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Sura61
ق
पद14

Section XThe application · continuation

The return, the sworn Day, glorification and the law

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Read the section from its beginning: sura 50

61:1

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। जो कुछ आकाशों और धरती में है, उसने ईश्वर की महिमा गाई,

بِسْمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحْمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ سَبَّحَ لِلهِ مَا فِے اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِے اِ۬لْأَرْضِۖ

और वह सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।

وَهْوَ اَ۬لْعَزِيزُ اُ۬لْحَكِيمُۖ

61:2

हे विश्वास करने वालो! तुम वह क्यों कहते हो जो तुम करते नहीं?

يَٰأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ لِمَ تَقُولُونَ مَا لَا تَفْعَلُونَۖ

61:3

ईश्वर के पास यह एक बड़ी घिनौनी बात है कि तुम वह कहो जो तुम करते नहीं।

كَبُرَ مَقْتاً عِندَ اَ۬للَّهِ أَن تَقُولُواْ مَا لَا تَفْعَلُونَۖ

61:4

ईश्वर निश्चय ही उनसे प्रेम करता है जो उसकी राह में सटी पंक्ति में लड़ते हैं, मानो वे एक ठोस निर्माण हों।

إِنَّ اَ۬للَّهَ يُحِبُّ اُ۬لذِينَ يُقَٰتِلُونَ فِے سَبِيلِهِۦ صَفّاٗ كَأَنَّهُم بُنْيَٰنٞ مَّرْصُوصٞۖ

61:5

और जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा: “हे मेरी क़ौम! तुम मुझे क्यों तंग करते हो, जबकि तुम निश्चय ही जान लोगे कि मैं तुम्हारी ओर भेजा गया ईश्वर का संदेशवाहक हूँ?”

وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِۦ يَٰقَوْمِ لِمَ تُؤْذُونَنِے وَقَد تَّعْلَمُونَ أَنِّے رَسُولُ اُ۬للَّهِ إِلَيْكُمْۖ

61:5

और जब वे टेढ़े हुए, तो ईश्वर ने उनके मर्मों को टेढ़ा कर दिया।

فَلَمَّا زَاغُواْ أَزَاغَ اَ۬للَّهُ قُلُوبَهُمْۖ

61:5

और ईश्वर अतिक्रमणकारियों की क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।

وَاللَّهُ لَا يَهْدِے اِ۬لْقَوْمَ اَ۬لْفَٰسِقِينَۖ

61:6

और जब मरयम के पुत्र ईसा ने कहा: “हे इसराईल की संतान! मैं निश्चय ही तुम्हारी ओर भेजा गया ईश्वर का संदेशवाहक हूँ, उसकी पुष्टि करता हुआ जो तौरात में से मुझसे पहले है, और एक ऐसे संदेशवाहक का शुभ समाचार देता हुआ जो मेरे बाद आएगा, जिसका गुण है: सबसे प्रशंसनीय।”

وَإِذْ قَالَ عِيسَى اَ۪بْنُ مَرْيَمَ يَٰبَنِے إِسْرَآءِيلَ إِنِّے رَسُولُ اُ۬للَّهِ إِلَيْكُم مُّصَدِّقاٗ لِّمَا بَيْنَ يَدَيَّ مِنَ اَ۬لتَّوْرَيٰةِ وَمُبَشِّراَۢ بِرَسُولٖ يَأْتِے مِنۢ بَعْدِيَ اَ۪سْمُهُۥ أَحْمَدُۖ

61:6

फिर जब वह उनके पास स्पष्ट प्रमाण लाया, तो उन्होंने कहा: “यह एक स्पष्ट भ्रम है।”

فَلَمَّا جَآءَهُم بِالْبَيِّنَٰتِ قَالُواْ هَٰذَا سِحْرٞ مُّبِينٞۖ

61:7

और उससे अधिक अन्यायी कौन है जो ईश्वर पर झूठ गढ़ता है, जबकि उसे ईश्वर के प्रति खरेपन के लिए बुलाया जाता है?

وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ اِ۪فْتَرَىٰ عَلَى اَ۬للَّهِ اِ۬لْكَذِبَ وَهْوَ يُدْعَىٰ إِلَى اَ۬لْإِسْلَٰمِۖ

और ईश्वर अन्यायी क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।

وَاللَّهُ لَا يَهْدِے اِ۬لْقَوْمَ اَ۬لظَّٰلِمِينَۖ

61:8

वे ईश्वर के प्रकाश को अपने मुँहों से बुझाना चाहते हैं, परंतु ईश्वर अपने प्रकाश को पूर्ण करता है, भले ही नकारने वाले इससे घृणा करें।

يُرِيدُونَ لِيُطْفِـُٔواْ نُورَ اَ۬للَّهِ بِأَفْوَٰهِهِمْ وَاللَّهُ مُتِمّٞ نُّورَهُۥ وَلَوْ كَرِهَ اَ۬لْكَٰفِرُونَۖ

61:9

वही है जिसने अपने संदेशवाहक को मार्गदर्शन और सत्य के विधान के साथ भेजा, ताकि उसे हर विधान पर प्रभावी करे, भले ही साझी ठहराने वाले इससे घृणा करें।

هُوَ اَ۬لذِے أَرْسَلَ رَسُولَهُۥ بِالْهُدَىٰ وَدِينِ اِ۬لْحَقِّ لِيُظْهِرَهُۥ عَلَى اَ۬لدِّينِ كُلِّهِۦ وَلَوْ كَرِهَ اَ۬لْمُشْرِكُونَۖ

हे विश्वास करने वालो! क्या तुम चाहते हो कि मैं तुम्हें एक ऐसा व्यापार बताऊँ जो तुम्हें पीड़ादायक दंड से उबार लेगा? तुम ईश्वर और उसके संदेशवाहक पर विश्वास करते हो, और ईश्वर की राह में अपनी संपत्ति और अपने स्व से संघर्ष करते हो — यह तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम जानते। वह तुम्हारे दोषों को क्षमा कर देगा और तुम्हें ऐसे उद्यानों में प्रवेश कराएगा जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, और अच्छे आवासों में, स्थायित्व के उद्यानों में।

يَٰأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ هَلْ أَدُلُّكُمْ عَلَىٰ تِجَٰرَةٖ تُنجِيكُم مِّنْ عَذَابٍ أَلِيمٖ تُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَتُجَٰهِدُونَ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ بِأَمْوَٰلِكُمْ وَأَنفُسِكُمْ ذَٰلِكُمْ خَيْرٞ لَّكُمْ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ يَغْفِرْ لَكُمْ ذُنُوبَكُمْ وَيُدْخِلْكُمْ جَنَّٰتٖ تَجْرِے مِن تَحْتِهَا اَ۬لْأَنْهَٰرُ وَمَسَٰكِنَ طَيِّبَةٗ فِے جَنَّٰتِ عَدْنٖۖ

यही विशाल विजय है।

ذَٰلِكَ اَ۬لْفَوْزُ اُ۬لْعَظِيمُۖ

और एक और चीज़ है जिससे तुम प्रेम करते हो: ईश्वर की ओर से सहायता और निकट का उद्घाटन।

وَأُخْرَىٰ تُحِبُّونَهَا نَصْرٞ مِّنَ اَ۬للَّهِ وَفَتْحٞ قَرِيبٞۖ

और विश्वास करने वालों को शुभ समाचार दो।

وَبَشِّرِ اِ۬لْمُؤْمِنِينَۖ

61:14

हे विश्वास करने वालो! ईश्वर के सहायक बनो, जैसे मरयम के पुत्र ईसा ने शिष्यों से कहा: “ईश्वर की ओर मेरे सहायक कौन हैं?”

يَٰأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ كُونُواْ أَنصَاراٗ لِّلهِ كَمَا قَالَ عِيسَى اَ۪بْنُ مَرْيَمَ لِلْحَوَارِيِّـۧنَ مَنْ أَنصَارِيَ إِلَى اَ۬للَّهِۖ

61:14

शिष्यों ने कहा: “हम ईश्वर के सहायक हैं।”

قَالَ اَ۬لْحَوَارِيُّونَ نَحْنُ أَنصَارُ اُ۬للَّهِۖ

61:14

तब इसराईल की संतान के एक समूह ने विश्वास किया, और एक समूह ने नकारा।

فَـَٔامَنَت طَّآئِفَةٞ مِّنۢ بَنِے إِسْرَآءِيلَ وَكَفَرَت طَّآئِفَةٞۖ

61:14

तब हमने उन्हें जो विश्वास करते थे, उनके शत्रु के विरुद्ध सशक्त किया, और वे ऊपर रहने वाले बन गए।

فَأَيَّدْنَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ عَلَىٰ عَدُوِّهِمْ فَأَصْبَحُواْ ظَٰهِرِينَۖ

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