النمل
An-Naml
The Ants
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
ता. सीन.
طسٓ
ये पाठ और एक स्पष्ट ग्रंथ के संकेत हैं,
تِلْكَ ءَايَٰتُ ٱلْقُرْءَانِ وَكِتَابٍۢ مُّبِينٍ
विश्वास करने वालों के लिए मार्गदर्शन और शुभ समाचार, जो संपर्क बनाए रखते हैं और शुद्ध उदारता देते हैं, और जो अंतिम जीवन के विषय में यक़ीन रखते हैं।
هُدًۭى وَبُشْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ ٱلَّذِينَ يُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَيُؤْتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَهُم بِٱلْءَاخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ
जो अंतिम जीवन पर विश्वास नहीं करते, हमने उनके कर्मों को उनके लिए सुंदर बना दिया, और वे टटोलते फिरते हैं।
إِنَّ ٱلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِٱلْءَاخِرَةِ زَيَّنَّا لَهُمْ أَعْمَٰلَهُمْ فَهُمْ يَعْمَهُونَ
ये वे हैं जिनके लिए बुरा दंड है, और अंतिम जीवन में यही सबसे बढ़कर घाटा उठाने वाले होंगे।
أُو۟لَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ لَهُمْ سُوٓءُ ٱلْعَذَابِ وَهُمْ فِى ٱلْءَاخِرَةِ هُمُ ٱلْأَخْسَرُونَ
और तुम तो अवश्य एक प्रज्ञावान, सर्वज्ञ की ओर से पाठ पाते हो।
وَإِنَّكَ لَتُلَقَّى ٱلْقُرْءَانَ مِن لَّدُنْ حَكِيمٍ عَلِيمٍ
जब मूसा ने अपने परिवार से कहा: “मैंने एक आग देखी है; मैं उसमें से तुम्हारे लिए कोई ख़बर लाऊँगा, या तुम्हारे लिए एक जलती हुई लकड़ी लाऊँगा, शायद तुम ताप सको।”
إِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِأَهْلِهِۦٓ إِنِّىٓ ءَانَسْتُ نَارًۭا سَـَٔاتِيكُم مِّنْهَا بِخَبَرٍ أَوْ ءَاتِيكُم بِشِهَابٍۢ قَبَسٍۢ لَّعَلَّكُمْ تَصْطَلُونَ
जब वह वहाँ पहुँचा, तो उसे पुकारा गया: “आशीषमय है वह जो आग में है और जो उसके आसपास है!
فَلَمَّا جَآءَهَا نُودِىَ أَنۢ بُورِكَ مَن فِى ٱلنَّارِ وَمَنْ حَوْلَهَا
और ईश्वर की महिमा हो, जो सभी प्राणियों का अभिभावक है!
وَسُبْحَٰنَ ٱللَّهِ رَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ
हे मूसा, मैं ही निश्चय ही ईश्वर हूँ, सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान। और अपनी लाठी फेंको।”
يَٰمُوسَىٰٓ إِنَّهُۥٓ أَنَا ٱللَّهُ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ وَأَلْقِ عَصَاكَ
जब उसने उसे थरथराते देखा मानो वह कोई प्रच्छन्न हो, तो वह पीठ फेरकर भागा और पीछे मुड़कर नहीं आया।
فَلَمَّا رَءَاهَا تَهْتَزُّ كَأَنَّهَا جَآنٌّۭ وَلَّىٰ مُدْبِرًۭا وَلَمْ يُعَقِّبْ
“हे मूसा, डरो मत;
يَٰمُوسَىٰ لَا تَخَفْ
मेरे पास, भेजे गए जन नहीं डरते,
إِنِّى لَا يَخَافُ لَدَىَّ ٱلْمُرْسَلُونَ
सिवा उसके जिसने अन्याय किया, फिर बुराई को भलाई से बदल दिया; तब, मैं निश्चय ही अत्यंत क्षमाशील, दयालु हूँ।
إِلَّا مَن ظَلَمَ ثُمَّ بَدَّلَ حُسْنًۢا بَعْدَ سُوٓءٍۢ فَإِنِّى غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ
और अपना हाथ अपने सीने के खुले भाग में डालो: वह श्वेत निकलेगा, बिना किसी बुराई के,
وَأَدْخِلْ يَدَكَ فِى جَيْبِكَ تَخْرُجْ بَيْضَآءَ مِنْ غَيْرِ سُوٓءٍۢ
नौ संकेतों में से, फ़िरऔन और उसकी क़ौम की ओर;
فِى تِسْعِ ءَايَٰتٍ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَقَوْمِهِۦٓ
क्योंकि वे अतिक्रमणकारियों की क़ौम थे।”
إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَوْمًۭا فَٰسِقِينَ
जब हमारे संकेत उनके पास आए, स्पष्ट दिखाई देते हुए, तो उन्होंने कहा: “यह स्पष्ट भ्रम है।”
فَلَمَّا جَآءَتْهُمْ ءَايَٰتُنَا مُبْصِرَةًۭ قَالُوا۟ هَٰذَا سِحْرٌۭ مُّبِينٌۭ
