Luqman لقمان
Gave Luqman wisdom لقمان الحكمة
The section and its links
The trial announced, then lived (29-32, then 33-35)
Read the section from its beginning: sura 29
Read with: the suras of the same shelf mark
- 2 Guidance for Those Who Guard Themselvesthe threshold: the Scripture, those who receive it, the law
- 3 The Rope of Godthe twin of 2: the dispute and the combat lived through
- 29 Without being put to the trialthe trial of those who say “We believe”
- 30 The Romansthe signs, and the Law that does not change
- 32 Fall down in prostrationthe descent, and those who fall down in prostration
What was shown before: The example from which this sura draws the application: Moussa facing Fir'awn, in 26 to 28. 26
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। الٓمٓ (Alif Lam Mim)।
بِسۡمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحۡمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ الٓمٓۚ
ये प्रज्ञा से भरे ग्रंथ के संकेत हैं, मार्गदर्शन और दया, उनके लिए जो भलाई करते हैं, जो संपर्क बनाए रखते हैं और शुद्ध उदारता देते हैं, और जो अंतिम जीवन के विषय में यक़ीन रखते हैं।
تِلۡكَ ءَايَٰتُ اُ۬لۡكِتَٰبِ اِ۬لۡحَكِيمِ هُدٗى وَرَحۡمَةٗ لِّلۡمُحۡسِنِينَ اَ۬لَّذِينَ يُقِيمُونَ اَ۬لصَّلَوٰةَ وَيُوتُونَ اَ۬لزَّكَوٰةَ وَهُم بِالۡأٓخِرَةِ هُمۡ يُوقِنُونَ
वही अपने अभिभावक की ओर से मार्गदर्शन पर हैं,
أُوْلَٰٓئِكَ عَلَىٰ هُدٗى مِّن رَّبِّهِمۡۖ
और वही सफल होने वाले हैं।
وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لۡمُفۡلِحُونَ
और लोगों में कुछ ऐसे हैं जो ध्यान भटकाने वाली चर्चा ख़रीदते हैं, बिना जाने ईश्वर की राह से भटकाने के लिए, और उसे मज़ाक़ बना लेते हैं;
وَمِنَ اَ۬لنَّاسِ مَن يَشۡتَرِي لَهۡوَ اَ۬لۡحَدِيثِ لِيَضِلَّ عَن سَبِيلِ اِ۬للَّهِ بِغَيۡرِ عِلۡمٖ وَيَتَّخِذُهَا هُزُؤًاۚ
यही हैं जिनके लिए अपमानजनक दंड होगा।
أُوْلَٰٓئِكَ لَهُمۡ عَذَابٞ مُّهِينٞ
और जब उसे हमारे संकेत सुनाए जाते हैं, तो वह घमंड से फूलकर पीठ फेर लेता है, मानो उसने उन्हें सुना ही नहीं, मानो उसके कानों में बहरापन हो:
وَإِذَا تُتۡلَىٰ عَلَيۡهِ ءَايَٰتُنَا وَلَّىٰ مُسۡتَكۡبِرٗا كَأَن لَّمۡ يَسۡمَعۡهَا كَأَنَّ فِي أُذُنَيۡهِ وَقۡرٗاۖ
तो उसे पीड़ादायक दंड का शुभ समाचार दो।
فَبَشِّرۡهُ بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, उनके लिए निश्चय ही उपकार के उद्यान हैं, जिनमें वे सदा रहेंगे —
إِنَّ اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ لَهُمۡ جَنَّٰتُ اُ۬لنَّعِيمِ خَٰلِدِينَ فِيهَاۖ
ईश्वर का वादा, पूर्ण सत्य के साथ;
وَعۡدَ اَ۬للَّهِ حَقّٗاۚ
