الشورى
Ash-Shura
One Single Law
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। हा. मीम. ऐन. सीन. क़ाफ़.
بِسۡمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحۡمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ حۭمٓ عٓسٓقٓۚ
इसी प्रकार ईश्वर, सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान, तुम पर प्रकट करता है — जैसे उन पर जो तुमसे पहले हुए।
كَذَٰلِكَ يُوحِيٓ إِلَيۡكَ وَإِلَى اَ۬لَّذِينَ مِن قَبۡلِكَ اَ۬للَّهُ اُ۬لۡعَزِيزُ اُ۬لۡحَكِيمُ
आकाशों में जो है और धरती पर जो है, वह उसी का है,
لَهُۥ مَا فِي اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي اِ۬لۡأَرۡضِۖ
और वह परम-उच्च, विशाल है।
وَهۡوَ اَ۬لۡعَلِيُّ اُ۬لۡعَظِيمُ
निकट है कि आकाश ऊपर से फट पड़ें,
۞ تَكَادُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتُ يَنفَطِرۡنَ مِن فَوۡقِهِنَّۚ
जबकि अभिकर्ता अपने अभिभावक की प्रशंसा करते हुए महिमा गाते हैं और धरती पर जो है उसके लिए क्षमा माँगते हैं।
وَاَلۡمَلَٰٓئِكَةُ يُسَبِّحُونَ بِحَمۡدِ رَبِّهِمۡ وَيَسۡتَغۡفِرُونَ لِمَن فِي اِ۬لۡأَرۡضِۗ
क्या ऐसा नहीं है: ईश्वर, वही निश्चय ही अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
أَلَآ إِنَّ اَ۬للَّهَ هُوَ اَ۬لۡغَفُورُ اُ۬لرَّحِيمُ
और जो उसके अतिरिक्त हिमायती बनाते हैं, उन पर ईश्वर रक्षक है;
وَاَلَّذِينَ اَ۪تَّخَذُواْ مِن دُونِهِۦٓ أَوۡلِيَآءَ اَ۬للَّهُ حَفِيظٌ عَلَيۡهِمۡ
और तुम उनके लिए मुख़्तार नहीं हो।
وَمَآ أَنتَ عَلَيۡهِم بِوَكِيلٖ
इसी प्रकार हमने तुम पर एक त्रुटिहीन पाठ प्रकट किया, ताकि तुम बस्तियों के महानगर को और जो उसके आसपास हैं उन्हें चेतावनी दो, और एकत्र होने के दिन की चेतावनी दो, जिसमें कोई संदेह नहीं:
وَكَذَٰلِكَ أَوۡحَيۡنَآ إِلَيۡكَ قُرۡءَانًا عَرَبِيّٗا لِّتُنذِرَ أُمَّ اَ۬لۡقُر۪يٰ وَمَنۡ حَوۡلَهَا وَتُنذِرَ يَوۡمَ اَ۬لۡجَمۡعِ لَا رَيۡبَ فِيهِۚ
एक भाग उद्यान में,
فَرِيقٞ فِي اِ۬لۡجَنَّةِ
और एक भाग दहकते अंगार में।
وَفَرِيقٞ فِي اِ۬لسَّعِيرِ
और यदि ईश्वर की मर्ज़ी होती, तो वह उन्हें एक ही समुदाय बना देता,
وَلَوۡ شَآءَ اَ۬للَّهُ لَجَعَلَهُمۡ أُمَّةٗ وَٰحِدَةٗ
परंतु वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे अपनी दया में प्रवेश देता है;
وَلَٰكِن يُدۡخِلُ مَن يَشَآءُ فِي رَحۡمَتِهِۦۚ
और अन्यायियों के लिए न कोई हिमायती है और न कोई सहायता।
وَاَلظَّٰلِمُونَ مَا لَهُم مِّن وَلِيّٖ وَلَا نَصِيرٍ
या फिर क्या उन्होंने उसके अतिरिक्त हिमायती बना लिए हैं?