और उन्होंने उन्हें हठपूर्वक अस्वीकार किया, जबकि उनके स्व को उनका यक़ीन था, अन्याय और श्रेष्ठता के भाव से।
وَجَحَدُوا۟ بِهَا وَٱسْتَيْقَنَتْهَآ أَنفُسُهُمْ ظُلْمًۭا وَعُلُوًّۭا
तो नज़र डालो कि बिगाड़ने वालों का परिणाम कैसा रहा।
فَٱنظُرْ كَيْفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلْمُفْسِدِينَ
हमने निश्चय ही दाऊद और सुलैमान को ज्ञान दिया; और दोनों ने कहा: “प्रशंसा ईश्वर के लिए है, जिसने हमें अपने बहुत से विश्वास करने वाले आज्ञाकारियों पर वरीयता दी।”
وَلَقَدْ ءَاتَيْنَا دَاوُۥدَ وَسُلَيْمَٰنَ عِلْمًۭا وَقَالَا ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِى فَضَّلَنَا عَلَىٰ كَثِيرٍۢ مِّنْ عِبَادِهِ ٱلْمُؤْمِنِينَ
और सुलैमान दाऊद का उत्तराधिकारी हुआ, और उसने कहा: “हे लोगो, हमें पक्षियों की भाषा सिखाई गई है, और हमें हर चीज़ में से हिस्सा दिया गया है;
وَوَرِثَ سُلَيْمَٰنُ دَاوُۥدَ وَقَالَ يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ عُلِّمْنَا مَنطِقَ ٱلطَّيْرِ وَأُوتِينَا مِن كُلِّ شَىْءٍ
यह अवश्य स्पष्ट अनुग्रह है।”
إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ ٱلْفَضْلُ ٱلْمُبِينُ
और सुलैमान के लिए उसकी सेनाएँ इकट्ठा की गईं, प्रच्छन्नों, मनुष्यों और पक्षियों में से, और वे पंक्तियों में बाँटी गईं।
وَحُشِرَ لِسُلَيْمَٰنَ جُنُودُهُۥ مِنَ ٱلْجِنِّ وَٱلْإِنسِ وَٱلطَّيْرِ فَهُمْ يُوزَعُونَ
यहाँ तक कि जब वे चींटियों की घाटी में पहुँचे, तो एक चींटी ने कहा: “हे चींटियो, अपने आवासों में घुस जाओ, कहीं सुलैमान और उसकी सेनाएँ तुम्हें बिना आभास के कुचल न दें।”
حَتَّىٰٓ إِذَآ أَتَوْا۟ عَلَىٰ وَادِ ٱلنَّمْلِ قَالَتْ نَمْلَةٌۭ يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّمْلُ ٱدْخُلُوا۟ مَسَٰكِنَكُمْ لَا يَحْطِمَنَّكُمْ سُلَيْمَٰنُ وَجُنُودُهُۥ وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
वह उसकी बात से प्रसन्न होकर मुस्कुराया, और उसने कहा: “मेरे अभिभावक, मुझे प्रेरित कीजिए कि मैं आपके उस उपकार के लिए कृतज्ञ रहूँ जिससे आपने मुझे और मेरे माता-पिता को भर दिया, और ऐसा भला कर्म करूँ जो आपको संतुष्ट करे, और अपनी दया से मुझे अपने भले आज्ञाकारियों में प्रवेश दीजिए।”
فَتَبَسَّمَ ضَاحِكًۭا مِّن قَوْلِهَا وَقَالَ رَبِّ أَوْزِعْنِىٓ أَنْ أَشْكُرَ نِعْمَتَكَ ٱلَّتِىٓ أَنْعَمْتَ عَلَىَّ وَعَلَىٰ وَٰلِدَىَّ وَأَنْ أَعْمَلَ صَٰلِحًۭا تَرْضَىٰهُ وَأَدْخِلْنِى بِرَحْمَتِكَ فِى عِبَادِكَ ٱلصَّٰلِحِينَ
और उसने पक्षियों की जाँच की, और कहा: “मुझे क्या हुआ कि मैं हुदहुद को नहीं देख रहा? या वह अनुपस्थितों में से है?
وَتَفَقَّدَ ٱلطَّيْرَ فَقَالَ مَا لِىَ لَآ أَرَى ٱلْهُدْهُدَ أَمْ كَانَ مِنَ ٱلْغَآئِبِينَ
मैं उसे अवश्य कठोर दंड दूँगा, या उसका गला रेत दूँगा, जब तक कि वह मेरे पास कोई स्पष्ट अधिकार न ले आए।”
لَأُعَذِّبَنَّهُۥ عَذَابًۭا شَدِيدًا أَوْ لَأَا۟ذْبَحَنَّهُۥٓ أَوْ لَيَأْتِيَنِّى بِسُلْطَٰنٍۢ مُّبِينٍۢ
वह देर तक अनुपस्थित नहीं रहा,
فَمَكَثَ غَيْرَ بَعِيدٍۢ
और उसने कहा: “मैंने उसे घेर लिया है जिसे तुमने नहीं घेरा, और मैं तुम्हारे लिए सबा से एक पक्की सूचना लाया हूँ।
فَقَالَ أَحَطتُ بِمَا لَمْ تُحِطْ بِهِۦ وَجِئْتُكَ مِن سَبَإٍۭ بِنَبَإٍۢ يَقِينٍ
मैंने एक स्त्री को पाया जो उन पर राज करती है, और जिसे हर चीज़ दी गई है।
إِنِّى وَجَدتُّ ٱمْرَأَةًۭ تَمْلِكُهُمْ وَأُوتِيَتْ مِن كُلِّ شَىْءٍۢ
और उसके पास एक विशाल भवन है।
وَلَهَا عَرْشٌ عَظِيمٌۭ
