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القرآن

ابراهيم

Ibrahim

A Good Word

अध्याय 14 · 52 पद

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।

14:1

अलिफ़. लाम. रा.

الٓر

14:1

एक ग्रंथ, जिसे हमने तुम्हारी ओर उतारा, ताकि तुम लोगों को अँधेरों से प्रकाश की ओर निकालो, उनके अभिभावक की अनुमति से, सर्वशक्तिमान, प्रशंसनीय के पथ की ओर।

كِتَٰبٌ أَنزَلْنَٰهُ إِلَيْكَ لِتُخْرِجَ ٱلنَّاسَ مِنَ ٱلظُّلُمَٰتِ إِلَى ٱلنُّورِ بِإِذْنِ رَبِّهِمْ إِلَىٰ صِرَٰطِ ٱلْعَزِيزِ ٱلْحَمِيدِ

14:2

ईश्वर, जिसका वह सब है जो आकाशों में है और जो धरती पर है।

ٱللَّهِ ٱلَّذِى لَهُۥ مَا فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ

14:2

और हाय नकारने वालों पर, एक कठोर दंड के कारण —

وَوَيْلٌۭ لِّلْكَٰفِرِينَ مِنْ عَذَابٍۢ شَدِيدٍ

जो अंतिम जीवन की अपेक्षा इहलोक के जीवन से अधिक प्रेम करते हैं, ईश्वर की राह रोकते हैं और उसे टेढ़ी करने की खोज में रहते हैं: यही वे हैं जो दूर के भटकाव में हैं।

ٱلَّذِينَ يَسْتَحِبُّونَ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا عَلَى ٱلْءَاخِرَةِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًا أُو۟لَٰٓئِكَ فِى ضَلَٰلٍۭ بَعِيدٍۢ

14:4

हमने कोई संदेशवाहक नहीं भेजा, सिवा इसके कि वह अपनी क़ौम की भाषा में हो, ताकि वह उनके लिए बातें स्पष्ट कर दे;

وَمَآ أَرْسَلْنَا مِن رَّسُولٍ إِلَّا بِلِسَانِ قَوْمِهِۦ لِيُبَيِّنَ لَهُمْ

14:4

फिर ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे भटकाता है, और जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे मार्ग दिखाता है:

فَيُضِلُّ ٱللَّهُ مَن يَشَآءُ وَيَهْدِى مَن يَشَآءُ

14:4

और वही सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।

وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ

14:5

हमने निश्चय ही मूसा को अपने संकेतों के साथ भेजा: “अपनी क़ौम को अँधेरों से प्रकाश की ओर निकालो, और उन्हें ईश्वर के दिनों का स्मरण कराओ।”

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِـَٔايَٰتِنَآ أَنْ أَخْرِجْ قَوْمَكَ مِنَ ٱلظُّلُمَٰتِ إِلَى ٱلنُّورِ وَذَكِّرْهُم بِأَيَّىٰمِ ٱللَّهِ

इसमें अवश्य हर उसके लिए संकेत हैं जो अत्यंत धैर्यवान, अत्यंत कृतज्ञ है।

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَءَايَٰتٍۢ لِّكُلِّ صَبَّارٍۢ شَكُورٍۢ

14:6

और जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा: “अपने ऊपर ईश्वर के उपकार का स्मरण करो, जब उसने तुम्हें फ़िरऔन के कुल से उबारा, जो तुम्हें बुरा दंड देते थे, तुम्हारे बेटों का वध करते थे और तुम्हारी स्त्रियों की लज्जा पर आघात करते थे:

وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ ٱذْكُرُوا۟ نِعْمَةَ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ أَنجَىٰكُم مِّنْ ءَالِ فِرْعَوْنَ يَسُومُونَكُمْ سُوٓءَ ٱلْعَذَابِ وَيُذَبِّحُونَ أَبْنَآءَكُمْ وَيَسْتَحْيُونَ نِسَآءَكُمْ

और उसमें तुम्हारे अभिभावक की ओर से वह था जो विशाल रूप से परखता है।”

