الحجر
Al-Hijr
Until Certainty Comes
بسم الله الرحمن الرحيم
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
अलिफ़. लाम. रा.
الر
ये ग्रंथ के संकेत हैं, और एक स्पष्ट पाठ के।
تلك ءايت الكتب وقرءان مبين
कितनी ही बार नकारने वाले चाहेंगे कि काश वे ईश्वर के प्रति खरे रहे होते।
ربما يود الذين كفروا لو كانوا مسلمين
उन्हें छोड़ दो: वे खाएँ, उपभोग करें, और आशा उन्हें भुलावे में रखे:
ذرهم ياكلوا ويتمتعوا ويلههم الامل
वे शीघ्र ही जान लेंगे।
فسوف يعلمون
हमने कोई बस्ती नष्ट नहीं की, जिसके विषय में उसके पास एक ज्ञात बही न रही हो।
وما اهلكنا من قرية الا ولها كتاب معلوم
कोई समुदाय न अपनी अवधि से आगे बढ़ता है, न उसे पीछे करता है।
ما تسبق من امة اجلها وما يستخرون
और उन्होंने कहा: “हे वह जिस पर स्मरण उतारा गया, तुम अवश्य विक्षिप्त हो! यदि तुम सच्चों में से हो, तो हमारे पास अभिकर्ताओं को क्यों नहीं ले आते?”
وقالوا يايها الذي نزل عليه الذكر انك لمجنون لو ما تاتينا بالمليكة ان كنت من الصدقين
हम अभिकर्ताओं को सत्य के साथ ही उतारते हैं,
ما ننزل المليكة الا بالحق
और तब उन्हें कोई मोहलत न दी जाती।
وما كانوا اذا منظرين
हमीं ने स्मरण को उतारा है,
انا نحن نزلنا الذكر
और हम ही अवश्य उसके रक्षक हैं।
وانا له لحفظون
हमने निश्चय ही तुमसे पहले, पहले वालों के गुटों में संदेशवाहक भेजे,
ولقد ارسلنا من قبلك في شيع الاولين
और उनके पास कोई संदेशवाहक नहीं आता था, जिसका वे मज़ाक़ न उड़ाते हों।
وما ياتيهم من رسول الا كانوا به يستهزءون
इसी प्रकार हम उसे बहिष्कृतों के मर्मों में डालते हैं: वे उस पर विश्वास नहीं करते, जबकि पहले वालों की रीति बीत चुकी है।
كذلك نسلكه في قلوب المجرمين لا يومنون به وقد خلت سنة الاولين
और यदि हम उनके लिए आकाश का कोई द्वार खोल दें, जिससे वे चढ़ते ही रहें, तो वे कहेंगे: “हमारी दृष्टियाँ बस धुंधली कर दी गई हैं; बल्कि हम भ्रम की शिकार क़ौम हैं।”
ولو فتحنا عليهم بابا من السماء فظلوا فيه يعرجون لقالوا انما سكرت ابصرنا بل نحن قوم مسحورون
हमने निश्चय ही आकाश में तारामंडल रखे, और नज़र डालने वालों के लिए उन्हें सजाया, और हर निष्कासित बहकाने वाले से उन्हें सुरक्षित रखा — सिवा उसके जो चोरी से सुन लेता है, और जिसका फिर एक स्पष्ट दहकता प्रक्षेप्य पीछा करता है।
ولقد جعلنا في السماء بروجا وزينها للنظرين وحفظنها من كل شيطن رجيم الا من استرق السمع فاتبعه شهاب مبين
और धरती को हमने फैलाया, और उसमें दृढ़ खूँटे डाले, और उसमें हर तौली हुई वस्तु उगाई, और उसमें तुम्हारे लिए जीवन-साधन बनाए,
والارض مددنها والقينا فيها روسي وانبتنا فيها من كل شىء موزون وجعلنا لكم فيها معيش
और उनके लिए भी जिनकी जीविका देने वाले तुम नहीं हो।
ومن لستم له برزقين
और ऐसी कोई वस्तु नहीं जिसके भंडार हमारे पास न हों,
وان من شىء الا عندنا خزاينه
और हम उसे एक ज्ञात माप के अनुसार ही उतारते हैं।
وما ننزله الا بقدر معلوم
और हमने उर्वर करने वाली हवाएँ भेजीं, और फिर आकाश से पानी उतारा जो हमने तुम्हें पिलाया, और तुम उसे भंडार में रखने वाले नहीं हो।
وارسلنا الريح لوقح فانزلنا من السماء ماء فاسقينكموه وما انتم له بخزنين
और हम ही अवश्य जीवन देते और मृत्यु देते हैं, और हम ही उत्तराधिकारी हैं।
وانا لنحن نحي ونميت ونحن الورثون
हम निश्चय ही तुममें से आगे बढ़ने वालों को जानते हैं, और हम निश्चय ही पीछे रहने वालों को जानते हैं।
