القلم
Al-Qalam
The Pen
بسم الله الرحمن الرحيم
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
नून.
ن
क़लम की शपथ, और उसकी जो वे पंक्तियों में अंकित करते हैं! तुम अपने अभिभावक के उपकार से विक्षिप्त नहीं हो। और तुम्हारे लिए अवश्य ऐसा पुरस्कार है जो तुम्हें जताया नहीं जाएगा। और तुम अवश्य विशाल चरित्र के हो।
والقلم وما يسطرون ما انت بنعمة ربك بمجنون وان لك لاجرا غير ممنون وانك لعلى خلق عظيم
तुम स्पष्ट देख लोगे, और वे स्पष्ट देख लेंगे, कि तुममें से परीक्षा में डाला गया कौन है।
فستبصر ويبصرون باييكم المفتون
तुम्हारा अभिभावक सबसे अच्छी तरह जानता है कि कौन उसकी राह से भटक गया,
ان ربك هو اعلم بمن ضل عن سبيله
और वह मार्गदर्शन पाने वालों को सबसे अच्छी तरह जानता है।
وهو اعلم بالمهتدين
तो झुठलाने वालों की बात मत मानो।
فلا تطع المكذبين
वे चाहते हैं कि तुम लचीले हो जाओ: तो वे लचीले हो जाएँगे।
ودوا لو تدهن فيدهنون
और किसी भी बहुत शपथें खाने वाले, तुच्छ, चुभने वाले निंदक, निंदा फैलाने वाले, अच्छाई को रोकने वाले, सीमाएँ पार करने वाले, अपराधी, क्रूर की बात मत मानो, और इसके अतिरिक्त समाज पर उगी गाँठ की — इसलिए कि वह संपत्ति और पुत्रों वाला है। जब उसे हमारे संकेत सुनाए जाते हैं, तो वह कहता है: “प्राचीनों की दंतकथाएँ!”
ولا تطع كل حلاف مهين هماز مشاء بنميم مناع للخير معتد اثيم عتل بعد ذلك زنيم ان كان ذا مال وبنين اذا تتلى عليه ءايتنا قال اسطير الاولين
हम उसकी थूथन पर छाप लगाएँगे।
سنسمه على الخرطوم
हमने उन्हें परखा जैसे हमने उद्यान वालों को परखा था, जब उन्होंने शपथ ली कि वे सुबह उसकी फ़सल काटेंगे, बिना कोई अपवाद रखे,
انا بلونهم كما بلونا اصحب الجنة اذ اقسموا ليصرمنها مصبحين ولا يستثنون
और तुम्हारे अभिभावक की ओर से एक फेरा उस पर से गुज़र गया, जबकि वे सो रहे थे, जिससे वह झुलसी हुई धरती जैसा हो गया।
فطاف عليها طايف من ربك وهم نايمون فاصبحت كالصريم
उन्होंने सुबह एक-दूसरे को पुकारा: “अपनी खेती की ओर सुबह-सवेरे निकलो, यदि तुम उसे काटना चाहते हो।”
فتنادوا مصبحين ان اغدوا على حرثكم ان كنتم صرمين
तो वे आपस में फुसफुसाते हुए चल पड़े: “आज तुम्हारे बीच कोई दरिद्र उसमें प्रवेश न करे।”
فانطلقوا وهم يتخفتون ان لا يدخلنها اليوم عليكم مسكين
और वे सुबह-सवेरे निकले, अड़े हुए, सामर्थ्यवान।
وغدوا على حرد قدرين
फिर जब उन्होंने उसे देखा, तो कहा: “हम अवश्य भटके हुए हैं; बल्कि हम वंचित हैं!”
فلما راوها قالوا انا لضالون بل نحن محرومون
उनमें से सबसे संतुलित ने कहा: “क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था: तुम महिमा क्यों नहीं गाते?”
