Az-Zumar الزمر
Devoting the Law exclusively to Him مخلصا له الدين
The section and its links
The refined obedient ones, then the refined Law (38, then 39)
Threshold of section IX
Read the section from its beginning: sura 38
Read with: the suras of the same shelf mark
- 40 My Guardian Is Godthose who argue; the believing man of Fir'awn's clan
- 41 Their Skins Will Testifythose who turn away; the Aad and the Thamud
- 42 Uphold the Lawthe one Law revealed to all the messengers
- 43 In their footstepsthe footsteps of the fathers, and appearances
- 44 In a blessed nightthe blessed night, and the trial
- 45 A legislated waythe signs, and the legislated way
- 46 Not a novelty among the messengersal-Ahqaf: the Aad, the Occulted who listen
What was shown before: “We refined them” (38) becomes here the command of a refined Law. 38
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। ग्रंथ का अवतरण ईश्वर की ओर से है, जो सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।
بِسۡمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحۡمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ تَنزِيلُ اُ۬لۡكِتَٰبِ مِنَ اَ۬للَّهِ اِ۬لۡعَزِيزِ اِ۬لۡحَكِيمِ
हमने तुम्हारी ओर ग्रंथ को पूर्ण सत्य के साथ उतारा; अतः ईश्वर की आज्ञा का पालन करो, विधान को अनन्य रूप से उसी को समर्पित करते हुए।
إِنَّا أَنزَلۡنَا إِلَيۡكَ اَ۬لۡكِتَٰب بِّالۡحَقِّ فَاَعۡبُدِ اِ۬للَّهَ مُخۡلِصٗا لَّهُ اُ۬لدِّينَ
क्या ऐसा नहीं है: निर्मल और अनन्य विधान ईश्वर का ही है।
أَلَا لِلَّهِ اِ۬لدِّينُ اُ۬لۡخَالِصُۚ
और जो उसके अतिरिक्त हिमायती बना लेते हैं: “हम उनकी आज्ञा का पालन केवल इसलिए करते हैं कि वे हमें ईश्वर के अत्यंत निकट पहुँचा दें”;
وَاَلَّذِينَ اَ۪تَّخَذُواْ مِن دُونِهِۦ أَوۡلِيَآءَ مَا نَعۡبُدُهُمۡ إِلَّا لِيُقَرِّبُونَا إِلَى اَ۬للَّهِ زُلۡفۭيٰ
ईश्वर निश्चय ही उनके बीच उस विषय में निर्णय करेगा जिसमें वे मतभेद रखते हैं,
إِنَّ اَ۬للَّهَ يَحۡكُم بَيۡنَهُمۡ فِي مَا هُمۡ فِيهِ يَخۡتَلِفُونَ
क्योंकि ईश्वर उसे मार्ग नहीं दिखाता जो झूठा, बड़ा नकारने वाला है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يَهۡدِي مَنۡ هُوَ كَٰذِبٞ كَفَّارٞ
यदि ईश्वर अपने लिए संतान रखना चाहता, तो वह अपने रचे हुए में से जो उसकी मर्ज़ी होती, उसे चुन लेता;
لَّوۡ أَرَادَ اَ۬للَّهُ أَن يَتَّخِذَ وَلَدٗا لَّاَصۡطَفَىٰ مِمَّا يَخۡلُقُ مَا يَشَآءُۚ
उसकी महिमा हो —
سُبۡحَٰنَهۖ
वही ईश्वर है, एकमेव, वर्चस्वशाली।
هُّوَ اَ۬للَّهُ اُ۬لۡوَٰحِدُ اُ۬لۡقَهَّارُ
उसने आकाशों और धरती को पूर्ण सत्य के साथ रचा;
خَلَقَ اَ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضَ بِالۡحَقِّۖ
वह रात को दिन पर लपेटता है, और दिन को रात पर लपेटता है;
يُكَوِّرُ اُ۬لَّيۡلَ عَلَى اَ۬لنَّه۪ارِ وَيُكَوِّرُ اُ۬لنَّهَارَ عَلَى اَ۬لَّيۡلِۖ
और उसने सूर्य और चंद्रमा को वश में किया,
وَسَخَّرَ اَ۬لشَّمۡسَ وَاَلۡقَمَرَۖ
प्रत्येक एक नामित अवधि की ओर दौड़ता हुआ।
كُلّٞ يَجۡرِي لِأَجَلٖ مُّسَمًّىۗ
क्या ऐसा नहीं है: वही सर्वशक्तिमान, महान क्षमाकर्ता है।
أَلَا هُوَ اَ۬لۡعَزِيزُ اُ۬لۡغَفَّٰرُ
उसने तुम्हें एक ही स्व से रचा, फिर उसमें से उसका जोड़ीदार निकाला;
خَلَقكُّم مِّن نَّفۡسٖ وَٰحِدَةٖ ثُمَّ جَعَلَ مِنۡهَا زَوۡجَهَا
और उसने तुम्हारे लिए पशुधन में से आठ उतारे, जोड़ों में;
وَأَنزَل لَّكُم مِّنَ اَ۬لۡأَنۡعَٰمِ ثَمَٰنِيَةَ أَزۡوَٰجٖۚ
वह तुम्हें तुम्हारी माताओं के पेटों में रचता है, रचना के बाद रचना, तीन अँधेरों में;
يَخۡلُقكُّمۡ فِي بُطُونِ أُمَّهَٰتِكُمۡ خَلۡقٗا مِّنۢ بَعۡدِ خَلۡقٖ فِي ظُلُمَٰتٖ ثَلَٰثٖۚ
यही ईश्वर है, तुम्हारा अभिभावक; उसी का राजत्व है;
ذَٰلِكُمُ اُ۬للَّهُ رَبُّكُمۡ لَهُ اُ۬لۡمُلۡكُۖ
उसके सिवा कोई देवता नहीं;
لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ
तो तुम कैसे हटा दिए जाते हो?
