البقرة
Al-Baqara
Guidance for Those Who Guard Themselves
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। अलिफ़. लाम. मीम.
بِسْمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحْمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ أَلَٓمِّٓۖ
यह ग्रंथ है: इसमें कोई संदेह नहीं,
ذَٰلِكَ اَ۬لْكِتَٰبُ لَا رَيْبَۖ
इसमें मार्गदर्शन है उनके लिए जो सावधान रहते हैं, जो विश्वास करते हैं भले ही वह उनकी इंद्रियों से परे हो, संपर्क बनाए रखते हैं, और उसमें से ख़र्च करते हैं जो हमने उन्हें जीविका के रूप में दिया है,
فِيهِ هُدىٗ لِّلْمُتَّقِينَ اَ۬لذِينَ يُومِنُونَ بِالْغَيْبِ وَيُقِيمُونَ اَ۬لصَّلَوٰةَ وَمِمَّا رَزَقْنَٰهُمْ يُنفِقُونَۖ
और जो उस पर विश्वास करते हैं जो तुम पर उतारा गया और जो तुमसे पहले उतारा गया, और जिन्हें अंतिम जीवन का यक़ीन है — वही अपने अभिभावक की ओर से मार्गदर्शन पर हैं,
وَالذِينَ يُومِنُونَ بِمَآ أُنزِلَ إِلَيْكَ وَمَآ أُنزِلَ مِن قَبْلِكَ وَبِالَاخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ أُوْلَٰٓئِكَ عَلَىٰ هُدىٗ مِّن رَّبِّهِمْۖ
और वही सफल होने वाले हैं।
وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لْمُفْلِحُونَۖ
जो नकारते हैं, उनके लिए निश्चय ही बराबर है कि तुम उन्हें चेतावनी दो या न दो: वे विश्वास नहीं करते।
إِنَّ اَ۬لذِينَ كَفَرُواْ سَوَآءٌ عَلَيْهِمُۥٓ ءَآنذَرْتَهُمُۥٓ أَمْ لَمْ تُنذِرْهُمْ لَا يُومِنُونَۖ
ईश्वर ने उनके मर्मों और उनके श्रवण पर मुहर लगा दी है,
خَتَمَ اَ۬للَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ وَعَلَىٰ سَمْعِهِمْۖ
और उनकी दृष्टियों पर आवरण है जो उन्हें ढके हुए है;
وَعَلَىٰٓ أَبْصٰ۪رِهِمْ غِشَٰوَةٞۖ
और उनके लिए विशाल दंड होगा।
وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٞۖ
और लोगों में कुछ ऐसे हैं जो कहते हैं: “हम ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास करते हैं”, जबकि वे विश्वास करने वाले नहीं हैं।
وَمِنَ اَ۬لنَّاسِ مَنْ يَّقُولُ ءَامَنَّا بِاللَّهِ وَبِالْيَوْمِ اِ۬لَاخِرِ وَمَا هُم بِمُومِنِينَۖ
वे ईश्वर को और उन्हें छलना चाहते हैं जिन्होंने विश्वास किया,
يُخَٰدِعُونَ اَ۬للَّهَ وَالذِينَ ءَامَنُواْۖ
किंतु वे केवल स्वयं को छलते हैं, और उन्हें इसका आभास नहीं।
وَمَا يُخَٰدِعُونَ إِلَّآ أَنفُسَهُمْ وَمَا يَشْعُرُونَۖ
उनके मर्मों में एक रोग है,
فِے قُلُوبِهِم مَّرَضٞۖ
और ईश्वर ने उनका रोग बढ़ा दिया है;
فَزَادَهُمُ اُ۬للَّهُ مَرَضاٗۖ
और उनके लिए पीड़ादायक दंड होगा, इसलिए कि वे झूठ बोलते थे।
وَلَهُمْ عَذَابٌ اَلِيمُۢ بِمَا كَانُواْ يُكَذِّبُونَۖ
और जब उनसे कहा जाता है: “धरती पर बिगाड़ न फैलाओ”, तो वे कहते हैं: “हम तो केवल सुधार करने वाले हैं।”
وَإِذَا قِيلَ لَهُمْ لَا تُفْسِدُواْ فِے اِ۬لَارْضِ قَالُوٓاْ إِنَّمَا نَحْنُ مُصْلِحُونَۖ
क्या ऐसा नहीं है: वही निश्चय ही बिगाड़ने वाले हैं; किंतु उन्हें इसका आभास नहीं।
أَلَآ إِنَّهُمْ هُمُ اُ۬لْمُفْسِدُونَ وَلَٰكِن لَّا يَشْعُرُونَۖ
और जब उनसे कहा जाता है: “विश्वास करो जैसे लोगों ने विश्वास किया”, तो वे कहते हैं: “क्या हम वैसे विश्वास करें जैसे मूर्खों ने विश्वास किया?”
وَإِذَا قِيلَ لَهُمُۥٓ ءَامِنُواْ كَمَآ ءَامَنَ اَ۬لنَّاسُ قَالُوٓاْ أَنُومِنُ كَمَآ ءَامَنَ اَ۬لسُّفَهَآءُۖ
क्या ऐसा नहीं है: वही निश्चय ही मूर्ख हैं; किंतु वे जानते नहीं।
اَ۬لَآ إِنَّهُمْ هُمُ اُ۬لسُّفَهَآءُ وَلَٰكِن لَّا يَعْلَمُونَۖ
और जब वे उनसे मिलते हैं जिन्होंने विश्वास किया, तो कहते हैं: “हमने विश्वास किया”;
وَإِذَا لَقُواْ اُ۬لذِينَ ءَامَنُواْ قَالُوٓاْ ءَامَنَّاۖ
और जब वे अपने बहकाने वालों के साथ अकेले होते हैं, तो कहते हैं: “हम निश्चय ही तुम्हारे साथ हैं, हम तो केवल मज़ाक़ उड़ा रहे हैं।”
وَإِذَا خَلَوِاْ اِلَىٰ شَيَٰطِينِهِمْ قَالُوٓاْ إِنَّا مَعَكُمُۥٓ إِنَّمَا نَحْنُ مُسْتَهْزِءُونَۖ
ईश्वर उनका मज़ाक़ उड़ाता है, और उन्हें उनकी मर्यादाहीनता में बढ़ने देता है, जिसमें वे टटोलते फिरते हैं।
اَ۬للَّهُ يَسْتَهْزِۓُ بِهِمْ وَيَمُدُّهُمْ فِے طُغْيَٰنِهِمْ يَعْمَهُونَۖ
यही वे हैं जिन्होंने मार्गदर्शन के बदले भटकाव ख़रीदा; इसलिए उनका व्यापार लाभदायक न रहा, और वे मार्गदर्शन पाने वाले न थे।
أُوْلَٰٓئِكَ اَ۬لذِينَ اَ۪شْتَرَوُاْ اُ۬لضَّلَٰلَةَ بِالْهُد۪ىٰ فَمَا رَبِحَت تِّجَٰرَتُهُمْ وَمَا كَانُواْ مُهْتَدِينَۖ
उनका उदाहरण उस व्यक्ति का उदाहरण है जो आग जलाता है; जब वह अपने आसपास को प्रकाशित कर चुका,
۞ مَثَلُهُمْ كَمَثَلِ اِ۬لذِے اِ۪سْتَوْقَدَ نَاراٗ فَلَمَّآ أَضَآءَتْ مَا حَوْلَهُۥۖ
ईश्वर उनका प्रकाश ले जाता है और उन्हें अँधेरों में छोड़ देता है जहाँ उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता।
ذَهَبَ اَ۬للَّهُ بِنُورِهِمْ وَتَرَكَهُمْ فِے ظُلُمَٰتٖ لَّا يُبْصِرُونَۖ
बहरे, गूँगे, अंधे, इसलिए वे नहीं लौटते।
صُمُّۢ بُكْمٌ عُمْيٞ فَهُمْ لَا يَرْجِعُونَۖ
या जैसे आकाश से मूसलाधार वर्षा, जिसमें अँधेरे, गरज और बिजलियाँ हैं:
أَوْ كَصَيِّبٖ مِّنَ اَ۬لسَّمَآءِ فِيهِ ظُلُمَٰتٞ وَرَعْدٞ وَبَرْقٞۖ
वे वज्रपात के कारण अपनी उँगलियाँ अपने कानों में डालते हैं, मृत्यु से सतर्क होकर।
يَجْعَلُونَ أَصَٰبِعَهُمْ فِےٓ ءَاذَانِهِم مِّنَ اَ۬لصَّوَٰعِقِ حَذَرَ اَ۬لْمَوْتِۖ
ईश्वर नकारने वालों को पूरी तरह घेरे हुए है।
وَاللَّهُ مُحِيطُۢ بِالْكٰ۪فِرِينَۖ
बिजली उनकी दृष्टियाँ उचक ले जाने को है।
يَكَادُ اُ۬لْبَرْقُ يَخْطَفُ أَبْصَٰرَهُمْۖ
जब भी वह उन्हें प्रकाशित करती है, वे चलते हैं;
كُلَّمَآ أَضَآءَ لَهُم مَّشَوْاْ فِيهِۖ
और जब उन पर अँधेरा छा जाता है, वे ठिठककर खड़े रह जाते हैं।
وَإِذَآ أَظْلَمَ عَلَيْهِمْ قَامُواْۖ
और यदि ईश्वर की मर्ज़ी होती, तो वह उनका श्रवण और उनकी दृष्टियाँ ज़रूर ले जाता,
وَلَوْ شَآءَ اَ۬للَّهُ لَذَهَبَ بِسَمْعِهِمْ وَأَبْصٰ۪رِهِمُۥٓۖ
क्योंकि ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَےْءٖ قَدِيرٞۖ
हे लोगो! अपने अभिभावक की आज्ञा का पालन करो, जिसने तुम्हें और तुमसे पहले वालों को रचा, शायद तुम सावधान रहो,
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لنَّاسُ اُ۟عْبُدُواْ رَبَّكُمُ اُ۬لذِے خَلَقَكُمْ وَالذِينَ مِن قَبْلِكُمْ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَۖ
वही जिसने तुम्हारे लिए धरती को बिछौना बनाया, और आकाश को एक निर्मिति, और जिसने आकाश से पानी उतारा, जिससे उसने तुम्हारे लिए जीविका के रूप में फल निकाले।
اَ۬لذِے جَعَلَ لَكُمُ اُ۬لَارْضَ فِرَٰشاٗ وَالسَّمَآءَ بِنَآءٗ وَأَنزَلَ مِنَ اَ۬لسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَخْرَجَ بِهِۦ مِنَ اَ۬لثَّمَرَٰتِ رِزْقاٗ لَّكُمْۖ
इसलिए ईश्वर के प्रतिद्वंद्वी न ठहराओ, जबकि तुम जानते हो।
فَلَا تَجْعَلُواْ لِلهِ أَندَاداٗ وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَۖ
और यदि तुम उसके विषय में संदेह में हो जो हमने अपने आज्ञाकारी पर उतारा है, तो उसके जैसी एक सूरा ले आओ,
وَإِن كُنتُمْ فِے رَيْبٖ مِّمَّا نَزَّلْنَا عَلَىٰ عَبْدِنَا فَاتُواْ بِسُورَةٖ مِّن مِّثْلِهِۦۖ
और ईश्वर के अतिरिक्त अपने साक्षियों को बुलाओ, यदि तुम सच्चे हो।
وَادْعُواْ شُهَدَآءَكُم مِّن دُونِ اِ۬للَّهِ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَۖ
यदि तुम ऐसा नहीं करते — और तुम कभी नहीं कर पाओगे — तो उस आग से सावधान रहो, जिसका ईंधन लोग और पत्थर हैं,
فَإِن لَّمْ تَفْعَلُواْ وَلَن تَفْعَلُواْ فَاتَّقُواْ اُ۬لنَّارَ اَ۬لتِے وَقُودُهَا اَ۬لنَّاسُ وَالْحِجَارَةُۖ
जो नकारने वालों के लिए तैयार की गई है।
أُعِدَّتْ لِلْكٰ۪فِرِينَۖ
और उन्हें शुभ समाचार दो जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए कि उनके लिए ऐसे उद्यान होंगे जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं।
وَبَشِّرِ اِ۬لذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ أَنَّ لَهُمْ جَنَّٰتٖ تَجْرِے مِن تَحْتِهَا اَ۬لَانْهَٰرُۖ
जब भी उन्हें वहाँ जीविका के रूप में कोई फल दिया जाता है, वे कहते हैं: “यह वही है जो हमें पहले दिया गया था”;
كُلَّمَا رُزِقُواْ مِنْهَا مِن ثَمَرَةٖ رِّزْقاٗ قَالُواْ هَٰذَا اَ۬لذِے رُزِقْنَا مِن قَبْلُۖ
और वह उन्हें मिलता-जुलता लाया जाता है।
وَأُتُواْ بِهِۦ مُتَشَٰبِهاٗۖ
और वहाँ उनके लिए स्वच्छ किए हुए जोड़ीदार होंगे,
وَلَهُمْ فِيهَآ أَزْوَٰجٞ مُّطَهَّرَةٞۖ
और वे वहाँ सदा रहते हैं।
وَهُمْ فِيهَا خَٰلِدُونَۖ
ईश्वर निश्चय ही कोई उदाहरण कई गुना करने में संकोच नहीं करता, चाहे वह मच्छर का हो या उससे भी अधिक का।
۞ إِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يَسْتَحْيِۦٓ أَنْ يَّضْرِبَ مَثَلاٗ مَّا بَعُوضَةٗ فَمَا فَوْقَهَاۖ
जहाँ तक उनका प्रश्न है जिन्होंने विश्वास किया, वे जानते हैं कि यह उनके अभिभावक की ओर से सत्य है;
فَأَمَّا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ فَيَعْلَمُونَ أَنَّهُ اُ۬لْحَقُّ مِن رَّبِّهِمْۖ
और जहाँ तक उनका प्रश्न है जो नकारते हैं, वे कहते हैं: “इस उदाहरण से ईश्वर ने क्या चाहा है?”
وَأَمَّا اَ۬لذِينَ كَفَرُواْ فَيَقُولُونَ مَاذَآ أَرَادَ اَ۬للَّهُ بِهَٰذَا مَثَلاٗۖ
वह इससे बहुतों को भटकाता है, और इससे बहुतों को मार्ग दिखाता है;
يُضِلُّ بِهِۦ كَثِيراٗ وَيَهْدِے بِهِۦ كَثِيراٗۖ
और वह इससे केवल अतिक्रमणकारियों को भटकाता है, जो ईश्वर की संधि को, उसे बाँधने वाली गंभीर प्रतिज्ञा के बाद, तोड़ते हैं, उसे काटते हैं जिसे ईश्वर ने जोड़ने का आदेश दिया है, और धरती पर बिगाड़ फैलाते हैं।
وَمَا يُضِلُّ بِهِۦٓ إِلَّا اَ۬لْفَٰسِقِينَ اَ۬لذِينَ يَنقُضُونَ عَهْدَ اَ۬للَّهِ مِنۢ بَعْدِ مِيثَٰقِهِۦ وَيَقْطَعُونَ مَآ أَمَرَ اَ۬للَّهُ بِهِۦٓ أَنْ يُّوصَلَ وَيُفْسِدُونَ فِے اِ۬لَارْضِۖ
यही घाटा उठाने वाले हैं।
أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لْخَٰسِرُونَۖ
तुम ईश्वर को कैसे नकार सकते हो, जबकि तुम मृत थे और उसने तुम्हें जीवन दिया; फिर वह तुम्हें मृत्यु देगा,
كَيْفَ تَكْفُرُونَ بِاللَّهِ وَكُنتُمُۥٓ أَمْوَٰتاٗ فَأَحْي۪اكُمْ ثُمَّ يُمِيتُكُمْۖ
फिर तुम्हें पुनः जीवन देगा, फिर उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे?
ثُمَّ يُحْيِيكُمْ ثُمَّ إِلَيْهِ تُرْجَعُونَۖ
वही है जिसने तुम्हारे लिए वह सब रचा जो धरती पर है,
هُوَ اَ۬لذِے خَلَقَ لَكُم مَّا فِے اِ۬لَارْضِ جَمِيعاٗۖ
फिर वह आकाश की ओर मुड़ा, और उसने उन्हें सात आकाशों के रूप में गढ़ा;
ثُمَّ اَ۪سْتَو۪ىٰٓ إِلَى اَ۬لسَّمَآءِ فَسَوّ۪يٰهُنَّ سَبْعَ سَمَٰوَٰتٖۖ
और वह हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।
وَهُوَ بِكُلِّ شَےْءٍ عَلِيمٞۖ
और जब तुम्हारे अभिभावक ने अभिकर्ताओं से कहा: “मैं धरती पर एक उत्तराधिकारी रखने वाला हूँ।”
وَإِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلَٰٓئِكَةِ إِنِّے جَاعِلٞ فِے اِ۬لَارْضِ خَلِيفَةٗۖ
उन्होंने कहा: “क्या आप उसमें ऐसे को रखेंगे जो वहाँ बिगाड़ फैलाएगा और रक्त बहाएगा, जबकि हम आपकी प्रशंसा करते हुए आपकी महिमा गाते हैं और आपकी पवित्रता की घोषणा करते हैं?”
قَالُوٓاْ أَتَجْعَلُ فِيهَا مَنْ يُّفْسِدُ فِيهَا وَيَسْفِكُ اُ۬لدِّمَآءَ وَنَحْنُ نُسَبِّحُ بِحَمْدِكَ وَنُقَدِّسُ لَكَۖ
उसने कहा: “मैं निश्चय ही वह जानता हूँ जो तुम नहीं जानते।”
قَالَ إِنِّيَ أَعْلَمُ مَا لَا تَعْلَمُونَۖ
और उसने आदम को सभी गुण सिखाए, फिर उन्हें अभिकर्ताओं के सामने रखा, और कहा: “मुझे इनके गुणों की सूचना दो, यदि तुम सच्चे हो।”
وَعَلَّمَ ءَادَمَ اَ۬لَاسْمَآءَ كُلَّهَا ثُمَّ عَرَضَهُمْ عَلَى اَ۬لْمَلَٰٓئِكَةِ فَقَالَ أَنۢبِـُٔونِے بِأَسْمَآءِ هَٰٓؤُلَآءِ ان كُنتُمْ صَٰدِقِينَۖ
उन्होंने कहा: “आपकी महिमा हो! हमें केवल उतना ही ज्ञान है जितना आपने हमें सिखाया; निश्चय ही आप ही सर्वज्ञ, प्रज्ञावान हैं।”
قَالُواْ سُبْحَٰنَكَ لَا عِلْمَ لَنَآ إِلَّا مَا عَلَّمْتَنَآ إِنَّكَ أَنتَ اَ۬لْعَلِيمُ اُ۬لْحَكِيمُۖ
उसने कहा: “हे आदम! इन्हें इनके गुणों की सूचना दो।”
قَالَ يَٰٓـَٔادَمُ أَنۢبِئْهُم بِأَسْمَآئِهِمْۖ
और जब उसने उन्हें उनके गुणों की सूचना दे दी, तो उसने कहा: “क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि मैं आकाशों और धरती में जो इंद्रियों से परे है उसे जानता हूँ, और जो तुम प्रकट करते हो और जो तुम दबाते थे उसे मैं जानता हूँ?”
فَلَمَّآ أَنۢبَأَهُم بِأَسْمَآئِهِمْ قَالَ أَلَمَ اَقُل لَّكُمُۥٓ إِنِّيَ أَعْلَمُ غَيْبَ اَ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالَارْضِ وَأَعْلَمُ مَا تُبْدُونَ وَمَا كُنتُمْ تَكْتُمُونَۖ
और जब हमने अभिकर्ताओं से कहा: “आदम के सामने माथा टेको”, तो उन्होंने माथा टेका,
۞ وَإِذْ قُلْنَا لِلْمَلَٰٓئِكَةِ اِ۟سْجُدُواْ لِأٓدَمَ فَسَجَدُوٓاْۖ
सिवा इब्लीस के: उसने इनकार किया, घमंड से फूल गया, और नकारने वालों में से हो गया।
إِلَّآ إِبْلِيسَ أَب۪ىٰ وَاسْتَكْبَرَ وَكَانَ مِنَ اَ۬لْكٰ۪فِرِينَۖ
और हमने कहा: “हे आदम! तुम और तुम्हारा जोड़ीदार उद्यान में रहो, और उसमें से भरपूर खाओ, जहाँ से तुम्हारी मर्ज़ी हो,
وَقُلْنَا يَٰٓـَٔادَمُ اُ۟سْكُنَ اَنتَ وَزَوْجُكَ اَ۬لْجَنَّةَ وَكُلَا مِنْهَا رَغَداً حَيْثُ شِئْتُمَاۖ
किंतु इस पेड़ के पास न जाना, नहीं तो तुम अन्यायियों में से हो जाओगे।”
وَلَا تَقْرَبَا هَٰذِهِ اِ۬لشَّجَرَةَ فَتَكُونَا مِنَ اَ۬لظَّٰلِمِينَۖ
किंतु बहकाने वाले ने उन्हें वहाँ से फिसला दिया, और उन्हें उस दशा से निकाल दिया जिसमें वे थे;
فَأَزَلَّهُمَا اَ۬لشَّيْطَٰنُ عَنْهَا فَأَخْرَجَهُمَا مِمَّا كَانَا فِيهِۖ
और हमने कहा: “नीचे जाओ,
وَقُلْنَا اَ۪هْبِطُواْۖ
एक-दूसरे के शत्रु बनकर,
بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوّٞۖ
और धरती पर तुम्हारे लिए एक ठौर और एक समय तक का उपभोग होगा।”
وَلَكُمْ فِے اِ۬لَارْضِ مُسْتَقَرّٞ وَمَتَٰعٌ اِلَىٰ حِينٖۖ
फिर आदम ने अपने अभिभावक से कुछ बोल पाए, और वह अनुकंपा के साथ उसकी ओर पलटा,
فَتَلَقّ۪ىٰٓ ءَادَمُ مِن رَّبِّهِۦ كَلِمَٰتٖ فَتَابَ عَلَيْهِۖ
क्योंकि वही निरंतर पश्चात्ताप स्वीकार करने वाला, दयालु है।
إِنَّهُۥ هُوَ اَ۬لتَّوَّابُ اُ۬لرَّحِيمُۖ
हमने कहा: “यहाँ से नीचे जाओ, सब के सब;
قُلْنَا اَ۪هْبِطُواْ مِنْهَا جَمِيعاٗۖ
फिर यदि मेरी ओर से तुम्हारे पास मार्गदर्शन आए, तो जो मेरे मार्गदर्शन पर चले, उन पर कोई डर नहीं, और न वे दुखी होंगे।
فَإِمَّا يَاتِيَنَّكُم مِّنِّے هُدىٗ فَمَن تَبِعَ هُد۪ايَ فَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَۖ
और जो नकारते हैं और हमारे संकेतों को झुठलाते हैं — वही आग वाले हैं, वे उसमें सदा रहते हैं।”
وَالذِينَ كَفَرُواْ وَكَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَآ أُوْلَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ اُ۬لنّ۪ارِ هُمْ فِيهَا خَٰلِدُونَۖ
हे इसराईल की संतान! मेरे उपकार का स्मरण करो, वह जिससे मैंने तुम्हें भर दिया, और मेरी संधि को निभाओ, मैं तुम्हारी संधि को निभाऊँगा; और तुम्हें मेरे ही प्रति आदर रखना चाहिए।
يَٰبَنِےٓ إِسْرَآءِيلَ اَ۟ذْكُرُواْ نِعْمَتِيَ اَ۬لتِےٓ أَنْعَمْتُ عَلَيْكُمْ وَأَوْفُواْ بِعَهْدِےٓ أُوفِ بِعَهْدِكُمْ وَإِيَّٰيَ فَارْهَبُونِۖ
और उस पर विश्वास करो जो मैंने उतारा है, जो उसकी पुष्टि करता है जो तुम्हारे पास है, और उसे नकारने वालों में पहले मत बनो;
وَءَامِنُواْ بِمَآ أَنزَلْتُ مُصَدِّقاٗ لِّمَا مَعَكُمْ وَلَا تَكُونُوٓاْ أَوَّلَ كَافِرِۢ بِهِۦۖ
और मेरे संकेतों के बदले तुच्छ मूल्य न ख़रीदो; और तुम्हें मेरे ही प्रति सावधान रहना चाहिए।
وَلَا تَشْتَرُواْ بِـَٔايَٰتِے ثَمَناٗ قَلِيلاٗ وَإِيَّٰيَ فَاتَّقُونِۖ
और सत्य पर असत्य का आवरण न चढ़ाओ, और सत्य को मत दबाओ, जबकि तुम जानते हो।
۞ وَلَا تَلْبِسُواْ اُ۬لْحَقَّ بِالْبَٰطِلِ وَتَكْتُمُواْ اُ۬لْحَقَّ وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَۖ
और संपर्क बनाए रखो, और शुद्ध उदारता दो,
وَأَقِيمُواْ اُ۬لصَّلَوٰةَ وَءَاتُواْ اُ۬لزَّكَوٰةَۖ
और घुटने टेकने वालों के साथ घुटने टेको।
وَارْكَعُواْ مَعَ اَ۬لرَّٰكِعِينَۖ
क्या तुम लोगों को सद्गुण का आदेश देते हो, और स्वयं को भूल जाते हो, जबकि तुम ग्रंथ सुनाते हो?
أَتَامُرُونَ اَ۬لنَّاسَ بِالْبِرِّ وَتَنسَوْنَ أَنفُسَكُمْ وَأَنتُمْ تَتْلُونَ اَ۬لْكِتَٰبَۖ
तो क्या तुम बुद्धि से काम नहीं लेते?
