الطور
At-Tur
The Punishment Will Fall
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
पर्वत की शपथ! अंकित लेख की शपथ, फैले हुए चर्म-पत्र पर! आबाद घर की शपथ! ऊँची छत की शपथ! उबाल पर लाए गए समुद्र की शपथ! तुम्हारे अभिभावक का दंड अवश्य घटित होगा —
وَٱلطُّورِ وَكِتَٰبٍۢ مَّسْطُورٍۢ فِى رَقٍّۢ مَّنشُورٍۢ وَٱلْبَيْتِ ٱلْمَعْمُورِ وَٱلسَّقْفِ ٱلْمَرْفُوعِ وَٱلْبَحْرِ ٱلْمَسْجُورِ إِنَّ عَذَابَ رَبِّكَ لَوَٰقِعٌۭ
कोई उसे हटा नहीं सकता।
مَّا لَهُۥ مِن دَافِعٍۢ
जिस दिन आकाश प्रचंड चक्कर में हिल उठेगा, और पहाड़ चल पड़ेंगे —
يَوْمَ تَمُورُ ٱلسَّمَآءُ مَوْرًۭا وَتَسِيرُ ٱلْجِبَالُ سَيْرًۭا
उस दिन हाय झुठलाने वालों पर, जो व्यर्थ बातों में खेलते हैं।
فَوَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ٱلَّذِينَ هُمْ فِى خَوْضٍۢ يَلْعَبُونَ
जिस दिन वे जहन्नम की आग की ओर धक्के देकर धकेले जाएँगे,
يَوْمَ يُدَعُّونَ إِلَىٰ نَارِ جَهَنَّمَ دَعًّا
“यह वही आग है जिसे तुम झुठलाते थे।
هَٰذِهِ ٱلنَّارُ ٱلَّتِى كُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ
तो क्या यह भ्रम है, या फिर तुम्हें स्पष्ट नहीं दिखता?
أَفَسِحْرٌ هَٰذَآ أَمْ أَنتُمْ لَا تُبْصِرُونَ
उसमें जलो: तुम धैर्य रखो या न रखो, तुम्हारे लिए बराबर है।
ٱصْلَوْهَا فَٱصْبِرُوٓا۟ أَوْ لَا تَصْبِرُوا۟ سَوَآءٌ عَلَيْكُمْ
तुम्हें केवल उसी के अनुसार प्रतिफल दिया जा रहा है जो तुम करते थे।”
إِنَّمَا تُجْزَوْنَ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
सावधानी बरतने वाले निश्चय ही उद्यानों और एक उपकार में हैं, उसका आनंद लेते हुए जो उनके अभिभावक ने उन्हें दिया,
إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى جَنَّٰتٍۢ وَنَعِيمٍۢ فَٰكِهِينَ بِمَآ ءَاتَىٰهُمْ رَبُّهُمْ
और उनके अभिभावक ने उन्हें भट्ठी के दंड से बचा लिया।
وَوَقَىٰهُمْ رَبُّهُمْ عَذَابَ ٱلْجَحِيمِ
“सुखपूर्वक खाओ और पियो, उसके बदले जो तुम करते थे”, पंक्तिबद्ध दीवानों पर टेक लगाए हुए; और हमने उन्हें सहारा देने वाले वार्ताकारों से जोड़ दिया।
كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيٓـًٔۢا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ مُتَّكِـِٔينَ عَلَىٰ سُرُرٍۢ مَّصْفُوفَةٍۢ وَزَوَّجْنَٰهُم بِحُورٍ عِينٍۢ
और जिन्होंने विश्वास किया, और जिनकी संतति ने विश्वास में उनका अनुसरण किया, हमने उनकी संतति को उनके साथ मिला दिया, उनके कर्मों में से कुछ भी घटाए बिना।
وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَٱتَّبَعَتْهُمْ ذُرِّيَّتُهُم بِإِيمَٰنٍ أَلْحَقْنَا بِهِمْ ذُرِّيَّتَهُمْ وَمَآ أَلَتْنَٰهُم مِّنْ عَمَلِهِم مِّن شَىْءٍۢ
हर व्यक्ति अपनी कमाई के बदले गिरवी रखा हुआ है।
كُلُّ ٱمْرِئٍۭ بِمَا كَسَبَ رَهِينٌۭ
और हम उन्हें स्वादों और मांस से भर देंगे, जिसकी वे कामना करें; वे आपस में हाथों-हाथ एक प्याला पहुँचाएँगे, जिसमें न कोई व्यर्थता है और न अपराध के लिए उकसावा।
وَأَمْدَدْنَٰهُم بِفَٰكِهَةٍۢ وَلَحْمٍۢ مِّمَّا يَشْتَهُونَ يَتَنَٰزَعُونَ فِيهَا كَأْسًۭا لَّا لَغْوٌۭ فِيهَا وَلَا تَأْثِيمٌۭ
और उनके बीच उन्हीं के जवान लड़के चक्कर लगाएँगे, भलीभाँति सुरक्षित मोतियों जैसे।
وَيَطُوفُ عَلَيْهِمْ غِلْمَانٌۭ لَّهُمْ كَأَنَّهُمْ لُؤْلُؤٌۭ مَّكْنُونٌۭ
और वे एक-दूसरे के सामने आएँगे, एक-दूसरे से पूछते हुए,
وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍۢ يَتَسَآءَلُونَ
कहते हुए: “हम इससे पहले अपनों के बीच आशंका से भरे थे; ईश्वर ने हम पर कृपा की और हमें लू के दंड से बचा लिया।
قَالُوٓا۟ إِنَّا كُنَّا قَبْلُ فِىٓ أَهْلِنَا مُشْفِقِينَ فَمَنَّ ٱللَّهُ عَلَيْنَا وَوَقَىٰنَا عَذَابَ ٱلسَّمُومِ
हम इससे पहले उसे पुकारते थे: निश्चय ही वही सद्गुणी, दयालु है।”
إِنَّا كُنَّا مِن قَبْلُ نَدْعُوهُ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلْبَرُّ ٱلرَّحِيمُ
तो स्मरण कराओ: तुम्हारे अभिभावक के उपकार से तुम न तो भविष्य बताने वाले हो, न विक्षिप्त।
فَذَكِّرْ فَمَآ أَنتَ بِنِعْمَتِ رَبِّكَ بِكَاهِنٍۢ وَلَا مَجْنُونٍ
या फिर वे कहते हैं: “एक लुभावना वक्ता, हम उसके लिए भाग्य के आघातों की आस लगाए हैं”?
أَمْ يَقُولُونَ شَاعِرٌۭ نَّتَرَبَّصُ بِهِۦ رَيْبَ ٱلْمَنُونِ
कहो: “तो प्रतीक्षा में रहो,
قُلْ تَرَبَّصُوا۟
क्योंकि मैं भी तुम्हारे साथ प्रतीक्षा में रहने वालों में से हूँ।”
فَإِنِّى مَعَكُم مِّنَ ٱلْمُتَرَبِّصِينَ
या फिर उनका संतुलन उन्हें यह आदेश देता है, या वे ऐसी क़ौम हैं जो हर मर्यादा से आगे निकल जाती है?
أَمْ تَأْمُرُهُمْ أَحْلَٰمُهُم بِهَٰذَآ أَمْ هُمْ قَوْمٌۭ طَاغُونَ
या फिर वे कहते हैं: “उसने इसे गढ़ लिया है”?
أَمْ يَقُولُونَ تَقَوَّلَهُۥ
बल्कि वे विश्वास नहीं करते।
بَل لَّا يُؤْمِنُونَ
तो वे इसके जैसी कोई वार्ता ले आएँ, यदि वे सच्चे हैं!
فَلْيَأْتُوا۟ بِحَدِيثٍۢ مِّثْلِهِۦٓ إِن كَانُوا۟ صَٰدِقِينَ
या फिर वे बिना किसी चीज़ के रचे गए हैं, या वे स्वयं रचयिता हैं?
أَمْ خُلِقُوا۟ مِنْ غَيْرِ شَىْءٍ أَمْ هُمُ ٱلْخَٰلِقُونَ
या फिर उन्होंने आकाशों और धरती को रचा है?
أَمْ خَلَقُوا۟ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ
बल्कि उन्हें कोई यक़ीन नहीं।
بَل لَّا يُوقِنُونَ
या फिर उनके पास तुम्हारे अभिभावक के भंडार हैं, या वे विवश करने वाले हैं?
أَمْ عِندَهُمْ خَزَآئِنُ رَبِّكَ أَمْ هُمُ ٱلْمُصَۣيْطِرُونَ
या फिर उनके पास कोई सीढ़ी है जिससे वे सुनते हैं?
أَمْ لَهُمْ سُلَّمٌۭ يَسْتَمِعُونَ فِيهِ
तो उनमें से सुनने वाला कोई स्पष्ट अधिकार ले आए!
فَلْيَأْتِ مُسْتَمِعُهُم بِسُلْطَٰنٍۢ مُّبِينٍ
या फिर उसके पास बेटियाँ हैं, जबकि तुम्हारे पास बेटे हैं?
أَمْ لَهُ ٱلْبَنَٰتُ وَلَكُمُ ٱلْبَنُونَ
या फिर तुम उनसे कोई पुरस्कार माँगते हो, इसलिए वे ऋण से लदे हुए हैं?
أَمْ تَسْـَٔلُهُمْ أَجْرًۭا فَهُم مِّن مَّغْرَمٍۢ مُّثْقَلُونَ
या फिर उनके पास वह है जो इंद्रियों से परे है, इसलिए वे उसे लिख लेते हैं?
أَمْ عِندَهُمُ ٱلْغَيْبُ فَهُمْ يَكْتُبُونَ
या फिर वे कोई चाल चलना चाहते हैं?
أَمْ يُرِيدُونَ كَيْدًۭا
बल्कि नकारने वाले ही चाल के शिकार होंगे।
فَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ هُمُ ٱلْمَكِيدُونَ
या फिर उनका ईश्वर के अतिरिक्त कोई और देवता है?
أَمْ لَهُمْ إِلَٰهٌ غَيْرُ ٱللَّهِ
ईश्वर की महिमा हो, उससे ऊपर जो वे उसके साथ साझी ठहराते हैं!
سُبْحَٰنَ ٱللَّهِ عَمَّا يُشْرِكُونَ
और यदि वे आकाश का कोई टुकड़ा गिरता देखते, तो कहते: “बादलों का एक ढेर।”
وَإِن يَرَوْا۟ كِسْفًۭا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ سَاقِطًۭا يَقُولُوا۟ سَحَابٌۭ مَّرْكُومٌۭ
तो उन्हें छोड़ दो, जब तक वे अपने उस दिन से न मिल लें जिसमें वे वज्र से मारे जाएँगे — उस दिन जब उनकी चाल उनके कुछ काम न आएगी, और उनकी सहायता नहीं की जाएगी।
فَذَرْهُمْ حَتَّىٰ يُلَٰقُوا۟ يَوْمَهُمُ ٱلَّذِى فِيهِ يُصْعَقُونَ يَوْمَ لَا يُغْنِى عَنْهُمْ كَيْدُهُمْ شَيْـًۭٔا وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ
और निश्चय ही, जिन्होंने अन्याय किया, उनके लिए उससे इधर एक दंड है,
وَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ عَذَابًۭا دُونَ ذَٰلِكَ
पर उनमें से अधिकतर नहीं जानते।
وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
और अपने अभिभावक के निर्णय के सामने धैर्य रखो, क्योंकि तुम हमारी आँखों के सामने हो।
وَٱصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ فَإِنَّكَ بِأَعْيُنِنَا
और प्रशंसा के साथ अपने अभिभावक की महिमा गाओ, जब तुम उठते हो,
وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ حِينَ تَقُومُ
और रात के एक भाग में उसकी महिमा गाओ, और तारों के ढलने पर भी।
وَمِنَ ٱلَّيْلِ فَسَبِّحْهُ وَإِدْبَٰرَ ٱلنُّجُومِ