتۡلُواْ عَلَيۡهِمُۥ ءَايَٰتِكَ وَيُعَلِّمُهُمُ ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡحِكۡمَةَ وَيُزَكِّيهِمُۥۖ

क्योंकि आप ही सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान हैं।”

إِنَّكَ أَنتَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ

2:130

और इब्राहीम के मत से कौन मुँह मोड़ता है, सिवा उसके जो अपने स्व को मूर्ख बनाता है?

وَمَن يَرۡغَبُ عَن مِّلَّةِ إِبۡرَٰهِيمَ إِلَّا مَن سَفِهَ نَفۡسَهُۥۚ

हमने उसे निकट जीवन में निश्चय ही चुना है,

وَلَقَدِ ٱصۡطَفَيۡنَٰهُۥ فِي ٱلدُّنۡيَاۖ

और अंतिम जीवन में वह अवश्य भलों में से होगा।

وَإِنَّهُۥ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ لَمِنَ ٱلصَّٰلِحِينَ

2:131

जब उसके अभिभावक ने उससे कहा: “मेरे प्रति खरे हो जाओ”;

إِذۡ قَالَ لَهُۥ رَبُّهُۥ أَسۡلِمۡۖ

उसने कहा: “मैं सभी प्राणियों के अभिभावक के प्रति खरा हूँ।”

قَالَ أَسۡلَمۡتُ لِرَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

2:132

और इब्राहीम ने अपने बेटों को इसकी अनुशंसा की,

وَوَصَّىٰ بِهَا إِبۡرَٰهِيمُ بَنِيهِۦ

तथा याक़ूब ने: “हे मेरे बेटो! ईश्वर ने तुम्हारे लिए यह विधान चुना है; इसलिए उसके प्रति खरे रहते हुए ही मरना।”

وَيَعۡقُوبُ يَٰبَنِيَّ إِنَّ ٱللَّهَ ٱصۡطَفَىٰ لَكُمُ ٱلدِّينَ فَلَا تَمُوتُنَّ إِلَّا وَأَنتُمُۥ مُسۡلِمُونَ

या क्या तुम साक्षी थे, जब याक़ूब के पास मृत्यु आ पहुँची, जब उसने अपने बेटों से कहा: “मेरे बाद तुम किसकी आज्ञा का पालन करोगे?”

أَمۡ كُنتُمُۥ شُهَدَآءَ ا۪ذۡ حَضَرَ يَعۡقُوبَ ٱلۡمَوۡتُ إِذۡ قَالَ لِبَنِيهِۦ مَا تَعۡبُدُونَ مِنۢ بَعۡدِيۖ

2:133

उन्होंने कहा: “हम तुम्हारे देवता की आज्ञा का पालन करेंगे, तुम्हारे पूर्वजों इब्राहीम, इस्माईल और इसहाक़ के देवता की, एक ही देवता की, और हम उसके प्रति खरे हैं।”

قَالُواْ نَعۡبُدُ إِلَٰهَكَ وَإِلَٰهَ ءَابَآئِكَ إِبۡرَٰهِيمَ وَإِسۡمَٰعِيلَ وَإِسۡحَٰقَ إِلَٰهٗا وَٰحِدٗا وَنَحۡنُ لَهُۥ مُسۡلِمُونَ

2:134

वह एक समुदाय है जो बीत चुका:

تِلۡكَ أُمَّةٞ قَدۡ خَلَتۡۖ

उसके लिए वह जो उसने कमाया,

لَهَا مَا كَسَبَتۡ

2:134

और तुम्हारे लिए वह जो तुमने कमाया;

وَلَكُمُۥ مَا كَسَبۡتُمُۥۖ

और तुमसे उसके विषय में नहीं पूछा जाएगा जो वे करते थे।

وَلَا تُسۡـَٔلُونَ عَمَّا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

और उन्होंने कहा: “पुनरुन्मुख या सहायक हो जाओ, तुम मार्गदर्शन पा लोगे।”

وَقَالُواْ كُونُواْ هُودًا أَوۡ نَصَٰرَىٰ تَهۡتَدُواْۗ

2:135

कहो: “नहीं, बल्कि इब्राहीम का मत, जो पूरी तरह ईश्वर की ओर मुड़ा हुआ था”,

قُلۡ بَلۡ مِلَّةَ إِبۡرَٰهِيمَ حَنِيفٗاۖ

और वह साझी ठहराने वालों में से न था।

وَمَا كَانَ مِنَ ٱلۡمُشۡرِكِينَ

2:136

कहो: “हम ईश्वर पर विश्वास करते हैं, उस पर जो हम पर उतारा गया, उस पर जो इब्राहीम, इस्माईल, इसहाक़, याक़ूब और वंश-शाखाओं पर उतारा गया, और उस पर जो मूसा और ईसा को दिया गया, और उस पर जो सूचनादाताओं को उनके अभिभावक की ओर से दिया गया; हम उनके बीच कोई भेद नहीं करते, और हम उसके प्रति खरे हैं।”

قُولُواْ ءَامَنَّا بِٱللَّهِ وَمَا أُنزِلَ إِلَيۡنَا وَمَا أُنزِلَ إِلَىٰ إِبۡرَٰهِيمَ وَإِسۡمَٰعِيلَ وَإِسۡحَٰقَ وَيَعۡقُوبَ وَٱلۡأَسۡبَاطِ وَمَا أُوتِيَ مُوسَىٰ وَعِيسَىٰ وَمَا أُوتِيَ ٱلنَّبِيُّونَ مِن رَّبِّهِمُۥ لَا نُفَرِّقُ بَيۡنَ أَحَدٖ مِّنۡهُمُۥ وَنَحۡنُ لَهُۥ مُسۡلِمُونَ

यदि वे उस पर विश्वास करें जिस पर तुमने विश्वास किया, तो वे मार्गदर्शन पा गए;

فَإِنۡ ءَامَنُواْ بِمِثۡلِ مَا ءَامَنتُمُۥ بِهِۦ فَقَدِ ٱهۡتَدَواْۖ

और यदि वे पीठ फेर लें, तो वे केवल एक दरार में हैं;

وَّإِن تَوَلَّوۡاْ فَإِنَّمَا هُمُۥ فِي شِقَاقٖۖ

उनके विरुद्ध ईश्वर तुम्हारे लिए शीघ्र पर्याप्त होगा:

فَسَيَكۡفِيكَهُمُ ٱللَّهُۚ

और वह सुनने वाला, सर्वज्ञ है।

وَهُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ

2:138

ईश्वर का रंग —

صِبۡغَةَ ٱللَّهِ

और ईश्वर से बेहतर रंगने वाला कौन है? —

وَمَنۡ أَحۡسَنُ مِنَ ٱللَّهِ صِبۡغَةٗۖ

और हम उसी की आज्ञा का पालन करते हैं।

وَنَحۡنُ لَهُۥ عَٰبِدُونَ

कहो: “क्या तुम ईश्वर के विषय में हमसे विवाद करते हो, जबकि वह हमारा अभिभावक है और तुम्हारा अभिभावक? हमारे लिए हमारे कर्म, तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म;

قُلۡ أَتُحَآجُّونَنَا فِي ٱللَّهِ وَهُوَ رَبُّنَا وَرَبُّكُمُۥ وَلَنَا أَعۡمَٰلُنَا وَلَكُمُۥ أَعۡمَٰلُكُمُۥ

और हम अनन्य रूप से उसी को समर्पित हैं।”

وَنَحۡنُ لَهُۥ مُخۡلِصُونَ

2:140

या तुम कहते हो: “इब्राहीम, इस्माईल, इसहाक़, याक़ूब और वंश-शाखाएँ पुनरुन्मुख या सहायक थे”?

أَمۡ يَقُولُونَ إِنَّ إِبۡرَٰهِيمَ وَإِسۡمَٰعِيلَ وَإِسۡحَٰقَ وَيَعۡقُوبَ وَٱلۡأَسۡبَاطَ كَانُواْ هُودًا أَوۡ نَصَٰرَىٰۗ

कहो: “क्या तुम अधिक जानते हो, या ईश्वर?”

قُلۡ ءَا۬نتُمُۥ أَعۡلَمُ أَمِ ٱللَّهُۗ

और उससे बढ़कर अन्यायी कौन है जो ईश्वर की ओर से अपने पास के साक्ष्य को दबाता है?

وَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّن كَتَمَ شَهَٰدَةً عِندَهُۥ مِنَ ٱللَّهِۗ

और ईश्वर उससे लापरवाह नहीं जो तुम करते हो।

وَمَا ٱللَّهُ بِغَٰفِلٍ عَمَّا تَعۡمَلُونَ

वह एक समुदाय है जो बीत चुका:

تِلۡكَ أُمَّةٞ قَدۡ خَلَتۡۖ

उसके लिए वह जो उसने कमाया,

لَهَا مَا كَسَبَتۡ

और तुम्हारे लिए वह जो तुमने कमाया;

وَلَكُمُۥ مَا كَسَبۡتُمُۥۖ

और तुमसे उसके विषय में नहीं पूछा जाएगा जो वे करते थे।

وَلَا تُسۡـَٔلُونَ عَمَّا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

2:142

लोगों में से मूर्ख कहेंगे: “उन्हें उनके उस मिलन-बिंदु से किस बात ने मोड़ दिया, जिस पर वे थे?”

۞ سَيَقُولُ ٱلسُّفَهَآءُ مِنَ ٱلنَّاسِ مَا وَلَّىٰهُمُۥ عَن قِبۡلَتِهِمُ ٱلَّتِي كَانُواْ عَلَيۡهَاۚ

2:142

कहो: “ईश्वर के हैं उदय-स्थान और अस्त-स्थान;

قُل لِّلَّهِ ٱلۡمَشۡرِقُ وَٱلۡمَغۡرِبُۚ

वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे सीधे पथ की ओर मार्ग दिखाता है।”

يَهۡدِي مَن يَشَآءُ اِ۪لَىٰ صِۜرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ

2:143

और इसी प्रकार हमने तुम्हें एक आदर्श समुदाय बनाया,

وَكَذَٰلِكَ جَعَلۡنَٰكُمُۥ أُمَّةٗ وَسَطٗا

2:143

ताकि तुम लोगों के विरुद्ध साक्षी बनो, और संदेशवाहक तुम्हारे विरुद्ध साक्षी हो।

لِّتَكُونُواْ شُهَدَآءَ عَلَى ٱلنَّاسِ وَيَكُونَ ٱلرَّسُولُ عَلَيۡكُمُۥ شَهِيدٗاۗ

2:143

और हमने वह मिलन-बिंदु, जिस पर तुम थे, केवल यह अलग दिखाने के लिए रखा था कि कौन संदेशवाहक का अनुसरण करता है और कौन एड़ियों के बल पलट जाता है।

وَمَا جَعَلۡنَا ٱلۡقِبۡلَةَ ٱلَّتِي كُنتَ عَلَيۡهَا إِلَّا لِنَعۡلَمَ مَن يَتَّبِعُ ٱلرَّسُولَ مِمَّن يَنقَلِبُ عَلَىٰ عَقِبَيۡهِۦۚ

2:143

यह अवश्य भारी था, सिवा उनके जिन्हें ईश्वर ने मार्ग दिखाया।

وَإِن كَانَتۡ لَكَبِيرَةً إِلَّا عَلَى ٱلَّذِينَ هَدَى ٱللَّهُۗ

2:143

और ईश्वर को यह शोभा नहीं देता कि वह तुम्हारे विश्वास को व्यर्थ जाने दे।

وَمَا كَانَ ٱللَّهُ لِيُضِيعَ إِيمَٰنَكُمُۥۚ

2:143

ईश्वर अवश्य लोगों के प्रति करुणामय, दयालु है।

إِنَّ ٱللَّهَ بِٱلنَّاسِ لَرَءُوفٞ رَّحِيمٞ

2:144

हम निश्चय ही तुम्हारा चेहरा आकाश में इधर-उधर मुड़ता देखेंगे; इसलिए हम तुम्हें अवश्य रुख़ के रूप में एक ऐसा मिलन-बिंदु देंगे जो तुम्हें संतुष्ट करे।

قَدۡ نَرَىٰ تَقَلُّبَ وَجۡهِكَ فِي ٱلسَّمَآءِۖ فَلَنُوَلِّيَنَّكَ قِبۡلَةٗ تَرۡضَىٰهَاۚ

2:144

इसलिए अपना रुख़ माथा टेकने के अलंघनीय स्थान की ओर करो,

فَوَلِّ وَجۡهَكَ شَطۡرَ ٱلۡمَسۡجِدِ ٱلۡحَرَامِۚ

2:144

और जहाँ भी तुम हो, अपना रुख़ उसी की ओर करो।

وَحَيۡثُ مَا كُنتُمُۥ فَوَلُّواْ وُجُوهَكُمُۥ شَطۡرَهُۥۗ

2:144

और जिन्हें ग्रंथ दिया गया है वे अवश्य जानते हैं कि यह उनके अभिभावक की ओर से सत्य है।

وَإِنَّ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡكِتَٰبَ لَيَعۡلَمُونَ أَنَّهُ ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّهِمُۥۗ

और ईश्वर उससे लापरवाह नहीं जो वे करते हैं।

وَمَا ٱللَّهُ بِغَٰفِلٍ عَمَّا يَعۡمَلُونَ

2:145

और यदि तुम उन्हें, जिन्हें ग्रंथ दिया गया है, हर संकेत ले भी आते, तब भी वे तुम्हारे मिलन-बिंदु का अनुसरण न करते।

وَلَئِنۡ أَتَيۡتَ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡكِتَٰبَ بِكُلِّ ءَايَةٖ مَّا تَبِعُواْ قِبۡلَتَكَۚ

2:145

और तुम उनके मिलन-बिंदु का अनुसरण नहीं करोगे;

وَمَا أَنتَ بِتَابِعٖ قِبۡلَتَهُمُۥۚ

2:145

और वे आपस में भी एक-दूसरे के मिलन-बिंदु का अनुसरण नहीं करते।

وَمَا بَعۡضُهُمُۥ بِتَابِعٖ قِبۡلَةَ بَعۡضٖۚ

और यदि तुम उनकी भावनाओं का अनुसरण करते, इसके बाद कि तुम्हारे पास ज्ञान आ चुका है, तो तुम तब अवश्य अन्यायियों में से होते।

وَلَئِنِ ٱتَّبَعۡتَ أَهۡوَآءَهُمُۥ مِنۢ بَعۡدِ مَا جَآءَكَ مِنَ ٱلۡعِلۡمِ إِنَّكَ إِذٗا لَّمِنَ ٱلظَّٰلِمِينَ

2:146

जिन्हें हमने ग्रंथ दिया वे उसे वैसे पहचानते हैं जैसे अपने बेटों को पहचानते हैं,

ٱلَّذِينَ ءَاتَيۡنَٰهُمُ ٱلۡكِتَٰبَ يَعۡرِفُونَهُۥ كَمَا يَعۡرِفُونَ أَبۡنَآءَهُمُۥۖ

2:146

और उनमें से एक भाग अवश्य सत्य को दबाता है, जानते हुए।

وَإِنَّ فَرِيقٗا مِّنۡهُمُۥ لَيَكۡتُمُونَ ٱلۡحَقَّ وَهُمُۥ يَعۡلَمُونَ

सत्य तुम्हारे अभिभावक की ओर से है;

ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّكَ

इसलिए कभी वाद-प्रतिवाद में पड़ने वालों में से न होना।

فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡمُمۡتَرِينَ

2:148

और हर एक की एक दिशा है जो उसे रुख़ के रूप में दी गई है; तो जो सबसे बेहतर है उसमें एक-दूसरे से आगे निकलो।

وَلِكُلّٖ وِجۡهَةٌ هُوَ مُوَلِّيهَاۖ فَٱسۡتَبِقُواْ ٱلۡخَيۡرَٰتِۚ

2:148

तुम जहाँ कहीं भी हो, ईश्वर तुम सबको वापस ले आएगा,

أَيۡنَ مَا تَكُونُواْ يَأۡتِ بِكُمُ ٱللَّهُ جَمِيعًاۚ

2:148

क्योंकि ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।

إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ

2:149

और तुम जहाँ से भी निकलो, अपना रुख़ माथा टेकने के अलंघनीय स्थान की ओर करो:

وَمِنۡ حَيۡثُ خَرَجۡتَ فَوَلِّ وَجۡهَكَ شَطۡرَ ٱلۡمَسۡجِدِ ٱلۡحَرَامِۖ

2:149

यह अवश्य तुम्हारे अभिभावक की ओर से आया सत्य है।

وَإِنَّهُۥ لَلۡحَقُّ مِن رَّبِّكَۗ

2:149

और ईश्वर उससे लापरवाह नहीं जो तुम करते हो।

وَمَا ٱللَّهُ بِغَٰفِلٍ عَمَّا تَعۡمَلُونَ

2:150

और तुम जहाँ से भी निकलो, अपना रुख़ माथा टेकने के अलंघनीय स्थान की ओर करो,

وَمِنۡ حَيۡثُ خَرَجۡتَ فَوَلِّ وَجۡهَكَ شَطۡرَ ٱلۡمَسۡجِدِ ٱلۡحَرَامِۚ

2:150

और तुम जहाँ कहीं भी हो, अपना रुख़ उसकी ओर करो, ताकि लोगों के पास तुम्हारे विरुद्ध कोई तर्क न रहे — सिवा उनमें से उनके जो अन्यायी हैं; तो उनसे भय मत रखो, बल्कि मुझसे भय रखो —

وَحَيۡثُ مَا كُنتُمُۥ فَوَلُّواْ وُجُوهَكُمُۥ شَطۡرَهُۥ لِئَلَّا يَكُونَ لِلنَّاسِ عَلَيۡكُمُۥ حُجَّةٌ إِلَّا ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ مِنۡهُمُۥ فَلَا تَخۡشَوۡهُمُۥ وَٱخۡشَوۡنِي

2:150

और ताकि मैं तुम पर अपना उपकार पूर्ण करूँ, और शायद तुम मार्गदर्शन पाओ,

وَلِأُتِمَّ نِعۡمَتِي عَلَيۡكُمُۥ وَلَعَلَّكُمُۥ تَهۡتَدُونَ

2:151–152

जैसे हमने तुम्हारे बीच, तुम्हीं में से, एक संदेशवाहक भेजा, जो तुम्हें हमारे संकेत सुनाता है, तुम्हें शुद्ध करता है, तुम्हें ग्रंथ और प्रज्ञा सिखाता है, और तुम्हें वह सिखाता है जो तुम नहीं जानते थे। तो मेरा स्मरण करो, मैं तुम्हारा स्मरण करूँगा; मेरे प्रति कृतज्ञ रहो, और मुझे मत नकारो।

كَمَا أَرۡسَلۡنَا فِيكُمُۥ رَسُولٗا مِّنكُمُۥ يَتۡلُواْ عَلَيۡكُمُۥ ءَايَٰتِنَا وَيُزَكِّيكُمُۥ وَيُعَلِّمُكُمُ ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡحِكۡمَةَ وَيُعَلِّمُكُمُۥ مَا لَمۡ تَكُونُواْ تَعۡلَمُونَ فَٱذۡكُرُونِيَ أَذۡكُرۡكُمُۥ وَٱشۡكُرُواْ لِي وَلَا تَكۡفُرُونِ