أَمِ اِ۪تَّخَذُواْ مِن دُونِهِۦٓ أَوۡلِيَآءَۖ
हिमायती तो ईश्वर ही है,
فَاَللَّهُ هُوَ اَ۬لۡوَلِيُّ
और वही मृतकों को पुनः जीवन देता है;
وَهۡوَ يُحۡيِ اِ۬لۡمَوۡتۭيٰ
और वह हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।
وَهۡوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ
और जिस भी चीज़ में तुम मतभेद रखते हो, उसका निर्णय ईश्वर के पास जाता है।
وَمَا اَ۪خۡتَلَفۡتُمۡ فِيهِ مِن شَيۡءٖ فَحُكۡمُهُۥٓ إِلَى اَ۬للَّهِۚ
यही ईश्वर है, मेरा अभिभावक;
ذَٰلِكُمُ اُ۬للَّهُ رَبِّي
उसी को मैं मुख़्तार बनाता हूँ,
عَلَيۡهِ تَوَكَّلۡتُ
और उसी का आसरा लेता हूँ।
وَإِلَيۡهِ أُنِيبُ
आकाशों और धरती का उद्गम, उसने तुम्हारे लिए तुम्हीं में से जोड़े बनाए, और पशुधन में से भी जोड़े; इसी के द्वारा वह तुम्हें बिखेरता है।
فَاطِرُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِۚ جَعَلَ لَكُم مِّنۡ أَنفُسِكُمۡ أَزۡوَٰجٗا وَمِنَ اَ۬لۡأَنۡعَٰمِ أَزۡوَٰجٗا يَذۡرَؤُكُمۡ فِيهِۚ
उसके जैसा कुछ भी नहीं,
لَيۡسَ كَمِثۡلِهِۦ شَيۡءٞۖ
और वह सुनने वाला, दृष्टिवान है।
وَهۡوَ اَ۬لسَّمِيعُ اُ۬لۡبَصِيرُ
आकाशों और धरती की ज़िम्मेदारियाँ उसी की हैं;
لَهُۥ مَقَالِيدُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِۖ
वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसके लिए जीविका फैलाता है, और उसे मापता है,
يَبۡسُطُ اُ۬لرِّزۡقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقۡدِرُۚ
क्योंकि वह हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।
إِنَّهُۥ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٞ
उसने तुम्हारे लिए विधान में वही स्थापित किया जिसकी अनुशंसा उसने नूह को की थी, और जो हमने तुम्हारी ओर प्रकट किया, और जिसकी अनुशंसा हमने इब्राहीम, मूसा और ईसा को की: “विधान को बनाए रखो, और उसके भीतर फूट में मत पड़ो।”
۞ شَرَعَ لَكُم مِّنَ اَ۬لدِّينِ مَا وَصَّىٰ بِهِۦ نُوحٗا وَاَلَّذِيٓ أَوۡحَيۡنَآ إِلَيۡكَ وَمَا وَصَّيۡنَا بِهِۦٓ إِبۡرَٰهِيمَ وَمُوسۭيٰ وَعِيسۭيٰٓ أَنۡ أَقِيمُواْ اُ۬لدِّينَ وَلَا تَتَفَرَّقُواْ فِيهِۚ
जिसकी ओर तुम उन्हें बुलाते हो, वह साझी ठहराने वालों पर भारी पड़ता है।
كَبُرَ عَلَى اَ۬لۡمُشۡرِكِينَ مَا تَدۡعُوهُمۡ إِلَيۡهِۚ
ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे अपने लिए चुन लेता है, और जो उसका आसरा लेता है उसे अपनी ओर मार्ग दिखाता है।
اِ۬للَّهُ يَجۡتَبِيٓ إِلَيۡهِ مَن يَشَآءُ وَيَهۡدِيٓ إِلَيۡهِ مَن يُنِيبُ
और वे ज्ञान आ जाने के बाद ही आपस में फूट में पड़े,
وَمَا تَفَرَّقُوٓاْ إِلَّا مِنۢ بَعۡدِ مَا جَآءَهُمُ اُ۬لۡعِلۡمُ
आपस की ज़्यादती के कारण।
بَغۡيَۢا بَيۡنَهُمۡۚ
और यदि नामित अवधि तक के लिए तुम्हारे अभिभावक का पहले का बोल न होता, तो उनके बीच फ़ैसला कर दिया गया होता।
وَلَوۡلَا كَلِمَةٞ سَبَقَتۡ مِن رَّبِّكَ إِلَىٰٓ أَجَلٖ مُّسَمّٗى لَّقُضِيَ بَيۡنَهُمۡۚ
और जिन्हें उनके बाद ग्रंथ विरासत में मिला, वे उसके विषय में अवश्य व्याकुल करने वाली दुविधा में हैं।