और मैंने उसे और उसकी क़ौम को ईश्वर के अतिरिक्त सूर्य के सामने माथा टेकते पाया; और बहकाने वाले ने उनके कर्म उनके लिए सुंदर बना दिए, और इस प्रकार उनकी राह रोक दी, इसलिए वे मार्गदर्शन नहीं पाते, जिससे वे ईश्वर के सामने माथा नहीं टेकते, जो आकाशों और धरती में छिपा रखी चीज़ को बाहर निकालता है, और जानता है जो वे छिपाते हैं और जो वे उजागर करते हैं।
وَجَدتُّهَا وَقَوْمَهَا يَسْجُدُونَ لِلشَّمْسِ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَزَيَّنَ لَهُمُ ٱلشَّيْطَٰنُ أَعْمَٰلَهُمْ فَصَدَّهُمْ عَنِ ٱلسَّبِيلِ فَهُمْ لَا يَهْتَدُونَ أَلَّا يَسْجُدُوا۟ لِلَّهِ ٱلَّذِى يُخْرِجُ ٱلْخَبْءَ فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَيَعْلَمُ مَا تُخْفُونَ وَمَا تُعْلِنُونَ
ईश्वर, उसके सिवा कोई देवता नहीं, विशाल भवन का अभिभावक।”
ٱللَّهُ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ ٱلْعَرْشِ ٱلْعَظِيمِ
उसने कहा: “हम नज़र डालेंगे कि तुमने सच कहा है, या तुम झूठों में से हो।
قَالَ سَنَنظُرُ أَصَدَقْتَ أَمْ كُنتَ مِنَ ٱلْكَٰذِبِينَ
मेरी ओर से यह पत्र लेकर जाओ, इसे उनकी ओर फेंक दो, फिर उनसे हट जाओ, और नज़र डालो कि वे क्या लौटाएँगे।”
ٱذْهَب بِّكِتَٰبِى هَٰذَا فَأَلْقِهْ إِلَيْهِمْ ثُمَّ تَوَلَّ عَنْهُمْ فَٱنظُرْ مَاذَا يَرْجِعُونَ
उसने कहा: “हे दरबार, मेरी ओर एक सम्मानित पत्र फेंका गया है। वह सुलैमान की ओर से है, और उसमें यह है: ‘ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है; मेरे विरुद्ध अपने को ऊँचा मत करो, और ईश्वर के प्रति खरे होकर मेरे पास आओ।’”
قَالَتْ يَٰٓأَيُّهَا ٱلْمَلَؤُا۟ إِنِّىٓ أُلْقِىَ إِلَىَّ كِتَٰبٌۭ كَرِيمٌ إِنَّهُۥ مِن سُلَيْمَٰنَ وَإِنَّهُۥ بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ أَلَّا تَعْلُوا۟ عَلَىَّ وَأْتُونِى مُسْلِمِينَ
उसने कहा: “हे दरबार, मेरे मामले में मुझे अपनी राय दो; मैं कोई फ़ैसला तब तक नहीं लेती जब तक तुम उसके साक्षी न हो।”
قَالَتْ يَٰٓأَيُّهَا ٱلْمَلَؤُا۟ أَفْتُونِى فِىٓ أَمْرِى مَا كُنتُ قَاطِعَةً أَمْرًا حَتَّىٰ تَشْهَدُونِ
उन्होंने कहा: “हम बल रखने वाले और कठोर उग्रता रखने वाले हैं, पर मामला तुम्हारे ही पास है; इसलिए नज़र डालो कि तुम क्या आदेश देती हो।”
قَالُوا۟ نَحْنُ أُو۟لُوا۟ قُوَّةٍۢ وَأُو۟لُوا۟ بَأْسٍۢ شَدِيدٍۢ وَٱلْأَمْرُ إِلَيْكِ فَٱنظُرِى مَاذَا تَأْمُرِينَ
उसने कहा: “निश्चय ही, राजा जब किसी बस्ती में प्रवेश करते हैं, उसे बिगाड़ देते हैं, और उसके निवासियों के शक्तिशालियों को अपमानित कर देते हैं;
قَالَتْ إِنَّ ٱلْمُلُوكَ إِذَا دَخَلُوا۟ قَرْيَةً أَفْسَدُوهَا وَجَعَلُوٓا۟ أَعِزَّةَ أَهْلِهَآ أَذِلَّةًۭ
और वे ऐसा ही करते हैं।
وَكَذَٰلِكَ يَفْعَلُونَ
अब मैं उनके पास एक नज़राना भेजने वाली हूँ, और नज़र डालूँगी कि भेजे गए जन क्या लेकर लौटते हैं।”
وَإِنِّى مُرْسِلَةٌ إِلَيْهِم بِهَدِيَّةٍۢ فَنَاظِرَةٌۢ بِمَ يَرْجِعُ ٱلْمُرْسَلُونَ
जब वह सुलैमान के पास पहुँचा, उसने कहा: “क्या तुम मुझे संपत्ति से सुसज्जित करना चाहते हो? जो ईश्वर ने मुझे दिया है वह उससे बेहतर है जो उसने तुम्हें दिया; बल्कि तुम ही अपने नज़राने पर प्रसन्न होते हो।
فَلَمَّا جَآءَ سُلَيْمَٰنَ قَالَ أَتُمِدُّونَنِ بِمَالٍۢ فَمَآ ءَاتَىٰنِۦَ ٱللَّهُ خَيْرٌۭ مِّمَّآ ءَاتَىٰكُم بَلْ أَنتُم بِهَدِيَّتِكُمْ تَفْرَحُونَ
उनके पास लौट जाओ: हम अवश्य उनके पास ऐसी सेनाएँ लेकर आएँगे जिनका वे सामना नहीं कर सकेंगे, और हम अवश्य उन्हें वहाँ से अपमानित और तिरस्कृत करके निकाल देंगे।”
ٱرْجِعْ إِلَيْهِمْ فَلَنَأْتِيَنَّهُم بِجُنُودٍۢ لَّا قِبَلَ لَهُم بِهَا وَلَنُخْرِجَنَّهُم مِّنْهَآ أَذِلَّةًۭ وَهُمْ صَٰغِرُونَ
उसने कहा: “हे दरबार, तुममें से कौन मेरे पास उसका भवन ले आएगा, इससे पहले कि वे ईश्वर के प्रति खरे होकर मेरे पास आएँ?”
