القصص
Al-Qasas
The Story
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। ता. सीन. मीम.
بِسْمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحْمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ طَسِٓمِّٓۖ
ये स्पष्ट ग्रंथ के संकेत हैं।
تِلْكَ ءَايَٰتُ اُ۬لْكِتَٰبِ اِ۬لْمُبِينِۖ
हम तुम्हें पूर्ण सत्य के साथ मूसा और फ़िरऔन की सूचना का एक भाग सुनाते हैं, उस क़ौम के लिए जो विश्वास करती है।
نَتْلُواْ عَلَيْكَ مِن نَّبَإِ مُوسَىٰ وَفِرْعَوْنَ بِالْحَقِّ لِقَوْمٖ يُؤْمِنُونَۖ
फ़िरऔन धरती पर ऊँचा उठा और उसने वहाँ के निवासियों को गुटों में बाँट दिया; वह उनमें से एक समूह को कमज़ोर करता था, उनके बेटों का गला रेतते हुए और उनकी स्त्रियों की लज्जा पर आघात करते हुए,
إِنَّ فِرْعَوْنَ عَلَا فِے اِ۬لْأَرْضِ وَجَعَلَ أَهْلَهَا شِيَعاٗ يَسْتَضْعِفُ طَآئِفَةٗ مِّنْهُمْ يُذَبِّحُ أَبْنَآءَهُمْ وَيَسْتَحْيِۦ نِسَآءَهُمْۖ
क्योंकि वह बिगाड़ने वालों में से था।
إِنَّهُۥ كَانَ مِنَ اَ۬لْمُفْسِدِينَۖ
और हम चाहते थे कि जो धरती पर कमज़ोर किए गए थे उन पर कृपा करें, उन्हें मार्गदर्शक बनाएँ, उन्हें उत्तराधिकारी बनाएँ, उन्हें धरती पर दृढ़ता से स्थापित करें, और उनके द्वारा फ़िरऔन, हामान और उनकी सेनाओं को वह दिखाएँ जिससे वे आशंकित थे।
وَنُرِيدُ أَن نَّمُنَّ عَلَى اَ۬لذِينَ اَ۟سْتُضْعِفُواْ فِے اِ۬لْأَرْضِ وَنَجْعَلَهُمْ أَئِمَّةٗ وَنَجْعَلَهُمُ اُ۬لْوَٰرِثِينَ وَنُمَكِّنَ لَهُمْ فِے اِ۬لْأَرْضِ وَنُرِيَ فِرْعَوْنَ وَهَامَٰنَ وَجُنُودَهُمَا مِنْهُم مَّا كَانُواْ يَحْذَرُونَۖ
और हमने मूसा की माँ के मन में प्रकट किया: “उसकी देखभाल का ज़िम्मा लो; और जब तुम्हें उसके लिए डर लगे, उसे लहर में डाल दो, डर और दुख के बिना,
وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ أُمِّ مُوسَىٰ أَنْ أَرْضِعِيهِ فَإِذَا خِفْتِ عَلَيْهِ فَأَلْقِيهِ فِے اِ۬لْيَمِّ وَلَا تَخَافِے وَلَا تَحْزَنِےۖ
क्योंकि हम उसे तुम्हारे पास वापस पहुँचाएँगे और उसे भेजे गए जनों में से एक बनाएँगे।”
إِنَّا رَآدُّوهُ إِلَيْكِ وَجَاعِلُوهُ مِنَ اَ۬لْمُرْسَلِينَۖ
फ़िरऔन के कुल ने उसे निकाल लिया, ताकि अंततः वह उनके लिए शत्रु और दुख का कारण बने,
فَالْتَقَطَهُۥ ءَالُ فِرْعَوْنَ لِيَكُونَ لَهُمْ عَدُوّاٗ وَحَزَناًۖ
क्योंकि फ़िरऔन, हामान और उनकी सेनाएँ भूल करने वाली थीं।
إِنَّ فِرْعَوْنَ وَهَامَٰنَ وَجُنُودَهُمَا كَانُواْ خَٰطِـِٕينَۖ
और फ़िरऔन की पत्नी ने कहा: “मेरी और तुम्हारी आँखों का ठहराव; उसे मार मत डालो;
وَقَالَتِ اِ۪مْرَأَتُ فِرْعَوْنَ قُرَّتُ عَيْنٖ لِّے وَلَكَ لَا تَقْتُلُوهُۖ
संभव है कि वह हमारे काम आए, या हम उसे संतान के रूप में अपना लें।” उन्हें आभास नहीं था।
عَسَىٰ أَنْ يَّنفَعَنَا أَوْ نَتَّخِذَهُۥ وَلَداٗ وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَۖ
और मूसा की माँ की चेतना रिक्त हो गई; यदि हमने उसके मर्म को बाँधा न होता तो वह उसे अवश्य सामने ले आती, ताकि वह विश्वास करने वालों में से हो।
وَأَصْبَحَ فُؤَادُ أُمِّ مُوسَىٰ فَٰرِغاً إِن كَٰدَتْ لَتُبْدِے بِهِۦ لَوْلَا أَن رَّبَطْنَا عَلَىٰ قَلْبِهَا لِتَكُونَ مِنَ اَ۬لْمُؤْمِنِينَۖ
और उसने उसकी बहन से कहा: “उसके पीछे-पीछे जाओ।” उसने उसे दूर से स्पष्ट देखा, और उन्हें आभास नहीं था।
وَقَالَتْ لِأُخْتِهِۦ قُصِّيهِ فَبَصُرَتْ بِهِۦ عَن جُنُبٖ وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَۖ
और हमने उस पर पहले से किसी और की हर देखभाल वर्जित कर दी थी; तब उसने कहा: “क्या तुम चाहते हो कि मैं तुम्हें एक ऐसे परिवार का पता दूँ जो तुम्हारे लिए उसकी देखभाल करेगा, और उसके प्रति निष्कपट होगा?”
