التحريم
At-Tahrim
The Prohibition
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
हे सूचनादाता! तुम उसे वर्जित क्यों मानते हो जो ईश्वर ने तुम्हारे लिए वैध किया है, अपनी जोड़ीदारों की प्रसन्नता खोजते हुए?
يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِىُّ لِمَ تُحَرِّمُ مَآ أَحَلَّ ٱللَّهُ لَكَ تَبْتَغِى مَرْضَاتَ أَزْوَٰجِكَ
और ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
وَٱللَّهُ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ
ईश्वर ने तुम्हारे लिए तुम्हारी शपथों की छूट निर्धारित की है,
قَدْ فَرَضَ ٱللَّهُ لَكُمْ تَحِلَّةَ أَيْمَٰنِكُمْ
और ईश्वर तुम्हारा सबसे निकट का ज़ामिन है।
وَٱللَّهُ مَوْلَىٰكُمْ
और वही सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
وَهُوَ ٱلْعَلِيمُ ٱلْحَكِيمُ
और जब सूचनादाता ने अपनी एक जोड़ीदार को गुप्त रूप से कोई वार्ता सौंपी,
وَإِذْ أَسَرَّ ٱلنَّبِىُّ إِلَىٰ بَعْضِ أَزْوَٰجِهِۦ حَدِيثًۭا
और उसने उसकी सूचना किसी और को दे दी, और ईश्वर ने उसे उसके सामने खोल दिया, तो उसने उसका एक अंश बता दिया और दूसरे अंश से आँखें फेर लीं।
فَلَمَّا نَبَّأَتْ بِهِۦ وَأَظْهَرَهُ ٱللَّهُ عَلَيْهِ عَرَّفَ بَعْضَهُۥ وَأَعْرَضَ عَنۢ بَعْضٍۢ
फिर जब उसने उसे उसकी सूचना दी, तो उसने कहा: “तुम्हें इसकी सूचना किसने दी?” उसने कहा: “सर्वज्ञ, पूरी ख़बर रखने वाले ने मुझे इसकी सूचना दी।”
فَلَمَّا نَبَّأَهَا بِهِۦ قَالَتْ مَنْ أَنۢبَأَكَ هَٰذَا قَالَ نَبَّأَنِىَ ٱلْعَلِيمُ ٱلْخَبِيرُ
यदि तुम दोनों ईश्वर की ओर पलट आओ — क्योंकि तुम्हारे मर्म झुक चुके हैं —
إِن تَتُوبَآ إِلَى ٱللَّهِ فَقَدْ صَغَتْ قُلُوبُكُمَا
और यदि तुम एक-दूसरी का उसके विरुद्ध समर्थन करो, तो ईश्वर निश्चय ही उसका सबसे निकट का ज़ामिन है, और जिब्रील और विश्वास करने वालों में जो भले हैं,
وَإِن تَظَٰهَرَا عَلَيْهِ فَإِنَّ ٱللَّهَ هُوَ مَوْلَىٰهُ وَجِبْرِيلُ وَصَٰلِحُ ٱلْمُؤْمِنِينَ
और इसके अतिरिक्त अभिकर्ता उसके समर्थक हैं।
وَٱلْمَلَٰٓئِكَةُ بَعْدَ ذَٰلِكَ ظَهِيرٌ
संभव है कि उसका अभिभावक, यदि वह तुम्हारा परित्याग कर दे, उसे बदले में तुमसे बेहतर जोड़ीदार दे: ईश्वर के प्रति खरी, विश्वास करने वाली, समर्पित, पश्चात्ताप करने वाली, आज्ञाकारी, यात्रा करने वाली, पहले विवाह कर चुकी या कुँवारी।
عَسَىٰ رَبُّهُۥٓ إِن طَلَّقَكُنَّ أَن يُبْدِلَهُۥٓ أَزْوَٰجًا خَيْرًۭا مِّنكُنَّ مُسْلِمَٰتٍۢ مُّؤْمِنَٰتٍۢ قَٰنِتَٰتٍۢ تَٰٓئِبَٰتٍ عَٰبِدَٰتٍۢ سَٰٓئِحَٰتٍۢ ثَيِّبَٰتٍۢ وَأَبْكَارًۭا
हे विश्वास करने वालो! अपने स्व को और अपने परिवार को उस आग से बचाओ जिसका ईंधन लोग और पत्थर होंगे, जिस पर कठोर और कड़े अभिकर्ता निगरानी रखते हैं, जो ईश्वर की उसमें अवज्ञा नहीं करते जिसका वह उन्हें आदेश देता है, और वही करते हैं जिसका उन्हें आदेश दिया जाता है।
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ قُوٓا۟ أَنفُسَكُمْ وَأَهْلِيكُمْ نَارًۭا وَقُودُهَا ٱلنَّاسُ وَٱلْحِجَارَةُ عَلَيْهَا مَلَٰٓئِكَةٌ غِلَاظٌۭ شِدَادٌۭ لَّا يَعْصُونَ ٱللَّهَ مَآ أَمَرَهُمْ وَيَفْعَلُونَ مَا يُؤْمَرُونَ
हे नकारने वालो! आज बहाने मत बनाओ: तुम्हें केवल उसी का प्रतिफल दिया जाता है जो तुम करते थे।
