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القرآن

الكهف

Al-Kahf

Unless God Wills

Sura18
الرالمر
पद110

Section IIIThe application · continuation · closing

The signs of the Scripture and the accounts that confirm it

  1. 10
  2. 11
  3. 12
  4. 13
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  9. 18

Read the section from its beginning: sura 10

18:1

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। प्रशंसा ईश्वर के लिए है, जिसने अपने आज्ञाकारी पर ग्रंथ उतारा और उसमें कोई टेढ़ापन नहीं रखा,

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي أَنزَلَ عَلَىٰ عَبۡدِهِ ٱلۡكِتَٰبَ وَلَمۡ يَجۡعَل لَّهُۥ عِوَجٗا

18:2–4

ऋजु — उसकी ओर से आने वाली कठोर प्रचंडता की चेतावनी देने के लिए, विश्वास करने वालों को, जो भले कर्म करते हैं, शुभ समाचार देने के लिए कि उनके लिए सुंदर पुरस्कार होगा, जिसमें वे सदा रहेंगे, और उन्हें चेतावनी देने के लिए जिन्होंने कहा: “ईश्वर ने अपने लिए संतान बना ली है।”

قَيِّمٗا لِّيُنذِرَ بَأۡسٗا شَدِيدٗا مِّن لَّدُنۡهُۥ وَيُبَشِّرَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ ٱلَّذِينَ يَعۡمَلُونَ ٱلصَّٰلِحَٰتِ أَنَّ لَهُمُۥ أَجۡرًا حَسَنٗا مَّٰكِثِينَ فِيهِۦ أَبَدٗا وَيُنذِرَ ٱلَّذِينَ قَالُواْ ٱتَّخَذَ ٱللَّهُ وَلَدٗا

18:5

उन्हें इसका कोई ज्ञान नहीं, और न उनके पूर्वजों को।

مَّا لَهُمُۥ بِهِۦ مِنۡ عِلۡمٖ وَلَا لِأٓبَآئِهِمُۥۚ

कितना भारी बोल है जो उनके मुँह से निकलता है!

كَبُرَتۡ كَلِمَةٗ تَخۡرُجُ مِنۡ أَفۡوَٰهِهِمُۥۚ

वे झूठ के सिवा कुछ नहीं कहते।

إِن يَقُولُونَ إِلَّا كَذِبٗا

18:6

शायद तुम उनके पदचिह्नों पर कड़वाहट में अपने आप को घुलाकर नष्ट कर लो, यदि वे इस वार्ता पर विश्वास न करें।

فَلَعَلَّكَ بَٰخِعٞ نَّفۡسَكَ عَلَىٰ ءَاثَٰرِهِمُۥ إِن لَّمۡ يُؤۡمِنُواْ بِهَٰذَا ٱلۡحَدِيثِ أَسَفًا

18:7

हमने धरती पर जो कुछ है उसे उसका शृंगार बनाया, ताकि उन्हें परखें: उनमें कौन कर्म में सबसे अच्छा है।

إِنَّا جَعَلۡنَا مَا عَلَى ٱلۡأَرۡضِ زِينَةٗ لَّهَا لِنَبۡلُوَهُمُۥ أَيُّهُمُۥ أَحۡسَنُ عَمَلٗا

18:8

और हम उस पर जो कुछ है उसे अवश्य एक बंजर उभार बना देंगे।

وَإِنَّا لَجَٰعِلُونَ مَا عَلَيۡهَا صَعِيدٗا جُرُزًا

18:9

या क्या तुमने समझा कि गुफा और अर-रक़ीम वाले हमारे संकेतों में से एक अचरज की बात थे?

أَمۡ حَسِبۡتَ أَنَّ أَصۡحَٰبَ ٱلۡكَهۡفِ وَٱلرَّقِيمِ كَانُواْ مِنۡ ءَايَٰتِنَا عَجَبًا

18:10

जब युवकों ने गुफा में शरण ली और कहा: “हमारे अभिभावक, हमें अपनी ओर से दया दीजिए, और हमारे मामले में हमारे लिए सुबुद्धि की राह सँवार दीजिए।”

إِذۡ أَوَى ٱلۡفِتۡيَةُ إِلَى ٱلۡكَهۡفِ فَقَالُواْ رَبَّنَا ءَاتِنَا مِن لَّدُنكَ رَحۡمَةٗ وَهَيِّئۡ لَنَا مِنۡ أَمۡرِنَا رَشَدٗا

18:11–12

तब हमने गुफा में उनके कान गिने हुए वर्षों तक बंद कर दिए; फिर हमने उन्हें उठाया, यह भेद करने के लिए कि दोनों दलों में कौन उस अंतराल को गिनने में सबसे ठीक था जो उन्होंने बिताया।

فَضَرَبۡنَا عَلَىٰ ءَاذَانِهِمُۥ فِي ٱلۡكَهۡفِ سِنِينَ عَدَدٗا ثُمَّ بَعَثۡنَٰهُمُۥ لِنَعۡلَمَ أَيُّ ٱلۡحِزۡبَيۡنِ أَحۡصَىٰ لِمَا لَبِثُواْ أَمَدٗا

हम तुम्हारे सामने उनकी सूचना का पूर्ण सत्य के साथ वर्णन करते हैं:

نَّحۡنُ نَقُصُّ عَلَيۡكَ نَبَأَهُمُۥ بِٱلۡحَقِّۚ

18:13

वे युवक थे जिन्होंने अपने अभिभावक पर विश्वास किया, और हमने उन्हें मार्गदर्शन में बढ़ाया।

إِنَّهُمُۥ فِتۡيَةٌ ءَامَنُواْ بِرَبِّهِمُۥ وَزِدۡنَٰهُمُۥ هُدٗى

18:14

और हमने उनके मर्मों को बाँध दिया, जब वे खड़े हुए और उन्होंने कहा: “हमारा अभिभावक आकाशों और धरती का अभिभावक है; हम उसके अतिरिक्त किसी देवता को कभी नहीं पुकारेंगे — तब हमने निश्चय ही भारी अतिरेक की बात कही होती।

وَرَبَطۡنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمُۥ إِذۡ قَامُواْ فَقَالُواْ رَبُّنَا رَبُّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ لَن نَّدۡعُوَاْ مِن دُونِهِۦ إِلَٰهٗاۖ لَّقَدۡ قُلۡنَا إِذٗا شَطَطًا

18:15

यह हमारी क़ौम है जिसने उसके अतिरिक्त देवता बना लिए हैं: वे उनके विषय में कोई स्पष्ट अधिकार क्यों नहीं ले आते?

هَٰؤُلَآءِ قَوۡمُنَا ٱتَّخَذُواْ مِن دُونِهِۦ ءَالِهَةٗۖ لَّوۡلَا يَأۡتُونَ عَلَيۡهِمُۥ بِسُلۡطَٰنِۭ بَيِّنٖۖ

तो उससे बढ़कर अन्यायी कौन है जो ईश्वर पर झूठ गढ़ता है?

فَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّنِ ٱفۡتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبٗا

18:16

और जब तुम उनसे और उससे अलग हो गए जिसकी वे आज्ञा का पालन करते हैं, सिवा ईश्वर के, तो गुफा में शरण लो: तुम्हारा अभिभावक तुम पर अपनी दया में से फैलाएगा और तुम्हारे मामले में तुम्हारे लिए एक आधार सँवारेगा।”

وَإِذِ ٱعۡتَزَلۡتُمُوهُمُۥ وَمَا يَعۡبُدُونَ إِلَّا ٱللَّهَ فَأۡوُۥاْ إِلَى ٱلۡكَهۡفِ يَنشُرۡ لَكُمُۥ رَبُّكُمُۥ مِن رَّحۡمَتِهِۦ وَيُهَيِّئۡ لَكُمُۥ مِنۡ أَمۡرِكُمُۥ مِرۡفَقٗا

18:17

और तुम देखते कि सूर्य, उदय होते समय, उनकी गुफा से दाईं ओर हट जाता, और अस्त होते समय, बाईं ओर से उसे छूता हुआ निकल जाता, जबकि वे उससे अलग एक गहरे खोखले भाग में थे।