۞ وَحَرَّمْنَا عَلَيْهِ اِ۬لْمَرَاضِعَ مِن قَبْلُ فَقَالَتْ هَلْ أَدُلُّكُمْ عَلَىٰ أَهْلِ بَيْتٖ يَكْفُلُونَهُۥ لَكُمْ وَهُمْ لَهُۥ نَٰصِحُونَۖ
इस प्रकार हमने उसे उसकी माँ के पास वापस पहुँचाया, ताकि उसकी आँखें ठहर जाएँ, वह दुखी न हो, और वह जान ले कि ईश्वर का वादा सच है —
فَرَدَدْنَٰهُ إِلَىٰ أُمِّهِۦ كَےْ تَقَرَّ عَيْنُهَا وَلَا تَحْزَنَ وَلِتَعْلَمَ أَنَّ وَعْدَ اَ۬للَّهِ حَقّٞۖ
परंतु उनमें से अधिकतर नहीं जानते।
وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَۖ
जब वह अपनी पूर्ण परिपक्वता को पहुँचा और स्थिर हो गया, हमने उसे निर्णय और ज्ञान दिया —
وَلَمَّا بَلَغَ أَشُدَّهُۥ وَاسْتَوَىٰ ءَاتَيْنَٰهُ حُكْماٗ وَعِلْماٗۖ
इसी प्रकार हम भलाई करने वालों को प्रतिफल देते हैं।
وَكَذَٰلِكَ نَجْزِے اِ۬لْمُحْسِنِينَۖ
और वह राजधानी के निवासियों के अनवधान के क्षण में उसमें प्रविष्ट हुआ, और उसने वहाँ दो पुरुषों को लड़ते पाया: एक उसके अपने पक्ष का, दूसरा उसके शत्रुओं का।
وَدَخَلَ اَ۬لْمَدِينَةَ عَلَىٰ حِينِ غَفْلَةٖ مِّنْ أَهْلِهَا فَوَجَدَ فِيهَا رَجُلَيْنِ يَقْتَتِلَٰنِ هَٰذَا مِن شِيعَتِهِۦ وَهَٰذَا مِنْ عَدُوِّهِۦۖ
उसके पक्ष वाले ने शत्रुओं वाले के विरुद्ध उसे बचाव के लिए पुकारा; मूसा ने उसे मुक्के से मारा और उसका अंत कर दिया।
فَاسْتَغَٰثَهُ اُ۬لذِے مِن شِيعَتِهِۦ عَلَى اَ۬لذِے مِنْ عَدُوِّهِۦ فَوَكَزَهُۥ مُوسَىٰ فَقَضَىٰ عَلَيْهِۖ
उसने कहा: “यह बहकाने वाले का काम है;
قَالَ هَٰذَا مِنْ عَمَلِ اِ۬لشَّيْطَٰنِۖ
वह निश्चय ही शत्रु है, स्पष्ट भटकाने वाला।”
إِنَّهُۥ عَدُوّٞ مُّضِلّٞ مُّبِينٞۖ
उसने कहा: “मेरे अभिभावक, मैंने निश्चय ही अपने पर अन्याय किया है; मुझे क्षमा कर दीजिए।”
قَالَ رَبِّ إِنِّے ظَلَمْتُ نَفْسِے فَاغْفِرْ لِےۖ
उसने उसे क्षमा कर दिया,
فَغَفَرَ لَهُۥۖ
क्योंकि वही अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
إِنَّهُۥ هُوَ اَ۬لْغَفُورُ اُ۬لرَّحِيمُۖ
उसने कहा: “मेरे अभिभावक, उस उपकार के कारण जो आपने मुझ पर किया, मैं कभी बहिष्कृतों का समर्थक नहीं बनूँगा।”
قَالَ رَبِّ بِمَا أَنْعَمْتَ عَلَيَّ فَلَنْ أَكُونَ ظَهِيراٗ لِّلْمُجْرِمِينَۖ
उसने स्वयं को राजधानी में पाया, डरा हुआ, चौकन्ना; और देखो, जिसने कल उससे सहायता माँगी थी, वह फिर उसे बचाव के लिए पुकार रहा था।
فَأَصْبَحَ فِے اِ۬لْمَدِينَةِ خَآئِفاٗ يَتَرَقَّبُ فَإِذَا اَ۬لذِے اِ۪سْتَنصَرَهُۥ بِالْأَمْسِ يَسْتَصْرِخُهُۥۖ
मूसा ने उससे कहा: “तुम अवश्य एक स्पष्ट दिशाहीन व्यक्ति हो।”
قَالَ لَهُۥ مُوسَىٰ إِنَّكَ لَغَوِيّٞ مُّبِينٞۖ
फिर, जब उसने उसे धर दबोचना चाहा जो उन दोनों का शत्रु था, उसने कहा: “हे मूसा, क्या तुम मुझे मार डालना चाहते हो जैसे तुमने कल एक स्व को मार डाला?
فَلَمَّا أَنْ أَرَادَ أَنْ يَّبْطِشَ بِالذِے هُوَ عَدُوّٞ لَّهُمَا قَالَ يَٰمُوسَىٰ أَتُرِيدُ أَن تَقْتُلَنِے كَمَا قَتَلْتَ نَفْساَۢ بِالْأَمْسِۖ
तुम तो केवल धरती पर अत्याचारी बनना चाहते हो, और तुम सुधार करने वालों में से होना नहीं चाहते।”
إِن تُرِيدُ إِلَّا أَن تَكُونَ جَبَّاراٗ فِے اِ۬لْأَرْضِ وَمَا تُرِيدُ أَن تَكُونَ مِنَ اَ۬لْمُصْلِحِينَۖ
और एक पुरुष राजधानी के दूर छोर से तेज़ क़दमों से आया।
وَجَآءَ رَجُلٞ مِّنْ أَقْصَا اَ۬لْمَدِينَةِ يَسْعَىٰۖ
उसने कहा: “हे मूसा, दरबार तुम्हें मार डालने के लिए तुम्हारे विरुद्ध मंत्रणा कर रहा है; निकल जाओ, मैं निश्चय ही तुम्हारे लिए निष्कपट सलाहकार हूँ।”
قَالَ يَٰمُوسَىٰ إِنَّ اَ۬لْمَلَأَ يَأْتَمِرُونَ بِكَ لِيَقْتُلُوكَ فَاخْرُجْ إِنِّے لَكَ مِنَ اَ۬لنَّٰصِحِينَۖ
वह वहाँ से निकला, डरा हुआ, चौकन्ना,
فَخَرَجَ مِنْهَا خَآئِفاٗ يَتَرَقَّبُۖ
और उसने कहा: “मेरे अभिभावक, मुझे अन्यायी क़ौम से उबार लीजिए।”
قَالَ رَبِّ نَجِّنِے مِنَ اَ۬لْقَوْمِ اِ۬لظَّٰلِمِينَۖ
जब वह मदयन की ओर बढ़ा, उसने कहा: “संभव है कि मेरा अभिभावक मुझे ठीक राह पर मार्ग दिखाए।”
۞ وَلَمَّا تَوَجَّهَ تِلْقَآءَ مَدْيَنَ قَالَ عَسَىٰ رَبِّيَ أَنْ يَّهْدِيَنِے سَوَآءَ اَ۬لسَّبِيلِۖ
जब वह मदयन के पानी पर पहुँचा, उसने वहाँ पानी पिलाते पुरुषों का एक समुदाय पाया, और उनसे अलग दो स्त्रियाँ पाईं जो अपने झुंड को रोके हुए थीं।
وَلَمَّا وَرَدَ مَآءَ مَدْيَنَ وَجَدَ عَلَيْهِ أُمَّةٗ مِّنَ اَ۬لنَّاسِ يَسْقُونَ وَوَجَدَ مِن دُونِهِمُ اُ۪مْرَأَتَيْنِ تَذُودَٰنِۖ
उसने कहा: “तुम दोनों की क्या स्थिति है?”
