Al-Hujurat الحجرات
The Believers Are But Brothers إنما المؤمنون إخوة
The section and its links
Facing those who contest it, then the messenger's community (40-46, then 47-49)
Read the section from its beginning: sura 40
What was shown before: The conduct laid down in 42 (reconciling, oppression) becomes here a rule among believers. 42
بسم الله الرحمن الرحيم
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
हे विश्वास करने वालो! ईश्वर और उसके संदेशवाहक के आगे मत बढ़ो।
يايها الذين امنوا لا تقدموا بين يدي الله ورسوله
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो,
واتقوا الله
क्योंकि ईश्वर सुनने वाला, सर्वज्ञ है।
ان الله سميع عليم
हे विश्वास करने वालो! अपनी आवाज़ें सूचनादाता की आवाज़ से ऊँची मत करो, और उससे ऊँचे स्वर में बात मत करो जैसे तुम आपस में करते हो, कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारे कर्म ढह जाएँ और तुम्हें आभास भी न हो,
يايها الذين امنوا لا ترفعوا اصوتكم فوق صوت النبي ولا تجهروا له بالقول كجهر بعضكم لبعض ان تحبط اعملكم وانتم لا تشعرون
क्योंकि जो ईश्वर के संदेशवाहक के सामने अपनी आवाज़ें धीमी रखते हैं, वही हैं जिनके मर्मों को ईश्वर ने सावधानी के लिए जाँचा है।
ان الذين يغضون اصوتهم عند رسول الله اوليك الذين امتحن الله قلوبهم للتقوي
उनके लिए क्षमा और विशाल पुरस्कार है।
لهم مغفره واجر عظيم
जो तुम्हें कक्षों के पीछे से पुकारते हैं, उनमें से अधिकतर बुद्धि से काम नहीं लेते।
ان الذين ينادونك من ورا الحجرت اكثرهم لا يعقلون
और यदि वे धैर्य रखते, यहाँ तक कि तुम उनकी ओर निकल आते, तो यह उनके लिए बेहतर होता।
ولو انهم صبروا حتي تخرج اليهم لكان خيرا لهم
और ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
والله غفور رحيم
हे विश्वास करने वालो! यदि कोई अतिक्रमणकारी तुम्हारे पास कोई सूचना लाए, तो स्पष्ट रूप से भेद करो, कहीं ऐसा न हो कि तुम अज्ञान में किसी क़ौम पर आ पड़ो और जो तुमने किया उस पर पछताने वाले बन जाओ।
يايها الذين امنوا ان جاكم فاسق بنبا فتبينوا ان تصيبوا قوما بجهله فتصبحوا علي ما فعلتم ندمين
और जान लो कि ईश्वर का संदेशवाहक तुम्हारे बीच है; यदि वह बहुत-से मामलों में तुम्हारी बात मान लेता, तो तुम कष्ट में पड़ जाते।
واعلموا ان فيكم رسول الله لو يطيعكم في كثير من الامر لعنتم
परंतु ईश्वर ने तुम्हें विश्वास प्रिय बना दिया और उसे तुम्हारे मर्मों में सुशोभित कर दिया, और तुममें नकार, अतिक्रमण और अवज्ञा के प्रति अरुचि जगा दी।
ولكن الله حبب اليكم الايمن وزينه في قلوبكم وكره اليكم الكفر والفسوق والعصيان
यही वे हैं जो सुबुद्धि वाले हैं, ईश्वर के अनुग्रह और उपकार से।
اوليك هم الرشدون فضلا من الله ونعمه
और ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
والله عليم حكيم
और यदि विश्वास करने वालों के दो समूह आपस में लड़ पड़ें, तो उनमें मेल करा दो।
وان طايفتان من المومنين اقتتلوا فاصلحوا بينهما
यदि उन दोनों में से एक समूह दूसरे पर ज़्यादती करे, तो ज़्यादती करने वाले से लड़ो, यहाँ तक कि वह ईश्वर के आदेश की ओर आ जाए।
فان بغت احديهما علي الاخري فقتلوا التي تبغي حتي تفي الي امر الله
यदि वह आ जाए, तो न्याय के साथ उनमें मेल करा दो, और निष्पक्ष रहो,
فان فات فاصلحوا بينهما بالعدل واقسطوا
क्योंकि ईश्वर निष्पक्षों से प्रेम करता है।
ان الله يحب المقسطين
विश्वास करने वाले तो केवल भाई हैं; अतः अपने दोनों भाइयों में मेल करा दो।
انما المومنون اخوه فاصلحوا بين اخويكم
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, शायद तुम पर दया की जाए।
واتقوا الله لعلكم ترحمون
हे विश्वास करने वालो! कोई क़ौम किसी क़ौम का उपहास न करे: संभव है वे उनसे बेहतर हों; और न स्त्रियाँ स्त्रियों का उपहास करें: संभव है वे उनसे बेहतर हों।
يايها الذين امنوا لا يسخر قوم من قوم عسي ان يكونوا خيرا منهم ولا نسا من نسا عسي ان يكن خيرا منهن
और कटाक्षों से अपनों की निंदा मत करो, और एक-दूसरे को चिढ़ाने वाले उपनाम मत दो।
ولا تلمزوا انفسكم ولا تنابزوا بالالقب
विश्वास के बाद अतिक्रमण कितना निकृष्ट गुण है!
