فصلت
Fussilat
Their Skins Will Testify
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
हा. मीम.
حمٓ
सर्वदयालु, दयालु की ओर से एक अवतरण: एक ग्रंथ जिसके संकेत विस्तृत किए गए हैं, एक त्रुटिहीन पाठ उस क़ौम के लिए जो जानती है, शुभ समाचार देने वाला और चेतावनी देने वाला,
تَنزِيلٌۭ مِّنَ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ كِتَٰبٌۭ فُصِّلَتْ ءَايَٰتُهُۥ قُرْءَانًا عَرَبِيًّۭا لِّقَوْمٍۢ يَعْلَمُونَ بَشِيرًۭا وَنَذِيرًۭا
परंतु उनमें से अधिकतर कतरा जाते हैं, इसलिए वे सुनते नहीं।
فَأَعْرَضَ أَكْثَرُهُمْ فَهُمْ لَا يَسْمَعُونَ
और वे कहते हैं: “हमारे मर्म उससे आवरणों में हैं जिसकी ओर तुम हमें बुलाते हो, और हमारे कानों में बहरापन है, और हमारे और तुम्हारे बीच एक पर्दा है। तो तुम कर्म करो, क्योंकि हम भी कर्म करते हैं।”
وَقَالُوا۟ قُلُوبُنَا فِىٓ أَكِنَّةٍۢ مِّمَّا تَدْعُونَآ إِلَيْهِ وَفِىٓ ءَاذَانِنَا وَقْرٌۭ وَمِنۢ بَيْنِنَا وَبَيْنِكَ حِجَابٌۭ فَٱعْمَلْ إِنَّنَا عَٰمِلُونَ
कहो: “मैं तुम्हारे ही जैसा केवल एक मानव हूँ; मुझ पर प्रकट किया जाता है कि तुम्हारा देवता एकमात्र देवता है। तो उसकी ओर सीधे डटे रहो और उससे क्षमा माँगो।”
قُلْ إِنَّمَآ أَنَا۠ بَشَرٌۭ مِّثْلُكُمْ يُوحَىٰٓ إِلَىَّ أَنَّمَآ إِلَٰهُكُمْ إِلَٰهٌۭ وَٰحِدٌۭ فَٱسْتَقِيمُوٓا۟ إِلَيْهِ وَٱسْتَغْفِرُوهُ
और हाय साझी ठहराने वालों पर, जो शुद्ध उदारता नहीं देते और अंतिम जीवन को नकारते हैं!
وَوَيْلٌۭ لِّلْمُشْرِكِينَ ٱلَّذِينَ لَا يُؤْتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَهُم بِٱلْءَاخِرَةِ هُمْ كَٰفِرُونَ
जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, उनके लिए निश्चय ही एक ऐसा पुरस्कार है जिसका उन पर एहसान नहीं जताया जाएगा।
إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍۢ
कहो: “क्या तुम सचमुच उसे नकारते हो जिसने धरती को दो दिनों में रचा, और उसके लिए प्रतिद्वंद्वी ठहराते हो?”