قَالَ مَا خَطْبُكُمَاۖ
उन दोनों ने कहा: “हम तभी पानी पिलाती हैं जब चरवाहे चले जाते हैं; और हमारे पिता अत्यंत वृद्ध हैं।”
قَالَتَا لَا نَسْقِے حَتَّىٰ يُصْدِرَ اَ۬لرِّعَآءُ وَأَبُونَا شَيْخٞ كَبِيرٞۖ
उसने उनके लिए पानी पिलाया, फिर छाया में चला गया और उसने कहा: “मेरे अभिभावक, आप मेरी ओर जो भी अच्छाई उतारें, मैं निश्चय ही उसका बहुत ज़रूरतमंद हूँ।”
فَسَقَىٰ لَهُمَا ثُمَّ تَوَلَّىٰ إِلَى اَ۬لظِّلِّ فَقَالَ رَبِّ إِنِّے لِمَا أَنزَلْتَ إِلَيَّ مِنْ خَيْرٖ فَقِيرٞۖ
उन दोनों में से एक संकोच भरी लज्जा के साथ चलती हुई उसके पास आई।
فَجَآءَتْهُ إِحْدَيٰهُمَا تَمْشِے عَلَى اَ۪سْتِحْيَآءٖۖ
उसने कहा: “मेरे पिता तुम्हें बुलाते हैं, ताकि हमारे लिए पानी पिलाने पर तुम्हारे पुरस्कार का प्रतिफल तुम्हें दें।”
قَالَتْ إِنَّ أَبِے يَدْعُوكَ لِيَجْزِيَكَ أَجْرَ مَا سَقَيْتَ لَنَاۖ
जब वह उसके पास आया और उसने उसे अपना वृत्तांत बताया, तो उसने कहा: “डरो मत, तुम अन्यायी क़ौम से बच निकले हो।”
فَلَمَّا جَآءَهُۥ وَقَصَّ عَلَيْهِ اِ۬لْقَصَصَ قَالَ لَا تَخَفْ نَجَوْتَ مِنَ اَ۬لْقَوْمِ اِ۬لظَّٰلِمِينَۖ
उनमें से एक ने कहा: “हे मेरे पिता, इसे काम पर रख लो;
قَالَتْ إِحْدَيٰهُمَا يَٰأَبَتِ اِ۪سْتَٰٔجِرْهُۖ
क्योंकि सबसे बेहतर जिसे तुम काम पर रख सकते हो वह है जो बलवान और भरोसेमंद हो।”
إِنَّ خَيْرَ مَنِ اِ۪سْتَٰٔجَرْتَ اَ۬لْقَوِيُّ اُ۬لْأَمِينُۖ
उसने कहा: “मैं चाहता हूँ कि अपनी इन दो बेटियों में से एक के साथ तुम्हारा विवाह कर दूँ, इस शर्त पर कि तुम आठ साल तक मेरी सेवा करो;
قَالَ إِنِّيَ أُرِيدُ أَنْ أُنكِحَكَ إِحْدَى اَ۪بْنَتَيَّ هَٰتَيْنِ عَلَىٰ أَن تَأْجُرَنِے ثَمَٰنِيَ حِجَجٖۖ
और यदि तुम दस पूरे करो, तो वह तुम्हारी ओर से होगा;
فَإِنْ أَتْمَمْتَ عَشْراٗ فَمِنْ عِندِكَۖ
और मैं तुम पर कोई दबाव डालना नहीं चाहता —
وَمَا أُرِيدُ أَنْ أَشُقَّ عَلَيْكَۖ
तुम मुझे, यदि ईश्वर की मर्ज़ी हो, भलों में से पाओगे।”
سَتَجِدُنِيَ إِن شَآءَ اَ۬للَّهُ مِنَ اَ۬لصَّٰلِحِينَۖ
उसने कहा: “यह तय रहा, तुम्हारे और मेरे बीच;
قَالَ ذَٰلِكَ بَيْنِے وَبَيْنَكَۖ
दोनों अवधियों में से जो भी मैं पूरी करूँ, मेरे विरुद्ध कोई वैर न हो;
أَيَّمَا اَ۬لْأَجَلَيْنِ قَضَيْتُ فَلَا عُدْوَٰنَ عَلَيَّۖ
और जो हम कहते हैं उस पर ईश्वर मुख़्तार है।”
وَاللَّهُ عَلَىٰ مَا نَقُولُ وَكِيلٞۖ
जब मूसा ने अवधि पूरी कर ली और वह अपने परिवार के साथ चल पड़ा, तो उसने पर्वत की बगल से एक आग देखी।
۞ فَلَمَّا قَضَىٰ مُوسَى اَ۬لْأَجَلَ وَسَارَ بِأَهْلِهِۦ ءَانَسَ مِن جَانِبِ اِ۬لطُّورِ نَاراٗۖ
उसने अपने परिवार से कहा: “यहीं ठहरो, क्योंकि मैंने एक आग देखी है; शायद मैं तुम्हारे लिए उसकी कोई ख़बर, या एक सुलगता कोयला ले आऊँ, शायद तुम ताप सको।”
قَالَ لِأَهْلِهِ اِ۟مْكُثُواْ إِنِّيَ ءَانَسْتُ نَاراٗ لَّعَلِّيَ ءَاتِيكُم مِّنْهَا بِخَبَرٍ أَوْ جِذْوَةٖ مِّنَ اَ۬لنَّارِ لَعَلَّكُمْ تَصْطَلُونَۖ
जब वह वहाँ पहुँचा, उसे घाटी के दाहिने किनारे से, आशीषित स्थान में, वृक्ष की ओर से पुकारा गया: “हे मूसा, मैं ही निश्चय ही ईश्वर हूँ, सभी प्राणियों का अभिभावक! और अपनी लाठी फेंक दो।”
فَلَمَّا أَتَيٰهَا نُودِيَ مِن شَٰطِےِٕ اِ۬لْوَادِ اِ۬لْأَيْمَنِ فِے اِ۬لْبُقْعَةِ اِ۬لْمُبَٰرَكَةِ مِنَ اَ۬لشَّجَرَةِ أَنْ يَّٰمُوسَىٰ إِنِّيَ أَنَا اَ۬للَّهُ رَبُّ اُ۬لْعَٰلَمِينَ وَأَنْ أَلْقِ عَصَاكَۖ
जब उसने उसे थरथराते देखा मानो वह कोई प्रच्छन्न हो, तो वह पीठ फेरकर भागा और पीछे मुड़कर नहीं आया।
فَلَمَّا رَءَاهَا تَهْتَزُّ كَأَنَّهَا جَآنّٞ وَلَّىٰ مُدْبِراٗ وَلَمْ يُعَقِّبْۖ
“हे मूसा, सामने आओ और डरो मत;
يَٰمُوسَىٰ أَقْبِلْ وَلَا تَخَفْۖ
क्योंकि तुम सुरक्षित रहने वालों में से हो।
إِنَّكَ مِنَ اَ۬لْأٓمِنِينَۖ
अपना हाथ अपने सीने के खुले भाग में डालो, वह श्वेत निकलेगा, किसी बुराई के बिना;
اَ۟سْلُكْ يَدَكَ فِے جَيْبِكَ تَخْرُجْ بَيْضَآءَ مِنْ غَيْرِ سُوٓءٖۖ
और अपना पंख अपनी ओर समेट लो, आदर-भाव के प्रतिकार में।
وَاضْمُمْ إِلَيْكَ جَنَاحَكَ مِنَ اَ۬لرَّهَبِۖ
ये हैं तुम्हारे अभिभावक की ओर से फ़िरऔन और उसके दरबार के लिए दो प्रमाण;
فَذَٰنِكَ بُرْهَٰنَٰنِ مِن رَّبِّكَ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَإِيْهِۦۖ
क्योंकि वे अतिक्रमणकारियों की क़ौम थे।”
إِنَّهُمْ كَانُواْ قَوْماٗ فَٰسِقِينَۖ
उसने कहा: “मेरे अभिभावक, मैंने निश्चय ही उनमें से एक स्व को मार डाला है और मुझे डर है कि वे मुझे मार डालेंगे; और मेरा भाई हारून मुझसे अधिक स्पष्ट ज़बान वाला है — उसे मेरे साथ अतिरिक्त बल के रूप में भेजिए जो मुझे सच्चा ठहराए;
