सामग्री पर जाएँ
القرآنal-quran.fr
मेनू
100%
القرآن

التوبة

At-Tawba

God Suffices Me

अध्याय 9 · 129 पद

9:1

बरी-पत्र, ईश्वर और उसके संदेशवाहक की ओर से, उन साझी ठहराने वालों के प्रति जिनसे तुमने संधि की थी।

بَرَآءَةٞ مِّنَ اَ۬للَّهِ وَرَسُولِهِۦ إِلَى اَ۬لذِينَ عَٰهَدتُّم مِّنَ اَ۬لْمُشْرِكِينَۖ

9:2

तो चार महीने धरती पर घूमते रहो,

فَسِيحُواْ فِے اِ۬لْأَرْضِ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٖۖ

और जान लो कि तुम ईश्वर को असमर्थ नहीं कर सकते, और यह कि ईश्वर नकारने वालों को लज्जित करता है।

وَاعْلَمُواْ أَنَّكُمْ غَيْرُ مُعْجِزِے اِ۬للَّهِ وَأَنَّ اَ۬للَّهَ مُخْزِے اِ۬لْكَٰفِرِينَۖ

9:3

और ईश्वर और उसके संदेशवाहक की ओर से लोगों के लिए एक घोषणा, हज के महासंगम के दिन: ईश्वर साझी ठहराने वालों से बरी है, और उसका संदेशवाहक भी।

وَأَذَٰنٞ مِّنَ اَ۬للَّهِ وَرَسُولِهِۦ إِلَى اَ۬لنَّاسِ يَوْمَ اَ۬لْحَجِّ اِ۬لْأَكْبَرِ أَنَّ اَ۬للَّهَ بَرِےٓءٞ مِّنَ اَ۬لْمُشْرِكِينَ وَرَسُولُهُۥۖ

9:3

तो यदि तुम पलट आओ, तो यह तुम्हारे लिए बेहतर है;

فَإِن تُبْتُمْ فَهْوَ خَيْرٞ لَّكُمْۖ

9:3

परंतु यदि तुम पीठ फेरो, तो जान लो कि तुम ईश्वर को असमर्थ नहीं कर सकते।

وَإِن تَوَلَّيْتُمْ فَاعْلَمُواْ أَنَّكُمْ غَيْرُ مُعْجِزِے اِ۬للَّهِۖ

9:4

और जिन्होंने नकारा उन्हें पीड़ादायक दंड का शुभ समाचार दो — उन साझी ठहराने वालों को छोड़कर जिनसे तुमने संधि की, फिर जिन्होंने तुम्हारे प्रति किसी बात में कमी नहीं की और तुम्हारे विरुद्ध किसी का साथ नहीं दिया: उनके प्रति उनकी संधि उसकी अवधि तक पूरी करो,

وَبَشِّرِ اِ۬لذِينَ كَفَرُواْ بِعَذَابٍ أَلِيمٍ إِلَّا اَ۬لذِينَ عَٰهَدتُّم مِّنَ اَ۬لْمُشْرِكِينَ ثُمَّ لَمْ يَنقُصُوكُمْ شَئْاٗ وَلَمْ يُظَٰهِرُواْ عَلَيْكُمْ أَحَداٗ فَأَتِمُّواْ إِلَيْهِمْ عَهْدَهُمْ إِلَىٰ مُدَّتِهِمْۖ

9:4

क्योंकि ईश्वर सावधानी बरतने वालों से प्रेम करता है।

إِنَّ اَ۬للَّهَ يُحِبُّ اُ۬لْمُتَّقِينَۖ

9:5

जब अलंघनीय महीने बीत जाएँ, तो साझी ठहराने वालों को जहाँ पाओ मार डालो; उन्हें पकड़ो, उन्हें घेरो, और हर निगरानी-स्थल पर उनके लिए घात लगाओ।

۞ فَإِذَا اَ۪نسَلَخَ اَ۬لْأَشْهُرُ اُ۬لْحُرُمُ فَاقْتُلُواْ اُ۬لْمُشْرِكِينَ حَيْثُ وَجَدتُّمُوهُمْ وَخُذُوهُمْ وَاحْصُرُوهُمْ وَاقْعُدُواْ لَهُمْ كُلَّ مَرْصَدٖۖ

परंतु यदि वे पलट आएँ, संपर्क बनाए रखें और शुद्ध उदारता दें, तो उनकी राह खुली छोड़ दो,

فَإِن تَابُواْ وَأَقَامُواْ اُ۬لصَّلَوٰةَ وَءَاتَوُاْ اُ۬لزَّكَوٰةَ فَخَلُّواْ سَبِيلَهُمْۖ

क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।

إِنَّ اَ۬للَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞۖ

9:6

और यदि साझी ठहराने वालों में से कोई तुमसे शरण माँगे, तो उसे शरण दो, जब तक वह ईश्वर का बोल न सुन ले, फिर उसे उसके सुरक्षित स्थान तक पहुँचा दो।

وَإِنْ أَحَدٞ مِّنَ اَ۬لْمُشْرِكِينَ اَ۪سْتَجَارَكَ فَأَجِرْهُ حَتَّىٰ يَسْمَعَ كَلَٰمَ اَ۬للَّهِ ثُمَّ أَبْلِغْهُ مَأْمَنَهُۥۖ

9:6

यह इसलिए कि वे ऐसी क़ौम हैं जो नहीं जानती।

ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَوْمٞ لَّا يَعْلَمُونَۖ

9:7

साझी ठहराने वालों के लिए ईश्वर और उसके संदेशवाहक के पास संधि कैसे हो सकती है — उनके सिवा जिनसे तुमने माथा टेकने के अलंघनीय स्थान के पास संधि की? जब तक वे तुम्हारे प्रति सीधे रहें, तुम भी उनके प्रति सीधे रहो,

كَيْفَ يَكُونُ لِلْمُشْرِكِينَ عَهْدٌ عِندَ اَ۬للَّهِ وَعِندَ رَسُولِهِۦ إِلَّا اَ۬لذِينَ عَٰهَدتُّمْ عِندَ اَ۬لْمَسْجِدِ اِ۬لْحَرَامِ فَمَا اَ۪سْتَقَٰمُواْ لَكُمْ فَاسْتَقِيمُواْ لَهُمْۖ

9:7

क्योंकि ईश्वर सावधानी बरतने वालों से प्रेम करता है।

إِنَّ اَ۬للَّهَ يُحِبُّ اُ۬لْمُتَّقِينَۖ

फिर कैसे? यदि वे तुम पर हावी हो जाएँ, तो वे तुम्हारे प्रति न रक्त-संबंध का लिहाज़ करेंगे न ज़मानत का।

كَيْفَ وَإِنْ يَّظْهَرُواْ عَلَيْكُمْ لَا يَرْقُبُواْ فِيكُمْ إِلّاٗ وَلَا ذِمَّةٗۖ

वे तुम्हें अपने मुँह से प्रसन्न करते हैं, जबकि उनके मर्म इनकार करते हैं; और उनमें से अधिकतर अतिक्रमणकारी हैं।

يُرْضُونَكُم بِأَفْوَٰهِهِمْ وَتَأْبَىٰ قُلُوبُهُمْ وَأَكْثَرُهُمْ فَٰسِقُونَۖ

उन्होंने ईश्वर के संकेतों के बदले एक तुच्छ मूल्य ख़रीदा, और उन्होंने उसकी राह रोकी।

اَ۪شْتَرَوْاْ بِـَٔايَٰتِ اِ۬للَّهِ ثَمَناٗ قَلِيلاٗ فَصَدُّواْ عَن سَبِيلِهِۦۖ

कितना बुरा है जो वे करते थे!

إِنَّهُمْ سَآءَ مَا كَانُواْ يَعْمَلُونَۖ

वे किसी विश्वास करने वाले के प्रति न रक्त-संबंध का लिहाज़ करते हैं न ज़मानत का।

لَا يَرْقُبُونَ فِے مُؤْمِنٍ إِلّاٗ وَلَا ذِمَّةٗۖ

और वही आक्रमणकारी हैं।

وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لْمُعْتَدُونَۖ

9:11

यदि वे पलट आएँ, संपर्क बनाए रखें और शुद्ध उदारता दें, तो वे विधान में तुम्हारे भाई हैं।

فَإِن تَابُواْ وَأَقَامُواْ اُ۬لصَّلَوٰةَ وَءَاتَوُاْ اُ۬لزَّكَوٰةَ فَإِخْوَٰنُكُمْ فِے اِ۬لدِّينِۖ

9:11

और हम उस क़ौम के लिए संकेतों का विवरण देते हैं जो जानती है।

وَنُفَصِّلُ اُ۬لْأٓيَٰتِ لِقَوْمٖ يَعْلَمُونَۖ

परंतु यदि वे अपनी संधि के बाद अपनी शपथें भंग करें, और तुम्हारे विधान पर प्रहार करें, तो नकार के अगुवाओं से लड़ो,

۞ وَإِن نَّكَثُواْ أَيْمَٰنَهُم مِّنۢ بَعْدِ عَهْدِهِمْ وَطَعَنُواْ فِے دِينِكُمْ فَقَٰتِلُواْ أَي۪مَّةَ اَ۬لْكُفْرِ

क्योंकि उनकी शपथें टिकाऊ नहीं — शायद वे बाज़ आएँ।

إِنَّهُمْ لَا أَيْمَٰنَ لَهُمْ لَعَلَّهُمْ يَنتَهُونَۖ

तो क्या तुम उस क़ौम से नहीं लड़ोगे जिसने अपनी शपथें भंग कीं, जिसने संदेशवाहक को निकालने का इरादा किया, और जिसने पहले तुम पर प्रहार किया? क्या तुम उनसे भय खाते हो?

أَلَا تُقَٰتِلُونَ قَوْماٗ نَّكَثُواْ أَيْمَٰنَهُمْ وَهَمُّواْ بِإِخْرَاجِ اِ۬لرَّسُولِ وَهُم بَدَءُوكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ أَتَخْشَوْنَهُمْۖ

ईश्वर इसका अधिक अधिकारी है कि तुम उससे भय खाओ, यदि तुम विश्वास करने वाले हो।

فَاللَّهُ أَحَقُّ أَن تَخْشَوْهُ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَۖ

उनसे लड़ो: ईश्वर तुम्हारे हाथों से उन्हें दंड देगा, उन्हें लज्जित करेगा, उनके विरुद्ध तुम्हारी सहायता करेगा, विश्वास करने वाली क़ौम के सीनों को चंगा करेगा, और उनके मर्मों से आक्रोश दूर करेगा।

قَٰتِلُوهُمْ يُعَذِّبْهُمُ اُ۬للَّهُ بِأَيْدِيكُمْ وَيُخْزِهِمْ وَيَنصُرْكُمْ عَلَيْهِمْ وَيَشْفِ صُدُورَ قَوْمٖ مُّؤْمِنِينَ وَيُذْهِبْ غَيْظَ قُلُوبِهِمْۖ

और ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसकी ओर अनुकंपा के साथ पलटता है।

وَيَتُوبُ اُ۬للَّهُ عَلَىٰ مَنْ يَّشَآءُۖ

और ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।

وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌۖ

या फिर तुमने समझा था कि तुम्हें यों ही छोड़ दिया जाएगा, जबकि ईश्वर ने अभी उन्हें अलग नहीं किया जिन्होंने तुममें से संघर्ष किया और ईश्वर, उसके संदेशवाहक और विश्वास करने वालों के अतिरिक्त किसी को अंतरंग राज़दार नहीं बनाया?

أَمْ حَسِبْتُمْ أَن تُتْرَكُواْ وَلَمَّا يَعْلَمِ اِ۬للَّهُ اُ۬لذِينَ جَٰهَدُواْ مِنكُمْ وَلَمْ يَتَّخِذُواْ مِن دُونِ اِ۬للَّهِ وَلَا رَسُولِهِۦ وَلَا اَ۬لْمُؤْمِنِينَ وَلِيجَةٗۖ

और ईश्वर तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।

وَاللَّهُ خَبِيرُۢ بِمَا تَعْمَلُونَۖ

9:17

साझी ठहराने वालों को यह उचित नहीं कि वे ईश्वर के माथा टेकने के स्थानों को आबाद करें, जबकि वे अपने ही विरुद्ध नकार का साक्ष्य देते हैं।

مَا كَانَ لِلْمُشْرِكِينَ أَنْ يَّعْمُرُواْ مَسَٰجِدَ اَ۬للَّهِ شَٰهِدِينَ عَلَىٰ أَنفُسِهِم بِالْكُفْرِۖ

वही हैं जिनके कर्म ढह गए, और जो आग में सदा रहते हैं।

أُوْلَٰٓئِكَ حَبِطَتْ أَعْمَٰلُهُمْ وَفِے اِ۬لنَّارِ هُمْ خَٰلِدُونَۖ

ईश्वर के माथा टेकने के स्थानों को वही आबाद करता है जिसने ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास किया, संपर्क बनाए रखा, शुद्ध उदारता दी, और केवल ईश्वर से भय खाया — यही वे हैं जिनके विषय में संभव है कि वे मार्गदर्शन पाने वालों में हों।

إِنَّمَا يَعْمُرُ مَسَٰجِدَ اَ۬للَّهِ مَنْ ءَامَنَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ اِ۬لْأٓخِرِ وَأَقَامَ اَ۬لصَّلَوٰةَ وَءَاتَى اَ۬لزَّكَوٰةَ وَلَمْ يَخْشَ إِلَّا اَ۬للَّهَ فَعَسَىٰ أُوْلَٰٓئِكَ أَنْ يَّكُونُواْ مِنَ اَ۬لْمُهْتَدِينَۖ

9:19

क्या तुमने हज करने वालों को पानी पिलाने और माथा टेकने के अलंघनीय स्थान को आबाद करने को उसके समकक्ष ठहरा लिया जिसने ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास किया, और ईश्वर की राह में संघर्ष किया?