وَفِى ذَٰلِكُم بَلَآءٌۭ مِّن رَّبِّكُمْ عَظِيمٌۭ

14:7

और जब तुम्हारे अभिभावक ने घोषणा की: “यदि तुम कृतज्ञ हुए, तो मैं तुम्हें अवश्य बढ़ाऊँगा; परंतु यदि तुमने नकारा, तो मेरा दंड अवश्य कठोर है।”

وَإِذْ تَأَذَّنَ رَبُّكُمْ لَئِن شَكَرْتُمْ لَأَزِيدَنَّكُمْ وَلَئِن كَفَرْتُمْ إِنَّ عَذَابِى لَشَدِيدٌۭ

14:8

और मूसा ने कहा: “यदि तुम नकारो, तुम और वे सब जो धरती पर हैं, तो ईश्वर अवश्य धनी है, वह प्रशंसनीय है।”

وَقَالَ مُوسَىٰٓ إِن تَكْفُرُوٓا۟ أَنتُمْ وَمَن فِى ٱلْأَرْضِ جَمِيعًۭا فَإِنَّ ٱللَّهَ لَغَنِىٌّ حَمِيدٌ

14:9

क्या तुम्हारे पास उनकी सूचना नहीं पहुँची जो तुमसे पहले थे: नूह की क़ौम, आद, समूद, और वे जो उनके बाद आए,

أَلَمْ يَأْتِكُمْ نَبَؤُا۟ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِكُمْ قَوْمِ نُوحٍۢ وَعَادٍۢ وَثَمُودَ وَٱلَّذِينَ مِنۢ بَعْدِهِمْ

14:9

जिन्हें ईश्वर के सिवा कोई नहीं जानता?

لَا يَعْلَمُهُمْ إِلَّا ٱللَّهُ

14:9

उनके संदेशवाहक उनके पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ आए, परंतु उन्होंने अपने हाथ अपने मुँह तक वापस ले गए और कहा: “जिसके साथ तुम भेजे गए हो, हम उसे नकारते हैं, और जिसकी ओर तुम हमें बुलाते हो, उसके विषय में हम अवश्य एक विचलित करने वाली दुविधा में हैं।”

جَآءَتْهُمْ رُسُلُهُم بِٱلْبَيِّنَٰتِ فَرَدُّوٓا۟ أَيْدِيَهُمْ فِىٓ أَفْوَٰهِهِمْ وَقَالُوٓا۟ إِنَّا كَفَرْنَا بِمَآ أُرْسِلْتُم بِهِۦ وَإِنَّا لَفِى شَكٍّۢ مِّمَّا تَدْعُونَنَآ إِلَيْهِ مُرِيبٍۢ

14:10

उनके संदेशवाहकों ने कहा: “क्या ईश्वर के विषय में कोई दुविधा है, जो आकाशों और धरती का उद्गम है? वह तुम्हें बुलाता है ताकि तुम्हारे दोषों का एक भाग क्षमा करे और तुम्हें एक नामित अवधि तक टाल दे।”

قَالَتْ رُسُلُهُمْ أَفِى ٱللَّهِ شَكٌّۭ فَاطِرِ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ يَدْعُوكُمْ لِيَغْفِرَ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمْ وَيُؤَخِّرَكُمْ إِلَىٰٓ أَجَلٍۢ مُّسَمًّۭى

14:10

उन्होंने कहा: “तुम तो बस हमारी तरह मानव हो; तुम हमें उससे रोकना चाहते हो जिसकी हमारे पूर्वज आज्ञा का पालन करते थे। तो हमारे पास कोई स्पष्ट अधिकार ले आओ।”

قَالُوٓا۟ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا بَشَرٌۭ مِّثْلُنَا تُرِيدُونَ أَن تَصُدُّونَا عَمَّا كَانَ يَعْبُدُ ءَابَآؤُنَا فَأْتُونَا بِسُلْطَٰنٍۢ مُّبِينٍۢ

14:11

उनके संदेशवाहकों ने उनसे कहा: “हम तो बस तुम्हारी तरह मानव हैं, परंतु ईश्वर अपने आज्ञाकारियों में से जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उस पर कृपा करता है।