وَإِنَّ اَ۬لَّذِينَ أُورِثُواْ اُ۬لۡكِتَٰبَ مِنۢ بَعۡدِهِمۡ لَفِي شَكّٖ مِّنۡهُ مُرِيبٖ
इसलिए बुलाओ और जैसा तुम्हें आदेश दिया गया है वैसे सीधे डटे रहो, और उनकी भावनाओं का अनुसरण मत करो।
فَلِذَٰلِكَ فَاَدۡعُۖ وَاَسۡتَقِمۡ كَمَآ أُمِرۡتَۖ وَلَا تَتَّبِعۡ أَهۡوَآءَهُمۡۖ
और कहो: “मैं हर उस ग्रंथ पर विश्वास करता हूँ जिसे ईश्वर ने उतारा है, और मुझे तुम्हारे बीच न्यायी होने का आदेश दिया गया है।
وَقُلۡ ءَامَنتُ بِمَآ أَنزَلَ اَ۬للَّهُ مِن كِتَٰبٖۖ وَأُمِرۡتُ لِأَعۡدِلَ بَيۡنَكُمُۖ
ईश्वर हमारा अभिभावक है और तुम्हारा अभिभावक है;
اُ۬للَّهُ رَبُّنَا وَرَبُّكُمۡۖ
हमारे लिए हमारे कर्म, तुम्हारे लिए तुम्हारे;
لَنَآ أَعۡمَٰلُنَا وَلَكُمۡ أَعۡمَٰلُكُمۡۖ
हमारे और तुम्हारे बीच कोई तर्क नहीं;
لَا حُجَّةَ بَيۡنَنَا وَبَيۡنَكُمُۖ
ईश्वर हमें एकत्र करेगा,
اُ۬للَّهُ يَجۡمَعُ بَيۡنَنَاۖ
और उसी की ओर गंतव्य है।”
وَإِلَيۡهِ اِ۬لۡمَصِيرُ
और जो ईश्वर के विषय में विवाद करते हैं, उसे उत्तर दिए जाने के बाद, उनका तर्क उनके अभिभावक के पास व्यर्थ है, और उन पर क्रोध है,
وَاَلَّذِينَ يُحَآجُّونَ فِي اِ۬للَّهِ مِنۢ بَعۡدِ مَا اَ۟سۡتُجِيبَ لَهُۥ حُجَّتُهُمۡ دَاحِضَةٌ عِندَ رَبِّهِمۡ وَعَلَيۡهِمۡ غَضَبٞ
और उनके लिए कठोर दंड है।
وَلَهُمۡ عَذَابٞ شَدِيدٌ
ईश्वर ही है जिसने सत्य को वहन करने वाला ग्रंथ उतारा, और तराज़ू भी।
اِ۬للَّهُ اُ۬لَّذِيٓ أَنزَلَ اَ۬لۡكِتَٰبَ بِالۡحَقِّ وَاَلۡمِيزَانَۗ
और तुम्हें इसका क्या अंदाज़ा दिलाए?
وَمَا يُدۡرِيكَ
हो सकता है कि वह घड़ी निकट हो।
لَعَلَّ اَ۬لسَّاعَةَ قَرِيبٞ
जो इसमें विश्वास नहीं करते वे इसे जल्दी माँगते हैं,
يَسۡتَعۡجِلُ بِهَا اَ۬لَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِهَاۖ
जबकि जिन्होंने विश्वास किया वे उससे आशंका से भरे हैं और जानते हैं कि वह सत्य है।
وَاَلَّذِينَ ءَامَنُواْ مُشۡفِقُونَ مِنۡهَا وَيَعۡلَمُونَ أَنَّهَا اَ۬لۡحَقُّۗ
क्या ऐसा नहीं है: जो घड़ी के विषय में वाद-प्रतिवाद करते हैं वे अवश्य दूर के भटकाव में हैं।
أَلَآ إِنَّ اَ۬لَّذِينَ يُمَارُونَ فِي اِ۬لسَّاعَةِ لَفِي ضَلَٰلِۢ بَعِيدٍ
ईश्वर अपने आज्ञाकारियों के प्रति सूक्ष्म है;
۞ اِ۬للَّهُ لَطِيفُۢ بِعِبَادِهِۦ
वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे जीविका देता है,
يَرۡزُقُ مَن يَشَآءُۖ
और वही बलवान, सर्वशक्तिमान है।
وَهۡوَ اَ۬لۡقَوِيُّ اُ۬لۡعَزِيزُ
जो अंतिम जीवन की खेती चाहता है, हम उसकी खेती बढ़ा देते हैं;
مَن كَانَ يُرِيدُ حَرۡثَ اَ۬لۡأٓخِرَةِ نَزِدۡ لَهُۥ فِي حَرۡثِهِۦۖ
और जो निकट जीवन की खेती चाहता है, हम उसे उसमें से एक हिस्सा देते हैं,
وَمَن كَانَ يُرِيدُ حَرۡثَ اَ۬لدُّنۡيۭا نُؤۡتِهۡ مِنۡهَا
परंतु अंतिम जीवन में उसका कोई अंश नहीं होगा।
وَمَا لَهُۥ فِي اِ۬لۡأٓخِرَةِ مِن نَّصِيبٍ
या फिर क्या उनके ऐसे साझीदार हैं जिन्होंने उनके लिए विधान में वह स्थापित किया जिसकी ईश्वर ने अनुमति नहीं दी?