بيس الاسم الفسوق بعد الايمن
और जो पश्चात्ताप नहीं करता, वही अन्यायी हैं।
ومن لم يتب فاوليك هم الظلمون
हे विश्वास करने वालो! बहुत-से अनुमानों से बचो,
يايها الذين امنوا اجتنبوا كثيرا من الظن
क्योंकि कुछ अनुमान अपराध हैं।
ان بعض الظن اثم
और जासूसी मत करो।
ولا تجسسوا
और तुममें से कोई किसी की पीठ पीछे बुराई न करे।
ولا يغتب بعضكم بعضا
क्या तुममें से किसी को यह प्रिय होगा कि वह अपने मृत भाई का मांस खाए? तुम्हें उससे अरुचि होती।
ايحب احدكم ان ياكل لحم اخيه ميتا فكرهتموه
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो,
واتقوا الله
क्योंकि ईश्वर निरंतर पलट आने वाला, दयालु है।
ان الله تواب رحيم
हे लोगो! हमने तुम्हें नर और मादा रचा, और हमने तुम्हें राष्ट्र और क़बीले बनाया, ताकि तुम एक-दूसरे को पहचानो।
يايها الناس انا خلقنكم من ذكر وانثي وجعلنكم شعوبا وقبايل لتعارفوا
ईश्वर के पास तुममें सबसे सम्मानित निश्चय ही वह है जो सबसे अधिक सावधानी बरतता है,
ان اكرمكم عند الله اتقيكم
क्योंकि ईश्वर सर्वज्ञ, पूरी ख़बर रखने वाला है।
ان الله عليم خبير
प्रतिष्ठित जनों ने कहा: “हमने विश्वास किया।” कहो: “तुमने विश्वास नहीं किया; बल्कि कहो: ‘हम ईश्वर के प्रति खरे हो गए हैं’, क्योंकि विश्वास अभी तुम्हारे मर्मों में प्रविष्ट नहीं हुआ।
قالت الاعراب امنا قل لم تومنوا ولكن قولوا اسلمنا ولما يدخل الايمن في قلوبكم
और यदि तुम ईश्वर और उसके संदेशवाहक की बात मानो, तो वह तुम्हारे कर्मों में से कुछ भी घटाएगा नहीं,
وان تطيعوا الله ورسوله لا يلتكم من اعملكم شيا
क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।”
ان الله غفور رحيم
विश्वास करने वाले तो केवल वही हैं जिन्होंने ईश्वर और उसके संदेशवाहक पर विश्वास किया, फिर संदेह नहीं किया, और जिन्होंने अपनी संपत्ति और अपने स्व से ईश्वर की राह में संघर्ष किया।
انما المومنون الذين امنوا بالله ورسوله ثم لم يرتابوا وجهدوا بامولهم وانفسهم في سبيل الله
यही सच्चे हैं।
اوليك هم الصدقون
कहो: “क्या तुम ईश्वर को अपने विधान की सूचना देना चाहते हो, जबकि ईश्वर जानता है जो आकाशों में है और जो धरती पर है?
قل اتعلمون الله بدينكم والله يعلم ما في السموت وما في الارض
और ईश्वर हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।”
والله بكل شي عليم
वे समझते हैं कि ईश्वर के प्रति खरे हो जाने से वे तुम पर कृपा कर रहे हैं।
يمنون عليك ان اسلموا
कहो: “यह मत समझो कि ईश्वर के प्रति अपने खरेपन से तुम मुझ पर कृपा कर रहे हो।
قل لا تمنوا علي اسلمكم
बल्कि ईश्वर तुम पर कृपा करता है कि उसने तुम्हें विश्वास की ओर मार्ग दिखाया, यदि तुम सच्चे हो।”
بل الله يمن عليكم ان هديكم للايمن ان كنتم صدقين
ईश्वर आकाशों और धरती में जो इंद्रियों से परे है उसे निश्चय ही जानता है।
ان الله يعلم غيب السموت والارض
और ईश्वर तुम जो करते हो उस पर दृष्टि रखता है।
والله بصير بما تعملون