العنكبوت
Al-Ankabut
The Spider
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। अलिफ़. लाम. मीम.
بِسْمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحْمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ أَلَٓمِّٓۖ
क्या लोग सोचते हैं कि उन्हें छोड़ दिया जाएगा, इस कारण कि वे कहते हैं: “हम विश्वास करते हैं”, और उन्हें परीक्षा में नहीं डाला जाएगा?
اَحَسِبَ اَ۬لنَّاسُ أَنْ يُّتْرَكُوٓاْ أَنْ يَّقُولُوٓاْ ءَامَنَّا وَهُمْ لَا يُفْتَنُونَۖ
हमने तो उन्हें परीक्षा में डाला जो उनसे पहले थे,
وَلَقَدْ فَتَنَّا اَ۬لذِينَ مِن قَبْلِهِمْۖ
ताकि ईश्वर अवश्य उन्हें अलग कर दे जिन्होंने सच कहा, और अवश्य झूठों को अलग कर दे।
فَلَيَعْلَمَنَّ اَ۬للَّهُ اُ۬لذِينَ صَدَقُواْ وَلَيَعْلَمَنَّ اَ۬لْكَٰذِبِينَۖ
या फिर क्या वे जो बुराई करते हैं सोचते हैं कि वे हमसे आगे निकल जाएँगे?
أَمْ حَسِبَ اَ۬لذِينَ يَعْمَلُونَ اَ۬لسَّيِّـَٔاتِ أَنْ يَّسْبِقُونَاۖ
कितना बुरा है उनका निर्णय!
سَآءَ مَا يَحْكُمُونَۖ
जो कोई ईश्वर से मिलने की आशा रखता है — ईश्वर की ठहराई हुई अवधि अवश्य आएगी;
مَن كَانَ يَرْجُواْ لِقَآءَ اَ۬للَّهِ فَإِنَّ أَجَلَ اَ۬للَّهِ لَأٓتٖۖ
और वह सुनने वाला, सर्वज्ञ है।
وَهُوَ اَ۬لسَّمِيعُ اُ۬لْعَلِيمُۖ
और जो कोई संघर्ष करता है वह केवल अपने लिए ही संघर्ष करता है,
وَمَن جَٰهَدَ فَإِنَّمَا يُجَٰهِدُ لِنَفْسِهِۦٓۖ
क्योंकि ईश्वर अवश्य धनी है, और सभी प्राणियों से निस्पृह है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ لَغَنِيٌّ عَنِ اِ۬لْعَٰلَمِينَۖ
और जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, हम उनके बुरे कर्मों को अवश्य ढक देंगे, और उन्हें उसके सबसे सुंदर के अनुसार अवश्य प्रतिफल देंगे जो वे करते थे।
وَالذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ لَنُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّـَٔاتِهِمْ وَلَنَجْزِيَنَّهُمُۥٓ أَحْسَنَ اَ۬لذِے كَانُواْ يَعْمَلُونَۖ
और हमने मनुष्य को उसके दोनों माता-पिता के साथ सुंदर आचरण की अनुशंसा की;
۞ وَوَصَّيْنَا اَ۬لِانسَٰنَ بِوَٰلِدَيْهِ حُسْناٗۖ
परंतु यदि वे तुमसे संघर्ष करें कि तुम मेरे साथ उसे साझी ठहराओ जिसका तुम्हें कोई ज्ञान नहीं, तो उनकी बात मत मानो;
وَإِن جَٰهَدَٰكَ لِتُشْرِكَ بِے مَا لَيْسَ لَكَ بِهِۦ عِلْمٞ فَلَا تُطِعْهُمَآۖ
मेरी ही ओर तुम्हारा लौटना है, और तब मैं तुम्हें सूचित करूँगा कि तुम क्या करते थे।
إِلَيَّ مَرْجِعُكُمْ فَأُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَۖ
और जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, हम उन्हें अवश्य भलों में प्रवेश कराएँगे।
وَالذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ لَنُدْخِلَنَّهُمْ فِے اِ۬لصَّٰلِحِينَۖ
और लोगों में से कुछ ऐसे हैं जो कहते हैं: “हम ईश्वर पर विश्वास करते हैं”; फिर, जैसे ही ईश्वर के लिए उन्हें सताया जाता है, वे लोगों की दी हुई परीक्षा को ईश्वर के दंड के बराबर मान लेते हैं।
وَمِنَ اَ۬لنَّاسِ مَنْ يَّقُولُ ءَامَنَّا بِاللَّهِ فَإِذَآ أُوذِيَ فِے اِ۬للَّهِ جَعَلَ فِتْنَةَ اَ۬لنَّاسِ كَعَذَابِ اِ۬للَّهِۖ
और यदि तुम्हारे अभिभावक की ओर से कोई सहायता आती है, तो वे अवश्य कहेंगे: “हम निश्चय ही तुम्हारे साथ थे।”
وَلَئِن جَآءَ نَصْرٞ مِّن رَّبِّكَ لَيَقُولُنَّ إِنَّا كُنَّا مَعَكُمُۥٓۖ
क्या ईश्वर सबसे अच्छी तरह नहीं जानता जो सभी प्राणियों के सीनों में है?