ولقد علمنا المستقدمين منكم ولقد علمنا المستخرين
और तुम्हारा अभिभावक ही उन्हें इकट्ठा करेगा,
وان ربك هو يحشرهم
क्योंकि वह प्रज्ञावान, सर्वज्ञ है।
انه حكيم عليم
हमने निश्चय ही मनुष्य को खनकती मिट्टी से, ढली हुई कीचड़ से रचा,
ولقد خلقنا الانسن من صلصل من حما مسنون
और प्रच्छन्नों को हमने पहले तप्त हवा की आग से रचा था।
والجان خلقنه من قبل من نار السموم
और जब तुम्हारे अभिभावक ने अभिकर्ताओं से कहा: “मैं निश्चय ही खनकती मिट्टी से, ढली हुई कीचड़ से एक मानव रचने वाला हूँ; जब मैं उसे गढ़ लूँ और उसमें अपने प्रवाह में से फूँक दूँ, तो उसके सामने झुक जाओ, माथा टेके हुए।”
واذ قال ربك للمليكة اني خلق بشرا من صلصل من حما مسنون فاذا سويته ونفخت فيه من روحي فقعوا له سجدين
तब अभिकर्ताओं ने माथा टेका, सब एक साथ, सिवा इब्लीस के: उसने माथा टेकने वालों में होने से इनकार किया।
فسجد المليكة كلهم اجمعون الا ابليس ابى ان يكون مع السجدين
उसने कहा: “हे इब्लीस, तुम्हें क्या हुआ कि तुम माथा टेकने वालों में नहीं हो?”
قال يابليس ما لك الا تكون مع السجدين
उसने कहा: “मेरे लिए उचित नहीं कि मैं ऐसे मानव के सामने माथा टेकूँ जिसे आपने खनकती मिट्टी से, ढली हुई कीचड़ से रचा है।”
قال لم اكن لاسجد لبشر خلقته من صلصل من حما مسنون
उसने कहा: “तो यहाँ से निकल जाओ, क्योंकि तुम निष्कासित हो, और चुकौती के दिन तक तुम पर निश्चय ही धिक्कार है।”
قال فاخرج منها فانك رجيم وان عليك اللعنة الى يوم الدين
उसने कहा: “मेरे अभिभावक, तो मुझे उस दिन तक मोहलत दीजिए जब वे उठाए जाएँगे।”
قال رب فانظرني الى يوم يبعثون
उसने कहा: “तुम उनमें से हो जिन्हें मोहलत दी जाती है, ज्ञात क्षण के दिन तक।”
قال فانك من المنظرين الى يوم الوقت المعلوم
उसने कहा: “मेरे अभिभावक, इसलिए कि आपने मुझे दिशाहीन होने दिया, मैं उनके लिए धरती पर जो कुछ है उसे अवश्य सुंदर बना दूँगा, और उन सबको अवश्य दिशाहीन कर दूँगा, सिवा उनमें से आपके आज्ञाकारियों के जो निर्मल हैं।”
قال رب بما اغويتني لازينن لهم في الارض ولاغوينهم اجمعين الا عبادك منهم المخلصين
उसने कहा: “यह एक पथ है जो मुझ पर है, एक सीधा पथ।
قال هذا صرط على مستقيم
मेरे आज्ञाकारियों पर तुम्हारा निश्चय ही कोई अधिकार नहीं, सिवा उसके जो दिशाहीनों में से तुम्हारा अनुसरण करेगा।”
ان عبادي ليس لك عليهم سلطن الا من اتبعك من الغاوين
और जहन्नम अवश्य उन सबके वादे का समय है; उसके सात द्वार हैं,
وان جهنم لموعدهم اجمعين لها سبعة ابوب
हर द्वार के लिए उनमें से एक निश्चित भाग है।
لكل باب منهم جزء مقسوم
जिन्होंने सावधानी बरती वे निश्चय ही उद्यानों और सोतों में होंगे: “शांति से, निर्भय होकर इनमें प्रवेश करो।”
ان المتقين في جنت وعيون ادخلوها بسلم ءامنين
और हम उनके सीनों से हर द्वेष निकाल चुके होंगे,
ونزعنا ما في صدورهم من غل
भाई-भाई, आसनों पर, आमने-सामने।
اخونا على سرر متقبلين
वहाँ उन्हें कोई थकान नहीं छुएगी,
لا يمسهم فيها نصب
और वे वहाँ से कभी निकाले नहीं जाएँगे।
وما هم منها بمخرجين
मेरे आज्ञाकारियों को सूचित करो कि मैं ही अत्यंत क्षमाशील, दयालु हूँ, और मेरा दंड ही पीड़ादायक दंड है।
نبي عبادي اني انا الغفور الرحيم وان عذابي هو العذاب الاليم
और उन्हें इब्राहीम के अतिथियों के विषय में सूचित करो, जब उन्होंने उसके यहाँ प्रवेश किया और कहा: “शांति!”