فَأَنَّىٰ تُصۡرَفُونَ
यदि तुम नकारो, तो ईश्वर निश्चय ही धनी है, उसे तुम्हारी कोई आवश्यकता नहीं;
إِن تَكۡفُرُواْ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ غَنِيٌّ عَنكُمۡۖ
और वह अपने आज्ञाकारियों के लिए नकार को स्वीकार नहीं करता;
وَلَا يَرۡضَىٰ لِعِبَادِهِ اِ۬لۡكُفۡرَۖ
परंतु यदि तुम कृतज्ञ हो, तो वह उसे तुम्हारे लिए स्वीकार करता है।
وَإِن تَشۡكُرُواْ يَرۡضَهۡ لَكُمۡۗ
और कोई बोझ वहन करने वाला किसी दूसरे का बोझ वहन नहीं करेगा;
وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٞ وِزۡرَ أُخۡر۪يٰۚ
फिर तुम्हारा लौटना तुम्हारे अभिभावक की ओर ही है, और वह तुम्हें सूचित करेगा कि तुम क्या करते थे,
ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُم مَّرۡجِعُكُمۡ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَۚ
क्योंकि वह सीनों के भीतर जो है उसके विषय में सर्वज्ञ है।
إِنَّهُۥ عَلِيمُۢ بِذَاتِ اِ۬لصُّدُورِ
और जब मनुष्य को कोई हानि छूती है, तो वह अपने अभिभावक को पुकारता है, उसका आसरा लेते हुए;
۞ وَإِذَا مَسَّ اَ۬لۡإِنسَٰنَ ضُرّٞ دَعَا رَبَّهُۥ مُنِيبًا إِلَيۡهِ
फिर जब वह उसे अपनी ओर से कोई उपकार उपलब्ध कराता है, तो वह उसे भूल जाता है जिसे वह पहले पुकारता था, और ईश्वर के लिए प्रतिद्वंद्वी ठहराता है, उसकी राह से दूर भटकाने के लिए।
ثُمَّ إِذَا خَوَّلَهُۥ نِعۡمَةٗ مِّنۡهُ نَسِيَ مَا كَانَ يَدۡعُواْ إِلَيۡهِ مِن قَبۡلُ وَجَعَل لِّلَّهِ أَندَادٗا لِّيَضِلَّ عَن سَبِيلِهِۦۚ
कहो: “अपने नकार का थोड़ा उपभोग कर लो, तुम निश्चय ही आग वालों में से हो।”
قُلۡ تَمَتَّعۡ بِكُفۡرِك قَّلِيلًا إِنَّكَ مِنۡ أَصۡحَٰبِ اِ۬لنّ۪ارِ
वह जो रात के प्रहरों में समर्पित रहता है, माथा टेके हुए और खड़ा हुआ, अंतिम जीवन के प्रति सजग और अपने अभिभावक की दया की आशा रखते हुए —
أَمَّنۡ هُوَ قَٰنِتٌ ءَانَآءَ اَ۬لَّيۡلِ سَاجِدٗا وَقَآئِمٗا يَحۡذَرُ اُ۬لۡأٓخِرَةَ وَيَرۡجُواْ رَحۡمَةَ رَبِّهِۦۗ
कहो: “क्या जो जानते हैं वे उनके बराबर हैं जो नहीं जानते?”
قُلۡ هَلۡ يَسۡتَوِي اِ۬لَّذِينَ يَعۡلَمُونَ وَاَلَّذِينَ لَا يَعۡلَمُونَۗ
केवल मेधा रखने वाले ही स्मरण करते हैं।
إِنَّمَا يَتَذَكَّرُ أُوْلُواْ اُ۬لۡأَلۡبَٰبِ
कहो: “हे मेरे विश्वास करने वाले आज्ञाकारियो, अपने अभिभावक के प्रति सावधान रहो;
قُلۡ يَٰعِبَادِ اِ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ اُ۪تَّقُواْ رَبَّكُمۡۚ
इस निकट जीवन में भलाई करने वालों के लिए कुछ सुंदर है;
لِلَّذِينَ أَحۡسَنُواْ فِي هَٰذِهِ اِ۬لدُّنۡيۭا حَسَنَةٞۗ
और ईश्वर की धरती विस्तृत है;
وَأَرۡضُ اُ۬للَّهِ وَٰسِعَةٌۗ
धैर्य रखने वाले ही निष्ठापूर्वक अपना पुरस्कार पाएँगे, बिना हिसाब के।”
إِنَّمَا يُوَفَّى اَ۬لصَّٰبِرُونَ أَجۡرَهُم بِغَيۡرِ حِسَابٖ
कहो: “मुझे आदेश दिया गया है कि मैं ईश्वर की आज्ञा का पालन करूँ, विधान को अनन्य रूप से उसी को समर्पित करते हुए, और मुझे आदेश दिया गया है कि मैं उसके प्रति खरों में सबसे पहला बनूँ।”
قُلۡ إِنِّي أُمِرۡتُ أَنۡ أَعۡبُدَ اَ۬للَّهَ مُخۡلِصٗا لَّهُ اُ۬لدِّينَ وَأُمِرۡتُ لِأَنۡ أَكُونَ أَوَّلَ اَ۬لۡمُسۡلِمِينَ
कहो: “यदि मैं अपने अभिभावक की अवज्ञा करूँ, तो मैं निश्चय ही एक विशाल दिन के दंड से डरता हूँ।”
قُلۡ إِنِّيَ أَخَافُ إِنۡ عَصَيۡتُ رَبِّي عَذَابَ يَوۡمٍ عَظِيمٖ
कहो: “मैं ईश्वर की ही आज्ञा का पालन करता हूँ, अपने विधान को अनन्य रूप से उसी को समर्पित करते हुए;
قُلِ اِ۬للَّهَ أَعۡبُدُ مُخۡلِصٗا لَّهُۥ دِينِي
तो तुम उसके अतिरिक्त जिसकी तुम्हारी मर्ज़ी हो, उसकी आज्ञा का पालन करो।”
فَاَعۡبُدُواْ مَا شِيتُم مِّن دُونِهِۦۗ
कहो: “घाटा उठाने वाले वही हैं जिन्होंने पेशी के दिन अपने स्व और अपने परिवार को घाटे में डाल दिया होगा;
قُلۡ إِنَّ اَ۬لۡخَٰسِرِينَ اَ۬لَّذِينَ خَسِرُواْ أَنفُسَهُمۡ وَأَهۡلِيهِمۡ يَوۡمَ اَ۬لۡقِيَٰمَةِۗ
क्या ऐसा नहीं है: यही तो स्पष्ट घाटा है।”
أَلَا ذَٰلِكَ هُوَ اَ۬لۡخُسۡرَانُ اُ۬لۡمُبِينُ
उनके ऊपर आग के चँदोवे होंगे, और उनके नीचे भी वैसे ही;
لَهُم مِّن فَوۡقِهِمۡ ظُلَلٞ مِّنَ اَ۬لنّ۪ارِ وَمِن تَحۡتِهِمۡ ظُلَلٞۚ
इसी से ईश्वर अपने आज्ञाकारियों को डराता है:
ذَٰلِكَ يُخَوِّفُ اُ۬للَّهُ بِهِۦ عِبَادَهُۥۚ
“हे मेरे आज्ञाकारियो, मेरे प्रति सावधान रहो!”