۞ أَجَعَلْتُمْ سِقَايَةَ اَ۬لْحَآجِّ وَعِمَارَةَ اَ۬لْمَسْجِدِ اِ۬لْحَرَامِ كَمَنْ ءَامَنَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ اِ۬لْأٓخِرِ وَجَٰهَدَ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِۖ

वे ईश्वर के पास बराबर नहीं हैं।

لَا يَسْتَوُۥنَ عِندَ اَ۬للَّهِۖ

और ईश्वर अन्यायी क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।

وَاللَّهُ لَا يَهْدِے اِ۬لْقَوْمَ اَ۬لظَّٰلِمِينَۖ

जिन्होंने विश्वास किया, प्रवास किया और अपनी संपत्ति और अपने स्व से ईश्वर की राह में संघर्ष किया, उनकी ईश्वर के पास एक अधिक विशाल श्रेणी है,

اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ وَهَاجَرُواْ وَجَٰهَدُواْ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ بِأَمْوَٰلِهِمْ وَأَنفُسِهِمْ أَعْظَمُ دَرَجَةً عِندَ اَ۬للَّهِۖ

और वही विजयी हैं।

وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لْفَآئِزُونَۖ

9:21–22

उनका अभिभावक उन्हें अपनी ओर से दया, एक प्रसन्नता, और ऐसे उद्यानों का शुभ समाचार देता है जिनमें उनके लिए बना रहने वाला उपकार होगा, वहाँ सदा, चिरकाल तक रहने को;

يُبَشِّرُهُمْ رَبُّهُم بِرَحْمَةٖ مِّنْهُ وَرِضْوَٰنٖ وَجَنَّٰتٖ لَّهُمْ فِيهَا نَعِيمٞ مُّقِيمٌ خَٰلِدِينَ فِيهَا أَبَداًۖ

क्योंकि ईश्वर के पास विशाल पुरस्कार है।

إِنَّ اَ۬للَّهَ عِندَهُۥ أَجْرٌ عَظِيمٞۖ

हे विश्वास करने वालो! अपने पिताओं और अपने भाइयों को हिमायती न बनाओ, यदि वे विश्वास की अपेक्षा नकार से अधिक प्रेम करते हैं।

يَٰأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَتَّخِذُواْ ءَابَآءَكُمْ وَإِخْوَٰنَكُمْ أَوْلِيَآءَ ا۪نِ اِ۪سْتَحَبُّواْ اُ۬لْكُفْرَ عَلَى اَ۬لْإِيمَٰنِۖ

और तुममें से जो कोई उन्हें हिमायती बनाता है, वही अन्यायी हैं।

وَمَنْ يَّتَوَلَّهُم مِّنكُمْ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لظَّٰلِمُونَۖ

9:24

कहो: “यदि तुम्हारे पिता, तुम्हारे पुत्र, तुम्हारे भाई, तुम्हारे जोड़ीदार, तुम्हारे आत्मीय जन, वह संपत्ति जो तुमने कमाई, वह व्यापार जिसके मंदे पड़ने का तुम्हें भय है, और वे आवास जिनसे तुम संतुष्ट हो, तुम्हें ईश्वर से, उसके संदेशवाहक से, और उसकी राह में संघर्ष से अधिक प्रिय हैं, तो प्रतीक्षा में रहो, जब तक ईश्वर अपना आदेश ले न आए।”

قُلْ إِن كَانَ ءَابَآؤُكُمْ وَأَبْنَآؤُكُمْ وَإِخْوَٰنُكُمْ وَأَزْوَٰجُكُمْ وَعَشِيرَتُكُمْ وَأَمْوَٰلٌ اِ۪قْتَرَفْتُمُوهَا وَتِجَٰرَةٞ تَخْشَوْنَ كَسَادَهَا وَمَسَٰكِنُ تَرْضَوْنَهَا أَحَبَّ إِلَيْكُم مِّنَ اَ۬للَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَجِهَادٖ فِے سَبِيلِهِۦ فَتَرَبَّصُواْ حَتَّىٰ يَأْتِيَ اَ۬للَّهُ بِأَمْرِهِۦۖ

9:24

और ईश्वर अतिक्रमणकारियों की क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।

وَاللَّهُ لَا يَهْدِے اِ۬لْقَوْمَ اَ۬لْفَٰسِقِينَۖ

9:25

ईश्वर ने निश्चय ही अनेक स्थानों पर तुम्हारी सहायता की, और हुनैन के दिन, जब तुम्हारी बड़ी संख्या ने तुम्हें चकाचौंध कर दिया, परंतु वह तुम्हारे किसी काम न आई, और धरती अपने विस्तार के बावजूद तुम्हारे लिए तंग हो गई; फिर तुमने पीठ फेरी, भागते हुए।

لَقَدْ نَصَرَكُمُ اُ۬للَّهُ فِے مَوَاطِنَ كَثِيرَةٖ وَيَوْمَ حُنَيْنٍ إِذْ أَعْجَبَتْكُمْ كَثْرَتُكُمْ فَلَمْ تُغْنِ عَنكُمْ شَئْاٗ وَضَاقَتْ عَلَيْكُمُ اُ۬لْأَرْضُ بِمَا رَحُبَتْ ثُمَّ وَلَّيْتُم مُّدْبِرِينَۖ

9:26

फिर ईश्वर ने अपने संदेशवाहक पर और विश्वास करने वालों पर अपनी आश्वस्ति उतारी, और ऐसी सेनाएँ उतारीं जिन्हें तुम नहीं देखते थे, और उसने उन्हें दंड दिया जिन्होंने नकारा था।

ثُمَّ أَنزَلَ اَ۬للَّهُ سَكِينَتَهُۥ عَلَىٰ رَسُولِهِۦ وَعَلَى اَ۬لْمُؤْمِنِينَ وَأَنزَلَ جُنُوداٗ لَّمْ تَرَوْهَا وَعَذَّبَ اَ۬لذِينَ كَفَرُواْۖ

9:26

और नकारने वालों का प्रतिफल ऐसा ही है।

وَذَٰلِكَ جَزَآءُ اُ۬لْكَٰفِرِينَۖ

फिर ईश्वर इसके बाद जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसकी ओर अनुकंपा के साथ पलटता है।

ثُمَّ يَتُوبُ اُ۬للَّهُ مِنۢ بَعْدِ ذَٰلِكَ عَلَىٰ مَنْ يَّشَآءُۖ

और ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।

وَاللَّهُ غَفُورٞ رَّحِيمٞۖ

हे विश्वास करने वालो! साझी ठहराने वाले तो केवल अशुद्धि हैं: अतः इस साल के बाद वे माथा टेकने के अलंघनीय स्थान के निकट न आएँ।

۞ يَٰأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ إِنَّمَا اَ۬لْمُشْرِكُونَ نَجَسٞ فَلَا يَقْرَبُواْ اُ۬لْمَسْجِدَ اَ۬لْحَرَامَ بَعْدَ عَامِهِمْ هَٰذَاۖ

और यदि तुम्हें तंगी का डर हो, तो ईश्वर, यदि उसकी मर्ज़ी हो, अपने अनुग्रह से तुम्हें धनी कर देगा,

وَإِنْ خِفْتُمْ عَيْلَةٗ فَسَوْفَ يُغْنِيكُمُ اُ۬للَّهُ مِن فَضْلِهِۦ إِن شَآءَۖ

क्योंकि ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।

ا۪نَّ اَ۬للَّهَ عَلِيمٌ حَكِيمٞۖ

9:29

उनसे लड़ो जो न ईश्वर पर विश्वास करते हैं न अंतिम दिन पर, जो उसे वर्जित नहीं मानते जिसे ईश्वर और उसके संदेशवाहक ने वर्जित किया है, और जो सत्य के विधान के अनुरूप नहीं चलते, उनमें से जिन्हें ग्रंथ दिया गया — जब तक कि वे अपने हाथ से युद्ध-क्षतिपूर्ति न दें, नीचा किए हुए।

قَٰتِلُواْ اُ۬لذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَلَا بِالْيَوْمِ اِ۬لْأٓخِرِ وَلَا يُحَرِّمُونَ مَا حَرَّمَ اَ۬للَّهُ وَرَسُولُهُۥ وَلَا يَدِينُونَ دِينَ اَ۬لْحَقِّ مِنَ اَ۬لذِينَ أُوتُواْ اُ۬لْكِتَٰبَ حَتَّىٰ يُعْطُواْ اُ۬لْجِزْيَةَ عَنْ يَّدٖ وَهُمْ صَٰغِرُونَۖ

9:30

और पुनरुन्मुखों ने कहा: “अल-उज़ैर ईश्वर का पुत्र है”;

وَقَالَتِ اِ۬لْيَهُودُ عُزَيْرُ اُ۪بْنُ اُ۬للَّهِۖ

9:30

और सहायकों ने कहा: “अल-मसीह ईश्वर का पुत्र है।”

وَقَالَتِ اِ۬لنَّصَٰرَى اَ۬لْمَسِيحُ اُ۪بْنُ اُ۬للَّهِۖ

9:30

यह उनका कथन है, उनके मुँह से; वे उनके कथन की नक़ल करते हैं जिन्होंने उनसे पहले नकारा।

ذَٰلِكَ قَوْلُهُم بِأَفْوَٰهِهِمْۖ يُضَٰهُونَ قَوْلَ اَ۬لذِينَ كَفَرُواْ مِن قَبْلُۖ

ईश्वर उनसे लड़े!

قَٰتَلَهُمُ اُ۬للَّهُۖ

तो वे कैसे उलटे फेरे जा रहे हैं?

أَنَّىٰ يُؤْفَكُونَۖ

9:31

उन्होंने अपने आचार्यों और अपने भिक्षुओं को ईश्वर के अतिरिक्त स्वामी बना लिया, और मरयम के पुत्र अल-मसीह को भी,

اَ۪تَّخَذُواْ أَحْبَارَهُمْ وَرُهْبَٰنَهُمْ أَرْبَاباٗ مِّن دُونِ اِ۬للَّهِ وَالْمَسِيحَ اَ۪بْنَ مَرْيَمَۖ

जबकि उन्हें केवल एक ही देवता की आज्ञा का पालन करने का आदेश दिया गया था।

وَمَا أُمِرُواْ إِلَّا لِيَعْبُدُواْ إِلَٰهاٗ وَٰحِداٗۖ

उसके सिवा कोई देवता नहीं।

لَّا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ

उसकी महिमा हो, उससे ऊपर जो वे उसके साथ साझी ठहराते हैं!

سُبْحَٰنَهُۥ عَمَّا يُشْرِكُونَۖ

9:32

वे ईश्वर की ज्योति को अपने मुँह से बुझाना चाहते हैं, परंतु ईश्वर अपनी ज्योति पूर्ण करने के सिवा सब कुछ अस्वीकार करता है, भले ही नकारने वाले इससे घृणा करें।

يُرِيدُونَ أَنْ يُّطْفِـُٔواْ نُورَ اَ۬للَّهِ بِأَفْوَٰهِهِمْ وَيَأْبَى اَ۬للَّهُ إِلَّا أَنْ يُّتِمَّ نُورَهُۥ وَلَوْ كَرِهَ اَ۬لْكَٰفِرُونَۖ

9:33

वही है जिसने अपने संदेशवाहक को मार्गदर्शन और सत्य के विधान के साथ भेजा, ताकि उसे हर विधान पर प्रबल करे, भले ही साझी ठहराने वाले इससे घृणा करें।

هُوَ اَ۬لذِے أَرْسَلَ رَسُولَهُۥ بِالْهُدَىٰ وَدِينِ اِ۬لْحَقِّ لِيُظْهِرَهُۥ عَلَى اَ۬لدِّينِ كُلِّهِۦ وَلَوْ كَرِهَ اَ۬لْمُشْرِكُونَۖ

हे विश्वास करने वालो! बहुत से आचार्य और भिक्षु लोगों की संपत्ति असत्य से अवश्य खा जाते हैं, और ईश्वर की राह को रोकते हैं।

۞ يَٰأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ إِنَّ كَثِيراٗ مِّنَ اَ۬لْأَحْبَارِ وَالرُّهْبَانِ لَيَأْكُلُونَ أَمْوَٰلَ اَ۬لنَّاسِ بِالْبَٰطِلِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اِ۬للَّهِۖ

और जो सोना और चाँदी जमा करके रखते हैं, और उसे ईश्वर की राह में ख़र्च नहीं करते — उन्हें पीड़ादायक दंड का शुभ समाचार दो,

وَالذِينَ يَكْنِزُونَ اَ۬لذَّهَبَ وَالْفِضَّةَ وَلَا يُنفِقُونَهَا فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ فَبَشِّرْهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٖۖ

उस दिन जब उन्हें जहन्नम की आग में तपाया जाएगा, और उससे उनके माथे, उनके पहलू और उनकी पीठें दागी जाएँगी: “यह वह है जो तुमने अपने लिए जमा करके रखा; तो जो तुम जमा करते थे उसे चखो!”