قُلْ أَئِنَّكُمْ لَتَكْفُرُونَ بِٱلَّذِى خَلَقَ ٱلْأَرْضَ فِى يَوْمَيْنِ وَتَجْعَلُونَ لَهُۥٓ أَندَادًۭا
यही सभी प्राणियों का अभिभावक है।
ذَٰلِكَ رَبُّ ٱلْعَٰلَمِينَ
और उसने उसमें उसके ऊपर दृढ़ खूँटे रखे, उसे आशीष दी और उसमें उसकी रसदें निर्धारित कीं, चार समान दिनों में, पूछने वालों के लिए।
وَجَعَلَ فِيهَا رَوَٰسِىَ مِن فَوْقِهَا وَبَٰرَكَ فِيهَا وَقَدَّرَ فِيهَآ أَقْوَٰتَهَا فِىٓ أَرْبَعَةِ أَيَّامٍۢ سَوَآءًۭ لِّلسَّآئِلِينَ
फिर वह आकाश की ओर अग्रसर हुआ, जो धुआँ था, और उससे तथा धरती से कहा: “तुम दोनों आओ, स्वेच्छा से या बलपूर्वक।”
ثُمَّ ٱسْتَوَىٰٓ إِلَى ٱلسَّمَآءِ وَهِىَ دُخَانٌۭ فَقَالَ لَهَا وَلِلْأَرْضِ ٱئْتِيَا طَوْعًا أَوْ كَرْهًۭا
उन दोनों ने कहा: “हम बात मानने वाली होकर आती हैं।”
قَالَتَآ أَتَيْنَا طَآئِعِينَ
उसने उन्हें सात आकाशों में पूर्ण किया, दो दिनों में, और हर आकाश के मन में उसका आदेश प्रकट किया।
فَقَضَىٰهُنَّ سَبْعَ سَمَٰوَاتٍۢ فِى يَوْمَيْنِ وَأَوْحَىٰ فِى كُلِّ سَمَآءٍ أَمْرَهَا
और हमने निकटतम आकाश को दीपों से सजाया,
وَزَيَّنَّا ٱلسَّمَآءَ ٱلدُّنْيَا بِمَصَٰبِيحَ
और उसे सुरक्षित रखा।
وَحِفْظًۭا
यही सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ द्वारा निर्धारित माप है।
ذَٰلِكَ تَقْدِيرُ ٱلْعَزِيزِ ٱلْعَلِيمِ
यदि वे कतरा जाएँ, तो कहो: “मैं तुम्हें आद और समूद के वज्र जैसे वज्र की चेतावनी देता हूँ”, जब उनके पास उनके आगे से और उनके पीछे से संदेशवाहक आए: “केवल ईश्वर की आज्ञा का पालन करो।”
فَإِنْ أَعْرَضُوا۟ فَقُلْ أَنذَرْتُكُمْ صَٰعِقَةًۭ مِّثْلَ صَٰعِقَةِ عَادٍۢ وَثَمُودَ إِذْ جَآءَتْهُمُ ٱلرُّسُلُ مِنۢ بَيْنِ أَيْدِيهِمْ وَمِنْ خَلْفِهِمْ أَلَّا تَعْبُدُوٓا۟ إِلَّا ٱللَّهَ
उन्होंने कहा: “यदि हमारे अभिभावक की मर्ज़ी होती, तो वह अभिकर्ताओं को उतारता। इसलिए हम निश्चय ही उसे नकारते हैं जिसके साथ तुम भेजे गए हो।”
قَالُوا۟ لَوْ شَآءَ رَبُّنَا لَأَنزَلَ مَلَٰٓئِكَةًۭ فَإِنَّا بِمَآ أُرْسِلْتُم بِهِۦ كَٰفِرُونَ
रही आद की बात, तो वे धरती पर बिना हक़ घमंड से फूल गए और उन्होंने कहा: “हमसे बल में बढ़कर कौन है?”
فَأَمَّا عَادٌۭ فَٱسْتَكْبَرُوا۟ فِى ٱلْأَرْضِ بِغَيْرِ ٱلْحَقِّ وَقَالُوا۟ مَنْ أَشَدُّ مِنَّا قُوَّةً
क्या वे नहीं देखते थे कि ईश्वर, जिसने उन्हें रचा, उनसे बल में बढ़कर है?