2:153

हे विश्वास करने वालो! धैर्य और संपर्क से मदद माँगो,

يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱسۡتَعِينُواْ بِٱلصَّبۡرِ وَٱلصَّلَوٰةِۚ

2:153

क्योंकि ईश्वर धैर्य रखने वालों के साथ है।

إِنَّ ٱللَّهَ مَعَ ٱلصَّٰبِرِينَ

2:154

और जो ईश्वर की राह में मार डाले जाते हैं उनके विषय में मत कहो कि वे मृत हैं।

وَلَا تَقُولُواْ لِمَن يُقۡتَلُ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ أَمۡوَٰتُۢۚ

2:154

नहीं, वे जीवित हैं, परंतु तुम्हें इसका आभास नहीं।

بَلۡ أَحۡيَآءٞ وَلَٰكِن لَّا تَشۡعُرُونَ

2:155

और अवश्य हम थोड़े डर और भूख से, और संपत्ति, स्व और फलों की कमी से तुम्हें परखेंगे;

وَلَنَبۡلُوَنَّكُمُۥ بِشَيۡءٖ مِّنَ ٱلۡخَوۡفِ وَٱلۡجُوعِ وَنَقۡصٖ مِّنَ ٱلۡأَمۡوَٰلِ وَٱلۡأَنفُسِ وَٱلثَّمَرَٰتِۗ

2:156

और धैर्य रखने वालों को शुभ समाचार दो, जो, जब उन पर कोई विपत्ति आ पड़ती है, कहते हैं: “हम निश्चय ही ईश्वर के हैं, और उसी की ओर हम लौटते हैं।”

وَبَشِّرِ ٱلصَّٰبِرِينَ ٱلَّذِينَ إِذَا أَصَٰبَتۡهُمُۥ مُصِيبَةٞ قَالُواْ إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّا إِلَيۡهِۦ رَٰجِعُونَ

2:157

यही वे हैं जिन पर उनके अभिभावक के संपर्क टिके हैं, और दया,

أُوْلَٰٓئِكَ عَلَيۡهِمُۥ صَلَوَٰتٞ مِّن رَّبِّهِمُۥ وَرَحۡمَةٞۖ

2:157

और यही वे हैं जो मार्गदर्शन पाते हैं।

وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُهۡتَدُونَ

2:158

सफ़ा और मरवा निश्चय ही ईश्वर के प्रत्यक्ष चिह्नों में से हैं।

۞ إِنَّ ٱلصَّفَا وَٱلۡمَرۡوَةَ مِن شَعَآئِرِ ٱللَّهِۖ

2:158

जो कोई घर का हज करे या उमरा करे, उन दोनों तक आने-जाने में उस पर कोई आक्षेप नहीं।

فَمَنۡ حَجَّ ٱلۡبَيۡتَ أَوِ ٱعۡتَمَرَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيۡهِۦ أَن يَطَّوَّفَ بِهِمَاۚ

और जो कोई स्वेच्छा से अच्छाई करे — ईश्वर निश्चय ही कृतज्ञ, सर्वज्ञ है।

وَمَن تَطَوَّعَ خَيۡرٗا فَإِنَّ ٱللَّهَ شَاكِرٌ عَلِيمٌ

2:159

निश्चय ही, जो उसे दबाते हैं जो हमने स्पष्ट प्रमाणों और मार्गदर्शन में से उतारा है, इसके बाद कि हमने उसे ग्रंथ में लोगों के लिए स्पष्ट कर दिया — यही वे हैं जिन्हें ईश्वर धिक्कारता है, और जिन्हें धिक्कारने वाले धिक्कारते हैं,

إِنَّ ٱلَّذِينَ يَكۡتُمُونَ مَا أَنزَلۡنَا مِنَ ٱلۡبَيِّنَٰتِ وَٱلۡهُدَىٰ مِنۢ بَعۡدِ مَا بَيَّنَّٰهُۥ لِلنَّاسِ فِي ٱلۡكِتَٰبِ أُوْلَٰٓئِكَ يَلۡعَنُهُمُ ٱللَّهُ وَيَلۡعَنُهُمُ ٱللَّٰعِنُونَ

2:160

सिवा उनके जो पलट आते हैं, स्वयं को सुधारते हैं और स्पष्ट करते हैं: यही वे हैं जिनकी ओर मैं अनुकंपा के साथ पलटता हूँ; मैं निरंतर पलट आने वाला, दयालु हूँ।

إِلَّا ٱلَّذِينَ تَابُواْ وَأَصۡلَحُواْ وَبَيَّنُواْ فَأُوْلَٰٓئِكَ أَتُوبُ عَلَيۡهِمُۥ وَأَنَا ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

2:161–162

निश्चय ही, जो नकारते हैं और नकारते हुए मरते हैं — यही वे हैं जिन पर ईश्वर का, अभिकर्ताओं का, और लोगों का, सब मिलकर, धिक्कार पड़ता है, जिसमें वे सदा रहेंगे;

إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَمَاتُواْ وَهُمُۥ كُفَّارٌ أُوْلَٰٓئِكَ عَلَيۡهِمُۥ لَعۡنَةُ ٱللَّهِ وَٱلۡمَلَٰٓئِكَةِ وَٱلنَّاسِ أَجۡمَعِينَ خَٰلِدِينَ فِيهَا

2:161–162

उनके लिए दंड हल्का नहीं किया जाएगा, और उन्हें मोहलत नहीं दी जाएगी।

لَا يُخَفَّفُ عَنۡهُمُ ٱلۡعَذَابُ وَلَا هُمُۥ يُنظَرُونَ

और तुम्हारा देवता एक ही देवता है;

وَإِلَٰهُكُمُۥ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞۖ

उसके सिवा कोई देवता नहीं,

لَّا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ

सर्वदयालु, दयालु।

ٱلرَّحۡمَٰنُ ٱلرَّحِيمُ

2:164

अवश्य, आकाशों और धरती की रचना में, रात और दिन की अदला-बदली में, उस जलयान में जो लोगों को लाभ पहुँचाता है उसे लादे हुए समुद्र में चलता है, उस पानी में जो ईश्वर आकाश से उतारता है और जिससे वह धरती को उसकी मृत्यु के बाद पुनः जीवन देता है, उसमें हर प्रकार के चलने-फिरने वाले को बिखेरते हुए, हवाओं की विविधता में, और आकाश और धरती के बीच वशीभूत बादल में — बुद्धि से काम लेने वाली क़ौम के लिए संकेत हैं।

إِنَّ فِي خَلۡقِ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَٱخۡتِلَٰفِ ٱلَّيۡلِ وَٱلنَّهَارِ وَٱلۡفُلۡكِ ٱلَّتِي تَجۡرِي فِي ٱلۡبَحۡرِ بِمَا يَنفَعُ ٱلنَّاسَ وَمَا أَنزَلَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مِن مَّآءٖ فَأَحۡيَا بِهِ ٱلۡأَرۡضَ بَعۡدَ مَوۡتِهَا وَبَثَّ فِيهَا مِن كُلِّ دَآبَّةٖ وَتَصۡرِيفِ ٱلرِّيَٰحِ وَٱلسَّحَابِ ٱلۡمُسَخَّرِ بَيۡنَ ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يَعۡقِلُونَ

2:165

और लोगों में से कुछ ऐसे हैं जो ईश्वर के अतिरिक्त प्रतिद्वंद्वी बना लेते हैं, जिनसे वे वैसा प्रेम करते हैं जैसा ईश्वर से किया जाता है;

وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يَتَّخِذُ مِن دُونِ ٱللَّهِ أَندَادٗا يُحِبُّونَهُمُۥ كَحُبِّ ٱللَّهِۖ

2:165

परंतु जिन्होंने विश्वास किया वे ईश्वर के प्रेम में और भी अधिक प्रबल हैं।

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ أَشَدُّ حُبّٗا لِّلَّهِۗ

2:165

और यदि अन्यायी देख लेते, जब वे दंड को देखेंगे, कि सारा बल ईश्वर का है, और कि ईश्वर दंड देने में कठोर है —

وَلَوۡ يَرَى ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ إِذۡ يَرَوۡنَ ٱلۡعَذَابَ أَنَّ ٱلۡقُوَّةَ لِلَّهِ جَمِيعٗا وَأَنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلۡعَذَابِ

2:166

जब वे जिनका अनुसरण किया गया, उनसे जिन्होंने उनका अनुसरण किया, स्वयं को बरी घोषित कर देंगे, और वे दंड देखेंगे, और उनके बीच की कड़ियाँ टूट जाएँगी।

إِذۡ تَبَرَّأَ ٱلَّذِينَ ٱتُّبِعُواْ مِنَ ٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُواْ وَرَأَوُاْ ٱلۡعَذَابَ وَتَقَطَّعَتۡ بِهِمُ ٱلۡأَسۡبَابُ

2:167

और जिन्होंने अनुसरण किया वे कहेंगे: “काश हमें पलटवार का अवसर मिलता, तो हम उनसे स्वयं को बरी घोषित कर देते जैसे उन्होंने हमसे स्वयं को बरी घोषित किया।”

وَقَالَ ٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُواْ لَوۡ أَنَّ لَنَا كَرَّةٗ فَنَتَبَرَّأَ مِنۡهُمُۥ كَمَا تَبَرَّءُواْ مِنَّاۗ

2:167

इस प्रकार ईश्वर उन्हें उनके कर्म दिखाता है, उनके लिए संताप के रूप में,

كَذَٰلِكَ يُرِيهِمُ ٱللَّهُ أَعۡمَٰلَهُمُۥ حَسَرَٰتٍ عَلَيۡهِمُۥۖ

2:167

और वे आग से कभी नहीं निकलेंगे।

وَمَا هُمُۥ بِخَٰرِجِينَ مِنَ ٱلنَّارِ

2:168

हे लोगो! धरती पर जो है उसमें से खाओ, जो वैध और अच्छा है,

يَٰأَيُّهَا ٱلنَّاسُ كُلُواْ مِمَّا فِي ٱلۡأَرۡضِ حَلَٰلٗا طَيِّبٗا

2:168

और बहकाने वाले के क़दमों का अनुसरण मत करो,

وَلَا تَتَّبِعُواْ خُطُوَٰتِ ٱلشَّيۡطَٰنِۚ

2:168

क्योंकि वह तुम्हारे लिए एक स्पष्ट शत्रु है।

إِنَّهُۥ لَكُمُۥ عَدُوّٞ مُّبِينٌ

2:169

वह तुम्हें केवल बुराई और निर्लज्जता का आदेश देता है, और यह कि तुम ईश्वर के विषय में वह कहो जो तुम नहीं जानते।

إِنَّمَا يَأۡمُرُكُمُۥ بِٱلسُّوٓءِ وَٱلۡفَحۡشَآءِ وَأَن تَقُولُواْ عَلَى ٱللَّهِ مَا لَا تَعۡلَمُونَ

2:170

और जब उनसे कहा जाता है: “उसका अनुसरण करो जो ईश्वर ने उतारा है”, तो वे कहते हैं: “नहीं, हम उसका अनुसरण करते हैं जिस पर हमने अपने पूर्वजों को पाया।”

وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱتَّبِعُواْ مَا أَنزَلَ ٱللَّهُ قَالُواْ بَلۡ نَتَّبِعُ مَا أَلۡفَيۡنَا عَلَيۡهِۦ ءَابَآءَنَاۚ

2:170

क्या! भले ही उनके पूर्वज किसी चीज़ में बुद्धि से काम न लेते हों और मार्गदर्शन न पाते हों?

أَوَلَوۡ كَانَ ءَابَآؤُهُمُۥ لَا يَعۡقِلُونَ شَيۡـٔٗا وَلَا يَهۡتَدُونَ

2:171

और नकारने वालों का उदाहरण उस व्यक्ति के उदाहरण जैसा है जो उस पर चिल्लाता है जो बुलावे और चीख़ के सिवा कुछ नहीं सुनता।

وَمَثَلُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ كَمَثَلِ ٱلَّذِي يَنۡعِقُ بِمَا لَا يَسۡمَعُ إِلَّا دُعَآءٗ وَنِدَآءٗۚ

2:171

बहरे, गूँगे, अंधे, इसलिए वे बुद्धि से काम नहीं लेते।

صُمُّۢ بُكۡمٌ عُمۡيٞ فَهُمُۥ لَا يَعۡقِلُونَ

हे विश्वास करने वालो! उन अच्छी चीज़ों में से खाओ जिनकी जीविका हमने तुम्हें दी है, और ईश्वर के प्रति कृतज्ञ रहो, यदि तुम उसी की आज्ञा का पालन करते हो।

يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ كُلُواْ مِن طَيِّبَٰتِ مَا رَزَقۡنَٰكُمُۥ وَٱشۡكُرُواْ لِلَّهِ إِن كُنتُمُۥ إِيَّاهُۥ تَعۡبُدُونَ

2:173

उसने तुम पर केवल मृत पशु, रक्त, सूअर का मांस, और वह जो ईश्वर के अतिरिक्त किसी और के लिए समर्पित किया गया हो, वर्जित किया है।

إِنَّمَا حَرَّمَ عَلَيۡكُمُ ٱلۡمَيۡتَةَ وَٱلدَّمَ وَلَحۡمَ ٱلۡخِنزِيرِ وَمَا أُهِلَّ بِهِۦ لِغَيۡرِ ٱللَّهِۖ

2:173

परंतु जो कोई विवश हो जाए, बिना विद्रोही हुए और बिना सीमाएँ पार किए, उस पर कोई अपराध नहीं ठहरता,

فَمَنُ ٱضۡطُرَّ غَيۡرَ بَاغٖ وَلَا عَادٖ فَلَا إِثۡمَ عَلَيۡهِۦۚ

2:173

क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।

إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٌ

2:174

निश्चय ही, जो उसे दबाते हैं जो ईश्वर ने ग्रंथ में से उतारा है, और उसके बदले तुच्छ मूल्य ख़रीदते हैं — यही वे हैं जो अपने पेटों में केवल आग निगलते हैं; पेशी के दिन ईश्वर उनसे बोलेगा नहीं, और उन्हें शुद्ध नहीं करेगा,

إِنَّ ٱلَّذِينَ يَكۡتُمُونَ مَا أَنزَلَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلۡكِتَٰبِ وَيَشۡتَرُونَ بِهِۦ ثَمَنٗا قَلِيلًا أُوْلَٰٓئِكَ مَا يَأۡكُلُونَ فِي بُطُونِهِمُۥ إِلَّا ٱلنَّارَ وَلَا يُكَلِّمُهُمُ ٱللَّهُ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ وَلَا يُزَكِّيهِمُۥ

2:174

और उनके लिए पीड़ादायक दंड होगा।

وَلَهُمُۥ عَذَابٌ أَلِيمٌ

2:175

यही वे हैं जिन्होंने मार्गदर्शन के मूल्य पर भटकाव ख़रीदा, और क्षमा के मूल्य पर दंड। आख़िर क्या उन्हें आग के सामने इतना सहने वाला बना रहा है!

أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ ٱشۡتَرَوُاْ ٱلضَّلَٰلَةَ بِٱلۡهُدَىٰ وَٱلۡعَذَابَ بِٱلۡمَغۡفِرَةِۚ فَمَا أَصۡبَرَهُمُۥ عَلَى ٱلنَّارِ

2:176

यह इसलिए कि ईश्वर ने ग्रंथ को पूर्ण सत्य के साथ उतारा है,

ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ نَزَّلَ ٱلۡكِتَٰبَ بِٱلۡحَقِّۗ

2:176

और जो ग्रंथ के विषय में मतभेद करते हैं वे अवश्य दूर की दरार में हैं।

وَإِنَّ ٱلَّذِينَ ٱخۡتَلَفُواْ فِي ٱلۡكِتَٰبِ لَفِي شِقَاقِۭ بَعِيدٖ

2:177

सद्गुण यह नहीं कि तुम अपने चेहरे उदय-स्थान या अस्त-स्थान की ओर फेरो,

۞ لَّيۡسَ ٱلۡبِرُّ أَن تُوَلُّواْ وُجُوهَكُمُۥ قِبَلَ ٱلۡمَشۡرِقِ وَٱلۡمَغۡرِبِ

2:177

परंतु सद्गुण वह है जो ईश्वर पर, अंतिम दिन पर, अभिकर्ताओं पर, ग्रंथ पर और सूचनादाताओं पर विश्वास करता है, और जो अपनी संपत्ति में से, उसके प्रति अपने प्रेम के होते हुए भी, निकट संबंधियों, अनाथों, दरिद्रों, राह के मुसाफ़िर, माँगने वालों को देता है, और गिरवी व्यक्तियों को छुड़ाने के लिए देता है, जो संपर्क बनाए रखता है और शुद्ध उदारता देता है,

وَلَٰكِنَّ ٱلۡبِرَّ مَنۡ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ وَٱلۡمَلَٰٓئِكَةِ وَٱلۡكِتَٰبِ وَٱلنَّبِيِّـۧنَ وَءَاتَى ٱلۡمَالَ عَلَىٰ حُبِّهِۦ ذَوِي ٱلۡقُرۡبَىٰ وَٱلۡيَتَٰمَىٰ وَٱلۡمَسَٰكِينَ وَٱبۡنَ ٱلسَّبِيلِ وَٱلسَّآئِلِينَ وَفِي ٱلرِّقَابِ وَأَقَامَ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتَى ٱلزَّكَوٰةَ

2:177

जो अपनी संधि के प्रति निष्ठावान हैं जब वे संधि करते हैं,

وَٱلۡمُوفُونَ بِعَهۡدِهِمُۥ إِذَا عَٰهَدُواْۖ

2:177

और संकट, हानि और हिंसा के क्षण में धैर्य रखने वाले:

وَٱلصَّٰبِرِينَ فِي ٱلۡبَأۡسَآءِ وَٱلضَّرَّآءِ وَحِينَ ٱلۡبَأۡسِۗ

2:177

यही वे हैं जो सच्चे रहे,

أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ صَدَقُواْۖ

2:177

और यही सावधानी बरतने वाले हैं।

وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُتَّقُونَ

हे विश्वास करने वालो! मार डाले गए जनों के विषय में जाँच तुम्हारे लिए विहित की गई है:

يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ كُتِبَ عَلَيۡكُمُ ٱلۡقِصَاصُ فِي ٱلۡقَتۡلَىۖ

2:178

स्वतंत्र के साथ स्वतंत्र, आज्ञाकारी के साथ आज्ञाकारी, और स्त्री के साथ स्त्री।

ٱلۡحُرُّ بِٱلۡحُرِّ وَٱلۡعَبۡدُ بِٱلۡعَبۡدِ وَٱلۡأُنثَىٰ بِٱلۡأُنثَىٰۚ

2:178

परंतु जिसके पक्ष में उसका भाई किसी चीज़ से दरगुज़र करे: मान्य के अनुसार अनुगमन, और सहर्ष भुगतान।

فَمَنۡ عُفِيَ لَهُۥ مِنۡ أَخِيهِۦ شَيۡءٞ فَٱتِّبَاعُۢ بِٱلۡمَعۡرُوفِ وَأَدَآءٌ إِلَيۡهِۦ بِإِحۡسَٰنٖۗ