يَٰعِبَادِ فَاَتَّقُونِ
और जो मर्यादाहीन की आज्ञा का पालन करने से बचते हैं, और ईश्वर का आसरा लेते हैं, उनके लिए शुभ समाचार है।
وَاَلَّذِينَ اَ۪جۡتَنَبُواْ اُ۬لطَّٰغُوتَ أَن يَعۡبُدُوهَا وَأَنَابُواْ إِلَى اَ۬للَّهِ لَهُمُ اُ۬لۡبُشۡر۪يٰۚ
अतः मेरे उन आज्ञाकारियों को शुभ समाचार दो जो कथन पर कान लगाते हैं और उसके सबसे सुंदर का अनुसरण करते हैं;
فَبَشِّرۡ عِبَادِ اِ۬لَّذِينَ يَسۡتَمِعُونَ اَ۬لۡقَوۡلَ فَيَتَّبِعُونَ أَحۡسَنَهُۥۚ
वही हैं जिन्हें ईश्वर ने मार्ग दिखाया,
أُوْلَٰٓئِكَ اَ۬لَّذِينَ هَدَىٰهُمُ اُ۬للَّهُۖ
और वही मेधा रखने वाले हैं।
وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمۡ أُوْلُواْ اُ۬لۡأَلۡبَٰبِ
जिस पर दंड का बोल सिद्ध हो चुका — क्या तुम उसे उबारोगे जो आग में है?
أَفَمَنۡ حَقَّ عَلَيۡهِ كَلِمَةُ اُ۬لۡعَذَابِ أَفَأَنتَ تُنقِذُ مَن فِي اِ۬لنّ۪ار
परंतु जिन्होंने अपने अभिभावक के प्रति सावधानी बरती, उनके लिए ऊँचे कक्ष हैं, जिनके ऊपर और कक्ष खड़े किए गए हैं, जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं;
لَّٰكِنِ اِ۬لَّذِينَ اَ۪تَّقَوۡاْ رَبَّهُمۡ لَهُمۡ غُرَفٞ مِّن فَوۡقِهَا غُرَفٞ مَّبۡنِيَّةٞ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا اَ۬لۡأَنۡهَٰرُ
ईश्वर का वादा —
وَعۡدَ اَ۬للَّهِ
ईश्वर अपने वादे को भंग नहीं करता।
لَا يُخۡلِفُ اُ۬للَّهُ اُ۬لۡمِيعَادَ
क्या तुमने नहीं देखा कि ईश्वर आकाश से एक पानी उतारता है, जिसे वह धरती में स्रोतों के रूप में प्रविष्ट कराता है, फिर उससे विविध रंगों की एक खेती निकालता है; फिर वह सूख जाती है, और तुम उसे पीली पड़ी देखते हो; फिर वह उसे चूरा बना देता है?
أَلَمۡ تَرَ أَنَّ اَ۬للَّهَ أَنزَلَ مِنَ اَ۬لسَّمَآءِ مَآءٗ فَسَلَكَهُۥ يَنَٰبِيعَ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ ثُمَّ يُخۡرِجُ بِهِۦ زَرۡعٗا مُّخۡتَلِفًا أَلۡوَٰنُهُۥ ثُمَّ يَهِيجُ فَتَر۪ىٰهُ مُصۡفَرّٗا ثُمَّ يَجۡعَلُهُۥ حُطَٰمًاۚ
इसमें अवश्य मेधा रखने वालों के लिए एक स्मरण है।
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَذِكۡر۪يٰ لِأُوْلِي اِ۬لۡأَلۡبَٰبِ
वह जिसके सीने को ईश्वर ने ईश्वर के प्रति खरेपन के लिए खोल दिया, और जो इस प्रकार अपने अभिभावक की ओर से एक प्रकाश पर है —
۞ أَفَمَن شَرَحَ اَ۬للَّهُ صَدۡرَهُۥ لِلۡإِسۡلَٰمِ فَهۡوَ عَلَىٰ نُورٖ مِّن رَّبِّهِۦۚ
तो हाय उन पर जिनके मर्म ईश्वर के स्मरण के विरुद्ध कठोर हो गए हैं!
