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القمر

Al-Qamar

Is There Anyone to Remember?

Sura54
ق
पद55

Section XThe application · continuation

The return, the sworn Day, glorification and the law

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Read the section from its beginning: sura 50

54:1

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। वह घड़ी निकट आ गई, और चंद्रमा फट गया।

بِسْمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحْمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ اِ۪قْتَرَبَتِ اِ۬لسَّاعَةُ وَانشَقَّ اَ۬لْقَمَرُۖ

54:2

और यदि वे कोई संकेत देखते हैं, तो उससे कतराते हैं और कहते हैं: “एक निरंतर भ्रम।”

وَإِنْ يَّرَوْاْ ءَايَةٗ يُعْرِضُواْ وَيَقُولُواْ سِحْرٞ مُّسْتَمِرّٞۖ

54:3

और उन्होंने झुठलाया और अपनी भावनाओं का अनुसरण किया।

وَكَذَّبُواْ وَاتَّبَعُواْ أَهْوَآءَهُمْۖ

54:3

जबकि हर मामला अपना स्थिर स्थान पाता है।

وَكُلُّ أَمْرٖ مُّسْتَقِرّٞۖ

उनके पास सूचनाओं में से वह आ चुका है जो उन्हें रोकने के लिए पर्याप्त है,

وَلَقَدْ جَآءَهُم مِّنَ اَ۬لْأَنۢبَآءِ مَا فِيهِ مُزْدَجَرٌۖ

परिपूर्ण प्रज्ञा —

حِكْمَةُۢ بَٰلِغَةٞۖ

पर चेतावनियाँ किस काम की?

فَمَا تُغْنِ اِ۬لنُّذُرُۖ

तो उनसे पीठ फेर लो।

فَتَوَلَّ عَنْهُمْۖ

54:7–8

जिस दिन बुलाने वाला एक अनसुनी चीज़ की ओर बुलाएगा, विनीत दृष्टियों के साथ वे क़ब्रों से निकलेंगे, फैली हुई टिड्डियों की तरह, बुलाने वाले की ओर दौड़ते हुए,

يَوْمَ يَدْعُ اُ۬لدَّاعِ إِلَىٰ شَےْءٖ نُّكُرٍ خُشَّعاً أَبْصَٰرُهُمْ يَخْرُجُونَ مِنَ اَ۬لْأَجْدَاثِ كَأَنَّهُمْ جَرَادٞ مُّنتَشِرٞ مُّهْطِعِينَ إِلَى اَ۬لدَّاعِۦۖ

54:7–8

नकारने वाले कहेंगे: “यह एक कठिन दिन है।”

يَقُولُ اُ۬لْكَٰفِرُونَ هَٰذَا يَوْمٌ عَسِرٞۖ

54:9

उनसे पहले नूह की क़ौम ने झुठलाया: उन्होंने हमारे आज्ञाकारी को झुठलाया और कहा: “वह विक्षिप्त है”, और उसे उग्रता से डाँटा गया।

كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٖ فَكَذَّبُواْ عَبْدَنَا وَقَالُواْ مَجْنُونٞ وَازْدُجِرَۖ

तब उसने अपने अभिभावक को पुकारा: “मैं पराजित हूँ, मेरी सहायता कीजिए।”

۞ فَدَعَا رَبَّهُۥ أَنِّے مَغْلُوبٞ فَانتَصِرْۖ

तब हमने आकाश के द्वार मूसलाधार पानी से खोल दिए,

فَفَتَحْنَا أَبْوَٰبَ اَ۬لسَّمَآءِ بِمَآءٖ مُّنْهَمِرٖۖ

54:12

और हमने धरती को सोतों में फोड़ दिया, तो पानी पहले से निर्धारित आदेश के अनुसार मिल गया।

وَفَجَّرْنَا اَ۬لْأَرْضَ عُيُوناٗ فَالْتَقَى اَ۬لْمَآءُ عَلَىٰ أَمْرٖ قَدْ قُدِرَۖ

और हमने उसे तख़्तों और जोड़ने वाली कीलों से बनी एक नाव पर सवार किया।

وَحَمَلْنَٰهُ عَلَىٰ ذَاتِ أَلْوَٰحٖ وَدُسُرٖۖ

54:14

वह हमारी आँखों के सामने चलती रही, उसके प्रतिफल के रूप में जिसे नकारा गया था।

تَجْرِے بِأَعْيُنِنَا جَزَآءٗ لِّمَن كَانَ كُفِرَۖ

54:15

हमने उसे निश्चय ही एक संकेत के रूप में छोड़ा: तो क्या कोई है जो उससे स्मरण ग्रहण करे?

وَلَقَد تَّرَكْنَٰهَا ءَايَةٗ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٖۖ

54:16

तो मेरा दंड और मेरी चेतावनियाँ कैसी थीं?

فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِے وَنُذُرِۖ

54:17

हमने निश्चय ही पाठ को स्मरण के लिए सरल कर दिया: तो क्या कोई है जो उससे स्मरण ग्रहण करे?