يَوْمَ يُحْمَىٰ عَلَيْهَا فِے نَارِ جَهَنَّمَ فَتُكْوَىٰ بِهَا جِبَاهُهُمْ وَجُنُوبُهُمْ وَظُهُورُهُمْ هَٰذَا مَا كَنَزْتُمْ لِأَنفُسِكُمْ فَذُوقُواْ مَا كُنتُمْ تَكْنِزُونَۖ

9:36

ईश्वर के निकट महीनों की संख्या निश्चय ही बारह महीने है, ईश्वर की संहिता में, उस दिन से जब उसने आकाशों और धरती को रचा;

إِنَّ عِدَّةَ اَ۬لشُّهُورِ عِندَ اَ۬للَّهِ اِ۪ثْنَا عَشَرَ شَهْراٗ فِے كِتَٰبِ اِ۬للَّهِ يَوْمَ خَلَقَ اَ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالْأَرْضَۖ

9:36

उनमें से चार अलंघनीय हैं।

مِنْهَا أَرْبَعَةٌ حُرُمٞۖ

यही सीधा विधान है।

ذَٰلِكَ اَ۬لدِّينُ اُ۬لْقَيِّمُۖ

तो इन महीनों में अपने आप पर अन्याय न करो।

فَلَا تَظْلِمُواْ فِيهِنَّ أَنفُسَكُمْۖ

9:36

और साझी ठहराने वालों से सभी महीनों में लड़ो, जैसे वे सभी महीनों में तुमसे लड़ते हैं,

وَقَٰتِلُواْ اُ۬لْمُشْرِكِينَ كَآفَّةٗ كَمَا يُقَٰتِلُونَكُمْ كَآفَّةٗۖ

और जान लो कि ईश्वर सावधानी बरतने वालों के साथ है।

وَاعْلَمُواْ أَنَّ اَ۬للَّهَ مَعَ اَ۬لْمُتَّقِينَۖ

9:37

स्थगन तो नकार में केवल एक और वृद्धि है: उसके द्वारा नकारने वाले भटकाते हैं; वे एक साल उसे वैध कर देते हैं और एक साल उसे अलंघनीय बना देते हैं, ताकि ईश्वर ने जिसे अलंघनीय बनाया है उसकी संख्या को रौंद दें, और इस प्रकार ईश्वर ने जिसे अलंघनीय बनाया है उसे वैध कर दें।

إِنَّمَا اَ۬لنَّسِےٓءُ زِيَادَةٞ فِے اِ۬لْكُفْرِ يَضِلُّ بِهِ اِ۬لذِينَ كَفَرُواْ يُحِلُّونَهُۥ عَاماٗ وَيُحَرِّمُونَهُۥ عَاماٗ لِّيُوَاطِـُٔواْ عِدَّةَ مَا حَرَّمَ اَ۬للَّهُ فَيُحِلُّواْ مَا حَرَّمَ اَ۬للَّهُۖ

उनके कर्मों की बुराई उनके लिए सुंदर बना दी गई है।

زُيِّنَ لَهُمْ سُوٓءُ اَ۬عْمَٰلِهِمْۖ

और ईश्वर नकारने वाली क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।

وَاللَّهُ لَا يَهْدِے اِ۬لْقَوْمَ اَ۬لْكَٰفِرِينَۖ

9:38

हे विश्वास करने वालो! तुम्हें क्या हुआ है कि जब तुमसे कहा जाता है: “ईश्वर की राह में लामबंद हो जाओ”, तो तुम धरती की ओर बोझिल होकर झुक जाते हो?

يَٰأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ مَا لَكُمْ إِذَا قِيلَ لَكُمُ اُ۪نفِرُواْ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ اِ۪ثَّاقَلْتُمْ إِلَى اَ۬لْأَرْضِۖ

क्या तुम अंतिम जीवन की अपेक्षा इहलोक के जीवन से संतुष्ट हो गए हो?

أَرَضِيتُم بِالْحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنْيَا مِنَ اَ۬لْأٓخِرَةِۖ

इहलोक के जीवन का उपभोग, अंतिम जीवन की तुलना में, बस थोड़ा-सा है।

فَمَا مَتَٰعُ اُ۬لْحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنْيَا فِے اِ۬لْأٓخِرَةِ إِلَّا قَلِيلٌۖ

यदि तुम लामबंद नहीं होगे, तो वह तुम्हें पीड़ादायक दंड देगा, और तुम्हें एक दूसरी क़ौम से बदल देगा, और तुम उसे ज़रा भी हानि न पहुँचा सकोगे।

إِلَّا تَنفِرُواْ يُعَذِّبْكُمْ عَذَاباً أَلِيماٗ وَيَسْتَبْدِلْ قَوْماً غَيْرَكُمْ وَلَا تَضُرُّوهُ شَئْاٗۖ

और ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।

وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَےْءٖ قَدِيرٌۖ

9:40

यदि तुम उसकी सहायता नहीं करोगे, तो ईश्वर पहले ही उसकी सहायता कर चुका है, जब नकारने वालों ने उसे निकाल दिया था — वह, दो में दूसरा — जब वे दोनों कंदरा में थे, जब वह अपने साथी से कह रहा था: “दुखी न हो, ईश्वर निश्चय ही हमारे साथ है।”

۞ إِلَّا تَنصُرُوهُ فَقَدْ نَصَرَهُ اُ۬للَّهُ إِذْ أَخْرَجَهُ اُ۬لذِينَ كَفَرُواْ ثَانِيَ اَ۪ثْنَيْنِ إِذْ هُمَا فِے اِ۬لْغَارِ إِذْ يَقُولُ لِصَٰحِبِهِۦ لَا تَحْزَنْ إِنَّ اَ۬للَّهَ مَعَنَاۖ

9:40

तब ईश्वर ने उस पर अपनी आश्वस्ति उतारी,

فَأَنزَلَ اَ۬للَّهُ سَكِينَتَهُۥ عَلَيْهِ

9:40

और उसे ऐसी सेनाओं से सुदृढ़ किया जिन्हें तुम नहीं देखते थे,

وَأَيَّدَهُۥ بِجُنُودٖ لَّمْ تَرَوْهَاۖ

9:40

और उसने नकारने वालों का बोल सबसे नीचा कर दिया,

وَجَعَلَ كَلِمَةَ اَ۬لذِينَ كَفَرُواْ اُ۬لسُّفْلَىٰۖ

9:40

जबकि ईश्वर का बोल तो सबसे ऊपर रहने वाला है।

وَكَلِمَةُ اُ۬للَّهِ هِيَ اَ۬لْعُلْيَاۖ

9:40

ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।

وَاللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌۖ

लामबंद हो जाओ, हलके या भारी, और अपनी संपत्ति और अपने स्व से ईश्वर की राह में संघर्ष करो।

اِ۪نفِرُواْ خِفَافاٗ وَثِقَالاٗ وَجَٰهِدُواْ بِأَمْوَٰلِكُمْ وَأَنفُسِكُمْ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِۖ

यह तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम जानते होते।

ذَٰلِكُمْ خَيْرٞ لَّكُمْ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَۖ

यदि यह निकट का लाभ और मध्यम यात्रा होती, तो वे तुम्हारा अनुसरण करते; परंतु दूरी उन्हें लंबी लगी।

لَوْ كَانَ عَرَضاٗ قَرِيباٗ وَسَفَراٗ قَاصِداٗ لَّاتَّبَعُوكَ وَلَٰكِنۢ بَعُدَتْ عَلَيْهِمُ اُ۬لشُّقَّةُۖ

और वे ईश्वर की शपथ खाएँगे: “यदि हमसे बन पड़ता, तो हम तुम्हारे साथ निकल पड़ते”;

وَسَيَحْلِفُونَ بِاللَّهِ لَوِ اِ۪سْتَطَعْنَا لَخَرَجْنَا مَعَكُمْۖ

वे स्वयं को नष्ट कर रहे हैं,

يُهْلِكُونَ أَنفُسَهُمْۖ

और ईश्वर जानता है कि वे अवश्य झूठे हैं।

وَاللَّهُ يَعْلَمُ إِنَّهُمْ لَكَٰذِبُونَۖ

9:43

ईश्वर तुमसे दरगुज़र करे! तुमने उन्हें यह अनुमति क्यों दी, इससे पहले कि तुम्हारे लिए वे स्पष्ट हो जाते जिन्होंने सच कहा, और तुम झूठों को जान लेते?

عَفَا اَ۬للَّهُ عَنكَ لِمَ أَذِنتَ لَهُمْ حَتَّىٰ يَتَبَيَّنَ لَكَ اَ۬لذِينَ صَدَقُواْ وَتَعْلَمَ اَ۬لْكَٰذِبِينَۖ

9:44

ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास करने वाले तुमसे अनुमति नहीं माँगते, जब बात अपनी संपत्ति और अपने स्व से संघर्ष करने की हो।

لَا يَسْتَٰٔذِنُكَ اَ۬لذِينَ يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ اِ۬لْأٓخِرِ أَنْ يُّجَٰهِدُواْ بِأَمْوَٰلِهِمْ وَأَنفُسِهِمْۖ

ईश्वर सावधानी बरतने वालों के विषय में सर्वज्ञ है।

وَاللَّهُ عَلِيمُۢ بِالْمُتَّقِينَۖ

9:45

तुमसे अनुमति केवल वही माँगते हैं जो न ईश्वर पर विश्वास करते हैं न अंतिम दिन पर, और जिनके मर्म संदेह से ग्रस्त हैं, इसलिए वे अपने संदेह में हिचकिचाते हैं।

إِنَّمَا يَسْتَٰٔذِنُكَ اَ۬لذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ اِ۬لْأٓخِرِ وَارْتَابَتْ قُلُوبُهُمْ فَهُمْ فِے رَيْبِهِمْ يَتَرَدَّدُونَۖ

और यदि वे निकलना चाहते, तो उसके लिए कुछ साज़-सामान तैयार करते;

۞ وَلَوْ أَرَادُواْ اُ۬لْخُرُوجَ لَأَعَدُّواْ لَهُۥ عُدَّةٗۖ

परंतु ईश्वर ने उनके उठाए जाने से अरुचि रखी, और उसने उन्हें रोक दिया, और उनसे कहा गया: “बैठने वालों के साथ बैठे रहो।”

وَلَٰكِن كَرِهَ اَ۬للَّهُ اُ۪نۢبِعَاثَهُمْ فَثَبَّطَهُمْ وَقِيلَ اَ۟قْعُدُواْ مَعَ اَ۬لْقَٰعِدِينَۖ

यदि वे तुम्हारे बीच निकले होते, तो तुम्हारी व्याकुलता ही बढ़ाते, और तुम्हें परीक्षा में डालने की खोज में तुम्हारे बीच इधर-उधर दौड़ते फिरते — और तुम्हारे बीच उनकी सुनने वाले हैं।

لَوْ خَرَجُواْ فِيكُم مَّا زَادُوكُمْ إِلَّا خَبَالاٗ وَلَأَوْضَعُواْ خِلَٰلَكُمْ يَبْغُونَكُمُ اُ۬لْفِتْنَةَ وَفِيكُمْ سَمَّٰعُونَ لَهُمْۖ

और ईश्वर अन्यायियों के विषय में सर्वज्ञ है।

وَاللَّهُ عَلِيمُۢ بِالظَّٰلِمِينَۖ

उन्होंने निश्चय ही पहले भी परीक्षा खोजी थी, और तुम्हारे लिए मामलों को उलट-पलट किया था, यहाँ तक कि सत्य आ गया और ईश्वर का आदेश सामने आ गया, उनकी अरुचि के बावजूद।

لَقَدِ اِ۪بْتَغَوُاْ اُ۬لْفِتْنَةَ مِن قَبْلُ وَقَلَّبُواْ لَكَ اَ۬لْأُمُورَ حَتَّىٰ جَآءَ اَ۬لْحَقُّ وَظَهَرَ أَمْرُ اُ۬للَّهِ وَهُمْ كَٰرِهُونَۖ

और उनमें से कोई है जो कहता है: “मुझे अनुमति दो, और मुझे परीक्षा में न डालो।”

وَمِنْهُم مَّنْ يَّقُولُ اُ۪ئْذَن لِّے وَلَا تَفْتِنِّےۖ

क्या वे परीक्षा में पहले ही नहीं गिर चुके?

