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Al-Isra

To What Is Most Upright

अध्याय 17 · 111 पद

17:1

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। उसकी महिमा हो जिसने अपने आज्ञाकारी को रात में माथा टेकने के अलंघनीय स्थान से सबसे दूर के माथा टेकने के स्थान तक यात्रा कराई, जिसके आसपास को हमने आशीष दी, ताकि हम उसे अपने कुछ संकेत दिखाएँ;

بِسْمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحْمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ سُبْحَٰنَ اَ۬لذِےٓ أَسْر۪ىٰ بِعَبْدِهِۦ لَيْلاٗ مِّنَ اَ۬لْمَسْجِدِ اِ۬لْحَرَامِ إِلَى اَ۬لْمَسْجِدِ اِ۬لَاقْصَا اَ۬لذِے بَٰرَكْنَا حَوْلَهُۥ لِنُرِيَهُۥ مِنَ اٰيَٰتِنَآۖ

क्योंकि वही है सुनने वाला, दृष्टिवान।

إِنَّهُۥ هُوَ اَ۬لسَّمِيعُ اُ۬لْبَصِيرُۖ

17:2–3

और हमने मूसा को ग्रंथ दिया, और उसे इसराईल की संतान के लिए मार्गदर्शन बनाया: “मेरे अतिरिक्त किसी को मुख़्तार मत बनाओ” — उनकी संतति जिन्हें हमने नूह के साथ सवार किया;

وَءَاتَيْنَا مُوسَى اَ۬لْكِتَٰبَ وَجَعَلْنَٰهُ هُدىٗ لِّبَنِےٓ إِسْرَآءِيلَ أَلَّا تَتَّخِذُواْ مِن دُونِے وَكِيلاٗ ذُرِّيَّةَ مَنْ حَمَلْنَا مَعَ نُوحٍۖ

17:2–3

क्योंकि वह कृतज्ञ आज्ञाकारी था।

اِنَّهُۥ كَانَ عَبْداٗ شَكُوراٗۖ

17:4

और हमने इसराईल की संतान के लिए ग्रंथ में तय कर दिया: “तुम धरती पर दो बार अवश्य बिगाड़ फैलाओगे, और अवश्य बड़ी ऊँचाई के साथ ऊपर उठोगे।”

وَقَضَيْنَآ إِلَىٰ بَنِےٓ إِسْرَآءِيلَ فِے اِ۬لْكِتَٰبِ لَتُفْسِدُنَّ فِے اِ۬لَارْضِ مَرَّتَيْنِ وَلَتَعْلُنَّ عُلُوّاٗ كَبِيراٗۖ

17:5

जब उन दोनों में से पहली बार का वादा आया, तो हमने तुम पर अपने कुछ आज्ञाकारी उठाए, जो कठोर प्रचंडता वाले थे, जो ठिकानों में आर-पार घुस गए —

فَإِذَا جَآءَ وَعْدُ أُول۪يٰهُمَا بَعَثْنَا عَلَيْكُمْ عِبَاداٗ لَّنَآ أُوْلِے بَأْسٖ شَدِيدٖ فَجَاسُواْ خِلَٰلَ اَ۬لدِّي۪ارِۖ

और यह एक वादा था, पूरा किया हुआ।

وَكَانَ وَعْداٗ مَّفْعُولاٗۖ

फिर हमने उन पर तुम्हारे लिए पलटवार वापस दिला दिया, और संपत्ति और पुत्रों से तुम्हें बल दिया, और तुम्हें संख्या-बल में सबसे अधिक बना दिया।

ثُمَّ رَدَدْنَا لَكُمُ اُ۬لْكَرَّةَ عَلَيْهِمْ وَأَمْدَدْنَٰكُم بِأَمْوَٰلٖ وَبَنِينَ وَجَعَلْنَٰكُمُۥٓ أَكْثَرَ نَفِيراًۖ

17:7

यदि तुम भलाई करो, तो अपने ही लिए भलाई करते हो,

اِنَ اَحْسَنتُمُۥٓ أَحْسَنتُمْ لِأَنفُسِكُمْۖ

17:7

और यदि बुरा आचरण करो, तो अपने ही विरुद्ध।

وَإِنَ اَسَأْتُمْ فَلَهَاۖ

17:7

फिर जब दूसरी बार का वादा आया, तो वह इसलिए कि वे तुम्हारे चेहरों पर अप्रियता अंकित कर दें, माथा टेकने के स्थान में वैसे ही प्रवेश करें जैसे वे पहली बार उसमें प्रविष्ट हुए थे, और जिसे उन्होंने हथिया लिया था उसे पूरी तरह उजाड़ दें।

فَإِذَا جَآءَ وَعْدُ اُ۬لَاخِرَةِ لِيَسُـُٔواْ وُجُوهَكُمْ وَلِيَدْخُلُواْ اُ۬لْمَسْجِدَ كَمَا دَخَلُوهُ أَوَّلَ مَرَّةٖ وَلِيُتَبِّرُواْ مَا عَلَوْاْ تَتْبِيراًۖ

संभव है तुम्हारा अभिभावक तुम पर दया करे;

عَس۪ىٰ رَبُّكُمُۥٓ أَنْ يَّرْحَمَكُمْۖ

17:8

परंतु यदि तुम दोहराओगे, तो हम दोहराएँगे।

وَإِنْ عُدتُّمْ عُدْنَاۖ

17:8

और हमने जहन्नम को नकारने वालों के लिए एक घेरा बनाया है।

وَجَعَلْنَا جَهَنَّمَ لِلْكٰ۪فِرِينَ حَصِيراًۖ

17:9–10

यह पाठ निश्चय ही उस ओर मार्ग दिखाता है जो सबसे ऋजु है, और विश्वास करने वालों को, जो भले कर्म करते हैं, शुभ समाचार देता है कि उनके लिए बड़ा पुरस्कार होगा, और यह कि जो अंतिम जीवन पर विश्वास नहीं करते — हमने उनके लिए पीड़ादायक दंड जुटा रखा है।

اِنَّ هَٰذَا اَ۬لْقُرْءَانَ يَهْدِے لِلتِے هِيَ أَقْوَمُ وَيُبَشِّرُ اُ۬لْمُومِنِينَ اَ۬لذِينَ يَعْمَلُونَ اَ۬لصَّٰلِحَٰتِ أَنَّ لَهُمُۥٓ أَجْراٗ كَبِيراٗ وَأَنَّ اَ۬لذِينَ لَا يُومِنُونَ بِالَاخِرَةِ أَعْتَدْنَا لَهُمْ عَذَاباً اَلِيماٗۖ

17:11

और मनुष्य बुराई को वैसे पुकारता है जैसे वह अच्छाई को पुकारता है,

۞ وَيَدْعُ اُ۬لِانسَٰنُ بِالشَّرِّ دُعَآءَهُۥ بِالْخَيْرِۖ

17:11

क्योंकि मनुष्य उतावला है।

وَكَانَ اَ۬لِانسَٰنُ عَجُولاٗۖ

और हमने रात और दिन को दो संकेत बनाया; हमने रात के संकेत को मिटा दिया और दिन के संकेत को देखने योग्य बना दिया, ताकि तुम अपने अभिभावक के अनुग्रह में से खोजो और वर्षों की संख्या और हिसाब जानो।

وَجَعَلْنَا اَ۬ليْلَ وَالنَّهَارَ ءَايَتَيْنِ فَمَحَوْنَآ ءَايَةَ اَ۬ليْلِ وَجَعَلْنَآ ءَايَةَ اَ۬لنَّه۪ارِ مُبْصِرَةٗ لِّتَبْتَغُواْ فَضْلاٗ مِّن رَّبِّكُمْ وَلِتَعْلَمُواْ عَدَدَ اَ۬لسِّنِينَ وَالْحِسَابَۖ

और हर चीज़ को हमने विस्तारपूर्वक विस्तृत किया।

وَكُلَّ شَےْءٖ فَصَّلْنَٰهُ تَفْصِيلاٗۖ

17:13

और हर मनुष्य की गर्दन में हमने उसका अपना शकुन बाँध दिया है; और हम पेशी के दिन उसके लिए एक बही निकालेंगे जिसे वह फैली हुई पाएगा:

وَكُلَّ إِنسَٰنٍ اَلْزَمْنَٰهُ طَٰٓئِرَهُۥ فِے عُنُقِهِۦ وَنُخْرِجُ لَهُۥ يَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِ كِتَٰباٗ يَلْق۪يٰهُ مَنشُوراًۖ

17:14

“अपनी बही पढ़ो: आज तुम्हारे लिए स्वयं अपना हिसाब रखने वाला होना ही पर्याप्त है।”

اِ۪قْرَأْ كِتَٰبَكَ كَف۪ىٰ بِنَفْسِكَ اَ۬لْيَوْمَ عَلَيْكَ حَسِيباٗۖ

17:15

जो कोई मार्गदर्शन पाता है, वह केवल अपने ही लिए मार्गदर्शन पाता है,

مَّنِ اِ۪هْتَد۪ىٰ فَإِنَّمَا يَهْتَدِے لِنَفْسِهِۦۖ

17:15

और जो कोई भटकता है, वह केवल अपने ही विरुद्ध भटकता है।

وَمَن ضَلَّ فَإِنَّمَا يَضِلُّ عَلَيْهَاۖ

17:15

और कोई बोझ वहन करने वाला किसी दूसरे का बोझ वहन नहीं करेगा।

وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٞ وِزْرَ أُخْر۪ىٰۖ

17:15

और हम तब तक कभी दंड नहीं देते जब तक किसी संदेशवाहक को न उठा लें।

وَمَا كُنَّا مُعَذِّبِينَ حَتَّىٰ نَبْعَثَ رَسُولاٗۖ

17:16

और जब हम किसी बस्ती को नष्ट करना चाहते हैं, तो हम उसके संपन्न जनों को आदेश देते हैं, पर वे उसमें अतिक्रमण करते हैं; तब कथन उस पर सिद्ध हो जाता है, और हम उसे पूर्ण ध्वंस से ध्वस्त कर देते हैं।

وَإِذَآ أَرَدْنَآ أَن نُّهْلِكَ قَرْيَةً اَمَرْنَا مُتْرَفِيهَا فَفَسَقُواْ فِيهَا فَحَقَّ عَلَيْهَا اَ۬لْقَوْلُ فَدَمَّرْنَٰهَا تَدْمِيراٗۖ

17:17

हमने नूह के बाद कितनी ही पीढ़ियाँ नष्ट कर दीं!

وَكَمَ اَهْلَكْنَا مِنَ اَ۬لْقُرُونِ مِنۢ بَعْدِ نُوحٖۖ

और तुम्हारा अभिभावक अपने आज्ञाकारियों के दोषों की पूरी ख़बर रखने वाले और दृष्टिवान के रूप में पर्याप्त है।

وَكَف۪ىٰ بِرَبِّكَ بِذُنُوبِ عِبَادِهِۦ خَبِيراَۢ بَصِيراٗۖ

17:18

जो कोई तात्कालिक जीवन चाहता है, हम उसमें जो हमारी मर्ज़ी हो, उसे शीघ्र दे देते हैं, उसे जिसे हम चाहें; फिर हम उसके लिए जहन्नम ठहरा देते हैं, जिसमें वह निंदित, ठुकराया हुआ झुलसेगा।

مَّن كَانَ يُرِيدُ اُ۬لْعَاجِلَةَ عَجَّلْنَا لَهُۥ فِيهَا مَا نَشَآءُ لِمَن نُّرِيدُ ثُمَّ جَعَلْنَا لَهُۥ جَهَنَّمَ يَصْلَيٰهَا مَذْمُوماٗ مَّدْحُوراٗۖ

17:19

और जो कोई अंतिम जीवन चाहता है और उसके लिए उसका उचित प्रयास करता है, और वह विश्वास करने वाला है — वही हैं जिनके प्रयास को मान्य ठहराया जाएगा।

وَمَنَ اَرَادَ اَ۬لَاخِرَةَ وَسَع۪ىٰ لَهَا سَعْيَهَا وَهُوَ مُومِنٞ فَأُوْلَٰٓئِكَ كَانَ سَعْيُهُم مَّشْكُوراٗۖ

17:20

हम सबको उपलब्ध कराते हैं —

كُلّاٗ نُّمِدُّۖ

17:20

इन्हें भी और उन्हें भी — तुम्हारे अभिभावक की देन में से,

هَٰٓؤُلَآءِ وَهَٰٓؤُلَآءِ مِنْ عَطَآءِ رَبِّكَۖ

17:20

और तुम्हारे अभिभावक की देन कभी रोकी नहीं गई।

وَمَا كَانَ عَطَآءُ رَبِّكَ مَحْظُوراًۖ

नज़र डालो कि हमने उनमें से कुछ को दूसरों पर कैसे वरीयता दी;

اُ۟نظُرْ كَيْفَ فَضَّلْنَا بَعْضَهُمْ عَلَىٰ بَعْضٖۖ

और अंतिम जीवन निश्चय ही श्रेणियों में और भी बड़ा है, और अनुग्रह में और भी बड़ा।

وَلَلَاخِرَةُ أَكْبَرُ دَرَجَٰتٖ وَأَكْبَرُ تَفْضِيلاٗۖ

ईश्वर के साथ कोई और देवता मत रखो, नहीं तो तुम निंदित, त्यागे हुए रह जाओगे।

لَّا تَجْعَلْ مَعَ اَ۬للَّهِ إِلَٰهاً اٰخَرَ فَتَقْعُدَ مَذْمُوماٗ مَّخْذُولاٗۖ

17:23

और तुम्हारे अभिभावक ने तय कर दिया है कि तुम केवल उसी की आज्ञा का पालन करो,

۞ وَقَض۪ىٰ رَبُّكَ أَلَّا تَعْبُدُوٓاْ إِلَّآ إِيَّاهُۖ

17:23

और माता-पिता के प्रति भलाई।

وَبِالْوَٰلِدَيْنِ إِحْسَٰناًۖ

17:23

यदि उनमें से एक, या दोनों, तुम्हारे पास वृद्धावस्था को पहुँचें, तो उनसे “उफ़!” मत कहो और उन्हें मत झिड़को,

اِمَّا يَبْلُغَنَّ عِندَكَ اَ۬لْكِبَرَ أَحَدُهُمَآ أَوْ كِلَاهُمَا فَلَا تَقُل لَّهُمَآ أُفّٖ وَلَا تَنْهَرْهُمَاۖ

17:23

बल्कि उनसे सम्मानित कथन कहो।

وَقُل لَّهُمَا قَوْلاٗ كَرِيماٗۖ

17:24

और उनके लिए दया से विनम्रता का पंख झुका दो,

وَاخْفِضْ لَهُمَا جَنَاحَ اَ۬لذُّلِّ مِنَ اَ۬لرَّحْمَةِۖ

17:24

और कहो: “मेरे अभिभावक, उन पर दया कीजिए जैसे उन्होंने मुझे छोटेपन में पाला।”

وَقُل رَّبِّ اِ۪رْحَمْهُمَا كَمَا رَبَّيَٰنِے صَغِيراٗۖ

तुम्हारा अभिभावक उसे सबसे अच्छा जानता है जो तुम्हारे स्व में है।

رَّبُّكُمُۥٓ أَعْلَمُ بِمَا فِے نُفُوسِكُمُۥٓۖ

यदि तुम भले हो, तो वह उनके प्रति जो निरंतर उसकी ओर पुनरागमन करते हैं निश्चय ही अत्यंत क्षमाशील है।

إِن تَكُونُواْ صَٰلِحِينَ فَإِنَّهُۥ كَانَ لِلَاوَّٰبِينَ غَفُوراٗۖ

17:26

और निकट संबंधी को उसका प्राप्य दो, तथा दरिद्र और राह के मुसाफ़िर को,

وَءَاتِ ذَا اَ۬لْقُرْب۪ىٰ حَقَّهُۥ وَالْمِسْكِينَ وَابْنَ اَ۬لسَّبِيلِۖ

17:26

और अंधाधुंध मत उड़ाओ,

وَلَا تُبَذِّرْ تَبْذِيراًۖ

17:27

क्योंकि उड़ाने वाले बहकाने वालों के भाई हैं,

اِنَّ اَ۬لْمُبَذِّرِينَ كَانُوٓاْ إِخْوَٰنَ اَ۬لشَّيَٰطِينِۖ

17:27

और बहकाने वाला अपने अभिभावक का बड़ा नकारने वाला है।

وَكَانَ اَ۬لشَّيْطَٰنُ لِرَبِّهِۦ كَفُوراٗۖ

और यदि तुम्हें उनसे कतराना पड़े, अपने अभिभावक की उस दया की खोज में जिसकी तुम आशा रखते हो, तो उनसे सहज कथन कहो।