أَوَلَيْسَ اَ۬للَّهُ بِأَعْلَمَ بِمَا فِے صُدُورِ اِ۬لْعَٰلَمِينَۖ
और ईश्वर अवश्य अलग कर देगा उन्हें जिन्होंने विश्वास किया, और अवश्य अलग कर देगा पाखंडियों को।
وَلَيَعْلَمَنَّ اَ۬للَّهُ اُ۬لذِينَ ءَامَنُواْ وَلَيَعْلَمَنَّ اَ۬لْمُنَٰفِقِينَۖ
और नकारने वालों ने विश्वास करने वालों से कहा: “हमारी राह का अनुसरण करो, और हम तुम्हारी भूलें वहन कर लेंगे” —
وَقَالَ اَ۬لذِينَ كَفَرُواْ لِلذِينَ ءَامَنُواْ اُ۪تَّبِعُواْ سَبِيلَنَا وَلْنَحْمِلْ خَطَٰيٰ۪كُمْۖ
जबकि वे उनकी भूलों में से कुछ भी वहन नहीं करेंगे;
وَمَا هُم بِحَٰمِلِينَ مِنْ خَطَٰيٰ۪هُم مِّن شَےْءٍۖ
वे अवश्य झूठे हैं।
اِنَّهُمْ لَكَٰذِبُونَۖ
और वे अवश्य अपने बोझ वहन करेंगे, और अपने बोझों के साथ और बोझ भी;
وَلَيَحْمِلُنَّ أَثْقَالَهُمْ وَأَثْقَالاٗ مَّعَ أَثْقَالِهِمْۖ
और उनसे अवश्य पूछा जाएगा, पेशी के दिन, उसके विषय में जो वे गढ़ते थे।
وَلَيُسْـَٔلُنَّ يَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِ عَمَّا كَانُواْ يَفْتَرُونَۖ
हमने निश्चय ही नूह को उसकी क़ौम की ओर भेजा, और उसने उनके बीच हज़ार वर्ष, प्रचलित पंचांग के पचास साल कम, बिताए, फिर बाढ़ ने उन्हें पकड़ लिया जबकि वे अन्यायी थे।
وَلَقَدَ اَرْسَلْنَا نُوحاً اِلَىٰ قَوْمِهِۦ فَلَبِثَ فِيهِمُۥٓ أَلْفَ سَنَةٍ اِلَّا خَمْسِينَ عَاماٗ فَأَخَذَهُمُ اُ۬لطُّوفَانُ وَهُمْ ظَٰلِمُونَۖ
हमने उसे और नाव वालों को उबारा,
فَأَنجَيْنَٰهُ وَأَصْحَٰبَ اَ۬لسَّفِينَةِۖ
और हमने उसे सभी प्राणियों के लिए एक संकेत बनाया।
وَجَعَلْنَٰهَآ ءَايَةٗ لِّلْعَٰلَمِينَۖ
और इब्राहीम, जब उसने अपनी क़ौम से कहा: “ईश्वर की आज्ञा का पालन करो और उसके प्रति सावधान रहो;
وَإِبْرَٰهِيمَ إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ اِ۟عْبُدُواْ اُ۬للَّهَ وَاتَّقُوهُۖ
यह तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम जानते।
ذَٰلِكُمْ خَيْرٞ لَّكُمُۥٓ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَۖ
तुम ईश्वर के अतिरिक्त केवल प्रतिरूपों की आज्ञा का पालन करते हो, और एक स्वांग रचते हो;
۞ إِنَّمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اِ۬للَّهِ أَوْثَٰناٗ وَتَخْلُقُونَ إِفْكاًۖ
ईश्वर के अतिरिक्त जिनकी तुम आज्ञा का पालन करते हो वे निश्चय ही तुम्हारे लिए किसी जीविका के मालिक नहीं —
اِنَّ اَ۬لذِينَ تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اِ۬للَّهِ لَا يَمْلِكُونَ لَكُمْ رِزْقاٗۖ
इसलिए ईश्वर के पास जीविका खोजो,
فَابْتَغُواْ عِندَ اَ۬للَّهِ اِ۬لرِّزْقَۖ
उसकी आज्ञा का पालन करो,
وَاعْبُدُوهُۖ
और उसके प्रति कृतज्ञ रहो;
وَاشْكُرُواْ لَهُۥٓۖ
उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।
إِلَيْهِ تُرْجَعُونَۖ
और यदि तुम झुठलाओ, तो तुमसे पहले के समुदाय पहले ही झुठला चुके हैं;
وَإِن تُكَذِّبُواْ فَقَدْ كَذَّبَ أُمَمٞ مِّن قَبْلِكُمْۖ
और संदेशवाहक पर केवल स्पष्ट संप्रेषण का दायित्व है।”
وَمَا عَلَى اَ۬لرَّسُولِ إِلَّا اَ۬لْبَلَٰغُ اُ۬لْمُبِينُۖ
क्या वे नहीं देखते कि ईश्वर रचना का आरंभ कैसे करता है,
أَوَلَمْ يَرَوْاْ كَيْفَ يُبْدِۓُ اُ۬للَّهُ اُ۬لْخَلْقَۖ
फिर उसे दोहराता है?
