الشمس
Ash-Shams
He Who Purifies It
بسم الله الرحمن الرحيم
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
सूर्य की और उसकी पूर्वाह्न की उजास की शपथ! चंद्रमा की जब वह उसके पीछे आता है! दिन की जब वह उसे उजागर करता है! रात की जब वह उसे ढक लेती है! आकाश की और उसकी जिसने उसे बनाया! धरती की और उसकी जिसने उसे फैलाया! एक स्व की, और उसकी जिसने उसे सँवारा, फिर उसके मन में उसका दुराचार और उसकी सावधानी प्रकट की! सफल हुआ निश्चय ही वह जो उसे शुद्ध करता है, और असफल हुआ निश्चय ही वह जो उसे दबा देता है।
والشمس وضحىها والقمر اذا تلىها والنهار اذا جلىها واليل اذا يغشىها والسماء وما بنىها والارض وما طحىها ونفس وما سوىها فالهمها فجورها وتقوىها قد افلح من زكىها وقد خاب من دسىها
समूद ने अपनी मर्यादाहीनता से झुठलाया, जब उनमें का सबसे अभागा उठाया गया। तब ईश्वर के संदेशवाहक ने उनसे कहा: “ईश्वर की ऊँटनी, और उसका पानी पीना!” परंतु उन्होंने उसे झुठलाया और उसका अंग-भंग कर दिया। तब उनके अभिभावक ने उनके दोष के कारण उन्हें कुचल दिया, और उन्हें समतल कर दिया।
كذبت ثمود بطغوىها اذ انبعث اشقىها فقال لهم رسول الله ناقة الله وسقيها فكذبوه فعقروها فدمدم عليهم ربهم بذنبهم فسوىها
तो वह उसके परिणाम से नहीं डरता।
ولا يخاف عقبها