وَإِمَّا تُعْرِضَنَّ عَنْهُمُ اُ۪بْتِغَآءَ رَحْمَةٖ مِّن رَّبِّكَ تَرْجُوهَا فَقُل لَّهُمْ قَوْلاٗ مَّيْسُوراٗۖ

17:29

और अपना हाथ अपनी गर्दन से बँधा हुआ मत बनाओ, और न उसे पूरी तरह फैला दो, नहीं तो तुम दोषारोपित, संताप से रिक्त बैठे रह जाओगे;

وَلَا تَجْعَلْ يَدَكَ مَغْلُولَةً اِلَىٰ عُنُقِكَ وَلَا تَبْسُطْهَا كُلَّ اَ۬لْبَسْطِ فَتَقْعُدَ مَلُوماٗ مَّحْسُوراًۖ

17:30

क्योंकि तुम्हारा अभिभावक जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसके लिए जीविका फैलाता है, और नपी-तुली भी कर देता है;

اِنَّ رَبَّكَ يَبْسُطُ اُ۬لرِّزْقَ لِمَنْ يَّشَآءُ وَيَقْدِرُۖ

क्योंकि वह अपने आज्ञाकारियों के प्रति पूरी ख़बर रखने वाला और दृष्टिवान है।

إِنَّهُۥ كَانَ بِعِبَادِهِۦ خَبِيراَۢ بَصِيراٗۖ

17:31

और अभाव का भय मानकर अपने बच्चों की हत्या न करो:

وَلَا تَقْتُلُوٓاْ أَوْلَٰدَكُمْ خَشْيَةَ إِمْلَٰقٖۖ

17:31

उन्हें और तुम्हें जीविका हम ही देते हैं,

نَّحْنُ نَرْزُقُهُمْ وَإِيَّاكُمُۥٓۖ

17:31

क्योंकि उनकी हत्या करना बड़ी भूल है।

إِنَّ قَتْلَهُمْ كَانَ خِطْـٔاٗ كَبِيراٗۖ

17:32

और व्यभिचार के निकट मत जाओ, क्योंकि वह एक निर्लज्जता है, और कितनी बुरी राह है!

وَلَا تَقْرَبُواْ اُ۬لزِّن۪ىٰٓ إِنَّهُۥ كَانَ فَٰحِشَةٗ وَسَآءَ سَبِيلاٗۖ

17:33

और उस स्व की हत्या न करो जिसे ईश्वर ने अलंघनीय किया है, सिवा उचित अधिकार के।

وَلَا تَقْتُلُواْ اُ۬لنَّفْسَ اَ۬لتِے حَرَّمَ اَ۬للَّهُ إِلَّا بِالْحَقِّۖ

17:33

और जिसकी अन्यायपूर्वक हत्या की जाए, हमने उसके विधिक उत्तरदायी के लिए एक अधिकार ठहराया है; परंतु वह हत्या में अति न करे,

وَمَن قُتِلَ مَظْلُوماٗ فَقَدْ جَعَلْنَا لِوَلِيِّهِۦ سُلْطَٰناٗ فَلَا يُسْرِف فِّے اِ۬لْقَتْلِۖ

क्योंकि उसकी सहायता की जाएगी।

إِنَّهُۥ كَانَ مَنصُوراٗۖ

और अनाथ की संपत्ति के निकट मत जाओ, सिवा सबसे सुंदर ढंग के, जब तक कि वह अपनी पूर्ण परिपक्वता को न पहुँच जाए,

وَلَا تَقْرَبُواْ مَالَ اَ۬لْيَتِيمِ إِلَّا بِالتِے هِيَ أَحْسَنُ حَتَّىٰ يَبْلُغَ أَشُدَّهُۥۖ

और संधि को निभाओ,

وَأَوْفُواْ بِالْعَهْدِۖ

क्योंकि संधि से पूछा जाएगा।

إِنَّ اَ۬لْعَهْدَ كَانَ مَسْـُٔولاٗۖ

17:35

और जब मापो तो माप पूरा-पूरा दो, और ऋजु तराज़ू से तौलो:

وَأَوْفُواْ اُ۬لْكَيْلَ إِذَا كِلْتُمْ وَزِنُواْ بِالْقُسْطَاسِ اِ۬لْمُسْتَقِيمِۖ

यही बेहतर है, और व्याख्या में अधिक सुंदर है।

ذَٰلِكَ خَيْرٞ وَأَحْسَنُ تَاوِيلاٗۖ

17:36

और उसके पीछे मत पड़ो जिसका तुम्हें कोई ज्ञान नहीं,

۞ وَلَا تَقْفُ مَا لَيْسَ لَكَ بِهِۦ عِلْمٌۖ

17:36

क्योंकि श्रवण, दृष्टि और चेतना — इनमें से हर एक से पूछा जाएगा।

اِنَّ اَ۬لسَّمْعَ وَالْبَصَرَ وَالْفُؤَادَ كُلُّ أُوْلَٰٓئِكَ كَانَ عَنْهُ مَسْـُٔولاٗۖ

17:37

और धरती पर इतराते हुए मत चलो,

وَلَا تَمْشِ فِے اِ۬لَارْضِ مَرَحاًۖ

17:37

क्योंकि तुम धरती को कभी छेद नहीं सकोगे, और ऊँचाई में पहाड़ों तक कभी नहीं पहुँचोगे।

اِنَّكَ لَن تَخْرِقَ اَ۬لَارْضَ وَلَن تَبْلُغَ اَ۬لْجِبَالَ طُولاٗۖ

17:38

यह सब, इसकी बुराई तुम्हारे अभिभावक के पास घृणित है।

كُلُّ ذَٰلِكَ كَانَ سَيِّئَةً عِندَ رَبِّكَ مَكْرُوهاٗۖ

17:39

यह उस प्रज्ञा में से है जो तुम्हारे अभिभावक ने तुम पर प्रकट की।

ذَٰلِكَ مِمَّآ أَوْح۪ىٰٓ إِلَيْكَ رَبُّكَ مِنَ اَ۬لْحِكْمَةِۖ

17:39

और ईश्वर के साथ कोई और देवता मत रखो, नहीं तो तुम जहन्नम में फेंक दिए जाओगे, दोषारोपित, ठुकराए हुए।

وَلَا تَجْعَلْ مَعَ اَ۬للَّهِ إِلَٰهاً اٰخَرَ فَتُلْق۪ىٰ فِے جَهَنَّمَ مَلُوماٗ مَّدْحُوراًۖ

17:40

क्या तुम्हारे अभिभावक ने तुम्हारे लिए पुत्र सुरक्षित रखे, और अभिकर्ताओं में से पुत्रियाँ बना लीं?

اَفَأَصْف۪يٰكُمْ رَبُّكُم بِالْبَنِينَ وَاتَّخَذَ مِنَ اَ۬لْمَلَٰٓئِكَةِ إِنَٰثاًۖ

तुम अवश्य एक विशाल कथन कहते हो।

اِنَّكُمْ لَتَقُولُونَ قَوْلاً عَظِيماٗۖ

हमने निश्चय ही इस पाठ में उदाहरणों को विविध किया, ताकि वे स्मरण करें; परंतु यह उनके विकर्षण को ही बढ़ाता है।

وَلَقَدْ صَرَّفْنَا فِے هَٰذَا اَ۬لْقُرْءَانِ لِيَذَّكَّرُواْ وَمَا يَزِيدُهُمُۥٓ إِلَّا نُفُوراٗۖ

17:42

कहो: “यदि उसके साथ देवता होते, जैसा वे कहते हैं, तो वे भवन वाले की ओर कोई राह खोजते।”

قُل لَّوْ كَانَ مَعَهُۥٓ ءَالِهَةٞ كَمَا تَقُولُونَ إِذاٗ لَّابْتَغَوِاْ اِلَىٰ ذِے اِ۬لْعَرْشِ سَبِيلاٗۖ

17:43

उसकी महिमा हो, और वह उससे बहुत ऊपर है जो वे कहते हैं, बड़ी ऊँचाई पर।

سُبْحَٰنَهُۥ وَتَعَٰل۪ىٰ عَمَّا يَقُولُونَ عُلُوّاٗ كَبِيراٗۖ

17:44

सातों आकाश उसकी महिमा गाते हैं, और धरती भी, और वे भी जो उनमें हैं;

