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القرآن

المزمل

Al-Muzzammil

The Wrapped One

Sura73
ن
पद20

Section XIThe application · continuation

“Leave Me”: the messenger's endurance in the face of denial

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Read the section from its beginning: sura 68

73:1–4

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। हे लिपटे हुए! रात में खड़े हो जाओ, थोड़े को छोड़कर — उसका आधा, या उससे थोड़ा कम, या उससे थोड़ा अधिक; और पाठ को ठहर-ठहरकर, स्पष्ट रूप से अलग-अलग करते हुए सुनाओ,

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ يَٰأَيُّهَا ٱلۡمُزَّمِّلُ قُمِ ٱلَّيۡلَ إِلَّا قَلِيلٗا نِّصۡفَهُۥ أَوُ ٱنقُصۡ مِنۡهُۥ قَلِيلًا أَوۡ زِدۡ عَلَيۡهِۦ وَرَتِّلِ ٱلۡقُرَانَ تَرۡتِيلًا

क्योंकि हम तुम पर एक भारी कथन डालने जा रहे हैं।

إِنَّا سَنُلۡقِي عَلَيۡكَ قَوۡلٗا ثَقِيلًا

73:6

रात का जागरण प्रभाव में अधिक दृढ़ और कथन में अधिक सीधा है।

إِنَّ نَاشِئَةَ ٱلَّيۡلِ هِيَ أَشَدُّ وَطۡـٔٗا وَأَقۡوَمُ قِيلًا

73:7

दिन में तुम्हारे लिए एक लंबी तैराकी है।

إِنَّ لَكَ فِي ٱلنَّهَارِ سَبۡحٗا طَوِيلٗا

और अपने अभिभावक के नाम का स्मरण करो, और पूरी तरह उसी के प्रति समर्पित हो जाओ।

وَٱذۡكُرِ ٱسۡمَ رَبِّكَ وَتَبَتَّلۡ إِلَيۡهِۦ تَبۡتِيلٗا

73:9

उदय-स्थान और अस्त-स्थान के अभिभावक,

رَّبُّ ٱلۡمَشۡرِقِ وَٱلۡمَغۡرِبِ

उसके सिवा कोई देवता नहीं;

لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ

73:9

तो उसे मुख़्तार बना लो।

فَٱتَّخِذۡهُۥ وَكِيلٗا

और जो वे कहते हैं उस पर धैर्य रखो,

وَٱصۡبِرۡ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ

और उनसे गरिमापूर्ण दूरी के साथ दूर हो जाओ।

وَٱهۡجُرۡهُمُۥ هَجۡرٗا جَمِيلٗا

और मुझे झुठलाने वालों के साथ छोड़ दो, जो सुख में जीते हैं, और उन्हें थोड़ा अवकाश दो।

وَذَرۡنِي وَٱلۡمُكَذِّبِينَ أُوْلِي ٱلنَّعۡمَةِ وَمَهِّلۡهُمُۥ قَلِيلًا

73:12–14

हमारे पास निश्चय ही भारी ज़ंजीरें हैं, एक भट्ठी, दम घोंटने वाला भोजन, और एक पीड़ादायक दंड, उस दिन जब धरती और पहाड़ हिला दिए जाएँगे, और जब पहाड़ ढहती हुई रेत का ढेर बन जाएँगे।

إِنَّ لَدَيۡنَا أَنكَالٗا وَجَحِيمٗا وَطَعَامٗا ذَا غُصَّةٖ وَعَذَابًا أَلِيمٗا يَوۡمَ تَرۡجُفُ ٱلۡأَرۡضُ وَٱلۡجِبَالُ وَكَانَتِ ٱلۡجِبَالُ كَثِيبٗا مَّهِيلًا

73:15–16

हमने तुम्हारे पास एक संदेशवाहक भेजा, तुम पर साक्षी, जैसे हमने फ़िरऔन के पास एक संदेशवाहक भेजा; परंतु फ़िरऔन ने संदेशवाहक की अवज्ञा की, तो हमने उसे घातक पकड़ से पकड़ लिया।

إِنَّا أَرۡسَلۡنَا إِلَيۡكُمُۥ رَسُولٗا شَٰهِدًا عَلَيۡكُمُۥ كَمَا أَرۡسَلۡنَا إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ رَسُولٗا فَعَصَىٰ فِرۡعَوۡنُ ٱلرَّسُولَ فَأَخَذۡنَٰهُۥ أَخۡذٗا وَبِيلٗا

73:17–18

तो यदि तुम नकारो, तो उस दिन से तुम कैसे सावधान रहोगे जो बच्चों के बाल सफ़ेद कर देगा, ऐसा दिन जब आकाश भी फट जाएगा?