قَالَتْ لَهُمْ رُسُلُهُمْ إِن نَّحْنُ إِلَّا بَشَرٌۭ مِّثْلُكُمْ وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ يَمُنُّ عَلَىٰ مَن يَشَآءُ مِنْ عِبَادِهِۦ

14:11

हमारे लिए उचित नहीं कि हम तुम्हारे पास कोई अधिकार लाएँ, सिवा ईश्वर की अनुमति के।

وَمَا كَانَ لَنَآ أَن نَّأْتِيَكُم بِسُلْطَٰنٍ إِلَّا بِإِذْنِ ٱللَّهِ

14:11

और विश्वास करने वालों को चाहिए कि ईश्वर को ही मुख़्तार बनाएँ।

وَعَلَى ٱللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ ٱلْمُؤْمِنُونَ

14:12

और हम ईश्वर को मुख़्तार क्यों न बनाएँ, जबकि उसने हमें हमारी राहों पर मार्ग दिखाया है?

وَمَا لَنَآ أَلَّا نَتَوَكَّلَ عَلَى ٱللَّهِ وَقَدْ هَدَىٰنَا سُبُلَنَا

14:12

और तुम हमें जो कष्ट देते हो, उस पर हम अवश्य धैर्य रखेंगे;

وَلَنَصْبِرَنَّ عَلَىٰ مَآ ءَاذَيْتُمُونَا

14:12

तो मुख़्तार बनाने वाले ईश्वर को ही मुख़्तार बनाएँ।”

وَعَلَى ٱللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ ٱلْمُتَوَكِّلُونَ

14:13

और नकारने वालों ने अपने संदेशवाहकों से कहा: “हम तुम्हें अपनी धरती से अवश्य निकाल देंगे, या तुम हमारे मत में वापस आ जाओगे!”

وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لِرُسُلِهِمْ لَنُخْرِجَنَّكُم مِّنْ أَرْضِنَآ أَوْ لَتَعُودُنَّ فِى مِلَّتِنَا

14:14

तब उनके अभिभावक ने उन पर प्रकट किया: “हम अन्यायियों को अवश्य नष्ट करेंगे, और तुम्हें उनके बाद इस धरती पर अवश्य बसाएँगे।

فَأَوْحَىٰٓ إِلَيْهِمْ رَبُّهُمْ لَنُهْلِكَنَّ ٱلظَّٰلِمِينَ وَلَنُسْكِنَنَّكُمُ ٱلْأَرْضَ مِنۢ بَعْدِهِمْ

14:14

यह उसके लिए है जो मेरे सामने खड़े होने से डरता है, और मेरी धमकी से डरता है।”

ذَٰلِكَ لِمَنْ خَافَ مَقَامِى وَخَافَ وَعِيدِ

और उन्होंने उद्घाटन माँगा,

وَٱسْتَفْتَحُوا۟

14:16–17

और हर हठी अत्याचारी विफल हुआ; उसके आगे जहन्नम है, और वहाँ उसे पीप भरा पानी पिलाया जाएगा, जिसे वह छोटे घूँटों में निगलेगा और लगभग गले से उतार नहीं पाएगा; उसके पास हर ओर से मृत्यु आएगी, पर वह मरेगा नहीं; और उसके आगे एक कड़ा दंड है।

وَخَابَ كُلُّ جَبَّارٍ عَنِيدٍۢ مِّن وَرَآئِهِۦ جَهَنَّمُ وَيُسْقَىٰ مِن مَّآءٍۢ صَدِيدٍۢ يَتَجَرَّعُهُۥ وَلَا يَكَادُ يُسِيغُهُۥ وَيَأْتِيهِ ٱلْمَوْتُ مِن كُلِّ مَكَانٍۢ وَمَا هُوَ بِمَيِّتٍۢ وَمِن وَرَآئِهِۦ عَذَابٌ غَلِيظٌۭ

14:18

उनका उदाहरण जो अपने अभिभावक को नकारते हैं:

مَّثَلُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِرَبِّهِمْ

14:18

उनके कर्म उस राख के समान हैं जिसे आँधी के दिन हवा ज़ोर से उड़ाती है: जो उन्होंने कमाया उसमें से वे कुछ भी थाम नहीं सकते।