أَفَلَا تَعْقِلُونَۖ
और धैर्य और संपर्क से मदद माँगो:
وَاسْتَعِينُواْ بِالصَّبْرِ وَالصَّلَوٰةِۖ
यह अवश्य भारी है, सिवा विनीतों के, जो अनुमान लगाते हैं कि वे अपने अभिभावक से मिलेंगे, और यह कि उसी की ओर वे लौटते हैं।
وَإِنَّهَا لَكَبِيرَةٌ اِلَّا عَلَى اَ۬لْخَٰشِعِينَ اَ۬لذِينَ يَظُنُّونَ أَنَّهُم مُّلَٰقُواْ رَبِّهِمْ وَأَنَّهُمُۥٓ إِلَيْهِ رَٰجِعُونَۖ
हे इसराईल की संतान! मेरे उपकार का स्मरण करो, वह जिससे मैंने तुम्हें भर दिया, और यह कि मैंने तुम्हें सभी प्राणियों से ऊपर वरीयता दी।
يَٰبَنِےٓ إِسْرَآءِيلَ اَ۟ذْكُرُواْ نِعْمَتِيَ اَ۬لتِےٓ أَنْعَمْتُ عَلَيْكُمْ وَأَنِّے فَضَّلْتُكُمْ عَلَى اَ۬لْعَٰلَمِينَۖ
और उस दिन से सावधान रहो जब कोई स्व किसी दूसरे स्व के कुछ भी काम नहीं आएगा, जब उससे कोई सिफ़ारिश स्वीकार नहीं की जाएगी, जब उससे कोई प्रतिकर नहीं लिया जाएगा, और जब उनकी सहायता नहीं की जाएगी।
وَاتَّقُواْ يَوْماٗ لَّا تَجْزِے نَفْسٌ عَن نَّفْسٖ شَئْاٗ وَلَا يُقْبَلُ مِنْهَا شَفَٰعَةٞ وَلَا يُوخَذُ مِنْهَا عَدْلٞ وَلَا هُمْ يُنصَرُونَۖ
और जब हमने तुम्हें फ़िरऔन के कुल से उबारा, जो तुम्हें बुरा दंड देता था, तुम्हारे बेटों का गला काटता था और तुम्हारी स्त्रियों की लाज पर आघात करता था —
وَإِذْ نَجَّيْنَٰكُم مِّنَ اٰلِ فِرْعَوْنَ يَسُومُونَكُمْ سُوٓءَ اَ۬لْعَذَابِ يُذَبِّحُونَ أَبْنَآءَكُمْ وَيَسْتَحْيُونَ نِسَآءَكُمْۖ
और उसमें तुम्हारे अभिभावक की ओर से वह था जो विशाल रूप से परखता है।
وَفِے ذَٰلِكُم بَلَآءٞ مِّن رَّبِّكُمْ عَظِيمٞۖ
और जब हमने तुम्हारे लिए समुद्र को चीरा, और तुम्हें उबारा, और फ़िरऔन के कुल को डुबो दिया, जबकि तुम नज़र डाल रहे थे।
وَإِذْ فَرَقْنَا بِكُمُ اُ۬لْبَحْرَ فَأَنجَيْنَٰكُمْ وَأَغْرَقْنَآ ءَالَ فِرْعَوْنَ وَأَنتُمْ تَنظُرُونَۖ
और जब हमने मूसा के लिए चालीस रातों का वादे का समय तय किया; फिर उसके बाद तुमने बछड़े को अपना लिया, और तुम अन्याय करने वाले थे।
وَإِذْ وَٰعَدْنَا مُوس۪ىٰٓ أَرْبَعِينَ لَيْلَةٗ ثُمَّ اَ۪تَّخَذتُّمُ اُ۬لْعِجْلَ مِنۢ بَعْدِهِۦ وَأَنتُمْ ظَٰلِمُونَۖ
फिर इसके बाद हमने तुमसे दरगुज़र किया, शायद तुम कृतज्ञ हो जाओ।
ثُمَّ عَفَوْنَا عَنكُم مِّنۢ بَعْدِ ذَٰلِكَ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَۖ
और जब हमने मूसा को ग्रंथ दिया
وَإِذَ اٰتَيْنَا مُوسَى اَ۬لْكِتَٰبَۖ
और विवेक, शायद तुम मार्गदर्शन पाओ।
وَالْفُرْقَانَ لَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَۖ
और जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा: “हे मेरी क़ौम! तुमने बछड़े को अपनाकर निश्चय ही स्वयं पर अन्याय किया है; इसलिए उसकी ओर पलट आओ जिसने तुम्हें अस्तित्व दिया, और आपस में एक-दूसरे को मारो,
۞ وَإِذْ قَالَ مُوس۪ىٰ لِقَوْمِهِۦ يَٰقَوْمِ إِنَّكُمْ ظَلَمْتُمُۥٓ أَنفُسَكُم بِاتِّخَاذِكُمُ اُ۬لْعِجْلَ فَتُوبُوٓاْ إِلَىٰ بَارِئِكُمْ فَاقْتُلُوٓاْ أَنفُسَكُمْۖ
यही तुम्हारे लिए उसके निकट, जिसने तुम्हें अस्तित्व दिया, बेहतर है।”
ذَٰلِكُمْ خَيْرٞ لَّكُمْ عِندَ بَارِئِكُمْۖ
तब वह अनुकंपा के साथ तुम्हारी ओर पलटा,
فَتَابَ عَلَيْكُمُۥٓۖ
क्योंकि वही निरंतर पश्चात्ताप स्वीकार करने वाला, दयालु है।
إِنَّهُۥ هُوَ اَ۬لتَّوَّابُ اُ۬لرَّحِيمُۖ
और जब तुमने कहा: “हे मूसा! हम तुम पर तब तक भरोसा नहीं करेंगे जब तक ईश्वर को खुलकर न देख लें”; तब वज्रपात ने तुम्हें पकड़ लिया, जबकि तुम नज़र डाल रहे थे।
وَإِذْ قُلْتُمْ يَٰمُوس۪ىٰ لَن نُّومِنَ لَكَ حَتَّىٰ نَرَى اَ۬للَّهَ جَهْرَةٗ فَأَخَذَتْكُمُ اُ۬لصَّٰعِقَةُ وَأَنتُمْ تَنظُرُونَۖ
फिर हमने तुम्हारी मृत्यु के बाद तुम्हें उठाया, शायद तुम कृतज्ञ हो जाओ।
ثُمَّ بَعَثْنَٰكُم مِّنۢ بَعْدِ مَوْتِكُمْ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَۖ
और हमने तुम पर बादल की छाया फैलाई, और तुम पर मन्न और बटेरें उतारीं:
وَظَلَّلْنَا عَلَيْكُمُ اُ۬لْغَمَٰمَ وَأَنزَلْنَا عَلَيْكُمُ اُ۬لْمَنَّ وَالسَّلْو۪ىٰۖ
“हमने तुम्हें जो जीविका दी है उसमें से अच्छी चीज़ें खाओ” —
كُلُواْ مِن طَيِّبَٰتِ مَا رَزَقْنَٰكُمْۖ
उन्होंने हम पर अन्याय नहीं किया, बल्कि वे स्वयं पर ही अन्याय करते थे।
وَمَا ظَلَمُونَاۖ وَلَٰكِن كَانُوٓاْ أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَۖ
और जब हमने कहा: “इस बस्ती में प्रवेश करो, उसमें से जहाँ तुम्हारी मर्ज़ी हो भरपूर खाओ, द्वार से माथा टेके हुए प्रवेश करो, और कहो: हमें बोझमुक्त कीजिए — हम तुम्हारी भूलें क्षमा कर देंगे,
وَإِذْ قُلْنَا اَ۟دْخُلُواْ هَٰذِهِ اِ۬لْقَرْيَةَ فَكُلُواْ مِنْهَا حَيْثُ شِئْتُمْ رَغَداٗ وَادْخُلُواْ اُ۬لْبَابَ سُجَّداٗ وَقُولُواْ حِطَّةٞ يُغْفَرْ لَكُمْ خَطَٰيٰ۪كُمْۖ
और भलाई करने वालों को हम और अधिक देंगे।”
وَسَنَزِيدُ اُ۬لْمُحْسِنِينَۖ
किंतु जो अन्यायी थे उन्होंने उस कथन को, जो उनसे कहा गया था, किसी और कथन से बदल दिया; तब हमने उन अन्यायियों पर आकाश से एक मलिनता उतारी, इसलिए कि उन्होंने अतिक्रमण किया।
فَبَدَّلَ اَ۬لذِينَ ظَلَمُواْ قَوْلاً غَيْرَ اَ۬لذِے قِيلَ لَهُمْ فَأَنزَلْنَا عَلَى اَ۬لذِينَ ظَلَمُواْ رِجْزاٗ مِّنَ اَ۬لسَّمَآءِ بِمَا كَانُواْ يَفْسُقُونَۖ
और जब मूसा ने अपनी क़ौम के लिए पानी माँगा; हमने कहा: “अपनी छड़ी से चट्टान पर मारो”;
۞ وَإِذِ اِ۪سْتَسْق۪ىٰ مُوس۪ىٰ لِقَوْمِهِۦ فَقُلْنَا اَ۪ضْرِب بِّعَصَاكَ اَ۬لْحَجَرَۖ
और देखो, उससे बारह सोते फूट निकले:
فَانفَجَرَتْ مِنْهُ اُ۪ثْنَتَا عَشْرَةَ عَيْناٗۖ
लोगों के हर समूह ने अपने पानी पीने का स्थान जान लिया।
قَدْ عَلِمَ كُلُّ أُنَاسٖ مَّشْرَبَهُمْۖ
ईश्वर की दी हुई जीविका में से खाओ और पियो,
كُلُواْ وَاشْرَبُواْ مِن رِّزْقِ اِ۬للَّهِۖ
और धरती पर उपद्रव न फैलाओ, बिगाड़ने वाले बनकर।
وَلَا تَعْثَوْاْ فِے اِ۬لَارْضِ مُفْسِدِينَۖ
और जब तुमने कहा: “हे मूसा! हम एक ही भोजन पर कभी धैर्य नहीं रख पाएँगे; इसलिए हमारे लिए अपने अभिभावक को पुकारो, कि वह हमारे लिए निकाले उसमें से जो धरती उगाती है, उसकी साग-सब्ज़ी, उसके खीरे, उसका लहसुन, उसकी मसूर और उसके प्याज़।”
وَإِذْ قُلْتُمْ يَٰمُوس۪ىٰ لَن نَّصْبِرَ عَلَىٰ طَعَامٖ وَٰحِدٖ فَادْعُ لَنَا رَبَّكَ يُخْرِجْ لَنَا مِمَّا تُنۢبِتُ اُ۬لَارْضُ مِنۢ بَقْلِهَا وَقِثَّآئِهَا وَفُومِهَا وَعَدَسِهَا وَبَصَلِهَاۖ
उसने कहा: “क्या तुम उसे लेना चाहोगे जो निकट का है, उसके बदले जो बेहतर है?
قَالَ أَتَسْتَبْدِلُونَ اَ۬لذِے هُوَ أَدْن۪ىٰ بِالذِے هُوَ خَيْرٌۖ
तो मिस्र में नीचे जाओ, क्योंकि वहाँ तुम्हें वह मिलेगा जो तुमने माँगा है।”
اِ۪هْبِطُواْ مِصْراٗ فَإِنَّ لَكُم مَّا سَأَلْتُمْۖ
और अपमान और दरिद्रता उन पर चिपका दी गई, और वे ईश्वर के क्रोध के पात्र बने।
وَضُرِبَتْ عَلَيْهِمُ اُ۬لذِّلَّةُ وَالْمَسْكَنَةُ وَبَآءُو بِغَضَبٖ مِّنَ اَ۬للَّهِۖ
यह इसलिए कि वे ईश्वर के संकेतों को नकारते थे, और सूचनादाताओं को बिना हक़ के मार डालते थे।
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ كَانُواْ يَكْفُرُونَ بِـَٔايَٰتِ اِ۬للَّهِ وَيَقْتُلُونَ اَ۬لنَّبِيٓـِٕۧنَ بِغَيْرِ اِ۬لْحَقِّۖ
यह इसलिए कि उन्होंने अवज्ञा की और सीमाएँ पार कीं।
ذَٰلِكَ بِمَا عَصَواْ وَّكَانُواْ يَعْتَدُونَۖ
निश्चय ही, जिन्होंने विश्वास किया, पुनरुन्मुख, सहायक और आकांक्षी — जिसने भी ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास किया, और भला कर्म किया, उनका पुरस्कार उनके अभिभावक के पास उनके लिए है, उन पर कोई डर नहीं, और न वे दुखी होंगे।
إِنَّ اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ وَالذِينَ هَادُواْ وَالنَّصَٰر۪ىٰ وَالصَّٰبِينَ مَنَ اٰمَنَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ اِ۬لَاخِرِ وَعَمِلَ صَٰلِحاٗ فَلَهُمُۥٓ أَجْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ وَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَۖ
और जब हमने तुम्हारी गंभीर प्रतिज्ञा ली, और तुम्हारे ऊपर पर्वत को ऊँचा किया:
وَإِذَ اَخَذْنَا مِيثَٰقَكُمْ وَرَفَعْنَا فَوْقَكُمُ اُ۬لطُّورَۖ
“जो हमने तुम्हें दिया है उसे दृढ़ता से थामो, और जो उसमें है उसे स्मरण रखो, शायद तुम सावधान रहो।”
خُذُواْ مَآ ءَاتَيْنَٰكُم بِقُوَّةٖ وَاذْكُرُواْ مَا فِيهِ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَۖ
फिर इसके बाद तुमने पीठ फेर ली;
ثُمَّ تَوَلَّيْتُم مِّنۢ بَعْدِ ذَٰلِكَۖ
और यदि तुम पर ईश्वर का अनुग्रह और उसकी दया न होती, तो तुम घाटा उठाने वालों में से होते।
فَلَوْلَا فَضْلُ اُ۬للَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُۥ لَكُنتُم مِّنَ اَ۬لْخَٰسِرِينَۖ
तुम उन्हें निश्चय ही जान चुके हो जिन्होंने तुममें से विराम के दिन के विषय में सीमाएँ पार कीं; तब हमने उनसे कहा: “दुत्कारे हुए बंदर बन जाओ।”
وَلَقَدْ عَلِمْتُمُ اُ۬لذِينَ اَ۪عْتَدَوْاْ مِنكُمْ فِے اِ۬لسَّبْتِ فَقُلْنَا لَهُمْ كُونُواْ قِرَدَةً خَٰسِـِٕينَۖ
हमने इसे उसके लिए जो इससे पहले था और जो इसके बाद था एक निवारक उदाहरण बनाया, और सावधानी बरतने वालों के लिए एक उपदेश।
فَجَعَلْنَٰهَا نَكَٰلاٗ لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهَا وَمَا خَلْفَهَا وَمَوْعِظَةٗ لِّلْمُتَّقِينَۖ
और जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा: “ईश्वर तुम्हें आदेश देता है कि एक गाय का गला काटो।”
۞ وَإِذْ قَالَ مُوس۪ىٰ لِقَوْمِهِۦٓ إِنَّ اَ۬للَّهَ يَامُرُكُمُۥٓ أَن تَذْبَحُواْ بَقَرَةٗۖ
उन्होंने कहा: “क्या तुम हमारा मज़ाक़ उड़ाते हो?”
قَالُوٓاْ أَتَتَّخِذُنَا هُزُؤاٗۖ
उसने कहा: “मैं स्वयं को ईश्वर की छत्रछाया में रखता हूँ कि मैं अज्ञानियों में से न होऊँ।”
قَالَ أَعُوذُ بِاللَّهِ أَنَ اَكُونَ مِنَ اَ۬لْجَٰهِلِينَۖ
उन्होंने कहा: “हमारे लिए अपने अभिभावक को पुकारो, कि वह हमें स्पष्ट करे कि वह क्या है।”
قَالُواْ اُ۟دْعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا هِيَۖ
उसने कहा: “वह कहता है कि वह एक गाय है, न बूढ़ी और न कुँवारी,
قَالَ إِنَّهُۥ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٞ لَّا فَارِضٞ وَلَا بِكْرٌۖ
इन दोनों के बीच मध्यम आयु की;
عَوَانُۢ بَيْنَ ذَٰلِكَۖ
इसलिए वही करो जिसका तुम्हें आदेश दिया गया है।”
فَافْعَلُواْ مَا تُومَرُونَۖ
उन्होंने कहा: “हमारे लिए अपने अभिभावक को पुकारो, कि वह हमें स्पष्ट करे कि उसका रंग क्या है।”
قَالُواْ اُ۟دْعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا لَوْنُهَاۖ
उसने कहा: “वह कहता है कि वह एक पीली गाय है, चटक रंग की,
قَالَ إِنَّهُۥ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٞ صَفْرَآءُ فَاقِعٞ لَّوْنُهَاۖ
जो निगाहों को भा जाती है।”
تَسُرُّ اُ۬لنَّٰظِرِينَۖ
उन्होंने कहा: “हमारे लिए अपने अभिभावक को पुकारो, कि वह हमें स्पष्ट करे कि वह क्या है: गायें सब हमारी दृष्टि में एक-सी हैं, और हम अवश्य, यदि ईश्वर की मर्ज़ी हो, मार्गदर्शन पाने वालों में से होंगे।”
قَالُواْ اُ۟دْعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا هِيَ إِنَّ اَ۬لْبَقَرَ تَشَٰبَهَ عَلَيْنَا وَإِنَّآ إِن شَآءَ اَ۬للَّهُ لَمُهْتَدُونَۖ
उसने कहा: “वह कहता है कि वह एक ऐसी गाय है जो भूमि को उलटने के लिए और खेत को सींचने के लिए सधाई नहीं गई,
قَالَ إِنَّهُۥ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٞ لَّا ذَلُولٞ تُثِيرُ اُ۬لَارْضَ وَلَا تَسْقِے اِ۬لْحَرْثَۖ
सही-सलामत, जिसमें कोई दाग़ नहीं।”
مُسَلَّمَةٞ لَّا شِيَةَ فِيهَاۖ
उन्होंने कहा: “अब तुम सत्य लाए हो।”
قَالُواْ اُ۬لَٰنَ جِئْتَ بِالْحَقِّۖ
तब उन्होंने उसका गला काटा, जबकि वे लगभग ऐसा न करते।
فَذَبَحُوهَا وَمَا كَادُواْ يَفْعَلُونَۖ
और जब तुमने एक स्व को मार डाला, और उसके विषय में एक-दूसरे पर टालने लगे —
وَإِذْ قَتَلْتُمْ نَفْساٗ فَادَّٰرَٰٔتُمْ فِيهَاۖ
जबकि ईश्वर उसे निकालने वाला था जो तुम दबाते थे।
وَاللَّهُ مُخْرِجٞ مَّا كُنتُمْ تَكْتُمُونَۖ
तब हमने कहा: “उसे उसके एक भाग से मारो”;
فَقُلْنَا اَ۪ضْرِبُوهُ بِبَعْضِهَاۖ
इस प्रकार ईश्वर मृतकों को जीवन देता है, और तुम्हें अपने संकेत दिखाता है, शायद तुम बुद्धि से काम लो।
كَذَٰلِكَ يُحْيِ اِ۬للَّهُ اُ۬لْمَوْت۪ىٰ وَيُرِيكُمُۥٓ ءَايَٰتِهِۦ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَۖ
फिर इसके बाद तुम्हारे मर्म सख़्त हो गए, यहाँ तक कि वे पत्थर जैसे हैं, या उससे भी अधिक कठोर।
ثُمَّ قَسَتْ قُلُوبُكُم مِّنۢ بَعْدِ ذَٰلِكَ فَهِيَ كَالْحِجَارَةِ أَوَ اَشَدُّ قَسْوَةٗۖ
और पत्थरों में अवश्य ऐसे हैं जिनसे नदियाँ फूट निकलती हैं;
وَإِنَّ مِنَ اَ۬لْحِجَارَةِ لَمَا يَتَفَجَّرُ مِنْهُ اُ۬لَانْهَٰرُۖ
और उनमें अवश्य ऐसे भी हैं जो फट जाते हैं, और उनसे पानी निकलता है;
وَإِنَّ مِنْهَا لَمَا يَشَّقَّقُ فَيَخْرُجُ مِنْهُ اُ۬لْمَآءُۖ
और उनमें अवश्य ऐसे भी हैं जो नीचे गिर पड़ते हैं, ईश्वर का भय रखते हुए।
وَإِنَّ مِنْهَا لَمَا يَهْبِطُ مِنْ خَشْيَةِ اِ۬للَّهِۖ
और ईश्वर उससे लापरवाह नहीं जो तुम करते हो।
وَمَا اَ۬للَّهُ بِغَٰفِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَۖ
क्या तुम लालसा रखते हो कि वे तुम पर भरोसा करें, जबकि उनमें से एक भाग ईश्वर का बोल सुनता था, फिर उस पर बुद्धि से काम लेने के बाद तोड़-मरोड़ देता था, जानते हुए?
أَفَتَطْمَعُونَ أَنْ يُّومِنُواْ لَكُمْ وَقَدْ كَانَ فَرِيقٞ مِّنْهُمْ يَسْمَعُونَ كَلَٰمَ اَ۬للَّهِ ثُمَّ يُحَرِّفُونَهُۥ مِنۢ بَعْدِ مَا عَقَلُوهُ وَهُمْ يَعْلَمُونَۖ
और जब वे उनसे मिलते हैं जिन्होंने विश्वास किया, तो कहते हैं: “हमने विश्वास किया”;
۞ وَإِذَا لَقُواْ اُ۬لذِينَ ءَامَنُواْ قَالُوٓاْ ءَامَنَّاۖ
और जब वे आपस में अकेले होते हैं, तो कहते हैं: “क्या तुम उन्हें बताओगे जो ईश्वर ने तुम पर खोला है, कि वे उसे लेकर तुम्हारे अभिभावक के पास तुमसे विवाद करें?”
وَإِذَا خَلَا بَعْضُهُمُۥٓ إِلَىٰ بَعْضٖ قَالُوٓاْ أَتُحَدِّثُونَهُم بِمَا فَتَحَ اَ۬للَّهُ عَلَيْكُمْ لِيُحَآجُّوكُم بِهِۦ عِندَ رَبِّكُمُۥٓۖ
तो क्या तुम बुद्धि से काम नहीं लेते?
أَفَلَا تَعْقِلُونَۖ
क्या वे नहीं जानते कि ईश्वर जानता है जो वे गुप्त रखते हैं और जो वे उजागर करते हैं?
أَوَلَا يَعْلَمُونَ أَنَّ اَ۬للَّهَ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَۖ
और उनमें कुछ ऐसे भी हैं जिनके पास पहले से कोई ग्रंथ न था, जो ग्रंथ को केवल व्यर्थ आशाओं के रूप में जानते हैं,
وَمِنْهُمُۥٓ أُمِّيُّونَ لَا يَعْلَمُونَ اَ۬لْكِتَٰبَ إِلَّآ أَمَانِيَّۖ
और जो केवल अनुमान लगाते हैं।
وَإِنْ هُمُۥٓ إِلَّا يَظُنُّونَۖ
तो हाय उन पर जो अपने हाथों से ग्रंथ लिखते हैं, फिर कहते हैं: “यह ईश्वर की ओर से है”, ताकि उसके बदले तुच्छ मूल्य ख़रीदें!
فَوَيْلٞ لِّلذِينَ يَكْتُبُونَ اَ۬لْكِتَٰبَ بِأَيْدِيهِمْ ثُمَّ يَقُولُونَ هَٰذَا مِنْ عِندِ اِ۬للَّهِ لِيَشْتَرُواْ بِهِۦ ثَمَناٗ قَلِيلاٗۖ
हाय उन पर, उसके कारण जो उनके हाथों ने लिखा,
فَوَيْلٞ لَّهُم مِّمَّا كَتَبَتَ اَيْدِيهِمْۖ
और हाय उन पर, उसके कारण जो वे कमाते हैं!
وَوَيْلٞ لَّهُم مِّمَّا يَكْسِبُونَۖ
और उन्होंने कहा: “आग हमें केवल गिने-चुने दिनों के लिए छुएगी।”
وَقَالُواْ لَن تَمَسَّنَا اَ۬لنَّارُ إِلَّآ أَيَّاماٗ مَّعْدُودَةٗۖ
कहो: “क्या तुमने ईश्वर के पास से कोई संधि ली है — ईश्वर अपनी संधि से कभी नहीं मुकरता —
قُلَ اَتَّخَذتُّمْ عِندَ اَ۬للَّهِ عَهْداٗ فَلَنْ يُّخْلِفَ اَ۬للَّهُ عَهْدَهُۥٓۖ
या तुम ईश्वर के विषय में वह कहते हो जो तुम नहीं जानते?”
أَمْ تَقُولُونَ عَلَى اَ۬للَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَۖ
क्यों नहीं: जो कोई बुरा कर्म कमाए, और उसकी भूल उसे घेर ले — वही आग वाले हैं, वे उसमें सदा रहते हैं।
بَل۪ىٰ مَن كَسَبَ سَيِّئَةٗ وَأَحَٰطَتْ بِهِۦ خَطِيٓـَٰٔتُهُۥ فَأُوْلَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ اُ۬لنّ۪ارِ هُمْ فِيهَا خَٰلِدُونَۖ
और जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए — वही उद्यान वाले हैं, वे उसमें सदा रहते हैं।
وَالذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ أُوْلَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ اُ۬لْجَنَّةِ هُمْ فِيهَا خَٰلِدُونَۖ
और जब हमने इसराईल की संतान की गंभीर प्रतिज्ञा ली: “तुम ईश्वर के अतिरिक्त किसी की आज्ञा का पालन नहीं करोगे,
وَإِذَ اَخَذْنَا مِيثَٰقَ بَنِےٓ إِسْرَآءِيلَ لَا تَعْبُدُونَ إِلَّا اَ۬للَّهَۖ
और माता-पिता, निकट-संबंधियों, अनाथों और दरिद्रों के प्रति भलाई करोगे;
وَبِالْوَٰلِدَيْنِ إِحْسَٰناٗ وَذِے اِ۬لْقُرْب۪ىٰ وَالْيَتَٰم۪ىٰ وَالْمَسَٰكِينِۖ
और लोगों से वह कहो जो सुंदर है;
وَقُولُواْ لِلنَّاسِ حُسْناٗۖ
और संपर्क बनाए रखो, और शुद्ध उदारता दो”;
وَأَقِيمُواْ اُ۬لصَّلَوٰةَ وَءَاتُواْ اُ۬لزَّكَوٰةَۖ
फिर तुमने पीठ फेर ली, तुममें से थोड़े-से को छोड़कर, टालमटोल करते हुए।
ثُمَّ تَوَلَّيْتُمُۥٓ إِلَّا قَلِيلاٗ مِّنكُمْ وَأَنتُم مُّعْرِضُونَۖ
और जब हमने तुम्हारी गंभीर प्रतिज्ञा ली: “तुम अपना रक्त नहीं बहाओगे, और अपने ठिकानों से एक-दूसरे को नहीं निकालोगे”; फिर तुमने उसे स्वीकार किया, और तुम साक्षी हो।
وَإِذَ اَخَذْنَا مِيثَٰقَكُمْ لَا تَسْفِكُونَ دِمَآءَكُمْ وَلَا تُخْرِجُونَ أَنفُسَكُم مِّن دِيٰ۪رِكُمْ ثُمَّ أَقْرَرْتُمْ وَأَنتُمْ تَشْهَدُونَۖ
फिर भी देखो तुम एक-दूसरे को मारते हो, और अपनों में से एक भाग को उनके ठिकानों से निकालते हो, अपराध और वैर में उनके विरुद्ध एक-दूसरे का साथ देते हुए;
ثُمَّ أَنتُمْ هَٰٓؤُلَآءِ تَقْتُلُونَ أَنفُسَكُمْ وَتُخْرِجُونَ فَرِيقاٗ مِّنكُم مِّن دِيٰ۪رِهِمْ تَظَّٰهَرُونَ عَلَيْهِم بِالِاثْمِ وَالْعُدْوَٰنِۖ
और यदि वे बंदी बनकर तुम्हारे पास आएँ, तो तुम उनकी अदला-बदली करते हो, जबकि उनका निकाला जाना तुम पर वर्जित था।
۞ وَإِنْ يَّاتُوكُمُۥٓ أُسَٰر۪ىٰ تُفَٰدُوهُمْ وَهُوَ مُحَرَّمٌ عَلَيْكُمُۥٓ إِخْرَاجُهُمُۥٓۖ
क्या तुम ग्रंथ के एक भाग पर विश्वास करते हो, और दूसरे भाग को नकारते हो?
أَفَتُومِنُونَ بِبَعْضِ اِ۬لْكِتَٰبِ وَتَكْفُرُونَ بِبَعْضٖۖ
तो तुममें से जो ऐसा करे, उसका प्रतिफल इहलोक के जीवन में लज्जा के सिवा और क्या है?
فَمَا جَزَآءُ مَنْ يَّفْعَلُ ذَٰلِكَ مِنكُمُۥٓ إِلَّا خِزْيٞ فِے اِ۬لْحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنْي۪اۖ
और पेशी के दिन वे सबसे कठोर दंड की ओर वापस लाए जाएँगे।
وَيَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِ يُرَدُّونَ إِلَىٰٓ أَشَدِّ اِ۬لْعَذَابِۖ
और ईश्वर उससे लापरवाह नहीं जो वे करते हैं।
وَمَا اَ۬للَّهُ بِغَٰفِلٍ عَمَّا يَعْمَلُونَۖ
यही वे हैं जिन्होंने अंतिम जीवन के बदले इहलोक का जीवन ख़रीदा; इसलिए उनका दंड हल्का नहीं किया जाएगा, और उनकी सहायता नहीं की जाएगी।
أُوْلَٰٓئِكَ اَ۬لذِينَ اَ۪شْتَرَوُاْ اُ۬لْحَيَوٰةَ اَ۬لدُّنْي۪ا بِالَاخِرَةِ فَلَا يُخَفَّفُ عَنْهُمُ اُ۬لْعَذَابُ وَلَا هُمْ يُنصَرُونَۖ
हमने निश्चय ही मूसा को ग्रंथ दिया, और उसके बाद संदेशवाहकों को क्रम से भेजा।
وَلَقَدَ اٰتَيْنَا مُوسَى اَ۬لْكِتَٰبَ وَقَفَّيْنَا مِنۢ بَعْدِهِۦ بِالرُّسُلِۖ
और हमने मरयम के पुत्र ईसा को स्पष्ट प्रमाण दिए, और उसे पवित्र प्रवाह से सुदृढ़ किया।
وَءَاتَيْنَا عِيسَى اَ۪بْنَ مَرْيَمَ اَ۬لْبَيِّنَٰتِ وَأَيَّدْنَٰهُ بِرُوحِ اِ۬لْقُدُسِۖ
तो जब भी कोई संदेशवाहक तुम्हारे पास वह लेकर आया जिसकी ओर तुम्हारे अपने स्व नहीं झुकते थे, क्या तुम घमंड से नहीं फूल गए?
أَفَكُلَّمَا جَآءَكُمْ رَسُولُۢ بِمَا لَا تَهْو۪ىٰٓ أَنفُسُكُمُ اُ۪سْتَكْبَرْتُمْۖ
तुमने उनमें से एक भाग को झुठलाया, और दूसरे भाग को तुम मार डालते हो।
فَفَرِيقاٗ كَذَّبْتُمْۖ وَفَرِيقاٗ تَقْتُلُونَۖ
और उन्होंने कहा: “हमारे मर्म ढके हुए हैं”;
وَقَالُواْ قُلُوبُنَا غُلْفُۢۖ
नहीं, ईश्वर ने उन्हें उनके नकार के कारण धिक्कारा, और वे थोड़ा ही विश्वास करते हैं।
بَل لَّعَنَهُمُ اُ۬للَّهُ بِكُفْرِهِمْ فَقَلِيلاٗ مَّا يُومِنُونَۖ
और जब उनके पास ईश्वर की ओर से एक ग्रंथ आया, जो उसकी पुष्टि करता है जो उनके पास है — जबकि इससे पहले वे नकारने वालों के विरुद्ध उद्घाटन माँगा करते थे —
وَلَمَّا جَآءَهُمْ كِتَٰبٞ مِّنْ عِندِ اِ۬للَّهِ مُصَدِّقٞ لِّمَا مَعَهُمْ وَكَانُواْ مِن قَبْلُ يَسْتَفْتِحُونَ عَلَى اَ۬لذِينَ كَفَرُواْۖ
तो जब उनके पास वह आया जिसे वे पहचानते थे, उन्होंने उसे नकार दिया।
فَلَمَّا جَآءَهُم مَّا عَرَفُواْ كَفَرُواْ بِهِۦۖ
इसलिए नकारने वालों पर ईश्वर का धिक्कार है।
فَلَعْنَةُ اُ۬للَّهِ عَلَى اَ۬لْكٰ۪فِرِينَۖ
कितना भयानक है वह जिसके बदले उन्होंने अपना स्व ख़रीदा: उसे नकारना जो ईश्वर ने उतारा है, ज़्यादती से, इसलिए कि ईश्वर अपने आज्ञाकारियों में से जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उस पर अपना अनुग्रह उतारता है!
بِيسَمَا اَ۪شْتَرَوْاْ بِهِۦٓ أَنفُسَهُمُۥٓ أَنْ يَّكْفُرُواْ بِمَآ أَنزَلَ اَ۬للَّهُ بَغْياً اَنْ يُّنَزِّلَ اَ۬للَّهُ مِن فَضْلِهِۦ عَلَىٰ مَنْ يَّشَآءُ مِنْ عِبَادِهِۦۖ
इसलिए वे क्रोध पर क्रोध के पात्र बने।
فَبَآءُو بِغَضَبٍ عَلَىٰ غَضَبٖۖ
और नकारने वालों के लिए हीन करने वाला दंड है।
وَلِلْكٰ۪فِرِينَ عَذَابٞ مُّهِينٞۖ
और जब उनसे कहा जाता है: “उस पर विश्वास करो जो ईश्वर ने उतारा है”, तो वे कहते हैं: “हम उस पर विश्वास करते हैं जो हम पर उतारा गया”; और वे उसे नकारते हैं जो उसके परे है,
وَإِذَا قِيلَ لَهُمُۥٓ ءَامِنُواْ بِمَآ أَنزَلَ اَ۬للَّهُ قَالُواْ نُومِنُ بِمَآ أُنزِلَ عَلَيْنَا وَيَكْفُرُونَ بِمَا وَرَآءَهُۥۖ
जबकि वही सत्य है, उसकी पुष्टि करता हुआ जो उनके पास है।
وَهُوَ اَ۬لْحَقُّ مُصَدِّقاٗ لِّمَا مَعَهُمْۖ
कहो: “तो फिर तुमने इससे पहले ईश्वर के सूचनादाताओं को क्यों मार डाला, यदि तुम विश्वास करने वाले थे?”