قَالَ يَٰٓأَيُّهَا ٱلْمَلَؤُا۟ أَيُّكُمْ يَأْتِينِى بِعَرْشِهَا قَبْلَ أَن يَأْتُونِى مُسْلِمِينَ
प्रच्छन्नों में से एक इफ़रीत ने कहा: “मैं उसे तुम्हारे पास ले आऊँगा, इससे पहले कि तुम अपने स्थान से उठो; और इसके लिए मैं अवश्य बलवान और भरोसेमंद हूँ।”
قَالَ عِفْرِيتٌۭ مِّنَ ٱلْجِنِّ أَنَا۠ ءَاتِيكَ بِهِۦ قَبْلَ أَن تَقُومَ مِن مَّقَامِكَ وَإِنِّى عَلَيْهِ لَقَوِىٌّ أَمِينٌۭ
जिसके पास संहिता का एक ज्ञान था उसने कहा: “मैं उसे तुम्हारे पास तुम्हारी दृष्टि के तुम्हारी ओर वापस आने से भी पहले ले आऊँगा।”
قَالَ ٱلَّذِى عِندَهُۥ عِلْمٌۭ مِّنَ ٱلْكِتَٰبِ أَنَا۠ ءَاتِيكَ بِهِۦ قَبْلَ أَن يَرْتَدَّ إِلَيْكَ طَرْفُكَ
जब उसने उसे अपने पास टिका हुआ देखा, उसने कहा: “यह मेरे अभिभावक के अनुग्रह से है, मुझे परखने के लिए: क्या मैं कृतज्ञ होऊँगा, या नकारूँगा?
فَلَمَّا رَءَاهُ مُسْتَقِرًّا عِندَهُۥ قَالَ هَٰذَا مِن فَضْلِ رَبِّى لِيَبْلُوَنِىٓ ءَأَشْكُرُ أَمْ أَكْفُرُ
और जो कृतज्ञ होता है वह केवल अपने लिए ही कृतज्ञ होता है,
وَمَن شَكَرَ فَإِنَّمَا يَشْكُرُ لِنَفْسِهِۦ
और जो नकारता है, तो मेरा अभिभावक निश्चय ही धनी, उदार है।”
وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ رَبِّى غَنِىٌّۭ كَرِيمٌۭ
उसने कहा: “उसके लिए उसके भवन को पहचान से परे बना दो; हम नज़र डालेंगे कि वह मार्गदर्शन पाती है, या उनमें से है जो मार्गदर्शन नहीं पाते।”
قَالَ نَكِّرُوا۟ لَهَا عَرْشَهَا نَنظُرْ أَتَهْتَدِىٓ أَمْ تَكُونُ مِنَ ٱلَّذِينَ لَا يَهْتَدُونَ
जब वह आई, उससे कहा गया: “क्या तुम्हारा भवन ऐसा ही है?” उसने कहा: “यह मानो वही है।
فَلَمَّا جَآءَتْ قِيلَ أَهَٰكَذَا عَرْشُكِ قَالَتْ كَأَنَّهُۥ هُوَ
और हमें उससे पहले ही ज्ञान दिया जा चुका था, और हम ईश्वर के प्रति खरे थे।”
وَأُوتِينَا ٱلْعِلْمَ مِن قَبْلِهَا وَكُنَّا مُسْلِمِينَ
और ईश्वर के अतिरिक्त वह जिसकी आज्ञा का पालन करती थी, उसने उसकी राह रोक दी थी;
وَصَدَّهَا مَا كَانَت تَّعْبُدُ مِن دُونِ ٱللَّهِ
क्योंकि वह नकारने वाली क़ौम से थी।
إِنَّهَا كَانَتْ مِن قَوْمٍۢ كَٰفِرِينَ
उससे कहा गया: “अवलोकन-मंडप में प्रवेश करो।”
قِيلَ لَهَا ٱدْخُلِى ٱلصَّرْحَ
जब उसने उसे देखा, उसने उसे जल का विस्तार समझा, और अपनी टाँगें उघाड़ दीं।
فَلَمَّا رَأَتْهُ حَسِبَتْهُ لُجَّةًۭ وَكَشَفَتْ عَن سَاقَيْهَا
उसने कहा: “यह स्फटिक से बना एक चमकाया हुआ अवलोकन-मंडप है।”
قَالَ إِنَّهُۥ صَرْحٌۭ مُّمَرَّدٌۭ مِّن قَوَارِيرَ
उसने कहा: “मेरे अभिभावक, मैंने निश्चय ही अपने पर अन्याय किया है, और मैं सुलैमान के साथ ईश्वर के प्रति खरी हूँ, जो सभी प्राणियों का अभिभावक है।”
قَالَتْ رَبِّ إِنِّى ظَلَمْتُ نَفْسِى وَأَسْلَمْتُ مَعَ سُلَيْمَٰنَ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ
हमने निश्चय ही समूद की ओर उनके भाई सालेह को भेजा: “ईश्वर की आज्ञा का पालन करो”; और देखो, वे दो भाग हैं जो झगड़ते हैं।
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَآ إِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمْ صَٰلِحًا أَنِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ فَإِذَا هُمْ فَرِيقَانِ يَخْتَصِمُونَ
उसने कहा: “हे मेरी क़ौम, तुम भलाई से पहले बुराई को जल्दी क्यों चाहते हो? क्या तुम ईश्वर से क्षमा नहीं माँगते, इस आशा में कि वह तुम पर दया करेगा?”