قَالَ رَبِّ إِنِّے قَتَلْتُ مِنْهُمْ نَفْساٗ فَأَخَافُ أَنْ يَّقْتُلُونِ وَأَخِے هَٰرُونُ هُوَ أَفْصَحُ مِنِّے لِسَاناٗ فَأَرْسِلْهُ مَعِے رِداٗ يُصَدِّقْنِےۖ
क्योंकि मुझे डर है कि वे मुझे झुठलाएँगे।”
إِنِّيَ أَخَافُ أَنْ يُّكَذِّبُونِۖ
उसने कहा: “हम तुम्हारी भुजा को तुम्हारे भाई से सुदृढ़ करेंगे, और तुम दोनों के लिए एक अधिकार ठहराएँगे, ताकि वे तुम तक न पहुँच सकें — हमारे संकेतों के कारण,
قَالَ سَنَشُدُّ عَضُدَكَ بِأَخِيكَ وَنَجْعَلُ لَكُمَا سُلْطَٰناٗ فَلَا يَصِلُونَ إِلَيْكُمَا بِـَٔايَٰتِنَاۖ
तुम दोनों, और तुम्हारे पीछे चलने वाले, विजेता होंगे।”
أَنتُمَا وَمَنِ اِ۪تَّبَعَكُمَا اَ۬لْغَٰلِبُونَۖ
जब मूसा उनके पास हमारे स्पष्ट संकेत लेकर आया, उन्होंने कहा: “यह तो केवल गढ़ा हुआ भ्रम है; हमने अपने पहले पूर्वजों में इसके बारे में कभी नहीं सुना।”
فَلَمَّا جَآءَهُم مُّوسَىٰ بِـَٔايَٰتِنَا بَيِّنَٰتٖ قَالُواْ مَا هَٰذَا إِلَّا سِحْرٞ مُّفْتَرىٗ وَمَا سَمِعْنَا بِهَٰذَا فِے ءَابَآئِنَا اَ۬لْأَوَّلِينَۖ
और मूसा ने कहा: “मेरा अभिभावक सबसे अच्छी तरह जानता है कि कौन उसकी ओर से मार्गदर्शन लेकर आता है, और किसके पास उस ठिकाने का परिणाम आएगा,
وَقَالَ مُوسَىٰ رَبِّيَ أَعْلَمُ بِمَن جَآءَ بِالْهُدَىٰ مِنْ عِندِهِۦ وَمَن تَكُونُ لَهُۥ عَٰقِبَةُ اُ۬لدَّارِۖ
क्योंकि अन्यायी सफल नहीं होते।”
إِنَّهُۥ لَا يُفْلِحُ اُ۬لظَّٰلِمُونَۖ
और फ़िरऔन ने कहा: “हे दरबार, मैं तुम्हारे लिए अपने सिवा कोई देवता नहीं जानता। तो मेरे लिए चिकनी मिट्टी पर आग जलाओ, हे हामान, और मेरे लिए एक अवलोकन-मंडप बनाओ, शायद मैं ऊपर चढ़कर मूसा के देवता को देख लूँ; मैं अवश्य अनुमान लगाता हूँ कि वह झूठों में से है।”
وَقَالَ فِرْعَوْنُ يَٰأَيُّهَا اَ۬لْمَلَأُ مَا عَلِمْتُ لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرِے فَأَوْقِدْ لِے يَٰهَامَٰنُ عَلَى اَ۬لطِّينِ فَاجْعَل لِّے صَرْحاٗ لَّعَلِّيَ أَطَّلِعُ إِلَىٰ إِلَٰهِ مُوسَىٰ وَإِنِّے لَأَظُنُّهُۥ مِنَ اَ۬لْكَٰذِبِينَۖ
और वह, और उसकी सेनाएँ, धरती पर बिना किसी हक़ के घमंड से फूल गए, और उन्होंने अनुमान लगाया कि वे कभी हमारी ओर लौटाए नहीं जाएँगे।
۞ وَاسْتَكْبَرَ هُوَ وَجُنُودُهُۥ فِے اِ۬لْأَرْضِ بِغَيْرِ اِ۬لْحَقِّ وَظَنُّواْ أَنَّهُمْ إِلَيْنَا لَا يَرْجِعُونَۖ
हमने उसे और उसकी सेनाओं को पकड़ा और उन्हें लहर में फेंक दिया —
فَأَخَذْنَٰهُ وَجُنُودَهُۥ فَنَبَذْنَٰهُمْ فِے اِ۬لْيَمِّۖ
तो नज़र डालो कि अन्यायियों का परिणाम कैसा रहा।
فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَٰقِبَةُ اُ۬لظَّٰلِمِينَۖ
और हमने उन्हें ऐसे मार्गदर्शक बनाया जो आग की ओर बुलाते हैं,
وَجَعَلْنَٰهُمْ أَئِمَّةٗ يَدْعُونَ إِلَى اَ۬لنَّارِۖ
और पेशी के दिन उनकी सहायता नहीं की जाएगी।
وَيَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِ لَا يُنصَرُونَۖ
और हमने इस इहलोक के जीवन में उनके पीछे एक धिक्कार लगा दिया,
وَأَتْبَعْنَٰهُمْ فِے هَٰذِهِ اِ۬لدُّنْيَا لَعْنَةٗۖ
और पेशी के दिन वे विकृत चेहरे वालों में होंगे।
وَيَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِ هُم مِّنَ اَ۬لْمَقْبُوحِينَۖ
हमने निश्चय ही मूसा को ग्रंथ दिया, पहली पीढ़ियों को नष्ट करने के बाद, लोगों के लिए आलोक के रूप में, मार्गदर्शन और दया, शायद वे स्मरण करें।
وَلَقَدْ ءَاتَيْنَا مُوسَى اَ۬لْكِتَٰبَ مِنۢ بَعْدِ مَا أَهْلَكْنَا اَ۬لْقُرُونَ اَ۬لْأُولَىٰ بَصَآئِرَ لِلنَّاسِ وَهُدىٗ وَرَحْمَةٗ لَّعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَۖ
तुम पश्चिमी बगल पर नहीं थे जब हमने मूसा के लिए आदेश तय किया,
وَمَا كُنتَ بِجَانِبِ اِ۬لْغَرْبِيِّ إِذْ قَضَيْنَا إِلَىٰ مُوسَى اَ۬لْأَمْرَۖ
तुम साक्षी बनने वालों में नहीं थे।
وَمَا كُنتَ مِنَ اَ۬لشَّٰهِدِينَۖ
परंतु हमने पीढ़ियाँ उत्पन्न कीं, और उनके लिए जीवन लंबा हो गया;
وَلَٰكِنَّا أَنشَأْنَا قُرُوناٗ فَتَطَاوَلَ عَلَيْهِمُ اُ۬لْعُمُرُۖ
और तुम मदयन वालों के बीच नहीं रहते थे, उन्हें हमारे संकेत सुनाते हुए,
وَمَا كُنتَ ثَاوِياٗ فِے أَهْلِ مَدْيَنَ تَتْلُواْ عَلَيْهِمْ ءَايَٰتِنَاۖ
परंतु हमने ही तुम्हें भेजा है।
وَلَٰكِنَّا كُنَّا مُرْسِلِينَۖ
तुम पर्वत की बगल में भी नहीं थे जब हमने उसे पुकारा;
وَمَا كُنتَ بِجَانِبِ اِ۬لطُّورِ إِذْ نَادَيْنَاۖ