قُلْ فَلِمَ تَقْتُلُونَ أَنۢبِئَآءَ اَ۬للَّهِ مِن قَبْلُ إِن كُنتُم مُّومِنِينَۖ
मूसा तुम्हारे पास निश्चय ही स्पष्ट प्रमाणों के साथ आया; फिर उसके बाद तुमने बछड़े को अपना लिया, और तुम अन्याय करने वाले थे।
۞ وَلَقَدْ جَآءَكُم مُّوس۪ىٰ بِالْبَيِّنَٰتِ ثُمَّ اَ۪تَّخَذتُّمُ اُ۬لْعِجْلَ مِنۢ بَعْدِهِۦ وَأَنتُمْ ظَٰلِمُونَۖ
और जब हमने तुम्हारी गंभीर प्रतिज्ञा ली, और तुम्हारे ऊपर पर्वत को ऊँचा किया:
وَإِذَ اَخَذْنَا مِيثَٰقَكُمْ وَرَفَعْنَا فَوْقَكُمُ اُ۬لطُّورَۖ
“जो हमने तुम्हें दिया है उसे दृढ़ता से थामो, और सुनो।”
خُذُواْ مَآ ءَاتَيْنَٰكُم بِقُوَّةٖ وَاسْمَعُواْۖ
उन्होंने कहा: “हमने सुना और अवज्ञा की”;
قَالُواْ سَمِعْنَا وَعَصَيْنَاۖ
और उनके मर्मों को उनके नकार के कारण बछड़ा पिला दिया गया।
وَأُشْرِبُواْ فِے قُلُوبِهِمُ اُ۬لْعِجْلَ بِكُفْرِهِمْۖ
कहो: “कितना भयानक है वह जिसका आदेश तुम्हारा विश्वास तुम्हें देता है, यदि तुम विश्वास करने वाले हो!”
قُلْ بِيسَمَا يَامُرُكُم بِهِۦٓ إِيمَٰنُكُمُۥٓ إِن كُنتُم مُّومِنِينَۖ
कहो: “यदि ईश्वर के पास अंतिम ठिकाना केवल तुम्हारे लिए है, लोगों को छोड़कर, तो मृत्यु की इच्छा करो, यदि तुम सच्चे हो।”
قُلِ اِن كَانَتْ لَكُمُ اُ۬لدَّارُ اُ۬لَاخِرَةُ عِندَ اَ۬للَّهِ خَالِصَةٗ مِّن دُونِ اِ۬لنَّاسِ فَتَمَنَّوُاْ اُ۬لْمَوْتَ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَۖ
किंतु वे उसकी इच्छा कभी नहीं करेंगे, उसके कारण जो उनके हाथों ने आगे बढ़ाया।
وَلَنْ يَّتَمَنَّوْهُ أَبَداَۢ بِمَا قَدَّمَتَ اَيْدِيهِمْۖ
और ईश्वर अन्यायियों के विषय में सर्वज्ञ है।
وَاللَّهُ عَلِيمُۢ بِالظَّٰلِمِينَۖ
और तुम उन्हें अवश्य सब लोगों में जीवन से सबसे अधिक चिपके हुए पाओगे,
وَلَتَجِدَنَّهُمُۥٓ أَحْرَصَ اَ۬لنَّاسِ عَلَىٰ حَيَوٰةٖۖ
उनसे भी अधिक जिन्होंने साझी ठहराया; उनमें से एक हज़ार वर्ष जीना चाहेगा,
وَمِنَ اَ۬لذِينَ أَشْرَكُواْ يَوَدُّ أَحَدُهُمْ لَوْ يُعَمَّرُ أَلْفَ سَنَةٖۖ
किंतु यह उसे दंड से किसी तरह बचा नहीं पाएगा, भले ही वह उतना ही लंबा जिए।
وَمَا هُوَ بِمُزَحْزِحِهِۦ مِنَ اَ۬لْعَذَابِ أَنْ يُّعَمَّرَۖ
ईश्वर उस पर दृष्टि रखता है जो वे करते हैं।
وَاللَّهُ بَصِيرُۢ بِمَا يَعْمَلُونَۖ
कहो: “जो कोई जिब्रील का शत्रु है, वह जान ले कि उसी ने उसे तुम्हारे मर्म पर उतारा है, ईश्वर की अनुमति से, उसकी पुष्टि करता हुआ जो उससे पहले है, और विश्वास करने वालों के लिए मार्गदर्शन और शुभ समाचार के रूप में।”
قُلْ مَن كَانَ عَدُوّاٗ لِّـجِبْرِيلَ فَإِنَّهُۥ نَزَّلَهُۥ عَلَىٰ قَلْبِكَ بِإِذْنِ اِ۬للَّهِ مُصَدِّقاٗ لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ وَهُدىٗ وَبُشْر۪ىٰ لِلْمُومِنِينَۖ
जो कोई ईश्वर का, उसके अभिकर्ताओं का, उसके संदेशवाहकों का, जिब्रील का और मीकाल का शत्रु है, वह जान ले कि ईश्वर निश्चय ही नकारने वालों का शत्रु है।
مَن كَانَ عَدُوّاٗ لِّلهِ وَمَلَٰٓئِكَتِهِۦ وَرُسُلِهِۦ وَجِبْرِيلَ وَمِيكَٰٓئِلَ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ عَدُوّٞ لِّلْكٰ۪فِرِينَۖ
हमने निश्चय ही तुम्हारी ओर स्पष्ट संकेत उतारे हैं,
وَلَقَدَ اَنزَلْنَآ إِلَيْكَ ءَايَٰتِۢ بَيِّنَٰتٖۖ
और उन्हें केवल अतिक्रमणकारी ही नकारते हैं।
وَمَا يَكْفُرُ بِهَآ إِلَّا اَ۬لْفَٰسِقُونَۖ
क्या ऐसा है कि जब भी वे कोई संधि करते हैं, उनमें से एक भाग उसे ठुकरा देता है?
أَوَكُلَّمَا عَٰهَدُواْ عَهْداٗ نَّبَذَهُۥ فَرِيقٞ مِّنْهُمۖ
बल्कि उनमें से अधिकतर विश्वास नहीं करते।
بَلَ اَكْثَرُهُمْ لَا يُومِنُونَۖ
और जब उनके पास ईश्वर की ओर से एक संदेशवाहक आया, उसकी पुष्टि करता हुआ जो उनके पास है, तो जिन्हें ग्रंथ दिया गया था उनमें से एक भाग ने ईश्वर के ग्रंथ को अपनी पीठ के पीछे फेंक दिया, मानो वे जानते ही न हों।
۞ وَلَمَّا جَآءَهُمْ رَسُولٞ مِّنْ عِندِ اِ۬للَّهِ مُصَدِّقٞ لِّمَا مَعَهُمْ نَبَذَ فَرِيقٞ مِّنَ اَ۬لذِينَ أُوتُواْ اُ۬لْكِتَٰبَ كِتَٰبَ اَ۬للَّهِ وَرَآءَ ظُهُورِهِمْ كَأَنَّهُمْ لَا يَعْلَمُونَۖ
और उन्होंने उसका अनुसरण किया जो बहकाने वाले सुलैमान के राजत्व के विषय में सुनाते थे।
وَاتَّبَعُواْ مَا تَتْلُواْ اُ۬لشَّيَٰطِينُ عَلَىٰ مُلْكِ سُلَيْمَٰنَۖ
जबकि सुलैमान ने कभी नहीं नकारा,
وَمَا كَفَرَ سُلَيْمَٰنُۖ
बल्कि बहकाने वालों ने नकारा, जो लोगों को भ्रम सिखाते थे, और उसे भी जो बाबिल में दो राजाओं, हारूत और मारूत, पर उतारा गया;
وَلَٰكِنَّ اَ۬لشَّيَٰطِينَ كَفَرُواْ يُعَلِّمُونَ اَ۬لنَّاسَ اَ۬لسِّحْرَ وَمَآ أُنزِلَ عَلَى اَ۬لْمَلَكَيْنِ بِبَابِلَ هَارُوتَ وَمَارُوتَۖ
और वे दोनों किसी को तब तक नहीं सिखाते थे जब तक पहले यह न कह दें: “हम तो केवल एक परीक्षा हैं, इसलिए नकारो मत।”
وَمَا يُعَلِّمَٰنِ مِنَ اَحَدٍ حَتَّىٰ يَقُولَآ إِنَّمَا نَحْنُ فِتْنَةٞ فَلَا تَكْفُرْۖ
फिर वे उनसे वह सीखते जिससे वे व्यक्ति को उसके जोड़ीदार से अलग करते हैं;
فَيَتَعَلَّمُونَ مِنْهُمَا مَا يُفَرِّقُونَ بِهِۦ بَيْنَ اَ۬لْمَرْءِ وَزَوْجِهِۦۖ
किंतु वे उससे किसी को हानि नहीं पहुँचाते, ईश्वर की अनुमति के बिना।
وَمَا هُم بِضَآرِّينَ بِهِۦ مِنَ اَحَدٍ اِلَّا بِإِذْنِ اِ۬للَّهِۖ
और वे वह सीखते हैं जो उन्हें हानि पहुँचाता है और लाभ नहीं देता।
وَيَتَعَلَّمُونَ مَا يَضُرُّهُمْ وَلَا يَنفَعُهُمْۖ
वे निश्चय ही जानते थे कि जो कोई उसे ख़रीदे, उसका अंतिम जीवन में कोई हिस्सा न होगा।
وَلَقَدْ عَلِمُواْ لَمَنِ اِ۪شْتَر۪يٰهُ مَا لَهُۥ فِے اِ۬لَاخِرَةِ مِنْ خَلَٰقٖۖ
और कितना भयानक है वह जिसके बदले उन्होंने अपना स्व बेच दिया, काश वे जानते!
وَلَبِيسَ مَا شَرَوْاْ بِهِۦٓ أَنفُسَهُمْ لَوْ كَانُواْ يَعْلَمُونَۖ
और यदि वे विश्वास करते और सावधान रहते, तो ईश्वर की ओर से मिलने वाला प्रतिदान निश्चय ही बेहतर होता, काश वे जानते।
وَلَوَ اَنَّهُمُۥٓ ءَامَنُواْ وَاتَّقَوْاْ لَمَثُوبَةٞ مِّنْ عِندِ اِ۬للَّهِ خَيْرٞ لَّوْ كَانُواْ يَعْلَمُونَۖ
हे विश्वास करने वालो! “हमारी उपेक्षा करो” न कहो, बल्कि कहो “हम पर नज़र डालो”, और सुनो।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَقُولُواْ رَٰعِنَا وَقُولُواْ اُ۟نظُرْنَا وَاسْمَعُواْۖ
और नकारने वालों के लिए पीड़ादायक दंड है।
وَلِلْكٰ۪فِرِينَ عَذَابٌ اَلِيمٞۖ
ग्रंथ वालों में से जो नकारते हैं, वे और साझी ठहराने वाले नहीं चाहते कि तुम्हारे अभिभावक की ओर से तुम पर कोई अच्छाई उतारी जाए;
مَّا يَوَدُّ اُ۬لذِينَ كَفَرُواْ مِنَ اَهْلِ اِ۬لْكِتَٰبِ وَلَا اَ۬لْمُشْرِكِينَ أَنْ يُّنَزَّلَ عَلَيْكُم مِّنْ خَيْرٖ مِّن رَّبِّكُمْۖ
किंतु ईश्वर अपनी दया जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसके लिए विशेष रखता है।
وَاللَّهُ يَخْتَصُّ بِرَحْمَتِهِۦ مَنْ يَّشَآءُۖ
और ईश्वर विशाल अनुग्रह वाला है।
وَاللَّهُ ذُو اُ۬لْفَضْلِ اِ۬لْعَظِيمِۖ
हम जिस भी संकेत की प्रतिलिपि बनाते हैं, या जिसे भुला देते हैं, उससे बेहतर या उसके जैसा ले आते हैं।
۞ مَا نَنسَخْ مِنَ اٰيَةٍ اَوْ نُنسِهَا نَاتِ بِخَيْرٖ مِّنْهَآ أَوْ مِثْلِهَآۖ
क्या तुम नहीं जानते कि ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है?
أَلَمْ تَعْلَمَ اَنَّ اَ۬للَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَےْءٖ قَدِيرٌۖ
क्या तुम नहीं जानते कि ईश्वर का है आकाशों और धरती का राजत्व, और यह कि ईश्वर के अतिरिक्त तुम्हारा न कोई आश्रयदाता है न कोई सहायता?
اَلَمْ تَعْلَمَ اَنَّ اَ۬للَّهَ لَهُۥ مُلْكُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالَارْضِ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ اِ۬للَّهِ مِنْ وَّلِيّٖ وَلَا نَصِيرٍۖ
या क्या तुम अपने संदेशवाहक से वैसे प्रश्न करना चाहोगे जैसे मूसा से पहले प्रश्न किए गए?
اَمْ تُرِيدُونَ أَن تَسْـَٔلُواْ رَسُولَكُمْ كَمَا سُئِلَ مُوس۪ىٰ مِن قَبْلُۖ
और जो कोई विश्वास के बदले नकार को अपनाए, वह ठीक राह से भटक गया।
وَمَنْ يَّتَبَدَّلِ اِ۬لْكُفْرَ بِالِايمَٰنِ فَقَد ضَّلَّ سَوَآءَ اَ۬لسَّبِيلِۖ
ग्रंथ वालों में से बहुत-से चाहते हैं कि तुम्हारे विश्वास के बाद तुम्हें फिर एक नकार की ओर वापस ले जाएँ,
وَدَّ كَثِيرٞ مِّنَ اَهْلِ اِ۬لْكِتَٰبِ لَوْ يَرُدُّونَكُم مِّنۢ بَعْدِ إِيمَٰنِكُمْ كُفَّاراًۖ
ईर्ष्या से, अपनी ओर से, इसके बाद कि सत्य उन पर स्पष्ट हो चुका है।
حَسَداٗ مِّنْ عِندِ أَنفُسِهِم مِّنۢ بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُ اُ۬لْحَقُّۖ
इसलिए दरगुज़र करो और पन्ना पलट दो, जब तक ईश्वर अपना आदेश न ले आए,
فَاعْفُواْ وَاصْفَحُواْ حَتَّىٰ يَاتِيَ اَ۬للَّهُ بِأَمْرِهِۦٓۖ
क्योंकि ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَےْءٖ قَدِيرٞۖ
और संपर्क बनाए रखो, और शुद्ध उदारता दो।
وَأَقِيمُواْ اُ۬لصَّلَوٰةَ وَءَاتُواْ اُ۬لزَّكَوٰةَۖ
और जो भी अच्छाई तुम अपने लिए आगे बढ़ाते हो, उसे तुम ईश्वर के पास पाओगे,
وَمَا تُقَدِّمُواْ لِأَنفُسِكُم مِّنْ خَيْرٖ تَجِدُوهُ عِندَ اَ۬للَّهِۖ
क्योंकि ईश्वर तुम जो करते हो उस पर दृष्टि रखता है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٞۖ
और उन्होंने कहा: “उद्यान में कोई प्रवेश नहीं करेगा, सिवा उसके जो पुनरुन्मुखों या सहायकों में से हो।”
وَقَالُواْ لَنْ يَّدْخُلَ اَ۬لْجَنَّةَ إِلَّا مَن كَانَ هُوداً اَوْ نَصَٰر۪ىٰۖ
ये उनकी व्यर्थ आशाएँ हैं।
تِلْكَ أَمَانِيُّهُمْۖ
कहो: “अपना प्रमाण लाओ, यदि तुम सच्चे हो।”
قُلْ هَاتُواْ بُرْهَٰنَكُمُۥٓ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَۖ
क्यों नहीं: जो कोई भलाई करते हुए अपनी दिशा ईश्वर के प्रति खरी कर दे, उसका पुरस्कार उसके अभिभावक के पास है; उन पर कोई डर नहीं, और न वे दुखी होंगे।
بَل۪ىٰ مَنَ اَسْلَمَ وَجْهَهُۥ لِلهِ وَهُوَ مُحْسِنٞ فَلَهُۥٓ أَجْرُهُۥ عِندَ رَبِّهِۦ وَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَۖ
और पुनरुन्मुखों ने कहा: “सहायक किसी आधार पर नहीं हैं”; और सहायकों ने कहा: “पुनरुन्मुख किसी आधार पर नहीं हैं”; जबकि वे ग्रंथ सुनाते हैं।
وَقَالَتِ اِ۬لْيَهُودُ لَيْسَتِ اِ۬لنَّصَٰر۪ىٰ عَلَىٰ شَےْءٖ وَقَالَتِ اِ۬لنَّصَٰر۪ىٰ لَيْسَتِ اِ۬لْيَهُودُ عَلَىٰ شَےْءٖ وَهُمْ يَتْلُونَ اَ۬لْكِتَٰبَۖ
इसी प्रकार उन्होंने कहा जो नहीं जानते, उनके कथन जैसा कथन कहते हुए।
كَذَٰلِكَ قَالَ اَ۬لذِينَ لَا يَعْلَمُونَ مِثْلَ قَوْلِهِمْۖ
ईश्वर पेशी के दिन उनके बीच उस विषय में निर्णय करेगा जिसमें वे मतभेद रखते थे।
فَاللَّهُ يَحْكُمُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِ فِيمَا كَانُواْ فِيهِ يَخْتَلِفُونَۖ
और उससे बढ़कर अन्यायी कौन है जो ईश्वर के माथा टेकने के स्थानों में उसके नाम का स्मरण किए जाने से रोकता है, और उन्हें उजाड़ने में लगा रहता है?
۞ وَمَنَ اَظْلَمُ مِمَّن مَّنَعَ مَسَٰجِدَ اَ۬للَّهِ أَنْ يُّذْكَرَ فِيهَا اَ۪سْمُهُۥ وَسَع۪ىٰ فِے خَرَابِهَآۖ
उन्हें वहाँ केवल डरते हुए प्रवेश करना चाहिए।
أُوْلَٰٓئِكَ مَا كَانَ لَهُمُۥٓ أَنْ يَّدْخُلُوهَآ إِلَّا خَآئِفِينَۖ
उनके लिए इहलोक में लज्जा है,
لَهُمْ فِے اِ۬لدُّنْي۪ا خِزْيٞۖ
और अंतिम जीवन में उनके लिए विशाल दंड होगा।
وَلَهُمْ فِے اِ۬لَاخِرَةِ عَذَابٌ عَظِيمٞۖ
और ईश्वर के हैं पूर्व और पश्चिम:
وَلِلهِ اِ۬لْمَشْرِقُ وَالْمَغْرِبُۖ
तुम जिधर भी मुड़ो, वहीं ईश्वर की दिशा है,
فَأَيْنَمَا تُوَلُّواْ فَثَمَّ وَجْهُ اُ۬للَّهِۖ
क्योंकि ईश्वर विस्तृत, सर्वज्ञ है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ وَٰسِعٌ عَلِيمٞۖ
और उन्होंने कहा: “ईश्वर ने अपने लिए संतान बना ली है।”
وَقَالُواْ اُ۪تَّخَذَ اَ۬للَّهُ وَلَداٗۖ
उसकी महिमा हो!
سُبْحَٰنَهُۥۖ
बल्कि उसी का है जो आकाशों और धरती में है;
بَل لَّهُۥ مَا فِے اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالَارْضِۖ
सब उसके प्रति समर्पित हैं।
كُلّٞ لَّهُۥ قَٰنِتُونَۖ
आकाशों और धरती का अपूर्व रचयिता।
بَدِيعُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالَارْضِۖ
जब वह किसी चीज़ को तय करता है, तो उससे केवल इतना कहता है: “हो जा”,
وَإِذَا قَض۪ىٰٓ أَمْراٗ فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُۥ كُنۖ
और वह हो जाती है।
فَيَكُونُۖ
और जो नहीं जानते उन्होंने कहा: “ईश्वर हमसे बोलता क्यों नहीं, या हमारे पास कोई संकेत क्यों नहीं आता!”
وَقَالَ اَ۬لذِينَ لَا يَعْلَمُونَ لَوْلَا يُكَلِّمُنَا اَ۬للَّهُ أَوْ تَاتِينَآ ءَايَةٞۖ
इसी प्रकार उनसे पहले वालों ने कहा, उनके कथन जैसा कथन कहते हुए;
كَذَٰلِكَ قَالَ اَ۬لذِينَ مِن قَبْلِهِم مِّثْلَ قَوْلِهِمْۖ
उनके मर्म एक-से हैं।
تَشَٰبَهَتْ قُلُوبُهُمْۖ
हमने उस क़ौम के लिए संकेत स्पष्ट कर दिए हैं जिसे यक़ीन है।
قَدْ بَيَّنَّا اَ۬لَايَٰتِ لِقَوْمٖ يُوقِنُونَۖ
हमने तुम्हें पूर्ण सत्य के साथ भेजा है, शुभ समाचार देने वाला और चेतावनी देने वाला,
إِنَّآ أَرْسَلْنَٰكَ بِالْحَقِّ بَشِيراٗ وَنَذِيراٗۖ
और तुमसे भट्ठी वालों के विषय में नहीं पूछा जाएगा।
وَلَا تَسْـَٔلْ عَنَ اَصْحَٰبِ اِ۬لْجَحِيمِۖ
और न पुनरुन्मुख और न सहायक कभी तुमसे संतुष्ट होंगे, जब तक तुम उनके मत का अनुसरण न करो।
وَلَن تَرْض۪ىٰ عَنكَ اَ۬لْيَهُودُ وَلَا اَ۬لنَّصَٰر۪ىٰ حَتَّىٰ تَتَّبِعَ مِلَّتَهُمْۖ
कहो: “ईश्वर का मार्गदर्शन ही मार्गदर्शन है।”
قُلِ اِنَّ هُدَى اَ۬للَّهِ هُوَ اَ۬لْهُد۪ىٰۖ
और यदि तुम उनकी भावनाओं का अनुसरण करो, इसके बाद कि तुम्हारे पास ज्ञान आ चुका है, तो ईश्वर के विरुद्ध तुम्हारा न कोई आश्रयदाता होगा न कोई सहायता।
وَلَئِنِ اِ۪تَّبَعْتَ أَهْوَآءَهُم بَعْدَ اَ۬لذِے جَآءَكَ مِنَ اَ۬لْعِلْمِ مَا لَكَ مِنَ اَ۬للَّهِ مِنْ وَّلِيّٖ وَلَا نَصِيرٍۖ
जिन्हें हमने ग्रंथ दिया, और जो उसे वैसे सुनाते हैं जैसे उसे सुनाया जाना चाहिए, वही उस पर विश्वास करते हैं।
اِ۬لذِينَ ءَاتَيْنَٰهُمُ اُ۬لْكِتَٰبَ يَتْلُونَهُۥ حَقَّ تِلَٰوَتِهِۦٓ أُوْلَٰٓئِكَ يُومِنُونَ بِهِۦۖ
और जो कोई उसे नकारे — वही घाटा उठाने वाले हैं।
وَمَنْ يَّكْفُرْ بِهِۦ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لْخَٰسِرُونَۖ
हे इसराईल की संतान! मेरे उपकार का स्मरण करो, वह जिससे मैंने तुम्हें भर दिया, और यह कि मैंने तुम्हें सभी प्राणियों से ऊपर वरीयता दी।
يَٰبَنِےٓ إِسْرَآءِيلَ اَ۟ذْكُرُواْ نِعْمَتِيَ اَ۬لتِےٓ أَنْعَمْتُ عَلَيْكُمْ وَأَنِّے فَضَّلْتُكُمْ عَلَى اَ۬لْعَٰلَمِينَۖ
और उस दिन से सावधान रहो जब कोई स्व किसी दूसरे स्व के कुछ भी काम नहीं आएगा, जब उससे कोई प्रतिकर स्वीकार नहीं किया जाएगा, जब कोई सिफ़ारिश उसे लाभ नहीं देगी, और जब उनकी सहायता नहीं की जाएगी।
وَاتَّقُواْ يَوْماٗ لَّا تَجْزِے نَفْسٌ عَن نَّفْسٖ شَئْاٗ وَلَا يُقْبَلُ مِنْهَا عَدْلٞ وَلَا تَنفَعُهَا شَفَٰعَةٞ وَلَا هُمْ يُنصَرُونَۖ
और जब इब्राहीम के अभिभावक ने उसे कुछ बोलों से परखा, जिन्हें उसने पूरा किया।
۞ وَإِذِ اِ۪بْتَل۪ىٰٓ إِبْرَٰهِـيمَ رَبُّهُۥ بِكَلِمَٰتٖ فَأَتَمَّهُنَّۖ
उसने कहा: “मैं निश्चय ही तुम्हें लोगों के लिए मार्गदर्शक बनाने वाला हूँ।”
قَالَ إِنِّے جَاعِلُكَ لِلنَّاسِ إِمَاماٗۖ
उसने कहा: “और मेरी संतति में से?”
قَالَ وَمِن ذُرِّيَّتِےۖ
उसने कहा: “मेरी संधि अन्यायियों को नहीं मिलती।”
قَالَ لَا يَنَالُ عَهْدِيَ اَ۬لظَّٰلِمِينَۖ
और जब हमने घर को लोगों के लिए बार-बार आने का स्थान और सुरक्षा बनाया; और उन्होंने इब्राहीम के ठहराव-स्थल को संपर्क का स्थान बना लिया।
وَإِذْ جَعَلْنَا اَ۬لْبَيْتَ مَثَابَةٗ لِّلنَّاسِ وَأَمْناٗ وَاتَّخَذُواْ مِن مَّقَامِ إِبْرَٰهِيمَ مُصَلّىٗۖ
और हमने इब्राहीम और इस्माईल को एक संधि से बाँधा: “मेरे घर को आने-जाने वालों, वहाँ ठहरने वालों, और सेवा में घुटने टेकने वालों और निष्ठा में माथा टेकने वालों के लिए स्वच्छ करो।”
وَعَهِدْنَآ إِلَىٰٓ إِبْرَٰهِيمَ وَإِسْمَٰعِيلَ أَن طَهِّرَا بَيْتِيَ لِلطَّآئِفِينَ وَالْعَٰكِفِينَ وَالرُّكَّعِ اِ۬لسُّجُودِۖ
और जब इब्राहीम ने कहा: “मेरे अभिभावक, इसे एक सुरक्षित भूभाग बनाइए, और इसके निवासियों को फलों की जीविका दीजिए, उन्हें जो उनमें से ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास करते हैं।”
وَإِذْ قَالَ إِبْرَٰهِيمُ رَبِّ اِ۪جْعَلْ هَٰذَا بَلَداً اٰمِناٗ وَارْزُقَ اَهْلَهُۥ مِنَ اَ۬لثَّمَرَٰتِ مَنَ اٰمَنَ مِنْهُم بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ اِ۬لَاخِرِۖ
उसने कहा: “और जो कोई नकारे, उसे मैं थोड़ा उपभोग दूँगा, फिर उसे आग के दंड की ओर धकेल दूँगा।”
قَالَ وَمَن كَفَرَ فَأُمَتِّعُهُۥ قَلِيلاٗ ثُمَّ أَضْطَرُّهُۥٓ إِلَىٰ عَذَابِ اِ۬لنّ۪ارِۖ
और कितना भयानक गंतव्य!
وَبِيسَ اَ۬لْمَصِيرُۖ
और जब इब्राहीम इस्माईल के साथ घर की नींव ऊँची कर रहा था:
وَإِذْ يَرْفَعُ إِبْرَٰهِيمُ اُ۬لْقَوَاعِدَ مِنَ اَ۬لْبَيْتِ وَإِسْمَٰعِيلُۖ
“हमारे अभिभावक, हमसे इसे स्वीकार कीजिए; निश्चय ही आप ही सुनने वाले, सर्वज्ञ हैं।
رَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّآ إِنَّكَ أَنتَ اَ۬لسَّمِيعُ اُ۬لْعَلِيمُۖ
हमारे अभिभावक, हम दोनों को अपने प्रति खरा बना दीजिए, और हमारी संतति में से अपने प्रति खरा एक समुदाय।
رَبَّنَا وَاجْعَلْنَا مُسْلِمَيْنِ لَكَ وَمِن ذُرِّيَّتِنَآ أُمَّةٗ مُّسْلِمَةٗ لَّكَۖ
और हमें हमारे हितकारी आचरण दिखाइए।
وَأَرِنَا مَنَاسِكَنَاۖ
और अनुकंपा के साथ हमारी ओर पलटिए,
وَتُبْ عَلَيْنَآۖ
क्योंकि आप ही निरंतर पश्चात्ताप स्वीकार करने वाले, दयालु हैं।
إِنَّكَ أَنتَ اَ۬لتَّوَّابُ اُ۬لرَّحِيمُۖ
हमारे अभिभावक, और उनके बीच उन्हीं में से एक संदेशवाहक उठाइए, जो उन्हें आपके संकेत सुनाए, उन्हें ग्रंथ और प्रज्ञा सिखाए, और उन्हें शुद्ध करे;
رَبَّنَا وَابْعَثْ فِيهِمْ رَسُولاٗ مِّنْهُمْ يَتْلُواْ عَلَيْهِمُۥٓ ءَايَٰتِكَ وَيُعَلِّمُهُمُ اُ۬لْكِتَٰبَ وَالْحِكْمَةَ وَيُزَكِّيهِمُۥٓۖ
क्योंकि आप ही सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान हैं।”
إِنَّكَ أَنتَ اَ۬لْعَزِيزُ اُ۬لْحَكِيمُۖ
और इब्राहीम के मत से कौन मुँह मोड़ता है, सिवा उसके जो अपने स्व को मूर्ख बनाता है?