وَلَقَدْ يَسَّرْنَا اَ۬لْقُرْءَانَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٖۖ

आद ने झुठलाया। तो मेरा दंड और मेरी चेतावनियाँ कैसी थीं?

كَذَّبَتْ عَادٞ فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِے وَنُذُرِۖ

54:19–20

हमने उन पर एक हिमशीतल आँधी भेजी, एक निरंतर अनिष्ट के दिन में, जो लोगों को उखाड़ फेंक रही थी, मानो वे जड़ से उखड़े खजूर के तने हों।

إِنَّا أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِيحاٗ صَرْصَراٗ فِے يَوْمِ نَحْسٖ مُّسْتَمِرّٖ تَنزِعُ اُ۬لنَّاسَ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٖ مُّنقَعِرٖۖ

तो मेरा दंड और मेरी चेतावनियाँ कैसी थीं?

فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِے وَنُذُرِۖ

54:22

हमने निश्चय ही पाठ को स्मरण के लिए सरल कर दिया: तो क्या कोई है जो उससे स्मरण ग्रहण करे?

وَلَقَدْ يَسَّرْنَا اَ۬لْقُرْءَانَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٖۖ

समूद ने चेतावनियों को झुठलाया।

كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِالنُّذُرِۖ

54:24–25

उन्होंने कहा: “क्या हम अपने ही बीच के एक अकेले साधारण मानव के पीछे चलें? तब तो हम अवश्य भटकाव और उन्माद में होंगे। क्या हमारे बीच से उसी पर स्मरण डाला गया है? बल्कि वह एक दंभी झूठा है।”

فَقَالُواْ أَبَشَراٗ مِّنَّا وَٰحِداٗ نَّتَّبِعُهُۥ إِنَّا إِذاٗ لَّفِے ضَلَٰلٖ وَسُعُرٍ أَٰ۟لْقِيَ اَ۬لذِّكْرُ عَلَيْهِ مِنۢ بَيْنِنَا بَلْ هُوَ كَذَّابٌ أَشِرٞۖ

54:26

वे कल जान लेंगे कि दंभी झूठा कौन है।

سَيَعْلَمُونَ غَداٗ مَّنِ اِ۬لْكَذَّابُ اُ۬لْأَشِرُۖ

हम ऊँटनी को उनके लिए परीक्षा के रूप में भेज रहे हैं: तो उनकी ताक में रहो, और दृढ़ रहो।

إِنَّا مُرْسِلُواْ اُ۬لنَّاقَةِ فِتْنَةٗ لَّهُمْ فَارْتَقِبْهُمْ وَاصْطَبِرْۖ

और उन्हें सूचित करो कि पानी उनके बीच बाँटा गया है,

وَنَبِّئْهُمْ أَنَّ اَ۬لْمَآءَ قِسْمَةُۢ بَيْنَهُمْۖ

पीने की हर बारी पर उपस्थित हुआ जाता है।

كُلُّ شِرْبٖ مُّحْتَضَرٞۖ

तब उन्होंने अपने साथी को आवाज़ दी, तो उसने उसे पकड़ा और उसका अंग-भंग कर दिया।

فَنَادَوْاْ صَٰحِبَهُمْ فَتَعَاطَىٰ فَعَقَرَۖ

तो मेरा दंड और मेरी चेतावनियाँ कैसी थीं?

فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِے وَنُذُرِۖ

हमने उन पर एक ही चीख़ भेजी, और वे बाड़ बनाने वाले के सूखे डंठलों जैसे हो गए।

إِنَّا أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ صَيْحَةٗ وَٰحِدَةٗ فَكَانُواْ كَهَشِيمِ اِ۬لْمُحْتَظِرِۖ

54:32

हमने निश्चय ही पाठ को स्मरण के लिए सरल कर दिया: तो क्या कोई है जो उससे स्मरण ग्रहण करे?

وَلَقَدْ يَسَّرْنَا اَ۬لْقُرْءَانَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٖۖ

54:33

लूत की क़ौम ने चेतावनियों को झुठलाया।

كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطِۢ بِالنُّذُرِۖ

54:34

हमने उन पर कंकड़ों की बौछार भेजी, लूत के कुल को छोड़कर, जिन्हें हमने रात के अंतिम पहरों में उबारा,

إِنَّا أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ حَاصِباً إِلَّا ءَالَ لُوطٖ نَّجَّيْنَٰهُم بِسَحَرٖۖ

54:35

हमारी ओर से एक उपकार के रूप में।

نِّعْمَةٗ مِّنْ عِندِنَاۖ

54:35

इसी प्रकार हम उसे प्रतिफल देते हैं जो कृतज्ञ है।

كَذَٰلِكَ نَجْزِے مَن شَكَرَۖ

54:36

उसने उन्हें हमारी जकड़ की निश्चय ही चेतावनी दी थी, पर वे चेतावनियों पर वाद-प्रतिवाद में पड़ गए।