قَالَ يَٰقَوْمِ لِمَ تَسْتَعْجِلُونَ بِٱلسَّيِّئَةِ قَبْلَ ٱلْحَسَنَةِ لَوْلَا تَسْتَغْفِرُونَ ٱللَّهَ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
उन्होंने कहा: “हम तुममें और तुम्हारे साथ वालों में अपशकुन देखते हैं।”
قَالُوا۟ ٱطَّيَّرْنَا بِكَ وَبِمَن مَّعَكَ
उसने कहा: “तुम्हारा अपशकुन ईश्वर के पास है;
قَالَ طَٰٓئِرُكُمْ عِندَ ٱللَّهِ
बल्कि तुम ऐसी क़ौम हो जिसे परीक्षा में डाला जाता है।”
بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌۭ تُفْتَنُونَ
और राजधानी में नौ व्यक्ति थे जो धरती पर बिगाड़ फैलाते थे और कुछ भी सुधारते न थे।
وَكَانَ فِى ٱلْمَدِينَةِ تِسْعَةُ رَهْطٍۢ يُفْسِدُونَ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَا يُصْلِحُونَ
उन्होंने कहा: “आपस में ईश्वर की शपथ लो कि हम रात में उस पर और उसके परिवार पर अवश्य आक्रमण करेंगे, फिर उसके विधिक उत्तरदायी से अवश्य कहेंगे: ‘हम उसके परिवार के विनाश के समय उपस्थित नहीं थे, और हम अवश्य सच्चे हैं।’”
قَالُوا۟ تَقَاسَمُوا۟ بِٱللَّهِ لَنُبَيِّتَنَّهُۥ وَأَهْلَهُۥ ثُمَّ لَنَقُولَنَّ لِوَلِيِّهِۦ مَا شَهِدْنَا مَهْلِكَ أَهْلِهِۦ وَإِنَّا لَصَٰدِقُونَ
और उन्होंने एक षड्यंत्र किया, और हमने एक षड्यंत्र किया, और उन्हें आभास न हुआ।
وَمَكَرُوا۟ مَكْرًۭا وَمَكَرْنَا مَكْرًۭا وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
तो नज़र डालो कि उनके षड्यंत्र का परिणाम कैसा रहा:
فَٱنظُرْ كَيْفَ كَانَ عَٰقِبَةُ مَكْرِهِمْ
हमने उन्हें और उनकी क़ौम को, सबको एक साथ, ध्वस्त कर दिया।
أَنَّا دَمَّرْنَٰهُمْ وَقَوْمَهُمْ أَجْمَعِينَ
तो ये हैं उनके घर, उनके अन्याय के कारण सूने पड़े हुए।
فَتِلْكَ بُيُوتُهُمْ خَاوِيَةًۢ بِمَا ظَلَمُوٓا۟
इसमें अवश्य एक संकेत है उस क़ौम के लिए जो जानती है।
إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَءَايَةًۭ لِّقَوْمٍۢ يَعْلَمُونَ
और हमने उन्हें उबारा जिन्होंने विश्वास किया था और सावधान रहते थे।
وَأَنجَيْنَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَكَانُوا۟ يَتَّقُونَ
और लूत, जब उसने अपनी क़ौम से कहा: “क्या तुम निर्लज्जता करते हो जबकि तुम स्पष्ट देखते हो?
وَلُوطًا إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِۦٓ أَتَأْتُونَ ٱلْفَٰحِشَةَ وَأَنتُمْ تُبْصِرُونَ
क्या तुम सचमुच स्त्रियों के अतिरिक्त कामना से पुरुषों के पास आते हो?
أَئِنَّكُمْ لَتَأْتُونَ ٱلرِّجَالَ شَهْوَةًۭ مِّن دُونِ ٱلنِّسَآءِ
बल्कि तुम अज्ञानी क़ौम हो।”
بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌۭ تَجْهَلُونَ
उसकी क़ौम का उत्तर केवल यही था कि उन्होंने कहा: “लूत के कुल को अपनी बस्ती से निकाल दो;
فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهِۦٓ إِلَّآ أَن قَالُوٓا۟ أَخْرِجُوٓا۟ ءَالَ لُوطٍۢ مِّن قَرْيَتِكُمْ
क्योंकि ये ऐसे पुरुष हैं जो स्वच्छ रहना चाहते हैं।”
إِنَّهُمْ أُنَاسٌۭ يَتَطَهَّرُونَ
तो हमने उसे और उसके परिवार को उबार लिया, उसकी पत्नी के सिवा; हमने ठहराया था कि वह पीछे रह जाने वालों में होगी।
فَأَنجَيْنَٰهُ وَأَهْلَهُۥٓ إِلَّا ٱمْرَأَتَهُۥ قَدَّرْنَٰهَا مِنَ ٱلْغَٰبِرِينَ
और हमने उन पर एक वर्षा बरसाई;
وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَرًۭا
कितनी बुरी वर्षा थी उनकी जिन्हें चेतावनी दी जा चुकी थी!
