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Until Certainty Comes

अध्याय 15 · 99 पद

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।

15:1

अलिफ़. लाम. रा.

الٓر

15:1

ये ग्रंथ के संकेत हैं, और एक स्पष्ट पाठ के।

تِلْكَ ءَايَٰتُ ٱلْكِتَٰبِ وَقُرْءَانٍۢ مُّبِينٍۢ

15:2

कितनी ही बार नकारने वाले चाहेंगे कि काश वे ईश्वर के प्रति खरे रहे होते।

رُّبَمَا يَوَدُّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَوْ كَانُوا۟ مُسْلِمِينَ

15:3

उन्हें छोड़ दो: वे खाएँ, उपभोग करें, और आशा उन्हें भुलावे में रखे:

ذَرْهُمْ يَأْكُلُوا۟ وَيَتَمَتَّعُوا۟ وَيُلْهِهِمُ ٱلْأَمَلُ

15:3

वे शीघ्र ही जान लेंगे।

فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ

15:4

हमने कोई बस्ती नष्ट नहीं की, जिसके विषय में उसके पास एक ज्ञात बही न रही हो।

وَمَآ أَهْلَكْنَا مِن قَرْيَةٍ إِلَّا وَلَهَا كِتَابٌۭ مَّعْلُومٌۭ

15:5

कोई समुदाय न अपनी अवधि से आगे बढ़ता है, न उसे पीछे करता है।

مَّا تَسْبِقُ مِنْ أُمَّةٍ أَجَلَهَا وَمَا يَسْتَـْٔخِرُونَ

15:6–7

और उन्होंने कहा: “हे वह जिस पर स्मरण उतारा गया, तुम अवश्य विक्षिप्त हो! यदि तुम सच्चों में से हो, तो हमारे पास अभिकर्ताओं को क्यों नहीं ले आते?”

وَقَالُوا۟ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِى نُزِّلَ عَلَيْهِ ٱلذِّكْرُ إِنَّكَ لَمَجْنُونٌۭ لَّوْ مَا تَأْتِينَا بِٱلْمَلَٰٓئِكَةِ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّٰدِقِينَ

15:8

हम अभिकर्ताओं को सत्य के साथ ही उतारते हैं,

مَا نُنَزِّلُ ٱلْمَلَٰٓئِكَةَ إِلَّا بِٱلْحَقِّ

और तब उन्हें कोई मोहलत न दी जाती।

وَمَا كَانُوٓا۟ إِذًۭا مُّنظَرِينَ

15:9

हमीं ने स्मरण को उतारा है,

إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا ٱلذِّكْرَ

15:9

और हम ही अवश्य उसके रक्षक हैं।

وَإِنَّا لَهُۥ لَحَٰفِظُونَ

15:10

हमने निश्चय ही तुमसे पहले, पहले वालों के गुटों में संदेशवाहक भेजे,

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ فِى شِيَعِ ٱلْأَوَّلِينَ

और उनके पास कोई संदेशवाहक नहीं आता था, जिसका वे मज़ाक़ न उड़ाते हों।

وَمَا يَأْتِيهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُوا۟ بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَ

15:12–13

इसी प्रकार हम उसे बहिष्कृतों के मर्मों में डालते हैं: वे उस पर विश्वास नहीं करते, जबकि पहले वालों की रीति बीत चुकी है।

كَذَٰلِكَ نَسْلُكُهُۥ فِى قُلُوبِ ٱلْمُجْرِمِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِهِۦ وَقَدْ خَلَتْ سُنَّةُ ٱلْأَوَّلِينَ

15:14–15

और यदि हम उनके लिए आकाश का कोई द्वार खोल दें, जिससे वे चढ़ते ही रहें, तो वे कहेंगे: “हमारी दृष्टियाँ बस धुंधली कर दी गई हैं; बल्कि हम भ्रम की शिकार क़ौम हैं।”

وَلَوْ فَتَحْنَا عَلَيْهِم بَابًۭا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ فَظَلُّوا۟ فِيهِ يَعْرُجُونَ لَقَالُوٓا۟ إِنَّمَا سُكِّرَتْ أَبْصَٰرُنَا بَلْ نَحْنُ قَوْمٌۭ مَّسْحُورُونَ

15:16–18

हमने निश्चय ही आकाश में तारामंडल रखे, और नज़र डालने वालों के लिए उन्हें सजाया, और हर निष्कासित बहकाने वाले से उन्हें सुरक्षित रखा — सिवा उसके जो चोरी से सुन लेता है, और जिसका फिर एक स्पष्ट दहकता प्रक्षेप्य पीछा करता है।

