النساء
An-Nisa
Reduced to Weakness
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। हे लोगो! अपने अभिभावक के प्रति सावधान रहो, जिसने तुम्हें एक ही स्व से रचा, और उसी से उसका जोड़ीदार रचा, और उन दोनों से बहुत-से पुरुष और स्त्रियाँ फैला दिए।
بِسْمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحْمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لنَّاسُ اُ۪تَّقُواْ رَبَّكُمُ اُ۬لذِے خَلَقَكُم مِّن نَّفْسٖ وَٰحِدَةٖ وَخَلَقَ مِنْهَا زَوْجَهَا وَبَثَّ مِنْهُمَا رِجَالاٗ كَثِيراٗ وَنِسَآءٗۖ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, जिसके नाम पर तुम आपस में एक-दूसरे से माँगते हो, और गर्भ की कड़ियों के प्रति भी,
وَاتَّقُواْ اُ۬للَّهَ اَ۬لذِے تَسَّآءَلُونَ بِهِۦ وَالَارْحَامَۖ
क्योंकि ईश्वर तुम पर एक निरीक्षक है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ عَلَيْكُمْ رَقِيباٗۖ
और अनाथों को उनकी संपत्ति दो,
وَءَاتُواْ اُ۬لْيَتَٰم۪ىٰٓ أَمْوَٰلَهُمْۖ
और नीच को अच्छे के स्थान पर मत रखो,
وَلَا تَتَبَدَّلُواْ اُ۬لْخَبِيثَ بِالطَّيِّبِۖ
और उनकी संपत्ति को अपनी संपत्ति के साथ मिलाकर मत खाओ,
وَلَا تَاكُلُوٓاْ أَمْوَٰلَهُمُۥٓ إِلَىٰٓ أَمْوَٰلِكُمُۥٓۖ
क्योंकि यह एक बड़ा दुष्कर्म है।
إِنَّهُۥ كَانَ حُوباٗ كَبِيراٗۖ
और यदि तुम्हें डर हो कि तुम अनाथों के प्रति निष्पक्ष नहीं रहोगे, तो स्त्रियों में से उनसे विवाह करो जिन्हें तुमसे विवाह करना ठीक लगे, दो, तीन या चार;
وَإِنْ خِفْتُمُۥٓ أَلَّا تُقْسِطُواْ فِے اِ۬لْيَتَٰم۪ىٰ فَانكِحُواْ مَا طَابَ لَكُم مِّنَ اَ۬لنِّسَآءِ مَثْن۪ىٰ وَثُلَٰثَ وَرُبَٰعَۖ
और यदि तुम्हें डर हो कि तुम न्यायी नहीं रहोगे, तो केवल एक, या वे जिनके प्रति तुम शपथ से बँधे हो।
فَإِنْ خِفْتُمُۥٓ أَلَّا تَعْدِلُواْ فَوَٰحِدَةً اَوْ مَا مَلَكَتَ اَيْمَٰنُكُمْۖ
यही सबसे निकट है इसके लिए कि तुम बहुत बड़े परिवार के भार से न दबो।
ذَٰلِكَ أَدْن۪ىٰٓ أَلَّا تَعُولُواْۖ
और स्त्रियों को उनका विवाह-धन दो, पूर्ण अधिकार की एक देन के रूप में।
وَءَاتُواْ اُ۬لنِّسَآءَ صَدُقَٰتِهِنَّ نِحْلَةٗۖ
फिर यदि उन्हें उसमें से कुछ अपनी ओर से तुम्हें सौंप देना ठीक लगे, तो उसका उपभोग करो
فَإِن طِبْنَ لَكُمْ عَن شَےْءٖ مِّنْهُ نَفْساٗ فَكُلُوهُۖ
सुखद रूप से और स्वास्थ्यप्रद रूप से।
هَنِيٓـٔاٗ مَّرِيٓـٔاٗۖ
और नासमझों को अपनी संपत्ति मत दो, जिसे ईश्वर ने तुम्हारे लिए बने रहने का आधार बनाया है;
وَلَا تُوتُواْ اُ۬لسُّفَهَآءَ امْوَٰلَكُمُ اُ۬لتِے جَعَلَ اَ۬للَّهُ لَكُمْ قِيَماٗۖ
परंतु उसमें से उन्हें जीविका दो, उन्हें पहनाओ, और उनसे एक मान्य कथन कहो।
وَارْزُقُوهُمْ فِيهَا وَاكْسُوهُمْ وَقُولُواْ لَهُمْ قَوْلاٗ مَّعْرُوفاٗۖ
और अनाथों को परखो जब तक वे विवाह की आयु तक न पहुँच जाएँ; तब यदि तुम उनमें निर्णय की सुबुद्धि पहचानो, तो उनकी संपत्ति उन्हें सौंप दो, और फ़िज़ूलख़र्ची और समय से पहले उसे मत खाओ, इससे पहले कि वे बड़े हो जाएँ।
۞ وَابْتَلُواْ اُ۬لْيَتَٰم۪ىٰ حَتَّىٰٓ إِذَا بَلَغُواْ اُ۬لنِّكَاحَ فَإِنَ اٰنَسْتُم مِّنْهُمْ رُشْداٗ فَادْفَعُوٓاْ إِلَيْهِمُۥٓ أَمْوَٰلَهُمْ وَلَا تَاكُلُوهَآ إِسْرَافاٗ وَبِدَاراً اَنْ يَّكْبَرُواْۖ
और जो धनी हो, वह स्वयं को रोके रखे;
وَمَن كَانَ غَنِيّاٗ فَلْيَسْتَعْفِفْۖ
और जो निर्धन हो, वह उसमें से जो मान्य है उसके अनुसार खाए।
وَمَن كَانَ فَقِيراٗ فَلْيَاكُلْ بِالْمَعْرُوفِۖ
और जब तुम उन्हें उनकी संपत्ति सौंपो, तो उनके विषय में साक्षी ले लो।
فَإِذَا دَفَعْتُمُۥٓ إِلَيْهِمُۥٓ أَمْوَٰلَهُمْ فَأَشْهِدُواْ عَلَيْهِمْۖ
और ईश्वर हिसाब रखने वाले के रूप में पर्याप्त है।
وَكَف۪ىٰ بِاللَّهِ حَسِيباٗۖ
पुरुषों का एक हिस्सा है उसमें जो माता-पिता और निकट संबंधी छोड़ जाएँ, और स्त्रियों का एक हिस्सा है उसमें जो माता-पिता और निकट संबंधी छोड़ जाएँ, चाहे वह थोड़ा हो या बहुत —
لِّلرِّجَالِ نَصِيبٞ مِّمَّا تَرَكَ اَ۬لْوَٰلِدَٰنِ وَالَاقْرَبُونَ وَلِلنِّسَآءِ نَصِيبٞ مِّمَّا تَرَكَ اَ۬لْوَٰلِدَٰنِ وَالَاقْرَبُونَ مِمَّا قَلَّ مِنْهُ أَوْ كَثُرَۖ
एक तय हिस्सा।
نَصِيباٗ مَّفْرُوضاٗۖ
और जब बँटवारे के समय निकट नाते वाले, अनाथ और दरिद्र उपस्थित हों, तो उसमें से उन्हें जीविका दो,
وَإِذَا حَضَرَ اَ۬لْقِسْمَةَ أُوْلُواْ اُ۬لْقُرْب۪ىٰ وَالْيَتَٰم۪ىٰ وَالْمَسَٰكِينُ فَارْزُقُوهُم مِّنْهُۖ
और उनसे एक मान्य कथन कहो।
وَقُولُواْ لَهُمْ قَوْلاٗ مَّعْرُوفاٗۖ
और वे भय रखें जो, यदि अपने पीछे कमज़ोर संतति छोड़ जाते, तो उसके लिए डरते:
وَلْيَخْشَ اَ۬لذِينَ لَوْ تَرَكُواْ مِنْ خَلْفِهِمْ ذُرِّيَّةٗ ضِعَٰفاً خَافُواْ عَلَيْهِمْۖ
वे ईश्वर के प्रति सावधान रहें, और सीधा कथन कहें।
فَلْيَتَّقُواْ اُ۬للَّهَ وَلْيَقُولُواْ قَوْلاٗ سَدِيداًۖ
जो अनाथों की संपत्ति अन्याय से खाते हैं, वे अपने पेटों में केवल एक आग खाते हैं,
اِنَّ اَ۬لذِينَ يَاكُلُونَ أَمْوَٰلَ اَ۬لْيَتَٰم۪ىٰ ظُلْماً اِنَّمَا يَاكُلُونَ فِے بُطُونِهِمْ نَاراٗۖ
और वे एक दहकते अंगार में जलेंगे।
وَسَيَصْلَوْنَ سَعِيراٗۖ
ईश्वर तुम्हें तुम्हारे बच्चों के विषय में अनुशंसा करता है:
۞ يُوصِيكُمُ اُ۬للَّهُ فِےٓ أَوْلَٰدِكُمْۖ
नर के लिए, दो मादाओं के भाग का समकक्ष।
لِلذَّكَرِ مِثْلُ حَظِّ اِ۬لُانثَيَيْنِۖ
परंतु यदि वे दो से अधिक स्त्रियाँ हों, तो जो छोड़ा गया उसका दो-तिहाई उन्हें मिलता है;
فَإِن كُنَّ نِسَآءٗ فَوْقَ اَ۪ثْنَتَيْنِ فَلَهُنَّ ثُلُثَا مَا تَرَكَۖ
और यदि वह अकेली हो, तो उसे आधा मिलता है।
وَإِن كَانَتْ وَٰحِدَةٞ فَلَهَا اَ۬لنِّصْفُۖ
और उसके पिता और उसकी माता को, उनमें से प्रत्येक को, उसके छोड़े हुए का छठा अंश मिलता है, यदि उसका कोई बच्चा हो;
وَلِأَبَوَيْهِ لِكُلِّ وَٰحِدٖ مِّنْهُمَا اَ۬لسُّدُسُ مِمَّا تَرَكَ إِن كَانَ لَهُۥ وَلَدٞۖ
परंतु यदि उसका कोई बच्चा न हो, और उसके पिता और माता उसके उत्तराधिकारी हों, तो उसकी माता को एक-तिहाई मिलता है।
فَإِن لَّمْ يَكُن لَّهُۥ وَلَدٞ وَوَرِثَهُۥٓ أَبَوَٰهُ فَلِأُمِّهِ اِ۬لثُّلُثُۖ
यदि उसके भाई-बहन हों, तो उसकी माता को छठा अंश मिलता है,
فَإِن كَانَ لَهُۥٓ إِخْوَةٞ فَلِأُمِّهِ اِ۬لسُّدُسُۖ
उसकी की हुई किसी वसीयत, या ऋण के बाद।
مِنۢ بَعْدِ وَصِيَّةٖ يُوصِے بِهَآ أَوْ دَيْنٍۖ
तुम्हारे पिता और तुम्हारे बेटे — तुम्हें कोई अंदाज़ा नहीं कि उनमें से कौन लाभ में तुम्हारे अधिक निकट है:
اٰبَآؤُكُمْ وَأَبْنَآؤُكُمْ لَا تَدْرُونَ أَيُّهُمُۥٓ أَقْرَبُ لَكُمْ نَفْعاٗۖ
यह ईश्वर की ओर से एक दायित्व है,
فَرِيضَةٗ مِّنَ اَ۬للَّهِۖ
क्योंकि ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ عَلِيماً حَكِيماٗۖ
और तुम्हें उसका आधा मिलता है जो तुम्हारे जोड़ीदार छोड़ें, यदि उनका कोई बच्चा न हो;
وَلَكُمْ نِصْفُ مَا تَرَكَ أَزْوَٰجُكُمُۥٓ إِن لَّمْ يَكُن لَّهُنَّ وَلَدٞۖ
परंतु यदि उनका कोई बच्चा हो, तो उनके छोड़े हुए का चौथाई तुम्हें मिलता है, उनकी की हुई किसी वसीयत, या ऋण के बाद।
فَإِن كَانَ لَهُنَّ وَلَدٞ فَلَكُمُ اُ۬لرُّبُعُ مِمَّا تَرَكْنَ مِنۢ بَعْدِ وَصِيَّةٖ يُوصِينَ بِهَآ أَوْ دَيْنٖۖ
और उन्हें तुम्हारे छोड़े हुए का चौथाई मिलता है, यदि तुम्हारा कोई बच्चा न हो;
وَلَهُنَّ اَ۬لرُّبُعُ مِمَّا تَرَكْتُمُۥٓ إِن لَّمْ يَكُن لَّكُمْ وَلَدٞۖ
परंतु यदि तुम्हारा कोई बच्चा हो, तो उन्हें तुम्हारे छोड़े हुए का आठवाँ अंश मिलता है, तुम्हारी की हुई किसी वसीयत, या ऋण के बाद।
فَإِن كَانَ لَكُمْ وَلَدٞ فَلَهُنَّ اَ۬لثُّمُنُ مِمَّا تَرَكْتُم مِّنۢ بَعْدِ وَصِيَّةٖ تُوصُونَ بِهَآ أَوْ دَيْنٖۖ
और यदि कोई पुरुष जिसकी विरासत ऊपर या नीचे की किसी पीढ़ी के बिना आगे जाती है, या कोई स्त्री उसी स्थिति में, उसका एक भाई या बहन हो, तो उनमें से प्रत्येक को छठा अंश मिलता है;
وَإِن كَانَ رَجُلٞ يُورَثُ كَلَٰلَةً اَوِ اِ۪مْرَأَةٞ وَلَهُۥٓ أَخٌ اَوُ ا۟خْتٞ فَلِكُلِّ وَٰحِدٖ مِّنْهُمَا اَ۬لسُّدُسُۖ
परंतु यदि वे इससे अधिक हों, तो वे एक-तिहाई में साझीदार हैं, की गई किसी वसीयत, या ऋण के बाद, बिना हानि पहुँचाए।
فَإِن كَانُوٓاْ أَكْثَرَ مِن ذَٰلِكَ فَهُمْ شُرَكَآءُ فِے اِ۬لثُّلُثِ مِنۢ بَعْدِ وَصِيَّةٖ يُوصِے بِهَآ أَوْ دَيْنٍ غَيْرَ مُضَآرّٖۖ
यह ईश्वर की ओर से एक अनुशंसा है।
وَصِيَّةٗ مِّنَ اَ۬للَّهِۖ
ईश्वर सर्वज्ञ, सहनशील है।
وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَلِيمٞۖ
ये ईश्वर की सीमाएँ हैं।
۞ تِلْكَ حُدُودُ اُ۬للَّهِۖ
और जो ईश्वर और उसके संदेशवाहक की बात मानता है, उसे वह ऐसे उद्यानों में प्रवेश कराएगा जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जिनमें वह सदा रहेगा।
وَمَنْ يُّطِعِ اِ۬للَّهَ وَرَسُولَهُۥ نُدْخِلْهُ جَنَّٰتٖ تَجْرِے مِن تَحْتِهَا اَ۬لَانْهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۖ
और यही विशाल विजय है।
وَذَٰلِكَ اَ۬لْفَوْزُ اُ۬لْعَظِيمُۖ
और जो ईश्वर और उसके संदेशवाहक की अवज्ञा करता है, और उसकी सीमाएँ पार करता है, उसे वह एक आग में प्रवेश कराएगा जिसमें वह सदा रहेगा,
وَمَنْ يَّعْصِ اِ۬للَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَيَتَعَدَّ حُدُودَهُۥ نُدْخِلْهُ نَاراً خَٰلِداٗ فِيهَاۖ
और उसके लिए अपमानजनक दंड होगा।
وَلَهُۥ عَذَابٞ مُّهِينٞۖ
और तुम्हारी स्त्रियों में से जो निर्लज्जता करती हैं, उनके विरुद्ध अपने में से चार का साक्ष्य माँगो;
وَالتِے يَاتِينَ اَ۬لْفَٰحِشَةَ مِن نِّسَآئِكُمْ فَاسْتَشْهِدُواْ عَلَيْهِنَّ أَرْبَعَةٗ مِّنكُمْۖ
और यदि वे साक्ष्य दें, तो उन्हें घरों में थामे रखो, जब तक मृत्यु उन्हें निष्ठा से सँभाल न ले, या ईश्वर उनके लिए कोई निकास न खोल दे।
فَإِن شَهِدُواْ فَأَمْسِكُوهُنَّ فِے اِ۬لْبُيُوتِ حَتَّىٰ يَتَوَفّ۪يٰهُنَّ اَ۬لْمَوْتُ أَوْ يَجْعَلَ اَ۬للَّهُ لَهُنَّ سَبِيلاٗۖ
और तुममें से जो दो इसे करें, उन दोनों को कष्ट दो;
وَالذَٰنِ يَاتِيَٰنِهَا مِنكُمْ فَـَٔاذُوهُمَاۖ
परंतु यदि वे पलट आएँ और स्वयं को सुधार लें, तो उनसे कतराओ,
فَإِن تَابَا وَأَصْلَحَا فَأَعْرِضُواْ عَنْهُمَآۖ
क्योंकि ईश्वर निरंतर पश्चात्ताप स्वीकार करने वाला, दयालु है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ تَوَّاباٗ رَّحِيماًۖ
ईश्वर द्वारा स्वीकार किया जाने वाला पश्चात्ताप केवल उनके लिए है जो अज्ञान में बुराई करते हैं, फिर शीघ्र ही पलट आते हैं:
اِنَّمَا اَ۬لتَّوْبَةُ عَلَى اَ۬للَّهِ لِلذِينَ يَعْمَلُونَ اَ۬لسُّوٓءَ بِجَهَٰلَةٖ ثُمَّ يَتُوبُونَ مِن قَرِيبٖۖ
यही वे हैं जिनकी ओर ईश्वर अनुकंपा के साथ पलटता है।
فَأُوْلَٰٓئِكَ يَتُوبُ اُ۬للَّهُ عَلَيْهِمْۖ
ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ عَلِيماً حَكِيماٗۖ
और पश्चात्ताप उनके लिए स्वीकार नहीं किया जाता जो बुरे कर्म करते रहते हैं, यहाँ तक कि जब उनमें से किसी के पास मृत्यु आ पहुँचती है, तो वह कहता है: “मैं अब निश्चय ही पलट आता हूँ” — और न उनके लिए जो नकारते हुए मरते हैं:
وَلَيْسَتِ اِ۬لتَّوْبَةُ لِلذِينَ يَعْمَلُونَ اَ۬لسَّيِّـَٔاتِ حَتَّىٰٓ إِذَا حَضَرَ أَحَدَهُمُ اُ۬لْمَوْتُ قَالَ إِنِّے تُبْتُ اُ۬لَٰـنَ وَلَا اَ۬لذِينَ يَمُوتُونَ وَهُمْ كُفَّارٌۖ
यही वे हैं जिनके लिए हमने पीड़ादायक दंड जुटा रखा है।
ا۟وْلَٰٓئِكَ أَعْتَدْنَا لَهُمْ عَذَاباً اَلِيماٗۖ
हे विश्वास करने वालो! तुम्हारे लिए वैध नहीं कि तुम स्त्रियों को बलपूर्वक विरासत में लो,
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ لَا يَحِلُّ لَكُمُۥٓ أَن تَرِثُوا اُ۬لنِّسَآءَ كَرْهاٗۖ
और उनके लिए इसलिए बाधा मत खड़ी करो कि तुम उसका कुछ भाग ले जाओ जो तुमने उन्हें दिया, सिवा इसके कि वे कोई स्पष्ट निर्लज्जता करें।
وَلَا تَعْضُلُوهُنَّ لِتَذْهَبُواْ بِبَعْضِ مَآ ءَاتَيْتُمُوهُنَّ إِلَّآ أَنْ يَّاتِينَ بِفَٰحِشَةٖ مُّبَيِّنَةٖۖ
और उनके साथ जो मान्य है उसके अनुसार जियो।
۞ وَعَاشِرُوهُنَّ بِالْمَعْرُوفِۖ
यदि तुम्हें उनसे अरुचि हो, तो हो सकता है कि तुम्हें उस चीज़ से अरुचि हो जिसमें ईश्वर बहुत अच्छाई रखता है।
فَإِن كَرِهْتُمُوهُنَّ فَعَس۪ىٰٓ أَن تَكْرَهُواْ شَئْاٗ وَيَجْعَلَ اَ۬للَّهُ فِيهِ خَيْراٗ كَثِيراٗۖ
और यदि तुम एक जोड़ीदार के स्थान पर दूसरा लाना चाहो, और तुमने उनमें से एक को एक क्विंटल दिया हो, तो उसमें से कुछ वापस मत लो।
وَإِنَ اَرَدتُّمُ اُ۪سْتِبْدَالَ زَوْجٖ مَّكَانَ زَوْجٖ وَءَاتَيْتُمُۥٓ إِحْد۪يٰهُنَّ قِنطَاراٗ فَلَا تَاخُذُواْ مِنْهُ شَئْاًۖ
क्या तुम उसे लांछन लगाकर और स्पष्ट अपराध करके वापस लोगे?