أَلَا فِے اِ۬لْفِتْنَةِ سَقَطُواْۖ

और जहन्नम नकारने वालों को अवश्य घेरे हुए है।

وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمُحِيطَةُۢ بِالْكَٰفِرِينَۖ

यदि तुम्हें कोई भलाई पहुँचती है, तो यह उन्हें बुरा लगता है,

إِن تُصِبْكَ حَسَنَةٞ تَسُؤْهُمْۖ

और यदि तुम्हें कोई विपत्ति पहुँचती है, तो वे कहते हैं: “हमने पहले ही एहतियात बरत ली थी” — और वे पीठ फेर लेते हैं, हर्ष से भरे हुए।

وَإِن تُصِبْكَ مُصِيبَةٞ يَقُولُواْ قَدْ أَخَذْنَا أَمْرَنَا مِن قَبْلُ وَيَتَوَلَّواْ وَّهُمْ فَرِحُونَۖ

9:51

कहो: “हम पर कुछ नहीं आएगा, सिवा उसके जो ईश्वर ने हमारे लिए विहित किया है;

قُل لَّنْ يُّصِيبَنَا إِلَّا مَا كَتَبَ اَ۬للَّهُ لَنَاۖ

9:51

वह हमारा सबसे निकट का ज़ामिन है।

هُوَ مَوْلَيٰنَاۖ

9:51

और विश्वास करने वालों को ईश्वर को ही मुख़्तार बनाना चाहिए।”

وَعَلَى اَ۬للَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ اِ۬لْمُؤْمِنُونَۖ

कहो: “क्या तुम हमारे विषय में दो सबसे सुंदर बातों में से केवल एक की ही अपेक्षा रखते हो?

قُلْ هَلْ تَرَبَّصُونَ بِنَا إِلَّا إِحْدَى اَ۬لْحُسْنَيَيْنِۖ

और हम तुम्हारे विषय में अपेक्षा रखते हैं कि ईश्वर तुम पर अपनी ओर से, या हमारे हाथों से, कोई दंड घटित करे।

وَنَحْنُ نَتَرَبَّصُ بِكُمْ أَنْ يُّصِيبَكُمُ اُ۬للَّهُ بِعَذَابٖ مِّنْ عِندِهِۦ أَوْ بِأَيْدِينَاۖ

तो तुम प्रतीक्षा में रहो,

فَتَرَبَّصُواْۖ

क्योंकि हम तुम्हारे साथ प्रतीक्षा में हैं।”

إِنَّا مَعَكُم مُّتَرَبِّصُونَۖ

कहो: “ख़ुशी से ख़र्च करो या अनमने मन से, यह तुमसे स्वीकार नहीं किया जाएगा,

قُلْ أَنفِقُواْ طَوْعاً أَوْ كَرْهاٗ لَّنْ يُّتَقَبَّلَ مِنكُمْۖ

क्योंकि तुम अतिक्रमणकारियों की क़ौम हो।”

إِنَّكُمْ كُنتُمْ قَوْماٗ فَٰسِقِينَۖ

और उनके ख़र्च स्वीकार किए जाने से उन्हें किसी चीज़ ने नहीं रोका, सिवा इसके कि उन्होंने ईश्वर और उसके संदेशवाहक को नकारा, कि वे संपर्क में आते हैं तो केवल आलस्य के साथ, और ख़र्च करते हैं तो केवल अनमने मन से।

وَمَا مَنَعَهُمْ أَن تُقْبَلَ مِنْهُمْ نَفَقَٰتُهُمْ إِلَّا أَنَّهُمْ كَفَرُواْ بِاللَّهِ وَبِرَسُولِهِۦ وَلَا يَأْتُونَ اَ۬لصَّلَوٰةَ إِلَّا وَهُمْ كُسَالَىٰ وَلَا يُنفِقُونَ إِلَّا وَهُمْ كَٰرِهُونَۖ

9:55

इसलिए उनकी संपत्ति और उनकी संतान तुम्हें चकाचौंध न करें।

۞ فَلَا تُعْجِبْكَ أَمْوَٰلُهُمْ وَلَا أَوْلَٰدُهُمْۖ

ईश्वर इससे केवल यही चाहता है कि उन्हें इहलोक के जीवन में दंड दे, और उनका स्व निकल जाए जबकि वे नकार रहे हों।

إِنَّمَا يُرِيدُ اُ۬للَّهُ لِيُعَذِّبَهُم بِهَا فِے اِ۬لْحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنْيَا وَتَزْهَقَ أَنفُسُهُمْ وَهُمْ كَٰفِرُونَۖ

9:56

और वे ईश्वर की शपथ खाते हैं कि वे अवश्य तुम्हारे ही हैं, जबकि वे तुम्हारे नहीं हैं; बल्कि वे डरने वाले हैं।

وَيَحْلِفُونَ بِاللَّهِ إِنَّهُمْ لَمِنكُمْ وَمَا هُم مِّنكُمْ وَلَٰكِنَّهُمْ قَوْمٞ يَفْرَقُونَۖ

यदि उन्हें कोई पीछे हटने की जगह मिलती, कंदराएँ या कोई सुरंग, तो वे उसी की ओर बेक़ाबू होकर मुड़ जाते।

لَوْ يَجِدُونَ مَلْجَـٔاً أَوْ مَغَٰرَٰتٍ أَوْ مُدَّخَلاٗ لَّوَلَّوْاْ إِلَيْهِ وَهُمْ يَجْمَحُونَۖ

और उनमें से कुछ ऐसे हैं जो दानों के विषय में कटाक्षों से तुम्हारी निंदा करते हैं: यदि उन्हें उनमें से सौंपा जाए, तो वे संतुष्ट रहते हैं; और यदि उन्हें उनमें से न सौंपा जाए, तो देखो, वे क्रुद्ध हो उठते हैं।

وَمِنْهُم مَّنْ يَّلْمِزُكَ فِے اِ۬لصَّدَقَٰتِ فَإِنْ أُعْطُواْ مِنْهَا رَضُواْ وَإِن لَّمْ يُعْطَوْاْ مِنْهَا إِذَا هُمْ يَسْخَطُونَۖ

और यदि वे उससे संतुष्ट हो जाते जो ईश्वर और उसके संदेशवाहक ने उन्हें दिया था, और कहते: “ईश्वर हमारे लिए पर्याप्त है; ईश्वर हमें अपने अनुग्रह से देगा, और उसका संदेशवाहक भी;

وَلَوْ أَنَّهُمْ رَضُواْ مَا ءَاتَيٰهُمُ اُ۬للَّهُ وَرَسُولُهُۥ وَقَالُواْ حَسْبُنَا اَ۬للَّهُ سَيُؤْتِينَا اَ۬للَّهُ مِن فَضْلِهِۦ وَرَسُولُهُۥۖ

क्योंकि हम तो ईश्वर की ओर लगन से मुड़ते हैं।”

إِنَّا إِلَى اَ۬للَّهِ رَٰغِبُونَۖ

9:60

दान केवल निर्धनों के लिए हैं, दरिद्रों के लिए, उनकी देखरेख करने वालों के लिए, उनके लिए जिनके मर्मों में मेल कराया गया है, उनके लिए जो ऋण के बोझ तले हैं, उनके लिए जो अप्रत्याशित ख़र्च से क़र्ज़दार हुए, ईश्वर की राह में, और राह के मुसाफ़िर के लिए — यह ईश्वर की ओर से अनिवार्य कर्तव्य है।

إِنَّمَا اَ۬لصَّدَقَٰتُ لِلْفُقَرَآءِ وَالْمَسَٰكِينِ وَالْعَٰمِلِينَ عَلَيْهَا وَالْمُؤَلَّفَةِ قُلُوبُهُمْ وَفِے اِ۬لرِّقَابِ وَالْغَٰرِمِينَ وَفِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ وَابْنِ اِ۬لسَّبِيلِ فَرِيضَةٗ مِّنَ اَ۬للَّهِۖ

9:60

और ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।

وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٞۖ

9:61

और उनमें से कुछ ऐसे हैं जो सूचनादाता को तंग करते हैं और कहते हैं: “वह तो पूरा कान ही है।”

۞ وَمِنْهُمُ اُ۬لذِينَ يُؤْذُونَ اَ۬لنَّبِےٓءَ وَيَقُولُونَ هُوَ أُذْنٞۖ

9:61

कहो: “तुम्हारे लिए अच्छाई का कान है: वह ईश्वर पर विश्वास करता है, विश्वास करने वालों पर भरोसा करता है, और तुममें से जिन्होंने विश्वास किया उनके लिए वह दया है।”

قُلْ أُذْنُ خَيْرٖ لَّكُمْ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَيُؤْمِنُ لِلْمُؤْمِنِينَ وَرَحْمَةٞ لِّلذِينَ ءَامَنُواْ مِنكُمْۖ

और जो ईश्वर के संदेशवाहक को तंग करते हैं, उन्हें पीड़ादायक दंड मिलेगा।

وَالذِينَ يُؤْذُونَ رَسُولَ اَ۬للَّهِ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٞۖ

वे तुम्हारे सामने ईश्वर की शपथ खाते हैं, तुम्हें संतुष्ट करने के लिए; परंतु ईश्वर और उसका संदेशवाहक इसके अधिक अधिकारी हैं कि वे उसे संतुष्ट करने का प्रयास करें, यदि वे विश्वास करने वाले हैं।

يَحْلِفُونَ بِاللَّهِ لَكُمْ لِيُرْضُوكُمْ وَاللَّهُ وَرَسُولُهُۥ أَحَقُّ أَنْ يُّرْضُوهُ إِن كَانُواْ مُؤْمِنِينَۖ

क्या वे नहीं जानते कि जो कोई ईश्वर और उसके संदेशवाहक से शत्रुतापूर्वक विरोध करता है, उसके लिए जहन्नम की आग है, जहाँ वह सदा रहेगा?

أَلَمْ يَعْلَمُواْ أَنَّهُۥ مَنْ يُّحَادِدِ اِ۬للَّهَ وَرَسُولَهُۥ فَأَنَّ لَهُۥ نَارَ جَهَنَّمَ خَٰلِداٗ فِيهَاۖ

यही विशाल लज्जा है।

ذَٰلِكَ اَ۬لْخِزْيُ اُ۬لْعَظِيمُۖ

9:64

पाखंडी इस बात से आशंकित रहते हैं कि उन पर कोई सूरा उतार दी जाए, जो उन्हें सूचित कर दे कि उनके मर्मों में क्या है।

يَحْذَرُ اُ۬لْمُنَٰفِقُونَ أَن تُنَزَّلَ عَلَيْهِمْ سُورَةٞ تُنَبِّئُهُم بِمَا فِے قُلُوبِهِمْۖ

कहो: “मज़ाक़ उड़ाओ!

قُلِ اِ۪سْتَهْزِءُواْۖ

ईश्वर निश्चय ही उसे खुले में निकाल लाएगा जिससे तुम आशंकित हो।”

إِنَّ اَ۬للَّهَ مُخْرِجٞ مَّا تَحْذَرُونَۖ

और यदि तुम उनसे पूछो, तो वे अवश्य कहेंगे: “हम तो केवल डूबते और खेलते थे।”

وَلَئِن سَأَلْتَهُمْ لَيَقُولُنَّ إِنَّمَا كُنَّا نَخُوضُ وَنَلْعَبُۖ

कहो: “क्या तुम ईश्वर, उसके संकेतों और उसके संदेशवाहक का मज़ाक़ उड़ाते थे?”