أَوَلَمْ يَرَوْا۟ أَنَّ ٱللَّهَ ٱلَّذِى خَلَقَهُمْ هُوَ أَشَدُّ مِنْهُمْ قُوَّةًۭ
और वे हमारे संकेतों को हठपूर्वक अस्वीकार करते थे।
وَكَانُوا۟ بِـَٔايَٰتِنَا يَجْحَدُونَ
हमने उन पर अशुभ दिनों में एक हिमशीतल आँधी भेजी, ताकि उन्हें इहलोक के जीवन में अपमान का दंड चखाएँ;
فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِيحًۭا صَرْصَرًۭا فِىٓ أَيَّامٍۢ نَّحِسَاتٍۢ لِّنُذِيقَهُمْ عَذَابَ ٱلْخِزْىِ فِى ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا
और अंतिम जीवन का दंड और भी अधिक अपमानजनक है, और उनकी सहायता नहीं की जाएगी।
وَلَعَذَابُ ٱلْءَاخِرَةِ أَخْزَىٰ وَهُمْ لَا يُنصَرُونَ
और रहे समूद, तो हमने उन्हें मार्ग दिखाया, परंतु उन्होंने मार्गदर्शन की अपेक्षा अंधेपन से अधिक प्रेम किया; अपमानजनक दंड के वज्र ने उन्हें उसके कारण पकड़ लिया जो वे कमाते थे।
وَأَمَّا ثَمُودُ فَهَدَيْنَٰهُمْ فَٱسْتَحَبُّوا۟ ٱلْعَمَىٰ عَلَى ٱلْهُدَىٰ فَأَخَذَتْهُمْ صَٰعِقَةُ ٱلْعَذَابِ ٱلْهُونِ بِمَا كَانُوا۟ يَكْسِبُونَ
और हमने उन्हें उबारा जो विश्वास करते थे और सावधानी बरतते थे।
وَنَجَّيْنَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَكَانُوا۟ يَتَّقُونَ
और जिस दिन हम ईश्वर के शत्रुओं को आग की ओर इकट्ठा करेंगे, वे पंक्तियों में बाँटे जाएँगे,
وَيَوْمَ يُحْشَرُ أَعْدَآءُ ٱللَّهِ إِلَى ٱلنَّارِ فَهُمْ يُوزَعُونَ
यहाँ तक कि जब वे वहाँ पहुँच जाएँगे, तो उनके श्रवण, उनकी दृष्टियाँ और उनकी त्वचाएँ उनके विरुद्ध उस पर साक्ष्य देंगी जो वे करते थे।
حَتَّىٰٓ إِذَا مَا جَآءُوهَا شَهِدَ عَلَيْهِمْ سَمْعُهُمْ وَأَبْصَٰرُهُمْ وَجُلُودُهُم بِمَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ
और वे अपनी त्वचाओं से कहेंगे: “तुमने हमारे विरुद्ध साक्ष्य क्यों दिया?”
وَقَالُوا۟ لِجُلُودِهِمْ لِمَ شَهِدتُّمْ عَلَيْنَا
वे कहेंगी: “ईश्वर ने, जो हर चीज़ से उच्चारण कराता है, हमसे उच्चारण कराया। उसी ने तुम्हें पहली बार रचा, और उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।”
قَالُوٓا۟ أَنطَقَنَا ٱللَّهُ ٱلَّذِىٓ أَنطَقَ كُلَّ شَىْءٍۢ وَهُوَ خَلَقَكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍۢ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
तुम इस बात से ओट नहीं लेते थे कि तुम्हारे श्रवण, तुम्हारी दृष्टियाँ और तुम्हारी त्वचाएँ तुम्हारे विरुद्ध साक्ष्य देंगी;
وَمَا كُنتُمْ تَسْتَتِرُونَ أَن يَشْهَدَ عَلَيْكُمْ سَمْعُكُمْ وَلَآ أَبْصَٰرُكُمْ وَلَا جُلُودُكُمْ