وَلَقَدْ جَعَلْنَا فِى ٱلسَّمَآءِ بُرُوجًۭا وَزَيَّنَّٰهَا لِلنَّٰظِرِينَ وَحَفِظْنَٰهَا مِن كُلِّ شَيْطَٰنٍۢ رَّجِيمٍ إِلَّا مَنِ ٱسْتَرَقَ ٱلسَّمْعَ فَأَتْبَعَهُۥ شِهَابٌۭ مُّبِينٌۭ

15:19–20

और धरती को हमने फैलाया, और उसमें दृढ़ खूँटे डाले, और उसमें हर तौली हुई वस्तु उगाई, और उसमें तुम्हारे लिए जीवन-साधन बनाए,

وَٱلْأَرْضَ مَدَدْنَٰهَا وَأَلْقَيْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ وَأَنۢبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ شَىْءٍۢ مَّوْزُونٍۢ وَجَعَلْنَا لَكُمْ فِيهَا مَعَٰيِشَ

15:19–20

और उनके लिए भी जिनकी जीविका देने वाले तुम नहीं हो।

وَمَن لَّسْتُمْ لَهُۥ بِرَٰزِقِينَ

15:21

और ऐसी कोई वस्तु नहीं जिसके भंडार हमारे पास न हों,

وَإِن مِّن شَىْءٍ إِلَّا عِندَنَا خَزَآئِنُهُۥ

15:21

और हम उसे एक ज्ञात माप के अनुसार ही उतारते हैं।

وَمَا نُنَزِّلُهُۥٓ إِلَّا بِقَدَرٍۢ مَّعْلُومٍۢ

15:22

और हमने उर्वर करने वाली हवाएँ भेजीं, और फिर आकाश से पानी उतारा जो हमने तुम्हें पिलाया, और तुम उसे भंडार में रखने वाले नहीं हो।

وَأَرْسَلْنَا ٱلرِّيَٰحَ لَوَٰقِحَ فَأَنزَلْنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۭ فَأَسْقَيْنَٰكُمُوهُ وَمَآ أَنتُمْ لَهُۥ بِخَٰزِنِينَ

और हम ही अवश्य जीवन देते और मृत्यु देते हैं, और हम ही उत्तराधिकारी हैं।

وَإِنَّا لَنَحْنُ نُحْىِۦ وَنُمِيتُ وَنَحْنُ ٱلْوَٰرِثُونَ

15:24

हम निश्चय ही तुममें से आगे बढ़ने वालों को जानते हैं, और हम निश्चय ही पीछे रहने वालों को जानते हैं।

وَلَقَدْ عَلِمْنَا ٱلْمُسْتَقْدِمِينَ مِنكُمْ وَلَقَدْ عَلِمْنَا ٱلْمُسْتَـْٔخِرِينَ

और तुम्हारा अभिभावक ही उन्हें इकट्ठा करेगा,

وَإِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْ

क्योंकि वह प्रज्ञावान, सर्वज्ञ है।

إِنَّهُۥ حَكِيمٌ عَلِيمٌۭ

15:26

हमने निश्चय ही मनुष्य को खनकती मिट्टी से, ढली हुई कीचड़ से रचा,

وَلَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَٰنَ مِن صَلْصَٰلٍۢ مِّنْ حَمَإٍۢ مَّسْنُونٍۢ

15:27

और प्रच्छन्नों को हमने पहले तप्त हवा की आग से रचा था।

وَٱلْجَآنَّ خَلَقْنَٰهُ مِن قَبْلُ مِن نَّارِ ٱلسَّمُومِ

15:28–29

और जब तुम्हारे अभिभावक ने अभिकर्ताओं से कहा: “मैं निश्चय ही खनकती मिट्टी से, ढली हुई कीचड़ से एक मानव रचने वाला हूँ; जब मैं उसे गढ़ लूँ और उसमें अपने प्रवाह में से फूँक दूँ, तो उसके सामने झुक जाओ, माथा टेके हुए।”

وَإِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلَٰٓئِكَةِ إِنِّى خَٰلِقٌۢ بَشَرًۭا مِّن صَلْصَٰلٍۢ مِّنْ حَمَإٍۢ مَّسْنُونٍۢ فَإِذَا سَوَّيْتُهُۥ وَنَفَخْتُ فِيهِ مِن رُّوحِى فَقَعُوا۟ لَهُۥ سَٰجِدِينَ

15:30–31

तब अभिकर्ताओं ने माथा टेका, सब एक साथ, सिवा इब्लीस के: उसने माथा टेकने वालों में होने से इनकार किया।

فَسَجَدَ ٱلْمَلَٰٓئِكَةُ كُلُّهُمْ أَجْمَعُونَ إِلَّآ إِبْلِيسَ أَبَىٰٓ أَن يَكُونَ مَعَ ٱلسَّٰجِدِينَ

15:32

उसने कहा: “हे इब्लीस, तुम्हें क्या हुआ कि तुम माथा टेकने वालों में नहीं हो?”