قُلْ أَبِاللَّهِ وَءَايَٰتِهِۦ وَرَسُولِهِۦ كُنتُمْ تَسْتَهْزِءُونَۖ

सफ़ाई मत दो:

لَا تَعْتَذِرُواْۖ

तुमने अपने विश्वास के बाद नकारा है।

قَدْ كَفَرْتُم بَعْدَ إِيمَٰنِكُمْۖ

9:66

यदि तुम में से एक समूह से दरगुज़र किया जाए, तो दूसरे समूह को दंड दिया जाएगा, इस कारण कि वे बहिष्कृत हुए।

إِنْ يُّعْفَ عَن طَآئِفَةٖ مِّنكُمْ تُعَذَّبْ طَآئِفَةُۢ بِأَنَّهُمْ كَانُواْ مُجْرِمِينَۖ

पाखंडी पुरुष और स्त्रियाँ एक-दूसरे में से हैं: वे अमान्य का आदेश देते हैं और मान्य से मना करते हैं, और अपने हाथ बंद रखते हैं; उन्होंने ईश्वर को भुला दिया, और उसने उन्हें भुला दिया।

اَ۬لْمُنَٰفِقُونَ وَالْمُنَٰفِقَٰتُ بَعْضُهُم مِّنۢ بَعْضٖ يَأْمُرُونَ بِالْمُنكَرِ وَيَنْهَوْنَ عَنِ اِ۬لْمَعْرُوفِ وَيَقْبِضُونَ أَيْدِيَهُمْ نَسُواْ اُ۬للَّهَ فَنَسِيَهُمْۖ

पाखंडी निश्चय ही अतिक्रमणकारी हैं।

إِنَّ اَ۬لْمُنَٰفِقِينَ هُمُ اُ۬لْفَٰسِقُونَۖ

ईश्वर ने पाखंडी पुरुषों और स्त्रियों से, और नकारने वालों से जहन्नम की आग का वादा किया है, जहाँ वे सदा रहेंगे।

وَعَدَ اَ۬للَّهُ اُ۬لْمُنَٰفِقِينَ وَالْمُنَٰفِقَٰتِ وَالْكُفَّارَ نَارَ جَهَنَّمَ خَٰلِدِينَ فِيهَاۖ

वही उनके लिए पर्याप्त है।

هِيَ حَسْبُهُمْۖ

और ईश्वर ने उन्हें धिक्कारा है,

وَلَعَنَهُمُ اُ۬للَّهُۖ

और उन्हें बना रहने वाला दंड मिलेगा।

وَلَهُمْ عَذَابٞ مُّقِيمٞۖ

उन जैसे जो तुमसे पहले थे: वे शक्ति में तुमसे बढ़कर थे, उनके पास अधिक संपत्ति और संतान थी; उन्होंने अपने हिस्से का उपभोग किया, और तुमने अपने हिस्से का उपभोग किया जैसे तुमसे पहले वालों ने अपने हिस्से का उपभोग किया, और तुम डूब गए जैसे वे डूब गए।

كَالذِينَ مِن قَبْلِكُمْ كَانُواْ أَشَدَّ مِنكُمْ قُوَّةٗ وَأَكْثَرَ أَمْوَٰلاٗ وَأَوْلَٰداٗ فَاسْتَمْتَعُواْ بِخَلَٰقِهِمْ فَاسْتَمْتَعْتُم بِخَلَٰقِكُمْ كَمَا اَ۪سْتَمْتَعَ اَ۬لذِينَ مِن قَبْلِكُم بِخَلَٰقِهِمْ وَخُضْتُمْ كَالذِے خَاضُواْۖ

यही वे हैं जिनके कर्म ढह गए, इहलोक में और अंतिम जीवन में;

أُوْلَٰٓئِكَ حَبِطَتْ أَعْمَٰلُهُمْ فِے اِ۬لدُّنْيَا وَالْأٓخِرَةِۖ

और यही घाटा उठाने वाले हैं।

وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لْخَٰسِرُونَۖ

9:70

क्या उन्हें उनकी सूचना नहीं पहुँची जो उनसे पहले थे: नूह की क़ौम, आद, समूद, इब्राहीम की क़ौम, मदयन वाले, और उलट दी गई बस्तियाँ?

۞ أَلَمْ يَأْتِهِمْ نَبَأُ اُ۬لذِينَ مِن قَبْلِهِمْ قَوْمِ نُوحٖ وَعَادٖ وَثَمُودَ وَقَوْمِ إِبْرَٰهِيمَ وَأَصْحَٰبِ مَدْيَنَ وَالْمُؤْتَفِكَٰتِۖ

9:70

उनके संदेशवाहक उनके पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ आए थे।

أَتَتْهُمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَٰتِۖ

और ईश्वर ऐसा न था कि उन पर अन्याय करता;

فَمَا كَانَ اَ۬للَّهُ لِيَظْلِمَهُمْۖ

बल्कि वे स्वयं अपने ऊपर अन्याय करते थे।

وَلَٰكِن كَانُواْ أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَۖ

9:71

और विश्वास करने वाले पुरुष और विश्वास करने वाली स्त्रियाँ एक-दूसरे के हिमायती हैं:

وَالْمُؤْمِنُونَ وَالْمُؤْمِنَٰتُ بَعْضُهُمْ أَوْلِيَآءُ بَعْضٖۖ

9:71

वे मान्य का आदेश देते हैं और अमान्य से मना करते हैं, संपर्क बनाए रखते हैं, शुद्ध उदारता देते हैं, और ईश्वर और उसके संदेशवाहक की बात मानते हैं।

يَأْمُرُونَ بِالْمَعْرُوفِ وَيَنْهَوْنَ عَنِ اِ۬لْمُنكَرِ وَيُقِيمُونَ اَ۬لصَّلَوٰةَ وَيُؤْتُونَ اَ۬لزَّكَوٰةَ وَيُطِيعُونَ اَ۬للَّهَ وَرَسُولَهُۥۖ

9:71

यही वे हैं जिन पर ईश्वर शीघ्र ही दया करेगा,

أُوْلَٰٓئِكَ سَيَرْحَمُهُمُ اُ۬للَّهُۖ

9:71

क्योंकि ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।

إِنَّ اَ۬للَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٞۖ

9:72

ईश्वर ने विश्वास करने वाले पुरुषों और विश्वास करने वाली स्त्रियों से ऐसे उद्यानों का वादा किया है जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जहाँ वे सदा रहेंगे, और स्थायित्व के उद्यानों में अच्छे आवासों का;

وَعَدَ اَ۬للَّهُ اُ۬لْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَٰتِ جَنَّٰتٖ تَجْرِے مِن تَحْتِهَا اَ۬لْأَنْهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَا وَمَسَٰكِنَ طَيِّبَةٗ فِے جَنَّٰتِ عَدْنٖۖ

9:72

और ईश्वर की ओर से एक प्रसन्नता इससे भी बड़ी है।

وَرِضْوَٰنٞ مِّنَ اَ۬للَّهِ أَكْبَرُۖ

9:72

यही विशाल विजय है।

ذَٰلِكَ هُوَ اَ۬لْفَوْزُ اُ۬لْعَظِيمُۖ

9:73

हे सूचनादाता! नकारने वालों और पाखंडियों से संघर्ष करो, और उनके प्रति दृढ़ रहो।

يَٰأَيُّهَا‏ اَ۬لنَّبِےٓءُ جَٰهِدِ اِ۬لْكُفَّارَ وَالْمُنَٰفِقِينَ وَاغْلُظْ عَلَيْهِمْۖ

और उनकी शरण जहन्नम होगी,

وَمَأْوَيٰهُمْ جَهَنَّمُۖ

और कितना भयानक गंतव्य!

وَبِئْسَ اَ۬لْمَصِيرُۖ

वे ईश्वर की शपथ खाते हैं कि उन्होंने कुछ नहीं कहा;

يَحْلِفُونَ بِاللَّهِ مَا قَالُواْۖ

जबकि उन्होंने निश्चय ही नकार का बोल कहा है, और ईश्वर के प्रति खरे रहने के बाद उन्होंने नकारा है, और उन्होंने उसका इरादा किया जो उन्हें प्राप्त नहीं हुआ।

وَلَقَدْ قَالُواْ كَلِمَةَ اَ۬لْكُفْرِ وَكَفَرُواْ بَعْدَ إِسْلَٰمِهِمْ وَهَمُّواْ بِمَا لَمْ يَنَالُواْۖ

वे केवल इसी का रोष रखते हैं कि ईश्वर और उसके संदेशवाहक ने उन्हें अपने अनुग्रह से धनी कर दिया।

وَمَا نَقَمُواْ إِلَّا أَنْ أَغْنَيٰهُمُ اُ۬للَّهُ وَرَسُولُهُۥ مِن فَضْلِهِۦۖ

यदि वे पलट आएँ, तो यह उनके लिए बेहतर होगा;

فَإِنْ يَّتُوبُواْ يَكُ خَيْراٗ لَّهُمْۖ

परंतु यदि वे पीठ फेर लें, तो ईश्वर उन्हें इहलोक में और अंतिम जीवन में पीड़ादायक दंड देगा,

وَإِنْ يَّتَوَلَّوْاْ يُعَذِّبْهُمُ اُ۬للَّهُ عَذَاباً أَلِيماٗ فِے اِ۬لدُّنْيَا وَالْأٓخِرَةِۖ

और धरती पर उनका न कोई आश्रयदाता होगा, न कोई सहायता।

وَمَا لَهُمْ فِے اِ۬لْأَرْضِ مِنْ وَّلِيّٖ وَلَا نَصِيرٖۖ

और उनमें से कुछ ऐसे हैं जिन्होंने ईश्वर से संधि की: “यदि वह हमें अपने अनुग्रह से देगा, तो हम अवश्य दान करेंगे, और हम अवश्य उनमें होंगे जो भले हैं।”

۞ وَمِنْهُم مَّنْ عَٰهَدَ اَ۬للَّهَ لَئِنْ ءَاتَيٰنَا مِن فَضْلِهِۦ لَنَصَّدَّقَنَّ وَلَنَكُونَنَّ مِنَ اَ۬لصَّٰلِحِينَۖ

परंतु जब उसने उन्हें अपने अनुग्रह से दिया, तो उन्होंने उसमें कंजूसी की और कतराते हुए पीठ फेर ली।

فَلَمَّا ءَاتَيٰهُم مِّن فَضْلِهِۦ بَخِلُواْ بِهِۦ وَتَوَلَّواْ وَّهُم مُّعْرِضُونَۖ

तब उसने इसके पीछे उनके मर्मों में पाखंड लगा दिया, उस दिन तक जब वे उससे मिलेंगे, इसलिए कि उन्होंने ईश्वर से जो वादा किया था उसमें उसके प्रति चूक की, और इसलिए कि वे झूठ बोलते थे।

فَأَعْقَبَهُمْ نِفَاقاٗ فِے قُلُوبِهِمْ إِلَىٰ يَوْمِ يَلْقَوْنَهُۥ بِمَا أَخْلَفُواْ اُ۬للَّهَ مَا وَعَدُوهُ وَبِمَا كَانُواْ يَكْذِبُونَۖ

9:78

क्या वे नहीं जानते कि ईश्वर उनका रहस्य और उनकी गुप्त मंत्रणाएँ जानता है, और यह कि जो इंद्रियों से परे है उसे पूरी तरह जानने वाला ईश्वर ही है?

أَلَمْ يَعْلَمُواْ أَنَّ اَ۬للَّهَ يَعْلَمُ سِرَّهُمْ وَنَجْوَيٰهُمْ وَأَنَّ اَ۬للَّهَ عَلَّٰمُ اُ۬لْغُيُوبِۖ

जो स्वेच्छा से दान करने वाले विश्वास करने वालों की कटाक्षों से निंदा करते हैं, और उनका उपहास करते हैं जिनके पास अपने परिश्रम के सिवा देने को कुछ नहीं — ईश्वर उनका उपहास करता है,

اِ۬لذِينَ يَلْمِزُونَ اَ۬لْمُطَّوِّعِينَ مِنَ اَ۬لْمُؤْمِنِينَ فِے اِ۬لصَّدَقَٰتِ وَالذِينَ لَا يَجِدُونَ إِلَّا جُهْدَهُمْ فَيَسْخَرُونَ مِنْهُمْ سَخِرَ اَ۬للَّهُ مِنْهُمْۖ

और उन्हें पीड़ादायक दंड मिलेगा।

وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌۖ

9:80

तुम उनके लिए क्षमा माँगो या न माँगो —

اِ۪سْتَغْفِرْ لَهُمْ أَوْ لَا تَسْتَغْفِرْ لَهُمْۖ

9:80

यदि तुम उनके लिए सत्तर बार क्षमा माँगो, तब भी ईश्वर उन्हें कभी क्षमा नहीं करेगा।

إِن تَسْتَغْفِرْ لَهُمْ سَبْعِينَ مَرَّةٗ فَلَنْ يَّغْفِرَ اَ۬للَّهُ لَهُمْۖ

9:80

यह इसलिए कि उन्होंने ईश्वर और उसके संदेशवाहक को नकारा।

ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ كَفَرُواْ بِاللَّهِ وَرَسُولِهِۦۖ

9:80

और ईश्वर अतिक्रमणकारियों की क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।

وَاللَّهُ لَا يَهْدِے اِ۬لْقَوْمَ اَ۬لْفَٰسِقِينَۖ

जो पीछे छोड़े गए, वे ईश्वर के संदेशवाहक से अलग बैठे रहने पर प्रसन्न हुए, और उन्हें ईश्वर की राह में अपनी संपत्ति और अपने स्व से संघर्ष करने से अरुचि हुई, और उन्होंने कहा: “गर्मी में लामबंद न होओ।”

فَرِحَ اَ۬لْمُخَلَّفُونَ بِمَقْعَدِهِمْ خِلَٰفَ رَسُولِ اِ۬للَّهِ وَكَرِهُواْ أَنْ يُّجَٰهِدُواْ بِأَمْوَٰلِهِمْ وَأَنفُسِهِمْ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ وَقَالُواْ لَا تَنفِرُواْ فِے اِ۬لْحَرِّۖ

कहो: “जहन्नम की आग गर्मी में और भी तीव्र है” — यदि वे समझते होते!