ونبيهم عن ضيف ابرهيم اذ دخلوا عليه فقالوا سلما
उसने कहा: “हम निश्चय ही तुम्हारे कारण सिहर रहे हैं।”
قال انا منكم وجلون
उन्होंने कहा: “मत सिहरो, क्योंकि हम तुम्हें एक ज्ञानी बालक का शुभ समाचार देते हैं।”
قالوا لا توجل انا نبشرك بغلم عليم
उसने कहा: “क्या तुम मुझे यह शुभ समाचार देते हो, जबकि बुढ़ापा मुझे छू चुका है? तो फिर तुम मुझे क्या शुभ समाचार देते हो?”
قال ابشرتموني على ان مسني الكبر فبم تبشرون
उन्होंने कहा: “हम तुम्हें यह शुभ समाचार पूर्ण सत्य के साथ देते हैं: तो हताश होने वालों में से मत हो।”
قالوا بشرنك بالحق فلا تكن من القنطين
उसने कहा: “और अपने अभिभावक की दया से कौन हताश होता है, सिवा भटके हुओं के?”
قال ومن يقنط من رحمة ربه الا الضالون
उसने कहा: “तो तुम्हारा क्या हाल है, हे भेजे गए जनो?”
قال فما خطبكم ايها المرسلون
उन्होंने कहा: “हम एक बहिष्कृत क़ौम की ओर भेजे गए हैं, सिवा लूत के कुल के।
قالوا انا ارسلنا الى قوم مجرمين الا ءال لوط
हम उन सबको अवश्य उबारेंगे, सिवा उसकी पत्नी के: हमने निर्धारित किया है कि वह अवश्य पीछे रह जाने वालों में से है।”
انا لمنجوهم اجمعين الا امراته قدرنا انها لمن الغبرين
और जब भेजे गए जन लूत के कुल के पास आए, तो उसने कहा: “तुम ऐसी क़ौम हो जिससे मैं अपरिचित हूँ।”
فلما جاء ءال لوط المرسلون قال انكم قوم منكرون
उन्होंने कहा: “बल्कि हम तुम्हारे पास वह लेकर आए हैं जिस पर वे वाद-प्रतिवाद करते थे। हम तुम्हारे पास सत्य लेकर आए हैं, और हम अवश्य सच्चे हैं।
قالوا بل جينك بما كانوا فيه يمترون واتينك بالحق وانا لصدقون
तो अपने परिवार के साथ रात के एक भाग में चल पड़ो, और उनके पीछे-पीछे चलो, और तुममें से कोई मुड़कर न देखे, और वहाँ जाओ जहाँ का तुम्हें आदेश दिया गया है।”
فاسر باهلك بقطع من اليل واتبع ادبرهم ولا يلتفت منكم احد وامضوا حيث تومرون
और हमने उसके लिए यह आदेश तय कर दिया: इनका अंतिम अवशेष प्रातः विच्छिन्न कर दिया जाएगा।
وقضينا اليه ذلك الامر ان دابر هولاء مقطوع مصبحين
और राजधानी वाले हर्षोल्लास में आए।
وجاء اهل المدينة يستبشرون
उसने कहा: “ये मेरे अतिथि हैं: मुझे अपमानित मत करो,
قال ان هولاء ضيفي فلا تفضحون
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, और मुझे लज्जित मत करो।”
واتقوا الله ولا تخزون
उन्होंने कहा: “क्या हमने तुम्हें किसी भी व्यक्ति से मना नहीं किया था?”
