الزلزلة
Az-Zalzala
The Weight of a Grain
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। जब धरती अपने ही कंपन से काँपेगी, और धरती अपने बोझ बाहर निकाल देगी, और मनुष्य कहेगा: “इसे क्या हुआ है?”, उस दिन वह अपनी ख़बरें बताएगी, क्योंकि तुम्हारे अभिभावक ने उसके मन में यह प्रकट किया होगा।
بِسْمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحْمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ إِذَا زُلْزِلَتِ اِ۬لَارْضُ زِلْزَالَهَا وَأَخْرَجَتِ اِ۬لَارْضُ أَثْقَالَهَا وَقَالَ اَ۬لِانسَٰنُ مَا لَهَا يَوْمَئِذٖ تُحَدِّثُ أَخْبَارَهَا بِأَنَّ رَبَّكَ أَوْح۪ىٰ لَهَاۖ
उस दिन लोग बिखरे हुए समूहों में चल पड़ेंगे ताकि उन्हें उनके कर्म दिखाए जाएँ।
يَوْمَئِذٖ يَصْدُرُ اُ۬لنَّاسُ أَشْتَاتاٗ لِّيُرَوَاْ اَعْمَٰلَهُمْۖ
जो कोई एक कण के भार के बराबर अच्छाई करेगा वह उसे देखेगा,
فَمَنْ يَّعْمَلْ مِثْقَالَ ذَرَّةٍ خَيْراٗ يَرَهُۥۖ
और जो कोई एक कण के भार के बराबर बुराई करेगा वह उसे देखेगा।
وَمَنْ يَّعْمَلْ مِثْقَالَ ذَرَّةٖ شَرّاٗ يَرَهُۥۖ