الطلاق
At-Talaq
Repudiation
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। हे सूचनादाता! जब तुम स्त्रियों का परित्याग करो, तो उनकी निर्धारित प्रतीक्षा-अवधि के अनुसार उनका परित्याग करो, और उस प्रतीक्षा-अवधि की गणना करो।
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ يَٰأَيُّهَا ٱلنَّبِيُّ إِذَا طَلَّقۡتُمُ ٱلنِّسَآءَ فَطَلِّقُوهُنَّ لِعِدَّتِهِنَّ وَأَحۡصُواْ ٱلۡعِدَّةَۖ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, जो तुम्हारा अभिभावक है।
وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ رَبَّكُمُۥۖ
उन्हें उनके घरों से मत निकालो,
لَا تُخۡرِجُوهُنَّ مِنۢ بِيُوتِهِنَّ
और वे भी न निकलें, सिवा इसके कि वे कोई स्पष्ट निर्लज्जता करें।
وَلَا يَخۡرُجۡنَ إِلَّا أَن يَأۡتِينَ بِفَٰحِشَةٖ مُّبَيَّنَةٖۚ
और यही ईश्वर की सीमाएँ हैं।
وَتِلۡكَ حُدُودُ ٱللَّهِۚ
और जो ईश्वर की सीमाएँ पार करे, उसने अपने स्व पर अन्याय किया।
وَمَن يَتَعَدَّ حُدُودَ ٱللَّهِ فَقَدۡ ظَلَمَ نَفۡسَهُۥۚ
तुम्हें कोई अंदाज़ा नहीं: शायद ईश्वर इसके बाद कोई बात उभार दे।
لَا تَدۡرِي لَعَلَّ ٱللَّهَ يُحۡدِثُ بَعۡدَ ذَٰلِكَ أَمۡرٗا
फिर जब वे अपनी अवधि तक पहुँच जाएँ, तो उन्हें मान्य के अनुसार रखो या मान्य के अनुसार उनसे अलग हो जाओ,
فَإِذَا بَلَغۡنَ أَجَلَهُنَّ فَأَمۡسِكُوهُنَّ بِمَعۡرُوفٍ أَوۡ فَارِقُوهُنَّ بِمَعۡرُوفٖ
और अपने में से दो न्यायी व्यक्तियों को साक्षी बना लो,
وَأَشۡهِدُواْ ذَوَيۡ عَدۡلٖ مِّنكُمُۥ
और ईश्वर के लिए साक्ष्य को बनाए रखो।
وَأَقِيمُواْ ٱلشَّهَٰدَةَ لِلَّهِۚ
यही वह है जिसका उपदेश उसे दिया जाता है जो ईश्वर और अंतिम दिन पर विश्वास करता है।
ذَٰلِكُمُۥ يُوعَظُ بِهِۦ مَن كَانَ يُؤۡمِنُ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِۚ
और जो ईश्वर के प्रति सावधान रहता है, वह उसके लिए एक निकास बना देता है, और उसे वहाँ से जीविका देता है जहाँ से उसे अपेक्षा नहीं होती।
وَمَن يَتَّقِ ٱللَّهَ يَجۡعَل لَّهُۥ مَخۡرَجٗا وَيَرۡزُقۡهُۥ مِنۡ حَيۡثُ لَا يَحۡتَسِبُۚ
और जो ईश्वर को मुख़्तार बनाता है, वह उसके लिए पर्याप्त है,
وَمَن يَتَوَكَّلۡ عَلَى ٱللَّهِ فَهُوَ حَسۡبُهُۥۚ
क्योंकि ईश्वर अपने आदेश को उसकी पूर्णता तक पहुँचाता है।
إِنَّ ٱللَّهَ بَٰلِغٌ أَمۡرَهُۥۚ
ईश्वर ने हर चीज़ के लिए एक माप निर्धारित किया है।