أَعْمَٰلُهُمْ كَرَمَادٍ ٱشْتَدَّتْ بِهِ ٱلرِّيحُ فِى يَوْمٍ عَاصِفٍۢ لَّا يَقْدِرُونَ مِمَّا كَسَبُوا۟ عَلَىٰ شَىْءٍۢ

14:18

यही दूर का भटकाव है।

ذَٰلِكَ هُوَ ٱلضَّلَٰلُ ٱلْبَعِيدُ

क्या तुमने नहीं देखा कि ईश्वर ने आकाशों और धरती को सत्य के साथ रचा है?

أَلَمْ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ بِٱلْحَقِّ

यदि उसकी मर्ज़ी हो, तो वह तुम्हें ले जाए और एक नई रचना ले आए,

إِن يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ وَيَأْتِ بِخَلْقٍۢ جَدِيدٍۢ

14:20

और यह ईश्वर के लिए कदापि पहुँच से बाहर नहीं है।

وَمَا ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ بِعَزِيزٍۢ

14:21

और वे सब ईश्वर के सामने खुलकर आ जाएँगे, और दुर्बल उनसे कहेंगे जो घमंड से फूलते थे: “हम निश्चय ही तुम्हारे अनुयायी थे; तो क्या तुम ईश्वर के दंड से हमें थोड़ा भी बचाने के काम आओगे?”

وَبَرَزُوا۟ لِلَّهِ جَمِيعًۭا فَقَالَ ٱلضُّعَفَٰٓؤُا۟ لِلَّذِينَ ٱسْتَكْبَرُوٓا۟ إِنَّا كُنَّا لَكُمْ تَبَعًۭا فَهَلْ أَنتُم مُّغْنُونَ عَنَّا مِنْ عَذَابِ ٱللَّهِ مِن شَىْءٍۢ

14:21

वे कहेंगे: “यदि ईश्वर ने हमें मार्ग दिखाया होता, तो हम निश्चय ही तुम्हें मार्ग दिखाते।

قَالُوا۟ لَوْ هَدَىٰنَا ٱللَّهُ لَهَدَيْنَٰكُمْ

14:21

हमारे लिए बराबर है कि हम घबराएँ या धैर्य रखें: हमारे लिए बच निकलने का कोई मार्ग नहीं।”

سَوَآءٌ عَلَيْنَآ أَجَزِعْنَآ أَمْ صَبَرْنَا مَا لَنَا مِن مَّحِيصٍۢ

14:22

और बहकाने वाला कहेगा, जब मामले का फ़ैसला हो चुका होगा: “ईश्वर ने तुमसे निश्चय ही सत्य का वादा किया था, और मैंने भी तुमसे वादा किया था, परंतु मैंने तुमसे वादा तोड़ा; तुम पर मेरा कोई अधिकार नहीं था, सिवा इसके कि मैंने तुम्हें बुलाया, और तुमने मुझे उत्तर दिया। तो मुझ पर दोषारोपण मत करो, बल्कि स्वयं पर दोषारोपण करो: न मैं तुम्हारी गुहार का उत्तर दे सकता हूँ, न तुम मेरी। इससे पहले तुमने मुझे जो ईश्वर का साझी ठहराया था, मैं उसे निश्चय ही नकारता हूँ।”

وَقَالَ ٱلشَّيْطَٰنُ لَمَّا قُضِىَ ٱلْأَمْرُ إِنَّ ٱللَّهَ وَعَدَكُمْ وَعْدَ ٱلْحَقِّ وَوَعَدتُّكُمْ فَأَخْلَفْتُكُمْ وَمَا كَانَ لِىَ عَلَيْكُم مِّن سُلْطَٰنٍ إِلَّآ أَن دَعَوْتُكُمْ فَٱسْتَجَبْتُمْ لِى فَلَا تَلُومُونِى وَلُومُوٓا۟ أَنفُسَكُم مَّآ أَنَا۠ بِمُصْرِخِكُمْ وَمَآ أَنتُم بِمُصْرِخِىَّ إِنِّى كَفَرْتُ بِمَآ أَشْرَكْتُمُونِ مِن قَبْلُ

14:22

अन्यायियों के लिए निश्चय ही पीड़ादायक दंड है।

إِنَّ ٱلظَّٰلِمِينَ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌۭ

और जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, वे ऐसे उद्यानों में प्रवेश कराए जाएँगे जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जहाँ वे सदा रहेंगे, अपने अभिभावक की अनुमति से।

وَأُدْخِلَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ جَنَّٰتٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِمْ

वहाँ उनका अभिवादन होगा: “शांति!”