وَمَنْ يَّرْغَبُ عَن مِّلَّةِ إِبْرَٰهِيمَ إِلَّا مَن سَفِهَ نَفْسَهُۥۖ
हमने उसे इहलोक में निश्चय ही चुना है,
وَلَقَدِ اِ۪صْطَفَيْنَٰهُ فِے اِ۬لدُّنْي۪اۖ
और अंतिम जीवन में वह अवश्य भलों में से होगा।
وَإِنَّهُۥ فِے اِ۬لَاخِرَةِ لَمِنَ اَ۬لصَّٰلِحِينَۖ
जब उसके अभिभावक ने उससे कहा: “मेरे प्रति खरे हो जाओ”;
إِذْ قَالَ لَهُۥ رَبُّهُۥٓ أَسْلِمْۖ
उसने कहा: “मैं सभी प्राणियों के अभिभावक के प्रति खरा हूँ।”
قَالَ أَسْلَمْتُ لِرَبِّ اِ۬لْعَٰلَمِينَۖ
और इब्राहीम ने अपने बेटों को इसकी अनुशंसा की,
وَأَوْص۪ىٰ بِهَآ إِبْرَٰهِيمُ بَنِيهِۖ
तथा याक़ूब ने: “हे मेरे बेटो! ईश्वर ने तुम्हारे लिए यह विधान चुना है; इसलिए उसके प्रति खरे रहते हुए ही मरना।”
وَيَعْقُوبُ يَٰبَنِيَّ إِنَّ اَ۬للَّهَ اَ۪صْطَف۪ىٰ لَكُمُ اُ۬لدِّينَ فَلَا تَمُوتُنَّ إِلَّا وَأَنتُم مُّسْلِمُونَۖ
या क्या तुम साक्षी थे, जब याक़ूब के पास मृत्यु आ पहुँची, जब उसने अपने बेटों से कहा: “मेरे बाद तुम किसकी आज्ञा का पालन करोगे?”
۞ أَمْ كُنتُمْ شُهَدَآءَ ا۪ذْ حَضَرَ يَعْقُوبَ اَ۬لْمَوْتُ إِذْ قَالَ لِبَنِيهِ مَا تَعْبُدُونَ مِنۢ بَعْدِےۖ
उन्होंने कहा: “हम तुम्हारे देवता की आज्ञा का पालन करेंगे, तुम्हारे पूर्वजों इब्राहीम, इस्माईल और इसहाक़ के देवता की, एक ही देवता की, और हम उसके प्रति खरे हैं।”
قَالُواْ نَعْبُدُ إِلَٰهَكَ وَإِلَٰهَ ءَابَآئِكَ إِبْرَٰهِيمَ وَإِسْمَٰعِيلَ وَإِسْحَٰقَ إِلَٰهاٗ وَٰحِداٗ وَنَحْنُ لَهُۥ مُسْلِمُونَۖ
वह एक समुदाय है जो बीत चुका:
تِلْكَ أُمَّةٞ قَدْ خَلَتْۖ
उसके लिए वह जो उसने कमाया,
لَهَا مَا كَسَبَتْۖ
और तुम्हारे लिए वह जो तुमने कमाया;
وَلَكُم مَّا كَسَبْتُمْۖ
और तुमसे उसके विषय में नहीं पूछा जाएगा जो वे करते थे।
وَلَا تُسْـَٔلُونَ عَمَّا كَانُواْ يَعْمَلُونَۖ
और उन्होंने कहा: “पुनरुन्मुख या सहायक हो जाओ, तुम मार्गदर्शन पा लोगे।”
وَقَالُواْ كُونُواْ هُوداً اَوْ نَصَٰر۪ىٰ تَهْتَدُواْۖ
कहो: “नहीं, बल्कि इब्राहीम का मत, जो पूरी तरह ईश्वर की ओर मुड़ा हुआ था”,
قُلْ بَلْ مِلَّةَ إِبْرَٰهِيمَ حَنِيفاٗۖ
और वह साझी ठहराने वालों में से न था।
وَمَا كَانَ مِنَ اَ۬لْمُشْرِكِينَۖ
कहो: “हम ईश्वर पर विश्वास करते हैं, उस पर जो हम पर उतारा गया, उस पर जो इब्राहीम, इस्माईल, इसहाक़, याक़ूब और वंश-शाखाओं पर उतारा गया, और उस पर जो मूसा और ईसा को दिया गया, और उस पर जो सूचनादाताओं को उनके अभिभावक की ओर से दिया गया; हम उनके बीच कोई भेद नहीं करते, और हम उसके प्रति खरे हैं।”
قُولُوٓاْ ءَامَنَّا بِاللَّهِ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيْنَا وَمَآ أُنزِلَ إِلَىٰٓ إِبْرَٰهِيمَ وَإِسْمَٰعِيلَ وَإِسْحَٰقَ وَيَعْقُوبَ وَالَاسْبَاطِ وَمَآ أُوتِيَ مُوس۪ىٰ وَعِيس۪ىٰ وَمَآ أُوتِيَ اَ۬لنَّبِيٓـُٔونَ مِن رَّبِّهِمْ لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٖ مِّنْهُمْ وَنَحْنُ لَهُۥ مُسْلِمُونَۖ
यदि वे उस पर विश्वास करें जिस पर तुमने विश्वास किया, तो वे मार्गदर्शन पा गए;
فَإِنَ اٰمَنُواْ بِمِثْلِ مَآ ءَامَنتُم بِهِۦ فَقَدِ اِ۪هْتَدَواْۖ
और यदि वे पीठ फेर लें, तो वे केवल एक दरार में हैं;
وَّإِن تَوَلَّوْاْ فَإِنَّمَا هُمْ فِے شِقَاقٖۖ
उनके विरुद्ध ईश्वर तुम्हारे लिए शीघ्र पर्याप्त होगा:
فَسَيَكْفِيكَهُمُ اُ۬للَّهُۖ
और वह सुनने वाला, सर्वज्ञ है।
وَهُوَ اَ۬لسَّمِيعُ اُ۬لْعَلِيمُۖ
ईश्वर का रंग —
صِبْغَةَ اَ۬للَّهِۖ
और ईश्वर से बेहतर रंगने वाला कौन है? —
وَمَنَ اَحْسَنُ مِنَ اَ۬للَّهِ صِبْغَةٗۖ
और हम उसी की आज्ञा का पालन करते हैं।
وَنَحْنُ لَهُۥ عَٰبِدُونَۖ
कहो: “क्या तुम ईश्वर के विषय में हमसे विवाद करते हो, जबकि वह हमारा अभिभावक है और तुम्हारा अभिभावक? हमारे लिए हमारे कर्म, तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म;
قُلَ اَتُحَآجُّونَنَا فِے اِ۬للَّهِ وَهُوَ رَبُّنَا وَرَبُّكُمْ وَلَنَآ أَعْمَٰلُنَا وَلَكُمُۥٓ أَعْمَٰلُكُمْۖ
और हम अनन्य रूप से उसी को समर्पित हैं।”
وَنَحْنُ لَهُۥ مُخْلِصُونَۖ
या तुम कहते हो: “इब्राहीम, इस्माईल, इसहाक़, याक़ूब और वंश-शाखाएँ पुनरुन्मुख या सहायक थे”?
أَمْ يَقُولُونَ إِنَّ إِبْرَٰهِيمَ وَإِسْمَٰعِيلَ وَإِسْحَٰقَ وَيَعْقُوبَ وَالَاسْبَاطَ كَانُواْ هُوداً اَوْ نَصَٰر۪ىٰۖ
कहो: “क्या तुम अधिक जानते हो, या ईश्वर?”
قُلَ آٰنتُمُۥٓ أَعْلَمُ أَمِ اِ۬للَّهُۖ
और उससे बढ़कर अन्यायी कौन है जो ईश्वर की ओर से अपने पास के साक्ष्य को दबाता है?
وَمَنَ اَظْلَمُ مِمَّن كَتَمَ شَهَٰدَةً عِندَهُۥ مِنَ اَ۬للَّهِۖ
और ईश्वर उससे लापरवाह नहीं जो तुम करते हो।
وَمَا اَ۬للَّهُ بِغَٰفِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَۖ
वह एक समुदाय है जो बीत चुका:
تِلْكَ أُمَّةٞ قَدْ خَلَتْۖ
उसके लिए वह जो उसने कमाया,
لَهَا مَا كَسَبَتْۖ
और तुम्हारे लिए वह जो तुमने कमाया;
وَلَكُم مَّا كَسَبْتُمْۖ
और तुमसे उसके विषय में नहीं पूछा जाएगा जो वे करते थे।
وَلَا تُسْـَٔلُونَ عَمَّا كَانُواْ يَعْمَلُونَۖ
लोगों में से मूर्ख कहेंगे: “उन्हें उनके उस मिलन-बिंदु से किस बात ने मोड़ दिया, जिस पर वे थे?”
۞ سَيَقُولُ اُ۬لسُّفَهَآءُ مِنَ اَ۬لنَّاسِ مَا وَلّ۪يٰهُمْ عَن قِبْلَتِهِمُ اُ۬لتِے كَانُواْ عَلَيْهَاۖ
कहो: “ईश्वर के हैं पूर्व और पश्चिम;
قُل لِّلهِ اِ۬لْمَشْرِقُ وَالْمَغْرِبُۖ
वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे सीधे पथ की ओर मार्ग दिखाता है।”
يَهْدِے مَنْ يَّشَآءُ اِ۪لَىٰ صِرَٰطٖ مُّسْتَقِيمٖۖ
और इसी प्रकार हमने तुम्हें एक आदर्श समुदाय बनाया,
وَكَذَٰلِكَ جَعَلْنَٰكُمُۥٓ أُمَّةٗ وَسَطاٗۖ
ताकि तुम लोगों के विरुद्ध साक्षी बनो, और संदेशवाहक तुम्हारे विरुद्ध साक्षी हो।
لِّتَكُونُواْ شُهَدَآءَ عَلَى اَ۬لنَّاسِ وَيَكُونَ اَ۬لرَّسُولُ عَلَيْكُمْ شَهِيداٗۖ
और हमने वह मिलन-बिंदु, जिस पर तुम थे, केवल यह अलग दिखाने के लिए रखा था कि कौन संदेशवाहक का अनुसरण करता है और कौन एड़ियों के बल पलट जाता है।
وَمَا جَعَلْنَا اَ۬لْقِبْلَةَ اَ۬لتِے كُنتَ عَلَيْهَآ إِلَّا لِنَعْلَمَ مَنْ يَّتَّبِعُ اُ۬لرَّسُولَ مِمَّنْ يَّنقَلِبُ عَلَىٰ عَقِبَيْهِۖ
यह अवश्य भारी था, सिवा उनके जिन्हें ईश्वर ने मार्ग दिखाया।
وَإِن كَانَتْ لَكَبِيرَةً اِلَّا عَلَى اَ۬لذِينَ هَدَى اَ۬للَّهُۖ
और ईश्वर को यह शोभा नहीं देता कि वह तुम्हारे विश्वास को व्यर्थ जाने दे।
وَمَا كَانَ اَ۬للَّهُ لِيُضِيعَ إِيمَٰنَكُمُۥٓۖ
ईश्वर अवश्य लोगों के प्रति करुणामय, दयालु है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ بِالنَّاسِ لَرَءُوفٞ رَّحِيمٞۖ
हम निश्चय ही तुम्हारा चेहरा आकाश में इधर-उधर मुड़ता देखेंगे; इसलिए हम तुम्हें अवश्य रुख़ के रूप में एक ऐसा मिलन-बिंदु देंगे जो तुम्हें संतुष्ट करे।
قَدْ نَر۪ىٰ تَقَلُّبَ وَجْهِكَ فِے اِ۬لسَّمَآءِ فَلَنُوَلِّيَنَّكَ قِبْلَةٗ تَرْض۪يٰهَاۖ
इसलिए अपना रुख़ माथा टेकने के अलंघनीय स्थान की ओर करो,
فَوَلِّ وَجْهَكَ شَطْرَ اَ۬لْمَسْجِدِ اِ۬لْحَرَامِۖ
और जहाँ भी तुम हो, अपना रुख़ उसी की ओर करो।
وَحَيْثُ مَا كُنتُمْ فَوَلُّواْ وُجُوهَكُمْ شَطْرَهُۥۖ
और जिन्हें ग्रंथ दिया गया है वे अवश्य जानते हैं कि यह उनके अभिभावक की ओर से सत्य है।
وَإِنَّ اَ۬لذِينَ أُوتُواْ اُ۬لْكِتَٰبَ لَيَعْلَمُونَ أَنَّهُ اُ۬لْحَقُّ مِن رَّبِّهِمْۖ
और ईश्वर उससे लापरवाह नहीं जो वे करते हैं।
وَمَا اَ۬للَّهُ بِغَٰفِلٍ عَمَّا يَعْمَلُونَۖ
और यदि तुम उन्हें, जिन्हें ग्रंथ दिया गया है, हर संकेत ले भी आओ, तब भी वे तुम्हारे मिलन-बिंदु का अनुसरण नहीं करेंगे।
وَلَئِنَ اَتَيْتَ اَ۬لذِينَ أُوتُواْ اُ۬لْكِتَٰبَ بِكُلِّ ءَايَةٖ مَّا تَبِعُواْ قِبْلَتَكَۖ
और तुम उनके मिलन-बिंदु का अनुसरण नहीं करोगे;
وَمَآ أَنتَ بِتَابِعٖ قِبْلَتَهُمْۖ
और वे आपस में भी एक-दूसरे के मिलन-बिंदु का अनुसरण नहीं करते।
وَمَا بَعْضُهُم بِتَابِعٖ قِبْلَةَ بَعْضٖۖ
और यदि तुम उनकी भावनाओं का अनुसरण करो, इसके बाद कि तुम्हारे पास ज्ञान आ चुका है, तो तुम तब अवश्य अन्यायियों में से होगे।
وَلَئِنِ اِ۪تَّبَعْتَ أَهْوَآءَهُم مِّنۢ بَعْدِ مَا جَآءَكَ مِنَ اَ۬لْعِلْمِ إِنَّكَ إِذاٗ لَّمِنَ اَ۬لظَّٰلِمِينَۖ
जिन्हें हमने ग्रंथ दिया वे उसे वैसे पहचानते हैं जैसे अपने बेटों को पहचानते हैं,
اَ۬لذِينَ ءَاتَيْنَٰهُمُ اُ۬لْكِتَٰبَ يَعْرِفُونَهُۥ كَمَا يَعْرِفُونَ أَبْنَآءَهُمْۖ
और उनमें से एक भाग अवश्य सत्य को दबाता है, जानते हुए।
وَإِنَّ فَرِيقاٗ مِّنْهُمْ لَيَكْتُمُونَ اَ۬لْحَقَّ وَهُمْ يَعْلَمُونَۖ
सत्य तुम्हारे अभिभावक की ओर से है;
اَ۬لْحَقُّ مِن رَّبِّكَۖ
इसलिए कभी वाद-प्रतिवाद में पड़ने वालों में से न होना।
فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ اَ۬لْمُمْتَرِينَۖ
और हर एक की एक दिशा है जो उसे रुख़ के रूप में दी गई है; तो जो सबसे बेहतर है उसमें एक-दूसरे से आगे निकलो।
۞ وَلِكُلّٖ وِجْهَةٌ هُوَ مُوَلِّيهَا فَاسْتَبِقُواْ اُ۬لْخَيْرَٰتِۖ
तुम जहाँ कहीं भी हो, ईश्वर तुम सबको वापस ले आएगा,
أَيْنَ مَا تَكُونُواْ يَاتِ بِكُمُ اُ۬للَّهُ جَمِيعاًۖ
क्योंकि ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।
اِنَّ اَ۬للَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَےْءٖ قَدِيرٞۖ
और तुम जहाँ से भी निकलो, अपना रुख़ माथा टेकने के अलंघनीय स्थान की ओर करो:
وَمِنْ حَيْثُ خَرَجْتَ فَوَلِّ وَجْهَكَ شَطْرَ اَ۬لْمَسْجِدِ اِ۬لْحَرَامِۖ
यह अवश्य तुम्हारे अभिभावक की ओर से आया सत्य है।
وَإِنَّهُۥ لَلْحَقُّ مِن رَّبِّكَۖ
और ईश्वर उससे लापरवाह नहीं जो तुम करते हो।
وَمَا اَ۬للَّهُ بِغَٰفِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَۖ
और तुम जहाँ से भी निकलो, अपना रुख़ माथा टेकने के अलंघनीय स्थान की ओर करो,
وَمِنْ حَيْثُ خَرَجْتَ فَوَلِّ وَجْهَكَ شَطْرَ اَ۬لْمَسْجِدِ اِ۬لْحَرَامِۖ
और तुम जहाँ कहीं भी हो, अपना रुख़ उसकी ओर करो, ताकि लोगों के पास तुम्हारे विरुद्ध कोई तर्क न रहे — सिवा उनमें से उनके जो अन्यायी हैं; तो उनसे भय मत रखो, बल्कि मुझसे भय रखो —
وَحَيْثُ مَا كُنتُمْ فَوَلُّواْ وُجُوهَكُمْ شَطْرَهُۥ لِيَ۬لَّا يَكُونَ لِلنَّاسِ عَلَيْكُمْ حُجَّةٌ اِلَّا اَ۬لذِينَ ظَلَمُواْ مِنْهُمْ فَلَا تَخْشَوْهُمْ وَاخْشَوْنِےۖ
और ताकि मैं तुम पर अपना उपकार पूर्ण करूँ, और शायद तुम मार्गदर्शन पाओ,
وَلِأُتِمَّ نِعْمَتِے عَلَيْكُمْ وَلَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَۖ
जैसे हमने तुम्हारे बीच, तुम्हीं में से, एक संदेशवाहक भेजा, जो तुम्हें हमारे संकेत सुनाता है, तुम्हें शुद्ध करता है, तुम्हें ग्रंथ और प्रज्ञा सिखाता है, और तुम्हें वह सिखाता है जो तुम नहीं जानते थे। तो मेरा स्मरण करो, मैं तुम्हारा स्मरण करूँगा; मेरे प्रति कृतज्ञ रहो, और मुझे मत नकारो।
كَمَآ أَرْسَلْنَا فِيكُمْ رَسُولاٗ مِّنكُمْ يَتْلُواْ عَلَيْكُمُۥٓ ءَايَٰتِنَا وَيُزَكِّيكُمْ وَيُعَلِّمُكُمُ اُ۬لْكِتَٰبَ وَالْحِكْمَةَ وَيُعَلِّمُكُم مَّا لَمْ تَكُونُواْ تَعْلَمُونَ فَاذْكُرُونِےٓ أَذْكُرْكُمْ وَاشْكُرُواْ لِے وَلَا تَكْفُرُونِۖ
हे विश्वास करने वालो! धैर्य और संपर्क से मदद माँगो,
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ اُ۪سْتَعِينُواْ بِالصَّبْرِ وَالصَّلَوٰةِۖ
क्योंकि ईश्वर धैर्य रखने वालों के साथ है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ مَعَ اَ۬لصَّٰبِرِينَۖ
और जो ईश्वर की राह में मार डाले जाते हैं उनके विषय में मत कहो कि वे मृत हैं।
وَلَا تَقُولُواْ لِمَنْ يُّقْتَلُ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ أَمْوَٰتُۢۖ
नहीं, वे जीवित हैं, परंतु तुम्हें इसका आभास नहीं।
بَلَ اَحْيَآءٞۖ وَلَٰكِن لَّا تَشْعُرُونَۖ
और अवश्य हम थोड़े डर और भूख से, और संपत्ति, स्व और फलों की कमी से तुम्हें परखेंगे;
وَلَنَبْلُوَنَّكُم بِشَےْءٖ مِّنَ اَ۬لْخَوْفِ وَالْجُوعِ وَنَقْصٖ مِّنَ اَ۬لَامْوَٰلِ وَالَانفُسِ وَالثَّمَرَٰتِۖ
और धैर्य रखने वालों को शुभ समाचार दो, जो, जब उन पर कोई विपत्ति आ पड़ती है, कहते हैं: “हम निश्चय ही ईश्वर के हैं, और उसी की ओर हम लौटते हैं।”
وَبَشِّرِ اِ۬لصَّٰبِرِينَ اَ۬لذِينَ إِذَآ أَصَٰبَتْهُم مُّصِيبَةٞ قَالُوٓاْ إِنَّا لِلهِ وَإِنَّآ إِلَيْهِ رَٰجِعُونَۖ
यही वे हैं जिन पर उनके अभिभावक के संपर्क टिके हैं, और दया,
أُوْلَٰٓئِكَ عَلَيْهِمْ صَلَوَٰتٞ مِّن رَّبِّهِمْ وَرَحْمَةٞۖ
और यही वे हैं जो मार्गदर्शन पाते हैं।
وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لْمُهْتَدُونَۖ
सफ़ा और मरवा निश्चय ही ईश्वर के प्रत्यक्ष चिह्नों में से हैं।
۞ إِنَّ اَ۬لصَّفَا وَالْمَرْوَةَ مِن شَعَٰٓئِرِ اِ۬للَّهِۖ
जो कोई घर का हज करे या उमरा करे, उन दोनों तक आने-जाने में उस पर कोई आक्षेप नहीं।
فَمَنْ حَجَّ اَ۬لْبَيْتَ أَوِ اِ۪عْتَمَرَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِ أَنْ يَّطَّوَّفَ بِهِمَاۖ
और जो कोई स्वेच्छा से अच्छाई करे — ईश्वर निश्चय ही कृतज्ञ, सर्वज्ञ है।
وَمَن تَطَوَّعَ خَيْراٗ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ شَاكِرٌ عَلِيمٌۖ
निश्चय ही, जो उसे दबाते हैं जो हमने स्पष्ट प्रमाणों और मार्गदर्शन में से उतारा है, इसके बाद कि हमने उसे ग्रंथ में लोगों के लिए स्पष्ट कर दिया — यही वे हैं जिन्हें ईश्वर धिक्कारता है, और जिन्हें धिक्कारने वाले धिक्कारते हैं,
اِنَّ اَ۬لذِينَ يَكْتُمُونَ مَآ أَنزَلْنَا مِنَ اَ۬لْبَيِّنَٰتِ وَالْهُد۪ىٰ مِنۢ بَعْدِ مَا بَيَّنَّٰهُ لِلنَّاسِ فِے اِ۬لْكِتَٰبِ أُوْلَٰٓئِكَ يَلْعَنُهُمُ اُ۬للَّهُ وَيَلْعَنُهُمُ اُ۬للَّٰعِنُونَ
सिवा उनके जो पलट आते हैं, स्वयं को सुधारते हैं और स्पष्ट करते हैं: यही वे हैं जिनकी ओर मैं अनुकंपा के साथ पलटता हूँ; मैं निरंतर पश्चात्ताप स्वीकार करने वाला, दयालु हूँ।
إِلَّا اَ۬لذِينَ تَابُواْ وَأَصْلَحُواْ وَبَيَّنُواْ فَأُوْلَٰٓئِكَ أَتُوبُ عَلَيْهِمْ وَأَنَا اَ۬لتَّوَّابُ اُ۬لرَّحِيمُۖ
निश्चय ही, जो नकारते हैं और नकारते हुए मरते हैं — यही वे हैं जिन पर ईश्वर का, अभिकर्ताओं का, और लोगों का, सब मिलकर, धिक्कार पड़ता है, जिसमें वे सदा रहेंगे;
إِنَّ اَ۬لذِينَ كَفَرُواْ وَمَاتُواْ وَهُمْ كُفَّارٌ ا۟وْلَٰٓئِكَ عَلَيْهِمْ لَعْنَةُ اُ۬للَّهِ وَالْمَلَٰٓئِكَةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ خَٰلِدِينَ فِيهَاۖ
उनके लिए दंड हल्का नहीं किया जाएगा, और उन्हें मोहलत नहीं दी जाएगी।
لَا يُخَفَّفُ عَنْهُمُ اُ۬لْعَذَابُ وَلَا هُمْ يُنظَرُونَۖ
और तुम्हारा देवता एक ही देवता है;
وَإِلَٰهُكُمُۥٓ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞۖ
उसके सिवा कोई देवता नहीं,
لَّآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ
सर्वदयालु, दयालु।
اَ۬لرَّحْمَٰنُ اُ۬لرَّحِيمُۖ
अवश्य, आकाशों और धरती की रचना में, रात और दिन की अदला-बदली में, उस जलयान में जो लोगों को लाभ पहुँचाता है उसे लादे हुए समुद्र में चलता है, उस पानी में जो ईश्वर आकाश से उतारता है और जिससे वह धरती को उसकी मृत्यु के बाद पुनः जीवन देता है, उसमें हर प्रकार के चलने-फिरने वाले को बिखेरते हुए, हवाओं की विविधता में, और आकाश और धरती के बीच वशीभूत बादल में — बुद्धि से काम लेने वाली क़ौम के लिए संकेत हैं।
إِنَّ فِے خَلْقِ اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالَارْضِ وَاخْتِلَٰفِ اِ۬ليْلِ وَالنَّه۪ارِ وَالْفُلْكِ اِ۬لتِے تَجْرِے فِے اِ۬لْبَحْرِ بِمَا يَنفَعُ اُ۬لنَّاسَ وَمَآ أَنزَلَ اَ۬للَّهُ مِنَ اَ۬لسَّمَآءِ مِن مَّآءٖ فَأَحْي۪ا بِهِ اِ۬لَارْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا وَبَثَّ فِيهَا مِن كُلِّ دَآبَّةٖ وَتَصْرِيفِ اِ۬لرِّيَٰحِ وَالسَّحَابِ اِ۬لْمُسَخَّرِ بَيْنَ اَ۬لسَّمَآءِ وَالَارْضِ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوْمٖ يَعْقِلُونَۖ
और लोगों में से कुछ ऐसे हैं जो ईश्वर के अतिरिक्त प्रतिद्वंद्वी बना लेते हैं, जिनसे वे वैसा प्रेम करते हैं जैसा ईश्वर से किया जाता है;
وَمِنَ اَ۬لنَّاسِ مَنْ يَّتَّخِذُ مِن دُونِ اِ۬للَّهِ أَندَاداٗ يُحِبُّونَهُمْ كَحُبِّ اِ۬للَّهِۖ
परंतु जिन्होंने विश्वास किया वे ईश्वर के प्रेम में और भी अधिक प्रबल हैं।
وَالذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَشَدُّ حُبّاٗ لِّلهِۖ
और यदि अन्यायी देख लेते, जब वे दंड को देखेंगे, कि सारा बल ईश्वर का है, और कि ईश्वर दंड देने में कठोर है —
وَلَوْ تَرَى اَ۬لذِينَ ظَلَمُوٓاْ إِذْ يَرَوْنَ اَ۬لْعَذَابَ أَنَّ اَ۬لْقُوَّةَ لِلهِ جَمِيعاٗ وَأَنَّ اَ۬للَّهَ شَدِيدُ اُ۬لْعَذَابِۖ
जब वे जिनका अनुसरण किया गया, उनसे जिन्होंने उनका अनुसरण किया, स्वयं को बरी घोषित कर देंगे, और वे दंड देखेंगे, और उनके बीच की कड़ियाँ टूट जाएँगी।
۞ إِذْ تَبَرَّأَ اَ۬لذِينَ اَ۟تُّبِعُواْ مِنَ اَ۬لذِينَ اَ۪تَّبَعُواْ وَرَأَوُاْ اُ۬لْعَذَابَ وَتَقَطَّعَتْ بِهِمُ اُ۬لَاسْبَٰبُۖ
और जिन्होंने अनुसरण किया वे कहेंगे: “काश हमें पलटवार का अवसर मिलता, तो हम उनसे स्वयं को बरी घोषित कर देते जैसे उन्होंने हमसे स्वयं को बरी घोषित किया।”
وَقَالَ اَ۬لذِينَ اَ۪تَّبَعُواْ لَوَ اَنَّ لَنَا كَرَّةٗ فَنَتَبَرَّأَ مِنْهُمْ كَمَا تَبَرَّءُواْ مِنَّاۖ
इस प्रकार ईश्वर उन्हें उनके कर्म दिखाता है, उनके लिए संताप के रूप में,
كَذَٰلِكَ يُرِيهِمُ اُ۬للَّهُ أَعْمَٰلَهُمْ حَسَرَٰتٍ عَلَيْهِمْۖ
और वे आग से कभी नहीं निकलेंगे।
وَمَا هُم بِخَٰرِجِينَ مِنَ اَ۬لنّ۪ارِۖ
हे लोगो! धरती पर जो है उसमें से खाओ, जो वैध और अच्छा है,
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لنَّاسُ كُلُواْ مِمَّا فِے اِ۬لَارْضِ حَلَٰلاٗ طَيِّباٗۖ
और बहकाने वाले के क़दमों का अनुसरण मत करो,
وَلَا تَتَّبِعُواْ خُطْوَٰتِ اِ۬لشَّيْطَٰنِۖ
क्योंकि वह तुम्हारे लिए एक स्पष्ट शत्रु है।
إِنَّهُۥ لَكُمْ عَدُوّٞ مُّبِينٌۖ
वह तुम्हें केवल बुराई और निर्लज्जता का आदेश देता है, और यह कि तुम ईश्वर के विषय में वह कहो जो तुम नहीं जानते।
اِنَّمَا يَامُرُكُم بِالسُّوٓءِ وَالْفَحْشَآءِ وَأَن تَقُولُواْ عَلَى اَ۬للَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَۖ
और जब उनसे कहा जाता है: “उसका अनुसरण करो जो ईश्वर ने उतारा है”, तो वे कहते हैं: “नहीं, हम उसका अनुसरण करते हैं जिस पर हमने अपने पूर्वजों को पाया।”
وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ اُ۪تَّبِعُواْ مَآ أَنزَلَ اَ۬للَّهُ قَالُواْ بَلْ نَتَّبِعُ مَآ أَلْفَيْنَا عَلَيْهِ ءَابَآءَنَآۖ
क्या! भले ही उनके पूर्वज किसी चीज़ में बुद्धि से काम न लेते हों और मार्गदर्शन न पाते हों?