परंतु यह तुम्हारे अभिभावक की ओर से दया है, ताकि तुम उस क़ौम को चेतावनी दो जिसके पास तुमसे पहले कोई चेतावनी देने वाला नहीं आया, इस आशा में कि वे स्मरण करेंगे।
وَلَٰكِن رَّحْمَةٗ مِّن رَّبِّكَ لِتُنذِرَ قَوْماٗ مَّا أَتَيٰهُم مِّن نَّذِيرٖ مِّن قَبْلِكَ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَۖ
और यदि, जब उन पर कोई विपत्ति आती है उसके कारण जो उनके हाथों ने आगे बढ़ाया, वे यह न कहते: “हमारे अभिभावक, आपने हमारी ओर कोई संदेशवाहक क्यों नहीं भेजा? हम आपके संकेतों का अनुसरण करते और विश्वास करने वालों में से होते” —
وَلَوْلَا أَن تُصِيبَهُم مُّصِيبَةُۢ بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيهِمْ فَيَقُولُواْ رَبَّنَا لَوْلَا أَرْسَلْتَ إِلَيْنَا رَسُولاٗ فَنَتَّبِعَ ءَايَٰتِكَ وَنَكُونَ مِنَ اَ۬لْمُؤْمِنِينَۖ
जब सत्य हमारी ओर से उनके पास आया, उन्होंने कहा: “उसे उसके समान क्यों नहीं दिया गया जो मूसा को दिया गया!”
فَلَمَّا جَآءَهُمُ اُ۬لْحَقُّ مِنْ عِندِنَا قَالُواْ لَوْلَا أُوتِيَ مِثْلَ مَا أُوتِيَ مُوسَىٰۖ
क्या उन्होंने उसे नहीं नकारा जो मूसा को पहले दिया गया था?
أَوَلَمْ يَكْفُرُواْ بِمَا أُوتِيَ مُوسَىٰ مِن قَبْلُۖ
उन्होंने कहा: “दो भ्रम जो एक-दूसरे का समर्थन करते हैं!”
قَالُواْ سَٰحِرَٰنِ تَظَٰهَرَاۖ
और उन्होंने कहा: “हम निश्चय ही इस सबको नकारते हैं।”
وَقَالُواْ إِنَّا بِكُلّٖ كَٰفِرُونَۖ
कहो: “तो ईश्वर के पास से कोई ग्रंथ लाओ जो इन दोनों से अधिक मार्गदर्शन देने वाला हो, मैं उसका अनुसरण करूँगा, यदि तुम सच्चे हो।”
قُلْ فَأْتُواْ بِكِتَٰبٖ مِّنْ عِندِ اِ۬للَّهِ هُوَ أَهْدَىٰ مِنْهُمَا أَتَّبِعْهُ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَۖ
यदि वे तुम्हें उत्तर नहीं देते, तो जान लो कि वे केवल अपनी भावनाओं का अनुसरण करते हैं —
فَإِن لَّمْ يَسْتَجِيبُواْ لَكَ فَاعْلَمْ أَنَّمَا يَتَّبِعُونَ أَهْوَآءَهُمْۖ
और उससे अधिक भटका हुआ कौन है जो ईश्वर के मार्गदर्शन के बिना अपनी भावना का अनुसरण करता है?
وَمَنْ أَضَلُّ مِمَّنِ اِ۪تَّبَعَ هَوَيٰهُ بِغَيْرِ هُدىٗ مِّنَ اَ۬للَّهِۖ
क्योंकि ईश्वर अन्यायी क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।
إِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يَهْدِے اِ۬لْقَوْمَ اَ۬لظَّٰلِمِينَۖ
हमने निश्चय ही उन तक कथन बिना विच्छेद के पहुँचाया है, शायद वे स्मरण करें।
۞ وَلَقَدْ وَصَّلْنَا لَهُمُ اُ۬لْقَوْلَ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَۖ
जिन्हें हमने इससे पहले ग्रंथ दिया वे उस पर विश्वास करते हैं;
اَ۬لذِينَ ءَاتَيْنَٰهُمُ اُ۬لْكِتَٰبَ مِن قَبْلِهِۦ هُم بِهِۦ يُؤْمِنُونَۖ
और जब वह उन्हें सुनाया जाता है, वे कहते हैं: “हम उस पर विश्वास करते हैं; यह निश्चय ही हमारे अभिभावक की ओर से आया सत्य है; हम उससे पहले ही ईश्वर के प्रति खरे थे।”
وَإِذَا يُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ قَالُواْ ءَامَنَّا بِهِۦ إِنَّهُ اُ۬لْحَقُّ مِن رَّبِّنَا إِنَّا كُنَّا مِن قَبْلِهِۦ مُسْلِمِينَۖ
इन्हें इनका पुरस्कार दो बार मिलेगा, इसलिए कि वे धैर्यवान रहे, बुराई को भलाई से टाला, और उसमें से ख़र्च किया जो हमने उन्हें जीविका में दिया।
أُوْلَٰٓئِكَ يُؤْتَوْنَ أَجْرَهُم مَّرَّتَيْنِ بِمَا صَبَرُواْ وَيَدْرَءُونَ بِالْحَسَنَةِ اِ۬لسَّيِّئَةَ وَمِمَّا رَزَقْنَٰهُمْ يُنفِقُونَۖ
और जब वे व्यर्थ बात सुनते हैं, उससे कतरा जाते हैं और कहते हैं: “हमारे लिए हमारे कर्म, तुम्हारे लिए तुम्हारे; तुम पर शांति हो, हम अज्ञानियों को नहीं खोजते।”
وَإِذَا سَمِعُواْ اُ۬للَّغْوَ أَعْرَضُواْ عَنْهُ وَقَالُواْ لَنَا أَعْمَٰلُنَا وَلَكُمْ أَعْمَٰلُكُمْ سَلَٰمٌ عَلَيْكُمْ لَا نَبْتَغِے اِ۬لْجَٰهِلِينَۖ
तुम निश्चय ही उसे मार्ग नहीं दिखाते जिससे तुम प्रेम करते हो;
إِنَّكَ لَا تَهْدِے مَنْ أَحْبَبْتَۖ
पर ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे मार्ग दिखाता है,
وَلَٰكِنَّ اَ۬للَّهَ يَهْدِے مَنْ يَّشَآءُۖ
और वह सबसे अच्छी तरह जानता है उन्हें जो मार्गदर्शन पाते हैं।
وَهْوَ أَعْلَمُ بِالْمُهْتَدِينَۖ
और उन्होंने कहा: “यदि हम तुम्हारे साथ मार्गदर्शन का अनुसरण करें, तो हम अपनी धरती से उखाड़ लिए जाएँगे।”
وَقَالُواْ إِن نَّتَّبِعِ اِ۬لْهُدَىٰ مَعَكَ نُتَخَطَّفْ مِنْ أَرْضِنَاۖ
क्या हमने उन्हें एक अलंघनीय और सुरक्षित स्थान में दृढ़ता से स्थापित नहीं किया, जहाँ हर चीज़ के फल खिंचे चले आते हैं, स्वयं हमारी ओर से जीविका के रूप में?