أَمۡ لَهُمۡ شُرَكَٰٓؤُاْ شَرَعُواْ لَهُم مِّنَ اَ۬لدِّينِ مَا لَمۡ يَأۡذَنۢ بِهِ اِ۬للَّهُۚ
और पृथक्करण का बोल न होता, तो उनके बीच फ़ैसला कर दिया गया होता;
وَلَوۡلَا كَلِمَةُ اُ۬لۡفَصۡلِ لَقُضِيَ بَيۡنَهُمۡۗ
और अन्यायियों के लिए निश्चय ही पीड़ादायक दंड होगा।
وَإِنَّ اَ۬لظَّٰلِمِينَ لَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ
तुम अन्यायियों को उससे आशंकित देखोगे जो उन्होंने कमाया है, जबकि वह उन पर आने वाला है;
تَرَى اَ۬لظَّٰلِمِينَ مُشۡفِقِينَ مِمَّا كَسَبُواْ وَهۡوَ وَاقِعُۢ بِهِمۡۗ
जबकि जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, वे उद्यानों की पुष्पित वाटिकाओं में होंगे,
وَاَلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ فِي رَوۡضَاتِ اِ۬لۡجَنَّاتِۖ
उनके अभिभावक के पास उनके लिए वह होगा जो उनकी मर्ज़ी हो:
لَهُم مَّا يَشَآءُونَ عِندَ رَبِّهِمۡۚ
यही बड़ा अनुग्रह है।
ذَٰلِكَ هُوَ اَ۬لۡفَضۡلُ اُ۬لۡكَبِيرُ
यही है जिसका शुभ समाचार ईश्वर अपने उन आज्ञाकारियों को देता है जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए।
ذَٰلِكَ اَ۬لَّذِي يَبۡشُرُ اُ۬للَّهُ عِبَادَهُ اُ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِۗ
कहो: “मैं इसके बदले तुमसे कोई पुरस्कार नहीं माँगता, सिवा निकटजनों के प्रति स्नेह के।”
قُل لَّآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ أَجۡرًا إِلَّا اَ۬لۡمَوَدَّةَ فِي اِ۬لۡقُرۡبۭيٰۗ
और जो कोई भलाई कमाता है, हम उसके लिए उसका सौंदर्य बढ़ा देते हैं;
وَمَن يَقۡتَرِفۡ حَسَنَةٗ نَّزِدۡ لَهُۥ فِيهَا حُسۡنًاۚ
क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, अत्यंत कृतज्ञ है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ غَفُورٞ شَكُورٌ
या फिर क्या वे कहेंगे कि उसने ईश्वर पर झूठ गढ़ा है?