قُلْ نَارُ جَهَنَّمَ أَشَدُّ حَرّاٗ لَّوْ كَانُواْ يَفْقَهُونَۖ

तो वे थोड़ा हँसें, और बहुत रोएँ, उसके प्रतिफल में जो वे कमाते थे।

فَلْيَضْحَكُواْ قَلِيلاٗ وَلْيَبْكُواْ كَثِيراٗ جَزَآءَۢ بِمَا كَانُواْ يَكْسِبُونَۖ

9:83

यदि ईश्वर तुम्हें उनके किसी समूह की ओर लौटा दे, और वे तुमसे निकलने की अनुमति माँगें, तो कहो: “तुम मेरे साथ कभी नहीं निकलोगे, और मेरे साथ किसी शत्रु से नहीं लड़ोगे,

فَإِن رَّجَعَكَ اَ۬للَّهُ إِلَىٰ طَآئِفَةٖ مِّنْهُمْ فَاسْتَٰٔذَنُوكَ لِلْخُرُوجِ فَقُل لَّن تَخْرُجُواْ مَعِيَ أَبَداٗ وَلَن تُقَٰتِلُواْ مَعِے عَدُوّاًۖ

क्योंकि तुम पहली बार बैठे रहने से संतुष्ट हो गए थे;

إِنَّكُمْ رَضِيتُم بِالْقُعُودِ أَوَّلَ مَرَّةٖۖ

तो पीछे रहने वालों के साथ बैठे रहो।”

فَاقْعُدُواْ مَعَ اَ۬لْخَٰلِفِينَۖ

9:84

और उनमें से जो कोई मर जाए, उसके साथ कभी संपर्क न रखो, और उसे दफ़नाने के लिए बने न रहो,

وَلَا تُصَلِّ عَلَىٰ أَحَدٖ مِّنْهُم مَّاتَ أَبَداٗ وَلَا تَقُمْ عَلَىٰ قَبْرِهِۦۖ

क्योंकि उन्होंने ईश्वर और उसके संदेशवाहक को नकारा, और वे अतिक्रमणकारी रहते हुए मरे।

إِنَّهُمْ كَفَرُواْ بِاللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَمَاتُواْ وَهُمْ فَٰسِقُونَۖ

9:85

और उनकी संपत्ति और उनकी संतान तुम्हें चकाचौंध न करें।

۞ وَلَا تُعْجِبْكَ أَمْوَٰلُهُمْ وَأَوْلَٰدُهُمْۖ

ईश्वर इससे केवल यही चाहता है कि उन्हें इहलोक में दंड दे, और उनका स्व निकल जाए जबकि वे नकार रहे हों।

إِنَّمَا يُرِيدُ اُ۬للَّهُ أَنْ يُّعَذِّبَهُم بِهَا فِے اِ۬لدُّنْيَا وَتَزْهَقَ أَنفُسُهُمْ وَهُمْ كَٰفِرُونَۖ

9:86

और जब कोई सूरा उतारी गई: “ईश्वर पर विश्वास करो, और उसके संदेशवाहक के साथ संघर्ष करो”, तो उनमें से जिनके पास साधन हैं वे तुमसे अनुमति माँगते हैं, और कहते हैं: “हमें बैठने वालों के साथ रहने दो।”

وَإِذَا أُنزِلَتْ سُورَةٌ أَنْ ءَامِنُواْ بِاللَّهِ وَجَٰهِدُواْ مَعَ رَسُولِهِ اِ۪سْتَٰٔذَنَكَ أُوْلُواْ اُ۬لطَّوْلِ مِنْهُمْ وَقَالُواْ ذَرْنَا نَكُن مَّعَ اَ۬لْقَٰعِدِينَۖ

9:87

वे पीछे रहने वालों के साथ होने से संतुष्ट हो गए,

رَضُواْ بِأَنْ يَّكُونُواْ مَعَ اَ۬لْخَوَالِفِۖ

और उनके मर्मों पर छाप लगा दी गई, इसलिए वे समझते नहीं।

وَطُبِعَ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ فَهُمْ لَا يَفْقَهُونَۖ

परंतु संदेशवाहक ने, और उन्होंने जिन्होंने उसके साथ विश्वास किया, अपनी संपत्ति और अपने स्व से संघर्ष किया,

لَٰكِنِ اِ۬لرَّسُولُ وَالذِينَ ءَامَنُواْ مَعَهُۥ جَٰهَدُواْ بِأَمْوَٰلِهِمْ وَأَنفُسِهِمْۖ

और यही वे हैं जिनके लिए अच्छाई है,

وَأُوْلَٰٓئِكَ لَهُمُ اُ۬لْخَيْرَٰتُۖ

और यही सफल होने वाले हैं।

وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لْمُفْلِحُونَۖ

ईश्वर ने उनके लिए ऐसे उद्यान तैयार किए हैं जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जहाँ वे सदा रहेंगे।

أَعَدَّ اَ۬للَّهُ لَهُمْ جَنَّٰتٖ تَجْرِے مِن تَحْتِهَا اَ۬لْأَنْهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۖ

यही विशाल विजय है।

ذَٰلِكَ اَ۬لْفَوْزُ اُ۬لْعَظِيمُۖ

9:90

और सफ़ाई देने वाले, प्रतिष्ठित जनों में से, आए कि उन्हें अनुमति दी जाए, जबकि जिन्होंने ईश्वर और उसके संदेशवाहक से झूठ बोला वे बैठे रहे।

وَجَآءَ اَ۬لْمُعَذِّرُونَ مِنَ اَ۬لْأَعْرَابِ لِيُؤْذَنَ لَهُمْ وَقَعَدَ اَ۬لذِينَ كَذَبُواْ اُ۬للَّهَ وَرَسُولَهُۥۖ

उनमें से जिन्होंने नकारा, उन्हें पीड़ादायक दंड पहुँचेगा।

سَيُصِيبُ اُ۬لذِينَ كَفَرُواْ مِنْهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٞۖ

दुर्बलों पर कोई बाधा नहीं, न रोगियों पर, न उन पर जो ख़र्च करने को कुछ नहीं पाते, बशर्ते वे ईश्वर और उसके संदेशवाहक के प्रति निष्कपट हों।

لَّيْسَ عَلَى اَ۬لضُّعَفَآءِ وَلَا عَلَى اَ۬لْمَرْضَىٰ وَلَا عَلَى اَ۬لذِينَ لَا يَجِدُونَ مَا يُنفِقُونَ حَرَجٌ إِذَا نَصَحُواْ لِلهِ وَرَسُولِهِۦۖ

भलाई करने वालों के विरुद्ध कोई राह नहीं।

مَا عَلَى اَ۬لْمُحْسِنِينَ مِن سَبِيلٖۖ

और ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।

وَاللَّهُ غَفُورٞ رَّحِيمٞۖ

न उनके विरुद्ध जो तुम्हारे पास इसलिए आए कि तुम उन्हें सवारी दो, और जिनसे तुमने कहा: “मुझे तुम्हें सवारी देने को कुछ नहीं मिलता”,

وَلَا عَلَى اَ۬لذِينَ إِذَا مَا أَتَوْكَ لِتَحْمِلَهُمْ قُلْتَ لَا أَجِدُ مَا أَحْمِلُكُمْ عَلَيْهِۖ

और जो इस हाल में चले गए कि उनकी आँखें आँसुओं से उमड़ रही थीं, दुखी कि उन्हें ख़र्च करने को कुछ नहीं मिला।

تَوَلَّواْ وَّأَعْيُنُهُمْ تَفِيضُ مِنَ اَ۬لدَّمْعِ حَزَناً أَلَّا يَجِدُواْ مَا يُنفِقُونَۖ

9:93

राह केवल उन्हीं के विरुद्ध है जो धनी होते हुए तुमसे अनुमति माँगते हैं।

۞ إِنَّمَا اَ۬لسَّبِيلُ عَلَى اَ۬لذِينَ يَسْتَٰٔذِنُونَكَ وَهُمْ أَغْنِيَآءُۖ

9:93

वे पीछे रहने वालों के साथ होने से संतुष्ट हो गए,

رَضُواْ بِأَنْ يَّكُونُواْ مَعَ اَ۬لْخَوَالِفِۖ

और ईश्वर ने उनके मर्मों पर छाप लगा दी, इसलिए वे जानते नहीं।

وَطَبَعَ اَ۬للَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ فَهُمْ لَا يَعْلَمُونَۖ

जब तुम उनकी ओर लौटोगे, तो वे तुम्हारे सामने सफ़ाई देंगे।

يَعْتَذِرُونَ إِلَيْكُمْ إِذَا رَجَعْتُمْ إِلَيْهِمْۖ

कहो: “सफ़ाई मत दो, हम तुम पर भरोसा नहीं करेंगे।

قُل لَّا تَعْتَذِرُواْ لَن نُّؤْمِنَ لَكُمْۖ

ईश्वर ने हमें तुम्हारी ख़बरों की सूचना पहले ही दे दी है।

قَدْ نَبَّأَنَا اَ۬للَّهُ مِنْ أَخْبَارِكُمْۖ

और ईश्वर तुम्हारा कर्म देखेगा, और उसका संदेशवाहक भी,

وَسَيَرَى اَ۬للَّهُ عَمَلَكُمْ وَرَسُولُهُۥۖ

9:94

फिर तुम उसकी ओर वापस लाए जाओगे जो उसे जानता है जो इंद्रियों से परे है और जो साक्ष्य में है, और वह तुम्हें सूचित करेगा कि तुम क्या करते थे।”

ثُمَّ تُرَدُّونَ إِلَىٰ عَٰلِمِ اِ۬لْغَيْبِ وَالشَّهَٰدَةِ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَۖ

जब तुम उनकी ओर पलट जाओगे, तो वे तुम्हारे सामने ईश्वर की शपथ खाएँगे, ताकि तुम उनसे कतराओ।

سَيَحْلِفُونَ بِاللَّهِ لَكُمْ إِذَا اَ۪نقَلَبْتُمْ إِلَيْهِمْ لِتُعْرِضُواْ عَنْهُمْۖ

तो तुम उनसे कतराओ,

فَأَعْرِضُواْ عَنْهُمْۖ

क्योंकि वे एक गंदगी हैं,

إِنَّهُمْ رِجْسٞۖ

और उनकी शरण जहन्नम होगी,

وَمَأْوَيٰهُمْ جَهَنَّمُۖ

उसके प्रतिफल में जो वे कमाते थे।

جَزَآءَۢ بِمَا كَانُواْ يَكْسِبُونَۖ

वे तुम्हारे सामने शपथ खाते हैं, ताकि तुम उनसे संतुष्ट हो जाओ; परंतु यदि तुम उनसे संतुष्ट हो भी जाओ, तो ईश्वर अतिक्रमणकारियों की क़ौम से निश्चय ही संतुष्ट नहीं होगा।

يَحْلِفُونَ لَكُمْ لِتَرْضَوْاْ عَنْهُمْ فَإِن تَرْضَوْاْ عَنْهُمْ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يَرْضَىٰ عَنِ اِ۬لْقَوْمِ اِ۬لْفَٰسِقِينَۖ

9:97

प्रतिष्ठित जन नकार और पाखंड में और भी तीव्र हैं, और वे इसके अधिक योग्य हैं कि उन सीमाओं को न जानें जो ईश्वर ने अपने संदेशवाहक पर उतारी हैं।

اَ۬لْأَعْرَابُ أَشَدُّ كُفْراٗ وَنِفَاقاٗ وَأَجْدَرُ أَلَّا يَعْلَمُواْ حُدُودَ مَا أَنزَلَ اَ۬للَّهُ عَلَىٰ رَسُولِهِۦۖ

और ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।

وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٞۖ

और प्रतिष्ठित जनों में कुछ ऐसे हैं जो जो कुछ ख़र्च करते हैं उसे विवश हानि मानते हैं, और तुम्हारे लिए भाग्य के पलटावों की अपेक्षा रखते हैं।

وَمِنَ اَ۬لْأَعْرَابِ مَنْ يَّتَّخِذُ مَا يُنفِقُ مَغْرَماٗ وَيَتَرَبَّصُ بِكُمُ اُ۬لدَّوَآئِرَۖ