यह तुम्हारे अभिभावक की ओर से राहत है, और दया।

ذَٰلِكَ تَخۡفِيفٞ مِّن رَّبِّكُمُۥ وَرَحۡمَةٞۗ

और जो कोई इसके बाद आक्रमण करे, उसके लिए पीड़ादायक दंड होगा।

فَمَنِ ٱعۡتَدَىٰ بَعۡدَ ذَٰلِكَ فَلَهُۥ عَذَابٌ أَلِيمٞ

2:179

और तुम्हारे लिए जाँच में एक जीवन है, हे मेधा रखने वालो, शायद तुम सावधान रहो।

وَلَكُمُۥ فِي ٱلۡقِصَاصِ حَيَوٰةٞ يَٰأُوْلِي ٱلۡأَلۡبَٰبِ لَعَلَّكُمُۥ تَتَّقُونَ

2:180

तुम पर विहित किया गया है, जब तुममें से किसी के पास मृत्यु आए, यदि वह कुछ संपत्ति छोड़े,

كُتِبَ عَلَيۡكُمُۥ إِذَا حَضَرَ أَحَدَكُمُ ٱلۡمَوۡتُ إِن تَرَكَ خَيۡرًا

2:180

माता-पिता और निकट संबंधियों के पक्ष में वसीयत, मान्य के अनुसार:

ٱلۡوَصِيَّةُ لِلۡوَٰلِدَيۡنِ وَٱلۡأَقۡرَبِينَ بِٱلۡمَعۡرُوفِۖ

2:180

सावधानी बरतने वालों के लिए एक कर्तव्य।

حَقًّا عَلَى ٱلۡمُتَّقِينَ

2:181

और जो कोई उसे सुनने के बाद उसे बदल दे, उसका अपराध केवल उन्हीं पर है जो उसे बदलते हैं,

فَمَنۢ بَدَّلَهُۥ بَعۡدَ مَا سَمِعَهُۥ فَإِنَّمَا إِثۡمُهُۥ عَلَى ٱلَّذِينَ يُبَدِّلُونَهُۥۚ

2:181

क्योंकि ईश्वर सुनने वाला, सर्वज्ञ है।

إِنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٞ

2:182

परंतु जो कोई किसी वसीयत करने वाले की ओर से पक्षपात या अपराध से डरे, और उनमें सुलह करा दे, उस पर कोई अपराध नहीं ठहरता;

فَمَنۡ خَافَ مِن مُّوصٖ جَنَفًا أَوۡ إِثۡمٗا فَأَصۡلَحَ بَيۡنَهُمُۥ فَلَا إِثۡمَ عَلَيۡهِۦۚ

2:182

क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।

إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ

2:183–184

हे विश्वास करने वालो! तुम पर परहेज़ विहित किया गया है, जैसे वह उन पर विहित किया गया था जो तुमसे पहले थे, शायद तुम सावधान रहो, गिने-चुने दिनों तक।

يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ كُتِبَ عَلَيۡكُمُ ٱلصِّيَامُ كَمَا كُتِبَ عَلَى ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِكُمُۥ لَعَلَّكُمُۥ تَتَّقُونَ أَيَّامٗا مَّعۡدُودَٰتٖۚ

2:183–184

और तुममें से जो कोई बीमार हो, या यात्रा में, तो अन्य दिनों की गिनती;

فَمَن كَانَ مِنكُمُۥ مَرِيضًا أَوۡ عَلَىٰ سَفَرٖ فَعِدَّةٞ مِّنۡ أَيَّامٍ أُخَرَۚ

2:183–184

और जिनमें इसकी क्षमता है, उनके लिए एक प्रतिपूर्ति, एक दरिद्र का भोजन।

وَعَلَى ٱلَّذِينَ يُطِيقُونَهُۥ فِدۡيَةٞ طَعَامُ مِسۡكِينٖۖ

2:183–184

और जो कोई स्वेच्छा से अच्छाई करे, वह उसके लिए बेहतर है;

فَمَن تَطَوَّعَ خَيۡرٗا فَهُوَ خَيۡرٞ لَّهُۥۚ

2:183–184

और तुम्हारा संयम करना तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम जानते।

وَأَن تَصُومُواْ خَيۡرٞ لَّكُمُۥ إِن كُنتُمُۥ تَعۡلَمُونَ

2:185

ताज़गी का महीना, जिसमें यह पाठ उतारा गया, लोगों के लिए मार्गदर्शन, और मार्गदर्शन और विवेक के स्पष्ट प्रमाण।

شَهۡرُ رَمَضَانَ ٱلَّذِي أُنزِلَ فِيهِ ٱلۡقُرَانُ هُدٗى لِّلنَّاسِ وَبَيِّنَٰتٖ مِّنَ ٱلۡهُدَىٰ وَٱلۡفُرۡقَانِۚ

2:185

तुममें से जो कोई इस महीने को प्रमाणित करे, वह इसमें संयम करे;

فَمَن شَهِدَ مِنكُمُ ٱلشَّهۡرَ فَلۡيَصُمۡهُۥۖ

और जो कोई बीमार हो, या यात्रा में, तो अन्य दिनों की गिनती।

وَمَن كَانَ مَرِيضًا أَوۡ عَلَىٰ سَفَرٖ فَعِدَّةٞ مِّنۡ أَيَّامٍ أُخَرَۗ

2:185

ईश्वर तुम्हारे लिए सुगमता चाहता है, वह तुम्हारे लिए कठिनाई नहीं चाहता,

يُرِيدُ ٱللَّهُ بِكُمُ ٱلۡيُسۡرَ وَلَا يُرِيدُ بِكُمُ ٱلۡعُسۡرَ

2:185

और यह कि तुम दिनों की गिनती पूरी करो, और यह कि तुम ईश्वर की बड़ाई की घोषणा करो कि उसने तुम्हें मार्ग दिखाया, शायद तुम कृतज्ञ हो जाओ।

وَلِتُكۡمِلُواْ ٱلۡعِدَّةَ وَلِتُكَبِّرُواْ ٱللَّهَ عَلَىٰ مَا هَدَىٰكُمُۥ وَلَعَلَّكُمُۥ تَشۡكُرُونَ

2:186

और जब मेरे आज्ञाकारी तुमसे मेरे विषय में पूछें, मैं निकट हूँ:

وَإِذَا سَأَلَكَ عِبَادِي عَنِّي فَإِنِّي قَرِيبٌۖ

2:186

जो मुझे बुलाता है, जब वह मुझे बुलाता है, मैं उसके बुलावे का उत्तर देता हूँ।

أُجِيبُ دَعۡوَةَ ٱلدَّاعِ إِذَا دَعَانِۖ

2:186

तो वे मेरे बुलावे का उत्तर दें, और मुझ पर विश्वास करें, शायद वे सुबुद्धि तक पहुँचें।

فَلۡيَسۡتَجِيبُواْ لِي وَلۡيُؤۡمِنُواْ بِي لَعَلَّهُمُۥ يَرۡشُدُونَ

2:187

परहेज़ की रात में अपनी स्त्रियों से अंतरंगता तुम्हारे लिए वैध की गई है:

أُحِلَّ لَكُمُۥ لَيۡلَةَ ٱلصِّيَامِ ٱلرَّفَثُ إِلَىٰ نِسَآئِكُمُۥۚ

2:187

वे तुम्हारे लिए वस्त्र हैं, और तुम उनके लिए वस्त्र हो।

هُنَّ لِبَاسٞ لَّكُمُۥ وَأَنتُمُۥ لِبَاسٞ لَّهُنَّۗ

2:187

ईश्वर जानता था कि तुम स्वयं को धोखा दे रहे थे; तब वह अनुकंपा के साथ तुम्हारी ओर पलटा, और उसने तुमसे दरगुज़र किया।

عَلِمَ ٱللَّهُ أَنَّكُمُۥ كُنتُمُۥ تَخۡتَانُونَ أَنفُسَكُمُۥ فَتَابَ عَلَيۡكُمُۥ وَعَفَا عَنكُمُۥۖ

2:187

अब तो उनसे मिलन करो,

فَٱلۡـَٰٔنَ بَٰشِرُوهُنَّ

2:187

और वह खोजो जो ईश्वर ने तुम्हारे लिए विहित किया है।

وَٱبۡتَغُواْ مَا كَتَبَ ٱللَّهُ لَكُمُۥۚ

2:187

और खाओ और पियो जब तक तुम्हारे लिए भोर का सफ़ेद धागा काले धागे से अलग स्पष्ट न हो जाए,

وَكُلُواْ وَٱشۡرَبُواْ حَتَّىٰ يَتَبَيَّنَ لَكُمُ ٱلۡخَيۡطُ ٱلۡأَبۡيَضُ مِنَ ٱلۡخَيۡطِ ٱلۡأَسۡوَدِ مِنَ ٱلۡفَجۡرِۖ

2:187

फिर रात तक परहेज़ पूर्ण करो।

ثُمَّ أَتِمُّواْ ٱلصِّيَامَ إِلَى ٱلَّيۡلِۚ

2:187

और उनसे मिलन मत करो, जबकि तुम माथा टेकने के स्थानों में ठहरे हुए हो।

وَلَا تُبَٰشِرُوهُنَّ وَأَنتُمُۥ عَٰكِفُونَ فِي ٱلۡمَسَٰجِدِۗ

2:187

ये ईश्वर की सीमाएँ हैं,

تِلۡكَ حُدُودُ ٱللَّهِ

2:187

तो उनके निकट मत जाओ।

فَلَا تَقۡرَبُوهَاۗ

2:187

इस प्रकार ईश्वर लोगों के लिए अपने संकेत स्पष्ट करता है, शायद वे सावधान रहें।

كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ ءَايَٰتِهِۦ لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمُۥ يَتَّقُونَ

2:188

और आपस में अपनी संपत्ति असत्य से मत हड़पो, और उसे निर्णयकर्ताओं के सामने इसलिए मत रखो कि लोगों की संपत्ति का एक भाग अपराध द्वारा हड़प लो, जबकि तुम जानते हो।

وَلَا تَأۡكُلُواْ أَمۡوَٰلَكُمُۥ بَيۡنَكُمُۥ بِٱلۡبَٰطِلِ وَتُدۡلُواْ بِهَا إِلَى ٱلۡحُكَّامِ لِتَأۡكُلُواْ فَرِيقٗا مِّنۡ أَمۡوَٰلِ ٱلنَّاسِ بِٱلۡإِثۡمِ وَأَنتُمُۥ تَعۡلَمُونَ

2:189

वे तुमसे सार्वजनिक घोषणाओं के विषय में पूछते हैं।

۞ يَسۡـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلۡأَهِلَّةِۖ

कहो: “वे लोगों के लिए निर्धारित वादे के समय हैं, और हज के लिए भी।

قُلۡ هِيَ مَوَٰقِيتُ لِلنَّاسِ وَٱلۡحَجِّۗ

2:189

और सद्गुण यह नहीं कि तुम घरों में उनके पिछवाड़े से आओ,

وَلَيۡسَ ٱلۡبِرُّ بِأَن تَأۡتُواْ ٱلۡبِيُوتَ مِن ظُهُورِهَا

2:189

परंतु सद्गुण वह है जो सावधान रहता है।

وَلَٰكِنَّ ٱلۡبِرَّ مَنِ ٱتَّقَىٰۗ

2:189

तो घरों में उनके द्वारों से आओ,

وَأۡتُواْ ٱلۡبِيُوتَ مِنۡ أَبۡوَٰبِهَاۚ

2:189

और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, शायद तुम सफल हो जाओ।”

وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ لَعَلَّكُمُۥ تُفۡلِحُونَ

2:190

और ईश्वर की राह में उनसे लड़ो जो तुमसे लड़ते हैं, परंतु आक्रमण मत करो,

وَقَٰتِلُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ ٱلَّذِينَ يُقَٰتِلُونَكُمُۥ وَلَا تَعۡتَدُواْۚ

2:190

क्योंकि ईश्वर आक्रमणकारियों से प्रेम नहीं करता।

إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ ٱلۡمُعۡتَدِينَ

2:191

और उन्हें जहाँ कहीं अचानक पाओ मार डालो, और उन्हें वहाँ से निकाल दो जहाँ से उन्होंने तुम्हें निकाला:

وَٱقۡتُلُوهُمُۥ حَيۡثُ ثَقِفۡتُمُوهُمُۥ وَأَخۡرِجُوهُمُۥ مِنۡ حَيۡثُ أَخۡرَجُوكُمُۥۚ

2:191

परीक्षा हत्या से अधिक कठोर है।

وَٱلۡفِتۡنَةُ أَشَدُّ مِنَ ٱلۡقَتۡلِۚ

2:191

और माथा टेकने के अलंघनीय स्थान के निकट उनसे मत लड़ो, जब तक वे वहाँ तुमसे न लड़ें;

وَلَا تُقَٰتِلُوهُمُۥ عِندَ ٱلۡمَسۡجِدِ ٱلۡحَرَامِ حَتَّىٰ يُقَٰتِلُوكُمُۥ فِيهِۦۖ

2:191

परंतु यदि वे तुमसे लड़ें, तो उन्हें मार डालो:

فَإِن قَٰتَلُوكُمُۥ فَٱقۡتُلُوهُمُۥۗ

2:191

नकारने वालों का प्रतिफल यही है।

كَذَٰلِكَ جَزَآءُ ٱلۡكَٰفِرِينَ

2:192

परंतु यदि वे रुक जाएँ, तो ईश्वर निश्चय ही अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।

فَإِنِ ٱنتَهَوۡاْ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ

2:193

और उनसे तब तक लड़ो जब तक कोई परीक्षा न रहे, और विधान ईश्वर के लिए हो;

وَقَٰتِلُوهُمُۥ حَتَّىٰ لَا تَكُونَ فِتۡنَةٞ وَيَكُونَ ٱلدِّينُ لِلَّهِۖ

2:193

और यदि वे रुक जाएँ, तो कोई शत्रुता नहीं, सिवा अन्यायियों के विरुद्ध।

فَإِنِ ٱنتَهَوۡاْ فَلَا عُدۡوَٰنَ إِلَّا عَلَى ٱلظَّٰلِمِينَ

2:194

अलंघनीय महीना अलंघनीय महीने के बदले, और अलंघनीय वस्तुओं के लिए, जाँच।

ٱلشَّهۡرُ ٱلۡحَرَامُ بِٱلشَّهۡرِ ٱلۡحَرَامِ وَٱلۡحُرُمَٰتُ قِصَاصٞۚ

2:194

जिसने तुम पर आक्रमण किया, उस पर उसके तुम पर किए गए आक्रमण के बराबर आक्रमण करो,

فَمَنِ ٱعۡتَدَىٰ عَلَيۡكُمُۥ فَٱعۡتَدُواْ عَلَيۡهِۦ بِمِثۡلِ مَا ٱعۡتَدَىٰ عَلَيۡكُمُۥۚ

2:194

और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, और जान लो कि ईश्वर सावधानी बरतने वालों के साथ है।

وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَٱعۡلَمُواْ أَنَّ ٱللَّهَ مَعَ ٱلۡمُتَّقِينَ

2:195

और ईश्वर की राह में ख़र्च करो, परंतु अपने हाथ में जो है उसे विनाश में मत डालो; और भलाई करो,

وَأَنفِقُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ وَلَا تُلۡقُواْ بِأَيۡدِيكُمُۥ إِلَى ٱلتَّهۡلُكَةِ وَأَحۡسِنُواْۚ

2:195

क्योंकि ईश्वर भलाई करने वालों से प्रेम करता है।

إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلۡمُحۡسِنِينَ

2:196

और हज और उमरा ईश्वर के लिए पूर्ण करो।

وَأَتِمُّواْ ٱلۡحَجَّ وَٱلۡعُمۡرَةَ لِلَّهِۚ

2:196

और यदि तुम रोक दिए जाओ, तो उपहार के रूप में जो सहज मिल जाए।

فَإِنۡ أُحۡصِرۡتُمُۥ فَمَا ٱسۡتَيۡسَرَ مِنَ ٱلۡهَدۡيِۖ

2:196

और अपने सिर तब तक मत मुँड़ाओ जब तक उपहार अपने मोचन-स्थान तक न पहुँच जाए;

وَلَا تَحۡلِقُواْ رُءُوسَكُمُۥ حَتَّىٰ يَبۡلُغَ ٱلۡهَدۡيُ مَحِلَّهُۥۚ

2:196

और तुममें से जो कोई बीमार हो, या सिर में कष्ट से पीड़ित हो, तो परहेज़, दान, या हितकारी आचरण द्वारा प्रतिपूर्ति।

فَمَن كَانَ مِنكُمُۥ مَرِيضًا أَوۡ بِهِۦ أَذٗى مِّن رَّأۡسِهِۦ فَفِدۡيَةٞ مِّن صِيَامٍ أَوۡ صَدَقَةٍ أَوۡ نُسُكٖۚ

2:196

और जब तुम सुरक्षित हो जाओ, तो जो कोई हज तक उमरा का उपभोग करे, तो उपहार के रूप में जो सहज मिल जाए।

فَإِذَا أَمِنتُمُۥ فَمَن تَمَتَّعَ بِٱلۡعُمۡرَةِ إِلَى ٱلۡحَجِّ فَمَا ٱسۡتَيۡسَرَ مِنَ ٱلۡهَدۡيِۚ

2:196

और जिसे इसके साधन न मिलें, तो हज के दौरान तीन दिन का परहेज़, और सात जब तुम लौट चुके होगे: ये पूरे दस दिन हैं।

فَمَن لَّمۡ يَجِدۡ فَصِيَامُ ثَلَٰثَةِ أَيَّامٖ فِي ٱلۡحَجِّ وَسَبۡعَةٍ إِذَا رَجَعۡتُمُۥۗ تِلۡكَ عَشَرَةٞ كَامِلَةٞۗ

2:196

यह उसके लिए है जिसका परिवार माथा टेकने के अलंघनीय स्थान में उपस्थित नहीं है।

ذَٰلِكَ لِمَن لَّمۡ يَكُنۡ أَهۡلُهُۥ حَاضِرِي ٱلۡمَسۡجِدِ ٱلۡحَرَامِۚ

2:196

और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, और जान लो कि ईश्वर सज़ा देने में कठोर है।

وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَٱعۡلَمُواْ أَنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلۡعِقَابِ

2:197

हज जाने-पहचाने महीनों में होता है।

ٱلۡحَجُّ أَشۡهُرٞ مَّعۡلُومَٰتٞۚ

2:197

जो कोई उनमें हज का संकल्प करे, तो हज के दौरान न अश्लीलता, न अतिक्रमण, और न बहस।

فَمَن فَرَضَ فِيهِنَّ ٱلۡحَجَّ فَلَا رَفَثٞ وَلَا فُسُوقٞ وَلَا جِدَالَ فِي ٱلۡحَجِّۗ

2:197

और तुम जो भी अच्छाई करो, ईश्वर उसे जानता है।

وَمَا تَفۡعَلُواْ مِنۡ خَيۡرٖ يَعۡلَمۡهُ ٱللَّهُۗ

2:197

और अपनी रसद ले लो;

وَتَزَوَّدُواْ

2:197

क्योंकि सबसे बेहतर रसद सावधानी है।

فَإِنَّ خَيۡرَ ٱلزَّادِ ٱلتَّقۡوَىٰۖ

2:197

और मेरे प्रति सावधान रहो, हे मेधा रखने वालो।

وَٱتَّقُونِ يَٰأُوْلِي ٱلۡأَلۡبَٰبِ

2:198

अपने अभिभावक का अनुग्रह खोजने में तुम पर कोई आक्षेप नहीं।

لَيۡسَ عَلَيۡكُمُۥ جُنَاحٌ أَن تَبۡتَغُواْ فَضۡلٗا مِّن رَّبِّكُمُۥۚ

2:198

और जब तुम अरफ़ात से उमड़ो, तो अलंघनीय प्रत्यक्ष चिह्न के निकट ईश्वर का स्मरण करो,

