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القرآن

العاديات

Al-Adiyat

The Ingrate, Witness to Himself

अध्याय 100 · 11 पद

بسم ٱلله ٱلرحمن ٱلرحيم

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।

100:1–8

उनकी शपथ जो सीमाएँ पार करती हैं, हाँफती हुई, जो टकराकर चिंगारी जलाती हैं, जो भोर में धावा बोलती हैं, और इस तरह धूल उड़ाती हैं, और उसके साथ एक जमावड़े के बीच में जा घुसती हैं! मनुष्य अपने अभिभावक के प्रति अवश्य विद्रोही एहसान-फ़रामोशी करता है, और वह स्वयं इसका अवश्य साक्षी है, और अच्छाई के प्रेम में वह अवश्य तीव्र है।

وٱلعديت ضبحا فٱلموريت قدحا فٱلمغيرت صبحا فأثرن به نقعا فوسطن به جمعا إن ٱلإنسن لربه لكنود وإنه على ذلك لشهيد وإنه لحب ٱلخير لشديد

100:9–11

तो क्या वह नहीं जानता कि जब वह उलट-पुलट कर दिया जाएगा जो क़ब्रों में है, और निकाल लिया जाएगा जो सीनों में है, तब उनका अभिभावक उस दिन उनके विषय में अवश्य पूरी ख़बर रखने वाला होगा?

أفلا يعلم إذا بعثر ما في ٱلقبور وحصل ما في ٱلصدور إن ربهم بهم يومئذ لخبير

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