فَوَيۡلٞ لِّلۡقَٰسِيَةِ قُلُوبُهُم مِّن ذِكۡرِ اِ۬للَّهِۚ
वही स्पष्ट भटकाव में हैं।
أُوْلَٰٓئِكَ فِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٍ
ईश्वर ने सबसे सुंदर वार्ता उतारा, एक ऐसा ग्रंथ जिसके अंश एक-दूसरे से मिलते-जुलते हैं, द्विपदियों में,
اِ۬للَّهُ نَزَّلَ أَحۡسَنَ اَ۬لۡحَدِيثِ كِتَٰبٗا مُّتَشَٰبِهٗا مَّثَانِيَ
जिससे उनकी त्वचाएँ काँप उठती हैं जो अपने अभिभावक से भय रखते हैं; फिर उनकी त्वचाएँ और उनके मर्म ईश्वर के स्मरण पर नरम पड़ जाते हैं;
تَقۡشَعِرُّ مِنۡهُ جُلُودُ اُ۬لَّذِينَ يَخۡشَوۡنَ رَبَّهُمۡ ثُمَّ تَلِينُ جُلُودُهُمۡ وَقُلُوبُهُمۡ إِلَىٰ ذِكۡرِ اِ۬للَّهِۚ
यही ईश्वर का मार्गदर्शन है, जिससे वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे मार्ग दिखाता है;
ذَٰلِكَ هُدَى اَ۬للَّهِ يَهۡدِي بِهِۦ مَن يَشَآءُۚ
और जिसे ईश्वर भटका दे, उसके लिए कोई मार्ग दिखाने वाला नहीं रहता।
وَمَن يُضۡلِلِ اِ۬للَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنۡ هَادٍ
वह जो पेशी के दिन बुरे दंड से अपने चेहरे द्वारा अपना बचाव करता है —
أَفَمَن يَتَّقِي بِوَجۡهِهِۦ سُوٓءَ اَ۬لۡعَذَابِ يَوۡمَ اَ۬لۡقِيَٰمَةِۚ
और अन्यायियों से कहा जाएगा: “चखो जो तुम कमाते थे।”
وَقِيل لِّلظَّٰلِمِينَ ذُوقُواْ مَا كُنتُمۡ تَكۡسِبُونَ
उनसे पहले वालों ने झुठलाया, और दंड उन पर वहाँ से आया जहाँ से उन्हें उसका आभास न था;
كَذَّبَ اَ۬لَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ فَأَتَىٰهُمُ اُ۬لۡعَذَابُ مِنۡ حَيۡثُ لَا يَشۡعُرُونَ
ईश्वर ने उन्हें निकट जीवन में लज्जा चखाई,
فَأَذَاقَهُمُ اُ۬للَّهُ اُ۬لۡخِزۡيَ فِي اِ۬لۡحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنۡيۭاۖ
और अंतिम जीवन का दंड अधिक बड़ा है, यदि वे जानते।
وَلَعَذَابُ اُ۬لۡأٓخِرَةِ أَكۡبَرۚ لَّوۡ كَانُواْ يَعۡلَمُونَ
और हमने निश्चय ही लोगों के लिए इस पाठ में हर प्रकार के उदाहरण कई गुना किए हैं, शायद वे स्मरण करें — एक त्रुटिहीन पाठ, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं, शायद वे सावधान रहें।
وَلَقَد ضَّرَبۡنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا اَ۬لۡقُرۡءَانِ مِن كُلِّ مَثَلٖ لَّعَلَّهُمۡ يَتَذَكَّرُونَ قُرۡءَانًا عَرَبِيًّا غَيۡرَ ذِي عِوَجٖ لَّعَلَّهُمۡ يَتَّقُونَ
ईश्वर एक उदाहरण जोड़ता है: एक पुरुष जो आपस में असहमत साझीदारों का है, और एक पुरुष जो एक पुरुष के बराबर है —
ضَرَبَ اَ۬للَّهُ مَثَلٗا رَّجُلٗا فِيهِ شُرَكَآءُ مُتَشَٰكِسُونَ وَرَجُلٗا سَٰلِمٗا لِّرَجُلٍ
क्या वे उदाहरण में बराबर हैं?
هَلۡ يَسۡتَوِيَانِ مَثَلًاۚ
प्रशंसा ईश्वर के लिए है!
اِ۬لۡحَمۡدُ لِلَّهِۚ
परंतु उनमें से अधिकतर नहीं जानते।
بَلۡ أَكۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ
तुम मरोगे, और वे मरेंगे; फिर पेशी के दिन तुम निश्चय ही अपने अभिभावक के सामने झगड़ोगे।
إِنَّكَ مَيِّتٞ وَإِنَّهُم مَّيِّتُونَ ثُمَّ إِنَّكُمۡ يَوۡمَ اَ۬لۡقِيَٰمَةِ عِندَ رَبِّكُمۡ تَخۡتَصِمُونَ
तो उससे अधिक अन्यायी कौन है जो ईश्वर पर झूठ बोलता है और सच्चाई के उसके पास आ जाने पर उसे झुठलाता है?
۞ فَمَنۡ أَظۡلَم مِّمَّن كَذَبَ عَلَى اَ۬للَّهِ وَكَذَّب بِّالصِّدۡقِ إِذ جَّآءَهُۥۚ
क्या जहन्नम में नकारने वालों के लिए कोई निवास नहीं है?
أَلَيۡسَ فِي جَهَنَّم مَّثۡوٗى لِّلۡكٰ۪فِرِينَ
और जो सच्चाई लेकर आया, और जिसने उसे सच्चा ठहराया, वही सावधानी बरतने वाले हैं।
وَاَلَّذِي جَآءَ بِالصِّدۡقِ وَصَدَّقَ بِهِۦ أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لۡمُتَّقُونَ
उनके अभिभावक के पास उनके लिए वह होगा जो उनकी मर्ज़ी हो;
لَهُم مَّا يَشَآءُونَ عِندَ رَبِّهِمۡۚ
यही भलाई करने वालों का प्रतिफल है, ताकि ईश्वर उनके लिए उसका सबसे बुरा ढक दे जो उन्होंने किया, और उन्हें उनके पुरस्कार का प्रतिफल दे उसके सबसे सुंदर के अनुसार जो वे करते थे।
ذَٰلِكَ جَزَآءُ اُ۬لۡمُحۡسِنِينَ لِيُكَفِّرَ اَ۬للَّهُ عَنۡهُمۡ أَسۡوَأَ اَ۬لَّذِي عَمِلُواْ وَيَجۡزِيَهُمۡ أَجۡرَهُم بِأَحۡسَنِ اِ۬لَّذِي كَانُواْ يَعۡمَلُونَ
क्या ईश्वर अपने आज्ञाकारी के लिए पर्याप्त नहीं है?
