نوح
Nuh
Nuh
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। हमने नूह को उसकी क़ौम की ओर भेजा: “अपनी क़ौम को चेतावनी दो, इससे पहले कि उन पर कोई पीड़ादायक दंड आए।”
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ إِنَّآ أَرۡسَلۡنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوۡمِهِۦٓ أَنۡ أَنذِرۡ قَوۡمَكَ مِن قَبۡلِ أَن يَأۡتِيَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ
उसने कहा: “हे मेरी क़ौम, मैं तुम्हारे लिए निश्चय ही एक स्पष्ट चेतावनी देने वाला हूँ: ईश्वर की आज्ञा का पालन करो, उसके प्रति सावधान रहो और मेरी बात मानो; वह तुम्हारे दोषों का एक भाग क्षमा कर देगा और तुम्हें एक नामित अवधि तक टाल देगा,
قَالَ يَٰقَوۡمِ إِنِّي لَكُمۡ نَذِيرٞ مُّبِينٌ أَنِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ وَٱتَّقُوهُ وَأَطِيعُونِ يَغۡفِرۡ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمۡ وَيُؤَخِّرۡكُمۡ إِلَىٰٓ أَجَلٖ مُّسَمًّىۚ
क्योंकि ईश्वर की अवधि, जब आ जाती है, तो टाली नहीं जा सकती, यदि तुम बस जानते।”
إِنَّ أَجَلَ ٱللَّهِ إِذَا جَآءَ لَا يُؤَخَّرُۚ لَوۡ كُنتُمۡ تَعۡلَمُونَ
उसने कहा: “मेरे अभिभावक, मैंने निश्चय ही अपनी क़ौम को रात और दिन पुकारा, परंतु मेरी पुकार ने उनके भागने को ही बढ़ाया।
قَالَ رَبِّ إِنِّي دَعَوۡتُ قَوۡمِي لَيۡلٗا وَنَهَارٗا فَلَمۡ يَزِدۡهُمۡ دُعَآءِيٓ إِلَّا فِرَارٗا
और जब भी मैंने उन्हें पुकारा, कि आप उन्हें क्षमा कर दें, उन्होंने अपनी उँगलियाँ अपने कानों में डाल लीं, अपने कपड़ों से स्वयं को ढक लिया, डटे रहे और पूरी तरह घमंड से फूल उठे।
وَإِنِّي كُلَّمَا دَعَوۡتُهُمۡ لِتَغۡفِرَ لَهُمۡ جَعَلُوٓاْ أَصَٰبِعَهُمۡ فِيٓ ءَاذَانِهِمۡ وَٱسۡتَغۡشَوۡاْ ثِيَابَهُمۡ وَأَصَرُّواْ وَٱسۡتَكۡبَرُواْ ٱسۡتِكۡبَارٗا
फिर मैंने उन्हें खुलकर पुकारा,
ثُمَّ إِنِّي دَعَوۡتُهُمۡ جِهَارٗا
फिर मैंने उनके सामने सार्वजनिक घोषणा की, और उन्हें गुप्त रूप से भी बताया, और कहा: अपने अभिभावक से क्षमा माँगो, क्योंकि वह बड़ा क्षमाकर्ता है; वह तुम पर बरसता हुआ आकाश भेजेगा, और तुम्हें संपत्ति और पुत्रों से सुसज्जित करेगा, और तुम्हें उद्यान देगा, और तुम्हें नदियाँ देगा।
ثُمَّ إِنِّيٓ أَعۡلَنتُ لَهُمۡ وَأَسۡرَرۡتُ لَهُمۡ إِسۡرَارٗا فَقُلۡتُ ٱسۡتَغۡفِرُواْ رَبَّكُمۡ إِنَّهُۥ كَانَ غَفَّارٗا يُرۡسِلِ ٱلسَّمَآءَ عَلَيۡكُم مِّدۡرَارٗا وَيُمۡدِدۡكُم بِأَمۡوَٰلٖ وَبَنِينَ وَيَجۡعَل لَّكُمۡ جَنَّٰتٖ وَيَجۡعَل لَّكُمۡ أَنۡهَٰرٗا
तुम्हें क्या हुआ है कि तुम ईश्वर से गंभीरता की आशा नहीं रखते, जबकि उसने तुम्हें क्रमिक चरणों में रचा है?
مَّا لَكُمۡ لَا تَرۡجُونَ لِلَّهِ وَقَارٗا وَقَدۡ خَلَقَكُمۡ أَطۡوَارًا
क्या तुमने नहीं देखा कि ईश्वर ने कैसे सात आकाश तह-दर-तह रचे, और उनमें चंद्रमा को प्रकाश और सूर्य को मशाल बनाया?