9:98

उन्हीं पर बुराई का चक्र है।

عَلَيْهِمْ دَآئِرَةُ اُ۬لسَّوْءِۖ

ईश्वर सुनने वाला, सर्वज्ञ है।

وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٞۖ

9:99

और प्रतिष्ठित जनों में कुछ ऐसे हैं जो ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास करते हैं, और जो कुछ ख़र्च करते हैं उसे ईश्वर के निकट पहुँचने का साधन और संदेशवाहक की मुलाक़ातों का साधन मानते हैं।

وَمِنَ اَ۬لْأَعْرَابِ مَنْ يُّؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ اِ۬لْأٓخِرِ وَيَتَّخِذُ مَا يُنفِقُ قُرُبَٰتٍ عِندَ اَ۬للَّهِ وَصَلَوَٰتِ اِ۬لرَّسُولِۖ

9:99

क्या ऐसा नहीं है: यह निश्चय ही उनके लिए निकटता है।

أَلَا إِنَّهَا قُرْبَةٞ لَّهُمْۖ

ईश्वर उन्हें अपनी दया में प्रवेश कराएगा,

سَيُدْخِلُهُمُ اُ۬للَّهُ فِے رَحْمَتِهِۦۖ

क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।

إِنَّ اَ۬للَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞۖ

9:100

और सबसे पहले के अग्रगामी, प्रवासियों और सहयोगियों में से, और वे जिन्होंने भलाई करते हुए उनका अनुसरण किया — ईश्वर उनसे संतुष्ट है, और वे उससे संतुष्ट हैं;

وَالسَّٰبِقُونَ اَ۬لْأَوَّلُونَ مِنَ اَ۬لْمُهَٰجِرِينَ وَالْأَنصَارِ وَالذِينَ اَ۪تَّبَعُوهُم بِإِحْسَٰنٖ رَّضِيَ اَ۬للَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُواْ عَنْهُۖ

9:100

उसने उनके लिए ऐसे उद्यान तैयार किए हैं जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जहाँ वे सदा, चिरकाल तक रहेंगे।

وَأَعَدَّ لَهُمْ جَنَّٰتٖ تَجْرِے تَحْتَهَا اَ۬لْأَنْهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَا أَبَداٗۖ

9:100

यही विशाल विजय है।

ذَٰلِكَ اَ۬لْفَوْزُ اُ۬لْعَظِيمُۖ

और तुम्हारे आसपास के प्रतिष्ठित जनों में पाखंडी हैं,

۞ وَمِمَّنْ حَوْلَكُم مِّنَ اَ۬لْأَعْرَابِ مُنَٰفِقُونَۖ

9:101

और राजधानी वालों में से भी कुछ, पाखंड में अड़े हुए, जिन्हें तुम नहीं जानते:

وَمِنْ أَهْلِ اِ۬لْمَدِينَةِ مَرَدُواْ عَلَى اَ۬لنِّفَاقِ لَا تَعْلَمُهُمْۖ

हम ही उन्हें जानते हैं।

نَحْنُ نَعْلَمُهُمْۖ

हम उन्हें दो बार दंड देंगे, फिर वे एक विशाल दंड की ओर वापस लाए जाएँगे।

سَنُعَذِّبُهُم مَّرَّتَيْنِ ثُمَّ يُرَدُّونَ إِلَىٰ عَذَابٍ عَظِيمٖۖ

9:102

और कुछ अन्य हैं जिन्होंने अपने दोष स्वीकार किए, एक भले कर्म को दूसरे बुरे कर्म से मिलाकर; संभव है कि ईश्वर अनुकंपा के साथ उनकी ओर पलटे,

وَءَاخَرُونَ اَ۪عْتَرَفُواْ بِذُنُوبِهِمْ خَلَطُواْ عَمَلاٗ صَٰلِحاٗ وَءَاخَرَ سَيِّئاً عَسَى اَ۬للَّهُ أَنْ يَّتُوبَ عَلَيْهِمْۖ

9:102

क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।

إِنَّ اَ۬للَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٌۖ

9:103

उनकी संपत्ति से ऐसा दान लो जो उन्हें स्वच्छ करे और बढ़ाए, और उनके साथ संपर्क में रहो,

خُذْ مِنْ أَمْوَٰلِهِمْ صَدَقَةٗ تُطَهِّرُهُمْ وَتُزَكِّيهِم بِهَا وَصَلِّ عَلَيْهِمْۖ

9:103

क्योंकि तुम्हारे संपर्क उनके लिए आश्वस्ति हैं।

إِنَّ صَلَوَٰتِكَ سَكَنٞ لَّهُمْۖ

ईश्वर सुनने वाला, सर्वज्ञ है।

وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌۖ

9:104

क्या वे नहीं जानते कि ईश्वर ही अपने आज्ञाकारियों का पश्चात्ताप स्वीकार करता है और दान ग्रहण करता है, और ईश्वर ही निरंतर पश्चात्ताप स्वीकार करने वाला, दयालु है?

أَلَمْ يَعْلَمُواْ أَنَّ اَ۬للَّهَ هُوَ يَقْبَلُ اُ۬لتَّوْبَةَ عَنْ عِبَادِهِۦ وَيَأْخُذُ اُ۬لصَّدَقَٰتِ وَأَنَّ اَ۬للَّهَ هُوَ اَ۬لتَّوَّابُ اُ۬لرَّحِيمُۖ

और कहो: “कर्म करो; ईश्वर तुम्हारा कर्म देखेगा, और उसका संदेशवाहक और विश्वास करने वाले भी,

وَقُلِ اِ۪عْمَلُواْ فَسَيَرَى اَ۬للَّهُ عَمَلَكُمْ وَرَسُولُهُۥ وَالْمُؤْمِنُونَۖ

9:105

और तुम उसकी ओर वापस लाए जाओगे जो उसे जानता है जो इंद्रियों से परे है और जो साक्ष्य में है, और वह तुम्हें सूचित करेगा कि तुम क्या करते थे।”

وَسَتُرَدُّونَ إِلَىٰ عَٰلِمِ اِ۬لْغَيْبِ وَالشَّهَٰدَةِ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَۖ

9:106

और कुछ अन्य ईश्वर के आदेश तक लंबित रखे गए हैं: या तो वह उन्हें दंड देगा, या अनुकंपा के साथ उनकी ओर पलटेगा।

وَءَاخَرُونَ مُرْجَوْنَ لِأَمْرِ اِ۬للَّهِ إِمَّا يُعَذِّبُهُمْ وَإِمَّا يَتُوبُ عَلَيْهِمْۖ

और ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।

وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌۖ

9:107

और जिन्होंने हानि पहुँचाने के लिए, नकार के कारण, विश्वास करने वालों के बीच फूट डालने के लिए, और उसके लिए निगरानी-चौकी के रूप में जिसने पहले ईश्वर और उसके संदेशवाहक से युद्ध छेड़ा था, माथा टेकने का एक स्थान बना लिया —

اِ۬لذِينَ اَ۪تَّخَذُواْ مَسْجِداٗ ضِرَاراٗ وَكُفْراٗ وَتَفْرِيقاَۢ بَيْنَ اَ۬لْمُؤْمِنِينَ وَإِرْصَاداٗ لِّمَنْ حَارَبَ اَ۬للَّهَ وَرَسُولَهُۥ مِن قَبْلُۖ

9:107

वे अवश्य शपथ खाएँगे: “हम तो केवल सबसे अच्छा चाहते थे”;

وَلَيَحْلِفُنَّ إِنْ أَرَدْنَا إِلَّا اَ۬لْحُسْنَىٰۖ

9:107

और ईश्वर साक्ष्य देता है कि वे अवश्य झूठे हैं।

وَاللَّهُ يَشْهَدُ إِنَّهُمْ لَكَٰذِبُونَۖ

9:108

उसमें कभी बने न रहो।

لَا تَقُمْ فِيهِ أَبَداٗۖ

9:108

जो माथा टेकने का स्थान पहले ही दिन से सावधानी की नींव पर रखा गया है, वह इसका कहीं अधिक अधिकारी है कि तुम उसमें बने रहो।

لَّمَسْجِدٌ أُسِّسَ عَلَى اَ۬لتَّقْوَىٰ مِنْ أَوَّلِ يَوْمٍ أَحَقُّ أَن تَقُومَ فِيهِۖ

वहाँ ऐसे पुरुष हैं जिन्हें स्वच्छ होना प्रिय है।

فِيهِ رِجَالٞ يُحِبُّونَ أَنْ يَّتَطَهَّرُواْۖ

ईश्वर स्वच्छ होने वालों से प्रेम करता है।

وَاللَّهُ يُحِبُّ اُ۬لْمُطَّهِّرِينَۖ

9:109

तो क्या वह जिसका निर्माण ईश्वर के प्रति सावधानी और उसकी प्रसन्नता की नींव पर रखा गया, बेहतर है, या वह जिसका निर्माण ढहने को तैयार एक खड्ड के किनारे पर रखा गया, जो फिर उसके साथ जहन्नम की आग में ढह जाता है?

أَفَمَنْ أُسِّسَ بُنْيَٰنُهُۥ عَلَىٰ تَقْوَىٰ مِنَ اَ۬للَّهِ وَرِضْوَٰنٍ خَيْرٌ أَم مَّنْ أُسِّسَ بُنْيَٰنُهُۥ عَلَىٰ شَفَا جُرُفٍ ه۪ارٖ فَانْهَارَ بِهِۦ فِے نَارِ جَهَنَّمَۖ

और ईश्वर अन्यायी क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।

وَاللَّهُ لَا يَهْدِے اِ۬لْقَوْمَ اَ۬لظَّٰلِمِينَۖ

9:110

जो निर्माण उन्होंने खड़ा किया वह उनके मर्मों में संदेह बना रहता है, जब तक कि उनके मर्म टुकड़े-टुकड़े न हो जाएँ।

لَا يَزَالُ بُنْيَٰنُهُمُ اُ۬لذِے بَنَوْاْ رِيبَةٗ فِے قُلُوبِهِمْ إِلَّا أَن تُقَطَّعَ قُلُوبُهُمْۖ

और ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।

وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌۖ

9:111

ईश्वर ने विश्वास करने वालों से उनका स्व और उनकी संपत्ति निश्चय ही ख़रीद लिया है, इसके बदले में कि उनके लिए उद्यान है।

۞ إِنَّ اَ۬للَّهَ اَ۪شْتَرَىٰ مِنَ اَ۬لْمُؤْمِنِينَ أَنفُسَهُمْ وَأَمْوَٰلَهُم بِأَنَّ لَهُمُ اُ۬لْجَنَّةَۖ

9:111

वे ईश्वर की राह में लड़ते हैं, मारते हैं और मारे जाते हैं — यह उसके ज़िम्मे एक वादा है, पूर्ण सत्य के साथ, तौरात, इंजील और इस पाठ में।

يُقَٰتِلُونَ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ فَيَقْتُلُونَ وَيُقْتَلُونَ وَعْداً عَلَيْهِ حَقّاٗ فِے اِ۬لتَّوْرَيٰةِ وَالْإِنجِيلِ وَالْقُرْءَانِۖ

9:111

और अपनी संधि पूरी करने में ईश्वर से अधिक निष्ठावान कौन है?