يُسَبِّحُ لَهُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتُ اُ۬لسَّبْعُ وَالَارْضُ وَمَن فِيهِنَّۖ

17:44

ऐसी कोई चीज़ नहीं जो उसकी प्रशंसा करते हुए उसकी महिमा न गाती हो,

وَإِن مِّن شَےْءٍ اِلَّا يُسَبِّحُ بِحَمْدِهِۦۖ

17:44

परंतु तुम उनके महिमा-गान को नहीं समझते,

وَلَٰكِن لَّا تَفْقَهُونَ تَسْبِيحَهُمُۥٓۖ

17:44

क्योंकि वह सहनशील, अत्यंत क्षमाशील है।

إِنَّهُۥ كَانَ حَلِيماً غَفُوراٗۖ

17:45

और जब तुम पाठ पढ़ते हो, तो हम तुम्हारे और उनके बीच जो अंतिम जीवन पर विश्वास नहीं करते, एक प्रच्छन्न पर्दा रख देते हैं,

وَإِذَا قَرَأْتَ اَ۬لْقُرْءَانَ جَعَلْنَا بَيْنَكَ وَبَيْنَ اَ۬لذِينَ لَا يُومِنُونَ بِالَاخِرَةِ حِجَاباٗ مَّسْتُوراٗۖ

17:46

और उनके मर्मों पर आवरण रख देते हैं, ताकि वे उसे न समझें, और उनके कानों में बहरापन।

وَجَعَلْنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمُۥٓ أَكِنَّةً اَنْ يَّفْقَهُوهُ وَفِےٓ ءَاذَانِهِمْ وَقْراٗۖ

17:46

और जब तुम पाठ में अपने अभिभावक का उल्लेख करते हो, केवल उसी का, तो वे विकर्षण के साथ पीठ फेर लेते हैं।

وَإِذَا ذَكَرْتَ رَبَّكَ فِے اِ۬لْقُرْءَانِ وَحْدَهُۥ وَلَّوْاْ عَلَىٰٓ أَدْبٰ۪رِهِمْ نُفُوراٗۖ

17:47

हम सबसे अच्छा जानते हैं कि वे क्या सुनते हैं, जब वे तुम्हें कान लगाकर सुनते हैं, और जब वे गुप्त मंत्रणा में होते हैं, जब अन्यायी कहते हैं: “तुम तो केवल भ्रम के शिकार एक पुरुष का अनुसरण कर रहे हो।”

نَّحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَسْتَمِعُونَ بِهِۦٓ إِذْ يَسْتَمِعُونَ إِلَيْكَ وَإِذْ هُمْ نَجْو۪ىٰٓ إِذْ يَقُولُ اُ۬لظَّٰلِمُونَ إِن تَتَّبِعُونَ إِلَّا رَجُلاٗ مَّسْحُوراًۖ

17:48

नज़र डालो कि उन्होंने तुम्हारे विषय में कैसे उदाहरण कई गुना किए, और इस तरह वे भटक गए:

اُ۟نظُرْ كَيْفَ ضَرَبُواْ لَكَ اَ۬لَامْثَالَ فَضَلُّواْۖ

इसलिए वे कोई राह नहीं पा सकते।

فَلَا يَسْتَطِيعُونَ سَبِيلاٗۖ

17:49

और उन्होंने कहा: “जब हम हड्डियाँ और चूर्ण हो जाएँगे, तो क्या हम सचमुच एक नई रचना में उठाए जाएँगे?”

وَقَالُوٓاْ أَ۟ذَا كُنَّا عِظَٰماٗ وَرُفَٰتاً اِنَّا لَمَبْعُوثُونَ خَلْقاٗ جَدِيداٗۖ

17:50–51

कहो: “पत्थर हो जाओ, या लोहा, या कोई भी रचना जो तुम्हारे सीनों में बड़ी लगती है।”

۞ قُلْ كُونُواْ حِجَارَةً اَوْ حَدِيداً اَوْ خَلْقاٗ مِّمَّا يَكْبُرُ فِے صُدُورِكُمْۖ

17:50–51

तब वे कहेंगे: “हमें कौन वापस लाएगा?”

فَسَيَقُولُونَ مَنْ يُّعِيدُنَاۖ

17:50–51

कहो: “वही जिसने तुम्हें पहली बार मूलतः रचा।”

قُلِ اِ۬لذِے فَطَرَكُمُۥٓ أَوَّلَ مَرَّةٖۖ

17:50–51

तब वे तुम्हारी ओर अपने सिर हिलाएँगे और कहेंगे: “यह कब होगा?”

فَسَيُنْغِضُونَ إِلَيْكَ رُءُوسَهُمْ وَيَقُولُونَ مَت۪ىٰ هُوَۖ

17:50–51

कहो: “संभव है कि वह निकट हो।

قُلْ عَس۪ىٰٓ أَنْ يَّكُونَ قَرِيباٗۖ

जिस दिन वह तुम्हें पुकारेगा, तो तुम उसकी प्रशंसा करते हुए उत्तर दोगे, और अनुमान लगाओगे कि तुमने थोड़ा ही समय बिताया।”

يَوْمَ يَدْعُوكُمْ فَتَسْتَجِيبُونَ بِحَمْدِهِۦ وَتَظُنُّونَ إِن لَّبِثْتُمُۥٓ إِلَّا قَلِيلاٗۖ

17:53

और मेरे आज्ञाकारियों से कहो कि वे वही कहें जो सबसे सुंदर है:

وَقُل لِّعِبَادِے يَقُولُواْ اُ۬لتِے هِيَ أَحْسَنُۖ

17:53

बहकाने वाला उनके बीच कलह भड़काता है;

إِنَّ اَ۬لشَّيْطَٰنَ يَنزَغُ بَيْنَهُمُۥٓۖ

17:53

क्योंकि बहकाने वाला मनुष्य के लिए स्पष्ट शत्रु है।

إِنَّ اَ۬لشَّيْطَٰنَ كَانَ لِلِانسَٰنِ عَدُوّاٗ مُّبِيناٗۖ

तुम्हारा अभिभावक तुम्हें सबसे अच्छा जानता है; यदि उसकी मर्ज़ी हो, तो वह तुम पर दया करता है, और यदि उसकी मर्ज़ी हो, तो वह तुम्हें दंड देता है।

رَّبُّكُمُۥٓ أَعْلَمُ بِكُمُۥٓۖ إِنْ يَّشَأْ يَرْحَمْكُمُۥٓ أَوِ اِنْ يَّشَأْ يُعَذِّبْكُمْۖ

17:54

हमने तुम्हें उन पर मुख़्तार बनाकर नहीं भेजा।

وَمَآ أَرْسَلْنَٰكَ عَلَيْهِمْ وَكِيلاٗۖ

तुम्हारा अभिभावक उन्हें सबसे अच्छा जानता है जो आकाशों और धरती में हैं।

وَرَبُّكَ أَعْلَمُ بِمَن فِے اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالَارْضِۖ

17:55

हमने निश्चय ही कुछ सूचनादाताओं को दूसरों पर वरीयता दी, और हमने दाऊद को एक प्रपत्र दिया।

وَلَقَدْ فَضَّلْنَا بَعْضَ اَ۬لنَّبِيٓـِٕۧنَ عَلَىٰ بَعْضٖ وَءَاتَيْنَا دَاوُۥدَ زَبُوراٗۖ

17:56

कहो: “उन्हें पुकारो जिनका तुम उसके अतिरिक्त दावा करते हो: वे तुमसे हानि हटाने की कोई सत्ता नहीं रखते, और न उसे विस्थापित करने की।”

قُلُ اُ۟دْعُواْ اُ۬لذِينَ زَعَمْتُم مِّن دُونِهِۦ فَلَا يَمْلِكُونَ كَشْفَ اَ۬لضُّرِّ عَنكُمْ وَلَا تَحْوِيلاًۖ

17:57

ये वही हैं जिन्हें वे पुकारते हैं, जो अपने अभिभावक की ओर निकटता का साधन खोजते हैं — कि उनमें कौन सबसे निकट हो — और उसकी दया की आशा रखते हैं और उसके दंड से डरते हैं,