और वह सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।
وَهۡوَ اَ۬لۡعَزِيزُ اُ۬لۡحَكِيمُ
उसने आकाशों को बिना खंभों के रचा
خَلَقَ اَ۬لسَّمَٰوَٰتِ بِغَيۡرِ عَمَدٖ
जिन्हें तुम देख सको;
تَرَوۡنَهَاۖ
और उसने धरती पर दृढ़ खूँटे डाले, ताकि वह तुम्हारे साथ डगमगा न जाए, और उसमें हर प्रकार के चलने-फिरने वाले फैला दिए;
وَأَلۡقَىٰ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ رَوَٰسِيَ أَن تَمِيدَ بِكُمۡ وَبَثَّ فِيهَا مِن كُلِّ دَآبَّةٖۚ
और हमने आकाश से पानी उतारा, और उसमें हर प्रकार के उदार जोड़े उगाए।
وَأَنزَلۡنَا مِنَ اَ۬لسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَنۢبَتۡنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوۡجٖ كَرِيمٍ
यह ईश्वर की रचना है:
هَٰذَا خَلۡقُ اُ۬للَّهِ
अब मुझे दिखाओ कि जो उसके अतिरिक्त हैं उन्होंने क्या रचा है।
فَأَرُونِي مَاذَا خَلَقَ اَ۬لَّذِينَ مِن دُونِهِۦۚ
अन्यायी तो बल्कि स्पष्ट भटकाव में हैं।
بَلِ اِ۬لظَّٰلِمُونَ فِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٖ
और हमने निश्चय ही लुक़मान को प्रज्ञा दी: “ईश्वर के प्रति कृतज्ञ हो”;
۞ وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا لُقۡمَٰنَ اَ۬لۡحِكۡمَةَ أَنِ اِ۟شۡكُر لِّلَّهِۚ
और जो कृतज्ञ होता है वह केवल अपने लिए ही कृतज्ञ होता है,
وَمَن يَشۡكُرۡ فَإِنَّمَا يَشۡكُر لِّنَفۡسِهِۦۖ
और जो नकारता है — ईश्वर निश्चय ही धनी, प्रशंसनीय है।
وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ غَنِيٌّ حَمِيدٞ
और जब लुक़मान ने अपने पुत्र से, उसे उपदेश देते हुए, कहा: “हे मेरे नन्हे, ईश्वर के साथ किसी को साझी मत ठहराओ;
وَإِذۡ قَال لُّقۡمَٰنُ لِاِبۡنِهِۦ وَهۡوَ يَعِظُهُۥ يَٰبُنَيِّ لَا تُشۡرِكۡ بِاللَّهِۖ
साझी ठहराना अवश्य एक विशाल अन्याय है।”
إِنَّ اَ۬لشِّرۡكَ لَظُلۡمٌ عَظِيمٞ
और हमने मनुष्य को उसके दोनों माता-पिता के विषय में अनुशंसा की —
وَوَصَّيۡنَا اَ۬لۡإِنسَٰنَ بِوَٰلِدَيۡهِ
उसकी माता ने कमज़ोरी पर कमज़ोरी के साथ उसे वहन किया,
حَمَلَتۡهُ أُمُّهُۥ وَهۡنًا عَلَىٰ وَهۡنٖ
और उसका दूध छुड़ाना आगामी दो साल में पूरा होता है — :
وَفِصَٰلُهُۥ فِي عَامَيۡنِ
“मेरे प्रति और अपने दोनों माता-पिता के प्रति कृतज्ञ हो;
أَنِ اِ۟شۡكُر لِّي وَلِوَٰلِدَيۡكَ
मेरी ओर ही गंतव्य है।”
إِلَيَّ اَ۬لۡمَصِيرُ
और यदि वे तुमसे संघर्ष करें कि तुम मेरे साथ उसे साझी ठहराओ जिसका तुम्हें कोई ज्ञान नहीं, तो उनकी बात मत मानो;
وَإِن جَٰهَدَاكَ عَلَىٰ أَن تُشۡرِكَ بِي مَا لَيۡسَ لَكَ بِهِۦ عِلۡمٞ فَلَا تُطِعۡهُمَاۖ
परंतु निकट जीवन में मान्य रीति से उनका साथ दो,
وَصَاحِبۡهُمَا فِي اِ۬لدُّنۡيۭا مَعۡرُوفٗاۖ
और उसकी राह का अनुसरण करो जो मेरा आसरा लेता है;
وَاَتَّبِعۡ سَبِيلَ مَنۡ أَنَابَ إِلَيَّۚ