قَدۡ جَعَلَ ٱللَّهُ لِكُلِّ شَيۡءٖ قَدۡرٗا
और तुम्हारी स्त्रियों में से जिन्हें मासिक स्राव की आशा नहीं रही, यदि तुम्हें संदेह हो, तो उनकी प्रतीक्षा-अवधि तीन महीने है, और उनके लिए भी जिन्हें वह नहीं हुआ।
وَٱلَّٰٓيِٕ يَئِسۡنَ مِنَ ٱلۡمَحِيضِ مِن نِّسَآئِكُمُۥ إِنِ ٱرۡتَبۡتُمُۥ فَعِدَّتُهُنَّ ثَلَٰثَةُ أَشۡهُرٖ وَٱلَّٰٓيِٕ لَمۡ يَحِضۡنَۚ
और गर्भवती स्त्रियों के लिए, उनकी अवधि वह क्षण है जब वे जो वहन करती हैं उसे जन्म दे दें।
وَأُوْلَٰتُ ٱلۡأَحۡمَالِ أَجَلُهُنَّ أَن يَضَعۡنَ حَمۡلَهُنَّۚ
और जो ईश्वर के प्रति सावधान रहता है, वह उसके मामले में उसके लिए सुगमता कर देता है।
وَمَن يَتَّقِ ٱللَّهَ يَجۡعَل لَّهُۥ مِنۡ أَمۡرِهِۦ يُسۡرٗا
यह ईश्वर का आदेश है, जो उसने तुम्हारी ओर उतारा है।
ذَٰلِكَ أَمۡرُ ٱللَّهِ أَنزَلَهُۥ إِلَيۡكُمُۥۚ
और जो ईश्वर के प्रति सावधान रहता है, वह उसके बुरे कर्म ढक देता है और उसका पुरस्कार विशाल कर देता है।
وَمَن يَتَّقِ ٱللَّهَ يُكَفِّرۡ عَنۡهُۥ سَيِّـَٔاتِهِۦ وَيُعۡظِمۡ لَهُۥ أَجۡرًا
उन्हें वहीं रहने दो जहाँ तुम स्वयं रहते हो, अपने साधनों के अनुसार,
أَسۡكِنُوهُنَّ مِنۡ حَيۡثُ سَكَنتُمُۥ مِن وُجۡدِكُمُۥ
और उन्हें तंग करने के लिए हानि न पहुँचाओ।
وَلَا تُضَآرُّوهُنَّ لِتُضَيِّقُواْ عَلَيۡهِنَّۚ
और यदि वे गर्भवती हों, तो उनकी आवश्यकताएँ पूरी करो जब तक कि वे जो वहन करती हैं उसे जन्म न दे दें।
وَإِن كُنَّ أُوْلَٰتِ حَمۡلٖ فَأَنفِقُواْ عَلَيۡهِنَّ حَتَّىٰ يَضَعۡنَ حَمۡلَهُنَّۚ
फिर यदि वे तुम्हारे लिए बच्चे की देखभाल का ज़िम्मा लें, तो उन्हें उनके पुरस्कार दो, और मान्य के अनुसार आपस में परामर्श करो।
فَإِنۡ أَرۡضَعۡنَ لَكُمُۥ فَـَٔاتُوهُنَّ أُجُورَهُنَّ وَأۡتَمِرُواْ بَيۡنَكُمُۥ بِمَعۡرُوفٖۖ
और यदि तुम एक-दूसरे के लिए कठिनाई पैदा करो, तो उसके लिए कोई अन्य स्त्री बच्चे की देखभाल का ज़िम्मा लेगी।
وَإِن تَعَاسَرۡتُمُۥ فَسَتُرۡضِعُ لَهُۥ أُخۡرَىٰ
जो संपन्न है वह अपनी संपन्नता के अनुसार ख़र्च करे,
لِيُنفِقۡ ذُو سَعَةٖ مِّن سَعَتِهِۦۖ
और जिसकी जीविका नपी-तुली है वह उसमें से ख़र्च करे जो ईश्वर ने उसे दिया है।
وَمَن قُدِرَ عَلَيۡهِۦ رِزۡقُهُۥ فَلۡيُنفِقۡ مِمَّا ءَاتَىٰهُ ٱللَّهُۚ
ईश्वर किसी स्व पर उतना ही भार डालता है जितना उसने उसे दिया है।
لَا يُكَلِّفُ ٱللَّهُ نَفۡسًا إِلَّا مَا ءَاتَىٰهَاۚ