۞ وَتَرَى ٱلشَّمۡسَ إِذَا طَلَعَت تَّزَّٰوَرُ عَن كَهۡفِهِمُۥ ذَاتَ ٱلۡيَمِينِ وَإِذَا غَرَبَت تَّقۡرِضُهُمُۥ ذَاتَ ٱلشِّمَالِ وَهُمُۥ فِي فَجۡوَةٖ مِّنۡهُۥۚ

यह ईश्वर के संकेतों में से है।

ذَٰلِكَ مِنۡ ءَايَٰتِ ٱللَّهِۗ

ईश्वर जिसे मार्ग दिखाता है, वही मार्गदर्शन पाने वाला है,

مَن يَهۡدِ ٱللَّهُ فَهُوَ ٱلۡمُهۡتَدِۖ

और जिसे वह भटकाता है, तुम उसके लिए कभी कोई हिमायती नहीं पाओगे जो उसे सुबुद्धि दे।

وَمَن يُضۡلِلۡ فَلَن تَجِدَ لَهُۥ وَلِيّٗا مُّرۡشِدٗا

18:18

और तुम उन्हें जागे हुए समझते, जबकि वे सो रहे थे।

وَتَحۡسِبُهُمُۥ أَيۡقَاظٗا وَهُمُۥ رُقُودٞۚ

18:18

और हम उन्हें दाईं ओर और बाईं ओर पलटते थे, जबकि उनका कुत्ता देहरी पर अपनी अगली टाँगें फैलाए बैठा था।

وَنُقَلِّبُهُمُۥ ذَاتَ ٱلۡيَمِينِ وَذَاتَ ٱلشِّمَالِۖ وَكَلۡبُهُمُۥ بَٰسِطٞ ذِرَاعَيۡهِۦ بِٱلۡوَصِيدِۚ

18:18

यदि तुम उन्हें झाँक लेते, तो तुम अवश्य उनसे पीठ फेरकर भाग जाते, और तुममें उनसे आतंक भर जाता।

لَوِ ٱطَّلَعۡتَ عَلَيۡهِمُۥ لَوَلَّيۡتَ مِنۡهُمُۥ فِرَارٗا وَلَمُلِّئۡتَ مِنۡهُمُۥ رُعۡبٗا

और इसी प्रकार हमने उन्हें उठाया, ताकि वे आपस में पूछें।

وَكَذَٰلِكَ بَعَثۡنَٰهُمُۥ لِيَتَسَآءَلُواْ بَيۡنَهُمُۥۚ

18:19

उनमें से एक ने कहा: “तुमने कितना समय बिताया?”

قَالَ قَآئِلٞ مِّنۡهُمُۥ كَمۡ لَبِثۡتُمُۥۖ

18:19

उन्होंने कहा: “हमने एक दिन बिताया, या एक दिन का कुछ भाग।”

قَالُواْ لَبِثۡنَا يَوۡمًا أَوۡ بَعۡضَ يَوۡمٖۚ

18:19

उन्होंने कहा: “तुम्हारा अभिभावक सबसे अच्छा जानता है कि तुमने कितना समय बिताया; तो अपने में से किसी एक को अपने इस सिक्के के साथ राजधानी की ओर उठाओ, और वह नज़र डाले कि उसका कौन-सा भोजन सबसे शुद्ध है, और उसमें से तुम्हारे लिए जीविका लाए, और वह गोपनीयता से काम ले,

قَالُواْ رَبُّكُمُۥ أَعۡلَمُ بِمَا لَبِثۡتُمُۥ فَٱبۡعَثُواْ أَحَدَكُمُۥ بِوَرِقِكُمُۥ هَٰذِهِۦ إِلَى ٱلۡمَدِينَةِ فَلۡيَنظُرۡ أَيُّهَا أَزۡكَىٰ طَعَامٗا فَلۡيَأۡتِكُمُۥ بِرِزۡقٖ مِّنۡهُۥ وَلۡيَتَلَطَّفۡ

और वह किसी को तुम्हारी उपस्थिति का आभास न होने दे,

وَلَا يُشۡعِرَنَّ بِكُمُۥ أَحَدًا

18:20

क्योंकि यदि वे तुम्हें पा लें, तो तुम्हें निष्कासित कर देंगे, या तुम्हें अपने मत में वापस ले आएँगे, और तब तुम कभी सफल नहीं होगे।”

إِنَّهُمُۥ إِن يَظۡهَرُواْ عَلَيۡكُمُۥ يَرۡجُمُوكُمُۥ أَوۡ يُعِيدُوكُمُۥ فِي مِلَّتِهِمُۥ وَلَن تُفۡلِحُواْ إِذًا أَبَدٗا

और इसी प्रकार हमने जनसाधारण को उन तक पहुँचा दिया, ताकि वे जानें कि ईश्वर का वादा सत्य है और यह कि उस घड़ी में कोई संदेह नहीं,

وَكَذَٰلِكَ أَعۡثَرۡنَا عَلَيۡهِمُۥ لِيَعۡلَمُواْ أَنَّ وَعۡدَ ٱللَّهِ حَقّٞ وَأَنَّ ٱلسَّاعَةَ لَا رَيۡبَ فِيهَا

जब वे आपस में अपने मामले पर खींचतान कर रहे थे और उन्होंने कहा: “उन पर एक निर्माण खड़ा कर दो” —

إِذۡ يَتَنَٰزَعُونَ بَيۡنَهُمُۥ أَمۡرَهُمُۥۖ فَقَالُواْ ٱبۡنُواْ عَلَيۡهِمُۥ بُنۡيَٰنٗاۖ

उनका अभिभावक उन्हें सबसे अच्छा जानता है।

رَّبُّهُمُۥ أَعۡلَمُ بِهِمُۥۚ

18:21

जो उनके मामले में प्रबल रहे, उन्होंने कहा: “हम अवश्य उन पर एक माथा टेकने का स्थान बना लेंगे।”

قَالَ ٱلَّذِينَ غَلَبُواْ عَلَىٰ أَمۡرِهِمُۥ لَنَتَّخِذَنَّ عَلَيۡهِمُۥ مَسۡجِدٗا

18:22

वे कहेंगे: “तीन, उनका चौथा उनका कुत्ता”,

سَيَقُولُونَ ثَلَٰثَةٞ رَّابِعُهُمُۥ كَلۡبُهُمُۥ

18:22

और वे कहेंगे: “पाँच, उनका छठा उनका कुत्ता”, जो इंद्रियों से परे है उसे उछालते हुए,

وَيَقُولُونَ خَمۡسَةٞ سَادِسُهُمُۥ كَلۡبُهُمُۥ رَجۡمَۢا بِٱلۡغَيۡبِۖ

18:22

और वे कहेंगे: “सात”,

وَيَقُولُونَ سَبۡعَةٞ

18:22

उनका आठवाँ उनका कुत्ता।

وَثَامِنُهُمُۥ كَلۡبُهُمُۥۚ

18:22

कहो: “मेरा अभिभावक उनकी संख्या को सबसे अच्छा जानता है”;

قُل رَّبِّيَ أَعۡلَمُ بِعِدَّتِهِمُۥ

18:22

उन्हें कोई नहीं जानता, सिवा थोड़े के।

مَا يَعۡلَمُهُمُۥ إِلَّا قَلِيلٞۗ

18:22

इसलिए उनके विषय में केवल खुले वाद-प्रतिवाद से ही वाद-प्रतिवाद करो, और उनके विषय में उनमें से किसी से परामर्श मत लो।

فَلَا تُمَارِ فِيهِمُۥ إِلَّا مِرَآءٗ ظَٰهِرٗا وَلَا تَسۡتَفۡتِ فِيهِمُۥ مِنۡهُمُۥ أَحَدٗا

18:23–24

और किसी चीज़ के विषय में कभी मत कहो: “मैं यह कल करूँगा”, जब तक कि ईश्वर की मर्ज़ी न हो।

وَلَا تَقُولَنَّ لِشَاْيۡءٍ إِنِّي فَاعِلٞ ذَٰلِكَ غَدًا إِلَّا أَن يَشَآءَ ٱللَّهُۚ

18:23–24

और जब तुम भूल जाओ, तो अपने अभिभावक का स्मरण करो,

وَٱذۡكُر رَّبَّكَ إِذَا نَسِيتَ

18:23–24

और कहो: “संभव है मेरा अभिभावक मुझे इससे अधिक निकट सुबुद्धि की ओर मार्ग दिखाए।”

وَقُلۡ عَسَىٰ أَن يَهۡدِيَنِۦ رَبِّي لِأَقۡرَبَ مِنۡ هَٰذَا رَشَدٗا

18:25

और उन्होंने अपनी गुफा में तीन सौ वर्ष बिताए, और नौ और बढ़ाए।

وَلَبِثُواْ فِي كَهۡفِهِمُۥ ثَلَٰثَ مِاْئَةٖ سِنِينَ وَٱزۡدَادُواْ تِسۡعٗا

18:26

कहो: “ईश्वर सबसे अच्छा जानता है कि उन्होंने कितना समय बिताया:

قُلِ ٱللَّهُ أَعۡلَمُ بِمَا لَبِثُواْۖ

18:26

आकाशों और धरती में जो इंद्रियों से परे है, वह उसी का है।

لَهُۥ غَيۡبُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ

वह कितना दृष्टिवान और कितना सुनने वाला है!