परंतु तुम अनुमान लगाते थे कि ईश्वर उसका बड़ा हिस्सा नहीं जानता जो तुम करते थे।
وَلَٰكِن ظَنَنتُمْ أَنَّ ٱللَّهَ لَا يَعْلَمُ كَثِيرًۭا مِّمَّا تَعْمَلُونَ
और यही तुम्हारा अनुमान है जो तुमने अपने अभिभावक के विषय में लगाया; इसने तुम्हें गिरा दिया, और तुम घाटा उठाने वालों में से हो गए।
وَذَٰلِكُمْ ظَنُّكُمُ ٱلَّذِى ظَنَنتُم بِرَبِّكُمْ أَرْدَىٰكُمْ فَأَصْبَحْتُم مِّنَ ٱلْخَٰسِرِينَ
यदि वे धैर्य रखें, तो आग उनका निवास है;
فَإِن يَصْبِرُوا۟ فَٱلنَّارُ مَثْوًۭى لَّهُمْ
और यदि वे फिर से स्वीकार किए जाने की माँग करें, तो वे उनमें से न होंगे जिन्हें फिर से स्वीकार किया जाता है।
وَإِن يَسْتَعْتِبُوا۟ فَمَا هُم مِّنَ ٱلْمُعْتَبِينَ
और हमने उनके लिए सहचर ठहराए, जिन्होंने उनके लिए सुंदर बना दिया जो उनके आगे था और जो उनके पीछे था,
وَقَيَّضْنَا لَهُمْ قُرَنَآءَ فَزَيَّنُوا۟ لَهُم مَّا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ
और उनके विरुद्ध कथन सिद्ध हो गया, उन समुदायों के बीच जो उनसे पहले बीत चुके, प्रच्छन्नों और मनुष्यों के;
وَحَقَّ عَلَيْهِمُ ٱلْقَوْلُ فِىٓ أُمَمٍۢ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِم مِّنَ ٱلْجِنِّ وَٱلْإِنسِ
क्योंकि वे घाटा उठाने वाले थे।
إِنَّهُمْ كَانُوا۟ خَٰسِرِينَ
और नकारने वालों ने कहा: “इस पाठ को मत सुनो, और उसके सुनाए जाने के समय व्यर्थ बातें उछालो, शायद तुम विजयी हो जाओ।”
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَا تَسْمَعُوا۟ لِهَٰذَا ٱلْقُرْءَانِ وَٱلْغَوْا۟ فِيهِ لَعَلَّكُمْ تَغْلِبُونَ
हम नकारने वालों को अवश्य एक कठोर दंड चखाएँगे, और उन्हें अवश्य उसके सबसे बुरे के अनुसार प्रतिफल देंगे जो वे करते थे।
فَلَنُذِيقَنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ عَذَابًۭا شَدِيدًۭا وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ أَسْوَأَ ٱلَّذِى كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ
यही ईश्वर के शत्रुओं का प्रतिफल है: आग;
ذَٰلِكَ جَزَآءُ أَعْدَآءِ ٱللَّهِ ٱلنَّارُ
उनके लिए वहाँ सदा रहने का ठिकाना है,
لَهُمْ فِيهَا دَارُ ٱلْخُلْدِ
इसके प्रतिफल में कि वे हमारे संकेतों को हठपूर्वक अस्वीकार करते थे।
جَزَآءًۢ بِمَا كَانُوا۟ بِـَٔايَٰتِنَا يَجْحَدُونَ
और नकारने वाले कहेंगे: “हमारे अभिभावक, हमें उन्हें दिखाइए जिन्होंने हमें प्रच्छन्नों और मनुष्यों में से भटकाया, कि हम उन्हें अपने पैरों तले रखें, ताकि वे सबसे नीचे वालों में हों।”