وَمَنْ أَوْفَىٰ بِعَهْدِهِۦ مِنَ اَ۬للَّهِۖ

9:111

तो उस बिक्री पर हर्षित हो जाओ जो तुमने उसके साथ की है,

فَاسْتَبْشِرُواْ بِبَيْعِكُمُ اُ۬لذِے بَايَعْتُم بِهِۦۖ

9:111

और यही विशाल विजय है।

وَذَٰلِكَ هُوَ اَ۬لْفَوْزُ اُ۬لْعَظِيمُۖ

9:112

पलट आने वाले, आज्ञा का पालन करने वाले, प्रशंसा करने वाले, यात्रा करने वाले, घुटने टेकने वाले, माथा टेकने वाले, मान्य का आदेश देने वाले और अमान्य से मना करने वाले, और ईश्वर की सीमाओं की रक्षा करने वाले —

اُ۬لتَّٰٓئِبُونَ اَ۬لْعَٰبِدُونَ اَ۬لْحَٰمِدُونَ اَ۬لسَّٰٓئِحُونَ اَ۬لرَّٰكِعُونَ اَ۬لسَّٰجِدُونَ اَ۬لْأٓمِرُونَ بِالْمَعْرُوفِ وَالنَّاهُونَ عَنِ اِ۬لْمُنكَرِ وَالْحَٰفِظُونَ لِحُدُودِ اِ۬للَّهِۖ

9:112

और विश्वास करने वालों को शुभ समाचार दो।

وَبَشِّرِ اِ۬لْمُؤْمِنِينَۖ

9:113

सूचनादाता और विश्वास करने वालों के लिए उचित न था कि वे साझी ठहराने वालों के लिए क्षमा माँगें, चाहे वे निकट संबंधी हों, जब उन पर स्पष्ट हो गया कि वे भट्ठी वाले हैं।

مَا كَانَ لِلنَّبِےٓءِ وَالذِينَ ءَامَنُواْ أَنْ يَّسْتَغْفِرُواْ لِلْمُشْرِكِينَ وَلَوْ كَانُواْ أُوْلِے قُرْبَىٰ مِنۢ بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمْ أَنَّهُمْ أَصْحَٰبُ اُ۬لْجَحِيمِۖ

9:114

और इब्राहीम ने अपने पिता के लिए क्षमा केवल उस वादे के कारण माँगी जो उसने उससे किया था;

وَمَا كَانَ اَ۪سْتِغْفَارُ إِبْرَٰهِيمَ لِأَبِيهِ إِلَّا عَن مَّوْعِدَةٖ وَعَدَهَا إِيَّاهُۖ

9:114

परंतु जब उस पर स्पष्ट हो गया कि वह ईश्वर का शत्रु है, तो उसने स्वयं को उससे बरी घोषित कर दिया।

فَلَمَّا تَبَيَّنَ لَهُۥ أَنَّهُۥ عَدُوّٞ لِّلهِ تَبَرَّأَ مِنْهُۖ

9:114

इब्राहीम अवश्य आहें भरने वाला, सहनशील था।

إِنَّ إِبْرَٰهِيمَ لَأَوَّٰهٌ حَلِيمٞۖ

ईश्वर को शोभा नहीं देता कि वह किसी क़ौम को उसके मार्ग दिखाने के बाद भटकाए, जब तक वह उसे पहले स्पष्ट न कर दे कि किससे सावधान रहना है,

وَمَا كَانَ اَ۬للَّهُ لِيُضِلَّ قَوْماَۢ بَعْدَ إِذْ هَدَيٰهُمْ حَتَّىٰ يُبَيِّنَ لَهُم مَّا يَتَّقُونَۖ

क्योंकि ईश्वर हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।

إِنَّ اَ۬للَّهَ بِكُلِّ شَےْءٍ عَلِيمٌۖ

आकाशों और धरती का राजत्व निश्चय ही ईश्वर का है;

إِنَّ اَ۬للَّهَ لَهُۥ مُلْكُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالْأَرْضِۖ

वह जीवन देता है और मृत्यु देता है।

يُحْيِۦ وَيُمِيتُۖ

और ईश्वर के अतिरिक्त तुम्हारा न कोई आश्रयदाता है, न कोई सहायता।

وَمَا لَكُم مِّن دُونِ اِ۬للَّهِ مِنْ وَّلِيّٖ وَلَا نَصِيرٖۖ

9:117–118

ईश्वर निश्चय ही सूचनादाता, प्रवासियों और सहयोगियों की ओर अनुकंपा के साथ पलटा है, जिन्होंने कठिनाई की घड़ी में उसका अनुसरण किया, इसके बाद कि उनमें से एक भाग के मर्म लगभग टेढ़े हो गए थे; फिर वह अनुकंपा के साथ उनकी ओर पलटा — वह उनके प्रति करुणामय, दयालु है — और उन तीन की ओर भी जो पीछे छोड़े गए थे,

۞ لَّقَد تَّابَ اَ۬للَّهُ عَلَى اَ۬لنَّبِےٓءِ وَالْمُهَٰجِرِينَ وَالْأَنصَارِ اِ۬لذِينَ اَ۪تَّبَعُوهُ فِے سَاعَةِ اِ۬لْعُسْرَةِ مِنۢ بَعْدِ مَا كَادَ تَزِيغُ قُلُوبُ فَرِيقٖ مِّنْهُمْ ثُمَّ تَابَ عَلَيْهِمْۖ إِنَّهُۥ بِهِمْ رَءُوفٞ رَّحِيمٞ وَعَلَى اَ۬لثَّلَٰثَةِ اِ۬لذِينَ خُلِّفُواْۖ

9:117–118

यहाँ तक कि धरती अपने विस्तार के बावजूद उनके लिए तंग हो गई, उनका स्व स्वयं भी उनके लिए तंग हो गया, और उन्होंने अनुमान लगाया कि ईश्वर से पीछे हटने की कोई जगह नहीं सिवा उसी की ओर — तब वह अनुकंपा के साथ उनकी ओर पलटा, ताकि वे पलट आएँ,

حَتَّىٰ إِذَا ضَاقَتْ عَلَيْهِمُ اُ۬لْأَرْضُ بِمَا رَحُبَتْ وَضَاقَتْ عَلَيْهِمْ أَنفُسُهُمْ وَظَنُّواْ أَن لَّا مَلْجَأَ مِنَ اَ۬للَّهِ إِلَّا إِلَيْهِ ثُمَّ تَابَ عَلَيْهِمْ لِيَتُوبُواْۖ

9:117–118

क्योंकि ईश्वर ही निरंतर पश्चात्ताप स्वीकार करने वाला, दयालु है।

إِنَّ اَ۬للَّهَ هُوَ اَ۬لتَّوَّابُ اُ۬لرَّحِيمُۖ

हे विश्वास करने वालो! ईश्वर के प्रति सावधान रहो, और सच्चों के साथ रहो।

يَٰأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ اُ۪تَّقُواْ اُ۬للَّهَ وَكُونُواْ مَعَ اَ۬لصَّٰدِقِينَۖ

9:120

राजधानी वालों के लिए, और उनके आसपास के प्रतिष्ठित जनों के लिए, उचित न था कि वे ईश्वर के संदेशवाहक से दूर पीछे रह जाएँ, या उसके स्व की अपेक्षा अपने ही स्व को चुनें।

مَا كَانَ لِأَهْلِ اِ۬لْمَدِينَةِ وَمَنْ حَوْلَهُم مِّنَ اَ۬لْأَعْرَابِ أَنْ يَّتَخَلَّفُواْ عَن رَّسُولِ اِ۬للَّهِ وَلَا يَرْغَبُواْ بِأَنفُسِهِمْ عَن نَّفْسِهِۦۖ

यह इसलिए कि ईश्वर की राह में उन्हें कोई प्यास, कोई थकान, कोई अभाव नहीं पहुँचता, वे कोई ऐसा स्थान नहीं रौंदते जो नकारने वालों को चिढ़ाए, और शत्रु पर कोई प्राप्ति उन्हें नहीं होती, बिना इसके कि उसके बदले उनके लिए एक भला कर्म लिख दिया जाए;

ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ لَا يُصِيبُهُمْ ظَمَأٞ وَلَا نَصَبٞ وَلَا مَخْمَصَةٞ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ وَلَا يَطَـُٔونَ مَوْطِئاٗ يَغِيظُ اُ۬لْكُفَّارَ وَلَا يَنَالُونَ مِنْ عَدُوّٖ نَّيْلاً إِلَّا كُتِبَ لَهُم بِهِۦ عَمَلٞ صَٰلِحٌۖ

क्योंकि ईश्वर भलाई करने वालों का पुरस्कार नष्ट नहीं होने देता।

إِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يُضِيعُ أَجْرَ اَ۬لْمُحْسِنِينَۖ

9:121

और वे कोई ख़र्च नहीं करते, छोटा या बड़ा, वे किसी घाटी का आवागमन विच्छिन्न नहीं करते, बिना इसके कि वह उनके लिए लिख दिया जाए,

وَلَا يُنفِقُونَ نَفَقَةٗ صَغِيرَةٗ وَلَا كَبِيرَةٗ وَلَا يَقْطَعُونَ وَادِياً إِلَّا كُتِبَ لَهُمْۖ

ताकि ईश्वर उन्हें, जो कुछ वे करते थे उसमें से सबसे सुंदर के अनुसार, प्रतिफल दे।

لِيَجْزِيَهُمُ اُ۬للَّهُ أَحْسَنَ مَا كَانُواْ يَعْمَلُونَۖ

9:122

विश्वास करने वालों के लिए उचित न था कि सब मिलकर लामबंद हो जाएँ।

وَمَا كَانَ اَ۬لْمُؤْمِنُونَ لِيَنفِرُواْ كَآفَّةٗۖ

9:122

तो ऐसा क्यों न हुआ कि उनके प्रत्येक भाग में से एक समूह लामबंद होता, ताकि वे विधान में जो समझते हैं उसे गहराई से जानें, और अपनी क़ौम को चेतावनी दें जब वे उनकी ओर लौटें, शायद वे सजग रहें?

فَلَوْلَا نَفَرَ مِن كُلِّ فِرْقَةٖ مِّنْهُمْ طَآئِفَةٞ لِّيَتَفَقَّهُواْ فِے اِ۬لدِّينِ وَلِيُنذِرُواْ قَوْمَهُمْ إِذَا رَجَعُواْ إِلَيْهِمْ لَعَلَّهُمْ يَحْذَرُونَۖ

हे विश्वास करने वालो! नकारने वालों में से जो तुम्हारे निकट हैं उनसे लड़ो, और वे तुममें दृढ़ता पाएँ।

۞ يَٰأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ قَٰتِلُواْ اُ۬لذِينَ يَلُونَكُم مِّنَ اَ۬لْكُفَّارِ وَلْيَجِدُواْ فِيكُمْ غِلْظَةٗۖ

और जान लो कि ईश्वर सावधानी बरतने वालों के साथ है।

وَاعْلَمُواْ أَنَّ اَ۬للَّهَ مَعَ اَ۬لْمُتَّقِينَۖ

और जब कोई सूरा उतारी गई, तो उनमें से कोई कहता है: “इस सूरा ने तुममें से किसे विश्वास में बढ़ाया?”

وَإِذَا مَا أُنزِلَتْ سُورَةٞ فَمِنْهُم مَّنْ يَّقُولُ أَيُّكُمْ زَادَتْهُ هَٰذِهِۦ إِيمَٰناٗۖ

जहाँ तक विश्वास करने वालों का प्रश्न है, उसने उन्हें विश्वास में बढ़ाया, और वे उससे हर्षित होते हैं।

فَأَمَّا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ فَزَادَتْهُمْ إِيمَٰناٗ وَهُمْ يَسْتَبْشِرُونَۖ

परंतु जिनके मर्मों में रोग है, उसने उनकी गंदगी पर एक और गंदगी जोड़ दी, और वे नकारते हुए मरे।

وَأَمَّا اَ۬لذِينَ فِے قُلُوبِهِم مَّرَضٞ فَزَادَتْهُمْ رِجْساً إِلَىٰ رِجْسِهِمْ وَمَاتُواْ وَهُمْ كَٰفِرُونَۖ

क्या वे नहीं देखते कि उन्हें हर साल एक या दो बार परीक्षा में डाला जाता है? फिर वे पलट नहीं आते, और स्मरण नहीं करते।

أَوَلَا يَرَوْنَ أَنَّهُمْ يُفْتَنُونَ فِے كُلِّ عَامٖ مَّرَّةً أَوْ مَرَّتَيْنِ ثُمَّ لَا يَتُوبُونَ وَلَا هُمْ يَذَّكَّرُونَۖ

और जब कोई सूरा उतारी गई, तो वे एक-दूसरे पर नज़र डालते हैं: “क्या कोई तुम्हें देख रहा है?” फिर वे खिसक जाते हैं।

وَإِذَا مَا أُنزِلَتْ سُورَةٞ نَّظَرَ بَعْضُهُمْ إِلَىٰ بَعْضٍ هَلْ يَرَيٰكُم مِّنْ أَحَدٖ ثُمَّ اَ۪نصَرَفُواْۖ

ईश्वर ने उनके मर्मों को फेर दिया, क्योंकि वे ऐसी क़ौम हैं जो समझती नहीं।

صَرَفَ اَ۬للَّهُ قُلُوبَهُم بِأَنَّهُمْ قَوْمٞ لَّا يَفْقَهُونَۖ

9:128

तुम्हारे पास निश्चय ही एक संदेशवाहक आया है, तुम्हीं में से; तुम्हारा कष्ट में पड़ना उसे भारी लगता है,

لَقَدْ جَآءَكُمْ رَسُولٞ مِّنْ أَنفُسِكُمْ عَزِيزٌ عَلَيْهِ مَا عَنِتُّمْۖ

9:128

वह तुम्हारी चिंता करने वाला है,

حَرِيصٌ عَلَيْكُمۖ

9:128

करुणामय है, विश्वास करने वालों के प्रति दयालु है।

بِالْمُؤْمِنِينَ رَءُوفٞ رَّحِيمٞۖ

9:129

यदि वे पीठ फेर लें, तो कहो: “ईश्वर मेरे लिए पर्याप्त है;

فَإِن تَوَلَّوْاْ فَقُلْ حَسْبِيَ اَ۬للَّهُۖ

9:129

उसके सिवा कोई देवता नहीं;

لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ

9:129

मैं उसी को मुख़्तार बनाता हूँ,

عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُۖ

9:129

और वह विशाल भवन का अभिभावक है।”

وَهْوَ رَبُّ اُ۬لْعَرْشِ اِ۬لْعَظِيمِۖ

← अध्यायों की अनुक्रमणिका