قال اوسطهم الم اقل لكم لولا تسبحون
उन्होंने कहा: “हमारे अभिभावक की महिमा हो! हम निश्चय ही अन्यायी रहे।”
قالوا سبحن ربنا انا كنا ظلمين
और वे एक-दूसरे के सामने आए, आपस में एक-दूसरे पर दोषारोपण करते हुए।
فاقبل بعضهم على بعض يتلومون
उन्होंने कहा: “हाय हम पर! हम निश्चय ही हर मर्यादा से आगे निकल गए। संभव है कि हमारा अभिभावक हमें इसके बदले इससे बेहतर दे; हम निश्चय ही उत्कंठा से अपने अभिभावक की ओर ही मुड़ते हैं।”
قالوا يويلنا انا كنا طغين عسى ربنا ان يبدلنا خيرا منها انا الى ربنا رغبون
दंड ऐसा ही है।
كذلك العذاب
और अंतिम जीवन का दंड अधिक बड़ा है, यदि वे जानते।
ولعذاب الءاخرة اكبر لو كانوا يعلمون
सावधानी बरतने वालों के लिए, उनके अभिभावक के पास, निश्चय ही उपकार के उद्यान हैं।
ان للمتقين عند ربهم جنت النعيم
क्या हम ईश्वर के प्रति खरों को बहिष्कृतों के समान ठहराएँगे?
افنجعل المسلمين كالمجرمين
तुम्हें क्या हुआ है?
ما لكم
तुम कैसा निर्णय करते हो?
كيف تحكمون
या फिर क्या तुम्हारे पास कोई ग्रंथ है जिसमें तुम अध्ययन करते हो, जिसमें तुम्हें अवश्य वह सब मिल जाता जिसे तुम चुनते हो?
ام لكم كتب فيه تدرسون ان لكم فيه لما تخيرون
या फिर क्या तुम्हारे पास हम पर ऐसी शपथें हैं जो पेशी के दिन तक पहुँचती हैं: कि तुम्हें अवश्य वही मिलेगा जो तुम निर्णय करते हो?
ام لكم ايمن علينا بلغة الى يوم القيمة ان لكم لما تحكمون
उनसे पूछो कि उनमें से कौन इसका ज़ामिन है।
سلهم ايهم بذلك زعيم
या फिर क्या उनके कोई साझीदार हैं? तो वे अपने साझीदारों को ले आएँ, यदि वे सच्चे हैं।
ام لهم شركاء فلياتوا بشركايهم ان كانوا صدقين
जिस दिन एक पिंडली उघाड़ी जाएगी, और वे माथा टेकने के लिए बुलाए जाएँगे, तो वे ऐसा नहीं कर सकेंगे,
يوم يكشف عن ساق ويدعون الى السجود فلا يستطيعون
उनकी दृष्टियाँ विनीत, अपमान उन्हें ढकता हुआ,
خشعة ابصرهم ترهقهم ذلة
जबकि वे उस समय माथा टेकने के लिए बुलाए जाते थे जब वे अक्षत थे।
وقد كانوا يدعون الى السجود وهم سلمون
तो मुझे उसके साथ छोड़ दो जो इस वार्ता को झुठलाता है।
فذرني ومن يكذب بهذا الحديث
हम उन्हें क्रमशः वहाँ से ले जाएँगे जहाँ से वे नहीं जानते, और मैं उन्हें ढील देता हूँ,
سنستدرجهم من حيث لا يعلمون واملي لهم
क्योंकि मेरी चाल पक्की है।
ان كيدي متين
या फिर तुम उनसे कोई पुरस्कार माँगते हो, इसलिए वे ऋण से लदे हुए हैं?
ام تسلهم اجرا فهم من مغرم مثقلون
या फिर उनके पास वह है जो इंद्रियों से परे है, इसलिए वे उसे लिख लेते हैं?
ام عندهم الغيب فهم يكتبون
तो अपने अभिभावक के निर्णय के सामने धैर्य रखो, और मछली वाले जैसे मत हो, जब उसने पुकारा जबकि वह अपने को रोके हुए था।
فاصبر لحكم ربك ولا تكن كصاحب الحوت اذ نادى وهو مكظوم
यदि उसके अभिभावक का वह उपकार न होता जिसने उसे सँभाल लिया, तो वह तिरस्कृत होकर नंगी भूमि पर फेंक दिया जाता।
لولا ان تدركه نعمة من ربه لنبذ بالعراء وهو مذموم
परंतु उसके अभिभावक ने उसे चुन लिया और उसे भलों में से एक बना दिया।
فاجتبه ربه فجعله من الصلحين
और नकारने वाले अवश्य तुम्हें अपनी दृष्टियों से ठोकर खिलाने ही वाले हैं, जब वे स्मरण सुनते हैं, और वे कहते हैं: “वह अवश्य विक्षिप्त है।”
وان يكاد الذين كفروا ليزلقونك بابصرهم لما سمعوا الذكر ويقولون انه لمجنون
और यह तो सभी प्राणियों के लिए केवल एक स्मरण है।
وما هو الا ذكر للعلمين