ثُمَّ يُعِيدُهُۥٓۖ
यह ईश्वर के लिए निश्चय ही सरल है।
إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى اَ۬للَّهِ يَسِيرٞۖ
कहो: “धरती में घूमो और नज़र डालो कि उसने रचना का आरंभ कैसे किया;
قُلْ سِيرُواْ فِے اِ۬لَارْضِ فَانظُرُواْ كَيْفَ بَدَأَ اَ۬لْخَلْقَۖ
फिर ईश्वर अंतिम उत्पत्ति को जन्म देगा;
ثُمَّ اَ۬للَّهُ يُنشِۓُ اُ۬لنَّشْأَةَ اَ۬لَاخِرَةَۖ
क्योंकि ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।”
إِنَّ اَ۬للَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَےْءٖ قَدِيرٞۖ
वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे दंड देता है और जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उस पर दया करता है;
يُعَذِّبُ مَنْ يَّشَآءُ وَيَرْحَمُ مَنْ يَّشَآءُۖ
और उसी की ओर तुम वापस पहुँचाए जाओगे।
وَإِلَيْهِ تُقْلَبُونَۖ
तुम उसे असमर्थ नहीं कर सकते, न धरती में न आकाश में;
وَمَآ أَنتُم بِمُعْجِزِينَ فِے اِ۬لَارْضِ وَلَا فِے اِ۬لسَّمَآءِۖ
और ईश्वर के अतिरिक्त तुम्हारा न कोई उत्तरदायी है, न कोई सहायता।
وَمَا لَكُم مِّن دُونِ اِ۬للَّهِ مِنْ وَّلِيّٖ وَلَا نَصِيرٖۖ
और जिन्होंने ईश्वर के संकेतों और उससे मिलने को नकारा, वे मेरी दया से निराश हो चुके हैं,
وَالذِينَ كَفَرُواْ بِـَٔايَٰتِ اِ۬للَّهِ وَلِقَآئِهِۦٓ أُوْلَٰٓئِكَ يَئِسُواْ مِن رَّحْمَتِےۖ
और उन्हीं को पीड़ादायक दंड मिलेगा।
وَأُوْلَٰٓئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ اَلِيمٞۖ
उसकी क़ौम का उत्तर केवल यही था कि उन्होंने कहा: “उसे मार डालो, या जला दो!”
فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهِۦٓ إِلَّآ أَن قَالُواْ اُ۟قْتُلُوهُ أَوْ حَرِّقُوهُۖ
परंतु ईश्वर ने उसे आग से उबारा;
فَأَنج۪يٰهُ اُ۬للَّهُ مِنَ اَ۬لنّ۪ارِۖ
इसमें अवश्य संकेत हैं उस क़ौम के लिए जो विश्वास करती है।
إِنَّ فِے ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوْمٖ يُومِنُونَۖ
और उसने कहा: “तुमने ईश्वर के अतिरिक्त प्रतिरूप केवल इहलोक के जीवन में आपसी स्नेह के कारण अपनाए हैं;
وَقَالَ إِنَّمَا اَ۪تَّخَذتُّم مِّن دُونِ اِ۬للَّهِ أَوْثَٰناٗ مَّوَدَّةَۢ بَيْنَكُمْ فِے اِ۬لْحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنْي۪اۖ
फिर पेशी के दिन तुम एक-दूसरे को नकारोगे और एक-दूसरे को धिक्कारोगे,
ثُمَّ يَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِ يَكْفُرُ بَعْضُكُم بِبَعْضٖ وَيَلْعَنُ بَعْضُكُم بَعْضاٗۖ
और तुम्हारी शरण आग है, और तुम्हारी कोई सहायता नहीं होगी।”
وَمَأْو۪يٰكُمُ اُ۬لنَّارُ وَمَا لَكُم مِّن نَّٰصِرِينَۖ
लूत ने उस पर भरोसा किया,
۞ فَـَٔامَنَ لَهُۥ لُوطٞۖ
और उसने कहा: “मैं अपने अभिभावक की ओर प्रवास करता हूँ;
وَقَالَ إِنِّے مُهَاجِرٌ اِلَىٰ رَبِّيَۖ
क्योंकि वही सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।”
إِنَّهُۥ هُوَ اَ۬لْعَزِيزُ اُ۬لْحَكِيمُۖ
और हमने उसे इसहाक़ और याक़ूब प्रदान किए,
وَوَهَبْنَا لَهُۥٓ إِسْحَٰقَ وَيَعْقُوبَۖ
और हमने उसकी संतति में सूचना देने का दायित्व और ग्रंथ रखा;
وَجَعَلْنَا فِے ذُرِّيَّتِهِ اِ۬لنُّبُوٓءَةَ وَالْكِتَٰبَۖ
और हमने उसे इहलोक में उसका पुरस्कार दिया,
وَءَاتَيْنَٰهُ أَجْرَهُۥ فِے اِ۬لدُّنْي۪اۖ
और अंतिम जीवन में वह अवश्य भलों में से होगा।
وَإِنَّهُۥ فِے اِ۬لَاخِرَةِ لَمِنَ اَ۬لصَّٰلِحِينَۖ
और लूत, जब उसने अपनी क़ौम से कहा: “तुम अवश्य वह निर्लज्जता करते हो, जिसमें सभी प्राणियों में से किसी ने तुमसे पहल नहीं की; क्या तुम सचमुच पुरुषों के पास जाते हो, राह काटते हो, और अपनी मंडलियों में वह करते हो जो अमान्य है?”