تَحِيَّتُهُمْ فِيهَا سَلَٰمٌ

14:24–25

क्या तुमने नहीं देखा कि ईश्वर कैसे उदाहरण को कई गुना करता है? एक अच्छा बोल एक अच्छे वृक्ष के समान है, जिसकी जड़ दृढ़ है और शाखाएँ आकाश में हैं, जो अपने अभिभावक की अनुमति से हर समय अपना भोजन देता है।

أَلَمْ تَرَ كَيْفَ ضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلًۭا كَلِمَةًۭ طَيِّبَةًۭ كَشَجَرَةٍۢ طَيِّبَةٍ أَصْلُهَا ثَابِتٌۭ وَفَرْعُهَا فِى ٱلسَّمَآءِ تُؤْتِىٓ أُكُلَهَا كُلَّ حِينٍۭ بِإِذْنِ رَبِّهَا

14:24–25

और ईश्वर लोगों के लिए उदाहरणों को कई गुना करता है, शायद वे स्मरण करें।

وَيَضْرِبُ ٱللَّهُ ٱلْأَمْثَالَ لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ

14:26

और एक निकृष्ट बोल का उदाहरण एक निकृष्ट वृक्ष के समान है, जो धरती की सतह से उखाड़ दिया गया, जिसमें कोई स्थिरता नहीं।

وَمَثَلُ كَلِمَةٍ خَبِيثَةٍۢ كَشَجَرَةٍ خَبِيثَةٍ ٱجْتُثَّتْ مِن فَوْقِ ٱلْأَرْضِ مَا لَهَا مِن قَرَارٍۢ

14:27

ईश्वर विश्वास करने वालों को दृढ़ कथन से स्थिर करता है, इहलोक के जीवन में और अंतिम जीवन में,

يُثَبِّتُ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ بِٱلْقَوْلِ ٱلثَّابِتِ فِى ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا وَفِى ٱلْءَاخِرَةِ

और ईश्वर अन्यायियों को भटकाता है,

وَيُضِلُّ ٱللَّهُ ٱلظَّٰلِمِينَ

और ईश्वर वही करता है जो उसकी मर्ज़ी हो।

وَيَفْعَلُ ٱللَّهُ مَا يَشَآءُ

14:28–29

क्या तुमने उन्हें नहीं देखा जिन्होंने ईश्वर के उपकार को नकार से बदल दिया, और अपनी क़ौम को क्षय के ठिकाने में ठहरा दिया — जहन्नम में, जहाँ वे जलेंगे:

أَلَمْ تَرَ إِلَى ٱلَّذِينَ بَدَّلُوا۟ نِعْمَتَ ٱللَّهِ كُفْرًۭا وَأَحَلُّوا۟ قَوْمَهُمْ دَارَ ٱلْبَوَارِ جَهَنَّمَ يَصْلَوْنَهَا

कितना निकृष्ट विश्राम-स्थल है!

وَبِئْسَ ٱلْقَرَارُ

14:30

और उन्होंने ईश्वर के प्रतिद्वंद्वी ठहराए, ताकि उसकी राह से भटकाएँ:

وَجَعَلُوا۟ لِلَّهِ أَندَادًۭا لِّيُضِلُّوا۟ عَن سَبِيلِهِۦ

कहो: “उपभोग कर लो, क्योंकि तुम्हारा गंतव्य आग है।”