اَتَاخُذُونَهُۥ بُهْتَٰناٗ وَإِثْماٗ مُّبِيناٗۖ
और तुम उसे कैसे वापस लोगे, जबकि तुममें से एक दूसरे से अंतरंग रूप से संयुक्त हो चुका है, और उन्होंने तुमसे एक गंभीर और दृढ़ प्रतिज्ञा ली है?
وَكَيْفَ تَاخُذُونَهُۥ وَقَدَ اَفْض۪ىٰ بَعْضُكُمُۥٓ إِلَىٰ بَعْضٖ وَأَخَذْنَ مِنكُم مِّيثَٰقاً غَلِيظاٗۖ
और स्त्रियों में से उनसे विवाह मत करो जिनसे तुम्हारे पूर्वजों ने विवाह किया, सिवा उसके जो पहले ही बीत चुका,
وَلَا تَنكِحُواْ مَا نَكَحَ ءَابَآؤُكُم مِّنَ اَ۬لنِّسَآءِ الَّا مَا قَدْ سَلَفَۖ
क्योंकि वह एक निर्लज्जता और एक घिनौनी बात थी,
إِنَّهُۥ كَانَ فَٰحِشَةٗ وَمَقْتاٗۖ
और कितनी बुरी राह है!
وَسَآءَ سَبِيلاًۖ
तुम पर वर्जित की गई हैं: तुम्हारी माताएँ, तुम्हारी बेटियाँ, तुम्हारी बहनें, तुम्हारी बुआएँ, तुम्हारी मौसियाँ, तुम्हारे भाई की बेटियाँ, तुम्हारी बहन की बेटियाँ,
حُرِّمَتْ عَلَيْكُمُۥٓ أُمَّهَٰتُكُمْ وَبَنَاتُكُمْ وَأَخَوَٰتُكُمْ وَعَمَّٰتُكُمْ وَخَٰلَٰتُكُمْ وَبَنَاتُ اُ۬لَاخِ وَبَنَاتُ اُ۬لُاخْتِۖ
तुम्हारी वे माताएँ जिन्होंने तुम्हारी देखभाल का ज़िम्मा लिया, और साझी देखभाल की तुम्हारी बहनें,
وَأُمَّهَٰتُكُمُ اُ۬لتِےٓ أَرْضَعْنَكُمْ وَأَخَوَٰتُكُم مِّنَ اَ۬لرَّضَٰعَةِۖ
तुम्हारी स्त्रियों की माताएँ, तुम्हारे गृह में पली बेटियाँ, तुम्हारी उन स्त्रियों से जिनके साथ तुमने विवाह का उपभोग किया —
وَأُمَّهَٰتُ نِسَآئِكُمْ وَرَبَٰٓئِبُكُمُ اُ۬لتِے فِے حُجُورِكُم مِّن نِّسَآئِكُمُ اُ۬لتِے دَخَلْتُم بِهِنَّۖ
परंतु यदि तुमने उनके साथ विवाह का उपभोग नहीं किया, तो तुम पर कोई आक्षेप नहीं —
فَإِن لَّمْ تَكُونُواْ دَخَلْتُم بِهِنَّ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْۖ
वे स्त्रियाँ जो वैध रूप से तुम्हारी कमर से उत्पन्न बेटों से संयुक्त हों,
وَحَلَٰٓئِلُ أَبْنَآئِكُمُ اُ۬لذِينَ مِنَ اَصْلَٰبِكُمْۖ
और दो बहनों को संयुक्त करना, सिवा उसके जो पहले ही बीत चुका,
وَأَن تَجْمَعُواْ بَيْنَ اَ۬لُاخْتَيْنِ إِلَّا مَا قَدْ سَلَفَۖ
क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ غَفُوراٗ رَّحِيماٗۖ
और वैवाहिक बंधन से सुरक्षित स्त्रियाँ, सिवा उनके जिनके प्रति तुम शपथ से बँधे हो —
۞ وَالْمُحْصَنَٰتُ مِنَ اَ۬لنِّسَآءِ الَّا مَا مَلَكَتَ اَيْمَٰنُكُمْۖ
यह ईश्वर की संहिता है जो तुम्हें बाँधती है।
كِتَٰبَ اَ۬للَّهِ عَلَيْكُمْۖ
और इन श्रेणियों के अतिरिक्त जितनी हैं वे सब तुम्हारे लिए वैध की गई हैं, कि तुम उन्हें अपनी संपत्ति के द्वारा खोजो, वैवाहिक बंधन में बँधने वाले पुरुषों के रूप में, लंपटों के रूप में नहीं।
وَأَحَلَّ لَكُم مَّا وَرَآءَ ذَٰلِكُمُۥٓ أَن تَبْتَغُواْ بِأَمْوَٰلِكُم مُّحْصِنِينَ غَيْرَ مُسَٰفِحِينَۖ
और जिसका तुमने उनके साथ उपभोग किया, उसके बदले उन्हें उनके पुरस्कार दो, एक तय दायित्व के रूप में।
فَمَا اَ۪سْتَمْتَعْتُم بِهِۦ مِنْهُنَّ فَـَٔاتُوهُنَّ أُجُورَهُنَّ فَرِيضَةٗۖ
और तय दायित्व के बाद जिस पर तुम आपस में प्रसन्न हो जाओ, उस पर तुम पर कोई आक्षेप नहीं,
وَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ فِيمَا تَرَٰضَيْتُم بِهِۦ مِنۢ بَعْدِ اِ۬لْفَرِيضَةِۖ
क्योंकि ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ عَلِيماً حَكِيماٗۖ
और तुममें से जिसके पास विश्वास करने वाली सुरक्षित स्त्रियों से विवाह करने के साधन न हों, तो तुम्हारी विश्वास करने वाली, शपथ से बँधी युवतियों में से एक।
وَمَن لَّمْ يَسْتَطِعْ مِنكُمْ طَوْلاً اَنْ يَّنكِحَ اَ۬لْمُحْصَنَٰتِ اِ۬لْمُومِنَٰتِ فَمِن مَّا مَلَكَتَ اَيْمَٰنُكُم مِّن فَتَيَٰتِكُمُ اُ۬لْمُومِنَٰتِۖ
ईश्वर तुम्हारे विश्वास को सबसे अच्छी तरह जानता है;
وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِإِيمَٰنِكُمۖ
तुम एक-दूसरे में से हो।
بَعْضُكُم مِّنۢ بَعْضٖۖ
अतः उनसे उनके परिवार की अनुमति से विवाह करो,
فَانكِحُوهُنَّ بِإِذْنِ أَهْلِهِنَّۖ
और उन्हें उनके पुरस्कार जो मान्य है उसके अनुसार दो, ऐसी स्त्रियों के रूप में जो वैवाहिक बंधन में बँधती हैं, न लंपट स्त्रियों और न गुप्त प्रेमी लेने वालियों के रूप में।
وَءَاتُوهُنَّ أُجُورَهُنَّ بِالْمَعْرُوفِ مُحْصَنَٰتٍ غَيْرَ مُسَٰفِحَٰتٖ وَلَا مُتَّخِذَٰتِ أَخْدَانٖۖ
और सुरक्षित हो जाने के बाद, यदि वे कोई निर्लज्जता करें, तो उन पर वैवाहिक बंधन से सुरक्षित स्त्रियों के दंड का आधा आता है।
فَإِذَآ أُحْصِنَّ فَإِنَ اَتَيْنَ بِفَٰحِشَةٖ فَعَلَيْهِنَّ نِصْفُ مَا عَلَى اَ۬لْمُحْصَنَٰتِ مِنَ اَ۬لْعَذَابِۖ
यह उसके लिए है जो तुममें से त्रस्त होने से भय रखता है;
ذَٰلِكَ لِمَنْ خَشِيَ اَ۬لْعَنَتَ مِنكُمْۖ
परंतु धैर्य रखना तुम्हारे लिए बेहतर है।
وَأَن تَصْبِرُواْ خَيْرٞ لَّكُمْۖ
और ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
وَاللَّهُ غَفُورٞ رَّحِيمٞۖ
ईश्वर चाहता है कि तुम्हें प्रबुद्ध करे, तुम्हें उनकी रीतियों के अनुसार मार्ग दिखाए जो तुमसे पहले थे, और अनुकंपा के साथ तुम्हारी ओर पलटे।
يُرِيدُ اُ۬للَّهُ لِيُبَيِّنَ لَكُمْ وَيَهْدِيَكُمْ سُنَنَ اَ۬لذِينَ مِن قَبْلِكُمْ وَيَتُوبَ عَلَيْكُمْۖ
और ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٞۖ
ईश्वर चाहता है कि अनुकंपा के साथ तुम्हारी ओर पलटे,
وَاللَّهُ يُرِيدُ أَنْ يَّتُوبَ عَلَيْكُمْۖ
जबकि जो अपनी कामनाओं का अनुसरण करते हैं वे चाहते हैं कि तुम एक विशाल झुकाव से झुक जाओ।
وَيُرِيدُ اُ۬لذِينَ يَتَّبِعُونَ اَ۬لشَّهَوَٰتِ أَن تَمِيلُواْ مَيْلاً عَظِيماٗۖ
ईश्वर तुम्हें हल्का करना चाहता है,
يُرِيدُ اُ۬للَّهُ أَنْ يُّخَفِّفَ عَنكُمْۖ
क्योंकि मनुष्य कमज़ोर रचा गया है।
وَخُلِقَ اَ۬لِانسَٰنُ ضَعِيفاٗۖ
हे विश्वास करने वालो! अपनी संपत्ति आपस में असत्य से मत खाओ,
۞ يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَاكُلُوٓاْ أَمْوَٰلَكُم بَيْنَكُم بِالْبَٰطِلِۖ
सिवा इसके कि वह तुम्हारी आपसी प्रसन्नता से उपजा कोई व्यापार हो।
إِلَّآ أَن تَكُونَ تِجَٰرَةٌ عَن تَرَاضٖ مِّنكُمْۖ
और स्वयं को मार मत डालो,
وَلَا تَقْتُلُوٓاْ أَنفُسَكُمُۥٓۖ
क्योंकि ईश्वर तुम्हारे प्रति दयालु है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ بِكُمْ رَحِيماٗۖ
और जो यह शत्रुता और अन्याय से करता है, उसे हम एक आग में जलाएँगे।
وَمَنْ يَّفْعَلْ ذَٰلِكَ عُدْوَٰناٗ وَظُلْماٗ فَسَوْفَ نُصْلِيهِ نَاراٗۖ
और यह ईश्वर के लिए एक सरल बात है।
وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى اَ۬للَّهِ يَسِيراًۖ
यदि तुम उसमें से, जो तुम्हारे लिए निषिद्ध है, सबसे गंभीर बातों से दूर रहो, तो हम तुम्हारे बुरे कर्म ढक देंगे, और तुम्हें एक सम्मानित प्रवेश में प्रवेश कराएँगे।
اِن تَجْتَنِبُواْ كَبَآئِرَ مَا تُنْهَوْنَ عَنْهُ نُكَفِّرْ عَنكُمْ سَيِّـَٔاتِكُمْ وَنُدْخِلْكُم مَّدْخَلاٗ كَرِيماٗۖ
और उसकी इच्छा मत करो जिसके द्वारा ईश्वर ने तुममें से कुछ को दूसरों पर वरीयता दी है।
وَلَا تَتَمَنَّوْاْ مَا فَضَّلَ اَ۬للَّهُ بِهِۦ بَعْضَكُمْ عَلَىٰ بَعْضٖۖ
पुरुषों के लिए उसका एक हिस्सा जो उन्होंने कमाया,
لِّلرِّجَالِ نَصِيبٞ مِّمَّا اَ۪كْتَسَبُواْۖ
और स्त्रियों के लिए उसका एक हिस्सा जो उन्होंने कमाया।
وَلِلنِّسَآءِ نَصِيبٞ مِّمَّا اَ۪كْتَسَبْنَۖ
और ईश्वर से उसके अनुग्रह में से माँगो,
وَسْـَٔلُواْ اُ۬للَّهَ مِن فَضْلِهِۦٓۖ
क्योंकि ईश्वर हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ بِكُلِّ شَےْءٍ عَلِيماٗۖ
और प्रत्येक के लिए हमने उत्तराधिकारी ठहराए हैं, उसके लिए जो छोड़ जाएँ
وَلِكُلّٖ جَعَلْنَا مَوَٰلِيَ مِمَّا تَرَكَۖ
माता-पिता और निकट संबंधी।
اَ۬لْوَٰلِدَٰنِ وَالَاقْرَبُونَۖ
और जिनसे तुम्हारी शपथों ने तुम्हें बाँधा है, उन्हें उनका हिस्सा दो,
وَالذِينَ عَٰقَدَتَ اَيْمَٰنُكُمْ فَـَٔاتُوهُمْ نَصِيبَهُمُۥٓۖ
क्योंकि ईश्वर हर चीज़ का साक्षी है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ عَلَىٰ كُلِّ شَےْءٖ شَهِيداًۖ
पुरुष स्त्रियों के प्रति गृह का कार्यकारी, सुरक्षा-संबंधी और वित्तीय ज़िम्मा वहन करते हैं, इस कारण कि ईश्वर ने कुछ को दूसरों पर वरीयता दी है, और इस कारण कि वे अपनी संपत्ति में से ख़र्च करते हैं।
اِ۬لرِّجَالُ قَوَّٰمُونَ عَلَى اَ۬لنِّسَآءِ بِمَا فَضَّلَ اَ۬للَّهُ بَعْضَهُمْ عَلَىٰ بَعْضٖ وَبِمَآ أَنفَقُواْ مِنَ اَمْوَٰلِهِمْۖ
भली स्त्रियाँ समर्पित होती हैं, जो इंद्रियों से परे है उसकी रक्षा करने वाली, इस कारण कि ईश्वर ने रक्षा की।
فَالصَّٰلِحَٰتُ قَٰنِتَٰتٌ حَٰفِظَٰتٞ لِّلْغَيْبِ بِمَا حَفِظَ اَ۬للَّهُۖ
और जिनकी एकतरफ़ा विमुखता का तुम्हें डर हो, उन्हें उपदेश दो, सोने के स्थानों में उनसे दूर हो जाओ, फिर उन्हें कई गुना करो;
وَالتِے تَخَافُونَ نُشُوزَهُنَّ فَعِظُوهُنَّ وَاهْجُرُوهُنَّ فِے اِ۬لْمَضَاجِعِ وَاضْرِبُوهُنَّۖ
फिर यदि वे तुम्हारी बात मानें, तो उनके विरुद्ध कोई राह मत खोजो,
فَإِنَ اَطَعْنَكُمْ فَلَا تَبْغُواْ عَلَيْهِنَّ سَبِيلاًۖ
क्योंकि ईश्वर परम-उच्च, महान है।
اِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ عَلِيّاٗ كَبِيراٗۖ
और यदि तुम्हें दोनों के बीच दरार का डर हो, तो उस पुरुष के परिवार से एक मध्यस्थ और उस स्त्री के परिवार से एक मध्यस्थ उठाओ; यदि वे दोनों मेल-मिलाप चाहें, तो ईश्वर उन्हें एक-दूसरे के अनुकूल कर देगा;
وَإِنْ خِفْتُمْ شِقَاقَ بَيْنِهِمَا فَابْعَثُواْ حَكَماٗ مِّنَ اَهْلِهِۦ وَحَكَماٗ مِّنَ اَهْلِهَآ إِنْ يُّرِيدَآ إِصْلَٰحاٗ يُوَفِّقِ اِ۬للَّهُ بَيْنَهُمَآۖ
क्योंकि ईश्वर सर्वज्ञ, पूरी ख़बर रखने वाला है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ عَلِيماً خَبِيراٗۖ
और ईश्वर की आज्ञा का पालन करो,
۞ وَاعْبُدُواْ اُ۬للَّهَۖ
और उसके साथ किसी चीज़ को साझी मत ठहराओ,
وَلَا تُشْرِكُواْ بِهِۦ شَئْاٗۖ
और भलाई करो माता-पिता के प्रति, निकट संबंधियों के प्रति, अनाथों के प्रति, दरिद्रों के प्रति, निकट के पड़ोसी के प्रति, अपरिचित पड़ोसी के प्रति, बगल के साथी के प्रति, राह के मुसाफ़िर के प्रति, और उनके प्रति जिनसे तुम शपथ से बँधे हो;
وَبِالْوَٰلِدَيْنِ إِحْسَٰناٗ وَبِذِے اِ۬لْقُرْب۪ىٰ وَالْيَتَٰم۪ىٰ وَالْمَسَٰكِينِ وَالْج۪ارِ ذِے اِ۬لْقُرْب۪ىٰ وَالْج۪ارِ اِ۬لْجُنُبِ وَالصَّٰحِبِ بِالْجَنۢبِ وَابْنِ اِ۬لسَّبِيلِ وَمَا مَلَكَتَ اَيْمَٰنُكُمُۥٓۖ
क्योंकि ईश्वर घमंडी, डींग हाँकने वाले से प्रेम नहीं करता।
إِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يُحِبُّ مَن كَانَ مُخْتَالاٗ فَخُوراًۖ
जो कंजूस हैं, लोगों को कंजूसी का आदेश देते हैं, और जो ईश्वर ने उन्हें अपने अनुग्रह से दिया उसे दबा रखते हैं —
اِ۬لذِينَ يَبْخَلُونَ وَيَامُرُونَ اَ۬لنَّاسَ بِالْبُخْلِ وَيَكْتُمُونَ مَآ ءَات۪يٰهُمُ اُ۬للَّهُ مِن فَضْلِهِۦۖ
और हमने नकारने वालों के लिए अपमानजनक दंड जुटा रखा है।
وَأَعْتَدْنَا لِلْكٰ۪فِرِينَ عَذَاباٗ مُّهِيناٗۖ
और जो अपनी संपत्ति लोगों के सामने दिखावे के लिए ख़र्च करते हैं, और न ईश्वर पर विश्वास करते हैं न अंतिम दिन पर —
وَالذِينَ يُنفِقُونَ أَمْوَٰلَهُمْ رِئَآءَ اَ۬لنَّاسِ وَلَا يُومِنُونَ بِاللَّهِ وَلَا بِالْيَوْمِ اِ۬لَاخِرِۖ
जिसका संगी बहकाने वाला हो, तो कितना बुरा संगी है!