أَوَلَوْ كَانَ ءَابَآؤُهُمْ لَا يَعْقِلُونَ شَئْاٗ وَلَا يَهْتَدُونَۖ
और नकारने वालों का उदाहरण उस व्यक्ति के उदाहरण जैसा है जो उस पर चिल्लाता है जो बुलावे और चीख़ के सिवा कुछ नहीं सुनता।
وَمَثَلُ اُ۬لذِينَ كَفَرُواْ كَمَثَلِ اِ۬لذِے يَنْعِقُ بِمَا لَا يَسْمَعُ إِلَّا دُعَآءٗ وَنِدَآءٗۖ
बहरे, गूँगे, अंधे, इसलिए वे बुद्धि से काम नहीं लेते।
صُمُّۢ بُكْمٌ عُمْيٞ فَهُمْ لَا يَعْقِلُونَۖ
हे विश्वास करने वालो! उन अच्छी चीज़ों में से खाओ जिनकी जीविका हमने तुम्हें दी है, और ईश्वर के प्रति कृतज्ञ रहो, यदि तुम उसी की आज्ञा का पालन करते हो।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ كُلُواْ مِن طَيِّبَٰتِ مَا رَزَقْنَٰكُمْ وَاشْكُرُواْ لِلهِ إِن كُنتُمُۥٓ إِيَّاهُ تَعْبُدُونَۖ
उसने तुम पर केवल मृत पशु, रक्त, सूअर का मांस, और वह जो ईश्वर के अतिरिक्त किसी और के लिए समर्पित किया गया हो, वर्जित किया है।
إِنَّمَا حَرَّمَ عَلَيْكُمُ اُ۬لْمَيْتَةَ وَالدَّمَ وَلَحْمَ اَ۬لْخِنزِيرِ وَمَآ أُهِلَّ بِهِۦ لِغَيْرِ اِ۬للَّهِۖ
परंतु जो कोई विवश हो जाए, बिना विद्रोही हुए और बिना सीमाएँ पार किए, उस पर कोई अपराध नहीं ठहरता,
فَمَنُ اُ۟ضْطُرَّ غَيْرَ بَاغٖ وَلَا عَادٖ فَلَآ إِثْمَ عَلَيْهِۖ
क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٌۖ
निश्चय ही, जो उसे दबाते हैं जो ईश्वर ने ग्रंथ में से उतारा है, और उसके बदले तुच्छ मूल्य ख़रीदते हैं — यही वे हैं जो अपने पेटों में केवल आग निगलते हैं; पेशी के दिन ईश्वर उनसे बोलेगा नहीं, और उन्हें शुद्ध नहीं करेगा,
اِنَّ اَ۬لذِينَ يَكْتُمُونَ مَآ أَنزَلَ اَ۬للَّهُ مِنَ اَ۬لْكِتَٰبِ وَيَشْتَرُونَ بِهِۦ ثَمَناٗ قَلِيلاً ا۟وْلَٰٓئِكَ مَا يَاكُلُونَ فِے بُطُونِهِمُۥٓ إِلَّا اَ۬لنَّارَ وَلَا يُكَلِّمُهُمُ اُ۬للَّهُ يَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِ وَلَا يُزَكِّيهِمْۖ
और उनके लिए पीड़ादायक दंड होगा।
وَلَهُمْ عَذَابٌ اَلِيمٌۖ
यही वे हैं जिन्होंने मार्गदर्शन के मूल्य पर भटकाव ख़रीदा, और क्षमा के मूल्य पर दंड। आख़िर क्या उन्हें आग के सामने इतना सहने वाला बना रहा है!
ا۟وْلَٰٓئِكَ اَ۬لذِينَ اَ۪شْتَرَوُاْ اُ۬لضَّلَٰلَةَ بِالْهُد۪ىٰ وَالْعَذَابَ بِالْمَغْفِرَةِ فَمَآ أَصْبَرَهُمْ عَلَى اَ۬لنّ۪ارِۖ
यह इसलिए कि ईश्वर ने ग्रंथ को पूर्ण सत्य के साथ उतारा है,
ذَٰلِكَ بِأَنَّ اَ۬للَّهَ نَزَّلَ اَ۬لْكِتَٰبَ بِالْحَقِّۖ
और जो ग्रंथ के विषय में मतभेद करते हैं वे अवश्य दूर की दरार में हैं।
وَإِنَّ اَ۬لذِينَ اَ۪خْتَلَفُواْ فِے اِ۬لْكِتَٰبِ لَفِے شِقَاقِۢ بَعِيدٖۖ
सद्गुण यह नहीं कि तुम अपने चेहरे पूर्व या पश्चिम की ओर फेरो,
۞ لَّيْسَ اَ۬لْبِرُّ أَن تُوَلُّواْ وُجُوهَكُمْ قِبَلَ اَ۬لْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِۖ
परंतु सद्गुण वह है जो ईश्वर पर, अंतिम दिन पर, अभिकर्ताओं पर, ग्रंथ पर और सूचनादाताओं पर विश्वास करता है, और जो अपनी संपत्ति में से, उसके प्रति अपने प्रेम के होते हुए भी, निकट संबंधियों, अनाथों, दरिद्रों, राह के मुसाफ़िर, माँगने वालों को देता है, और ऋण के भार तले दबे हुओं को मुक्त कराने के लिए देता है, जो संपर्क बनाए रखता है और शुद्ध उदारता देता है,
وَلَٰكِنِ اِ۬لْبِرُّ مَنَ اٰمَنَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ اِ۬لَاخِرِ وَالْمَلَٰٓئِكَةِ وَالْكِتَٰبِ وَالنَّبِيٓـِٕۧنَ وَءَاتَى اَ۬لْمَالَ عَلَىٰ حُبِّهِۦ ذَوِے اِ۬لْقُرْب۪ىٰ وَالْيَتَٰم۪ىٰ وَالْمَسَٰكِينَ وَابْنَ اَ۬لسَّبِيلِ وَالسَّآئِلِينَ وَفِے اِ۬لرِّقَابِ وَأَقَامَ اَ۬لصَّلَوٰةَ وَءَاتَى اَ۬لزَّكَوٰةَۖ
जो अपनी संधि के प्रति निष्ठावान हैं जब वे संधि करते हैं,
وَالْمُوفُونَ بِعَهْدِهِمُۥٓ إِذَا عَٰهَدُواْۖ
और संकट, हानि और हिंसा के क्षण में धैर्य रखने वाले:
وَالصَّٰبِرِينَ فِے اِ۬لْبَأْسَآءِ وَالضَّرَّآءِ وَحِينَ اَ۬لْبَأْسِۖ
यही वे हैं जो सच्चे रहे,
أُوْلَٰٓئِكَ اَ۬لذِينَ صَدَقُواْۖ
और यही सावधानी बरतने वाले हैं।
وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لْمُتَّقُونَۖ
हे विश्वास करने वालो! मार डाले गए जनों के विषय में जाँच तुम्हारे लिए विहित की गई है:
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ كُتِبَ عَلَيْكُمُ اُ۬لْقِصَاصُ فِے اِ۬لْقَتْلَىۖ
स्वतंत्र के साथ स्वतंत्र, आज्ञाकारी के साथ आज्ञाकारी, और स्त्री के साथ स्त्री।
اَ۬لْحُرُّ بِالْحُرِّ وَالْعَبْدُ بِالْعَبْدِ وَالُانث۪ىٰ بِالُانث۪ىٰۖ
परंतु जिसके पक्ष में उसका भाई किसी चीज़ से दरगुज़र करे: मान्य के अनुसार अनुगमन, और सहर्ष भुगतान।
فَمَنْ عُفِيَ لَهُۥ مِنَ اَخِيهِ شَےْءٞ فَاتِّبَاعُۢ بِالْمَعْرُوفِ وَأَدَآءٌ اِلَيْهِ بِإِحْسَٰنٖۖ
यह तुम्हारे अभिभावक की ओर से राहत है, और दया।
ذَٰلِكَ تَخْفِيفٞ مِّن رَّبِّكُمْ وَرَحْمَةٞۖ
और जो कोई इसके बाद आक्रमण करे, उसके लिए पीड़ादायक दंड होगा।
فَمَنِ اِ۪عْتَد۪ىٰ بَعْدَ ذَٰلِكَ فَلَهُۥ عَذَابٌ اَلِيمٞۖ
और तुम्हारे लिए जाँच में एक जीवन है, हे मेधा रखने वालो, शायद तुम सावधान रहो।
وَلَكُمْ فِے اِ۬لْقِصَاصِ حَيَوٰةٞ يَٰٓأُوْلِے اِ۬لَالْبَٰبِ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَۖ
तुम पर विहित किया गया है, जब तुममें से किसी के पास मृत्यु आए, यदि वह कुछ संपत्ति छोड़े,
كُتِبَ عَلَيْكُمُۥٓ إِذَا حَضَرَ أَحَدَكُمُ اُ۬لْمَوْتُ إِن تَرَكَ خَيْراًۖ
माता-पिता और निकट संबंधियों के पक्ष में वसीयत, मान्य के अनुसार:
اِ۬لْوَصِيَّةُ لِلْوَٰلِدَيْنِ وَالَاقْرَبِينَ بِالْمَعْرُوفِۖ
सावधानी बरतने वालों के लिए एक कर्तव्य।
حَقّاً عَلَى اَ۬لْمُتَّقِينَۖ
और जो कोई उसे सुनने के बाद उसे बदल दे, उसका अपराध केवल उन्हीं पर है जो उसे बदलते हैं,
فَمَنۢ بَدَّلَهُۥ بَعْدَ مَا سَمِعَهُۥ فَإِنَّمَآ إِثْمُهُۥ عَلَى اَ۬لذِينَ يُبَدِّلُونَهُۥٓۖ
क्योंकि ईश्वर सुनने वाला, सर्वज्ञ है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٞۖ
परंतु जो कोई किसी वसीयत करने वाले की ओर से पक्षपात या अपराध से डरे, और उनमें सुलह करा दे, उस पर कोई अपराध नहीं ठहरता;
فَمَنْ خَافَ مِن مُّوصٖ جَنَفاً اَوِ اِثْماٗ فَأَصْلَحَ بَيْنَهُمْ فَلَآ إِثْمَ عَلَيْهِۖ
क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞۖ
हे विश्वास करने वालो! तुम पर संयम विहित किया गया है, जैसे वह उन पर विहित किया गया था जो तुमसे पहले थे, शायद तुम सावधान रहो, गिने-चुने दिनों तक।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ كُتِبَ عَلَيْكُمُ اُ۬لصِّيَامُ كَمَا كُتِبَ عَلَى اَ۬لذِينَ مِن قَبْلِكُمْ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ أَيَّاماٗ مَّعْدُودَٰتٖۖ
और तुममें से जो कोई बीमार हो, या यात्रा में, तो अन्य दिनों की गिनती;
فَمَن كَانَ مِنكُم مَّرِيضاً اَوْ عَلَىٰ سَفَرٖ فَعِدَّةٞ مِّنَ اَيَّامٍ ا۟خَرَۖ
और जिनमें इसकी क्षमता है, उनके लिए एक प्रतिपूर्ति, एक दरिद्र का भोजन।
وَعَلَى اَ۬لذِينَ يُطِيقُونَهُۥ فِدْيَةُ طَعَامِ مَسَٰكِينَۖ
और जो कोई स्वेच्छा से अच्छाई करे, वह उसके लिए बेहतर है;
فَمَن تَطَوَّعَ خَيْراٗ فَهُوَ خَيْرٞ لَّهُۥۖ
और तुम्हारा संयम करना तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम जानते।
وَأَن تَصُومُواْ خَيْرٞ لَّكُمُۥٓ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَۖ
ताज़गी का महीना, जिसमें यह पाठ उतारा गया, लोगों के लिए मार्गदर्शन, और मार्गदर्शन और विवेक के स्पष्ट प्रमाण।
۞ شَهْرُ رَمَضَانَ اَ۬لذِےٓ أُنزِلَ فِيهِ اِ۬لْقُرْءَانُ هُدىٗ لِّلنَّاسِ وَبَيِّنَٰتٖ مِّنَ اَ۬لْهُد۪ىٰ وَالْفُرْقَانِۖ
तुममें से जो कोई इस महीने के आरंभ को प्रमाणित करे, वह इसमें संयम करे;
فَمَن شَهِدَ مِنكُمُ اُ۬لشَّهْرَ فَلْيَصُمْهُۖ
और जो कोई बीमार हो, या यात्रा में, तो अन्य दिनों की गिनती।
وَمَن كَانَ مَرِيضاً اَوْ عَلَىٰ سَفَرٖ فَعِدَّةٞ مِّنَ اَيَّامٍ ا۟خَرَۖ
ईश्वर तुम्हारे लिए सुगमता चाहता है, वह तुम्हारे लिए कठिनाई नहीं चाहता,
يُرِيدُ اُ۬للَّهُ بِكُمُ اُ۬لْيُسْرَ وَلَا يُرِيدُ بِكُمُ اُ۬لْعُسْرَۖ
और यह कि तुम दिनों की गिनती पूरी करो, और यह कि तुम ईश्वर की बड़ाई की घोषणा करो कि उसने तुम्हें मार्ग दिखाया, शायद तुम कृतज्ञ हो जाओ।
وَلِتُكْمِلُواْ اُ۬لْعِدَّةَ وَلِتُكَبِّرُواْ اُ۬للَّهَ عَلَىٰ مَا هَد۪يٰكُمْ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَۖ
और जब मेरे आज्ञाकारी तुमसे मेरे विषय में पूछें, मैं निकट हूँ:
وَإِذَا سَأَلَكَ عِبَادِے عَنِّے فَإِنِّے قَرِيبٌۖ
जो मुझे बुलाता है, जब वह मुझे बुलाता है, मैं उसके बुलावे का उत्तर देता हूँ।
ا۟جِيبُ دَعْوَةَ اَ۬لدَّاعِۦٓ إِذَا دَعَانِۦۖ
तो वे मेरे बुलावे का उत्तर दें, और मुझ पर विश्वास करें, शायद वे सुबुद्धि तक पहुँचें।
فَلْيَسْتَجِيبُواْ لِے وَلْيُومِنُواْ بِيَ لَعَلَّهُمْ يَرْشُدُونَۖ
संयम की रात में अपनी स्त्रियों से अंतरंगता तुम्हारे लिए वैध की गई है:
أُحِلَّ لَكُمْ لَيْلَةَ اَ۬لصِّيَامِ اِ۬لرَّفَثُ إِلَىٰ نِسَآئِكُمْۖ
वे तुम्हारे लिए वस्त्र हैं, और तुम उनके लिए वस्त्र हो।
هُنَّ لِبَاسٞ لَّكُمْ وَأَنتُمْ لِبَاسٞ لَّهُنَّۖ
ईश्वर जानता था कि तुम स्वयं को धोखा दे रहे थे; तब वह अनुकंपा के साथ तुम्हारी ओर पलटा, और उसने तुमसे दरगुज़र किया।
عَلِمَ اَ۬للَّهُ أَنَّكُمْ كُنتُمْ تَخْتَانُونَ أَنفُسَكُمْ فَتَابَ عَلَيْكُمْ وَعَفَا عَنكُمْۖ
अब तो उनसे मिलन करो,
فَالَٰنَ بَٰشِرُوهُنَّۖ
और वह खोजो जो ईश्वर ने तुम्हारे लिए विहित किया है।
وَابْتَغُواْ مَا كَتَبَ اَ۬للَّهُ لَكُمْۖ
और खाओ और पियो जब तक तुम्हारे लिए भोर का सफ़ेद धागा काले धागे से अलग स्पष्ट न हो जाए,
وَكُلُواْ وَاشْرَبُواْ حَتَّىٰ يَتَبَيَّنَ لَكُمُ اُ۬لْخَيْطُ اُ۬لَابْيَضُ مِنَ اَ۬لْخَيْطِ اِ۬لَاسْوَدِ مِنَ اَ۬لْفَجْرِۖ
फिर रात तक संयम पूर्ण करो।
ثُمَّ أَتِمُّواْ اُ۬لصِّيَامَ إِلَى اَ۬ليْلِۖ
और उनसे मिलन मत करो, जबकि तुम माथा टेकने के स्थानों में ठहरे हुए हो।
وَلَا تُبَٰشِرُوهُنَّ وَأَنتُمْ عَٰكِفُونَ فِے اِ۬لْمَسَٰجِدِۖ
ये ईश्वर की सीमाएँ हैं,
تِلْكَ حُدُودُ اُ۬للَّهِۖ
तो उनके निकट मत जाओ।
فَلَا تَقْرَبُوهَاۖ
इस प्रकार ईश्वर लोगों के लिए अपने संकेत स्पष्ट करता है, शायद वे सावधान रहें।
كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اُ۬للَّهُ ءَايَٰتِهِۦ لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَتَّقُونَۖ
और आपस में अपनी संपत्ति असत्य से मत हड़पो, और उसे निर्णयकर्ताओं के सामने इसलिए मत रखो कि लोगों की संपत्ति का एक भाग अपराध द्वारा हड़प लो, जबकि तुम जानते हो।
وَلَا تَاكُلُوٓاْ أَمْوَٰلَكُم بَيْنَكُم بِالْبَٰطِلِ وَتُدْلُواْ بِهَآ إِلَى اَ۬لْحُكَّامِ لِتَاكُلُواْ فَرِيقاٗ مِّنَ اَمْوَٰلِ اِ۬لنَّاسِ بِالِاثْمِ وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَۖ
वे तुमसे सार्वजनिक घोषणाओं के विषय में पूछते हैं।
۞ يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ اِ۬لَاهِلَّةِۖ
कहो: “वे लोगों के लिए निर्धारित वादे के समय हैं, और हज के लिए भी।
قُلْ هِيَ مَوَٰقِيتُ لِلنَّاسِ وَالْحَجِّۖ
और सद्गुण यह नहीं कि तुम घरों में उनके पिछवाड़े से आओ,
وَلَيْسَ اَ۬لْبِرُّ بِأَن تَاتُواْ اُ۬لْبُيُوتَ مِن ظُهُورِهَاۖ
परंतु सद्गुण वह है जो सावधान रहता है।
وَلَٰكِنِ اِ۬لْبِرُّ مَنِ اِ۪تَّق۪ىٰۖ
तो घरों में उनके द्वारों से आओ,
وَاتُواْ اُ۬لْبُيُوتَ مِنَ اَبْوَٰبِهَاۖ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, शायद तुम सफल हो जाओ।”
وَاتَّقُواْ اُ۬للَّهَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَۖ
और ईश्वर की राह में उनसे लड़ो जो तुमसे लड़ते हैं, परंतु आक्रमण मत करो,
وَقَٰتِلُواْ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ اِ۬لذِينَ يُقَٰتِلُونَكُمْ وَلَا تَعْتَدُوٓاْۖ
क्योंकि ईश्वर आक्रमणकारियों से प्रेम नहीं करता।
إِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يُحِبُّ اُ۬لْمُعْتَدِينَۖ
और उन्हें जहाँ कहीं अचानक पाओ मार डालो, और उन्हें वहाँ से निकाल दो जहाँ से उन्होंने तुम्हें निकाला:
وَاقْتُلُوهُمْ حَيْثُ ثَقِفْتُمُوهُمْ وَأَخْرِجُوهُم مِّنْ حَيْثُ أَخْرَجُوكُمْۖ
परीक्षा हत्या से अधिक कठोर है।
وَالْفِتْنَةُ أَشَدُّ مِنَ اَ۬لْقَتْلِۖ
और माथा टेकने के अलंघनीय स्थान के निकट उनसे मत लड़ो, जब तक वे वहाँ तुमसे न लड़ें;
وَلَا تُقَٰتِلُوهُمْ عِندَ اَ۬لْمَسْجِدِ اِ۬لْحَرَامِ حَتَّىٰ يُقَٰتِلُوكُمْ فِيهِۖ
परंतु यदि वे तुमसे लड़ें, तो उन्हें मार डालो:
فَإِن قَٰتَلُوكُمْ فَاقْتُلُوهُمْۖ
नकारने वालों का प्रतिफल यही है।
كَذَٰلِكَ جَزَآءُ اُ۬لْكٰ۪فِرِينَۖ
परंतु यदि वे रुक जाएँ, तो ईश्वर निश्चय ही अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
فَإِنِ اِ۪نتَهَوْاْ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞۖ
और उनसे तब तक लड़ो जब तक कोई परीक्षा न रहे, और विधान ईश्वर के लिए हो;
وَقَٰتِلُوهُمْ حَتَّىٰ لَا تَكُونَ فِتْنَةٞ وَيَكُونَ اَ۬لدِّينُ لِلهِۖ
और यदि वे रुक जाएँ, तो कोई शत्रुता नहीं, सिवा अन्यायियों के विरुद्ध।
فَإِنِ اِ۪نتَهَوْاْ فَلَا عُدْوَٰنَ إِلَّا عَلَى اَ۬لظَّٰلِمِينَۖ
अलंघनीय महीना अलंघनीय महीने के बदले, और अलंघनीय वस्तुओं के लिए, जाँच।
اَ۬لشَّهْرُ اُ۬لْحَرَامُ بِالشَّهْرِ اِ۬لْحَرَامِ وَالْحُرُمَٰتُ قِصَاصٞۖ
जिसने तुम पर आक्रमण किया, उस पर उसके तुम पर किए गए आक्रमण के बराबर आक्रमण करो,
فَمَنِ اِ۪عْتَد۪ىٰ عَلَيْكُمْ فَاعْتَدُواْ عَلَيْهِ بِمِثْلِ مَا اَ۪عْتَد۪ىٰ عَلَيْكُمْۖ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, और जान लो कि ईश्वर सावधानी बरतने वालों के साथ है।
وَاتَّقُواْ اُ۬للَّهَ وَاعْلَمُوٓاْ أَنَّ اَ۬للَّهَ مَعَ اَ۬لْمُتَّقِينَۖ
और ईश्वर की राह में ख़र्च करो, परंतु अपने हाथ में जो है उसे विनाश में मत डालो; और भलाई करो,
وَأَنفِقُواْ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ وَلَا تُلْقُواْ بِأَيْدِيكُمُۥٓ إِلَى اَ۬لتَّهْلُكَةِ وَأَحْسِنُوٓاْۖ
क्योंकि ईश्वर भलाई करने वालों से प्रेम करता है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ يُحِبُّ اُ۬لْمُحْسِنِينَۖ
और हज और उमरा ईश्वर के लिए पूर्ण करो।
وَأَتِمُّواْ اُ۬لْحَجَّ وَالْعُمْرَةَ لِلهِۖ
और यदि तुम रोक दिए जाओ, तो उपहार के रूप में जो सहज मिल जाए।
فَإِنُ ا۟حْصِرْتُمْ فَمَا اَ۪سْتَيْسَرَ مِنَ اَ۬لْهَدْيِۖ
और अपने सिर तब तक मत मुँड़ाओ जब तक उपहार अपने मोचन-स्थान तक न पहुँच जाए;
وَلَا تَحْلِقُواْ رُءُوسَكُمْ حَتَّىٰ يَبْلُغَ اَ۬لْهَدْيُ مَحِلَّهُۥۖ
और तुममें से जो कोई बीमार हो, या सिर में कष्ट से पीड़ित हो, तो संयम, दान, या हितकारी आचरण द्वारा प्रतिपूर्ति।
فَمَن كَانَ مِنكُم مَّرِيضاً اَوْ بِهِۦٓ أَذىٗ مِّن رَّأْسِهِۦ فَفِدْيَةٞ مِّن صِيَامٍ اَوْ صَدَقَةٍ اَوْ نُسُكٖۖ
और जब तुम सुरक्षित हो जाओ, तो जो कोई हज तक उमरा का उपभोग करे, तो उपहार के रूप में जो सहज मिल जाए।
فَإِذَآ أَمِنتُمْ فَمَن تَمَتَّعَ بِالْعُمْرَةِ إِلَى اَ۬لْحَجِّ فَمَا اَ۪سْتَيْسَرَ مِنَ اَ۬لْهَدْيِۖ
और जिसे इसके साधन न मिलें, तो हज के दौरान तीन दिन का संयम, और सात जब तुम लौट चुके होगे: ये पूरे दस दिन हैं।
۞ فَمَن لَّمْ يَجِدْ فَصِيَامُ ثَلَٰثَةِ أَيَّامٖ فِے اِ۬لْحَجِّ وَسَبْعَةٍ اِذَا رَجَعْتُمْ تِلْكَ عَشَرَةٞ كَامِلَةٞۖ
यह उसके लिए है जिसका परिवार माथा टेकने के अलंघनीय स्थान में उपस्थित नहीं है।
ذَٰلِكَ لِمَن لَّمْ يَكُنَ اَهْلُهُۥ حَاضِرِے اِ۬لْمَسْجِدِ اِ۬لْحَرَامِۖ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, और जान लो कि ईश्वर सज़ा देने में कठोर है।
وَاتَّقُواْ اُ۬للَّهَ وَاعْلَمُوٓاْ أَنَّ اَ۬للَّهَ شَدِيدُ اُ۬لْعِقَابِۖ
हज जाने-पहचाने महीनों में होता है।
اِ۬لْحَجُّ أَشْهُرٞ مَّعْلُومَٰتٞۖ
जो कोई उनमें हज का संकल्प करे, तो हज के दौरान न अश्लीलता, न अतिक्रमण, और न बहस।
فَمَن فَرَضَ فِيهِنَّ اَ۬لْحَجَّ فَلَا رَفَثَ وَلَا فُسُوقَ وَلَا جِدَالَ فِے اِ۬لْحَجِّۖ
और तुम जो भी अच्छाई करो, ईश्वर उसे जानता है।
وَمَا تَفْعَلُواْ مِنْ خَيْرٖ يَعْلَمْهُ اُ۬للَّهُۖ
और अपनी रसद ले लो;
وَتَزَوَّدُواْۖ
क्योंकि सबसे बेहतर रसद सावधानी है।
فَإِنَّ خَيْرَ اَ۬لزَّادِ اِ۬لتَّقْو۪ىٰۖ
और मेरे प्रति सावधान रहो, हे मेधा रखने वालो।
وَاتَّقُونِ يَٰٓأُوْلِے اِ۬لَالْبَٰبِۖ
अपने अभिभावक का अनुग्रह खोजने में तुम पर कोई आक्षेप नहीं।
لَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ اَن تَبْتَغُواْ فَضْلاٗ مِّن رَّبِّكُمْۖ
और जब तुम अरफ़ात से उमड़ो, तो अलंघनीय प्रत्यक्ष चिह्न के निकट ईश्वर का स्मरण करो,
فَإِذَآ أَفَضْتُم مِّنْ عَرَفَٰتٖ فَاذْكُرُواْ اُ۬للَّهَ عِندَ اَ۬لْمَشْعَرِ اِ۬لْحَرَامِۖ
और उसका स्मरण करो, जैसे उसने तुम्हें मार्ग दिखाया, जबकि तुम इससे पहले अवश्य भटके हुओं में से थे।
وَاذْكُرُوهُ كَمَا هَد۪يٰكُمْ وَإِن كُنتُم مِّن قَبْلِهِۦ لَمِنَ اَ۬لضَّآلِّينَۖ
फिर वहाँ से उमड़ो जहाँ से लोग उमड़ते हैं,
ثُمَّ أَفِيضُواْ مِنْ حَيْثُ أَفَاضَ اَ۬لنَّاسُۖ
और ईश्वर से क्षमा माँगो,
وَاسْتَغْفِرُواْ اُ۬للَّهَۖ
क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞۖ
और जब तुम अपने हितकारी आचरण संपन्न कर चुको, तो ईश्वर का स्मरण करो जैसे तुम अपने पूर्वजों का स्मरण करते हो, या उससे भी अधिक तीव्र स्मरण के साथ।
فَإِذَا قَضَيْتُم مَّنَٰسِكَكُمْ فَاذْكُرُواْ اُ۬للَّهَ كَذِكْرِكُمُۥٓ ءَابَآءَكُمُۥٓ أَوَ اَشَدَّ ذِكْراٗۖ
और लोगों में से कोई ऐसा है जो कहता है: “हमारे अभिभावक, हमें इहलोक में दीजिए” — और अंतिम जीवन में उसका कोई हिस्सा नहीं होगा।
فَمِنَ اَ۬لنَّاسِ مَنْ يَّقُولُ رَبَّنَآ ءَاتِنَا فِے اِ۬لدُّنْي۪ا وَمَا لَهُۥ فِے اِ۬لَاخِرَةِ مِنْ خَلَٰقٖۖ
और उनमें से कोई ऐसा है जो कहता है: “हमारे अभिभावक, हमें इहलोक में एक सुंदर अंश दीजिए, और अंतिम जीवन में एक सुंदर अंश, और हमें आग के दंड से बचाइए।”
وَمِنْهُم مَّنْ يَّقُولُ رَبَّنَآ ءَاتِنَا فِے اِ۬لدُّنْي۪ا حَسَنَةٗ وَفِے اِ۬لَاخِرَةِ حَسَنَةٗ وَقِنَا عَذَابَ اَ۬لنّ۪ارِۖ
यही वे हैं जिनके लिए उसमें से एक हिस्सा है जो उन्होंने कमाया।
أُوْلَٰٓئِكَ لَهُمْ نَصِيبٞ مِّمَّا كَسَبُواْۖ
ईश्वर हिसाब में शीघ्र है।
وَاللَّهُ سَرِيعُ اُ۬لْحِسَابِۖ
और गिने हुए दिनों में ईश्वर का स्मरण करो।
۞ وَاذْكُرُواْ اُ۬للَّهَ فِےٓ أَيَّامٖ مَّعْدُودَٰتٖۖ
और जो कोई दो दिन में जल्दी करे, उस पर कोई अपराध नहीं ठहरता;
فَمَن تَعَجَّلَ فِے يَوْمَيْنِ فَلَآ إِثْمَ عَلَيْهِۖ
और जो कोई देर करे, उस पर कोई अपराध नहीं ठहरता, उसके लिए जो सावधान रहता है।
وَمَن تَأَخَّرَ فَلَآ إِثْمَ عَلَيْهِ لِمَنِ اِ۪تَّق۪ىٰۖ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, और जान लो कि तुम उसी की ओर इकट्ठा किए जाओगे।
وَاتَّقُواْ اُ۬للَّهَ وَاعْلَمُوٓاْ أَنَّكُمُۥٓ إِلَيْهِ تُحْشَرُونَۖ
और लोगों में से कोई ऐसा है जिसका कथन, इहलोक के जीवन के विषय में, तुम्हें चकाचौंध कर देता है, और जो अपने मर्म में जो है उस पर ईश्वर को साक्षी बनाता है, जबकि वह झगड़ने वालों में सबसे हठी है।
وَمِنَ اَ۬لنَّاسِ مَنْ يُّعْجِبُكَ قَوْلُهُۥ فِے اِ۬لْحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنْي۪ا وَيُشْهِدُ اُ۬للَّهَ عَلَىٰ مَا فِے قَلْبِهِۦ وَهُوَ أَلَدُّ اُ۬لْخِصَامِۖ
और जब वह पीठ फेरता है, तो वह धरती पर वहाँ बिगाड़ फैलाने, और खेती और संतति को नष्ट करने में लगा रहता है।
وَإِذَا تَوَلّ۪ىٰ سَع۪ىٰ فِے اِ۬لَارْضِ لِيُفْسِدَ فِيهَا وَيُهْلِكَ اَ۬لْحَرْثَ وَالنَّسْلَۖ
ईश्वर बिगाड़ से प्रेम नहीं करता।
وَاللَّهُ لَا يُحِبُّ اُ۬لْفَسَادَۖ
और जब उससे कहा जाता है: “ईश्वर के प्रति सावधान रहो”, तो शक्ति उसे अपराध में जकड़ लेती है; तो जहन्नम उसके लिए पर्याप्त है।
وَإِذَا قِيلَ لَهُ اُ۪تَّقِ اِ۬للَّهَ أَخَذَتْهُ اُ۬لْعِزَّةُ بِالِاثْمِ فَحَسْبُهُۥ جَهَنَّمُۖ
और कितना भयानक बिछौना!