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ رَبَّنَآ أَرِنَا ٱلَّذَيْنِ أَضَلَّانَا مِنَ ٱلْجِنِّ وَٱلْإِنسِ نَجْعَلْهُمَا تَحْتَ أَقْدَامِنَا لِيَكُونَا مِنَ ٱلْأَسْفَلِينَ
निश्चय ही, जो कहते हैं: “हमारा अभिभावक ईश्वर है”, फिर सीधे डटे रहते हैं, उन पर अभिकर्ता उतरते हैं: “मत डरो और दुखी मत हो; उस उद्यान का शुभ समाचार पाओ जिसका तुमसे वादा किया जाता था।
إِنَّ ٱلَّذِينَ قَالُوا۟ رَبُّنَا ٱللَّهُ ثُمَّ ٱسْتَقَٰمُوا۟ تَتَنَزَّلُ عَلَيْهِمُ ٱلْمَلَٰٓئِكَةُ أَلَّا تَخَافُوا۟ وَلَا تَحْزَنُوا۟ وَأَبْشِرُوا۟ بِٱلْجَنَّةِ ٱلَّتِى كُنتُمْ تُوعَدُونَ
हम इहलोक के जीवन में और अंतिम जीवन में तुम्हारे हिमायती हैं;
نَحْنُ أَوْلِيَآؤُكُمْ فِى ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا وَفِى ٱلْءَاخِرَةِ
और वहाँ तुम्हें वह मिलेगा जो तुम्हारे स्व कामना करते हैं, और वहाँ तुम्हें वह मिलेगा जो तुम माँगोगे, अत्यंत क्षमाशील, दयालु की ओर से आतिथ्य के रूप में।”
وَلَكُمْ فِيهَا مَا تَشْتَهِىٓ أَنفُسُكُمْ وَلَكُمْ فِيهَا مَا تَدَّعُونَ نُزُلًۭا مِّنْ غَفُورٍۢ رَّحِيمٍۢ
और उससे सुंदर कथन किसका है जो ईश्वर की ओर बुलाता है, भला कर्म करता है और कहता है: “मैं ईश्वर के प्रति खरों में से हूँ”?
وَمَنْ أَحْسَنُ قَوْلًۭا مِّمَّن دَعَآ إِلَى ٱللَّهِ وَعَمِلَ صَٰلِحًۭا وَقَالَ إِنَّنِى مِنَ ٱلْمُسْلِمِينَ
और भलाई तथा बुरा कर्म बराबर नहीं हैं।
وَلَا تَسْتَوِى ٱلْحَسَنَةُ وَلَا ٱلسَّيِّئَةُ
उससे हटाओ जो अधिक सुंदर है; तब वह जिसके और तुम्हारे बीच शत्रुता थी, गर्मजोशी वाले मित्र जैसा हो जाएगा।
ٱدْفَعْ بِٱلَّتِى هِىَ أَحْسَنُ فَإِذَا ٱلَّذِى بَيْنَكَ وَبَيْنَهُۥ عَدَٰوَةٌۭ كَأَنَّهُۥ وَلِىٌّ حَمِيمٌۭ
परंतु यह उन्हीं को मिलता है जो धैर्य रखते हैं,
وَمَا يُلَقَّىٰهَآ إِلَّا ٱلَّذِينَ صَبَرُوا۟
और यह उसी को मिलता है जिसके पास विशाल हिस्सा है।
وَمَا يُلَقَّىٰهَآ إِلَّا ذُو حَظٍّ عَظِيمٍۢ
और यदि बहकाने वाले की ओर से कोई कचोट तुम्हें कचोटे, तो ईश्वर की छत्रछाया चाहो;
وَإِمَّا يَنزَغَنَّكَ مِنَ ٱلشَّيْطَٰنِ نَزْغٌۭ فَٱسْتَعِذْ بِٱللَّهِ
क्योंकि वही सुनने वाला, सर्वज्ञ है।
إِنَّهُۥ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلْعَلِيمُ
और उसके संकेतों में से: रात और दिन, सूर्य और चंद्रमा।
وَمِنْ ءَايَٰتِهِ ٱلَّيْلُ وَٱلنَّهَارُ وَٱلشَّمْسُ وَٱلْقَمَرُ