وَمَنْ يَّكُنِ اِ۬لشَّيْطَٰنُ لَهُۥ قَرِيناٗ فَسَآءَ قَرِيناٗۖ
और उन पर क्या भारी पड़ जाता, यदि वे ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास करते, और उसमें से ख़र्च करते जिससे ईश्वर ने उन्हें जीविका दी?
وَمَاذَا عَلَيْهِمْ لَوَ اٰمَنُواْ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ اِ۬لَاخِرِ وَأَنفَقُواْ مِمَّا رَزَقَهُمُ اُ۬للَّهُۖ
ईश्वर उनके विषय में सर्वज्ञ है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ بِهِمْ عَلِيماًۖ
ईश्वर एक कण के भार जितना भी अन्याय नहीं करता।
اِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يَظْلِمُ مِثْقَالَ ذَرَّةٖۖ
और यदि वह कोई भलाई हो, तो वह उसे दोगुना करता है, और अपनी ओर से एक विशाल पुरस्कार देता है।
وَإِن تَكُ حَسَنَةٞ يُضَٰعِفْهَا وَيُوتِ مِن لَّدُنْهُ أَجْراً عَظِيماٗۖ
तो फिर कैसा होगा, जब हम प्रत्येक समुदाय में से एक साक्षी लाएँगे, और तुम्हें इनके विरुद्ध साक्षी के रूप में लाएँगे?
فَكَيْفَ إِذَا جِئْنَا مِن كُلِّ أُمَّةِۢ بِشَهِيدٖ وَجِئْنَا بِكَ عَلَىٰ هَٰٓؤُلَآءِ شَهِيداٗۖ
उस दिन जिन्होंने नकारा और संदेशवाहक की अवज्ञा की, वे चाहेंगे कि धरती उन पर समतल कर दी जाए, और वे ईश्वर से कोई वार्ता दबा नहीं सकेंगे।
يَوْمَئِذٖ يَوَدُّ اُ۬لذِينَ كَفَرُواْ وَعَصَوُاْ اُ۬لرَّسُولَ لَوْ تَسَّوّ۪ىٰ بِهِمُ اُ۬لَارْضُ وَلَا يَكْتُمُونَ اَ۬للَّهَ حَدِيثاٗۖ
हे विश्वास करने वालो! नशे की स्थिति में संपर्क के निकट मत जाओ, जब तक कि तुम जान न लो कि तुम क्या कहते हो, और न मलिन अवस्था में — सिवा किसी राह से गुज़रते हुए — जब तक कि तुम स्वयं को धो न लो।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَقْرَبُواْ اُ۬لصَّلَوٰةَ وَأَنتُمْ سُكَٰر۪ىٰ حَتَّىٰ تَعْلَمُواْ مَا تَقُولُونَ وَلَا جُنُباً اِلَّا عَابِرِے سَبِيلٍ حَتَّىٰ تَغْتَسِلُواْۖ
और यदि तुम बीमार हो, या यात्रा में हो, या तुममें से कोई प्राकृतिक आवश्यकता पूरी करके आया हो, या तुमने किसी स्त्री को अंतरंगता में जाना हो, और तुम्हें पानी न मिले, तो किसी अच्छे भू-उभार को लक्ष्य करो, और उससे अपने चेहरों और हाथों पर फेर लो;
وَإِن كُنتُم مَّرْض۪ىٰٓ أَوْ عَلَىٰ سَفَرٍ اَوْ جَآءَ احَدٞ مِّنكُم مِّنَ اَ۬لْغَآئِطِ أَوْ لَٰمَسْتُمُ اُ۬لنِّسَآءَ فَلَمْ تَجِدُواْ مَآءٗ فَتَيَمَّمُواْ صَعِيداٗ طَيِّباٗ فَامْسَحُواْ بِوُجُوهِكُمْ وَأَيْدِيكُمُۥٓۖ
क्योंकि ईश्वर निरंतर दरगुज़र करने वाला, अत्यंत क्षमाशील है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ عَفُوّاً غَفُوراًۖ
क्या तुमने उन्हें नहीं देखा जिन्हें ग्रंथ का एक हिस्सा दिया गया, जो भटकाव ख़रीदते हैं और चाहते हैं कि तुम राह से भटक जाओ?
اَلَمْ تَرَ إِلَى اَ۬لذِينَ أُوتُواْ نَصِيباٗ مِّنَ اَ۬لْكِتَٰبِ يَشْتَرُونَ اَ۬لضَّلَٰلَةَ وَيُرِيدُونَ أَن تَضِلُّواْ اُ۬لسَّبِيلَۖ
ईश्वर तुम्हारे शत्रुओं को सबसे अच्छी तरह जानता है।
وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِأَعْدَآئِكُمْۖ
और ईश्वर आश्रयदाता के रूप में पर्याप्त है, और ईश्वर सहायता के रूप में पर्याप्त है।
وَكَف۪ىٰ بِاللَّهِ وَلِيّاٗ وَكَف۪ىٰ بِاللَّهِ نَصِيراٗۖ
पुनरुन्मुखों में कुछ ऐसे हैं जो बोलों को उनके संदर्भ से हटाकर तोड़-मरोड़ते हैं, और कहते हैं: “हमने सुना और अवज्ञा की”, और: “सुनो, तुम्हें सुनाया न जाए”, और: “हमें तुच्छ जानो”, अपनी जीभें मरोड़ते हुए और विधान पर वार करते हुए।
۞ مِّنَ اَ۬لذِينَ هَادُواْ يُحَرِّفُونَ اَ۬لْكَلِمَ عَن مَّوَاضِعِهِۦ وَيَقُولُونَ سَمِعْنَا وَعَصَيْنَا وَاسْمَعْ غَيْرَ مُسْمَعٖ وَرَٰعِنَا لَيّاَۢ بِأَلْسِنَتِهِمْ وَطَعْناٗ فِے اِ۬لدِّينِۖ
और यदि वे कहते: “हमने सुना और बात मानी”, और: “सुनो”, और: “हम पर नज़र डालो”, तो यह उनके लिए बेहतर और अधिक सीधा होता;
وَلَوَ اَنَّهُمْ قَالُواْ سَمِعْنَا وَأَطَعْنَا وَاسْمَعْ وَانظُرْنَا لَكَانَ خَيْراٗ لَّهُمْ وَأَقْوَمَۖ
परंतु ईश्वर ने उनके नकार के कारण उन्हें धिक्कारा, और वे विश्वास बस थोड़ा ही करते हैं।
وَلَٰكِن لَّعَنَهُمُ اُ۬للَّهُ بِكُفْرِهِمْ فَلَا يُومِنُونَ إِلَّا قَلِيلاٗۖ
हे ग्रंथ दिए गए जनो! उस पर विश्वास करो जो हमने उतारा, जो तुम्हारे पास है उसकी पुष्टि करते हुए, इससे पहले कि हम कुछ चेहरों को पोंछ दें, उन्हें पीछे की ओर वापस मोड़ने के लिए, या उन्हें धिक्कारें जैसे हमने विराम वालों को धिक्कारा।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ أُوتُواْ اُ۬لْكِتَٰبَ ءَامِنُواْ بِمَا نَزَّلْنَا مُصَدِّقاٗ لِّمَا مَعَكُم مِّن قَبْلِ أَن نَّطْمِسَ وُجُوهاٗ فَنَرُدَّهَا عَلَىٰٓ أَدْبٰ۪رِهَآ أَوْ نَلْعَنَهُمْ كَمَا لَعَنَّآ أَصْحَٰبَ اَ۬لسَّبْتِۖ
और ईश्वर का आदेश सदा किया जा चुका काम होता है।
وَكَانَ أَمْرُ اُ۬للَّهِ مَفْعُولۖاً
ईश्वर निश्चय ही यह क्षमा नहीं करता कि उसके साथ साझी ठहराया जाए,
اِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يَغْفِرُ أَنْ يُّشْرَكَ بِهِۦۖ
परंतु इससे कम जो है, उसे वह उसके लिए क्षमा कर देता है जिस पर उसकी मर्ज़ी हो।
وَيَغْفِرُ مَا دُونَ ذَٰلِكَ لِمَنْ يَّشَآءُۖ
और जो ईश्वर के साथ साझी ठहराता है, वह एक विशाल अपराध गढ़ता है।
وَمَنْ يُّشْرِكْ بِاللَّهِ فَقَدِ اِ۪فْتَر۪ىٰٓ إِثْماً عَظِيماًۖ
क्या तुमने उन्हें नहीं देखा जो स्वयं को शुद्ध घोषित करते हैं?
اَلَمْ تَرَ إِلَى اَ۬لذِينَ يُزَكُّونَ أَنفُسَهُمۖ
बल्कि ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे शुद्ध करता है,
بَلِ اِ۬للَّهُ يُزَكِّے مَنْ يَّشَآءُۖ
और वे अन्याय नहीं सहेंगे, रेशे भर भी।
وَلَا يُظْلَمُونَ فَتِيلاًۖ
नज़र डालो कि वे ईश्वर के विरुद्ध झूठ कैसे गढ़ते हैं: यही स्पष्ट अपराध के रूप में पर्याप्त है।
اُ۟نظُرْ كَيْفَ يَفْتَرُونَ عَلَى اَ۬للَّهِ اِ۬لْكَذِبَ وَكَف۪ىٰ بِهِۦٓ إِثْماٗ مُّبِيناًۖ
क्या तुमने उन्हें नहीं देखा जिन्हें ग्रंथ का एक हिस्सा दिया गया, जो बुत पर और मर्यादाहीन पर विश्वास करते हैं, और नकारने वालों के विषय में कहते हैं: “ये राह के विषय में उनसे अधिक मार्गदर्शन पाए हुए हैं जिन्होंने विश्वास किया”?
اَلَمْ تَرَ إِلَى اَ۬لذِينَ أُوتُواْ نَصِيباٗ مِّنَ اَ۬لْكِتَٰبِ يُومِنُونَ بِالْجِبْتِ وَالطَّٰغُوتِ وَيَقُولُونَ لِلذِينَ كَفَرُواْ هَٰٓؤُلَآءِ اَ۬هْد۪ىٰ مِنَ اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ سَبِيلاًۖ
यही वे हैं जिन्हें ईश्वर ने धिक्कारा;
ا۟وْلَٰٓئِكَ اَ۬لذِينَ لَعَنَهُمُ اُ۬للَّهُۖ
और जिसे ईश्वर धिक्कारे, उसके लिए तुम कोई सहायता नहीं पाओगे।
وَمَنْ يَّلْعَنِ اِ۬للَّهُ فَلَن تَجِدَ لَهُۥ نَصِيراًۖ
या क्या उनके पास राजत्व का कोई हिस्सा है? तब तो वे लोगों को खजूर की गुठली का खाँचा भी न देते।
اَمْ لَهُمْ نَصِيبٞ مِّنَ اَ۬لْمُلْكِ فَإِذاٗ لَّا يُوتُونَ اَ۬لنَّاسَ نَقِيراًۖ
या क्या वे लोगों से उस पर ईर्ष्या करते हैं जो ईश्वर ने उन्हें अपने अनुग्रह से दिया?
اَمْ يَحْسُدُونَ اَ۬لنَّاسَ عَلَىٰ مَآ ءَات۪يٰهُمُ اُ۬للَّهُ مِن فَضْلِهِۦۖ
हमने तो इब्राहीम के कुल को ग्रंथ और प्रज्ञा दी है, और उन्हें एक विशाल राजत्व दिया है।
فَقَدَ اٰتَيْنَآ ءَالَ إِبْرَٰهِيمَ اَ۬لْكِتَٰبَ وَالْحِكْمَةَ وَءَاتَيْنَٰهُم مُّلْكاً عَظِيماٗۖ
उनमें कुछ ऐसे हैं जिन्होंने उस पर विश्वास किया, और कुछ ऐसे हैं जो उसके सामने बिदक गए।
فَمِنْهُم مَّنَ اٰمَنَ بِهِۦ وَمِنْهُم مَّن صَدَّ عَنْهُۖ
और जहन्नम दहकते अंगार के रूप में पर्याप्त है।
وَكَف۪ىٰ بِجَهَنَّمَ سَعِيراًۖ
जिन्होंने हमारे संकेतों को नकारा, हम उन्हें निश्चय ही एक आग में जलाएँगे।
اِنَّ اَ۬لذِينَ كَفَرُواْ بِـَٔايَٰتِنَا سَوْفَ نُصْلِيهِمْ نَاراٗۖ
जब-जब उनकी त्वचाएँ जल चुकेंगी, हम उनकी जगह उन्हें दूसरी त्वचाएँ दे देंगे, ताकि वे दंड का स्वाद चखें,
كُلَّمَا نَضِجَتْ جُلُودُهُم بَدَّلْنَٰهُمْ جُلُوداً غَيْرَهَا لِيَذُوقُواْ اُ۬لْعَذَابَۖ
क्योंकि ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ عَزِيزاً حَكِيماٗۖ
और जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, हम उन्हें ऐसे उद्यानों में प्रवेश कराएँगे जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जहाँ वे सदा, चिरकाल तक रहेंगे।
وَالذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ سَنُدْخِلُهُمْ جَنَّٰتٖ تَجْرِے مِن تَحْتِهَا اَ۬لَانْهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَداٗۖ
वहाँ उनके लिए स्वच्छ किए हुए जोड़ीदार होंगे,
لَّهُمْ فِيهَآ أَزْوَٰجٞ مُّطَهَّرَةٞۖ
और हम उन्हें छाया करने वाली एक छाया में प्रवेश कराएँगे।
وَنُدْخِلُهُمْ ظِلّاٗ ظَلِيلاًۖ
ईश्वर तुम्हें आदेश देता है कि भरोसे की धरोहरें उनके हक़दारों के हवाले करो, और जब तुम लोगों के बीच निर्णय करो, तो न्याय से निर्णय करो।
۞ اِنَّ اَ۬للَّهَ يَامُرُكُمُۥٓ أَن تُوَ۬دُّواْ اُ۬لَامَٰنَٰتِ إِلَىٰٓ أَهْلِهَا وَإِذَا حَكَمْتُم بَيْنَ اَ۬لنَّاسِ أَن تَحْكُمُواْ بِالْعَدْلِۖ
कितना उत्तम है वह, जिसका ईश्वर तुम्हें उपदेश देता है!
إِنَّ اَ۬للَّهَ نِعِمَّا يَعِظُكُم بِهِۦٓۖ
क्योंकि ईश्वर सुनने वाला, दृष्टिवान है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ سَمِيعاَۢ بَصِيراٗۖ
हे विश्वास करने वालो! ईश्वर की बात मानो, संदेशवाहक की बात मानो और अपने में से उनकी भी, जिनके हाथ में आदेश है।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَطِيعُواْ اُ۬للَّهَ وَأَطِيعُواْ اُ۬لرَّسُولَ وَأُوْلِے اِ۬لَامْرِ مِنكُمْۖ
और यदि तुम किसी बात पर खींचतान में पड़ो, तो उसे ईश्वर और संदेशवाहक की ओर वापस ले जाओ, यदि तुम ईश्वर पर और अंतिम दिन पर विश्वास करते हो।
فَإِن تَنَٰزَعْتُمْ فِے شَےْءٖ فَرُدُّوهُ إِلَى اَ۬للَّهِ وَالرَّسُولِ إِن كُنتُمْ تُومِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ اِ۬لَاخِرِۖ
यही बेहतर है, और व्याख्या में अधिक सुंदर है।
ذَٰلِكَ خَيْرٞ وَأَحْسَنُ تَاوِيلاًۖ
क्या तुमने उन्हें नहीं देखा जो दावा करते हैं कि उन्होंने उस पर विश्वास किया है जो तुम पर उतारा गया और जो तुमसे पहले उतारा गया, और जो अपना मुक़दमा मर्यादाहीन के पास ले जाना चाहते हैं, जबकि उन्हें आदेश दिया गया था कि उसे नकारें?