وَلُوطاً اِذْ قَالَ لِقَوْمِهِۦٓ إِنَّكُمْ لَتَاتُونَ اَ۬لْفَٰحِشَةَ مَا سَبَقَكُم بِهَا مِنَ اَحَدٖ مِّنَ اَ۬لْعَٰلَمِينَ أَئِنَّكُمْ لَتَاتُونَ اَ۬لرِّجَالَ وَتَقْطَعُونَ اَ۬لسَّبِيلَ وَتَاتُونَ فِے نَادِيكُمُ اُ۬لْمُنكَرَۖ
उसकी क़ौम का केवल यही उत्तर था कि उन्होंने कहा: “हमारे पास ईश्वर का दंड ले आओ, यदि तुम सच्चों में से हो!”
فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهِۦٓ إِلَّآ أَن قَالُواْ اُ۪يتِنَا بِعَذَابِ اِ۬للَّهِ إِن كُنتَ مِنَ اَ۬لصَّٰدِقِينَۖ
उसने कहा: “मेरे अभिभावक, बिगाड़ फैलाने वाली क़ौम के विरुद्ध मेरी सहायता कीजिए।”
قَالَ رَبِّ اِ۟نصُرْنِے عَلَى اَ۬لْقَوْمِ اِ۬لْمُفْسِدِينَۖ
जब हमारे संदेशवाहक शुभ समाचार लेकर इब्राहीम के पास आए, उन्होंने कहा: “हम निश्चय ही इस बस्ती वालों का विनाश करने वाले हैं; इसके निवासी अन्यायी हैं।”
وَلَمَّا جَآءَتْ رُسُلُنَآ إِبْرَٰهِيمَ بِالْبُشْر۪ىٰ قَالُوٓاْ إِنَّا مُهْلِكُوٓاْ أَهْلِ هَٰذِهِ اِ۬لْقَرْيَةِ إِنَّ أَهْلَهَا كَانُواْ ظَٰلِمِينَۖ
उसने कहा: “लूत तो निश्चय ही इसमें है।”
قَالَ إِنَّ فِيهَا لُوطاٗۖ
उन्होंने कहा: “जो इसमें है उसे हम सबसे अच्छी तरह जानते हैं;
قَالُواْ نَحْنُ أَعْلَمُ بِمَن فِيهَاۖ
हम उसे अवश्य उबारेंगे, उसे और उसके परिवार को, सिवा उसकी पत्नी के, जो पीछे रह जाने वालों में होगी।”
لَنُنَجِّيَنَّهُۥ وَأَهْلَهُۥٓ إِلَّا اَ۪مْرَأَتَهُۥ كَانَتْ مِنَ اَ۬لْغَٰبِرِينَۖ
जब हमारे संदेशवाहक लूत के पास आए, उनका आना उसे बुरा लगा और वह उनके विषय में व्याकुल हो गया;
وَلَمَّآ أَن جَآءَتْ رُسُلُنَا لُوطاٗ س۬ےٓءَ بِهِمْ وَضَاقَ بِهِمْ ذَرْعاٗۖ
और उन्होंने कहा: “डरो मत और दुखी मत होओ, क्योंकि हम तुम्हें उबारेंगे, तुम्हें और तुम्हारे परिवार को, सिवा तुम्हारी पत्नी के, जो पीछे रह जाने वालों में होगी।
وَقَالُواْ لَا تَخَفْ وَلَا تَحْزَنِ اِنَّا مُنَجُّوكَ وَأَهْلَكَ إِلَّا اَ۪مْرَأَتَكَ كَانَتْ مِنَ اَ۬لْغَٰبِرِينَۖ
हम इस बस्ती वालों पर आकाश से एक अशुद्धि निश्चय ही उतारेंगे, इस कारण कि उन्होंने अतिक्रमण किया।”
إِنَّا مُنزِلُونَ عَلَىٰٓ أَهْلِ هَٰذِهِ اِ۬لْقَرْيَةِ رِجْزاٗ مِّنَ اَ۬لسَّمَآءِ بِمَا كَانُواْ يَفْسُقُونَۖ
हमने उसमें से एक स्पष्ट संकेत निश्चय ही छोड़ा है, उस क़ौम के लिए जो बुद्धि से काम लेती है।
وَلَقَد تَّرَكْنَا مِنْهَآ ءَايَةَۢ بَيِّنَةٗ لِّقَوْمٖ يَعْقِلُونَۖ
और मदयन की ओर उनका भाई शुऐब; उसने कहा: “हे मेरी क़ौम! ईश्वर की आज्ञा का पालन करो, अंतिम दिन की आशा रखो, और धरती पर बिगाड़ने वाले बनकर उपद्रव मत मचाओ।”
۞ وَإِلَىٰ مَدْيَنَ أَخَاهُمْ شُعَيْباٗ فَقَالَ يَٰقَوْمِ اِ۟عْبُدُواْ اُ۬للَّهَ وَارْجُواْ اُ۬لْيَوْمَ اَ۬لَاخِرَ وَلَا تَعْثَوْاْ فِے اِ۬لَارْضِ مُفْسِدِينَۖ