فَسَآءَ مَطَرُ ٱلْمُنذَرِينَ
कहो: “प्रशंसा ईश्वर के लिए है, और उसके चुने हुए आज्ञाकारियों पर शांति हो।
قُلِ ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ وَسَلَٰمٌ عَلَىٰ عِبَادِهِ ٱلَّذِينَ ٱصْطَفَىٰٓ
क्या ईश्वर बेहतर है, या वह जिसे तुम साझी ठहराते हो?”
ءَآللَّهُ خَيْرٌ أَمَّا يُشْرِكُونَ
क्या वह नहीं जिसने आकाशों और धरती को रचा, और तुम्हारे लिए आकाश से पानी उतारा, जिससे हमने रमणीयता से भरे घिरे उद्यान उगाए,
أَمَّنْ خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَأَنزَلَ لَكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۭ فَأَنۢبَتْنَا بِهِۦ حَدَآئِقَ ذَاتَ بَهْجَةٍۢ
जबकि तुम्हारे लिए उनके वृक्ष उगाना संभव न था?
مَّا كَانَ لَكُمْ أَن تُنۢبِتُوا۟ شَجَرَهَآ
क्या ईश्वर के साथ कोई देवता है?
أَءِلَٰهٌۭ مَّعَ ٱللَّهِ
बल्कि वे ऐसी क़ौम हैं जो उसके लिए प्रतिभार खड़े करती है।
بَلْ هُمْ قَوْمٌۭ يَعْدِلُونَ
क्या वह नहीं जिसने धरती को टिकने योग्य स्थान बनाया, उसके बीच नदियाँ रखीं, उसके लिए दृढ़ खूँटे रखे, और दो समुद्रों के बीच एक आड़ रखी?
أَمَّن جَعَلَ ٱلْأَرْضَ قَرَارًۭا وَجَعَلَ خِلَٰلَهَآ أَنْهَٰرًۭا وَجَعَلَ لَهَا رَوَٰسِىَ وَجَعَلَ بَيْنَ ٱلْبَحْرَيْنِ حَاجِزًا
क्या ईश्वर के साथ कोई देवता है?
أَءِلَٰهٌۭ مَّعَ ٱللَّهِ
परंतु उनमें से अधिकतर नहीं जानते।
بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
क्या वह नहीं जो विवश को उत्तर देता है जब वह उसे पुकारता है, बुराई को दूर करता है, और तुम्हें धरती पर उत्तराधिकारी बनाता है?
أَمَّن يُجِيبُ ٱلْمُضْطَرَّ إِذَا دَعَاهُ وَيَكْشِفُ ٱلسُّوٓءَ وَيَجْعَلُكُمْ خُلَفَآءَ ٱلْأَرْضِ
क्या ईश्वर के साथ कोई देवता है?
أَءِلَٰهٌۭ مَّعَ ٱللَّهِ
कितना कम तुम स्मरण करते हो!
قَلِيلًۭا مَّا تَذَكَّرُونَ
क्या वह नहीं जो तुम्हें थल और समुद्र के अँधेरों में मार्ग दिखाता है, और हवाओं को अपनी दया के आगे शुभ समाचार देने वाली बनाकर भेजता है?
أَمَّن يَهْدِيكُمْ فِى ظُلُمَٰتِ ٱلْبَرِّ وَٱلْبَحْرِ وَمَن يُرْسِلُ ٱلرِّيَٰحَ بُشْرًۢا بَيْنَ يَدَىْ رَحْمَتِهِۦٓ
क्या ईश्वर के साथ कोई देवता है?
أَءِلَٰهٌۭ مَّعَ ٱللَّهِ
ईश्वर उससे बहुत ऊपर है जिसे वे उसका साझी ठहराते हैं!
تَعَٰلَى ٱللَّهُ عَمَّا يُشْرِكُونَ
क्या वह नहीं जो रचना का आरंभ करता है, फिर उसे दोहराता है, और तुम्हें आकाश और धरती से जीविका देता है?
أَمَّن يَبْدَؤُا۟ ٱلْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُۥ وَمَن يَرْزُقُكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ
क्या ईश्वर के साथ कोई देवता है?
أَءِلَٰهٌۭ مَّعَ ٱللَّهِ
कहो: “अपना प्रमाण लाओ, यदि तुम सच्चे हो।”
قُلْ هَاتُوا۟ بُرْهَٰنَكُمْ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَ
कहो: “आकाशों और धरती में जो इंद्रियों से परे है, उसे कोई नहीं जानता, ईश्वर के सिवा;
قُل لَّا يَعْلَمُ مَن فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ٱلْغَيْبَ إِلَّا ٱللَّهُ
और उन्हें आभास नहीं कि वे कब उठाए जाएँगे।”
وَمَا يَشْعُرُونَ أَيَّانَ يُبْعَثُونَ
बल्कि अंतिम जीवन के विषय में उनका ज्ञान अपनी सीमा तक पहुँच गया है;
بَلِ ٱدَّٰرَكَ عِلْمُهُمْ فِى ٱلْءَاخِرَةِ
बल्कि वे उसके विषय में दुविधा में हैं, बल्कि वे उसके विषय में अंधे हैं।
بَلْ هُمْ فِى شَكٍّۢ مِّنْهَا بَلْ هُم مِّنْهَا عَمُونَ
और जिन्होंने नकारा उन्होंने कहा: “जब हम मिट्टी हो जाएँगे, हम और हमारे पूर्वज, तो क्या हम सचमुच बाहर निकाले जाएँगे?