اَلَمْ تَرَ إِلَى اَ۬لذِينَ يَزْعُمُونَ أَنَّهُمُۥٓ ءَامَنُواْ بِمَآ أُنزِلَ إِلَيْكَ وَمَآ أُنزِلَ مِن قَبْلِكَ يُرِيدُونَ أَنْ يَّتَحَاكَمُوٓاْ إِلَى اَ۬لطَّٰغُوتِ وَقَدُ ا۟مِرُوٓاْ أَنْ يَّكْفُرُواْ بِهِۦۖ
और बहकाने वाला उन्हें दूर के भटकाव से भटकाना चाहता है।
وَيُرِيدُ اُ۬لشَّيْطَٰنُ أَنْ يُّضِلَّهُمْ ضَلَٰلاَۢ بَعِيداٗۖ
और जब उनसे कहा जाता है: “उसकी ओर आओ जो ईश्वर ने उतारा है, और संदेशवाहक की ओर”, तो तुम पाखंडियों को देखते हो कि वे दृढ़ता से तुमसे बिदक जाते हैं।
وَإِذَا قِيلَ لَهُمْ تَعَالَوِاْ اِلَىٰ مَآ أَنزَلَ اَ۬للَّهُ وَإِلَى اَ۬لرَّسُولِ رَأَيْتَ اَ۬لْمُنَٰفِقِينَ يَصُدُّونَ عَنكَ صُدُوداٗۖ
तो फिर कैसे, जब उन पर उसके कारण कोई विपत्ति आ पड़ती है जो उनके हाथों ने आगे बढ़ाया, तब वे तुम्हारे पास आते हैं, ईश्वर की शपथ खाते हुए: “हम तो केवल भलाई और मेल-मिलाप चाहते थे”?
فَكَيْفَ إِذَآ أَصَٰبَتْهُم مُّصِيبَةُۢ بِمَا قَدَّمَتَ اَيْدِيهِمْ ثُمَّ جَآءُوكَ يَحْلِفُونَ بِاللَّهِ إِنَ اَرَدْنَآ إِلَّآ إِحْسَٰناٗ وَتَوْفِيقاًۖ
ये वे हैं जिनके मर्मों में जो कुछ है उसे ईश्वर जानता है; अतः उनसे कतराओ, उन्हें उपदेश दो, और उनसे उन्हीं के विषय में एक असरदार कथन कहो।
ا۟وْلَٰٓئِكَ اَ۬لذِينَ يَعْلَمُ اُ۬للَّهُ مَا فِے قُلُوبِهِمْ فَأَعْرِضْ عَنْهُمْ وَعِظْهُمْ وَقُل لَّهُمْ فِےٓ أَنفُسِهِمْ قَوْلاَۢ بَلِيغاٗۖ
और हमने कोई संदेशवाहक नहीं भेजा, सिवा इसके कि ईश्वर की अनुमति से उसकी बात मानी जाए।
وَمَآ أَرْسَلْنَا مِن رَّسُولٍ اِلَّا لِيُطَاعَ بِإِذْنِ اِ۬للَّهِۖ
और यदि वे, अपने आप पर अन्याय करने के बाद, तुम्हारे पास आते, ईश्वर से क्षमा माँगते, और संदेशवाहक भी उनके लिए क्षमा माँगता, तो वे ईश्वर को ज़रूर निरंतर पश्चात्ताप स्वीकार करने वाला, दयालु पाते।
وَلَوَ اَنَّهُمُۥٓ إِذ ظَّلَمُوٓاْ أَنفُسَهُمْ جَآءُوكَ فَاسْتَغْفَرُواْ اُ۬للَّهَ وَاسْتَغْفَرَ لَهُمُ اُ۬لرَّسُولُ لَوَجَدُواْ اُ۬للَّهَ تَوَّاباٗ رَّحِيماٗۖ
नहीं, तुम्हारे अभिभावक की शपथ! वे तब तक विश्वास नहीं करेंगे जब तक वे अपने विवादों में तुम्हें निर्णायक न बना लें, फिर तुम जो फ़ैसला करो उसके प्रति अपने भीतर कोई तंगी न पाएँ, और पूर्ण खरेपन के साथ उसे स्वीकार न कर लें।
۞ فَلَا وَرَبِّكَ لَا يُومِنُونَ حَتَّىٰ يُحَكِّمُوكَ فِيمَا شَجَرَ بَيْنَهُمْ ثُمَّ لَا يَجِدُواْ فِےٓ أَنفُسِهِمْ حَرَجاٗ مِّمَّا قَضَيْتَ وَيُسَلِّمُواْ تَسْلِيماٗۖ
और यदि हम उन पर विहित करते: “आपस में एक-दूसरे को मार डालो”, या: “अपने ठिकानों से निकल जाओ”, तो वे ऐसा न करते, सिवा उनमें से थोड़े के।
وَلَوَ اَنَّا كَتَبْنَا عَلَيْهِمُۥٓ أَنُ اُ۟قْتُلُوٓاْ أَنفُسَكُمُۥٓ أَوُ اُ۟خْرُجُواْ مِن دِيٰ۪رِكُم مَّا فَعَلُوهُ إِلَّا قَلِيلٞ مِّنْهُمْۖ
और यदि उन्होंने वह किया होता जिसका उन्हें उपदेश दिया जाता था, तो यह उनके लिए बेहतर होता, और उन्हें अधिक दृढ़ता से स्थिर करता;
وَلَوَ اَنَّهُمْ فَعَلُواْ مَا يُوعَظُونَ بِهِۦ لَكَانَ خَيْراٗ لَّهُمْ وَأَشَدَّ تَثْبِيتاٗۖ
और तब हम उन्हें अपनी ओर से ज़रूर एक विशाल पुरस्कार देते,
وَإِذاٗ لَّأٓتَيْنَٰهُم مِّن لَّدُنَّآ أَجْراً عَظِيماٗ
और उन्हें ज़रूर सीधे पथ का मार्ग दिखाते।
وَلَهَدَيْنَٰهُمْ صِرَٰطاٗ مُّسْتَقِيماٗۖ
और जो कोई ईश्वर और संदेशवाहक की बात माने, वे उनके साथ होंगे जिन्हें ईश्वर ने अपने उपकार से भर दिया, यानी सूचनादाताओं, सच्चों, साक्षियों और उनके साथ जो भले हैं।
وَمَنْ يُّطِعِ اِ۬للَّهَ وَالرَّسُولَ فَأُوْلَٰٓئِكَ مَعَ اَ۬لذِينَ أَنْعَمَ اَ۬للَّهُ عَلَيْهِم مِّنَ اَ۬لنَّبِيٓـِٕۧنَ وَالصِّدِّيقِينَ وَالشُّهَدَآءِ وَالصَّٰلِحِينَۖ
और कितनी सुंदर संगति है वह!
وَحَسُنَ أُوْلَٰٓئِكَ رَفِيقاٗۖ
यही ईश्वर की ओर से आया अनुग्रह है,
ذَٰلِكَ اَ۬لْفَضْلُ مِنَ اَ۬للَّهِۖ
और ईश्वर सर्वज्ञ के रूप में पर्याप्त है।
وَكَف۪ىٰ بِاللَّهِ عَلِيماٗۖ
हे विश्वास करने वालो! अपने बचाव का प्रबंध करो, और टुकड़ियों में लामबंद हो जाओ, या सब मिलकर लामबंद हो जाओ।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ خُذُواْ حِذْرَكُمْ فَانفِرُواْ ثُبَاتٍ اَوِ اِ۪نفِرُواْ جَمِيعاٗۖ
और तुममें अवश्य कोई ऐसा है जो जान-बूझकर ढिलाई करता है;
وَإِنَّ مِنكُمْ لَمَن لَّيُبَطِّئَنَّۖ
और यदि तुम पर कोई विपत्ति आए, तो वह कहता है: “ईश्वर ने मुझे अपने उपकार से भर दिया, चूँकि मैं उनके साथ साक्षी बनकर नहीं था।”
فَإِنَ اَصَٰبَتْكُم مُّصِيبَةٞ قَالَ قَدَ اَنْعَمَ اَ۬للَّهُ عَلَيَّ إِذْ لَمَ اَكُن مَّعَهُمْ شَهِيداٗۖ
परंतु यदि तुम पर ईश्वर की ओर से कोई अनुग्रह आए, तो वह अवश्य कहेगा, मानो तुम्हारे और उसके बीच कोई स्नेह था ही नहीं: “काश मैं उनके साथ होता, तब मैं एक विशाल विजय पाता!”
وَلَئِنَ اَصَٰبَكُمْ فَضْلٞ مِّنَ اَ۬للَّهِ لَيَقُولَنَّ كَأَن لَّمْ يَكُنۢ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُۥ مَوَدَّةٞ يَٰلَيْتَنِے كُنتُ مَعَهُمْ فَأَفُوزَ فَوْزاً عَظِيماٗۖ
तो जो इहलोक का जीवन अंतिम जीवन के बदले बेचते हैं, वे ईश्वर की राह में लड़ें।
۞ فَلْيُقَٰتِلْ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ اِ۬لذِينَ يَشْرُونَ اَ۬لْحَيَوٰةَ اَ۬لدُّنْي۪ا بِالَاخِرَةِۖ
और जो कोई ईश्वर की राह में लड़ता है, फिर मारा जाता है या विजयी होता है, हम उसे एक विशाल पुरस्कार देंगे।
وَمَنْ يُّقَٰتِلْ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ فَيُقْتَلَ اَوْ يَغْلِبْ فَسَوْفَ نُوتِيهِ أَجْراً عَظِيماٗۖ
और तुम्हें क्या हुआ है कि तुम ईश्वर की राह में नहीं लड़ते, और उन पुरुषों, स्त्रियों और बच्चों के लिए नहीं लड़ते जो दुर्बल बना दिए गए हैं, जो कहते हैं: “हमारे अभिभावक, हमें इस बस्ती से निकालिए जिसके निवासी अन्यायी हैं, और हमें अपनी ओर से एक आश्रयदाता दीजिए, और हमें अपनी ओर से एक सहायक दीजिए”?
وَمَا لَكُمْ لَا تُقَٰتِلُونَ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ وَالْمُسْتَضْعَفِينَ مِنَ اَ۬لرِّجَالِ وَالنِّسَآءِ وَالْوِلْدَٰنِ اِ۬لذِينَ يَقُولُونَ رَبَّنَآ أَخْرِجْنَا مِنْ هَٰذِهِ اِ۬لْقَرْيَةِ اِ۬لظَّالِمِ أَهْلُهَا وَاجْعَل لَّنَا مِن لَّدُنكَ وَلِيّاٗ وَاجْعَل لَّنَا مِن لَّدُنكَ نَصِيراًۖ
जिन्होंने विश्वास किया वे ईश्वर की राह में लड़ते हैं,
اِ۬لذِينَ ءَامَنُواْ يُقَٰتِلُونَ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِۖ
और नकारने वाले मर्यादाहीन की राह में लड़ते हैं।
وَالذِينَ كَفَرُواْ يُقَٰتِلُونَ فِے سَبِيلِ اِ۬لطَّٰغُوتِۖ
तो बहकाने वाले के हिमायतियों से लड़ो,
فَقَٰتِلُوٓاْ أَوْلِيَآءَ اَ۬لشَّيْطَٰنِۖ
क्योंकि बहकाने वाले की चाल दुर्बल है।
إِنَّ كَيْدَ اَ۬لشَّيْطَٰنِ كَانَ ضَعِيفاًۖ
क्या तुमने उन्हें नहीं देखा जिनसे कहा गया था: “अपने हाथ रोके रखो, संपर्क बनाए रखो और शुद्ध उदारता दो”?
اَلَمْ تَرَ إِلَى اَ۬لذِينَ قِيلَ لَهُمْ كُفُّوٓاْ أَيْدِيَكُمْ وَأَقِيمُواْ اَ۬لصَّلَوٰةَ وَءَاتُواْ اُ۬لزَّكَوٰةَۖ
फिर जब उन पर लड़ाई विहित की गई, तो देखो, उनमें से एक भाग लोगों से ऐसे भय खाने लगा जैसे ईश्वर से भय खाया जाता है, या उससे भी अधिक तीव्र भय से,
فَلَمَّا كُتِبَ عَلَيْهِمُ اُ۬لْقِتَالُ إِذَا فَرِيقٞ مِّنْهُمْ يَخْشَوْنَ اَ۬لنَّاسَ كَخَشْيَةِ اِ۬للَّهِ أَوَ اَشَدَّ خَشْيَةٗۖ
और वे कहते हैं: “हमारे अभिभावक, आपने हम पर लड़ाई क्यों विहित की? आपने हमें किसी निकट अवधि तक टाल क्यों न दिया!”
وَقَالُواْ رَبَّنَا لِمَ كَتَبْتَ عَلَيْنَا اَ۬لْقِتَالَ لَوْلَآ أَخَّرْتَنَآ إِلَىٰٓ أَجَلٖ قَرِيبٖۖ
कहो: “इहलोक का उपभोग थोड़ा है,
قُلْ مَتَٰعُ اُ۬لدُّنْي۪ا قَلِيلٞۖ
और अंतिम जीवन उसके लिए बेहतर है जो सावधान रहता है,
وَالَاخِرَةُ خَيْرٞ لِّمَنِ اِ۪تَّق۪ىٰۖ
और तुम पर अन्याय नहीं किया जाएगा, रेशे भर भी।”
وَلَا تُظْلَمُونَ فَتِيلاًۖ
तुम जहाँ कहीं भी हो, मृत्यु तुम्हें आ पकड़ेगी, चाहे तुम दुर्गम बुर्जों में हो।
اَيْنَمَا تَكُونُواْ يُدْرِككُّمُ اُ۬لْمَوْتُ وَلَوْ كُنتُمْ فِے بُرُوجٖ مُّشَيَّدَةٖۖ
और यदि उन्हें कोई भलाई पहुँचती है, तो वे कहते हैं: “यह ईश्वर की ओर से है”;
وَإِن تُصِبْهُمْ حَسَنَةٞ يَقُولُواْ هَٰذِهِۦ مِنْ عِندِ اِ۬للَّهِۖ
और यदि उन्हें कोई बुराई पहुँचती है, तो वे कहते हैं: “यह तुम्हारी ओर से है।”
وَإِن تُصِبْهُمْ سَيِّئَةٞ يَقُولُواْ هَٰذِهِۦ مِنْ عِندِكَۖ
कहो: “सब कुछ ईश्वर की ओर से है।”
قُلْ كُلّٞ مِّنْ عِندِ اِ۬للَّهِۖ
इस क़ौम को क्या हो गया है कि लगभग कोई वार्ता नहीं समझती?
فَمَالِ هَٰٓؤُلَآءِ اِ۬لْقَوْمِ لَا يَكَادُونَ يَفْقَهُونَ حَدِيثاٗۖ
तुम्हें जो भलाई पहुँचती है वह ईश्वर की ओर से है,
۞ مَّآ أَصَابَكَ مِنْ حَسَنَةٖ فَمِنَ اَ۬للَّهِۖ
और तुम्हें जो बुराई पहुँचती है वह स्वयं तुमसे है।
وَمَآ أَصَابَكَ مِن سَيِّئَةٖ فَمِن نَّفْسِكَۖ
और हमने तुम्हें लोगों के लिए संदेशवाहक के रूप में भेजा है।
وَأَرْسَلْنَٰكَ لِلنَّاسِ رَسُولاٗۖ
और ईश्वर साक्षी के रूप में पर्याप्त है।
وَكَف۪ىٰ بِاللَّهِ شَهِيداٗۖ
जो संदेशवाहक की बात मानता है, वह ईश्वर की बात मानता है,
مَّنْ يُّطِعِ اِ۬لرَّسُولَ فَقَدَ اَطَاعَ اَ۬للَّهَۖ
और जो पीठ फेर ले — हमने तुम्हें उन पर रक्षक बनाकर नहीं भेजा।
وَمَن تَوَلّ۪ىٰ فَمَآ أَرْسَلْنَٰكَ عَلَيْهِمْ حَفِيظاٗۖ
और वे कहते हैं: “बात मानना”,
وَيَقُولُونَ طَاعَةٞۖ
परंतु जब वे तुम्हारे यहाँ से निकलते हैं, तो उनमें से एक गुट रात में उससे बिलकुल भिन्न बात की योजना बनाता है जो वे कहते हैं।
فَإِذَا بَرَزُواْ مِنْ عِندِكَ بَيَّتَ طَآئِفَةٞ مِّنْهُمْ غَيْرَ اَ۬لذِے تَقُولُۖ
ईश्वर लिख लेता है जिसकी वे रात में योजना बनाते हैं।
وَاللَّهُ يَكْتُبُ مَا يُبَيِّتُونَۖ
अतः उनसे कतराओ, और ईश्वर को मुख़्तार बनाओ।
فَأَعْرِضْ عَنْهُمْ وَتَوَكَّلْ عَلَى اَ۬للَّهِۖ
और ईश्वर मुख़्तार के रूप में पर्याप्त है।
وَكَف۪ىٰ بِاللَّهِ وَكِيلاًۖ
क्या वे पाठ पर मनन नहीं करते?
اَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ اَ۬لْقُرْءَانَۖ
और यदि वह ईश्वर के अतिरिक्त किसी और की ओर से होता, तो वे उसमें बहुत विसंगति पाते।
وَلَوْ كَانَ مِنْ عِندِ غَيْرِ اِ۬للَّهِ لَوَجَدُواْ فِيهِ اِ۪خْتِلَٰفاٗ كَثِيراٗۖ
और जब उनके पास कोई आश्वस्त करने वाली या डरावनी ख़बर आती है, तो वे उसे फैला देते हैं;
وَإِذَا جَآءَهُمُۥٓ أَمْرٞ مِّنَ اَ۬لَامْنِ أَوِ اِ۬لْخَوْفِ أَذَاعُواْ بِهِۦۖ
परंतु यदि वे उसे संदेशवाहक की ओर और अपने में से उनकी ओर वापस ले जाते जिनके हाथ में आदेश है, तो उनमें से जो उसका सार निकालना चाहते हैं, वे उसे जान लेते।
وَلَوْ رَدُّوهُ إِلَى اَ۬لرَّسُولِ وَإِلَىٰٓ أُوْلِے اِ۬لَامْرِ مِنْهُمْ لَعَلِمَهُ اُ۬لذِينَ يَسْتَنۢبِطُونَهُۥ مِنْهُمْۖ
और यदि तुम पर ईश्वर का अनुग्रह और उसकी दया न होती, तो तुम बहकाने वाले का ज़रूर अनुसरण करते, सिवा तुममें से थोड़े के।
وَلَوْلَا فَضْلُ اُ۬للَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُۥ لَاتَّبَعْتُمُ اُ۬لشَّيْطَٰنَ إِلَّا قَلِيلاٗۖ
अतः ईश्वर की राह में लड़ो:
فَقَٰتِلْ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِۖ
तुम्हें केवल स्वयं का दायित्व सौंपा गया है।
لَا تُكَلَّفُ إِلَّا نَفْسَكَۖ
और विश्वास करने वालों को प्रेरणा दो।
وَحَرِّضِ اِ۬لْمُومِنِينَۖ
संभव है कि ईश्वर नकारने वालों की प्रचंडता रोक दे।
عَسَى اَ۬للَّهُ أَنْ يَّكُفَّ بَأْسَ اَ۬لذِينَ كَفَرُواْۖ
ईश्वर कठोरता में अधिक भयंकर है, और रोकथाम के उदाहरण में अधिक भयंकर।
وَاللَّهُ أَشَدُّ بَأْساٗ وَأَشَدُّ تَنكِيلاٗۖ
जो कोई सुंदर सिफ़ारिश करता है, उसे उसका एक भाग मिलेगा;
مَّنْ يَّشْفَعْ شَفَٰعَةً حَسَنَةٗ يَكُن لَّهُۥ نَصِيبٞ مِّنْهَاۖ
और जो कोई बुरी सिफ़ारिश करता है, वह उसका उत्तरदायित्व उठाएगा।
وَمَنْ يَّشْفَعْ شَفَٰعَةٗ سَيِّئَةٗ يَكُن لَّهُۥ كِفْلٞ مِّنْهَاۖ
ईश्वर हर चीज़ पर प्रबंधक है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَےْءٖ مُّقِيتاٗۖ
और जब कोई तुम्हारा अभिवादन करे, तो उससे सुंदर अभिवादन करो, या उसे वापस करो,
وَإِذَا حُيِّيتُم بِتَحِيَّةٖ فَحَيُّواْ بِأَحْسَنَ مِنْهَآ أَوْ رُدُّوهَآۖ
क्योंकि ईश्वर हर चीज़ का हिसाब रखने वाला है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ عَلَىٰ كُلِّ شَےْءٍ حَسِيباًۖ
ईश्वर, उसके सिवा कोई देवता नहीं।
۞ اِ۬للَّهُ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ
वह तुम्हें अवश्य पेशी के दिन एकत्र करेगा, जिसमें कोई संदेह नहीं।
لَيَجْمَعَنَّكُمُۥٓ إِلَىٰ يَوْمِ اِ۬لْقِيَٰمَةِ لَا رَيْبَ فِيهِۖ
और वार्ता में ईश्वर से अधिक सच्चा कौन है?
وَمَنَ اَصْدَقُ مِنَ اَ۬للَّهِ حَدِيثاٗۖ
तुम्हें क्या हो गया है कि पाखंडियों के विषय में तुम दो टोलियाँ बन गए हो, जबकि ईश्वर ने उन्हें उसके कारण पलट दिया जो उन्होंने कमाया?
فَمَا لَكُمْ فِے اِ۬لْمُنَٰفِقِينَ فِئَتَيْنِ وَاللَّهُ أَرْكَسَهُم بِمَا كَسَبُوٓاْۖ
क्या तुम उसे मार्ग दिखाना चाहते हो जिसे ईश्वर ने भटका दिया है?
أَتُرِيدُونَ أَن تَهْدُواْ مَنَ اَضَلَّ اَ۬للَّهُۖ
और जिसे ईश्वर भटका दे, तुम उसके लिए कोई राह नहीं पाओगे।
وَمَنْ يُّضْلِلِ اِ۬للَّهُ فَلَن تَجِدَ لَهُۥ سَبِيلاٗۖ
वे चाहते हैं कि तुम भी नकारो जैसे उन्होंने नकारा, ताकि तुम समान हो जाओ;
وَدُّواْ لَوْ تَكْفُرُونَ كَمَا كَفَرُواْ فَتَكُونُونَ سَوَآءٗۖ
अतः उनमें से किसी को हिमायती मत बनाओ, जब तक वे ईश्वर की राह में प्रवास न करें।
فَلَا تَتَّخِذُواْ مِنْهُمُۥٓ أَوْلِيَآءَ حَتَّىٰ يُهَاجِرُواْ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِۖ
यदि वे पीठ फेर लें, तो उन्हें पकड़ो और जहाँ कहीं पाओ मार डालो, और उनमें से न किसी को हिमायती बनाओ और न सहायक — सिवा उनके जो ऐसी क़ौम से जुड़े हैं जिसके और तुम्हारे बीच गंभीर प्रतिज्ञा है, या जो तुम्हारे पास आते हैं
فَإِن تَوَلَّوْاْ فَخُذُوهُمْ وَاقْتُلُوهُمْ حَيْثُ وَجَدتُّمُوهُمْ وَلَا تَتَّخِذُواْ مِنْهُمْ وَلِيّاٗ وَلَا نَصِيراً اِلَّا اَ۬لذِينَ يَصِلُونَ إِلَىٰ قَوْمِۢ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُم مِّيثَٰقٌ اَوْ جَآءُوكُمْۖ
सीना तंग किए हुए, तुमसे लड़ने या अपनी ही क़ौम से लड़ने के विचार से।
حَصِرَتْ صُدُورُهُمُۥٓ أَنْ يُّقَٰتِلُوكُمُۥٓ أَوْ يُقَٰتِلُواْ قَوْمَهُمْۖ
और यदि ईश्वर की मर्ज़ी होती, तो वह उन्हें तुम पर वर्चस्व दे देता, और वे तुमसे लड़ते।
وَلَوْ شَآءَ اَ۬للَّهُ لَسَلَّطَهُمْ عَلَيْكُمْ فَلَقَٰتَلُوكُمْۖ
यदि वे तुमसे अलग रहें, तुमसे न लड़ें, और तुम्हारे सामने शांति प्रस्तुत करें, तो ईश्वर तुम्हें उनके विरुद्ध कोई राह नहीं देता।
فَإِنِ اِ۪عْتَزَلُوكُمْ فَلَمْ يُقَٰتِلُوكُمْ وَأَلْقَوِاْ اِلَيْكُمُ اُ۬لسَّلَمَ فَمَا جَعَلَ اَ۬للَّهُ لَكُمْ عَلَيْهِمْ سَبِيلاٗۖ
तुम कुछ और पाओगे जो तुम्हारे साथ भी निश्चिंत रहना चाहते हैं और अपनी क़ौम के साथ भी निश्चिंत; जब-जब उन्हें परीक्षा की ओर वापस लाया जाता है, वे उसमें फिर डूब जाते हैं।
سَتَجِدُونَ ءَاخَرِينَ يُرِيدُونَ أَنْ يَّامَنُوكُمْ وَيَامَنُواْ قَوْمَهُمْ كُلَّ مَا رُدُّوٓاْ إِلَى اَ۬لْفِتْنَةِ أُرْكِسُواْ فِيهَاۖ
यदि वे तुमसे अलग न रहें, तुम्हारे सामने शांति प्रस्तुत न करें, और अपने हाथ न रोकें, तो उन्हें पकड़ो और जहाँ कहीं उन पर आ पड़ो मार डालो।
فَإِن لَّمْ يَعْتَزِلُوكُمْ وَيُلْقُوٓاْ إِلَيْكُمُ اُ۬لسَّلَمَ وَيَكُفُّوٓاْ أَيْدِيَهُمْ فَخُذُوهُمْ وَاقْتُلُوهُمْ حَيْثُ ثَقِفْتُمُوهُمْۖ
और यही वे हैं जिनके विरुद्ध हमने तुम्हारे लिए स्पष्ट अधिकार ठहराया है।
وَأُوْلَٰٓئِكُمْ جَعَلْنَا لَكُمْ عَلَيْهِمْ سُلْطَٰناٗ مُّبِيناٗۖ
और किसी विश्वास करने वाले के लिए उचित नहीं कि वह किसी विश्वास करने वाले को मार डाले,
وَمَا كَانَ لِمُومِنٍ اَنْ يَّقْتُلَ مُومِناًۖ
सिवा भूल के।
اِلَّا خَطَـٔاٗۖ
और जो कोई किसी विश्वास करने वाले को भूल से मार डाले, उस पर है ऋण में बँधे एक विश्वास करने वाले व्यक्ति को स्वतंत्र करना, तथा उसके परिवार को दी गई क्षतिपूर्ति, सिवा इसके कि वह दानस्वरूप उसे छोड़ दे।
وَمَن قَتَلَ مُومِناً خَطَـٔاٗ فَتَحْرِيرُ رَقَبَةٖ مُّومِنَةٖ وَدِيَةٞ مُّسَلَّمَةٌ اِلَىٰٓ أَهْلِهِۦٓ إِلَّآ أَنْ يَّصَّدَّقُواْۖ
और यदि मारा गया व्यक्ति तुम्हारे लिए शत्रु क़ौम से हो, जबकि वह विश्वास करने वाला था, तो ऋण में बँधे एक विश्वास करने वाले व्यक्ति को स्वतंत्र करना।
فَإِن كَانَ مِن قَوْمٍ عَدُوّٖ لَّكُمْ وَهُوَ مُومِنٞ فَتَحْرِيرُ رَقَبَةٖ مُّومِنَةٖۖ
और यदि वह ऐसी क़ौम से हो जिसके और तुम्हारे बीच गंभीर प्रतिज्ञा है, तो उसके परिवार को दी गई क्षतिपूर्ति, और ऋण में बँधे एक विश्वास करने वाले व्यक्ति को स्वतंत्र करना।
وَإِن كَانَ مِن قَوْمِۢ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُم مِّيثَٰقٞ فَدِيَةٞ مُّسَلَّمَةٌ اِلَىٰٓ أَهْلِهِۦ وَتَحْرِيرُ رَقَبَةٖ مُّومِنَةٖۖ
और जो कोई इसके साधन न पाए, तो लगातार दो महीने का संयम, ईश्वर की ओर से पश्चात्ताप के रूप में।
۞ فَمَن لَّمْ يَجِدْ فَصِيَامُ شَهْرَيْنِ مُتَتَابِعَيْنِ تَوْبَةٗ مِّنَ اَ۬للَّهِۖ
ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ عَلِيماً حَكِيماٗۖ
और जो कोई किसी विश्वास करने वाले को जान-बूझकर मार डाले, उसका प्रतिफल जहन्नम है, जहाँ वह सदा रहेगा; ईश्वर उस पर क्रोधित हुआ, उसने उसे धिक्कारा, और उसके लिए एक विशाल दंड तैयार किया।
وَمَنْ يَّقْتُلْ مُومِناٗ مُّتَعَمِّداٗ فَجَزَآؤُهُۥ جَهَنَّمُ خَٰلِداٗ فِيهَا وَغَضِبَ اَ۬للَّهُ عَلَيْهِ وَلَعَنَهُۥ وَأَعَدَّ لَهُۥ عَذَاباً عَظِيماٗۖ
हे विश्वास करने वालो! जब तुम ईश्वर की राह में विचरण करो, तो स्पष्टता से भेद करो,
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِذَا ضَرَبْتُمْ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ فَتَبَيَّنُواْۖ
और जो तुम्हारे सामने शांति प्रस्तुत करे उससे मत कहो: “तुम विश्वास करने वाले नहीं हो”, इहलोक के जीवन की क्षणभंगुर संपदा की खोज में; जबकि ईश्वर के पास प्रचुर लूट-सामग्री है।
وَلَا تَقُولُواْ لِمَنَ اَلْق۪ىٰٓ إِلَيْكُمُ اُ۬لسَّلَمَ لَسْتَ مُومِناٗ تَبْتَغُونَ عَرَضَ اَ۬لْحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنْي۪ا فَعِندَ اَ۬للَّهِ مَغَانِمُ كَثِيرَةٞۖ
पहले तुम भी ऐसे ही थे, और ईश्वर ने तुम पर कृपा की।
كَذَٰلِكَ كُنتُم مِّن قَبْلُ فَمَنَّ اَ۬للَّهُ عَلَيْكُمْۖ
अतः स्पष्टता से भेद करो,
فَتَبَيَّنُوٓاْۖ
क्योंकि ईश्वर तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيراٗۖ
विश्वास करने वालों में से जो बैठे रहते हैं, अपंगों को छोड़कर, और जो ईश्वर की राह में अपनी संपत्ति और अपने स्व से संघर्ष करते हैं, वे समान नहीं हैं।
لَّا يَسْتَوِے اِ۬لْقَٰعِدُونَ مِنَ اَ۬لْمُومِنِينَ غَيْرَ أُوْلِے اِ۬لضَّرَرِ وَالْمُجَٰهِدُونَ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ بِأَمْوَٰلِهِمْ وَأَنفُسِهِمْۖ
ईश्वर ने अपनी संपत्ति और अपने स्व से संघर्ष करने वालों को बैठे रहने वालों पर एक श्रेणी की वरीयता दी है।
فَضَّلَ اَ۬للَّهُ اُ۬لْمُجَٰهِدِينَ بِأَمْوَٰلِهِمْ وَأَنفُسِهِمْ عَلَى اَ۬لْقَٰعِدِينَ دَرَجَةٗۖ
और सभी से ईश्वर ने सबसे सुंदर का वादा किया है;
وَكُلّاٗ وَعَدَ اَ۬للَّهُ اُ۬لْحُسْن۪ىٰۖ
और ईश्वर ने संघर्ष करने वालों को बैठे रहने वालों पर एक विशाल पुरस्कार के साथ वरीयता दी है — अपनी ओर से श्रेणियाँ, एक क्षमा, और एक दया;
وَفَضَّلَ اَ۬للَّهُ اُ۬لْمُجَٰهِدِينَ عَلَى اَ۬لْقَٰعِدِينَ أَجْراً عَظِيماٗ دَرَجَٰتٖ مِّنْهُ وَمَغْفِرَةٗ وَرَحْمَةٗۖ
और ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ غَفُوراٗ رَّحِيماًۖ
निश्चय ही, जिन्हें अभिकर्ता निष्ठा से सँभाल लेते हैं, जबकि वे अपने आप पर अन्याय करने वाले थे — वे कहते हैं: “तुम किस स्थिति में थे?”
اِنَّ اَ۬لذِينَ تَوَفّ۪يٰهُمُ اُ۬لْمَلَٰٓئِكَةُ ظَالِمِےٓ أَنفُسِهِمْ قَالُواْ فِيمَ كُنتُمْۖ
वे कहते हैं: “हम धरती पर दुर्बल बना दिए गए थे।”
قَالُواْ كُنَّا مُسْتَضْعَفِينَ فِے اِ۬لَارْضِۖ
वे कहते हैं: “क्या ईश्वर की धरती इतनी विस्तृत नहीं थी कि तुम उसमें प्रवास करते?”