أَبۡصِرۡ بِهِۦ وَأَسۡمِعۡۚ

18:26

उनका उसके अतिरिक्त कोई हिमायती नहीं,

مَا لَهُمُۥ مِن دُونِهِۦ مِن وَلِيّٖ

18:26

और वह अपने निर्णय में किसी को साझीदार नहीं बनाता।”

وَلَا يُشۡرِكُ فِي حُكۡمِهِۦ أَحَدٗا

और जो तुम पर तुम्हारे अभिभावक के ग्रंथ में से प्रकट किया गया है उसे सुनाओ: उसके बोलों को कोई बदलने वाला नहीं,

وَٱتۡلُ مَا أُوحِيَ إِلَيۡكَ مِن كِتَابِ رَبِّكَۖ لَا مُبَدِّلَ لِكَلِمَٰتِهِۦ

18:27

और तुम उसके अतिरिक्त कोई शरण नहीं पाओगे।

وَلَن تَجِدَ مِن دُونِهِۦ مُلۡتَحَدٗا

18:28

और उनके साथ दृढ़ता से डटे रहो जो सुबह और शाम अपने अभिभावक को पुकारते हैं और उसकी दिशा चाहते हैं,

وَٱصۡبِرۡ نَفۡسَكَ مَعَ ٱلَّذِينَ يَدۡعُونَ رَبَّهُمُۥ بِٱلۡغَدَوٰةِ وَٱلۡعَشِيِّ يُرِيدُونَ وَجۡهَهُۥۖ

18:28

और तुम्हारी आँखें उनसे आगे न बढ़ें, कि तुम निकट जीवन की शोभा चाहने लगो;

وَلَا تَعۡدُ عَيۡنَاكَ عَنۡهُمُۥ تُرِيدُ زِينَةَ ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَاۖ

18:28

और उसकी बात न मानो जिसके मर्म को हमने अपने स्मरण से लापरवाह कर दिया, जिसने अपनी भावना का अनुसरण किया, और जिसका मामला अति है।

وَلَا تُطِعۡ مَنۡ أَغۡفَلۡنَا قَلۡبَهُۥ عَن ذِكۡرِنَا وَٱتَّبَعَ هَوَىٰهُۥ وَكَانَ أَمۡرُهُۥ فُرُطٗا

18:29

और कहो: “सत्य तुम्हारे अभिभावक की ओर से है: जो चाहे विश्वास करे, और जो चाहे नकारे।”

وَقُلِ ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّكُمُۥۖ فَمَن شَآءَ فَلۡيُؤۡمِن وَمَن شَآءَ فَلۡيَكۡفُرۡۚ

18:29

क्योंकि हमने अन्यायियों के लिए एक ऐसी आग जुटा रखी है जिसकी चारदीवारी उन्हें घेरे हुए है।

إِنَّا أَعۡتَدۡنَا لِلظَّٰلِمِينَ نَارًا أَحَاطَ بِهِمُۥ سُرَادِقُهَاۚ

18:29

और यदि वे सहायता के लिए पुकारें, तो पिघली हुई धातु जैसे पानी से उनकी सहायता की जाएगी, जो चेहरों को झुलसा देता है।

وَإِن يَسۡتَغِيثُواْ يُغَاثُواْ بِمَآءٖ كَٱلۡمُهۡلِ يَشۡوِي ٱلۡوُجُوهَۚ

कितना निकृष्ट पेय है!

بِئۡسَ ٱلشَّرَابُ

और विश्राम का कितना बुरा स्थान है!

وَسَآءَتۡ مُرۡتَفَقًا

जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए — हम भलाई करने वाले के पुरस्कार को नष्ट नहीं होने देते।

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ إِنَّا لَا نُضِيعُ أَجۡرَ مَنۡ أَحۡسَنَ عَمَلًا

यही हैं वे जिनके लिए स्थायित्व के उद्यान हैं; उनके नीचे नदियाँ बहती हैं; वहाँ उन्हें सोने के कंगन पहनाए जाएँगे और वे महीन रेशम और ज़री के हरे वस्त्र पहनेंगे, सजे हुए आसनों पर टेक लगाए हुए।

أُوْلَٰٓئِكَ لَهُمُۥ جَنَّٰتُ عَدۡنٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهِمُ ٱلۡأَنۡهَٰرُ يُحَلَّوۡنَ فِيهَا مِنۡ أَسَاوِرَ مِن ذَهَبٖ وَيَلۡبَسُونَ ثِيَابًا خُضۡرٗا مِّن سُندُسٖ وَإِسۡتَبۡرَقٖ مُّتَّكِـِٔينَ فِيهَا عَلَى ٱلۡأَرَآئِكِۚ

कितना उत्तम प्रतिदान है!

نِعۡمَ ٱلثَّوَابُ

और विश्राम का कितना सुंदर स्थान है!

وَحَسُنَتۡ مُرۡتَفَقٗا

18:32

और उनके लिए एक उदाहरण जोड़ो: दो पुरुष; उनमें से एक के लिए हमने अंगूरों के दो उद्यान बनाए, उन्हें खजूरों से घेरा, और उनके बीच खेती रखी।

۞ وَٱضۡرِبۡ لَهُمُۥ مَثَلٗا رَّجُلَيۡنِ جَعَلۡنَا لِأَحَدِهِمَا جَنَّتَيۡنِ مِنۡ أَعۡنَٰبٖ وَحَفَفۡنَٰهُمَا بِنَخۡلٖ وَجَعَلۡنَا بَيۡنَهُمَا زَرۡعٗاۚ

18:33

दोनों उद्यानों ने अपना भोजन दिया, बिना किसी बात में अन्याय किए,

كِلۡتَا ٱلۡجَنَّتَيۡنِ ءَاتَتۡ أُكۡلَهَا وَلَمۡ تَظۡلِم مِّنۡهُۥ شَيۡـٔٗاۚ

18:34

और हमने उन दोनों के बीच एक नदी बहा दी; और उसके पास फलती-फूलती संपत्ति थी।

وَفَجَّرۡنَا خِلَٰلَهُمَا نَهَرٗا وَكَانَ لَهُۥ ثُمُرٞ

18:34

उसने अपने साथी से, उससे बातचीत करते हुए, कहा: “मेरे पास तुमसे अधिक संपत्ति है, और जन-बल में मैं अधिक शक्तिशाली हूँ।”

فَقَالَ لِصَٰحِبِهِۦ وَهُوَ يُحَاوِرُهُۥ أَنَا۠ أَكۡثَرُ مِنكَ مَالٗا وَأَعَزُّ نَفَرٗا

और वह अपने उद्यान में गया, स्वयं पर अन्याय करता हुआ,

وَدَخَلَ جَنَّتَهُۥ وَهُوَ ظَالِمٞ لِّنَفۡسِهِۦ

18:36

और कहा: “मैं अनुमान नहीं लगाता कि यह कभी नष्ट होगा, और मैं अनुमान नहीं लगाता कि वह घड़ी आएगी; और यदि मैं अपने अभिभावक की ओर वापस लाया भी गया, तो पलटाव के स्थान के रूप में मैं इस उद्यान से अवश्य बेहतर पाऊँगा।”

قَالَ مَا أَظُنُّ أَن تَبِيدَ هَٰذِهِۦ أَبَدٗا وَمَا أَظُنُّ ٱلسَّاعَةَ قَآئِمَةٗ وَلَئِن رُّدِدتُّ إِلَىٰ رَبِّي لَأَجِدَنَّ خَيۡرٗا مِّنۡهُمَا مُنقَلَبٗا

18:37

उसके साथी ने, उससे बातचीत करते हुए, उससे कहा: “क्या तुम उसे नकारते हो जिसने तुम्हें मिट्टी से, फिर एक बूँद से रचा, फिर तुम्हें पूर्ण मनुष्य का रूप दिया?