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَا تَعْتَذِرُوا۟ ٱلْيَوْمَ إِنَّمَا تُجْزَوْنَ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
हे विश्वास करने वालो! ईश्वर की ओर सच्चे पश्चात्ताप के साथ पलट आओ। संभव है कि तुम्हारा अभिभावक तुम्हारे बुरे कर्म ढक दे और तुम्हें ऐसे उद्यानों में प्रवेश कराए जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, उस दिन जब ईश्वर सूचनादाता को और उन्हें जिन्होंने उसके साथ विश्वास किया लज्जित नहीं करेगा; उनका प्रकाश उनके आगे और उनके दाएँ दौड़ेगा।
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ تُوبُوٓا۟ إِلَى ٱللَّهِ تَوْبَةًۭ نَّصُوحًا عَسَىٰ رَبُّكُمْ أَن يُكَفِّرَ عَنكُمْ سَيِّـَٔاتِكُمْ وَيُدْخِلَكُمْ جَنَّٰتٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَٰرُ يَوْمَ لَا يُخْزِى ٱللَّهُ ٱلنَّبِىَّ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مَعَهُۥ نُورُهُمْ يَسْعَىٰ بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَبِأَيْمَٰنِهِمْ
वे कहेंगे: “हमारे अभिभावक, हमारे लिए हमारा प्रकाश पूर्ण कीजिए और हमें क्षमा कीजिए,
يَقُولُونَ رَبَّنَآ أَتْمِمْ لَنَا نُورَنَا وَٱغْفِرْ لَنَآ
क्योंकि आप हर चीज़ का सामर्थ्य रखते हैं।”
إِنَّكَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌۭ
हे सूचनादाता! नकारने वालों और पाखंडियों से संघर्ष करो, और उनके प्रति दृढ़ रहो।
يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِىُّ جَٰهِدِ ٱلْكُفَّارَ وَٱلْمُنَٰفِقِينَ وَٱغْلُظْ عَلَيْهِمْ
और उनकी शरण जहन्नम होगी,
وَمَأْوَىٰهُمْ جَهَنَّمُ
और कितना भयानक गंतव्य!
وَبِئْسَ ٱلْمَصِيرُ
ईश्वर उनके लिए जिन्होंने नकारा एक उदाहरण कई गुना करता है: नूह की पत्नी और लूत की पत्नी।
ضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلًۭا لِّلَّذِينَ كَفَرُوا۟ ٱمْرَأَتَ نُوحٍۢ وَٱمْرَأَتَ لُوطٍۢ
वे हमारे दो भले आज्ञाकारियों के अधीन थीं, और उन्होंने उनके साथ विश्वासघात किया, इसलिए वे दोनों ईश्वर के सामने उनके किसी काम न आए,
كَانَتَا تَحْتَ عَبْدَيْنِ مِنْ عِبَادِنَا صَٰلِحَيْنِ فَخَانَتَاهُمَا فَلَمْ يُغْنِيَا عَنْهُمَا مِنَ ٱللَّهِ شَيْـًۭٔا
और उनसे कहा गया: “तुम दोनों उनके साथ आग में प्रवेश करो जो उसमें प्रवेश करते हैं।”
وَقِيلَ ٱدْخُلَا ٱلنَّارَ مَعَ ٱلدَّٰخِلِينَ
और ईश्वर विश्वास करने वालों के लिए एक उदाहरण कई गुना करता है: फ़िरऔन की पत्नी, जब उसने कहा: “मेरे अभिभावक, मेरे लिए अपने पास उद्यान में एक घर बना दीजिए, और मुझे फ़िरऔन से और उसके कर्म से उबार लीजिए, और मुझे अन्यायी क़ौम से उबार लीजिए।”
وَضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلًۭا لِّلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱمْرَأَتَ فِرْعَوْنَ إِذْ قَالَتْ رَبِّ ٱبْنِ لِى عِندَكَ بَيْتًۭا فِى ٱلْجَنَّةِ وَنَجِّنِى مِن فِرْعَوْنَ وَعَمَلِهِۦ وَنَجِّنِى مِنَ ٱلْقَوْمِ ٱلظَّٰلِمِينَ
और मरयम, इमरान की बेटी, जिसने अपना शील सुरक्षित रखा; हमने उसमें अपने प्रवाह में से फूँका। उसने अपने अभिभावक के बोलों को और उसके ग्रंथों को सच्चा ठहराया, और वह समर्पित जनों में से थी।
وَمَرْيَمَ ٱبْنَتَ عِمْرَٰنَ ٱلَّتِىٓ أَحْصَنَتْ فَرْجَهَا فَنَفَخْنَا فِيهِ مِن رُّوحِنَا وَصَدَّقَتْ بِكَلِمَٰتِ رَبِّهَا وَكُتُبِهِۦ وَكَانَتْ مِنَ ٱلْقَٰنِتِينَ