Al-Qamar القمر
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The return judged far-fetched, the sworn Day, then the community (50, then 51-67)
Read the section from its beginning: sura 50
What was shown before: The return judged far-fetched is set out in 50. 50
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। वह घड़ी निकट आ गई, और चंद्रमा फट गया।
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ ٱقۡتَرَبَتِ ٱلسَّاعَةُ وَٱنشَقَّ ٱلۡقَمَرُ
और यदि वे कोई संकेत देखते हैं, तो उससे कतराते हैं और कहते हैं: “एक निरंतर भ्रम।”
وَإِن يَرَوۡاْ ءَايَةٗ يُعۡرِضُواْ وَيَقُولُواْ سِحۡرٞ مُّسۡتَمِرّٞ
और उन्होंने झुठलाया और अपनी भावनाओं का अनुसरण किया।
وَكَذَّبُواْ وَٱتَّبَعُواْ أَهۡوَآءَهُمُۥۚ
जबकि हर मामला अपना स्थिर स्थान पाता है।
وَكُلُّ أَمۡرٖ مُّسۡتَقِرّٞ
उनके पास सूचनाओं में से वह आ चुका है जो उन्हें रोकने के लिए पर्याप्त है,
وَلَقَدۡ جَآءَهُمُۥ مِنَ ٱلۡأَنۢبَآءِ مَا فِيهِۦ مُزۡدَجَرٌ
परिपूर्ण प्रज्ञा —
حِكۡمَةُۢ بَٰلِغَةٞۖ
पर चेतावनियाँ किस काम की?
فَمَا تُغۡنِ ٱلنُّذُرُ
तो उनसे पीठ फेर लो।
فَتَوَلَّ عَنۡهُمُۥۘ
जिस दिन बुलाने वाला एक अनसुनी चीज़ की ओर बुलाएगा, विनीत दृष्टियों के साथ वे क़ब्रों से निकलेंगे, फैली हुई टिड्डियों की तरह, बुलाने वाले की ओर दौड़ते हुए,
يَوۡمَ يَدۡعُ ٱلدَّاعِ إِلَىٰ شَيۡءٖ نُّكۡرٍ خُشَّعًا أَبۡصَٰرُهُمُۥ يَخۡرُجُونَ مِنَ ٱلۡأَجۡدَاثِ كَأَنَّهُمُۥ جَرَادٞ مُّنتَشِرٞ مُّهۡطِعِينَ إِلَى ٱلدَّاعِۦۖ
नकारने वाले कहेंगे: “यह एक कठिन दिन है।”
يَقُولُ ٱلۡكَٰفِرُونَ هَٰذَا يَوۡمٌ عَسِرٞ
उनसे पहले नूह की क़ौम ने झुठलाया: उन्होंने हमारे आज्ञाकारी को झुठलाया और कहा: “वह विक्षिप्त है”, और उसे उग्रता से डाँटा गया।
۞ كَذَّبَتۡ قَبۡلَهُمُۥ قَوۡمُ نُوحٖ فَكَذَّبُواْ عَبۡدَنَا وَقَالُواْ مَجۡنُونٞ وَٱزۡدُجِرَ
तब उसने अपने अभिभावक को पुकारा: “मैं पराजित हूँ, मेरी सहायता कीजिए।”
فَدَعَا رَبَّهُۥ أَنِّي مَغۡلُوبٞ فَٱنتَصِرۡ
तब हमने आकाश के द्वार मूसलाधार पानी से खोल दिए,
فَفَتَحۡنَا أَبۡوَٰبَ ٱلسَّمَآءِ بِمَآءٖ مُّنۡهَمِرٖ
और हमने धरती को सोतों में फोड़ दिया, तो पानी पहले से निर्धारित आदेश के अनुसार मिल गया।
وَفَجَّرۡنَا ٱلۡأَرۡضَ عِيُونٗا فَٱلۡتَقَى ٱلۡمَآءُ عَلَىٰ أَمۡرٖ قَدۡ قُدِرَ
और हमने उसे तख़्तों और जोड़ने वाली कीलों से बनी एक नाव पर सवार किया।
وَحَمَلۡنَٰهُۥ عَلَىٰ ذَاتِ أَلۡوَٰحٖ وَدُسُرٖ
वह हमारी आँखों के सामने चलती रही, उसके प्रतिफल के रूप में जिसे नकारा गया था।
تَجۡرِي بِأَعۡيُنِنَا جَزَآءٗ لِّمَن كَانَ كُفِرَ
हमने उसे निश्चय ही एक संकेत के रूप में छोड़ा: तो क्या कोई है जो उससे स्मरण ग्रहण करे?
وَلَقَد تَّرَكۡنَٰهَا ءَايَةٗ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ
तो मेरा दंड और मेरी चेतावनियाँ कैसी थीं?
فَكَيۡفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ
हमने निश्चय ही पाठ को स्मरण के लिए सरल कर दिया: तो क्या कोई है जो उससे स्मरण ग्रहण करे?