وَلَقَدْ أَنذَرَهُم بَطْشَتَنَا فَتَمَارَوْاْ بِالنُّذُرِۖ

54:37

उन्होंने उसे उसके अतिथियों से फेरने की निश्चय ही चेष्टा की; तब हमने उनकी आँखें मिटा दीं: “तो मेरा दंड और मेरी चेतावनियाँ चखो।”

۞ وَلَقَدْ رَٰوَدُوهُ عَن ضَيْفِهِۦ فَطَمَسْنَا أَعْيُنَهُمْ فَذُوقُواْ عَذَابِے وَنُذُرِۖ

54:38

भोर में एक स्थिर दंड ने निश्चय ही उन्हें अचानक आ घेरा,

وَلَقَدْ صَبَّحَهُم بُكْرَةً عَذَابٞ مُّسْتَقِرّٞۖ

“तो मेरा दंड और मेरी चेतावनियाँ चखो।”

فَذُوقُواْ عَذَابِے وَنُذُرِۖ

54:40

हमने निश्चय ही पाठ को स्मरण के लिए सरल कर दिया: तो क्या कोई है जो उससे स्मरण ग्रहण करे?

وَلَقَدْ يَسَّرْنَا اَ۬لْقُرْءَانَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٖۖ

54:41

चेतावनियाँ निश्चय ही फ़िरऔन के कुल के पास आईं।

وَلَقَدْ جَا ءَالَ فِرْعَوْنَ اَ۬لنُّذُرُۖ

उन्होंने हमारे सभी संकेतों को झुठलाया; तब हमने उन्हें एक सर्वशक्तिमान, सामर्थ्यवान की पकड़ से पकड़ा।

كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا كُلِّهَا فَأَخَذْنَٰهُمْ أَخْذَ عَزِيزٖ مُّقْتَدِرٍۖ

54:43

क्या तुम में से नकारने वाले उनसे बेहतर हैं, या तुम्हारे पास प्रपत्रों में कोई बरी-पत्र है?

أَكُفَّارُكُمْ خَيْرٞ مِّنْ أُوْلَٰٓئِكُمْ أَمْ لَكُم بَرَآءَةٞ فِے اِ۬لزُّبُرِۖ

54:44

या फिर वे कहते हैं: “हम एक संगठित जत्था हैं, जो अपनी सहायता कर लेता है”?

أَمْ يَقُولُونَ نَحْنُ جَمِيعٞ مُّنتَصِرٞۖ

यह जत्था पराजित होगा, और वे पीठ फेर लेंगे।

سَيُهْزَمُ اُ۬لْجَمْعُ وَيُوَلُّونَ اَ۬لدُّبُرَۖ

बल्कि वह घड़ी ही उनके वादे का समय है,

بَلِ اِ۬لسَّاعَةُ مَوْعِدُهُمْۖ

और वह घड़ी अधिक विपत्तिपूर्ण और अधिक कड़वी है।

وَالسَّاعَةُ أَدْهَىٰ وَأَمَرُّۖ

54:47–48

बहिष्कृत निश्चय ही भटकाव और उन्माद में हैं, जिस दिन वे आग में अपने चेहरों के बल घसीटे जाएँगे: “सक़र का स्पर्श चखो।”

إِنَّ اَ۬لْمُجْرِمِينَ فِے ضَلَٰلٖ وَسُعُرٖ يَوْمَ يُسْحَبُونَ فِے اِ۬لنَّارِ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ ذُوقُواْ مَسَّ سَقَرَۖ

54:49

हमने हर चीज़ एक निर्धारित माप के अनुसार रची है।

إِنَّا كُلَّ شَےْءٍ خَلَقْنَٰهُ بِقَدَرٖۖ

और हमारा आदेश बस एक ही है, पलक झपकने जैसा।

وَمَا أَمْرُنَا إِلَّا وَٰحِدَةٞ كَلَمْحِۢ بِالْبَصَرِۖ

54:51

हमने निश्चय ही तुम जैसों को नष्ट किया है: तो क्या कोई है जो उससे स्मरण ग्रहण करे?

وَلَقَدْ أَهْلَكْنَا أَشْيَاعَكُمْ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٖۖ

54:52

और जो कुछ उन्होंने किया वह प्रपत्रों में है।

وَكُلُّ شَےْءٖ فَعَلُوهُ فِے اِ۬لزُّبُرِۖ

54:53

और हर छोटी या बड़ी चीज़ लिखी हुई है।

وَكُلُّ صَغِيرٖ وَكَبِيرٖ مُّسْتَطَرٌۖ

54:54–55

सावधानी बरतने वाले निश्चय ही उद्यानों और एक नदी में हैं, सच्चाई के आसन में, एक सामर्थ्यवान अधिराज के पास।

إِنَّ اَ۬لْمُتَّقِينَ فِے جَنَّٰتٖ وَنَهَرٖ فِے مَقْعَدِ صِدْقٍ عِندَ مَلِيكٖ مُّقْتَدِرِۢۖ

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