Ash-Shams الشمس
Who purifies it من زكىها
The section and its links
The immense Information, the Day, then the “Say” suras (78, then 79-114)
Read the section from its beginning: sura 78
What was shown before: The immense Information is set out in 78. 78
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। सूर्य की और उसकी पूर्वाह्न की उजास की शपथ! चंद्रमा की जब वह उसके पीछे आता है! दिन की जब वह उसे उजागर करता है! रात की जब वह उसे ढक लेती है! आकाश की और उसकी जिसने उसे बनाया! धरती की और उसकी जिसने उसे फैलाया! एक स्व की, और उसकी जिसने उसे सँवारा, फिर उसके मन में उसका दुराचार और उसकी सावधानी प्रकट की! सफल हुआ निश्चय ही वह जो उसे शुद्ध करता है, और असफल हुआ निश्चय ही वह जो उसे दबा देता है।
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلشَّمۡسِ وَضُحَىٰهَا وَٱلۡقَمَرِ إِذَا تَلَىٰهَا وَٱلنَّهَارِ إِذَا جَلَّىٰهَا وَٱلَّيۡلِ إِذَا يَغۡشَىٰهَا وَٱلسَّمَآءِ وَمَا بَنَىٰهَا وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا طَحَىٰهَا وَنَفۡسٖ وَمَا سَوَّىٰهَا فَأَلۡهَمَهَا فُجُورَهَا وَتَقۡوَىٰهَا قَدۡ أَفۡلَحَ مَن زَكَّىٰهَا وَقَدۡ خَابَ مَن دَسَّىٰهَا
समूद ने अपनी मर्यादाहीनता से झुठलाया, जब उनमें का सबसे अभागा उठाया गया। तब ईश्वर के संदेशवाहक ने उनसे कहा: “ईश्वर की ऊँटनी, और उसका पानी पीना!” परंतु उन्होंने उसे झुठलाया और उसका अंग-भंग कर दिया। तब उनके अभिभावक ने उनके दोष के कारण उन्हें कुचल दिया, और उन्हें समतल कर दिया।
كَذَّبَتۡ ثَمُودُ بِطَغۡوَىٰهَا إِذِ ٱنۢبَعَثَ أَشۡقَىٰهَا فَقَالَ لَهُمُۥ رَسُولُ ٱللَّهِ نَاقَةَ ٱللَّهِ وَسُقۡيَٰهَا فَكَذَّبُوهُۥ فَعَقَرُوهَا فَدَمۡدَمَ عَلَيۡهِمُۥ رَبُّهُمُۥ بِذَنۢبِهِمُۥ فَسَوَّىٰهَا
तो वह उसके परिणाम से नहीं डरता।
وَلَا يَخَافُ عُقۡبَٰهَا