قَالَ لَهُۥ صَاحِبُهُۥ وَهُوَ يُحَاوِرُهُۥ أَكَفَرۡتَ بِٱلَّذِي خَلَقَكَ مِن تُرَابٖ ثُمَّ مِن نُّطۡفَةٖ ثُمَّ سَوَّىٰكَ رَجُلٗا

18:38

रही मेरी बात, वह ईश्वर है, मेरा अभिभावक, और मैं अपने अभिभावक के साथ किसी को साझी नहीं ठहराता।

لَّٰكِنَّا۠ هُوَ ٱللَّهُ رَبِّي وَلَا أُشۡرِكُ بِرَبِّيَ أَحَدٗا

18:39

और जब तुम अपने उद्यान में प्रवेश कर रहे थे, तब तुमने यह क्यों न कहा: ‘यह वही है जो ईश्वर की मर्ज़ी हुई! ईश्वर के बिना कोई बल नहीं!’ —

وَلَوۡلَا إِذۡ دَخَلۡتَ جَنَّتَكَ قُلۡتَ مَا شَآءَ ٱللَّهُ لَا قُوَّةَ إِلَّا بِٱللَّهِۚ

18:40–41

यदि तुम मुझे अपने से कम संपत्ति और संतान वाला देखते हो, तो संभव है कि मेरा अभिभावक मुझे तुम्हारे उद्यान से बेहतर दे, और उस पर आकाश से एक गिना हुआ संकट भेज दे, जिससे वह एक फिसलन भरा उभार बन जाए, या उसका पानी धँस जाए और तुम उसे कभी न पा सको।”

إِن تَرَنِۦ أَنَا۠ أَقَلَّ مِنكَ مَالٗا وَوَلَدٗا فَعَسَىٰ رَبِّيَ أَن يُؤۡتِيَنِۦ خَيۡرٗا مِّن جَنَّتِكَ وَيُرۡسِلَ عَلَيۡهَا حُسۡبَانٗا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ فَتُصۡبِحَ صَعِيدٗا زَلَقًا أَوۡ يُصۡبِحَ مَآؤُهَا غَوۡرٗا فَلَن تَسۡتَطِيعَ لَهُۥ طَلَبٗا

18:42

और उसकी फलती-फूलती संपत्ति घेर ली गई, तो वह उस पर, जो उसने उसमें ख़र्च किया था, अपनी हथेलियाँ उलटने-पलटने लगा, जबकि उद्यान अपनी इमारतों के होते हुए भी उजड़ा पड़ा था, और वह कह रहा था: “काश मैंने अपने अभिभावक के साथ किसी को साझी न ठहराया होता!”

وَأُحِيطَ بِثُمُرِهِۦ فَأَصۡبَحَ يُقَلِّبُ كَفَّيۡهِۦ عَلَىٰ مَا أَنفَقَ فِيهَا وَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا وَيَقُولُ يَٰلَيۡتَنِي لَمۡ أُشۡرِكۡ بِرَبِّيَ أَحَدٗا

18:43

और उसके पास कोई दल न था जो ईश्वर के अतिरिक्त उसकी सहायता करता,

وَلَمۡ تَكُن لَّهُۥ فِئَةٞ يَنصُرُونَهُۥ مِن دُونِ ٱللَّهِ

18:43

और वह स्वयं अपनी सहायता भी न कर सका।

وَمَا كَانَ مُنتَصِرًا

18:44

वहाँ हिमायत ईश्वर का है, जो सत्य है।

هُنَالِكَ ٱلۡوَلَٰيَةُ لِلَّهِ ٱلۡحَقِّۚ

18:44

वह प्रतिदान में सबसे बेहतर है और परिणाम में सबसे बेहतर है।

هُوَ خَيۡرٞ ثَوَابٗا وَخَيۡرٌ عُقُبٗا

18:45

और उनके लिए निकट जीवन का उदाहरण जोड़ो: वह उस पानी के समान है जिसे हम आकाश से उतारते हैं; धरती की वनस्पति उसमें घुल-मिल जाती है, फिर वह भूसा बन जाती है जिसे हवाएँ बिखेर देती हैं —

وَٱضۡرِبۡ لَهُمُۥ مَثَلَ ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا كَمَآءٍ أَنزَلۡنَٰهُۥ مِنَ ٱلسَّمَآءِ فَٱخۡتَلَطَ بِهِۦ نَبَاتُ ٱلۡأَرۡضِ فَأَصۡبَحَ هَشِيمٗا تَذۡرُوهُ ٱلرِّيَٰحُۗ

ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।

وَكَانَ ٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ مُّقۡتَدِرًا

18:46

संपत्ति और पुत्र निकट जीवन की शोभा हैं;

ٱلۡمَالُ وَٱلۡبَنُونَ زِينَةُ ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَاۖ

18:46

और स्थायी और भले कर्म तुम्हारे अभिभावक के पास प्रतिदान में बेहतर और आशा में बेहतर हैं।

وَٱلۡبَٰقِيَٰتُ ٱلصَّٰلِحَٰتُ خَيۡرٌ عِندَ رَبِّكَ ثَوَابٗا وَخَيۡرٌ أَمَلٗا

18:47

और उस दिन जब हम पहाड़ों को गतिमान करेंगे, और तुम धरती को खुली हुई देखोगे, और हम उन सबको इकट्ठा करेंगे, बिना किसी एक को छोड़े।

وَيَوۡمَ تُسَيَّرُ ٱلۡجِبَالُ وَتَرَى ٱلۡأَرۡضَ بَارِزَةٗ وَحَشَرۡنَٰهُمُۥ فَلَمۡ نُغَادِرۡ مِنۡهُمُۥ أَحَدٗا

और वे तुम्हारे अभिभावक के सामने पंक्तिबद्ध प्रस्तुत किए जाएँगे:

وَعُرِضُواْ عَلَىٰ رَبِّكَ صَفّٗا

“तुम निश्चय ही हमारे पास वैसे ही आ गए हो जैसे हमने तुम्हें पहली बार रचा था;

لَّقَدۡ جِئۡتُمُونَا كَمَا خَلَقۡنَٰكُمُۥ أَوَّلَ مَرَّةِۭۚ

18:48

परंतु तुम दावा करते थे कि हम तुम्हारे लिए कभी कोई वादे का समय निर्धारित नहीं करेंगे।”

بَلۡ زَعَمۡتُمُۥ أَلَّن نَّجۡعَلَ لَكُمُۥ مَوۡعِدٗا

18:49

और बही रखी जाएगी, और तुम बहिष्कृतों को देखोगे कि वे उसमें जो है उससे आशंकित हैं,

وَوُضِعَ ٱلۡكِتَٰبُ فَتَرَى ٱلۡمُجۡرِمِينَ مُشۡفِقِينَ مِمَّا فِيهِۦ

18:49

और वे कहेंगे: “हाय हम पर! इस बही को क्या हुआ कि यह न कोई छोटी बात छोड़ती है न बड़ी, बिना उसे गिने!”