قُلْ تَمَتَّعُوا۟ فَإِنَّ مَصِيرَكُمْ إِلَى ٱلنَّارِ

14:31

मेरे आज्ञाकारियों से, जो विश्वास करते हैं, कहो कि वे संपर्क बनाए रखें और उसमें से ख़र्च करें जो हमने उन्हें जीविका में दिया, चुपके से और खुलकर, उस दिन के आने से पहले जिसमें न ख़रीद-फ़रोख़्त होगी, न मित्रता।

قُل لِّعِبَادِىَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ يُقِيمُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَيُنفِقُوا۟ مِمَّا رَزَقْنَٰهُمْ سِرًّۭا وَعَلَانِيَةًۭ مِّن قَبْلِ أَن يَأْتِىَ يَوْمٌۭ لَّا بَيْعٌۭ فِيهِ وَلَا خِلَٰلٌ

14:32

ईश्वर वही है जिसने आकाशों और धरती को रचा, और आकाश से पानी उतारा, जिससे उसने तुम्हारे लिए जीविका के रूप में फल निकाले, और उसने तुम्हारे लिए जलयान को वश में किया, ताकि वह उसके आदेश से समुद्र में चले,

ٱللَّهُ ٱلَّذِى خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَأَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۭ فَأَخْرَجَ بِهِۦ مِنَ ٱلثَّمَرَٰتِ رِزْقًۭا لَّكُمْ وَسَخَّرَ لَكُمُ ٱلْفُلْكَ لِتَجْرِىَ فِى ٱلْبَحْرِ بِأَمْرِهِۦ

14:32

और उसने तुम्हारे लिए नदियों को वश में किया।

وَسَخَّرَ لَكُمُ ٱلْأَنْهَٰرَ

14:33

और उसने तुम्हारे लिए सूर्य और चंद्रमा को वश में किया, जो अपनी गति में निरंतर हैं,

وَسَخَّرَ لَكُمُ ٱلشَّمْسَ وَٱلْقَمَرَ دَآئِبَيْنِ

14:33

और उसने तुम्हारे लिए रात और दिन को वश में किया।

وَسَخَّرَ لَكُمُ ٱلَّيْلَ وَٱلنَّهَارَ

14:34

और उसने तुम्हें हर उस वस्तु में से दिया जो तुमने उससे माँगी;

وَءَاتَىٰكُم مِّن كُلِّ مَا سَأَلْتُمُوهُ

14:34

और यदि तुम ईश्वर के उपकार को गिनने लगो, तो उसे पूरा गिन न सकोगे।

وَإِن تَعُدُّوا۟ نِعْمَتَ ٱللَّهِ لَا تُحْصُوهَآ

14:34

मनुष्य अवश्य अत्यंत अन्यायी है, एक बड़ा नकारने वाला।

إِنَّ ٱلْإِنسَٰنَ لَظَلُومٌۭ كَفَّارٌۭ

14:35

और जब इब्राहीम ने कहा: “मेरे अभिभावक, इस भूभाग को सुरक्षित बना दीजिए, और मुझे तथा मेरे बेटों को मूर्तियों की आज्ञा का पालन करने से दूर रखिए।

وَإِذْ قَالَ إِبْرَٰهِيمُ رَبِّ ٱجْعَلْ هَٰذَا ٱلْبَلَدَ ءَامِنًۭا وَٱجْنُبْنِى وَبَنِىَّ أَن نَّعْبُدَ ٱلْأَصْنَامَ

14:36

मेरे अभिभावक, उन्होंने निश्चय ही बहुत से लोगों को भटकाया है। जो मेरे पीछे चले, वह तो मेरा अपना है, और जो मेरी अवज्ञा करे — तो आप निश्चय ही अत्यंत क्षमाशील, दयालु हैं।

رَبِّ إِنَّهُنَّ أَضْلَلْنَ كَثِيرًۭا مِّنَ ٱلنَّاسِ فَمَن تَبِعَنِى فَإِنَّهُۥ مِنِّى وَمَنْ عَصَانِى فَإِنَّكَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ

14:37

हमारे अभिभावक, मैंने अपनी संतति का एक भाग एक बंजर घाटी में बसाया है, आपके अलंघनीय किए गए घर के पास,

رَّبَّنَآ إِنِّىٓ أَسْكَنتُ مِن ذُرِّيَّتِى بِوَادٍ غَيْرِ ذِى زَرْعٍ عِندَ بَيْتِكَ ٱلْمُحَرَّمِ