فَكَيۡفَ تَتَّقُونَ إِن كَفَرۡتُمُۥ يَوۡمٗا يَجۡعَلُ ٱلۡوِلۡدَٰنَ شِيبًا ٱلسَّمَآءُ مُنفَطِرُۢ بِهِۦۚ

उसका वादा सदा पूरा होकर रहता है।

كَانَ وَعۡدُهُۥ مَفۡعُولًا

73:19

यह एक स्मरण है।

إِنَّ هَٰذِهِۦ تَذۡكِرَةٞۖ

73:19

तो जो चाहे वह अपने अभिभावक की ओर एक राह ले ले।

فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ سَبِيلًا

73:20

तुम्हारा अभिभावक जानता है कि तुम रात के दो-तिहाई से कुछ कम, उसके आधे और उसके तिहाई खड़े रहते हो, और तुम्हारे साथ वालों में से एक समूह भी।

۞ إِنَّ رَبَّكَ يَعۡلَمُ أَنَّكَ تَقُومُ أَدۡنَىٰ مِن ثُلُثَيِ ٱلَّيۡلِ وَنِصۡفَهُۥ وَثُلُثَهُۥ وَطَآئِفَةٞ مِّنَ ٱلَّذِينَ مَعَكَۚ

और ईश्वर रात और दिन का निर्धारण करता है;

وَٱللَّهُ يُقَدِّرُ ٱلَّيۡلَ وَٱلنَّهَارَۚ

73:20

वह जानता है कि तुम उसे कभी गिन नहीं सकोगे, इसलिए वह अनुकंपा के साथ तुम्हारी ओर पलटा है।

عَلِمَ أَن لَّن تُحۡصُوهُۥ فَتَابَ عَلَيۡكُمُۥۖ

73:20

तो पाठ में से जो तुम्हारे लिए आसान हो उसे पढ़ो।

فَٱقۡرَءُواْ مَا تَيَسَّرَ مِنَ ٱلۡقُرَانِۚ

73:20

वह जानता है कि तुम्हारे बीच बीमार होंगे, और दूसरे जो ईश्वर के अनुग्रह की खोज में धरती पर घूमेंगे, और दूसरे जो ईश्वर की राह में लड़ेंगे।

عَلِمَ أَن سَيَكُونُ مِنكُمُۥ مَرۡضَىٰ وَءَاخَرُونَ يَضۡرِبُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِ يَبۡتَغُونَ مِن فَضۡلِ ٱللَّهِ وَءَاخَرُونَ يُقَٰتِلُونَ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِۖ

73:20

तो उसमें से जो तुम्हारे लिए आसान हो उसे पढ़ो,

فَٱقۡرَءُواْ مَا تَيَسَّرَ مِنۡهُۥۚ

73:20

और संपर्क बनाए रखो, और शुद्ध उदारता दो,

وَأَقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُواْ ٱلزَّكَوٰةَ

और ईश्वर को एक सुंदर उधार दो।

وَأَقۡرِضُواْ ٱللَّهَ قَرۡضًا حَسَنٗاۚ

जो भी अच्छाई तुम अपने लिए आगे बढ़ाते हो, उसे तुम ईश्वर के पास पाओगे, बेहतर और पुरस्कार में अधिक विशाल।

وَمَا تُقَدِّمُواْ لِأَنفُسِكُمُۥ مِنۡ خَيۡرٖ تَجِدُوهُۥ عِندَ ٱللَّهِ هُوَ خَيۡرٗا وَأَعۡظَمَ أَجۡرٗاۚ

और ईश्वर से क्षमा माँगो;

وَٱسۡتَغۡفِرُواْ ٱللَّهَۖ

क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।

إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمُۢ

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