ا۟وْلَٰٓئِكَ اَ۬لذِينَ يَدْعُونَ يَبْتَغُونَ إِلَىٰ رَبِّهِمُ اُ۬لْوَسِيلَةَ أَيُّهُمُۥٓ أَقْرَبُ وَيَرْجُونَ رَحْمَتَهُۥ وَيَخَافُونَ عَذَابَهُۥٓۖ

क्योंकि तुम्हारे अभिभावक का दंड ऐसा है जिससे सतर्क रहा जाए।

إِنَّ عَذَابَ رَبِّكَ كَانَ مَحْذُوراٗۖ

17:58

और ऐसी कोई बस्ती नहीं जिसे हम पेशी के दिन से पहले नष्ट न कर दें, या जिसे हम कठोर दंड न दें:

وَإِن مِّن قَرْيَةٍ اِلَّا نَحْنُ مُهْلِكُوهَا قَبْلَ يَوْمِ اِ۬لْقِيَٰمَةِ أَوْ مُعَذِّبُوهَا عَذَاباٗ شَدِيداٗۖ

17:58

यह बही में दर्ज है।

كَانَ ذَٰلِكَ فِے اِ۬لْكِتَٰبِ مَسْطُوراٗۖ

हमें संकेत भेजने से किसी चीज़ ने नहीं रोका, सिवा इसके कि पहले वालों ने उन्हें झुठलाया।

وَمَا مَنَعَنَآ أَن نُّرْسِلَ بِالَايَٰتِ إِلَّآ أَن كَذَّبَ بِهَا اَ۬لَاوَّلُونَۖ

और हमने समूद को ऊँटनी दी, एक स्पष्ट प्रमाण के रूप में, पर उन्होंने उस पर अन्याय किया।

وَءَاتَيْنَا ثَمُودَ اَ۬لنَّاقَةَ مُبْصِرَةٗ فَظَلَمُواْ بِهَاۖ

और हम संकेत केवल डराने के लिए भेजते हैं।

وَمَا نُرْسِلُ بِالَايَٰتِ إِلَّا تَخْوِيفاٗۖ

और जब हमने तुमसे कहा कि तुम्हारा अभिभावक लोगों को घेरे हुए है —

وَإِذْ قُلْنَا لَكَ إِنَّ رَبَّكَ أَحَاطَ بِالنَّاسِۖ

17:60

हमने वह स्वप्न जो हमने तुम्हें दिखाया, केवल लोगों के लिए एक परीक्षा बनाया, और इस पाठ में धिक्कारे गए वृक्ष को भी।

وَمَا جَعَلْنَا اَ۬لرُّءْيَا اَ۬لتِےٓ أَرَيْنَٰكَ إِلَّا فِتْنَةٗ لِّلنَّاسِ وَالشَّجَرَةَ اَ۬لْمَلْعُونَةَ فِے اِ۬لْقُرْءَانِۖ

और हम उन्हें डराते हैं, पर यह उनकी बड़ी मर्यादाहीनता को ही बढ़ाता है।

وَنُخَوِّفُهُمْ فَمَا يَزِيدُهُمُۥٓ إِلَّا طُغْيَٰناٗ كَبِيراٗۖ

17:61

और जब हमने अभिकर्ताओं से कहा: “आदम के सामने माथा टेको”, तो उन्होंने माथा टेका,

۞ وَإِذْ قُلْنَا لِلْمَلَٰٓئِكَةِ اِ۟سْجُدُواْ لِأٓدَمَ فَسَجَدُوٓاْۖ

17:61

सिवा इब्लीस के: उसने कहा: “क्या मैं उसके सामने माथा टेकूँ जिसे आपने चिकनी मिट्टी से रचा?”

إِلَّآ إِبْلِيسَ قَالَ ءَآسْجُدُ لِمَنْ خَلَقْتَ طِيناٗۖ

17:62

उसने कहा: “क्या आप इसे देखते हैं, जिसे आपने मुझसे ऊपर सम्मानित किया? यदि आप मुझे पेशी के दिन तक अवकाश देंगे, तो मैं अवश्य उसकी संतति को अपने नियंत्रण में ले लूँगा, उनमें से थोड़े को छोड़कर।”

قَالَ أَرَٰٓيْتَكَ هَٰذَا اَ۬لذِے كَرَّمْتَ عَلَيَّ لَئِنَ اَخَّرْتَنِۦٓ إِلَىٰ يَوْمِ اِ۬لْقِيَٰمَةِ لَأَحْتَنِكَنَّ ذُرِّيَّتَهُۥٓ إِلَّا قَلِيلاٗۖ

17:63

उसने कहा: “जाओ! उनमें से जो कोई तुम्हारा अनुसरण करेगा — निश्चय ही जहन्नम तुम्हारा प्रतिफल होगा, भरपूर प्रतिफल।

قَالَ اَ۪ذْهَبْ فَمَن تَبِعَكَ مِنْهُمْ فَإِنَّ جَهَنَّمَ جَزَآؤُكُمْ جَزَآءٗ مَّوْفُوراٗۖ

17:64

और उनमें से जिसे तुम उखाड़ सको, उसे अपनी आवाज़ से उखाड़ दो; अपने घुड़सवारों और पैदल सेना को उन पर चढ़ा लो; संपत्ति और संतान में उनके साझीदार बनो; और उनसे वादे करो —

وَاسْتَفْزِزْ مَنِ اِ۪سْتَطَعْتَ مِنْهُم بِصَوْتِكَ وَأَجْلِبْ عَلَيْهِم بِخَيْلِكَ وَرَجْلِكَ وَشَارِكْهُمْ فِے اِ۬لَامْوَٰلِ وَالَاوْلَٰدِ وَعِدْهُمْۖ

17:64

जबकि बहकाने वाला उनसे केवल छलावे का वादा करता है।

وَمَا يَعِدُهُمُ اُ۬لشَّيْطَٰنُ إِلَّا غُرُوراًۖ

17:65

मेरे आज्ञाकारियों पर तुम्हारा निश्चय ही कोई अधिकार नहीं;

اِنَّ عِبَادِے لَيْسَ لَكَ عَلَيْهِمْ سُلْطَٰنٞۖ

17:65

और तुम्हारा अभिभावक मुख़्तार के रूप में पर्याप्त है।”

وَكَف۪ىٰ بِرَبِّكَ وَكِيلاٗۖ

तुम्हारा अभिभावक वही है जो तुम्हारे लिए समुद्र में जलयान को चलाता है, ताकि तुम उसके अनुग्रह में से खोजो,

رَّبُّكُمُ اُ۬لذِے يُزْجِے لَكُمُ اُ۬لْفُلْكَ فِے اِ۬لْبَحْرِ لِتَبْتَغُواْ مِن فَضْلِهِۦٓۖ

क्योंकि वह तुम्हारे प्रति दयालु है।

إِنَّهُۥ كَانَ بِكُمْ رَحِيماٗۖ

और जब समुद्र में तुम्हें हानि पहुँचती है, तो जिन्हें तुम पुकारते हो वे भटक जाते हैं, सिवा उसके।

وَإِذَا مَسَّكُمُ اُ۬لضُّرُّ فِے اِ۬لْبَحْرِ ضَلَّ مَن تَدْعُونَ إِلَّآ إِيَّاهُۖ

फिर जब वह तुम्हें उबारकर थल की ओर ले आता है, तो तुम कतरा जाते हो:

فَلَمَّا نَجّ۪يٰكُمُۥٓ إِلَى اَ۬لْبَرِّ أَعْرَضْتُمْۖ

17:67

मनुष्य बड़ा नकारने वाला है।

وَكَانَ اَ۬لِانسَٰنُ كَفُوراًۖ

17:68–69

तो क्या तुम निश्चिंत हो कि हम तुम्हें थल के एक भाग से धँसा नहीं देंगे, या तुम पर कंकड़ों की बौछार नहीं भेजेंगे, और तब तुम अपने लिए कोई मुख़्तार नहीं पाओगे? या क्या तुम निश्चिंत हो कि हम तुम्हें उसमें एक और बार वापस नहीं ले आएँगे, कि तुम पर तोड़ देने वाली हवा भेजें जो तुम्हें तुम्हारे नकार के कारण डुबो दे, और तब तुम अपने लिए हमसे इसका जवाब माँगने वाला कोई नहीं पाओगे?

