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Sura96
عم
पद19

Section XIIThe application · continuation

The immense Information: the Day, the address to the messenger, the “Say” suras

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Read the section from its beginning: sura 78

96:1

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। पढ़ो, अपने अभिभावक के नाम से जिसने रचा!

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ ٱقۡرَأۡ بِٱسۡمِ رَبِّكَ ٱلَّذِي خَلَقَ

96:2

उसने मनुष्य को एक चिपकाव से रचा।

خَلَقَ ٱلۡإِنسَٰنَ مِنۡ عَلَقٍ

96:3–5

पढ़ो! और तुम्हारा अभिभावक परम उदार है, जिसने क़लम के द्वारा सिखाया, मनुष्य को वह सिखाया जो वह नहीं जानता था।

ٱقۡرَأۡ وَرَبُّكَ ٱلۡأَكۡرَمُ ٱلَّذِي عَلَّمَ بِٱلۡقَلَمِ عَلَّمَ ٱلۡإِنسَٰنَ مَا لَمۡ يَعۡلَمۡ

96:6–7

कदापि नहीं! मनुष्य अवश्य हर मर्यादा से आगे निकल जाता है, जैसे ही वह अपने को धनी समझता है।

كَلَّآ إِنَّ ٱلۡإِنسَٰنَ لَيَطۡغَىٰٓ أَن رّٜءٜاهُ ٱسۡتَغۡنَىٰٓ

तुम्हारे अभिभावक ही की ओर लौटना है।

إِنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلرُّجۡعَىٰٓ

96:9–10

क्या तुमने उसे देखा जो एक आज्ञाकारी को संपर्क जोड़ने से मना करता है?

أَرَءَيۡتَ ٱلَّذِي يَنۡهَىٰ عَبۡدًا إِذَا صَلَّىٰٓ

96:11–12

क्या तुम देखते हो कि यदि वह मार्गदर्शन पर हो, या सावधानी का आदेश देता हो?

أَرَءَيۡتَ إِن كَانَ عَلَى ٱلۡهُدَىٰٓ أَوۡ أَمَرَ بِٱلتَّقۡوَىٰٓ

क्या तुम देखते हो कि यदि वह झुठलाए और पीठ फेरे? क्या वह नहीं जानता कि ईश्वर देखता है?

أَرَءَيۡتَ إِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰٓ أَلَمۡ يَعۡلَم بِأَنَّ ٱللَّهَ يَرَىٰ

96:15–16

कदापि नहीं! यदि वह न रुका, तो हम उसे माथे के बालों से कसकर अवश्य पकड़ेंगे, एक झूठे और भूल करने वाले माथे के बाल!

كَلَّا لَئِن لَّمۡ يَنتَهِ لَنَسۡفَعَۢا بِٱلنَّاصِيَةِ نَاصِيَةٖ كَٰذِبَةٍ خَاطِئَةٖ

96:17–18

तो वह अपनी मंडली को बुला ले; हम अपनों को बुलाएँगे।

فَلۡيَدۡعُ نَادِيَهُۥ سَنَدۡعُ ٱلزَّبَانِيَةَ

कदापि नहीं! उसकी बात मत मानो, बल्कि माथा टेको और निकट आओ।

كَلَّا لَا تُطِعۡهُ وَٱسۡجُدۡۤ وَٱقۡتَرِب۩

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