फिर मेरी ही ओर तुम्हारा लौटना है, और तब मैं तुम्हें सूचित करूँगा कि तुम क्या करते थे।
ثُمَّ إِلَيَّ مَرۡجِعُكُمۡ فَأُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ
“हे मेरे नन्हे, वह राई के दाने के भार का होता, और किसी चट्टान में, या आकाशों में, या धरती पर होता, तो ईश्वर उसे ले आता,
يَٰبُنَيِّ إِنَّهَا إِن تَكُ مِثۡقَالَ حَبَّةٖ مِّنۡ خَرۡدَلٖ فَتَكُن فِي صَخۡرَةٍ أَوۡ فِي اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ أَوۡ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ يَاتِ بِهَا اَ۬للَّهُۚ
क्योंकि ईश्वर सूक्ष्म, पूरी ख़बर रखने वाला है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ لَطِيفٌ خَبِيرٞ
हे मेरे नन्हे, संपर्क बनाए रखो,
يَٰبُنَيِّ أَقِمِ اِ۬لصَّلَوٰةَ
और जो मान्य है उसका आदेश दो,
وَامُرۡ بِالۡمَعۡرُوفِ
और जो अमान्य है उससे मना करो,
وَاَنۡهَ عَنِ اِ۬لۡمُنكَرِ
और जो तुम पर आ पड़े उसमें धैर्य रखो,
وَاَصۡبِرۡ عَلَىٰ مَا أَصَابَكَۖ
क्योंकि यह उन मामलों में से है जिनमें संकल्प चाहिए।
إِنَّ ذَٰلِكَ مِنۡ عَزۡمِ اِ۬لۡأُمُورِ
और लोगों की ओर अपना गाल मत मरोड़ो,
وَلَا تُصَٰعِرۡ خَدَّكَ لِلنَّاسِ
और धरती पर इतराते हुए मत चलो,
وَلَا تَمۡشِ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ مَرَحًاۖ
क्योंकि ईश्वर किसी भी अभिमानी शेखीबाज़ से प्रेम नहीं करता।
إِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يُحِبُّ كُلَّ مُخۡتَالٖ فَخُورٖ
और अपनी चाल में मध्यम रहो,
وَاَقۡصِدۡ فِي مَشۡيِكَ
और अपनी आवाज़ नीची रखो:
وَاَغۡضُضۡ مِن صَوۡتِكَۚ
क्योंकि सबसे पहचान में न आने वाली आवाज़ अवश्य गधों की आवाज़ है।”
إِنَّ أَنكَرَ اَ۬لۡأَصۡوَٰتِ لَصَوۡتُ اُ۬لۡحَمِيرِ
क्या तुमने नहीं देखा कि ईश्वर ने तुम्हारे लिए वह सब वश में कर दिया है जो आकाशों में है और जो धरती पर है, और तुम्हें अपने उपकारों से भर दिया है, खुले भी और भीतरी भी?
أَلَمۡ تَرَوۡاْ أَنَّ اَ۬للَّهَ سَخَّر لَّكُم مَّا فِي اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي اِ۬لۡأَرۡضِ وَأَسۡبَغَ عَلَيۡكُمۡ نِعَمَهُۥ ظَٰهِرَةٗ وَبَاطِنَةٗۗ
और लोगों में एक ऐसा है जो ईश्वर के विषय में बहस करता है, बिना ज्ञान के, न मार्गदर्शन के, न किसी प्रकाश देने वाले ग्रंथ के।
وَمِنَ اَ۬لنَّاسِ مَن يُجَٰدِلُ فِي اِ۬للَّهِ بِغَيۡرِ عِلۡمٖ وَلَا هُدٗى وَلَا كِتَٰبٖ مُّنِيرٖ
और जब उनसे कहा जाता है: “जो ईश्वर ने उतारा है उसका अनुसरण करो”,
وَإِذَا قِيل لَّهُمُ اُ۪تَّبِعُواْ مَا أَنزَلَ اَ۬للَّهُ
तो वे कहते हैं: “बल्कि हम उसका अनुसरण करते हैं जिस पर हमने अपने पूर्वजों को पाया।”
قَالُواْ بَلۡ نَتَّبِعُ مَا وَجَدۡنَا عَلَيۡهِ ءَابَآءَنَاۚ
और क्या तब भी जब बहकाने वाला उन्हें दहकते अंगारों के दंड की ओर बुलाए?