أَلَيۡسَ اَ۬للَّهُ بِكَافٍ عَبۡدَهُۥۖ
और वे तुम्हें उनसे डराना चाहते हैं जो उसके अतिरिक्त हैं;
وَيُخَوِّفُونَكَ بِالَّذِينَ مِن دُونِهِۦۚ
और जिसे ईश्वर भटका दे, उसके लिए कोई मार्ग दिखाने वाला नहीं रहता।
وَمَن يُضۡلِلِ اِ۬للَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنۡ هَادٖ
और जिसे ईश्वर मार्ग दिखाए, उसके लिए भटकाने वाला कोई नहीं रहता;
وَمَن يَهۡدِ اِ۬للَّهُ فَمَا لَهُۥ مِن مُّضِلٍّۗ
क्या ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रतिशोध वाला नहीं है?
أَلَيۡسَ اَ۬للَّهُ بِعَزِيزٖ ذِي اِ۪نتِقَامٖ
और यदि तुम उनसे पूछो कि आकाशों और धरती को किसने रचा, तो वे अवश्य कहेंगे: “ईश्वर”;
وَلَئِن سَأَلۡتَهُم مَّنۡ خَلَقَ اَ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضَ لَيَقُولُنَّ اَ۬للَّهُۚ
कहो: “क्या तुम देखते हो उसे जिसे तुम ईश्वर के अतिरिक्त पुकारते हो? यदि ईश्वर मुझे हानि पहुँचाना चाहता, तो क्या ये उसकी हानि को मुझसे दूर कर सकतीं? या यदि वह मेरे लिए दया चाहता, तो क्या ये उसे अपने पास रोक सकतीं?”
قُلۡ أَفَرَءَيۡتُم مَّا تَدۡعُونَ مِن دُونِ اِ۬للَّهِ إِنۡ أَرَادَنِيَ اَ۬للَّهُ بِضُرٍّ هَلۡ هُنَّ كَٰشِفَٰتٞ ضُرَّهُۥ أَوۡ أَرَادَنِي بِرَحۡمَةٍ هَلۡ هُنَّ مُمۡسِكَٰتٞ رَّحۡمَتَهُۥۚ
कहो: “ईश्वर मेरे लिए पर्याप्त है;
قُلۡ حَسۡبِيَ اَ۬للَّهُۖ
मुख़्तार बनाने वाले उसी को मुख़्तार बनाते हैं।”
عَلَيۡهِ يَتَوَكَّلُ اُ۬لۡمُتَوَكِّلُونَ
कहो: “हे मेरी क़ौम, अपने स्थान के अनुसार कर्म करो, क्योंकि मैं भी कर्म करता हूँ;
قُلۡ يَٰقَوۡمِ اِ۪عۡمَلُواْ عَلَىٰ مَكَانَتِكُمۡ إِنِّي عَٰمِلٞۖ
तुम शीघ्र जान लोगे कि किसके पास वह दंड आएगा जो उसे अपमानित करेगा, और किस पर वह दंड टूट पड़ेगा जो बना रहता है।”
فَسَوۡفَ تَعۡلَمُونَ مَن يَاتِيهِ عَذَابٞ يُخۡزِيهِ وَيَحِلُّ عَلَيۡهِ عَذَابٞ مُّقِيمٌ
हमने तुम पर लोगों के लिए ग्रंथ उतारा है, पूर्ण सत्य के साथ;
إِنَّا أَنزَلۡنَا عَلَيۡكَ اَ۬لۡكِتَٰبَ لِلنَّاسِ بِالۡحَقِّۖ
जो मार्गदर्शन पाता है, वह अपने ही लिए है;
فَمَنِ اِ۪هۡتَدَىٰ فَلِنَفۡسِهِۦۖ
और जो भटकता है वह केवल अपने ही विरुद्ध भटकता है;
وَمَن ضَلَّ فَإِنَّمَا يَضِلُّ عَلَيۡهَاۖ
और तुम उनके लिए मुख़्तार नहीं हो।
وَمَا أَنتَ عَلَيۡهِم بِوَكِيلٍ
ईश्वर स्वों को उनकी मृत्यु के समय निष्ठापूर्वक सँभालता है, और उन्हें भी जो अभी नहीं मरे, उनकी नींद में;
اِ۬للَّهُ يَتَوَفَّى اَ۬لۡأَنفُسَ حِينَ مَوۡتِهَا وَاَلَّتِي لَمۡ تَمُتۡ فِي مَنَامِهَاۖ
जिन पर उसने मृत्यु तय की उन्हें वह थामे रखता है, और दूसरों को एक नामित अवधि तक वापस भेज देता है;
فَيُمۡسِكُ اُ۬لَّتِي قَضَىٰ عَلَيۡهَا اَ۬لۡمَوۡتَ وَيُرۡسِلُ اُ۬لۡأُخۡر۪يٰ إِلَىٰ أَجَلٖ مُّسَمًّىۚ
इसमें अवश्य एक ऐसी क़ौम के लिए संकेत हैं जो सोच-विचार करती है।
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يَتَفَكَّرُونَ
या क्या उन्होंने ईश्वर के अतिरिक्त मध्यस्थ बना लिए हैं?
أَمِ اِ۪تَّخَذُواْ مِن دُونِ اِ۬للَّهِ شُفَعَآءَۚ
कहो: “भले ही वे किसी चीज़ के मालिक न हों और बुद्धि से काम न लें?”