قَالُوٓاْ أَلَمْ تَكُنَ اَرْضُ اُ۬للَّهِ وَٰسِعَةٗ فَتُهَاجِرُواْ فِيهَاۖ
ये वे हैं जिनकी शरण जहन्नम होगी; और कितना बुरा गंतव्य! — सिवा उन पुरुषों, स्त्रियों और बच्चों के जो दुर्बल बना दिए गए हैं, जो कोई उपाय नहीं पा सकते, और न किसी राह का मार्गदर्शन पा सकते हैं।
فَأُوْلَٰٓئِكَ مَأْو۪يٰهُمْ جَهَنَّمُ وَسَآءَتْ مَصِيراً اِلَّا اَ۬لْمُسْتَضْعَفِينَ مِنَ اَ۬لرِّجَالِ وَالنِّسَآءِ وَالْوِلْدَٰنِ لَا يَسْتَطِيعُونَ حِيلَةٗ وَلَا يَهْتَدُونَ سَبِيلاٗۖ
यही वे हैं जिनसे, संभव है, ईश्वर दरगुज़र करे।
فَأُوْلَٰٓئِكَ عَسَى اَ۬للَّهُ أَنْ يَّعْفُوَ عَنْهُمْۖ
ईश्वर निरंतर दरगुज़र करने वाला, अत्यंत क्षमाशील है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ عَفُوّاً غَفُوراٗۖ
और जो कोई ईश्वर की राह में प्रवास करता है, वह धरती पर प्रचुर शरण और सुविधा पाएगा।
۞ وَمَنْ يُّهَاجِرْ فِے سَبِيلِ اِ۬للَّهِ يَجِدْ فِے اِ۬لَارْضِ مُرَٰغَماٗ كَثِيراٗ وَسَعَةٗۖ
और जो कोई अपने घर से निकले, ईश्वर और उसके संदेशवाहक की ओर प्रवास करते हुए, फिर मृत्यु उसे आ पकड़े, तो उसका पुरस्कार अब ईश्वर पर है।
وَمَنْ يَّخْرُجْ مِنۢ بَيْتِهِۦ مُهَاجِراً اِلَى اَ۬للَّهِ وَرَسُولِهِۦ ثُمَّ يُدْرِكْهُ اُ۬لْمَوْتُ فَقَدْ وَقَعَ أَجْرُهُۥ عَلَى اَ۬للَّهِۖ
और ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ غَفُوراٗ رَّحِيماٗۖ
और जब तुम धरती पर विचरण करो, तो संपर्क को छोटा करने में तुम पर कोई आक्षेप नहीं, यदि तुम्हें डर हो कि नकारने वाले तुम्हें परीक्षा में डालेंगे;
وَإِذَا ضَرَبْتُمْ فِے اِ۬لَارْضِ فَلَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ اَن تَقْصُرُواْ مِنَ اَ۬لصَّلَوٰةِ إِنْ خِفْتُمُۥٓ أَنْ يَّفْتِنَكُمُ اُ۬لذِينَ كَفَرُوٓاْۖ
क्योंकि नकारने वाले तुम्हारे लिए स्पष्ट शत्रु हैं।
إِنَّ اَ۬لْكٰ۪فِرِينَ كَانُواْ لَكُمْ عَدُوّاٗ مُّبِيناٗۖ
और जब तुम उनके बीच हो, और उनके लिए संपर्क का नेतृत्व करो, तो उनमें से एक गुट तुम्हारे साथ खड़ा हो, और वे अपने हथियार ले लें।
وَإِذَا كُنتَ فِيهِمْ فَأَقَمْتَ لَهُمُ اُ۬لصَّلَوٰةَ فَلْتَقُمْ طَآئِفَةٞ مِّنْهُم مَّعَكَ وَلْيَاخُذُوٓاْ أَسْلِحَتَهُمْۖ
फिर जब वे माथा टेक चुकें, तो वे तुम्हारे पीछे चले जाएँ,
فَإِذَا سَجَدُواْ فَلْيَكُونُواْ مِنْ وَّرَآئِكُمْۖ
और दूसरा गुट, जिसने अभी संपर्क नहीं जोड़ा है, आए और तुम्हारे साथ संपर्क जोड़े, अपने बचाव के प्रबंध और अपने हथियार लेकर।
وَلْتَاتِ طَآئِفَةٌ ا۟خْر۪ىٰ لَمْ يُصَلُّواْ فَلْيُصَلُّواْ مَعَكَ وَلْيَاخُذُواْ حِذْرَهُمْ وَأَسْلِحَتَهُمْۖ
नकारने वाले चाहते हैं कि तुम अपने हथियारों और अपने सामान की उपेक्षा करो, ताकि वे एक ही बार में तुम पर टूट पड़ें।
وَدَّ اَ۬لذِينَ كَفَرُواْ لَوْ تَغْفُلُونَ عَنَ اَسْلِحَتِكُمْ وَأَمْتِعَتِكُمْ فَيَمِيلُونَ عَلَيْكُم مَّيْلَةٗ وَٰحِدَةٗۖ
और यदि वर्षा से तुम्हें कष्ट हो या तुम बीमार हो, तो अपने हथियार रख देने में तुम पर कोई आक्षेप नहीं;
وَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمُۥٓ إِن كَانَ بِكُمُۥٓ أَذىٗ مِّن مَّطَرٍ اَوْ كُنتُم مَّرْض۪ىٰٓ أَن تَضَعُوٓاْ أَسْلِحَتَكُمْۖ
परंतु अपने बचाव का प्रबंध करो,
وَخُذُواْ حِذْرَكُمُۥٓۖ
क्योंकि ईश्वर ने नकारने वालों के लिए अपमानजनक दंड तैयार किया है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ أَعَدَّ لِلْكٰ۪فِرِينَ عَذَاباٗ مُّهِيناٗۖ
और जब तुम संपर्क पूरा कर लो, तो ईश्वर का स्मरण करो, खड़े, बैठे, या करवट के बल लेटे हुए।
فَإِذَا قَضَيْتُمُ اُ۬لصَّلَوٰةَ فَاذْكُرُواْ اُ۬للَّهَ قِيَٰماٗ وَقُعُوداٗ وَعَلَىٰ جُنُوبِكُمْۖ
फिर जब तुम चैन में आ जाओ, तो संपर्क बनाए रखो,
فَإِذَا اَ۪طْمَأْنَنتُمْ فَأَقِيمُواْ اُ۬لصَّلَوٰةَۖ
क्योंकि संपर्क विश्वास करने वालों के लिए निश्चित समयों वाली एक अनिवार्यता है।
إِنَّ اَ۬لصَّلَوٰةَ كَانَتْ عَلَى اَ۬لْمُومِنِينَ كِتَٰباٗ مَّوْقُوتاٗۖ
और उस क़ौम की खोज में ढीले मत पड़ो।
وَلَا تَهِنُواْ فِے اِ۪بْتِغَآءِ اِ۬لْقَوْمِۖ
यदि तुम पीड़ा सहते हो, तो वे भी निश्चय ही वैसे ही पीड़ा सहते हैं जैसे तुम सहते हो; परंतु तुम ईश्वर से वह आशा रखते हो जो वे नहीं रखते।
إِن تَكُونُواْ تَالَمُونَ فَإِنَّهُمْ يَالَمُونَ كَمَا تَالَمُونَ وَتَرْجُونَ مِنَ اَ۬للَّهِ مَا لَا يَرْجُونَۖ
ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ عَلِيماً حَكِيماًۖ
हमने तुम्हारी ओर ग्रंथ पूर्ण सत्य के साथ उतारा, ताकि तुम लोगों के बीच उसके अनुसार निर्णय करो जो ईश्वर ने तुम्हें दिखाया है।
۞ اِنَّآ أَنزَلْنَآ إِلَيْكَ اَ۬لْكِتَٰبَ بِالْحَقِّ لِتَحْكُمَ بَيْنَ اَ۬لنَّاسِ بِمَآ أَر۪يٰكَ اَ۬للَّهُۖ
और विश्वासघातियों के लिए झगड़ालू मत बनो।
وَلَا تَكُن لِّلْخَآئِنِينَ خَصِيماٗۖ
और ईश्वर से क्षमा माँगो,
وَاسْتَغْفِرِ اِ۬للَّهَۖ
क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ غَفُوراٗ رَّحِيماٗۖ
और उनके पक्ष में बहस मत करो जो अपने ही साथ विश्वासघात करते हैं,
وَلَا تُجَٰدِلْ عَنِ اِ۬لذِينَ يَخْتَانُونَ أَنفُسَهُمُۥٓۖ
क्योंकि ईश्वर बड़े विश्वासघाती, अपराधी से प्रेम नहीं करता।
إِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يُحِبُّ مَن كَانَ خَوَّاناً اَثِيماٗۖ
वे लोगों से छिपते हैं, और ईश्वर से नहीं छिपते, जबकि वह उनके साथ है जब वे रात में ऐसे कथनों की योजना बनाते हैं जिन्हें वह स्वीकार नहीं करता।
يَسْتَخْفُونَ مِنَ اَ۬لنَّاسِ وَلَا يَسْتَخْفُونَ مِنَ اَ۬للَّهِ وَهُوَ مَعَهُمُۥٓ إِذْ يُبَيِّتُونَ مَا لَا يَرْض۪ىٰ مِنَ اَ۬لْقَوْلِۖ
ईश्वर उसे पूरी तरह घेरे हुए है जो वे करते हैं।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ بِمَا يَعْمَلُونَ مُحِيطاًۖ
देखो, तुम ही हो जिन्होंने इहलोक के जीवन में उनके पक्ष में बहस की; परंतु पेशी के दिन उनके पक्ष में ईश्वर से कौन बहस करेगा? या उनके लिए कौन मुख़्तार होगा?
هَآنتُمْ هَٰٓؤُلَآءِ جَٰدَلْتُمْ عَنْهُمْ فِے اِ۬لْحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنْي۪ا فَمَنْ يُّجَٰدِلُ اُ۬للَّهَ عَنْهُمْ يَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِ أَم مَّنْ يَّكُونُ عَلَيْهِمْ وَكِيلاٗۖ
और जो कोई बुराई करे, या अपने ही स्व पर अन्याय करे, फिर ईश्वर से क्षमा माँगे, वह ईश्वर को अत्यंत क्षमाशील, दयालु पाएगा।
وَمَنْ يَّعْمَلْ سُوٓءاً اَوْ يَظْلِمْ نَفْسَهُۥ ثُمَّ يَسْتَغْفِرِ اِ۬للَّهَ يَجِدِ اِ۬للَّهَ غَفُوراٗ رَّحِيماٗۖ
और जो कोई अपराध कमाता है, वह उसे अपने ही स्व के विरुद्ध कमाता है।
وَمَنْ يَّكْسِبِ اِثْماٗ فَإِنَّمَا يَكْسِبُهُۥ عَلَىٰ نَفْسِهِۦۖ
ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ عَلِيماً حَكِيماٗۖ
और जो कोई भूल या अपराध कमाए, फिर उसका आरोप किसी ऐसे पर लगाए जो उससे बरी है, तो वह एक लांछन और स्पष्ट अपराध का बोझ वहन कर लेता है।
وَمَنْ يَّكْسِبْ خَطِيٓـَٔةً اَوِ اِثْماٗ ثُمَّ يَرْمِ بِهِۦ بَرِيٓـٔاٗ فَقَدِ اِ۪حْتَمَلَ بُهْتَٰناٗ وَإِثْماٗ مُّبِيناٗۖ
और यदि तुम पर ईश्वर का अनुग्रह और उसकी दया न होती, तो उनमें से एक गुट ने तुम्हें भटकाने का इरादा कर लिया होता;
وَلَوْلَا فَضْلُ اُ۬للَّهِ عَلَيْكَ وَرَحْمَتُهُۥ لَهَمَّت طَّآئِفَةٞ مِّنْهُمُۥٓ أَنْ يُّضِلُّوكَۖ
परंतु वे केवल अपने आप को भटकाते हैं, और तुम्हें किसी बात में हानि नहीं पहुँचा सकते।
وَمَا يُضِلُّونَ إِلَّآ أَنفُسَهُمْ وَمَا يَضُرُّونَكَ مِن شَےْءٖۖ
और ईश्वर ने तुम पर ग्रंथ और प्रज्ञा उतारे, और तुम्हें वह सिखाया जो तुम नहीं जानते थे।
وَأَنزَلَ اَ۬للَّهُ عَلَيْكَ اَ۬لْكِتَٰبَ وَالْحِكْمَةَ وَعَلَّمَكَ مَا لَمْ تَكُن تَعْلَمُۖ
तुम पर ईश्वर का अनुग्रह विशाल है।
وَكَانَ فَضْلُ اُ۬للَّهِ عَلَيْكَ عَظِيماٗۖ
उनके अधिकतर गुप्त परामर्शों में कोई अच्छाई नहीं, सिवा उसके जो दान का, या जो मान्य है उसका, या लोगों के बीच सुलह का आदेश देता है।
۞ لَّا خَيْرَ فِے كَثِيرٖ مِّن نَّجْو۪يٰهُمُۥٓ إِلَّا مَنَ اَمَرَ بِصَدَقَةٍ اَوْ مَعْرُوفٍ اَوِ اِصْلَٰحِۢ بَيْنَ اَ۬لنَّاسِۖ
और जो कोई ईश्वर की प्रसन्नता खोजते हुए यह करता है, हम उसे एक विशाल पुरस्कार देंगे।
وَمَنْ يَّفْعَلْ ذَٰلِكَ اَ۪بْتِغَآءَ مَرْضَاتِ اِ۬للَّهِ فَسَوْفَ نُوتِيهِ أَجْراً عَظِيماٗۖ
और जो कोई संदेशवाहक के विरोध में खड़ा हो, इसके बाद कि मार्गदर्शन उसके लिए स्पष्ट हो चुका, और विश्वास करने वालों की राह से भिन्न राह का अनुसरण करे, हम उसे उसी पर छोड़ देंगे जिस ओर वह मुड़ा, और उसे जहन्नम में जलाएँगे।
وَمَنْ يُّشَاقِقِ اِ۬لرَّسُولَ مِنۢ بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُ اُ۬لْهُد۪ىٰ وَيَتَّبِعْ غَيْرَ سَبِيلِ اِ۬لْمُومِنِينَ نُوَلِّهِۦ مَا تَوَلّ۪ىٰ وَنُصْلِهِۦ جَهَنَّمَۖ
और कितना बुरा गंतव्य!
وَسَآءَتْ مَصِيراًۖ
ईश्वर निश्चय ही यह क्षमा नहीं करता कि उसके साथ साझी ठहराया जाए,
اِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يَغْفِرُ أَنْ يُّشْرَكَ بِهِۦ
परंतु इससे कम जो है, उसे वह उसके लिए क्षमा कर देता है जिस पर उसकी मर्ज़ी हो।
وَيَغْفِرُ مَا دُونَ ذَٰلِكَ لِمَنْ يَّشَآءُۖ
और जो कोई ईश्वर के साथ साझी ठहराता है, वह दूर के भटकाव से भटक गया।
وَمَنْ يُّشْرِكْ بِاللَّهِ فَقَد ضَّلَّ ضَلَٰلاَۢ بَعِيداًۖ
वे उसके अतिरिक्त केवल मादाओं को पुकारते हैं, और केवल एक विद्रोही बहकाने वाले को पुकारते हैं, जिसे ईश्वर ने धिक्कारा है,
اِنْ يَّدْعُونَ مِن دُونِهِۦٓ إِلَّآ إِنَٰثاٗ وَإِنْ يَّدْعُونَ إِلَّا شَيْطَٰناٗ مَّرِيداٗ لَّعَنَهُ اُ۬للَّهُۖ
जिसने कहा: “मैं अवश्य आपके आज्ञाकारियों में से एक निर्धारित भाग लूँगा; मैं उन्हें अवश्य भटकाऊँगा, उन्हें अवश्य व्यर्थ आशाएँ दूँगा, उन्हें अवश्य आदेश दूँगा कि वे पशुधन के कान चीरें, और उन्हें अवश्य आदेश दूँगा कि वे ईश्वर की रचना को बिगाड़ें।”
وَقَالَ لَأَتَّخِذَنَّ مِنْ عِبَادِكَ نَصِيباٗ مَّفْرُوضاٗ وَلَأُضِلَّنَّهُمْ وَلَأُمَنِّيَنَّهُمْ وَلَأٓمُرَنَّهُمْ فَلَيُبَتِّكُنَّ ءَاذَانَ اَ۬لَانْعَٰمِ وَلَأٓمُرَنَّهُمْ فَلَيُغَيِّرُنَّ خَلْقَ اَ۬للَّهِۖ
और जो कोई ईश्वर के अतिरिक्त बहकाने वाले को हिमायती बनाता है, उसने स्पष्ट घाटा उठाया।
وَمَنْ يَّتَّخِذِ اِ۬لشَّيْطَٰنَ وَلِيّاٗ مِّن دُونِ اِ۬للَّهِ فَقَدْ خَسِرَ خُسْرَاناٗ مُّبِيناٗۖ
वह उनसे वादे करता है और उन्हें व्यर्थ आशाएँ देता है,
يَعِدُهُمْ وَيُمَنِّيهِمْۖ
और बहकाने वाला उनसे केवल छलावे का वादा करता है।
وَمَا يَعِدُهُمُ اُ۬لشَّيْطَٰنُ إِلَّا غُرُوراًۖ
ये वे हैं जिनकी शरण जहन्नम होगी,
ا۟وْلَٰٓئِكَ مَأْو۪يٰهُمْ جَهَنَّمُۖ
और वे वहाँ कोई छुटकारा नहीं पाएँगे।
وَلَا يَجِدُونَ عَنْهَا مَحِيصاٗۖ
और जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, हम उन्हें ऐसे उद्यानों में प्रवेश कराएँगे जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जहाँ वे सदा, चिरकाल तक रहेंगे।
وَالذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ سَنُدْخِلُهُمْ جَنَّٰتٖ تَجْرِے مِن تَحْتِهَا اَ۬لَانْهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَداٗۖ
ईश्वर का वादा, पूर्ण सत्य के साथ।
وَعْدَ اَ۬للَّهِ حَقّاٗۖ
और कथन में ईश्वर से अधिक सच्चा कौन है?
وَمَنَ اَصْدَقُ مِنَ اَ۬للَّهِ قِيلاٗۖ
यह न तुम्हारी इच्छाओं पर निर्भर है, न ग्रंथ वालों की इच्छाओं पर।
لَّيْسَ بِأَمَانِيِّكُمْ وَلَآ أَمَانِيِّ أَهْلِ اِ۬لْكِتَٰبِۖ
जो कोई बुराई करेगा वह उसका प्रतिफल पाएगा, और ईश्वर के अतिरिक्त न कोई आश्रयदाता पाएगा, न कोई सहायता।
مَنْ يَّعْمَلْ سُوٓءاٗ يُجْزَ بِهِۦ وَلَا يَجِدْ لَهُۥ مِن دُونِ اِ۬للَّهِ وَلِيّاٗ وَلَا نَصِيراٗۖ
और जो कोई भले कर्म करे, पुरुष हो या स्त्री, जबकि वह विश्वास करने वाला हो, वे उद्यान में प्रवेश कराए जाएँगे, और उन पर अन्याय नहीं किया जाएगा, खजूर की गुठली के खाँचे भर भी।
۞ وَمَنْ يَّعْمَلْ مِنَ اَ۬لصَّٰلِحَٰتِ مِن ذَكَرٍ اَوُ ا۟نث۪ىٰ وَهُوَ مُومِنٞ فَأُوْلَٰٓئِكَ يَدْخُلُونَ اَ۬لْجَنَّةَ وَلَا يُظْلَمُونَ نَقِيراٗۖ
और उससे सुंदर विधान किसका है, जिसने ईश्वर के प्रति अपनी दिशा खरी कर दी, भलाई करते हुए, और पूरी तरह ईश्वर की ओर मुड़े हुए इब्राहीम के मत का अनुसरण किया?