فَإِذَا أَفَضۡتُمُۥ مِنۡ عَرَفَٰتٖ فَٱذۡكُرُواْ ٱللَّهَ عِندَ ٱلۡمَشۡعَرِ ٱلۡحَرَامِۖ

2:198

और उसका स्मरण करो, जैसे उसने तुम्हें मार्ग दिखाया, जबकि तुम इससे पहले अवश्य भटके हुओं में से थे।

وَٱذۡكُرُوهُۥ كَمَا هَدَىٰكُمُۥ وَإِن كُنتُمُۥ مِن قَبۡلِهِۦ لَمِنَ ٱلضَّآلِّينَ

2:199

फिर वहाँ से उमड़ो जहाँ से लोग उमड़ते हैं,

ثُمَّ أَفِيضُواْ مِنۡ حَيۡثُ أَفَاضَ ٱلنَّاسُ

2:199

और ईश्वर से क्षमा माँगो,

وَٱسۡتَغۡفِرُواْ ٱللَّهَۚ

2:199

क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।

إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ

2:200

और जब तुम अपने हितकारी आचरण संपन्न कर चुको, तो ईश्वर का स्मरण करो जैसे तुम अपने पूर्वजों का स्मरण करते हो, या उससे भी अधिक तीव्र स्मरण के साथ।

فَإِذَا قَضَيۡتُمُۥ مَنَٰسِكَكُمُۥ فَٱذۡكُرُواْ ٱللَّهَ كَذِكۡرِكُمُۥ ءَابَآءَكُمُۥ أَوۡ أَشَدَّ ذِكۡرٗاۗ

2:200

और लोगों में से कोई ऐसा है जो कहता है: “हमारे अभिभावक, हमें निकट जीवन में दीजिए” — और अंतिम जीवन में उसका कोई हिस्सा नहीं होगा।

فَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يَقُولُ رَبَّنَا ءَاتِنَا فِي ٱلدُّنۡيَا وَمَا لَهُۥ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ مِنۡ خَلَٰقٖ

2:201

और उनमें से कोई ऐसा है जो कहता है: “हमारे अभिभावक, हमें निकट जीवन में एक सुंदर अंश दीजिए, और अंतिम जीवन में एक सुंदर अंश, और हमें आग के दंड से बचाइए।”

وَمِنۡهُمُۥ مَن يَقُولُ رَبَّنَا ءَاتِنَا فِي ٱلدُّنۡيَا حَسَنَةٗ وَفِي ٱلۡأٓخِرَةِ حَسَنَةٗ وَقِنَا عَذَابَ ٱلنَّارِ

2:202

यही वे हैं जिनके लिए उसमें से एक हिस्सा है जो उन्होंने कमाया।

أُوْلَٰٓئِكَ لَهُمُۥ نَصِيبٞ مِّمَّا كَسَبُواْۚ

2:202

ईश्वर हिसाब में शीघ्र है।

وَٱللَّهُ سَرِيعُ ٱلۡحِسَابِ

2:203

और गिने हुए दिनों में ईश्वर का स्मरण करो।

۞ وَٱذۡكُرُواْ ٱللَّهَ فِي أَيَّامٖ مَّعۡدُودَٰتٖۚ

2:203

और जो कोई दो दिन में जल्दी करे, उस पर कोई अपराध नहीं ठहरता;

فَمَن تَعَجَّلَ فِي يَوۡمَيۡنِ فَلَا إِثۡمَ عَلَيۡهِۦ

2:203

और जो कोई देर करे, उस पर कोई अपराध नहीं ठहरता, उसके लिए जो सावधान रहता है।

وَمَن تَأَخَّرَ فَلَا إِثۡمَ عَلَيۡهِۦۖ لِمَنِ ٱتَّقَىٰۗ

2:203

और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, और जान लो कि तुम उसी की ओर इकट्ठा किए जाओगे।

وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَٱعۡلَمُواْ أَنَّكُمُۥ إِلَيۡهِۦ تُحۡشَرُونَ

2:204

और लोगों में से कोई ऐसा है जिसका कथन, निकट जीवन के विषय में, तुम्हें चकाचौंध कर देता है, और जो अपने मर्म में जो है उस पर ईश्वर को साक्षी बनाता है, जबकि वह झगड़ने वालों में सबसे हठी है।

وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يُعۡجِبُكَ قَوۡلُهُۥ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَيُشۡهِدُ ٱللَّهَ عَلَىٰ مَا فِي قَلۡبِهِۦ وَهُوَ أَلَدُّ ٱلۡخِصَامِ

2:205

और जब वह पीठ फेरता है, तो वह धरती पर वहाँ बिगाड़ फैलाने, और खेती और संतति को नष्ट करने में लगा रहता है।

وَإِذَا تَوَلَّىٰ سَعَىٰ فِي ٱلۡأَرۡضِ لِيُفۡسِدَ فِيهَا وَيُهۡلِكَ ٱلۡحَرۡثَ وَٱلنَّسۡلَۚ

2:205

ईश्वर बिगाड़ से प्रेम नहीं करता।

وَٱللَّهُ لَا يُحِبُّ ٱلۡفَسَادَ

2:206

और जब उससे कहा जाता है: “ईश्वर के प्रति सावधान रहो”, तो शक्ति उसे अपराध में जकड़ लेती है; तो जहन्नम उसके लिए पर्याप्त है।

وَإِذَا قِيلَ لَهُ ٱتَّقِ ٱللَّهَ أَخَذَتۡهُ ٱلۡعِزَّةُ بِٱلۡإِثۡمِۚ فَحَسۡبُهُۥ جَهَنَّمُۖ

2:206

और कितना भयानक बिछौना!

وَلَبِئۡسَ ٱلۡمِهَادُ

2:207

और लोगों में से कोई ऐसा है जो ईश्वर की प्रसन्नता खोजते हुए अपना स्व बेच देता है।

وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يَشۡرِي نَفۡسَهُ ٱبۡتِغَآءَ مَرۡضَاتِ ٱللَّهِۚ

2:207

ईश्वर अपने आज्ञाकारियों के प्रति करुणामय है।

وَٱللَّهُ رَءُوفُۢ بِٱلۡعِبَادِ

2:208

हे विश्वास करने वालो! शांति में प्रवेश करो, पूर्णतः,

يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱدۡخُلُواْ فِي ٱلسَّلۡمِ كَآفَّةٗ

2:208

और बहकाने वाले के क़दमों का अनुसरण मत करो,

وَلَا تَتَّبِعُواْ خُطُوَٰتِ ٱلشَّيۡطَٰنِۚ

2:208

क्योंकि वह तुम्हारे लिए एक स्पष्ट शत्रु है।

إِنَّهُۥ لَكُمُۥ عَدُوّٞ مُّبِينٞ

2:209

और यदि तुम्हारे पास स्पष्ट प्रमाण आ जाने के बाद तुम डगमगाओ, तो जान लो कि ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।

فَإِن زَلَلۡتُمُۥ مِنۢ بَعۡدِ مَا جَآءَتۡكُمُ ٱلۡبَيِّنَٰتُ فَٱعۡلَمُواْ أَنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌ

2:210

क्या वे केवल इसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं कि ईश्वर बादलों के चँदोवों में उनके पास आए,

هَلۡ يَنظُرُونَ إِلَّا أَن يَأۡتِيَهُمُ ٱللَّهُ فِي ظُلَلٖ مِّنَ ٱلۡغَمَامِ

2:210

अभिकर्ताओं के साथ, और मामले का फ़ैसला कर दिया जाए?

وَٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ وَقُضِيَ ٱلۡأَمۡرُۚ

2:210

और सारे मामले ईश्वर की ओर लौटते हैं।

وَإِلَى ٱللَّهِ تُرۡجَعُ ٱلۡأُمُورُ

2:211

इसराईल की संतान से पूछो कि हमने उन्हें कितने स्पष्ट संकेत दिए।

سَلۡ بَنِي إِسۡرَٰٓءِيلَ كَمۡ ءَاتَيۡنَٰهُمُۥ مِنۡ ءَايَةِۭ بَيِّنَةٖۗ

2:211

और जो कोई ईश्वर के उपकार को, उसके पास आ जाने के बाद, बदल दे — ईश्वर निश्चय ही सज़ा देने में कठोर है।

وَمَن يُبَدِّلۡ نِعۡمَةَ ٱللَّهِ مِنۢ بَعۡدِ مَا جَآءَتۡهُۥ فَإِنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلۡعِقَابِ

2:212

जो नकारते हैं उनके लिए निकट जीवन सुशोभित कर दिया गया है, और वे उनका उपहास करते हैं जिन्होंने विश्वास किया;

زُيِّنَ لِلَّذِينَ كَفَرُواْ ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَا وَيَسۡخَرُونَ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْۘ

2:212

परंतु सावधानी बरतने वाले पेशी के दिन उनके ऊपर होंगे।

وَٱلَّذِينَ ٱتَّقَوۡاْ فَوۡقَهُمُۥ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۗ

2:212

और ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे बिना गिने जीविका देता है।

وَٱللَّهُ يَرۡزُقُ مَن يَشَآءُ بِغَيۡرِ حِسَابٖ

2:213

लोग एक ही समुदाय थे; तब ईश्वर ने सूचनादाताओं को उठाया, शुभ समाचार देने वाले और चेतावनी देने वाले, और उनके साथ ग्रंथ को पूर्ण सत्य के साथ उतारा, ताकि वह लोगों के बीच उस विषय में निर्णय करे जिसमें वे मतभेद करते थे।

كَانَ ٱلنَّاسُ أُمَّةٗ وَٰحِدَةٗ فَبَعَثَ ٱللَّهُ ٱلنَّبِيِّـۧنَ مُبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ وَأَنزَلَ مَعَهُمُ ٱلۡكِتَٰبَ بِٱلۡحَقِّ لِيَحۡكُمَ بَيۡنَ ٱلنَّاسِ فِيمَا ٱخۡتَلَفُواْ فِيهِۦۚ

2:213

और उसमें मतभेद केवल उन्होंने किया जिन्हें वह दिया गया,

وَمَا ٱخۡتَلَفَ فِيهِۦ إِلَّا ٱلَّذِينَ أُوتُوهُۥ

2:213

उनके पास स्पष्ट प्रमाण आ जाने के बाद, आपस की ज़्यादती के कारण।

مِنۢ بَعۡدِ مَا جَآءَتۡهُمُ ٱلۡبَيِّنَٰتُ بَغۡيَۢا بَيۡنَهُمُۥۖ

2:213

तब ईश्वर ने उन्हें, जिन्होंने विश्वास किया, उस सत्य की ओर मार्ग दिखाया जिसमें वे मतभेद करते थे, अपनी अनुमति से।

فَهَدَى ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لِمَا ٱخۡتَلَفُواْ فِيهِۦ مِنَ ٱلۡحَقِّ بِإِذۡنِهِۦۗ

2:213

और ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे सीधे पथ की ओर मार्ग दिखाता है।

وَٱللَّهُ يَهۡدِي مَن يَشَآءُ اِ۪لَىٰ صِۜرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٍ

2:214

या फिर क्या तुम सोचते थे कि तुम उद्यान में प्रवेश करोगे, जबकि तुम्हारे पास अभी तक उसके जैसा नहीं आया जो तुमसे पहले गुज़रे जनों ने झेला? उन्हें संकट और हानि ने छुआ, और वे इतना हिला दिए गए कि संदेशवाहक और जिन्होंने उसके साथ विश्वास किया था उन्होंने कहा: “ईश्वर की सहायता कब?”

أَمۡ حَسِبۡتُمُۥ أَن تَدۡخُلُواْ ٱلۡجَنَّةَ وَلَمَّا يَأۡتِكُمُۥ مَثَلُ ٱلَّذِينَ خَلَوۡاْ مِن قَبۡلِكُمُۥۖ مَسَّتۡهُمُ ٱلۡبَأۡسَآءُ وَٱلضَّرَّآءُ وَزُلۡزِلُواْ حَتَّىٰ يَقُولَ ٱلرَّسُولُ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مَعَهُۥ مَتَىٰ نَصۡرُ ٱللَّهِۗ

2:214

क्या ऐसा नहीं है: ईश्वर की सहायता निश्चय ही निकट है!

أَلَا إِنَّ نَصۡرَ ٱللَّهِ قَرِيبٞ

2:215

वे तुमसे पूछते हैं: उन्हें क्या ख़र्च करना चाहिए?

يَسۡـَٔلُونَكَ مَاذَا يُنفِقُونَۖ

2:215

कहो: “तुम अच्छाई में से जो ख़र्च करते हो वह माता-पिता, निकट संबंधियों, अनाथों, दरिद्रों, और राह के मुसाफ़िर को जाता है।

قُلۡ مَا أَنفَقۡتُمُۥ مِنۡ خَيۡرٖ فَلِلۡوَٰلِدَيۡنِ وَٱلۡأَقۡرَبِينَ وَٱلۡيَتَٰمَىٰ وَٱلۡمَسَٰكِينِ وَٱبۡنِ ٱلسَّبِيلِۗ

2:215

और तुम जो भी अच्छाई करो, ईश्वर उसके विषय में निश्चय ही सर्वज्ञ है।”

وَمَا تَفۡعَلُواْ مِنۡ خَيۡرٖ فَإِنَّ ٱللَّهَ بِهِۦ عَلِيمٞ

2:216

तुम पर लड़ाई विहित की गई है, जबकि वह तुम्हारी अरुचि का विषय है।

كُتِبَ عَلَيۡكُمُ ٱلۡقِتَالُ وَهُوَ كُرۡهٞ لَّكُمُۥۖ

2:216

और हो सकता है कि तुम्हें किसी चीज़ से अरुचि हो, जबकि वह तुम्हारे लिए अच्छाई है;

وَعَسَىٰ أَن تَكۡرَهُواْ شَيۡـٔٗا وَهُوَ خَيۡرٞ لَّكُمُۥۖ

2:216

और हो सकता है कि तुम किसी चीज़ से प्रेम करो, जबकि वह तुम्हारे लिए बुराई है।

وَعَسَىٰ أَن تُحِبُّواْ شَيۡـٔٗا وَهُوَ شَرّٞ لَّكُمُۥۚ

2:216

ईश्वर जानता है,

وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ

2:216

और तुम नहीं जानते।

وَأَنتُمُۥ لَا تَعۡلَمُونَ

2:217

वे तुमसे अलंघनीय महीने के विषय में पूछते हैं, उसमें होने वाली लड़ाई के विषय में।

يَسۡـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلشَّهۡرِ ٱلۡحَرَامِ قِتَالٖ فِيهِۦۖ

2:217

कहो: “उसमें लड़ना गंभीर है;

قُلۡ قِتَالٞ فِيهِۦ كَبِيرٞۚ

2:217

परंतु ईश्वर की राह रोकना, उसे नकारना, माथा टेकने के अलंघनीय स्थान तक पहुँच रोकना, और उसके निवासियों को वहाँ से निकाल देना, ईश्वर के पास और भी अधिक गंभीर है;

وَصَدٌّ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَكُفۡرُۢ بِهِۦ وَٱلۡمَسۡجِدِ ٱلۡحَرَامِ وَإِخۡرَاجُ أَهۡلِهِۦ مِنۡهُۥ أَكۡبَرُ عِندَ ٱللَّهِۚ

2:217

और परीक्षा हत्या से अधिक गंभीर है।

وَٱلۡفِتۡنَةُ أَكۡبَرُ مِنَ ٱلۡقَتۡلِۗ

2:217

और वे तुमसे लड़ने से तब तक नहीं रुकेंगे जब तक वे तुमसे तुम्हारा विधान छुड़वा न दें, यदि वे कर सकें।

وَلَا يَزَالُونَ يُقَٰتِلُونَكُمُۥ حَتَّىٰ يَرُدُّوكُمُۥ عَن دِينِكُمُۥ إِنِ ٱسۡتَطَٰعُواْۚ

2:217

और तुममें से जो कोई अपना विधान छोड़ दे, और नकारते हुए मरे — यही वे हैं जिनके कर्म ढह गए, निकट जीवन में और अंतिम जीवन में,

وَمَن يَرۡتَدِدۡ مِنكُمُۥ عَن دِينِهِۦ فَيَمُتۡ وَهُوَ كَافِرٞ فَأُوْلَٰٓئِكَ حَبِطَتۡ أَعۡمَٰلُهُمُۥ فِي ٱلدُّنۡيَا وَٱلۡأٓخِرَةِۖ

2:217

और यही आग वाले हैं, वे उसमें सदा रहते हैं।”

وَأُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِۖ هُمُۥ فِيهَا خَٰلِدُونَ

2:218

निश्चय ही, जिन्होंने विश्वास किया, जिन्होंने प्रवास किया और ईश्वर की राह में संघर्ष किया — यही वे हैं जो ईश्वर की दया की आशा रखते हैं।

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَٱلَّذِينَ هَاجَرُواْ وَجَٰهَدُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ أُوْلَٰٓئِكَ يَرۡجُونَ رَحۡمَتَ ٱللَّهِۚ

2:218

और ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।

وَٱللَّهُ غَفُورٞ رَّحِيمٞ

2:219

वे तुमसे मदिरा और जुए के विषय में पूछते हैं।

۞ يَسۡـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلۡخَمۡرِ وَٱلۡمَيۡسِرِۖ

2:219

कहो: “दोनों में एक बड़ा अपराध है, और लोगों के लिए लाभ भी;

قُلۡ فِيهِمَا إِثۡمٞ كَبِيرٞ وَمَنَٰفِعُ لِلنَّاسِ

2:219

परंतु उनका अपराध उनके लाभ से बड़ा है।”

وَإِثۡمُهُمَا أَكۡبَرُ مِن نَّفۡعِهِمَاۗ

2:219

और वे तुमसे पूछते हैं: उन्हें क्या ख़र्च करना चाहिए? कहो: “आवश्यकता से अधिक।”

وَيَسۡـَٔلُونَكَ مَاذَا يُنفِقُونَ قُلِ ٱلۡعَفۡوَۗ

2:220

इस प्रकार ईश्वर तुम्हारे लिए संकेत स्पष्ट करता है, शायद तुम निकट जीवन और अंतिम जीवन पर सोच-विचार करो।

كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمُ ٱلۡأٓيَٰتِ لَعَلَّكُمُۥ تَتَفَكَّرُونَ فِي ٱلدُّنۡيَا وَٱلۡأٓخِرَةِۗ

2:220

और वे तुमसे अनाथों के विषय में पूछते हैं। कहो: “उनकी स्थिति सुधारना अच्छाई है;

وَيَسۡـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلۡيَتَٰمَىٰۖ قُلۡ إِصۡلَاحٞ لَّهُمُۥ خَيۡرٞۖ

2:220

और यदि तुम अपने मामले उनके मामलों में मिला लो, तो वे तुम्हारे भाई हैं।

وَإِن تُخَالِطُوهُمُۥ فَإِخۡوَٰنُكُمُۥۚ

2:220

ईश्वर बिगाड़ने वाले को सुधार करने वाले से अलग पहचानता है।

وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ ٱلۡمُفۡسِدَ مِنَ ٱلۡمُصۡلِحِۚ