न सूर्य के सामने माथा टेको और न चंद्रमा के सामने,
لَا تَسْجُدُوا۟ لِلشَّمْسِ وَلَا لِلْقَمَرِ
बल्कि ईश्वर के सामने माथा टेको जिसने उन्हें रचा, यदि तुम उसी की आज्ञा का पालन करते हो।
وَٱسْجُدُوا۟ لِلَّهِ ٱلَّذِى خَلَقَهُنَّ إِن كُنتُمْ إِيَّاهُ تَعْبُدُونَ
यदि वे घमंड से फूलें, तो जो तुम्हारे अभिभावक के पास हैं वे रात और दिन उसकी महिमा गाते हैं, बिना थके।
فَإِنِ ٱسْتَكْبَرُوا۟ فَٱلَّذِينَ عِندَ رَبِّكَ يُسَبِّحُونَ لَهُۥ بِٱلَّيْلِ وَٱلنَّهَارِ وَهُمْ لَا يَسْـَٔمُونَ
और उसके संकेतों में से: तुम धरती को विनीत देखते हो; फिर जब हम उस पर पानी उतारते हैं, तो वह काँप उठती है और फूल जाती है।
وَمِنْ ءَايَٰتِهِۦٓ أَنَّكَ تَرَى ٱلْأَرْضَ خَٰشِعَةًۭ فَإِذَآ أَنزَلْنَا عَلَيْهَا ٱلْمَآءَ ٱهْتَزَّتْ وَرَبَتْ
जिसने उसे पुनः जीवन दिया वही अवश्य मृतकों को पुनः जीवन देने वाला है;
إِنَّ ٱلَّذِىٓ أَحْيَاهَا لَمُحْىِ ٱلْمَوْتَىٰٓ
क्योंकि वह हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।
إِنَّهُۥ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌ
जो हमारे संकेतों को विकृत करते हैं वे निश्चय ही हमसे छिपे नहीं हैं।
إِنَّ ٱلَّذِينَ يُلْحِدُونَ فِىٓ ءَايَٰتِنَا لَا يَخْفَوْنَ عَلَيْنَآ
क्या वह जो आग में डाला जाए बेहतर है, या वह जो पेशी के दिन सुरक्षित होकर आए?
أَفَمَن يُلْقَىٰ فِى ٱلنَّارِ خَيْرٌ أَم مَّن يَأْتِىٓ ءَامِنًۭا يَوْمَ ٱلْقِيَٰمَةِ
जैसी तुम्हारी मर्ज़ी हो, वैसा कर्म करो,
ٱعْمَلُوا۟ مَا شِئْتُمْ
क्योंकि तुम जो करते हो उस पर वह दृष्टि रखता है।
إِنَّهُۥ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
जिन्होंने स्मरण को नकारा, जब वह उन तक पहुँचा… और यह अवश्य एक अजेय ग्रंथ है, जिस तक असत्य न आगे से पहुँचता है न पीछे से,
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِٱلذِّكْرِ لَمَّا جَآءَهُمْ وَإِنَّهُۥ لَكِتَٰبٌ عَزِيزٌۭ لَّا يَأْتِيهِ ٱلْبَٰطِلُ مِنۢ بَيْنِ يَدَيْهِ وَلَا مِنْ خَلْفِهِۦ
एक प्रज्ञावान, प्रशंसनीय की ओर से एक अवतरण।
تَنزِيلٌۭ مِّنْ حَكِيمٍ حَمِيدٍۢ
तुमसे वही कहा जाता है जो तुमसे पहले संदेशवाहकों से पहले ही कहा जा चुका है;
مَّا يُقَالُ لَكَ إِلَّا مَا قَدْ قِيلَ لِلرُّسُلِ مِن قَبْلِكَ
तुम्हारा अभिभावक अवश्य क्षमा का धारक है और पीड़ादायक सज़ा का धारक है।
إِنَّ رَبَّكَ لَذُو مَغْفِرَةٍۢ وَذُو عِقَابٍ أَلِيمٍۢ
और यदि हम उसे अस्पष्ट पाठ बनाते, तो वे कहते: “उसके संकेत विस्तृत क्यों नहीं किए गए?”