قالوا اولم ننهك عن العلمين
उसने कहा: “ये मेरी बेटियाँ हैं, यदि तुम्हें करना ही है।”
قال هولاء بناتي ان كنتم فعلين
तुम्हारे जीवन की शपथ, वे अपने नशे में अवश्य टटोलते फिर रहे थे।
لعمرك انهم لفي سكرتهم يعمهون
तब सूर्योदय के समय चीख़ ने उन्हें पकड़ लिया, और हमने उसके ऊपरी भाग को उसका निचला भाग बना दिया, और उन पर ढली हुई मिट्टी के पत्थर बरसाए।
فاخذتهم الصيحة مشرقين فجعلنا عليها سافلها وامطرنا عليهم حجارة من سجيل
इसमें अवश्य उनके लिए संकेत हैं जो निशान पहचानना जानते हैं।
ان في ذلك لءايت للمتوسمين
और वह अवश्य एक टिकी हुई राह पर है।
وانها لبسبيل مقيم
इसमें अवश्य विश्वास करने वालों के लिए एक संकेत है।
ان في ذلك لءاية للمومنين
और झाड़ी वाले अवश्य अन्यायी थे,
وان كان اصحب الايكة لظلمين
तो हमने उनसे प्रतिशोध लिया,
فانتقمنا منهم
और वे दोनों अवश्य एक स्पष्ट संदर्भ पर हैं।
وانهما لبامام مبين
हिज्र वालों ने निश्चय ही भेजे गए जनों को झुठलाया,
ولقد كذب اصحب الحجر المرسلين
और हमने उन्हें अपने संकेत दिए, परंतु वे उनसे कतरा गए।
وءاتينهم ءايتنا فكانوا عنها معرضين
और वे पहाड़ों में घर तराशते थे, पूरी सुरक्षा में।
وكانوا ينحتون من الجبال بيوتا ءامنين
तब प्रातः चीख़ ने उन्हें पकड़ लिया,
فاخذتهم الصيحة مصبحين
और जो उन्होंने कमाया था वह उनके कुछ काम न आया।
فما اغنى عنهم ما كانوا يكسبون
हमने आकाशों, धरती और जो उनके बीच है, उन्हें पूर्ण सत्य के साथ ही रचा है।
وما خلقنا السموت والارض وما بينهما الا بالحق
और वह घड़ी अवश्य आने वाली है:
وان الساعة لءاتية
तो पन्ना पलट दो, गरिमा के साथ,
فاصفح الصفح الجميل
क्योंकि तुम्हारा अभिभावक महा-रचयिता है, सर्वज्ञ।
ان ربك هو الخلق العليم
हमने तुम्हें निश्चय ही छंदों में से सात दिए, और विशाल पाठ।
ولقد ءاتينك سبعا من المثاني والقرءان العظيم
अपनी आँखें उसकी ओर मत फैलाओ जिसका हमने उनमें से कुछ जोड़ों को उपभोग कराया,
لا تمدن عينيك الى ما متعنا به ازوجا منهم
और उनके लिए दुखी मत हो,
ولا تحزن عليهم
और विश्वास करने वालों के लिए अपना पंख झुका लो।
واخفض جناحك للمومنين
और कहो: “मैं ही निश्चय ही स्पष्ट चेतावनी देने वाला हूँ” — वैसा ही जैसा हमने उन पर उतारा जिन्होंने उसे आपस में बाँट लिया, जिन्होंने इस पाठ को बिखरे हुए टुकड़े बना दिया।
وقل اني انا النذير المبين كما انزلنا على المقتسمين الذين جعلوا القرءان عضين
तुम्हारे अभिभावक की शपथ, हम उन सबसे अवश्य पूछेंगे कि वे क्या करते थे।
فوربك لنسلنهم اجمعين عما كانوا يعملون
तो जो तुम्हें आदेश दिया गया है उसे खुलकर घोषित करो,
فاصدع بما تومر
और साझी ठहराने वालों से कतराओ,
واعرض عن المشركين
क्योंकि हम तुम्हारे लिए उन मज़ाक़ उड़ाने वालों के विरुद्ध पर्याप्त रहे हैं, जो ईश्वर के साथ कोई और देवता रखते हैं:
انا كفينك المستهزءين الذين يجعلون مع الله الها ءاخر
वे शीघ्र ही जान लेंगे।
فسوف يعلمون
हम निश्चय ही जानेंगे कि वे जो कहते हैं उससे तुम्हारा सीना तंग होता है:
ولقد نعلم انك يضيق صدرك بما يقولون
तो प्रशंसा के साथ अपने अभिभावक की महिमा गाओ, और माथा टेकने वालों में रहो,
فسبح بحمد ربك وكن من السجدين
और अपने अभिभावक की आज्ञा का पालन करो, जब तक तुम्हारे पास यक़ीन न आ जाए।
واعبد ربك حتى ياتيك اليقين