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ أَءِذَا كُنَّا تُرَٰبًۭا وَءَابَآؤُنَآ أَئِنَّا لَمُخْرَجُونَ
हमसे और हमारे पूर्वजों से इसका वादा पहले भी निश्चय ही किया गया है;
لَقَدْ وُعِدْنَا هَٰذَا نَحْنُ وَءَابَآؤُنَا مِن قَبْلُ
ये तो केवल प्राचीनों की दंतकथाएँ हैं।”
إِنْ هَٰذَآ إِلَّآ أَسَٰطِيرُ ٱلْأَوَّلِينَ
कहो: “धरती में घूमो, और नज़र डालो कि बहिष्कृतों का परिणाम कैसा रहा।”
قُلْ سِيرُوا۟ فِى ٱلْأَرْضِ فَٱنظُرُوا۟ كَيْفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلْمُجْرِمِينَ
और उनके लिए दुखी मत हो, और उनके षड्यंत्रों के कारण संकुचित मत हो।
وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَلَا تَكُن فِى ضَيْقٍۢ مِّمَّا يَمْكُرُونَ
और वे कहते हैं: “यह वादा कब है, यदि तुम सच्चे हो?”
وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا ٱلْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَ
कहो: “संभव है कि जिसे तुम जल्दी चाहते हो उसका कुछ भाग तुम्हारे पीछे ही लगा हो।”
قُلْ عَسَىٰٓ أَن يَكُونَ رَدِفَ لَكُم بَعْضُ ٱلَّذِى تَسْتَعْجِلُونَ
और तुम्हारा अभिभावक लोगों पर अवश्य अनुग्रह रखता है,
وَإِنَّ رَبَّكَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى ٱلنَّاسِ
परंतु उनमें से अधिकतर कृतज्ञ नहीं होते।
وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَشْكُرُونَ
और तुम्हारा अभिभावक अवश्य जानता है जो उनके सीने छिपाए रखते हैं और जो वे उजागर करते हैं।
وَإِنَّ رَبَّكَ لَيَعْلَمُ مَا تُكِنُّ صُدُورُهُمْ وَمَا يُعْلِنُونَ
और आकाश और धरती में ऐसी कोई चीज़ नहीं जो इंद्रियों से परे हो और स्पष्ट बही में न हो।
وَمَا مِنْ غَآئِبَةٍۢ فِى ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ إِلَّا فِى كِتَٰبٍۢ مُّبِينٍ
यह पाठ इसराईल की संतान को उसका अधिकतर बताता है जिस पर वे मतभेद रखते हैं।
إِنَّ هَٰذَا ٱلْقُرْءَانَ يَقُصُّ عَلَىٰ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ أَكْثَرَ ٱلَّذِى هُمْ فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
और वह अवश्य मार्गदर्शन और दया है विश्वास करने वालों के लिए।
وَإِنَّهُۥ لَهُدًۭى وَرَحْمَةٌۭ لِّلْمُؤْمِنِينَ
तुम्हारा अभिभावक निश्चय ही अपने निर्णय से उनके बीच फ़ैसला करता है,
إِنَّ رَبَّكَ يَقْضِى بَيْنَهُم بِحُكْمِهِۦ
और वही सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ है।
وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْعَلِيمُ
तो ईश्वर को मुख़्तार बनाओ,
فَتَوَكَّلْ عَلَى ٱللَّهِ
क्योंकि तुम स्पष्ट सत्य पर हो।
إِنَّكَ عَلَى ٱلْحَقِّ ٱلْمُبِينِ
तुम मृतकों को नहीं सुनवाते, और बहरों को बुलावा नहीं सुनवाते, जब वे पीठ फेरकर चले जाते हैं।
إِنَّكَ لَا تُسْمِعُ ٱلْمَوْتَىٰ وَلَا تُسْمِعُ ٱلصُّمَّ ٱلدُّعَآءَ إِذَا وَلَّوْا۟ مُدْبِرِينَ
और तुम अंधों को उनके भटकाव से बाहर मार्ग दिखाने वाले नहीं हो;
وَمَآ أَنتَ بِهَٰدِى ٱلْعُمْىِ عَن ضَلَٰلَتِهِمْ
तुम केवल उसी को सुनवाते हो जो हमारे संकेतों पर विश्वास करता है, और वे ईश्वर के प्रति खरे हैं।
إِن تُسْمِعُ إِلَّا مَن يُؤْمِنُ بِـَٔايَٰتِنَا فَهُم مُّسْلِمُونَ
और जब कथन उन पर पूरा होगा, हम उनके लिए धरती में से एक चेतन प्राणी निकालेंगे, जो उनसे बोलेगा,
وَإِذَا وَقَعَ ٱلْقَوْلُ عَلَيْهِمْ أَخْرَجْنَا لَهُمْ دَآبَّةًۭ مِّنَ ٱلْأَرْضِ تُكَلِّمُهُمْ
इस कारण कि लोगों को हमारे संकेतों पर यक़ीन नहीं था।
أَنَّ ٱلنَّاسَ كَانُوا۟ بِـَٔايَٰتِنَا لَا يُوقِنُونَ
और जिस दिन हम हर समुदाय से, हमारे संकेतों को झुठलाने वालों में से, एक भीड़ इकट्ठा करेंगे, उन्हें पंक्तियों में बाँटा जाएगा,
وَيَوْمَ نَحْشُرُ مِن كُلِّ أُمَّةٍۢ فَوْجًۭا مِّمَّن يُكَذِّبُ بِـَٔايَٰتِنَا فَهُمْ يُوزَعُونَ
यहाँ तक कि जब वे पहुँचेंगे, वह कहेगा: “क्या तुमने मेरे संकेतों को झुठलाया, जबकि तुमने उन्हें ज्ञान से घेरा नहीं था?
حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءُو قَالَ أَكَذَّبْتُم بِـَٔايَٰتِى وَلَمْ تُحِيطُوا۟ بِهَا عِلْمًا
या फिर, तुम क्या करते थे?”
أَمَّاذَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और कथन उन पर उनके अन्याय के कारण पूरा होगा, और उनसे कुछ उच्चारित नहीं होगा।
وَوَقَعَ ٱلْقَوْلُ عَلَيْهِم بِمَا ظَلَمُوا۟ فَهُمْ لَا يَنطِقُونَ
क्या वे नहीं देखते कि हमने रात बनाई ताकि वे उसमें विश्राम करें, और दिन ताकि वे उसमें स्पष्ट देखें?
أَلَمْ يَرَوْا۟ أَنَّا جَعَلْنَا ٱلَّيْلَ لِيَسْكُنُوا۟ فِيهِ وَٱلنَّهَارَ مُبْصِرًا
इसमें अवश्य संकेत हैं उस क़ौम के लिए जो विश्वास करती है।
إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَءَايَٰتٍۢ لِّقَوْمٍۢ يُؤْمِنُونَ
और जिस दिन नरसिंगा फूँका जाएगा, वे घबराहट से भर जाएँगे जो आकाशों में हैं और जो धरती पर हैं, उनके सिवा जिन पर ईश्वर की मर्ज़ी हो;
وَيَوْمَ يُنفَخُ فِى ٱلصُّورِ فَفَزِعَ مَن فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَن فِى ٱلْأَرْضِ إِلَّا مَن شَآءَ ٱللَّهُ
और सभी उसके पास आएँगे, नतमस्तक होकर।
وَكُلٌّ أَتَوْهُ دَٰخِرِينَ
और तुम पहाड़ों को देखते हो, उन्हें जमे हुए समझते हो, जबकि वे बादलों के गुज़रने की तरह गुज़रते हैं:
وَتَرَى ٱلْجِبَالَ تَحْسَبُهَا جَامِدَةًۭ وَهِىَ تَمُرُّ مَرَّ ٱلسَّحَابِ
ईश्वर की कृति, जिसने हर चीज़ को परिपूर्ण किया,
صُنْعَ ٱللَّهِ ٱلَّذِىٓ أَتْقَنَ كُلَّ شَىْءٍ
क्योंकि वह तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।
إِنَّهُۥ خَبِيرٌۢ بِمَا تَفْعَلُونَ
जो कोई भलाई लेकर आता है, उसे उससे बेहतर मिलेगा, और वे उस दिन घबराहट से सुरक्षित होंगे।
مَن جَآءَ بِٱلْحَسَنَةِ فَلَهُۥ خَيْرٌۭ مِّنْهَا وَهُم مِّن فَزَعٍۢ يَوْمَئِذٍ ءَامِنُونَ
और जो कोई बुराई लेकर आता है, तो उनके चेहरे आग में औंधे गिराए जाएँगे।
وَمَن جَآءَ بِٱلسَّيِّئَةِ فَكُبَّتْ وُجُوهُهُمْ فِى ٱلنَّارِ
क्या तुम्हें उसके सिवा किसी और का प्रतिफल दिया जाएगा जो तुम करते थे?
هَلْ تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
“मुझे केवल यह आदेश दिया गया है कि मैं इस देश के अभिभावक की आज्ञा का पालन करूँ, जिसे उसने अलंघनीय बनाया है, और जिसकी हर चीज़ है;
إِنَّمَآ أُمِرْتُ أَنْ أَعْبُدَ رَبَّ هَٰذِهِ ٱلْبَلْدَةِ ٱلَّذِى حَرَّمَهَا وَلَهُۥ كُلُّ شَىْءٍۢ
और मुझे आदेश दिया गया है कि मैं ईश्वर के प्रति खरों में से रहूँ, और पाठ सुनाऊँ।”
وَأُمِرْتُ أَنْ أَكُونَ مِنَ ٱلْمُسْلِمِينَ وَأَنْ أَتْلُوَا۟ ٱلْقُرْءَانَ
जो कोई मार्गदर्शन पाता है वह केवल अपने लिए ही मार्गदर्शन पाता है,
فَمَنِ ٱهْتَدَىٰ فَإِنَّمَا يَهْتَدِى لِنَفْسِهِۦ
और जो कोई भटकता है, तो कहो: “मैं तो केवल चेतावनी देने वालों में से एक हूँ।”
وَمَن ضَلَّ فَقُلْ إِنَّمَآ أَنَا۠ مِنَ ٱلْمُنذِرِينَ
और कहो: “प्रशंसा ईश्वर के लिए है; वह तुम्हें अपने संकेत दिखाएगा, और तुम उन्हें पहचान लोगे।”
وَقُلِ ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ سَيُرِيكُمْ ءَايَٰتِهِۦ فَتَعْرِفُونَهَا
और तुम्हारा अभिभावक उससे लापरवाह नहीं है जो तुम करते हो।
وَمَا رَبُّكَ بِغَٰفِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