اَفَأَمِنتُمُۥٓ أَنْ يَّخْسِفَ بِكُمْ جَانِبَ اَ۬لْبَرِّ أَوْ يُرْسِلَ عَلَيْكُمْ حَاصِباٗ ثُمَّ لَا تَجِدُواْ لَكُمْ وَكِيلاً اَمَ اَمِنتُمُۥٓ أَنْ يُّعِيدَكُمْ فِيهِ تَارَةً ا۟خْر۪ىٰ فَيُرْسِلَ عَلَيْكُمْ قَاصِفاٗ مِّنَ اَ۬لرِّيحِ فَيُغْرِقَكُم بِمَا كَفَرْتُمْ ثُمَّ لَا تَجِدُواْ لَكُمْ عَلَيْنَا بِهِۦ تَبِيعاٗۖ

17:70

हमने निश्चय ही आदम की संतान को सम्मानित किया, हमने उन्हें थल और समुद्र में सवार किया, हमने उन्हें अच्छी वस्तुओं से जीविका दी, और हमने उन्हें उनमें से बहुतों पर स्पष्ट वरीयता दी जिन्हें हमने रचा।

۞ وَلَقَدْ كَرَّمْنَا بَنِےٓ ءَادَمَ وَحَمَلْنَٰهُمْ فِے اِ۬لْبَرِّ وَالْبَحْرِ وَرَزَقْنَٰهُم مِّنَ اَ۬لطَّيِّبَٰتِ وَفَضَّلْنَٰهُمْ عَلَىٰ كَثِيرٖ مِّمَّنْ خَلَقْنَا تَفْضِيلاٗۖ

17:71

जिस दिन हम लोगों के हर समूह को उसके संदर्भ के साथ बुलाएँगे,

يَوْمَ نَدْعُواْ كُلَّ أُنَاسِۢ بِإِمَٰمِهِمْۖ

17:71

तो जिसकी बही उसके दाएँ हाथ में दी जाएगी — वे अपनी बही पढ़ेंगे, और उन पर रेशे भर भी अन्याय नहीं किया जाएगा।

فَمَنُ ا۟وتِيَ كِتَٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ فَأُوْلَٰٓئِكَ يَقْرَءُونَ كِتَٰبَهُمْ وَلَا يُظْلَمُونَ فَتِيلاٗۖ

और जो कोई इस जीवन में अंधा है, वह अंतिम जीवन में अंधा होगा, और राह के विषय में और भी अधिक भटका हुआ।

وَمَن كَانَ فِے هَٰذِهِۦٓ أَعْم۪ىٰ فَهُوَ فِے اِ۬لَاخِرَةِ أَعْم۪ىٰ وَأَضَلُّ سَبِيلاٗۖ

17:73

और वे अवश्य तुम्हें परीक्षा में डालकर उससे हटाने ही वाले थे जो हमने तुम पर प्रकट किया, ताकि तुम हमारे विरुद्ध कुछ और गढ़ो;

وَإِن كَادُواْ لَيَفْتِنُونَكَ عَنِ اِ۬لذِےٓ أَوْحَيْنَآ إِلَيْكَ لِتَفْتَرِيَ عَلَيْنَا غَيْرَهُۥۖ

17:73

तब वे तुम्हें घनिष्ठ मित्र बना लेते।

وَإِذاٗ لَّاتَّخَذُوكَ خَلِيلاٗۖ

17:74

और यदि हम तुम्हें दृढ़ न करते, तो तुम निश्चय ही उनकी ओर ज़रा-सा झुकने ही वाले थे।

وَلَوْلَآ أَن ثَبَّتْنَٰكَ لَقَدْ كِدتَّ تَرْكَنُ إِلَيْهِمْ شَئْاٗ قَلِيلاًۖ

17:75

तब हम तुम्हें जीवन का दुगुना और मृत्यु का दुगुना चखाते; फिर तुम हमारे विरुद्ध अपने लिए कोई सहायता न पाते।

اِذاٗ لَّأَذَقْنَٰكَ ضِعْفَ اَ۬لْحَيَوٰةِ وَضِعْفَ اَ۬لْمَمَاتِ ثُمَّ لَا تَجِدُ لَكَ عَلَيْنَا نَصِيراٗۖ

और वे अवश्य तुम्हें इस धरती से उखाड़ने ही वाले थे, ताकि तुम्हें वहाँ से निकाल दें —

وَإِن كَادُواْ لَيَسْتَفِزُّونَكَ مِنَ اَ۬لَارْضِ لِيُخْرِجُوكَ مِنْهَاۖ

17:76

और तब वे तुम्हारे बाद वहाँ बहुत थोड़ा ही समय बिता पाते।

وَإِذاٗ لَّا يَلْبَثُونَ خَلْفَكَ إِلَّا قَلِيلاٗۖ

17:77

यह उनके विषय में रीति है जिन्हें हमने तुमसे पहले अपने संदेशवाहकों में से भेजा,

سُنَّةَ مَن قَدَ اَرْسَلْنَا قَبْلَكَ مِن رُّسُلِنَاۖ

और तुम हमारी रीति में कोई विस्थापन नहीं पाओगे।

وَلَا تَجِدُ لِسُنَّتِنَا تَحْوِيلاًۖ

17:78

सूर्य के ढलने से रात के अँधेरे तक संपर्क बनाए रखो, तथा भोर का पाठ भी,

اَقِمِ اِ۬لصَّلَوٰةَ لِدُلُوكِ اِ۬لشَّمْسِ إِلَىٰ غَسَقِ اِ۬ليْلِ وَقُرْءَانَ اَ۬لْفَجْرِۖ

17:78

क्योंकि भोर का पाठ प्रमाणित है।

إِنَّ قُرْءَانَ اَ۬لْفَجْرِ كَانَ مَشْهُوداٗۖ

17:79

और रात के एक भाग में उसके साथ जागरण करो, तुम्हारे लिए अतिरिक्त रूप में: संभव है कि तुम्हारा अभिभावक तुम्हें एक प्रशंसित स्थान पर उठाए।

وَمِنَ اَ۬ليْلِ فَتَهَجَّدْ بِهِۦ نَافِلَةٗ لَّكَ عَس۪ىٰٓ أَنْ يَّبْعَثَكَ رَبُّكَ مَقَاماٗ مَّحْمُوداٗۖ

17:80

और कहो: “मेरे अभिभावक, मुझे सच्चे प्रवेश से प्रवेश कराइए, और मुझे सच्चे निकास से निकालिए, और अपनी ओर से मेरे लिए एक सहायक अधिकार ठहराइए।”

وَقُل رَّبِّ أَدْخِلْنِے مُدْخَلَ صِدْقٖ وَأَخْرِجْنِے مُخْرَجَ صِدْقٖ وَاجْعَل لِّے مِن لَّدُنكَ سُلْطَٰناٗ نَّصِيراٗۖ

17:81

और कहो: “सत्य आ गया, और असत्य मिट गया:

وَقُلْ جَآءَ اَ۬لْحَقُّ وَزَهَقَ اَ۬لْبَٰطِلُۖ

17:81

असत्य निश्चय ही मिट जाने वाला ही है।”

إِنَّ اَ۬لْبَٰطِلَ كَانَ زَهُوقاٗۖ

17:82

और हम इस पाठ में से वह उतारते हैं जो विश्वास करने वालों के लिए उपचार और दया है,

وَنُنَزِّلُ مِنَ اَ۬لْقُرْءَانِ مَا هُوَ شِفَآءٞ وَرَحْمَةٞ لِّلْمُومِنِينَۖ

परंतु यह अन्यायियों को केवल घाटे में ही बढ़ाता है।

وَلَا يَزِيدُ اُ۬لظَّٰلِمِينَ إِلَّا خَسَاراٗۖ

और जब हम मनुष्य को उपकारों से भर देते हैं, तो वह कतरा जाता है और अपनी ओर से दूर हट जाता है;

وَإِذَآ أَنْعَمْنَا عَلَى اَ۬لِانسَٰنِ أَعْرَضَ وَنَـ۪ٔا بِجَانِبِهِۦۖ

17:83

और जब उसे बुराई छूती है, तो वह निराश हो जाता है।

وَإِذَا مَسَّهُ اُ۬لشَّرُّ كَانَ يَـُٔوساٗۖ

17:84

कहो: “हर कोई अपने स्वभाव के अनुसार कर्म करता है; तुम्हारा अभिभावक सबसे अच्छा जानता है कि राह के विषय में सबसे अधिक मार्गदर्शन पाया हुआ कौन है।”