उन्होंने उसे झुठलाया; तब झटके ने उन्हें आ पकड़ा, और वे अपने ठिकाने में औंधे पड़े, निश्चल रह गए।
فَكَذَّبُوهُ فَأَخَذَتْهُمُ اُ۬لرَّجْفَةُ فَأَصْبَحُواْ فِے د۪ارِهِمْ جَٰثِمِينَۖ
और आद और समूद — यह तुम्हारे सामने उनके आवासों से स्पष्ट हो चुका है; बहकाने वाले ने उनके कर्म उन्हें सुंदर बना दिए थे, और इस प्रकार उन्हें राह से रोक दिया था, जबकि वे स्पष्ट दृष्टि रखने वाले थे।
وَعَاداٗ وَثَمُوداٗ وَقَد تَّبَيَّنَ لَكُم مِّن مَّسَٰكِنِهِمْ وَزَيَّنَ لَهُمُ اُ۬لشَّيْطَٰنُ أَعْمَٰلَهُمْ فَصَدَّهُمْ عَنِ اِ۬لسَّبِيلِ وَكَانُواْ مُسْتَبْصِرِينَۖ
और क़ारून, फ़िरऔन और हामान —
وَقَارُونَ وَفِرْعَوْنَ وَهَامَٰنَۖ
मूसा तो उनके पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ आया था, परंतु वे धरती पर घमंड से फूल गए, हमसे आगे निकल पाने में समर्थ न होते हुए।
وَلَقَدْ جَآءَهُم مُّوس۪ىٰ بِالْبَيِّنَٰتِ فَاسْتَكْبَرُواْ فِے اِ۬لَارْضِ وَمَا كَانُواْ سَٰبِقِينَۖ
उनमें से हर एक को हमने उसके दोष के कारण पकड़ा;
فَكُلّاً اَخَذْنَا بِذَنۢبِهِۦۖ
उनमें से कुछ पर हमने कंकड़ों की बौछार भेजी,
فَمِنْهُم مَّنَ اَرْسَلْنَا عَلَيْهِ حَاصِباٗۖ
कुछ को चीख़ ने आ पकड़ा,
وَمِنْهُم مَّنَ اَخَذَتْهُ اُ۬لصَّيْحَةُۖ
कुछ को हमने धरती से निगलवा दिया,
وَمِنْهُم مَّنْ خَسَفْنَا بِهِ اِ۬لَارْضَۖ
और कुछ को हमने डुबो दिया।
وَمِنْهُم مَّنَ اَغْرَقْنَاۖ
ईश्वर उन पर अन्याय करने वाला न था;
وَمَا كَانَ اَ۬للَّهُ لِيَظْلِمَهُمْۖ
बल्कि वे स्वयं अपने ऊपर अन्याय करते थे।
وَلَٰكِن كَانُوٓاْ أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَۖ
उनका उदाहरण जो ईश्वर के अतिरिक्त हिमायती बना लेते हैं, उस मकड़ी जैसा है जो अपने लिए एक घर बना लेती है;
مَثَلُ اُ۬لذِينَ اَ۪تَّخَذُواْ مِن دُونِ اِ۬للَّهِ أَوْلِيَآءَ كَمَثَلِ اِ۬لْعَنكَبُوتِ اِ۪تَّخَذَتْ بَيْتاٗۖ
जबकि सबसे कमज़ोर घर अवश्य मकड़ी का घर है — काश वे जानते।
وَإِنَّ أَوْهَنَ اَ۬لْبُيُوتِ لَبَيْتُ اُ۬لْعَنكَبُوتِ لَوْ كَانُواْ يَعْلَمُونَۖ
ईश्वर निश्चय ही वह सब कुछ जानता है जिसे वे उसके अतिरिक्त पुकारते हैं;
إِنَّ اَ۬للَّهَ يَعْلَمُ مَا تَدْعُونَ مِن دُونِهِۦ مِن شَےْءٖۖ
और वह सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।
وَهُوَ اَ۬لْعَزِيزُ اُ۬لْحَكِيمُۖ
और ये उदाहरण, हम इन्हें लोगों के लिए कई गुना करते हैं,
وَتِلْكَ اَ۬لَامْثَٰلُ نَضْرِبُهَا لِلنَّاسِۖ
परंतु इनमें केवल ज्ञानी ही बुद्धि से काम लेते हैं।
وَمَا يَعْقِلُهَآ إِلَّا اَ۬لْعَٰلِمُونَۖ
ईश्वर ने आकाशों और धरती को पूर्ण सत्य के साथ रचा है;