2:220

और यदि ईश्वर की मर्ज़ी होती, तो वह तुम्हें कुचल देता,

وَلَوۡ شَآءَ ٱللَّهُ لَأَعۡنَتَكُمُۥۚ

2:220

क्योंकि ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।”

إِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٞ

2:221

और साझी ठहराने वाली स्त्रियों से विवाह मत करो, जब तक वे विश्वास न करें;

وَلَا تَنكِحُواْ ٱلۡمُشۡرِكَٰتِ حَتَّىٰ يُؤۡمِنَّۚ

2:221

और आज्ञाकारी, विश्वास करने वाली स्त्री साझी ठहराने वाली स्त्री से निश्चय ही बेहतर है, भले ही वह तुम्हें चकाचौंध करे।

وَلَأَمَةٞ مُّؤۡمِنَةٌ خَيۡرٞ مِّن مُّشۡرِكَةٖ وَلَوۡ أَعۡجَبَتۡكُمُۥۗ

2:221

और साझी ठहराने वालों को विवाह में मत दो, जब तक वे विश्वास न करें;

وَلَا تُنكِحُواْ ٱلۡمُشۡرِكِينَ حَتَّىٰ يُؤۡمِنُواْۚ

2:221

और आज्ञाकारी, विश्वास करने वाला पुरुष साझी ठहराने वाले पुरुष से निश्चय ही बेहतर है, भले ही वह तुम्हें चकाचौंध करे।

وَلَعَبۡدٞ مُّؤۡمِنٌ خَيۡرٞ مِّن مُّشۡرِكٖ وَلَوۡ أَعۡجَبَكُمُۥۗ

2:221

यही वे हैं जो आग की ओर बुलाते हैं,

أُوْلَٰٓئِكَ يَدۡعُونَ إِلَى ٱلنَّارِۖ

2:221

जबकि ईश्वर उद्यान और क्षमा की ओर बुलाता है, अपनी अनुमति से,

وَٱللَّهُ يَدۡعُواْ إِلَى ٱلۡجَنَّةِ وَٱلۡمَغۡفِرَةِ بِإِذۡنِهِۦۖ

2:221

और वह लोगों के लिए अपने संकेत स्पष्ट करता है, शायद वे स्मरण करें।

وَيُبَيِّنُ ءَايَٰتِهِۦ لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمُۥ يَتَذَكَّرُونَ

2:222

और वे तुमसे मासिक स्राव के विषय में पूछते हैं। कहो: “यह एक कष्ट है;

وَيَسۡـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلۡمَحِيضِۖ قُلۡ هُوَ أَذٗى

तो मासिक स्राव के दौरान स्त्रियों से दूर रहो,

فَٱعۡتَزِلُواْ ٱلنِّسَآءَ فِي ٱلۡمَحِيضِ

2:222

और उनके निकट मत जाओ जब तक उन्हें कष्ट न रहे।

وَلَا تَقۡرَبُوهُنَّ حَتَّىٰ يَطۡهُرۡنَۖ

2:222

और जब उन्हें कष्ट न रहे, तो उनसे मिलन करो जहाँ से ईश्वर ने तुम्हें आदेश दिया है,

فَإِذَا تَطَهَّرۡنَ فَأۡتُوهُنَّ مِنۡ حَيۡثُ أَمَرَكُمُ ٱللَّهُۚ

2:222

क्योंकि ईश्वर पलट आने वालों से प्रेम करता है, और स्वच्छ रहने वालों से प्रेम करता है।”

إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلتَّوَّٰبِينَ وَيُحِبُّ ٱلۡمُتَطَهِّرِينَ

2:223

तुम्हारी स्त्रियाँ तुम्हारे लिए खेती हैं; तो अपनी खेती से जैसी तुम्हारी मर्ज़ी हो वैसे मिलन करो,

نِسَآؤُكُمُۥ حَرۡثٞ لَّكُمُۥ فَأۡتُواْ حَرۡثَكُمُۥ أَنَّىٰ شِئۡتُمُۥۖ

2:223

और अपने लिए आगे बढ़ाओ;

وَقَدِّمُواْ لِأَنفُسِكُمُۥۚ

2:223

और ईश्वर के प्रति सावधान रहो,

وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ

2:223

और जान लो कि तुम उससे मिलोगे।

وَٱعۡلَمُواْ أَنَّكُمُۥ مُلَٰقُوهُۥۗ

2:223

और विश्वास करने वालों को शुभ समाचार दो।

وَبَشِّرِ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

2:224

और अपनी शपथों में ईश्वर को एक ऐसा बहाना मत बनाओ जिसका तुम मनमाने ढंग से उपयोग करो,

وَلَا تَجۡعَلُواْ ٱللَّهَ عُرۡضَةٗ لِّأَيۡمَٰنِكُمُۥ

यह प्रमाणित करने के लिए कि तुम सद्गुणी हो, कि तुम सावधान रहते हो, और कि तुम लोगों में सुलह कराते हो।

أَن تَبَرُّواْ وَتَتَّقُواْ وَتُصۡلِحُواْ بَيۡنَ ٱلنَّاسِۚ

ईश्वर सुनने वाला, सर्वज्ञ है।

وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٞ

2:225

ईश्वर तुम्हें तुम्हारी शपथों में व्यर्थता के लिए नहीं पकड़ेगा,

لَّا يُؤَاخِذُكُمُ ٱللَّهُ بِٱللَّغۡوِ فِي أَيۡمَٰنِكُمُۥ

2:225

परंतु वह तुम्हें उसके कारण पकड़ेगा जो तुम्हारे मर्मों ने कमाया।

وَلَٰكِن يُؤَاخِذُكُمُۥ بِمَا كَسَبَتۡ قُلُوبُكُمُۥۗ

2:225

ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, सहनशील है।

وَٱللَّهُ غَفُورٌ حَلِيمٞ

2:226

जो अपनी स्त्रियों से दूर रहने की शपथ लेते हैं, उनके लिए चार महीने की प्रतीक्षा-अवधि;

لِّلَّذِينَ يُؤۡلُونَ مِن نِّسَآئِهِمُۥ تَرَبُّصُ أَرۡبَعَةِ أَشۡهُرٖۖ

2:226

और यदि वे वापस आ जाएँ, तो ईश्वर निश्चय ही अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।

فَإِن فَآءُو فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ

2:227

और यदि वे परित्याग का दृढ़ निश्चय कर लें, तो ईश्वर निश्चय ही सुनने वाला, सर्वज्ञ है।

وَإِنۡ عَزَمُواْ ٱلطَّلَٰقَ فَإِنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٞ

2:228

और परित्यक्त स्त्रियाँ तीन चक्र तक प्रतीक्षा-अवधि में रहती हैं;

وَٱلۡمُطَلَّقَٰتُ يَتَرَبَّصۡنَ بِأَنفُسِهِنَّ ثَلَٰثَةَ قُرُوٓءٖۚ

2:228

और उनके लिए वैध नहीं कि वे उसे दबाएँ जो ईश्वर ने उनके गर्भाशयों में रचा है, यदि वे ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास करती हैं।

وَلَا يَحِلُّ لَهُنَّ أَن يَكۡتُمۡنَ مَا خَلَقَ ٱللَّهُ فِي أَرۡحَامِهِنَّ إِن كُنَّ يُؤۡمِنَّ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِۚ

2:228

और उनके पति इसमें उन्हें वापस ले आने का अधिक हक़ रखते हैं, यदि वे सुलह चाहें।

وَبُعُولَتُهُنَّ أَحَقُّ بِرَدِّهِنَّ فِي ذَٰلِكَ إِنۡ أَرَادُواْ إِصۡلَٰحٗاۚ

2:228

और उनके हक़ उनके दायित्वों के समान हैं, मान्य के अनुसार;

وَلَهُنَّ مِثۡلُ ٱلَّذِي عَلَيۡهِنَّ بِٱلۡمَعۡرُوفِۚ

2:228

और पुरुषों की उन पर एक श्रेणी है।

وَلِلرِّجَالِ عَلَيۡهِنَّ دَرَجَةٞۗ

2:228

ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।

وَٱللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ

2:229

परित्याग दो बार का है।

ٱلطَّلَٰقُ مَرَّتَانِۖ

2:229

फिर, या तो मान्य के अनुसार पुनर्ग्रहण, या सहर्ष मुक्ति।

فَإِمۡسَاكُۢ بِمَعۡرُوفٍ أَوۡ تَسۡرِيحُۢ بِإِحۡسَٰنٖۗ

2:229

और तुम्हारे लिए वैध नहीं कि जो तुमने उन्हें दिया है उसमें से कुछ भी वापस लो, सिवा इसके कि दोनों को ईश्वर की सीमाएँ बनाए न रख पाने का डर हो।

وَلَا يَحِلُّ لَكُمُۥ أَن تَأۡخُذُواْ مِمَّا ءَاتَيۡتُمُوهُنَّ شَيۡـًٔا إِلَّا أَن يَخَافَا أَلَّا يُقِيمَا حُدُودَ ٱللَّهِۖ

2:229

और यदि तुम्हें डर हो कि वे ईश्वर की सीमाएँ बनाए नहीं रखेंगे, तो जिसके बदले वह स्वयं को छुड़ा ले उसके विषय में उन दोनों पर कोई आक्षेप नहीं।

فَإِنۡ خِفۡتُمُۥ أَلَّا يُقِيمَا حُدُودَ ٱللَّهِ فَلَا جُنَاحَ عَلَيۡهِمَا فِيمَا ٱفۡتَدَتۡ بِهِۦۗ

2:229

ये ईश्वर की सीमाएँ हैं,

تِلۡكَ حُدُودُ ٱللَّهِ

2:229

तो उन्हें पार मत करो।

فَلَا تَعۡتَدُوهَاۚ

2:229

और जो कोई ईश्वर की सीमाएँ पार करे — यही अन्यायी हैं।

وَمَن يَتَعَدَّ حُدُودَ ٱللَّهِ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلظَّٰلِمُونَ

2:230

यदि वह उसका परित्याग कर दे, तो इसके बाद वह उसके लिए वैध नहीं रहेगी, जब तक वह उससे भिन्न किसी जोड़ीदार से विवाह न कर ले।

فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا تَحِلُّ لَهُۥ مِنۢ بَعۡدُ حَتَّىٰ تَنكِحَ زَوۡجًا غَيۡرَهُۥۗ

2:230

और यदि यह उसका परित्याग कर दे, तो उन दोनों पर फिर से जुड़ने में कोई आक्षेप नहीं, यदि वे अनुमान लगाएँ कि वे ईश्वर की सीमाएँ बनाए रखेंगे।

فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا جُنَاحَ عَلَيۡهِمَا أَن يَتَرَاجَعَا إِن ظَنَّا أَن يُقِيمَا حُدُودَ ٱللَّهِۗ

2:230

और ये ईश्वर की सीमाएँ हैं, जिन्हें वह ऐसी क़ौम के लिए स्पष्ट करता है जो जानती है।

وَتِلۡكَ حُدُودُ ٱللَّهِ يُبَيِّنُهَا لِقَوۡمٖ يَعۡلَمُونَ

2:231

और जब तुम स्त्रियों का परित्याग करो, और वे अपनी अवधि तक पहुँच जाएँ, तो उन्हें मान्य के अनुसार रखो, या उन्हें मान्य के अनुसार मुक्त करो;

وَإِذَا طَلَّقۡتُمُ ٱلنِّسَآءَ فَبَلَغۡنَ أَجَلَهُنَّ فَأَمۡسِكُوهُنَّ بِمَعۡرُوفٍ أَوۡ سَرِّحُوهُنَّ بِمَعۡرُوفٖۚ

2:231

और उन्हें हानि पहुँचाने के लिए, आक्रमण करने के लिए मत रखो।

وَلَا تُمۡسِكُوهُنَّ ضِرَارٗا لِّتَعۡتَدُواْۚ

2:231

और जो कोई ऐसा करे उसने स्वयं पर अन्याय किया है।

وَمَن يَفۡعَلۡ ذَٰلِكَ فَقَدۡ ظَلَمَ نَفۡسَهُۥۚ

2:231

और ईश्वर के संकेतों को मज़ाक़ का विषय मत बनाओ।

وَلَا تَتَّخِذُواْ ءَايَٰتِ ٱللَّهِ هُزُؤٗاۚ

2:231

और अपने ऊपर ईश्वर के उपकार का स्मरण करो, और उसे भी जो उसने तुम पर ग्रंथ और प्रज्ञा में से उतारा है, जिनके द्वारा वह तुम्हें उपदेश देता है।

وَٱذۡكُرُواْ نِعۡمَتَ ٱللَّهِ عَلَيۡكُمُۥ وَمَا أَنزَلَ عَلَيۡكُمُۥ مِنَ ٱلۡكِتَٰبِ وَٱلۡحِكۡمَةِ يَعِظُكُمُۥ بِهِۦۚ

2:231

और ईश्वर के प्रति सावधान रहो,

وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ

2:231

और जान लो कि ईश्वर हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।

وَٱعۡلَمُواْ أَنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٞ

2:232

और जब तुम स्त्रियों का परित्याग करो, और वे अपनी अवधि तक पहुँच जाएँ, तो उन्हें अपने जोड़ीदारों से विवाह करने में बाधा मत डालो, जब उनके बीच मान्य के अनुसार आपसी प्रसन्नता हो।

وَإِذَا طَلَّقۡتُمُ ٱلنِّسَآءَ فَبَلَغۡنَ أَجَلَهُنَّ فَلَا تَعۡضُلُوهُنَّ أَن يَنكِحۡنَ أَزۡوَٰجَهُنَّ إِذَا تَرَٰضَوۡاْ بَيۡنَهُمُۥ بِٱلۡمَعۡرُوفِۗ

2:232

यही वह है जिसका उपदेश तुममें से हर उस व्यक्ति को दिया जाता है जो ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास करता है।

ذَٰلِكَ يُوعَظُ بِهِۦ مَن كَانَ مِنكُمُۥ يُؤۡمِنُ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِۗ

2:232

यह तुम्हारे लिए अधिक शुद्ध है, और अधिक स्वच्छ।

ذَٰلِكُمُۥ أَزۡكَىٰ لَكُمُۥ وَأَطۡهَرُۚ

2:232

ईश्वर जानता है, और तुम नहीं जानते।

وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ وَأَنتُمُۥ لَا تَعۡلَمُونَ

2:233

और माताएँ अपने बच्चों की देखभाल का ज़िम्मा पूरे दो बरस लेती हैं,

۞ وَٱلۡوَٰلِدَٰتُ يُرۡضِعۡنَ أَوۡلَٰدَهُنَّ حَوۡلَيۡنِ كَامِلَيۡنِۖ

2:233

उसके लिए जो इस देखभाल को पूर्ण करना चाहे।

لِمَنۡ أَرَادَ أَن يُتِمَّ ٱلرَّضَاعَةَۚ

2:233

और जिसके लिए बच्चा जन्मा है, उस पर है कि वह मान्य के अनुसार उन्हें जीविका और पहनावा दे।

وَعَلَى ٱلۡمَوۡلُودِ لَهُۥ رِزۡقُهُنَّ وَكِسۡوَتُهُنَّ بِٱلۡمَعۡرُوفِۚ

2:233

किसी भी स्व पर उसकी क्षमता से अधिक भार नहीं डाला जाता।

لَا تُكَلَّفُ نَفۡسٌ إِلَّا وُسۡعَهَاۚ

2:233

कोई माता अपने बच्चे के कारण हानि न सहे, और न वह जिसके लिए बच्चा जन्मा है, अपने बच्चे के कारण।

لَا تُضَآرُّ وَٰلِدَةُۢ بِوَلَدِهَا وَلَا مَوۡلُودٞ لَّهُۥ بِوَلَدِهِۦۚ

2:233

और उत्तराधिकारी पर भी वैसा ही है।

وَعَلَى ٱلۡوَارِثِ مِثۡلُ ذَٰلِكَۗ

2:233

और यदि वे दूध छुड़ाना चाहें, आपस की प्रसन्नता और परामर्श के बाद, तो उन दोनों पर कोई आक्षेप नहीं।

فَإِنۡ أَرَادَا فِصَالًا عَن تَرَاضٖ مِّنۡهُمَا وَتَشَاوُرٖ فَلَا جُنَاحَ عَلَيۡهِمَاۗ

2:233

और यदि तुम अपने बच्चों की देखभाल का ज़िम्मा दिलवाना चाहो, तो तुम पर कोई आक्षेप नहीं, जब तुम वह सौंप दो जो तुम्हें देना है, मान्य के अनुसार।

وَإِنۡ أَرَدتُّمُۥ أَن تَسۡتَرۡضِعُواْ أَوۡلَٰدَكُمُۥ فَلَا جُنَاحَ عَلَيۡكُمُۥ إِذَا سَلَّمۡتُمُۥ مَا أَتَيۡتُمُۥ بِٱلۡمَعۡرُوفِۗ

2:233

और ईश्वर के प्रति सावधान रहो,

وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ

2:233

और जान लो कि ईश्वर तुम जो करते हो उस पर दृष्टि रखता है।

وَٱعۡلَمُواْ أَنَّ ٱللَّهَ بِمَا تَعۡمَلُونَ بَصِيرٞ

2:234

और तुममें से जो निष्ठापूर्वक सँभाल लिए जाते हैं, जोड़ीदार छोड़ते हुए, उनकी जोड़ीदार चार महीने और दस की प्रतीक्षा-अवधि में रहती हैं;

وَٱلَّذِينَ يُتَوَفَّوۡنَ مِنكُمُۥ وَيَذَرُونَ أَزۡوَٰجٗا يَتَرَبَّصۡنَ بِأَنفُسِهِنَّ أَرۡبَعَةَ أَشۡهُرٖ وَعَشۡرٗاۖ

2:234

और जब वे अपनी अवधि तक पहुँच जाएँ, तो वे अपने विषय में जो मान्य के अनुसार करें उसके लिए तुम पर कोई आक्षेप नहीं।

فَإِذَا بَلَغۡنَ أَجَلَهُنَّ فَلَا جُنَاحَ عَلَيۡكُمُۥ فِيمَا فَعَلۡنَ فِي أَنفُسِهِنَّ بِٱلۡمَعۡرُوفِۗ

2:234

और ईश्वर तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।

وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ خَبِيرٞ

2:235

और स्त्रियों से विवाह-प्रस्ताव के रूप में तुम जो इशारे से जताओ, या जो तुम अपने भीतर सँजोकर रखो, उसमें तुम पर कोई आक्षेप नहीं।

وَلَا جُنَاحَ عَلَيۡكُمُۥ فِيمَا عَرَّضۡتُمُۥ بِهِۦ مِنۡ خِطۡبَةِ ٱلنِّسَآءِ اَ۬وۡ أَكۡنَنتُمُۥ فِي أَنفُسِكُمُۥۚ

2:235

ईश्वर जानता है कि तुम उनके विषय में सोचोगे; परंतु उनसे गुप्त रूप से कोई वादा मत करो,

عَلِمَ ٱللَّهُ أَنَّكُمُۥ سَتَذۡكُرُونَهُنَّ وَلَٰكِن لَّا تُوَاعِدُوهُنَّ سِرًّا