وَمَنَ اَحْسَنُ دِيناٗ مِّمَّنَ اَسْلَمَ وَجْهَهُۥ لِلهِ وَهُوَ مُحْسِنٞ وَاتَّبَعَ مِلَّةَ إِبْرَٰهِيمَ حَنِيفاٗۖ
और ईश्वर ने इब्राहीम को घनिष्ठ मित्र बना लिया।
وَاتَّخَذَ اَ۬للَّهُ إِبْرَٰهِيمَ خَلِيلاٗۖ
और ईश्वर का है जो आकाशों में है और जो धरती पर है।
وَلِلهِ مَا فِے اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِے اِ۬لَارْضِۖ
ईश्वर हर चीज़ को पूरी तरह घेरे हुए है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ بِكُلِّ شَےْءٖ مُّحِيطاٗۖ
और वे तुमसे स्त्रियों के विषय में परामर्श माँगते हैं।
وَيَسْتَفْتُونَكَ فِے اِ۬لنِّسَآءِۖ
कहो: “ईश्वर तुम्हें उनके विषय में अपनी राय देता है, और वह भी जो ग्रंथ में तुम्हें उन अनाथ बालिकाओं के विषय में सुनाया जाता है जिन्हें तुम वह नहीं देते जो उनके लिए विहित है, जबकि उनसे विवाह करना चाहते हो, और दुर्बल बना दिए गए बच्चों के विषय में, और इस विषय में कि तुम अनाथों के साथ पूर्ण निष्पक्षता से व्यवहार करो।
قُلِ اِ۬للَّهُ يُفْتِيكُمْ فِيهِنَّ وَمَا يُتْل۪ىٰ عَلَيْكُمْ فِے اِ۬لْكِتَٰبِ فِے يَتَٰمَى اَ۬لنِّسَآءِ اِ۬لتِے لَا تُوتُونَهُنَّ مَا كُتِبَ لَهُنَّ وَتَرْغَبُونَ أَن تَنكِحُوهُنَّ وَالْمُسْتَضْعَفِينَ مِنَ اَ۬لْوِلْدَٰنِ وَأَن تَقُومُواْ لِلْيَتَٰم۪ىٰ بِالْقِسْطِۖ
और तुम जो भी अच्छाई करो, ईश्वर निश्चय ही उसके विषय में सर्वज्ञ है।”
وَمَا تَفْعَلُواْ مِنْ خَيْرٖ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ بِهِۦ عَلِيماٗۖ
और यदि कोई स्त्री अपने पति से स्थायी शत्रुता या कतराव का डर रखे, तो उन दोनों पर कोई आक्षेप नहीं कि वे किसी समझौते से सुलह कर लें;
وَإِنِ اِ۪مْرَأَةٌ خَافَتْ مِنۢ بَعْلِهَا نُشُوزاً اَوِ اِعْرَاضاٗ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَآ أَنْ يَّصَّٰلَحَا بَيْنَهُمَا صُلْحاٗۖ
और सुलह बेहतर है।
وَالصُّلْحُ خَيْرٞۖ
और लालच स्वों में सदा मौजूद रहता है;
وَأُحْضِرَتِ اِ۬لَانفُسُ اُ۬لشُّحَّۖ
परंतु यदि तुम भलाई करो और सावधान रहो, तो ईश्वर निश्चय ही तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।
وَإِن تُحْسِنُواْ وَتَتَّقُواْ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيراٗۖ
और तुम स्त्रियों के बीच कभी न्यायी नहीं हो सकोगे, चाहे तुम इसके लिए उत्सुक हो;
وَلَن تَسْتَطِيعُوٓاْ أَن تَعْدِلُواْ بَيْنَ اَ۬لنِّسَآءِ وَلَوْ حَرَصْتُمْۖ
अतः पूरी तरह मत झुक जाओ, कि दूसरी को लटकी हुई-सी छोड़ दो।
فَلَا تَمِيلُواْ كُلَّ اَ۬لْمَيْلِ فَتَذَرُوهَا كَالْمُعَلَّقَةِۖ
और यदि तुम सुलह कर लो और सावधान रहो, तो ईश्वर निश्चय ही अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
وَإِن تُصْلِحُواْ وَتَتَّقُواْ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ غَفُوراٗ رَّحِيماٗۖ
और यदि वे अलग हो जाएँ, तो ईश्वर अपने विस्तार से उनमें से प्रत्येक को धनी कर देगा।
۞ وَإِنْ يَّتَفَرَّقَا يُغْنِ اِ۬للَّهُ كُلّاٗ مِّن سَعَتِهِۦۖ
ईश्वर विस्तृत, प्रज्ञावान है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ وَٰسِعاً حَكِيماٗۖ
और ईश्वर का है जो आकाशों में है और जो धरती पर है।
وَلِلهِ مَا فِے اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِے اِ۬لَارْضِۖ
और हमने निश्चय ही उन्हें जिन्हें तुमसे पहले ग्रंथ दिया गया, और तुम्हें भी, अनुशंसा की है कि ईश्वर के प्रति सावधान रहो।
وَلَقَدْ وَصَّيْنَا اَ۬لذِينَ أُوتُواْ اُ۬لْكِتَٰبَ مِن قَبْلِكُمْ وَإِيَّاكُمُۥٓ أَنِ اِ۪تَّقُواْ اُ۬للَّهَۖ
और यदि तुम नकारो, तो जो आकाशों में है और जो धरती पर है वह निश्चय ही ईश्वर का है।
وَإِن تَكْفُرُواْ فَإِنَّ لِلهِ مَا فِے اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِے اِ۬لَارْضِۖ
ईश्वर धनी, प्रशंसनीय है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ غَنِيّاً حَمِيداٗۖ
और ईश्वर का है जो आकाशों में है और जो धरती पर है।
وَلِلهِ مَا فِے اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِے اِ۬لَارْضِۖ
और ईश्वर मुख़्तार के रूप में पर्याप्त है।
وَكَف۪ىٰ بِاللَّهِ وَكِيلاًۖ
हे लोगो, यदि उसकी मर्ज़ी हो, तो वह तुम्हें ले जाए और दूसरों को ले आए।
اِنْ يَّشَأْ يُذْهِبْكُمُۥٓ أَيُّهَا اَ۬لنَّاسُ وَيَاتِ بِـَٔاخَرِينَۖ
ईश्वर इसका सामर्थ्य रखता है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ عَلَىٰ ذَٰلِكَ قَدِيراٗۖ
जो कोई इहलोक का प्रतिदान चाहता है — ईश्वर के पास इहलोक का और अंतिम जीवन का प्रतिदान है।
مَّن كَانَ يُرِيدُ ثَوَابَ اَ۬لدُّنْي۪ا فَعِندَ اَ۬للَّهِ ثَوَابُ اُ۬لدُّنْي۪ا وَالَاخِرَةِۖ
ईश्वर सुनने वाला, दृष्टिवान है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ سَمِيعاَۢ بَصِيراٗۖ
हे विश्वास करने वालो! निष्पक्षता को दृढ़ता से बनाए रखने वालों में से बनो, ईश्वर के लिए साक्षी, चाहे अपने विरुद्ध हो, या अपने माता-पिता, या अपने निकटजनों के विरुद्ध।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ كُونُواْ قَوَّٰمِينَ بِالْقِسْطِ شُهَدَآءَ لِلهِ وَلَوْ عَلَىٰٓ أَنفُسِكُمُۥٓ أَوِ اِ۬لْوَٰلِدَيْنِ وَالَاقْرَبِينَۖ
चाहे वह धनी हो या निर्धन, ईश्वर उन दोनों के अधिक निकट है; अतः भावना का अनुसरण मत करो, कि तुम न्यायी न रह पाओ।
إِنْ يَّكُنْ غَنِيّاً اَوْ فَقِيراٗ فَاللَّهُ أَوْل۪ىٰ بِهِمَا فَلَا تَتَّبِعُواْ اُ۬لْهَو۪ىٰٓ أَن تَعْدِلُواْۖ
और यदि तुम टेढ़े चलो या कतराओ, तो ईश्वर निश्चय ही तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।
وَإِن تَلْوُۥٓاْ أَوْ تُعْرِضُواْ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيراٗۖ
हे विश्वास करने वालो! ईश्वर पर, उसके संदेशवाहक पर, उस ग्रंथ पर जो उसने अपने संदेशवाहक पर उतारा, और उस ग्रंथ पर जो उसने पहले उतारा, विश्वास करो।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُوٓاْ ءَامِنُواْ بِاللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَالْكِتَٰبِ اِ۬لذِے نَزَّلَ عَلَىٰ رَسُولِهِۦ وَالْكِتَٰبِ اِ۬لذِےٓ أَنزَلَ مِن قَبْلُۖ
और जो कोई ईश्वर, उसके अभिकर्ताओं, उसके ग्रंथों, उसके संदेशवाहकों और अंतिम दिन को नकारता है, वह दूर के भटकाव से भटक गया।
وَمَنْ يَّكْفُرْ بِاللَّهِ وَمَلَٰٓئِكَتِهِۦ وَكُتُبِهِۦ وَرُسُلِهِۦ وَالْيَوْمِ اِ۬لَاخِرِ فَقَد ضَّلَّ ضَلَٰلاَۢ بَعِيداًۖ
निश्चय ही, जिन्होंने विश्वास किया, फिर नकारा, फिर विश्वास किया, फिर नकारा, फिर नकार में बढ़ते गए — ईश्वर को शोभा नहीं देता कि वह उन्हें क्षमा करे, और न यह कि उन्हें किसी राह की ओर मार्ग दिखाए।
اِنَّ اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ ثُمَّ كَفَرُواْ ثُمَّ ءَامَنُواْ ثُمَّ كَفَرُواْ ثُمَّ اَ۪زْدَادُواْ كُفْراٗ لَّمْ يَكُنِ اِ۬للَّهُ لِيَغْفِرَ لَهُمْ وَلَا لِيَهْدِيَهُمْ سَبِيلاَۢۖ
पाखंडियों को शुभ समाचार दो कि उनके लिए पीड़ादायक दंड है — जो नकारने वालों को विश्वास करने वालों के अतिरिक्त हिमायती बनाते हैं।
بَشِّرِ اِ۬لْمُنَٰفِقِينَ بِأَنَّ لَهُمْ عَذَاباً اَلِيماً اِ۬لذِينَ يَتَّخِذُونَ اَ۬لْكٰ۪فِرِينَ أَوْلِيَآءَ مِن دُونِ اِ۬لْمُومِنِينَۖ
क्या वे उनके पास शक्ति खोजते हैं? शक्ति तो निश्चय ही पूरी की पूरी ईश्वर की है।
أَيَبْتَغُونَ عِندَهُمُ اُ۬لْعِزَّةَ فَإِنَّ اَ۬لْعِزَّةَ لِلهِ جَمِيعاٗۖ
और वह तुम पर ग्रंथ में पहले ही उतार चुका है: जब तुम सुनो कि ईश्वर के संकेतों को नकारा जा रहा है और उनका मज़ाक़ उड़ाया जा रहा है, तो उनके साथ मत बैठे रहो, जब तक वे किसी और वार्ता में डूब न जाएँ;
۞ وَقَدْ نُزِّلَ عَلَيْكُمْ فِے اِ۬لْكِتَٰبِ أَنِ اِذَا سَمِعْتُمُۥٓ ءَايَٰتِ اِ۬للَّهِ يُكْفَرُ بِهَا وَيُسْتَهْزَأُ بِهَا فَلَا تَقْعُدُواْ مَعَهُمْ حَتَّىٰ يَخُوضُواْ فِے حَدِيثٍ غَيْرِهِۦٓۖ
क्योंकि तब तुम भी उन्हीं जैसे होगे।
إِنَّكُمُۥٓ إِذاٗ مِّثْلُهُمُۥٓۖ
ईश्वर निश्चय ही पाखंडियों और नकारने वालों को, सबको एक साथ, जहन्नम में एकत्र करेगा — उन्हें जो तुम्हारे प्रति प्रतीक्षा में हैं: यदि ईश्वर की ओर से तुम्हारे लिए कोई खुलाव आए, तो वे कहते हैं: “क्या हम तुम्हारे साथ नहीं थे?” और यदि नकारने वालों को कोई भाग मिले, तो वे कहते हैं: “क्या हम तुम पर हावी नहीं हुए, और क्या हमने तुम्हें विश्वास करने वालों से छुड़ा नहीं लिया?”
إِنَّ اَ۬للَّهَ جَامِعُ اُ۬لْمُنَٰفِقِينَ وَالْكٰ۪فِرِينَ فِے جَهَنَّمَ جَمِيعاً اِ۬لذِينَ يَتَرَبَّصُونَ بِكُمْ فَإِن كَانَ لَكُمْ فَتْحٞ مِّنَ اَ۬للَّهِ قَالُوٓاْ أَلَمْ نَكُن مَّعَكُمْ وَإِن كَانَ لِلْكٰ۪فِرِينَ نَصِيبٞ قَالُوٓاْ أَلَمْ نَسْتَحْوِذْ عَلَيْكُمْ وَنَمْنَعْكُم مِّنَ اَ۬لْمُومِنِينَۖ
ईश्वर पेशी के दिन तुम्हारे बीच निर्णय करेगा;
فَاللَّهُ يَحْكُمُ بَيْنَكُمْ يَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِۖ
और ईश्वर नकारने वालों को विश्वास करने वालों पर कभी कोई राह नहीं देगा।
وَلَنْ يَّجْعَلَ اَ۬للَّهُ لِلْكٰ۪فِرِينَ عَلَى اَ۬لْمُومِنِينَ سَبِيلاًۖ
पाखंडी ईश्वर को धोखा देना चाहते हैं, और वही उन्हें धोखा देता है।
اِنَّ اَ۬لْمُنَٰفِقِينَ يُخَٰدِعُونَ اَ۬للَّهَ وَهُوَ خَٰدِعُهُمْۖ
और जब वे संपर्क के लिए खड़े होते हैं, तो आलस्य से खड़े होते हैं, लोगों के सामने दिखावा करते हुए, और ईश्वर का केवल थोड़ा स्मरण करते हैं, दोनों के बीच डोलते हुए, न इस ओर न उस ओर।
وَإِذَا قَامُوٓاْ إِلَى اَ۬لصَّلَوٰةِ قَامُواْ كُسَال۪ىٰ يُرَآءُونَ اَ۬لنَّاسَ وَلَا يَذْكُرُونَ اَ۬للَّهَ إِلَّا قَلِيلاٗ مُّذَبْذَبِينَ بَيْنَ ذَٰلِكَ لَآ إِلَىٰ هَٰٓؤُلَآءِ وَلَآ إِلَىٰ هَٰٓؤُلَآءِۖ
और जिसे ईश्वर भटका दे, तुम उसके लिए कोई राह नहीं पाओगे।
وَمَنْ يُّضْلِلِ اِ۬للَّهُ فَلَن تَجِدَ لَهُۥ سَبِيلاٗۖ
हे विश्वास करने वालो! नकारने वालों को विश्वास करने वालों के अतिरिक्त हिमायती मत बनाओ।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَتَّخِذُواْ اُ۬لْكٰ۪فِرِينَ أَوْلِيَآءَ مِن دُونِ اِ۬لْمُومِنِينَۖ
क्या तुम ईश्वर के लिए अपने विरुद्ध एक स्पष्ट अधिकार ठहराना चाहोगे?
أَتُرِيدُونَ أَن تَجْعَلُواْ لِلهِ عَلَيْكُمْ سُلْطَٰناٗ مُّبِيناًۖ
पाखंडी निश्चय ही आग की सबसे निचली तह में हैं, और तुम उनके लिए कभी कोई सहायता नहीं पाओगे —
اِنَّ اَ۬لْمُنَٰفِقِينَ فِے اِ۬لدَّرَكِ اِ۬لَاسْفَلِ مِنَ اَ۬لنّ۪ارِ وَلَن تَجِدَ لَهُمْ نَصِيراًۖ
सिवा उनके जो पलट आते हैं, स्वयं को सुधारते हैं, ईश्वर से दृढ़ता से जुड़ते हैं, और अपना विधान केवल ईश्वर के लिए खरा कर देते हैं: यही विश्वास करने वालों के साथ हैं,
اِلَّا اَ۬لذِينَ تَابُواْ وَأَصْلَحُواْ وَاعْتَصَمُواْ بِاللَّهِ وَأَخْلَصُواْ دِينَهُمْ لِلهِ فَأُوْلَٰٓئِكَ مَعَ اَ۬لْمُومِنِينَۖ
और ईश्वर शीघ्र ही विश्वास करने वालों को एक विशाल पुरस्कार देगा।
وَسَوْفَ يُوتِ اِ۬للَّهُ اُ۬لْمُومِنِينَ أَجْراً عَظِيماٗۖ
यदि तुम कृतज्ञ हो और विश्वास करने वाले हो, तो ईश्वर तुम्हारे दंड का क्या करेगा?