خَلَقَ اَ۬للَّهُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالَارْضَ بِالْحَقِّۖ
इसमें अवश्य विश्वास करने वालों के लिए एक संकेत है।
إِنَّ فِے ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّلْمُومِنِينَۖ
जो तुम पर ग्रंथ में से प्रकट किया गया है उसे सुनाओ, और संपर्क बनाए रखो;
اَ۟تْلُ مَآ أُوحِيَ إِلَيْكَ مِنَ اَ۬لْكِتَٰبِ وَأَقِمِ اِ۬لصَّلَوٰةَۖ
क्योंकि संपर्क निर्लज्जता से और जो अमान्य है उससे रोकता है;
إِنَّ اَ۬لصَّلَوٰةَ تَنْه۪ىٰ عَنِ اِ۬لْفَحْشَآءِ وَالْمُنكَرِۖ
और ईश्वर का स्मरण इससे भी बड़ा है;
وَلَذِكْرُ اُ۬للَّهِ أَكْبَرُۖ
ईश्वर जानता है जो तुम करते हो।
وَاللَّهُ يَعْلَمُ مَا تَصْنَعُونَۖ
और ग्रंथ वालों से सबसे सुंदर ढंग के सिवा बहस मत करो,
۞ وَلَا تُجَٰدِلُوٓاْ أَهْلَ اَ۬لْكِتَٰبِ إِلَّا بِالتِے هِيَ أَحْسَنُۖ
सिवा उनमें से उनके जो अन्याय करते हैं;
إِلَّا اَ۬لذِينَ ظَلَمُواْ مِنْهُمْۖ
और कहो: “हम उस पर विश्वास करते हैं जो हमारे लिए उतारा गया और जो तुम्हारे लिए उतारा गया; हमारा देवता और तुम्हारा देवता एक है, और हम उसके प्रति खरे हैं।”
وَقُولُوٓاْ ءَامَنَّا بِالذِےٓ أُنزِلَ إِلَيْنَا وَأُنزِلَ إِلَيْكُمْ وَإِلَٰهُنَا وَإِلَٰهُكُمْ وَٰحِدٞ وَنَحْنُ لَهُۥ مُسْلِمُونَۖ
इसी प्रकार हमने तुम पर ग्रंथ उतारा;
وَكَذَٰلِكَ أَنزَلْنَآ إِلَيْكَ اَ۬لْكِتَٰبَۖ
जिन्हें हमने ग्रंथ दिया वे उस पर विश्वास करते हैं, और इनमें से भी कुछ उस पर विश्वास करते हैं;
فَالذِينَ ءَاتَيْنَٰهُمُ اُ۬لْكِتَٰبَ يُومِنُونَ بِهِۦ وَمِنْ هَٰٓؤُلَآءِ مَنْ يُّومِنُ بِهِۦۖ
और हमारे संकेतों को केवल नकारने वाले ही हठपूर्वक ठुकराते हैं।
وَمَا يَجْحَدُ بِـَٔايَٰتِنَآ إِلَّا اَ۬لْكَٰفِرُونَۖ
तुम इससे पहले कोई ग्रंथ नहीं सुनाते थे, और अपने दाहिने हाथ से उसे नहीं लिखते थे;
وَمَا كُنتَ تَتْلُواْ مِن قَبْلِهِۦ مِن كِتَٰبٖ وَلَا تَخُطُّهُۥ بِيَمِينِكَۖ
अन्यथा मिथ्या गढ़ने वालों को संदेह हो जाता।
إِذاٗ لَّارْتَابَ اَ۬لْمُبْطِلُونَۖ
ये तो बल्कि स्पष्ट संकेत हैं, उनके सीनों में जिन्हें ज्ञान दिया गया है;
بَلْ هُوَ ءَايَٰتُۢ بَيِّنَٰتٞ فِے صُدُورِ اِ۬لذِينَ أُوتُواْ اُ۬لْعِلْمَۖ
हमारे संकेतों को केवल अन्यायी ही हठपूर्वक ठुकराते हैं।
وَمَا يَجْحَدُ بِـَٔايَٰتِنَآ إِلَّا اَ۬لظَّٰلِمُونَۖ
और उन्होंने कहा: “उस पर उसके अभिभावक की ओर से संकेत क्यों नहीं उतारे गए!”
وَقَالُواْ لَوْلَآ أُنزِلَ عَلَيْهِ ءَايَٰتٞ مِّن رَّبِّهِۦۖ
कहो: “संकेत तो केवल ईश्वर के पास हैं; और मैं केवल एक स्पष्ट चेतावनी देने वाला हूँ।”
قُلِ اِنَّمَا اَ۬لَايَٰتُ عِندَ اَ۬للَّهِ وَإِنَّمَآ أَنَا نَذِيرٞ مُّبِينٌۖ
क्या उनके लिए यह पर्याप्त नहीं कि हमने तुम पर ग्रंथ उतारा, जो उन्हें सुनाया जाता है?