وَلَبِيسَ اَ۬لْمِهَادُۖ
और लोगों में से कोई ऐसा है जो ईश्वर की प्रसन्नता खोजते हुए अपना स्व बेच देता है।
وَمِنَ اَ۬لنَّاسِ مَنْ يَّشْرِے نَفْسَهُ اُ۪بْتِغَآءَ مَرْضَاتِ اِ۬للَّهِۖ
ईश्वर अपने आज्ञाकारियों के प्रति करुणामय है।
وَاللَّهُ رَءُوفُۢ بِالْعِبَادِۖ
हे विश्वास करने वालो! शांति में प्रवेश करो, पूर्णतः,
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ اُ۟دْخُلُواْ فِے اِ۬لسَّلْمِ كَآفَّةٗۖ
और बहकाने वाले के क़दमों का अनुसरण मत करो,
وَلَا تَتَّبِعُواْ خُطْوَٰتِ اِ۬لشَّيْطَٰنِۖ
क्योंकि वह तुम्हारे लिए एक स्पष्ट शत्रु है।
إِنَّهُۥ لَكُمْ عَدُوّٞ مُّبِينٞۖ
और यदि तुम्हारे पास स्पष्ट प्रमाण आ जाने के बाद तुम डगमगाओ, तो जान लो कि ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।
فَإِن زَلَلْتُم مِّنۢ بَعْدِ مَا جَآءَتْكُمُ اُ۬لْبَيِّنَٰتُ فَاعْلَمُوٓاْ أَنَّ اَ۬للَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌۖ
क्या वे केवल इसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं कि ईश्वर बादलों के चँदोवों में उनके पास आए,
هَلْ يَنظُرُونَ إِلَّآ أَنْ يَّاتِيَهُمُ اُ۬للَّهُ فِے ظُلَلٖ مِّنَ اَ۬لْغَمَٰمِۖ
अभिकर्ताओं के साथ, और मामले का फ़ैसला कर दिया जाए?
وَالْمَلَٰٓئِكَةُ وَقُضِيَ اَ۬لَامْرُۖ
और सारे मामले ईश्वर की ओर लौटते हैं।
وَإِلَى اَ۬للَّهِ تُرْجَعُ اُ۬لُامُورُۖ
इसराईल की संतान से पूछो कि हमने उन्हें कितने स्पष्ट संकेत दिए।
سَلْ بَنِےٓ إِسْرَآءِيلَ كَمَ اٰتَيْنَٰهُم مِّنَ اٰيَةِۢ بَيِّنَةٖۖ
और जो कोई ईश्वर के उपकार को, उसके पास आ जाने के बाद, बदल दे — ईश्वर निश्चय ही सज़ा देने में कठोर है।
وَمَنْ يُّبَدِّلْ نِعْمَةَ اَ۬للَّهِ مِنۢ بَعْدِ مَا جَآءَتْهُ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ شَدِيدُ اُ۬لْعِقَابِۖ
जो नकारते हैं उनके लिए इहलोक का जीवन सुशोभित कर दिया गया है, और वे उनका उपहास करते हैं जिन्होंने विश्वास किया;
زُيِّنَ لِلذِينَ كَفَرُواْ اُ۬لْحَيَوٰةُ اُ۬لدُّنْي۪ا وَيَسْخَرُونَ مِنَ اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْۖ
परंतु सावधानी बरतने वाले पेशी के दिन उनके ऊपर होंगे।
وَالذِينَ اَ۪تَّقَوْاْ فَوْقَهُمْ يَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِۖ
और ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे बिना गिने जीविका देता है।
وَاللَّهُ يَرْزُقُ مَنْ يَّشَآءُ بِغَيْرِ حِسَابٖۖ
लोग एक ही समुदाय थे; तब ईश्वर ने सूचनादाताओं को उठाया, शुभ समाचार देने वाले और चेतावनी देने वाले, और उनके साथ ग्रंथ को पूर्ण सत्य के साथ उतारा, ताकि वह लोगों के बीच उस विषय में निर्णय करे जिसमें वे मतभेद करते थे।
۞ كَانَ اَ۬لنَّاسُ أُمَّةٗ وَٰحِدَةٗ فَبَعَثَ اَ۬للَّهُ اُ۬لنَّبِيٓـِٕۧنَ مُبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ وَأَنزَلَ مَعَهُمُ اُ۬لْكِتَٰبَ بِالْحَقِّ لِيَحْكُمَ بَيْنَ اَ۬لنَّاسِ فِيمَا اَ۪خْتَلَفُواْ فِيهِۖ
और उसमें मतभेद केवल उन्होंने किया जिन्हें वह दिया गया,
وَمَا اَ۪خْتَلَفَ فِيهِ إِلَّا اَ۬لذِينَ أُوتُوهُۖ
उनके पास स्पष्ट प्रमाण आ जाने के बाद, आपस की ज़्यादती के कारण।
مِنۢ بَعْدِ مَا جَآءَتْهُمُ اُ۬لْبَيِّنَٰتُ بَغْياَۢ بَيْنَهُمْۖ
तब ईश्वर ने उन्हें, जिन्होंने विश्वास किया, उस सत्य की ओर मार्ग दिखाया जिसमें वे मतभेद करते थे, अपनी अनुमति से।
فَهَدَى اَ۬للَّهُ اُ۬لذِينَ ءَامَنُواْ لِمَا اَ۪خْتَلَفُواْ فِيهِ مِنَ اَ۬لْحَقِّ بِإِذْنِهِۦۖ
और ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे सीधे पथ की ओर मार्ग दिखाता है।
وَاللَّهُ يَهْدِے مَنْ يَّشَآءُ اِ۪لَىٰ صِرَٰطٖ مُّسْتَقِيمٍۖ
या फिर क्या तुम सोचते थे कि तुम उद्यान में प्रवेश करोगे, जबकि तुम्हारे पास अभी तक उसके जैसा नहीं आया जो तुमसे पहले गुज़रे जनों ने झेला? उन्हें संकट और हानि ने छुआ, और वे इतना हिला दिए गए कि संदेशवाहक और जिन्होंने उसके साथ विश्वास किया था उन्होंने कहा: “ईश्वर की सहायता कब?”
اَمْ حَسِبْتُمُۥٓ أَن تَدْخُلُواْ اُ۬لْجَنَّةَ وَلَمَّا يَاتِكُم مَّثَلُ اُ۬لذِينَ خَلَوْاْ مِن قَبْلِكُم مَّسَّتْهُمُ اُ۬لْبَأْسَآءُ وَالضَّرَّآءُ وَزُلْزِلُواْ حَتَّىٰ يَقُولُ اُ۬لرَّسُولُ وَالذِينَ ءَامَنُواْ مَعَهُۥ مَت۪ىٰ نَصْرُ اُ۬للَّهِۖ
क्या ऐसा नहीं है: ईश्वर की सहायता निश्चय ही निकट है!
أَلَآ إِنَّ نَصْرَ اَ۬للَّهِ قَرِيبٞۖ
वे तुमसे पूछते हैं: उन्हें क्या ख़र्च करना चाहिए?
يَسْـَٔلُونَكَ مَاذَا يُنفِقُونَۖ
कहो: “तुम अच्छाई में से जो ख़र्च करते हो वह माता-पिता, निकट संबंधियों, अनाथों, दरिद्रों, और राह के मुसाफ़िर को जाता है।
قُلْ مَآ أَنفَقْتُم مِّنْ خَيْرٖ فَلِلْوَٰلِدَيْنِ وَالَاقْرَبِينَ وَالْيَتَٰم۪ىٰ وَالْمَسَٰكِينِ وَابْنِ اِ۬لسَّبِيلِۖ
और तुम जो भी अच्छाई करो, ईश्वर उसके विषय में निश्चय ही सर्वज्ञ है।”
وَمَا تَفْعَلُواْ مِنْ خَيْرٖ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ بِهِۦ عَلِيمٞۖ
तुम पर लड़ाई विहित की गई है, जबकि वह तुम्हारी अरुचि का विषय है।
كُتِبَ عَلَيْكُمُ اُ۬لْقِتَالُ وَهُوَ كُرْهٞ لَّكُمْۖ
और हो सकता है कि तुम्हें किसी चीज़ से अरुचि हो, जबकि वह तुम्हारे लिए अच्छाई है;
وَعَس۪ىٰٓ أَن تَكْرَهُواْ شَئْاٗ وَهُوَ خَيْرٞ لَّكُمْۖ
और हो सकता है कि तुम किसी चीज़ से प्रेम करो, जबकि वह तुम्हारे लिए बुराई है।
وَعَس۪ىٰٓ أَن تُحِبُّواْ شَئْاٗ وَهُوَ شَرّٞ لَّكُمْۖ
ईश्वर जानता है,
وَاللَّهُ يَعْلَمُۖ
और तुम नहीं जानते।
وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَۖ
वे तुमसे अलंघनीय महीने के विषय में पूछते हैं, उसमें होने वाली लड़ाई के विषय में।
يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ اِ۬لشَّهْرِ اِ۬لْحَرَامِ قِتَالٖ فِيهِۖ
कहो: “उसमें लड़ना गंभीर है;
قُلْ قِتَالٞ فِيهِ كَبِيرٞۖ
परंतु ईश्वर की राह रोकना, उसे नकारना, माथा टेकने के अलंघनीय स्थान तक पहुँच रोकना, और उसके निवासियों को वहाँ से निकाल देना, ईश्वर के पास और भी अधिक गंभीर है;
وَصَدٌّ عَن سَبِيلِ اِ۬للَّهِ وَكُفْرُۢ بِهِۦ وَالْمَسْجِدِ اِ۬لْحَرَامِ وَإِخْرَاجُ أَهْلِهِۦ مِنْهُ أَكْبَرُ عِندَ اَ۬للَّهِۖ
और परीक्षा हत्या से अधिक गंभीर है।
وَالْفِتْنَةُ أَكْبَرُ مِنَ اَ۬لْقَتْلِۖ
और वे तुमसे लड़ने से तब तक नहीं रुकेंगे जब तक वे तुमसे तुम्हारा विधान छुड़वा न दें, यदि वे कर सकें।
وَلَا يَزَالُونَ يُقَٰتِلُونَكُمْ حَتَّىٰ يَرُدُّوكُمْ عَن دِينِكُمُۥٓ إِنِ اِ۪سْتَطَٰعُواْۖ
और तुममें से जो कोई अपना विधान छोड़ दे, और नकारते हुए मरे — यही वे हैं जिनके कर्म ढह गए, इहलोक में और अंतिम जीवन में,
وَمَنْ يَّرْتَدِدْ مِنكُمْ عَن دِينِهِۦ فَيَمُتْ وَهُوَ كَافِرٞ فَأُوْلَٰٓئِكَ حَبِطَتَ اَعْمَٰلُهُمْ فِے اِ۬لدُّنْي۪ا وَالَاخِرَةِۖ
और यही आग वाले हैं, वे उसमें सदा रहते हैं।”
وَأُوْلَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ اُ۬لنّ۪ارِ هُمْ فِيهَا خَٰلِدُونَۖ
निश्चय ही, जिन्होंने विश्वास किया, जिन्होंने प्रवास किया और ईश्वर की राह में संघर्ष किया — यही वे हैं जो ईश्वर की दया की आशा रखते हैं।
إِنَّ اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ وَالذِينَ هَاجَرُواْ وَجَٰهَدُواْ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ أُوْلَٰٓئِكَ يَرْجُونَ رَحْمَتَ اَ۬للَّهِۖ
और ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
وَاللَّهُ غَفُورٞ رَّحِيمٞۖ
वे तुमसे मदिरा और जुए के विषय में पूछते हैं।
۞ يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ اِ۬لْخَمْرِ وَالْمَيْسِرِۖ
कहो: “दोनों में एक बड़ा अपराध है, और लोगों के लिए लाभ भी;
قُلْ فِيهِمَآ إِثْمٞ كَبِيرٞ وَمَنَٰفِعُ لِلنَّاسِۖ
परंतु उनका अपराध उनके लाभ से बड़ा है।”
وَإِثْمُهُمَآ أَكْبَرُ مِن نَّفْعِهِمَاۖ
और वे तुमसे पूछते हैं: उन्हें क्या ख़र्च करना चाहिए? कहो: “आवश्यकता से अधिक।”
وَيَسْـَٔلُونَكَ مَاذَا يُنفِقُونَ قُلِ اِ۬لْعَفْوَۖ
इस प्रकार ईश्वर तुम्हारे लिए संकेत स्पष्ट करता है, शायद तुम इहलोक और अंतिम जीवन पर सोच-विचार करो।
كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اُ۬للَّهُ لَكُمُ اُ۬لَايَٰتِ لَعَلَّكُمْ تَتَفَكَّرُونَ فِے اِ۬لدُّنْي۪ا وَالَاخِرَةِۖ
और वे तुमसे अनाथों के विषय में पूछते हैं। कहो: “उनकी स्थिति सुधारना अच्छाई है;
وَيَسْـَٔلُونَكَ عَنِ اِ۬لْيَتَٰم۪ىٰ قُلِ اِصْلَٰحٞ لَّهُمْ خَيْرٞۖ
और यदि तुम अपने मामले उनके मामलों में मिला लो, तो वे तुम्हारे भाई हैं।
وَإِن تُخَالِطُوهُمْ فَإِخْوَٰنُكُمْۖ
ईश्वर बिगाड़ने वाले को सुधार करने वाले से अलग पहचानता है।
وَاللَّهُ يَعْلَمُ اُ۬لْمُفْسِدَ مِنَ اَ۬لْمُصْلِحِۖ
और यदि ईश्वर की मर्ज़ी होती, तो वह तुम्हें कुचल देता,
وَلَوْ شَآءَ اَ۬للَّهُ لَأَعْنَتَكُمُۥٓۖ
क्योंकि ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।”
إِنَّ اَ۬للَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٞۖ
और साझी ठहराने वाली स्त्रियों से विवाह मत करो, जब तक वे विश्वास न करें;
وَلَا تَنكِحُواْ اُ۬لْمُشْرِكَٰتِ حَتَّىٰ يُومِنَّۖ
और आज्ञाकारी, विश्वास करने वाली स्त्री साझी ठहराने वाली स्त्री से निश्चय ही बेहतर है, भले ही वह तुम्हें चकाचौंध करे।
وَلَأَمَةٞ مُّومِنَةٌ خَيْرٞ مِّن مُّشْرِكَةٖ وَلَوَ اَعْجَبَتْكُمْۖ
और साझी ठहराने वालों को विवाह में मत दो, जब तक वे विश्वास न करें;
وَلَا تُنكِحُواْ اُ۬لْمُشْرِكِينَ حَتَّىٰ يُومِنُواْۖ
और आज्ञाकारी, विश्वास करने वाला पुरुष साझी ठहराने वाले पुरुष से निश्चय ही बेहतर है, भले ही वह तुम्हें चकाचौंध करे।
وَلَعَبْدٞ مُّومِنٌ خَيْرٞ مِّن مُّشْرِكٖ وَلَوَ اَعْجَبَكُمُۥٓۖ
यही वे हैं जो आग की ओर बुलाते हैं,
أُوْلَٰٓئِكَ يَدْعُونَ إِلَى اَ۬لنّ۪ارِۖ
जबकि ईश्वर उद्यान और क्षमा की ओर बुलाता है, अपनी अनुमति से,
وَاللَّهُ يَدْعُوٓاْ إِلَى اَ۬لْجَنَّةِ وَالْمَغْفِرَةِ بِإِذْنِهِۦۖ
और वह लोगों के लिए अपने संकेत स्पष्ट करता है, शायद वे स्मरण करें।
وَيُبَيِّنُ ءَايَٰتِهِۦ لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَۖ
और वे तुमसे मासिक स्राव के विषय में पूछते हैं। कहो: “यह एक कष्ट है;
وَيَسْـَٔلُونَكَ عَنِ اِ۬لْمَحِيضِ قُلْ هُوَ أَذىٗۖ
तो मासिक स्राव के दौरान स्त्रियों से दूर रहो,
فَاعْتَزِلُواْ اُ۬لنِّسَآءَ فِے اِ۬لْمَحِيضِۖ
और उनके निकट मत जाओ जब तक उन्हें कष्ट न रहे।
وَلَا تَقْرَبُوهُنَّ حَتَّىٰ يَطْهُرْنَۖ
और जब उन्हें कष्ट न रहे, तो उनसे मिलन करो जहाँ से ईश्वर ने तुम्हें आदेश दिया है,
فَإِذَا تَطَهَّرْنَ فَاتُوهُنَّ مِنْ حَيْثُ أَمَرَكُمُ اُ۬للَّهُۖ
क्योंकि ईश्वर पलट आने वालों से प्रेम करता है, और स्वच्छ रहने वालों से प्रेम करता है।”
إِنَّ اَ۬للَّهَ يُحِبُّ اُ۬لتَّوَّٰبِينَ وَيُحِبُّ اُ۬لْمُتَطَهِّرِينَۖ
तुम्हारी स्त्रियाँ तुम्हारे लिए खेती हैं; तो अपनी खेती से जैसी तुम्हारी मर्ज़ी हो वैसे मिलन करो,
نِسَآؤُكُمْ حَرْثٞ لَّكُمْ فَاتُواْ حَرْثَكُمُۥٓ أَنّ۪ىٰ شِئْتُمْۖ
और अपने लिए आगे बढ़ाओ;
وَقَدِّمُواْ لِأَنفُسِكُمْۖ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो,
وَاتَّقُواْ اُ۬للَّهَۖ
और जान लो कि तुम उससे मिलोगे।
وَاعْلَمُوٓاْ أَنَّكُم مُّلَٰقُوهُۖ
और विश्वास करने वालों को शुभ समाचार दो।
وَبَشِّرِ اِ۬لْمُومِنِينَۖ
और अपनी शपथों में ईश्वर को एक ऐसा बहाना मत बनाओ जिसका तुम मनमाने ढंग से उपयोग करो,
وَلَا تَجْعَلُواْ اُ۬للَّهَ عُرْضَةٗ لِّأَيْمَٰنِكُمُۥٓۖ
यह प्रमाणित करने के लिए कि तुम सद्गुणी हो, कि तुम सावधान रहते हो, और कि तुम लोगों में सुलह कराते हो।
أَن تَبَرُّواْ وَتَتَّقُواْ وَتُصْلِحُواْ بَيْنَ اَ۬لنَّاسِۖ
ईश्वर सुनने वाला, सर्वज्ञ है।
وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٞۖ
ईश्वर तुम्हें तुम्हारी शपथों में व्यर्थता के लिए नहीं पकड़ेगा,
لَّا يُوَ۬اخِذُكُمُ اُ۬للَّهُ بِاللَّغْوِ فِےٓ أَيْمَٰنِكُمْۖ
परंतु वह तुम्हें उसके कारण पकड़ेगा जो तुम्हारे मर्मों ने कमाया।
وَلَٰكِنْ يُّوَ۬اخِذُكُم بِمَا كَسَبَتْ قُلُوبُكُمْۖ
ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, सहनशील है।
وَاللَّهُ غَفُورٌ حَلِيمٞۖ
जो अपनी स्त्रियों से दूर रहने की शपथ लेते हैं, उनके लिए चार महीने की प्रतीक्षा-अवधि;
لِّلذِينَ يُولُونَ مِن نِّسَآئِهِمْ تَرَبُّصُ أَرْبَعَةِ أَشْهُرٖۖ
और यदि वे वापस आ जाएँ, तो ईश्वर निश्चय ही अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
فَإِن فَآءُو فَإِنَّ اَ۬للَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞۖ
और यदि वे परित्याग का दृढ़ निश्चय कर लें, तो ईश्वर निश्चय ही सुनने वाला, सर्वज्ञ है।
وَإِنْ عَزَمُواْ اُ۬لطَّلَٰقَ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٞۖ
और परित्यक्त स्त्रियाँ तीन चक्र तक प्रतीक्षा-अवधि में रहती हैं;
۞ وَالْمُطَلَّقَٰتُ يَتَرَبَّصْنَ بِأَنفُسِهِنَّ ثَلَٰثَةَ قُرُوٓءٖۖ
और उनके लिए वैध नहीं कि वे उसे दबाएँ जो ईश्वर ने उनके गर्भाशयों में रचा है, यदि वे ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास करती हैं।
وَلَا يَحِلُّ لَهُنَّ أَنْ يَّكْتُمْنَ مَا خَلَقَ اَ۬للَّهُ فِےٓ أَرْحَامِهِنَّ إِن كُنَّ يُومِنَّ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ اِ۬لَاخِرِۖ
और उनके पति इस अवधि में उन्हें वापस ले आने का अधिक हक़ रखते हैं, यदि वे सुलह चाहें।
وَبُعُولَتُهُنَّ أَحَقُّ بِرَدِّهِنَّ فِے ذَٰلِكَ إِنَ اَرَادُوٓاْ إِصْلَٰحاٗۖ
और उनके हक़ उनके दायित्वों के समान हैं, मान्य के अनुसार;
وَلَهُنَّ مِثْلُ اُ۬لذِے عَلَيْهِنَّ بِالْمَعْرُوفِۖ
और पुरुषों की उन पर एक श्रेणी है।
وَلِلرِّجَالِ عَلَيْهِنَّ دَرَجَةٞۖ
ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।
وَاللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌۖ
परित्याग दो बार का है।
اِ۬لطَّلَٰقُ مَرَّتَٰنِۖ
फिर, या तो मान्य के अनुसार पुनर्ग्रहण, या सहर्ष मुक्ति।
فَإِمْسَاكُۢ بِمَعْرُوفٍ اَوْ تَسْرِيحُۢ بِإِحْسَٰنٖۖ
और तुम्हारे लिए वैध नहीं कि जो तुमने उन्हें दिया है उसमें से कुछ भी वापस लो, सिवा इसके कि दोनों को ईश्वर की सीमाएँ बनाए न रख पाने का डर हो।
وَلَا يَحِلُّ لَكُمُۥٓ أَن تَاخُذُواْ مِمَّآ ءَاتَيْتُمُوهُنَّ شَئْاً اِلَّآ أَنْ يَّخَافَآ أَلَّا يُقِيمَا حُدُودَ اَ۬للَّهِۖ
और यदि तुम्हें डर हो कि वे ईश्वर की सीमाएँ बनाए नहीं रखेंगे, तो जिसके बदले वह स्वयं को छुड़ा ले उसके विषय में उन दोनों पर कोई आक्षेप नहीं।
فَإِنْ خِفْتُمُۥٓ أَلَّا يُقِيمَا حُدُودَ اَ۬للَّهِ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَا فِيمَا اَ۪فْتَدَتْ بِهِۦۖ
ये ईश्वर की सीमाएँ हैं,
تِلْكَ حُدُودُ اُ۬للَّهِۖ
तो उन्हें पार मत करो।
فَلَا تَعْتَدُوهَاۖ
और जो कोई ईश्वर की सीमाएँ पार करे — यही अन्यायी हैं।
وَمَنْ يَّتَعَدَّ حُدُودَ اَ۬للَّهِ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لظَّٰلِمُونَۖ
यदि वह उसका परित्याग कर दे, तो इसके बाद वह उसके लिए वैध नहीं रहेगी, जब तक वह उससे भिन्न किसी जोड़ीदार से विवाह न कर ले।
فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا تَحِلُّ لَهُۥ مِنۢ بَعْدُ حَتَّىٰ تَنكِحَ زَوْجاً غَيْرَهُۥۖ
और यदि यह उसका परित्याग कर दे, तो उन दोनों पर फिर से जुड़ने में कोई आक्षेप नहीं, यदि वे अनुमान लगाएँ कि वे ईश्वर की सीमाएँ बनाए रखेंगे।
فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَآ أَنْ يَّتَرَاجَعَآ إِن ظَنَّآ أَنْ يُّقِيمَا حُدُودَ اَ۬للَّهِۖ
और ये ईश्वर की सीमाएँ हैं, जिन्हें वह ऐसी क़ौम के लिए स्पष्ट करता है जो जानती है।
وَتِلْكَ حُدُودُ اُ۬للَّهِ يُبَيِّنُهَا لِقَوْمٖ يَعْلَمُونَۖ
और जब तुम स्त्रियों का परित्याग करो, और वे अपनी अवधि तक पहुँच जाएँ, तो उन्हें मान्य के अनुसार रखो, या उन्हें मान्य के अनुसार मुक्त करो;
وَإِذَا طَلَّقْتُمُ اُ۬لنِّسَآءَ فَبَلَغْنَ أَجَلَهُنَّ فَأَمْسِكُوهُنَّ بِمَعْرُوفٍ اَوْ سَرِّحُوهُنَّ بِمَعْرُوفٖۖ
और उन्हें हानि पहुँचाने के लिए, आक्रमण करने के लिए मत रखो।
وَلَا تُمْسِكُوهُنَّ ضِرَاراٗ لِّتَعْتَدُواْۖ
और जो कोई ऐसा करे उसने स्वयं पर अन्याय किया है।
وَمَنْ يَّفْعَلْ ذَٰلِكَ فَقَد ظَّلَمَ نَفْسَهُۥۖ
और ईश्वर के संकेतों को मज़ाक़ का विषय मत बनाओ।
وَلَا تَتَّخِذُوٓاْ ءَايَٰتِ اِ۬للَّهِ هُزُؤاٗۖ
और अपने ऊपर ईश्वर के उपकार का स्मरण करो, और उसे भी जो उसने तुम पर ग्रंथ और प्रज्ञा में से उतारा है, जिनके द्वारा वह तुम्हें उपदेश देता है।
وَاذْكُرُواْ نِعْمَتَ اَ۬للَّهِ عَلَيْكُمْ وَمَآ أَنزَلَ عَلَيْكُم مِّنَ اَ۬لْكِتَٰبِ وَالْحِكْمَةِ يَعِظُكُم بِهِۦۖ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो,
وَاتَّقُواْ اُ۬للَّهَۖ
और जान लो कि ईश्वर हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।
وَاعْلَمُوٓاْ أَنَّ اَ۬للَّهَ بِكُلِّ شَےْءٍ عَلِيمٞۖ
और जब तुम स्त्रियों का परित्याग करो, और वे अपनी अवधि तक पहुँच जाएँ, तो उन्हें अपने जोड़ीदारों से विवाह करने में बाधा मत डालो, जब उनके बीच मान्य के अनुसार आपसी प्रसन्नता हो।
وَإِذَا طَلَّقْتُمُ اُ۬لنِّسَآءَ فَبَلَغْنَ أَجَلَهُنَّ فَلَا تَعْضُلُوهُنَّ أَنْ يَّنكِحْنَ أَزْوَٰجَهُنَّ إِذَا تَرَٰضَوْاْ بَيْنَهُم بِالْمَعْرُوفِۖ
यही वह है जिसका उपदेश तुममें से हर उस व्यक्ति को दिया जाता है जो ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास करता है।
ذَٰلِكَ يُوعَظُ بِهِۦ مَن كَانَ مِنكُمْ يُومِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ اِ۬لَاخِرِۖ
यह तुम्हारे लिए अधिक शुद्ध है, और अधिक स्वच्छ।
ذَٰلِكُمُۥٓ أَزْك۪ىٰ لَكُمْ وَأَطْهَرُۖ
ईश्वर जानता है, और तुम नहीं जानते।
وَاللَّهُ يَعْلَمُۖ وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَۖ
और माताएँ अपने बच्चों की देखभाल का ज़िम्मा पूरे दो बरस लेती हैं,
۞ وَالْوَٰلِدَٰتُ يُرْضِعْنَ أَوْلَٰدَهُنَّ حَوْلَيْنِ كَامِلَيْنِۖ
उसके लिए जो इस देखभाल को पूर्ण करना चाहे।
لِمَنَ اَرَادَ أَنْ يُّتِمَّ اَ۬لرَّضَٰعَةَۖ
और जिसके लिए बच्चा जन्मा है, उस पर है कि वह मान्य के अनुसार उन्हें जीविका और पहनावा दे।
وَعَلَى اَ۬لْمَوْلُودِ لَهُۥ رِزْقُهُنَّ وَكِسْوَتُهُنَّ بِالْمَعْرُوفِۖ
किसी भी स्व पर उसकी क्षमता से अधिक भार नहीं डाला जाता।
لَا تُكَلَّفُ نَفْسٌ اِلَّا وُسْعَهَاۖ
कोई माता अपने बच्चे के कारण हानि न सहे, और न वह जिसके लिए बच्चा जन्मा है, अपने बच्चे के कारण।