2:235

सिवा इसके कि तुम मान्य कथन कहो।

إِلَّا أَن تَقُولُواْ قَوۡلٗا مَّعۡرُوفٗاۚ

2:235

और विवाह-अनुबंध तब तक पक्का मत करो जब तक दस्तावेज़ अपनी अवधि तक न पहुँच जाए।

وَلَا تَعۡزِمُواْ عُقۡدَةَ ٱلنِّكَاحِ حَتَّىٰ يَبۡلُغَ ٱلۡكِتَٰبُ أَجَلَهُۥۚ

2:235

और जान लो कि ईश्वर जानता है जो तुम्हारे स्व में है; तो उसके प्रति सतर्क रहो।

وَٱعۡلَمُواْ أَنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ مَا فِي أَنفُسِكُمُۥ فَٱحۡذَرُوهُۥۚ

2:235

और जान लो कि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, सहनशील है।

وَٱعۡلَمُواْ أَنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌ حَلِيمٞ

2:236

तुम पर कोई आक्षेप नहीं, यदि तुम स्त्रियों का परित्याग करो जब तक तुमने उन्हें स्पर्श न किया हो, या उनके लिए कोई दायित्व निर्धारित न किया हो।

لَّا جُنَاحَ عَلَيۡكُمُۥ إِن طَلَّقۡتُمُ ٱلنِّسَآءَ مَا لَمۡ تَمَسُّوهُنَّ أَوۡ تَفۡرِضُواْ لَهُنَّ فَرِيضَةٗۚ

2:236

और उन्हें एक उपभोग दो — संपन्न अपने सामर्थ्य के अनुसार, और अल्प-साधन वाला अपने सामर्थ्य के अनुसार — मान्य के अनुसार एक उपभोग:

وَمَتِّعُوهُنَّ عَلَى ٱلۡمُوسِعِ قَدۡرُهُۥ وَعَلَى ٱلۡمُقۡتِرِ قَدۡرُهُۥ مَتَٰعَۢا بِٱلۡمَعۡرُوفِۖ

2:236

भलाई करने वालों के लिए एक कर्तव्य।

حَقًّا عَلَى ٱلۡمُحۡسِنِينَ

2:237

और यदि तुम उनका परित्याग उन्हें स्पर्श करने से पहले करो, जबकि तुमने उनके लिए दायित्व निर्धारित किया था, तो जो तुमने निर्धारित किया उसका आधा, सिवा इसके कि वे दरगुज़र करें, या वह दरगुज़र करे जिसके हाथों में विवाह-अनुबंध है।

وَإِن طَلَّقۡتُمُوهُنَّ مِن قَبۡلِ أَن تَمَسُّوهُنَّ وَقَدۡ فَرَضۡتُمُۥ لَهُنَّ فَرِيضَةٗ فَنِصۡفُ مَا فَرَضۡتُمُۥ إِلَّا أَن يَعۡفُونَ أَوۡ يَعۡفُوَاْ ٱلَّذِي بِيَدِهِۦ عُقۡدَةُ ٱلنِّكَاحِۚ

2:237

और दरगुज़र करना, यह सावधानी के अधिक निकट है।

وَأَن تَعۡفُواْ أَقۡرَبُ لِلتَّقۡوَىٰۚ

2:237

और आपस में अनुग्रह को मत भूलो,

وَلَا تَنسَوُاْ ٱلۡفَضۡلَ بَيۡنَكُمُۥۚ

2:237

क्योंकि ईश्वर तुम जो करते हो उस पर दृष्टि रखता है।

إِنَّ ٱللَّهَ بِمَا تَعۡمَلُونَ بَصِيرٌ

2:238

संपर्कों की रक्षा करो, और सबसे पूर्ण संपर्क की भी, और ईश्वर के सामने खड़े रहो, समर्पित होकर।

حَٰفِظُواْ عَلَى ٱلصَّلَوَٰتِ وَٱلصَّلَوٰةِ ٱلۡوُسۡطَىٰ وَقُومُواْ لِلَّهِ قَٰنِتِينَ

2:239

और यदि तुम डरो, तो पैदल या सवार;

فَإِنۡ خِفۡتُمُۥ فَرِجَالًا أَوۡ رُكۡبَانٗاۖ

2:239

और जब तुम सुरक्षित हो जाओ, तो ईश्वर का स्मरण करो जैसे उसने तुम्हें वह सिखाया जो तुम नहीं जानते थे।

فَإِذَا أَمِنتُمُۥ فَٱذۡكُرُواْ ٱللَّهَ كَمَا عَلَّمَكُمُۥ مَا لَمۡ تَكُونُواْ تَعۡلَمُونَ

2:240

और तुममें से जो निष्ठापूर्वक सँभाल लिए जाते हैं, जोड़ीदार छोड़ते हुए — अपने जोड़ीदारों के पक्ष में एक अनुशंसा: बरसगाँठ तक एक उपभोग, निकाले जाने के बिना;

وَٱلَّذِينَ يُتَوَفَّوۡنَ مِنكُمُۥ وَيَذَرُونَ أَزۡوَٰجٗا وَصِيَّةٞ لِّأَزۡوَٰجِهِمُۥ مَتَٰعًا إِلَى ٱلۡحَوۡلِ غَيۡرَ إِخۡرَاجٖۚ

2:240

परंतु यदि वे निकल जाएँ, तो वे अपने विषय में जो मान्य में करें उसके लिए तुम पर कोई आक्षेप नहीं।

فَإِنۡ خَرَجۡنَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيۡكُمُۥ فِي مَا فَعَلۡنَ فِي أَنفُسِهِنَّ مِن مَّعۡرُوفٖۗ

2:240

ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।

وَٱللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٞ

2:241

और परित्यक्त स्त्रियों के लिए मान्य के अनुसार एक उपभोग:

وَلِلۡمُطَلَّقَٰتِ مَتَٰعُۢ بِٱلۡمَعۡرُوفِۖ

2:241

सावधानी बरतने वालों के लिए एक कर्तव्य।

حَقًّا عَلَى ٱلۡمُتَّقِينَ

2:242

इस प्रकार ईश्वर तुम्हारे लिए अपने संकेत स्पष्ट करता है, शायद तुम बुद्धि से काम लो।

كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمُۥ ءَايَٰتِهِۦ لَعَلَّكُمُۥ تَعۡقِلُونَ

2:243

क्या तुमने उन्हें नहीं देखा जो अपने ठिकानों से निकले, हज़ारों में, मृत्यु से सतर्क रहते हुए? तब ईश्वर ने उनसे कहा: “मर जाओ”; फिर उसने उन्हें पुनः जीवन दिया।

۞ أَلَمۡ تَرَ إِلَى ٱلَّذِينَ خَرَجُواْ مِن دِيَٰرِهِمُۥ وَهُمُۥ أُلُوفٌ حَذَرَ ٱلۡمَوۡتِ فَقَالَ لَهُمُ ٱللَّهُ مُوتُواْ ثُمَّ أَحۡيَٰهُمُۥۚ

2:243

ईश्वर अवश्य लोगों के प्रति अनुग्रह रखता है,

إِنَّ ٱللَّهَ لَذُو فَضۡلٍ عَلَى ٱلنَّاسِ

2:243

परंतु अधिकतर लोग कृतज्ञ नहीं हैं।

وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَشۡكُرُونَ

2:244

और ईश्वर की राह में लड़ो, और जान लो कि ईश्वर सुनने वाला, सर्वज्ञ है।

وَقَٰتِلُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ وَٱعۡلَمُواْ أَنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٞ

2:245

कौन है जो ईश्वर को एक सुंदर उधार देगा, जिसे वह उसके लिए अनेक बार दुगना कर देगा?

مَّن ذَا ٱلَّذِي يُقۡرِضُ ٱللَّهَ قَرۡضًا حَسَنٗا فَيُضَعِّفُهُۥ لَهُۥ أَضۡعَافٗا كَثِيرَةٗۚ

2:245

ईश्वर संकुचित करता है और प्रशस्त करता है,

وَٱللَّهُ يَقۡبِضُ وَيَبۡصُۜطُ

2:245

और तुम उसी की ओर लौटाए जाओगे।

وَإِلَيۡهِۦ تُرۡجَعُونَ

2:246

क्या तुमने इसराईल की संतान में से दरबार को नहीं देखा, मूसा के बाद, जब उन्होंने अपने ही एक सूचनादाता से कहा: “हमारे लिए एक राजा उठाओ, ताकि हम ईश्वर की राह में लड़ें”?

أَلَمۡ تَرَ إِلَى ٱلۡمَلَإِ مِنۢ بَنِي إِسۡرَٰٓءِيلَ مِنۢ بَعۡدِ مُوسَىٰ إِذۡ قَالُواْ لِنَبِيّٖ لَّهُمُ ٱبۡعَثۡ لَنَا مَلِكٗا نُّقَٰتِلۡ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِۖ

2:246

उसने कहा: “क्या ऐसा हो सकता है कि यदि तुम पर लड़ाई विहित की जाती, तो तुम न लड़ते?”

قَالَ هَلۡ عَسَيۡتُمُۥ إِن كُتِبَ عَلَيۡكُمُ ٱلۡقِتَالُ أَلَّا تُقَٰتِلُواْۖ

2:246

उन्होंने कहा: “और हमें क्या हुआ है कि हम ईश्वर की राह में न लड़ें, जबकि हमें अपने ठिकानों और अपने बेटों से निकाल दिया गया है?”

قَالُواْ وَمَا لَنَا أَلَّا نُقَٰتِلَ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ وَقَدۡ أُخۡرِجۡنَا مِن دِيَٰرِنَا وَأَبۡنَآئِنَاۖ

2:246

परंतु जब उन पर लड़ाई विहित की गई, तो उन्होंने पीठ फेर ली, सिवा उनमें से थोड़े के।

فَلَمَّا كُتِبَ عَلَيۡهِمُ ٱلۡقِتَالُ تَوَلَّوۡاْ إِلَّا قَلِيلٗا مِّنۡهُمُۥۚ

2:246

और ईश्वर अन्यायियों के विषय में सर्वज्ञ है।

وَٱللَّهُ عَلِيمُۢ بِٱلظَّٰلِمِينَ

2:247

और उनके सूचनादाता ने उनसे कहा: “ईश्वर ने निश्चय ही तालूत को तुम्हारे लिए राजा के रूप में उठाया है।”

وَقَالَ لَهُمُۥ نَبِيُّهُمُۥ إِنَّ ٱللَّهَ قَدۡ بَعَثَ لَكُمُۥ طَالُوتَ مَلِكٗاۚ

2:247

उन्होंने कहा: “उसके पास हम पर राजत्व कैसे होगा, जबकि हम उसमें उससे अधिक हक़ रखते हैं, और उसे संपत्ति की संपन्नता नहीं दी गई?”

قَالُواْ أَنَّىٰ يَكُونُ لَهُ ٱلۡمُلۡكُ عَلَيۡنَا وَنَحۡنُ أَحَقُّ بِٱلۡمُلۡكِ مِنۡهُۥ وَلَمۡ يُؤۡتَ سَعَةٗ مِّنَ ٱلۡمَالِۚ

2:247

उसने कहा: “ईश्वर ने निश्चय ही उसे तुम पर चुन लिया है, और उसे ज्ञान और काया के विस्तार में बढ़ा दिया है।”

قَالَ إِنَّ ٱللَّهَ ٱصۡطَفَىٰهُۥ عَلَيۡكُمُۥ وَزَادَهُۥ بَسۡطَةٗ فِي ٱلۡعِلۡمِ وَٱلۡجِسۡمِۖ

2:247

ईश्वर अपना राजत्व जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे देता है।

وَٱللَّهُ يُؤۡتِي مُلۡكَهُۥ مَن يَشَآءُۚ

2:247

ईश्वर विस्तृत, सर्वज्ञ है।

وَٱللَّهُ وَٰسِعٌ عَلِيمٞ

2:248

और उनके सूचनादाता ने उनसे कहा: “उसके राजत्व का संकेत यह होगा कि संदूक तुम्हारे पास आए, जिसमें तुम्हारे अभिभावक की ओर से एक ढाढ़स है, और मूसा के कुल और हारून के कुल ने जो छोड़ा उसका अवशेष है, जो अभिकर्ताओं द्वारा वहन किया हुआ है।”

وَقَالَ لَهُمُۥ نَبِيُّهُمُۥ إِنَّ ءَايَةَ مُلۡكِهِۦ أَن يَأۡتِيَكُمُ ٱلتَّابُوتُ فِيهِۦ سَكِينَةٞ مِّن رَّبِّكُمُۥ وَبَقِيَّةٞ مِّمَّا تَرَكَ ءَالُ مُوسَىٰ وَءَالُ هَٰرُونَ تَحۡمِلُهُ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةُۚ

2:248

इसमें अवश्य तुम्हारे लिए एक संकेत है, यदि तुम विश्वास करने वाले हो।

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لَّكُمُۥ إِن كُنتُمُۥ مُؤۡمِنِينَ

2:249

जब तालूत सेनाओं के साथ चला, तो उसने कहा: “ईश्वर एक नदी से तुम्हें परखेगा: जो कोई उसमें से पिएगा वह मेरे अपनों में से नहीं है, और जो कोई उसे आहार नहीं बनाता वह निश्चय ही मेरे अपनों में से है — सिवा उसके जो अपने हाथ में एक घूँट भर ले।”

فَلَمَّا فَصَلَ طَالُوتُ بِٱلۡجُنُودِ قَالَ إِنَّ ٱللَّهَ مُبۡتَلِيكُمُۥ بِنَهَرٖ فَمَن شَرِبَ مِنۡهُۥ فَلَيۡسَ مِنِّي وَمَن لَّمۡ يَطۡعَمۡهُۥ فَإِنَّهُۥ مِنِّي إِلَّا مَنِ ٱغۡتَرَفَ غَرۡفَةَۢ بِيَدِهِۦۚ

2:249

उन्होंने उसमें से पिया, सिवा उनमें से थोड़े के।

فَشَرِبُواْ مِنۡهُۥ إِلَّا قَلِيلٗا مِّنۡهُمُۥۚ

2:249

फिर जब उसने और उसके साथ विश्वास करने वालों ने उसे पार कर लिया, तो उन्होंने कहा: “आज हमारे पास जालूत और उसकी सेनाओं के विरुद्ध कोई बल नहीं।”

فَلَمَّا جَاوَزَهُۥ هُوَ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مَعَهُۥ قَالُواْ لَا طَاقَةَ لَنَا ٱلۡيَوۡمَ بِجَالُوتَ وَجُنُودِهِۦۚ

2:249

जिन्होंने अनुमान लगाया था कि वे ईश्वर से मिलेंगे उन्होंने कहा: “कितनी ही थोड़ी संख्या वाली टुकड़ियों ने बड़ी टुकड़ियों को ईश्वर की अनुमति से परास्त कर दिया है!”

قَالَ ٱلَّذِينَ يَظُنُّونَ أَنَّهُمُۥ مُلَٰقُواْ ٱللَّهِ كَم مِّن فِئَةٖ قَلِيلَةٍ غَلَبَتۡ فِئَةٗ كَثِيرَةَۢ بِإِذۡنِ ٱللَّهِۗ

2:249

ईश्वर धैर्य रखने वालों के साथ है।

وَٱللَّهُ مَعَ ٱلصَّٰبِرِينَ

2:250–251

और जब वे जालूत और उसकी सेनाओं के सामने आए, तो उन्होंने कहा: “हमारे अभिभावक, हम पर धैर्य उँडेल दीजिए, हमारे क़दम दृढ़ कीजिए, और उस क़ौम के विरुद्ध हमारी सहायता कीजिए जो नकारती है”; तब उन्होंने उन्हें ईश्वर की अनुमति से भगा दिया,

وَلَمَّا بَرَزُواْ لِجَالُوتَ وَجُنُودِهِۦ قَالُواْ رَبَّنَا أَفۡرِغۡ عَلَيۡنَا صَبۡرٗا وَثَبِّتۡ أَقۡدَامَنَا وَٱنصُرۡنَا عَلَى ٱلۡقَوۡمِ ٱلۡكَٰفِرِينَ فَهَزَمُوهُمُۥ بِإِذۡنِ ٱللَّهِ

2:250–251

और दाऊद ने जालूत को मार डाला; ईश्वर ने उसे राजत्व और प्रज्ञा दी, और उसे वह सिखाया जो उसकी मर्ज़ी हुई।

وَقَتَلَ دَاوُۥدُ جَالُوتَ وَءَاتَىٰهُ ٱللَّهُ ٱلۡمُلۡكَ وَٱلۡحِكۡمَةَ وَعَلَّمَهُۥ مِمَّا يَشَآءُۗ

2:250–251

और यदि ईश्वर लोगों को एक-दूसरे के द्वारा न हटाता, तो धरती निश्चय ही बिगाड़ के हवाले कर दी गई होती;

وَلَوۡلَا دَفۡعُ ٱللَّهِ ٱلنَّاسَ بَعۡضَهُمُۥ بِبَعۡضٖ لَّفَسَدَتِ ٱلۡأَرۡضُ

2:250–251

परंतु ईश्वर सभी प्राणियों के प्रति अनुग्रह रखता है।

وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ ذُو فَضۡلٍ عَلَى ٱلۡعَٰلَمِينَ

2:252

ये ईश्वर के संकेत हैं, जो हम तुम्हें पूर्ण सत्य के साथ सुनाते हैं,

تِلۡكَ ءَايَٰتُ ٱللَّهِ نَتۡلُوهَا عَلَيۡكَ بِٱلۡحَقِّۚ

2:252

और तुम अवश्य भेजे गए जनों में से हो।

وَإِنَّكَ لَمِنَ ٱلۡمُرۡسَلِينَ

2:253

ये संदेशवाहक हैं:

۞ تِلۡكَ ٱلرُّسُلُ

2:253

हमने उनमें से कुछ को दूसरों पर वरीयता दी।

فَضَّلۡنَا بَعۡضَهُمُۥ عَلَىٰ بَعۡضٖۘ

2:253

उनमें से कुछ ऐसे हैं जिनसे ईश्वर बोला,

مِّنۡهُمُۥ مَن كَلَّمَ ٱللَّهُۖ

2:253

और उसने दूसरों को श्रेणियों में ऊँचा किया।

وَرَفَعَ بَعۡضَهُمُۥ دَرَجَٰتٖۚ

2:253

और हमने मरयम के पुत्र ईसा को स्पष्ट प्रमाण दिए, और उसे पवित्र प्रवाह से सुदृढ़ किया।

وَءَاتَيۡنَا عِيسَى ٱبۡنَ مَرۡيَمَ ٱلۡبَيِّنَٰتِ وَأَيَّدۡنَٰهُۥ بِرُوحِ ٱلۡقُدۡسِۗ

2:253

और यदि ईश्वर की मर्ज़ी होती, तो जो उनके बाद आए वे स्पष्ट प्रमाण उनके पास आ जाने के बाद आपस में एक-दूसरे को मार न डालते;

وَلَوۡ شَآءَ ٱللَّهُ مَا ٱقۡتَتَلَ ٱلَّذِينَ مِنۢ بَعۡدِهِمُۥ مِنۢ بَعۡدِ مَا جَآءَتۡهُمُ ٱلۡبَيِّنَٰتُ

2:253

परंतु उन्होंने मतभेद किया:

وَلَٰكِنِ ٱخۡتَلَفُواْ

2:253

उनमें से कुछ ने विश्वास किया, और कुछ ने नकारा।

فَمِنۡهُمُۥ مَنۡ ءَامَنَ وَمِنۡهُمُۥ مَن كَفَرَۚ

2:253

और यदि ईश्वर की मर्ज़ी होती, तो वे आपस में एक-दूसरे को मार न डालते;

وَلَوۡ شَآءَ ٱللَّهُ مَا ٱقۡتَتَلُواْ

2:253

परंतु ईश्वर वही करता है जो वह चाहता है।

وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ يَفۡعَلُ مَا يُرِيدُ

2:254

हे विश्वास करने वालो! उसमें से ख़र्च करो जिसकी जीविका हमने तुम्हें दी है, इससे पहले कि वह दिन आए जिसमें न क्रय-विक्रय होगा, न मित्रता, न मध्यस्थता।

يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ أَنفِقُواْ مِمَّا رَزَقۡنَٰكُمُۥ مِن قَبۡلِ أَن يَأۡتِيَ يَوۡمٞ لَّا بَيۡعَ فِيهِۦ وَلَا خُلَّةَ وَلَا شَفَٰعَةَۗ

2:254

और जो नकारते हैं — यही अन्यायी हैं।

وَٱلۡكَٰفِرُونَ هُمُ ٱلظَّٰلِمُونَ

2:255

ईश्वर, उसके सिवा कोई देवता नहीं,

ٱللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ

2:255

जीवित, अपने आप बना रहने वाला।

ٱلۡحَيُّ ٱلۡقَيُّومُ

2:255

न ऊँघ उसे पकड़ती है, न नींद।

لَا تَأۡخُذُهُۥ سِنَةٞ وَلَا نَوۡمٞۚ

2:255

आकाशों में जो है और धरती पर जो है, वह उसी का है।

لَّهُۥ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۗ

2:255

कौन है जो उसके पास मध्यस्थता करता है, उसकी अनुमति के सिवा?