أَلَمۡ تَرَوۡاْ كَيۡفَ خَلَقَ ٱللَّهُ سَبۡعَ سَمَٰوَٰتٖ طِبَاقٗا وَجَعَلَ ٱلۡقَمَرَ فِيهِنَّ نُورٗا وَجَعَلَ ٱلشَّمۡسَ سِرَاجٗا
और ईश्वर ने तुम्हें धरती से एक पौधे की तरह उगाया, फिर वह तुम्हें उसमें वापस पहुँचाएगा, और तुम्हें उससे फिर से निकालेगा।
وَٱللَّهُ أَنۢبَتَكُم مِّنَ ٱلۡأَرۡضِ نَبَاتٗا ثُمَّ يُعِيدُكُمۡ فِيهَا وَيُخۡرِجُكُمۡ إِخۡرَاجٗا
और ईश्वर ने तुम्हारे लिए धरती को बिछा हुआ गलीचा बना दिया, ताकि तुम उसमें राहों पर चलो, चौड़े रास्तों पर।”
وَٱللَّهُ جَعَلَ لَكُمُ ٱلۡأَرۡضَ بِسَاطٗا لِّتَسۡلُكُواْ مِنۡهَا سُبُلٗا فِجَاجٗا
नूह ने कहा: “मेरे अभिभावक, उन्होंने निश्चय ही मेरी अवज्ञा की और उसका अनुसरण किया जिसकी संपत्ति और बच्चों ने केवल घाटा बढ़ाया, और उन्होंने बहुत बड़ा षड्यंत्र किया,
قَالَ نُوحٞ رَّبِّ إِنَّهُمۡ عَصَوۡنِي وَٱتَّبَعُواْ مَن لَّمۡ يَزِدۡهُ مَالُهُۥ وَوَلَدُهُۥٓ إِلَّا خَسَارٗا وَمَكَرُواْ مَكۡرٗا كُبَّارٗا
और उन्होंने कहा: अपने देवताओं को कभी न त्यागना, न वद्द को, न सुवाअ को, न यग़ूस को, न यऊक़ को, न नस्र को।
وَقَالُواْ لَا تَذَرُنَّ ءَالِهَتَكُمۡ وَلَا تَذَرُنَّ وَدّٗا وَلَا سُوَاعٗا وَلَا يَغُوثَ وَيَعُوقَ وَنَسۡرٗا
और उन्होंने बहुतों को भटकाया।
وَقَدۡ أَضَلُّواْ كَثِيرٗاۖ
और अन्यायियों को केवल भटकाव में बढ़ाइए।”
وَلَا تَزِدِ ٱلظَّٰلِمِينَ إِلَّا ضَلَٰلٗا
अपनी भूलों के कारण वे डुबो दिए गए, फिर एक आग में प्रविष्ट कराए गए, और उन्हें ईश्वर के अतिरिक्त कोई सहायता न मिली।
مِّمَّا خَطِيٓـَٰٔتِهِمۡ أُغۡرِقُواْ فَأُدۡخِلُواْ نَارٗا فَلَمۡ يَجِدُواْ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ أَنصَارٗا
और नूह ने कहा: “मेरे अभिभावक, धरती पर, नकारने वालों में से, किसी निवासी को न बख़्शिए!
وَقَالَ نُوحٞ رَّبِّ لَا تَذَرۡ عَلَى ٱلۡأَرۡضِ مِنَ ٱلۡكَٰفِرِينَ دَيَّارًا
क्योंकि यदि आप उन्हें बख़्श देंगे, तो वे आपके आज्ञाकारियों को भटका देंगे, और केवल दुराचारी, बड़े नकारने वालों को जन्म देंगे।
إِنَّكَ إِن تَذَرۡهُمۡ يُضِلُّواْ عِبَادَكَ وَلَا يَلِدُوٓاْ إِلَّا فَاجِرٗا كَفَّارٗا
मेरे अभिभावक, मुझे क्षमा कीजिए, और मेरे दोनों माता-पिता को, और जो कोई विश्वास करते हुए मेरे घर में प्रवेश करे, और विश्वास करने वालों और विश्वास करने वालियों को,
رَّبِّ ٱغۡفِرۡ لِي وَلِوَٰلِدَيَّ وَلِمَن دَخَلَ بَيۡتِي مُؤۡمِنٗا وَلِلۡمُؤۡمِنِينَ وَٱلۡمُؤۡمِنَٰتِۖ
और अन्यायियों को केवल तबाही में बढ़ाइए।”
وَلَا تَزِدِ ٱلظَّٰلِمِينَ إِلَّا تَبَارَۢا