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अध्याय 81 · 29 पद

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।

81:1–14

जब सूर्य लपेट दिया जाएगा, और जब तारे बिखर जाएँगे, और जब पहाड़ गति में डाल दिए जाएँगे, और जब निकट जन उपेक्षित छोड़ दिए जाएँगे, और जब जंगली पशु इकट्ठा किए जाएँगे, और जब समुद्र उबाल पर लाए जाएँगे, और जब स्वों के जोड़े बनाए जाएँगे, और जब ज़िंदा गाड़ी गई बच्ची से पूछा जाएगा कि वह किस दोष के कारण मारी गई, और जब अभिलेख फैलाए जाएँगे, और जब आकाश की खाल उतारी जाएगी, और जब भट्ठी भड़काई जाएगी, और जब उद्यान निकट लाया जाएगा, तब एक स्व जान लेगा कि उसने क्या प्रस्तुत किया।

إِذَا ٱلشَّمْسُ كُوِّرَتْ وَإِذَا ٱلنُّجُومُ ٱنكَدَرَتْ وَإِذَا ٱلْجِبَالُ سُيِّرَتْ وَإِذَا ٱلْعِشَارُ عُطِّلَتْ وَإِذَا ٱلْوُحُوشُ حُشِرَتْ وَإِذَا ٱلْبِحَارُ سُجِّرَتْ وَإِذَا ٱلنُّفُوسُ زُوِّجَتْ وَإِذَا ٱلْمَوْءُۥدَةُ سُئِلَتْ بِأَىِّ ذَنۢبٍۢ قُتِلَتْ وَإِذَا ٱلصُّحُفُ نُشِرَتْ وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ كُشِطَتْ وَإِذَا ٱلْجَحِيمُ سُعِّرَتْ وَإِذَا ٱلْجَنَّةُ أُزْلِفَتْ عَلِمَتْ نَفْسٌۭ مَّآ أَحْضَرَتْ

81:15–21

नहीं! मैं शपथ लेता हूँ पीछे हटने वाले तारों की, जो दौड़ते और छिप जाते हैं, और रात की जब वह विदा लेती है, और भोर की जब वह साँस लेती है: यह अवश्य एक सम्मानित संदेशवाहक का कथन है, जो बल वाला है, भवन वाले के पास भली-भाँति स्थापित है, जिसकी वहाँ बात मानी जाती है, और जो विश्वस्त है।

فَلَآ أُقْسِمُ بِٱلْخُنَّسِ ٱلْجَوَارِ ٱلْكُنَّسِ وَٱلَّيْلِ إِذَا عَسْعَسَ وَٱلصُّبْحِ إِذَا تَنَفَّسَ إِنَّهُۥ لَقَوْلُ رَسُولٍۢ كَرِيمٍۢ ذِى قُوَّةٍ عِندَ ذِى ٱلْعَرْشِ مَكِينٍۢ مُّطَاعٍۢ ثَمَّ أَمِينٍۢ

81:22

और तुम्हारा साथी विक्षिप्त नहीं है।

وَمَا صَاحِبُكُم بِمَجْنُونٍۢ

और उसने उसे निश्चय ही स्पष्ट क्षितिज पर देखा है।

وَلَقَدْ رَءَاهُ بِٱلْأُفُقِ ٱلْمُبِينِ

81:24

और वह उस विषय में कंजूस नहीं जो इंद्रियों से परे है।

وَمَا هُوَ عَلَى ٱلْغَيْبِ بِضَنِينٍۢ

81:25–26

और यह किसी निष्कासित बहकाने वाले का कथन नहीं है। तो तुम कहाँ जा रहे हो?

وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَيْطَٰنٍۢ رَّجِيمٍۢ فَأَيْنَ تَذْهَبُونَ

81:27–28

यह तो सभी प्राणियों के लिए केवल एक स्मरण है, तुममें से उसके लिए जिसकी मर्ज़ी सीधा रहने की हो।

إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌۭ لِّلْعَٰلَمِينَ لِمَن شَآءَ مِنكُمْ أَن يَسْتَقِيمَ

81:29

और तुम तभी चाहोगे जब ईश्वर की मर्ज़ी हो, जो सभी प्राणियों का अभिभावक है।

وَمَا تَشَآءُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ رَبُّ ٱلْعَٰلَمِينَ

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