14:37

हमारे अभिभावक, ताकि वे संपर्क बनाए रखें; तो आप ऐसा करें कि लोगों में से कुछ चेतनाएँ उनकी ओर झुकें, और उन्हें फलों की जीविका दें, शायद वे कृतज्ञ हों।

رَبَّنَا لِيُقِيمُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ فَٱجْعَلْ أَفْـِٔدَةًۭ مِّنَ ٱلنَّاسِ تَهْوِىٓ إِلَيْهِمْ وَٱرْزُقْهُم مِّنَ ٱلثَّمَرَٰتِ لَعَلَّهُمْ يَشْكُرُونَ

14:38

हमारे अभिभावक, आप जानते हैं जो हम छिपाते हैं और जो हम उजागर करते हैं;

رَبَّنَآ إِنَّكَ تَعْلَمُ مَا نُخْفِى وَمَا نُعْلِنُ

14:38

और ईश्वर से कुछ भी छिपा नहीं, न धरती पर न आकाश में।

وَمَا يَخْفَىٰ عَلَى ٱللَّهِ مِن شَىْءٍۢ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَا فِى ٱلسَّمَآءِ

14:39

प्रशंसा ईश्वर के लिए है, जिसने बुढ़ापे के बावजूद मुझे इस्माईल और इसहाक़ प्रदान किए!

ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِى وَهَبَ لِى عَلَى ٱلْكِبَرِ إِسْمَٰعِيلَ وَإِسْحَٰقَ

14:39

मेरा अभिभावक अवश्य पुकार सुनने वाला है।

إِنَّ رَبِّى لَسَمِيعُ ٱلدُّعَآءِ

14:40

मेरे अभिभावक, मुझे संपर्क बनाए रखने वाला बनाइए, और मेरी संतति को भी;

رَبِّ ٱجْعَلْنِى مُقِيمَ ٱلصَّلَوٰةِ وَمِن ذُرِّيَّتِى

14:40

हमारे अभिभावक, और मेरी पुकार स्वीकार कीजिए।

رَبَّنَا وَتَقَبَّلْ دُعَآءِ

14:41

हमारे अभिभावक, मुझे क्षमा कीजिए, और मेरे माता-पिता को, और विश्वास करने वालों को, उस दिन जब हिसाब सामने खड़ा होगा।”

رَبَّنَا ٱغْفِرْ لِى وَلِوَٰلِدَىَّ وَلِلْمُؤْمِنِينَ يَوْمَ يَقُومُ ٱلْحِسَابُ

14:42

और कदापि यह न समझो कि ईश्वर उससे लापरवाह है जो अन्यायी करते हैं:

وَلَا تَحْسَبَنَّ ٱللَّهَ غَٰفِلًا عَمَّا يَعْمَلُ ٱلظَّٰلِمُونَ

14:43

वह तो उन्हें उस दिन तक टाल रहा है जब दृष्टियाँ जम जाएँगी; वे सिर ऊँचा किए दौड़ते आएँगे, उनकी निगाह उनकी ओर वापस नहीं आएगी, और उनकी चेतनाएँ ख़ाली होंगी।

إِنَّمَا يُؤَخِّرُهُمْ لِيَوْمٍۢ تَشْخَصُ فِيهِ ٱلْأَبْصَٰرُ مُهْطِعِينَ مُقْنِعِى رُءُوسِهِمْ لَا يَرْتَدُّ إِلَيْهِمْ طَرْفُهُمْ وَأَفْـِٔدَتُهُمْ هَوَآءٌۭ

और लोगों को उस दिन की चेतावनी दो जब उन पर दंड आएगा, और जिन्होंने अन्याय किया वे कहेंगे: “हमारे अभिभावक, हमें एक निकट अवधि तक टाल दीजिए: हम आपके बुलावे का उत्तर देंगे और संदेशवाहकों का अनुसरण करेंगे।”

وَأَنذِرِ ٱلنَّاسَ يَوْمَ يَأْتِيهِمُ ٱلْعَذَابُ فَيَقُولُ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ رَبَّنَآ أَخِّرْنَآ إِلَىٰٓ أَجَلٍۢ قَرِيبٍۢ نُّجِبْ دَعْوَتَكَ وَنَتَّبِعِ ٱلرُّسُلَ

“क्या तुमने इससे पहले शपथ नहीं खाई थी कि तुम्हारा कोई विलोप नहीं होगा?