لَا تُضَآرَّ وَٰلِدَةُۢ بِوَلَدِهَا وَلَا مَوْلُودٞ لَّهُۥ بِوَلَدِهِۦۖ
और उत्तराधिकारी पर भी वैसा ही है।
وَعَلَى اَ۬لْوَارِثِ مِثْلُ ذَٰلِكَۖ
और यदि वे दूध छुड़ाना चाहें, आपस की प्रसन्नता और परामर्श के बाद, तो उन दोनों पर कोई आक्षेप नहीं।
فَإِنَ اَرَادَا فِصَالاً عَن تَرَاضٖ مِّنْهُمَا وَتَشَاوُرٖ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَاۖ
और यदि तुम अपने बच्चों की देखभाल का ज़िम्मा दिलवाना चाहो, तो तुम पर कोई आक्षेप नहीं, जब तुम वह सौंप दो जो तुम्हें देना है, मान्य के अनुसार।
وَإِنَ اَرَدتُّمُۥٓ أَن تَسْتَرْضِعُوٓاْ أَوْلَٰدَكُمْ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمُۥٓ إِذَا سَلَّمْتُم مَّآ ءَاتَيْتُم بِالْمَعْرُوفِۖ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो,
وَاتَّقُواْ اُ۬للَّهَۖ
और जान लो कि ईश्वर तुम जो करते हो उस पर दृष्टि रखता है।
وَاعْلَمُوٓاْ أَنَّ اَ۬للَّهَ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٞۖ
और तुममें से जो निष्ठापूर्वक सँभाल लिए जाते हैं, जोड़ीदार छोड़ते हुए, उनकी जोड़ीदार चार महीने और दस की प्रतीक्षा-अवधि में रहती हैं;
وَالذِينَ يُتَوَفَّوْنَ مِنكُمْ وَيَذَرُونَ أَزْوَٰجاٗ يَتَرَبَّصْنَ بِأَنفُسِهِنَّ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٖ وَعَشْراٗۖ
और जब वे अपनी अवधि तक पहुँच जाएँ, तो वे अपने विषय में जो मान्य के अनुसार करें उसके लिए तुम पर कोई आक्षेप नहीं।
فَإِذَا بَلَغْنَ أَجَلَهُنَّ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ فِيمَا فَعَلْنَ فِےٓ أَنفُسِهِنَّ بِالْمَعْرُوفِۖ
और ईश्वर तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।
وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٞۖ
और स्त्रियों से विवाह-प्रस्ताव के रूप में तुम जो इशारे से जताओ, या जो तुम अपने भीतर सँजोकर रखो, उसमें तुम पर कोई आक्षेप नहीं।
وَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ فِيمَا عَرَّضْتُم بِهِۦ مِنْ خِطْبَةِ اِ۬لنِّسَآءِ اَ۬وَ اَكْنَنتُمْ فِےٓ أَنفُسِكُمْۖ
ईश्वर जानता है कि तुम उनके विषय में सोचोगे; परंतु उनसे गुप्त रूप से कोई वादा मत करो,
عَلِمَ اَ۬للَّهُ أَنَّكُمْ سَتَذْكُرُونَهُنَّ وَلَٰكِن لَّا تُوَاعِدُوهُنَّ سِرّاًۖ
सिवा इसके कि तुम मान्य कथन कहो।
اِلَّآ أَن تَقُولُواْ قَوْلاٗ مَّعْرُوفاٗۖ
और विवाह-अनुबंध तब तक पक्का मत करो जब तक दस्तावेज़ अपनी अवधि तक न पहुँच जाए।
۞ وَلَا تَعْزِمُواْ عُقْدَةَ اَ۬لنِّكَاحِ حَتَّىٰ يَبْلُغَ اَ۬لْكِتَٰبُ أَجَلَهُۥۖ
और जान लो कि ईश्वर जानता है जो तुम्हारे स्व में है; तो उसके प्रति सतर्क रहो।
وَاعْلَمُوٓاْ أَنَّ اَ۬للَّهَ يَعْلَمُ مَا فِےٓ أَنفُسِكُمْ فَاحْذَرُوهُۖ
और जान लो कि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, सहनशील है।
وَاعْلَمُوٓاْ أَنَّ اَ۬للَّهَ غَفُورٌ حَلِيمٞۖ
तुम पर कोई आक्षेप नहीं, यदि तुम स्त्रियों का परित्याग करो जब तक तुमने उन्हें स्पर्श न किया हो, या उनके लिए कोई दायित्व निर्धारित न किया हो।
لَّا جُنَاحَ عَلَيْكُمُۥٓ إِن طَلَّقْتُمُ اُ۬لنِّسَآءَ مَا لَمْ تَمَسُّوهُنَّ أَوْ تَفْرِضُواْ لَهُنَّ فَرِيضَةٗۖ
और उन्हें एक उपभोग दो — संपन्न अपने सामर्थ्य के अनुसार, और अल्प-साधन वाला अपने सामर्थ्य के अनुसार — मान्य के अनुसार एक उपभोग:
وَمَتِّعُوهُنَّ عَلَى اَ۬لْمُوسِعِ قَدْرُهُۥ وَعَلَى اَ۬لْمُقْتِرِ قَدْرُهُۥ مَتَٰعاَۢ بِالْمَعْرُوفِۖ
भलाई करने वालों के लिए एक कर्तव्य।
حَقّاً عَلَى اَ۬لْمُحْسِنِينَۖ
और यदि तुम उनका परित्याग उन्हें स्पर्श करने से पहले करो, जबकि तुमने उनके लिए दायित्व निर्धारित किया था, तो जो तुमने निर्धारित किया उसका आधा, सिवा इसके कि वे दरगुज़र करें, या वह दरगुज़र करे जिसके हाथों में विवाह-अनुबंध है।
وَإِن طَلَّقْتُمُوهُنَّ مِن قَبْلِ أَن تَمَسُّوهُنَّ وَقَدْ فَرَضْتُمْ لَهُنَّ فَرِيضَةٗ فَنِصْفُ مَا فَرَضْتُمُۥٓ إِلَّآ أَنْ يَّعْفُونَ أَوْ يَعْفُوَاْ اَ۬لذِے بِيَدِهِۦ عُقْدَةُ اُ۬لنِّكَاحِۖ
और दरगुज़र करना, यह सावधानी के अधिक निकट है।
وَأَن تَعْفُوٓاْ أَقْرَبُ لِلتَّقْو۪ىٰۖ
और आपस में अनुग्रह को मत भूलो,
وَلَا تَنسَوُاْ اُ۬لْفَضْلَ بَيْنَكُمُۥٓۖ
क्योंकि ईश्वर तुम जो करते हो उस पर दृष्टि रखता है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌۖ
संपर्कों की रक्षा करो, और सबसे पूर्ण संपर्क की भी, और ईश्वर के सामने खड़े रहो, समर्पित होकर।
حَٰفِظُواْ عَلَى اَ۬لصَّلَوَٰتِ وَالصَّلَوٰةِ اِ۬لْوُسْط۪ىٰ وَقُومُواْ لِلهِ قَٰنِتِينَۖ
और यदि तुम डरो, तो पैदल या सवार;
فَإِنْ خِفْتُمْ فَرِجَالاً اَوْ رُكْبَاناٗۖ
और जब तुम सुरक्षित हो जाओ, तो ईश्वर का स्मरण करो जैसे उसने तुम्हें वह सिखाया जो तुम नहीं जानते थे।
فَإِذَآ أَمِنتُمْ فَاذْكُرُواْ اُ۬للَّهَ كَمَا عَلَّمَكُم مَّا لَمْ تَكُونُواْ تَعْلَمُونَۖ
और तुममें से जो निष्ठापूर्वक सँभाल लिए जाते हैं, जोड़ीदार छोड़ते हुए — अपने जोड़ीदारों के पक्ष में एक अनुशंसा: बरसगाँठ तक एक उपभोग, निकाले जाने के बिना;
وَالذِينَ يُتَوَفَّوْنَ مِنكُمْ وَيَذَرُونَ أَزْوَٰجاٗ وَصِيَّةٞ لِّأَزْوَٰجِهِم مَّتَٰعاً اِلَى اَ۬لْحَوْلِ غَيْرَ إِخْرَاجٖۖ
परंतु यदि वे निकल जाएँ, तो वे अपने विषय में जो मान्य में करें उसके लिए तुम पर कोई आक्षेप नहीं।
فَإِنْ خَرَجْنَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ فِے مَا فَعَلْنَ فِےٓ أَنفُسِهِنَّ مِن مَّعْرُوفٖۖ
ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।
وَاللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٞۖ
और परित्यक्त स्त्रियों के लिए मान्य के अनुसार एक उपभोग:
وَلِلْمُطَلَّقَٰتِ مَتَٰعُۢ بِالْمَعْرُوفِۖ
सावधानी बरतने वालों के लिए एक कर्तव्य।
حَقّاً عَلَى اَ۬لْمُتَّقِينَۖ
इस प्रकार ईश्वर तुम्हारे लिए अपने संकेत स्पष्ट करता है, शायद तुम बुद्धि से काम लो।
كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اُ۬للَّهُ لَكُمُۥٓ ءَايَٰتِهِۦ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَۖ
क्या तुमने उन्हें नहीं देखा जो अपने ठिकानों से निकले, हज़ारों में, मृत्यु से सतर्क रहते हुए? तब ईश्वर ने उनसे कहा: “मर जाओ”; फिर उसने उन्हें पुनः जीवन दिया।
۞ أَلَمْ تَرَ إِلَى اَ۬لذِينَ خَرَجُواْ مِن دِيٰ۪رِهِمْ وَهُمُۥٓ أُلُوفٌ حَذَرَ اَ۬لْمَوْتِ فَقَالَ لَهُمُ اُ۬للَّهُ مُوتُواْ ثُمَّ أَحْي۪اهُمُۥٓۖ
ईश्वर अवश्य लोगों के प्रति अनुग्रह रखता है,
إِنَّ اَ۬للَّهَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى اَ۬لنَّاسِۖ
परंतु अधिकतर लोग कृतज्ञ नहीं हैं।
وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ اَ۬لنَّاسِ لَا يَشْكُرُونَۖ
और ईश्वर की राह में लड़ो, और जान लो कि ईश्वर सुनने वाला, सर्वज्ञ है।
وَقَٰتِلُواْ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ وَاعْلَمُوٓاْ أَنَّ اَ۬للَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٞۖ
कौन है जो ईश्वर को एक सुंदर उधार देगा, जिसे वह उसके लिए अनेक बार दुगना कर देगा?
مَّن ذَا اَ۬لذِے يُقْرِضُ اُ۬للَّهَ قَرْضاً حَسَناٗ فَيُضَٰعِفُهُۥ لَهُۥٓ أَضْعَافاٗ كَثِيرَةٗۖ
ईश्वर संकुचित करता है और प्रशस्त करता है,
وَاللَّهُ يَقْبِضُ وَيَبْصُطُۖ
और तुम उसी की ओर लौटाए जाओगे।
وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَۖ
क्या तुमने इसराईल की संतान में से दरबार को नहीं देखा, मूसा के बाद, जब उन्होंने अपने ही एक सूचनादाता से कहा: “हमारे लिए एक राजा उठाओ, ताकि हम ईश्वर की राह में लड़ें”?
أَلَمْ تَرَ إِلَى اَ۬لْمَلَإِ مِنۢ بَنِےٓ إِسْرَآءِيلَ مِنۢ بَعْدِ مُوس۪ىٰٓ إِذْ قَالُواْ لِنَبِےٓءٖ لَّهُمُ اُ۪بْعَثْ لَنَا مَلِكاٗ نُّقَٰتِلْ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِۖ
उसने कहा: “क्या ऐसा हो सकता है कि यदि तुम पर लड़ाई विहित की जाए, तो तुम न लड़ो?”
قَالَ هَلْ عَسِيتُمُۥٓ إِن كُتِبَ عَلَيْكُمُ اُ۬لْقِتَالُ أَلَّا تُقَٰتِلُواْۖ
उन्होंने कहा: “और हमें क्या हुआ है कि हम ईश्वर की राह में न लड़ें, जबकि हमें अपने ठिकानों और अपने बेटों से निकाल दिया गया है?”
قَالُواْ وَمَا لَنَآ أَلَّا نُقَٰتِلَ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ وَقَدُ ا۟خْرِجْنَا مِن دِيٰ۪رِنَا وَأَبْنَآئِنَاۖ
परंतु जब उन पर लड़ाई विहित की गई, तो उन्होंने पीठ फेर ली, सिवा उनमें से थोड़े के।
فَلَمَّا كُتِبَ عَلَيْهِمُ اُ۬لْقِتَالُ تَوَلَّوِاْ اِلَّا قَلِيلاٗ مِّنْهُمْۖ
और ईश्वर अन्यायियों के विषय में सर्वज्ञ है।
وَاللَّهُ عَلِيمُۢ بِالظَّٰلِمِينَۖ
और उनके सूचनादाता ने उनसे कहा: “ईश्वर ने निश्चय ही तालूत को तुम्हारे लिए राजा के रूप में उठाया है।”
وَقَالَ لَهُمْ نَبِيٓـُٔهُمُۥٓ إِنَّ اَ۬للَّهَ قَدْ بَعَثَ لَكُمْ طَالُوتَ مَلِكاٗۖ
उन्होंने कहा: “उसके पास हम पर राजत्व कैसे होगा, जबकि हम उसमें उससे अधिक हक़ रखते हैं, और उसे संपत्ति की संपन्नता नहीं दी गई?”
قَالُوٓاْ أَنّ۪ىٰ يَكُونُ لَهُ اُ۬لْمُلْكُ عَلَيْنَا وَنَحْنُ أَحَقُّ بِالْمُلْكِ مِنْهُ وَلَمْ يُوتَ سَعَةٗ مِّنَ اَ۬لْمَالِۖ
उसने कहा: “ईश्वर ने निश्चय ही उसे तुम पर चुन लिया है, और उसे ज्ञान और काया के विस्तार में बढ़ा दिया है।”
قَالَ إِنَّ اَ۬للَّهَ اَ۪صْطَف۪يٰهُ عَلَيْكُمْ وَزَادَهُۥ بَسْطَةٗ فِے اِ۬لْعِلْمِ وَالْجِسْمِۖ
ईश्वर अपना राजत्व जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे देता है।
وَاللَّهُ يُوتِے مُلْكَهُۥ مَنْ يَّشَآءُۖ
ईश्वर विस्तृत, सर्वज्ञ है।
وَاللَّهُ وَٰسِعٌ عَلِيمٞۖ
और उनके सूचनादाता ने उनसे कहा: “उसके राजत्व का संकेत यह होगा कि संदूक तुम्हारे पास आए, जिसमें तुम्हारे अभिभावक की ओर से एक ढाढ़स है, और मूसा के कुल और हारून के कुल ने जो छोड़ा उसका अवशेष है, जो अभिकर्ताओं द्वारा वहन किया हुआ है।”
۞ وَقَالَ لَهُمْ نَبِيٓـُٔهُمُۥٓ إِنَّ ءَايَةَ مُلْكِهِۦٓ أَنْ يَّاتِيَكُمُ اُ۬لتَّابُوتُ فِيهِ سَكِينَةٞ مِّن رَّبِّكُمْ وَبَقِيَّةٞ مِّمَّا تَرَكَ ءَالُ مُوس۪ىٰ وَءَالُ هَٰرُونَ تَحْمِلُهُ اُ۬لْمَلَٰٓئِكَةُۖ
इसमें अवश्य तुम्हारे लिए एक संकेत है, यदि तुम विश्वास करने वाले हो।
إِنَّ فِے ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لَّكُمُۥٓ إِن كُنتُم مُّومِنِينَۖ
जब तालूत सेनाओं के साथ चला, तो उसने कहा: “ईश्वर एक नदी से तुम्हें परखेगा: जो कोई उसमें से पिएगा वह मेरे अपनों में से नहीं है, और जो कोई उसे आहार नहीं बनाता वह निश्चय ही मेरे अपनों में से है — सिवा उसके जो अपने हाथ में एक घूँट भर ले।”
فَلَمَّا فَصَلَ طَالُوتُ بِالْجُنُودِ قَالَ إِنَّ اَ۬للَّهَ مُبْتَلِيكُم بِنَهَرٖ فَمَن شَرِبَ مِنْهُ فَلَيْسَ مِنِّے وَمَن لَّمْ يَطْعَمْهُ فَإِنَّهُۥ مِنِّيَ إِلَّا مَنِ اِ۪غْتَرَفَ غَرْفَةَۢ بِيَدِهِۦۖ
उन्होंने उसमें से पिया, सिवा उनमें से थोड़े के।
فَشَرِبُواْ مِنْهُ إِلَّا قَلِيلاٗ مِّنْهُمْۖ
फिर जब उसने और उसके साथ विश्वास करने वालों ने उसे पार कर लिया, तो उन्होंने कहा: “आज हमारे पास जालूत और उसकी सेनाओं के विरुद्ध कोई बल नहीं।”
فَلَمَّا جَاوَزَهُۥ هُوَ وَالذِينَ ءَامَنُواْ مَعَهُۥ قَالُواْ لَا طَاقَةَ لَنَا اَ۬لْيَوْمَ بِجَالُوتَ وَجُنُودِهِۦۖ
जिन्होंने अनुमान लगाया था कि वे ईश्वर से मिलेंगे उन्होंने कहा: “कितनी ही थोड़ी संख्या वाली टुकड़ियों ने बड़ी टुकड़ियों को ईश्वर की अनुमति से परास्त कर दिया है!”
قَالَ اَ۬لذِينَ يَظُنُّونَ أَنَّهُم مُّلَٰقُواْ اُ۬للَّهِ كَم مِّن فِئَةٖ قَلِيلَةٍ غَلَبَتْ فِئَةٗ كَثِيرَةَۢ بِإِذْنِ اِ۬للَّهِۖ
ईश्वर धैर्य रखने वालों के साथ है।
وَاللَّهُ مَعَ اَ۬لصَّٰبِرِينَۖ
और जब वे जालूत और उसकी सेनाओं के सामने आए, तो उन्होंने कहा: “हमारे अभिभावक, हम पर धैर्य उँडेल दीजिए, हमारे क़दम दृढ़ कीजिए, और उस क़ौम के विरुद्ध हमारी सहायता कीजिए जो नकारती है”; तब उन्होंने उन्हें ईश्वर की अनुमति से भगा दिया,
وَلَمَّا بَرَزُواْ لِجَالُوتَ وَجُنُودِهِۦ قَالُواْ رَبَّنَآ أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْراٗ وَثَبِّتَ اَقْدَامَنَا وَانصُرْنَا عَلَى اَ۬لْقَوْمِ اِ۬لْكٰ۪فِرِينَ فَهَزَمُوهُم بِإِذْنِ اِ۬للَّهِۖ
और दाऊद ने जालूत को मार डाला; ईश्वर ने उसे राजत्व और प्रज्ञा दी, और उसे वह सिखाया जो उसकी मर्ज़ी हुई।
وَقَتَلَ دَاوُۥدُ جَالُوتَ وَءَات۪يٰهُ اُ۬للَّهُ اُ۬لْمُلْكَ وَالْحِكْمَةَ وَعَلَّمَهُۥ مِمَّا يَشَآءُۖ
और यदि ईश्वर लोगों को एक-दूसरे के द्वारा न हटाता, तो धरती निश्चय ही बिगाड़ के हवाले कर दी गई होती;
وَلَوْلَا دِفَٰعُ اُ۬للَّهِ اِ۬لنَّاسَ بَعْضَهُم بِبَعْضٖ لَّفَسَدَتِ اِ۬لَارْضُۖ
परंतु ईश्वर सभी प्राणियों के प्रति अनुग्रह रखता है।
وَلَٰكِنَّ اَ۬للَّهَ ذُو فَضْلٍ عَلَى اَ۬لْعَٰلَمِينَۖ
ये ईश्वर के संकेत हैं, जो हम तुम्हें पूर्ण सत्य के साथ सुनाते हैं,
تِلْكَ ءَايَٰتُ اُ۬للَّهِ نَتْلُوهَا عَلَيْكَ بِالْحَقِّۖ
और तुम अवश्य भेजे गए जनों में से हो।
وَإِنَّكَ لَمِنَ اَ۬لْمُرْسَلِينَۖ
ये संदेशवाहक हैं:
۞ تِلْكَ اَ۬لرُّسُلُۖ
हमने उनमें से कुछ को दूसरों पर वरीयता दी।
فَضَّلْنَا بَعْضَهُمْ عَلَىٰ بَعْضٖۖ
उनमें से कुछ ऐसे हैं जिनसे ईश्वर बोला,
مِّنْهُم مَّن كَلَّمَ اَ۬للَّهُۖ
और उसने दूसरों को श्रेणियों में ऊँचा किया।
وَرَفَعَ بَعْضَهُمْ دَرَجَٰتٖۖ
और हमने मरयम के पुत्र ईसा को स्पष्ट प्रमाण दिए, और उसे पवित्र प्रवाह से सुदृढ़ किया।
وَءَاتَيْنَا عِيسَى اَ۪بْنَ مَرْيَمَ اَ۬لْبَيِّنَٰتِ وَأَيَّدْنَٰهُ بِرُوحِ اِ۬لْقُدُسِۖ
और यदि ईश्वर की मर्ज़ी होती, तो जो उनके बाद आए वे स्पष्ट प्रमाण उनके पास आ जाने के बाद आपस में एक-दूसरे को मार न डालते;
وَلَوْ شَآءَ اَ۬للَّهُ مَا اَ۪قْتَتَلَ اَ۬لذِينَ مِنۢ بَعْدِهِم مِّنۢ بَعْدِ مَا جَآءَتْهُمُ اُ۬لْبَيِّنَٰتُۖ
परंतु उन्होंने मतभेद किया:
وَلَٰكِنِ اِ۪خْتَلَفُواْۖ
उनमें से कुछ ने विश्वास किया, और कुछ ने नकारा।
فَمِنْهُم مَّنَ اٰمَنَ وَمِنْهُم مَّن كَفَرَۖ
और यदि ईश्वर की मर्ज़ी होती, तो वे आपस में एक-दूसरे को मार न डालते;
وَلَوْ شَآءَ اَ۬للَّهُ مَا اَ۪قْتَتَلُواْۖ
परंतु ईश्वर वही करता है जो वह चाहता है।
وَلَٰكِنَّ اَ۬للَّهَ يَفْعَلُ مَا يُرِيدُۖ
हे विश्वास करने वालो! उसमें से ख़र्च करो जिसकी जीविका हमने तुम्हें दी है, इससे पहले कि वह दिन आए जिसमें न क्रय-विक्रय होगा, न मित्रता, न सिफ़ारिश।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَنفِقُواْ مِمَّا رَزَقْنَٰكُم مِّن قَبْلِ أَنْ يَّاتِيَ يَوْمٞ لَّا بَيْعٞ فِيهِ وَلَا خُلَّةٞ وَلَا شَفَٰعَةٞۖ
और जो नकारते हैं — यही अन्यायी हैं।
وَالْكَٰفِرُونَ هُمُ اُ۬لظَّٰلِمُونَۖ
ईश्वर, उसके सिवा कोई देवता नहीं,
اَ۬للَّهُ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ
जीवित, अपने आप बना रहने वाला।
اَ۬لْحَيُّ اُ۬لْقَيُّومُۖ
न ऊँघ उसे पकड़ती है, न नींद।
لَا تَاخُذُهُۥ سِنَةٞ وَلَا نَوْمٞۖ
आकाशों में जो है और धरती पर जो है, वह उसी का है।
لَّهُۥ مَا فِے اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِے اِ۬لَارْضِۖ
कौन है जो उसके पास सिफ़ारिश करता है, उसकी अनुमति के सिवा?
مَن ذَا اَ۬لذِے يَشْفَعُ عِندَهُۥٓ إِلَّا بِإِذْنِهِۦۖ
वह जानता है जो उनके आगे है और जो उनके पीछे है,
يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْۖ
और वे उसके ज्ञान में से किसी भी चीज़ को नहीं घेर पाते, सिवा उतने के जितना उसकी मर्ज़ी हो।
وَلَا يُحِيطُونَ بِشَےْءٖ مِّنْ عِلْمِهِۦٓ إِلَّا بِمَا شَآءَۖ
और उसका आसन आकाशों और धरती पर व्याप्त है,
وَسِعَ كُرْسِيُّهُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالَارْضَۖ
और उनकी रक्षा उसे बिल्कुल भारी नहीं पड़ती।
وَلَا يَـُٔودُهُۥ حِفْظُهُمَاۖ
वह परम-उच्च, विशाल है।
وَهُوَ اَ۬لْعَلِيُّ اُ۬لْعَظِيمُۖ
विधान में कोई बाध्यता नहीं:
لَآ إِكْرَاهَ فِے اِ۬لدِّينِۖ
सुबुद्धि दिशाहीनता से अलग स्पष्ट हो गई है।
قَد تَّبَيَّنَ اَ۬لرُّشْدُ مِنَ اَ۬لْغَيِّۖ
जो कोई मर्यादाहीन को नकारता है और ईश्वर पर विश्वास करता है, उसने सबसे भरोसेमंद कुंडे को दृढ़ता से थाम लिया है, जो कभी नहीं टूटता।
فَمَنْ يَّكْفُرْ بِالطَّٰغُوتِ وَيُومِنۢ بِاللَّهِ فَقَدِ اِ۪سْتَمْسَكَ بِالْعُرْوَةِ اِ۬لْوُثْق۪ىٰ لَا اَ۪نفِصَامَ لَهَاۖ
ईश्वर सुनने वाला, सर्वज्ञ है।
وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌۖ
ईश्वर उनका आश्रयदाता है जिन्होंने विश्वास किया, वह उन्हें अँधेरों से प्रकाश की ओर निकालता है।
اِ۬للَّهُ وَلِيُّ اُ۬لذِينَ ءَامَنُواْ يُخْرِجُهُم مِّنَ اَ۬لظُّلُمَٰتِ إِلَى اَ۬لنُّورِۖ
और जो नकारते हैं, उनके आश्रयदाता मर्यादाहीन हैं, जो उन्हें प्रकाश से अँधेरों की ओर निकालता है।
وَالذِينَ كَفَرُوٓاْ أَوْلِيَآؤُهُمُ اُ۬لطَّٰغُوتُ يُخْرِجُونَهُم مِّنَ اَ۬لنُّورِ إِلَى اَ۬لظُّلُمَٰتِۖ
यही आग वाले हैं, वे उसमें सदा रहते हैं।
أُوْلَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ اُ۬لنّ۪ارِ هُمْ فِيهَا خَٰلِدُونَۖ
क्या तुमने उसे नहीं देखा जिसने इब्राहीम से उसके अभिभावक के विषय में विवाद किया, इसलिए कि ईश्वर ने उसे राजत्व दिया था? जब इब्राहीम ने कहा: “मेरा अभिभावक वह है जो जीवन देता है और मृत्यु देता है”,
۞ أَلَمْ تَرَ إِلَى اَ۬لذِے حَآجَّ إِبْرَٰهِيمَ فِے رَبِّهِۦٓ أَنَ اٰت۪يٰهُ اُ۬للَّهُ اُ۬لْمُلْكَ إِذْ قَالَ إِبْرَٰهِيمُ رَبِّيَ اَ۬لذِے يُحْيِۦ وَيُمِيتُۖ
उसने कहा: “मैं जीवन देता हूँ और मैं मृत्यु देता हूँ।”
قَالَ أَنَآ أُحْيِۦ وَأُمِيتُۖ
इब्राहीम ने कहा: “ईश्वर निश्चय ही सूर्य को पूर्व से लाता है; तो तुम उसे पश्चिम से ले आओ”; तब जो नकारता था उसके शब्द बिखर गए।
قَالَ إِبْرَٰهِيمُ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ يَاتِے بِالشَّمْسِ مِنَ اَ۬لْمَشْرِقِ فَاتِ بِهَا مِنَ اَ۬لْمَغْرِبِ فَبُهِتَ اَ۬لذِے كَفَرَۖ
और ईश्वर अन्यायी क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।
وَاللَّهُ لَا يَهْدِے اِ۬لْقَوْمَ اَ۬لظَّٰلِمِينَۖ
या उस जैसा जो एक बस्ती के पास से गुज़रा जो अपने भवनों के बावजूद ख़ाली थी।
أَوْ كَالذِے مَرَّ عَلَىٰ قَرْيَةٖ وَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَاۖ
उसने कहा: “ईश्वर इसे इसकी मृत्यु के बाद कैसे जीवित करेगा?” तब ईश्वर ने उसे सौ साल तक मृत्यु दी, फिर उसने उसे उठाया।
قَالَ أَنّ۪ىٰ يُحْيِۦ هَٰذِهِ اِ۬للَّهُ بَعْدَ مَوْتِهَا فَأَمَاتَهُ اُ۬للَّهُ مِاْئَةَ عَامٖ ثُمَّ بَعَثَهُۥۖ
उसने कहा: “तुमने कितना समय बिताया है?”