وَلَقَدۡ يَسَّرۡنَا ٱلۡقُرَانَ لِلذِّكۡرِ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ
आद ने झुठलाया। तो मेरा दंड और मेरी चेतावनियाँ कैसी थीं?
كَذَّبَتۡ عَادٞ فَكَيۡفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ
हमने उन पर एक हिमशीतल आँधी भेजी, एक निरंतर अनिष्ट के दिन में, जो लोगों को उखाड़ फेंक रही थी, मानो वे जड़ से उखड़े खजूर के तने हों।
إِنَّا أَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمُۥ رِيحٗا صَرۡصَرٗا فِي يَوۡمِ نَحۡسٖ مُّسۡتَمِرّٖ تَنزِعُ ٱلنَّاسَ كَأَنَّهُمُۥ أَعۡجَازُ نَخۡلٖ مُّنقَعِرٖ
तो मेरा दंड और मेरी चेतावनियाँ कैसी थीं?
فَكَيۡفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ
हमने निश्चय ही पाठ को स्मरण के लिए सरल कर दिया: तो क्या कोई है जो उससे स्मरण ग्रहण करे?
وَلَقَدۡ يَسَّرۡنَا ٱلۡقُرَانَ لِلذِّكۡرِ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ
समूद ने चेतावनियों को झुठलाया।
كَذَّبَتۡ ثَمُودُ بِٱلنُّذُرِ
उन्होंने कहा: “क्या हम अपने ही बीच के एक अकेले साधारण मानव के पीछे चलें? तब तो हम अवश्य भटकाव और उन्माद में होंगे। क्या हमारे बीच से उसी पर स्मरण डाला गया है? बल्कि वह एक दंभी झूठा है।”
فَقَالُواْ أَبَشَرٗا مِّنَّا وَٰحِدٗا نَّتَّبِعُهُۥ إِنَّا إِذٗا لَّفِي ضَلَٰلٖ وَسُعُرٍ أَ۟لۡقِيَ ٱلذِّكۡرُ عَلَيۡهِۦ مِنۢ بَيۡنِنَا بَلۡ هُوَ كَذَّابٌ أَشِرٞ
वे कल जान लेंगे कि दंभी झूठा कौन है।
سَيَعۡلَمُونَ غَدٗا مَّنِ ٱلۡكَذَّابُ ٱلۡأَشِرُ
हम ऊँटनी को उनके लिए परीक्षा के रूप में भेज रहे हैं: तो उनकी ताक में रहो, और दृढ़ रहो।
إِنَّا مُرۡسِلُواْ ٱلنَّاقَةِ فِتۡنَةٗ لَّهُمُۥ فَٱرۡتَقِبۡهُمُۥ وَٱصۡطَبِرۡ
और उन्हें सूचित करो कि पानी उनके बीच बाँटा गया है,
وَنَبِّئۡهُمُۥ أَنَّ ٱلۡمَآءَ قِسۡمَةُۢ بَيۡنَهُمُۥۖ
पीने की हर बारी पर उपस्थित हुआ जाता है।
كُلُّ شِرۡبٖ مُّحۡتَضَرٞ
तब उन्होंने अपने साथी को आवाज़ दी, तो उसने उसे पकड़ा और उसका अंग-भंग कर दिया।
فَنَادَوۡاْ صَاحِبَهُمُۥ فَتَعَاطَىٰ فَعَقَرَ
तो मेरा दंड और मेरी चेतावनियाँ कैसी थीं?
فَكَيۡفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ
हमने उन पर एक ही चीख़ भेजी, और वे बाड़ बनाने वाले के सूखे डंठलों जैसे हो गए।
إِنَّا أَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمُۥ صَيۡحَةٗ وَٰحِدَةٗ فَكَانُواْ كَهَشِيمِ ٱلۡمُحۡتَظِرِ
हमने निश्चय ही पाठ को स्मरण के लिए सरल कर दिया: तो क्या कोई है जो उससे स्मरण ग्रहण करे?