أَوَلَمْ تَكُونُوٓا۟ أَقْسَمْتُم مِّن قَبْلُ مَا لَكُم مِّن زَوَالٍۢ

14:45

और तुम उनके आवासों में बसे जिन्होंने स्वयं पर अन्याय किया, और तुम पर स्पष्ट हो गया कि हमने उनके साथ कैसा किया, और हमने तुम्हारे लिए उदाहरणों को कई गुना किया।”

وَسَكَنتُمْ فِى مَسَٰكِنِ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوٓا۟ أَنفُسَهُمْ وَتَبَيَّنَ لَكُمْ كَيْفَ فَعَلْنَا بِهِمْ وَضَرَبْنَا لَكُمُ ٱلْأَمْثَالَ

14:46

और उन्होंने अपना षड्यंत्र किया,

وَقَدْ مَكَرُوا۟ مَكْرَهُمْ

14:46

परंतु उनका षड्यंत्र ईश्वर के पास है,

وَعِندَ ٱللَّهِ مَكْرُهُمْ

14:46

चाहे उनका षड्यंत्र ऐसा रहा हो कि उससे पहाड़ हट जाएँ।

وَإِن كَانَ مَكْرُهُمْ لِتَزُولَ مِنْهُ ٱلْجِبَالُ

14:47

तो कदापि यह न समझो कि ईश्वर अपने संदेशवाहकों से किया अपना वादा तोड़ता है,

فَلَا تَحْسَبَنَّ ٱللَّهَ مُخْلِفَ وَعْدِهِۦ رُسُلَهُۥٓ

क्योंकि ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रतिशोध वाला है।

إِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌۭ ذُو ٱنتِقَامٍۢ

14:48

उस दिन जब धरती दूसरी धरती में बदल दी जाएगी, और आकाश भी,

يَوْمَ تُبَدَّلُ ٱلْأَرْضُ غَيْرَ ٱلْأَرْضِ وَٱلسَّمَٰوَٰتُ

14:48

और वे ईश्वर के सामने खुलकर आ जाएँगे, जो एक, सर्वोपरि है।

وَبَرَزُوا۟ لِلَّهِ ٱلْوَٰحِدِ ٱلْقَهَّارِ

14:49–51

और तुम उस दिन बहिष्कृतों को देखोगे, बेड़ियों में एक साथ जकड़े हुए, उनके कुर्ते डामर के, और आग उनके चेहरों को ढँके हुए, ताकि ईश्वर हर स्व को उसके कमाए के अनुसार प्रतिफल दे,

وَتَرَى ٱلْمُجْرِمِينَ يَوْمَئِذٍۢ مُّقَرَّنِينَ فِى ٱلْأَصْفَادِ سَرَابِيلُهُم مِّن قَطِرَانٍۢ وَتَغْشَىٰ وُجُوهَهُمُ ٱلنَّارُ لِيَجْزِىَ ٱللَّهُ كُلَّ نَفْسٍۢ مَّا كَسَبَتْ

क्योंकि ईश्वर हिसाब में शीघ्र है।

إِنَّ ٱللَّهَ سَرِيعُ ٱلْحِسَابِ

14:52

यह लोगों के लिए एक संप्रेषण है, ताकि उन्हें इससे चेतावनी मिले, वे जानें कि वह बस एक ही देवता है, और मेधा रखने वाले स्मरण करें।

هَٰذَا بَلَٰغٌۭ لِّلنَّاسِ وَلِيُنذَرُوا۟ بِهِۦ وَلِيَعْلَمُوٓا۟ أَنَّمَا هُوَ إِلَٰهٌۭ وَٰحِدٌۭ وَلِيَذَّكَّرَ أُو۟لُوا۟ ٱلْأَلْبَٰبِ

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