وَيَقُولُونَ يَٰوَيۡلَتَنَا مَالِ هَٰذَا ٱلۡكِتَٰبِ لَا يُغَادِرُ صَغِيرَةٗ وَلَا كَبِيرَةً إِلَّا أَحۡصَىٰهَاۚ

18:49

और जो उन्होंने किया था, उसे वे उपस्थित पाएँगे,

وَوَجَدُواْ مَا عَمِلُواْ حَاضِرٗاۗ

18:49

और तुम्हारा अभिभावक किसी पर अन्याय नहीं करता।

وَلَا يَظۡلِمُ رَبُّكَ أَحَدٗا

18:50

और जब हमने अभिकर्ताओं से कहा: “आदम के सामने माथा टेको”, तो उन्होंने माथा टेका,

وَإِذۡ قُلۡنَا لِلۡمَلَٰٓئِكَةِ ٱسۡجُدُواْ لِأٓدَمَ فَسَجَدُواْ

18:50

सिवा इब्लीस के: वह प्रच्छन्नों में से था, और उसने अपने अभिभावक के आदेश का अतिक्रमण किया।

إِلَّا إِبۡلِيسَ كَانَ مِنَ ٱلۡجِنِّ فَفَسَقَ عَنۡ أَمۡرِ رَبِّهِۦۗ

18:50

तो क्या तुम उसे और उसकी संतति को मेरे अतिरिक्त हिमायती बनाओगे, जबकि वे तुम्हारे शत्रु हैं?

أَفَتَتَّخِذُونَهُۥ وَذُرِّيَّتَهُۥ أَوۡلِيَآءَ مِن دُونِي وَهُمُۥ لَكُمُۥ عَدُوُّۢۚ

18:50

अन्यायियों के लिए कितना निकृष्ट विनिमय है!

بِئۡسَ لِلظَّٰلِمِينَ بَدَلٗا

18:51

मैंने उन्हें न आकाशों और धरती की रचना का साक्षी बनाया, न उनकी अपनी रचना का, और मैंने भटकाने वालों को कभी भुजा नहीं बनाया।

۞ مَّا أَشۡهَدتُّهُمُۥ خَلۡقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَلَا خَلۡقَ أَنفُسِهِمُۥ وَمَا كُنتُ مُتَّخِذَ ٱلۡمُضِلِّينَ عَضُدٗا

18:52

और उस दिन जब वह कहेगा: “मेरे उन साझीदारों को पुकारो जिनका तुम दावा करते थे”, तो वे उन्हें पुकारेंगे, परंतु वे उन्हें उत्तर नहीं देंगे; और हम उनके बीच विनाश का एक स्थान रख देंगे।

وَيَوۡمَ يَقُولُ نَادُواْ شُرَكَآءِيَ ٱلَّذِينَ زَعَمۡتُمُۥ فَدَعَوۡهُمُۥ فَلَمۡ يَسۡتَجِيبُواْ لَهُمُۥ وَجَعَلۡنَا بَيۡنَهُمُۥ مَوۡبِقٗا

और बहिष्कृत आग को देखेंगे और अनुमान लगाएँगे कि वे उसमें गिरने वाले हैं, और उससे हटने का कोई उपाय नहीं पाएँगे।

وَرَءَا ٱلۡمُجۡرِمُونَ ٱلنَّارَ فَظَنُّواْ أَنَّهُمُۥ مُوَاقِعُوهَا وَلَمۡ يَجِدُواْ عَنۡهَا مَصۡرِفٗا

18:54

हमने निश्चय ही इस पाठ में लोगों के लिए हर प्रकार के उदाहरणों को विविध किया है;

وَلَقَدۡ صَرَّفۡنَا فِي هَٰذَا ٱلۡقُرَانِ لِلنَّاسِ مِن كُلِّ مَثَلٖۚ

18:54

परंतु मनुष्य हर चीज़ से अधिक बहस की ओर झुका हुआ है।

وَكَانَ ٱلۡإِنسَٰنُ أَكۡثَرَ شَيۡءٖ جَدَلٗا

18:55

और लोगों को विश्वास करने से और अपने अभिभावक से क्षमा माँगने से, जब मार्गदर्शन उनके पास आ चुका, कोई चीज़ नहीं रोकती, सिवा इसके कि उन पर पहले वालों की रीति आ पड़े, या उन पर दंड आमने-सामने आ पड़े।

وَمَا مَنَعَ ٱلنَّاسَ أَن يُؤۡمِنُواْ إِذۡ جَآءَهُمُ ٱلۡهُدَىٰ وَيَسۡتَغۡفِرُواْ رَبَّهُمُۥ إِلَّا أَن تَأۡتِيَهُمُۥ سُنَّةُ ٱلۡأَوَّلِينَ أَوۡ يَأۡتِيَهُمُ ٱلۡعَذَابُ قِبَلٗا

हम भेजे गए जनों को केवल शुभ समाचार देने वालों और चेतावनी देने वालों के रूप में भेजते हैं;

وَمَا نُرۡسِلُ ٱلۡمُرۡسَلِينَ إِلَّا مُبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَۚ

18:56

और जो नकारते हैं वे असत्य के सहारे बहस करते हैं, ताकि उससे सत्य को खंडित करें,

وَيُجَٰدِلُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِٱلۡبَٰطِلِ لِيُدۡحِضُواْ بِهِ ٱلۡحَقَّۖ

18:56

और उन्होंने मेरे संकेतों को, और जिसकी उन्हें चेतावनी दी गई थी, उसे मज़ाक़ का विषय बना लिया।

وَٱتَّخَذُواْ ءَايَٰتِي وَمَا أُنذِرُواْ هُزُؤٗا

और उससे बढ़कर अन्यायी कौन है जिसे उसके अभिभावक के संकेतों का स्मरण कराया जाए और वह उनसे कतरा जाए, यह भूलकर कि उसके हाथों ने क्या आगे बढ़ाया?

وَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّن ذُكِّرَ بِـَٔايَٰتِ رَبِّهِۦ فَأَعۡرَضَ عَنۡهَا وَنَسِيَ مَا قَدَّمَتۡ يَدَاهُۥۚ

18:57

हमने उनके मर्मों पर आवरण डाल दिए हैं, कि वे उसे न समझें, और उनके कानों में बहरापन;

إِنَّا جَعَلۡنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمُۥ أَكِنَّةً أَن يَفۡقَهُوهُۥ وَفِي ءَاذَانِهِمُۥ وَقۡرٗاۖ

और यदि तुम उन्हें मार्गदर्शन की ओर बुलाओ, तो वे कभी मार्गदर्शन नहीं पाएँगे।

وَإِن تَدۡعُهُمُۥ إِلَى ٱلۡهُدَىٰ فَلَن يَهۡتَدُواْ إِذًا أَبَدٗا

तुम्हारा अभिभावक अत्यंत क्षमाशील है, दया वाला है;

وَرَبُّكَ ٱلۡغَفُورُ ذُو ٱلرَّحۡمَةِۖ

यदि वह उन्हें उसके कारण पकड़ता जो उन्होंने कमाया, तो वह उनके लिए दंड शीघ्र कर देता;

لَوۡ يُؤَاخِذُهُمُۥ بِمَا كَسَبُواْ لَعَجَّلَ لَهُمُ ٱلۡعَذَابَۚ

18:58

परंतु उनके लिए एक वादे का समय है जिससे बचकर निकलने का कोई स्थान वे उसके अतिरिक्त नहीं पाएँगे।

بَل لَّهُمُۥ مَوۡعِدٞ لَّن يَجِدُواْ مِن دُونِهِۦ مَوۡئِلٗا

18:59

और उन बस्तियों को हमने नष्ट कर दिया जब उन्होंने अन्याय किया, और हमने उनके विनाश के लिए एक वादे का समय निर्धारित किया।

وَتِلۡكَ ٱلۡقُرَىٰ أَهۡلَكۡنَٰهُمُۥ لَمَّا ظَلَمُواْ وَجَعَلۡنَا لِمُهۡلَكِهِمُۥ مَوۡعِدٗا

18:60

और जब मूसा ने अपने युवा साथी से कहा: “मैं तब तक चलता रहूँगा जब तक दो समुद्रों के संगम तक न पहुँच जाऊँ, चाहे मुझे लंबी अवधि तक चलना पड़े।”

وَإِذۡ قَالَ مُوسَىٰ لِفَتَىٰهُۥ لَا أَبۡرَحُ حَتَّىٰ أَبۡلُغَ مَجۡمَعَ ٱلۡبَحۡرَيۡنِ أَوۡ أَمۡضِيَ حُقُبٗا