مَّا يَفْعَلُ اُ۬للَّهُ بِعَذَابِكُمُۥٓ إِن شَكَرْتُمْ وَءَامَنتُمْۖ
ईश्वर कृतज्ञ, सर्वज्ञ है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ شَاكِراً عَلِيماٗۖ
ईश्वर को यह प्रिय नहीं कि बुराई ऊँचे स्वर में कही जाए, सिवा उसके जिस पर अन्याय किया गया हो।
۞ لَّا يُحِبُّ اُ۬للَّهُ اُ۬لْجَهْرَ بِالسُّوٓءِ مِنَ اَ۬لْقَوْلِ إِلَّا مَن ظُلِمَۖ
ईश्वर सुनने वाला, सर्वज्ञ है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ سَمِيعاً عَلِيماًۖ
तुम अच्छाई सामने लाओ, या उसे छिपाओ, या किसी बुराई से दरगुज़र करो, ईश्वर निश्चय ही निरंतर दरगुज़र करने वाला, सामर्थ्यवान है।
اِن تُبْدُواْ خَيْراً اَوْ تُخْفُوهُ أَوْ تَعْفُواْ عَن سُوٓءٖ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ كَانَ عَفُوّاٗ قَدِيراًۖ
जो ईश्वर और उसके संदेशवाहकों को नकारते हैं, और ईश्वर को उसके संदेशवाहकों से अलग करना चाहते हैं, यह कहते हुए: “हम एक भाग पर विश्वास करते हैं और एक भाग को नकारते हैं”, और दोनों के बीच एक राह निकालना चाहते हैं — वही वास्तव में नकारने वाले हैं।
اِنَّ اَ۬لذِينَ يَكْفُرُونَ بِاللَّهِ وَرُسُلِهِۦ وَيُرِيدُونَ أَنْ يُّفَرِّقُواْ بَيْنَ اَ۬للَّهِ وَرُسُلِهِۦ وَيَقُولُونَ نُومِنُ بِبَعْضٖ وَنَكْفُرُ بِبَعْضٖ وَيُرِيدُونَ أَنْ يَّتَّخِذُواْ بَيْنَ ذَٰلِكَ سَبِيلاً ا۟وْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لْكَٰفِرُونَ حَقّاٗۖ
और हमने नकारने वालों के लिए अपमानजनक दंड जुटा रखा है।
وَأَعْتَدْنَا لِلْكٰ۪فِرِينَ عَذَاباٗ مُّهِيناٗۖ
और जिन्होंने ईश्वर और उसके संदेशवाहकों पर विश्वास किया, और उनके बीच कोई भेद नहीं किया, उन्हें वह शीघ्र ही उनके पुरस्कार देगा।
وَالذِينَ ءَامَنُواْ بِاللَّهِ وَرُسُلِهِۦ وَلَمْ يُفَرِّقُواْ بَيْنَ أَحَدٖ مِّنْهُمُۥٓ أُوْلَٰٓئِكَ سَوْفَ نُوتِيهِمُۥٓ أُجُورَهُمْۖ
और ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ غَفُوراٗ رَّحِيماٗۖ
ग्रंथ वाले तुमसे माँग करते हैं कि तुम उन पर आकाश से कोई ग्रंथ उतार दो।
يَسْـَٔلُكَ أَهْلُ اُ۬لْكِتَٰبِ أَن تُنَزِّلَ عَلَيْهِمْ كِتَٰباٗ مِّنَ اَ۬لسَّمَآءِۖ
उन्होंने तो मूसा से इससे भी बड़ी माँग की थी, कहते हुए: “हमें ईश्वर को खुले रूप में दिखाओ”; तब उनके अन्याय के कारण बिजली ने उन्हें आ पकड़ा।
فَقَدْ سَأَلُواْ مُوس۪ىٰٓ أَكْبَرَ مِن ذَٰلِكَ فَقَالُوٓاْ أَرِنَا اَ۬للَّهَ جَهْرَةٗ فَأَخَذَتْهُمُ اُ۬لصَّٰعِقَةُ بِظُلْمِهِمْۖ
फिर उन्होंने बछड़ा ले लिया, इसके बाद कि स्पष्ट प्रमाण उनके पास आ चुके थे; परंतु हमने उससे दरगुज़र किया,
ثُمَّ اَ۪تَّخَذُواْ اُ۬لْعِجْلَ مِنۢ بَعْدِ مَا جَآءَتْهُمُ اُ۬لْبَيِّنَٰتُ فَعَفَوْنَا عَن ذَٰلِكَۖ
और हमने मूसा को स्पष्ट अधिकार दिया।
وَءَاتَيْنَا مُوس۪ىٰ سُلْطَٰناٗ مُّبِيناٗۖ
और हमने उनके ऊपर पर्वत को ऊँचा किया, उनकी गंभीर प्रतिज्ञा के आधार पर,
وَرَفَعْنَا فَوْقَهُمُ اُ۬لطُّورَ بِمِيثَٰقِهِمْۖ
और हमने उनसे कहा: “द्वार से प्रवेश करो, माथा टेके हुए”,
وَقُلْنَا لَهُمُ اُ۟دْخُلُواْ اُ۬لْبَابَ سُجَّداٗۖ
और हमने उनसे कहा: “विराम के विषय में सीमाएँ पार मत करो”,
وَقُلْنَا لَهُمْ لَا تَعَدُّواْ فِے اِ۬لسَّبْتِۖ
और हमने उनसे गंभीर और दृढ़ प्रतिज्ञा ली।
وَأَخَذْنَا مِنْهُم مِّيثَٰقاً غَلِيظاٗۖ
यह इसलिए कि उन्होंने अपनी गंभीर प्रतिज्ञा तोड़ी, ईश्वर के संकेतों को नकारा, सूचनादाताओं को बिना हक़ के मार डाला, और कहा: “हमारे मर्म ढके हुए हैं” — नहीं, उनके नकार के कारण ईश्वर ने उनके मर्मों पर मुहर लगा दी है, इसलिए वे विश्वास बस थोड़ा ही करते हैं — और उनके नकार के कारण, और मरयम पर एक विशाल लांछन लगाने के कारण, और यह कहने के कारण: “हमने निश्चय ही अल-मसीह, ईसा, मरयम के पुत्र, ईश्वर के संदेशवाहक को मार डाला”,
فَبِمَا نَقْضِهِم مِّيثَٰقَهُمْ وَكُفْرِهِم بِـَٔايَٰتِ اِ۬للَّهِ وَقَتْلِهِمُ اُ۬لَانۢبِئَآءَ بِغَيْرِ حَقّٖ وَقَوْلِهِمْ قُلُوبُنَا غُلْفُۢ بَلْ طَبَعَ اَ۬للَّهُ عَلَيْهَا بِكُفْرِهِمْ فَلَا يُومِنُونَ إِلَّا قَلِيلاٗ وَبِكُفْرِهِمْ وَقَوْلِهِمْ عَلَىٰ مَرْيَمَ بُهْتَٰناً عَظِيماٗ وَقَوْلِهِمُۥٓ إِنَّا قَتَلْنَا اَ۬لْمَسِيحَ عِيسَى اَ۪بْنَ مَرْيَمَ رَسُولَ اَ۬للَّهِۖ
जबकि उन्होंने न उसे मारा और न उसे सूली पर चढ़ाया, बल्कि उन्हें उसकी एक समरूपता दी गई।
۞ وَمَا قَتَلُوهُ وَمَا صَلَبُوهُ وَلَٰكِن شُبِّهَ لَهُمْۖ
और जो उसके विषय में भिन्न मत रखते हैं, वे इस विषय में अवश्य दुविधा में हैं।
وَإِنَّ اَ۬لذِينَ اَ۪خْتَلَفُواْ فِيهِ لَفِے شَكّٖ مِّنْهُۖ
उन्हें इसका कोई ज्ञान नहीं,
مَا لَهُم بِهِۦ مِنْ عِلْمٍۖ
वे केवल अनुमान का ही अनुसरण करते हैं।
اِلَّا اَ۪تِّبَاعَ اَ۬لظَّنِّۖ
और यह ज़रूर है कि उन्होंने उसे नहीं मारा।
وَمَا قَتَلُوهُ يَقِيناَۢۖ
बल्कि ईश्वर ने उसे अपनी ओर ऊँचा कर लिया।
بَل رَّفَعَهُ اُ۬للَّهُ إِلَيْهِۖ
ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ عَزِيزاً حَكِيماٗۖ
और ग्रंथ वालों में कोई ऐसा नहीं जो उसकी मृत्यु से पहले उस पर अवश्य विश्वास न करे; और पेशी के दिन वह उन पर साक्षी होगा।
وَإِن مِّنَ اَهْلِ اِ۬لْكِتَٰبِ إِلَّا لَيُومِنَنَّ بِهِۦ قَبْلَ مَوْتِهِۦ وَيَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِ يَكُونُ عَلَيْهِمْ شَهِيداٗۖ
पुनरुन्मुखों के अन्याय के कारण हमने उन पर अच्छी चीज़ें वर्जित कर दीं जो उनके लिए वैध की गई थीं, और ईश्वर की राह बहुत रोकने के कारण, और ब्याज लेने के कारण, जबकि वह उनके लिए वर्जित था, और लोगों का माल असत्य से खाने के कारण।
فَبِظُلْمٖ مِّنَ اَ۬لذِينَ هَادُواْ حَرَّمْنَا عَلَيْهِمْ طَيِّبَٰتٍ ا۟حِلَّتْ لَهُمْ وَبِصَدِّهِمْ عَن سَبِيلِ اِ۬للَّهِ كَثِيراٗ وَأَخْذِهِمُ اُ۬لرِّبَوٰاْ وَقَدْ نُهُواْ عَنْهُ وَأَكْلِهِمُۥٓ أَمْوَٰلَ اَ۬لنَّاسِ بِالْبَٰطِلِۖ
और हमने उनमें से नकारने वालों के लिए पीड़ादायक दंड जुटा रखा है।
وَأَعْتَدْنَا لِلْكٰ۪فِرِينَ مِنْهُمْ عَذَاباً اَلِيماٗۖ
परंतु उनमें से जो ज्ञान में जमे हुए हैं, और विश्वास करने वाले, उस पर विश्वास करते हैं जो तुम पर उतारा गया और जो तुमसे पहले उतारा गया, तथा संपर्क बनाए रखने वाले,
لَّٰكِنِ اِ۬لرَّٰسِخُونَ فِے اِ۬لْعِلْمِ مِنْهُمْ وَالْمُومِنُونَ يُومِنُونَ بِمَآ أُنزِلَ إِلَيْكَ وَمَآ أُنزِلَ مِن قَبْلِكَ وَالْمُقِيمِينَ اَ۬لصَّلَوٰةَۖ
शुद्ध उदारता देने वाले, और ईश्वर तथा अंतिम दिन पर विश्वास करने वाले — यही वे हैं जिन्हें हम शीघ्र ही एक विशाल पुरस्कार देंगे।
وَالْمُوتُونَ اَ۬لزَّكَوٰةَ وَالْمُومِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ اِ۬لَاخِرِ أُوْلَٰٓئِكَ سَنُوتِيهِمُۥٓ أَجْراً عَظِيماًۖ
हमने तुम्हारी ओर निश्चय ही प्रकट किया है, जैसे हमने नूह की ओर और उसके बाद के सूचनादाताओं की ओर प्रकट किया,
اِنَّآ أَوْحَيْنَآ إِلَيْكَ كَمَآ أَوْحَيْنَآ إِلَىٰ نُوحٖ وَالنَّبِيٓـِٕۧنَ مِنۢ بَعْدِهِۦۖ
और हमने इब्राहीम, इस्माईल, इसहाक़, याक़ूब, वंशों, ईसा, अय्यूब, यूनुस, हारून और सुलैमान की ओर प्रकट किया;
وَأَوْحَيْنَآ إِلَىٰٓ إِبْرَٰهِيمَ وَإِسْمَٰعِيلَ وَإِسْحَٰقَ وَيَعْقُوبَ وَالَاسْبَاطِ وَعِيس۪ىٰ وَأَيُّوبَ وَيُونُسَ وَهَٰرُونَ وَسُلَيْمَٰنَۖ
और हमने दाऊद को एक प्रपत्र दिया।
وَءَاتَيْنَا دَاوُۥدَ زَبُوراٗۖ
और ऐसे संदेशवाहक जिनका वृत्तांत हम तुम्हें पहले बता चुके हैं, और ऐसे संदेशवाहक जिनका वृत्तांत हमने तुम्हें नहीं बताया;
وَرُسُلاٗ قَدْ قَصَصْنَٰهُمْ عَلَيْكَ مِن قَبْلُ وَرُسُلاٗ لَّمْ نَقْصُصْهُمْ عَلَيْكَۖ
और ईश्वर मूसा से एक वाणी में बोला।
وَكَلَّمَ اَ۬للَّهُ مُوس۪ىٰ تَكْلِيماٗۖ
शुभ समाचार देने वाले और चेतावनी देने वाले संदेशवाहक, ताकि संदेशवाहकों के बाद लोगों के पास ईश्वर के विरुद्ध कोई तर्क न रहे।
رُّسُلاٗ مُّبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ لِيَ۬لَّا يَكُونَ لِلنَّاسِ عَلَى اَ۬للَّهِ حُجَّةُۢ بَعْدَ اَ۬لرُّسُلِۖ
ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ عَزِيزاً حَكِيماٗۖ
परंतु ईश्वर उसका साक्ष्य देता है जो उसने तुम्हारी ओर उतारा है;
۞ لَّٰكِنِ اِ۬للَّهُ يَشْهَدُ بِمَآ أَنزَلَ إِلَيْكَۖ
उसने उसे अपने ज्ञान के साथ उतारा है, और अभिकर्ता इसका साक्ष्य देते हैं।
أَنزَلَهُۥ بِعِلْمِهِۦ وَالْمَلَٰٓئِكَةُ يَشْهَدُونَۖ
और ईश्वर साक्षी के रूप में पर्याप्त है।
وَكَف۪ىٰ بِاللَّهِ شَهِيداًۖ
जिन्होंने नकारा और ईश्वर की राह रोकी, वे निश्चय ही दूर के भटकाव से भटक गए।
اِنَّ اَ۬لذِينَ كَفَرُواْ وَصَدُّواْ عَن سَبِيلِ اِ۬للَّهِ قَد ضَّلُّواْ ضَلَٰلاَۢ بَعِيداًۖ
निश्चय ही, जिन्होंने नकारा और अन्याय किया — ईश्वर को शोभा नहीं देता कि वह उन्हें क्षमा करे, और न यह कि उन्हें किसी रास्ते की ओर मार्ग दिखाए, जहन्नम के रास्ते को छोड़कर, जहाँ वे सदा, चिरकाल तक रहेंगे।
اِنَّ اَ۬لذِينَ كَفَرُواْ وَظَلَمُواْ لَمْ يَكُنِ اِ۬للَّهُ لِيَغْفِرَ لَهُمْ وَلَا لِيَهْدِيَهُمْ طَرِيقاً اِلَّا طَرِيقَ جَهَنَّمَ خَٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَداٗۖ
और यह ईश्वर के लिए एक सरल बात है।
وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى اَ۬للَّهِ يَسِيراٗۖ
हे लोगो! संदेशवाहक तुम्हारे पास तुम्हारे अभिभावक की ओर से सत्य के साथ आया है; अतः विश्वास करो, यह तुम्हारे लिए बेहतर है।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لنَّاسُ قَدْ جَآءَكُمُ اُ۬لرَّسُولُ بِالْحَقِّ مِن رَّبِّكُمْ فَـَٔامِنُواْ خَيْراٗ لَّكُمْۖ
और यदि तुम नकारो, तो जो आकाशों में और धरती पर है वह निश्चय ही ईश्वर का है।
وَإِن تَكْفُرُواْ فَإِنَّ لِلهِ مَا فِے اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالَارْضِۖ
ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ عَلِيماً حَكِيماٗۖ
हे ग्रंथ वालो! अपने विधान में अतिरंजना मत करो, और ईश्वर के विषय में केवल सत्य ही कहो।
يَٰٓأَهْلَ اَ۬لْكِتَٰبِ لَا تَغْلُواْ فِے دِينِكُمْ وَلَا تَقُولُواْ عَلَى اَ۬للَّهِ إِلَّا اَ۬لْحَقَّۖ
अल-मसीह, ईसा, मरयम का पुत्र, केवल ईश्वर का संदेशवाहक है, और उसका बोल,
إِنَّمَا اَ۬لْمَسِيحُ عِيسَى اَ۪بْنُ مَرْيَمَ رَسُولُ اُ۬للَّهِ وَكَلِمَتُهُۥٓۖ
जिसे उसने मरयम तक पहुँचाया, और उसकी ओर से एक प्रवाह।
أَلْق۪يٰهَآ إِلَىٰ مَرْيَمَ وَرُوحٞ مِّنْهُۖ
अतः ईश्वर और उसके संदेशवाहकों पर विश्वास करो,
فَـَٔامِنُواْ بِاللَّهِ وَرُسُلِهِۦۖ
और मत कहो: “तीन”।
وَلَا تَقُولُواْ ثَلَٰثَةٌۖ
रुक जाओ: यह तुम्हारे लिए बेहतर है।
اِ۪نتَهُواْ خَيْراٗ لَّكُمُۥٓۖ
ईश्वर तो केवल एक ही देवता है।
إِنَّمَا اَ۬للَّهُ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞۖ
उसकी महिमा हो! वह किसी संतान के होने से ऊपर है।
سُبْحَٰنَهُۥٓ أَنْ يَّكُونَ لَهُۥ وَلَدٞۖ
उसी का है जो आकाशों में है और जो धरती पर है।
لَّهُۥ مَا فِے اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِے اِ۬لَارْضِۖ
और ईश्वर मुख़्तार के रूप में पर्याप्त है।
وَكَف۪ىٰ بِاللَّهِ وَكِيلاٗۖ
अल-मसीह कभी ईश्वर का आज्ञाकारी होने का तिरस्कार नहीं करेगा, और न निकटस्थ अभिकर्ता।
لَّنْ يَّسْتَنكِفَ اَ۬لْمَسِيحُ أَنْ يَّكُونَ عَبْداٗ لِّلهِ وَلَا اَ۬لْمَلَٰٓئِكَةُ اُ۬لْمُقَرَّبُونَۖ
और जो कोई उसकी आज्ञा के पालन का तिरस्कार करे और घमंड से फूल जाए, तो वह उन्हें शीघ्र ही सबको एक साथ अपनी ओर इकट्ठा करेगा।
وَمَنْ يَّسْتَنكِفْ عَنْ عِبَادَتِهِۦ وَيَسْتَكْبِرْ فَسَيَحْشُرُهُمُۥٓ إِلَيْهِ جَمِيعاٗۖ
रही उनकी बात जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, वह उन्हें उनके पुरस्कार पूरे-पूरे चुकाएगा, और अपने अनुग्रह से उन्हें और अधिक देगा;
فَأَمَّا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ فَيُوَفِّيهِمُۥٓ أُجُورَهُمْ وَيَزِيدُهُم مِّن فَضْلِهِۦۖ
और रही उनकी बात जिन्होंने तिरस्कार किया और जो घमंड से फूल गए, वह उन्हें पीड़ादायक दंड देगा, और वे ईश्वर के अतिरिक्त न कोई आश्रयदाता पाएँगे, न कोई सहायता।
وَأَمَّا اَ۬لذِينَ اَ۪سْتَنكَفُواْ وَاسْتَكْبَرُواْ فَيُعَذِّبُهُمْ عَذَاباً اَلِيماٗ وَلَا يَجِدُونَ لَهُم مِّن دُونِ اِ۬للَّهِ وَلِيّاٗ وَلَا نَصِيراٗۖ
हे लोगो! तुम्हारे अभिभावक की ओर से तुम्हारे पास एक सप्रमाण प्रदर्शन आया है, और हमने तुम्हारी ओर एक स्पष्ट प्रकाश उतारा है।
۞ يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لنَّاسُ قَدْ جَآءَكُم بُرْهَٰنٞ مِّن رَّبِّكُمْ وَأَنزَلْنَآ إِلَيْكُمْ نُوراٗ مُّبِيناٗۖ
रही उनकी बात जिन्होंने ईश्वर पर विश्वास किया और जो उससे दृढ़ता से जुड़ गए, वह उन्हें शीघ्र ही अपनी ओर से एक दया और एक अनुग्रह में प्रवेश कराएगा, और उन्हें अपनी ओर सीधे पथ से मार्ग दिखाएगा।
فَأَمَّا اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ بِاللَّهِ وَاعْتَصَمُواْ بِهِۦ فَسَيُدْخِلُهُمْ فِے رَحْمَةٖ مِّنْهُ وَفَضْلٖ وَيَهْدِيهِمُۥٓ إِلَيْهِ صِرَٰطاٗ مُّسْتَقِيماٗۖ
वे तुमसे परामर्श माँगते हैं।
يَسْتَفْتُونَكَۖ
कहो: “ईश्वर तुम्हें कलाला के विषय में अपनी राय देता है।
قُلِ اِ۬للَّهُ يُفْتِيكُمْ فِے اِ۬لْكَلَٰلَةِۖ
यदि कोई पुरुष बिना संतान के मर जाए, परंतु उसकी एक बहन हो, तो उसके छोड़े हुए का आधा उसे मिलेगा;
إِنِ اِ۪مْرُؤٌاْ هَلَكَ لَيْسَ لَهُۥ وَلَدٞ وَلَهُۥٓ أُخْتٞ فَلَهَا نِصْفُ مَا تَرَكَۖ
और वह उससे विरासत पाएगा, यदि उसके कोई संतान न हो।
وَهُوَ يَرِثُهَآ إِن لَّمْ يَكُن لَّهَا وَلَدٞۖ
परंतु यदि वे दो हों, तो उन्हें उसके छोड़े हुए के दो तिहाई मिलेंगे;
فَإِن كَانَتَا اَ۪ثْنَتَيْنِ فَلَهُمَا اَ۬لثُّلُثَٰنِ مِمَّا تَرَكَۖ
और यदि वे कई हों, भाई और बहनें, तो नर के लिए दो मादाओं के भाग का समकक्ष।
وَإِن كَانُوٓاْ إِخْوَةٗ رِّجَالاٗ وَنِسَآءٗ فَلِلذَّكَرِ مِثْلُ حَظِّ اِ۬لُانثَيَيْنِۖ
ईश्वर तुम्हें यह इसलिए स्पष्ट करता है कि तुम भटको नहीं;
يُبَيِّنُ اُ۬للَّهُ لَكُمُۥٓ أَن تَضِلُّواْۖ
और ईश्वर हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।”
وَاللَّهُ بِكُلِّ شَےْءٍ عَلِيمٞۖ