قَالَ يَٰٓإِبْلِيسُ مَا لَكَ أَلَّا تَكُونَ مَعَ ٱلسَّٰجِدِينَ

उसने कहा: “मेरे लिए उचित नहीं कि मैं ऐसे मानव के सामने माथा टेकूँ जिसे आपने खनकती मिट्टी से, ढली हुई कीचड़ से रचा है।”

قَالَ لَمْ أَكُن لِّأَسْجُدَ لِبَشَرٍ خَلَقْتَهُۥ مِن صَلْصَٰلٍۢ مِّنْ حَمَإٍۢ مَّسْنُونٍۢ

15:34–35

उसने कहा: “तो यहाँ से निकल जाओ, क्योंकि तुम निष्कासित हो, और चुकौती के दिन तक तुम पर निश्चय ही धिक्कार है।”

قَالَ فَٱخْرُجْ مِنْهَا فَإِنَّكَ رَجِيمٌۭ وَإِنَّ عَلَيْكَ ٱللَّعْنَةَ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلدِّينِ

उसने कहा: “मेरे अभिभावक, तो मुझे उस दिन तक मोहलत दीजिए जब वे उठाए जाएँगे।”

قَالَ رَبِّ فَأَنظِرْنِىٓ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ

उसने कहा: “तुम उनमें से हो जिन्हें मोहलत दी जाती है, ज्ञात क्षण के दिन तक।”

قَالَ فَإِنَّكَ مِنَ ٱلْمُنظَرِينَ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْوَقْتِ ٱلْمَعْلُومِ

15:39–40

उसने कहा: “मेरे अभिभावक, इसलिए कि आपने मुझे दिशाहीन होने दिया, मैं उनके लिए धरती पर जो कुछ है उसे अवश्य सुंदर बना दूँगा, और उन सबको अवश्य दिशाहीन कर दूँगा, सिवा उनमें से आपके आज्ञाकारियों के जो निर्मल हैं।”

قَالَ رَبِّ بِمَآ أَغْوَيْتَنِى لَأُزَيِّنَنَّ لَهُمْ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَأُغْوِيَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ إِلَّا عِبَادَكَ مِنْهُمُ ٱلْمُخْلَصِينَ

15:41

उसने कहा: “यह एक पथ है जो मुझ पर है, एक सीधा पथ।

قَالَ هَٰذَا صِرَٰطٌ عَلَىَّ مُسْتَقِيمٌ

15:42

मेरे आज्ञाकारियों पर तुम्हारा निश्चय ही कोई अधिकार नहीं, सिवा उसके जो दिशाहीनों में से तुम्हारा अनुसरण करेगा।”

إِنَّ عِبَادِى لَيْسَ لَكَ عَلَيْهِمْ سُلْطَٰنٌ إِلَّا مَنِ ٱتَّبَعَكَ مِنَ ٱلْغَاوِينَ

और जहन्नम अवश्य उन सबके वादे का समय है; उसके सात द्वार हैं,

وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمَوْعِدُهُمْ أَجْمَعِينَ لَهَا سَبْعَةُ أَبْوَٰبٍۢ

15:43–44

हर द्वार के लिए उनमें से एक निश्चित भाग है।

لِّكُلِّ بَابٍۢ مِّنْهُمْ جُزْءٌۭ مَّقْسُومٌ

15:45–46

जिन्होंने सावधानी बरती वे निश्चय ही उद्यानों और सोतों में होंगे: “शांति से, निर्भय होकर इनमें प्रवेश करो।”

إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى جَنَّٰتٍۢ وَعُيُونٍ ٱدْخُلُوهَا بِسَلَٰمٍ ءَامِنِينَ