وَلَقَدۡ يَسَّرۡنَا ٱلۡقُرَانَ لِلذِّكۡرِ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ
लूत की क़ौम ने चेतावनियों को झुठलाया।
كَذَّبَتۡ قَوۡمُ لُوطِۭ بِٱلنُّذُرِ
हमने उन पर कंकड़ों की बौछार भेजी, लूत के कुल को छोड़कर, जिन्हें हमने रात के अंतिम पहरों में उबारा,
إِنَّا أَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمُۥ حَاصِبًا إِلَّا ءَالَ لُوطٖۖ نَّجَّيۡنَٰهُمُۥ بِسَحَرٖ
हमारी ओर से एक उपकार के रूप में।
نِّعۡمَةٗ مِّنۡ عِندِنَاۚ
इसी प्रकार हम उसे प्रतिफल देते हैं जो कृतज्ञ है।
كَذَٰلِكَ نَجۡزِي مَن شَكَرَ
उसने उन्हें हमारी जकड़ की निश्चय ही चेतावनी दी थी, पर वे चेतावनियों पर वाद-प्रतिवाद में पड़ गए।
وَلَقَدۡ أَنذَرَهُمُۥ بَطۡشَتَنَا فَتَمَارَوۡاْ بِٱلنُّذُرِ
उन्होंने उसे उसके अतिथियों से फेरने की निश्चय ही चेष्टा की; तब हमने उनकी आँखें मिटा दीं: “तो मेरा दंड और मेरी चेतावनियाँ चखो।”
وَلَقَدۡ رَٰوَدُوهُۥ عَن ضَيۡفِهِۦ فَطَمَسۡنَا أَعۡيُنَهُمُۥ فَذُوقُواْ عَذَابِي وَنُذُرِ
भोर में एक स्थिर दंड ने निश्चय ही उन्हें अचानक आ घेरा,
وَلَقَدۡ صَبَّحَهُمُۥ بُكۡرَةً عَذَابٞ مُّسۡتَقِرّٞ
“तो मेरा दंड और मेरी चेतावनियाँ चखो।”
فَذُوقُواْ عَذَابِي وَنُذُرِ
हमने निश्चय ही पाठ को स्मरण के लिए सरल कर दिया: तो क्या कोई है जो उससे स्मरण ग्रहण करे?
وَلَقَدۡ يَسَّرۡنَا ٱلۡقُرَانَ لِلذِّكۡرِ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ
चेतावनियाँ निश्चय ही फ़िरऔन के कुल के पास आईं।
وَلَقَدۡ جَآءَ ا۟لَ فِرۡعَوۡنَ ٱلنُّذُرُ
उन्होंने हमारे सभी संकेतों को झुठलाया; तब हमने उन्हें एक सर्वशक्तिमान, सामर्थ्यवान की पकड़ से पकड़ा।
كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا كُلِّهَا فَأَخَذۡنَٰهُمُۥ أَخۡذَ عَزِيزٖ مُّقۡتَدِرٍ
क्या तुम में से नकारने वाले उनसे बेहतर हैं, या तुम्हारे पास प्रपत्रों में कोई बरी-पत्र है?
أَكُفَّارُكُمُۥ خَيۡرٞ مِّنۡ أُوْلَٰٓئِكُمُۥ أَمۡ لَكُمُۥ بَرَآءَةٞ فِي ٱلزُّبُرِ
या फिर वे कहते हैं: “हम एक संगठित जत्था हैं, जो अपनी सहायता कर लेता है”?
أَمۡ يَقُولُونَ نَحۡنُ جَمِيعٞ مُّنتَصِرٞ
यह जत्था पराजित होगा, और वे पीठ फेर लेंगे।
سَيُهۡزَمُ ٱلۡجَمۡعُ وَيُوَلُّونَ ٱلدُّبُرَ
बल्कि वह घड़ी ही उनके वादे का समय है,
بَلِ ٱلسَّاعَةُ مَوۡعِدُهُمُۥ
और वह घड़ी अधिक विपत्तिपूर्ण और अधिक कड़वी है।
وَٱلسَّاعَةُ أَدۡهَىٰ وَأَمَرُّ
बहिष्कृत निश्चय ही भटकाव और उन्माद में हैं, जिस दिन वे आग में अपने चेहरों के बल घसीटे जाएँगे: “सक़र का स्पर्श चखो।”
إِنَّ ٱلۡمُجۡرِمِينَ فِي ضَلَٰلٖ وَسُعُرٖ يَوۡمَ يُسۡحَبُونَ فِي ٱلنَّارِ عَلَىٰ وُجُوهِهِمُۥ ذُوقُواْ مَسَّ سَقَرَ
हमने हर चीज़ एक निर्धारित माप के अनुसार रची है।
إِنَّا كُلَّ شَيۡءٍ خَلَقۡنَٰهُۥ بِقَدَرٖ
और हमारा आदेश बस एक ही है, पलक झपकने जैसा।
وَمَا أَمۡرُنَا إِلَّا وَٰحِدَةٞ كَلَمۡحِۭ بِٱلۡبَصَرِ
हमने निश्चय ही तुम जैसों को नष्ट किया है: तो क्या कोई है जो उससे स्मरण ग्रहण करे?
وَلَقَدۡ أَهۡلَكۡنَا أَشۡيَاعَكُمُۥ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ
और जो कुछ उन्होंने किया वह प्रपत्रों में है।
وَكُلُّ شَيۡءٖ فَعَلُوهُۥ فِي ٱلزُّبُرِ
और हर छोटी या बड़ी चीज़ लिखी हुई है।
وَكُلُّ صَغِيرٖ وَكَبِيرٖ مُّسۡتَطَرٌ
सावधानी बरतने वाले निश्चय ही उद्यानों और एक नदी में हैं, सच्चाई के आसन में, एक सामर्थ्यवान अधिराज के पास।
إِنَّ ٱلۡمُتَّقِينَ فِي جَنَّٰتٖ وَنَهَرٖ فِي مَقۡعَدِ صِدۡقٍ عِندَ مَلِيكٖ مُّقۡتَدِرِۭ