قُلْ كُلّٞ يَعْمَلُ عَلَىٰ شَاكِلَتِهِۦ فَرَبُّكُمُۥٓ أَعْلَمُ بِمَنْ هُوَ أَهْد۪ىٰ سَبِيلاٗۖ

17:85

और वे तुमसे प्रवाह के विषय में पूछते हैं।

۞ وَيَسْـَٔلُونَكَ عَنِ اِ۬لرُّوحِۖ

17:85

कहो: “प्रवाह मेरे अभिभावक के आदेश में से है; और तुम्हें ज्ञान में से बहुत थोड़ा ही दिया गया है।”

قُلِ اِ۬لرُّوحُ مِنَ اَمْرِ رَبِّے وَمَآ أُوتِيتُم مِّنَ اَ۬لْعِلْمِ إِلَّا قَلِيلاٗۖ

17:86–87

और यदि हमारी मर्ज़ी होती, तो हम अवश्य उसे ले जाते जो हमने तुम पर प्रकट किया; तब तुम हमारे विरुद्ध उसके लिए कोई मुख़्तार नहीं पाते — सिवा तुम्हारे अभिभावक की ओर से एक दया के;

وَلَئِن شِئْنَا لَنَذْهَبَنَّ بِالذِےٓ أَوْحَيْنَآ إِلَيْكَ ثُمَّ لَا تَجِدُ لَكَ بِهِۦ عَلَيْنَا وَكِيلاً اِلَّا رَحْمَةٗ مِّن رَّبِّكَۖ

क्योंकि उसका अनुग्रह तुम पर बड़ा है।

إِنَّ فَضْلَهُۥ كَانَ عَلَيْكَ كَبِيراٗۖ

17:88

कहो: “यदि मनुष्य और प्रच्छन्न इस पाठ के समान कुछ ले आने के लिए एकत्र हो जाएँ, तो वे इसके समान नहीं ला सकेंगे, भले ही वे एक-दूसरे के समर्थक हों।”

قُل لَّئِنِ اِ۪جْتَمَعَتِ اِ۬لِانسُ وَالْجِنُّ عَلَىٰٓ أَنْ يَّاتُواْ بِمِثْلِ هَٰذَا اَ۬لْقُرْءَانِ لَا يَاتُونَ بِمِثْلِهِۦ وَلَوْ كَانَ بَعْضُهُمْ لِبَعْضٖ ظَهِيراٗۖ

17:89

हमने निश्चय ही लोगों के लिए इस पाठ में हर प्रकार के उदाहरणों को विविध किया; परंतु अधिकतर लोगों ने नकार के सिवा हर बात से इनकार कर दिया।

وَلَقَدْ صَرَّفْنَا لِلنَّاسِ فِے هَٰذَا اَ۬لْقُرْءَانِ مِن كُلِّ مَثَلٖ فَأَب۪ىٰٓ أَكْثَرُ اُ۬لنَّاسِ إِلَّا كُفُوراٗۖ

17:90–93

और उन्होंने कहा: “हम तुम पर तब तक भरोसा नहीं करेंगे जब तक तुम हमारे लिए धरती से एक स्रोत न फोड़ दो, या तुम्हारे पास खजूर और अंगूर का कोई उद्यान न हो जिसके बीच तुम नदियाँ प्रचुर मात्रा में बहा दो, या तुम आकाश को, जैसा तुम दावा करते हो, हम पर टुकड़े-टुकड़े करके न गिरा दो, या तुम ईश्वर और अभिकर्ताओं को हमारे सामने न ले आओ, या तुम्हारे पास सुनहरी सजावट का कोई घर न हो, या तुम आकाश में चढ़ न जाओ — और हम तुम्हारे चढ़ने पर भी तब तक भरोसा नहीं करेंगे जब तक तुम हम पर एक बही न उतार दो जिसे हम पढ़ सकें।”

وَقَالُواْ لَن نُّومِنَ لَكَ حَتَّىٰ تُفَجِّرَ لَنَا مِنَ اَ۬لَارْضِ يَنۢبُوعاً اَوْ تَكُونَ لَكَ جَنَّةٞ مِّن نَّخِيلٖ وَعِنَبٖ فَتُفَجِّرَ اَ۬لَانْهَٰرَ خِلَٰلَهَا تَفْجِيراً اَوْ تُسْقِطَ اَ۬لسَّمَآءَ كَمَا زَعَمْتَ عَلَيْنَا كِسَفاً اَوْ تَاتِيَ بِاللَّهِ وَالْمَلَٰٓئِكَةِ قَبِيلاً اَوْ يَكُونَ لَكَ بَيْتٞ مِّن زُخْرُفٍ اَوْ تَرْق۪ىٰ فِے اِ۬لسَّمَآءِ وَلَن نُّومِنَ لِرُقِيِّكَ حَتَّىٰ تُنَزِّلَ عَلَيْنَا كِتَٰباٗ نَّقْرَؤُهُۥۖ

17:90–93

कहो: “मेरे अभिभावक की महिमा हो! क्या मैं केवल एक मानव, एक संदेशवाहक हूँ?”

قُلْ سُبْحَٰنَ رَبِّے هَلْ كُنتُ إِلَّا بَشَراٗ رَّسُولاٗۖ

17:94

और लोगों को विश्वास करने से किसी चीज़ ने नहीं रोका, जब उनके पास मार्गदर्शन आया, सिवा इसके कि उन्होंने कहा: “क्या ईश्वर ने एक मानव को संदेशवाहक के रूप में उठाया है?”

وَمَا مَنَعَ اَ۬لنَّاسَ أَنْ يُّومِنُوٓاْ إِذْ جَآءَهُمُ اُ۬لْهُد۪ىٰٓ إِلَّآ أَن قَالُوٓاْ أَبَعَثَ اَ۬للَّهُ بَشَراٗ رَّسُولاٗۖ

17:95

कहो: “यदि धरती पर अभिकर्ता पूरे चैन से चलते होते, तो हम उन पर आकाश से एक अभिकर्ता संदेशवाहक के रूप में उतारते।”

قُل لَّوْ كَانَ فِے اِ۬لَارْضِ مَلَٰٓئِكَةٞ يَمْشُونَ مُطْمَئِنِّينَ لَنَزَّلْنَا عَلَيْهِم مِّنَ اَ۬لسَّمَآءِ مَلَكاٗ رَّسُولاٗۖ

कहो: “मेरे और तुम्हारे बीच साक्षी के रूप में ईश्वर पर्याप्त है,

قُلْ كَف۪ىٰ بِاللَّهِ شَهِيداَۢ بَيْنِے وَبَيْنَكُمُۥٓۖ

क्योंकि वह अपने आज्ञाकारियों के प्रति पूरी ख़बर रखने वाला और दृष्टिवान है।”

إِنَّهُۥ كَانَ بِعِبَادِهِۦ خَبِيراَۢ بَصِيراٗۖ

और जिसे ईश्वर मार्ग दिखाता है, वही मार्गदर्शन पाने वाला है,

وَمَنْ يَّهْدِ اِ۬للَّهُ فَهُوَ اَ۬لْمُهْتَدِۦۖ

और जिसे वह भटकाता है, तुम उनके लिए उसके अतिरिक्त कभी कोई हिमायती नहीं पाओगे।

وَمَنْ يُّضْلِلْ فَلَن تَجِدَ لَهُمُۥٓ أَوْلِيَآءَ مِن دُونِهِۦۖ

17:97

और हम उन्हें पेशी के दिन उनके चेहरों के बल इकट्ठा करेंगे, अंधे, गूँगे और बहरे:

وَنَحْشُرُهُمْ يَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ عُمْياٗ وَبُكْماٗ وَصُمّاٗۖ

17:97

उनकी शरण जहन्नम होगी:

مَّأْو۪يٰهُمْ جَهَنَّمُۖ

17:97

जब-जब वह मंद पड़ती है, हम उनके लिए दहकते अंगार बढ़ा देते हैं।

كُلَّمَا خَبَتْ زِدْنَٰهُمْ سَعِيراٗۖ

17:98

यही उनका प्रतिफल है, इसलिए कि उन्होंने हमारे संकेतों को नकारा और कहा: “जब हम हड्डियाँ और चूर्ण हो जाएँगे, तो क्या हम सचमुच एक नई रचना में उठाए जाएँगे?”