مَن ذَا ٱلَّذِي يَشۡفَعُ عِندَهُۥ إِلَّا بِإِذۡنِهِۦۚ

2:255

वह जानता है जो उनके आगे है और जो उनके पीछे है,

يَعۡلَمُ مَا بَيۡنَ أَيۡدِيهِمُۥ وَمَا خَلۡفَهُمُۥۖ

2:255

और वे उसके ज्ञान में से किसी भी चीज़ को नहीं घेर पाते, सिवा उतने के जितना उसकी मर्ज़ी हो।

وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيۡءٖ مِّنۡ عِلۡمِهِۦ إِلَّا بِمَا شَآءَۚ

2:255

और उसका आसन आकाशों और धरती पर व्याप्त है,

وَسِعَ كُرۡسِيُّهُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَۖ

2:255

और उनकी रक्षा उसे बिल्कुल भारी नहीं पड़ती।

وَلَا يَـُٔودُهُۥ حِفۡظُهُمَاۚ

2:255

वह परम-उच्च, विशाल है।

وَهُوَ ٱلۡعَلِيُّ ٱلۡعَظِيمُ

2:256

विधान में कोई बाध्यता नहीं:

لَا إِكۡرَاهَ فِي ٱلدِّينِۖ

2:256

सुबुद्धि दिशाहीनता से अलग स्पष्ट हो गई है।

قَد تَّبَيَّنَ ٱلرُّشۡدُ مِنَ ٱلۡغَيِّۚ

2:256

जो कोई मर्यादाहीन को नकारता है और ईश्वर पर विश्वास करता है, उसने सबसे भरोसेमंद कुंडे को दृढ़ता से थाम लिया है, जो कभी नहीं टूटता।

فَمَن يَكۡفُرۡ بِٱلطَّٰغُوتِ وَيُؤۡمِنۢ بِٱللَّهِ فَقَدِ ٱسۡتَمۡسَكَ بِٱلۡعُرۡوَةِ ٱلۡوُثۡقَىٰ لَا ٱنفِصَامَ لَهَاۗ

2:256

ईश्वर सुनने वाला, सर्वज्ञ है।

وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ

2:257

ईश्वर उनका हिमायती है जिन्होंने विश्वास किया, वह उन्हें अँधेरों से प्रकाश की ओर निकालता है।

ٱللَّهُ وَلِيُّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ يُخۡرِجُهُمُۥ مِنَ ٱلظُّلُمَٰتِ إِلَى ٱلنُّورِۖ

2:257

और जो नकारते हैं, उनके आश्रयदाता मर्यादाहीन हैं, जो उन्हें प्रकाश से अँधेरों की ओर निकालता है।

وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ أَوۡلِيَآؤُهُمُ ٱلطَّٰغُوتُ يُخۡرِجُونَهُمُۥ مِنَ ٱلنُّورِ إِلَى ٱلظُّلُمَٰتِۗ

2:257

यही आग वाले हैं, वे उसमें सदा रहते हैं।

أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِۖ هُمُۥ فِيهَا خَٰلِدُونَ

2:258

क्या तुमने उसे नहीं देखा जिसने इब्राहीम से उसके अभिभावक के विषय में विवाद किया, इसलिए कि ईश्वर ने उसे राजत्व दिया था? जब इब्राहीम ने कहा: “मेरा अभिभावक वह है जो जीवन देता है और मृत्यु देता है”,

أَلَمۡ تَرَ إِلَى ٱلَّذِي حَآجَّ إِبۡرَٰهِيمَ فِي رَبِّهِۦ أَنۡ ءَاتَىٰهُ ٱللَّهُ ٱلۡمُلۡكَ إِذۡ قَالَ إِبۡرَٰهِيمُ رَبِّيَ ٱلَّذِي يُحۡيِۦ وَيُمِيتُ

2:258

उसने कहा: “मैं जीवन देता हूँ और मैं मृत्यु देता हूँ।”

قَالَ أَنَا۠ أُحۡيِۦ وَأُمِيتُۖ

2:258

इब्राहीम ने कहा: “ईश्वर निश्चय ही सूर्य को उदय-स्थान से लाता है; तो तुम उसे अस्त-स्थान से ले आओ”; तब जो नकारता था उसके शब्द बिखर गए।

قَالَ إِبۡرَٰهِيمُ فَإِنَّ ٱللَّهَ يَأۡتِي بِٱلشَّمۡسِ مِنَ ٱلۡمَشۡرِقِ فَأۡتِ بِهَا مِنَ ٱلۡمَغۡرِبِ فَبُهِتَ ٱلَّذِي كَفَرَۗ

2:258

और ईश्वर अन्यायी क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।

وَٱللَّهُ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلظَّٰلِمِينَ

2:259

या उस जैसा जो एक बस्ती के पास से गुज़रा जो अपने भवनों के बावजूद ख़ाली थी।

أَوۡ كَٱلَّذِي مَرَّ عَلَىٰ قَرۡيَةٖ وَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا

2:259

उसने कहा: “ईश्वर इसे इसकी मृत्यु के बाद कैसे जीवित करेगा?” तब ईश्वर ने उसे सौ साल तक मृत्यु दी, फिर उसने उसे उठाया।

قَالَ أَنَّىٰ يُحۡيِۦ هَٰذِهِ ٱللَّهُ بَعۡدَ مَوۡتِهَاۖ فَأَمَاتَهُ ٱللَّهُ مِاْئَةَ عَامٖ ثُمَّ بَعَثَهُۥۖ

2:259

उसने कहा: “तुमने कितना समय बिताया है?”

قَالَ كَمۡ لَبِثۡتَۖ

2:259

उसने कहा: “मैंने एक दिन बिताया, या एक दिन का एक खंड।”

قَالَ لَبِثۡتُ يَوۡمًا أَوۡ بَعۡضَ يَوۡمٖۖ

2:259

उसने कहा: “नहीं, तुमने सौ साल बिताए हैं।

قَالَ بَل لَّبِثۡتَ مِاْئَةَ عَامٖ

2:259

तो अपने भोजन और अपने पेय पर नज़र डालो: उन्होंने प्रतीक्षा नहीं की;

فَٱنظُرۡ إِلَىٰ طَعَامِكَ وَشَرَابِكَ لَمۡ يَتَسَنَّهۡۖ

2:259

और अपने गधे पर नज़र डालो —

وَٱنظُرۡ إِلَىٰ حِمَارِكَ

2:259

और ताकि हम तुम्हें लोगों के लिए एक संकेत बनाएँ।

وَلِنَجۡعَلَكَ ءَايَةٗ لِّلنَّاسِۖ

2:259

और हड्डियों पर नज़र डालो, कि हम उन्हें कैसे फैलाते हैं, फिर उन्हें मांस पहनाते हैं।”

وَٱنظُرۡ إِلَى ٱلۡعِظَامِ كَيۡفَ نُنشِرُهَا ثُمَّ نَكۡسُوهَا لَحۡمٗاۚ

2:259

जब यह उसके लिए स्पष्ट हो गया, तो उसने कहा: “मैं जानता हूँ कि ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।”

فَلَمَّا تَبَيَّنَ لَهُۥ قَالَ أَعۡلَمُ أَنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ

2:260

और जब इब्राहीम ने कहा: “मेरे अभिभावक, मुझे दिखाइए कि आप मृतकों को कैसे पुनः जीवन देते हैं।”

وَإِذۡ قَالَ إِبۡرَٰهِيمُ رَبِّ أَرۡنِي كَيۡفَ تُحۡيِ ٱلۡمَوۡتَىٰۖ

2:260

उसने कहा: “क्या तुम विश्वास नहीं करते?”

قَالَ أَوَلَمۡ تُؤۡمِنۖ

2:260

उसने कहा: “क्यों नहीं, परंतु यह इसलिए कि मेरे मर्म को चैन मिले।”

قَالَ بَلَىٰ وَلَٰكِن لِّيَطۡمَئِنَّ قَلۡبِيۖ

2:260

उसने कहा: “तो चार पक्षी लो, उन्हें अपने पास पालतू बनाओ, फिर हर पहाड़ पर उनमें से एक भाग रखो, फिर उन्हें बुलाओ: वे लपकते हुए तुम्हारे पास आएँगे।

قَالَ فَخُذۡ أَرۡبَعَةٗ مِّنَ ٱلطَّيۡرِ فَصُرۡهُنَّ إِلَيۡكَ ثُمَّ ٱجۡعَلۡ عَلَىٰ كُلِّ جَبَلٖ مِّنۡهُنَّ جُزۡءٗا ثُمَّ ٱدۡعُهُنَّ يَأۡتِينَكَ سَعۡيٗاۚ

2:260

और जान लो कि ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।”

وَٱعۡلَمۡ أَنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٞ

2:261

जो अपनी संपत्ति ईश्वर की राह में ख़र्च करते हैं, उनका उदाहरण उस दाने का उदाहरण है जो सात बालियाँ उगाता है,

مَّثَلُ ٱلَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمۡوَٰلَهُمُۥ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ كَمَثَلِ حَبَّةٍ أَنۢبَتَتۡ سَبۡعَ سَنَابِلَ

2:261

जिसकी हर बाली में सौ दाने हैं।

فِي كُلِّ سُنۢبُلَةٖ مِّاْئَةُ حَبَّةٖۗ

2:261

ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसके लिए दुगुना करता है।

وَٱللَّهُ يُضَعِّفُ لِمَن يَشَآءُۚ

2:261

ईश्वर विस्तृत, सर्वज्ञ है।

وَٱللَّهُ وَٰسِعٌ عَلِيمٌ

2:262

जो अपनी संपत्ति ईश्वर की राह में ख़र्च करते हैं, फिर ख़र्च किए हुए को न जताते हैं और न कष्ट देते हैं, उनका पुरस्कार उनके अभिभावक के पास है; उन पर कोई डर नहीं, और न वे दुखी होंगे।

ٱلَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمۡوَٰلَهُمُۥ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ ثُمَّ لَا يُتۡبِعُونَ مَا أَنفَقُواْ مَنّٗا وَلَا أَذٗى لَّهُمُۥ أَجۡرُهُمُۥ عِندَ رَبِّهِمُۥ وَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمُۥ وَلَا هُمُۥ يَحۡزَنُونَ

2:263

मान्य कथन और क्षमा उस दान से बेहतर हैं जिसके पीछे कष्ट दिया जाए।

۞ قَوۡلٞ مَّعۡرُوفٞ وَمَغۡفِرَةٌ خَيۡرٞ مِّن صَدَقَةٖ يَتۡبَعُهَا أَذٗىۗ

2:263

ईश्वर धनी, सहनशील है।

وَٱللَّهُ غَنِيٌّ حَلِيمٞ

2:264

हे विश्वास करने वालो! अपने दानों को जताकर और कष्ट देकर व्यर्थ न करो, उसकी तरह जो लोगों को दिखाने के लिए अपनी संपत्ति ख़र्च करता है, और न ईश्वर पर विश्वास करता है और न अंतिम दिन पर।

يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تُبۡطِلُواْ صَدَقَٰتِكُمُۥ بِٱلۡمَنِّ وَٱلۡأَذَىٰ كَٱلَّذِي يُنفِقُ مَالَهُۥ رِئَآءَ ٱلنَّاسِ وَلَا يُؤۡمِنُ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِۖ

2:264

उसका उदाहरण मिट्टी से ढकी एक चिकनी चट्टान जैसा है: उस पर मूसलाधार वर्षा आ पड़ती है, और उसे उघड़ा छोड़ देती है।

فَمَثَلُهُۥ كَمَثَلِ صَفۡوَانٍ عَلَيۡهِۦ تُرَابٞ فَأَصَابَهُۥ وَابِلٞ فَتَرَكَهُۥ صَلۡدٗاۖ

2:264

जो उन्होंने कमाया उसमें से किसी चीज़ पर उनका अधिकार नहीं रहता।

لَّا يَقۡدِرُونَ عَلَىٰ شَيۡءٖ مِّمَّا كَسَبُواْۗ

2:264

और ईश्वर नकारने वाली क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।

وَٱللَّهُ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلۡكَٰفِرِينَ

2:265

और जो ईश्वर की प्रसन्नता खोजते हुए और अपने ही स्वों की दृढ़ता के लिए अपनी संपत्ति ख़र्च करते हैं, उनका उदाहरण ऊँची भूमि पर स्थित एक उद्यान जैसा है: उस पर मूसलाधार वर्षा आ पड़ती है, और वह अपना भोजन दुगुना देता है; और यदि उस पर कोई मूसलाधार वर्षा न आ पड़े, तो फुहार।

وَمَثَلُ ٱلَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمۡوَٰلَهُمُ ٱبۡتِغَآءَ مَرۡضَاتِ ٱللَّهِ وَتَثۡبِيتٗا مِّنۡ أَنفُسِهِمُۥ كَمَثَلِ جَنَّةِۭ بِرُبۡوَةٍ أَصَابَهَا وَابِلٞ فَـَٔاتَتۡ أُكۡلَهَا ضِعۡفَيۡنِ فَإِن لَّمۡ يُصِبۡهَا وَابِلٞ فَطَلّٞۗ

2:265

और ईश्वर तुम जो करते हो उस पर दृष्टि रखता है।

وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ بَصِيرٌ

2:266

क्या तुममें से कोई चाहेगा कि उसके पास खजूरों और अंगूरों का उद्यान हो, जिसके नीचे नदियाँ बहती हों, जिसमें उसके लिए हर प्रकार के फल हों, फिर उस पर बुढ़ापा आ पड़े, जबकि उसकी संतति दुर्बल हो, और उद्यान पर एक बवंडर आ पड़े जिसमें आग हो, और वह जल जाए?

أَيَوَدُّ أَحَدُكُمُۥ أَن تَكُونَ لَهُۥ جَنَّةٞ مِّن نَّخِيلٖ وَأَعۡنَابٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ لَهُۥ فِيهَا مِن كُلِّ ٱلثَّمَرَٰتِ وَأَصَابَهُ ٱلۡكِبَرُ وَلَهُۥ ذُرِّيَّةٞ ضُعَفَآءُ فَأَصَابَهَا إِعۡصَارٞ فِيهِۦ نَارٞ فَٱحۡتَرَقَتۡۗ

2:266

इसी प्रकार ईश्वर तुम्हारे लिए संकेत स्पष्ट करता है, शायद तुम सोच-विचार करो।

كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمُ ٱلۡأٓيَٰتِ لَعَلَّكُمُۥ تَتَفَكَّرُونَ

2:267

हे विश्वास करने वालो! अपनी कमाई की अच्छी चीज़ों में से और उसमें से जो हमने तुम्हारे लिए धरती से निकाला है, ख़र्च करो,

يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ أَنفِقُواْ مِن طَيِّبَٰتِ مَا كَسَبۡتُمُۥ وَمِمَّا أَخۡرَجۡنَا لَكُمُۥ مِنَ ٱلۡأَرۡضِۖ

2:267

और उसमें से निकृष्ट को ख़र्च करने के लिए लक्ष्य न बनाओ, जबकि तुम स्वयं उसे केवल उस पर आँखें मूँदकर ही लेते।

وَلَا تَيَمَّمُواْ ٱلۡخَبِيثَ مِنۡهُۥ تُنفِقُونَ وَلَسۡتُمُۥ بِـَٔاخِذِيهِۦ إِلَّا أَن تُغۡمِضُواْ فِيهِۦۚ

2:267

और जान लो कि ईश्वर धनी, प्रशंसनीय है।

وَٱعۡلَمُواْ أَنَّ ٱللَّهَ غَنِيٌّ حَمِيدٌ

2:268

बहकाने वाला तुमसे निर्धनता का वादा करता है, और तुम्हें निर्लज्जता का आदेश देता है,

ٱلشَّيۡطَٰنُ يَعِدُكُمُ ٱلۡفَقۡرَ وَيَأۡمُرُكُمُۥ بِٱلۡفَحۡشَآءِۖ

2:268

जबकि ईश्वर तुमसे अपनी ओर से क्षमा और अनुग्रह का वादा करता है।

وَٱللَّهُ يَعِدُكُمُۥ مَغۡفِرَةٗ مِّنۡهُۥ وَفَضۡلٗاۗ

2:268

ईश्वर विस्तृत, सर्वज्ञ है।

وَٱللَّهُ وَٰسِعٌ عَلِيمٞ

2:269

वह प्रज्ञा उसे देता है जिस पर उसकी मर्ज़ी हो,

يُؤۡتِي ٱلۡحِكۡمَةَ مَن يَشَآءُۚ

2:269

और जिसे प्रज्ञा दी जाए, उसे बहुत अच्छाई दी जा चुकी है।

وَمَن يُؤۡتَ ٱلۡحِكۡمَةَ فَقَدۡ أُوتِيَ خَيۡرٗا كَثِيرٗاۗ

2:269

और इसे केवल मेधा रखने वाले ही स्मरण करते हैं।

وَمَا يَذَّكَّرُ إِلَّا أُوْلُواْ ٱلۡأَلۡبَٰبِ

2:270

और तुम जो भी ख़र्च करो, या जो भी मन्नत मानो, ईश्वर उसे निश्चय ही जानता है।

وَمَا أَنفَقۡتُمُۥ مِن نَّفَقَةٍ أَوۡ نَذَرۡتُمُۥ مِن نَّذۡرٖ فَإِنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُهُۥۗ

2:270

और अन्यायियों के लिए कोई सहायता नहीं।

وَمَا لِلظَّٰلِمِينَ مِنۡ أَنصَارٍ

2:271

यदि तुम दानों को सामने लाओ, तो यह उत्तम है;

إِن تُبۡدُواْ ٱلصَّدَقَٰتِ فَنِعِمَّا هِيَۖ

2:271

और यदि तुम उन्हें छिपाओ और निर्धनों को दो, तो यह तुम्हारे लिए बेहतर है, और हम तुम्हारे कुछ बुरे कर्म ढक देंगे।

وَإِن تُخۡفُوهَا وَتُؤۡتُوهَا ٱلۡفُقَرَآءَ فَهُوَ خَيۡرٞ لَّكُمُۥۚ وَنُكَفِّرُ عَنكُمُۥ مِن سَيِّـَٔاتِكُمُۥۗ

2:271

और ईश्वर तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।

وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ خَبِيرٞ

2:272

उन्हें मार्ग दिखाना तुम्हारे ज़िम्मे नहीं है,

۞ لَّيۡسَ عَلَيۡكَ هُدَىٰهُمُۥ

2:272

परंतु ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे मार्ग दिखाता है।

وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ يَهۡدِي مَن يَشَآءُۗ

2:272

और तुम जो भी अच्छाई ख़र्च करो, वह तुम्हारे अपने लिए है।

وَمَا تُنفِقُواْ مِنۡ خَيۡرٖ فَلِأَنفُسِكُمُۥۚ

2:272

और तुम केवल ईश्वर की दिशा खोजते हुए ही ख़र्च करते हो।

وَمَا تُنفِقُونَ إِلَّا ٱبۡتِغَآءَ وَجۡهِ ٱللَّهِۚ

2:272

और तुम जो भी अच्छाई ख़र्च करो, वह तुम्हें पूरा-पूरा चुकाया जाएगा, और तुम पर अन्याय नहीं किया जाएगा।

وَمَا تُنفِقُواْ مِنۡ خَيۡرٖ يُوَفَّ إِلَيۡكُمُۥ وَأَنتُمُۥ لَا تُظۡلَمُونَ

2:273

यह उन निर्धनों के लिए है जो ईश्वर की राह में रोक लिए गए हैं, जो धरती पर चल-फिर नहीं सकते: अज्ञानी उनके संकोच के कारण उन्हें धनी समझता है;

لِلۡفُقَرَآءِ ٱلَّذِينَ أُحۡصِرُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ لَا يَسۡتَطِيعُونَ ضَرۡبٗا فِي ٱلۡأَرۡضِ يَحۡسِبُهُمُ ٱلۡجَاهِلُ أَغۡنِيَآءَ مِنَ ٱلتَّعَفُّفِ

2:273

तुम उन्हें उनके निशान से पहचान लेते हो: वे लोगों से आग्रहपूर्वक नहीं माँगते।

تَعۡرِفُهُمُۥ بِسِيمَٰهُمُۥ لَا يَسۡـَٔلُونَ ٱلنَّاسَ إِلۡحَافٗاۗ

2:273

और तुम जो भी अच्छाई ख़र्च करो, ईश्वर निश्चय ही उसके विषय में सर्वज्ञ है।

وَمَا تُنفِقُواْ مِنۡ خَيۡرٖ فَإِنَّ ٱللَّهَ بِهِۦ عَلِيمٌ

2:274

जो अपनी संपत्ति रात और दिन, गुप्त रूप से और खुले रूप से ख़र्च करते हैं, उनका पुरस्कार उनके अभिभावक के पास है; उन पर कोई डर नहीं, और न वे दुखी होंगे।

ٱلَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمۡوَٰلَهُمُۥ بِٱلَّيۡلِ وَٱلنَّهَارِ سِرّٗا وَعَلَانِيَةٗ فَلَهُمُۥ أَجۡرُهُمُۥ عِندَ رَبِّهِمُۥ وَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمُۥ وَلَا هُمُۥ يَحۡزَنُونَ

2:275

जो ब्याज खाते हैं, वे केवल वैसे ही खड़े होते हैं जैसे वह खड़ा होता है जिसे बहकाने वाला अपने स्पर्श से लड़खड़ा देता है।

ٱلَّذِينَ يَأۡكُلُونَ ٱلرِّبَوٰاْ لَا يَقُومُونَ إِلَّا كَمَا يَقُومُ ٱلَّذِي يَتَخَبَّطُهُ ٱلشَّيۡطَٰنُ مِنَ ٱلۡمَسِّۚ

2:275

यह इसलिए कि उन्होंने कहा: “बिक्री तो केवल ब्याज जैसी ही है”;

ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُۥ قَالُواْ إِنَّمَا ٱلۡبَيۡعُ مِثۡلُ ٱلرِّبَوٰاْۗ

2:275

जबकि ईश्वर ने बिक्री को वैध ठहराया और ब्याज को वर्जित किया।

وَأَحَلَّ ٱللَّهُ ٱلۡبَيۡعَ وَحَرَّمَ ٱلرِّبَوٰاْۚ

2:275

जिसके पास उसके अभिभावक की ओर से उपदेश आ गया और वह रुक गया, तो जो बीत चुका वह उसी का है,

فَمَن جَآءَهُۥ مَوۡعِظَةٞ مِّن رَّبِّهِۦ فَٱنتَهَىٰ فَلَهُۥ مَا سَلَفَ

2:275

और उसका मामला ईश्वर के हवाले है;

وَأَمۡرُهُۥ إِلَى ٱللَّهِۖ

2:275

परंतु जो दोहराए — वही आग वाले हैं, वे उसमें सदा रहते हैं।

وَمَنۡ عَادَ فَأُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِۖ هُمُۥ فِيهَا خَٰلِدُونَ

2:276

ईश्वर ब्याज को मिटा देता है, और दानों को बढ़ाता है।

يَمۡحَقُ ٱللَّهُ ٱلرِّبَوٰاْ وَيُرۡبِي ٱلصَّدَقَٰتِۗ

2:276

ईश्वर किसी भी बड़े नकारने वाले, अपराधी से प्रेम नहीं करता।

وَٱللَّهُ لَا يُحِبُّ كُلَّ كَفَّارٍ أَثِيمٍ

2:277

निश्चय ही, जिन्होंने विश्वास किया, भले कर्म किए, संपर्क बनाए रखा और शुद्ध उदारता दी, उनका पुरस्कार उनके अभिभावक के पास है; उन पर कोई डर नहीं, और न वे दुखी होंगे।

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ وَأَقَامُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتَوُاْ ٱلزَّكَوٰةَ لَهُمُۥ أَجۡرُهُمُۥ عِندَ رَبِّهِمُۥ وَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمُۥ وَلَا هُمُۥ يَحۡزَنُونَ

2:278

हे विश्वास करने वालो! ईश्वर के प्रति सावधान रहो, और ब्याज का जो शेष रह गया है उसे छोड़ दो, यदि तुम विश्वास करने वाले हो।

يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَذَرُواْ مَا بَقِيَ مِنَ ٱلرِّبَوٰاْ إِن كُنتُمُۥ مُؤۡمِنِينَ

2:279

यदि तुम ऐसा न करो, तो ईश्वर और उसके संदेशवाहक की ओर से युद्ध के लिए स्वयं को चेताया हुआ जानो;

فَإِن لَّمۡ تَفۡعَلُواْ فَأۡذَنُواْ بِحَرۡبٖ مِّنَ ٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦۖ

2:279

और यदि तुम पलट आओ, तो तुम्हारी संपत्ति का मूलधन तुम्हारा है, न तुम अन्यायी ठहरो और न तुम पर अन्याय किया जाए।

وَإِن تُبۡتُمُۥ فَلَكُمُۥ رُءُوسُ أَمۡوَٰلِكُمُۥ لَا تَظۡلِمُونَ وَلَا تُظۡلَمُونَ

2:280

और यदि कोई तंगी में हो, तो सुगमता आने तक मोहलत है;

وَإِن كَانَ ذُو عُسۡرَةٖ فَنَظِرَةٌ إِلَىٰ مَيۡسَرَةٖۚ

2:280

और तुम्हारा उसे दान कर देना तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम जानते।

وَأَن تَصَّدَّقُواْ خَيۡرٞ لَّكُمُۥ إِن كُنتُمُۥ تَعۡلَمُونَ

2:281

और उस दिन से सावधान रहो जब तुम ईश्वर की ओर लौटाए जाओगे,

وَٱتَّقُواْ يَوۡمٗا تُرۡجَعُونَ فِيهِۦ إِلَى ٱللَّهِۖ

2:281

जब हर स्व वह पूरा-पूरा पाएगा जो उसने कमाया, और उस पर अन्याय नहीं किया जाएगा।

ثُمَّ تُوَفَّىٰ كُلُّ نَفۡسٖ مَّا كَسَبَتۡ وَهُمُۥ لَا يُظۡلَمُونَ

2:282

हे विश्वास करने वालो! जब तुम आपस में किसी नामित अवधि के लिए ऋण का सौदा करो, तो उसे लिख लो।

يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ إِذَا تَدَايَنتُمُۥ بِدَيۡنٍ إِلَىٰ أَجَلٖ مُّسَمّٗى فَٱكۡتُبُوهُۥۚ

2:282

और तुम्हारे बीच कोई लेखक उसे न्याय के साथ लिखे,

وَلۡيَكۡتُب بَّيۡنَكُمُۥ كَاتِبُۢ بِٱلۡعَدۡلِۚ

2:282

और कोई लेखक लिखने से इनकार न करे,

وَلَا يَأۡبَ كَاتِبٌ أَن يَكۡتُبَ

2:282

जैसा ईश्वर ने उसे सिखाया है; तो वह लिखे,

كَمَا عَلَّمَهُ ٱللَّهُۚ فَلۡيَكۡتُبۡ

2:282

और जिस पर देय है वह लिखवाए, और ईश्वर, अपने अभिभावक, के प्रति सावधान रहे, और उसमें से कुछ भी कम न करे।

وَلۡيُمۡلِلِ ٱلَّذِي عَلَيۡهِ ٱلۡحَقُّ وَلۡيَتَّقِ ٱللَّهَ رَبَّهُۥ وَلَا يَبۡخَسۡ مِنۡهُۥ شَيۡـٔٗاۚ

2:282

और यदि जिस पर देय है वह मूर्ख हो, या दुर्बल हो, या स्वयं लिखवा न सके, तो उसका विधिक उत्तरदायी न्याय के साथ लिखवाए।

فَإِن كَانَ ٱلَّذِي عَلَيۡهِ ٱلۡحَقُّ سَفِيهًا أَوۡ ضَعِيفًا أَوۡ لَا يَسۡتَطِيعُ أَن يُمِلَّ هُوَ فَلۡيُمۡلِلۡ وَلِيُّهُۥ بِٱلۡعَدۡلِۚ

2:282

और अपने पुरुषों में से दो साक्षियों से उसका साक्ष्य दिलवाओ;

وَٱسۡتَشۡهِدُواْ شَهِيدَيۡنِ مِن رِّجَالِكُمُۥۖ

2:282

और यदि दो पुरुष न हों, तो एक पुरुष और दो स्त्रियाँ, उनमें से जिनका साक्ष्य तुम स्वीकार करते हो, ताकि यदि उन दोनों में से एक भटक जाए तो दूसरी उसे स्मरण करा दे।

فَإِن لَّمۡ يَكُونَا رَجُلَيۡنِ فَرَجُلٞ وَٱمۡرَأَتَانِ مِمَّن تَرۡضَوۡنَ مِنَ ٱلشُّهَدَآءِ اَ۬ن تَضِلَّ إِحۡدَىٰهُمَا فَتُذۡكِرَ إِحۡدَىٰهُمَا ٱلۡأُخۡرَىٰۚ

2:282

और साक्षी इनकार न करें, जब उन्हें बुलाया जाए।

وَلَا يَأۡبَ ٱلشُّهَدَآءُ اِ۪ذَا مَا دُعُواْۚ

2:282

और उसे लिखने से ऊब न जाओ, चाहे छोटा हो या बड़ा, उसकी अवधि तक।

وَلَا تَسۡـَٔمُواْ أَن تَكۡتُبُوهُۥ صَغِيرًا أَوۡ كَبِيرًا إِلَىٰ أَجَلِهِۦۚ

2:282

यह ईश्वर के पास अधिक निष्पक्ष है, साक्ष्य के लिए अधिक सीधा है, और संदेह न करने के अधिक निकट है — सिवा इसके कि वह तत्काल व्यापार हो जिसे तुम आपस में चलाते हो: तब तुम पर उसे न लिखने का कोई आक्षेप नहीं।

ذَٰلِكُمُۥ أَقۡسَطُ عِندَ ٱللَّهِ وَأَقۡوَمُ لِلشَّهَٰدَةِ وَأَدۡنَىٰ أَلَّا تَرۡتَابُواْ إِلَّا أَن تَكُونَ تِجَٰرَةٌ حَاضِرَةٞ تُدِيرُونَهَا بَيۡنَكُمُۥ فَلَيۡسَ عَلَيۡكُمُۥ جُنَاحٌ أَلَّا تَكۡتُبُوهَاۗ

2:282

और जब तुम आपस में बिक्री करो तो साक्षी बना लो।

وَأَشۡهِدُواْ إِذَا تَبَايَعۡتُمُۥۚ

2:282

और न लेखक को हानि पहुँचाई जाए और न साक्षी को।

وَلَا يُضَآرَّ كَاتِبٞ وَلَا شَهِيدٞۚ

2:282

और यदि तुम ऐसा करो, तो यह निश्चय ही तुम्हारी ओर से अतिक्रमण है।

وَإِن تَفۡعَلُواْ فَإِنَّهُۥ فُسُوقُۢ بِكُمُۥۗ

2:282

और ईश्वर के प्रति सावधान रहो,

وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَۖ

2:282

और ईश्वर तुम्हें सिखाता है।

وَيُعَلِّمُكُمُ ٱللَّهُۗ

2:282

और ईश्वर हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।

وَٱللَّهُ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٞ

2:283

और यदि तुम यात्रा पर हो और कोई लेखक न पाओ, तो क़ब्ज़े में ली हुई एक गिरवी।

۞ وَإِن كُنتُمُۥ عَلَىٰ سَفَرٖ وَلَمۡ تَجِدُواْ كَاتِبٗا فَرُهُنٞ مَّقۡبُوضَةٞۖ

2:283

और यदि तुममें से कोई दूसरे पर भरोसा करे, तो जिस पर भरोसा किया गया वह अपनी धरोहर हवाले कर दे,

فَإِنۡ أَمِنَ بَعۡضُكُمُۥ بَعۡضٗا فَلۡيُؤَدِّ ٱلَّذِي ٱؤۡتُمِنَ أَمَٰنَتَهُۥ

2:283

और ईश्वर, अपने अभिभावक, के प्रति सावधान रहे।

وَلۡيَتَّقِ ٱللَّهَ رَبَّهُۥۗ

2:283

और साक्ष्य को मत दबाओ।

وَلَا تَكۡتُمُواْ ٱلشَّهَٰدَةَۚ

2:283

और जो उसे दबाए, निश्चय ही उसका मर्म अपराधी है।

وَمَن يَكۡتُمۡهَا فَإِنَّهُۥ ءَاثِمٞ قَلۡبُهُۥۗ

2:283

ईश्वर तुम जो करते हो उसके विषय में सर्वज्ञ है।

وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ عَلِيمٞ

2:284

ईश्वर का है जो आकाशों में है और जो धरती पर है।

لِّلَّهِ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۗ

2:284

और तुम अपने भीतर जो है उसे सामने लाओ, या उसे छिपाओ, ईश्वर तुमसे उसका हिसाब लेगा; फिर वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे क्षमा करता है, और जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे दंड देता है।

وَإِن تُبۡدُواْ مَا فِي أَنفُسِكُمُۥ أَوۡ تُخۡفُوهُۥ يُحَاسِبۡكُمُۥ بِهِ ٱللَّهُۖ فَيَغۡفِرۡ لِمَن يَشَآءُ وَيُعَذِّبۡ مَن يَشَآءُۗ

2:284

और ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।

وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٌ

2:285

संदेशवाहक ने उस पर विश्वास किया जो उसके अभिभावक की ओर से उसके लिए उतारा गया, और विश्वास करने वालों ने भी।

ءَامَنَ ٱلرَّسُولُ بِمَا أُنزِلَ إِلَيۡهِۦ مِن رَّبِّهِۦ وَٱلۡمُؤۡمِنُونَۚ

2:285

सबने ईश्वर पर, उसके अभिकर्ताओं पर, उसके ग्रंथों पर और उसके संदेशवाहकों पर विश्वास किया,

كُلٌّ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَمَلَٰٓئِكَتِهِۦ وَكُتُبِهِۦ وَرُسُلِهِۦ

2:285

उसके संदेशवाहकों में से किसी के बीच भी भेद किए बिना;

لَا نُفَرِّقُ بَيۡنَ أَحَدٖ مِّن رُّسُلِهِۦۚ

2:285

और उन्होंने कहा: “हमने सुना और हमने बात मानी।

وَقَالُواْ سَمِعۡنَا وَأَطَعۡنَاۖ

2:285

आपकी क्षमा, हमारे अभिभावक; आपकी ओर ही गंतव्य है।”

غُفۡرَانَكَ رَبَّنَا وَإِلَيۡكَ ٱلۡمَصِيرُ

2:286

ईश्वर किसी स्व पर उसकी क्षमता के सिवा कुछ नहीं थोपता।

لَا يُكَلِّفُ ٱللَّهُ نَفۡسًا إِلَّا وُسۡعَهَاۚ

2:286

उसी का है जो उसने कमाया,

لَهَا مَا كَسَبَتۡ

2:286

और उसी के विरुद्ध है जो उसने किया।

وَعَلَيۡهَا مَا ٱكۡتَسَبَتۡۗ

2:286

“हमारे अभिभावक, यदि हम भूल जाएँ या ग़लती करें, तो हमें न पकड़िए।

رَبَّنَا لَا تُؤَاخِذۡنَا إِن نَّسِينَا أَوۡ أَخۡطَأۡنَاۚ

2:286

हमारे अभिभावक, और हमसे कोई जुआठा वहन न कराइए, जैसा आपने उनसे वहन कराया जो हमसे पहले थे।

رَبَّنَا وَلَا تَحۡمِلۡ عَلَيۡنَا إِصۡرٗا كَمَا حَمَلۡتَهُۥ عَلَى ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِنَاۚ

2:286

हमारे अभिभावक, और हमसे वह वहन न कराइए जिसे वहन करने की ताक़त हममें नहीं है।

رَبَّنَا وَلَا تُحَمِّلۡنَا مَا لَا طَاقَةَ لَنَا بِهِۦۖ

2:286

और हमसे दरगुज़र कीजिए,

وَٱعۡفُ عَنَّا

2:286

और हमें क्षमा कीजिए,

وَٱغۡفِرۡ لَنَا

2:286

और हम पर दया कीजिए।

وَٱرۡحَمۡنَاۚ

2:286

आप हमारे हिमायती हैं; तो नकारने वाली क़ौम के विरुद्ध हमारी सहायता कीजिए।”

أَنتَ مَوۡلَىٰنَا فَٱنصُرۡنَا عَلَى ٱلۡقَوۡمِ ٱلۡكَٰفِرِينَ

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