وَلَوْ جَعَلْنَٰهُ قُرْءَانًا أَعْجَمِيًّۭا لَّقَالُوا۟ لَوْلَا فُصِّلَتْ ءَايَٰتُهُۥٓ
अस्पष्ट भी और त्रुटिहीन भी?
ءَا۬عْجَمِىٌّۭ وَعَرَبِىٌّۭ
कहो: “वह विश्वास करने वालों के लिए मार्गदर्शन और उपचार है;
قُلْ هُوَ لِلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ هُدًۭى وَشِفَآءٌۭ
और जो विश्वास नहीं करते उनके कानों में बहरापन है, और वह उनके लिए अंधापन है;
وَٱلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ فِىٓ ءَاذَانِهِمْ وَقْرٌۭ وَهُوَ عَلَيْهِمْ عَمًى
उन्हें दूर के स्थान से हाँक लगाई जाती है।”
أُو۟لَٰٓئِكَ يُنَادَوْنَ مِن مَّكَانٍۭ بَعِيدٍۢ
हमने निश्चय ही मूसा को ग्रंथ दिया, और उसमें मतभेद किया गया;
وَلَقَدْ ءَاتَيْنَا مُوسَى ٱلْكِتَٰبَ فَٱخْتُلِفَ فِيهِ
और यदि तुम्हारे अभिभावक का पहले का बोल न होता, तो उनके बीच फ़ैसला कर दिया गया होता;
وَلَوْلَا كَلِمَةٌۭ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ لَقُضِىَ بَيْنَهُمْ
और वे उसके विषय में अवश्य व्याकुल करने वाली दुविधा में हैं।
وَإِنَّهُمْ لَفِى شَكٍّۢ مِّنْهُ مُرِيبٍۢ
जो कोई भला कर्म करता है, वह अपने ही लिए है;
مَّنْ عَمِلَ صَٰلِحًۭا فَلِنَفْسِهِۦ
और जो कोई बुरा करता है, वह अपने ही विरुद्ध है;
وَمَنْ أَسَآءَ فَعَلَيْهَا
और तुम्हारा अभिभावक बाध्य आज्ञाकारियों पर अन्याय करने वाला नहीं है।
وَمَا رَبُّكَ بِظَلَّٰمٍۢ لِّلْعَبِيدِ
उसी की ओर उस घड़ी का ज्ञान वापस ले जाया जाता है;
إِلَيْهِ يُرَدُّ عِلْمُ ٱلسَّاعَةِ
कोई फल अपने खोल से नहीं निकलता, कोई मादा न वहन करती है और न जनती है, सिवा उसके ज्ञान के साथ;
وَمَا تَخْرُجُ مِن ثَمَرَٰتٍۢ مِّنْ أَكْمَامِهَا وَمَا تَحْمِلُ مِنْ أُنثَىٰ وَلَا تَضَعُ إِلَّا بِعِلْمِهِۦ
और जिस दिन वह उन्हें पुकारेगा: “मेरे साझीदार कहाँ हैं?”, वे कहेंगे: “हम आपको सूचित करते हैं कि हममें कोई साक्षी नहीं है।”
وَيَوْمَ يُنَادِيهِمْ أَيْنَ شُرَكَآءِى قَالُوٓا۟ ءَاذَنَّٰكَ مَا مِنَّا مِن شَهِيدٍۢ
और वे जिन्हें पहले पुकारते थे वे उनसे दूर भटक जाएँगे, और वे अनुमान लगाएँगे कि उनके लिए कोई पलायन नहीं है।
وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا۟ يَدْعُونَ مِن قَبْلُ وَظَنُّوا۟ مَا لَهُم مِّن مَّحِيصٍۢ