أَوَلَمْ نُمَكِّن لَّهُمْ حَرَماً ءَامِناٗ تُجْبَىٰ إِلَيْهِ ثَمَرَٰتُ كُلِّ شَےْءٖ رِّزْقاٗ مِّن لَّدُنَّاۖ
परंतु उनमें से अधिकतर नहीं जानते।
وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَۖ
हमने कितनी बस्तियाँ नष्ट कीं, जो अपने ही अस्तित्व के नशे में थीं!
وَكَمْ أَهْلَكْنَا مِن قَرْيَةِۢ بَطِرَتْ مَعِيشَتَهَاۖ
ये हैं उनके आवास, जो उनके बाद फिर आबाद नहीं हुए, बहुत थोड़े के सिवा — और उत्तराधिकारी हम ही थे।
فَتِلْكَ مَسَٰكِنُهُمْ لَمْ تُسْكَن مِّنۢ بَعْدِهِمْ إِلَّا قَلِيلاٗ وَكُنَّا نَحْنُ اُ۬لْوَٰرِثِينَۖ
तुम्हारा अभिभावक बस्तियों को कभी नष्ट नहीं करता, जब तक उनके महानगर में एक संदेशवाहक न उठा ले जो उन्हें हमारे संकेत सुनाए;
وَمَا كَانَ رَبُّكَ مُهْلِكَ اَ۬لْقُرَىٰ حَتَّىٰ يَبْعَثَ فِے أُمِّهَا رَسُولاٗ يَتْلُواْ عَلَيْهِمْ ءَايَٰتِنَاۖ
हमने बस्तियों को कभी नष्ट नहीं किया, केवल तब जब वहाँ के निवासी अन्यायी थे।
وَمَا كُنَّا مُهْلِكِے اِ۬لْقُرَىٰ إِلَّا وَأَهْلُهَا ظَٰلِمُونَۖ
जो कुछ तुम्हें दिया गया है वह केवल इहलोक के जीवन का उपभोग और उसकी शोभा है;
وَمَا أُوتِيتُم مِّن شَےْءٖ فَمَتَٰعُ اُ۬لْحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنْيَا وَزِينَتُهَاۖ
जो ईश्वर के पास है वह बेहतर और अधिक स्थायी है।
وَمَا عِندَ اَ۬للَّهِ خَيْرٞ وَأَبْقَىٰۖ
तो क्या तुम बुद्धि से काम नहीं लेते?
أَفَلَا تَعْقِلُونَۖ
क्या वह जिससे हमने एक सुंदर वादा किया और जो उसे पाएगा, उसके समान है जिसे हमने इहलोक के जीवन का उपभोग कराया, और जो फिर पेशी के दिन लाए गए जनों में से होगा?
أَفَمَنْ وَّعَدْنَٰهُ وَعْداً حَسَناٗ فَهْوَ لَٰقِيهِ كَمَن مَّتَّعْنَٰهُ مَتَٰعَ اَ۬لْحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنْيَا ثُمَّ هْوَ يَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِ مِنَ اَ۬لْمُحْضَرِينَۖ
और जिस दिन वह उन्हें पुकारेगा और कहेगा: “मेरे साझीदार कहाँ हैं, जिनका तुम दावा करते थे?”
وَيَوْمَ يُنَادِيهِمْ فَيَقُولُ أَيْنَ شُرَكَآءِيَ اَ۬لذِينَ كُنتُمْ تَزْعُمُونَۖ
जिन पर कथन सिद्ध हो चुका होगा वे कहेंगे: “हमारे अभिभावक, ये हैं वे जिन्हें हमने दिशाहीन किया; हमने उन्हें दिशाहीन किया जैसे हम स्वयं दिशाहीन हुए;
۞ قَالَ اَ۬لذِينَ حَقَّ عَلَيْهِمُ اُ۬لْقَوْلُ رَبَّنَا هَٰؤُلَآءِ اِ۬لذِينَ أَغْوَيْنَا أَغْوَيْنَٰهُمْ كَمَا غَوَيْنَاۖ
हम आपके सामने स्वयं को बरी घोषित करते हैं;
تَبَرَّأْنَا إِلَيْكَۖ
वे हमारी आज्ञा का पालन नहीं करते थे।”
مَا كَانُواْ إِيَّانَا يَعْبُدُونَۖ
और कहा जाएगा: “अपने साझीदारों को बुलाओ।” वे उन्हें बुलाएँगे, परंतु वे उन्हें उत्तर नहीं देंगे; वे दंड देखेंगे — यदि वे केवल मार्गदर्शन पा लेते...
وَقِيلَ اَ۟دْعُواْ شُرَكَآءَكُمْ فَدَعَوْهُمْ فَلَمْ يَسْتَجِيبُواْ لَهُمْ وَرَأَوُاْ اُ۬لْعَذَابَ لَوْ أَنَّهُمْ كَانُواْ يَهْتَدُونَۖ
और जिस दिन वह उन्हें पुकारेगा और कहेगा: “तुमने भेजे गए जनों को क्या उत्तर दिया?”