أَوَلَوۡ كَانَ اَ۬لشَّيۡطَٰنُ يَدۡعُوهُمۡ إِلَىٰ عَذَابِ اِ۬لسَّعِيرِ
और जो कोई ईश्वर के प्रति अपनी दिशा खरी करता है, और भलाई करता भी है, उसने सबसे भरोसेमंद कुंडे को दृढ़ता से थाम लिया है;
۞ وَمَن يُسۡلِمۡ وَجۡهَهُۥ إِلَى اَ۬للَّهِ وَهۡوَ مُحۡسِنٞ فَقَدِ اِ۪سۡتَمۡسَكَ بِالۡعُرۡوَةِ اِ۬لۡوُثۡقۭيٰۗ
और ईश्वर की ओर ही मामलों का परिणाम है।
وَإِلَى اَ۬للَّهِ عَٰقِبَةُ اُ۬لۡأُمُورِ
और जो कोई नकारे, उसका नकार तुम्हें दुखी न करे:
وَمَن كَفَرَ فَلَا يَحۡزُنكَ كُفۡرُهُۥۚ
उनका लौटना हमारी ही ओर है, और तब हम उन्हें सूचित करेंगे कि वे क्या करते थे,
إِلَيۡنَا مَرۡجِعُهُمۡ فَنُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُواْۚ
क्योंकि ईश्वर सीनों के भीतर जो है उसके विषय में सर्वज्ञ है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ عَلِيمُۢ بِذَاتِ اِ۬لصُّدُورِ
हम उन्हें थोड़ा उपभोग देते हैं, फिर उन्हें कठोर दंड की ओर विवश कर देंगे।
نُمَتِّعُهُمۡ قَلِيلٗا ثُمَّ نَضۡطَرُّهُمۡ إِلَىٰ عَذَابٍ غَلِيظٖ
और यदि तुम उनसे पूछो कि आकाशों और धरती को किसने रचा, तो वे अवश्य कहेंगे: “ईश्वर”;
وَلَئِن سَأَلۡتَهُم مَّنۡ خَلَقَ اَ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضَ لَيَقُولُنَّ اَ۬للَّهُۚ
कहो: “प्रशंसा ईश्वर के लिए है!”
قُلِ اِ۬لۡحَمۡدُ لِلَّهِۚ
परंतु उनमें से अधिकतर नहीं जानते।
بَلۡ أَكۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ
जो आकाशों और धरती में है, वह ईश्वर का है;
لِلَّهِ مَا فِي اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِۚ
क्योंकि ईश्वर धनी, प्रशंसनीय है।
إِنَّ اَ۬للَّه هُّوَ اَ۬لۡغَنِيُّ اُ۬لۡحَمِيدُ
और यदि धरती के सारे वृक्ष क़लमें होते, और समुद्र उसके बाद सात समुद्रों से भरा जाता, तब भी ईश्वर के बोल समाप्त न होते,
وَلَوۡ أَنَّمَا فِي اِ۬لۡأَرۡضِ مِن شَجَرَةٍ أَقۡلَٰمٞ وَاَلۡبَحۡرَ يَمُدُّهُۥ مِنۢ بَعۡدِهِۦ سَبۡعَةُ أَبۡحُرٖ مَّا نَفِدَتۡ كَلِمَٰتُ اُ۬للَّهِۚ
क्योंकि ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٞ
तुम्हारी रचना और तुम्हारा उठाया जाना बस एक ही स्व के समान है;
مَّا خَلۡقُكُمۡ وَلَا بَعۡثُكُمۡ إِلَّا كَنَفۡسٖ وَٰحِدَةٍۚ
क्योंकि ईश्वर सुनने वाला, दृष्टिवान है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ سَمِيعُۢ بَصِيرٌ
क्या तुमने नहीं देखा कि ईश्वर रात को दिन में प्रविष्ट कराता है, और दिन को रात में प्रविष्ट कराता है, और उसने सूर्य और चंद्रमा को वश में किया है, प्रत्येक एक नामित अवधि की ओर दौड़ता हुआ, और कि ईश्वर तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है?
أَلَمۡ تَرَ أَنَّ اَ۬للَّهَ يُولِجُ اُ۬لَّيۡلَ فِي اِ۬لنَّه۪ارِ وَيُولِجُ اُ۬لنَّهَارَ فِي اِ۬لَّيۡلِ وَسَخَّرَ اَ۬لشَّمۡسَ وَاَلۡقَمَرَۖ كُلّٞ يَجۡرِي إِلَىٰ أَجَلٖ مُّسَمّٗى وَأَنَّ اَ۬للَّهَ بِمَا تَعۡمَلُونَ خَبِيرٞ
यह इसलिए कि ईश्वर सत्य है, और जिसे तुम उसके अतिरिक्त पुकारते हो वह मिथ्या है, और ईश्वर परम-उच्च, महान है।
ذَٰلِكَ بِأَنَّ اَ۬للَّه هُّوَ اَ۬لۡحَقُّ وَأَنَّ مَا يَدۡعُونَ مِن دُونِهِ اِ۬لۡبَٰطِلُ وَأَنَّ اَ۬للَّه هُّوَ اَ۬لۡعَلِيُّ اُ۬لۡكَبِيرُ
क्या तुमने नहीं देखा कि जलयान ईश्वर के उपकार से समुद्र में चलते हैं, ताकि वह तुम्हें अपने कुछ संकेत दिखाए?