ईश्वर कठिनाई के बाद सुगमता को आने देगा।
سَيَجۡعَلُ ٱللَّهُ بَعۡدَ عُسۡرٖ يُسۡرٗا
कितनी ही बस्तियों ने अपने अभिभावक और उसके संदेशवाहकों के आदेश के सामने उद्दंडता की! हमने उनका हिसाब कठोरता से लिया और उन्हें अनसुना दंड दिया, और उन्होंने अपने व्यवहार के घातक परिणाम चखे।
وَكَآئِن مِّن قَرۡيَةٍ عَتَتۡ عَنۡ أَمۡرِ رَبِّهَا وَرُسُلِهِۦ فَحَاسَبۡنَٰهَا حِسَابٗا شَدِيدٗا وَعَذَّبۡنَٰهَا عَذَابٗا نُّكۡرٗا فَذَاقَتۡ وَبَالَ أَمۡرِهَا
और उनके व्यवहार का परिणाम घाटा रहा।
وَكَانَ عَٰقِبَةُ أَمۡرِهَا خُسۡرًا
ईश्वर ने उनके लिए कठोर दंड तैयार किया है।
أَعَدَّ ٱللَّهُ لَهُمُۥ عَذَابٗا شَدِيدٗاۖ
अतः ईश्वर के प्रति सावधान रहो, हे मेधा रखने वालो,
فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ يَٰأُوْلِي ٱلۡأَلۡبَٰبِ
तुम जो विश्वास करते हो; ईश्वर ने तुम्हारी ओर एक स्मरण उतारा है,
ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْۚ قَدۡ أَنزَلَ ٱللَّهُ إِلَيۡكُمُۥ ذِكۡرٗا
एक संदेशवाहक जो तुम्हें ईश्वर के स्पष्ट संकेत सुनाता है, ताकि उन्हें जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, अँधेरों से प्रकाश की ओर निकाल लाए।
رَّسُولٗا يَتۡلُواْ عَلَيۡكُمُۥ ءَايَٰتِ ٱللَّهِ مُبَيَّنَٰتٖ لِّيُخۡرِجَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ مِنَ ٱلظُّلُمَٰتِ إِلَى ٱلنُّورِۚ
और जो ईश्वर पर विश्वास करे और भला कर्म करे, उसे वह ऐसे उद्यानों में प्रवेश कराएगा जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जहाँ वे सदा, चिरकाल तक रहेंगे; ईश्वर ने उसे अवश्य सुंदर जीविका दी है।
وَمَن يُؤۡمِنۢ بِٱللَّهِ وَيَعۡمَلۡ صَٰلِحٗا يُدۡخِلۡهُۥ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَا أَبَدٗاۖ قَدۡ أَحۡسَنَ ٱللَّهُ لَهُۥ رِزۡقًا
ईश्वर वही है जिसने सात आकाश रचे, और धरती में से उनके समान।
ٱللَّهُ ٱلَّذِي خَلَقَ سَبۡعَ سَمَٰوَٰتٖ وَمِنَ ٱلۡأَرۡضِ مِثۡلَهُنَّۖ
आदेश उनके बीच उतरता है, ताकि तुम जानो कि ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है, और कि ईश्वर ने हर चीज़ को अपने ज्ञान से घेर रखा है।
يَتَنَزَّلُ ٱلۡأَمۡرُ بَيۡنَهُنَّ لِتَعۡلَمُواْ أَنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ وَأَنَّ ٱللَّهَ قَدۡ أَحَاطَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عِلۡمَۢا