وَيَوْمَ يُنَادِيهِمْ فَيَقُولُ مَاذَا أَجَبْتُمُ اُ۬لْمُرْسَلِينَۖ
उस दिन सूचनाएँ उनके लिए धुँधली हो जाएँगी, और वे आपस में नहीं पूछेंगे।
فَعَمِيَتْ عَلَيْهِمُ اُ۬لْأَنۢبَآءُ يَوْمَئِذٖ فَهُمْ لَا يَتَسَآءَلُونَۖ
जहाँ तक उसकी बात है जिसने पश्चात्ताप किया, विश्वास किया और एक भला कर्म किया, संभव है कि वह सफल होने वालों में से हो।
فَأَمَّا مَن تَابَ وَءَامَنَ وَعَمِلَ صَٰلِحاٗ فَعَسَىٰ أَنْ يَّكُونَ مِنَ اَ۬لْمُفْلِحِينَۖ
तुम्हारा अभिभावक जो उसकी मर्ज़ी हो, रचता है और चुनाव करता है;
وَرَبُّكَ يَخْلُقُ مَا يَشَآءُ وَيَخْتَارُۖ
चुनाव उनके हाथ में नहीं है।
مَا كَانَ لَهُمُ اُ۬لْخِيَرَةُۖ
ईश्वर की महिमा हो, वह उससे बहुत ऊपर है जिसे वे उसका साझी ठहराते हैं।
سُبْحَٰنَ اَ۬للَّهِ وَتَعَٰلَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَۖ
तुम्हारा अभिभावक जानता है जो उनके सीने छिपाए रखते हैं और जो वे उजागर करते हैं।
وَرَبُّكَ يَعْلَمُ مَا تُكِنُّ صُدُورُهُمْ وَمَا يُعْلِنُونَۖ
वही ईश्वर है; उसके सिवा कोई देवता नहीं;
وَهْوَ اَ۬للَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ
उसी के लिए प्रशंसा है, पहली में भी और अंतिम में भी;
لَهُ اُ۬لْحَمْدُ فِے اِ۬لْأُولَىٰ وَالْأٓخِرَةِۖ
और उसी का निर्णय है,
وَلَهُ اُ۬لْحُكْمُۖ
और उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।
وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَۖ
कहो: “क्या तुम देखते हो: यदि ईश्वर तुम्हारे लिए पेशी के दिन तक निरंतर रात कर दे, तो ईश्वर से भिन्न कौन-सा देवता तुम्हारे पास उजाला ले आएगा?
قُلْ أَرَٰ۬يْتُمْ إِن جَعَلَ اَ۬للَّهُ عَلَيْكُمُ اُ۬ليْلَ سَرْمَداً إِلَىٰ يَوْمِ اِ۬لْقِيَٰمَةِ مَنْ إِلَٰهٌ غَيْرُ اُ۬للَّهِ يَأْتِيكُم بِضِيَآءٍۖ
तो क्या तुम सुनते नहीं?”
أَفَلَا تَسْمَعُونَۖ
कहो: “क्या तुम देखते हो: यदि ईश्वर तुम्हारे लिए पेशी के दिन तक निरंतर दिन कर दे, तो ईश्वर से भिन्न कौन-सा देवता तुम्हारे पास रात ले आएगा जिसमें तुम विश्राम करो?
قُلْ أَرَٰ۬يْتُمْ إِن جَعَلَ اَ۬للَّهُ عَلَيْكُمُ اُ۬لنَّهَارَ سَرْمَداً إِلَىٰ يَوْمِ اِ۬لْقِيَٰمَةِ مَنْ إِلَٰهٌ غَيْرُ اُ۬للَّهِ يَأْتِيكُم بِلَيْلٖ تَسْكُنُونَ فِيهِۖ
तो क्या तुम स्पष्ट नहीं देखते?”
أَفَلَا تُبْصِرُونَۖ
और उसी ने अपनी दया से तुम्हारे लिए रात और दिन बनाए, ताकि तुम विश्राम करो और उसके अनुग्रह में से खोजो, और शायद तुम कृतज्ञ हो जाओ।
وَمِن رَّحْمَتِهِۦ جَعَلَ لَكُمُ اُ۬ليْلَ وَالنَّهَارَ لِتَسْكُنُواْ فِيهِ وَلِتَبْتَغُواْ مِن فَضْلِهِۦ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَۖ
और जिस दिन वह उन्हें पुकारेगा और कहेगा: “मेरे साझीदार कहाँ हैं, जिनका तुम दावा करते थे?”
وَيَوْمَ يُنَادِيهِمْ فَيَقُولُ أَيْنَ شُرَكَآءِيَ اَ۬لذِينَ كُنتُمْ تَزْعُمُونَۖ
और हम हर समुदाय से एक साक्षी खींच निकालेंगे, और कहेंगे: “अपना प्रमाण लाओ।” तब वे जान लेंगे कि सत्य ईश्वर का है, और जो वे गढ़ते थे वह भटककर उनसे दूर हो जाएगा।
وَنَزَعْنَا مِن كُلِّ أُمَّةٖ شَهِيداٗ فَقُلْنَا هَاتُواْ بُرْهَٰنَكُمْ فَعَلِمُواْ أَنَّ اَ۬لْحَقَّ لِلهِ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُواْ يَفْتَرُونَۖ
क़ारून मूसा की क़ौम से था; उसने उन पर ज़्यादतियाँ कीं —
۞ إِنَّ قَارُونَ كَانَ مِن قَوْمِ مُوسَىٰ فَبَغَىٰ عَلَيْهِمْۖ
और हमने उसे ख़ज़ानों में से इतना कुछ दिया था कि उनकी केवल चाबियाँ ही बल रखने वाले पुरुषों की एक पूरी टोली के लिए अवश्य भारी पड़ती थीं।
وَءَاتَيْنَٰهُ مِنَ اَ۬لْكُنُوزِ مَا إِنَّ مَفَاتِحَهُۥ لَتَنُوٓأُ بِالْعُصْبَةِ أُوْلِے اِ۬لْقُوَّةِۖ
तब उसकी क़ौम ने उससे कहा: “इतराओ मत, क्योंकि ईश्वर इतराने वालों से प्रेम नहीं करता;
إِذْ قَالَ لَهُۥ قَوْمُهُۥ لَا تَفْرَحْ إِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يُحِبُّ اُ۬لْفَرِحِينَۖ
बल्कि जो ईश्वर ने तुम्हें दिया है उसमें अंतिम ठिकाना खोजो,
وَابْتَغِ فِيمَا ءَاتَيٰكَ اَ۬للَّهُ اُ۬لدَّارَ اَ۬لْأٓخِرَةَۖ
पर इहलोक का अपना हिस्सा भूलो भी मत;
وَلَا تَنسَ نَصِيبَكَ مِنَ اَ۬لدُّنْيَاۖ
और भलाई करो जैसे ईश्वर ने तुम्हारे साथ भलाई की,
وَأَحْسِن كَمَا أَحْسَنَ اَ۬للَّهُ إِلَيْكَۖ
और धरती पर बिगाड़ मत खोजो;
وَلَا تَبْغِ اِ۬لْفَسَادَ فِے اِ۬لْأَرْضِۖ
क्योंकि ईश्वर बिगाड़ने वालों से प्रेम नहीं करता।”
إِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يُحِبُّ اُ۬لْمُفْسِدِينَۖ
उसने कहा: “यह मुझे केवल उस ज्ञान के आधार पर दिया गया है जो मेरा अपना है।”
قَالَ إِنَّمَا أُوتِيتُهُۥ عَلَىٰ عِلْمٍ عِندِيَۖ
क्या वह नहीं जानता था कि ईश्वर ने उससे पहले ऐसी पीढ़ियाँ नष्ट कर दी थीं जो बल में उससे बढ़कर थीं और अधिक जमा करती थीं?