أَلَمۡ تَرَ أَنَّ اَ۬لۡفُلۡكَ تَجۡرِي فِي اِ۬لۡبَحۡرِ بِنِعۡمَتِ اِ۬للَّهِ لِيُرِيَكُم مِّنۡ ءَايَٰتِهِۦۚ
इसमें अवश्य हर अत्यंत धैर्यवान, अत्यंत कृतज्ञ के लिए संकेत हैं।
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّكُلِّ صَبّ۪ارٖ شَكُورٖ
और जब कोई लहर उन्हें छत्रों की तरह ढक लेती है, तो वे ईश्वर को पुकारते हैं, उसी के लिए विधान को समर्पित करते हुए;
وَإِذَا غَشِيَهُم مَّوۡجٞ كَاَلظُّلَلِ دَعَوُاْ اُ۬للَّهَ مُخۡلِصِينَ لَهُ اُ۬لدِّينَ
फिर जब वह उन्हें उबारकर थल की ओर ले आता है, तो उनमें से कुछ मध्यम रहते हैं;
فَلَمَّا نَجَّىٰهُمۡ إِلَى اَ۬لۡبَرِّ فَمِنۡهُم مُّقۡتَصِدٞۚ
और हमारे संकेतों को हठपूर्वक केवल हर विश्वासघाती, बड़ा नकारने वाला ही ठुकराता है।
وَمَا يَجۡحَدُ بِـَٔايَٰتِنَا إِلَّا كُلُّ خَتّ۪ارٖ كَفُورٖ
हे लोगो, अपने अभिभावक के प्रति सावधान रहो, और उस दिन का भय मानो जब कोई जनक अपनी संतान के ज़रा भी काम न आएगा, न कोई संतान अपने जनक के ज़रा भी काम आएगी;
۞ يَٰأَيُّهَا اَ۬لنَّاسُ اُ۪تَّقُواْ رَبَّكُمۡ وَاَخۡشَوۡاْ يَوۡمٗا لَّا يَجۡزِي وَالِدٌ عَن وَلَدِهِۦ وَلَا مَوۡلُودٌ هُوَ جَازٍ عَن وَالِدِهِۦ شَيۡـًٔاۚ
क्योंकि ईश्वर का वादा सत्य है:
إِنَّ وَعۡدَ اَ۬للَّهِ حَقّٞۖ
अतः निकट जीवन तुम्हें छल न ले,
فَلَا تَغُرَّنَّكُمُ اُ۬لۡحَيَوٰةُ اُ۬لدُّنۡيۭا
और बड़ा छलिया ईश्वर के विषय में तुम्हें छल न ले।
وَلَا يَغُرَّنَّكُم بِاللَّهِ اِ۬لۡغَرُورُ
ईश्वर के पास निश्चय ही उस घड़ी का ज्ञान है,
إِنَّ اَ۬للَّهَ عِندَهُۥ عِلۡمُ اُ۬لسَّاعَةِ
और वह राहत की वर्षा उतारता है,
وَيُنزِلُ اُ۬لۡغَيۡثَ
और जानता है जो गर्भाशयों में है;
وَيَعۡلَم مَّا فِي اِ۬لۡأَرۡحَامِۖ
और किसी स्व को अंदाज़ा नहीं कि वह कल क्या कमाएगा,
وَمَا تَدۡرِي نَفۡسٞ مَّاذَا تَكۡسِبُ غَدٗاۖ
और किसी स्व को अंदाज़ा नहीं कि वह किस धरती पर मरेगा;
وَمَا تَدۡرِي نَفۡسُۢ بِأَيِّ أَرۡضٖ تَمُوتُۚ
क्योंकि ईश्वर सर्वज्ञ, पूरी ख़बर रखने वाला है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ عَلِيمٌ خَبِيرُۢ