أَمۡ يَقُولُونَ اَ۪فۡتَر۪يٰ عَلَى اَ۬للَّهِ كَذِبٗاۖ
और यदि ईश्वर की मर्ज़ी होती, तो वह तुम्हारे मर्म पर मुहर लगा देता;
فَإِن يَشَإِ اِ۬للَّهُ يَخۡتِمۡ عَلَىٰ قَلۡبِكَۗ
परंतु ईश्वर असत्य को मिटाता है और अपने बोलों से सत्य को सिद्ध करता है,
وَيَمۡحُ اُ۬للَّهُ اُ۬لۡبَٰطِلَ وَيُحِقُّ اُ۬لۡحَقَّ بِكَلِمَٰتِهِۦٓۚ
क्योंकि वह सीनों के भीतर जो है उसके विषय में सर्वज्ञ है।
إِنَّهُۥ عَلِيمُۢ بِذَاتِ اِ۬لصُّدُورِ
वही है जो अपने आज्ञाकारियों का पश्चात्ताप स्वीकार करता है, बुरे कर्मों से दरगुज़र करता है, और जानता है कि वे क्या करते हैं।
وَهۡوَ اَ۬لَّذِي يَقۡبَلُ اُ۬لتَّوۡبَةَ عَنۡ عِبَادِهِۦ وَيَعۡفُواْ عَنِ اِ۬لسَّيِّـَٔاتِ وَيَعۡلَمُ مَا يَفۡعَلُونَ
और वह उन्हें उत्तर देता है जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, और उन्हें अपने अनुग्रह से और अधिक देता है;
وَيَسۡتَجِيبُ اُ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ وَيَزِيدُهُم مِّن فَضۡلِهِۦۚ
और जो नकारते हैं उनके लिए कठोर दंड होगा।
وَاَلۡكَٰفِرُونَ لَهُمۡ عَذَابٞ شَدِيدٞ
और यदि ईश्वर अपने आज्ञाकारियों के लिए जीविका फैला देता, तो वे धरती पर ज़्यादती करने लगते;
وَلَوۡ بَسَطَ اَ۬للَّهُ اُ۬لرِّزۡقَ لِعِبَادِهِۦ لَبَغَوۡاْ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ
परंतु वह जो उसकी मर्ज़ी हो, माप के साथ उतारता है,
وَلَٰكِن يُنزِلُ بِقَدَرٖ مَّا يَشَآءُۚ
क्योंकि वह अपने आज्ञाकारियों के प्रति पूरी ख़बर रखने वाला और दृष्टिवान है।
اِ۪نَّهُۥ بِعِبَادِهِۦ خَبِيرُۢ بَصِيرٞ
वही है जो उनके हिम्मत हार जाने के बाद जीवनदायी वर्षा उतारता है, और अपनी दया फैलाता है;
وَهۡوَ اَ۬لَّذِي يُنزِلُ اُ۬لۡغَيۡثَ مِنۢ بَعۡدِ مَا قَنَطُواْ وَيَنشُرُ رَحۡمَتَهُۥۚ
और वही हिमायती, प्रशंसनीय है।
وَهۡوَ اَ۬لۡوَلِيُّ اُ۬لۡحَمِيدُ
और उसके संकेतों में से: आकाशों और धरती की रचना, और वे सब चलने-फिरने वाले जिन्हें उसने उनमें छितराया है;
وَمِنۡ ءَايَٰتِهِۦ خَلۡقُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِ وَمَا بَثَّ فِيهِمَا مِن دَآبَّةٖۚ
और जब उसकी मर्ज़ी हो, वह उन्हें एकत्र करने का सामर्थ्य रखता है।
وَهۡوَ عَلَىٰ جَمۡعِهِمۡ إِذَا يَشَآءُ قَدِيرٞ
और तुम पर जो भी विपत्ति आती है, वह उसी के कारण है जो तुम्हारे हाथों ने कमाया है — और वह बहुत-सी चीज़ों से दरगुज़र करता है।
وَمَآ أَصَٰبَكُم مِّن مُّصِيبَةٖ فَبِمَا كَسَبَتۡ أَيۡدِيكُمۡ وَيَعۡفُواْ عَن كَثِيرٖ
तुम धरती पर उसे असमर्थ नहीं कर सकते,
وَمَآ أَنتُم بِمُعۡجِزِينَ فِي اِ۬لۡأَرۡضِۖ
और ईश्वर के अतिरिक्त तुम्हारे लिए न कोई हिमायती है और न कोई सहायता।
وَمَا لَكُم مِّن دُونِ اِ۬للَّهِ مِن وَلِيّٖ وَلَا نَصِيرٖ
और उसके संकेतों में से: समुद्र में चलने वाली, खड़े किए गए दिशासूचकों जैसी।
۞ وَمِنۡ ءَايَٰتِهِ اِ۬لۡجَوَارِۦ فِي اِ۬لۡبَحۡرِ كَاَلۡأَعۡلَٰمِۚ
यदि उसकी मर्ज़ी हो, तो वह हवा को थाम देता है, और वे उसकी सतह पर निश्चल पड़े रह जाते हैं — इसमें अवश्य हर अत्यंत धैर्यवान, अत्यंत कृतज्ञ के लिए संकेत हैं — या फिर वह उन्हें उनके कमाए के कारण विनाश के हवाले कर देता है, जबकि बहुत-सी चीज़ों से दरगुज़र भी करता है,
إِن يَشَأۡ يُسۡكِنِ اِ۬لرِّيحَ فَيَظۡلَلۡنَ رَوَاكِدَ عَلَىٰ ظَهۡرِهِۦٓۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّكُلِّ صَبّ۪ارٖ شَكُورٍ أَوۡ يُوبِقۡهُنَّ بِمَا كَسَبُواْ وَيَعۡفُ عَن كَثِيرٖ
— और ताकि जो हमारे संकेतों के विषय में बहस करते हैं वे जान लें कि उनके लिए कोई पलायन नहीं।
وَيَعۡلَمَ اَ۬لَّذِينَ يُجَٰدِلُونَ فِيٓ ءَايَٰتِنَا مَا لَهُم مِّن مَّحِيصٖ
जो कुछ तुम्हें दिया गया है वह केवल निकट जीवन का उपभोग है;
فَمَآ أُوتِيتُم مِّن شَيۡءٖ فَمَتَٰعُ اُ۬لۡحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنۡيۭاۖ
परंतु जो ईश्वर के पास है वह बेहतर और अधिक टिकाऊ है, उनके लिए जिन्होंने विश्वास किया और जो अपने अभिभावक को मुख़्तार बनाते हैं;
وَمَا عِندَ اَ۬للَّهِ خَيۡرٞ وَأَبۡقَىٰ لِلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَلَىٰ رَبِّهِمۡ يَتَوَكَّلُونَ
और उनके लिए जो बड़े अपराधों और निर्लज्जताओं से दूर रहते हैं, और जब वे क्रोधित होते हैं तो क्षमा करते हैं;
وَاَلَّذِينَ يَجۡتَنِبُونَ كَبَٰٓئِرَ اَ۬لۡإِثۡمِ وَاَلۡفَوَٰحِشَ وَإِذَا مَا غَضِبُواْ هُمۡ يَغۡفِرُونَ
और उनके लिए जो अपने अभिभावक को उत्तर देते हैं, संपर्क बनाए रखते हैं, अपने मामलों में आपस में परामर्श करते हैं, और जो हमने उन्हें जीविका दी उसमें से ख़र्च करते हैं;
وَاَلَّذِينَ اَ۪سۡتَجَابُواْ لِرَبِّهِمۡ وَأَقَامُواْ اُ۬لصَّلَوٰةَ وَأَمۡرُهُمۡ شُور۪يٰ بَيۡنَهُمۡ وَمِمَّا رَزَقۡنَٰهُمۡ يُنفِقُونَ
और उनके लिए जो, जब उन पर ज़्यादती होती है, अपनी सहायता स्वयं करते हैं।
وَاَلَّذِينَ إِذَآ أَصَابَهُمُ اُ۬لۡبَغۡيُ هُمۡ يَنتَصِرُونَ
और बुराई का प्रतिफल उसके समकक्ष बुराई है;
وَجَزَٰٓؤُاْ سَيِّئَةٖ سَيِّئَةٞ مِّثۡلُهَاۖ
परंतु जो कोई दरगुज़र करे और मेल कर ले, उसका पुरस्कार ईश्वर के ज़िम्मे है,
فَمَنۡ عَفَا وَأَصۡلَحَ فَأَجۡرُهُۥ عَلَى اَ۬للَّهِۚ
क्योंकि वह अन्यायियों से प्रेम नहीं करता।
إِنَّهُۥ لَا يُحِبُّ اُ۬لظَّٰلِمِينَ
और जो कोई अन्याय सहने के बाद अपनी सहायता स्वयं करे, ऐसों के विरुद्ध कोई राह नहीं।
وَلَمَنِ اِ۪نتَصَرَ بَعۡدَ ظُلۡمِهِۦ فَأُوْلَٰٓئِكَ مَا عَلَيۡهِم مِّن سَبِيلٍ
राह केवल उनके विरुद्ध खुली है जो लोगों पर अन्याय करते हैं और बिना हक़ के धरती पर ज़्यादती करते हैं।
إِنَّمَا اَ۬لسَّبِيلُ عَلَى اَ۬لَّذِينَ يَظۡلِمُونَ اَ۬لنَّاسَ وَيَبۡغُونَ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ بِغَيۡرِ اِ۬لۡحَقِّۚ
यही हैं जिनके लिए पीड़ादायक दंड होगा।
أُوْلَٰٓئِكَ لَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ
और जो कोई धैर्य रखे और क्षमा करे, तो यह अवश्य उन मामलों में से है जिनमें संकल्प चाहिए।
۞ وَلَمَن صَبَرَ وَغَفَرَ إِنَّ ذَٰلِكَ لَمِنۡ عَزۡمِ اِ۬لۡأُمُورِ
और जिसे ईश्वर भटका दे, उसके लिए उसके बाद कोई हिमायती नहीं रहता।
وَمَن يُضۡلِلِ اِ۬للَّهُ فَمَا لَهُۥ مِن وَلِيّٖ مِّنۢ بَعۡدِهِۦۗ
और तुम अन्यायियों को देखोगे, जब वे दंड देखेंगे, कहते हुए: “क्या वापस लाए जाने का कोई उपाय है?”
وَتَرَى اَ۬لظَّٰلِمِينَ لَمَّا رَأَوُاْ اُ۬لۡعَذَابَ يَقُولُونَ هَلۡ إِلَىٰ مَرَدّٖ مِّن سَبِيلٖ
और तुम उन्हें उसके सामने प्रस्तुत किए जाते देखोगे, विनीत,
وَتَر۪ىٰهُمۡ يُعۡرَضُونَ عَلَيۡهَا خَٰشِعِينَ
छिपी हुई पलक के नीचे से नज़र डालते हुए, अपमान के प्रभाव से।
مِنَ اَ۬لذُّلِّ يَنظُرُونَ مِن طَرۡفٍ خَفِيّٖۗ
और जिन्होंने विश्वास किया वे कहेंगे: “घाटा उठाने वाले निश्चय ही वे हैं जिन्होंने पेशी के दिन अपने स्व और अपने परिवार को घाटे में डाल दिया।”
وَقَالَ اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِنَّ اَ۬لۡخَٰسِرِينَ اَ۬لَّذِينَ خَسِرُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ وَأَهۡلِيهِمۡ يَوۡمَ اَ۬لۡقِيَٰمَةِۗ
क्या ऐसा नहीं है: अन्यायी ऐसे दंड में हैं जो बना रहता है।
أَلَآ إِنَّ اَ۬لظَّٰلِمِينَ فِي عَذَابٖ مُّقِيمٖ
ईश्वर के अतिरिक्त उनका कोई हिमायती न होगा जो उनकी सहायता करे।
وَمَا كَانَ لَهُم مِّنۡ أَوۡلِيَآءَ يَنصُرُونَهُم مِّن دُونِ اِ۬للَّهِۗ
और जिसे ईश्वर भटका दे, उसके लिए कोई राह नहीं रहती।
وَمَن يُضۡلِلِ اِ۬للَّهُ فَمَا لَهُۥ مِن سَبِيلٍ
अपने अभिभावक को उत्तर दो, इससे पहले कि ईश्वर की ओर से वह दिन आए जिसे रद्द नहीं किया जा सकता;
اِ۪سۡتَجِيبُواْ لِرَبِّكُم مِّن قَبۡلِ أَن يَأۡتِيَ يَوۡمٞ لَّا مَرَدَّ لَهُۥ مِنَ اَ۬للَّهِۚ
उस दिन तुम्हारे लिए पीछे हटने की कोई जगह न होगी,
مَا لَكُم مِّن مَّلۡجَإٖ يَوۡمَئِذٖ
और तुम्हारे पास अमान्य ठहराने का कोई उपाय न होगा।
وَمَا لَكُم مِّن نَّكِيرٖ
यदि वे कतरा जाएँ, तो हमने तुम्हें उन पर रक्षक बनाकर नहीं भेजा;
فَإِنۡ أَعۡرَضُواْ فَمَآ أَرۡسَلۡنَٰكَ عَلَيۡهِمۡ حَفِيظًاۖ
तुम पर केवल संप्रेषण का दायित्व है।
إِنۡ عَلَيۡكَ إِلَّا اَ۬لۡبَلَٰغُۗ
और जब हम मनुष्य को अपनी ओर से दया का स्वाद चखाते हैं, तो वह उस पर प्रसन्न होता है;
وَإِنَّآ إِذَآ أَذَقۡنَا اَ۬لۡإِنسَٰنَ مِنَّا رَحۡمَةٗ فَرِحَ بِهَاۖ
और यदि उन पर उसके कारण कोई बुराई आ पड़े जो उनके हाथों ने आगे बढ़ाया, तो मनुष्य निश्चय ही अत्यंत नकारने वाला है।
وَإِن تُصِبۡهُمۡ سَيِّئَةُۢ بِمَا قَدَّمَتۡ أَيۡدِيهِمۡ فَإِنَّ اَ۬لۡإِنسَٰنَ كَفُورٞ
आकाशों और धरती का राजत्व ईश्वर का ही है;
لِّلَّهِ مُلۡكُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِۚ
वह जो उसकी मर्ज़ी हो, रचता है;
يَخۡلُقُ مَا يَشَآءُۚ
वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे बेटियाँ प्रदान करता है, और जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे लड़के प्रदान करता है, या फिर वह उन्हें जोड़ा बना देता है, लड़के और बेटियाँ, और जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे बाँझ कर देता है,
يَهَبُ لِمَن يَشَآءُ اِ۪نَٰثٗا وَيَهَبُ لِمَن يَشَآءُ اُ۬لذُّكُورَ أَوۡ يُزَوِّجُهُمۡ ذُكۡرَانٗا وَإِنَٰثٗاۖ وَيَجۡعَلُ مَن يَشَآءُ عَقِيمًاۚ
क्योंकि वह सर्वज्ञ, सामर्थ्यवान है।
إِنَّهُۥ عَلِيمٞ قَدِيرٞ
किसी मानव के लिए उचित नहीं कि ईश्वर उससे बोले, सिवा प्रकटीकरण के, या परदे के पीछे से, या ऐसा संदेशवाहक भेजकर जो उसकी अनुमति से, जो उसकी मर्ज़ी हो, प्रकट करे;
۞ وَمَا كَانَ لِبَشَرٍ أَن يُكَلِّمَهُ اُ۬للَّهُ إِلَّا وَحۡيًا أَوۡ مِن وَرَآيِٕ حِجَابٍ أَوۡ يُرۡسِلَ رَسُولٗا فَيُوحِيَ بِإِذۡنِهِۦ مَا يَشَآءُۚ
वह निश्चय ही परम-उच्च, प्रज्ञावान है।
اِ۪نَّهُۥ عَلِيٌّ حَكِيمٞ
इसी प्रकार हमने तुम्हारी ओर अपने आदेश से निकला एक प्रवाह प्रकट किया;
وَكَذَٰلِكَ أَوۡحَيۡنَآ إِلَيۡكَ رُوحٗا مِّنۡ أَمۡرِنَاۚ
तुम्हें इसका अंदाज़ा न था कि ग्रंथ क्या है, और न ही यह कि विश्वास क्या है, परंतु हमने उसे एक प्रकाश बनाया जिससे हम अपने आज्ञाकारियों में से जिस पर हमारी मर्ज़ी हो, उसे मार्ग दिखाते हैं;
مَا كُنتَ تَدۡرِي مَا اَ۬لۡكِتَٰبُ وَلَا اَ۬لۡإِيمَٰنُ وَلَٰكِن جَعَلۡنَٰهُ نُورٗا نَّهۡدِي بِهِۦ مَن نَّشَآءُ مِنۡ عِبَادِنَاۚ
और तुम अवश्य सीधे पथ की ओर मार्ग दिखाते हो — ईश्वर के पथ की ओर, जिसका वह सब है जो आकाशों में है और जो धरती पर है।
وَإِنَّكَ لَتَهۡدِيٓ إِلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ صِرَٰطِ اِ۬للَّهِ اِ۬لَّذِي لَهُۥ مَا فِي اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي اِ۬لۡأَرۡضِۗ
क्या ऐसा नहीं है: ईश्वर की ओर ही सारे मामले पहुँचते हैं।
أَلَآ إِلَى اَ۬للَّهِ تَصِيرُ اُ۬لۡأُمُورُ