قُلۡ أَوَلَوۡ كَانُواْ لَا يَمۡلِكُونَ شَيۡـٔٗا وَلَا يَعۡقِلُونَ
कहो: “मध्यस्थता पूरी की पूरी ईश्वर की है;
قُل لِّلَّهِ اِ۬لشَّفَٰعَة جَّمِيعٗاۖ
आकाशों और धरती का राजत्व उसी का है;
لَّهُۥ مُلۡكُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِۖ
फिर उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।”
ثُمَّ إِلَيۡهِ تُرۡجَعُونَ
और जब अकेले ईश्वर का स्मरण किया जाता है, तो जो अंतिम जीवन पर विश्वास नहीं करते उनके मर्म अरुचि से सिकुड़ जाते हैं;
۞ وَإِذَا ذُكِرَ اَ۬للَّهُ وَحۡدَهُ اُ۪شۡمَأَزَّتۡ قُلُوبُ اُ۬لَّذِينَ لَا يُومِنُونَ بِالۡأٓخِرَةِۖ
और जब उनका स्मरण किया जाता है जो उसके अतिरिक्त हैं, तो देखो, वे उल्लसित हो उठते हैं।
وَإِذَا ذُكِرَ اَ۬لَّذِينَ مِن دُونِهِۦ إِذَا هُمۡ يَسۡتَبۡشِرُونَ
कहो: “हे ईश्वर, आकाशों और धरती के उद्गम, उसे जानने वाले जो इंद्रियों से परे है और जो साक्ष्य में है, आप ही अपने आज्ञाकारियों के बीच उसका निर्णय करेंगे जिसमें वे मतभेद करते थे।”
قُلِ اِ۬للَّهُمَّ فَاطِرَ اَ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِ عَٰلِمَ اَ۬لۡغَيۡبِ وَاَلشَّهَٰدَةِ أَنتَ تَحۡكُم بَيۡنَ عِبَادِكَ فِي مَا كَانُواْ فِيهِ يَخۡتَلِفُونَ
और यदि अन्यायियों के पास वह सब होता जो धरती पर है, और उसके साथ उतना ही और, तो वे उसे पेशी के दिन बुरे दंड के बदले फिरौती में दे देते;
وَلَوۡ أَنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُواْ مَا فِي اِ۬لۡأَرۡضِ جَمِيعٗا وَمِثۡلَهُۥ مَعَهُۥ لَاَفۡتَدَوۡاْ بِهِۦ مِن سُوٓءِ اِ۬لۡعَذَابِ يَوۡمَ اَ۬لۡقِيَٰمَةِۚ
और ईश्वर की ओर से उनके सामने वह आ जाएगा जिसकी वे गिनती नहीं करते थे।
وَبَدَا لَهُم مِّنَ اَ۬للَّهِ مَا لَمۡ يَكُونُواْ يَحۡتَسِبُونَ
और उनके सामने आ जाएँगे उनकी कमाई के बुरे परिणाम,
وَبَدَا لَهُمۡ سَيِّـَٔاتُ مَا كَسَبُواْ
और जिसका वे मज़ाक़ उड़ाते थे वह उनके विरुद्ध चरितार्थ होगा।
وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُواْ بِهِۦ يَسۡتَهۡزِءُونَ
जब मनुष्य को हानि छूती है, तो वह हमें पुकारता है; फिर जब हम उसे अपनी ओर से कोई उपकार उपलब्ध कराते हैं, तो वह कहता है: “यह मुझे केवल ज्ञान के कारण दिया गया है।”
فَإِذَا مَسَّ اَ۬لۡإِنسَٰنَ ضُرّٞ دَعَانَا ثُمَّ إِذَا خَوَّلۡنَٰهُ نِعۡمَةٗ مِّنَّا قَالَ إِنَّمَا أُوتِيتُهُۥ عَلَىٰ عِلۡمِۢۚ
बल्कि यह एक परीक्षा है,
بَلۡ هِيَ فِتۡنَةٞ
परंतु उनमें से अधिकतर नहीं जानते।
وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ
उनसे पहले वालों ने भी यही कह दिया था, और जो वे कमाते थे वह उनके किसी काम न आया।
قَدۡ قَالَهَا اَ۬لَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ فَمَا أَغۡنَىٰ عَنۡهُم مَّا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ
उनकी कमाई के बुरे परिणाम उन पर आ पड़े;
فَأَصَابَهُمۡ سَيِّـَٔاتُ مَا كَسَبُواْۚ
और इनमें से जो अन्यायी हैं, उन पर उनकी कमाई के बुरे परिणाम आ पड़ेंगे, और वे उसे असमर्थ न कर सकेंगे।
وَاَلَّذِينَ ظَلَمُواْ مِنۡ هَٰؤُلَآءِ سَيُصِيبُهُمۡ سَيِّـَٔاتُ مَا كَسَبُواْ وَمَا هُم بِمُعۡجِزِينَ
क्या वे नहीं जानते कि ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसके लिए जीविका फैलाता है, और उसे मापता है?
أَوَ لَمۡ يَعۡلَمُواْ أَنَّ اَ۬للَّهَ يَبۡسُطُ اُ۬لرِّزۡقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقۡدِرُۚ
इसमें अवश्य एक ऐसी क़ौम के लिए संकेत हैं जो विश्वास करती है।
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يُومِنُونَ
कहो: “हे मेरे आज्ञाकारियो, जिन्होंने स्वयं को अत्यधिक दोष दिया है, ईश्वर की दया के विषय में हिम्मत मत हारो;
۞ قُلۡ يَٰعِبَادِي اِ۬لَّذِينَ أَسۡرَفُواْ عَلَىٰ أَنفُسِهِمۡ لَا تَقۡنِطُواْ مِن رَّحۡمَةِ اِ۬للَّهِۚ