اَوَلَمْ يَكْفِهِمُۥٓ أَنَّآ أَنزَلْنَا عَلَيْكَ اَ۬لْكِتَٰبَ يُتْل۪ىٰ عَلَيْهِمُۥٓۖ
इसमें अवश्य उस क़ौम के लिए दया और स्मरण है जो विश्वास करती है।
إِنَّ فِے ذَٰلِكَ لَرَحْمَةٗ وَذِكْر۪ىٰ لِقَوْمٖ يُومِنُونَۖ
कहो: “मेरे और तुम्हारे बीच ईश्वर साक्षी के रूप में पर्याप्त है;
قُلْ كَف۪ىٰ بِاللَّهِ بَيْنِے وَبَيْنَكُمْ شَهِيداٗۖ
वह जानता है जो आकाशों और धरती में है;
يَعْلَمُ مَا فِے اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالَارْضِۖ
और जो मिथ्या पर विश्वास करते हैं और ईश्वर को नकारते हैं, वही घाटा उठाने वाले हैं।”
وَالذِينَ ءَامَنُواْ بِالْبَٰطِلِ وَكَفَرُواْ بِاللَّهِ أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لْخَٰسِرُونَۖ
और वे तुमसे माँग करते हैं कि दंड जल्दी लाया जाए;
وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِالْعَذَابِۖ
और यदि नामित अवधि न होती, तो दंड उन पर आ चुका होता — वह उन पर अवश्य अचानक आएगा, और उन्हें आभास भी न हो।
وَلَوْلَآ أَجَلٞ مُّسَمّىٗ لَّجَآءَهُمُ اُ۬لْعَذَابُ وَلَيَاتِيَنَّهُم بَغْتَةٗ وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَۖ
वे तुमसे माँग करते हैं कि दंड जल्दी लाया जाए,
يَسْتَعْجِلُونَكَ بِالْعَذَابِۖ
और जहन्नम नकारने वालों को अवश्य घेरे हुए है।
وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمُحِيطَةُۢ بِالْكٰ۪فِرِينَۖ
जिस दिन दंड उन्हें उनके ऊपर से और उनके पैरों के नीचे से ढक लेगा, और हम कहेंगे: “जो तुम करते थे उसका स्वाद चखो।”
يَوْمَ يَغْش۪يٰهُمُ اُ۬لْعَذَابُ مِن فَوْقِهِمْ وَمِن تَحْتِ أَرْجُلِهِمْ وَيَقُولُ ذُوقُواْ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَۖ
“हे मेरे आज्ञाकारियो, जिन्होंने विश्वास किया, मेरी धरती विस्तृत है; इसलिए मेरी ही आज्ञा का पालन करो।”
يَٰعِبَادِيَ اَ۬لذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِنَّ أَرْضِے وَٰسِعَةٞ فَإِيَّٰيَ فَاعْبُدُونِۖ
हर स्व मृत्यु का स्वाद चखेगा,
كُلُّ نَفْسٖ ذَآئِقَةُ اُ۬لْمَوْتِۖ
फिर तुम हमारी ही ओर लौटाए जाओगे।
ثُمَّ إِلَيْنَا تُرْجَعُونَۖ
और जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, उन्हें हम अवश्य उद्यान के ऊँचे कक्षों में बसाएँगे, जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जहाँ वे सदा रहेंगे;
وَالذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ لَنُبَوِّئَنَّهُم مِّنَ اَ۬لْجَنَّةِ غُرَفاٗ تَجْرِے مِن تَحْتِهَا اَ۬لَانْهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۖ
कर्म करने वालों के लिए कितना उत्तम पुरस्कार है,
نِعْمَ أَجْرُ اُ۬لْعَٰمِلِينَۖ
उनके लिए जिन्होंने धैर्य रखा और जो अपने अभिभावक को मुख़्तार बनाते हैं।
اَ۬لذِينَ صَبَرُواْ وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَۖ
कितने ही चलने-फिरने वाले अपनी जीविका स्वयं वहन नहीं करते! ईश्वर ही उन्हें जीविका देता है, और तुम्हें भी उनके साथ;
۞ وَكَأَيِّن مِّن دَآبَّةٖ لَّا تَحْمِلُ رِزْقَهَا اَ۬للَّهُ يَرْزُقُهَا وَإِيَّاكُمْۖ
और वह सुनने वाला, सर्वज्ञ है।
وَهُوَ اَ۬لسَّمِيعُ اُ۬لْعَلِيمُۖ
और यदि तुम उनसे पूछो कि आकाशों और धरती को किसने रचा और सूर्य और चंद्रमा को वश में किया, तो वे अवश्य कहेंगे: “ईश्वर”;
وَلَئِن سَأَلْتَهُم مَّنْ خَلَقَ اَ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالَارْضَ وَسَخَّرَ اَ۬لشَّمْسَ وَالْقَمَرَ لَيَقُولُنَّ اَ۬للَّهُۖ
तो वे कैसे उलटे फेरे जा रहे हैं?