मनुष्य अच्छाई को बुलाने से नहीं थकता;
لَّا يَسْـَٔمُ ٱلْإِنسَٰنُ مِن دُعَآءِ ٱلْخَيْرِ
परंतु यदि बुराई उसे छू ले, तभी वह निराश, हताश हो जाता है।
وَإِن مَّسَّهُ ٱلشَّرُّ فَيَـُٔوسٌۭ قَنُوطٌۭ
और यदि हम उसे, उसे छू चुकी हानि के बाद, अपनी ओर से दया चखाएँ, तो वह अवश्य कहेगा: “यह मेरा हक़ है, और मैं अनुमान नहीं लगाता कि वह घड़ी आ खड़ी होगी; और यदि मैं अपने अभिभावक की ओर लौटाया गया, तो मेरे लिए उसके पास अवश्य सबसे सुंदर होगा।”
وَلَئِنْ أَذَقْنَٰهُ رَحْمَةًۭ مِّنَّا مِنۢ بَعْدِ ضَرَّآءَ مَسَّتْهُ لَيَقُولَنَّ هَٰذَا لِى وَمَآ أَظُنُّ ٱلسَّاعَةَ قَآئِمَةًۭ وَلَئِن رُّجِعْتُ إِلَىٰ رَبِّىٓ إِنَّ لِى عِندَهُۥ لَلْحُسْنَىٰ
हम नकारने वालों को अवश्य सूचित करेंगे कि उन्होंने क्या किया, और उन्हें अवश्य एक कड़ा दंड चखाएँगे।
فَلَنُنَبِّئَنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِمَا عَمِلُوا۟ وَلَنُذِيقَنَّهُم مِّنْ عَذَابٍ غَلِيظٍۢ
और जब हम मनुष्य को उपकारों से भर देते हैं, तो वह कतरा जाता है और अपनी ओर से दूर हट जाता है;
وَإِذَآ أَنْعَمْنَا عَلَى ٱلْإِنسَٰنِ أَعْرَضَ وَنَـَٔا بِجَانِبِهِۦ
और जब बुराई उसे छूती है, तभी वह अंतहीन पुकारों में लग जाता है।
وَإِذَا مَسَّهُ ٱلشَّرُّ فَذُو دُعَآءٍ عَرِيضٍۢ
कहो: “क्या तुम देखते हो? यदि यह ईश्वर की ओर से हो और तुम इसे नकारो, तो उससे अधिक भटका हुआ कौन है जो दूर की दरार में है?”
قُلْ أَرَءَيْتُمْ إِن كَانَ مِنْ عِندِ ٱللَّهِ ثُمَّ كَفَرْتُم بِهِۦ مَنْ أَضَلُّ مِمَّنْ هُوَ فِى شِقَاقٍۭ بَعِيدٍۢ
हम उन्हें अपने संकेत क्षितिजों में और स्वयं उनमें दिखाएँगे, यहाँ तक कि उन पर स्पष्ट हो जाए कि यही सत्य है।
سَنُرِيهِمْ ءَايَٰتِنَا فِى ٱلْءَافَاقِ وَفِىٓ أَنفُسِهِمْ حَتَّىٰ يَتَبَيَّنَ لَهُمْ أَنَّهُ ٱلْحَقُّ
क्या यह पर्याप्त नहीं कि तुम्हारा अभिभावक हर चीज़ पर साक्षी है?
أَوَلَمْ يَكْفِ بِرَبِّكَ أَنَّهُۥ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ شَهِيدٌ
क्या ऐसा नहीं है: वे अपने अभिभावक से मिलने के विषय में निश्चय ही वाद-प्रतिवाद में हैं;
أَلَآ إِنَّهُمْ فِى مِرْيَةٍۢ مِّن لِّقَآءِ رَبِّهِمْ
क्या ऐसा नहीं है: वह निश्चय ही हर चीज़ को पूरी तरह घेरे हुए है।
أَلَآ إِنَّهُۥ بِكُلِّ شَىْءٍۢ مُّحِيطٌۢ