قَالَ كَمْ لَبِثْتَۖ
उसने कहा: “मैंने एक दिन बिताया, या एक दिन का एक खंड।”
قَالَ لَبِثْتُ يَوْماً اَوْ بَعْضَ يَوْمٖۖ
उसने कहा: “नहीं, तुमने सौ साल बिताए हैं।
قَالَ بَل لَّبِثْتَ مِاْئَةَ عَامٖۖ
तो अपने भोजन और अपने पेय पर नज़र डालो: उन्होंने प्रतीक्षा नहीं की;
فَانظُرِ اِلَىٰ طَعَامِكَ وَشَرَابِكَ لَمْ يَتَسَنَّهْۖ
और अपने गधे पर नज़र डालो —
وَانظُرِ اِلَىٰ حِم۪ارِكَۖ
और ताकि हम तुम्हें लोगों के लिए एक संकेत बनाएँ।
وَلِنَجْعَلَكَ ءَايَةٗ لِّلنَّاسِۖ
और हड्डियों पर नज़र डालो, कि हम उन्हें कैसे फैलाते हैं, फिर उन्हें मांस पहनाते हैं।”
وَانظُرِ اِلَى اَ۬لْعِظَٰمِ كَيْفَ نُنشِرُهَا ثُمَّ نَكْسُوهَا لَحْماٗۖ
जब यह उसके लिए स्पष्ट हो गया, तो उसने कहा: “मैं जानता हूँ कि ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।”
فَلَمَّا تَبَيَّنَ لَهُۥ قَالَ أَعْلَمُ أَنَّ اَ۬للَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَےْءٖ قَدِيرٞۖ
और जब इब्राहीम ने कहा: “मेरे अभिभावक, मुझे दिखाइए कि आप मृतकों को कैसे पुनः जीवन देते हैं।”
وَإِذْ قَالَ إِبْرَٰهِيمُ رَبِّ أَرِنِے كَيْفَ تُحْيِ اِ۬لْمَوْت۪ىٰۖ
उसने कहा: “क्या तुम विश्वास नहीं करते?”
قَالَ أَوَلَمْ تُومِنۖ
उसने कहा: “क्यों नहीं, परंतु यह इसलिए कि मेरे मर्म को चैन मिले।”
قَالَ بَل۪ىٰ وَلَٰكِن لِّيَطْمَئِنَّ قَلْبِےۖ
उसने कहा: “तो चार पक्षी लो, उन्हें अपने पास पालतू बनाओ, फिर हर पहाड़ पर उनमें से एक भाग रखो, फिर उन्हें बुलाओ: वे लपकते हुए तुम्हारे पास आएँगे।
قَالَ فَخُذَ اَرْبَعَةٗ مِّنَ اَ۬لطَّيْرِ فَصُرْهُنَّ إِلَيْكَ ثُمَّ اَ۪جْعَلْ عَلَىٰ كُلِّ جَبَلٖ مِّنْهُنَّ جُزْءاٗ ثُمَّ اَ۟دْعُهُنَّ يَاتِينَكَ سَعْياٗۖ
और जान लो कि ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।”
وَاعْلَمَ اَنَّ اَ۬للَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٞۖ
जो अपनी संपत्ति ईश्वर की राह में ख़र्च करते हैं, उनका उदाहरण उस दाने का उदाहरण है जो सात बालियाँ उगाता है,
مَّثَلُ اُ۬لذِينَ يُنفِقُونَ أَمْوَٰلَهُمْ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ كَمَثَلِ حَبَّةٍ اَنۢبَتَتْ سَبْعَ سَنَابِلَۖ
जिसकी हर बाली में सौ दाने हैं।
فِے كُلِّ سُنۢبُلَةٖ مِّاْئَةُ حَبَّةٖۖ
ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसके लिए दुगुना करता है।
وَاللَّهُ يُضَٰعِفُ لِمَنْ يَّشَآءُۖ
ईश्वर विस्तृत, सर्वज्ञ है।
وَاللَّهُ وَٰسِعٌ عَلِيمٌۖ
जो अपनी संपत्ति ईश्वर की राह में ख़र्च करते हैं, फिर ख़र्च किए हुए को न जताते हैं और न कष्ट देते हैं, उनका पुरस्कार उनके अभिभावक के पास है; उन पर कोई डर नहीं, और न वे दुखी होंगे।
اِ۬لذِينَ يُنفِقُونَ أَمْوَٰلَهُمْ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ ثُمَّ لَا يُتْبِعُونَ مَآ أَنفَقُواْ مَنّاٗ وَلَآ أَذىٗ لَّهُمُۥٓ أَجْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ وَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَۖ
मान्य कथन और क्षमा उस दान से बेहतर हैं जिसके पीछे कष्ट दिया जाए।
۞ قَوْلٞ مَّعْرُوفٞ وَمَغْفِرَةٌ خَيْرٞ مِّن صَدَقَةٖ يَتْبَعُهَآ أَذىٗۖ
ईश्वर धनी, सहनशील है।
وَاللَّهُ غَنِيٌّ حَلِيمٞۖ
हे विश्वास करने वालो! अपने दानों को जताकर और कष्ट देकर व्यर्थ न करो, उसकी तरह जो लोगों को दिखाने के लिए अपनी संपत्ति ख़र्च करता है, और न ईश्वर पर विश्वास करता है और न अंतिम दिन पर।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ لَا تُبْطِلُواْ صَدَقَٰتِكُم بِالْمَنِّ وَالَاذ۪ىٰ كَالذِے يُنفِقُ مَالَهُۥ رِئَآءَ اَ۬لنَّاسِ وَلَا يُومِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ اِ۬لَاخِرِۖ
उसका उदाहरण मिट्टी से ढकी एक चिकनी चट्टान जैसा है: उस पर मूसलाधार वर्षा आ पड़ती है, और उसे उघड़ा छोड़ देती है।
فَمَثَلُهُۥ كَمَثَلِ صَفْوَانٍ عَلَيْهِ تُرَابٞ فَأَصَابَهُۥ وَابِلٞ فَتَرَكَهُۥ صَلْداٗۖ
जो उन्होंने कमाया उसमें से किसी चीज़ पर उनका अधिकार नहीं रहता।
لَّا يَقْدِرُونَ عَلَىٰ شَےْءٖ مِّمَّا كَسَبُواْۖ
और ईश्वर नकारने वाली क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।
وَاللَّهُ لَا يَهْدِے اِ۬لْقَوْمَ اَ۬لْكٰ۪فِرِينَۖ
और जो ईश्वर की प्रसन्नता खोजते हुए और अपने ही स्वों की दृढ़ता के लिए अपनी संपत्ति ख़र्च करते हैं, उनका उदाहरण ऊँची भूमि पर स्थित एक उद्यान जैसा है: उस पर मूसलाधार वर्षा आ पड़ती है, और वह अपना भोजन दुगुना देता है; और यदि उस पर कोई मूसलाधार वर्षा न आ पड़े, तो फुहार।
وَمَثَلُ اُ۬لذِينَ يُنفِقُونَ أَمْوَٰلَهُمُ اُ۪بْتِغَآءَ مَرْضَاتِ اِ۬للَّهِ وَتَثْبِيتاٗ مِّنَ اَنفُسِهِمْ كَمَثَلِ جَنَّةِۢ بِرُبْوَةٍ اَصَابَهَا وَابِلٞ فَـَٔاتَتُ ا۟كْلَهَا ضِعْفَيْنِ فَإِن لَّمْ يُصِبْهَا وَابِلٞ فَطَلّٞۖ
और ईश्वर तुम जो करते हो उस पर दृष्टि रखता है।
وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌۖ
क्या तुममें से कोई चाहेगा कि उसके पास खजूरों और अंगूरों का उद्यान हो, जिसके नीचे नदियाँ बहती हों, जिसमें उसके लिए हर प्रकार के फल हों, फिर उस पर बुढ़ापा आ पड़े, जबकि उसकी संतति दुर्बल हो, और उद्यान पर एक बवंडर आ पड़े जिसमें आग हो, और वह जल जाए?
اَيَوَدُّ أَحَدُكُمُۥٓ أَن تَكُونَ لَهُۥ جَنَّةٞ مِّن نَّخِيلٖ وَأَعْنَٰبٖ تَجْرِے مِن تَحْتِهَا اَ۬لَانْهَٰرُ لَهُۥ فِيهَا مِن كُلِّ اِ۬لثَّمَرَٰتِ وَأَصَابَهُ اُ۬لْكِبَرُ وَلَهُۥ ذُرِّيَّةٞ ضُعَفَآءُ فَأَصَابَهَآ إِعْصَارٞ فِيهِ نَارٞ فَاحْتَرَقَتْۖ
इसी प्रकार ईश्वर तुम्हारे लिए संकेत स्पष्ट करता है, शायद तुम सोच-विचार करो।
كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اُ۬للَّهُ لَكُمُ اُ۬لَايَٰتِ لَعَلَّكُمْ تَتَفَكَّرُونَۖ
हे विश्वास करने वालो! अपनी कमाई की अच्छी चीज़ों में से और उसमें से जो हमने तुम्हारे लिए धरती से निकाला है, ख़र्च करो,
۞ يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَنفِقُواْ مِن طَيِّبَٰتِ مَا كَسَبْتُمْ وَمِمَّآ أَخْرَجْنَا لَكُم مِّنَ اَ۬لَارْضِۖ
और उसमें से निकृष्ट को ख़र्च करने के लिए लक्ष्य न बनाओ, जबकि तुम स्वयं उसे केवल उस पर आँखें मूँदकर ही लोगे।
وَلَا تَيَمَّمُواْ اُ۬لْخَبِيثَ مِنْهُ تُنفِقُونَ وَلَسْتُم بِـَٔاخِذِيهِ إِلَّآ أَن تُغْمِضُواْ فِيهِۖ
और जान लो कि ईश्वर धनी, प्रशंसनीय है।
وَاعْلَمُوٓاْ أَنَّ اَ۬للَّهَ غَنِيٌّ حَمِيدٌۖ
बहकाने वाला तुमसे निर्धनता का वादा करता है, और तुम्हें निर्लज्जता का आदेश देता है,
اِ۬لشَّيْطَٰنُ يَعِدُكُمُ اُ۬لْفَقْرَ وَيَامُرُكُم بِالْفَحْشَآءِۖ
जबकि ईश्वर तुमसे अपनी ओर से क्षमा और अनुग्रह का वादा करता है।
وَاللَّهُ يَعِدُكُم مَّغْفِرَةٗ مِّنْهُ وَفَضْلاٗۖ
ईश्वर विस्तृत, सर्वज्ञ है।
وَاللَّهُ وَٰسِعٌ عَلِيمٞۖ
वह प्रज्ञा उसे देता है जिस पर उसकी मर्ज़ी हो,
يُوتِے اِ۬لْحِكْمَةَ مَنْ يَّشَآءُۖ
और जिसे प्रज्ञा दी जाए, उसे बहुत अच्छाई दी जा चुकी है।
وَمَنْ يُّوتَ اَ۬لْحِكْمَةَ فَقَدُ ا۟وتِيَ خَيْراٗ كَثِيراٗۖ
और इसे केवल मेधा रखने वाले ही स्मरण करते हैं।
وَمَا يَذَّكَّرُ إِلَّآ أُوْلُواْ اُ۬لَالْبَٰبِۖ
और तुम जो भी ख़र्च करो, या जो भी मन्नत मानो, ईश्वर उसे निश्चय ही जानता है।
وَمَآ أَنفَقْتُم مِّن نَّفَقَةٍ اَوْ نَذَرْتُم مِّن نَّذْرٖ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ يَعْلَمُهُۥۖ
और अन्यायियों के लिए कोई सहायता नहीं।
وَمَا لِلظَّٰلِمِينَ مِنَ اَنص۪ارٍۖ
यदि तुम दानों को सामने लाओ, तो यह उत्तम है;
اِن تُبْدُواْ اُ۬لصَّدَقَٰتِ فَنِعِمَّا هِيَۖ
और यदि तुम उन्हें छिपाओ और निर्धनों को दो, तो यह तुम्हारे लिए बेहतर है, और हम तुम्हारे कुछ बुरे कर्म ढक देंगे।
وَإِن تُخْفُوهَا وَتُوتُوهَا اَ۬لْفُقَرَآءَ فَهُوَ خَيْرٞ لَّكُمْ وَنُكَفِّرْ عَنكُم مِّن سَيِّـَٔاتِكُمْۖ
और ईश्वर तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।
وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٞۖ
उन्हें मार्ग दिखाना तुम्हारे ज़िम्मे नहीं है,
۞ لَّيْسَ عَلَيْكَ هُد۪يٰهُمْۖ
परंतु ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे मार्ग दिखाता है।
وَلَٰكِنَّ اَ۬للَّهَ يَهْدِے مَنْ يَّشَآءُۖ
और तुम जो भी अच्छाई ख़र्च करो, वह तुम्हारे अपने लिए है।
وَمَا تُنفِقُواْ مِنْ خَيْرٖ فَلِأَنفُسِكُمْۖ
और तुम केवल ईश्वर की दिशा खोजते हुए ही ख़र्च करते हो।
وَمَا تُنفِقُونَ إِلَّا اَ۪بْتِغَآءَ وَجْهِ اِ۬للَّهِۖ
और तुम जो भी अच्छाई ख़र्च करो, वह तुम्हें पूरा-पूरा चुकाया जाएगा, और तुम पर अन्याय नहीं किया जाएगा।
وَمَا تُنفِقُواْ مِنْ خَيْرٖ يُوَفَّ إِلَيْكُمْ وَأَنتُمْ لَا تُظْلَمُونَۖ
यह उन निर्धनों के लिए है जो ईश्वर की राह में रोक लिए गए हैं, जो धरती पर चल-फिर नहीं सकते: अज्ञानी उनके संकोच के कारण उन्हें धनी समझता है;
لِلْفُقَرَآءِ اِ۬لذِينَ أُحْصِرُواْ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ لَا يَسْتَطِيعُونَ ضَرْباٗ فِے اِ۬لَارْضِ يَحْسِبُهُمُ اُ۬لْجَاهِلُ أَغْنِيَآءَ مِنَ اَ۬لتَّعَفُّفِۖ
तुम उन्हें उनके निशान से पहचान लेते हो: वे लोगों से आग्रहपूर्वक नहीं माँगते।
تَعْرِفُهُم بِسِيمٰ۪هُمْ لَا يَسْـَٔلُونَ اَ۬لنَّاسَ إِلْحَافاٗۖ
और तुम जो भी अच्छाई ख़र्च करो, ईश्वर निश्चय ही उसके विषय में सर्वज्ञ है।
وَمَا تُنفِقُواْ مِنْ خَيْرٖ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ بِهِۦ عَلِيمٌۖ
जो अपनी संपत्ति रात और दिन, गुप्त रूप से और खुले रूप से ख़र्च करते हैं, उनका पुरस्कार उनके अभिभावक के पास है; उन पर कोई डर नहीं, और न वे दुखी होंगे।
اِ۬لذِينَ يُنفِقُونَ أَمْوَٰلَهُم بِاليْلِ وَالنَّه۪ارِ سِرّاٗ وَعَلَٰنِيَةٗ فَلَهُمُۥٓ أَجْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ وَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَۖ
जो ब्याज खाते हैं, वे केवल वैसे ही खड़े होते हैं जैसे वह खड़ा होता है जिसे बहकाने वाला अपने स्पर्श से लड़खड़ा देता है।
اَ۬لذِينَ يَاكُلُونَ اَ۬لرِّبَوٰاْ لَا يَقُومُونَ إِلَّا كَمَا يَقُومُ اُ۬لذِے يَتَخَبَّطُهُ اُ۬لشَّيْطَٰنُ مِنَ اَ۬لْمَسِّۖ
यह इसलिए कि उन्होंने कहा: “बिक्री तो केवल ब्याज जैसी ही है”;
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَالُوٓاْ إِنَّمَا اَ۬لْبَيْعُ مِثْلُ اُ۬لرِّبَوٰاْۖ
जबकि ईश्वर ने बिक्री को वैध ठहराया और ब्याज को वर्जित किया।
وَأَحَلَّ اَ۬للَّهُ اُ۬لْبَيْعَ وَحَرَّمَ اَ۬لرِّبَوٰاْۖ
जिसके पास उसके अभिभावक की ओर से उपदेश आ गया और वह रुक गया, तो जो बीत चुका वह उसी का है,
فَمَن جَآءَهُۥ مَوْعِظَةٞ مِّن رَّبِّهِۦ فَانتَه۪ىٰ فَلَهُۥ مَا سَلَفَۖ
और उसका मामला ईश्वर के हवाले है;
وَأَمْرُهُۥٓ إِلَى اَ۬للَّهِۖ
परंतु जो दोहराए — वही आग वाले हैं, वे उसमें सदा रहते हैं।
وَمَنْ عَادَ فَأُوْلَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ اُ۬لنّ۪ارِ هُمْ فِيهَا خَٰلِدُونَۖ
ईश्वर ब्याज को मिटा देता है, और दानों को बढ़ाता है।
يَمْحَقُ اُ۬للَّهُ اُ۬لرِّبَوٰاْ وَيُرْبِے اِ۬لصَّدَقَٰتِۖ
ईश्वर किसी भी बड़े नकारने वाले, अपराधी से प्रेम नहीं करता।
وَاللَّهُ لَا يُحِبُّ كُلَّ كَفّ۪ارٍ اَثِيمٍۖ
निश्चय ही, जिन्होंने विश्वास किया, भले कर्म किए, संपर्क बनाए रखा और शुद्ध उदारता दी, उनका पुरस्कार उनके अभिभावक के पास है; उन पर कोई डर नहीं, और न वे दुखी होंगे।
اِنَّ اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ وَأَقَامُواْ اُ۬لصَّلَوٰةَ وَءَاتَوُاْ اُ۬لزَّكَوٰةَ لَهُمُۥٓ أَجْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ وَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَۖ
हे विश्वास करने वालो! ईश्वर के प्रति सावधान रहो, और ब्याज का जो शेष रह गया है उसे छोड़ दो, यदि तुम विश्वास करने वाले हो।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ اُ۪تَّقُواْ اُ۬للَّهَ وَذَرُواْ مَا بَقِيَ مِنَ اَ۬لرِّبَوٰٓاْ إِن كُنتُم مُّومِنِينَۖ
यदि तुम ऐसा न करो, तो ईश्वर और उसके संदेशवाहक की ओर से युद्ध के लिए स्वयं को चेताया हुआ जानो;
فَإِن لَّمْ تَفْعَلُواْ فَاذَنُواْ بِحَرْبٖ مِّنَ اَ۬للَّهِ وَرَسُولِهِۦۖ
और यदि तुम पलट आओ, तो तुम्हारी संपत्ति का मूलधन तुम्हारा है, न तुम अन्यायी ठहरो और न तुम पर अन्याय किया जाए।
وَإِن تُبْتُمْ فَلَكُمْ رُءُوسُ أَمْوَٰلِكُمْ لَا تَظْلِمُونَ وَلَا تُظْلَمُونَۖ
और यदि कोई तंगी में हो, तो सुगमता आने तक मोहलत है;
۞ وَإِن كَانَ ذُو عُسْرَةٖ فَنَظِرَةٌ اِلَىٰ مَيْسُرَةٖۖ
और तुम्हारा उसे दान कर देना तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम जानते।
وَأَن تَصَّدَّقُواْ خَيْرٞ لَّكُمُۥٓ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَۖ
और उस दिन से सावधान रहो जब तुम ईश्वर की ओर लौटाए जाओगे,
وَاتَّقُواْ يَوْماٗ تُرْجَعُونَ فِيهِ إِلَى اَ۬للَّهِۖ
जब हर स्व वह पूरा-पूरा पाएगा जो उसने कमाया, और उस पर अन्याय नहीं किया जाएगा।
ثُمَّ تُوَفّ۪ىٰ كُلُّ نَفْسٖ مَّا كَسَبَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَۖ
हे विश्वास करने वालो! जब तुम आपस में किसी नामित अवधि के लिए ऋण का सौदा करो, तो उसे लिख लो।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِذَا تَدَايَنتُم بِدَيْنٍ اِلَىٰٓ أَجَلٖ مُّسَمّىٗ فَاكْتُبُوهُۖ
और तुम्हारे बीच कोई लेखक उसे न्याय के साथ लिखे,
وَلْيَكْتُب بَّيْنَكُمْ كَاتِبُۢ بِالْعَدْلِۖ
और कोई लेखक लिखने से इनकार न करे,
وَلَا يَابَ كَاتِبٌ اَنْ يَّكْتُبَۖ
जैसा ईश्वर ने उसे सिखाया है; तो वह लिखे,
كَمَا عَلَّمَهُ اُ۬للَّهُ فَلْيَكْتُبْۖ
और जिस पर देय है वह लिखवाए, और ईश्वर, अपने अभिभावक, के प्रति सावधान रहे, और उसमें से कुछ भी कम न करे।
وَلْيُمْلِلِ اِ۬لذِے عَلَيْهِ اِ۬لْحَقُّ وَلْيَتَّقِ اِ۬للَّهَ رَبَّهُۥ وَلَا يَبْخَسْ مِنْهُ شَئْاٗۖ
और यदि जिस पर देय है वह मूर्ख हो, या दुर्बल हो, या स्वयं लिखवा न सके, तो उसका विधिक उत्तरदायी न्याय के साथ लिखवाए।
فَإِن كَانَ اَ۬لذِے عَلَيْهِ اِ۬لْحَقُّ سَفِيهاً اَوْ ضَعِيفاً اَوْ لَا يَسْتَطِيعُ أَنْ يُّمِلَّ هُوَ فَلْيُمْلِلْ وَلِيُّهُۥ بِالْعَدْلِۖ
और अपने पुरुषों में से दो साक्षियों से उसका साक्ष्य दिलवाओ;
وَاسْتَشْهِدُواْ شَهِيدَيْنِ مِن رِّجَالِكُمْۖ
और यदि दो पुरुष न हों, तो एक पुरुष और दो स्त्रियाँ, उनमें से जिनका साक्ष्य तुम स्वीकार करते हो, ताकि यदि उन दोनों में से एक भटक जाए तो दूसरी उसे स्मरण करा दे।
فَإِن لَّمْ يَكُونَا رَجُلَيْنِ فَرَجُلٞ وَامْرَأَتَٰنِ مِمَّن تَرْضَوْنَ مِنَ اَ۬لشُّهَدَآءِ اَ۬ن تَضِلَّ إِحْد۪يٰهُمَا فَتُذَكِّرَ إِحْد۪يٰهُمَا اَ۬لُاخْر۪ىٰۖ
और साक्षी इनकार न करें, जब उन्हें बुलाया जाए।
وَلَا يَابَ اَ۬لشُّهَدَآءُ اِ۪ذَا مَا دُعُواْۖ
और उसे लिखने से ऊब न जाओ, चाहे छोटा हो या बड़ा, उसकी अवधि तक।
وَلَا تَسْـَٔمُوٓاْ أَن تَكْتُبُوهُ صَغِيراً اَوْ كَبِيراً اِلَىٰٓ أَجَلِهِۦۖ
यह ईश्वर के पास अधिक निष्पक्ष है, साक्ष्य के लिए अधिक सीधा है, और संदेह न करने के अधिक निकट है — सिवा इसके कि वह तत्काल व्यापार हो जिसे तुम आपस में चलाते हो: तब तुम पर उसे न लिखने का कोई आक्षेप नहीं।
ذَٰلِكُمُۥٓ أَقْسَطُ عِندَ اَ۬للَّهِ وَأَقْوَمُ لِلشَّهَٰدَةِ وَأَدْن۪ىٰٓ أَلَّا تَرْتَابُوٓاْ إِلَّآ أَن تَكُونَ تِجَٰرَةٌ حَاضِرَةٞ تُدِيرُونَهَا بَيْنَكُمْ فَلَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ اَلَّا تَكْتُبُوهَاۖ
और जब तुम आपस में बिक्री करो तो साक्षी बना लो।
وَأَشْهِدُوٓاْ إِذَا تَبَايَعْتُمْۖ
और न लेखक को हानि पहुँचाई जाए और न साक्षी को।
وَلَا يُضَآرَّ كَاتِبٞ وَلَا شَهِيدٞۖ
और यदि तुम ऐसा करो, तो यह निश्चय ही तुम्हारी ओर से अतिक्रमण है।
وَإِن تَفْعَلُواْ فَإِنَّهُۥ فُسُوقُۢ بِكُمْۖ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो,
وَاتَّقُواْ اُ۬للَّهَۖ
और ईश्वर तुम्हें सिखाता है।
وَيُعَلِّمُكُمُ اُ۬للَّهُۖ
और ईश्वर हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।
وَاللَّهُ بِكُلِّ شَےْءٍ عَلِيمٞۖ
और यदि तुम यात्रा पर हो और कोई लेखक न पाओ, तो क़ब्ज़े में ली हुई एक गिरवी।
۞ وَإِن كُنتُمْ عَلَىٰ سَفَرٖ وَلَمْ تَجِدُواْ كَاتِباٗ فَرِهَٰنٞ مَّقْبُوضَةٞۖ
और यदि तुममें से कोई दूसरे पर भरोसा करे, तो जिस पर भरोसा किया गया वह अपनी धरोहर हवाले कर दे,
فَإِنَ اَمِنَ بَعْضُكُم بَعْضاٗ فَلْيُوَ۬دِّ اِ۬لذِے اِ۟وتُمِنَ أَمَٰنَتَهُۥۖ
और ईश्वर, अपने अभिभावक, के प्रति सावधान रहे।
وَلْيَتَّقِ اِ۬للَّهَ رَبَّهُۥۖ
और साक्ष्य को मत दबाओ।
وَلَا تَكْتُمُواْ اُ۬لشَّهَٰدَةَۖ
और जो उसे दबाए, निश्चय ही उसका मर्म अपराधी है।
وَمَنْ يَّكْتُمْهَا فَإِنَّهُۥٓ ءَاثِمٞ قَلْبُهُۥۖ
ईश्वर तुम जो करते हो उसके विषय में सर्वज्ञ है।
وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ عَلِيمٞۖ
ईश्वर का है जो आकाशों में है और जो धरती पर है।
لِّلهِ مَا فِے اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِے اِ۬لَارْضِۖ
और तुम अपने भीतर जो है उसे सामने लाओ, या उसे छिपाओ, ईश्वर तुमसे उसका हिसाब लेगा; फिर वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे क्षमा करता है, और जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे दंड देता है।
وَإِن تُبْدُواْ مَا فِےٓ أَنفُسِكُمُۥٓ أَوْ تُخْفُوهُ يُحَاسِبْكُم بِهِ اِ۬للَّهُ فَيَغْفِرْ لِمَنْ يَّشَآءُ وَيُعَذِّبْ مَنْ يَّشَآءُۖ
और ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।
وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَےْءٖ قَدِيرٌۖ
संदेशवाहक ने उस पर विश्वास किया जो उसके अभिभावक की ओर से उसके लिए उतारा गया, और विश्वास करने वालों ने भी।
اٰمَنَ اَ۬لرَّسُولُ بِمَآ أُنزِلَ إِلَيْهِ مِن رَّبِّهِۦ وَالْمُومِنُونَۖ
सबने ईश्वर पर, उसके अभिकर्ताओं पर, उसके ग्रंथों पर और उसके संदेशवाहकों पर विश्वास किया,
كُلٌّ اٰمَنَ بِاللَّهِ وَمَلَٰٓئِكَتِهِۦ وَكُتُبِهِۦ وَرُسُلِهِۦۖ
उसके संदेशवाहकों में से किसी के बीच भी भेद किए बिना;
لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٖ مِّن رُّسُلِهِۦۖ
और उन्होंने कहा: “हमने सुना और हमने बात मानी।
وَقَالُواْ سَمِعْنَا وَأَطَعْنَاۖ
आपकी क्षमा, हमारे अभिभावक; आपकी ओर ही गंतव्य है।”
غُفْرَانَكَ رَبَّنَاۖ وَإِلَيْكَ اَ۬لْمَصِيرُۖ
ईश्वर किसी स्व पर उसकी क्षमता के सिवा कुछ नहीं थोपता।
لَا يُكَلِّفُ اُ۬للَّهُ نَفْساً اِلَّا وُسْعَهَاۖ
उसी का है जो उसने कमाया,
لَهَا مَا كَسَبَتْۖ
और उसी के विरुद्ध है जो उसने किया।
وَعَلَيْهَا مَا اَ۪كْتَسَبَتْۖ
“हमारे अभिभावक, यदि हम भूल जाएँ या ग़लती करें, तो हमें न पकड़िए।
رَبَّنَا لَا تُوَ۬اخِذْنَآ إِن نَّسِينَآ أَوَ اَخْطَأْنَاۖ
हमारे अभिभावक, और हमसे कोई जुआठा वहन न कराइए, जैसा आपने उनसे वहन कराया जो हमसे पहले थे।
رَبَّنَا وَلَا تَحْمِلْ عَلَيْنَآ إِصْراٗ كَمَا حَمَلْتَهُۥ عَلَى اَ۬لذِينَ مِن قَبْلِنَاۖ
हमारे अभिभावक, और हमसे वह वहन न कराइए जिसे वहन करने की ताक़त हममें नहीं है।
رَبَّنَا وَلَا تُحَمِّلْنَا مَا لَا طَاقَةَ لَنَا بِهِۦۖ
और हमसे दरगुज़र कीजिए,
وَاعْفُ عَنَّاۖ
और हमें क्षमा कीजिए,
وَاغْفِرْ لَنَاۖ
और हम पर दया कीजिए।
وَارْحَمْنَآۖ
आप हमारे सबसे निकट के ज़ामिन हैं; तो नकारने वाली क़ौम के विरुद्ध हमारी सहायता कीजिए।”
أَنتَ مَوْل۪يٰنَا فَانصُرْنَا عَلَى اَ۬لْقَوْمِ اِ۬لْكٰ۪فِرِينَۖ