فَأَنّ۪ىٰ يُوفَكُونَۖ
ईश्वर अपने आज्ञाकारियों में से जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसके लिए जीविका फैला देता है, और उसके लिए नापकर देता है;
اَ۬للَّهُ يَبْسُطُ اُ۬لرِّزْقَ لِمَنْ يَّشَآءُ مِنْ عِبَادِهِۦ وَيَقْدِرُ لَهُۥٓۖ
क्योंकि ईश्वर हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ بِكُلِّ شَےْءٍ عَلِيمٞۖ
और यदि तुम उनसे पूछो कि आकाश से पानी कौन उतारता है और उसके द्वारा धरती को उसकी मृत्यु के बाद पुनः जीवन देता है, तो वे अवश्य कहेंगे: “ईश्वर”;
وَلَئِن سَأَلْتَهُم مَّن نَّزَّلَ مِنَ اَ۬لسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَحْي۪ا بِهِ اِ۬لَارْضَ مِنۢ بَعْدِ مَوْتِهَا لَيَقُولُنَّ اَ۬للَّهُۖ
कहो: “प्रशंसा ईश्वर के लिए है!”
قُلِ اِ۬لْحَمْدُ لِلهِۖ
परंतु उनमें से अधिकतर बुद्धि से काम नहीं लेते।
بَلَ اَكْثَرُهُمْ لَا يَعْقِلُونَۖ
यह इहलोक का जीवन तो केवल बहलावा और खेल है;
وَمَا هَٰذِهِ اِ۬لْحَيَوٰةُ اُ۬لدُّنْي۪آ إِلَّا لَهْوٞ وَلَعِبٞۖ
और अंतिम ठिकाना, वही अवश्य सच्चा जीवन है — काश वे जानते।
وَإِنَّ اَ۬لدَّارَ اَ۬لَاخِرَةَ لَهِيَ اَ۬لْحَيَوَانُ لَوْ كَانُواْ يَعْلَمُونَۖ
जब वे जलयान में सवार होते हैं, तो ईश्वर को पुकारते हैं, उसी के लिए विधान को समर्पित करते हुए;
فَإِذَا رَكِبُواْ فِے اِ۬لْفُلْكِ دَعَوُاْ اُ۬للَّهَ مُخْلِصِينَ لَهُ اُ۬لدِّينَۖ
परंतु जब वह उन्हें उबारकर थल की ओर ले आता है, तो देखो, वे साझी ठहराते हैं, ताकि जो हमने उन्हें दिया उसे नकारें,
فَلَمَّا نَجّ۪يٰهُمُۥٓ إِلَى اَ۬لْبَرِّ إِذَا هُمْ يُشْرِكُونَ لِيَكْفُرُواْ بِمَآ ءَاتَيْنَٰهُمْۖ
तो वे उपभोग कर लें: वे शीघ्र ही जान लेंगे।
وَلِيَتَمَتَّعُواْ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَۖ
क्या वे नहीं देखते कि हमने एक अलंघनीय और सुरक्षित स्थान बनाया है, जबकि उनके आसपास लोग छीन लिए जाते हैं?
أَوَلَمْ يَرَوَاْ اَنَّا جَعَلْنَا حَرَماً اٰمِناٗ وَيُتَخَطَّفُ اُ۬لنَّاسُ مِنْ حَوْلِهِمُۥٓۖ
तो क्या वे मिथ्या पर विश्वास करते हैं, और ईश्वर के उपकार को नकारते हैं?
أَفَبِالْبَٰطِلِ يُومِنُونَ وَبِنِعْمَةِ اِ۬للَّهِ يَكْفُرُونَۖ
और उससे बढ़कर अन्यायी कौन है जो ईश्वर पर झूठ गढ़ता है, या सत्य को, जब वह उसके पास आ चुका, झुठलाता है?
وَمَنَ اَظْلَمُ مِمَّنِ اِ۪فْتَر۪ىٰ عَلَى اَ۬للَّهِ كَذِباً اَوْ كَذَّبَ بِالْحَقِّ لَمَّا جَآءَهُۥٓۖ
क्या जहन्नम में नकारने वालों के लिए निवास नहीं है?
أَلَيْسَ فِے جَهَنَّمَ مَثْوىٗ لِّلْكٰ۪فِرِينَۖ
और जिन्होंने हमारे लिए संघर्ष किया, उन्हें हम अवश्य अपनी राहों में मार्ग दिखाएँगे;
وَالذِينَ جَٰهَدُواْ فِينَا لَنَهْدِيَنَّهُمْ سُبُلَنَاۖ
और ईश्वर अवश्य उनके साथ है जो भलाई करते हैं।
وَإِنَّ اَ۬للَّهَ لَمَعَ اَ۬لْمُحْسِنِينَۖ