क्योंकि ईश्वर सभी दोष क्षमा करता है;
إِنَّ اَ۬للَّهَ يَغۡفِرُ اُ۬لذُّنُوبَ جَمِيعًاۚ
क्योंकि वही अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।”
إِنَّه هُّوَ اَ۬لۡغَفُورُ اُ۬لرَّحِيمُ
और अपने अभिभावक का आसरा लो, और उसके प्रति खरे बनो, इससे पहले कि तुम पर दंड आए; तब तुम्हारी सहायता नहीं की जाएगी।
وَأَنِيبُواْ إِلَىٰ رَبِّكُمۡ وَأَسۡلِمُواْ لَهُۥ مِن قَبۡلِ أَن يَاتِيَكُمُ اُ۬لۡعَذَابُ ثُمَّ لَا تُنصَرُونَ
और जो तुम्हारे अभिभावक की ओर से तुम पर उतारा गया है, उसमें से सबसे सुंदर का अनुसरण करो, इससे पहले कि तुम पर अचानक दंड आ जाए, जबकि तुम्हें उसका आभास न हो — कहीं ऐसा न हो कि कोई स्व कहे: “कैसा संताप है उस पर जिसकी मैंने ईश्वर के प्रति उपेक्षा की, और इस पर कि मैं अवश्य उपहास करने वालों में से था!” या वह कहे: “यदि ईश्वर ने मुझे मार्ग दिखाया होता, तो मैं सावधानी बरतने वालों में से होता”; या वह दंड को देखते हुए कहे: “काश मेरे पास एक दूसरा दाँव होता, तो मैं भलाई करने वालों में से होता।”
وَاَتَّبِعُواْ أَحۡسَنَ مَا أُنزِلَ إِلَيۡكُم مِّن رَّبِّكُم مِّن قَبۡلِ أَن يَاتِيَكُمُ اُ۬لۡعَذَاب بَّغۡتَةٗ وَأَنتُمۡ لَا تَشۡعُرُونَ أَن تَقُولَ نَفۡسٞ يَٰحَسۡرَتَىٰ عَلَىٰ مَا فَرَّطتُ فِي جَنۢبِ اِ۬للَّهِ وَإِن كُنتُ لَمِنَ اَ۬لسَّٰخِرِينَ أَوۡ تَقُول لَّوۡ أَنَّ اَ۬للَّه هَّدَىٰنِي لَكُنتُ مِنَ اَ۬لۡمُتَّقِينَ أَوۡ تَقُولَ حِينَ تَر۪ي اَ۬لۡعَذَابَ لَوۡ أَنَّ لِي كَرَّةٗ فَأَكُونَ مِنَ اَ۬لۡمُحۡسِنِينَ
“क्यों नहीं! मेरे संकेत तुम्हारे पास आए, परंतु तुमने उन्हें झुठलाया, तुम घमंड से फूल गए, और तुम नकारने वालों में से रहे।”
بَلَىٰ قَد جَّآءَتۡكَ ءَايَٰتِي فَكَذَّبۡتَ بِهَا وَاَسۡتَكۡبَرۡتَ وَكُنتَ مِنَ اَ۬لۡكٰ۪فِرِينَ
और पेशी के दिन तुम उन्हें देखोगे जिन्होंने ईश्वर पर झूठ बोला, काले चेहरों के साथ।
وَيَوۡمَ اَ۬لۡقِيَٰمَة تَّر۪ي اَ۬لَّذِينَ كَذَبُواْ عَلَى اَ۬للَّهِ وُجُوهُهُم مُّسۡوَدَّةٌۚ
क्या जहन्नम में घमंडियों के लिए कोई निवास नहीं है?
أَلَيۡسَ فِي جَهَنَّم مَّثۡوٗى لِّلۡمُتَكَبِّرِينَ
और ईश्वर उन्हें उबारता है जिन्होंने सावधानी बरती, उनकी विजय के कारण; उन्हें कोई बुराई नहीं छुएगी, और न वे दुखी होंगे।
وَيُنَجِّي اِ۬للَّهُ اُ۬لَّذِينَ اَ۪تَّقَوۡاْ بِمَفَازَتِهِمۡ لَا يَمَسُّهُمُ اُ۬لسُّوٓءُ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُونَ
ईश्वर हर चीज़ का रचयिता है;
اَ۬للَّهُ خَٰلِق كُّلِّ شَيۡءٖۖ
और वह हर चीज़ पर मुख़्तार है।
وَهۡوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ وَكِيلٞ
आकाशों और धरती की ज़िम्मेदारियाँ उसी की हैं;
لَّهُۥ مَقَالِيدُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِۗ
और जो ईश्वर के संकेतों को नकारते हैं, वही घाटा उठाने वाले हैं।
وَاَلَّذِينَ كَفَرُواْ بِـَٔايَٰتِ اِ۬للَّهِ أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لۡخَٰسِرُونَ
कहो: “तो क्या तुम मुझे आदेश देते हो कि मैं ईश्वर के अतिरिक्त किसी और की आज्ञा का पालन करूँ, हे अज्ञानियो?”
قُلۡ أَفَغَيۡرَ اَ۬للَّهِ تَامُرُوٓنِّي أَعۡبُدُ أَيُّهَا اَ۬لۡجَٰهِلُونَ
निश्चय ही तुम पर, और तुमसे पहले वालों पर, यह प्रकट किया गया है: “यदि तुम साझी ठहराते, तो तुम्हारा कर्म अवश्य ढह जाता, और तुम अवश्य घाटा उठाने वालों में से होते।”
وَلَقَدۡ أُوحِيَ إِلَيۡكَ وَإِلَى اَ۬لَّذِينَ مِن قَبۡلِكَ لَئِنۡ أَشۡرَكۡتَ لَيَحۡبَطَنَّ عَمَلُكَ وَلَتَكُونَنَّ مِنَ اَ۬لۡخَٰسِرِينَ
बल्कि ईश्वर की आज्ञा का पालन करो, और कृतज्ञों की गिनती में रहो।
بَلِ اِ۬للَّهَ فَاَعۡبُدۡ وَكُن مِّنَ اَ۬لشَّٰكِرِينَ
उन्होंने ईश्वर को उसकी सही माप से नहीं मापा; पूरी धरती पेशी के दिन उसकी मुट्ठी में होगी, और आकाश उसके दाएँ हाथ में तह किए जाएँगे।