15:47

और हम उनके सीनों से हर द्वेष निकाल चुके होंगे,

وَنَزَعْنَا مَا فِى صُدُورِهِم مِّنْ غِلٍّ

15:47

भाई-भाई, आसनों पर, आमने-सामने।

إِخْوَٰنًا عَلَىٰ سُرُرٍۢ مُّتَقَٰبِلِينَ

15:48

वहाँ उन्हें कोई थकान नहीं छुएगी,

لَا يَمَسُّهُمْ فِيهَا نَصَبٌۭ

15:48

और वे वहाँ से कभी निकाले नहीं जाएँगे।

وَمَا هُم مِّنْهَا بِمُخْرَجِينَ

मेरे आज्ञाकारियों को सूचित करो कि मैं ही अत्यंत क्षमाशील, दयालु हूँ, और मेरा दंड ही पीड़ादायक दंड है।

نَبِّئْ عِبَادِىٓ أَنِّىٓ أَنَا ٱلْغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ وَأَنَّ عَذَابِى هُوَ ٱلْعَذَابُ ٱلْأَلِيمُ

15:51–52

और उन्हें इब्राहीम के अतिथियों के विषय में सूचित करो, जब उन्होंने उसके यहाँ प्रवेश किया और कहा: “शांति!”

وَنَبِّئْهُمْ عَن ضَيْفِ إِبْرَٰهِيمَ إِذْ دَخَلُوا۟ عَلَيْهِ فَقَالُوا۟ سَلَٰمًۭا

15:51–52

उसने कहा: “हम निश्चय ही तुम्हारे कारण सिहर रहे हैं।”

قَالَ إِنَّا مِنكُمْ وَجِلُونَ

उन्होंने कहा: “मत सिहरो, क्योंकि हम तुम्हें एक ज्ञानी बालक का शुभ समाचार देते हैं।”

قَالُوا۟ لَا تَوْجَلْ إِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَٰمٍ عَلِيمٍۢ

15:54

उसने कहा: “क्या तुम मुझे यह शुभ समाचार देते हो, जबकि बुढ़ापा मुझे छू चुका है? तो फिर तुम मुझे क्या शुभ समाचार देते हो?”

قَالَ أَبَشَّرْتُمُونِى عَلَىٰٓ أَن مَّسَّنِىَ ٱلْكِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرُونَ

15:55

उन्होंने कहा: “हम तुम्हें यह शुभ समाचार पूर्ण सत्य के साथ देते हैं: तो हताश होने वालों में से मत हो।”

قَالُوا۟ بَشَّرْنَٰكَ بِٱلْحَقِّ فَلَا تَكُن مِّنَ ٱلْقَٰنِطِينَ

15:56

उसने कहा: “और अपने अभिभावक की दया से कौन हताश होता है, सिवा भटके हुओं के?”

قَالَ وَمَن يَقْنَطُ مِن رَّحْمَةِ رَبِّهِۦٓ إِلَّا ٱلضَّآلُّونَ

उसने कहा: “तो तुम्हारा क्या हाल है, हे भेजे गए जनो?”

قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا ٱلْمُرْسَلُونَ

15:58–59

उन्होंने कहा: “हम एक बहिष्कृत क़ौम की ओर भेजे गए हैं, सिवा लूत के कुल के।

قَالُوٓا۟ إِنَّآ أُرْسِلْنَآ إِلَىٰ قَوْمٍۢ مُّجْرِمِينَ إِلَّآ ءَالَ لُوطٍ

15:60

हम उन सबको अवश्य उबारेंगे, सिवा उसकी पत्नी के: हमने निर्धारित किया है कि वह अवश्य पीछे रह जाने वालों में से है।”

إِنَّا لَمُنَجُّوهُمْ أَجْمَعِينَ إِلَّا ٱمْرَأَتَهُۥ قَدَّرْنَآ إِنَّهَا لَمِنَ ٱلْغَٰبِرِينَ

15:61–62

और जब भेजे गए जन लूत के कुल के पास आए, तो उसने कहा: “तुम ऐसी क़ौम हो जिससे मैं अपरिचित हूँ।”

فَلَمَّا جَآءَ ءَالَ لُوطٍ ٱلْمُرْسَلُونَ قَالَ إِنَّكُمْ قَوْمٌۭ مُّنكَرُونَ

उन्होंने कहा: “बल्कि हम तुम्हारे पास वह लेकर आए हैं जिस पर वे वाद-प्रतिवाद करते थे। हम तुम्हारे पास सत्य लेकर आए हैं, और हम अवश्य सच्चे हैं।