ذَٰلِكَ جَزَآؤُهُم بِأَنَّهُمْ كَفَرُواْ بِـَٔايَٰتِنَا وَقَالُوٓاْ أَ۟ذَا كُنَّا عِظَٰماٗ وَرُفَٰتاً اِنَّا لَمَبْعُوثُونَ خَلْقاٗ جَدِيداًۖ

क्या उन्होंने नहीं देखा कि ईश्वर, जिसने आकाशों और धरती को रचा, उनके समान को रचने का सामर्थ्य रखता है, और उसने उनके लिए एक अवधि ठहराई है जिसमें कोई संदेह नहीं?

۞ اَوَلَمْ يَرَوَاْ اَنَّ اَ۬للَّهَ اَ۬لذِے خَلَقَ اَ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالَارْضَ قَادِرٌ عَلَىٰٓ أَنْ يَّخْلُقَ مِثْلَهُمْ وَجَعَلَ لَهُمُۥٓ أَجَلاٗ لَّا رَيْبَ فِيهِۖ

परंतु अन्यायियों ने नकार के सिवा हर बात से इनकार कर दिया।

فَأَبَى اَ۬لظَّٰلِمُونَ إِلَّا كُفُوراٗۖ

कहो: “यदि तुम मेरे अभिभावक की दया के भंडारों के मालिक होते, तो तुम तब ख़र्च का भय मानकर उन्हें रोक रखते।”

قُل لَّوَ اَنتُمْ تَمْلِكُونَ خَزَآئِنَ رَحْمَةِ رَبِّيَ إِذاٗ لَّأَمْسَكْتُمْ خَشْيَةَ اَ۬لِانفَاقِۖ

मनुष्य कंजूस है।

وَكَانَ اَ۬لِانسَٰنُ قَتُوراٗۖ

17:101

हमने निश्चय ही मूसा को नौ स्पष्ट संकेत दिए:

وَلَقَدَ اٰتَيْنَا مُوس۪ىٰ تِسْعَ ءَايَٰتِۢ بَيِّنَٰتٖۖ

17:101

सो इसराईल की संतान से पूछो: जब वह उनके पास आया, तो फ़िरऔन ने उससे कहा: “मैं अवश्य अनुमान लगाता हूँ कि तुम, हे मूसा, भ्रम का शिकार हो।”

فَسْـَٔلْ بَنِےٓ إِسْرَآءِيلَ إِذْ جَآءَهُمْ فَقَالَ لَهُۥ فِرْعَوْنُ إِنِّے لَأَظُنُّكَ يَٰمُوس۪ىٰ مَسْحُوراٗۖ

17:102

उसने कहा: “तुम निश्चय ही जानते हो कि इन्हें आकाशों और धरती के अभिभावक के सिवा किसी ने नहीं उतारा, ये दृष्टि देने वाले प्रमाण हैं,

قَالَ لَقَدْ عَلِمْتَ مَآ أَنزَلَ هَٰٓؤُلَآءِ الَّا رَبُّ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالَارْضِ بَصَآئِرَۖ

17:102

और मैं अवश्य अनुमान लगाता हूँ कि तुम, हे फ़िरऔन, बरबाद हो।”

وَإِنِّے لَأَظُنُّكَ يَٰفِرْعَوْنُ مَثْبُوراٗۖ

तब उसने उन्हें इस धरती से उखाड़ना चाहा; परंतु हमने उसे और उन सबको जो उसके साथ थे डुबो दिया।

فَأَرَادَ أَنْ يَّسْتَفِزَّهُم مِّنَ اَ۬لَارْضِ فَأَغْرَقْنَٰهُ وَمَن مَّعَهُۥ جَمِيعاٗۖ

और हमने उसके बाद इसराईल की संतान से कहा: “इस धरती में रहो,

وَقُلْنَا مِنۢ بَعْدِهِۦ لِبَنِےٓ إِسْرَآءِيلَ اَ۟سْكُنُواْ اُ۬لَارْضَۖ

17:104

फिर जब दूसरी बार का वादा आएगा, तो हम तुम सबको एक-दूसरे में गुँथा हुआ ले आएँगे।”

فَإِذَا جَآءَ وَعْدُ اُ۬لَاخِرَةِ جِئْنَا بِكُمْ لَفِيفاٗۖ

17:105

और सत्य के साथ हमने इसे उतारा,

وَبِالْحَقِّ أَنزَلْنَٰهُۖ

17:105

और सत्य के साथ यह उतरा;

وَبِالْحَقِّ نَزَلَۖ

और हमने तुम्हें केवल शुभ समाचार देने वाला और चेतावनी देने वाला बनाकर भेजा है।

وَمَآ أَرْسَلْنَٰكَ إِلَّا مُبَشِّراٗ وَنَذِيراٗۖ

17:106

और एक पाठ जिसे हमने खंडों में बाँटा, ताकि तुम उसे लोगों के सामने ठहर-ठहर कर पढ़ो,

وَقُرْءَاناٗ فَرَقْنَٰهُ لِتَقْرَأَهُۥ عَلَى اَ۬لنَّاسِ عَلَىٰ مُكْثٖۖ

17:106

और हमने उसे एक के बाद एक चरणों में उतारा।

وَنَزَّلْنَٰهُ تَنزِيلاٗۖ

कहो: “उस पर विश्वास करो, या विश्वास न करो:

قُلَ اٰمِنُواْ بِهِۦٓ أَوْ لَا تُومِنُوٓاْۖ

जिन्हें इससे पहले ज्ञान दिया गया, जब उन्हें यह सुनाया जाता है, तो वे ठोड़ी के बल माथा टेकते हुए गिर पड़ते हैं, और कहते हैं: ‘हमारे अभिभावक की महिमा हो! हमारे अभिभावक का वादा अवश्य पूरा किया हुआ है।’

إِنَّ اَ۬لذِينَ أُوتُواْ اُ۬لْعِلْمَ مِن قَبْلِهِۦٓ إِذَا يُتْل۪ىٰ عَلَيْهِمْ يَخِرُّونَ لِلَاذْقَانِ سُجَّداٗ وَيَقُولُونَ سُبْحَٰنَ رَبِّنَآ إِن كَانَ وَعْدُ رَبِّنَا لَمَفْعُولاٗۖ

और वे ठोड़ी के बल गिर पड़ते हैं, रोते हुए, और यह उनकी विनीतता को बढ़ाता है।”

وَيَخِرُّونَ لِلَاذْقَانِ يَبْكُونَ وَيَزِيدُهُمْ خُشُوعاٗۖ۩

17:110

कहो: “ईश्वर को पुकारो, या सर्वदयालु को पुकारो:

قُلُ اُ۟دْعُواْ اُ۬للَّهَ أَوُ اُ۟دْعُواْ اُ۬لرَّحْمَٰنَۖ

17:110

जिसे भी तुम पुकारो, उसी के लिए सबसे सुंदर गुण हैं।”

أَيّاٗ مَّا تَدْعُواْ فَلَهُ اُ۬لَاسْمَآءُ اُ۬لْحُسْن۪ىٰۖ

17:110

और अपने संपर्क को ऊँचे स्वर में मत बोलो, और उसे फुसफुसाओ भी नहीं: इन दोनों के बीच कोई राह खोजो।

وَلَا تَجْهَرْ بِصَلَاتِكَ وَلَا تُخَافِتْ بِهَا وَابْتَغِ بَيْنَ ذَٰلِكَ سَبِيلاٗۖ

17:111

और कहो: “प्रशंसा ईश्वर के लिए है, जिसने अपने लिए संतान नहीं बनाई, जिसका राजत्व में कोई साझीदार नहीं, और जिसका अपमान से बचाने वाला कोई आश्रयदाता नहीं”,

وَقُلِ اِ۬لْحَمْدُ لِلهِ اِ۬لذِے لَمْ يَتَّخِذْ وَلَداٗ وَلَمْ يَكُن لَّهُۥ شَرِيكٞ فِے اِ۬لْمُلْكِ وَلَمْ يَكُن لَّهُۥ وَلِيّٞ مِّنَ اَ۬لذُّلِّۖ

17:111

और उसकी बड़ाई पूरी तरह घोषित करो।

وَكَبِّرْهُ تَكْبِيراًۖ

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