۞ وَمَا قَدَرُواْ اُ۬للَّهَ حَقَّ قَدۡرِهِۦ وَاَلۡأَرۡضُ جَمِيعٗا قَبۡضَتُهُۥ يَوۡمَ اَ۬لۡقِيَٰمَةِ وَاَلسَّمَٰوَٰتُ مَطۡوِيَّٰتُۢ بِيَمِينِهِۦۚ
उसकी महिमा हो, और वह उससे बहुत ऊपर है जिसे वे उसका साझी ठहराते हैं।
سُبۡحَٰنَهُۥ وَتَعَٰلَىٰ عَمَّا يُشۡرِكُونَ
और नरसिंगे में फूँका जाएगा, और जो भी आकाशों में और धरती पर है वज्राहत हो जाएगा, सिवा उसके जिस पर ईश्वर की मर्ज़ी हो;
وَنُفِخَ فِي اِ۬لصُّورِ فَصَعِقَ مَن فِي اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَمَن فِي اِ۬لۡأَرۡضِ إِلَّا مَن شَآءَ اَ۬للَّهُۖ
फिर उसमें दूसरी बार फूँका जाएगा, और देखो, वे खड़े हैं, नज़र डालते हुए।
ثُمَّ نُفِخَ فِيهِ أُخۡر۪يٰ فَإِذَا هُمۡ قِيَامٞ يَنظُرُونَ
और धरती अपने अभिभावक के प्रकाश से जगमगा उठेगी; बही रखी जाएगी; सूचनादाता और साक्षी लाए जाएँगे; उनके बीच पूर्ण सत्य के साथ फ़ैसला किया जाएगा, और उन पर अन्याय नहीं किया जाएगा।
وَأَشۡرَقَتِ اِ۬لۡأَرۡضُ بِنُور رَّبِّهَا وَوُضِعَ اَ۬لۡكِتَٰبُ وَجِاْيٓءَ بِالنَّبِيِّـۧنَ وَاَلشُّهَدَآءِ وَقُضِيَ بَيۡنَهُم بِالۡحَقِّ وَهُمۡ لَا يُظۡلَمُونَ
और हर स्व को निष्ठापूर्वक वह दिया जाएगा जो उसने किया, और वह जो वे करते हैं उसे सबसे अच्छी तरह जानता है।
وَوُفِّيَتۡ كُلُّ نَفۡسٖ مَّا عَمِلَتۡ وَهۡوَ أَعۡلَم بِمَا يَفۡعَلُونَ
और नकारने वाले जहन्नम की ओर ले जाए जाएँगे, समूह-समूह में,
وَسِيقَ اَ۬لَّذِينَ كَفَرُواْ إِلَىٰ جَهَنَّمَ زُمَرًاۖ
यहाँ तक कि जब वे वहाँ पहुँच जाएँगे, तो उसके द्वार खुल जाएँगे, और उसके प्रभारी उनसे कहेंगे: “क्या तुम्हीं में से संदेशवाहक तुम्हारे पास नहीं आए, जो तुम्हें तुम्हारे अभिभावक के संकेत सुनाते थे और तुम्हें इस दिन से मिलने की चेतावनी देते थे?”
حَتَّىٰ إِذَا جَآءُوهَا فُتِّحَتۡ أَبۡوَٰبُهَا وَقَال لَّهُمۡ خَزَنَتُهَا أَلَمۡ يَاتِكُمۡ رُسُلٞ مِّنكُمۡ يَتۡلُونَ عَلَيۡكُمۡ ءَايَٰتِ رَبِّكُمۡ وَيُنذِرُونَكُمۡ لِقَآءَ يَوۡمِكُمۡ هَٰذَاۚ
वे कहेंगे: “क्यों नहीं!” परंतु दंड का बोल नकारने वालों पर सिद्ध हो चुका होगा।
قَالُواْ بَلَىٰ وَلَٰكِنۡ حَقَّتۡ كَلِمَةُ اُ۬لۡعَذَابِ عَلَى اَ۬لۡكٰ۪فِرِينَ
कहा जाएगा: “जहन्नम के द्वारों से प्रवेश करो, वहाँ सदा रहने के लिए।”
قِيلَ اَ۟دۡخُلُواْ أَبۡوَٰبَ جَهَنَّمَ خَٰلِدِينَ فِيهَاۖ
घमंडियों का निवास कितना निकृष्ट है!
فَبِيسَ مَثۡوَى اَ۬لۡمُتَكَبِّرِينَ
और जो अपने अभिभावक के प्रति सावधान रहे, वे उद्यान की ओर ले जाए जाएँगे, समूह-समूह में,
وَسِيقَ اَ۬لَّذِينَ اَ۪تَّقَوۡاْ رَبَّهُمۡ إِلَى اَ۬لۡجَنَّة زُّمَرًاۖ
यहाँ तक कि जब वे वहाँ पहुँच जाएँगे, और उसके द्वार खुले होंगे, तो उसके प्रभारी उनसे कहेंगे: “तुम पर शांति हो, तुम भले रहे — इसमें प्रवेश करो, वहाँ सदा रहने के लिए।”
حَتَّىٰ إِذَا جَآءُوهَا وَفُتِّحَتۡ أَبۡوَٰبُهَا وَقَال لَّهُمۡ خَزَنَتُهَا سَلَٰمٌ عَلَيۡكُمۡ طِبۡتُمۡ فَاَدۡخُلُوهَا خَٰلِدِينَ
और वे कहेंगे: “प्रशंसा ईश्वर के लिए है, जिसने हमसे अपना वादा निभाया, और हमें धरती का वारिस बनाया, हमें उद्यान में जहाँ हमारी मर्ज़ी हो वहाँ स्थापित करते हुए; कर्म करने वालों का पुरस्कार कितना उत्तम है!”
وَقَالُواْ اُ۬لۡحَمۡدُ لِلَّهِ اِ۬لَّذِي صَدَقَنَا وَعۡدَهُۥ وَأَوۡرَثَنَا اَ۬لۡأَرۡضَ نَتَبَوَّأُ مِنَ اَ۬لۡجَنَّةِ حَيۡثُ نَشَآءُۖ فَنِعۡمَ أَجۡرُ اُ۬لۡعَٰمِلِينَ
और तुम अभिकर्ताओं को भवन के आसपास देखोगे, अपने अभिभावक की प्रशंसा करते हुए महिमा गाते हुए;
وَتَر۪ي اَ۬لۡمَلَٰٓئِكَةَ حَآفِّينَ مِنۡ حَوۡلِ اِ۬لۡعَرۡشِ يُسَبِّحُونَ بِحَمۡدِ رَبِّهِمۡۚ
और उनके बीच पूर्ण सत्य के साथ फ़ैसला किया जाएगा,
وَقُضِيَ بَيۡنَهُم بِالۡحَقِّۚ
और कहा जाएगा: “प्रशंसा ईश्वर के लिए है, जो सभी प्राणियों का अभिभावक है।”
وَقِيلَ اَ۬لۡحَمۡدُ لِلَّهِ رَبِّ اِ۬لۡعَٰلَمِينَ