قَالُوا۟ بَلْ جِئْنَٰكَ بِمَا كَانُوا۟ فِيهِ يَمْتَرُونَ وَأَتَيْنَٰكَ بِٱلْحَقِّ وَإِنَّا لَصَٰدِقُونَ

15:65

तो अपने परिवार के साथ रात के एक भाग में चल पड़ो, और उनके पीछे-पीछे चलो, और तुममें से कोई मुड़कर न देखे, और वहाँ जाओ जहाँ का तुम्हें आदेश दिया गया है।”

فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍۢ مِّنَ ٱلَّيْلِ وَٱتَّبِعْ أَدْبَٰرَهُمْ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنكُمْ أَحَدٌۭ وَٱمْضُوا۟ حَيْثُ تُؤْمَرُونَ

15:66

और हमने उसके लिए यह आदेश तय कर दिया: इनका अंतिम अवशेष प्रातः विच्छिन्न कर दिया जाएगा।

وَقَضَيْنَآ إِلَيْهِ ذَٰلِكَ ٱلْأَمْرَ أَنَّ دَابِرَ هَٰٓؤُلَآءِ مَقْطُوعٌۭ مُّصْبِحِينَ

15:67

और राजधानी वाले हर्षोल्लास में आए।

وَجَآءَ أَهْلُ ٱلْمَدِينَةِ يَسْتَبْشِرُونَ

उसने कहा: “ये मेरे अतिथि हैं: मुझे अपमानित मत करो,

قَالَ إِنَّ هَٰٓؤُلَآءِ ضَيْفِى فَلَا تَفْضَحُونِ

और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, और मुझे लज्जित मत करो।”

وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَلَا تُخْزُونِ

15:70

उन्होंने कहा: “क्या हमने तुम्हें किसी भी व्यक्ति से मना नहीं किया था?”

قَالُوٓا۟ أَوَلَمْ نَنْهَكَ عَنِ ٱلْعَٰلَمِينَ

15:71

उसने कहा: “ये मेरी बेटियाँ हैं, यदि तुम्हें करना ही है।”

قَالَ هَٰٓؤُلَآءِ بَنَاتِىٓ إِن كُنتُمْ فَٰعِلِينَ

15:72

तुम्हारे जीवन की शपथ, वे अपने नशे में अवश्य टटोलते फिर रहे थे।

لَعَمْرُكَ إِنَّهُمْ لَفِى سَكْرَتِهِمْ يَعْمَهُونَ

15:73–74

तब सूर्योदय के समय चीख़ ने उन्हें पकड़ लिया, और हमने उसके ऊपरी भाग को उसका निचला भाग बना दिया, और उन पर ढली हुई मिट्टी के पत्थर बरसाए।

فَأَخَذَتْهُمُ ٱلصَّيْحَةُ مُشْرِقِينَ فَجَعَلْنَا عَٰلِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ حِجَارَةًۭ مِّن سِجِّيلٍ

15:75

इसमें अवश्य उनके लिए संकेत हैं जो निशान पहचानना जानते हैं।

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَءَايَٰتٍۢ لِّلْمُتَوَسِّمِينَ

15:76

और वह अवश्य एक टिकी हुई राह पर है।

وَإِنَّهَا لَبِسَبِيلٍۢ مُّقِيمٍ

15:77

इसमें अवश्य विश्वास करने वालों के लिए एक संकेत है।

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَءَايَةًۭ لِّلْمُؤْمِنِينَ

15:78

और झाड़ी वाले अवश्य अन्यायी थे,

وَإِن كَانَ أَصْحَٰبُ ٱلْأَيْكَةِ لَظَٰلِمِينَ

तो हमने उनसे प्रतिशोध लिया,

فَٱنتَقَمْنَا مِنْهُمْ

15:79

और वे दोनों अवश्य एक स्पष्ट संदर्भ पर हैं।

وَإِنَّهُمَا لَبِإِمَامٍۢ مُّبِينٍۢ

15:80

हिज्र वालों ने निश्चय ही भेजे गए जनों को झुठलाया,

وَلَقَدْ كَذَّبَ أَصْحَٰبُ ٱلْحِجْرِ ٱلْمُرْسَلِينَ

और हमने उन्हें अपने संकेत दिए, परंतु वे उनसे कतरा गए।

وَءَاتَيْنَٰهُمْ ءَايَٰتِنَا فَكَانُوا۟ عَنْهَا مُعْرِضِينَ

15:82

और वे पहाड़ों में घर तराशते थे, पूरी सुरक्षा में।

وَكَانُوا۟ يَنْحِتُونَ مِنَ ٱلْجِبَالِ بُيُوتًا ءَامِنِينَ

तब प्रातः चीख़ ने उन्हें पकड़ लिया,

فَأَخَذَتْهُمُ ٱلصَّيْحَةُ مُصْبِحِينَ

और जो उन्होंने कमाया था वह उनके कुछ काम न आया।

فَمَآ أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا۟ يَكْسِبُونَ

15:85

हमने आकाशों, धरती और जो उनके बीच है, उन्हें पूर्ण सत्य के साथ ही रचा है।

وَمَا خَلَقْنَا ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَآ إِلَّا بِٱلْحَقِّ

15:85

और वह घड़ी अवश्य आने वाली है:

وَإِنَّ ٱلسَّاعَةَ لَءَاتِيَةٌۭ

15:85

तो पन्ना पलट दो, गरिमा के साथ,

فَٱصْفَحِ ٱلصَّفْحَ ٱلْجَمِيلَ

15:86

क्योंकि तुम्हारा अभिभावक महा-रचयिता है, सर्वज्ञ।

إِنَّ رَبَّكَ هُوَ ٱلْخَلَّٰقُ ٱلْعَلِيمُ

15:87

हमने तुम्हें निश्चय ही छंदों में से सात दिए, और विशाल पाठ।

وَلَقَدْ ءَاتَيْنَٰكَ سَبْعًۭا مِّنَ ٱلْمَثَانِى وَٱلْقُرْءَانَ ٱلْعَظِيمَ

15:88

अपनी आँखें उसकी ओर मत फैलाओ जिसका हमने उनमें से कुछ जोड़ों को उपभोग कराया,

لَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعْنَا بِهِۦٓ أَزْوَٰجًۭا مِّنْهُمْ

15:88

और उनके लिए दुखी मत हो,

وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ

15:88

और विश्वास करने वालों के लिए अपना पंख झुका लो।

وَٱخْفِضْ جَنَاحَكَ لِلْمُؤْمِنِينَ

15:89–91

और कहो: “मैं ही निश्चय ही स्पष्ट चेतावनी देने वाला हूँ” — वैसा ही जैसा हमने उन पर उतारा जिन्होंने उसे आपस में बाँट लिया, जिन्होंने इस पाठ को बिखरे हुए टुकड़े बना दिया।

وَقُلْ إِنِّىٓ أَنَا ٱلنَّذِيرُ ٱلْمُبِينُ كَمَآ أَنزَلْنَا عَلَى ٱلْمُقْتَسِمِينَ ٱلَّذِينَ جَعَلُوا۟ ٱلْقُرْءَانَ عِضِينَ

तुम्हारे अभिभावक की शपथ, हम उन सबसे अवश्य पूछेंगे कि वे क्या करते थे।

فَوَرَبِّكَ لَنَسْـَٔلَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ عَمَّا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ

15:94

तो जो तुम्हें आदेश दिया गया है उसे खुलकर घोषित करो,

فَٱصْدَعْ بِمَا تُؤْمَرُ

15:94

और साझी ठहराने वालों से कतराओ,

وَأَعْرِضْ عَنِ ٱلْمُشْرِكِينَ

15:95–96

क्योंकि हम तुम्हारे लिए उन मज़ाक़ उड़ाने वालों के विरुद्ध पर्याप्त रहे हैं, जो ईश्वर के साथ कोई और देवता रखते हैं:

إِنَّا كَفَيْنَٰكَ ٱلْمُسْتَهْزِءِينَ ٱلَّذِينَ يَجْعَلُونَ مَعَ ٱللَّهِ إِلَٰهًا ءَاخَرَ

15:95–96

वे शीघ्र ही जान लेंगे।

فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ

15:97

हम निश्चय ही जानेंगे कि वे जो कहते हैं उससे तुम्हारा सीना तंग होता है:

وَلَقَدْ نَعْلَمُ أَنَّكَ يَضِيقُ صَدْرُكَ بِمَا يَقُولُونَ

15:98

तो प्रशंसा के साथ अपने अभिभावक की महिमा गाओ, और माथा टेकने वालों में रहो,

فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَكُن مِّنَ ٱلسَّٰجِدِينَ

15:99

और अपने अभिभावक की आज्ञा का पालन करो, जब तक तुम्हारे पास यक़ीन न आ जाए।

وَٱعْبُدْ رَبَّكَ حَتَّىٰ يَأْتِيَكَ ٱلْيَقِينُ

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