18:61

जब वे दो समुद्रों के संगम तक पहुँचे, तो वे अपनी मछली भूल गए, और उसने समुद्र में अपना मार्ग बना लिया, मानो मरीचिका जो लुप्त हो जाती है।

فَلَمَّا بَلَغَا مَجۡمَعَ بَيۡنِهِمَا نَسِيَا حُوتَهُمَا فَٱتَّخَذَ سَبِيلَهُۥ فِي ٱلۡبَحۡرِ سَرَبٗا

जब वे उसे पार कर चुके, तो उसने अपने युवा साथी से कहा: “हमारा भोजन लाओ; हमने निश्चय ही इस यात्रा में बहुत थकान पाई है।”

فَلَمَّا جَاوَزَا قَالَ لِفَتَىٰهُۥ ءَاتِنَا غَدَآءَنَا لَقَدۡ لَقِينَا مِن سَفَرِنَا هَٰذَا نَصَبٗا

18:63

उसने कहा: “क्या तुमने देखा? जब हमने चट्टान के पास शरण ली थी, तो मैं मछली को निश्चय ही भूल गया —

قَالَ أَرَءَيۡتَ إِذۡ أَوَيۡنَا إِلَى ٱلصَّخۡرَةِ فَإِنِّي نَسِيتُ ٱلۡحُوتَ

18:63

और मुझे उसे भुलाने वाला केवल बहकाने वाला ही था, कि मैंने उसका उल्लेख करने का ध्यान न किया —

وَمَا أَنسَىٰنِيهِۦ إِلَّا ٱلشَّيۡطَٰنُ أَنۡ أَذۡكُرَهُۥۚ

और उसने समुद्र में अपना मार्ग बना लिया,

وَٱتَّخَذَ سَبِيلَهُۥ فِي ٱلۡبَحۡرِ

आश्चर्यजनक ढंग से!”

عَجَبٗا

18:64

उसने कहा: “यही तो हम खोज रहे थे।”

قَالَ ذَٰلِكَ مَا كُنَّا نَبۡغِۦۚ

18:65

तब वे अपने पदचिह्नों पर, उनका अनुसरण करते हुए, वापस चल पड़े, और उन्होंने हमारे आज्ञाकारियों में से एक आज्ञाकारी को पाया, जिसे हमने अपनी ओर से दया दी थी और जिसे हमने अपनी ओर से ज्ञान सिखाया था।

فَٱرۡتَدَّا عَلَىٰ ءَاثَارِهِمَا قَصَصٗا فَوَجَدَا عَبۡدٗا مِّنۡ عِبَادِنَا ءَاتَيۡنَٰهُۥ رَحۡمَةٗ مِّنۡ عِندِنَا وَعَلَّمۡنَٰهُۥ مِن لَّدُنَّا عِلۡمٗا

18:66

मूसा ने उससे कहा: “क्या मैं तुम्हारे पीछे चल सकता हूँ, इस शर्त पर कि तुम मुझे उसमें से जो तुम्हें सिखाया गया है, सुबुद्धि सिखाओ?”

قَالَ لَهُۥ مُوسَىٰ هَلۡ أَتَّبِعُكَ عَلَىٰ أَن تُعَلِّمَنِۦ مِمَّا عُلِّمۡتَ رُشۡدٗا

18:67

उसने कहा: “तुम मेरे साथ कभी धैर्य नहीं रख पाओगे।

قَالَ إِنَّكَ لَن تَسۡتَطِيعَ مَعِي صَبۡرٗا

18:68

और जिसे तुम अनुभव से घेर नहीं पाते, उस पर तुम धैर्य कैसे रखोगे?”

وَكَيۡفَ تَصۡبِرُ عَلَىٰ مَا لَمۡ تُحِطۡ بِهِۦ خُبۡرٗا

18:69

उसने कहा: “यदि ईश्वर की मर्ज़ी हुई तो तुम मुझे धैर्यवान पाओगे,

قَالَ سَتَجِدُنِي إِن شَآءَ ٱللَّهُ صَابِرٗا

और मैं किसी बात में तुम्हारी अवज्ञा नहीं करूँगा।”

وَلَا أَعۡصِي لَكَ أَمۡرٗا

18:70

उसने कहा: “यदि तुम मेरे पीछे चलो, तो मुझसे किसी बात के बारे में न पूछना, जब तक मैं स्वयं तुमसे उसका उल्लेख न कर दूँ।”

قَالَ فَإِنِ ٱتَّبَعۡتَنِي فَلَا تَسۡـَٔلۡنِي عَن شَيۡءٍ حَتَّىٰ أُحۡدِثَ لَكَ مِنۡهُۥ ذِكۡرٗا

18:71

तो वे चल पड़े, यहाँ तक कि जब वे नाव में सवार हुए, तो उसने उसमें छेद कर दिया।

فَٱنطَلَقَا حَتَّىٰ إِذَا رَكِبَا فِي ٱلسَّفِينَةِ خَرَقَهَاۖ

18:71

उसने कहा: “क्या तुमने इसमें छेद इसलिए किया कि इसके सवारों को डुबो दो? तुम निश्चय ही एक बहुत गंभीर बात कर बैठे!”

قَالَ أَخَرَقۡتَهَا لِتُغۡرِقَ أَهۡلَهَا لَقَدۡ جِئۡتَ شَيۡـًٔا إِمۡرٗا

उसने कहा: “क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि तुम मेरे साथ कभी धैर्य नहीं रख पाओगे?”

قَالَ أَلَمۡ أَقُلۡ إِنَّكَ لَن تَسۡتَطِيعَ مَعِي صَبۡرٗا

18:73

उसने कहा: “मैं जो भूल गया उस पर मुझे न पकड़ो, और मेरे मामले में मुझ पर कठिनाई का बोझ न डालो।”

قَالَ لَا تُؤَاخِذۡنِي بِمَا نَسِيتُ وَلَا تُرۡهِقۡنِي مِنۡ أَمۡرِي عُسۡرٗا

18:74

तो वे चल पड़े, यहाँ तक कि जब वे एक युवा बालक से मिले, तो उसने उसे मार डाला। उसने कहा: “क्या तुमने एक शुद्ध स्व को मार डाला, बिना इसके कि वह किसी दूसरे स्व के बदले में हो? तुम निश्चय ही एक अनसुनी बात कर बैठे!”

فَٱنطَلَقَا حَتَّىٰ إِذَا لَقِيَا غُلَٰمٗا فَقَتَلَهُۥ قَالَ أَقَتَلۡتَ نَفۡسٗا زَٰكِيَةَۢ بِغَيۡرِ نَفۡسٖ لَّقَدۡ جِئۡتَ شَيۡـٔٗا نُّكۡرٗا

उसने कहा: “क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि तुम मेरे साथ कभी धैर्य नहीं रख पाओगे?”

۞ قَالَ أَلَمۡ أَقُل لَّكَ إِنَّكَ لَن تَسۡتَطِيعَ مَعِي صَبۡرٗا

18:76

उसने कहा: “यदि इसके बाद मैं तुमसे किसी बात के बारे में फिर पूछूँ, तो मेरे साथ न रहना; तब तुम्हारे पास मेरी ओर से एक उचित कारण होगा।”

قَالَ إِن سَأَلۡتُكَ عَن شَيۡءِۭ بَعۡدَهَا فَلَا تُصَٰحِبۡنِيۖ قَدۡ بَلَغۡتَ مِن لَّدُنِّي عُذۡرٗا

18:77

तो वे चल पड़े, यहाँ तक कि जब वे एक बस्ती वालों के पास पहुँचे, तो उन्होंने उनसे भोजन माँगा; परंतु उन्होंने उन्हें अतिथि बनाने से इनकार कर दिया। वहाँ उन्हें एक दीवार मिली जो गिरना चाहती थी, और उसने उसे सीधा कर दिया।

فَٱنطَلَقَا حَتَّىٰ إِذَا أَتَيَا أَهۡلَ قَرۡيَةٍ ٱسۡتَطۡعَمَا أَهۡلَهَا فَأَبَوۡاْ أَن يُضَيِّفُوهُمَا فَوَجَدَا فِيهَا جِدَارٗا يُرِيدُ أَن يَنقَضَّ فَأَقَامَهُۥۖ

18:77

उसने कहा: “यदि तुम चाहते, तो इसके लिए कोई पुरस्कार ले सकते थे।”

قَالَ لَوۡ شِئۡتَ لَتَخِذۡتَ عَلَيۡهِۦ أَجۡرٗا

उसने कहा: “यह तुम्हारे और मेरे बीच का बिछोह है;

قَالَ هَٰذَا فِرَاقُ بَيۡنِي وَبَيۡنِكَۚ

18:78

मैं तुम्हें उसके पूर्वकथन से सूचित करूँगा जिस पर तुम धैर्य के साथ टिके रहने का सामर्थ्य नहीं रख सके।

سَأُنَبِّئُكَ بِتَأۡوِيلِ مَا لَمۡ تَسۡتَطِع عَّلَيۡهِۦ صَبۡرًا

18:79

रही नाव, वह दरिद्रों की थी जो समुद्र में काम करते थे; मैंने उसे दोषपूर्ण करना चाहा, क्योंकि उनके आगे एक राजा था जो हर नाव को बलपूर्वक ले लेता था।

أَمَّا ٱلسَّفِينَةُ فَكَانَتۡ لِمَسَٰكِينَ يَعۡمَلُونَ فِي ٱلۡبَحۡرِ فَأَرَدتُّ أَنۡ أَعِيبَهَا وَكَانَ وَرَآءَهُمُۥ مَلِكٞ يَأۡخُذُ كُلَّ سَفِينَةٍ غَصۡبٗا

18:80

रहा बालक, उसके माता-पिता विश्वास करने वाले थे, और हमें भय हुआ कि वह उन्हें मर्यादाहीनता और नकार से दबोच लेगा,

وَأَمَّا ٱلۡغُلَٰمُ فَكَانَ أَبَوَاهُۥ مُؤۡمِنَيۡنِ فَخَشِينَا أَن يُرۡهِقَهُمَا طُغۡيَٰنٗا وَكُفۡرٗا

18:81

और हमने चाहा कि उनका अभिभावक उन्हें उसके बदले में एक ऐसा दे जो शुद्धता में उससे बेहतर हो और दया में अधिक निकट हो।

فَأَرَدۡنَا أَن يُبۡدِلَهُمَا رَبُّهُمَا خَيۡرٗا مِّنۡهُۥ زَكَوٰةٗ وَأَقۡرَبَ رُحۡمٗا

18:82

रही दीवार, वह राजधानी के दो अनाथ बालकों की थी, और उसके नीचे उनका एक ख़ज़ाना था;

وَأَمَّا ٱلۡجِدَارُ فَكَانَ لِغُلَٰمَيۡنِ يَتِيمَيۡنِ فِي ٱلۡمَدِينَةِ وَكَانَ تَحۡتَهُۥ كَنزٞ لَّهُمَا

18:82

उनका पिता भला था, और तुम्हारे अभिभावक ने चाहा कि वे अपनी पूर्ण परिपक्वता तक पहुँचें और अपना ख़ज़ाना स्वयं निकालें, तुम्हारे अभिभावक की दया से;

وَكَانَ أَبُوهُمَا صَٰلِحٗا فَأَرَادَ رَبُّكَ أَن يَبۡلُغَا أَشُدَّهُمَا وَيَسۡتَخۡرِجَا كَنزَهُمَا رَحۡمَةٗ مِّن رَّبِّكَۚ

18:82

और मैंने यह अपनी ओर से नहीं किया।

وَمَا فَعَلۡتُهُۥ عَنۡ أَمۡرِيۚ

18:82

यही उसका पूर्वकथन है जिस पर तुम धैर्य के साथ टिके न रह सके।”

ذَٰلِكَ تَأۡوِيلُ مَا لَمۡ تَسۡطِع عَّلَيۡهِۦ صَبۡرٗا

18:83

और वे तुमसे दो सहचरों वाले के विषय में पूछते हैं।

وَيَسۡـَٔلُونَكَ عَن ذِي ٱلۡقَرۡنَيۡنِۖ

कहो: “मैं तुम्हें उसके विषय में एक स्मरण सुनाऊँगा।”

قُلۡ سَأَتۡلُواْ عَلَيۡكُمُۥ مِنۡهُۥ ذِكۡرًا

18:84–86

हमने उसे धरती पर स्थापित किया, और हमने उसे हर चीज़ में से एक कड़ी दी; तब उसने एक कड़ी का अनुसरण किया, यहाँ तक कि जब वह सूर्य के अस्त होने के स्थान पर पहुँचा, तो उसने उसे एक कीचड़ भरे सोते में अस्त होते पाया, और उसके पास एक क़ौम को पाया।

إِنَّا مَكَّنَّا لَهُۥ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَءَاتَيۡنَٰهُۥ مِن كُلِّ شَيۡءٖ سَبَبٗا فَٱتَّبَعَ سَبَبًاۚ حَتَّىٰ إِذَا بَلَغَ مَغۡرِبَ ٱلشَّمۡسِ وَجَدَهَا تَغۡرُبُ فِي عَيۡنٍ حَمِئَةٖ وَوَجَدَ عِندَهَا قَوۡمٗا

18:84–86

हमने कहा: “हे दो सहचरों वाले, या तो तुम उन्हें दंड दो, या उनके साथ सुंदर व्यवहार अपनाओ।”

قُلۡنَا يَٰذَا ٱلۡقَرۡنَيۡنِ إِمَّا أَن تُعَذِّبَ وَإِمَّا أَن تَتَّخِذَ فِيهِمُۥ حُسۡنٗا

18:87

उसने कहा: “रहा वह जिसने अन्याय किया, हम उसे दंड देंगे; फिर वह अपने अभिभावक की ओर वापस लाया जाएगा, जो उसे अनसुने दंड से दंडित करेगा।

قَالَ أَمَّا مَن ظَلَمَ فَسَوۡفَ نُعَذِّبُهُۥ ثُمَّ يُرَدُّ إِلَىٰ رَبِّهِۦ فَيُعَذِّبُهُۥ عَذَابٗا نُّكۡرٗا

18:88

रहा वह जो विश्वास करता है और भला कर्म करता है, उसके लिए प्रतिफल के रूप में सबसे सुंदर होगा,

وَأَمَّا مَنۡ ءَامَنَ وَعَمِلَ صَٰلِحٗا فَلَهُۥ جَزَآءُ ٱلۡحُسۡنَىٰۖ

और हम उससे अपने मामले में एक सहज कथन कहेंगे।”

وَسَنَقُولُ لَهُۥ مِنۡ أَمۡرِنَا يُسۡرٗا

18:89–91

फिर उसने एक कड़ी का अनुसरण किया, यहाँ तक कि जब वह सूर्य के उदय होने के स्थान पर पहुँचा, तो उसने उसे एक ऐसी क़ौम पर उगते पाया जिसके लिए हमने उसके इस ओर कोई आड़ नहीं बनाई थी। ऐसा ही हुआ।

ثُمَّ ٱتَّبَعَ سَبَبًا حَتَّىٰ إِذَا بَلَغَ مَطۡلِعَ ٱلشَّمۡسِ وَجَدَهَا تَطۡلُعُ عَلَىٰ قَوۡمٖ لَّمۡ نَجۡعَل لَّهُمُۥ مِن دُونِهَا سِتۡرٗا كَذَٰلِكَۖ

और जो कुछ उससे संबंधित था, उसे हम ज्ञान से घेरे हुए थे।

وَقَدۡ أَحَطۡنَا بِمَا لَدَيۡهِۦ خُبۡرٗا

18:92–93

फिर उसने एक कड़ी का अनुसरण किया, यहाँ तक कि जब वह दो अवरोधों के बीच के स्थान पर पहुँचा, तो उसने उनके इस ओर एक ऐसी क़ौम पाई जो लगभग कोई कथन नहीं समझती थी।

ثُمَّ ٱتَّبَعَ سَبَبًا حَتَّىٰ إِذَا بَلَغَ بَيۡنَ ٱلسَّدَّيۡنِ وَجَدَ مِن دُونِهِمَا قَوۡمٗا لَّا يَكَادُونَ يَفۡقَهُونَ قَوۡلٗا

18:94

उन्होंने कहा: “हे दो सहचरों वाले, याजूज और माजूज धरती में बिगाड़ फैलाते हैं; क्या हम तुम्हें शुल्क दें, इस शर्त पर कि तुम हमारे और उनके बीच एक अवरोध खड़ा करो?”

قَالُواْ يَٰذَا ٱلۡقَرۡنَيۡنِ إِنَّ يَاجُوجَ وَمَاجُوجَ مُفۡسِدُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَهَلۡ نَجۡعَلُ لَكَ خَرۡجًا عَلَىٰ أَن تَجۡعَلَ بَيۡنَنَا وَبَيۡنَهُمُۥ سَدّٗا

18:95

उसने कहा: “जिसमें मेरे अभिभावक ने मुझे स्थापित किया है, वही बेहतर है;

قَالَ مَا مَكَّنَنِي فِيهِۦ رَبِّي خَيۡرٞ

18:95

इसलिए बल से मेरी सहायता करो, और मैं तुम्हारे और उनके बीच एक प्राचीर खड़ी कर दूँगा।

فَأَعِينُونِي بِقُوَّةٍ أَجۡعَلۡ بَيۡنَكُمُۥ وَبَيۡنَهُمُۥ رَدۡمًا

18:96

मेरे पास लोहे के खंड लाओ।”

ءَاتُونِي زُبَرَ ٱلۡحَدِيدِۖ

18:96

फिर जब उसने दोनों पहाड़ी ढलानों के बीच समतल बराबर कर दिया, तो कहा: “फूँको!”

حَتَّىٰ إِذَا سَاوَىٰ بَيۡنَ ٱلصُّدُفَيۡنِ قَالَ ٱنفُخُواْۖ

18:96

फिर जब उसने उसे आग बना दिया, तो कहा: “मेरे पास नेफ़्था लाओ, कि मैं उस पर उँडेलूँ।”

حَتَّىٰ إِذَا جَعَلَهُۥ نَارٗا قَالَ ءَاتُونِي أُفۡرِغۡ عَلَيۡهِۦ قِطۡرٗا

18:97

वे उसे पलट न सके, और उनमें उसमें सेंध लगाने का सामर्थ्य न था।

فَمَا ٱسۡطَٰعُواْ أَن يَظۡهَرُوهُۥ وَمَا ٱسۡتَطَٰعُواْ لَهُۥ نَقۡبٗا

18:98

उसने कहा: “यह मेरे अभिभावक की दया है;

قَالَ هَٰذَا رَحۡمَةٞ مِّن رَّبِّيۖ

18:98

परंतु जब मेरे अभिभावक का वादा आएगा, तो वह उसे समतल कर देगा — और मेरे अभिभावक का वादा सत्य है।”

فَإِذَا جَآءَ وَعۡدُ رَبِّي جَعَلَهُۥ دَكّٗاۖ وَكَانَ وَعۡدُ رَبِّي حَقّٗا

और हम उस दिन उन्हें एक-दूसरे पर उमड़ने के लिए छोड़ देंगे,

۞ وَتَرَكۡنَا بَعۡضَهُمُۥ يَوۡمَئِذٖ يَمُوجُ فِي بَعۡضٖۖ

18:99

और नरसिंगा फूँका जाएगा, और हम उन्हें एक ही एकत्रीकरण में एकत्र करेंगे।

وَنُفِخَ فِي ٱلصُّورِ فَجَمَعۡنَٰهُمُۥ جَمۡعٗا

18:100–101

और हम उस दिन जहन्नम को नकारने वालों के सामने पूरी स्पष्टता से प्रस्तुत करेंगे — उनके सामने जिनकी आँखें मेरे स्मरण से परे परदे में थीं, और जो कुछ सुन नहीं सकते थे।

وَعَرَضۡنَا جَهَنَّمَ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡكَٰفِرِينَ عَرۡضًا ٱلَّذِينَ كَانَتۡ أَعۡيُنُهُمُۥ فِي غِطَآءٍ عَن ذِكۡرِي وَكَانُواْ لَا يَسۡتَطِيعُونَ سَمۡعًا

तो क्या नकारने वालों ने समझा कि वे मेरे आज्ञाकारियों को मेरे अतिरिक्त हिमायती बना लेंगे?

أَفَحَسِبَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ أَن يَتَّخِذُواْ عِبَادِي مِن دُونِي أَوۡلِيَآءَۚ

18:102

हमने निश्चय ही नकारने वालों के आतिथ्य के लिए जहन्नम जुटा रखा है।

ا۪نَّا أَعۡتَدۡنَا جَهَنَّمَ لِلۡكَٰفِرِينَ نُزُلٗا

18:103–104

कहो: “क्या मैं तुम्हें उनके विषय में सूचित करूँ जो कर्मों में सबसे बढ़कर घाटा उठाने वाले हैं — वे जिनका प्रयास निकट जीवन में भटक गया, जबकि वे समझते हैं कि वे भलाई कर रहे हैं?”

قُلۡ هَلۡ نُنَبِّئُكُمُۥ بِٱلۡأَخۡسَرِينَ أَعۡمَٰلًا ٱلَّذِينَ ضَلَّ سَعۡيُهُمُۥ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَهُمُۥ يَحۡسِبُونَ أَنَّهُمُۥ يُحۡسِنُونَ صُنۡعًا

18:105

यही हैं वे जिन्होंने अपने अभिभावक के संकेतों और उससे मिलने को नकारा: उनके कर्म ढह गए, और हम पेशी के दिन उनके लिए कोई तौल नहीं रखेंगे।

أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِـَٔايَٰتِ رَبِّهِمُۥ وَلِقَآئِهِۦ فَحَبِطَتۡ أَعۡمَٰلُهُمُۥ فَلَا نُقِيمُ لَهُمُۥ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ وَزۡنٗا

18:106

यही: उनका प्रतिफल जहन्नम होगा, इसलिए कि उन्होंने नकारा और मेरे संकेतों और मेरे संदेशवाहकों को मज़ाक़ का विषय बनाया।

ذَٰلِكَ جَزَآؤُهُمُۥ جَهَنَّمُ بِمَا كَفَرُواْ وَٱتَّخَذُواْ ءَايَٰتِي وَرُسُلِي هُزُؤًا

18:107–108

जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, उनके आतिथ्य के लिए निश्चय ही फ़िरदौस के उद्यान होंगे, जहाँ वे सदा रहेंगे, वहाँ से हटाए जाने की खोज किए बिना।

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ كَانَتۡ لَهُمُۥ جَنَّٰتُ ٱلۡفِرۡدَوۡسِ نُزُلًا خَٰلِدِينَ فِيهَا لَا يَبۡغُونَ عَنۡهَا حِوَلٗا

18:109

कहो: “यदि समुद्र मेरे अभिभावक के बोलों के लिए स्याही होता, तो मेरे अभिभावक के बोलों के समाप्त होने से पहले समुद्र समाप्त हो जाता, चाहे हम सहायता के लिए उतना ही और ले आते।”

قُل لَّوۡ كَانَ ٱلۡبَحۡرُ مِدَادٗا لِّكَلِمَٰتِ رَبِّي لَنَفِدَ ٱلۡبَحۡرُ قَبۡلَ أَن تَنفَدَ كَلِمَٰتُ رَبِّي وَلَوۡ جِئۡنَا بِمِثۡلِهِۦ مَدَدٗا

18:110

कहो: “मैं तुम्हारे जैसा केवल एक मानव हूँ; मुझ पर प्रकट किया जाता है कि तुम्हारा देवता एक ही देवता है।

قُلۡ إِنَّمَا أَنَا۠ بَشَرٞ مِّثۡلُكُمُۥ يُوحَىٰ إِلَيَّ أَنَّمَا إِلَٰهُكُمُۥ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞۖ

18:110

इसलिए जो अपने अभिभावक से मिलने की आशा रखता है, वह भला कर्म करे और अपने अभिभावक की आज्ञा के पालन में किसी को साझी न ठहराए।”

فَمَن كَانَ يَرۡجُواْ لِقَآءَ رَبِّهِۦ فَلۡيَعۡمَلۡ عَمَلٗا صَٰلِحٗا وَلَا يُشۡرِكۡ بِعِبَادَةِ رَبِّهِۦ أَحَدَۢا

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