الفاتحة
Al-Fatiha
Guide Us on the Straight Path
Sura1
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पद7
Opening
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
प्रशंसा ईश्वर के लिए है, जो सभी प्राणियों का अभिभावक है,
ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ
सर्वदयालु, दयालु,
ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
चुकौती के दिन का अधिराज।
مَٰلِكِ يَوۡمِ ٱلدِّينِ
हम आपकी ही आज्ञा का पालन करते हैं, और आपसे ही हम मदद माँगते हैं।
إِيَّاكَ نَعۡبُدُ وَإِيَّاكَ نَسۡتَعِينُ
हमें सीधा पथ दिखाइए,
ٱهۡدِنَا ٱلصِّرَٰطَ ٱلۡمُسۡتَقِيمَ
उनका पथ, जिन्हें आपने अपने उपकार से भर दिया,
صِرَٰطَ ٱلَّذِينَ أَنۡعَمۡتَ عَلَيۡهِمۡ
उनका नहीं जो क्रोध के पात्र बने, और न भटके हुओं का।
غَيۡرِ ٱلۡمَغۡضُوبِ عَلَيۡهِمۡ وَلَا ٱلضَّآلِّينَ