أَوَلَمْ يَعْلَمْ أَنَّ اَ۬للَّهَ قَدْ أَهْلَكَ مِن قَبْلِهِۦ مِنَ اَ۬لْقُرُونِ مَنْ هُوَ أَشَدُّ مِنْهُ قُوَّةٗ وَأَكْثَرُ جَمْعاٗۖ
और बहिष्कृतों से उनके दोषों के बारे में पूछा नहीं जाएगा।
وَلَا يُسْـَٔلُ عَن ذُنُوبِهِمُ اُ۬لْمُجْرِمُونَۖ
वह अपनी क़ौम के सामने अपनी पूरी शोभा में निकला।
فَخَرَجَ عَلَىٰ قَوْمِهِۦ فِے زِينَتِهِۦۖ
जो इहलोक का जीवन चाहते हैं, उन्होंने कहा: “काश हमारे पास भी वैसा होता जैसा क़ारून को दिया गया! उसके पास अवश्य एक विशाल हिस्सा है।”
قَالَ اَ۬لذِينَ يُرِيدُونَ اَ۬لْحَيَوٰةَ اَ۬لدُّنْيَا يَٰلَيْتَ لَنَا مِثْلَ مَا أُوتِيَ قَارُونُ إِنَّهُۥ لَذُو حَظٍّ عَظِيمٖۖ
परंतु जिन्हें ज्ञान दिया गया था उन्होंने कहा: “हाय तुम पर! ईश्वर का प्रतिदान उसके लिए बेहतर है जो विश्वास करता है और भला कर्म करता है;
وَقَالَ اَ۬لذِينَ أُوتُواْ اُ۬لْعِلْمَ وَيْلَكُمْ ثَوَابُ اُ۬للَّهِ خَيْرٞ لِّمَنْ ءَامَنَ وَعَمِلَ صَٰلِحاٗۖ
और इसे केवल धैर्य रखने वाले ही पाते हैं।”
وَلَا يُلَقَّيٰهَا إِلَّا اَ۬لصَّٰبِرُونَۖ
हमने धरती से उसे निगलवा दिया, उसे और उसके ठिकाने को;
فَخَسَفْنَا بِهِۦ وَبِدَارِهِ اِ۬لْأَرْضَۖ
उसके पास कोई टुकड़ी नहीं थी जो ईश्वर के अतिरिक्त उसकी सहायता करती,
فَمَا كَانَ لَهُۥ مِن فِئَةٖ يَنصُرُونَهُۥ مِن دُونِ اِ۬للَّهِۖ
और वह स्वयं की सहायता करने वालों में से नहीं था।
وَمَا كَانَ مِنَ اَ۬لْمُنتَصِرِينَۖ
और जिन्होंने कल उसकी जगह की इच्छा की थी वे कहने लगे: “आह! तो ईश्वर अपने आज्ञाकारियों में से जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसके लिए जीविका फैला देता है, और नापकर देता है!
وَأَصْبَحَ اَ۬لذِينَ تَمَنَّوْاْ مَكَانَهُۥ بِالْأَمْسِ يَقُولُونَ وَيْكَأَنَّ اَ۬للَّهَ يَبْسُطُ اُ۬لرِّزْقَ لِمَنْ يَّشَآءُ مِنْ عِبَادِهِۦ وَيَقْدِرُۖ
यदि ईश्वर ने हम पर कृपा न की होती, तो वह हमें भी निगलवा देता।
لَوْلَا أَن مَّنَّ اَ۬للَّهُ عَلَيْنَا لَخُسِفَ بِنَاۖ
आह! तो नकारने वाले कभी सफल नहीं होते।”
وَيْكَأَنَّهُۥ لَا يُفْلِحُ اُ۬لْكَٰفِرُونَۖ
वह अंतिम ठिकाना हम उनके लिए रखते हैं जो धरती पर न दूसरों से ऊँचा उठना चाहते हैं, न बिगाड़ चाहते हैं;
۞ تِلْكَ اَ۬لدَّارُ اُ۬لْأٓخِرَةُ نَجْعَلُهَا لِلذِينَ لَا يُرِيدُونَ عُلُوّاٗ فِے اِ۬لْأَرْضِ وَلَا فَسَاداٗۖ
और परिणाम सावधानी बरतने वालों के हिस्से आता है।
وَالْعَٰقِبَةُ لِلْمُتَّقِينَۖ
जो कोई भलाई लेकर आता है उसे उससे बेहतर मिलेगा;
مَن جَآءَ بِالْحَسَنَةِ فَلَهُۥ خَيْرٞ مِّنْهَاۖ
और जो कोई बुराई लेकर आता है — जिन्होंने बुराई की है उन्हें उसी के अनुसार प्रतिफल मिलेगा जो वे करते थे।
وَمَن جَآءَ بِالسَّيِّئَةِ فَلَا يُجْزَى اَ۬لذِينَ عَمِلُواْ اُ۬لسَّيِّـَٔاتِ إِلَّا مَا كَانُواْ يَعْمَلُونَۖ
जिसने तुम पर पाठ को अनिवार्य किया है वह तुम्हें अवश्य पहले से ठहरे वादे के समय की ओर वापस ले जाएगा।
إِنَّ اَ۬لذِے فَرَضَ عَلَيْكَ اَ۬لْقُرْءَانَ لَرَآدُّكَ إِلَىٰ مَعَادٖۖ
कहो: “मेरा अभिभावक सबसे अच्छी तरह जानता है कि कौन मार्गदर्शन लेकर आता है और कौन स्पष्ट भटकाव में है।”
قُل رَّبِّيَ أَعْلَمُ مَن جَآءَ بِالْهُدَىٰ وَمَنْ هُوَ فِے ضَلَٰلٖ مُّبِينٖۖ
तुम आशा नहीं रखते थे कि ग्रंथ तुम्हारी ओर पहुँचाया जाएगा; यह केवल तुम्हारे अभिभावक की दया से है —
وَمَا كُنتَ تَرْجُواْ أَنْ يُّلْقَىٰ إِلَيْكَ اَ۬لْكِتَٰبُ إِلَّا رَحْمَةٗ مِّن رَّبِّكَۖ
इसलिए कभी नकारने वालों का समर्थक न बनना।
فَلَا تَكُونَنَّ ظَهِيراٗ لِّلْكَٰفِرِينَۖ
और वे तुम्हें ईश्वर के संकेतों की राह से न रोकें, इसके बाद कि वे तुम पर उतारे गए;
وَلَا يَصُدُّنَّكَ عَنْ ءَايَٰتِ اِ۬للَّهِ بَعْدَ إِذْ أُنزِلَتْ إِلَيْكَۖ
और अपने अभिभावक की ओर बुलाओ,
وَادْعُ إِلَىٰ رَبِّكَۖ
और कभी साझी ठहराने वालों में से न होना।
وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ اَ۬لْمُشْرِكِينَۖ
और ईश्वर के साथ किसी और देवता को मत पुकारो;
وَلَا تَدْعُ مَعَ اَ۬للَّهِ إِلَٰهاً ءَاخَرَۖ
उसके सिवा कोई देवता नहीं।
لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ
हर चीज़ नष्ट हो जाती है, उसकी दिशा के सिवा।
كُلُّ شَےْءٍ هَالِكٌ إِلَّا وَجْهَهُۥۖ
उसी का निर्णय है,
لَهُ اُ۬لْحُكْمُۖ
और उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।
وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَۖ