ابراهيم
Ibrahim
A Good Word
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। अलिफ़. लाम. रा.
بِسۡمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحۡمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ الٓر۪ۚ
एक ग्रंथ, जिसे हमने तुम्हारी ओर उतारा, ताकि तुम लोगों को अँधेरों से प्रकाश की ओर निकालो, उनके अभिभावक की अनुमति से, सर्वशक्तिमान, प्रशंसनीय के पथ की ओर।
كِتَٰبٌ أَنزَلۡنَٰهُ إِلَيۡكَ لِتُخۡرِجَ اَ۬لنَّاسَ مِنَ اَ۬لظُّلُمَٰتِ إِلَى اَ۬لنُّورِ بِإِذۡنِ رَبِّهِمۡ إِلَىٰ صِرَٰطِ اِ۬لۡعَزِيزِ اِ۬لۡحَمِيدِ
ईश्वर, जिसका वह सब है जो आकाशों में है और जो धरती पर है।
اِ۬للَّهِ اِ۬لَّذِي لَهُۥ مَا فِي اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي اِ۬لۡأَرۡضِۗ
और हाय नकारने वालों पर, एक कठोर दंड के कारण —
وَوَيۡلٞ لِّلۡكٰ۪فِرِينَ مِنۡ عَذَابٖ شَدِيدٍ
जो अंतिम जीवन की अपेक्षा इहलोक के जीवन से अधिक प्रेम करते हैं, ईश्वर की राह रोकते हैं और उसे टेढ़ी करने की खोज में रहते हैं: यही वे हैं जो दूर के भटकाव में हैं।
اِ۬لَّذِينَ يَسۡتَحِبُّونَ اَ۬لۡحَيَوٰةَ اَ۬لدُّنۡيۭا عَلَى اَ۬لۡأٓخِرَةِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اِ۬للَّهِ وَيَبۡغُونَهَا عِوَجًاۚ أُوْلَٰٓئِكَ فِي ضَلَٰلِۢ بَعِيدٖ
हमने कोई संदेशवाहक नहीं भेजा, सिवा इसके कि वह अपनी क़ौम की भाषा में हो, ताकि वह उनके लिए बातें स्पष्ट कर दे;
وَمَا أَرۡسَلۡنَا مِن رَّسُولٍ إِلَّا بِلِسَانِ قَوۡمِهِۦ لِيُبَيِّن لَّهُمۡۖ
फिर ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे भटकाता है, और जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे मार्ग दिखाता है:
فَيُضِلُّ اُ۬للَّهُ مَن يَشَآءُ وَيَهۡدِي مَن يَشَآءُۚ
और वही सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।
وَهۡوَ اَ۬لۡعَزِيزُ اُ۬لۡحَكِيمُ
हमने निश्चय ही मूसा को अपने संकेतों के साथ भेजा: “अपनी क़ौम को अँधेरों से प्रकाश की ओर निकालो, और उन्हें ईश्वर के दिनों का स्मरण कराओ।”
وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا مُوسۭيٰ بِـَٔايَٰتِنَا أَنۡ أَخۡرِجۡ قَوۡمَكَ مِنَ اَ۬لظُّلُمَٰتِ إِلَى اَ۬لنُّورِ وَذَكِّرۡهُم بِأَيَّىٰمِ اِ۬للَّهِۚ
इसमें अवश्य हर उसके लिए संकेत हैं जो अत्यंत धैर्यवान, अत्यंत कृतज्ञ है।
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّكُلِّ صَبّ۪ارٖ شَكُورٖ
और जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा: “अपने ऊपर ईश्वर के उपकार का स्मरण करो, जब उसने तुम्हें फ़िरऔन के कुल से उबारा, जो तुम्हें बुरा दंड देते थे, तुम्हारे बेटों का वध करते थे और तुम्हारी स्त्रियों की लज्जा पर आघात करते थे:
وَإِذۡ قَالَ مُوسۭيٰ لِقَوۡمِهِ اِ۟ذۡكُرُواْ نِعۡمَةَ اَ۬للَّهِ عَلَيۡكُمۡ إِذۡ أَنجَىٰكُم مِّنۡ ءَالِ فِرۡعَوۡنَ يَسُومُونَكُمۡ سُوٓءَ اَ۬لۡعَذَابِ وَيُذَبِّحُونَ أَبۡنَآءَكُمۡ وَيَسۡتَحۡيُون نِّسَآءَكُمۡۚ
और उसमें तुम्हारे अभिभावक की ओर से वह था जो विशाल रूप से परखता है।”
وَفِي ذَٰلِكُم بَلَآءٞ مِّن رَّبِّكُمۡ عَظِيمٞ
और जब तुम्हारे अभिभावक ने घोषणा की: “यदि तुम कृतज्ञ हुए, तो मैं तुम्हें अवश्य बढ़ाऊँगा; परंतु यदि तुमने नकारा, तो मेरा दंड अवश्य कठोर है।”
وَإِذ تَّأَذَّن رَّبُّكُمۡ لَئِن شَكَرۡتُمۡ لَأَزِيدَنَّكُمۡۖ وَلَئِن كَفَرۡتُمۡ إِنَّ عَذَابِي لَشَدِيدٞ
और मूसा ने कहा: “यदि तुम नकारो, तुम और वे सब जो धरती पर हैं, तो ईश्वर अवश्य धनी है, वह प्रशंसनीय है।”
وَقَالَ مُوسۭيٰ إِن تَكۡفُرُواْ أَنتُمۡ وَمَن فِي اِ۬لۡأَرۡضِ جَمِيعٗا فَإِنَّ اَ۬للَّهَ لَغَنِيٌّ حَمِيدٌ
क्या तुम्हारे पास उनकी सूचना नहीं पहुँची जो तुमसे पहले थे: नूह की क़ौम, आद, समूद, और वे जो उनके बाद आए,
أَلَمۡ يَاتِكُمۡ نَبَؤُاْ اُ۬لَّذِينَ مِن قَبۡلِكُمۡ قَوۡمِ نُوحٖ وَعَادٖ وَثَمُودَ وَاَلَّذِينَ مِنۢ بَعۡدِهِمۡ
जिन्हें ईश्वर के सिवा कोई नहीं जानता?
لَا يَعۡلَمُهُمۡ إِلَّا اَ۬للَّهُۚ
उनके संदेशवाहक उनके पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ आए, परंतु उन्होंने अपने हाथ अपने मुँह तक वापस ले गए और कहा: “जिसके साथ तुम भेजे गए हो, हम उसे नकारते हैं, और जिसकी ओर तुम हमें बुलाते हो, उसके विषय में हम अवश्य एक विचलित करने वाली दुविधा में हैं।”
جَآءَتۡهُمۡ رُسۡلُهُم بِالۡبَيِّنَٰتِ فَرَدُّواْ أَيۡدِيَهُمۡ فِي أَفۡوَٰهِهِمۡ وَقَالُواْ إِنَّا كَفَرۡنَا بِمَا أُرۡسِلۡتُم بِهِۦ وَإِنَّا لَفِي شَكّٖ مِّمَّا تَدۡعُونَنَا إِلَيۡهِ مُرِيبٖ
उनके संदेशवाहकों ने कहा: “क्या ईश्वर के विषय में कोई दुविधा है, जो आकाशों और धरती का उद्गम है? वह तुम्हें बुलाता है ताकि तुम्हारे दोषों का एक भाग क्षमा करे और तुम्हें एक नामित अवधि तक टाल दे।”
۞ قَالَتۡ رُسۡلُهُمۡ أَفِي اِ۬للَّهِ شَكّٞ فَاطِرِ اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِۖ يَدۡعُوكُمۡ لِيَغۡفِر لَّكُم مِّن ذُنُوبِكُمۡ وَيُؤَخِّرَكُمۡ إِلَىٰ أَجَلٖ مُّسَمّٗىۚ
उन्होंने कहा: “तुम तो बस हमारी तरह मानव हो; तुम हमें उससे रोकना चाहते हो जिसकी हमारे पूर्वज आज्ञा का पालन करते थे। तो हमारे पास कोई स्पष्ट अधिकार ले आओ।”
قَالُواْ إِنۡ أَنتُمۡ إِلَّا بَشَرٞ مِّثۡلُنَا تُرِيدُونَ أَن تَصُدُّونَا عَمَّا كَانَ يَعۡبُدُ ءَابَآؤُنَا فَاتُونَا بِسُلۡطَٰنٖ مُّبِينٖ
उनके संदेशवाहकों ने उनसे कहा: “हम तो बस तुम्हारी तरह मानव हैं, परंतु ईश्वर अपने आज्ञाकारियों में से जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उस पर कृपा करता है।
قَالَتۡ لَهُمۡ رُسۡلُهُمۡ إِن نَّحۡنُ إِلَّا بَشَرٞ مِّثۡلُكُمۡ وَلَٰكِنَّ اَ۬للَّهَ يَمُنُّ عَلَىٰ مَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦۖ
हमारे लिए उचित नहीं कि हम तुम्हारे पास कोई अधिकार लाएँ, सिवा ईश्वर की अनुमति के।
وَمَا كَانَ لَنَا أَن نَّاتِيَكُم بِسُلۡطَٰنٍ إِلَّا بِإِذۡنِ اِ۬للَّهِۚ
और विश्वास करने वालों को चाहिए कि ईश्वर को ही मुख़्तार बनाएँ।
وَعَلَى اَ۬للَّهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ اِ۬لۡمُومِنُونَ
और हम ईश्वर को मुख़्तार क्यों न बनाएँ, जबकि उसने हमें हमारी राहों पर मार्ग दिखाया है?
وَمَا لَنَا أَلَّا نَتَوَكَّلَ عَلَى اَ۬للَّهِ وَقَدۡ هَدَىٰنَا سُبۡلَنَاۚ
और तुम हमें जो कष्ट देते हो, उस पर हम अवश्य धैर्य रखेंगे;
وَلَنَصۡبِرَنَّ عَلَىٰ مَا ءَاذَيۡتُمُونَاۚ
तो मुख़्तार बनाने वाले ईश्वर को ही मुख़्तार बनाएँ।”
وَعَلَى اَ۬للَّهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ اِ۬لۡمُتَوَكِّلُونَ
और नकारने वालों ने अपने संदेशवाहकों से कहा: “हम तुम्हें अपनी धरती से अवश्य निकाल देंगे, या तुम हमारे मत में वापस आ जाओगे!”
وَقَالَ اَ۬لَّذِينَ كَفَرُواْ لِرُسۡلِهِمۡ لَنُخۡرِجَنَّكُم مِّنۡ أَرۡضِنَا أَوۡ لَتَعُودُنَّ فِي مِلَّتِنَاۖ
तब उनके अभिभावक ने उन पर प्रकट किया: “हम अन्यायियों को अवश्य नष्ट करेंगे, और तुम्हें उनके बाद इस धरती पर अवश्य बसाएँगे।
فَأَوۡحَىٰ إِلَيۡهِمۡ رَبُّهُمۡ لَنُهۡلِكَنَّ اَ۬لظَّٰلِمِينَ وَلَنُسۡكِنَنَّكُمُ اُ۬لۡأَرۡضَ مِنۢ بَعۡدِهِمۡۚ
यह उसके लिए है जो मेरे सामने खड़े होने से डरता है, और मेरी धमकी से डरता है।”
ذَٰلِكَ لِمَنۡ خَافَ مَقَامِي وَخَافَ وَعِيدِ
और उन्होंने उद्घाटन माँगा,
وَاَسۡتَفۡتَحُواْ
और हर हठी अत्याचारी विफल हुआ; उसके आगे जहन्नम है, और वहाँ उसे पीप भरा पानी पिलाया जाएगा, जिसे वह छोटे घूँटों में निगलेगा और लगभग गले से उतार नहीं पाएगा; उसके पास हर ओर से मृत्यु आएगी, पर वह मरेगा नहीं; और उसके आगे एक कड़ा दंड है।
وَخَابَ كُلُّ جَبّ۪ارٍ عَنِيدٖ مِّن وَرَآئِهِۦ جَهَنَّمُ وَيُسۡقَىٰ مِن مَّآءٖ صَدِيدٖ يَتَجَرَّعُهُۥ وَلَا يَكَادُ يُسِيغُهُۥ وَيَاتِيهِ اِ۬لۡمَوۡتُ مِن كُلِّ مَكَانٖ وَمَا هُوَ بِمَيِّتٖۖ وَمِن وَرَآئِهِۦ عَذَابٌ غَلِيظٞ
उनका उदाहरण जो अपने अभिभावक को नकारते हैं:
مَّثَلُ اُ۬لَّذِينَ كَفَرُواْ بِرَبِّهِمۡۖ
उनके कर्म उस राख के समान हैं जिसे आँधी के दिन हवा ज़ोर से उड़ाती है: जो उन्होंने कमाया उसमें से वे कुछ भी थाम नहीं सकते।
أَعۡمَٰلُهُمۡ كَرَمَادٍ اِ۪شۡتَدَّتۡ بِهِ اِ۬لرِّيحُ فِي يَوۡمٍ عَاصِفٖۖ لَّا يَقۡدِرُونَ مِمَّا كَسَبُواْ عَلَىٰ شَيۡءٖۚ
यही दूर का भटकाव है।
ذَٰلِكَ هُوَ اَ۬لضَّلَٰلُ اُ۬لۡبَعِيدُ
क्या तुमने नहीं देखा कि ईश्वर ने आकाशों और धरती को सत्य के साथ रचा है?
أَلَمۡ تَرَ أَنَّ اَ۬للَّهَ خَلَقَ اَ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضَ بِالۡحَقِّۚ
यदि उसकी मर्ज़ी हो, तो वह तुम्हें ले जाए और एक नई रचना ले आए,
إِن يَشَأۡ يُذۡهِبۡكُمۡ وَيَاتِ بِخَلۡقٖ جَدِيدٖ
और यह ईश्वर के लिए कदापि पहुँच से बाहर नहीं है।
وَمَا ذَٰلِكَ عَلَى اَ۬للَّهِ بِعَزِيزٖ
और वे सब ईश्वर के सामने खुलकर आ जाएँगे, और दुर्बल उनसे कहेंगे जो घमंड से फूलते थे: “हम निश्चय ही तुम्हारे अनुयायी थे; तो क्या तुम ईश्वर के दंड से हमें थोड़ा भी बचाने के काम आओगे?”
۞ وَبَرَزُواْ لِلَّهِ جَمِيعٗا فَقَالَ اَ۬لضُّعَفَٰٓؤُاْ لِلَّذِينَ اَ۪سۡتَكۡبَرُواْ إِنَّا كُنَّا لَكُمۡ تَبَعٗا فَهَلۡ أَنتُم مُّغۡنُونَ عَنَّا مِنۡ عَذَابِ اِ۬للَّهِ مِن شَيۡءٖۚ
वे कहेंगे: “यदि ईश्वर ने हमें मार्ग दिखाया होता, तो हम निश्चय ही तुम्हें मार्ग दिखाते।
قَالُواْ لَوۡ هَدَىٰنَا اَ۬للَّهُ لَهَدَيۡنَٰكُمۡۖ
हमारे लिए बराबर है कि हम घबराएँ या धैर्य रखें: हमारे लिए बच निकलने का कोई मार्ग नहीं।”
سَوَآءٌ عَلَيۡنَا أَجَزِعۡنَا أَمۡ صَبَرۡنَا مَا لَنَا مِن مَّحِيصٖ
और बहकाने वाला कहेगा, जब मामले का फ़ैसला हो चुका होगा: “ईश्वर ने तुमसे निश्चय ही सत्य का वादा किया था, और मैंने भी तुमसे वादा किया था, परंतु मैंने तुमसे वादा तोड़ा; तुम पर मेरा कोई अधिकार नहीं था, सिवा इसके कि मैंने तुम्हें बुलाया, और तुमने मुझे उत्तर दिया। तो मुझ पर दोषारोपण मत करो, बल्कि स्वयं पर दोषारोपण करो: न मैं तुम्हारी गुहार का उत्तर दे सकता हूँ, न तुम मेरी। इससे पहले तुमने मुझे जो ईश्वर का साझी ठहराया था, मैं उसे निश्चय ही नकारता हूँ।”
وَقَالَ اَ۬لشَّيۡطَٰنُ لَمَّا قُضِيَ اَ۬لۡأَمۡرُ إِنَّ اَ۬للَّهَ وَعَدَكُمۡ وَعۡدَ اَ۬لۡحَقِّ وَوَعَدتُّكُمۡ فَأَخۡلَفۡتُكُمۡۖ وَمَا كَانَ لِي عَلَيۡكُم مِّن سُلۡطَٰنٍ إِلَّا أَن دَعَوۡتُكُمۡ فَاَسۡتَجَبۡتُمۡ لِيۖ فَلَا تَلُومُونِي وَلُومُواْ أَنفُسَكُمۖ مَّا أَنَا۠ بِمُصۡرِخِكُمۡ وَمَا أَنتُم بِمُصۡرِخِيَّ إِنِّي كَفَرۡتُ بِمَا أَشۡرَكۡتُمُونِۦ مِن قَبۡلُۗ
अन्यायियों के लिए निश्चय ही पीड़ादायक दंड है।
إِنَّ اَ۬لظَّٰلِمِينَ لَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ
और जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, वे ऐसे उद्यानों में प्रवेश कराए जाएँगे जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जहाँ वे सदा रहेंगे, अपने अभिभावक की अनुमति से।
وَأُدۡخِلَ اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰت جَّنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا اَ۬لۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَا بِإِذۡنِ رَبِّهِمۡۖ
वहाँ उनका अभिवादन होगा: “शांति!”
تَحِيَّتُهُمۡ فِيهَا سَلَٰمٌ
क्या तुमने नहीं देखा कि ईश्वर कैसे उदाहरण को कई गुना करता है? एक अच्छा बोल एक अच्छे वृक्ष के समान है, जिसकी जड़ दृढ़ है और शाखाएँ आकाश में हैं, जो अपने अभिभावक की अनुमति से हर समय अपना भोजन देता है।
أَلَمۡ تَرَ كَيۡفَ ضَرَبَ اَ۬للَّهُ مَثَلٗا كَلِمَةٗ طَيِّبَةٗ كَشَجَرَةٖ طَيِّبَةٍ أَصۡلُهَا ثَابِتٞ وَفَرۡعُهَا فِي اِ۬لسَّمَآءِۚ تُوتِي أُكۡلَهَا كُلَّ حِينِۢ بِإِذۡنِ رَبِّهَاۗ
और ईश्वर लोगों के लिए उदाहरणों को कई गुना करता है, शायद वे स्मरण करें।
وَيَضۡرِبُ اُ۬للَّهُ اُ۬لۡأَمۡثَال لِّلنَّاسِ لَعَلَّهُمۡ يَتَذَكَّرُونَ
और एक निकृष्ट बोल का उदाहरण एक निकृष्ट वृक्ष के समान है, जो धरती की सतह से उखाड़ दिया गया, जिसमें कोई स्थिरता नहीं।
وَمَثَلُ كَلِمَةٍ خَبِيثَةٖ كَشَجَرَةٍ خَبِيثَةٍ اِ۟جۡتُثَّتۡ مِن فَوۡقِ اِ۬لۡأَرۡضِ مَا لَهَا مِن قَر۪ارٖ
ईश्वर विश्वास करने वालों को दृढ़ कथन से स्थिर करता है, इहलोक के जीवन में और अंतिम जीवन में,
يُثَبِّتُ اُ۬للَّهُ اُ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ بِالۡقَوۡلِ اِ۬لثَّابِتِ فِي اِ۬لۡحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنۡيۭا وَفِي اِ۬لۡأٓخِرَةِۖ
और ईश्वर अन्यायियों को भटकाता है,
وَيُضِلُّ اُ۬للَّهُ اُ۬لظَّٰلِمِينَۚ
और ईश्वर वही करता है जो उसकी मर्ज़ी हो।
وَيَفۡعَلُ اُ۬للَّهُ مَا يَشَآءُ
क्या तुमने उन्हें नहीं देखा जिन्होंने ईश्वर के उपकार को नकार से बदल दिया, और अपनी क़ौम को क्षय के ठिकाने में ठहरा दिया — जहन्नम में, जहाँ वे जलेंगे:
۞ اَ۬لَمۡ تَرَ إِلَى اَ۬لَّذِينَ بَدَّلُواْ نِعۡمَتَ اَ۬للَّهِ كُفۡرٗا وَأَحَلُّواْ قَوۡمَهُمۡ دَارَ اَ۬لۡبَو۪ارِ جَهَنَّمَ يَصۡلَوۡنَهَاۖ
कितना निकृष्ट विश्राम-स्थल है!
وَبِيسَ اَ۬لۡقَرَارُ
और उन्होंने ईश्वर के प्रतिद्वंद्वी ठहराए, ताकि उसकी राह से भटकाएँ:
وَجَعَلُواْ لِلَّهِ أَندَادٗا لِّيَضِلُّواْ عَن سَبِيلِهِۦۗ
कहो: “उपभोग कर लो, क्योंकि तुम्हारा गंतव्य आग है।”
قُلۡ تَمَتَّعُواْ فَإِنَّ مَصِيرَكُمۡ إِلَى اَ۬لنّ۪ارِ
मेरे आज्ञाकारियों से, जो विश्वास करते हैं, कहो कि वे संपर्क बनाए रखें और उसमें से ख़र्च करें जो हमने उन्हें जीविका में दिया, चुपके से और खुलकर, उस दिन के आने से पहले जिसमें न ख़रीद-फ़रोख़्त होगी, न मित्रता।
قُل لِّعِبَادِيَ اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ يُقِيمُواْ اُ۬لصَّلَوٰةَ وَيُنفِقُواْ مِمَّا رَزَقۡنَٰهُمۡ سِرّٗا وَعَلَانِيَةٗ مِّن قَبۡلِ أَن يَاتِي يَّوۡمٞ لَّا بَيۡعَ فِيهِ وَلَا خِلَٰلَ
ईश्वर वही है जिसने आकाशों और धरती को रचा, और आकाश से पानी उतारा, जिससे उसने तुम्हारे लिए जीविका के रूप में फल निकाले, और उसने तुम्हारे लिए जलयान को वश में किया, ताकि वह उसके आदेश से समुद्र में चले,
اَ۬للَّهُ اُ۬لَّذِي خَلَقَ اَ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضَ وَأَنزَلَ مِنَ اَ۬لسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَخۡرَجَ بِهِۦ مِنَ اَ۬لثَّمَرَٰتِ رِزۡقٗا لَّكُمۡۖ وَسَخَّر لَّكُمُ اُ۬لۡفُلۡكَ لِتَجۡرِيَ فِي اِ۬لۡبَحۡرِ بِأَمۡرِهِۦۖ
और उसने तुम्हारे लिए नदियों को वश में किया।
وَسَخَّر لَّكُمُ اُ۬لۡأَنۡهَٰرَ
और उसने तुम्हारे लिए सूर्य और चंद्रमा को वश में किया, जो अपनी गति में निरंतर हैं,
وَسَخَّر لَّكُمُ اُ۬لشَّمۡسَ وَاَلۡقَمَرَ دَآئِبَيۡنِۖ
और उसने तुम्हारे लिए रात और दिन को वश में किया।
وَسَخَّر لَّكُمُ اُ۬لَّيۡلَ وَاَلنَّهَارَ
और उसने तुम्हें हर उस वस्तु में से दिया जो तुमने उससे माँगी;
وَءَاتَىٰكُم مِّن كُلِّ مَا سَأَلۡتُمُوهُۚ
और यदि तुम ईश्वर के उपकार को गिनने लगो, तो उसे पूरा गिन न सकोगे।
وَإِن تَعُدُّواْ نِعۡمَتَ اَ۬للَّهِ لَا تُحۡصُوهَاۗ
मनुष्य अवश्य अत्यंत अन्यायी है, एक बड़ा नकारने वाला।
إِنَّ اَ۬لۡإِنسَٰنَ لَظَلُومٞ كَفَّارٞ
और जब इब्राहीम ने कहा: “मेरे अभिभावक, इस भूभाग को सुरक्षित बना दीजिए, और मुझे तथा मेरे बेटों को मूर्तियों की आज्ञा का पालन करने से दूर रखिए।
وَإِذۡ قَالَ إِبۡرَٰهِيمُ رَبِّ اِ۪جۡعَلۡ هَٰذَا اَ۬لۡبَلَدَ ءَامِنٗا وَاَجۡنُبۡنِي وَبَنِيَّ أَن نَّعۡبُدَ اَ۬لۡأَصۡنَامَ
मेरे अभिभावक, उन्होंने निश्चय ही बहुत से लोगों को भटकाया है। जो मेरे पीछे चले, वह तो मेरा अपना है, और जो मेरी अवज्ञा करे — तो आप निश्चय ही अत्यंत क्षमाशील, दयालु हैं।
رَبِّ إِنَّهُنَّ أَضۡلَلۡنَ كَثِيرٗا مِّن اَ۬لنَّاسِۖ فَمَن تَبِعَنِي فَإِنَّهُۥ مِنِّيۖ وَمَنۡ عَصَانِي فَإِنَّكَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ
हमारे अभिभावक, मैंने अपनी संतति का एक भाग एक बंजर घाटी में बसाया है, आपके अलंघनीय किए गए घर के पास,
رَّبَّنَا إِنِّيَ أَسۡكَنتُ مِن ذُرِّيَّتِي بِوَادٍ غَيۡرِ ذِي زَرۡعٍ عِندَ بَيۡتِكَ اَ۬لۡمُحَرَّمِ
हमारे अभिभावक, ताकि वे संपर्क बनाए रखें; तो आप ऐसा करें कि लोगों में से कुछ चेतनाएँ उनकी ओर झुकें, और उन्हें फलों की जीविका दें, शायद वे कृतज्ञ हों।
رَبَّنَا لِيُقِيمُواْ اُ۬لصَّلَوٰةَ فَاَجۡعَلۡ أَفۡـِٔدَةٗ مِّنَ اَ۬لنَّاسِ تَهۡوِي إِلَيۡهِمۡ وَاَرۡزُقۡهُم مِّنَ اَ۬لثَّمَرَٰتِ لَعَلَّهُمۡ يَشۡكُرُونَ
हमारे अभिभावक, आप जानते हैं जो हम छिपाते हैं और जो हम उजागर करते हैं;
رَبَّنَا إِنَّكَ تَعۡلَم مَّا نُخۡفِي وَمَا نُعۡلِنُۗ
और ईश्वर से कुछ भी छिपा नहीं, न धरती पर न आकाश में।
وَمَا يَخۡفَىٰ عَلَى اَ۬للَّهِ مِن شَيۡءٖ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ وَلَا فِي اِ۬لسَّمَآءِ
प्रशंसा ईश्वर के लिए है, जिसने बुढ़ापे के बावजूद मुझे इस्माईल और इसहाक़ प्रदान किए!
۞ اِ۬لۡحَمۡدُ لِلَّهِ اِ۬لَّذِي وَهَبَ لِي عَلَى اَ۬لۡكِبَرِ إِسۡمَٰعِيلَ وَإِسۡحَٰقَۚ
मेरा अभिभावक अवश्य पुकार सुनने वाला है।
إِنَّ رَبِّي لَسَمِيعُ اُ۬لدُّعَآءِ
मेरे अभिभावक, मुझे संपर्क बनाए रखने वाला बनाइए, और मेरी संतति को भी;
رَبِّ اِ۪جۡعَلۡنِي مُقِيمَ اَ۬لصَّلَوٰةِ وَمِن ذُرِّيَّتِيۚ
हमारे अभिभावक, और मेरी पुकार स्वीकार कीजिए।
رَبَّنَا وَتَقَبَّلۡ دُعَآءِۦ
हमारे अभिभावक, मुझे क्षमा कीजिए, और मेरे माता-पिता को, और विश्वास करने वालों को, उस दिन जब हिसाब सामने खड़ा होगा।”
رَبَّنَا اَ۪غۡفِر لِّي وَلِوَٰلِدَيَّ وَلِلۡمُومِنِينَ يَوۡمَ يَقُومُ اُ۬لۡحِسَابُ
और कदापि यह न समझो कि ईश्वर उससे लापरवाह है जो अन्यायी करते हैं:
وَلَا تَحۡسِبَنَّ اَ۬للَّهَ غَٰفِلًا عَمَّا يَعۡمَلُ اُ۬لظَّٰلِمُونَۚ
वह तो उन्हें उस दिन तक टाल रहा है जब दृष्टियाँ जम जाएँगी; वे सिर ऊँचा किए दौड़ते आएँगे, उनकी निगाह उनकी ओर वापस नहीं आएगी, और उनकी चेतनाएँ ख़ाली होंगी।
إِنَّمَا يُؤَخِّرُهُمۡ لِيَوۡمٖ تَشۡخَصُ فِيهِ اِ۬لۡأَبۡصَٰرُ مُهۡطِعِينَ مُقۡنِعِي رُءُوسِهِمۡ لَا يَرۡتَدُّ إِلَيۡهِمۡ طَرۡفُهُمۡۖ وَأَفۡـِٔدَتُهُمۡ هَوَآءٞ
और लोगों को उस दिन की चेतावनी दो जब उन पर दंड आएगा, और जिन्होंने अन्याय किया वे कहेंगे: “हमारे अभिभावक, हमें एक निकट अवधि तक टाल दीजिए: हम आपके बुलावे का उत्तर देंगे और संदेशवाहकों का अनुसरण करेंगे।”
وَأَنذِرِ اِ۬لنَّاسَ يَوۡمَ يَاتِيهِمِ اِ۬لۡعَذَابُ فَيَقُولُ اُ۬لَّذِينَ ظَلَمُواْ رَبَّنَا أَخِّرۡنَا إِلَىٰ أَجَلٖ قَرِيبٖ نُّجِبۡ دَعۡوَتَكَ وَنَتَّبِعِ اِ۬لرُّسُلَۗ
“क्या तुमने इससे पहले शपथ नहीं खाई थी कि तुम्हारा कोई विलोप नहीं होगा?
أَوَ لَمۡ تَكُونُواْ أَقۡسَمۡتُم مِّن قَبۡلُ مَا لَكُم مِّن زَوَالٖ
और तुम उनके आवासों में बसे जिन्होंने स्वयं पर अन्याय किया, और तुम पर स्पष्ट हो गया कि हमने उनके साथ कैसा किया, और हमने तुम्हारे लिए उदाहरणों को कई गुना किया।”
وَسَكَنتُمۡ فِي مَسَٰكِنِ اِ۬لَّذِينَ ظَلَمُواْ أَنفُسَهُمۡ وَتَبَيَّن لَّكُمۡ كَيۡف فَّعَلۡنَا بِهِمۡ وَضَرَبۡنَا لَكُمُ اُ۬لۡأَمۡثَالَ
और उन्होंने अपना षड्यंत्र किया,
وَقَدۡ مَكَرُواْ مَكۡرَهُمۡ
परंतु उनका षड्यंत्र ईश्वर के पास है,
وَعِندَ اَ۬للَّهِ مَكۡرُهُمۡ
चाहे उनका षड्यंत्र ऐसा रहा हो कि उससे पहाड़ हट जाएँ।
وَإِن كَانَ مَكۡرُهُمۡ لِتَزُولَ مِنۡهُ اُ۬لۡجِبَالُ
तो कदापि यह न समझो कि ईश्वर अपने संदेशवाहकों से किया अपना वादा तोड़ता है,
فَلَا تَحۡسِبَنَّ اَ۬للَّهَ مُخۡلِفَ وَعۡدِهِۦ رُسُلَهُۥۚ
क्योंकि ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रतिशोध वाला है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ عَزِيزٞ ذُو اُ۪نتِقَامٖ
उस दिन जब धरती दूसरी धरती में बदल दी जाएगी, और आकाश भी,
يَوۡمَ تُبَدَّلُ اُ۬لۡأَرۡضُ غَيۡرَ اَ۬لۡأَرۡضِ وَاَلسَّمَٰوَٰتُۖ
और वे ईश्वर के सामने खुलकर आ जाएँगे, जो एक, सर्वोपरि है।
وَبَرَزُواْ لِلَّهِ اِ۬لۡوَٰحِدِ اِ۬لۡقَهّ۪ارِ
और तुम उस दिन बहिष्कृतों को देखोगे, बेड़ियों में एक साथ जकड़े हुए, उनके कुर्ते डामर के, और आग उनके चेहरों को ढँके हुए, ताकि ईश्वर हर स्व को उसके कमाए के अनुसार प्रतिफल दे,
وَتَر۪ي اَ۬لۡمُجۡرِمِينَ يَوۡمَئِذٖ مُّقَرَّنِينَ فِي اِ۬لۡأَصۡفَاد سَّرَابِيلُهُم مِّن قَطِرَانٖ وَتَغۡشَىٰ وُجُوهَهُمُ اُ۬لنَّار لِّيَجۡزِيَ اَ۬للَّهُ كُلَّ نَفۡسٖ مَّا كَسَبَتۡۚ
क्योंकि ईश्वर हिसाब में शीघ्र है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ سَرِيعُ اُ۬لۡحِسَابِ
यह लोगों के लिए एक संप्रेषण है, ताकि उन्हें इससे चेतावनी मिले, वे जानें कि वह बस एक ही देवता है, और मेधा रखने वाले स्मरण करें।
هَٰذَا بَلَٰغٞ لِّلنَّاسِ وَلِيُنذَرُواْ بِهِۦ وَلِيَعۡلَمُواْ أَنَّمَا هُوَ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞ وَلِيَذَّكَّرَ أُوْلُواْ اُ۬لۡأَلۡبَٰب